Currency Check : रुपए में लगातार 8वें सेशन में तेजी कायम, डॉलर के मुकाबले 15 पैसे की बढ़त के साथ 94.78 पर खुला

Currency Check : 21 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया बढ़त के साथ खुला है। रुपए के जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़े डॉलर इनफ्लो और भारतीय रिजर्व बैंक के सपोर्ट से मदद मिल रही है। ऐसे में रुपये की बढ़त का सिलसिला लगातार आठवें दिन भी जारी है। सोमवार को 94.92 पर बंद होने के बाद,आज रुपया 15 पैसे की तेजी के साथ 94.78 प्रति डॉलर पर खुला।

फिनरेक्स का कहना है कि रुपया 94.73 पर खुलने की उम्मीद थी। आज से रिटेल और HNI (हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स) के लिए शुरू हो रहे जियो (JIO) IPO से आने वाले निवेश से रुपये को फायदा मिलने की उम्मीद है। आयातकों के लिए डॉलर पर 94.73 का भाव निकट अवधि में खरीदारी के लिए अच्छा हो सकता है, क्योंकि 2 महीने और उससे आगे की अवधि के लिए प्रीमियम ऊंचे बने हुए हैं। निर्यातकों को 94.95 के स्तर का इंतजार करना चाहिए ताकि वे ऊंचे प्रीमियम पर डॉलर बेच सकें या हेजिंग कर सकें। वहीं, आयातकों को केवल अक्टूबर महीने के लिए ही खरीदारी करनी चाहिए,ताकि वे ऊंचे प्रीमियम के बोझ से बच सकें।

दूसरी एशियन करेंसीज पर एक नजर

शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया और चीनी रेनमिनबी सबसे मजबूत दिखीं। इनमें 0.3 प्रतिशत और 0.099 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मलेशियाई रिंगित में 0.012 प्रतिशत की मामूली तेजी आई है। वहीं, दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.013 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा ताइवान डॉलर 0.037 प्रतिशत और जापानी येन 0.051 प्रतिशत नीचे आ गए हैं।

फिलीपीनो पेसो में 0.105 प्रतिशत की कमजोरी आई, जबकि थाई बहत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 0.196 प्रतिशत गिर गया है।

बुधवार को अमेरिकी डॉलर दबाव में रहा। इससे पहले के सोशन में यह तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया था। ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण डॉलर की मांग थोड़ी कम हुई है।

छह अन्य मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मंगलवार को आई 0.2% की गिरावट के बाद आज 101.78 पर मजबूत दिख रहा है

 

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अमेरिका बोला- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, उससे बातचीत जरूरी:रुबियो बोले- विदेश नीति के लिए ये जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऐसा करना जरूरी है। रुबियो बोले- अमेरिका आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता होती है। रुबियो ने कहा, ये मुश्किल फैसले हैं, लेकिन विदेश नीति के तहत हमें ऐसा करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। अगर हमारे पाकिस्तान के साथ संबंध हैं और हम उससे बात कर सकते हैं, तो इससे हमें उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है। रुबियो बोले- ईरान पर कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का कंट्रोल रुबियो ने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, वे समझौता करना नहीं जानते। वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का नियंत्रण है। मैं सभी शिया धर्मगुरुओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की बात कर रहा हूं, जो धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं। ऐसे लोगों के साथ समझौता करना बहुत मुश्किल है। होर्मुज में तेल की आवाजाही 80 से 100% हुई रुबियो ने कहा कि होर्मुज से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की 80 से 100% तक बनी हुई है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह उन व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर सवार नाविकों की जान भी खतरे में पड़ रही है। रुबियो ने दुनिया के देशों से ऐसे हमलों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने ईरान के इन हमलों की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से की। रुबियो के मुताबिक, उस दौर में भी पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। फैक्ट चेक: स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के मुताबिक 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 99% घट गई थी। यानी, अगर युद्ध से पहले एक दिन में 100 टैंकर गुजरते थे, तो इस आंकड़े के मुताबिक अब केवल 1 टैंकर गुजर रहा था। भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। नोट- पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं 2 भारतीय नाविक लापता बताए गए हैं। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा अमेरिका रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन बनाने में करता है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान को मिलने वाले पैसे और संसाधनों का इस्तेमाल देश के विकास के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियार तैयार करने में किया जाता है। रुबियो के बयान के तीन बड़े संकेत

अमेरिका बोला- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, उससे बातचीत जरूरी:रुबियो बोले- विदेश नीति के लिए ये जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऐसा करना जरूरी है। रुबियो बोले- अमेरिका आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता होती है। रुबियो ने कहा, ये मुश्किल फैसले हैं, लेकिन विदेश नीति के तहत हमें ऐसा करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। अगर हमारे पाकिस्तान के साथ संबंध हैं और हम उससे बात कर सकते हैं, तो इससे हमें उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है। रुबियो बोले- ईरान पर कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का कंट्रोल रुबियो ने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, वे समझौता करना नहीं जानते। वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का नियंत्रण है। मैं सभी शिया धर्मगुरुओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की बात कर रहा हूं, जो धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं। ऐसे लोगों के साथ समझौता करना बहुत मुश्किल है। होर्मुज में तेल की आवाजाही 80 से 100% हुई रुबियो ने कहा कि होर्मुज से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की 80 से 100% तक बनी हुई है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह उन व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर सवार नाविकों की जान भी खतरे में पड़ रही है। रुबियो ने दुनिया के देशों से ऐसे हमलों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने ईरान के इन हमलों की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से की। रुबियो के मुताबिक, उस दौर में भी पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। फैक्ट चेक: स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के मुताबिक 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 99% घट गई थी। यानी, अगर युद्ध से पहले एक दिन में 100 टैंकर गुजरते थे, तो इस आंकड़े के मुताबिक अब केवल 1 टैंकर गुजर रहा था। भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। नोट- पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं 2 भारतीय नाविक लापता बताए गए हैं। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा अमेरिका रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन बनाने में करता है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान को मिलने वाले पैसे और संसाधनों का इस्तेमाल देश के विकास के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियार तैयार करने में किया जाता है। रुबियो के बयान के तीन बड़े संकेत

BLS Polymers IPO: 27 अक्टूबर से खुलेगा ₹255 करोड़ का इश्यू, GMP दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत

BLS Polymers IPO: बीएलएस पॉलिमर्स का ₹255 करोड़ का IPO 27 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड ₹142 से ₹150 प्रति शेयर तय किया गया है। इस हिसाब से कंपनी की वैल्यू करीब ₹930.5 करोड़ होगी। IPO में 1.7 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इश्यू 29 अक्टूबर को बंद होगा, जबकि एंकर निवेशक 26 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

शेयरों का अलॉटमेंट 30 अक्टूबर तक फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं, स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग 3 नवंबर को हो सकती है। कंपनी को दिसंबर 2025 में SEBI से IPO की मंजूरी मिली थी।

BLS Polymers IPO का GMP

ग्रे मार्केट में BLS पॉलिमर्स के आईपीओ को तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसका लेटेस्ट GMP ₹30 है। यह अपर प्राइस बैंड से 20% लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। हालांकि, GMP सिर्फ आईपीओ की डिमांड का अंदाजा भर होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

IPO से जुटाए पैसे कहां खर्च होंगे?

BLS पॉलिमर्स IPO से मिलने वाली रकम में से ₹77.56 करोड़ गोवा स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के विस्तार पर खर्च करेगी। इसके अलावा, ₹89.5 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए रखे जाएंगे। बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों में होगा।

क्या करती है कंपनी?

नई दिल्ली स्थित BLS Polymers खास तरह के पॉलिमर कंपाउंड बनाती है। इनका इस्तेमाल बिजली, टेलीकॉम, रेलवे, पानी और तेल-गैस से जुड़े उद्योगों में होता है। कंपनी के प्रोडक्ट तारों, केबलों और पाइपलाइनों को सुरक्षा देने में काम आते हैं।

मुनाफा 27.8% बढ़ा

FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 27.8% बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹21.1 करोड़ था। इस दौरान रेवेन्यू भी 6.4% बढ़कर ₹349.4 करोड़ पहुंच गई। जून 2026 तिमाही में कंपनी ने ₹107.02 करोड़ की रेवेन्यू पर ₹10.2 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आकाश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं बताईं, कहा-इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने पर होगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के फोकस में बदलाव कर रही है। अब तक कंपनी का जोर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहा है। अब कंपनी अपने नेटवर्क का मैक्सिमम फायदा उठाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ने पिछले सालों में पूरे देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भारी निवेश किया है। अब वह अपने सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है और निवेश की गई पूंजी पर रिटर्न बढ़ाना चाहती है। इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश अंबानी ने बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करने पर होगा फोकस

मनीकंट्रोल को दिए ईमेल इंटरव्यू में अंबानी ने कहा, “हमारे कैपिटल एलोकेशन की दिशा सस्टेनेबल लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करने के मकसद पर निर्भर करेगी। हम वहां निवेश करना जारी रखेंगे, जहां हमें टेक्नोलॉजी, कस्टमर डिमांड और उपलब्ध मौकों का फायदा उठाने के लिहाज से ऐसा करना सही लगेगा।” उन्होंने कहा कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में हमारा फोकस उस इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करना है, जिसे हमने बनाया है।

पिछले सालों में कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है

जियो प्लेटफॉर्म्स ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। मार्च 2026 में कंपनी के 3,60,382 नेटवर्क टावर्स थे। इसमें 10 लाख रूट किलोमीटर से ज्यादा लंबा फाइबर नेटवर्क शामिल है। कंपनी के वायरलेस ब्रॉडबहैंड नेटवर्क के तहत देश की आबादी का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का कवरेज करीब 98 फीसदी पिन कोड्स तक है। FY26 में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी।

अब पूंजीगत निवेश की रफ्तार में धीर-धीरे कमी आ रही

कई सालों तक भारी निवेश करने के बाद अब इनवेस्टमेंट की तेज रफ्तार कम हुई है। FY26 में कंपनी का कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 34,184 करोड़ रुपये रही। यह FY25 में 44,268 करोड़ रुपये थी। FY24 में 53,510 करोड़ रुपये थी। नेटवर्क कैपेक्स अकेले 40,617 करोड़ रुपये से घटकर 29,377 करोड़ रुपये पर आ गया। उधर, बिजनेस की ऑपरेटिंग अर्निंग्स अब अच्छे लेवल पर पहुंच गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा। यह करीब 52 फीसदी का मार्जिन है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 30,049 करोड़ रुपये रहा।

जियो की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विदेश में करने पर भी होगा फोकस

कंपनी ने शॉर्ट टर्म में कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा इसमें नेटवर्क क्वालिटी बनाए रखना, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का विस्तार करना और एंटरप्राइज एंड डिजिटल सर्विसेज का विस्तार शामिल हैं। जियो AI-एनेबल्ड एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, IoT, क्लाउड कंप्यूटिंग और AR/VR में भी मौकों पर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि जियो की टेक्नोलॉजी कपैबिलिटी के लिए विदेश में मौकों की तलाश भी प्राथमिकता में शामिल होगी।

यह भी पढ़ें: Jio IPO: ‘कमाई बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर फोकस’, आकाश अंबानी ने कहा- सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं रहेगा जोर

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेश के लिए खुल जाएगा

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ में सिर्फ नए शेयर इश्यू होंगे। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यह आईपीओ 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा और 23 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065-1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी आईपीओ से आने वाले पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस का कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Jio IPO: ‘कमाई बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर फोकस’, आकाश अंबानी ने कहा- सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं रहेगा जोर

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी कमाई बढ़ाने के लिए सिर्फ मोबाइल रिचार्ज महंगे करने पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी अब डेटा की बढ़ती खपत, प्रीमियम डिजिटल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड और कॉरपोरेट सेवाओं से कमाई बढ़ाने की तैयारी में है। Jio का लक्ष्य अपने 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों से ज्यादा रेवेन्यू हासिल करना है।

Jio Platforms के चेयरमैन आकाश अंबानी ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी हर GB डेटा के लिए ज्यादा पैसे वसूलने को ही कमाई बढ़ाने का एकमात्र तरीका नहीं मानती। उनके मुताबिक, टैरिफ कारोबार का एक हिस्सा है। लेकिन कमाई बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी हैं।

Jio ग्राहकों को देगी प्रीमियम सेवाएं

Jio अपनी डिजिटल सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। कंपनी चाहती है कि ग्राहक प्रीमियम सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस इंटरनेट का विस्तार भी किया जाएगा।

कंपनी कॉरपोरेट ग्राहकों के साथ अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। साथ ही, इंटरनेट कनेक्शन के साथ दूसरी सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें OTT वीडियो, म्यूजिक, क्लाउड स्टोरेज और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं।

आकाश अंबानी के मुताबिक, ग्राहक इन सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो कमाई बढ़ाने के नए मौके मिलेंगे। प्रीमियम इंटरनेट कनेक्टिविटी और AI सेवाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Airtel से पीछे है Jio की प्रति ग्राहक कमाई

वित्त वर्ष 2026 में Jio की औसत प्रति यूजर कमाई यानी ARPU 214 रुपये प्रति माह रही। वहीं, Bharti Airtel की ARPU 257 रुपये थी।

एनालिस्ट्स का मानना है कि Jio के पास कमाई बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। कंपनी के पास ग्राहकों की संख्या ज्यादा है। उसके नेटवर्क पर डेटा का इस्तेमाल भी काफी होता है। ऐसे में प्रीमियम सेवाओं और डेटा की बढ़ती खपत से कंपनी को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, आकाश अंबानी ने यह नहीं बताया कि अगली बार मोबाइल टैरिफ कब बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि आने वाले समय में कीमतें किस स्तर पर स्थिर हो सकती हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ का फैसला ग्राहकों की जरूरत, बाजार में प्रतिस्पर्धा, महंगाई और नेटवर्क पर होने वाले निवेश को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO

Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर को खुला है और 23 अक्टूबर को बंद होगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।

इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होनी है।

₹27,500 करोड़ से चुकाया जाएगा कर्ज

वित्त वर्ष 2026 में Jio Platforms का रेवेन्यू 1.47 लाख करोड़ रुपये रहा। कंपनी को 30,049 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ। वहीं, EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा।

IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये Reliance Jio Infocomm का कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। यह Jio Platforms की सब्सिडियरी कंपनी है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

OYO का अब आईपीओ में सिर्फ 3350 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करने का प्लान, जानिए वजह

ओयो की पेरेंट कंपनी प्रिज्म अपने प्रस्तावित आईपीओ में अपने नए शेयरों की संख्या घटाकर आधी करना चाहती है। पहले वह आईपीओ में 6,650 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करने वाली थी। अब वह 3,350 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करने के बारे में सोच रही है। सूत्रों ने मंगलवार को यह बताया।

स्ट्रॉन्ग कैश जेनरेशन की वजह से कंपनी ने बदला प्लान

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने पीटीआई को बताया कि स्ट्रॉन्ग कैश जेनरेशन की वजह से प्रिज्म इश्यू का साइज घटाना चाहती है। कंपनी का कैश जेनरेशन स्ट्रॉन्ग बना हुआ है। बैलेंसशीट भी स्ट्रॉन्ग है। इससे कंपनी को अब पहले के मुकाबले कम कैपिटल की जरूरत है।

पहले कंपनी को ज्यादा पूंजी की जरूरत थी 

एक सूत्र ने बताया कि कंपनी ने जब आईपीओ का प्लान बनाया था तब उसे ज्यादा पूंजी की जरूरत थी। लेकिन, हाल में बेहतर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के बाद अब कंपनी को कम पूंजी की जरूरत है। सूत्र ने बताया कि कंपनी अब उतनी ही पूंजी जुटाना चाहती है, जितनी उसकी जरूरत है। कंपनी का प्लान अगले दो से तीन साल में कर्ज चुकाने का है।

पहले कंपनी का प्लान 6650 करोड़ जुटाने का था

OYO ने पहले आईपीओ से 6,650 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। इसमें से कंपनी 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करने वाली थी। आईपीओ के रिवाइज्ड स्ट्रक्चर के मुताबिक, कंपनी इश्यू से आने वाले ज्यादातर पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

मूडीज ने पेरेंट कंपनी प्रिज्म का आउटलुक बदला

रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने प्रिज्म के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बदलकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। उसने इस बी2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग भी दी है। मूडीज ने कहा है कि उसे अगले 12-18 महीनों में ओयो की एबिड्टा बढ़कर करीब 3,000 करोड़ रुपये पहुंच जाने की उम्मीद है। FY26 में कंपनी का EBITDA दोगुना यानी 2,630 करोड़ रुपये हो गया। FY25 में यह 1,080 करोड़ रुपये था।

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ओयो में सॉफ्टबैंक की सब्सिडियरी की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

ओयो की शुरुआत 2013 में हुई थी। रीतेश अग्रवाल इसके फाउंडर हैं। उनकी इस कंपनी में 30.52 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी में सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी एसवीएफ इंडिया होल्डिंग्स (केमैन) की है, जो सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प की सब्सिडियरी है।

Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

retirement table

पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

भारत से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश:वीडियो में उम्मीदवार की तारीफ, मुंबई में बैठे शख्स को हर पोस्ट के 15 डॉलर मिले

अमेरिका में चुनाव के दौरान वोटरों को प्रभावित करने के लिए भारत से सोशल मीडिया पर वीडियो फैलाए गए। इन वीडियो में आम लोग सड़कों पर खड़े होकर एक उम्मीदवार की तारीफ करते और महंगाई जैसे मुद्दों पर अपनी राय देते नजर आए। वीडियो ऐसे बनाए गए थे, जैसे लोग अपनी मर्जी से उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हों। लेकिन इन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए पैसे दिए जा रहे थे। मुंबई में बैठा आयुष जैन हर पोस्ट के बदले करीब 15 डॉलर (1400 रुपए) कमा रहा था। गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखने वाले दो रिसर्च ग्रुप्स के मुताबिक, इन वीडियो को पोस्ट करने वाले ज्यादातर अकाउंट भारत से चलाए जा रहे थे। डेमोक्रेट उम्मीदवार के समर्थन में 36 वीडियो पोस्ट किए गए यह मामला अगस्त में मिशिगन राज्य में सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को चुनने से पहले का है। सोशल मीडिया पर कम से कम 36 वीडियो पोस्ट किए गए जिन्हें लाखों बार देखा गया। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर डाले गए इन वीडियो में ज्यादातर सांसद हेली स्टीवंस की तारीफ की गई थी। इनमें लोग महंगाई और रोजी-रोटी जैसे मुद्दों पर बात करते हुए स्टीवंस का समर्थन करते नजर आए। हालांकि, वीडियो बनाने वालों की पहचान सामने नहीं आई है और यह भी साफ नहीं है कि इनके पीछे पैसा किसने लगाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान स्टीवंस को उनके प्रतिद्वंद्वी डॉ. अब्दुल एल-सैयद के खिलाफ जीत दिलाने की कोशिश कर रहे किसी राजनीतिक समूह से जुड़ा हो सकता है। लेकिन इन वीडियो को फैलाने में स्टीवंस के चुनाव अभियान या उनके समर्थक समूहों का हाथ होने का कोई सबूत सामने नहीं आया है। 4 अगस्त को चुनाव में एल-सैयद ने जीत हासिल की। हर 1000 व्यू पर मिलते थे 1 से 5 डॉलर पेंसिल्वेनिया की कंपनी ने आयुष को काम पर रखा था अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य की ‘लुमिना क्लिपर्स’ नाम की एक कंपनी ने आयुष जैन को हायर किया था। यह कंपनी सोशल मीडिया पर बॉट अकाउंट के जरिए पोस्ट की पहुंच बढ़ाने का काम करती है। बॉट ऐसे अकाउंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में पोस्ट और इन्फोर्मेशन फैलाने के लिए किया जा सकता है। इस कंपनी का फोन नंबर UAE का है और इसे पुर्तगाल में रहने वाले आयरलैंड के नागरिक राइस मैके चलाते हैं। मैके ने माना कि उनकी कंपनी ने मिशिगन के इन वीडियो को फैलाने में भूमिका निभाई थी। इसके लिए आयुष जैन और उनके जैसे दर्जनों अन्य लोगों को काम पर रखा गया था। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्हें यह काम किसने दिया था और इसके लिए कितना पैसा खर्च हुआ। 28 अकाउंट ने पैसे लेकर फैलाए वीडियो इस अभियान का सबसे पहले पता ‘एंटीबॉट4नवालनी’ नाम के समूह ने लगाया। समूह ने एक्स पर ऐसे 28 अकाउंट की पहचान की, जो पैसे लेकर वीडियो पोस्ट कर रहे थे। इन पोस्ट को 70 लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद क्लेमसन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर भी ऐसे अकाउंट खोजे। इनमें से कुछ अकाउंट पहले चीन से जुड़े बॉट नेटवर्क के जरिए चलाए गए अभियानों में भी सामने आ चुके थे। रिसर्चर्स के मुताबिक, ये अकाउंट आम तौर पर कार्टून और मनोरंजन से जुड़े वीडियो पोस्ट करते थे लेकिन चुनाव के दौरान अचानक राजनीतिक वीडियो फैलाने लगे। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार के चुनाव के बाद भी इन अकाउंट से राजनीतिक पोस्ट जारी रहीं। इनमें कैलिफोर्निया में गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के समर्थन वाली पोस्ट भी शामिल थीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं:10 में से 9 सर्वे में पीछे, महंगाई-ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपने ही उम्मीदवार दूरी बना रहे अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

SBI की 444 दिनों की स्पेशल FD स्कीम! जानें ₹5 लाख और ₹10 लाख फिक्स कराने पर कितना मिलेगा रिटर्न

SBI Amrit Vrishti Scheme: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्पेशल फिक्स्ड डिपॉजिट योजना ‘अमृत वृष्टि’ निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। अगर आप सुरक्षित जगह पर निवेश करके शानदार रिटर्न पाना चाहते हैं, तो यह खास 444 दिनों की योजना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बैंक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जानिए इस स्पेशल टेन्योर स्कीम की हर एक जरूरी बात।

ब्याज दरें: किसे कितना मिलेगा फायदा?

इस योजना के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के निवेशकों के लिए ब्याज दरें तय की गई हैं:

  1. आम नागरिक: 6.45% सालाना
  2. वरिष्ठ नागरिक: 6.95% सालाना (सामान्य नागरिकों से 0.50% ज्यादा)
  3. सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक): 7.05% सालाना

स्कीम की मुख्य विशेषताएं और नियम

अवधि: इस एफडी की मैच्योरिटी अवधि ठीक 444 दिन (करीब 14.5 महीने) तय की गई है।

न्यूनतम और अधिकतम राशि: इस योजना में रिटेल डिपॉजिट के तहत ₹1,000 से निवेश की शुरुआत की जा सकती है, और अधिकतम राशि ₹3 करोड़ से कम होनी चाहिए।

कौन कर सकता है निवेश: भारत के सामान्य नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और अनिवासी भारतीय (NRIs) इसमें निवेश के पात्र हैं।

ब्याज भुगतान के विकल्प: निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार ब्याज का भुगतान मासिक, त्रैमासिक, छमाही या सीधे मैच्योरिटी के समय ले सकते हैं।

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशकों को इस एफडी पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है।

प्री-मैच्योर विड्रॉल यानी समय से पहले पैसे निकासी के नियम

अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसों की जरूरत पड़ जाती है और आप एफडी तुड़वाते हैं, तो बैंक नियमों के तहत पेनल्टी काटता है:

₹5 लाख तक की राशि पर: 0.50% की पेनल्टी।

₹5 लाख से ₹3 करोड़ से कम राशि पर: 1.0% की पेनल्टी।

खास छूट: अगर एफडी को बुक करने के 7 दिनों के भीतर बंद किया जाता है, तो कोई ब्याज नहीं मिलता है। हालांकि, बैंक के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस पेनल्टी से छूट दी गई है।

कैसे कर सकते हैं आवेदन?

SBI की इस योजना का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को बैंक जाने की भी जरूरत नहीं है, इसे घर बैठे ऑनलाइन भी शुरू किया जा सकता है:

  • SBI YONO App के जरिए।
  • एसबीआई की आधिकारिक इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल से।
  • अपने नजदीकी एसबीआई की किसी भी शाखा में जाकर फॉर्म भरकर।

₹5 लाख और ₹10 लाख की FD पर कितना मिलेगा रिटर्न

एसबीआई की 444 दिनों वाली ‘अमृत वृष्टि’ एफडी में अगर आप 5 लाख रुपये का निवेश करते हैं, तो 6.45% सालाना ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹39,800 से ₹40,000 का ब्याज मिलेगा, जिससे कुल रकम बढ़कर करीब ₹5.40 लाख हो जाएगी; वहीं 6.95% की दर से वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹43,000 से ₹43,200 तक का रिटर्न मिलेगा, जिससे उनकी कुल रकम ₹5.43 लाख के पार पहुंच जाएगी।

इस स्कीम में ₹10 लाख की FD करने पर 6.45% सालाना चक्रवर्ती ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹80,000 से ₹80,500 तक का शुद्ध रिटर्न मिलेगा (कुल मैच्योरिटी रकम करीब ₹10.80 लाख हो जाएगी); वहीं 6.95% सालाना ब्याज दर के साथ वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹86,500 से ₹87,000 तक का ब्याज प्राप्त होगा, जिससे 444 दिनों बाद उनकी कुल जमा रकम बढ़कर लगभग ₹10.87 लाख पहुंच जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।