मिड कैप आईटी के अंदर में ज्यादा पॉजिटिव संकेत, ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में भी है दम

भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया है। लेकिन निफ्टी 24100 के आसपास अब भी बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। फिलहाल सेंसेक्स 105.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,038.84 पर और निफ्टी 3.15 अंक या 0.01 प्रतिशत गिरकर 24,087.70 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में TCS, HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra और Wipro शामिल हैं।

टेक्नो फंडा नजरिए के साथ बाजार पर बात करते हुए JM Financial Services के PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा कि आईटी शेयरों में पिछले कुछ दिनों में एक अच्छी रैली देखने को नजर आई है। खासतौर पर ब्लूमबर्ग एआई वैल्यू चेन इंडेक्स में, जो सारे एआई डेटा सेंटर स्टोरी का कॉम्बीनेशन है, में करेक्शन के दौरान हमें आईटी में रिकवरी देखने को मिली है। एआई से हुए स्विच ट्रेड के चलते हमें आईटी में स्ट्रेंथ देखने को नजर आ रही है। डॉलर के मुकाबले रुपए में भी स्टेबिलिटी देखने को नजर आ रही है। ऐसे में लगता है कि मिड टियर आईटी कंपनीज में और ग्रोथ आएगी। यहां पर हमारी टॉप पिक कोफर्ज और परसिस्टेंस हैं। इनमें आगे हमें 23 से 24% की ग्रोथ देखने को नजर आ सकती है।

खासतौर पर कोफोर्स- एनकोरा की डील के बाद हमें एनकोरा में अच्छा टर्म एराउंड देखने को मिल सकता है। इसका बेनिफिट कोफोर्ट के मार्जिन के साथ ही साथ इसके ओवरऑल ग्रोथ में देखने को नजर आएगी। इस समय मिड कैप आईटी के अंदर में ज्यादा पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं। लार्ज कैप आईटी में इस समय भी अंडरवेट पोजीशन है। हालांकि बड़ी आईटी कंपनियों में यहां से किसी बड़े डाउन साइड का डर नहीं है। लेकिन इनमें रिकवरी आने में शायद थोड़ा समय लगे। इनमें कंसोलिडेशन फेज देखने को नजर आ सकता है।

ऑटो और ऑटो एंजिलरी स्पेस पर बात करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि एथर एनर्जी और TVS Motors ये दो ऐसे स्टॉक है जो उनको बहुत ज्यादा पसंद है। इन दोनों कंपनियों ने ईवी के अंदर में अपना अच्छा पेनिट्रेशन किया है। TVS Motors ने बहुत ही अच्छी बढ़त बनाए रखी है और अपना मार्केट शेयर लगातार बढ़ाया है। इसकी वजह से लगता है ये कंपनी आने वाले समय में भी बहुत अच्छी ग्रोथ दिखाएगी। इनका ईवी सेगमेंट भी काफी अच्छा ग्रोथ कर रहा है। एथर इंडस्ट्रीज में अभी एक टर्न अराउंड दिखना शुरू हो गया है। डिमांड साइड पर काफी बड़ी ग्रोथ देखने को नजर आई है। कंपनी अपनी क्षमता में बहुत बड़ा विस्तार कर रही है। कंपनी की करंट कैपेसिटी पर इसकी आर्डर बुक पोजीशन काफी अच्छी बनी हुई है। कंपनी बड़ी तेजी से टर्न अराउंड हो रही है। कंपनी जल्द ही मुनाफे में आ सकती है। इसके चलते आगे एथर एनर्जी में बढ़िया रीटिंग देखने को नजर आ सकती है।

आशीष चतुरमोहता ने कहा कि ऑटो एंसिलरी कंपनियों में वे उन कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं जो ऑटो के साथ साथ डिफेंस या एरोस्पेस इंडस्ट्री के अंदर में भी अपनी जगह बना रही हैं। इस तरह की पहली कंपनी सनसेरा इंजीनियरिंग है जिसकी टॉप लाइन आज 30 से 35%। एडीएस सेगमेंट से भी योगदान आना शुरू हो गया है। एरोस्पेस डिफेंस और सेमीकंडक्टर में भी कंपनी के लिए मौके बन रहे हैं। इसके चलते आगे कंपनी के मार्जिन और एबिटा में भी काफी अच्छा ग्रोथ होता हुआ नजर आएगा।

सोना बीएलडबल्यू भी काफी अच्छी लग रही है। जापानी कंपनी के साथ अब इनस दो जेबी हो चुके है। फ्यूचर ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए यह कंपनी लॉन्ग टर्म नजरिए से काफी पसंद आ रही है।

आज लिस्ट हुए टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (Tempsens) के शेयरों पर बात करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि उन्होंने इसके आईपीओ में अप्लाई तो नहीं किया था लेकिन यह शेयर काफी अच्छा लग रहा है। आने वाले पांच साल में जो कंपनी की टॉप लाइन ग्रोथ ऑलमोस्ट 30% सालाना की दर से ग्रो कर सकती है। इसकी मार्जिन भी 24% पर जाती हुई नजर आएगी जिसके चलते एबिटा ग्रोथ 35% की देखने को नजर आएगी। अगर से हम मल्टीपल देखें तो उसको देखते हुए लगता है कि करंट करंट लेवल से भी शायद आपको इसमें 20 से 25% की अपसाइड देखने को नजर आ सकती है। यह बहुत ही इंटरेस्टिंग कंपनी है। यहां पर करंट लेवल से भी इसमें काफी तेजी देखने को मिल सकती है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, क्या आप जानते हैं कि उनकी 5 साल की कमाई कितनी थी?

N Chandrasekaran Remuneration: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये भी बात सामने आ रही है कि उन्होंने एक और कार्यकाल के लिए कोई डिमांड नहीं की है। इन खबरों के बीच अब उनकी सैलरी और कम्पेनसेशन के आंकड़े चर्चा में आ गए हैं। मनीकंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक, ‘चंद्रा’ के नाम से मशहूर चंद्रशेखरन को पिछले 5 सालों में टाटा संस से कुल ₹685 करोड़ का कम्पेनसेशन मिला है।

वित्त वर्ष 2025-26 में उन्हें कुल ₹158.6 करोड़ का रेमुनरेशन मिला। यह FY22 के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा पैकेज है, जब से कंपनी ने अपने शीर्ष अधिकारियों की सैलरी के आंकड़े सार्वजनिक करना शुरू किया था।

सैलरी का 88% हिस्सा सिर्फ कमीशन!

चंद्रशेखरन की भारी-भरकम कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा उनकी फिक्स्ड सैलरी का नहीं, बल्कि कंपनी के प्रदर्शन से मिलने वाले कमीशन का है। FY26 की उनकी कुल कमाई ₹158.6 करोड़ रही जिसमें ₹140.7 करोड़ कमीशन रहा जो कुल पैकेज का लगभग 88.7% है। उनकी फिक्स्ड सैलरी ₹17.9 करोड़ थी। चंद्रशेखरन को मिला यह पैकेज टाटा संस द्वारा अपने सभी डायरेक्टर्स को दी गई कुल सैलरी का 80 प्रतिशत हिस्सा है। FY25 में उनका कुल कम्पेनसेशन ₹155 करोड़ और FY24 में ₹134.8 करोड़ रहा था।

देश के सबसे टॉप कॉर्पोरेट दिग्गजों में शामिल थे चंद्रशेखरन

भारत के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स से अगर तुलना करें, तो चंद्रशेखरन टॉप पायदान पर खड़े नजर आते हैं:

सी विजयकुमार (HCL Tech CEO): वित्त वर्ष 2026 में ₹176 करोड़ के पैकेज के साथ देश के सबसे महंगे एग्जीक्यूटिव माने जाते हैं।

एन चंद्रशेखरन (Tata Sons Chairman): FY26 में ₹158.6 करोड़ के पैकेज के साथ दूसरे बड़े स्थान पर हैं।

संदीप कालरा (Persistent Systems CEO): FY25 में इनका पैकेज ₹148 करोड़ था, जो चंद्रशेखरन की FY26 की कमाई से कम है।

पवन मुंजाल (Hero MotoCorp): FY26 में ₹122 करोड़ के पैकेज के साथ ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले अधिकारी रहे।

AGM में डायरेक्ट्रिशिप पर वोटिंग से पहले बड़ा घटनाक्रम

चंद्रशेखरन की सैलरी और इस्तीफे के ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब अगस्त के मध्य में टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) आयोजित होने वाली है। वैसे चेयरमैन के रूप में उनका 5 साल का कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन रोटेशन नियमों के तहत उन्हें बोर्ड में अपनी डायरेक्टर की सीट बरकरार रखने के लिए शेयरधारकों के बहुमत की मंजूरी की आवश्यकता थी। इसी बीच उनके इस्तीफे और कार्यकाल पूरा कर हटने के फैसले ने सबको चौंका दिया है।

CFO सौरभ अग्रवाल दूसरे सबसे महंगे अधिकारी

टाटा संस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल कंपनी में दूसरे सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टॉप मैनेजर रहे। उनकी FY26 में कुल आय ₹34 करोड़ रही जिसमें कमीशन का हिस्सा ₹26 करोड़ था।

चंद्रशेखरन और सौरभ अग्रवाल के अलावा बोर्ड के अन्य 7 सदस्यों में से किसी को भी रेगुलर रेमुनरेशन नहीं मिला। हालांकि, 6 सदस्यों को ₹1 से ₹3 करोड़ का कमीशन मिला, जबकि TVS मोटर्स के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन इकलौते ऐसे बोर्ड मेंबर रहे जिन्होंने न तो कोई सैलरी ली और न ही कमीशन।

Persistent Systems Share Price: Q1 नतीजों के बाद IT कंपनी का शेयर 4% तक फिसला, HSBC को आगे और गिरावट की आशंका

सोमवार, 3 अगस्त को IT कंपनी Persistent Systems Ltd. के शेयरों में दिन में 4 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। बीएसई पर शेयर 5319.75 रुपये के लो तक गया। कंपनी का मुनाफा बढ़ने के बावजूद शेयर में बिकवाली का दबाव है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 13.67 प्रतिशत बढ़कर 483.04 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 424.93 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4,303.22 करोड़ रुपये हो गया, जो जून 2025 तिमाही में 3,333.58 करोड़ रुपये था। सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और उभरते उद्योग क्षेत्र कंपनी के रेवेन्यू में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले बने रहे। इसकी हिस्सेदारी 40.7 प्रतिशत रही। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल रेवेन्यू में 34 प्रतिशत रही। हेल्थकेयर और लाइफसाइंसेज सेक्टर का योगदान 25.3 प्रतिशत रहा।

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के कर्मचारियों की संख्या 30 जून 2026 तक बढ़कर 28,640 हो गई। खर्च 3750.76 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 2832.84 करोड़ रुपये के थे। जून तिमाही में कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही बुकिंग दर्ज कीं। एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ 65 करोड़ डॉलर से ज्यादा की डील के कारण कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) लगभग दोगुनी होकर 1.15 अरब डॉलर हो गई। सालाना कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (ACV) पिछली तिमाही के मुकाबले 20.6 प्रतिशत बढ़कर 53.68 करोड़ डॉलर हो गई।

Persistent Systems पर HSBC ने ‘होल्ड’ रेटिंग रखी बरकरार

जून तिमाही की कमाई सामने आने के बाद ब्रोकरेज फर्म HSBC ने पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर के लिए ₹4,610 के टारगेट प्राइस के साथ ‘होल्ड’ रेटिंग को दोहराया है। यह टारगेट शेयर के पिछले बंद भाव से 17 प्रतिशत कम है। HSBC ने कहा कि कंपनी ने जून 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान से बेहतर रही और रिकॉर्ड डील हासिल की गईं। मजबूत ऑर्डर इनफ्लो काफी हद तक उम्मीदों के मुताबिक था। लेकिन शुद्ध मुनाफा उम्मीदों से कम रहा। ज्यादा डायरेक्ट कॉस्ट और अधिक सेल्स व मार्केटिंग खर्चों ने मुनाफे पर असर डाला। EBIT मार्जिन गिरकर 16% हो गया, जबकि अनुमान लगभग 16.5% का था।

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मार्जिन के दबाव के बावजूद, ब्रोकरेज ने कहा कि Persistent अपने सेक्टर में सबसे तेजी से बढ़ने वाली IT सर्विसेज कंपनियों में से एक बनी हुई है। इसकी 4.1% की कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ TCS, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, Mphasis, Zensar, LTTS और हेक्सावेयर जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों से बेहतर रही।

शेयर एक महीने में 18 प्रतिशत चढ़ा

Persistent Systems का मार्केट कैप 86700 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में 18 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। बीएसई पर 52 सपताह का एडजस्टेड हाई 6,597 रुपये और एडजस्टेड लो 4,242.65 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 30.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: 3 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। निफ्टी 66 अंक चढ़कर 24,383 पर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत 44 अंकों की बढ़त के साथ हुई और पहले हाफ में निफ्टी 24,429 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। हालांकि, दिन के आखिर में मुनाफावसूली से कुछ बढ़त कम हो गई।

पिछले सप्ताह के पांच में से चार कारोबारी सत्रों में बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। इसके चलते निफ्टी ने पूरे हफ्ते में 2.59% की मजबूती दर्ज की।

अब सोमवार, 3 अगस्त से शुरू हो रहे कारोबारी हफ्ते में निफ्टी की चाल कैसी रहेगी। कौन कौन से लेवल अहम रहेंगे, इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, उससे पहले जान लेते हैं कि पिछले कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को क्या हुआ था।

इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी

निफ्टी 50 में Bajaj Finance, Bajaj Finserv और Jio Financial Services सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं TCS, Eternal और Infosys ने सबसे कमजोर प्रदर्शन किया।

आईटी, FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा तेजी मीडिया, ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में रही। ब्रॉडर मार्केट भी मजबूत रहा। Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 दोनों में 0.44% की बढ़त दर्ज की गई।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

इस सप्ताह बाजार की नजर कई अहम घटनाओं पर रहेगी। इनमें RBI की मौद्रिक नीति (MPC) बैठक, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति शामिल हैं।

इसके अलावा जून तिमाही के नतीजों का सीजन भी जारी रहेगा। Divi’s Laboratories, APL Apollo Tubes, CDSL, AU Small Finance Bank और Persistent Systems जैसी कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी।

FCNR जमा से बाजार को मिल सकता है सहारा

8 जून से 31 जुलाई के बीच बैंकों ने RBI की विशेष स्वैप सुविधा के तहत FCNR(B) डिपॉजिट्स के जरिए 36.7 अरब डॉलर जुटाए हैं। बेहतर ब्याज दरों और एनआरआई निवेशकों की दिलचस्पी से मिले इन फंड्स से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।

निफ्टी पर एक्सपर्ट्स की राय

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का कहना है कि निफ्टी का ट्रेंड अभी भी मजबूत बना हुआ है। अगर इंडेक्स 24,400 के ऊपर टिकता है, तो यह 24,600-24,700 तक जा सकता है। वहीं 24,200 पर मजबूत सपोर्ट है।

HDFC Securities के ही नंदीश शाह के मुताबिक निफ्टी ने 200-Day DEMA और अहम रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर वापसी की है। उनके अनुसार 24,530 और 24,778 पर रेजिस्टेंस है, जबकि 24,100 पर सपोर्ट है।

LKP Securities के रूपक डे का कहना है कि निफ्टी अभी भी सकारात्मक रुख बनाए हुए है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के तनाव की वजह से बाजार में कुछ सतर्कता बनी हुई है। उनके मुताबिक 24,200 सपोर्ट और 24,500 रेजिस्टेंस का स्तर रहेगा।

Angel One के हितेश राठी का मानना है कि निफ्टी में मजबूत तेजी तभी आएगी, जब यह 24,550-24,600 के ऊपर टिकेगा। अगर इंडेक्स 24,650-24,700 के ऊपर निकलता है, तो बाजार में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। नीचे की तरफ 24,250-24,200 पहला सपोर्ट और 23,980-23,950 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

बैंक निफ्टी का क्या रहा हाल?

बैंक निफ्टी का प्रदर्शन निफ्टी से कमजोर रहा। इंडेक्स 0.10% की मामूली गिरावट के साथ 57,148 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 56,769 तक फिसला था, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी से इसमें रिकवरी आई।

पिछले चार सत्रों से बैंक निफ्टी 56,672 से 57,330 के दायरे में कारोबार कर रहा है, जिससे साफ है कि फिलहाल इसमें सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है।

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक बैंक निफ्टी के लिए 57,500-57,600 का स्तर अहम रेजिस्टेंस है। अगर यह इसके ऊपर निकलता है, तो 58,000 और फिर 58,400 तक तेजी आ सकती है। वहीं 56,700-56,600 का दायरा मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।

Stocks to Buy: ये 7 शेयर दे सकते हैं 60% तक रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने खरीदने की सलाह दी

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Coal India Production Update: सरकारी कंपनी का कोयला प्रोडक्शन 8% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Coal India Production Update: सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया (CIL) ने जुलाई 2026 के प्रोडक्शन और ऑफटेक के शुरुआती आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी का जुलाई में कोयला उत्पादन 8.4% बढ़कर 5.04 करोड़ टन (50.4 मिलियन टन) रहा। पिछले साल जुलाई में यह 4.64 करोड़ टन था। वहीं, ऑफटेक यानी ग्राहकों को कोयले की सप्लाई 17.4% बढ़कर 6.37 करोड़ टन रही, जो एक साल पहले 5.42 करोड़ टन थी।

हालांकि, अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान कंपनी का कुल उत्पादन 4.3% घटकर 22 करोड़ टन रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 22.98 करोड़ टन था। इसके बावजूद चार महीनों में ऑफटेक 6.8% बढ़कर 26.19 करोड़ टन पहुंच गया, जो एक साल पहले 24.52 करोड़ टन था। इससे पता चलता है कि उत्पादन में कमी के बावजूद कंपनी की सप्लाई मजबूत बनी हुई है।

अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन

कोल इंडिया की अलग-अलग सहायक कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

  • Central Coalfields Limited (CCL) ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। जुलाई में इसका उत्पादन 56.9% बढ़कर 59 लाख टन हो गया। वहीं, ऑफटेक 66.1% बढ़कर 74 लाख टन रहा।
  • Eastern Coalfields Limited (ECL) का उत्पादन 34.1% बढ़कर 36 लाख टन और ऑफटेक 38.4% बढ़कर 45 लाख टन पहुंच गया।
  • South Eastern Coalfields Limited (SECL), जो कोल इंडिया की सबसे बड़ी सहायक कंपनी है, उसका उत्पादन 17.5% बढ़कर 1.15 करोड़ टन रहा। वहीं, ऑफटेक 11.1% बढ़कर 1.44 करोड़ टन हो गया।
  • Western Coalfields Limited (WCL) का उत्पादन 15.5% बढ़कर 29 लाख टन रहा। ऑफटेक 36.2% बढ़कर 54 लाख टन पहुंच गया।

MCL और BCCL रहे कमजोर

Mahanadi Coalfields Limited (MCL) का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। जुलाई में इसका उत्पादन 10.7% घटकर 1.31 करोड़ टन रह गया। हालांकि, ऑफटेक 10.4% बढ़कर 1.82 करोड़ टन हो गया। अप्रैल-जुलाई के दौरान MCL का उत्पादन 16% घटा।

Bharat Coking Coal Limited (BCCL) का जुलाई उत्पादन 3.4% बढ़कर 25 लाख टन रहा। लेकिन अप्रैल-जुलाई के दौरान इसका ऑफटेक 21.1% घट गया, जो प्रमुख सहायक कंपनियों में सबसे बड़ी गिरावट रही। सबसे छोटी इकाई North Eastern Coalfields (NEC) का उत्पादन और ऑफटेक बेहद कम रहा। जुलाई में इसका ऑफटेक 100% घट गया।

कोल इंडिया के शेयरों का हाल

कोल इंडिया का शेयर शुक्रवार को 0.67% की गिरावट के साथ 414.40 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक यह शेयर 3.48% की बढ़त दर्ज कर चुका है। वहीं बीते 1 साल में इसने 10.60% का रिटर्न दिया है।

कोल इंडिया भारत की सबसे बड़ी सरकारी कोयला खनन कंपनी है। यह देश के बिजली संयंत्रों, स्टील, सीमेंट और अन्य उद्योगों को कोयले की सप्लाई करती है। भारत के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान इसी कंपनी का है।

Persistent Systems Q1 Results: मुनाफा घटा, लेकिन AI और रिकॉर्ड डील्स से कमाई बढ़ी; शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BASIC Home Loan: 2029 तक 500 नए फाइनेंस सेंटर खोलेगी, हर साल ₹60,000 करोड़ तक होम लोन का टारगेट

BASIC Home Loan: फिनटेक कंपनी BASIC Home Loan ने 2029 तक देशभर में 500 BASIC Finance Centres खोलने की योजना बनाई है। कंपनी का मकसद होम लोन को ज्यादा आसान और तेज बनाना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी के साथ स्थानीय एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी। कंपनी का लक्ष्य इन सेंटरों के जरिए हर साल ₹50,000-60,000 करोड़ के होम लोन डिस्बर्स करना है।

पहले इन राज्यों पर रहेगा फोकस

बेसिक होम लोन के मुताबिक, शुरुआत में कंपनी उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में विस्तार करेगी। इसके बाद पूरे देश में नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। खास फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर रहेगा। कंपनी अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

क्यों जरूरी हैं नए फाइनेंस सेंटर?

कंपनी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आने के बाद भी लोग होम लोन लेते समय सलाह चाहते हैं। उन्हें सही बैंक चुनने, पात्रता समझने और दस्तावेज तैयार करने में मदद की जरूरत पड़ती है। नए BASIC Finance Centres यही काम करेंगे। यहां AI टेक्नोलॉजी और स्थानीय सलाहकार मिलकर ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवा देंगे।

2027 तक 200 सेंटर खोलने का लक्ष्य

BASIC Home Loan के को-फाउंडर और CEO अतुल मोंगा ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने होम लोन आसान बनाया है, लेकिन भरोसा और सही सलाह आज भी उतनी ही जरूरी है। वहीं, कंपनी के सीनियर डायरेक्टर अमरदीप शर्मा ने बताया कि 2027 के आखिर तक 200 फाइनेंस सेंटर शुरू करने का लक्ष्य है। इनके जरिए हर साल ₹15,000-20,000 करोड़ के होम लोन डिस्बर्स करने की योजना है।

स्थानीय कारोबारियों को भी मिलेगा मौका

बेसिक होम लोन का इस विस्तार के साथ 400-500 नए फाइनेंस सेंटर पार्टनर्स भी जोड़ेगी। इसमें स्थानीय उद्यमियों और फाइनेंशियल एडवाइजर्स को शामिल किया जाएगा। उन्हें कंपनी का टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, लेंडर्स का नेटवर्क और ऑपरेशनल सपोर्ट मिलेगा। साथ ही लगातार ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

अब तक कैसा रहा सफर?

BASIC Home Loan अब तक 4 लाख से ज्यादा परिवारों को होम लोन दिलाने में मदद कर चुकी है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी ₹50,000 करोड़ से ज्यादा के होम लोन डिस्बर्स करा चुकी है। उसके पास 30,000 से ज्यादा एजेंट्स का नेटवर्क और देशभर में 120 से ज्यादा BASIC Finance Centres हैं।

Persistent Systems Q1 Results: मुनाफा घटा, लेकिन AI और रिकॉर्ड डील्स से कमाई बढ़ी; शेयरों पर रहेगी नजर

Persistent Systems Q1 Results: मुनाफा घटा, लेकिन AI और रिकॉर्ड डील्स से कमाई बढ़ी; शेयरों पर रहेगी नजर

Persistent Systems Q1 Results: आईटी सर्विसेज कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 8.7% घटकर ₹483 करोड़ रह गया। मार्च तिमाही में यह ₹529 करोड़ था। हालांकि, कारोबार की रफ्तार बनी रही। कंपनी का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹4,303 करोड़ पहुंच गया, जो पिछली तिमाही में ₹4,056 करोड़ था।

डॉलर के हिसाब से भी कंपनी की कमाई बढ़ी। जून तिमाही में रेवेन्यू 3.8% बढ़कर 452.4 मिलियन डॉलर रहा। मार्च तिमाही में यह 436 मिलियन डॉलर था।

ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव

इस तिमाही में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की ऑपरेटिंग कमाई पर थोड़ा दबाव दिखा। EBIT 12% घटकर ₹581.5 करोड़ रह गया। पिछली तिमाही में यह ₹659 करोड़ था। वहीं, EBIT मार्जिन भी 16.2% से घटकर 13.5% पर आ गया। यानी रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफे का मार्जिन कम हुआ।

लगातार 25वीं तिमाही में बढ़ा कारोबार

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संदीप कालरा ने कहा कि पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने लगातार 25वीं तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। सालाना आधार पर कंपनी का रेवेन्यू 16.1% बढ़ा है। उनके मुताबिक, यह लगातार मजबूत डील जीतने और ग्राहकों से बढ़ते कारोबार का नतीजा है।

रिकॉर्ड TCV हासिल किया

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने इस तिमाही में 1.15 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड Total Contract Value (TCV) हासिल किया। यह अब तक का सबसे बड़ा तिमाही TCV है। इसमें एक बड़ी वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ 6.5 साल का रणनीतिक सर्विस एग्रीमेंट भी शामिल है, जिसकी वैल्यू 650 मिलियन डॉलर से ज्यादा है। इससे आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Nagarro के साथ बड़ी डील

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने यूरोप की डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी Nagarro के साथ बिजनेस कॉम्बिनेशन एग्रीमेंट भी साइन किया है। इस डील का मकसद कंपनी की तकनीकी क्षमता बढ़ाना, नए देशों में कारोबार फैलाना और अलग-अलग इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है।

कंपनी ने बताया कि ओपन ऑफर से जुड़े दस्तावेज जर्मनी के वित्तीय नियामक BaFin को भेज दिए गए हैं। वहीं, भारत में RBI से भी मंजूरी मांगी गई है। दूसरे देशों में भी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल की प्रक्रिया चल रही है।

AI पर रहेगा बड़ा दांव

संदीप कालरा का कहना है कि दुनिया भर की कंपनियां अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपना रही हैं। इसे देखते हुए पर्सिस्टेंट सिस्टम्स भी AI बेस्ड प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में निवेश बढ़ाती रहेगी। कंपनी का लक्ष्य ग्राहकों को AI की मदद से बेहतर तकनीक, तेज कामकाज और ज्यादा बिजनेस वैल्यू देना है।

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर

आईटी कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 0.35% बढ़कर 5,534 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 20.81% चढ़ा है। इसने एक साल में 6.89% का रिटर्न दिया है। वहीं बीते पांच साल में इससे 254.93% का मल्टीबैगर रिटर्न मिला है। कंपनी का मार्केट कैप 86.96 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

AI Bubble: क्या AI का बबल फूट रहा? इन 5 बड़े ‘क्रैश’ ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार को नई रफ्तार दी है। AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। दुनिया भर के बाजारों में AI शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI का बूम भी डॉट-कॉम बबल की तरह खत्म होने वाला है?

दक्षिण कोरिया का Kospi Index गुरुवार को 6% से ज्यादा टूट गया। AI चिप बनाने वाली SK Hynix के शेयर 11% और Samsung Electronics के शेयर 8% गिर गए। निवेशकों को अब कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई की चिंता सता रही है।

आइए जानते हैं हाल के समय में AI थीम से जुड़े 5 बड़े झटकों के बारे में।

IBM

आईटी और कंसल्टिंग कंपनी IBM के शेयर जुलाई 2026 में करीब 25% टूट गए। इससे कंपनी का करीब 70 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया। कमजोर शुरुआती नतीजों के साथ यह चिंता भी बढ़ी कि AI कंपनी के पारंपरिक कंसल्टिंग कारोबार पर असर डाल सकता है।

SaaS सेक्टर

सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर फरवरी 2026 में बुरी तरह टूटे। इसकी वजह Anthropic का नया Agentic AI प्लेटफॉर्म रहा। इसके बाद Salesforce, Adobe और ServiceNow जैसे शेयरों में तेज बिकवाली हुई। निवेशकों को लगा कि AI पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदल सकता है।

Nvidia

AI चिप बनाने वाली कंपनी Nvidia को जनवरी 2025 में बड़ा झटका लगा। कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 600 अरब डॉलर घट गया। इसकी वजह चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek का सस्ता AI मॉडल था। इसके बाद निवेशकों को डर सताने लगा कि महंगे AI चिप्स की मांग उम्मीद से कम हो सकती है।

Alphabet और Big Tech

टेक दिग्गज कंपनियों Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft के शेयर जून 2026 में फिसल गए। Alphabet करीब 6% और Amazon लगभग 5% टूट गया। निवेशकों को चिंता थी कि AI पर हो रहा भारी खर्च कब मुनाफे में बदलेगा।

भारतीय आईटी सेक्टर

भारतीय आईटी कंपनियां भी इस दबाव से नहीं बचीं। IBM की गिरावट के बाद AI को लेकर चिंता बढ़ गई। Infosys, TCS, Wipro, HCLTech, Persistent Systems, Coforge और LTIMindtree जैसे शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। Nifty IT Index करीब 2% टूट गया। जबकि Nifty 50 और Sensex बढ़त के साथ बंद हुए।

फिलहाल AI सेक्टर की लंबी अवधि की कहानी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन ऊंची वैल्यूएशन, मुनाफे को लेकर सवाल और AI से बदलते कारोबार की वजह से इस सेक्टर में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IT Stocks: चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने आईटी कंपनियों की रेटिंग-टारगेट घटाए, कहा- रिकवरी में लग सकता है वक्त

IT Stocks: ब्रोकरेज फर्म Choice Institutional Equities का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक और कमजोर तिमाही साबित हो सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मांग में सुधार नहीं दिख रहा। उल्टा हालात और बिगड़े हैं। इससे साफ है कि जिस रिकवरी की उम्मीद थी, वह अब और आगे खिसक गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। कंपनियां नए फैसले लेने में समय लगा रही हैं। AI की वजह से प्रोडक्टिविटी बढ़ी है, लेकिन इसका असर रेवेन्यू पर दबाव के रूप में दिख रहा है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है। इन सब वजहों से कंपनियां गैरजरूरी (Discretionary) खर्च कम कर रही हैं। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर की ग्रोथ पर पड़ रहा है।

लार्जकैप और मिडकैप पर अनुमान

ब्रोकरेज का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों की कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) ग्रोथ तिमाही आधार पर सपाट रह सकती है। कुछ कंपनियों में हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है।

वहीं, मिडकैप आईटी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इसकी वजह नए डील्स का शुरू होना और बाजार हिस्सेदारी बढ़ना है।

कमाई के अनुमान में कटौती

Choice Institutional Equities का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही की ग्रोथ पूरे साल के गाइडेंस के हिसाब से कमजोर दिख रही है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कई कंपनियां अपने गाइडेंस में बदलाव कर सकती हैं। कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए पूरे आईटी सेक्टर की कमाई के अनुमान में 0.1% से 16.7% तक की कटौती की है। साथ ही, कई कंपनियों के टारगेट प्राइस और वैल्यूएशन में भी 0% से 21.6% तक की कमी की गई है। इसकी वजह कमजोर मांग, AI की वजह से रेवेन्यू पर दबाव और बढ़ता एग्जीक्यूशन रिस्क है।

क्या अब आईटी शेयरों में खरीदारी का मौका है?

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी शेयरों में पहले ही अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है। इसलिए अब नीचे जाने की गुंजाइश सीमित दिखती है। हालांकि, सेक्टर में दोबारा तेज तेजी तभी आएगी, जब मांग में सुधार दिखे। कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ तेज हो। साथ ही, GenAI से सिर्फ लागत घटाने के बजाय कमाई बढ़ने के भी साफ संकेत मिलें।

HCLTech : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने HCLTech की रेटिंग ‘Add’ से बढ़ाकर ‘Buy’ कर दी है। हालांकि, टारगेट प्राइस 1,500 रुपये से घटाकर 1,410 रुपये कर दिया गया है।

Mphasis : इसकी रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 2,520 रुपये रखा गया है।

Persistent Systems : ब्रोकरेज ने Persistent Systems की रेटिंग घटाकर ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 5,010 रुपये तय किया गया है।

Tech Mahindra : महिंद्रा ग्रुप की आईटी कंपनी की रेटिंग भी घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। ब्रोकरेज ने शेयर का नया टारगेट प्राइस 1,600 रुपये रखा है।

Zensar Technologies : ब्रोकरेज ने Zensar Technologies की रेटिंग भी ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 560 रुपये तय किया गया है।

TCS : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने टाटा ग्रुप की आईटी TCS पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 2,625 रुपये कर दिया गया है।

Infosys : इस आईटी कंपनी पर भी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी गई है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस घटाकर 1,360 रुपये कर दिया है।

Happiest Minds : इस पर ब्रोकिंग फर्म ने ‘Buy’ रेटिंग कायम रखी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 440 रुपये कर दिया गया है।

Coforge : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने Coforge पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। कंपनी का टारगेट प्राइस 1,900 रुपये पर कायम रखा गया है।

Wipro : ब्रोकरेज ने Wipro पर ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 185 रुपये कर दिया गया है।

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