डेंटिस्ट बनने दुबई गईं भारतीय महिला, डांस फिटनेस से बदली किस्मत, अब हर महीने कमाती हैं 11 लाख रुपये

कभी-कभी जिंदगी में एक छोटा-सा शौक करियर की ऐसी राह खोल देता है, जिसके बारे में इंसान ने कभी सोचा भी नहीं होता। भारतीय महिला मोनिका सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह डेंटिस्ट बनने का सपना लेकर दुबई पहुंची थीं, लेकिन डांस फिटनेस में उनकी दिलचस्पी ने उन्हें एक अलग पहचान दिला दी। आज वह दुबई में महिलाओं की फिटनेस और हेल्थ से जुड़ा अपना बिजनेस चला रही हैं और हर महीने करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये तक कमाती हैं।

भारत से दुबई पहुंचीं, डेंटिस्ट के तौर पर काम करने की थी तैयारी

द नेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोनिका सिंह करीब 12 साल पहले दुबई गई थीं। उनका इरादा वहां डेंटिस्ट के रूप में अपना करियर बनाने का था। इसके लिए उन्हें दुबई हेल्थ अथॉरिटी (DHA) की लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी थी। इसी तैयारी के दौरान वह ग्रुप वर्कआउट क्लास में जाने लगीं। यहां उन्हें डांस फिटनेस पसंद आने लगी। शुरुआत में यह सिर्फ एक्सरसाइज और खुद को फिट रखने का तरीका था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया। मोनिका ने बताया कि वह पहले फिटनेस को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखती थीं। डांस फिटनेस क्लास में जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह इस क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उन्होंने अपने पति से इस बारे में बात की और पति ने भी उनके फैसले का समर्थन किया।

फिटनेस क्लास से शुरू हुआ सफर

मोनिका ने दुबई के अलग-अलग स्टूडियो में ग्रुप एक्सरसाइज क्लास लेना शुरू किया। इससे उन्हें फिटनेस इंडस्ट्री में अनुभव मिला और आगे चलकर अपना बिजनेस शुरू करने का रास्ता खुला। डेंटिस्ट्री की पढ़ाई ने भी उनके काम में मदद की। मानव शरीर की बनावट और उसके काम करने के तरीके की उनकी समझ ने उन्हें फिटनेस और महिलाओं की सेहत को बेहतर तरीके से समझने में मदद की। इसके बाद उन्होंने महिलाओं की वेलनेस, खासकर मिडलाइफ के दौरान होने वाले बदलावों पर ध्यान दिया और इससे जुड़ी ट्रेनिंग भी ली।

23 महिलाओं को देती हैं कोचिंग

आज मोनिका दुबई में महिलाओं को फिटनेस और वेलनेस कोचिंग देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल उनके पास 23 क्लाइंट हैं। उनकी मासिक कमाई 42,000 से 45,000 दिरहम के बीच बताई गई है, जो भारतीय रुपये में करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये होती है। उनका तरीका महिलाओं को जरूरत से ज्यादा कठिन एक्सरसाइज या शारीरिक दबाव में डालने के बजाय उनकी जरूरतों के हिसाब से फिटनेस लक्ष्य हासिल करने में मदद करना है।

लाखों की कमाई के बावजूद निवेश नहीं

अच्छी कमाई होने के बावजूद मोनिका ने अभी निवेश करना शुरू नहीं किया है। वह फिलहाल अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचाकर रखती हैं। उनके सात साल के बेटे की स्कूल फीस, कार लोन और घर के रोजमर्रा के खर्च भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं। मोनिका के मुताबिक, वह घरेलू खर्चों के लिए हर महीने करीब 3,000 से 4,000 दिरहम अलग रखती हैं और बाकी रकम बचाती हैं। घर के अन्य खर्चों की जिम्मेदारी उनके पति संभालते हैं।

अब ऑनलाइन बिजनेस और बड़े घर का सपना

मोनिका का अगला लक्ष्य अपने वेलनेस बिजनेस के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल और ऐप लॉन्च करना है। इसके लिए वह पैसे जोड़ रही हैं, क्योंकि इसे तैयार करने में काफी खर्च आएगा।

लंबे समय में वह अपने परिवार के साथ बड़ा घर खरीदना चाहती हैं। उनकी कहानी बताती है कि करियर का रास्ता हमेशा पहले से तय नहीं होता। कभी-कभी किसी नए अनुभव को मौका देना जिंदगी की दिशा बदल सकता है। हालांकि, उनकी कमाई और सफलता का यह सफर उनकी अपनी परिस्थितियों और बिजनेस पर आधारित है।

एक दिन लेट किराया देने पर लगा जुर्माना, Gen Z किराएदार ने ऐसा पलटवार किया कि मकान मालिक की बोलती बंद!

एक दिन लेट किराया देने पर लगा जुर्माना, Gen Z किराएदार ने ऐसा पलटवार किया कि मकान मालिक की बोलती बंद!

किराए के घर में रहने वाले लोगों और मकान मालिकों के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद होना आम है, लेकिन एक Gen Z किराएदार ने इस समस्या से निपटने का ऐसा तरीका अपनाया, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। मामला किराया देर से जमा करने पर लगे जुर्माने से शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही इसमें घर की मरम्मत से जुड़ी पुरानी शिकायतें भी सामने आ गईं। किराएदार ने बहस करने या मकान मालिक से उलझने के बजाय सभी शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार किया और दूसरे किराएदारों को भी इसमें शामिल कर लिया।

इसके बाद जब मकान मालिक ने किराया जमा करने की याद दिलाई, तो उसे अपनी ही शर्तों के बीच एक असहज सवाल का सामना करना पड़ा। इस पूरे मामले ने किराएदारों के अधिकारों और मकान मालिकों की जिम्मेदारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

6 तारीख को दिया किराया, तो लगा जुर्माना

X पर Dekim_Kalvino नाम के यूजर ने यह किस्सा साझा किया। पोस्ट के मुताबिक, मकान मालिक का नियम था कि हर महीने की 5 तारीख के बाद किराया देने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। एक Gen Z किराएदार ने 6 तारीख को किराया दिया, जिसके बाद उस पर भी जुर्माना लगा दिया गया। उसने बहस करने के बजाय मकान मालिक की अनदेखी की गई मरम्मत संबंधी शिकायतों का रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया।

स्प्रेडशीट में जुटाए सबूत

किराएदार ने एक स्प्रेडशीट तैयार की, जिसमें लंबित मरम्मत की शिकायतों की तारीखें और स्क्रीनशॉट दर्ज किए। फिर उसने यह रिकॉर्ड दूसरे किराएदारों के साथ साझा किया। इसके बाद अन्य लोगों ने भी अपनी शिकायतों के सबूत उसमें जोड़ने शुरू कर दिए। इस तरह एक व्यक्ति की शिकायत कई किराएदारों की समस्याओं का दस्तावेज बन गई। अब मकान मालिक के सामने केवल जुर्माने का मामला नहीं, बल्कि लंबित शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड था।

किराएदार ने याद दिलाया नियम

अगले महीने जब मकान मालिक ने किराया जमा करने का रिमाइंडर भेजा, तो किराएदार ने जवाब में कहा कि किराया 5 तारीख तक देना जरूरी है, लेकिन मरम्मत की शिकायतें 63 दिनों से लंबित हैं। पोस्ट के अनुसार, मकान मालिक ने बाद में उसे निजी तौर पर फोन किया और स्प्रेडशीट हटाने को कहा। किराएदार ने इनकार करते हुए तर्क दिया कि अगर देर से किराया देने पर जुर्माना लगाया जा सकता है, तो मरम्मत में देरी की जवाबदेही भी होनी चाहिए। इसके बाद मकान मालिक ने कथित तौर पर फोन काट दिया।

‘हम यह दुनिया छोड़ रहे हैं’ मौत से पहले कर्मचारी ने कंपनी को भेजा ईमेल, गुरुग्राम के फ्लैट में मृत मिला कपल

दिल्ली से सटे गुरुग्राम से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गुरुग्राम में एक सोसायटी के फ्लैट में बुधवार सुबह एक टेक दंपति संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए। सोसायटी के फ्लैट में टेक कपल मोहम्मद असलम (30) और उनकी पत्नी फरहाना की मौत की खबर सुन हर कोई हैरान रह गया। वहीं अपनी मौत से पहले असलम ने सुबह करीब 7 बजे ‘हम दुनिया छोड़ रहे हैं’ का मैसेज अपने एंप्लॉयर को ईमेल भेजा था। इसमें उसने अपने माता-पिता और मकान मालिक के फोन नंबर भी शेयर किया था।

पुलिस को किया फोन

30 वर्षीय मोहम्मद असलम ने अपने ऑफिस के लोगों से इन नंबरों पर संपर्क कर परिवार को जानकारी देने के लिए कहा था। ईमेल मिलने के बाद उनके सहकर्मियों ने मकान मालिक से बात की। इसके बाद मकान मालिक गुरुग्राम के M3M मरीना परिसर के टावर 7 में स्थित दंपति के फ्लैट पर पहुंचे। मकान मालिक जब फ्लैट के अंदर पहुंचे, तो उन्होंने असलम को मृत पाया। वहीं, उनकी करीब 28 वर्षीय पत्नी फरहाना फर्श पर पड़ी थीं और उनकी गर्दन पर चोट के निशान थे। घटना की जानकारी मिलते ही मकान मालिक ने बादशाहपुर पुलिस को फोन कर इसकी सूचना दी।

फ्लैट के अंदर मिला नोट

पुलिस को फ्लैट के अंदर एक नोट मिला, जिस पर लिखा था, “हम यह दुनिया छोड़ रहे हैं।” फरहाना के कपड़ों पर भी “आई लव यू” लिखा हुआ था। पुलिस अब नोट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और फ्लैट से बरामद अन्य सामान की जांच कर रही है, ताकि घटना के पीछे की वजह और उस दिन क्या हुआ था, इसका पता लगाया जा सके। इस दिन फरहाना का जन्मदिन था।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का केस दर्ज किया है। जांच अधिकारियों को आशंका है कि असलम ने आत्महत्या करने से पहले अपनी पत्नी की हत्या की होगी। वहीं, पुलिस के कहा कि घटना किस क्रम में हुई और दोनों की मौत कैसे हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगी।

साल 2023 में हुई थी शादी

असलम और फरहाना करीब तीन महीने पहले बेंगलुरु से गुड़गांव आए थे। कोझिकोड के रहने वाले असलम ने सेक्टर 58 में ऑफिस वाली इंडोनेशिया की एक आईटी कंपनी में नौकरी शुरू की थी, जबकि मलप्पुरम की रहने वाली फरहाना बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी के लिए घर से काम करती थीं। दोनों की शादी 2023 में हुई थी और गुड़गांव आने से पहले वे लगभग दो साल तक बेंगलुरु में रहे थे। असलम ने 2018 में NIT कालीकट से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद 2020 में उन्होंने IIM इंदौर से MBA की डिग्री हासिल की। वहीं, फरहाना ने केरल के कुट्टीपुरम स्थित MES कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से BTech किया था।

पोस्टमार्टम में होगा मौत की वजह का सुलासा

मकान मालिक की सूचना मिलने के बाद सुबह करीब 8 बजे इमरजेंसी टीम अपार्टमेंट पहुंची। इसके कुछ देर बाद पुलिस की एक बड़ी टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस के अनुसार, फ्लैट का दरवाजा खुला हुआ था। तलाशी के दौरान वहां से तीन लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, एक रस्सी, डायरी, कैंची, पेन ड्राइव, एक नोट और पेन बरामद किए गए। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, ताकि मामले से जुड़ी अहम जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस के मुताबिक, फ्लैट से मिले नोट में किसी भी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया गया था। शुक्रवार को दोनों के शवों को मोर्चरी में रखा गया, जहां परिवार के सदस्यों ने उनकी पहचान की। फिलहाल पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों की मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

दोनों के बीच सबकुछ ठीक थी

केरल में रहने वाले दोनों परिवारों के मुताबिक, असलम और फरहाना के बीच सब कुछ ठीक था और उन्हें किसी अनबन की जानकारी नहीं थी। फरहाना के भाई फैसल ने कहा कि इस घटना से दोनों परिवार सदमे में हैं। TOI के अनुसार, “दोनों के बीच काफी गहरा रिश्ता था। वे एक-दूसरे के साथ खुश रहते थे और उनकी शादीशुदा जिंदगी में किसी तरह की परेशानी या अनबन की जानकारी नहीं थी।” फरहाना के भाई फैसल ने बताया कि रिश्तेदारों को आशंका है कि काम का दबाव इस घटना की वजह हो सकता है, लेकिन परिवार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

बुजुर्ग किराएदार को घर से निकालने पर सरकार संकट में:स्पेन में महंगे किराए से जुड़ा प्रस्ताव संसद में गिरा, 8 महीने पहले चुनाव होंगे

स्पेन में 87 साल की एक महिला को घर से निकालना बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। महंगे किराए और लोगों को घर से निकाले जाने के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। मामला इतना बढ़ा कि सरकार को किराएदारों को राहत देने के लिए संसद में इमरजेंसी बिल लाने पड़े। लेकिन सरकार इन्हें पास नहीं करा सकी। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने तय समय से करीब 8 महीने पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। स्पेन में 29 नवंबर 2026 को वोटिंग होगी। 70 साल से घर में रह रही थी बुजुर्ग मामले की शुरुआत 23 सितंबर को हुई। मैड्रिड में 87 साल की मारिया डेल कार्मेन अबास्कल को उस घर से निकाल दिया गया, जहां वह करीब 70 साल से रह रही थीं। यह घर अबास्कल परिवार के पास कई दशकों से किराए पर था। 2018 में घर के मूल मालिक ने पूरी इमारत एक रियल एस्टेट कंपनी को बेच दी। इसके बाद कंपनी और अबास्कल में किराए को लेकर विवाद शुरू हो गया। कंपनी ने किराया 500 यूरो से बढ़ाकर 2650 यूरो कर दिया। अबास्कल की मासिक पेंशन ही करीब 1,350 यूरो थी। यानी मांगा गया किराया उनकी पूरी मासिक आय से भी काफी ज्यादा था। इसी वजह से वह नया किराया देने की स्थिति में नहीं थीं। इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया था। घटना के बाद पूरे देश में विरोध शुरू हुआ अबास्कल को घर से निकाले जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से फैल गया। लोगों का कहना था कि अगर 87 साल की बुजुर्ग महिला अपनी पूरी पेंशन देने के बाद भी घर का किराया नहीं चुका सकतीं, तो यह सिर्फ एक परिवार की समस्या नहीं है। मैड्रिड समेत कई शहरों में लोगों ने महंगे किराए और बेदखली के खिलाफ प्रदर्शन किए। अबास्कल का मामला धीरे-धीरे स्पेन के बढ़ते आवास संकट का प्रतीक बन गया। सरकार पर भी दबाव बढ़ने लगा। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार ने कहा कि बुजुर्गों और दूसरे कमजोर किराएदारों को घर से निकालने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। सरकार ने दो इमरजेंसी बिल पेश किए, दोनों खारिज 29 सितंबर को सरकार ने किराएदारों को राहत देने के लिए संसद में दो इमरजेंसी बिल पेश किए। पहला बिल: इसमें कमजोर किराएदारों को 2030 तक घर से निकालने से रोकने की योजना थी। साथ ही किराए बढ़ाने पर कुछ पाबंदियां लगाने और बड़े निवेशकों के घर खरीदने पर रोक लगाने की बात थी। छोटे मकान मालिकों और किराएदारों को टैक्स में राहत देने का भी प्रावधान था। दूसरा बिल: इसमें किराएदारों के मौजूदा किराए के समझौते को आगे बढ़ाने की बात थी। यानी समझौता खत्म होने के बाद उन्हें तुरंत घर खाली नहीं करना पड़ता और उन्हें कुछ और समय तक उसी घर में रहने का मौका मिलता। PM पेद्रो सांचेज की सरकार के पास संसद में बहुमत नहीं है। इसलिए उसे हर बड़े फैसले के लिए दूसरी पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ती है। सरकार को उम्मीद थी कि आवास संकट को देखते हुए दूसरी पार्टियां इन उपायों का समर्थन करेंगी। लेकिन उसे जरूरी समर्थन नहीं मिला। 2 अक्टूबर को हुए वोटिंग में दोनों प्रस्ताव पास नहीं हो सके। बिलों को समर्थन नहीं मिलने की 4 वजहें वजह 1: दूसरी पार्टियों को लगा कि इससे किराए के घर कम हो सकते हैं: विरोध करने वाली पार्टियों का कहना था कि अगर मकान मालिकों पर ज्यादा नियम लगाए गए तो वे अपने घर किराए पर देने से बच सकते हैं। इससे बाजार में किराए के लिए घर कम पड़ सकते हैं। वजह 2: किराया और बढ़ने का खतरा: जब किराए के लिए घर कम होंगे, तो बचे हुए घरों का किराया बढ़ सकता है। यानी किराएदारों को राहत देने के बजाय समस्या और बड़ी हो सकती है। वजह 3: छोटे मकान मालिकों को लेकर भी आपत्ति थी: जुंत्स का कहना था कि सरकार की योजना में छोटे मकान मालिकों के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। पार्टी चाहती थी कि उनके लिए भी ज्यादा राहत और सुरक्षा हो। वजह 4: सरकार के राजनीतिक विरोधी भी साथ नहीं आए: विपक्षी पार्टियां PP और वॉक्स पहले से ही सांचेज सरकार की आवास नीति का विरोध कर रही थीं। उन्होंने दोनों बिलों का समर्थन नहीं किया। सांचेज ने समय से पहले चुनाव का फैसला क्यों लिया? स्पेन में किराए का संकट कितना बड़ा है? 1. सस्ते घरों की संख्या बेहद कम है: स्पेन में कम आय वाले लोगों के लिए सस्ते सरकारी घर बहुत कम हैं। कुल घरों में ऐसे घरों की हिस्सेदारी सिर्फ 1.5 % है। 2. महीनेभर की कमाई के करीब पहुंचा किराया: रॉयटर्स के मुताबिक कुछ मामलों में किराए की कीमत एक युवा व्यक्ति की औसत मासिक कमाई के करीब 99% तक पहुंच गई है। 3. 2028 तक 10 लाख से ज्यादा घरों की कमी का खतरा: केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि अगर घरों की कमी दूर नहीं हुई तो 2028 तक 10 लाख से ज्यादा घरों की कमी हो सकती है।

5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

Building collapse deaths in India

Building collapse deaths in India: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर 2026) को हुई दर्दनाक दुर्घटना में पांच मंज़िला इमारत ढहने से सोमवार सुबह तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी हकीकत को सामने लाता है कि किस तरह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में ढिलाई बरती जाती है।

सत्य निकेतन जैसी घटनाएं मीडिया का ध्यान इसलिए खींचती हैं क्योंकि ये छात्रों और युवाओं के पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़ी होती हैं। लेकिन इसके इतर दर्जनों ऐसी छिटपुट घटनाएं हैं जो मिलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दर्जनों और देश भर में सैकड़ों बेकसूरों की जान ले लेती हैं और सुर्खियों से गायब रह जाती हैं।

Building collapse deaths in India

दिल्ली : आबादी के अनुपात में मौतों की गंभीर स्थिति

2024 में मौतों की कुल संख्या (42) के आधार पर दिल्ली देश में 12वें स्थान पर थी, लेकिन जब इन मौतों का विश्लेषण प्रति दस लाख (Per Million) आबादी के अनुपात में किया जाता है, तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है:

  • 2022, 2023 और 2024 तीनों वर्षों में प्रति 10 लाख आबादी पर इमारतें ढहने से हुई मौतों के मामले में दिल्ली देश में दूसरे या तीसरे स्थान पर बनी रही।
  • 2025-2026 की स्थिति : यद्यपि 2025 की आधिकारिक ADSI रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के संकलन के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक 20 से अधिक घटनाओं में कम से कम 70 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया : तात्कालिक हड़बड़ी बनाम ढांचागत सुधार

सत्य निकेतन की घटना के बाद हमेशा की तरह जन-आक्रोश भड़कने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने घोषणा की है कि वह 5-मंज़िला या उससे ऊपर की सभी अवैध इमारतों को “तत्काल सील” करेगा।

क्यों विफल होता है सिस्ट्म?

  1. रिएक्टिव बनाम प्रोएक्टिव : नगर निकाय हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागते हैं। नियमित ऑडिट और भ्रष्टाचार-मुक्त निगरानी का अभाव रहता है।
  2. सस्ते आवास की भारी मांग : दिल्ली जैसे बड़े शहरों में छात्रों और प्रवासियों की आमद लगातार बढ़ रही है। सस्ते आवास (Affordable Housing) की मांग के चलते अवैध और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
  3. सिर्फ सीलिंग समाधान नहीं : अचानक इमारतों को सील करने से किराएदार बेघर हो जाते हैं, लेकिन निर्माण के लिए जिम्मेदार बिल्डर-प्रशासनिक साठगांठ पर स्थायी लगाम नहीं लग पाती।
  4. स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और निगरानी का अभाव: स्थानीय जूनियर इंजीनियरों (JE) और पुलिस की मिलीभगत से अवैध निर्माण बिना रुकावट जारी रहता है। हादसे के बाद सीलिंग ड्राइव (Sealing Drive) चलाई जाती है, जो कि केवल एक रिएक्टिव (प्रतिक्रियात्मक) कदम है, प्रोएक्टिव नहीं।
  5. अपीलीय प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें : निगम द्वारा धारा 343/344 के तहत नोटिस जारी करने के बाद, मामला Appellate Tribunal for MCD (ATMCD) या अदालतों में चला जाता है, जहाँ स्टे (Stay Order) मिलने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही वर्षों तक लटकी रहती है।

ऐसे हादसों को कैसे रोकें : सुधार हेतु आवश्यक कदम (Way Forward)

  • स्ट्रक्चरल ऑडिट का अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण : 15 वर्ष से पुरानी या 3 मंजिल से ऊंची सभी इमारतों के लिए हर 5 साल में थर्ड-पार्टी ऑडिट (Third-Party Audit) अनिवार्य किया जाए और उसका डेटा सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही (Individual Accountability) : यदि किसी इलाके में अवैध निर्माण के दौरान हादसा होता है, तो केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के संबंधित नगर निगम इंजीनियर और बीट कांस्टेबल को भी कानूनी रूप से सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए।
  • सस्ते और सुरक्षित छात्र आवास का नियमन : सरकार को निजी PG और हॉस्टलों के संचालन के लिए एक पारदर्शी और सख्त नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाना चाहिए, ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सस्ते आवास उपलब्ध कराए जा सकें।

हाल ही में हुआ सत्य निकेतन हादसा और देश भर में 5 वर्षों में हुई लगभग 8,000 मौतें यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि भारत में शहरी विकास का ढाँचा और भवन सुरक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है।

भारत में शहरी आवास सुरक्षा नियम, दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बाय-लॉज (Unified Building Bye-Laws) और अवैध निर्माण पर लागू वैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण:

 

Building collapse deaths in India

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MCD के मुख्य बिल्डिंग बाय-लॉज और सुरक्षा मानक

MCD के नियमों के अनुसार किसी भी इमारत के निर्माण से लेकर उसके उपयोग तक निम्नलिखित कड़े नियमों का पालन अनिवार्य है:

(A) फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ऊंचाई की सीमा

  • भूखंड (Plot Size) के आकार के आधार पर यह तय होता है कि उस पर कितना निर्माण हो सकता है।
  • रिहायशी इलाकों में अतिरिक्त मंजिलें (जैसे 3 मंजिल के ऊपर 4था या 5वां फ्लोर बनाना) बिना FAR और स्ट्रक्चरल परमिशन के पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं।

(B) स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट (Structural Safety Certificate)

  • किसी भी इमारत का नक्शा पास कराने के लिए एक पंजीकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर (Structural Engineer) से यह प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है कि इमारत भूकंप, हवा के दबाव और वजन को सहने में सक्षम है।
  • ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) / कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) : निर्माण पूरा होने के बाद MCD इंस्पेक्टर और इंजीनियर मौके का निरीक्षण करते हैं। इसके बिना इमारत में किसी को रहने या किराए (PG) पर देने की अनुमति नहीं होती।

(C) यूसेज परिवर्तन (Commercial vs Residential)

  • आवासीय परिसरों (Residential Plots) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे बिना अनुमति के पेइंग गेस्ट (PG), व्यावसायिक हॉस्टल या कोचिंग सेंटर चलाने के लिए करना बाय-लॉज का सीधा उल्लंघन है।

Building collapse deaths in India

  • धारा 343 (DMC Act, 1957) – ध्वस्तीकरण का आदेश (Order of Demolition) : यदि कोई निर्माण बिना पास नक्शे के या पास नक्शे का उल्लंघन करके किया गया है, तो निगम नोटिस जारी कर निर्माण को गिराने (Demolish) का आदेश दे सकता है।
  • धारा 344 – काम रोकने और सील करने की शक्ति (Stop Work / Sealing Notice) : निगम अधिकारियों को अधिकार है कि वे निर्माणाधीन अवैध इमारत पर 'स्टॉप वर्क' का नोटिस दें या पुलिस बल की मदद से साइट को तुरंत सील कर दें।
  • धारा 348 – खतरनाक इमारतों की मरम्मत या ध्वस्तीकरण (Unsafe Buildings): यदि कोई पुरानी इमारत जीर्ण-शीर्ण (Dilapidated) स्थिति में है और गिरने के कगार पर है, तो निगम मकान मालिक को नोटिस जारी कर उसे खाली कराने, मरम्मत कराने या ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मामला : हादसे की स्थिति में मकान मालिक, बिल्डर और लापरवाह अधिकारियों पर BNS धारा 106 (गैर-इरादतन हत्या/लापरवाही से हुई मौत – पूर्व में IPC धारा 304A) और धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है।

Property vs REITs: ₹20-30 लाख के बजट में घर खरीदें या REITs में लगाएं पैसा? जानें कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न

REITs vs Rental Flat Investment: प्रॉपर्टी में निवेश करके हर महीने पक्की कमाई पाना हर भारतीय का सपना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना लाखों-करोड़ों की जमीन या फ्लैट खरीदे भी आप रियल एस्टेट से हर महीने रेगुलर इनकम कमा सकते हैं?

रियल एस्टेट में निवेश के दो बड़े रास्ते हैं- पहला, खुद का एक छोटा रेंटल फ्लैट खरीदना और दूसरा, रीट्स (REITs – Real Estate Investment Trusts) के जरिए कमर्शियल प्रॉपर्टीज में पैसे लगाना। अगर आपके पास ₹20 से ₹30 लाख रुपये का बजट है, तो आपके लिए कौन सा जरिया सही रहेगा?

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कमाई, जोखिम और सहूलियत के मामले में दोनों में से कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे बेस्ट है।

REITs: कम बजट में बड़े कमर्शियल प्रॉपर्टी का मालिकाना हक

अगर आपके पास ₹20-30 लाख का बजट है, तो कई बड़े शहरों में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री और ब्रोकरेज मिलाकर एक अच्छा रेंटल फ्लैट खरीदना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में REITs एक शानदार विकल्प है।

क्या है REIT? जैसे म्यूचुअल फंड में कई लोगों से पैसा जुटाकर शेयर बाजार में लगाया जाता है, वैसे ही रीट के जरिए पैसे जुटाकर बड़े-बड़े आईटी पार्क्स, मॉल और ऑफिस कॉम्प्लेक्स जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टीज में निवेश किया जाता है।

कमाई का नियम: सेबी के नियमों के मुताबिक, रीट्स को अपनी कमाई का कम से कम 90% हिस्सा अपने निवेशकों को डिविडेंड या ब्याज के रूप में बांटना अनिवार्य है।

रेंटल फ्लैट: कंट्रोल पूरा, लेकिन सिरदर्दी भी कम नहीं

एक छोटा रेंटल फ्लैट आपको एक ‘भौतिक संपत्ति’ देता है, जो आंखों के सामने होती है।

फायदे: किराएदार कौन होगा, कितना किराया बढ़ाना है और प्रॉपर्टी कब बेचनी है इन सब पर आपका पूरा नियंत्रण रहता है। अगर इलाका तेजी से विकसित होता है, तो प्रॉपर्टी के दाम भी जबरदस्त बढ़ते हैं।

कमियां और मेहनत: भारत में आवासीय संपत्तियों का सालाना रेंटल यील्ड महज 1.5% से 4% के आसपास ही रहता है। इसके अलावा मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, मरम्मत, ब्रोकरेज और किराएदार न मिलने पर खाली पड़े रहने का घाटा अलग से सहना पड़ता है।

लिक्विडिटी और डाइवर्सिफिकेशन: REITs क्यों मारता है बाजी?

Property vs REITs: ₹20-30 लाख का बजट में घर खरीदें या REITs में लगाएं पैसा? जानें कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेहतर?

REITs आपके लिए सही हैं अगर: आप बिना मकान मालिक बने और बिना किसी सिरदर्दी के रियल एस्टेट से कमाई करना चाहते हैं। अगर आपको लिक्विडिटी पसंद है और आप बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव को झेल सकते हैं।

रेंटल फ्लैट आपके लिए सही है अगर: आपके पास पर्याप्त पूंजी है, आपको स्थानीय रियल एस्टेट मार्केट की अच्छी समझ है, और आप लंबे समय तक किरायेदारों व मेंटेनेंस को संभालने के लिए तैयार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या रीट्स (REITs) में रेंटल इनकम की गारंटी होती है?

उत्तर: नहीं, रीट्स में कमाई की कोई फिक्स्ड गारंटी नहीं होती। हालांकि, नियम के तहत इन्हें अपनी 90% कमाई बांटनी होती है, लेकिन यह बिजनेस के प्रदर्शन और ऑक्यूपेंसी रेट पर निर्भर करता है।

Q2: क्या रीट्स रेंटल फ्लैट से ज्यादा सुरक्षित हैं?

उत्तर: दोनों में अलग-अलग तरह का रिस्क है। रीट्स शेयर बाजार से जुड़े होने के कारण उतार-चढ़ाव वाले होते हैं, जबकि एक अकेले फ्लैट में लोकेशन, किराएदार न मिलने और पूरे पैसे एक जगह फंसने का रिस्क होता है।

Q3: क्या मैं दोनों में एक साथ निवेश कर सकता हूं?

उत्तर: बिल्कुल! बेहतर पोर्टफोलियो बनाने के लिए आप अपने पैसों को रीट्स और फिजिकल प्रॉपर्टी दोनों में बांटकर लगा सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Mehul Choksi: भारी कैश के साथ मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल लंदन में हिरासत में, भगोड़ा हीरा कारोबारी कब आएगा भारत?

Mehul Choksi Lawyer Detained: लंदन में भारतीय आपराधिक मामलों के चर्चित वकील और भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी का केस लड़ने वाले विजय अग्रवाल को ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अग्रवाल पर ब्रिटेन में इमिग्रेशन और वर्क परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप है। विजय अग्रवाल भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के वकील के तौर पर खास तौर पर चर्चित रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर तब हिरासत में लिया गया जब UK इमिग्रेशन अधिकारियों ने लंदन के मेफेयर इलाके में एक प्रॉपर्टी की जांच की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मकान मालिक की शिकायत के बाद की गई। इसी जांच के दौरान विजय अग्रवाल को हिरासत में लिया गया। विवेक अग्रवाल ने भारत में कई हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट क्राइम और फाइनेंशियल फ्रॉड केस संभाले हैं।

बिना जरूरी अनुमति काम करने का आरोप

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रिटिश अधिकारियों को संदेह था कि अग्रवाल ब्रिटेन में आवश्यक वर्क परमिट या अन्य जरूरी इमिग्रेशन परमिशन के बिना पेशेवर गतिविधियां कर रहे थे। इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई के दौरान मेफेयर की इस प्रॉपर्टी में बड़ी मात्रा में कैश भी मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कैश के स्रोत की भी जांच की जा रही है। प्रॉपर्टी की जांच के समय अग्रवाल की फर्म से जुड़े कई जूनियर वकील भी कथित तौर पर वहां मौजूद थे। हालांकि, सामने आई रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए जाने के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने आगे क्या कार्रवाई की।

मेहुल चोकसी के प्रमुख वकील रहे हैं अग्रवाल

विजय अग्रवाल का नाम भारत के सबसे चर्चित वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के आरोपी भगोड़े मेहुल चोकसी की कानूनी पैरवी से जुड़ा रहा है। चोकसी भारत में कथित PNB धोखाधड़ी मामले में वांछित है। वह भारत से बाहर रह रहा है। अग्रवाल ने विभिन्न देशों में चल रही कानूनी कार्यवाहियों में चोकसी का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में भी चोकसी की ओर से पैरवी की है। बेल्जियम में चोकसी की गिरफ्तारी के बाद भी अग्रवाल उसके कानूनी बचाव से जुड़े रहे। भारत द्वारा चोकसी को वापस लाने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कानूनी दलीलें पेश की हैं।

प्रत्यर्पण के खिलाफ दिए थे ये तर्क

चोकसी की भारत वापसी से जुड़े मामलों में अग्रवाल की ओर से मानवाधिकार, जेल की परिस्थितियों और चोकसी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों जैसे मुद्दे उठाए गए थे। इन आधारों पर भारत प्रत्यर्पण का विरोध किया गया। चोकसी पर भारत में करीब 13,000 करोड़ रुपये के PNB घोटाले से जुड़े गंभीर आरोप हैं। वह मामले में वांछित आरोपियों में शामिल है।

कई हाई-प्रोफाइल मामलों में कर चुके हैं पैरवी

विजय अग्रवाल सिर्फ मेहुल चोकसी के मामले के कारण ही चर्चित नहीं हैं। बल्कि उनका कानूनी करियर भारत के कई बड़े कॉरपोरेट क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा रहा है। उन्होंने PNB बैंक घोटाले से जुड़े मामलों में बचाव पक्ष की पैरवी की है। इसके अलावा उनका नाम 2G स्पेक्ट्रम मामले से जुड़े कानूनी मामलों में भी सामने आया है।

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फिलहाल लंदन में उनकी हिरासत से जुड़े आरोपों की जांच ब्रिटिश अधिकारियों की कार्रवाई पर निर्भर है। वर्क परमिट उल्लंघन और बरामद कथित कैश से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के नतीजे आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

घर ढूंढ़ने निकला शख्स रह गया हैरान, गुरुग्राम में 3BHK का किराया जान उड़ जाएंगे होश

गुरुग्राम में घर किराए पर लेना अब पहले जितना आसान या किफायती नहीं रह गया है। शहर के कई इलाकों में किराए लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मनपसंद बजट में घर ढूंढ़ना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में इसी मुद्दे ने तब लोगों का ध्यान खींचा, जब एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर अपना अनुभव साझा किया। घर की तलाश के दौरान उसे बार-बार एक ही सलाह मिली बजट बढ़ाइए। इसके बाद उसने सवाल उठाया कि क्या अब शहर में महंगा किराया ही नई सामान्य स्थिति बन चुका है। उसकी पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और सैकड़ों लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।

किसी ने बढ़ते किराए को जिम्मेदार ठहराया तो किसी ने ब्रोकरों के रवैये पर सवाल उठाए। यह चर्चा अब सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि गुरुग्राम में तेजी से बदलते रेंटल मार्केट और बढ़ती महंगाई पर बड़ी बहस का रूप ले चुकी है।

पोस्ट ने छेड़ दी बड़ी बहस

Reddit के r/gurgaon समुदाय में शेयर की गई पोस्ट ने देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींच लिया। कई यूजर्स ने माना कि वे भी घर खोजते समय इसी तरह के अनुभव से गुजर चुके हैं। चर्चा धीरे-धीरे केवल किराए तक सीमित नहीं रही, बल्कि गुरुग्राम में तेजी से बढ़ती महंगाई और रहने की लागत पर भी सवाल उठने लगे।

हर घर के साथ जुड़ जाता है ‘बस ₹5,000 और’

पोस्ट लिखने वाले यूजर ने बताया कि गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड पर करीब 1,700 वर्गफुट का 3BHK फ्लैट ₹50,000 से अधिक में मिल रहा है, जबकि शहर के कई प्रमुख सेक्टरों में ₹60,000 या उससे ज्यादा किराया सामान्य हो चुका है। उनका कहना था कि हर बार ब्रोकर सिर्फ इतना कहते हैं, “बस ₹5,000 और बढ़ा दीजिए।”

किराया ही नहीं, सालाना खर्च भी बढ़ रहा

यूजर ने हिसाब लगाते हुए बताया कि ₹50,000 मासिक किराए का मतलब सालभर में ₹6 लाख से ज्यादा खर्च है। यदि मेंटेनेंस, बिजली और अन्य शुल्क जोड़ दिए जाएं, तो यह रकम आसानी से ₹7 लाख के पार पहुंच जाती है। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्या सैलरी इतनी तेजी से बढ़ी है?

यूजर ने सवाल उठाया कि जब वेतन में इतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं हुई, तो आखिर आम परिवार इतने महंगे किराए को कैसे वहन करें? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या लोग वास्तव में इतनी रकम चुका रहे हैं, या फिर मकान मालिकों और ब्रोकरों ने हर समस्या का समाधान सिर्फ “बजट बढ़ाइए” बना दिया है।

दूसरे यूजर्स ने भी साझा किए अपने अनुभव

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि 2BHK की तलाश में जब उसने ₹45,000 का बजट बताया, तो ब्रोकर ने साफ कह दिया कि उसकी जरूरतें और बजट मेल नहीं खाते। वहीं एक अन्य यूजर ने बताया कि ऑनलाइन कई 3BHK फ्लैट ₹90,000 से लेकर ₹1.5 लाख प्रति माह तक में सूचीबद्ध हैं।

लोगों ने सुझाए दूसरे विकल्प

कई Reddit यूजर्स ने सलाह दी कि अगर बजट सीमित है, तो गुरुग्राम के प्रीमियम इलाकों से बाहर घर तलाशना बेहतर रहेगा। कुछ लोगों ने नोएडा जैसे एनसीआर शहरों का भी सुझाव दिया, जहां समान सुविधाओं वाले फ्लैट अपेक्षाकृत कम किराए में मिल सकते हैं।

बदलती सोच या बढ़ता दबाव?

यह चर्चा सिर्फ एक व्यक्ति के घर खोजने की कहानी नहीं रही, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या गुरुग्राम में “अफोर्डेबल रेंट” की परिभाषा बदल चुकी है। बढ़ते किराए और स्थिर आय के बीच यह बहस अब शहर के हजारों किरायेदारों की साझा चिंता बनती दिखाई दे रही है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

Buying vs Renting Real Estate Guide: बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में घर खरीदना लोगों का सपना होता है। कई लोग इसे ‘इमोशनल ओनरशिप’ से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे केवल ‘फाइनेंशियल रिटर्न’ के नजरिए से देखते हैं।

लेकिन क्या मेट्रो शहरों में आज की तारीख में घर खरीदना फायदे का सौदा है, या फिर किराये पर रहकर पैसों को शेयर बाजार या अन्य ऑप्शन में निवेश करना ज्यादा समझदारी है? आइए इसे EMI-to-Rent Ratio, रेंटल यील्ड और रियल-लाइफ कैलकुलेशन से समझते हैं।

किराए पर रहना vs घर खरीदना: गणित क्या कहता है?

इसे समझने के लिए ₹1 करोड़ की कीमत वाले 2BHK फ्लैट का उदाहरण लेते हैं:

सिनेरियो A: अगर आप घर खरीदते हैं

प्रॉपर्टी की कीमत: ₹1 करोड़

डाउन पेमेंट (20%): ₹20 लाख (अपनी बचत से)

होम लोन (80%): ₹80 लाख (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए)

मासिक EMI: लगभग ₹69,400 प्रति महीना

अन्य खर्च: मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (₹6-8 लाख एक्स्ट्रा)।

20 साल में कुल भुगतान: ₹80 लाख के लोन पर आप 20 साल में लगभग ₹86.5 लाख केवल ब्याज देंगे। यानी कुल भुगतान ₹1.66 करोड़ होगा (प्रिंसिपल + इंटरेस्ट)।

सिनेरियो B: अगर आप किराये पर रहते हैं और बाकी पैसा इन्वेस्ट करते हैं

मासिक किराया: भारत के मेट्रो शहरों में औसतन रेंटल यील्ड 2.5% से 3% होती है। यानी ₹1 करोड़ के मकान का मासिक किराया लगभग ₹22,000 से ₹25,000 होगा।

बचत (EMI vs Rent Diff): EMI (₹69,400) और Rent (₹25,000) के बीच का अंतर = ₹44,400 प्रति महीना।

डाउन पेमेंट की बचत: डाउन पेमेंट के ₹20 लाख भी आपके पास निवेश के लिए बचते हैं।

कंपाउंडिंग का जादू: अगर आप ₹20 लाख जो डाउन पेमेंट की बचत से हुआ है उसे म्यूचुअल फंड में 12% सालाना रिटर्न पर 20 साल के लिए इन्वेस्ट करते हैं, तो यह रकम बढ़कर लगभग ₹1.93 करोड़ हो जाती है।

साथ ही अगर आप हर महीने बची हुई ₹44,400 की SIP (12% रिटर्न के साथ) 20 साल तक करते हैं, तो इससे लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड तैयार होता है। 20 साल बाद आपकी कुल वेल्थ ₹6.36 करोड़ होगी जो टैक्स और सालाना रेंट हाइक एडजस्ट करने के बाद भी एक बड़ा कॉर्पस आपके पास होगा।

EMI-to-Rent Ratio: क्या कहता है यह फॉर्मूला?

EMI-to-Rent Ratio यह तय करने का एक आसान तरीका है कि आपको घर खरीदना चाहिए या किराये पर रहना चाहिए:

EMI-to-Rent Ratio= मंथली Rent/ मंथली EMI

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अनुपात 1 से 1.5 के बीच: अगर आपकी EMI और रेंट लगभग बराबर हैं, तो घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

अनुपात 2.5 से अधिक: बड़े शहरों में अक्सर EMI (₹70,000) किराए (₹25,000) से 2.8 गुना अधिक होती है। जब अनुपात इतना ज्यादा हो, तो वित्तीय दृष्टि से किराये पर रहना और सरप्लस पैसे को इन्वेस्ट करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें?

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

इमोशनल ओनरशिप बनाम फाइनेंशियल प्रैक्टिकैलिटी

भारत में घर सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ये रहे खुद के घर के फायदे:

  • सुरक्षा का अहसास: आपको कोई मकान मालिक खाली करने को नहीं कह सकता।
  • अपने हिसाब से बदलाव: आप इंटीरियर, रेनोवेशन या बदलाव अपनी पसंद से कर सकते हैं।
  • रिटायरमेंट एसेट: बुढ़ापे में रहने के लिए सिर पर पक्की छत रहती है।

किराये के घर के फायदे

  • जॉब फ्लेक्सिबिलिटी: अगर आपकी नौकरी बेंगलुरु से गुड़गांव शिफ्ट होती है, तो आप बिना किसी परेशानी के मूव कर सकते हैं।
  • बेहतर लोकेशन: जितने किराए में आप किसी प्रीमियम लोकेशन पर रह सकते हैं, उतना महंगा घर खरीदना आपकी क्षमता से बाहर हो सकता है।

आपके लिए क्या सही है?

आपको घर तब खरीदना चाहिए जब आपके पास इनकम का परमानेंट सोर्स हो, आप अगले 10-15 साल उसी शहर में बसना चाहते हैं, आपके पास डाउन पेमेंट का पर्याप्त फंड है, और आपके लिए मानसिक शांति वित्तीय रिटर्न से ज्यादा मायने रखती है।

वहीं आपको किराये पर तब रहना चाहिए जब आपकी उम्र 20-35 साल के बीच है, करियर में ग्रोथ और सिटी चेंज की संभावना है, और आप बचे हुए पैसों (EMI और रेंट के अंतर) को अनुशासित तरीके से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।