Gold Silver Price Today: एक ही दिन में ₹8900 सस्ती हुई चांदी, सोने का भी गिरा भाव

Gold Silver Price Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹700 सस्ता होकर ₹1,46,300 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोमवार को इसका भाव ₹1,47,000 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका भाव ₹8,900 टूटकर ₹2,26,100 प्रति किलोग्राम रह गया। एक दिन पहले चांदी ₹2,35,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोना-चांदी के दाम?

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, ज्वैलर्स और औद्योगिक खरीदारों की मांग कमजोर रहने से घरेलू बाजार में सोना और चांदी दबाव में रहे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का क्या हाल?

वैश्विक बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। स्पॉट गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,020.13 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 1% चढ़कर 58.06 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

आगे क्या रहेगा असर?

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद सोने में रिकवरी की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन तेजी ज्यादा नहीं टिक सकी।

उन्होंने कहा कि इसकी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई बढ़ने की चिंता है। यह भी माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से सोने में बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिख रही है। अब बाजार की नजर अमेरिका के CPI और Core CPI महंगाई के आंकड़ों पर है।

उन्होंने कहा कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे डॉलर और मजबूत होगा और सोने पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम आते हैं, तो सोने को सहारा मिल सकता है। उनके मुताबिक, इन आंकड़ों से पहले सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

SIP vs SSY: सुकन्या समृद्धि और SIP में हर महीने ₹2000 निवेश करें तो किसमें ज्यादा पैसा बनेगा?

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold silver price: चढ़ रहा सोना, ₹1,303 और महंगा हुआ भाव, चांदी भी हो गई महंगी, जल्दी करें कहीं चूक ना जाएं मौका

Gold silver price: व्यापारियों की ताजा खरीदारी और मजबूत वैश्विक संकेतों के समर्थन से मंगलवार (14 जुलाई) को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। हालांकि बाद के सत्र में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के प्रमुख स्तर से नीचे फिसल गई।

एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी के लिए सोना वायदा ₹1,303 या 0.93% बढ़कर ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। इस बीच, जुलाई डिलीवरी के लिए चांदी वायदा ₹2,946 या 1.35% चढ़कर ₹2.20 लाख प्रति किलोग्राम हो गई।

बाजार सहभागियों ने इस बढ़त का श्रेय स्थिर हाजिर मांग और घरेलू सर्राफा बाजारों में मजबूती के बीच व्यापारियों द्वारा की गई ताजा पोजीशन को दिया।

भारत में क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?

घरेलू सर्राफा कीमतों को स्थानीय खरीदारी और बढ़ी हुई वैश्विक अनिश्चितता के संयोजन से समर्थन मिल रहा है।इससे पहले वैश्विक सत्र में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी जहाजों पर नाकाबंदी बहाल करने के बाद जियोपॉलिटिकल तनाव फिर से उभरने के कारण सुरक्षित-हेवन मांग के कारण सोने के वायदा भाव में तेजी आई थी, जिससे तेल आपूर्ति और मुद्रास्फीति पर चिंता बढ़ गई थी।

हालांकि, बाद में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने सख्त लहजे में कहा कि अगर मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी और कटौती की भी संभावना है, जिसके बाद सर्राफा ने बढ़त छोड़ दी।

उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों की अपील को कम कर देती हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी पैदावार भी कीमती धातु की कीमतों पर असर डालती है।

इस बीच, सुरक्षित मांग और इसके औद्योगिक उपयोग दोनों के समर्थन से चांदी ने घरेलू व्यापार में सोने से बेहतर प्रदर्शन जारी रखा।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

रिद्धिसिद्धि बुलियंस के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि शॉर्ट टर्म में सोने की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर रह सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि लगातार मुद्रास्फीति, जियोपॉलिटिकल रिस्क और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति पथ पर अनिश्चितता सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे लगातार टूटने से सोना 3,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जबकि चांदी के 58-63 डॉलर प्रति औंस के व्यापक दायरे में रहने की उम्मीद है।

निवेशक अब आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति डेटा और पश्चिम एशिया में आगे के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखेंगे। क्योंकि दोनों शॉर्ट टर्म में सोने और चांदी की कीमतों को दिशा देते दिखाई देगें।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 15 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 14 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,100 के नीचे रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर और निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ। लगभग 1422 शेयरों में बढ़त हुई,2632 शेयरों में गिरावट आई और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में शामिल शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,श्रीराम फाइनेंस,HDFC लाइफ,टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे। जबकि, भारती एयरटेल,अपोलो हॉस्पिटल्स,सन फार्मा,TCS और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा गिरा (2%),इसके बाद निफ्टी PSU बैंक (-1.8%),निफ्टी ऑटो (-1.6%),निफ्टी बैंक (-1.1%) और निफ्टी IT (-1%) रहे। अन्य सेक्टरों में,निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.8%,निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.6%,निफ्टी FMCG 0.6%,निफ्टी मीडिया 0.3% और निफ्टी इंफ्रा 0.3% गिरे।

वहीं, दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा ने 1% की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया,इसके बाद निफ्टी मेटल रहा,जिसमें 0.60% की बढ़त हुई। छोटे-मझोले शेयर भी दबाव में रहे। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.4% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1% गिरे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं हैं,जिससे घरेलू इक्विटी पर फिर से दबाव आ गया। इससे यह डर भी पैदा हो गया कि क्या ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट भारत की कॉर्पोरेट कमाई में सुधार को और धीमा कर देगी। रुपये के डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार करने से मुश्किलें और बढ़ गईं। इससे इंपोर्टेड महंगाई की चिंता बढ़ी और अलग-अलग इंडस्ट्रीज में इनपुट कॉस्ट बढ़ने का डर पैदा हो गया।

इसका सबसे ज्यादा असर महंगाई और कॉस्ट-सेंसिटिव सेक्टर पर दिखा। ऑटो,फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर में गिरावट के कारण बाजार नीचे आया। जबकि फार्मा सेक्टर ने इस ट्रेंड के विपरीत प्रदर्शन किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने’डिफेंसिव’शेयरों का सहारा लिया। इससे फार्मा सेक्टर को फायदा हुआ। विदेशी फंड की लगातार निकासी ने भी बाजार में सावधानी का माहौल बनाए रखा और सेंटीमेंट को कमजोर किया। अब सबकी नजरें US फेड चेयर पर हैं,जिनके आने वाले बयान ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं। इस बीच,Q1 अर्निंग्स सीजन तो अच्छा चल रहा है,लेकिन जियोपॉलिटिकल रिस्क में तेजी से हुई बढ़ोतरी ने सेंटीमेंट को कुछ हद तक कमजोर कर दिया है।

इक्विरस वेल्थ में MD और बिज़नेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों,कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू करेंसी में भारी गिरावट के कारण बैंकिंग,IT,ऑटोमोबाइल और रियल्टी शेयरों में भारी बिकवाली हुई,जिससे बेंचमार्क इंडेक्स गिर गए।

US-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। FIIs की ओर से घरेलू इक्विटी में नई बिकवाली के चलते निवेशक इक्विटी में निवेश करते समय सावधानी बरतेंगे और चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाएंगे।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि NSE के वीकली ऑप्शन की एक्सपायरी के कारण गैप-डाउन के साथ खुलने के बाद इंडेक्स एक दायरे में ही बना रहा। इसने पिछले दिन के निचले स्तर के आसपास सपोर्ट लिया और गिरती हुई ट्रेंडलाइन के ऊपर बना रहा। इंडेक्स 50 EMA के ऊपर भी बना रहा, जो इसकी अंदरूनी मजबूती को दिखाता है।

शॉर्ट टर्म में,जब तक इंडेक्स 23,950 के ऊपर रहता है,तब तक आउटलुक पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। ऊपर की तरफ यह 24,250–24,300 के जोन की ओर बढ़ सकता है। हालांकि,23,950 के नीचे बड़ी गिरावट मौजूदा तेजी वाले सेटअप को कमजोर कर सकती है और कंसोलिडेशन का दौर शुरू कर सकती है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में US-ईरान युद्धे से जुड़ी घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और Q1FY27 के अर्निंग्स सीजन की अहम भूमिका होगी। कंपनियों के मज़बूत नतीजों से बाजार को सहारा मिल सकता है,लेकिन जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतें निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती हैं।

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बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट,वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडलस्टिक पैटर्न’बनाया है,जो ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव दिखाता है। इंडेक्स अपने 200 डे के मूविंग एवरेज के पास भी बंद हुआ है,इसलिए इस सपोर्ट जोन पर नजर रखना ज़रूरी है। इसके अलावा,RSI ने’लोअर टॉप’बनाया है जो ऊपर की ओर बढ़ने की रफ्तार (मोमेंटम) में कमी का संकेत है।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी बैंक के लिए सपोर्ट 56,800–56,900 के जोनन में है। जबकि, तत्काल रेजिस्टेंस 58,200 के आसपास दिख रहा है। मोमेंटम कमजोर होने को देखते हुए,ट्रेडर्स को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए और नई पोजीशन लेने से पहले किसी साफ चाल(डिसाइसिव मूव)का इंतजार करना चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SIP vs SSY: सुकन्या समृद्धि और SIP में हर महीने ₹2000 निवेश करें तो किसमें ज्यादा पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs SSY: अगर आपके घर में छोटी बेटी है और आप उसके भविष्य के लिए हर महीने ₹2,000 बचाना चाहते हैं, तो आपके सामने दो लोकप्रिय विकल्प होते हैं। पहला सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और दूसरा म्यूचुअल फंड SIP।

दोनों का मकसद लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है। लेकिन दोनों का तरीका अलग है। एक में सरकार तय ब्याज देती है, जबकि दूसरे में रिटर्न बाजार पर निर्भर करता है।

तो अगर हर महीने सिर्फ ₹2,000 निवेश किए जाएं, तो आखिर किसमें ज्यादा पैसा बन सकता है? आइए इसे समझते हैं।

₹2,000 की SIP से कितना फंड बन सकता है?

मान लीजिए कि आपकी बेटी अभी 2 साल की है। आप उसके 23 साल की होने तक एक अच्छा फंड तैयार करना चाहते हैं। आप 21 साल तक हर महीने ₹2,000 की SIP करते हैं। अगर निवेश पर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो तस्वीर कुछ ऐसी बन सकती है।

डिटेलSIP
मासिक निवेश₹2,000
निवेश अवधि21 साल
कुल निवेश₹5.04 लाख
अनुमानित रिटर्न12% सालाना
अनुमानित मैच्योरिटी राशिकरीब ₹22-24 लाख

यानी आपने अपनी जेब से सिर्फ ₹5.04 लाख लगाए, लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से फंड ₹22 लाख से ज्यादा हो सकता है।

सुकन्या समृद्धि योजना में कितना पैसा मिलेगा?

अब सुकन्या समृद्धि योजना का हिसाब भी समझ लेते हैं। इसमें आप हर महीने ₹2,000 जमा करते हैं। फिलहाल इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। इस स्थिति में अनुमानित तस्वीर कुछ ऐसी होगी।

डिटेल
Sukanya Samriddhi Yojana

मासिक निवेश₹2,000
जमा करने की अवधि15 साल
योजना की मैच्योरिटी21 साल
कुल निवेश₹3.60 लाख
मौजूदा ब्याज दर8.2% सालाना
अनुमानित मैच्योरिटी राशिकरीब ₹9.5-10 लाख*

*यह अनुमान मौजूदा 8.2% ब्याज दर के आधार पर है। भविष्य में ब्याज दर बदल सकती है।

दोनों में इतना बड़ा अंतर क्यों?

पहली नजर में आपको लगेगा कि SIP में पैसा बहुत ज्यादा बन रहा है। लेकिन इसकी वजह समझना भी जरूरी है। SIP वाले उदाहरण में 21 साल तक लगातार निवेश किया गया है। वहीं सुकन्या समृद्धि योजना में सिर्फ 15 साल तक पैसा जमा करना होता है, लेकिन खाता 21 साल में मैच्योर होता है। यानी आखिरी 6 साल तक बिना नया पैसा जमा किए भी ब्याज मिलता रहता है।

दूसरी बात यह है कि SIP में 12% रिटर्न माना गया है, जबकि सुकन्या योजना में 8.2% ब्याज लिया गया है। यही दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है।

कौन-सा विकल्प चुनें?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता पूरी सुरक्षा है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं, तो सुकन्या समृद्धि योजना बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें सरकार की गारंटी होती है और ब्याज भी टैक्स छूट के साथ मिलता है।

लेकिन अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार का थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखती है। हालांकि, इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

क्या एक ही विकल्प चुनना चाहिए?

जरूरी नहीं कि आप सिर्फ एक ही विकल्प चुनें। कई फाइनेंशियल प्लानर सलाह देते हैं कि बेटी के भविष्य के लिए दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, आप हर महीने ₹1,000 सुकन्या समृद्धि योजना में और ₹1,000 SIP में निवेश कर सकते हैं। इससे एक तरफ सुरक्षित फंड बनेगा, वहीं दूसरी तरफ बाजार से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बनी रहेगी। आपकी कमाई जैसे बढ़े, उसी हिसाब से आप निवेश की रकम भी बढ़ा सकते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver Price Today: सोना ₹1500 सस्ता हुआ, ₹2000 गिरा चांदी का भाव; जानिए लेटेस्ट रेट

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को दिल्ली में बड़ी गिरावट देखने को मिली। 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹1,500 टूटकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी ₹2,000 गिरकर ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2.37 लाख प्रति किलो था।

सोना-चांदी क्यों हुए सस्ते?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता फिर गहरा गई है। साथ ही अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है। इन दोनों वजहों का दबाव सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं, जिसका असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी रही। स्पॉट गोल्ड 1.3% गिरकर 4,067.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 2.32% टूटकर 58.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह का कहना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि सोने पर दबाव बना हुआ है।

अब किस पर रहेगी बाजार की नजर?

अब निवेशकों की नजर मंगलवार को आने वाले अमेरिका के CPI (Consumer Price Index) आंकड़ों पर रहेगी। इससे यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठा सकता है।

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर अमेरिका में महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है। इससे सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर महंगाई के आंकड़े नरम आते हैं, तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

HCLTech Q1 Results: आईटी कंपनी का मुनाफा 20% बढ़ा, गाइडेंस बरकरार; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

ITR Refund: ई-वेरिफिकेशन में देरी होने पर भी मिलेगा रिफंड, ITAT के फैसले से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

48 घंटे से भी कम समय में क्रेडिट होने वाला है आपके PF खाते में इंट्रेस्ट! जानिए कैसे कैलकुलेट होता है ब्याज, 5 लाख पीएफ पर कितनी होगी कमाई?

EPF Interest 2026: अगर आप भी बार-बार अपनी ईपीएफ (EPF) पासबुक रिफ्रेश कर रहे हैं तो आपका इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 34 करोड़ खातों में 15 जुलाई तक ब्याज की रकम क्रेडिट करने जा रहा है। पिछले वर्षों में जहां ब्याज अक्टूबर-नवंबर के समय क्रेडिट होता था। वहीं इस साल यह काफी पहले किया जा रहा है।

इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इंट्रेस्ट के मद में क्रेडिट होने वाली है। EPFO के नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम (CITES) के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाने वाला पहला ब्याज भुगतान है।

पिछले महीने वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूर की गई ब्याज दर लगातार तीसरे साल भी 8.25 प्रतिशत पर बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से इस 8.25% ब्याज का रुपयों में क्या गणित बैठता है और इसका कैलकुलेशन कैसे किया जाता है।

₹5 लाख से ₹1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इंट्रेस्ट का कैलकुलेशन 31 मार्च 2026 तक के कुल फंड के आधार पर की जाती है। ये इंट्रेस्ट 15 जुलाई तक आपके पासबुक में दिखने लगेगी। साधारण गणित के हिसाब से आपके पीएफ बैलेंस पर मिलने वाला इंट्रेस्ट कुछ ऐसा बनता है:-

₹5 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹41250 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹541250 हो जाएगा।

₹10 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹82500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹1082500 हो जाएगा।

₹50 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹412500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹5412500 हो जाएगा।

₹1 करोड़ के पीएफ बैलेंस पर: ₹825000 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹10825000 हो जाएगा।

इंट्रेस्ट क्रेडिट होने से पहले अपने ईपीएफओ मेंबर पोर्टल या उमंग (UMANG) ऐप पर जाकर तुरंत चेक कर लें कि आपकी केवाईसी डिटेल्स अपडेटेड हैं या नहीं। केवाईसी डिटेल्स का पुराना या आउटडेटेड होना ही सबसे आम कारण है जिसकी वजह से ब्याज क्रेडिट और क्लेम अटक जाते हैं।

कैसे होता है EPF ब्याज का कैलकुलेशन? जानिए नियम

ईपीएफ (EPF) में ब्याज की गणना मंथली आधार पर की जाती है। लेकिन यह रकम वित्तीय वर्ष के अंत में साल में एक बार आपके खाते में जमा होती है। इसका कैलकुलेशन कुछ इस तरह से किया जाता है-

मंथली क्लोजिंग बैलेंस: ईपीएफओ हर महीने के अंत में आपके खाते के बैलेंस को आधार बनाता है। पिछले वित्त वर्ष के क्लोजिंग बैलेंस पर पूरे साल का ब्याज मिलता है।

मासिक दर: वार्षिक ब्याज दर को 12 से भाग दिया जाता है, जैसे- 8.25% ÷ 12 = 0.6875% प्रति माह

नया योगदान: महीने के दौरान जमा हुई नई राशि को उस महीने के ब्याज में नहीं गिना जाता बल्कि उसे अगले महीने के ओपनिंग बैलेंस में शामिल किया जाता है। साल के दौरान जमा होने वाले नए पीएफ योगदान पर ब्याज, जमा होने के अगले महीने की पहली तारीख से 31 मार्च तक मिलता है।

पैसा निकालने पर नियम: अगर आपने साल के बीच में पीएफ का पैसा निकाला है तो निकाली गई रकम पर ब्याज केवल निकासी वाले महीने से ठीक पहले तक ही मिलता है। उसके बाद उस हिस्से पर ब्याज नहीं मिलता।

राउंड ऑफ और टोटल: सभी 12 महीनों के ब्याज को जोड़कर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में क्रेडिट किया जाता है। आखिरी में EPFO कुल ब्याज की रकम को नजदीकी पूरे रुपये में राउंड ऑफ कर देता है।

इस बार नए CITES सिस्टम की वजह से न सिर्फ ब्याज काफी जल्दी मिल रहा है। बल्कि आगे चलकर क्लेम, अकाउंट ट्रांसफर और दूसरी EPFO सेवाएं भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगी।

मेंबर पासबुक पोर्टल पर कैसे चेक करें अपना बैलेंस? स्टेप बाई स्टेप तरीका

अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज आपके खाते में क्रेडिट हुआ है या नहीं तो सुनिश्चित करें कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट हो। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:-

स्टेप 1: सबसे पहले EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपने UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी (OTP) को दर्ज करके अपनी पहचान सत्यापित करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आप अपना लेटेस्ट ईपीएफ बैलेंस देख सकते हैं और यह भी चेक कर सकते हैं कि FY26 का ब्याज क्रेडिट हुआ है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत खराब रहने की संभावना है। शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 0.79 फीसदी कमजोरी के साथ 24,045 के आसपास ट्रेड कर रह है। यह एक निगेटिव संकेत है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

10 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन भी रिकवरी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में हुई जबरदस्त खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी,दोनों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के बीच बाजार मजबूती के साथ खुला और पूरे सेशन के दौरान बढ़त बनाए रखी। निफ्टी 50 ने इंट्राडे में 24,228.45 का हाई लेवल छुआ। इस तेज़ी में IT शेयरों का अहम योगदान रहा। वहीं,रियल्टी,मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने सेंटीमेंट को और मजबूत किया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 827.57 अंक या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.39 पर और निफ्टी 244.10 अंक या 1.02 प्रतिशत बढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ।

ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट में टेंशन से ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार चला गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर है। इधर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोना $4,100 के नीचे फिसल गया है।

LTM के उम्मीद से बेहतर नतीजे, L&T फाइनेंस का मुनाफा 28% बढ़ा

LTM ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की constant currency यानी CC रेवेन्यू ग्रोथ 0.3% रही है। कंपनी के मुनाफे में 9% से ज्यादा की बढ़त रही है। वहीं मार्जिन में भी सुधार दिखा है। ऑर्डर बुक भी मजबूत रही है। दूसरी ओर L&T Finance की प्रॉफिट और ब्याज से होने वाली कमाई यानी NII 28% से ज्यादा बढ़ी है। रिटेल लोन बुक गाइडेंस से कहीं बेहतर रही है।

डीमार्ट: Q1 मुनाफे में 11.3% का उछाल

पहली तिमाही में एवेन्यू सुपरमाट्स के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में 11 परसेंट और रेवेन्यू में 15 परसेंट की ग्रोथ रही है। हालांकि मार्जिन बिल्कुल फ्लैट रहे हैं। मेट्रो शहरों के स्टोर्स की ग्रोथ में दबाव दिखा है।

आज आएंगे HCL TECH के नतीजे

निफ्टी में आज HCL TECH के नतीजे आएंगे। इसकी कॉन्सटेंट करेंसी में 1.1 परसेंट और डॉलर आय में 1.3% गिरावट का अनुमान है। हालांकि मार्जिन 30 Bps बढ़ने की उम्मीद है।

SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO का साइज घटा

SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO का साइज घटा है। इश्यू का साइज 11700 करोड़ रुपए से घटकर 9813 करोड़ रुपए हुआ है। इधर दिग्गजों को प्री-IPO स्टेक बेचकर SBI ने 1655 करोड़ रुपए जुटाए हैं। SBI के OFS का हिस्सा घटकर 6.30% से 4.89% पर आ गया है।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:50 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 195 अंक यानी 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 24,040.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए निगेटिव संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 1.20 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.20 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.85 फीसदी की तेजी दिख रही है। ताइवान के बाजार में भी 0.82 फीसदी की बढ़त नजर आ रही है। वहीं, कोस्पी करीब 4.75 फीसदी नीचे है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.71 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

शुक्रवार को S&P 500 में 0.42% की बढ़त हुई और यह 7,575.39 के लेवल पर बंद हुआ। यह 2 जून को बने रिकॉर्ड हाई क्लोज़ से अभी भी 0.45% नीचे है। Nasdaq भी 0.29% की बढ़त के साथ यह 26,281.61 के लेवल पर पहुंच गया। जबकि डाओ जोन्स में 0.29% की बढ़त हुई और यह 52,637.01 के स्तर पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुए टकराव से महंगाई का डर बढ़ गया और सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बढ़ गई है। जिसके चलते डॉलर अपनी ज़्यादातर प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 101.17 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में 2 बेसिस पॉइंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ये क्रमशः 4.58% और 4.23% पर पहुंच गए हैं।

एशियन करेंसी

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला कारोबार हुआ,रीजनल बाजारों में सतर्कता का माहौल दिखा। इंडोनेशियाई रुपया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है। जिसमें 0.35% की बढ़त हुई। इसके बाद चीनी रेनमिनबी (+0.22%) और ताइवान डॉलर (+0.19%) का स्थान रहा। दूसरी तरफ,साउथ कोरियन वॉन इस इलाके की सबसे कमजोर करेंसी है,जिसमें 0.34% की गिरावट आई,जबकि जापानी येन 0.25% फिसला है जिससे पता चलता है कि नॉर्थ एशिया की मुख्य करेंसी के मुकाबले डॉलर में हल्की मज़बूती आई है। थाई बात(-0.21%),सिंगापुर डॉलर (-0.17%),मलेशियन रिंगिट (-0.17%) और फिलीपीन पेसो (-0.16%) भी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

10 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)ने बिकवाली के एक दिन बाद ₹2,603 ​​करोड़ के शेयर खरीदे और वे नेट खरीदार बन गए। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार तीसरे सेशन में खरीदारी जारी रखी और ₹2,019 करोड़ का निवेश किया।

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।