8th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग के जैसे इस बार भी फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा, तो कितनी बढ़ेगी चपरासी, टीचर और अधिकारी की सैलरी?

8th Pay Commission Salary Calculation: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और नए पे मैट्रिक्स को लेकर उत्सुकता चरम पर है। कर्मचारियों की सबसे बड़ी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार फिटमेंट फैक्टर कितना तय करती है।

अगर सरकार 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर को ही 8वें वेतन आयोग में आधार मानती है, या फिर यूनियनों की मांग के मुताबिक इसमें बदलाव करती है, तो ग्रुप-डी कर्मचारी (चपरासी/एमटीएस), स्कूल शिक्षक (TGT/PGT) और क्लास-1 राजपत्रित अधिकारी के बेसिक पे और टेक-होम सैलरी में कितना उछाल आएगा? आइए समझते हैं पूरा गणित।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है, जिसका उपयोग वर्तमान 7वें वेतन आयोग के बेसिक पे को नए वेतन आयोग के संशोधित बेसिक पे में बदलने के लिए किया जाता है।

नया बेसिक पे=मौजूदा 7th CPC बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था।

नया बेसिक पे तय होने के बाद महंगाई भत्ता (DA) 0% पर रीसेट हो जाता है और मकान किराया भत्ता (HRA) व परिवहन भत्ता (TA) नए बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर फिर से जोड़ा जाता है।

2.57 फिटमेंट फैक्टर पर चपरासी, टीचर और अधिकारी की सैलरी का गणित

7वें वेतन आयोग के न्यूनतम 2.57 फिटमेंट फैक्टर को आधार मानते हुए अलग-अलग पदों की संशोधित सैलरी इस प्रकार होगी:

A. चपरासी / सपोर्ट स्टाफ (Level 1 – MTS/Group D)

मौजूदा 7th CPC बेसिक पे: ₹18,000

2.57 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नया बेसिक पे: ₹18,000 × 2.57 = ₹46,260

मासिक बेसिक में बढ़ोतरी: ₹28,260 की सीधी वृद्धि।

B. शिक्षक / TGT (Level 7)

मौजूदा 7th CPC बेसिक पे: ₹44,900

2.57 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नया बेसिक पे: ₹44,900 × 2.57 = ₹1,15,393 (पे मैट्रिक्स में लगभग ₹1,15,400)

मासिक बेसिक में बढ़ोतरी: ₹70,500 से अधिक का उछाल।

C. क्लास-1 अधिकारी / एंट्री-लेवल गजटेड अफसर (Level 10)

मौजूदा 7th CPC बेसिक पे: ₹56,100

2.57 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नया बेसिक पे: ₹56,100 × 2.57 = ₹1,44,177 (पे मैट्रिक्स में लगभग ₹1,44,200)

मासिक बेसिक में बढ़ोतरी: ₹88,000 से अधिक की वृद्धि।

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक पे में संभावित बदलाव

वर्तमान में वित्तीय विश्लेषकों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा 1.92x से लेकर 2.86x तक के फिटमेंट फैक्टर का अनुमान लगाया जा रहा है। नीचे दिए गए टेबल से समझिए कि किस स्तर पर कितना प्रभाव पड़ेगा:

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक पे में संभावित बदलाव

इन-हैंड सैलरी पर क्या असर होगा?

जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तो महंगाई भत्ता (DA) 0% से दोबारा शुरू होता है। वहीं शहरों की श्रेणी (X – 30%, Y – 20%, Z – 10%) के हिसाब से नए बेसिक पे पर HRA जोड़ा जाता है।

2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर कुल इन-हैंड सैलरी में लगभग 20% से 30% की प्रभावी बढ़ोतरी देखी जाती है, क्योंकि जमा हुआ महंगाई भत्ता नए मूल वेतन में समाहित हो जाता है।

अगर 8वां वेतन आयोग 7वें वेतन आयोग के 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को न्यूनतम मानक स्वीकार करता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹46,000 के पार पहुंच जाएगी। वहीं मध्य स्तर के शिक्षकों की बेसिक सैलरी ₹1.15 लाख और राजपत्रित अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹1.44 लाख को पार कर जाएगी। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा गठित वेतन आयोग की सिफारिशों और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

8th Pay Commission: बेसिक पे से लेकर भत्तों तक, जानिए 7 और 10 अगस्त को वेतन आयोग किस बात पर करेगा महत्वपूर्ण चर्चा

8th Pay Commission Salary Structure: देश के करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में आठवां वेतन आयोग को लेकर खूब चर्चा है। यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण फेज में पहुंच चुका है। इस दौरान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के लिए हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों से लगातार चर्चा की जा रही है।

7 और 10 अगस्त को होगी बड़ी बैठक

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अगले वेतन संशोधन पर चल रहे परामर्श के तहत दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारी संघों, परिसंघों और यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। 23 जुलाई 2026 को जारी एक नोटिस में आयोग ने बताया कि यह बैठक उसकी हितधारक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले कर्मचारी प्रतिनिधियों के सुझाव और सिफारिशें जुटा रहा है।

सैलरी स्ट्रक्चर के 3 मुख्य पिलर, जिन पर टिकी है पूरी चर्चा

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का नया गणित मुख्यतः तीन हिस्सों में तय किया जा रहा है:

A. बेसिक पे और फिटमेंट फैक्टर

बेसिक पे आपकी सैलरी और पेंशन की सबसे मजबूत नींव है, क्योंकि ग्रेच्युटी, पीएफ और बाकी भत्ते इसी के आधार पर तय होते हैं। पुराने बेसिक पे को नए बेसिक पे में बदलने के लिए फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। नेशनल काउंसिल – जेसीएम (NC-JCM) ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

वहीं ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने परिवार की निर्भरता इकाई को 3 से बढ़ाकर 4.4 करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बेसिक पे में बड़ा उछाल आएगा।

B. भत्ते (DA, HRA और TA)

नए बेसिक पे के लागू होते ही उस पर आधारित सभी प्रमुख भत्ते री-कैलकुलेट होंगे:

HRA (मकान किराया भत्ता): एआईएनपीएसईएफ ने X कैटेगरी के शहरों के लिए 36%, Y के लिए 24% और Z कैटेगरी के लिए 12% HRA करने की सिफारिश की है। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि जब भी DA बढ़े, HRA में खुद-ब-खुद बढ़ोतरी हो।

TA (ट्रेवल भत्ता): लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम TA बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीने करने का प्रस्ताव है।

C. ग्रॉस सैलरी

बेसिक पे और सभी भत्तों को मिलाकर आपकी कुल कमाई तय होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर यूनियनों के ये सभी प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी ₹37,080 से बढ़कर सीधे ₹61,344 तक पहुंच सकती है यानी करीब 65% तक की भारी बढ़ोतरी!

कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें?

आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को 18 महीने की अवधि के लिए किया गया था। इसके अनुसार, आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2027 से मध्य-2027 के बीच सौंप सकता है।

अगर हम ऐतिहासिक ट्रेंड्स को देखें तो सिफारिशें आने के बाद सरकार द्वारा इसे पूरी तरह लागू करने में 2 से 3 साल का समय लगता है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से एरियर के साथ प्रभावी हो सकती है।

8वें वेतन आयोग पर आया बड़ा अपडेट! अब केंद्रीय कर्मचारी 7 और 10 अगस्त के लिए कर लें पूरी तैयारी

8th Pay Commission updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के अगले पे रिवीजन के लिए जारी हलचल के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने दिल्ली स्थित केंद्रीय कर्मचारियों के संघों, फेडरेशनों और यूनियनों के साथ वार्ता करने के लिए तारीख का ऐलान कर दिया है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक 8वें वेतन आयोग ने दिल्ली में स्थित या पंजीकृत कर्मचारी यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त को आयोग के साथ बातचीत करने का निमंत्रण दिया है। यह बैठकें अगली सैलरी रिवीजन पर चल रहे विचार-विमर्श की प्रक्रिया के तहत आयोजित की जा रही हैं।

23 जुलाई के नोटिस में आयोग ने क्या कहा?

वेतन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले स्टेकहोल्डर्स की सिफारिशें और विचार जानने के लिए यह परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। 23 जुलाई को जारी अपने नोटिस में आयोग ने कहा कि वह सिर्फ दिल्ली में स्थित या पंजीकृत केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के कर्मचारियों के संघों, परिसंघों और यूनियनों से 7 अगस्त और 10 अगस्त को बातचीत करेगा। हालांकि, इस बैठक में भाग लेने के लिए एक शर्त रखी गई है। सिर्फ वही संगठन इस बैठक के लिए अपॉइंटमेंट मांग सकते हैं जिन्होंने पहले ही अपना ज्ञापन जमा कर दिया है और आयोग के साथ दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में अब तक कोई वार्ता नहीं की है।

31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य

बैठक में शामिल होने के पात्र संगठनों के लिए आयोग ने समय-सीमा तय कर दी है। इच्छुक पात्र संगठनों को 31 जुलाई तक ऑनलाइन माध्यम से अपना अनुरोध जमा करना होगा। अनुरोध भेजते समय संगठनों को अपनी यूनिक मेमो आईडी साथ में दर्ज करनी होगी। बैठकों का स्थान और समय अलग से बताया जाएगा।

अन्य राज्यों के यूनियनों के लिए भी तय होगी तारीखें

आने वाले महीनों में देश भर के अन्य राज्यों के यूनियनों के साथ भी बातचीत की जाएगी। दिल्ली-एनसीआर के बाहर के कर्मचारी संघ और यूनियनें अपने स्वयं के राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में आयोग के साथ बातचीत के लिए समय मांग सकते हैं। आयोग ने बताया है कि आने वाली बैठकों और परामर्श का पूरा शेड्यूल उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया जाता रहेगा।

क्यों अहम हैं ये बैठकें?

कर्मचारी यूनियनों और संघों के साथ बातचीत हर वेतन आयोग के कामकाज का एक मानक हिस्सा होती है। इस बातचीत के दौरान स्टेकहोल्डर्स आयोग के सामने अपने मेमोरेंडम देके हैं। इनमें पे-स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन लाभ, करियर में प्रगति और सेवा शर्तें जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होते हैं। आयोग इन सभी मेमोरेंडम के साथ-साथ अलग अलग मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के इनपुट की समीक्षा करने के बाद ही केंद्र सरकार के लिए अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करता है।

क्या है 8वां वेतन आयोग?

केंद्र सरकार ने लाखों वर्किंग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन लाभों में संशोधन की सिफारिश करने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। आयोग की सिफारिशें एक बार अंतिम रूप ले लेने और सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद देश के लाखों सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए अगले दौर के वेतन संशोधन को निर्धारित करेंगी। फिलहाल आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले अलग अलग स्टेकहोल्डर्स से मिलने और राय बनाने के दौर में है।

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8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं! जानिए वे 5 बड़े आर्थिक कारण जो तय करेंगे आपकी सैलरी

8th Pay Commission Salary Revision Factors: क्या 8वें वेतन आयोग में सिर्फ ‘फिटमेंट फैक्टर’ ही आपकी सैलरी और पेंशन बढ़ाएगा? जवाब है- नहीं! 3 नवंबर 2025 को बने इस आयोग का आधा समय यानी 9 महीने पूरा हो चुका है और अब फोकस केवल मांगों पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक हकीकत पर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारियों का पे-स्केल तय करने के लिए 5 ऐसे बड़े आर्थिक कारण होंगे, जिन पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े आर्थिक फैक्टर हैं, जो 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन संशोधन को आकार देंगे।

फिटमेंट फैक्टर की मांग और इतिहास

फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

पुराने वेतन आयोगों का ट्रेंड: 5वें वेतन आयोग में कोई एक समान ऑफिशियल मल्टीप्लायर नहीं था। वहीं 6वें वेतन आयोग में 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था।

यूनियनों की मांग: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘वेतन आयोग हमेशा एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। फिटमेंट फैक्टर भले ही सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरता है, लेकिन यह व्यापक मूल्यांकन का केवल एक हिस्सा है।’

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

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सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से फैसला क्यों नहीं हो सकता?

फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मूल वेतन में वृद्धि तय करता है, इसलिए यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। हालांकि, कोई भी वेतन आयोग देश की आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी करके सिर्फ एक आंकड़े पर फैसला नहीं ले सकता।

आयोग को कर्मचारियों की आकांक्षाओं और देश के राजकोषीय संतुलन के बीच तालमेल बिठाना होता है। हाल ही में भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों में मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपेगा। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और सरकार उसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक वेतन वृद्धि या पेंशन सुधार को लेकर किए जाने वाले सभी अनुमान केवल संभावित हैं।

पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, इमरजेंसी के वक्त किसका इस्तेमाल करें? समझिए पूरा हिसाब

Personal Loan vs Credit Card: अगर अचानक अस्पताल का बड़ा बिल आ जाए। घर में कोई इमरजेंसी आ जाए। या नौकरी छूटने की वजह से तुरंत पैसों की जरूरत पड़ जाए। ऐसे समय में ज्यादातर लोगों के सामने दो विकल्प होते हैं- क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन-सा विकल्प कम महंगा पड़ता है? क्या हर इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना सही है? या फिर सीधे पर्सनल लोन लेना बेहतर रहेगा? जवाब आपकी जरूरत, रकम और उसे लौटाने की क्षमता पर निर्भर है।

पहले एक आसान उदाहरण समझिए

अब मान लीजिए आपको अचानक ₹2 लाख की जरूरत पड़ गई। यह पैसा आपको अस्पताल के बिल के लिए चाहिए। अब आपके पास दो रास्ते हैं। बैंक से 3 साल के लिए 12% ब्याज पर पर्सनल लोन लें। या क्रेडिट कार्ड से पूरा भुगतान कर दें। यहीं से दोनों विकल्पों का फर्क शुरू हो जाता है।

अगर पर्सनल लोन लेते हैं

मान लीजिए बैंक ने आपको ₹2 लाख का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए दे दिया।

डिटेलपैसों का हिसाब
लोन अमाउंट₹2,00,000
ब्याज दर12% सालाना
अवधि3 साल
अनुमानित EMIकरीब ₹6,640
कुल भुगतानकरीब ₹2.39 लाख
कुल ब्याजकरीब ₹39,000

EMI तय रहती है। आपको पहले से पता होता है कि हर महीने कितना पैसा देना है।

अगर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं?

अब मान लीजिए आपने पूरे ₹2 लाख का भुगतान क्रेडिट कार्ड से कर दिया। लेकिन बिल आने पर आप सिर्फ Minimum Due भरते रहे। यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल ₹2 लाख आया है। बैंक कहता है कि फिलहाल सिर्फ ₹10,000 का मिनिमम ड्यू भर दीजिए। इससे लेट फीस तो नहीं लगेगी, लेकिन बाकी ₹1,90,000 पर हर महीने ब्याज लगता रहेगा।

ज्यादातर क्रेडिट कार्ड 30% से 48% सालाना तक ब्याज वसूलते हैं। यानी करीब 2.5% से 4% हर महीने। अगर आपने पूरा बिल नहीं चुकाया, तो ब्याज तेजी से बढ़ने लगता है। कई बार उस पर GST और दूसरे चार्ज भी जुड़ जाते हैं। ऐसे में ₹2 लाख का बकाया कुछ ही महीनों में काफी महंगा साबित हो सकता है।

एक नजर में सीधी तुलना

डिटेलपर्सनल लोनक्रेडिट कार्ड
ब्याज10%-18% सालाना
30%-48% सालाना

भुगतानतय EMIMinimum Due का विकल्प
बड़ी रकम के लिएबेहतरमहंगा
छोटी अवधि के लिएठीकअगर पूरा बिल समय पर चुका दें तो बेहतर

तो क्रेडिट कार्ड कब इस्तेमाल करें?

अगर आपको भरोसा है कि 30 से 45 दिन के भीतर पूरा पैसा चुका देंगे, तो क्रेडिट कार्ड अच्छा विकल्प हो सकता है।

मान लीजिए आपने ₹50,000 का अस्पताल का बिल कार्ड से भरा। सैलरी आने में सिर्फ 20 दिन बाकी हैं। अगर बिल की Due Date तक पूरा भुगतान कर दिया, तो आमतौर पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा। यही क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी ताकत है।

और पर्सनल लोन कब लेना चाहिए?

अगर रकम बड़ी है और उसे लौटाने में कई महीने या साल लगेंगे, तो पर्सनल लोन बेहतर रहता है।

मान लीजिए शादी, इलाज या घर की मरम्मत के लिए ₹3 लाख चाहिए। आपको पता है कि इसे एक-दो महीने में नहीं चुका पाएंगे। ऐसे में पर्सनल लोन लेना ज्यादा समझदारी होगी। इसकी EMI तय रहती है और ब्याज भी क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होता है।

₹1 लाख पर कितना पड़ेगा फर्क?

मान लीजिए आपको ₹1 लाख की जरूरत है। आप यह रकम क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं और सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते रहते हैं। ऐसे में एक साल में ब्याज और दूसरे चार्ज मिलाकर आपको ₹30,000-₹40,000 या उससे भी ज्यादा अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

वहीं, अगर आप यही ₹1 लाख 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, तो आपकी EMI करीब ₹3,320 महीने बनेगी। तीन साल में कुल भुगतान करीब ₹1.20 लाख होगा। यानी कुल ब्याज करीब ₹19,500-₹20,000 पड़ेगा।

सबसे अच्छा विकल्प क्या है?

इमरजेंसी में सबसे बड़ा फैसला पैसा जुटाना नहीं, सही तरीके से पैसा जुटाना होता है। अगर कुछ हफ्तों में पैसा लौटा सकते हैं, तो क्रेडिट कार्ड ठीक है। लेकिन अगर कर्ज लंबे समय तक चलेगा, तो पर्सनल लोन आपकी जेब पर कम बोझ डालेगा।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा विकल्प इमरजेंसी फंड है। अगर आपके पास 6 महीने के खर्च जितनी बचत अलग रखी है, तो ऐसी स्थिति में आपको न महंगा ब्याज देना पड़ेगा और न ही कर्ज लेना पड़ेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Warren Buffett: वॉरेन बफे 2034 तक अपनी पूरी संपत्ति दान करेंगे, बिल गेट्स फाउंडेशन को नहीं मिला कोई पैसा

Warren Buffett: दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे ने इस साल अपनी सालाना चैरिटी डोनेशन में Bill Gates Foundation को शामिल नहीं किया। उन्होंने करीब 6 अरब डॉलर (करीब ₹50,000 करोड़) का दान अपने परिवार से जुड़ी चार फाउंडेशन को देने का ऐलान किया। मंगलवार को जारी बयान में उन्होंने Bill Gates Foundation का कोई जिक्र नहीं किया।

2034 तक पूरी संपत्ति दान करेंगे

बफे ने यह भी कहा कि उनकी बची हुई Berkshire Hathaway की हिस्सेदारी 31 दिसंबर 2034 तक पूरी तरह दान कर दी जाएगी। इसकी मौजूदा कीमत करीब 146 अरब डॉलर है।

पहले योजना यह थी कि उनके निधन के बाद उनके तीन बच्चे 10 साल के भीतर उनकी संपत्ति दान करेंगे। अब बफे ने इस प्रक्रिया को पहले ही पूरा करने का फैसला किया है।

Bill Gates Foundation क्यों नहीं शामिल?

बफे ने इस फैसले की वजह नहीं बताई। हालांकि, यह फैसला ऐसे समय आया है जब बिल गेट्स के दिवंगत फाइनेंसर जॉफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein )से संबंधों को लेकर फिर चर्चा हो रही है।

बिल गेट्स ने हमेशा कहा है कि उन्हें Epstein के अपराधों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि Epstein से उनकी मुलाकात सिर्फ चैरिटी के लिए फंड जुटाने की उम्मीद में हुई थी। बिल गेट्स पर किसी तरह का आपराधिक आरोप नहीं लगा है।

पहले सबसे ज्यादा दान Gates Foundation को मिला

2006 में अपनी संपत्ति दान करने का ऐलान करने के बाद से बफे 61 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम Bill Gates Foundation को दे चुके हैं। हर साल वह Berkshire Hathaway के शेयर Gates Foundation और अपने बच्चों की फाउंडेशन को दान करते रहे हैं।

कभी गहरे दोस्त थे Buffett और Gates

एक समय वॉरेन बफे और बिल गेट्स बेहद करीबी दोस्त थे। दोनों अक्सर मिलते थे, साथ में छुट्टियां बिताते थे और ऑनलाइन ब्रिज खेलते थे। गेट्स कई साल तक Berkshire Hathaway के बोर्ड में रहे। वहीं, बफे भी Gates Foundation के बोर्ड का हिस्सा थे।

हालांकि, बफे ने इसी साल CNBC को बताया था कि 2025 में Epstein से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद से उनकी गेट्स से कोई बातचीत नहीं हुई है।

Epstein मामले पर क्या बोले बफे?

बफे ने कहा कि Jeffrey Epstein लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाने में माहिर था। उन्होंने कहा कि वह किसी ऐसे मामले से जुड़ना नहीं चाहते, जिसकी भविष्य में जांच हो सकती हो।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी होती है कि इतने प्रभावशाली और अमीर लोग Epstein के जाल में कैसे फंस गए। वहीं, Gates Foundation ने बताया है कि उसने Epstein से जुड़े पुराने संबंधों की समीक्षा शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी साझेदारियों की जांच के नियम भी मजबूत किए जा रहे हैं।

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ITR Filing 2026: ₹12.75 लाख तक सैलरी है, फिर भी देना पड़ सकता है टैक्स! जानिए क्यों

ITR Filing 2026: न्यू टैक्स रिजीम में कई नौकरीपेशा लोगों को लगता है कि अगर उनकी सालाना सैलरी ₹12.75 लाख तक है, तो उन्हें कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता।

अगर आपकी कमाई का कुछ हिस्सा ऐसे स्रोतों से आया है, जिन पर अलग टैक्स दर लागू होती है, तो आपको टैक्स देना पड़ सकता है। भले ही आपकी सैलरी पर Section 87A के तहत टैक्स छूट मिल रही हो।

किन कमाई पर देना पड़ सकता है टैक्स?

Section 87A की छूट सिर्फ उस आय पर मिलती है, जिस पर सामान्य टैक्स स्लैब लागू होता है। लेकिन कुछ तरह की कमाई पर अलग नियम हैं। उन पर यह छूट नहीं मिलती। इनमें शामिल हैं…

  • शेयर बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन
  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन
  • लॉटरी से जीती रकम
  • घुड़दौड़ से कमाई
  • ऑनलाइन गेमिंग या फैंटेसी गेम्स से कमाई

यानी आपकी कुल आय ₹12.75 लाख से कम हो सकती है। फिर भी इन स्रोतों से कमाई हुई है, तो उस हिस्से पर टैक्स देना पड़ सकता है।

ऐसा क्यों होता है?

सरकार ने Section 87A की छूट सिर्फ सामान्य टैक्स स्लैब वाली आय के लिए दी है। जिन कमाई पर पहले से अलग टैक्स दर तय है, उन पर यह छूट लागू नहीं होती।

उदाहरण के लिए, अगर आपने ऑनलाइन गेमिंग या फैंटेसी स्पोर्ट्स से पैसे जीते हैं, तो उस कमाई पर 30% की फ्लैट टैक्स दर लगती है। गेमिंग प्लेटफॉर्म TDS भी काटते हैं। ऐसे में Section 87A का फायदा नहीं मिलेगा।

ITR भरते समय ये गलती न करें

  • अगर आपकी ऐसी कोई कमाई है, तो उसे ITR में जरूर दिखाएं।
  • कैपिटल गेन को सही तरह शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म में दर्ज करें।
  • खरीद और बिक्री की पूरी जानकारी भरें।
  • AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें।
  • लॉटरी, घुड़दौड़ और ऑनलाइन गेमिंग से हुई कमाई भी जरूर बताएं।
  • सिर्फ इसलिए पूरी आय को टैक्स-फ्री न मान लें कि आपकी सैलरी ₹12.75 लाख से कम है।

अगर आपने ऐसी आय छिपाई या गलत जानकारी दी, तो बाद में इनकम टैक्स विभाग की तरफ से टैक्स डिमांड या नोटिस आ सकता है।

Salary Hike SIP: सैलरी बढ़ने पर कितनी बढ़ाएं SIP? इन 5 चीजों को देखकर करें फैसला

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Income Tax Return: अगर ITR फाइल करने में की ये गलती तो 200% तक पेनाल्टी के साथ जेल भी हो सकती है!

ITR Update: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही कई टैक्स पेयर्स अपनी टैक्स देनदारी को कम करने के जुगाड़ में लग जाते हैं। कई बार लोग बिना उचित डॉक्युमेंट्स के या फिर फर्जी बिल और रसीदें लगाकर टैक्स छूट का दावा कर देते हैं। शॉर्ट टर्म में यह तरीका भले ही टैक्स बचाने का आसान रास्ता लगे लेकिन इनकम टैक्स एक्ट के तहत इसके बेहद गंभीर और कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

मनी कंट्रोल पर्सनल फाइनेंस सेगमेंट में आषुष मिश्रा की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि टैक्स चोरी या गलत वेरिफिकेशन के मामलों में करदाताओं पर भारी-भरकम जुर्माने से लेकर आपराधिक मुकदमा और जेल की सजा तक हो सकती है। आइए जानते हैं कि आईटीआर दाखिल करते समय की गई कौन सी गलतियां आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती हैं।

क्या है धारा 270A और कब लगती है भारी पेनाल्टी?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A असेसिंग ऑफिसर (AO), कमिश्नर (अपील), प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर को यह अधिकार देती है कि अगर कोई टैक्स पेयर अपनी इनकम को कम दिखाता है या गलत जानकारी देता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। डिफॉल्ट की गंभीरता के आधार पर यह पेनाल्टी कम दिखाई गई आय पर देय टैक्स के 50 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक हो सकती है।

इनकम को कम दिखाना क्या है?

1- धारा 270A के तहत नीचे दी गई परिस्थितियों में यह माना जाता है कि टैक्स पेयर ने अपनी इनकम कम दिखाई है:

  • जब आय का कोई हिस्सा बही-खातों या इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित न किया गया हो।
  • आयकर विभाग द्वारा आकलित की गई आय फाइल किए गए ITR में दिखाई गई आय से अधिक हो।
  • कोई टैक्स रिटर्न दाखिल ही न किया गया हो, विभाग द्वारा निर्धारित की गई आय मूल छूट सीमा से अधिक हो।
  • सामान्य प्रावधानों के तहत आकलित की गई आय, धारा 115JB या 115JC के विशेष प्रावधानों के तहत गणना की गई आय से अधिक हो।

2- इनकम को गलत तरीके से पेश करना क्या है?

यह बेहद गंभीर मामला है जिसमें जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है। धारा 270A के तहत इसे मिसरिपोर्टिंग माना जाता है:

  • तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना या उन्हें छिपाना।
  • बही-खातों में निवेश को दर्ज न करना।
  • बिना किसी पुख्ता सबूत या सहायक दस्तावेजों के खर्चों का दावा करना।
  • बही-खातों में झूठी या फर्जी एंट्रियां दर्ज करना।
  • खातों में प्राप्तियों को दर्ज करने में विफल रहना।
  • किसी अंतरराष्ट्रीय लेनदेन या ऐसे ही किसी माने गए लेनदेन को रिपोर्ट न करना।

फर्जी दस्तावेज दिखाए तो हो सकती है जेल

टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक अगर टैक्स बचाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया जाता है तो यह सिर्फ टैक्स विवाद नहीं रह जाता बल्कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत एक आपराधिक अपराध बन जाता है। इसके लिए नीचे दी गई धाराएं लगाई जाती हैं-

धारा 276C (जानबूझकर टैक्स चोरी का प्रयास): अगर टैक्स चोरी की रकम 25 लाख रुपये से अधिक है तो दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सश्रम जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर यह राशि 25 लाख रुपये से कम है तो जेल की अवधि 3 महीने से 2 साल तक और साथ में जुर्माना हो सकता है।

धारा 277 (सत्यापन में झूठे बयान): यह धारा तब लागू होती है जब कोई करदाता जानबूझकर झूठे दस्तावेजों को सत्यापित करता है या जमा करता है। टैक्स चोरी के प्रयास की राशि के आधार पर इसमें 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

धारा 278 (उकसाना या बढ़ावा देना): इसके तहत केवल टैक्स भरने वाला ही नहीं बल्कि अपराध को बढ़ावा देने या सुविधाजनक बनाने वाला कोई भी व्यक्ति (जैसे कन्सल्टेंट, एजेंट, या फर्जी डोनेशन/किराया रसीद जारी करने वाली संस्था) भी कानूनी कार्रवाई और सजा का भागीदार बनेगा।

अन्य कानूनी शिकंजे और री-असेसमेंट का खतरा

अगर जालसाजी के लिए नकली स्टांप, फर्जी सील या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं भी लागू हो सकती हैं। इसके अलावा अगर बड़े पैमाने पर संगठित रूप से धारा 80G के तहत फर्जी डोनेशन रसीदें जारी करने या बड़े कैश ट्रेल का मामला सामने आता है तो प्रवर्तन एजेंसियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भी कार्रवाई कर सकती हैं। अगर किसी एक वित्त वर्ष में आपके दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो आयकर विभाग पिछले वर्षों के मामलों को भी दोबारा खोल सकता है ताकि यह जांचा जा सके कि क्या अतीत में भी ऐसे फर्जी दावे किए गए थे।

एक्सपर्ट की राय: विभाग के पास है आपका पूरा डेटा

एचजे अग्रवाल एंड कंपनी (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स) के पार्टनर हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में आयकर विभाग के पास एक दशक पहले की तुलना में वित्तीय जानकारी के कहीं अधिक व्यापक स्रोत हैं। वह कहते हैं कि विभाग एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जैसे सिस्टम के जरिए आपकी सैलरी, बैंकिंग, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय डेटा को आसानी से क्रॉस-वेरिफाई कर सकता है। ऐसे में गलत या फर्जी डिडक्शन के दावों को पकड़ना अब बेहद आसान हो चुका है।

हर्षित अग्रवाल ने सलाह दी कि वित्तीय जुर्माने से कहीं अधिक दर्दनाक और लंबी चलने वाली आपराधिक प्रक्रियाएं होती हैं जो सालों ले सकती हैं और अत्यधिक मानसिक तनाव व कानूनी खर्च का कारण बनती हैं। ऐसे में अगक किसी करदाता को यह अहसास होता है कि उसने कोई गलत दावा कर दिया है तो विभाग द्वारा पकड़े जाने का इंतजार करने के बजाय खुद से आगे आकर रिवाइज्ड (संशोधित) या अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर उसे सुधार लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

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EPFO का बड़ा अपडेट, नौकरी बदलने पर अब 2 तरीकों से करें PF ट्रांसफर, मिनटों में होगा पूरा प्रोसेस

epfo

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है, तो अब आपका Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) में जमा Provident Fund (PF) बैलेंस ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। EPFO के नए सदस्य पोर्टल पर कर्मचारियों को अपने पुराने नियोक्ता (Employer) के PF खाते से नए खाते में राशि ट्रांसफर करने के लिए दो आसान विकल्प दिए गए हैं।

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EPFO का कहना है कि इस नए फीचर का उद्देश्य PF ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल बनाना, कागजी कार्रवाई कम करना और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को बिना किसी अनावश्यक देरी के एक ही खाते में समेकित करना है।

 

EPFO पोर्टल में हुआ बड़ा अपग्रेड

 

हाल ही में EPFO के सदस्य पोर्टल में डेटाबेस कंसोलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड किया गया था। इस दौरान पोर्टल लगभग दो सप्ताह तक प्रभावित रहा और ऑनलाइन सेवाओं की बहाली में कई बार देरी हुई। अब पोर्टल की सेवाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। हालांकि EPFO ने कहा है कि फिलहाल PF क्लेम और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के निपटान में कुछ समय लग सकता है।

 

नौकरी बदलने पर PF बैलेंस ट्रांसफर करने के दो तरीके

 

PF ट्रांसफर शुरू करने से पहले कर्मचारियों को अपने Universal Account Number (UAN) की मदद से EPFO सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वे निम्नलिखित दो तरीकों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं।

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1. 'Request for Transfer of Account' विकल्प
 

2. 'Member Service History' के जरिए

 

EPFO 3.0 में कर्मचारियों को Member Service History सेक्शन में अपने पुराने और वर्तमान रोजगार की पूरी जानकारी देखने की सुविधा मिलती है।

 

  • यदि कोई PF ट्रांसफर लंबित नहीं होगा तो स्टेटस “No” दिखाई देगा।
  • इसके बाद Claim लिंक पर क्लिक करें।
  • Form 13 के जरिए Service Transfer Claim दर्ज करें।
  • इसके बाद आपकी PF ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
  • UAN नहीं पता तो क्या करें?

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अगर आपको अपना Universal Account Number (UAN) याद नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इसे—

 

  • अपनी नवीनतम Salary Slip में देख सकते हैं।
  • या फिर अपने Employer (नियोक्ता) से प्राप्त कर सकते हैं।
  • कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
  • PF ट्रांसफर की प्रक्रिया होगी आसान।
  • कागजी कार्रवाई में होगी कमी।
  • पुराने और नए PF खाते को एक जगह समेकित करना होगा सरल।
  • रिटायरमेंट सेविंग्स का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
  • नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर में देरी की संभावना होगी कम।

8th Pay Commission के तहत सीनियर कंसल्टेंट से यंग प्रोफेशनल बनने का मौका, 1.8 लाख तक सैलरी! फुल डिटेल जानिए

8th Pay Commission Job and Salary details: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा और उसमें बदलाव की सिफारिशें करने के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ काम करने का एक शानदार मौका है। 8वें वेतन आयोग ने कंसल्टेंट पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। इसकी लास्ट डेट नजदीक आ रही है। आपको बता दें कि इस भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य प्रोफेशनल्स के पास आवेदन करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है।

हमारे सहयोगी ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने सबसे पहले 10 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर तीन अलग-अलग कैटेगिरी में कांट्रैक्ट के आधार पर आवेदन मांगे थे। आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, मुआवजा, लीगल रीसर्च, डेटा विश्लेषण और पॉलिसी से जुड़ी स्टडी जैसे काम के लिए सीनियर कंसल्टेंट, कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल्स की हायरिंग कर रहा है। आइए इस भर्ती से जुड़ी वैकेंसी, योग्यता, सैलरी और काम के स्वरूप की पूरी डिटेल विस्तार से जानते हैं:-

वैकेंसी की पूरी डिटेल (उम्र सीमा और अनुभव)

रिपोर्ट के मुताबिक इन वैकेंसी के लिए एज और एक्सपीरिंस को कैलकुलेट करने के लिए कट-ऑफ डेट 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस भर्ती के तहत सीनियर कंसल्टेंट के लिए अधिकतम 5 पद निकाले गए हैं। इसके लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष और न्यूनतम रेलेवेंट एक्सपीरियंस 10 वर्ष होना चाहिए।

इसी तरह कंसल्टेंट पद के लिए भी अधिकतम 5 वैकेंसियां हैं। इसमें आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा 40 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 6 वर्ष निर्धारित किया गया है। यंग प्रोफेशनल के लिए सबसे ज्यादा यानी मैक्सिमम 10 पद हैं। इसके लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा 32 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 4 वर्ष होना जरूरी है।

क्या योग्यता है जरूरी?

आवेदकों के पास नीचे दी गई योग्यताओं में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:-

फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्सेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस या इससे जुड़े विषयों में मास्टर्स डिग्री या MBA, या

LL।B डिग्री के साथ बार काउंसिल/बार एसोसिएशन में क्रेडेंशियल होना चाहिए और ट्रिब्यूनल या अदालतों के समक्ष लीगल रीसर्च या सर्विस मैटर में प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए।

अनिवार्य योग्यता: सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए एक्सेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन टूल्स का ज्ञान होना अनिवार्य है। जिन उम्मीदवारों के पास वेतन, मुआवजा या स्टैबिलिशमेंट से जुड़े मामलों का अनुभव है उन्हें चयन में वरीयता दी जाएगी।

सैलरी और कार्यकाल

ये नियुक्तियां पूरी तरह से कांट्रैक्ट बेसिस पर होंगी। ये शुरुआत में एक साल या वेतन आयोग के कार्यकाल तक (जो भी पहले हो) के लिए की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

पदों के हिसाब से तय मासिक मानदेय इस प्रकार है:-

सीनियर कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.8 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹90000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000

कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.2 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹60000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹30000

यंग प्रोफेशनल: फुल-टाइम के लिए ₹90000, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹22500

इस सैलरी में से इनकम टैक्स और अन्य लागू कटौतियां (TDS) की जाएंगी।

चयनित कंसल्टेंट्स को क्या काम करना होगा?

ऑफिशियल गाइडलाइंस के मुताबिक चुने गए प्रोफेशनल्स को आयोग के साथ नीचे दिए गए काम करने होंगे:-

मौजूदा वेतन, भत्तों, पेंशन और उपलब्ध परिलब्धियों के ढांचे का विश्लेषण करना।

वेतन और मुआवजे के ट्रेंड्स की पहचान करने के लिए डेटा, रिपोर्ट्स और सर्वे का अध्ययन करना।

आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों पर लीगल रीसर्च करना।

डेटा इकट्ठा करने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय करना।

मानव संसाधन, मुआवजा, ग्रेच्युटी और बोनस तंत्र पर विशेष अध्ययनों में सहायता प्रदान करना।

आयोग को प्राप्त होने वाले ज्ञापनों और प्रतिवेदनों का विश्लेषण करना।

आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाले राजकोषीय प्रभाव का अनुमान लगाना।

रिपोर्ट्स, प्रेजेंटेशन और अन्य विश्लेषणात्मक सामग्री तैयार करना।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवारों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन सबमिट करना होगा। आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार के फिजिकल या हार्ड-कॉपी आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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