केरल की कार्तियानी अम्मा की कहानी से इंप्रेस आर माधवन ने पोस्ट किया Video, 96 साल की उम्र में लिटरेसी एक्जाम में हासिल किए 100 में 98 नंबर

कभी-कभी किसी की कहानी इतनी प्रेरणादायक होती है कि उनके जाने के लंबे समय बाद भी वो हमें इंस्पायर करती रहती है। ऐसा ही कुछ एक्टर आर माधवन के साथ भी हुआ है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर केरल की कार्तियानी अम्मा की कहानी शेयर की है। कार्तियानी अम्मा ने 96 साल की उम्र में लिटरेसी एग्जाम में 100 में से 98 नंबर लाकर सुर्खियां बटोरी थीं। एक्टर ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर उनकी उप्लब्धि को सेलिब्रेट करते हुए एक वीडियो रीपोस्ट किया। कार्तियानी अम्मा का 2023 में 101 साल की उम्र में निधन हो गया

उनकी लिटरेसी एग्जाम की कहानी देर से पढ़ाई करने के अपने पक्के इरादे से इंस्पायर करती है। बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर कार्तियानी अम्मा के शानदार सफर की तारीफ की। उन्होंने साबित किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। एक्टर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें बताया गया कि कैसे कार्तियानी अम्मा ने 96 साल की उम्र में लिटरेसी एग्जाम दिया और 100 में से शानदार 98 नंबर हासिल किए।

आर माधवन ने कार्तियानी अम्मा की इंस्पायरिंग कहानी शेयर की

माधवन के शेयर किए गए वीडियो में कार्तियानी अम्मा की अचीवमेंट को इस मैसेज के साथ हाईलाइट किया गया, “96 साल की उम्र में, केरल की कार्तियानी अम्मा ने 98/100 के साथ लिटरेसी एग्जाम में टॉप किया।” यह कहानी 2018 की है, जब कार्तियानी अम्मा ने केरल के अक्षरलक्षम लिटरेसी प्रोग्राम में हिस्सा लिया था।

अपने जीवन का ज्यादातर हिस्सा बिना औपचारिक शिक्षा के बिताने के बावजूद, उन्होंने नब्बे की उम्र में पढ़ना, लिखना और बेसिक मैथ्स सीखने का फैसला किया।

कार्तियानी अम्मा कौन थीं?

1922 में केरल के अलप्पुझा जिले के चेप्पड़ गांव में जन्मी कार्तियानी अम्मा एक ऐसे घर में पली-बढ़ीं जो पैसे की तंगी से जूझ रहा था। अपनी पीढ़ी की कई औरतों की तरह, उन्हें बचपन में स्कूल जाने का मौका नहीं मिला।

इसके बजाय, उन्होंने अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय काम करने और अपने छह बच्चों को पालने में बिताया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने परिवार का गुजारा करने के लिए घरेलू मदद और सड़क साफ करने वाली के तौर पर काम किया।

पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी तब फिर से जागी जब उनकी 60 साल की बेटी ने एक लिटरेसी प्रोग्राम में एडमिशन लिया और सफलतापूर्वक परीक्षा पास की। अपनी बेटी की कामयाबी से प्रेरित होकर, कार्तियानी अम्मा ने खुद भी पढ़ाई करने का फैसला किया। उनके पोते-पोतियों और परपोते-परपोतियों ने उन्हें पढ़ने, लिखने और मैथ्स की प्रैक्टिस करने में मदद की।

96 साल की उम्र में 98 अंक हासिल किए

2018 में, कार्तियानी अम्मा केरल स्टेट लिटरेसी मिशन अथॉरिटी के तहत हुई एक साक्षरता परीक्षा में शामिल हुईं। इस परीक्षा में 40,000 से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। 96 साल की उम्र में, उन्होंने 100 में से 98 मार्क्स हासिल किए। उन्हें 2019 में कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग के लिए गुडविल एंबेसडर भी बनाया गया और उन्हें मशहूर नारी शक्ति पुरस्कार मिला।

कार्तियानी अम्मा का निधन कब हुआ?

कार्तियानी अम्मा का अक्टूबर 2023 में 101 साल की उम्र में निधन हो गया। हालांकि वह अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी को पक्के इरादे और जिंदगी भर सीखने की मिसाल के तौर पर याद किया जाता है।

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Subhash Ghai: आज के समय में एक्टर्स आर्ट से ज्यादा पैसों को अहमियत देते हैं, सुभाष घई ने पुराने दिनों में स्टार्स की फीस को लेकर की बात

Subhash Ghai: सुभाष घई ने 1980 और 90 के दशक में ‘खलनायक’, ‘हीरो’, ‘परदेस’ और ‘ताल’ जैसी कई बेहद सफल फिल्मों का निर्देशन किया है। अब उन्होंने इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया दी है कि आज के कलाकार अपने काम से ज्यादा पैसे को अहमियत देते हैं। ‘स्क्रीन’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आए इस बदलाव के बारे में बात की।

सुभाष घई ने क्या कहा

निर्देशक ने कहा- “आज के दौर में कमर्शियल पहलू (पैसा कमाने की होड़) हावी हो गया है। आज के कलाकार ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं, जबकि कला पर उनका ध्यान कम है। हमारे समय में कलाकार असल में ‘कलाकार’ बनना चाहते थे और उनका मानना ​​था कि पैसा तो अपने आप आ ही जाएगा। अभिनेता ने फिल्म बनाते समय एक स्पष्ट रचनात्मक दृष्टिकोण होने के महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “हम जो फिल्में बनाते हैं, उन्हें हर हिंदुस्तानी अपने पूरे परिवार के साथ आराम से देख सकता है।”

फिल्ममेकर ने कहा कि पहले कोई भी सिर्फ पैसे के लिए काम नहीं करता था। वे किसी फिल्म को उसके निर्देशक, कहानी और अपने किरदार को देखकर साइन करते थे। मेरी फिल्मों में काम करने वाले ज्यादातर सितारों ने अपनी फीस का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा ही लिया, क्योंकि उन्हें अपने किरदार और कहानी में दिलचस्पी थी।”

उन्होंने आगे कहा- “आज अगर आप किसी कलाकार से कहें कि वह अपनी फीस का सिर्फ 40 प्रतिशत हिस्सा ले तो उसके चार मैनेजर बीच में आ जाएंगे और 3 पीआर (PR) वाले आकर उसे एक बड़ा सेलिब्रिटी बताकर बचाव करने लगेंगे। आज कलाकारों के पास फिल्मों के अलावा पैसे कमाने के कई और जरिया भी हैं। लेकिन ये सब कुछ समय के लिए ही होते हैं। 3-4 साल बाद इनका क्रेज खत्म हो जाता है। फिर वे इंडस्ट्री से बाहर हो जाते हैं और उनकी जगह कोई और ले लेता है।”

सलमान खान का कमेंट

‘कॉफी विद करण’ सीजन 9 में सलमान खान ने भी फिल्म इंडस्ट्री के इस मुद्दे पर बात की थी। करण जौहर ने बॉलीवुड के पुराने सितारों की लगातार बनी हुई लोकप्रियता का जिक्र करते हुए बताया कि 2026 में अक्षय कुमार, अजय देवगन, शाहरुख खान और सलमान खान जैसे बड़े नामों वाली फिल्में सफल रहीं। उन्होंने कहा कि दर्शकों को अपनी ओर खींचने की उनकी क्षमता यह दिखाती है कि उनकी पीढ़ी आज भी प्रासंगिक (relevant) है। करण की बात का जवाब देते हुए सलमान ने कहा, “हम अपने काम में दिलचस्पी रखते हैं। हम घर से बाहर निकलकर अच्छा काम करना चाहते हैं। कभी-कभी यह सही हो जाता है तो कभी-कभी नहीं।”

अभिनेता ने फिल्म बनाते समय एक स्पष्ट क्रिएटिव नजरिए होने के महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा- “हम जो फिल्में बनाते हैं, उन्हें हर हिंदुस्तानी अपने पूरे परिवार के साथ आराम से देख सकता है।”

Cult.fit को IPO के लिए SEBI से मिली मंजूरी, रहेंगे ₹950 करोड़ तक के नए शेयर

फिटनेस सर्विसेज प्लेटफॉर्म Cult.fit को IPO लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिल गई है। सेबी की वेबसाइट पर मौजूद एक दस्तावेज से पता चलता है कि कंपनी अब लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। Cult.fit के पब्लिक इश्यू में 950 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 17.86 करोड़ तक इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा।

Cult.fit भारत में 77 शहरों में 708 फिटनेस सेंटर चलाती है। 31 मार्च, 2026 तक इसके 987,000 से अधिक पेड मेंबर थे। यह कई माध्यमों से मेंबरशिप बेचती है, जिनमें इसका ऐप, वेबसाइट, कॉरपोरेट पार्टनरशिप प्रोग्राम और फिटनेस सेंटरों पर होने वाली डायरेक्ट सेल शामिल हैं। कल्ट फिट ने इस साल जुलाई में SEBI के पास IPO के लिए आवेदन किया था।

कंपनी में टेमासेक होल्डिंग्स के निवेश वाली मैकरिची इनवेस्टमेंट्स, फिटनेस फर्स्ट लक्जमबर्ग, IDG वेंचर्स इंडिया फंड, टाटा डिजिटल, चिराटे ट्रस्ट, श्रोडर्स कैपिटल, ट्वेंटी नाइन कैपिटल पार्टनर्स और एक्सेल इंडिया V (मॉरीशस) का भी पैसा लगा हुआ है।

IPO के पैसे कैसे इस्तेमाल करेगी Cult.fit

Cult.fit अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल नए सेंटर खोलने, और ब्रांडिंग व मार्केटिंग के खर्चों के लिए करेगी। इस इश्यू के लिए एक्सिस कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स जैसी एंटिटीज ‘बुक-रनिंग लीड मैनेजर’ हैं। साल 2016 में शुरू हुई कल्ट फिट भारत में जिम, ग्रुप वर्कआउट, आउटडोर फॉर्मेट, एट-होम वर्कआउट और फिटनेस प्रोडक्ट्स जैसे- कपड़े, जूते और जिम के सामान बेचने वाला एक बहुत बड़ा और जाना-माना प्लेटफॉर्म बन चुका है।

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इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

कल्ट फिट के अलावा SEBI ने ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज और सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट के IPO को भी मंजूरी दी है। ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज के IPO में 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और 1.32 करोड़ इक्विटी शेयरों का OFS रहेगा। IPO का साइज 1,100 करोड़ रुपये से 1,300 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट ने मार्च में कॉन्फिडेंशियल रूट से SEBI के पास IPO ड्राफ्ट जमा किया था। साल 2026 में अब तक 97 मेनबोर्ड कंपनियां अपने IPO के जरिए 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुकी हैं।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में इस हफ्ते सोना 3% गिरा, चांदी 13500 रुपये फिसली

Gold Silver Prices Today: यह हफ्ता सोने और चांदी की कीमतों के लिए अच्छा नहीं रहा। दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, हफ्ते के अंतिम दिन यानी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में दिल्ली सर्राफा बाजार में बदलाव नहीं हुआ। सोना की कीमत बगैर किसी बदलाव के 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बनी रही।

चांदी 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में भी बदलाव नहीं हुआ। यह 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सोना 0.13 फीसदी चढ़कर 4,176 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 0.30 फीसदी के उछाल के साथ 57.58 डॉलर प्रति औंस थी।

इस हफ्ते दिल्ली में चांदी 13500 रुपये हुई सस्ती

इस हफ्ते सोना दिल्ली सर्राफा बाजार में 3 फीसदी यानी 4,500 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। चांदी में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। यह इस हफ्ते 13,500 रुपये यानी 6 फीसदी फिसल गई। हालांकि, त्योहारों के दौरान सोने और चांदी में गिरावट ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। भारत में त्योहारों के दौरान सोने और चांदी खरीदने की परंपरा रही है।

रुपये में तेजी से सोने में रिकवरी पर लगी लगाम

डिजिटल एसेट ट्रेडिंग फर्म जियोटस डॉट कॉम के सीईओ विक्मर शुभराज ने कहा कि शुक्रवार को रुपये में डॉलर के मुकाबले छटे दिन तेजी आई। यह 7 पैसे चढ़कर 94.92 के लेवल पर पहुंच गया। रुपये में मजबूती से सोने में रिकवरी पर ब्रेक लगा है। रुपये में मजबूती से गोल्ड की इंपोर्ट कॉस्ट कम हो जाती है। इसका असर इसकी कीमतों पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में रिकवरी 

ऑगमोन्ट में चीफ रिसर्च अफसर रेनिशा चैनानी ने कहा कि डॉलर इंडेक्स में नरमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी दिखी। इससे पहले यह गिरकर 18 महीने के निचले स्तर पर आ गया था। चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतें शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती हैं।

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बुलियन मार्केट की नजरें फेड की पॉलिसी पर 

बुलियन मार्केट की नजरें इस महीने के अंत में आने वाली फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर लगी हैं। हालांकि, शुक्रवार को थाईलेंड में आईएमएफ की सालाना बैठक में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने 28 अक्टूबर की पॉलिसी के फैसलों के बारे में किसी तरह का संकेत देने से इनकार कर दिया। लेकिन, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन कह चुके हैं कि उनका फोकस फिलहाल कीमतों को बढ़ने से रोकने पर होगा।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

हेल्थ पॉलिसी होने के बावजूद कई बार हॉस्पिटल के बिल का कुछ हिस्सा जेब से भरना पड़ता है। अगर हॉस्पिटल के बिल में से 3 लाख रुपये जेब से भरना हो तो फिर क्या करना चाहिए? क्या सेविंग्स के पैसा का इस्तेमाल करना चाहिए, बैंक एफडी को तोड़ देना चाहिए या पीएफ से पैसे निकालने चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल एक्सपर्ट से पूछा।

बीमारी को ध्यान में रखकर लेने होंगे फैसले

आरोग्य फाइनेंस के को-फाउंडर और सीईओ जोस पीटर ने कहा कि इस सवाल का जवाब कई बातों पर निर्भर है। इसमें बीमारी कौन सी है, बीमारी के इलाज में कितना समय लगेगा और कितने पैसे खर्च होंगे शामिल हैं। कई बार बीमारी का इलाज एक सर्जरी से हो जाता है, जबकि कुछ बीमारी में बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।

हॉस्पिटल बिल और इंश्योरेंस सेटलमेंट स्टेंटमेंट को चेक करें

उन्होंने कहा कि अगर हॉस्पिटल का बिल 5 लाख आने पर हेल्थ पॉलिसी के बावजूद 3 लाख जेब से चुकाना हो तो बड़ी समस्या हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को दवाइयां भी खरीदनी हो और आगे भी डॉक्टर से दिखाना हो। ऐसे में परिवार को हॉस्पिटल के बिल को ध्यान से देखना जरूरी है। इंश्योरेंस कंपनी के सेटलमेंट स्टेटमेंट को भी देखना होगा। इससे पता चलेगा कि कौन-कौन से चार्ज इंश्योरेंस में कवर नहीं हुआ है।

कई हॉस्पिटल इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करते हैं

सबसे पहले हॉस्पिटल से यह पूछा जा सकता है कि क्या वह इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करता है। इसमें इंटरेस्ट का बोझ हॉस्पिटल उठाता है। अगर हॉस्पिटल यह सुविधा ऑफर करता है तो परिवार के लिए इसका इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहेगा। परिवार मंथली किस्त चुकाने के लिए अपने गैरजरूरी खर्चों में कटौती कर सकता है। अगर यह सुविधा हॉस्पिटल ऑफर नहीं करता है तो ही बैंक एफडी तोड़ने या दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ेगी।

बैंक एफडी तोड़ने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें 

अगर बैंक एफडी तोड़ना जरूरी हो तो पहले यह देखना होगा कि इंटरेस्ट के मामले में कितना लॉस होगा और तय समय से पहले एफडी तोड़ने पर कितनी पेनाल्टी चुकानी होगी। एफडी पर लोन लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर एफडी अगर लंबी अवधि का है तो उसे तोड़ना सस्ता पड़ेगा। परिवार दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद फैसला ले सकता है।

ईपीएफ में जमा पैसा निकालने का भी विकल्प

तीसरा विकल्प ईपीएफ से पैसे निकालना है। लेकिन, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ईपीएफ से पैसे निकालने का असर आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ता है। इस प्रोसेस में समय भी लगता है। यह विकल्प तब काम नहीं करेगा, जब पेशेंट हॉस्पिटल में है और उसे हॉस्पिटल से घर लाने से पहले बिल चुकाना जरूरी हो। ऐसी स्थिति में ईपीएफ से पैसे निकलने का इंतजार नहीं किया जा सकता।

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जरूरत के हिसाब से कुछ विकल्पों का किया जा सकता है इस्तेमाल

उपर्युक्त विकल्पों पर विचार करने के बाद सबसे अच्छा यह होगा कि हॉस्पिटल का बिल चुकाने के लिए सेविंग्स के कुछ पैसे का इस्तेमाल किया जाए और बाकी पैसा का इंतजाम दूसरे स्रोतों से किया जाए। इससे अचानक हाथ खाली नहीं होगा और हॉस्पिटल से पेशेंट के डिस्चार्ज के बाद भी उसकी देखभाल के लिए पैसे बचे रहेंगे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

रैपिडो ड्राइवर ने पकड़ लिया हाथ और देने लगा क्रीपी इस्माइल! इस लड़की ने सुनाई पूरी दास्तां तो आया ये रिएक्शन

बेंगलुरु की एक महिला ने रैपिडो बाइक टैक्सी के एक राइडर पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि उसे उसकी रिहायशी सोसाइटी के बाहर छोड़ने के बाद भी राइडर वहीं रुका रहा, जिससे वह असुरक्षित महसूस करने लगी। महिला ने इस घटना के बारे में ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया, जिस पर बेंगलुरु सिटी पुलिस और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का ध्यान गया।

अपनी पोस्ट में महिला ने बाइक-टैक्सी यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल उठाए। उसने बताया कि बारिश की वजह से वह पहले राइड लेने में हिचकिचा रही थी, लेकिन राइडर ने बार-बार उससे बुकिंग कैंसिल न करने के लिए कहा। उसने लिखा- “मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे राइडर्स के लिए रैपिडो की कोई जवाबदेही कैसे नहीं है।”

“उसने मुझे अजीब सी मुस्कान के साथ मेरा हाथ पकड़ लिया”

महिला ने बताया कि ड्राइवर बहुत ज्यादा घुल-मिलकर बात कर रहा था और उसने उसे रेनकोट देने की भी कोशिश की। महिला ने आगे बताया कि ड्राइवर बार-बार पूछ रहा था कि क्या वह सहज (कंफर्टेबल) है। उसने कहा, “उसने मुझे मेरी सोसाइटी के पास छोड़ा और जब मैं उसे उसका हेलमेट वापस दे रही थी, तो उसने कुछ सेकंड के लिए मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे देखकर अजीब सी मुस्कान दी।”

उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने पेमेंट करने के लिए QR कोड मांगा तो राइडर ने कहा कि बारिश की वजह से उसका फोन काम नहीं कर रहा है और उसने उनका फोन नंबर मांग लिया। फिर पेमेंट के लिए अपना नंबर देने को कहा। मैंने QR कोड पर ही जोर दिया और पेमेंट कर दिया।”

“मैं बहुत असुरक्षित और सदमे में महसूस कर रही थी”

अपने घर पर पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह तुरंत अपनी रेजिडेंशियल सोसाइटी के अंदर नहीं गईं क्योंकि उन्हें असुरक्षित महसूस हो रहा था। उन्हें तब और भी बड़ा झटका लगा, जब एक सिक्योरिटी गार्ड के जाने के लिए कहने के बावजूद राइडर वहीं एंट्री गेट के पास खड़ा रहा। गार्ड के दूसरी बार कहने पर वह वहां से गया।

महिला ने लिखा- “मैं बहुत असुरक्षित महसूस कर रही थी और सदमे में थी। हकीकत यह है कि खराब सुरक्षा इंतजामों की वजह से पीक आवर्स के दौरान भी आप बाइक, ऑटो या कैब में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।”

बेंगलुरु सिटी पुलिस और रैपिडो ने उनकी शिकायत पर प्रतिक्रिया दी

महिला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरु सिटी पुलिस ने उनसे लोकेशन की जानकारी और संपर्क विवरण डायरेक्ट मैसेज (DM) के जरिए साझा करने को कहा। वहीं रैपिडो ने भी जवाब दिया, इस अनुभव के लिए माफी मांगी और आरोपों की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “इस परेशान करने वाले अनुभव के लिए हमें सचमुच खेद है। बिना सहमति के शारीरिक संपर्क और ऐसा व्यवहार जिससे आप असुरक्षित महसूस करें, बहुत गंभीर मामला हैं। उस कैप्टन को रैपिडो प्लेटफॉर्म से हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।”

रैपिडो ने आगे कहा-अगर कभी भी राइड के दौरान आप असहज या असुरक्षित महसूस करें तो तुरंत मदद पाने के लिए रैपिडो ऐप में दिए गए SOS विकल्प का इस्तेमाल करें। आपकी सुरक्षा और सम्मान हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं।”

“यह बहुत भयानक है”

इस घटना ने इंटरनेट पर लोगों को गुस्से से भर दिया है और कई लोग रैपिडो से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। एक व्यक्ति ने कमेंट किया- “हे भगवान यह बहुत भयानक है। बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं। उम्मीद है कि आप ठीक होंगी।”

एक यूजर ने कहा, “रैपिडो (Rapido) का इस्तेमाल करने से बचें। यहां डेटा प्राइवेसी नहीं है… राइड कैंसिल करने के बाद भी ड्राइवर आपको कॉल कर सकते हैं। हो सकता है कि इस बदतमीज इंसान ने आपका नंबर भी सेव कर लिया हो और वह आपसे संपर्क करने की कोशिश करे। भले ही थोड़ा महंगा पड़े, लेकिन उबर (Uber) या ओला (Ola) का इस्तेमाल करें। आप अपनी सुरक्षा के लिए पैसे दे रहे हैं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा- “अरे बाप रे, यह तो बहुत ही डरावना है। उम्मीद है कि रैपिडो कोई ठोस कदम उठाएगा। नियमों को लागू करने के मामले में तो यह ऐप एकदम बेकार है।”

SIP Calculator: 40 साल तक जीरो सेविंग के बाद भी 60 तक बना सकते हैं 3 करोड़ का रिटायरमेंट फंड, ये है मंथली एसआईपी कैलकुलेशन

SIP Calculator: कई लोगों को सेविंग्स और इनवेस्टमेंट का ख्याल देर से आता है। फिर उन्हें लगता है कि इसके लिए समय उनके हाथ से निकल गया है। लेकिन, यह पूरा सच नहीं है। जल्द सेविंग्स और निवेश शुरू करने के कई फायदे हैं। लेकिन, देर से निवेश शुरू करने पर भी रिटायरमेंट के लिए अच्छा फंड बन सकता है।

40 की उम्र में भी रिटायरमेंट के लिए शुरू कर सकते हैं निवेश

अगर आपकी उम्र 40 हो गई है तो भी आप रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। लेकिन, आपको हर महीने ज्यादा इनवेस्ट करना होगा। अगर कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू करता है तो उसके पास इसके लिए 20 साल बचते हैं। यह समय ज्यादा नहीं है तो बहुत कम भी नहीं है।

रिटायरमेंट फंड के कैलकुलेशन में इनफ्लेशन को ध्यान में रखना होगा

आम तौर पर यह माना जाता है कि आपका रिटायरमेंट फंड आपके सालाना खर्च का 25 से 30 गुना होना चाहिए। मान लीजिए किसी व्यक्ति के परिवार का मंथली खर्च आज 30,000 रुपये है। अगर इनफ्लेशन 6 फीसदी मान लिया जाए तो यह 20 साल बाद 96,000 रुपये हो जाएगा। इसका 25 गुना करीब 2.9 करोड़ रुपये होगा।

मंथली 15000 रुपये सिप निवेश से 1.5 करोड़ का फंड बन सकता है

अगर आप हर महीने सिप से 15,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं तो आप 20 साल में आप 36 लाख रुपये निवेश करेंगे। अगर आपके निवेश पर सालाना 10 फीसदी रिटर्न मिलता है तो 20 साल बाद आपका पैसा बढ़कर 1.15 करोड़ हो जाएगा। अगर सालाना रिटर्न 12 फीसदी मान लिया जाए तो यह पैसा करीब 1.5 करोड़ रुपये होगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है। इक्विटी फंड में निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं होती है।

3 करोड़ रुपये के फंड के लिए बढ़ाना होगा मंथली सिप अमाउंट 

अगर आप 2.9 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड चाहते हैं तो आपको हर महीने करीब 29,000 रुपये इनवेस्ट करना होगा। इस कैलकुलेशन में सालाना रिटर्न 12 फीसदी माना गया है। यह अमाउंट आपको ज्यादा लग सकता है। इसकी वजह यह है कि 40 साल के व्यक्ति पर परिवार सहित कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन, इसका एक दूसरा तरीका है।

हर साल सिप 10 फीसदी बढ़ाने से मिल सकती है काफी मदद  

अगर आप मंथली 15,000 रुपये के सिप को हर साल 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो निवेश पर 12 फीसदी रिटर्न से आपके लिए करीब 3 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। आपको हर साल इनकम बढ़ने के साथ सिप का अमाउंट बढ़ाना होगा। आपको गैरजरूरी खर्चों में कटौती करनी होगी। जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट की उम्र 62 या 63 साल मान सकते हैं।

पीपीएफ में भी निवेश करने से रिटायरमें फंड बनाना होगा आसान

अगर आप नौकरी करते हैं तो ईपीएफ में रेगुलर कंट्रिब्यूशन से भी बड़ा फंड बनेगा। सबसे पहले आपको यह चेक कर लेना चाहिए कि इससे कितना बड़ा फंड बनेगा। दूसरा, आप पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड में भी निवेश शुरू कर सकते हैं। पीपीएफ 15 साल में मैच्योर हो जाता है। दिसंबर तिमाही में पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी है। सरकार हर तिमाही पीपीएफ सहित स्मॉल सेविंग्स स्कीम के इंटरेस्ट रेट की समीक्षा करती है।

NPS भी हालिया बदलाव के बाद सब्सक्राइबर्स के लिए काफी अट्रैक्टिव

NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम भी अब काफी अट्रैक्टिव हो गया है। हाल में पीएफआरडीए ने इसमें कई बदलाव किए हैं। अगर आपके एनपीएस में 12 लाख या इससे ज्यादा हैं तो आप 60 साल की उम्र में एकमुश्त 80 फीसदी पैसे निकाल सकते हैं। सिर्फ 20 फीसदी पैसे का इस्तेमाल एन्युटी के लिए होगा। दूसरा, सब्सक्राइबर्स 85 साल की उम्र तक इनवेस्टमेंट बनाए रख सकते हैं।

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हर महीने निवेश करने में इन बातों का रखना होगा खास ख्याल 

40 की उम्र में निवेश शुरू करने पर आपको ज्यादातर पैसा इंडेक्स या फ्लेक्सीकैप फंड जैसे डायवर्सिफायड इक्विटी फंड में लगाना होगा। आपको निवेश सिप के जरिए करना होगा। रिटायरमेंट नजदीक आने पर कई एक्सपर्ट्स पैसा इक्विटी फंड से निकालकर धीरे-धीरे हाइब्रिड या डेट फंड्स में लगाने की सलाह देते हैं। इससे अचानक बाजार में गिरावट आने पर आपके रिटायरमेंट फंड पर खराब असर नहीं पड़ेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

मान लीजिए कि कोई प्रॉपर्टी बेचने या विरासत में मिली रकम के कारण आपके बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये आ गए हैं। इन सभी पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देना सबसे आसान विकल्प लग सकता है। वहीं, पूरी रकम को शेयर या म्यूचुअल फंड में लगाने से बेहतर ग्रोथ मिल सकती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपकी बचत को नुकसान होने का जोखिम भी रहता है। चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच एक सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसकी शुरुआत आप अपनी उम्र को ध्यान में रखकर कर सकते हैं। 30 की उम्र वाले किसी व्यक्ति के पास नियमित सैलरी का सहारा हो सकता है, जो बाजार कमजोर होने पर काम आ सकती है। वहीं, रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के खर्चों, मेडिकल बिलों और अन्य जरूरतों के लिए इसी 1 करोड़ रुपये पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आपका निवेश प्लान इसी अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

30 की उम्र में, समय का फायदा उठाएं

अगर रिटायरमेंट में अभी भी 25 या 30 साल का समय है, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए काफी समय है। आप अपनी रकम का एक हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इनमें लंबे समय में अच्छी ग्रोथ की संभावना तो होती है, लेकिन रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

उदाहरण के लिए, 35 साल के किसी व्यक्ति को लें, जिसे नियमित सैलरी मिलती है। अगर आने वाले समय में कोई बड़ा खर्च नहीं है, तो आप अपनी रकम को इस तरह बांट सकते हैं। 60 लाख रुपये इक्विटी फंड में, 30 लाख रुपये फिक्स्ड-इनकम निवेश (जैसे FD या बॉन्ड) में और 10 लाख रुपये ऐसी बचत में जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। लेकिन, अगर आप अगले 3 सालों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह बंटवारा बदल जाएगा। घर के डाउन पेमेंट के लिए जरूरी पैसों को इस बात पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए कि उस समय शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसके बजाय, इस रकम को ऐसे निवेश विकल्पों में रखें जो अपेक्षाकृत स्थिर हों।

40 और 50 की उम्र में, जोखिम पर ज्यादा ध्यान दें

इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, रिटायरमेंट अब कोई दूर की बात नहीं रह जाती। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की किस्तें और माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आपकी मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। ऐसे में अगर आपको जल्द ही पैसों की जरूरत पड़े और आपके निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट आ जाए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है। 40 के दशक के आखिर में चल रहे लोग अपनी कुल रकम का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में लगाने पर विचार कर सकते हैं, जबकि बाकी हिस्सा फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और लिक्विड सेविंग्स में रखा जा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। जिस व्यक्ति के पास पेंशन या कोई पक्की आय का साधन है, वह उस व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम उठा सकता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद मुख्य रूप से इसी पैसे पर निर्भर रहना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट, उपयुक्त डेट फंड और सरकारी बचत योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उस पर लगने वाले टैक्स और पैसे निकालने के नियमों को जरूर देख लें। अगर किसी जरूरी खर्च के समय आपका पैसा कहीं फंस जाए, तो बहुत अधिक रिटर्न का वादा भी किसी काम का नहीं रहता।

60 की उम्र के बाद, मासिक खर्चों के लिए योजना बनाएं

रिटायर होने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनका पैसा कितने समय तक चलेगा। घर के नियमित खर्च, दवाइयों का खर्च और अचानक आने वाले अस्पताल के बिल धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर सकते हैं। कुछ पैसा सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट में रखने से तुरंत आने वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। बाकी बची रकम को उपयुक्त फिक्स्ड-इनकम निवेशों में लगाया जा सकता है। अगर आप बाजार के जोखिम को उठा सकते हैं, तो इसमें कुछ हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जा सकता है।

पूरी रकम को बिना सोचे-समझे निवेश न करें

निवेश करने से पहले, इमरजेंसी फंड के लिए कुछ पैसा अलग रख लें और महंगे कर्ज चुका दें। यह भी जांच लें कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस पर्याप्त है या नहीं, खासकर तब जब आप रिटायरमेंट के करीब हों। साथ ही, उन खर्चों का भी ध्यान रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा (रिव्यू) जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो का कोई एक हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ गया है, तो आपको उसे फिर से संतुलित (रीबैलेंस) करने की जरूरत पड़ सकती है। याद रखें कि डेट प्रोडक्ट्स में भी जोखिम होता है, और टैक्स व अन्य शुल्क आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं।

1 करोड़ रुपये की रकम आपको एक अच्छी शुरुआत दे सकती है, लेकिन यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके पास कितनी रकम है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कहां निवेश किया है। अपने भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश करें, न कि सिर्फ अपनी उम्र या किसी और के बताए गए रिटर्न को देखकर।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

दिल्ली में रहने वाली अमेरिकन लेडी भारत की किराना दुकानों की हो गई फैन! इनमें ऐसा क्या मिल गया इनको?

दिल्ली (Delhi) में रहने वाली अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर क्रिस्टन फिशर (Kristen Fisher) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह अपने घर के पास की किराना दुकान से खरीदती नजर आ रही हैं। क्रिस्टन को यह बात पसंद आई कि रोज का सामान लेने के लिए न तो दूर जाना पड़ता है और न ही ऑनलाइन ऑर्डर करके डिलीवरी का इंतजार करना पड़ता है।

क्रिस्टन ने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि किराना दुकान उनके घर से एक मिनट से भी कम दूरी पर है। वह पैदल दुकान पर गईं, हिंदी में दूध और दही मांगा, पैसे दिए और घर लौट आईं। उन्होंने कहा कि भारत में छोटी दुकानें पास में होने से जरूरत का सामान आसानी से मिल जाता है और यह सुविधा उन्हें बहुत पसंद है।

क्रिस्टन के वीडियो पर लोगों ने कई तरह के रिएक्शन दिए

एक यूजर ने कहा कि भारतीय अपने आसपास आसानी से मिलने वाली सुविधाओं की अहमियत भूल जाते हैं। दूसरे ने बताया कि अमेरिका में बिना कार के खरीदारी करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, एक यूजर ने छोटी दुकानों को ‘छोटा वॉलमार्ट’ कहा। कई लोगों ने क्रिस्टन की हिंदी की भी तारीफ की।

ब्लिंकइट से बेहतर लगी पैदल खरीदारी

एक यूजर ने क्रिस्टन को ब्लिंकइट इस्तेमाल करने की सलाह दी। इस पर उन्होंने कहा कि वह पैदल जाकर लोगों से बात करना और छोटी दुकानों से सामान खरीदना पसंद करती हैं। इससे छोटे दुकानदारों को भी मदद मिलती है।

आजकल ब्लिंकइट और इंस्टामार्ट जैसे ऐप्स से लोग कुछ ही मिनटों में घर पर सामान मंगवा लेते हैं। मोहल्ले की दुकानों से सामान लेने पर लोगों को डिलीवरी का इंतजार नहीं करना पड़ता और छोटे दुकानदारों का कारोबार भी चलता रहता है।

अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर; फल-सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका

अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। ऐसे में इमिग्रेशन एजेंसी ICE के छापों और पकड़े जाने के डर से मजदूर खेतों में काम करने से बच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक खेतों में मजदूरों की कमी हुई तो फल और सब्जियों के दाम 30 से 32% तक बढ़ सकते हैं। कैलिफोर्निया में हजारों लोग हिरासत में कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है। ट्रम्प ने राज्य सरकार पर प्रवासियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। इसके बाद ICE वहां भी कार्रवाई कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो महीनों में हजारों खेत मजदूरों को पकड़कर हिरासत केंद्रों में रखा गया है। कुछ लोगों को देश से निकाला भी गया है। अमेरिका में एक लाख भारतीय मजदूर खेती का काम करते हैं अमेरिका में बिना जरूरी कागजात के रह रहे करीब 7.5 लाख भारतीयों में से लगभग एक लाख खेती से जुड़े काम करते हैं। इमिग्रेशन एजेंसी ICE ग्रामीण इलाकों और खेतों में भी छापे मार रही है। कैलिफोर्निया से लेकर कैंसस तक कई जगह खेतों में मजदूरों की कमी देखी जा रही है। ट्रम्प सरकार प्रवासियों को देश से निकालने की कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। बिना वकील के अपना पक्ष रखना मुश्किल अमेरिका में जरूरी कागजात के बिना रह रहे लोगों को भी कुछ कानूनी अधिकार मिले हैं। लेकिन कई प्रवासियों के लिए इन अधिकारों का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। कई प्रवासियों के पास वकील करने के पैसे नहीं हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले बिना ही अमेरिका से निकाला जा सकता है। पॉलिटिको की रिसर्च के मुताबिक, 40 से ज्यादा अदालतें करीब 5 हजार प्रवासियों के पक्ष में फैसला सुना चुकी हैं। इसके बावजूद सरकार इन प्रवासियों को इमिग्रेशन वकील नहीं दे रही है। छापों से बचने के लिए काम बदल रहे भारतीय ICE की कार्रवाई के डर से कई भारतीय मजदूर खेतों को छोड़ पेट्रोल पंप, किराना दुकान और इमारतों के निर्माण से जुड़े कामों में लग गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन जगहों पर फिलहाल छापों का डर कम है। कुछ भारतीय मजदूर मैक्सिको भी चले गए हैं लेकिन उनकी संख्या कम है। वहां खेतों में काम करने पर अमेरिका के मुकाबले कम पैसे मिलते हैं। ट्रम्प की चुनावी रणनीति से खेती पर असर पड़ेगा? मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टॉम जुराविच के मुताबिक मिडटर्म चुनाव में समर्थन हासिल करने के लिए ट्रम्प सरकार प्रवासियों को देश से निकालने पर जोर दे रही है। लेकिन इस कार्रवाई का असर खेती पर पड़ सकता है। अमेरिका में लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से आए मजदूर खेतों में काम करते हैं। उन्हें अपने देश के मुकाबले ज्यादा मजदूरी मिलती है, लेकिन कई बार उनकी मजदूरी अमेरिकी मजदूरों से कम होती है। ट्रम्प की रणनीती से किसानों का नुकसान अमेरिका के खेतों में मशीनों के साथ मजदूरों की भी जरूरत होती है। अगर मजदूर कम हो गए, तो फसलों की बुवाई, देखभाल और कटाई का काम प्रभावित होगा। इससे किसानों को नुकसान हो सकता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खेती को हर साल करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। स्ट्रॉबेरी जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है। अमेरिकी खेती प्रवासी मजदूरों पर कितनी निर्भर? अमेरिका के नेशनल एग्रीकल्चरल वर्कर्स सर्वे के मुताबिक, खेतों में काम करने वाले करीब 45% मजदूर दूसरे देशों से आए हैं। पिछले साल किसानों ने खेतों में मजदूरों की भर्ती के लिए 4.15 लाख पद निकाले थे। लेकिन इन नौकरियों के लिए सिर्फ 182 श्वेत लोगों ने आवेदन किया। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। CNN के मुताबिक, हमलावर को एक स्थानीय नागरिक ने गोली मार दी, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर की उम्र करीब 16 साल थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…