Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कौन-सी पेंशन स्कीम सबसे बढ़िया? समझिए पूरा हिसाब

Retirement Planning: रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। आज लोगों के पास कई विकल्प हैं। कोई NPS में निवेश करता है, कोई PPF में पैसा जमा करता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF है। वहीं, कम आय वाले लोगों के लिए Atal Pension Yojana (APY) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) जैसी योजनाएं भी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सबसे बेहतर स्कीम कौन-सी है? इसका जवाब एक नहीं है। यह आपकी नौकरी, आय, उम्र और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है। आइए एक-एक करके समझते हैं।

स्कीम किसके लिए सबसे बड़ा फायदा

स्कीमकिसके लिएसबसे बड़ा फायदा
NPSसभी भारतीय नागरिक
बड़ा रिटायरमेंट फंड और टैक्स छूट

EPFनौकरीपेशा कर्मचारी
कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान

PPFसभी भारतीय नागरिक
पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न

APYकम आय वाले लोग
₹1,000 से ₹5,000 तक गारंटीड पेंशन

PM-SYMअसंगठित क्षेत्र के कामगार₹3,000 मासिक गारंटीड पेंशन, सरकार भी बराबर योगदान देती है
UPSकेंद्र सरकार के पात्र कर्मचारीतय शर्तों पर निश्चित पेंशन

NPS: लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का मौका

अगर आपकी उम्र 20 से 45 साल के बीच है और आप लंबे समय तक निवेश कर सकते हैं, तो National Pension System (NPS) अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें आपका पैसा शेयर बाजार और बॉन्ड में निवेश होता है। इसलिए लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, रिटर्न तय नहीं होता।

मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने ₹5,000 निवेश करते हैं। अगर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है और आप 60 साल की उम्र तक निवेश करते हैं, तो आपका कुल निवेश ₹18 लाख होगा। वहीं, अनुमानित फंड करीब ₹1.13 करोड़ बन सकता है।

रिटायरमेंट के समय करीब ₹68 लाख (60%) टैक्स-फ्री निकाले जा सकते हैं। बाकी करीब ₹45 लाख से एन्युटी खरीदनी होगी। इसी से हर महीने पेंशन मिलेगी।

EPF: नौकरीपेशा लोगों की मजबूत बचत

अगर आप नौकरी करते हैं, तो EPF आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग की सबसे मजबूत नींव है। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों हर महीने योगदान करते हैं। सरकार हर साल ब्याज भी देती है।

मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 है। ऐसे में कर्मचारी और कंपनी मिलाकर हर महीने करीब ₹9,600 EPF खाते में जमा हो सकते हैं। अगर 30 साल तक नियमित योगदान होता है, तो रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

PPF: बिना जोखिम वालों के लिए

अगर आप जोखिम नहीं लेना चाहते, तो Public Provident Fund (PPF) अच्छा विकल्प है। इसमें सरकार ब्याज देती है। ब्याज और मैच्योरिटी दोनों टैक्स-फ्री रहते हैं।

अगर आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं और ब्याज दर 7.1% रहती है, तो 15 साल बाद करीब ₹40 लाख का फंड बन सकता है। जरूरत पड़ने पर इस खाते को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

APY : कम आय वालों के लिए बेहतर

अगर आपकी आय कम है और आप गारंटीड पेंशन चाहते हैं, तो Atal Pension Yojana (APY) अच्छा विकल्प हो सकती है। इसमें 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिलती है। जितनी कम उम्र में योजना से जुड़ेंगे, उतना कम योगदान देना होगा।

मान लीजिए आपकी उम्र 25 साल है और आप ₹5,000 महीने की पेंशन चाहते हैं। ऐसे में आपको करीब ₹376 महीने जमा करने होंगे। 60 साल के बाद आपको तय पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी।

PM-SYM : रेहड़ी पटरी या मजदूरी वालों के लिए

अगर आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे रेहड़ी-पटरी लगाते हैं, मजदूरी करते हैं या छोटे दुकानदार हैं, तो प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) भी अच्छा विकल्प है। इस योजना में 60 साल की उम्र के बाद ₹3,000 महीने की गारंटीड पेंशन मिलती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जितना पैसा आप जमा करते हैं, उतना ही पैसा सरकार भी जमा करती है।

उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 30 साल है, तो आपको हर महीने ₹100 जमा करने होंगे। सरकार भी ₹100 जमा करेगी। यानी हर महीने कुल ₹200 खाते में जमा होंगे। 60 साल की उम्र के बाद आपको ₹3,000 महीने की पेंशन मिलेगी। अगर पेंशनधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को 50% फैमिली पेंशन मिलती है।

UPS: सरकारी कर्मचारियों के लिए नया विकल्प

अगर आप केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी हैं, तो Unified Pension Scheme (UPS) भी अच्छा विकल्प हो सकता है।

इस योजना में तय शर्तें पूरी होने पर रिटायरमेंट के बाद आखिरी 12 महीने की औसत बेसिक सैलरी का 50% तक पेंशन मिल सकती है। इससे रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बनी रहती है।

आखिर कौन-सी स्कीम सबसे बेहतर?

  • अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं, तो EPF और NPS का कॉम्बिनेशन सबसे मजबूत माना जाता है। EPF सुरक्षित बचत देता है, जबकि NPS लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकता है।
  • अगर आप खुद का कारोबार करते हैं, तो NPS और PPF अच्छा विकल्प हो सकता है। एक तरफ बेहतर ग्रोथ की संभावना रहती है, तो दूसरी तरफ सुरक्षित और टैक्स-फ्री बचत भी होती है।
  • अगर आपकी आय कम है या आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, तो APY और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन जैसी योजनाएं रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का सहारा बन सकती हैं।
  • अगर आप केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी हैं, तो UPS पर भी विचार कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कितना फंड होना चाहिए?

एक आसान नियम है। रिटायरमेंट के बाद हर महीने जितना खर्च चाहिए, उसका कम से कम 200 से 250 गुना फंड बनाने की कोशिश करें।

मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹20,000 खर्च होगा। ऐसे में कम से कम ₹50 लाख से ₹60 लाख का रिटायरमेंट फंड बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। हालांकि, महंगाई को देखते हुए इससे बड़ा फंड तैयार करना हमेशा बेहतर रहेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

 

Small Savings Schemes: शेयर मार्केट में उठा-पटक की टेंशन दूर, 8.2% तक का रिटर्न, पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम शानदार

Small Savings Schemes: पिछले कुछ महीनों से स्टॉक मार्केट में काफी उठा-पटक दिख रही है। इससे शॉर्ट टर्म में रिटर्न को लेकर निवेशक परेशान हो गए हैं। हालांकि अधिकतक एक्सपर्ट्स लंबे समय में अच्छा पैसा बनाने के लिए इक्विटी में पैसा लगाने की सलाह देते हैं लेकिन जो निवेशक मार्केट की घबराहट से दूर बिना टेंशन अच्छा पैसा बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी मार्केट में विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे निवेशकों के लिए सरकार के सपोर्ट वाली छोटी बचत योजनाएं पोर्टफोलियो का अच्छा हिस्सा बन सकती हैं। इनमें सालाना 8.2% तक का ब्याज मिल रहा है, जिससे मार्केट की उठा-पटक से दूर निवेशकों का क्रेज इन्हें लेकर बढ़ रहा है।

Public Provident Fund (PPF)

लंबे समय से पीपीएफ सैलरीड एंप्लॉयीज और अपना खुद का बिजनेस करने वालों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश विकल्पों में शुमार है। अभी इस पर सालाना 7.1% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 15 वर्ष है। पुरानी टैक्स व्यवस्था यानी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत इसमें किए गए निवेश पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन मिलका है। साथ ही अर्जित ब्याज और मेच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा भी टैक्स-फ्री होता है।

National Savings Certificate (NSC)

एनएससी एक फिक्स्ड इनकम योजना है, जिसमें अभी सालाना 7.7% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है और इसमें निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलता है।

Kisan Vikas Patra (KVP)

बाजार की उठा-पटक से दूर किसान विकास पत्र (केवीपी) ऐसे निवेशकों के लिए सुरक्षित है जो बिना किसी टेंशन अपने पैसे को अच्छी रफ्तार से बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं। अभी इस पर सालाना 7.5% की दर से ब्याज मिल रहा है और इस रफ्तार से 115 महीने में इसमें रखा पैसा डबल हो जाता है।

Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)

लड़कियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना में अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है जोकि स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में सबसे अधिक ब्याज देने वाली योजना में से एक है। 10 साल से कम उम्र की लड़की के अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं।

Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS)

सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम के तहत अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है और यह भी अधिक ब्याज देने वाली सरकारी बचत योजनाओं में शुमार है। इसके तहत 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग निवेश कर सकते हैं और ऐसे लोगों के लिए बेहतर है जो नियमित आय चाहते हैं।

Post Office Time Deposits

पोस्ट ऑफिस में बैंकों की तरह एक एफडी है, जिसे सरकार का सपोर्ट मिला हुआ है। इसमें एक साल की जमा पर 6.9%,दो साल की जमा पर 7.0%, तीन साल की जमा पर 7.1% और पांच साल की जमा पर 7.5% की दर से ब्याज मिलेगा। पांच साल की जमा पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलेगा।

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें

सरकार हर तिमाही स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स यानी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें तय करती हैं और सितंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यहां पोस्ट ऑफिस से जुड़ी स्कीम्स के लिए ब्याज दर की डिटेल्स दी जा रही है-

स्मॉल सेविंग्स स्कीमब्याज दर
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)8.2%
सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS)8.2%
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.7%
किसान विकास पत्र (KVP)7.5%
5 वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट7.5%
पोस्टऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.4%
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.1%
3 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट7.1%
2 साल का पोस्ट ऑफिस डाकघर टाइम डिपॉजिट7.0%
1 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट6.9%
पोस्ट ऑफिस आरडी (RD)6.7%
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम4.0%

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डिस्क्लेमर: निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Rate: सोने की कीमत फिर टूटी, क्या ये एक लाख रुपये तक गिर जाएगा? एक्सपर्ट्स ने 3 बड़ी बातें बताईं

इस साल सोना खरीदने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कीमत और गिरने का इंतजार करना चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि सोने की कीमत कितनी नीचे जाएगी। इसलिए सिर्फ सस्ता होने की उम्मीद में खरीदारी टालना सही फैसला नहीं हो सकता। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 तक भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत कभी भी 1 लाख रुपये से ऊपर नहीं गई थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने की कीमत 1.43 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार की अपील के बावजूद देश में सोने का कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है। हालांकि, कई खरीदार फिलहाल ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमत फिर से 1 लाख रुपये के आसपास आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध जैसे वैश्विक हालात के कारण महंगाई बढ़ी है। ऐसे में लोग पेट्रोल और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों पर खर्च के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं, इसलिए सोने की खरीदारी को लेकर भी सावधानी बरत रहे हैं।

क्या सोने की कीमत और गिरेगी? 

ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की कीमत आगे और कम होगी या अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल बहुत कम है। ऑगमॉन्ट की रिसर्च प्रमुख रेनिशा चैनानी के मुताबिक, ज्यादातर विशेषज्ञों को नहीं लगता कि सोना जल्द ही फिर से 10 ग्राम के लिए 1 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूत सहारा मिल रहा है। उनके अनुसार, सोने का 1 लाख रुपये तक गिरना सिर्फ एक बहुत कम संभावना वाली स्थिति है, न कि सामान्य अनुमान।

उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, जिसका असर सोने पर भी पड़ा। मार्च से ही सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली और 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.43 लाख रुपये के आसपास रहा। रेनिशा चैनानी का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आना सामान्य बात है। उनका अनुमान है कि 2026 तक सोना 10 ग्राम के लिए 1.40 लाख से 1.50 लाख रुपये के दायरे से ऊपर ही बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि 5 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट बाजार में सामान्य उतार-चढ़ाव है, इसे बड़ी गिरावट या क्रैश नहीं माना जाना चाहिए।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपना पैसा सिर्फ सोने में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि अलग-अलग निवेश विकल्पों में निवेश करना चाहिए। उनका कहना है कि खबरों या अफवाहों को देखकर जल्दबाजी में सोना खरीदने या बेचने का फैसला नहीं लेना चाहिए। सबसे कम कीमत का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

कब आ सकती है सोने में बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट तभी आ सकती है जब कोई बड़ा आर्थिक बदलाव हो। जैसे अमेरिकी डॉलर बहुत मजबूत हो जाए, ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी हो या फिर सोने की मांग में भारी कमी आ जाए। फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिख रहे हैं।

क्या सोना फिर 1 लाख रुपये तक आ सकता है?

बोनांजा के वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि 10 ग्राम सोने की कीमत का फिर से 1 लाख रुपये तक पहुंचना पूरी तरह असंभव नहीं है। हालांकि, मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए ऐसा जल्द होने की संभावना नहीं है। अगर ऐसा होता भी है, तो यह आने वाले मध्यम या लंबे समय में ही संभव हो सकता है।

किन वजहों से सस्ता हो सकता है सोना?

वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी, यह दुनिया की आर्थिक स्थिति, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर करेगा।

उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों में सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है:

  • अगर दुनिया में युद्ध या दूसरे अंतरराष्ट्रीय तनाव कम हो जाते हैं, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट सकती है।
  • अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं या अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने में देरी करता है, तो सोने में निवेश कम आकर्षक हो सकता है।
  • अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो इसका असर सोने जैसी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
  • अगर दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक सोना खरीदना कम कर देते हैं, तो कीमतों में कमजोरी आ सकती है।
  • अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर जा सकते हैं।

निरपेंद्र यादव ने कहा कि इतिहास बताता है कि अपने सबसे ऊंचे स्तर से 10 से 20 फीसदी तक गिरना सोने के लिए कोई असामान्य बात नहीं है। हालांकि, लंबे समय में इसकी दिशा दुनिया की आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। उन्होंने सलाह दी कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अगर सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आती है, तो इसे धीरे-धीरे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा सकता है। वहीं, कम समय के लिए निवेश करने वालों को कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और उसी के अनुसार अपनी निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

FD से कमाना चाहते है अच्छा रिटर्न, ये बैंक दे रहे हैं 8.1% तक ब्याज, चेक करें लिस्ट

Invest in FD : अगर आप भी उन इन्वेस्टर्स में से एक जो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी (FD)में निवेश करना चाहते है तो आप आसानी से इन बैंकों से 8.1 फीसदी तक का इंटरेस्ट कमा सकते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे ज़्यादा FD रेट के साथ सबसे आगे हैं, वहीं प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के लेंडर भी अलग-अलग समय में अच्छा रिटर्न दे रहे हैं।

FD इंटरेस्ट रेट में थोड़ा सा भी अंतर लंबे समय में रिटर्न को काफी बढ़ा सकता है, खासकर बड़ी रकम इन्वेस्ट करने वाले सीनियर सिटिजन के लिए। FD बुक करने से पहले अलग-अलग बैंकों के रेट की तुलना करने से बिना ज़्यादा रिस्क लिए इंटरेस्ट इनकम को ज़्यादा से ज़्यादा करने में मदद मिल सकती है। निवेश से पहले यहां देखें उन बैंकों के लिस्ट जो दे रहे है सबसे ज्यादा रिटर्न।

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  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • जन स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.80 प्रतिशत तक की फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरें दे रहा है।

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  • DCB बैंक 7.50 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • बंधन बैंक 7.45 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • CSB बैंक 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • IDFC FIRST बैंक 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • SBM बैंक इंडिया 7.35 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • सिटी यूनियन बैंक 7.25 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।

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  • बैंक ऑफ़ इंडिया 6.85 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • पंजाब एंड सिंध बैंक 6.85 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • इंडियन बैंक 6.80 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • बैक ऑफ़ बड़ौदा 6.75 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया 6.70 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र 6.65 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉज़िट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।Image
  • ड्यूश बैंक 7.00 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक 6.60 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।
  • HSBC बैंक 5.50 परसेंट तक के फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट दे रहा है।

एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि 5 लाख रुपये के इंश्योरेंस कवर में रहने के लिए कई बैंकों में डिपॉजिट बांट लें, ज़्यादा रिटर्न के लिए छोटे फाइनेंस बैंकों का चुनिंदा इस्तेमाल करें, और लिक्विडिटी की जरूरतों के हिसाब से डिपॉजिट की अवधि तय करें। डिपॉजिट इंश्योरेंस प्रोटेक्शन और स्थिर रिटर्न के साथ, FD रिटायर लोगों के लिए एक भरोसेमंद इन्वेस्टमेंट का तरीका बना हुआ है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: सोने की तेजी पर ब्रेक, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक लुढ़का; अब इतना रह गया भाव

देश में सोने की कीमत में लगातार आ रही तेजी शुक्रवार, 24 जुलाई को थम गई। आज सुबह ज्यादातर शहरों में कीमत गिरी है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 146320 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। मुंबई में भाव 146170 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये घटकर 1,49,200 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत कम होकर 4,042.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। अगस्त में डिलीवरी वाला यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 4,045.60 डॉलर प्रति औंस पर है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े तनाव ने ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दी है। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता फिर से बढ़ गई है। इसके चलते अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा बेंचमार्क ब्याज दरों में इजाफा किए जाने के अनुमानों को बल मिला है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक अन्य स्त्रोतों से बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। इसलिए ब्याज दरों का बढ़ना सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर होता है।

CME FedWatch टूल के अनुसार, ऐसी उम्मीद है कि U.S. फेडरल रिजर्व अगले हफ्ते यानि कि 28-29 जुलाई की मीटिंग में दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन ट्रेडर्स सितंबर की मीटिंग में दरों में बढ़ोतरी की लगभग 81% संभावना मानकर चल रहे हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 146320 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 133990 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 146170 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147290 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 146170 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 133990 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली134140146320
मुंबई133990146170
अहमदाबाद134040146220
चेन्नई135010147290
कोलकाता133990146170
हैदराबाद133990146170
जयपुर134140146320
भोपाल134040146220
लखनऊ134140146320
चंडीगढ़134140146320

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट है। 24 जुलाई की सुबह चांदी 239900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत घटकर 57.56 डॉलर प्रति औंस हो गई है। प्लेटिनम का भाव 1,592.97 डॉलर प्रति औंस पर है। ​

Realty Stocks : निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने लगाई जबरदस्त छलांग, एनालिस्ट्स को इन चुनिंदा शेयरों में अभी नजर आ रहा दम

Real Estate Stocks : पिछले महीने निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा है। इसमें 10.8% की बढ़त हुई और इसने बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। मजबूत बिक्री,नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी पाइपलाइन और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट साइकल के बने रहने की उम्मीदों के चलते इन्वेस्टर्स लिस्टेड डेवलपर्स में रुचि ले रहे हैं। इसके चलते इस सेक्टर में अच्छी तेजी आई है।

निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने इस अवधि में दूसरे सेक्टर इंडेक्सों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी दौरान,निफ्टी IT इंडेक्स में 3.6% की बढ़त हुई,जबकि बैंकिंग,फाइनेंशियल सर्विस और अधिकांश दूसरे सेक्टर में मामूली बढ़त हुई या फिर उनमें सुस्ती रही। निफ्टी रियल्टी की यह बढ़त व्यापक रही जिसमें लोढ़ा डेवलपर्स,गोदरेज प्रॉपर्टीज़,प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स,ब्रिगेड एंटरप्राइजेज,ओबेरॉय रियल्टी,फीनिक्स मिल्स और अनंत राज जैसे शेयरों की अहम भूमिका रही।

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अक्षय शेट्टी का कहना है कि यह तेजी किसी एक वजह से नहीं,बल्कि बेहतर मैक्रो स्थितियों और कंपनियों के मज़बूत होते फंडामेंटल्स के मिले-जुले असर से आ रही है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है। साथ ही,बड़े लिस्टेड डेवलपर्स लगातार अच्छी प्री-सेल्स,मजबूत बिज़नेस डेवलपमेंट और लॉन्च की मजबूत पाइपलाइन की जानकारी दे रहे हैं,जिससे यह भरोसा मजबूत होता है कि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट का साइकिल कायम है।

उन्होंने बताया कि 2026 की पहली छमाही में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों ने लगभग 4.3-4.4 अरब डॉलर निवेश किया जो सालाना आधार पर 23-25% की बढ़ोतरी दिखाता है। कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ लगभग 18% रही,जबकि हाउसिंग लोन में सालाना आधार पर लगभग 11% की बढ़ोतरी देखने को मिली जिससे मांग में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीद से भी लोगों का भरोसा बढ़ा है। RBI का रेपो रेट 5.25% है और होम लोन की दरें लगभग 7.1% से शुरू हो रही हैं, जिससे घर खरीदना आसान हो गया है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की AVP और रिसर्च एनालिस्ट स्नेहा पोद्दार ने कहा कि यह तेजी रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में आए स्ट्रक्चरल सुधारों को दिखाती है। हाउसिंग सेक्टर की स्थिति अच्छी बनी हुई है। डिमांड अपने पीक लेवल से थोड़ी कम हुई है,लेकिन सप्लाई पर कंट्रोल रहा है,जिससे इन्वेंट्री का बहुत ज्यादा स्टॉक जमा नहीं हुआ है। लिस्टेड डेवलपर्स ने पिछले चार-पांच सालों में अपना कर्ज काफी कम किया है,जिससे कैश जेनरेशन बेहतर हुआ है और उनकी बैलेंस शीट मज़बूत हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन की वजह से बड़े ब्रांडेड डेवलपर्स लगातार मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं। साथ ही,प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में मजबूत डिमांड और बेहतर बैलेंस शीट की वजह से डेवलपर्स जमीन के बड़े सौदे कर रहे हैं और नए इलाकों में अपना कारोबार फैला रहे हैं।

कहां करें निवेश?

पिछले महीने में हुई जबरदस्त बढ़त के बावजूद,एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशकों को इस सेक्टर में अच्छे रिटर्न के लिए अब चुनिंदा क्विलिटी शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। लिस्टेड कंपनियों में एनालिस्ट्स अब मजबूत बैलेंस शीट और समय पर काम पूरा करने की क्षमता वाले बड़े डेवलपर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अक्षय शेट्टी को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में काम करने के तरीके,अच्छे कलेक्शन,प्रीमियम लॉन्च और सोच-समझकर होने वाले कैपिटल एलोकेशन के कारण लोढ़ा डेवलपर्स सबसे ज्यादा पसंद है। इसके अलावी उनको गोदरेज प्रॉपर्टीज भी पसंद है। उनका मानना है कि कंपनी को मज़बूत बिज़नेस डेवलपमेंट पाइपलाइन और एसेट-लाइट विस्तार की रणनीति क फायदा मिलेगा। अनंत राज भी उनकी फेवरिट लिस्ट में शामिल है। उनका कहना है कि इस कंपनी को रियल एस्टेट बिजनेस के साथ-साथ बढ़ते डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म का भी फायदा मिलेगा।

स्नेहा पोद्दार ने कहा कि ने कहा कि मोतीलाल ओसवाल की पसंदीदा कंपनियों में लोढ़ा डेवलपर्स,DLF और गोदरेज प्रॉपर्टीज शामिल हैं,क्योंकि इनके पास अच्छा फ्री कैश फ्लो,प्रीमियम प्रोजेक्ट पाइपलाइन और काम करने की मजबूत क्षमता है।

 

 

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Gold Silver Price Today: एक ही दिन में चांदी ₹8500 महंगी हुई, सोना ₹1.49 लाख के पार

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार में बढ़ी खरीदारी की वजह से सोना ₹1,900 चढ़कर ₹1,49,600 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह करीब दो हफ्ते का सबसे ऊंचा स्तर है।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, मंगलवार को सोना ₹1,47,700 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इससे पहले 7 जुलाई को इसकी कीमत ₹1,49,250 प्रति 10 ग्राम थी।

चांदी ने भी लगाई लंबी छलांग

चांदी ने लगातार छह दिन की गिरावट पर ब्रेक लगा दिया। इसकी कीमत ₹8,500 बढ़कर ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई। एक दिन पहले यह ₹2,21,500 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

सोना-चांदी में तेजी क्यों आई?

बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में लगातार तीसरे दिन तेजी आई है। इसकी वजह सिर्फ एक नहीं है। विदेशी बाजार में मजबूती रही। घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ी। हाल की गिरावट के बाद निवेशकों ने भी खरीदारी का मौका देखा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेत और फिजिकल डिमांड बढ़ने से सोना दो हफ्ते के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि गोल्ड ETF में दोबारा निवेश बढ़ने से भी बाजार को सहारा मिला है।

ग्लोबल मार्केट में क्या हो रहा है?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.16% बढ़कर 4,125.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 1% चढ़कर 59.32 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला ने बताया कि कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 4,140 डॉलर प्रति औंस के दो हफ्ते के उच्च स्तर तक पहुंच गया। वहीं, चांदी भी 60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद दोनों कीमती धातुओं में मजबूती बनी हुई है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि बातचीत की गुंजाइश तो है, लेकिन फिलहाल ईरान गंभीर नहीं दिख रहा। इसलिए निवेशक इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं।

वहीं, Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि सोने को तीन चीजों से सहारा मिल रहा है। पहली, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद। दूसरी, ट्रंप प्रशासन की ओर से फिर टैरिफ लगाने की शुरुआत। तीसरी, सोने का 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहना।

अब बाजार की नजर अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी। ब्याज दरों को लेकर जो संकेत मिलेंगे, वही आगे सोना और चांदी की चाल तय करेंगे।

*एजेंसी इनपुट के साथ

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Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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Silver Gold Price Today : सोना दो हफ्तों के हाई के आसपास, चांदी 1.7% भागी, जानिए कमोडिटी में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : बुधवार,22 जुलाई को सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड लगभग दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुच गया है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा ब्याज दरों से जुड़े नए संकेतों के लिए अगले हफ्ते होने वाली US फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी मीटिंग पर भी बाजार की नजर है। ऐसे में सोने के सपोर्ट मिल रहा है।

COMEX पर गोल्ड फ़्यूचर्स 1.17% बढ़कर 4,124 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि, इंट्राडे में इसने $4,128.40 प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ था। चांदी का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा। COMEX सिल्वर 1.70% बढ़कर 60.115 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

घरेलू बाजार में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में तेजी आने के एक दिन बाद विदेशी बाजारो में भी इनमें तेजी आई है। दिल्ली में सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम हो गई है।

लोकल सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक मंगलवार, 21 जुलाई को ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और फिजिकल डिमांड के कारण चांदी की कीमत ₹2.21 लाख प्रति किलोग्राम पर सपाट रही।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें ?

इसकी सबसे बड़ी वजह’सेफ़-हेवन'(सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग है। पश्चिम एशिया को लेकर तब नई चिंताएं पैदा हो गईं, जब ऐसी खबरें आईं कि सऊदी अरब से एशिया जा रहे दो तेल टैंकरों को यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बाद लाल सागर में अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस घटना से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं और निवेशकों का रुझान सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की ओर बढ़ा।

हालांकि, इस तनाव को कम करने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी हैं और ईरान बातचीत को आसान बनाने के लिए पाकिस्तान से मदद मांग रहा है। फिर भी मार्केट आगे तनाव बढ़ने की संभावना को लेकर सतर्क हैं।

सोने को आमतौर पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के समय में फायदा होता है क्योंकि जब ग्लोबल ग्रोथ या फाइनेंशियल मार्केट के लिए रिस्क बढ़ता है तो इसमें इन्वेस्टर्स की रुचि बढ़ जाती है।

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फेड की पॉलिसी पर नजर

भू-राजनीतिक घटनाओं के अलावा,निवेशक अगले हफ्ते होने वाली US फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले भी अपनी पोजीशन बना रहे हैं। बाजार में आम धारणा है कि फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि,ट्रेडर मॉनेटरी पॉलिसी की भविष्य की दिशा के संकेत पाने के लिए सेंट्रल बैंक की टिप्पणी और आगे के आर्थिक अनुमानों पर बारीकी से नजर रखेंगे।

सोने की कीमतों पर असर डालने वाले सबसे बड़े फैक्टर्स में से एक ब्याज दरें भी हैं। चूंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती,इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर फिक्स्ड-इनकम एसेट्स (जैसे बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट) से मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है,जिससे सोने का आकर्षण आम तौर पर कम हो जाता है। इसके उलट,ब्याज दरें घटने की उम्मीद या नरम नीतिगत रुख से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

फिजिकल डिमांड बढ़ने से भी मिल रहा सपोर्ट

जानकारों का कहना है कि ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों के अलावा फिजिकल गोल्ड की खरीदारी में हुई बढ़त से भी सोने की कीमतों में इजाफा हुआ है।

सोने की कीमतों में बढ़त के बावजूद इसके बड़े कंज्यूमर देशों, खासकर चीन से मज़बूत मांग बनी हुई है। साथ ही,पिछले कुछ महीनों में सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने बुलियन की कीमतों एडिशनल सपोर्ट दिया है।

इसके अलावा चांदी को भी इंडस्ट्रियल मेटल्स के लिए बेहतर होते सेंटीमेंट का फायदा मिला है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स,सोलर पैनल और क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी में बड़े पैमाने पर होता है।

जानकारों की राय

LKP सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) और वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट से बिकवाली का दबाव कम हुआ,जिससे कीमतें तेजी से वापस ऊपर आईं। अमेरिका-ईरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर सोने की नई खरीदारी से कीमतों में यह उछाल आया।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख की उम्मीदों के बावजूद,जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने निवेशकों की सोने में दिलचस्पी फिर से बढ़ा दी है। टेक्निकल नज़रिए से,उन्हें उम्मीद है कि MCX गोल्ड अगले कुछ सेशन में ₹1.41 प्रति 10 ग्राम से ₹1.45 प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा।

वहीं,HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि हालिया बढ़त को मजबूत फिजिकल डिमांड और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी का भी सपोर्ट मिला है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं केडिया एडवाइजरी (Kedia Advisory) के अजय केडिया। इनकी आज एमसीएक्स गोल्ड में 142500 रुपए के आसपास, 141500 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 144000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर में इनकी 223000 रुपए के आसपास, 221000 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ,228000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

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Silver Rate Today: आज का चांदी का भाव! लगातार छठे दिन गिरावट, जानिए आज 1 किलो सिल्वर का ताजा भाव

Silver Price Today: अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमत में 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर 2,21,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गया है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र है, जब चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

बाजार के जानकारों के अनुसार, 10 जुलाई से अब तक चांदी की कीमत में कुल 15,500 रुपये प्रति किलोग्राम यानी करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निवेशक वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में हल्की तेजी दर्ज की गई। वायदा कारोबार में चांदी 1,618 रुपये (0.75%) बढ़कर 2,18,021 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

दिल्ली में 1 किलो सिल्वर ₹2,35,100

अगर आप आज चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जान लेना आपके लिए जरूरी है। आज दिल्ली में चांदी की कीमत ₹235.10 प्रति ग्राम और ₹2,35,100 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। दिल्ली देश के सबसे बड़े सर्राफा बाजारों में से एक है। यहां चांदी की मांग हमेशा ऊंची रहती है। निवेश के साथ-साथ लोग चांदी का इस्तेमाल आभूषण, बर्तन, सजावटी सामान, सिक्के और उपहार के रूप में भी बड़े पैमाने पर करते हैं। इसी वजह से दिल्ली में चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की लगातार नजर रहती है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर समय-समय पर बदलते रहते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले अपने शहर का ताज़ा रेट जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आप निवेश या व्यक्तिगत उपयोग के लिए चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अधिकृत ज्वेलर्स या सर्राफा बाजार से मौजूदा कीमत की पुष्टि करने के बाद ही खरीदारी करें।

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