Salary vs EMI: सैलरी आते ही EMI से खाली हो जाता है अकाउंट? कर्ज के जाल से निकलने के लिए अपनाएं ये 3 आसान स्टेप्स

Debt Management Tips: महीने की पहली तारीख को सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है और कुछ ही घंटों में EMIs कटने के बाद अकाउंट खाली लगने लगता है। अगर आपकी सैलरी का भी एक बड़ा हिस्सा पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बिल और होम लोन की किश्तों में जा रहा है, तो बचत करना तो दूर, रोजमर्रा के खर्चे संभालना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसी स्थिति में अक्सर लोग किसी इमरजेंसी खर्च से निपटने के लिए एक और नया लोन या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर लेते हैं, जो उन्हें एक गंभीर ‘डेट ट्रैप’ यानी कर्ज के जाल में फंसा देता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने वित्तीय साक्षरता अभियानों में बार-बार आगाह करता है कि पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप भी EMI के दबाव से परेशान हैं, तो इन 3 आसान स्टेप्स के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति पर दोबारा नियंत्रण पा सकते हैं।

कर्ज के दबाव को कम करने का 3-स्टेप फॉर्मूला

स्टेप 1: जानिए पैसा कहां जा रहा है और महंगे कर्ज पहले खत्म कीजिए

कोई भी रणनीति बनाने से पहले आपको अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर साफ देखनी होगी। अपनी हर EMI, क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया, यूटिलिटी बिल्स और राशन/किराए जैसे फिक्स्ड खर्चों को एक कागज पर लिखें। क्रेडिट कार्ड बकाया और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बहुत ज्यादा होती हैं, जबकि होम लोन या कार लोन तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं।

सभी कर्जों को एक साथ भरने के बजाय सबसे महंगे कर्ज (हाई-इंटरेस्ट लोन) को पहले चुकाने का लक्ष्य बनाएं। बाकी कर्जों की सिर्फ मिनिमम EMI देते रहें और जितनी भी एक्स्ट्रा बचत हो, उसे सबसे महंगे लोन को बंद करने में लगाएं।

स्टेप 2: एक छोटा कैश बफर जरूर तैयार करें

जब बजट पहले से टाइट हो, तो महीने के ₹1,000 या ₹2,000 बचाना भी मुश्किल लगता है। लेकिन यही छोटी बचत आपकी ढाल बनती है। अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी या गाड़ी की खराबी आ जाए, तो इमरजेंसी फंड न होने पर आपको दोबारा क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता है।

रिजर्व बैंक का मानना है कि हर परिवार के पास एक छोटा कैश बफर होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में नया कर्ज न लेना पड़े। शुरुआत में ₹5,000 से ₹10,000 का छोटा बफर बनाएं, फिर धीरे-धीरे इसे 3-6 महीने के आवश्यक खर्चों के बराबर ले जाएं।

स्टेप 3: सैलरी इंक्रीमेंट या बोनस का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें

साल में जब भी सैलरी बढ़े, बोनस मिले या कोई टैक्स रिफंड आए, तो उस पूरे पैसे को नए शौक या लाइफस्टाइल पर खर्च करने की गलती न करें। मिली हुई एक्स्ट्रा राशि का कम से कम 50% से 70% हिस्सा अपने सबसे महंगे लोन के प्रिंसिपल को चुकाने में लगाएं। इससे आपका आने वाला ब्याज काफी घट जाता है।

लोन की प्री-पेमेंट करने से पहले अपने बैंक के नियमों और प्री-पेमेंट चार्जेस की जांच जरूर कर लें। RBI के नियमों के अनुसार बैंकों को लोन की शर्तों में प्री-पेमेंट चार्जेस का पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य है।

पुराने लोन को चुकाने के लिए कभी न लें नया लोन!

कई बार लोग EMI कम करने के लिए लोन कंसोलिडेशन या री-फाइनेंसिंग का सहारा लेते हैं। जब बैंक किसी नए लोन में कम EMI दिखाता है, तो लोग आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि EMI इसलिए कम दिखती है क्योंकि लोन की अवधि बढ़ा दी जाती है।

लोन की अवधि बढ़ाने से आपकी महीने की किस्त तो छोटी हो सकती है, लेकिन बैंक को जाने वाला कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर से भुगतान करने पर आपको न केवल लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा, बल्कि आपका CIBIL स्कोर भी खराब होगा, जिससे भविष्य में इमरजेंसी लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्या हो लोन रीपेमेंट की बेस्ट स्ट्रेटजी

कर्ज के जाल से बाहर निकलने का रास्ता किसी जादुई फॉर्मले से नहीं, बल्कि सही वित्तीय अनुशासन से निकलता है। जब धीरे-धीरे आपकी एक-एक EMI खत्म होगी, तो उससे बचने वाला पैसा ही आपकी भविष्य की बचत और निवेश की नींव बनेगा। पहला लक्ष्य स्थिति को बिगड़ने से रोकना है, और दूसरा लक्ष्य हर एक्स्ट्रा रुपये को किसी नए कर्ज में फंसाने के बजाय उससे निकलने का जरिया बनाना है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: सिर्फ एक बार नहीं बल्कि हर साल सैलरी में होगा बंपर इजाफा! सालाना इंक्रीमेंट वाला ये फार्मूला समझिए

8th Pay Commission Salary Calculation: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम राज्यों के दौरों के साथ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगी यूनियनों के साथ लगातार बैठकें कर रही है। दिल्ली, लद्दाख, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद आयोग की परामर्श प्रक्रिया अब अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है।

कर्मचारी यूनियनों द्वारा आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों से एक बात साफ हो गई है कर्मचारी न केवल फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी चाहते हैं, बल्कि इस बार वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को भी 3% से बढ़ाकर 5% से 7% करने की मांग कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि तुरंत मिलने वाला बड़ा फिटमेंट फैक्टर ज्यादा फायदेमंद है या हर साल मिलने वाला ज्यादा इंक्रीमेंट?

3% की जगह मिले 5% से 7% का इंक्रीमेंट

7वें वेतन आयोग के तहत फिलहाल कर्मचारियों को 3% की दर से सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के सामने प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है:

कर्मचारी संगठनप्रस्तावित सालाना इंक्रीमेंट
NC-JCM6%
AIDEF6%
FNPO6%
AINPSEF 7%
IRTSA5%

वार्षिक इंक्रीमेंट में कंपाउंडिंग की ताकत

फिटमेंट फैक्टर लागू होते ही कर्मचारियों की शुरुआती बेसिक पे में तुरंत बड़ा उछाल आता है। लेकिन सालाना इंक्रीमेंट की भूमिका लंबी अवधि के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।

जब हर साल बेसिक पे बढ़ती है, तो अगले साल का इंक्रीमेंट उस बढ़ी हुई रकम पर लगता है। यानी इस पर कंपाउंडिंग जैसा असर काम करता है। अगर आपकी नौकरी 15 से 30 साल बची है, तो सालाना इंक्रीमेंट की उच्च दर आपकी सैलरी को फिटमेंट फैक्टर के मुकाबले कई गुना ज्यादा बढ़ा सकती है।

कैल्कुलेशन से समझें फिटमेंट फैक्टर vs 7% इंक्रीमेंट

मान लीजिए किसी Level 10 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹56,100 है। अलग-अलग परिस्थितियों में 15 और 30 साल बाद सैलरी का अनुमानित गणित इस प्रकार हो सकता है:

कैल्कुलेशन से समझें फिटमेंट फैक्टर vs 7% इंक्रीमेंट

(नोट: यह केवल गणना को समझाने के लिए एक काल्पनिक उदाहरण है। वास्तविक सैलरी सरकार द्वारा स्वीकृत अंतिम फिटमेंट फैक्टर और पे-स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगी।)

कर्मचारियों के लिए सबसे बेहतर क्या होगा?

आंकड़ों से साफ है कि केवल 7% इंक्रीमेंट मिलने पर लंबे समय (30 साल) में बेसिक पे ₹4.27 लाख तक पहुंच सकती है, जो 2.57x फिटमेंट फैक्टर के ₹3.50 लाख वाले आंकड़े से कहीं ज्यादा है। लेकिन इसके लिए कर्मचारियों को कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए सालों इंतजार करना पड़ेगा।

इसलिए, कर्मचारियों के लिए सबसे सही और फायदेमंद विकल्प ‘फिटमेंट फैक्टर + हाई इंक्रीमेंट’ का कॉम्बिनेशन होगा:

बंपर फिटमेंट फैक्टर: इससे पहले ही साल से बेसिक पे में तुरंत और बड़ी बढ़ोतरी मिलेगी।

5% से 7% इंक्रीमेंट: इससे पूरी सर्विस के दौरान हर साल वेतन तेजी से बढ़ता रहेगा।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला 8वां वेतन आयोग फिलहाल सभी हितधारकों से चर्चा कर रहा है। माना जा रहा है कि आयोग अपनी सिफारिशें और अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंप सकता है।

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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MLA Salary: कार, बंगला और लाखों के भत्ते! जानिए किस राज्य के विधायक कमाते हैं सबसे ज्यादा पैसा

MLA Salary: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के सभी 234 विधायकों को सरकारी गाड़ी और हर महीने अतिरिक्त भत्ता देने के फैसले के बाद अब विधायकों की सैलरी और उन्हें मिलने वाली दूसरी सुविधाएं चर्चा में हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि विधायकों को वेतन के अलावा और क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं।

नई व्यवस्था के तहत तमिलनाडु के हर विधायक को एक सरकारी गाड़ी मिलेगी। इसके अलावा गाड़ी, पेट्रोल-डीजल और मेंटेनेंस के खर्च के लिए हर महीने 75,000 रुपये और एक सहायक (असिस्टेंट) के लिए 25,000 रुपये दिए जाएंगे। यानी हर विधायक को वेतन के अलावा हर महीने कुल 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार ने विधायकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी बढ़ा दिया है।

इस फैसले के बाद देशभर में विधायकों की सैलरी और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग राज्यों में विधायकों की बेसिक सैलरी, भत्तों और दूसरी सुविधाओं में काफी अंतर देखने को मिलता है।

यह राज्यों का विषय है

सांसदों की सैलरी और भत्ते संसद तय करती है, लेकिन विधायकों की सैलरी और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं राज्य सरकार के दायरे में आती हैं। हर राज्य की विधानसभा अपने विधायकों के वेतन और भत्तों से जुड़े नियम और कानून तय करती है।

विधायकों के लिए कोई एकसमान राष्ट्रीय वेतन संरचना नहीं है। उनकी कमाई में सिर्फ बेसिक सैलरी ही शामिल नहीं होती। राज्य सरकारें विधायकों को विधानसभा क्षेत्र के खर्च, ऑफिस और स्टाफ, यात्रा, रहने, फोन और कम्युनिकेशन, इलाज और दूसरे आधिकारिक खर्चों के लिए अलग-अलग भत्ते भी देती हैं।

पीआरएस विधायी अनुसंधान के अनुसार, अधिकांश राज्यों में, विधायक कानून के माध्यम से अपने वेतन और भत्ते स्वयं निर्धारित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्यों में मूल वेतन और समग्र वेतन पैकेज दोनों में महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलता है।

किस राज्य में विधायकों को सबसे अधिक वेतन मिलता है?

2025 में द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना राज्य में विधायकों को सबसे अधिक वेतन 2.75 लाख रुपये दिया जाता था। के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के दौरान सभी भत्तों सहित यह वेतन 1.25 लाख रुपये से बढ़कर 2.75 लाख रुपये हो गया था।

किस राज्य में विधायकों का वेतन सबसे कम है?

पीआरएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के विधायकों का मासिक वेतन 70,000 रुपये है, जो देश के सबसे कम वेतन पाने वाले विधायकों में से एक है। उनके मासिक वेतन में 2,000 रुपये का निश्चित भत्ता, 25,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 20,000 रुपये का न्यूनतम मासिक यात्रा भत्ता, 11,000 रुपये का टेलीफोन भत्ता, 4,000 रुपये का सूचना भत्ता और 8,000 रुपये का उपभोग भत्ता शामिल है। उन्हें राज्य के भीतर यात्रा के लिए 1,000 रुपये और केरल के बाहर यात्रा के लिए 1,200 रुपये का दैनिक भत्ता भी मिलता है।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि कम वेतन वाले राज्य में विधायकों को कम सुविधाएं मिलती हैं। इन्हें आवास, सरकारी आवास, इलाज, यात्रा खर्च की भरपाई, स्टाफ सपोर्ट और दूसरी सुविधाएं अलग से दी जाती हैं।

विधायकों को वेतन के अलावा और क्या मिलता है?

विधायक का मासिक वेतन राज्य द्वारा विधायक पर किए जाने वाले कुल व्यय का केवल एक हिस्सा है।

सामान्य सुविधाओं और भत्तों में शामिल हैं:

  • निर्वाचन क्षेत्र के कार्यों से संबंधित खर्चों के लिए निर्वाचन क्षेत्र भत्ता
  • कर्मचारियों और प्रशासनिक खर्चों के लिए सेक्रेटेरियल या ऑफिस भत्ता
  • सरकारी यात्राओं के लिए यात्रा और परिवहन भत्ता
  • विधानसभा सत्रों और समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए दैनिक भत्ता
  • राज्य की राजधानी में आवास
  • विधायक और कुछ राज्यों में परिवार के सदस्यों के लिए मेडिकल सुविधाएं
  • टेलीफोन और संचार भत्ता
  • वाहन सुविधाएं या वाहन भत्ता
  • कार्यालय उपकरण और स्टेशनरी भत्ता
  • विधानसभा छोड़ने के बाद पेंशन और अन्य लाभ, जो राज्य के नियमों पर निर्भर करते हैं
  • हरियाणा में आवास और कार सुविधा
  • कुछ राज्य पारंपरिक वेतन-भत्ते मॉडल से परे भी लाभ प्रदान करते हैं।

हरियाणा में विधायकों को सिर्फ सैलरी और भत्ते ही नहीं, बल्कि घर और गाड़ी खरीदने के लिए 1 करोड़ रुपये तक का लोन लेने की सुविधा भी मिलती है। यह लोन घर, मोटर कार या दोनों के लिए लिया जा सकता है।

इसके अलावा, विधायकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा भी दी जाती है। राज्य सरकार घर में बदलाव कराने और उसकी मरम्मत के लिए भी विधायकों को एडवांस राशि उपलब्ध कराती है।

ओडिशा का विधायक विकास कोष

एक और महत्वपूर्ण अंतर विधायक द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्राप्त लाभों और उनके निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े कोषों के बीच है।

ओडिशा की विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 से हर विधानसभा क्षेत्र को 5 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इस राशि को सामान्य विकास, शिक्षा और सड़क से जुड़े कामों के लिए बांटा जाता है।

हालांकि, इस राशि को विधायक का वेतन या व्यक्तिगत लाभ नहीं माना जाना चाहिए। यह सार्वजनिक धन है जो विधायक द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए निर्धारित किया गया है।

विधायकों के वेतन में इतना अंतर क्यों होता है?

इस अंतर के पीछे कई कारण हैं:

  • आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों के पास उच्च वेतन देने की वित्तीय क्षमता अधिक हो सकती है, हालांकि राजनीतिक प्राथमिकताएं भी मायने रखती हैं।
  • उच्च जीवन यापन और परिचालन लागत वाले राज्यों के विधायकों को अधिक भत्ते मिल सकते हैं।
  • अगर किसी विधायक का क्षेत्र बहुत बड़ा, दूर-दराज या कई इलाकों में फैला हुआ है, तो उसका यात्रा खर्च भी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में उसे ज्यादा यात्रा भत्ता मिल सकता है
  • कई बार राज्य सरकारें और विधानमंडल विधायकों की मांगों के बाद समय-समय पर वेतन और भत्तों में संशोधन करते हैं।

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8th Pay Commission में सैलरी हाइक का ये फैक्टर आप गारंटीड नहीं जानते होंगे! वो ‘हिडन फॉर्मूला’ जो कर देगा मालामाल

8th Pay Commission Salary Hike: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मन में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद उनकी सैलरी में कितना उछाल आएगा। आमतौर पर हर कोई इसे सिर्फ फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (DA) के आंकड़ों से जोड़कर देख रहा है, लेकिन असल में सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का फैसला एक ‘स्पेशल फैक्टर’ के हाथ में है। अगर यह फॉर्मूला मंजूर हो गया, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में सीधे 283% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह मास्टर फैक्टर है- ‘फैमिली यूनिट’ की गणना में बड़ा बदलाव का। आइए समझते हैं कि यह नया फॉर्मूला आपकी इन-हैंड सैलरी को कैसे बदल देगा।

क्या है ‘फैमिली यूनिट’ और अब तक कैसे तय होती थी आपकी सैलरी?

वेतन आयोग कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 के 15वें इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) के मानकों का पालन करता है। 7वें वेतन आयोग तक सरकार परिवार में केवल 3 यूनिट्स का खर्च जोड़कर न्यूनतम बेसिक पे तय करती थी:

  • कर्मचारी खुद: 1 यूनिट
  • पति या पत्नी: 1 यूनिट
  • 2 बच्चे (0.5 + 0.5): 1 यूनिट
  • कुल योग: 3 यूनिट्स

इसी 3 यूनिट्स के फॉर्मूले के आधार पर 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर दिया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 तय हुई थी।

8वें वेतन आयोग में 5 यूनिट्स का नया प्रस्ताव

कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि अब परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए। नए प्रस्ताव में यूनिट्स का गणित कुछ इस प्रकार है:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • पति या पत्नी: 1 यूनिट
  • 2 बच्चे (0.8 + 0.8): 1.6 यूनिट
  • आश्रित माता-पिता (0.8 + 0.8): 1.6 यूनिट
  • कुल योग: 5.2 यूनिट्स (राउंड ऑफ करके 5 यूनिट्स)

3 बनाम 5 यूनिट: जानिए आपकी सैलरी में कितना आएगा अंतर?

मान लीजिए, आज की महंगाई में एक व्यक्ति का न्यूनतम मासिक लिविंग कॉस्ट यानी राशन, कपड़ा, बिजली, मकान किराया, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च लगभग ₹13,800 बैठता है:

पुराने 3 यूनिट फॉर्मूले से: 3×₹13,800=₹41,400 (अनुमानित न्यूनतम बेसिक सैलरी)

प्रस्तावित 5 यूनिट फॉर्मूले से: 5×₹13,800=₹69,000 (प्रस्तावित न्यूनतम बेसिक सैलरी)

साफ है कि सिर्फ माता-पिता का खर्च जुड़ने (2 अतिरिक्त यूनिट्स) से ही कर्मचारियों की बेसिक पे सीधे ₹27,600 प्रति महीना अतिरिक्त बढ़ जाएगी!

फिटमेंट फैक्टर 3.83 होते ही ₹18,000 की बेसिक बनेगी ₹69,000

फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी में गुणा करके नई बेसिक पे निकाली जाती है। 5 यूनिट्स का फॉर्मूला लागू होने पर फिटमेंट फैक्टर बढ़कर 3.83 हो जाएगा।

ऐसे समझें कैलकुलेशन (लेवल-1 कर्मचारी):

  • मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000
  • नया फॉर्मूला: मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर
  • नई बेसिक सैलरी: ₹18,000×3.83=₹68,940 (लगभग ₹69,000)

यानी 5 यूनिट्स का नियम पास होते ही बेसिक पे ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹69,000 हो जाएगी। इसके ऊपर से मिलने वाला DA, HRA और अन्य अलाउंस अलग से जुड़ेंगे।

कर्मचारी यूनियनों ने दिए ये 3 मजबूत कानूनी तर्क

नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग के सामने 5 यूनिट्स लागू करने के लिए ठोस कानूनी आधार रखे हैं:

सीनियर सिटीजन एक्ट: ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना कर्मचारी की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: नए लेबर कोड्स में भी कर्मचारी के परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को आधिकारिक तौर पर जगह दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले: शीर्ष अदालत (1991 और भूपेंद्र नाथ हजारिका केस) ने साफ कहा है कि सरकार को अपने कर्मचारियों को सिर्फ ‘जीवित रहने लायक’ नहीं, बल्कि ‘सम्मानजनक जीवन’ जीने लायक वेतन देना चाहिए।

25 साल के GenZ ने 1 करोड़ रुपये का जॉब ऑफर ठुकराया! मेंटल पीस से जुड़ी वजह जानकर चौंक जाएंगे

एक 25 साल के प्रोफेशनल ने 1 करोड़ रुपये की नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि वह ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहता था, जो मानसिक रूप से नुकसानदेह हो। इस फ़ैसले ने पैसे, मानसिक स्वास्थ्य और युवा कर्मचारी अपने करियर से क्या चाहते हैं, इस पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

यह कहानी बेंगलुरु की प्रोडक्ट डिज़ाइनर मुस्कान अतार ने शेयर की। उन्होंने कहा कि वह इस बात से प्रभावित थीं कि उस युवा प्रोफेशनल ने अपने करियर की शुरुआत में ही कितनी साफ़-साफ़ अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली थीं।

उन्होंने पैसे के बजाय अपने लंबे समय के लक्ष्यों को चुना

मुस्कान अतार ने लिंक्डइन पर लिखा, “मेरे एक दोस्त ने 25 साल की उम्र में ₹1 करोड़ का ऑफर ठुकरा दिया, ताकि उन्हें खराब माहौल वाले वर्कप्लेस में काम न करना पड़े।” उन्होंने कहा कि उन्होंने भी पहले ऐसे मौके ठुकराए हैं, लेकिन 25 साल की उम्र में ऐसा फैसला लेने के बारे में सोचना भी उनके लिए मुश्किल था।

उन्होंने कहा, “मैंने भी ऐसे मौकों को ना कहा है, लेकिन 25 साल की उम्र में इतनी स्पष्ट प्राथमिकता तय करने के बारे में मैं सोच भी नहीं सकती।” अतार ने बताया कि कई तरह के दबावों की वजह से उनके लिए यह फैसला लेना बहुत मुश्किल हो सकता था, जैसे परिवार की ज़रूरतें, दूसरों की उम्मीदें और निजी लक्ष्य।

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“परिवार की ज़िम्मेदारियां, दोस्तों का दबाव और अपनी जीवनशैली की इच्छाओं की वजह से शायद मैं वह ऑफ़र स्वीकार कर लेती। वह भी मेरी ही तरह के बैकग्राउंड से आते हैं, फिर भी उनमें ऐसे फ़ायदे छोड़ने की हिम्मत है जो उनके लंबे समय के लक्ष्यों से मेल नहीं खाते। यह उनके व्यक्तित्व में एक बड़ा सुधार दिखाता है।”

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से यह भी पता चलता है कि कैसे कुछ युवा कर्मचारी नौकरी चुनते समय सिर्फ़ सैलरी से आगे की चीज़ों पर भी ध्यान दे रहे हैं। “कामकाजी लोगों की अगली पीढ़ी को पता है कि उनके लिए क्या ज़रूरी है। वर्कप्लेस को इसके हिसाब से ढलना सीखना होगा।”

उनकी पसंद पर लोगों की अलग-अलग राय थी

इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं; कुछ लोगों ने इस फैसले की तारीफ़ की, तो कुछ ने कहा कि हर कोई इतनी बड़ी सैलरी ठुकराने का जोखिम नहीं उठा सकता। एक व्यक्ति ने लिखा, “खुशी है कि लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के असर को समझ रहे हैं… चाहे वह अच्छा हो या बुरा… और हां, पैसा ज़रूरी है। मैं हमेशा कहता हूं कि मैं बाकी चीज़ों से ज़्यादा पैसे को चुनूंगा, कभी-कभी तो नौकरी की भूमिका या काम के घंटों से भी ज़्यादा। लेकिन टॉक्सिक माहौल और अजीब काम करने की जगह… बिल्कुल नहीं…!! यह बात मुझे MNC और PSU में एक दशक तक काम करने के बाद समझ आई, लेकिन 25 साल की उम्र में ऐसा करना तारीफ़ के काबिल है।”

एक और व्यक्ति ने कमेंट किया, “मेरे अंदर का मिडिल-क्लास इंसान 45 साल की उम्र में भी ऐसा नहीं कर पाएगा। तो हाँ, वे ऑफ़र मेरी तरफ़ भेज दो।” किसी ने लिखा, “यह बात बहुत रिलेटेबल है, भले ही पिछली पीढ़ी को यह बेवकूफी लगे, लेकिन कौन भला हर किसी की कहानी में हीरो रहा है!”

एक यूज़र ने कहा, “अगर कोई कुछ समय के लिए बिना इनकम के रह सकता है, तो ही यह मुमकिन है। शायद इस पीढ़ी के पास वह फ्लेक्सिबिलिटी है। हमारी पीढ़ी के पास वह नहीं थी, और अब भी नहीं है।” एक और व्यक्ति ने लिखा, “सच कहूं तो, उनकी तारीफ़ करनी चाहिए। अभी तो ऐसा लगता है कि वे एक प्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से आते हैं, क्योंकि हम सब जानते हैं कि कितने लोग ऐसे ऑफ़र के लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार होंगे! लेकिन हां, यह जानना बहुत अच्छी बात है कि आप ज़िंदगी में बहुत जल्दी क्या चाहते हैं और आपके पास वह फ़ैसला लेने की क्षमता/हालात/सपोर्ट है!”

एक कमेंट में लिखा था, “काम का भविष्य उन लोगों से तय होगा जो सिर्फ़ सैलरी नहीं, बल्कि मकसद, भलाई और सार्थक ग्रोथ को अहमियत देते हैं।”

8th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग जैसा फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा, तो कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? देखिए लेवल 1, 4, 6 और 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary Calculation: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज है। नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी में कितना उछाल आएगा, यह पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करता है।

अगर सरकार 8वें वेतन आयोग में भी 7वें वेतन आयोग की तरह 2.57 का फिटमेंट फैक्टर बरकरार रखती है, तो अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और कुल टेक-होम सैलरी में कितना अंतर आएगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे बढ़ती है बेसिक सैलरी?

फिटमेंट फैक्टर एक कॉमन मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का फॉर्मूला: 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

2.57 फिटमेंट फैक्टर का गणित: अगर 8वें वेतन आयोग में भी 2.57 का ही फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 7वें वेतन आयोग की बेसिक पे को सीधे 2.57 से मल्टीप्लाई कर नया बेसिक पे तय किया जाएगा।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

1. लेवल 1 (ग्रुप D/एमटीएस कर्मचारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹18,000 × 2.57): ₹46,260

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक पे में सीधे ₹28,260 प्रति महीने की बढ़ोतरी होगी। महंगाई भत्ता यानी DA घटने के बाद नए बेसिक पर री-कैल्कुलेट होगा।

2. लेवल 4 (लोअर डिविजन क्लर्क / LDC)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹25,500

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹25,500 × 2.57): ₹65,535

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक सैलरी में लगभग ₹40,035 प्रति महीने की सीधी वृद्धि देखने को मिलेगी।

3. लेवल 6 (असिस्टेंट / सीनियर क्लर्क / सब-इंस्पेक्टर)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹35,400

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹35,400 × 2.57): ₹90,978

सैलरी में बढ़ोतरी: इस लेवल के कर्मचारियों की बेसिक पे में ₹55,578 प्रति महीने का बड़ा उछाल आएगा।

4. लेवल 10 (ग्रुप A / क्लास 1 अधिकारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹56,100

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹56,100 × 2.57): ₹1,44,177

सैलरी में बढ़ोतरी: ग्रुप-ए अधिकारियों की बेसिक पे में सीधे ₹88,077 प्रति महीने की बंपर बढ़ोतरी होगी।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

भत्तों पर क्या पड़ेगा असर?

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो केवल बेसिक सैलरी ही नहीं बदलती, बल्कि अन्य भत्तों का ढांचा भी पुनर्गठित होता है:

हाउस रेंट अलाउंस (HRA): नए बेसिक पे के आधार पर X, Y और Z श्रेणी के शहरों के हिसाब से HRA दोबारा तय किया जाएगा।

महंगाई भत्ता (DA): नया वेतन आयोग लागू होते ही मौजूदा DA शून्य (0%) कर दिया जाता है और नई बेसिक सैलरी पर फ्रेश तरीके से डीए की गणना शुरू होती है।

पेंशनभोगियों को फायदा: 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का सीधा लाभ 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन रिवीजन में भी मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनें इस बार 2.86 से 3.25 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं, लेकिन अगर सरकार पिछले आयोग के 2.57 के फॉर्मूले को भी अपनाती है, तब भी कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में जबरदस्त इजाफा होगा।

सैलरी नहीं, ये 5 आदतें खाली कर रही हैं आपकी जेब! बेंगलुरु के क्रिएटर ने बताया बचत का तरीका

बेंगलुरु के कंटेंट क्रिएटर अक्षय सीएन ने लोगों का ध्यान बचत से जुड़ी एक अहम समस्या की ओर दिलाया है। उनका कहना है कि कम सैलरी नहीं, बल्कि रोजाना होने वाले छोटे-छोटे खर्च कई बार आर्थिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि फूड डिलीवरी, कैब राइड, गैरजरूरी शॉपिंग, बेकार सब्सक्रिप्शन और बिना प्लानिंग के वीकेंड खर्च जैसी आदतें धीरे-धीरे बड़ी रकम में बदल जाती हैं।

अक्षय के मुताबिक, ज्यादा कमाई करने वाले लोग भी अगर खर्चों पर नजर नहीं रखते तो बचत नहीं कर पाते। वहीं सीमित आय वाले लोग सही प्लानिंग के जरिए पैसे बचा सकते हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच खर्च करने की आदतों और बेहतर वित्तीय प्रबंधन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

वायरल वीडियो में बताए पैसे खत्म करने वाले कारण

Instagram पेज @bangalore_viral चलाने वाले अक्षय सीएन ने एक वीडियो शेयर कर ऐसी 5 आदतों के बारे में बताया, जो धीरे-धीरे हर महीने की बचत को कम कर देती हैं। इनमें बार-बार ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना, कैब पर ज्यादा खर्च, बेवजह खरीदारी, बिना इस्तेमाल वाले सब्सक्रिप्शन और बिना बजट के वीकेंड प्लान शामिल हैं।

‘समस्या सैलरी नहीं, अनदेखे खर्च हैं’

अक्षय ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि कई लोग सोचते हैं कि सैलरी बढ़ने के बाद बचत शुरू करेंगे। लेकिन उनके मुताबिक, असली फर्क कमाई से ज्यादा पैसों को लेकर जागरूकता का होता है। उन्होंने बताया कि कुछ लोग 40 हजार रुपये कमाकर भी बचत कर लेते हैं, जबकि लाखों की आय वाले लोग भी महीने के अंत में परेशान रहते हैं।

छोटे खर्च कैसे बन जाते हैं बड़ा बोझ

अक्षय ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार का ₹300 का कैब राइड ज्यादा बड़ा खर्च नहीं लगता, लेकिन महीने में 20 बार लेने पर यही रकम काफी बढ़ जाती है। इसी तरह रोजाना फूड डिलीवरी, सेल के नाम पर खरीदारी और छोटे-छोटे डिजिटल पेमेंट लंबे समय में जेब पर भारी असर डाल सकते हैं।

सब्सक्रिप्शन और वीकेंड खर्च पर भी दी चेतावनी

उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसे ऐप्स और सेवाओं के लिए पैसे देते रहते हैं, जिनका इस्तेमाल तक नहीं करते। वहीं हर वीकेंड बाहर जाने की आदत भी बिना प्लानिंग के बजट बिगाड़ सकती है। उनके अनुसार, समस्या बाहर जाने में नहीं बल्कि बिना हिसाब के खर्च करने में है।

30 दिन वाला सवाल बदल सकता है खर्च की आदत

अक्षय ने पैसे बचाने का एक आसान तरीका भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कोई भी चीज खरीदने से पहले वह खुद से पूछते हैं,”क्या मैं 30 दिन बाद भी इस खरीदारी से खुश रहूंगा?” उनके मुताबिक, इस एक सवाल ने उन्हें बेहतर वित्तीय फैसले लेने में मदद की है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी प्रतिक्रिया

अक्षय की पोस्ट पर कई यूजर्स ने सहमति जताई। कुछ लोगों ने कहा कि रोजमर्रा के खर्चों की वजह से महीने के अंत तक पैसे बचाना मुश्किल हो जाता है। वहीं कई यूजर्स ने माना कि बचत के लिए ज्यादा कमाई से ज्यादा खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है।

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नौकरी से छंटनी हुई तो इस शख्स को मिल गया जीवन बदलने का मौका, AI की मदद से मिल गई 1.5 करोड़ की जॉब! जानिए कैसे

एक ही कंपनी में दस साल बिताने के बाद नौकरी छूटने से किसी का भी आत्मविश्वास डगमगा सकता है। एक प्रोफेशनल के लिए, उसके बाद के महीने अनिश्चितता, बार-बार रिजेक्शन और ऐसे इंटरव्यू से भरे रहे जिनसे कोई नतीजा नहीं निकला।

हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदल दिया। इंटरव्यू की प्रैक्टिस करने और अपने जवाबों को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके, उन्हें आखिरकार एक नई नौकरी मिल गई, जिसमें सालाना लगभग 1.5 करोड़ रुपये का पैकेज मिलता है।

AI ने उनके इंटरव्यू की तैयारी का तरीका बदल दिया

इस प्रोफेशनल ने Reddit पर “kml3141” यूज़रनेम से अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक ही कंपनी में 10 साल काम करने और तीन प्रमोशन पाने के बाद फरवरी के आखिर में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यह फैसला एक झटके जैसा था, और अगले पांच महीने नौकरी की मुश्किल तलाश में बीते। उन्होंने कई इंटरव्यू दिए लेकिन उन्हें बार-बार निराशा का सामना करना पड़ा।

कुछ पद रद्द कर दिए गए, कुछ को होल्ड पर डाल दिया गया, जबकि कुछ पद आखिरकार कंपनी के अंदर के लोगों से ही भर दिए गए। अपने चांस बेहतर करने के लिए, उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी में AI का इस्तेमाल करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वे AI टूल्स में जॉब डिस्क्रिप्शन पेस्ट करते थे और उन लोगों के बारे में भी जानकारी शेयर करते थे जो उनका इंटरव्यू लेने वाले थे।

इसके बाद AI ने उन्हें इंटरव्यू में पूछे जा सकने वाले संभावित सवालों का अंदाजा लगाने, इंटरव्यू लेने वालों के बारे में जानकारी जुटाने और STAR मेथड का इस्तेमाल करके जवाब तैयार करने में मदद की। उन्होंने यह भी बताया कि AI की मदद से वे इंटरव्यू के दौरान बहुत ज़्यादा बातें करने के बजाय अपने जवाब छोटे और काम की बात पर केंद्रित रख पाए।

Got an offer!!

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u/kml3141 in

Layoffs

आखिरकार मेहनत रंग लाई

कई महीनों की खोज के बाद, उन्हें एजेंसी इंडस्ट्री से बाहर की एक कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। इस नई नौकरी में सालाना सैलरी $155,000 (लगभग ₹1.5 करोड़) है, साथ ही 15% सालाना बोनस और पहले दिन से ही एम्प्लॉई बेनिफिट्स भी मिलेंगे। इसमें फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्स के साथ हाइब्रिड वर्क मॉडल की सुविधा भी है।

हालांकि उन्होंने सैलरी पर बातचीत (नेगोशिएशन) करने के बारे में सोचा था, लेकिन उन्होंने ऑफर स्वीकार करने का फैसला किया क्योंकि यह उनकी पिछली नौकरी की कमाई से ज़्यादा था। पीछे मुड़कर देखने पर, Reddit यूज़र ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें धैर्य रखने और लगातार अप्लाई करते रहने का महत्व सिखाया, भले ही कोई नौकरी पहुंच से बाहर लग रही हो।

उनकी पोस्ट को दूसरे Reddit यूज़र्स से भी काफी सपोर्ट मिला। एक यूज़र ने पूछा, “बधाई हो! आपने इंटरव्यू की तैयारी कैसे की? आजकल वे ज़्यादातर व्यवहार और स्थिति-आधारित (बिहेवियरल और सिनेरियो-बेस्ड) इंटरव्यू पर ज़ोर देते हैं।”एक और यूज़र ने लिखा, “बधाई हो! यहां दूसरों का हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “अरे OP, इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई। अगर आपको कोई दिक्कत न हो, तो क्या मैं आपसे DM में उन प्रॉम्प्ट्स के बारे में कुछ मदद ले सकता हूं जिनका आपने इस्तेमाल किया था? ये इंटरव्यू की तैयारी में मेरे काम आ सकते हैं। मुझे आपसे कुछ मेंटरशिप चाहिए।”

एक और यूज़र ने बताया, “मैंने एक एजेंसी के लिए काम किया था और मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपकी नई नौकरी के लिए शुभकामनाएं! अब इस बात पर ध्यान दें कि आपके पास एक बड़ा इमरजेंसी फंड हो और आप अपना कोई भी बकाया कर्ज़ चुका दें।”

ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

income tax

अगर आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) अभी तक दाखिल नहीं किया है, तो तुरंत सावधान हो जाएं! व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगियों के लिए बिना  किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।

 

अंतिम समय में इनकम टैक्स पोर्टल पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से सर्वर स्लो होने या पेमेंट अटकने की समस्या हो सकती है। यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आपको  भारी लेट फीस, ब्याज और कई वित्तीय नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।
 

धारा 234F के तहत पेनल्टी (Late Fee Slabs) 

आयकर कानून की धारा 234F के अनुसार, नियत तारीख के बाद रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने पर निम्नलिखित जुर्माना लागू होता है:

 

कुल वार्षिक आय (Total Income) 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करने पर लेट फीस

2.5 लाख तक रुपए (मूल छूट सीमा) कोई पेनल्टी नहीं

2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक 1,000 रुपए अधिकतम लेट फीस

5 लाख रुपए से अधिक 5,000 रुपए लेट फीस

 

समय पर ITR न भरने के 4 बड़े नुकसान

1. धारा 234A के तहत ब्याज : यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो समय सीमा समाप्त होने के बाद आपको बकाए टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा। 
 

2. नुकसान (Losses) को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना : शेयर बाजार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस से हुए नुकसान को अगले वर्षों के मुनाफे से एडजस्ट (Carry Forward) करने का विकल्प समाप्त हो जाता है।
 

3. ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प बंद: यदि आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनना चाहते थे, तो समय सीमा बीत जाने के बाद आप केवल न्यू टैक्स  रिजीम (New Tax Regime) के तहत ही बेलैटेड रिटर्न भर पाएंगे।

4. रिफंड में देरी : यदि आपका TDS कटा है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देर से फाइल करने पर आपका रिफंड अटक सकता है या उसमें काफी देरी हो सकती है।

 

पोर्टल पर ऑनलाइन ITR फाइल करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

समय सीमा समाप्त होने से पहले घर बैठे आधिकारिक पोर्टल (incometax.gov.in) पर आसानी से ITR फाइल करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:
 

1.ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: PAN और पासवर्ड तैयार रखें।

आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपनी यूजर आईडी (PAN) और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें।
 

2.File Income Tax Return चुनें:

लॉगिन के बाद मुख्य डैशबोर्ड पर e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प पर क्लिक करें।
 

3.आकलन वर्ष (Assessment Year) का चयन करें:

आकलन वर्ष में AY 2026-27 का चयन करें। इसके बाद ऑनलाइन फाइलिंग (Online Mode) चुनें और 'Start New Filing' पर क्लिक करें।
 

4.करदाता स्थिति एवं सही ITR फॉर्म का चुनाव करें:

अपनी स्थिति Individual चुनें। यदि आपकी केवल वेतन, एक मकान संपत्ति या ब्याज से आय है, तो ITR-1 (Sahaj) चुनें।
 

5.AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें:

अपने फॉर्म 16, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के आंकड़ों की जांच करें। यदि कोई टैक्स बकाया दिखता है, तो e-Pay Tax  के माध्यम से तुरंत भुगतान करें।
 

6.समीक्षा करें और e-Verify पूरा करें:

अपनी सभी जानकारियों की दोबारा समीक्षा करके Submit पर क्लिक करें। इसके बाद अपने आधार OTP या नेट बैंकिंग का उपयोग करके e-Verification प्रक्रिया तुरंत पूरी  करें (बिना ई-वेरिफिकेशन के ITR अमान्य माना जाता है)।
 

ITR सबमिट करने से पहले अंतिम चेकलिस्ट 

– AIS/TIS की जांच: अपने पोर्टल पर जाकर AIS जरूर डाउनलोड करें और उसमें दर्ज ब्याज, डिविडेंड या शेयर ट्रेडिंग की जानकारी अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।

– बैंक खाता वैलिडेट करें: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता पोर्टल पर पूर्व-सत्यापित (Pre-validated) है ताकि रिफंड सीधे आपके खाते में आ सके।

– ई-वेरिफिकेशन न भूलें: ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।

सलाह: यदि पोर्टल पर अत्यधिक लोड के कारण तकनीकी समस्या आए, तो स्क्रीनशॉट लेकर रखें और थोड़ा रुककर पुनः प्रयास करें। 31 जुलाई की मध्यरात्रि से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। 

 

आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को 'Defective Return' (धारा  139(9)) करार दे सकता है। 

व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals) के लिए ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 सबसे आम फॉर्म हैं। 

ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 में मुख्य अंतर 

विषय ITR-1 (Sahaj) ITR-2

पात्रता (Eligibility) केवल भारत के निवासी (Resident Individuals) निवासी (Resident), अनिवासी (NRI) और HUF

कुल आय सीमा ₹50 लाख तक ₹50 लाख से अधिक (कोई सीमा नहीं)

मकान संपत्ति (House Property) केवल 1 मकान संपत्ति से आय 1 से अधिक मकान संपत्तियों से आय

कैपिटल गेन्स (शेयर, MF, प्रॉपर्टी) केवल Section 112A के तहत ₹1.25 लाख तक LTCG सभी प्रकार के Capital Gains (STCG/LTCG,  प्रॉपर्टी, सोना आदि)

विदेशी संपत्ति / आय (Foreign Assets) अनुमति नहीं है विदेश में संपत्ति, शेयर (RSUs/ESOPs) या आय होने पर अनिवार्य

कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 तक ₹5,000 से अधिक होने पर

डायरेक्टर / अनलिस्टेड शेयर कंपनी में डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल नहीं कर सकते कंपनी के डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल कर सकते हैं

आपके लिए कौन सा फॉर्म सही है?

1. आपको ITR-1 (Sahaj) चुनना चाहिए यदि:
 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख तक है। 

आपकी आय का मुख्य स्रोत वेतन (Salary), पेंशन (Pension) या ब्याज/डिविडेंड (Other Sources) है। 

आपके पास केवल 1 मकान संपत्ति (Single House Property) है। 

आपकी कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 या उससे कम है। 

आपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचे हैं, लेकिन आपका कुल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Section 112A u/s) ₹1.25 लाख के अंदर है और कोई अन्य कैपिटल गेन  या लॉस नहीं है। 

2. आपको ITR-2 चुनना चाहिए यदि: 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख से अधिक है। 

आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान या सोना बेचा है और आपको Short-Term Capital Gain (STCG) या अधिक LTCG हुआ है। 

आपके पास 2 या उससे अधिक मकान हैं जिनसे किराया या आय आती है। 

आपकी विदेशी आय है या विदेश में कोई बैंक खाता/कंपनी शेयर (जैसे MNCs से मिले US Stocks/ESOPs) हैं। 

आपकी कृषि आय ₹5,000 से अधिक है। 

आप किसी कंपनी में डायरेक्टर (Director) हैं या आपके पास अनलिस्टेड कंपनियों के शेयर हैं। 

आपका आवासीय दर्जा NRI (Non-Resident Indian) या RNOR है। 

ध्यान दें: बिजनेस या प्रोफेशन से आय (जैसे फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग या बिज़नेस प्रॉफिट) कमाने वाले व्यक्ति ITR-1 या ITR-2 का उपयोग नहीं कर सकते। उनके लिए ITR-3  या ITR-4 लागू होता है। 

 

 

आयकर पोर्टल (Income Tax Portal) से AIS (Annual Information Statement) डाउनलोड करना और उसका Form 16 से मिलान  (Reconciliation) करना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इससे आपके ITR में किसी प्रकार के मिसमैच की संभावना खत्म हो जाती है।
 

1. AIS कैसे डाउनलोड करें? (Step-by-Step Guide) 
 

1.इ-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें:

आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपने PAN (यूजर ID) और पासवर्ड से लॉगिन करें।

2.Services मेनू में जाएं:

लॉगिन के बाद मुख्य मेनू बार पर Services टैब पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से Annual Information Statement (AIS) चुनें।

3.AIS पोर्टल पर रिडायरेक्ट हों:

स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज आएगा, वहां Proceed पर क्लिक करें। यह आपको एक नए Compliance Portal पर ले जाएगा।

4.असेसमेंट ईयर और फाइल फॉर्मेट चुनें:

Compliance Portal पर AIS टैब पर क्लिक करें। ऊपर से सही असेसमेंट ईयर (जैसे AY 2026-27) चुनें।

5.PDF या Excel में डाउनलोड करें:PDF खोलने के लिए पासवर्ड डालें.

आप पूरे विवरण को PDF या JSON/Excel फॉर्मेट में डाउनलोड करने के लिए Download बटन पर क्लिक करें।
 

PDF खोलने का पासवर्ड Format: 

AIS की PDF फाइल पासवर्ड प्रोटेक्टेड होती है। इसका पासवर्ड आपका PAN (स्मॉल लेटर्स में) + आपकी जन्मतिथि (DDMMYYYY) होता है। 

उदाहरण: यदि आपका PAN ABCDE1234F और DOB 15/08/1990 है, तो पासवर्ड होगा: abcde1234f15081990।

2. Form 16 और AIS का मिलान (Reconciliation) कैसे करें? 

Form 16 आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) द्वारा दी गई सैलरी और काटे गए TDS का प्रमाण है, जबकि AIS में आपकी सैलरी के अलावा बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रेडिंग आदि की भी  जानकारी होती है। 

दोनों का मिलान करते समय निम्नलिखित बिंदुओं को क्रमानुसार जांचें:

1. ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) का मिलान 

Form 16 (Part B): अपनी कुल ग्रॉस सैलरी और एम्प्लॉयर द्वारा काटे गए कुल TDS की जांच करें। 

AIS (Part B – TDS/TCS section): सैलरी कोड (192) के सामने दिख रही रकम और काटे गए TDS का मिलान Form 16 के Part A से  करें। 

ध्यान दें: यदि आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों एम्प्लॉयर्स के Form 16 की कुल रकम का जोड़ AIS की कुल सैलरी से मिलना चाहिए। 

2. TDS और Form 26AS से क्रॉस-चेक 

Form 16 में दर्ज कुल TDS कटौती, AIS के TDS/TCS टैब और आपके Form 26AS में दिख रहे टैक्स क्रेडिट से पूरी तरह मैच होनी चाहिए। 

3. अन्य आय (Other Income) की पहचान 

AIS में सैलरी के अलावा कई ऐसी आय दर्ज होती हैं जो Form 16 में नहीं होतीं: 

बैंक ब्याज (Savings/FD Interest): पासबुक और बैंक से मिले इंटरेस्ट सर्टिफिकेट से इसका मिलान करें। 

डिविडेंड (Dividend Income): शेयर या म्यूचुअल फंड से मिले डिविडेंड को क्रॉस-चेक करें। 

कैपिटल गेन्स (Shares/MF Sale): शेयर या प्रॉपर्टी बिक्री से हुई कमाई AIS के SFT Information में दिखती है।
 

यदि AIS में गलत जानकारी या अंतर दिखाई दे तो क्या करें? 
 

अगर AIS में कोई ऐसी इनकम दर्ज दिख रही है जो आपकी नहीं है या कोई आंकड़ा दो बार (Duplicate) दर्ज हो गया है, तो आप पोर्टल पर Feedback दे सकते हैं: 

1. AIS Portal पर उस गलत एंट्री/लाइन आइटम पर क्लिक करें। 

2. Optional / Feedback बटन चुनें।

3. उपयुक्त विकल्प चुनें (जैसे: Information is not correct, Income is not taxable, या Information relates to  other PAN/Year)।

4. इसे सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद आपकी TIS (Taxpayer Information Summary) अपने आप अपडेट हो जाएगी।