Jio Platforms IPO: सेबी ने जियो के आईपीओ को मंजूरी दी, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे

Jio Platforms IPO: रिलायंस ग्रुप की टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms की शेयर बाजार में एंट्री अब और करीब आ गई है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंपनी के IPO प्लान को मंजूरी दे दी है। Jio Platforms ने 19 जून को DRHP दाखिल किया था। अब IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

यह IPO भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। कंपनी इस इश्यू में 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। इससे करीब 2.93% हिस्सेदारी कम होगी। IPO से मिलने वाली रकम में से करीब ₹27,500 करोड़ लोन चुकाने में लगाए जाएंगे।

Jio Platforms में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

Jio Platforms में Reliance Industries यानी RIL सबसे बड़ी शेयरधारक है। उसके पास 66.43% हिस्सेदारी है। Meta Platforms के पास 9.98% और Google के पास 7.73% हिस्सेदारी है।

सऊदी अरब के पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड के पास 2.31% हिस्सेदारी है। KKR के पास भी 2.31% और Vista Equity Partners के पास 2.31% हिस्सेदारी है। Silver Lake के पास 1.88% हिस्सेदारी है।

इसके अलावा Mubadala के पास 1.85%, General Atlantic Singapore के पास 1.34%, Abu Dhabi Investment Authority के पास 1.16% और TPG Capital के पास 0.93% हिस्सेदारी है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 12% बढ़ा

Jio Platforms का कारोबार भी अच्छी रफ्तार से बढ़ रहा है। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹45,961 करोड़ रहा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹39,173 करोड़ रहा। EBITDA 15% बढ़कर ₹20,865 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 52% से बढ़कर 53% हो गया। कंपनी का मुनाफा 9.2% बढ़कर ₹7,764 करोड़ रहा।

53.33 करोड़ पहुंचा सब्सक्राइबर बेस

जून तिमाही के अंत में Jio Platforms का सब्सक्राइबर बेस 53.33 करोड़ हो गया। पिछली तिमाही में यह 52.44 करोड़ था। एक साल पहले यह 49.81 करोड़ था।

कंपनी के 5G सब्सक्राइबर की संख्या 28.5 करोड़ पहुंच गई। डेटा इस्तेमाल भी बढ़ा है। जून तिमाही में कुल डेटा ट्रैफिक सालाना आधार पर 26.9% बढ़कर 69.4 अरब GB रहा। प्रति व्यक्ति औसत मासिक डेटा इस्तेमाल 43.7 GB रहा।

इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

SEBI ने Bharat PET, Sadbhav Futuretech, MK Sons Fine Jewels, Pushp Brand India और Paras Healthcare के IPO को भी मंजूरी दी है।

इसके अलावा Paramotor Digital Technology के प्री फाइलिंग प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Elon Musk Starlink Update: क्या भारत के गांवों में पहुंचेगा एलन मस्क का सुपरफास्ट इंटरनेट? अरबपति कारोबारी ने नए लाइसेंस आवेदन के साथ किया बड़ा ऐलान

Elon Musk Starlink Update: स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी क्षेत्र की ग्लोबल कंपनी स्पेसएक्स के संस्थापक अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। एलन मस्क ने कहा है कि स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत के उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बूस्ट कर सकती है जहां इंटरनेट की पहुंच लिमिटेड है। मस्क यहां पर खासकर भारत के गांवों तक सुपरफास्ट इंटरनेट पहुंचाने की बात करते नजर आ रहे हैं।

मस्क का ये कमेंट ऐसे समय में आया है जब तमाम रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सर्विस देने के लिए एक रीअप्लाई किया है।

एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि स्टारलिंक भारत में सबसे कम सेवा पाने वाले लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मदद करेगा। असल में मस्क एक्स हैंडल DogeDesigner की एक पोस्ट पर अपना रिएक्शन दे रहे थे। इस पोस्ट में भारत के दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए स्टारलिंक की सर्विस की मदद लेने की वकालत की गई थी।

इस सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर भारत के टेलीकॉम और इंटरनेट कनेक्टिविटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच भारी अंतर को दिखाया गया है। पोस्ट के आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 तक भारत के 11256 गांवों में अब भी 4G नेटवर्क की कवरेज नहीं थी। इसी तरह मार्च 2026 तक भारत में कुल 1.093 अरब इंटरनेट सब्सक्रिप्शन थे लेकिन इनमें से सिर्फ 44.087 करोड़ सब्सक्रिप्शन ही ग्रामीण इलाकों के थे। ग्रामीण भारत में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन डेंसिटी प्रति 100 लोगों पर सिर्फ 48.31 थी, जबकि शहरी भारत में यह आंकड़ा प्रति 100 लोगों पर 126.80 था।

नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन

मस्क का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब रिपोर्टों के अनुसार स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सेवाएं प्रदान करने के लिए एक नया आवेदन जमा किया है। इससे पहले कंपनी को इस मामले में झटका भी लग चुका है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र ने इससे पहले स्टारलिंक के जेन 2 सैटेलाइट नेटवर्क के आवेदन को खारिज कर दिया था। रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने पाया था कि इसके कुछ फीचर्स और जिन रेडियो फ्रीक्वेंसी का यह इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे भारत की जरूरतों के हिसाब से नहीं हैं। आपको बता दें कि स्टारलिंक के इस जेन 2 सिस्टम में डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी की क्षमता भी होती है।

भारत में मंजूरी की कोशिशें जारी

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के ग्रुप्स की मदद से इंटरनेट सर्विस देती है। कंपनी भारत में अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लिए लंबे समय से जरूरी रेग्युलेटरी क्लियरेंस लेने के लिए कोशिश कर रही है।

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SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

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भारत में मोबाइल SIM कार्ड को लेकर नियम और सख्त होने जा रहे हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) अब ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल करेगा, जो अपने नाम पर निर्धारित अधिकतम संख्या में SIM कार्ड पहले ही ले चुके हैं। ऐसे यूजर्स को अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन लेने से रोका जाएगा।

 

देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 SIM कार्ड की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य SIM कार्ड के जरिए होने वाले धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध पर लगाम लगाना है।

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10वां SIM लेने की कोशिश की तो क्या होगा?

 

एक बार निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां उसी व्यक्ति के नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेंगी। नए सिस्टम के तहत यदि किसी व्यक्ति के नाम पर 9 SIM कार्ड हैं, तो उसकी जानकारी और उपलब्ध होने पर फोटो भी Digital Intelligence Platform (DIP) पर दिखाई देगी। टेलीकॉम कंपनियां नया कनेक्शन देने से पहले यह जांच सकेंगी कि ग्राहक पहले ही तय सीमा तक SIM ले चुका है या नहीं।

 

यह व्यवस्था 23 अगस्त 2026 से लागू होने की योजना है। शुरुआत में टेलीकॉम कंपनियां नए कनेक्शन जारी करने से पहले DIP में उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्रॉस-चेक करेंगी। इसके बाद सिस्टम को धीरे-धीरे अधिक ऑटोमेटेड बनाया जाएगा।

 

पहले से लिमिट से ज्यादा SIM हैं तो क्या होगा?

 

नए नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे, जिनके नाम पर पहले से तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे अतिरिक्त SIM कार्ड की पहचान कर उन्हें डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। DoT की तकनीक पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किए गए SIM कार्ड या निर्धारित सीमा से ज्यादा कनेक्शन की पहचान करने में सक्षम है।

 

SIM कार्ड के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड पर लगाम

 

सरकार के इस कदम का बड़ा मकसद उन SIM कार्ड के इस्तेमाल को रोकना है, जिनका इस्तेमाल अपराधी दूसरे लोगों की पहचान बनाकर, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध करने के लिए करते हैं। DIP के जरिए DoT पहले से ही टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों, पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ SIM और टेलीकॉम दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करता है।

 

नवंबर 2026 तक टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा सिस्टम तैयार

 

DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक रियल-टाइम SIM जांच व्यवस्था लागू करने और अपने सिस्टम को Digital Intelligence Platform के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट करने की समयसीमा दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा से ज्यादा SIM रखने वाले ग्राहकों की पहचान जल्द हो सके और अतिरिक्त कनेक्शन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

 

ASTR भी करेगा फर्जी SIM की पहचान

 

सरकार ने फर्जी दस्तावेजों या निर्धारित सीमा से अधिक संख्या में जारी किए गए SIM कार्ड की पहचान के लिए ASTR नाम का AI आधारित सिस्टम भी तैयार किया है। यह तकनीक संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने में मदद करती है।

 

CNAP से कॉल आने पर दिखेगा नाम

 

SIM कार्ड की संख्या सीमित करने के साथ टेलीकॉम सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव Calling Name Presentation (CNAP) के रूप में हो रहा है। CNAP के जरिए जब किसी व्यक्ति के पास कॉल आएगी तो मोबाइल स्क्रीन पर उस नंबर से जुड़ा नाम दिखाई देगा, भले ही वह नंबर कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न हो। CNAP में टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद KYC जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा, न कि किसी क्राउडसोर्स्ड डेटाबेस का।

 

कुल मिलाकर, SIM की सीमा सख्त करना, DIP के जरिए जानकारी साझा करना और CNAP लागू करना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फर्जी मोबाइल कनेक्शन के जरिए पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने वालों पर शिकंजा कसना है।

हर एक शेयर पर 2 नए शेयर फ्री, फायदा पाना है तो आज 20 अगस्त को आखिरी मौका; 6 महीनों में कीमत 21% चढ़ी

गुड लक इंडिया लिमिटेड के शेयर में आज, 20 अगस्त को शानदार तेजी है। दिन में शेयर की कीमत BSE पर लगभग 8.5 प्रतिशत तक चढ़कर 1477.45 रुपये के हाई तक गई। दरअसल कंपनी बोनस शेयर बांटने जा रही है, जिसके लिए रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे होंगे, वे बोनस शेयरों के हकदार होंगे।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई बोनस शेयर पाना चाहता है लेकिन अभी तक शेयरहोल्डर नहीं है तो उसे आज, 20 अगस्त को ट्रेडिंग खत्म होने से पहले गुड लक इंडिया के शेयर खरीदने होंगे। इसलिए शेयर में जमकर पैसे लगाए जा रहे हैं। कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 1 शेयर पर 2 नए शेयर बोनस के तौर पर देगी।

बोनस शेयरों के अलॉटमेंट की तारीख 24 अगस्त है। इनमें 25 अगस्त से ट्रेडिंग की जा सकेगी। कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। इस बोनस इश्यू की घोषणा जुलाई महीने में हुई थी। गुड लंक इंडिया पहली बार बोनस शेयर देने वाली है।

क्या करती है कंपनी

गुडलक इंडिया लिमिटेड कई तरह के ERW स्टील पाइप, हॉलो सेक्शंस, CR कॉइल्स, CRCA शीट्स और पाइप, गैल्वेनाइज्ड कॉइल्स, CDW ट्यूब, फोर्जिंग और फ्लैंज बनाने और एक्सपोर्ट करने का काम करती है। कंपनी टेलीकॉम और ट्रांसमिशन लाइन टावर, सबस्टेशन स्ट्रक्चर, सड़क व रेलवे के लिए पुल और सड़क सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराती है।

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अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,205.94 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 49.66 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 4,067.71 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 173.45 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Goodluck India का शेयर एक सप्ताह में 15 प्रतिशत उछला

कंपनी का मार्केट कैप 4800 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 54 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर एक सप्ताह में 15 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। 6 महीनों में कीमत 21 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 38 प्रतिशत उछली है। 2 साल में शेयर 64 प्रतिशत और 3 साल में 162 प्रतिशत की तेजी देख चुका है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 19 अगस्त को इन 12 शेयरों पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार, 19 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों ने बड़े फैसलों और ऑर्डर की जानकारी दी है। इनमें फंड जुटाने, नए कॉन्ट्रैक्ट, ग्रीन एनर्जी निवेश और रणनीतिक हिस्सेदारी खरीदने जैसे अपडेट शामिल हैं। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

Bharat Petroleum

सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी Bharat Petroleum (BPCL) ने ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कंपनी अपनी फंडिंग जरूरतें पूरी करेगी।

RailTel

सरकारी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RailTel को EPFO से ₹166.8 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर टैक्स समेत है। इससे कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिल सकती है।

Aster DM Quality Care

हेल्थकेयर कंपनी Aster DM Quality Care में 7.2% हिस्सेदारी करीब ₹4,780 करोड़ के ब्लॉक डील के जरिए बिक सकती है। यह हिस्सेदारी TPG Inc. से जुड़ी Centella Mauritius Holdings बेच सकती है। डील का फ्लोर प्राइस ₹766.10 प्रति शेयर रखा गया है, जो पिछले NSE क्लोजिंग प्राइस से करीब 6.3% कम है।

Krystal Integrated Services

फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी Krystal Integrated Services को MSRTC से करीब ₹134 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर के तय क्षेत्रों में तीन साल तक इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज देगी। यह ऑर्डर 18 अगस्त को सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया।

Atlanta Electricals

ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी Atlanta Electricals को आंध्र प्रदेश ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (APTRANSCO) से ₹193.92 करोड़ का LOI मिला है। कंपनी 160 MVA क्षमता वाले 12 ऑटो ट्रांसफॉर्मर डिजाइन, निर्माण और सप्लाई करेगी।

Exide Industries

बैटरी बनाने वाली कंपनी Exide Industries ने अपनी सहायक कंपनी Exide Energy Solutions में ₹200 करोड़ का निवेश किया है। यह रकम भारत में बन रहे मल्टी-गीगावॉट लिथियम-आयन सेल प्लांट के लिए लगाई गई है। निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया गया।

Highway Infrastructure

इंफ्रा कंपनी Highway Infrastructure को NHAI से ₹80.17 करोड़ का टोल ऑपरेशन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza के लिए है। इसकी अवधि 90 दिन होगी।

Jubilant Ingrevia

स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी Jubilant Ingrevia ने Zettaone Technologies India में 40% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा ₹189.2 करोड़ में होगा। इससे कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कदम बढ़ाएगी।

Hindustan Zinc

माइनिंग और मेटल कंपनी Hindustan Zinc ने बताया कि उसकी बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 22% हो गई है। FY26 में यह करीब 18% थी। कंपनी FY28 तक इसे 70% तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

ONGC

सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC ने असम के गोलाघाट जिले में Khoraghat GGS-1 गैस इवैक्युएशन फैसिलिटी शुरू कर दी है। इससे अपर असम शेल्फ की अतिरिक्त गैस को North East Gas Grid के जरिए प्रोसेस और सप्लाई किया जा सकेगा।

Balkrishna Industries

ऑफ-हाईवे टायर बनाने वाली कंपनी Balkrishna Industries ने ₹550 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए NCD जारी करके जुटाएगी।

Shilpa Medicare

फार्मा कंपनी Shilpa Medicare ने अमेरिका में Pemetrexed Injection की 27,923 वायल्स को स्वेच्छा से वापस मंगाने का फैसला किया है। कंपनी ने दवा के रंग में असामान्य बदलाव के कारण यह रिकॉल शुरू किया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में किया खूब निवेश, जानिए कहां से हुई इनकी निकासी

जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने कुछ खास सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है। इस दौरान कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ सबसे ज्यादा नेट इक्विटी निवेश किया गया है। वहीं,कैपिटल गुड्स और टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में इनकी सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली है।

 FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव

जुलाई में FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव आया है। महीने के दूसरे आधे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ से जबरदस्त खरीदारी हुई है। वहीं, मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में हुई खरीदारी के विपरीत दूसरे हिस्से में बिकवाली देखने को मिली है।

कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में हुआ सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश 

जुलाई में कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश रहा है। इस सेक्टर में इस दौरान 10,201 रुपए करोड़ की खरीदारी हुई है। इस सेक्टर में 1 से 15 जुलाई के बीच 7,361 करोड़ रुपए और महीने के दूसरे हिस्से में 2,840 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया है।

हेल्थकेयर सेक्टर  पर भी आया FPI का दिल

हेल्थकेयर सेक्टर इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा। इसमें FPIs का नेट निवेश 7,731 करोड़ रुपए रहा। इस सेक्टर में FPIs ने पहले हिस्से में 4,101 करोड़ रुपए और दूसरे हिस्से में 3,630 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स  भी आया पसंद

महीने के आगे बढ़ने के साथ ही कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीदारी में तेजी आई। FPIs ने 1-15 जुलाई के दौरान इस सेक्टर में 2,384 करोड़ रुपये और महीने के दूसरे हिस्से में 4,958 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे इसमें महीने का कुल नेट निवेश 7,342 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में भी हुई खरीदारी

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में 5,993 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। जिसके बाद FPIs ने महीने के दूसरे आधे हिस्से में 1,056 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली की,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में 4,937 करोड़ रुपए का नेट निवेश देखने को मिला।

महीने के दूसरे पखवाड़े में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बढ़ी खरीदारी 

महीने के दूसरे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी खरीदारी में तेजी देखने को मिली। जुलाई के पहले पखवाड़े में सिर्फ 60 करोड़ रुपये के नेट इन्वेस्टमेंट के बाद, FPIs ने दूसरे हिस्से में 3,298 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में होने वाला कुल निवेश 3,358 करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने कंस्ट्रक्शन मटीरियल में 2,445 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया,जिसमें से 1,574 करोड़ रुपए पहले पखवाड़े में और 871 करोड़ रुपए दूसरे पखवाड़े में आए।

जुलाई में सर्विस सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपए की नेट खरीदारी देखने को मिली। FPIs ने पहले पखवाड़े में इस सेक्टर में 2,353 करोड़ रुपए का निवेश किया,जबकि दूसरे पखवाड़े में 30 करोड़ रुपए की मामूली बिकवाली की।

फाइनेंशियल सर्विसेज में हुई बिकवाली

असेट अंडर कस्टडी (AUC) के आधार पर FPI पोर्टफोलियो के सबसे बड़े सेक्टर,फाइनेंशियल सर्विसेज़ में जुलाई में 694 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली हुई। FPIs ने महीने के पहले हिस्से में 1,975 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल सर्विसेज़ स्टॉक्स खरीदे,लेकिन दूसरे हिस्से में 2,669 करोड़ रुपये के स्टॉक्स बेचे।

जुलाई के आखिर में इस सेक्टर का AUC 21.13 लाख करोड़ रुपए था। जबकि 15 जुलाई को यह 21.39 लाख करोड़ रुपए पर था। फिर भी FPI पोर्टफोलियो में यह सेक्टर सबसे बड़ा निवेश वाला सेक्टर बना रहा।

कई दूसरे सेक्टर में भी भारी बिकवाली हुई। जुलाई में कैपिटल गुड्स सेक्टर से 6,275 करोड़ रुपए की नेट FPI निकासी हुई,जबकि टेलीकॉम सेक्टर में 5,725 करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई। पावर सेक्टर में 2,863 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली हुई।

FPI AUC में फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा

फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा,ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स का FPI AUC में 5.40 लाख करोड़ रुपये का हिस्सा रहा। इसके बाद हेल्थकेयर का नंबर आता है, जिसका हिस्सा 5.33 लाख करोड़ रुपये रहा। फिर कैपिटल गुड्स का हिस्सा 4.89 लाख करोड़ रुपये रहा।

जुलाई के आखिर में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इक्विटी AUC 3.93 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का AUC 1.98 लाख करोड़ रुपये रहा। रियल्टी सेक्टर का हिस्सा भी काफी बड़ा रहा,जो 1.54 लाख करोड़ रुपये पर रहा।

 

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Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: सोमवार, 17 अगस्त को बाजार खुलते ही कई शेयरों में तगड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने मजबूत तिमाही नतीजे दिए हैं, तो कुछ पर बड़े ऑर्डर, ब्लॉक डील और रेगुलेटरी अपडेट का असर रह सकता है। डिफेंस, बैंकिंग, रियल एस्टेट, FMCG और इंजीनियरिंग समेत कई सेक्टर फोकस में रहेंगे। ऐसे में इन 20 शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

Cochin Shipyard

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Cochin Shipyard के नतीजे कमजोर रहे। नेट प्रॉफिट 27.7% घटकर ₹135.8 करोड़ रह गया। रेवेन्यू और EBITDA में भी गिरावट दर्ज हुई। कमजोर प्रदर्शन का असर शेयर पर पड़ सकता है।

Reliance Industries

तेल-टेलीकॉम से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक कारोबार करने वाली Reliance Industries ने ब्रिटेन की एयरोस्पेस कंपनी Rolls-Royce के साथ बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियां भारत के AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने पर काम करेंगी। इसके लिए भारत में एक एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की भी योजना है, जो पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा।

Voltas

एयर कंडीशनर और होम एप्लायंसेस बनाने वाली टाटा ग्रुप की कंपनी Voltas ने मजबूत तिमाही नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹140 करोड़ से बढ़कर ₹214 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 19% बढ़कर ₹4,674 करोड़ पहुंच गया। बेहतर नतीजों से शेयर में हलचल दिख सकती है।

Max Estates

रियल एस्टेट कंपनी Max Estates का पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% घटकर ₹8.35 करोड़ रह गया। रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 0.85% बढ़कर ₹51.91 करोड़ पहुंचा। वहीं, EBITDA 41.6% गिरकर ₹8.12 करोड़ रहा। हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले कंपनी ने घाटे से मुनाफे में वापसी की है।

Texmaco Rail & Engineering

रेलवे और इंजीनियरिंग कंपनी Texmaco Rail & Engineering ने अपनी डिफेंस सब्सिडियरी Texmaco Defence Technologies में ₹200 करोड़ तक के निवेश के लिए समझौता किया है। पहले चरण में ₹100 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करके लगाए जाएंगे। बाकी ₹100 करोड़ इक्विटी, डेट या अन्य वित्तीय साधनों के जरिए निवेश किए जाएंगे।

BEML

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी BEML को मॉरीशस से 6.65 मिलियन डॉलर (करीब ₹63.5 करोड़) का एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी BE220G हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर अफ्रीका के कई देशों में सप्लाई करेगी। ऑर्डर की शुरुआत सिएरा लियोन में पायलट डिप्लॉयमेंट से होगी।

Ather Energy

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ather Energy के शेयरधारकों ने ₹1,200 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दे दी है। इससे पहले कंपनी ₹1,300 करोड़ का QIP भी पूरा कर चुकी है। दोनों को मिलाकर कंपनी ने करीब ₹2,500 करोड़ जुटाए हैं।

NMDC Steel

सरकारी स्टील कंपनी NMDC Steel ने पहली तिमाही में मजबूत ग्रोथ दिखाई। नेट प्रॉफिट 97.6% बढ़कर ₹50.51 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 8.8% बढ़कर ₹3,661.84 करोड़ पहुंचा। बेहतर नतीजों से निवेशकों की नजर रहेगी।

Embassy Office Parks REIT

रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट Embassy Office Parks REIT में Bain Capital की इकाई APAC Company XXIII Limited ने ब्लॉक डील लॉन्च की है। बेस ऑफर के तहत 4.42% हिस्सेदारी वाले 4.19 करोड़ यूनिट करीब ₹1,802 करोड़ में बेचे जाएंगे। अपसाइज विकल्प जोड़ने पर डील का आकार करीब ₹2,298 करोड़ तक पहुंच सकता है।

Patanjali

FMCG कंपनी पंतजलि ने शानदार तिमाही प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा ₹180 करोड़ से बढ़कर ₹336 करोड़ हो गया। इसके साथ FY27 के लिए ₹0.80 और FY26 के लिए ₹1.50 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान भी किया है।

IndusInd Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक IndusInd Bank पर RBI ने ₹59.20 लाख का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नियमों के पालन में कमी के चलते हुई है। बैंक पर ब्याज दर और सिक्योरिटाइजेशन नियमों के उल्लंघन का मामला है।

PhysicsWallah

एडटेक कंपनी PhysicsWallah का घाटा कम हुआ है। नेट लॉस ₹120.5 करोड़ से घटकर ₹77.6 करोड़ रह गया। यानी कंपनी ने घाटे में करीब ₹42.9 करोड़ की कमी दर्ज की है।

PB Fintech

इंश्योरेंस और फिनटेक कंपनी PB Fintech की सब्सिडियरी Policybazaar को IRDAI से शो-कॉज नोटिस मिला है। यह नोटिस पिछले निरीक्षण के दौरान की गई टिप्पणियों से जुड़ा है। कंपनी ने तय समय में जवाब देने की बात कही है।

Dr. Reddy’s Laboratories

फार्मा कंपनी Dr. Reddy’s Laboratories की हैदराबाद स्थित FTO-3 यूनिट का USFDA निरीक्षण पूरा हो गया है। निरीक्षण के बाद अमेरिकी नियामक ने Form 483 जारी किया है। इसमें चार ऑब्जर्वेशन दर्ज किए गए हैं।

BMW Industries

स्टील प्रोसेसिंग कंपनी BMW Industries ने बेहतर तिमाही नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 25.8% बढ़कर ₹19.04 करोड़ हो गया। कुल आय भी 15% बढ़कर ₹176.68 करोड़ पहुंच गई।

NMDC

सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2% बढ़कर ₹2,007 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 2.4% बढ़कर ₹6,795 करोड़ रहा। मजबूत प्रदर्शन से शेयर पर नजर रहेगी।

Jupiter Wagons

रेलवे वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons का मुनाफा 13.6% घटकर ₹28.3 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 46% बढ़कर ₹670.7 करोड़ पहुंचा। EBITDA में भी हल्की बढ़त दर्ज हुई।

Zaggle Prepaid

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid का नेट प्रॉफिट 33% घटकर ₹17.5 करोड़ रह गया। इसके बावजूद रेवेन्यू 27.5% बढ़कर ₹423 करोड़ हो गया। मिले-जुले नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

Borosil

ग्लासवेयर और किचनवेयर कंपनी Borosil का नेट प्रॉफिट 26.4% घटकर ₹13 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 9% बढ़ा, लेकिन EBITDA में गिरावट दर्ज हुई। इससे शेयर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Schneider Electric

इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट कंपनी Schneider Electric के नतीजे कमजोर रहे। नेट प्रॉफिट करीब 70% घटकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू में हल्की बढ़त रही, लेकिन EBITDA और मार्जिन पर दबाव बना रहा।

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BSNL का धमाकेदार ऑफर! सिर्फ 1 रुपये में अनलिमिटेड कॉलिंग, रोज एक GB डेटा और 100 SMS लेकिन ये है शर्त

सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने ग्राहकों के लिए 1 रुपये वाला प्री-पेड रिचार्ज प्लान फिर से लॉन्च कर दिया है। कुछ समय के लिए पोर्टफोलियो से हटाए जाने के बाद कंपनी ने इसे सभी टेलीकॉम सर्किलों में नए ग्राहकों के लिए दोबारा पेश किया है। इस किफायती रिचार्ज प्लान में 24 दिनों की सर्विस वैलिडिटी के साथ डेटा, एसएमएस और अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग जैसी कई सुविधाएं दी जा रही हैं। अगर आप BSNL का नया सिम लेने की सोच रहे हैं तो लंबे समय के प्लान पर जाने से पहले इस ऑफर के जरिए कंपनी की सेवाओं को बेहद कम लागत में टेस्ट कर सकते हैं।

BSNL का 1 रुपये वाला प्लान: किसे मिलेगा इसका फायदा?

वैसे बीएसएनएल के इस 1 रुपये वाले ऑफर का लाभ उठाने के लिए एक शर्त भी है। यह प्लान सिर्फ और सिर्फ BSNL के नए सब्सक्राइबर्स के लिए ही उपलब्ध है। इस प्लान को एफआरसी (First Recharge Coupon) के रूप में कैटेगराइज किया गया है। इसका मतलब यह है कि ग्राहकों को नया BSNL सिम खरीदने के बाद इसे अपने पहले रिचार्ज के तौर पर इस्तेमाल करना होगा। बीएसएनएल के मौजूदा यूजर्स या पुराने कनेक्शन इस्तेमाल कर रहे ग्राहक इस 1 रुपये वाले ऑफर का फायदा नहीं उठा सकते हैं।

24 दिनों की वैलिडिटी और रोज 1GB डेटा

बीएसएनएल का यह 1 रुपये वाला एफआरसी प्लान 24 दिनों की सर्विस वैलिडिटी के साथ आता है। इस पूरी वैलिडिटी के दौरान ग्राहकों को रोजाना 1GB मोबाइल डेटा दिया जाता है। इस तरह 24 दिनों की पूरी अवधि में सब्सक्राइबर्स को कुल 24GB डेटा मिलता है। कंपनी इस 1 रुपये के एफआरसी प्लान में वॉइस कॉलिंग और मैसेजिंग की बेहतरीन सुविधाएं दे रही है। ग्राहकों को पूरी वैलिडिटी अवधि के दौरान बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग का लाभ मिलता है। इसमें रोजाना 100 मैसेज (SMS) भेजने की सुविधा शामिल है। इस तरह 24 दिनों में ग्राहक कुल 2400 SMS तक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पुराने और नए 1 रुपये वाले प्लान में क्या बदला है?

वैसे तो प्लान की कीमत 1 रुपये ही रखी गई है, लेकिन इसके फायदों और वैलिडिटी में कंपनी ने बदलाव किए हैं। पुराने 1 रुपये वाले प्लान में ग्राहकों को 30 दिनों की वैलिडिटी और रोजाना 2GB डेटा मिलता था, जिससे कुल 60GB डेटा का बंडल डेटा हो जाता था। दोबारा पेश किए गए नए प्लान में वैलिडिटी को घटाकर 24 दिन और रोजाना मिलने वाले डेटा को घटाकर 1GB कर दिया गया है। अनलिमिटेड कॉलिंग और रोजाना 100 SMS की सुविधा पहले की तरह ही बरकरार रखी गई है।