‘ब्याज दरें जल्द कम करें…’ फेड की दर वृद्धि के बाद ट्रंप ने 1% या उससे कम रेट की मांग की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती की मांग की है। खास बात यह है कि ट्रंप की यह मांग ऐसे समय आई है, जब फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। हालांकि, इस बार ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श पर सीधे निशाना साधने से परहेज किया है। अब चलिए जानते हैं ट्रंप ने आखिर ब्याज दरों में कटौती की मांग क्यों की, और फेड ने इसके उलट दरें बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?

गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “हम दुनिया के लगभग हर देश का ‘बोझ उठा’ रहे हैं, और ऐसा अब और नहीं चल सकता। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के लिए ब्याज दरें कम करें, और जल्द करें!”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि देश की क्रेडिट रेटिंग बहुत अच्छी है और निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कम लागत पर उधार लेना सही ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है, उनके साथ व्यापार बंद करने से हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमाए जा सकते हैं। दरअसल, उनका तर्क था कि व्यापार घाटा असल में नुकसान ही है।

उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में लिखा, “अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि हमारी क्रेडिट रेटिंग दुनिया में सबसे अच्छी है — और इसमें कोई शक नहीं है। हमारे देश में नए निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं! अगर हम उन सभी देशों के साथ व्यापार बंद कर दें जिनके साथ हमारा व्यापार घाटा है — और ऐसे ज्यादातर देश हैं — तो हम हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमा सकते हैं। ‘Deficit’ शब्द असल में ‘Loss’ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक फैंसी शब्द है।”

बता दें कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। वहीं, इस फैसले के साथ फेड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को नजरअंदाज कर दिया जिसमें उन्होंने ब्याज दरें घटाने की मांग की थी। सेंट्रल बैंक के प्रमुख केविन वार्श ने कहा कि महंगाई अभी भी काफी ज्यादा है और लंबे समय से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

फेड की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75 से 4.00% के बीच करने के लिए वोट किया। कमिटी का कहना है कि दरें बढ़ने से महंगाई को उसके 2% के लक्ष्य तक जल्द वापस लाने में मदद मिलेगी।

ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉर्श ने कहा कि यह फैसला “गंभीर” था, लेकिन इसे लेना जरूरी था।

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “साफ बात यह है कि महंगाई बहुत ज्यादा है और काफी समय से ऐसी ही बनी हुई है।”

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Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, दिल्ली में ₹140810 पर पहुंचा 22 कैरेट; वैश्विक बाजार में कीमत लुढ़की

देश में सोने की कीमत में और तेजी दिख रही है। 17 सितंबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 153600 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अन्य शहरों में भी भाव चढ़ा है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 3 सत्रों की गिरावट के बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,200 रुपये बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,240.1 डॉलर प्रति औंस पर है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद वैश्विक बाजार में सोना लुढ़का है। फेड ने आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ने का संकेत दिया है। इस फैसले के बाद डॉलर मजबूत हुआ और बिना रिटर्न वाली कीमती धातुओं जैसे सोने पर बुरा असर पड़ा। फेड ने बेंचमार्क ओवरनाइट ब्याज दर को 0.25% बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में पहुंचा दिया है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 153600 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली140810153600
मुंबई140660153450
अहमदाबाद140710153500
चेन्नई140660153450
कोलकाता140660153450
हैदराबाद140660153450
जयपुर140810153600
भोपाल140710153500
लखनऊ140810153600
चंडीगढ़140810153600

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चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी में गुरुवार को गिरावट है। 17 सितंबर की सुबह चांदी फिसलकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में चांदी 2 कारोबारी सत्र स्थिर रहने के बाद 7,000 रुपये उछली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत गिरकर 62.57 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लौटी तेजी, चांदी एक दिन में ₹7400 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 16 सितंबर को सोने और चांदी में तेजी दिखी। सोना लगातार तीन दिनों तक गिरने के बाद बुधवार को 1,200 रुपये चढ़ा। इससे इसकी कीमत 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी का असर भी घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

चांदी एक दिन में 7400 रुपये चढ़ी

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी में जोरदार तेजी दिखी। यह 7,400 रुपये चढ़कर 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद ट्रेडर्स ने सोने की कम कीमतों का फायदा उठाने के लिए खरीदारी की, जिसका असर कीमत पर पड़ा।

क्रूड में नरमी का सोने पर असर

उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी का असर भी सोने पर पड़ा है। हालांकि, मार्केट और इनवेस्टर्स की नजरें अब फेडरल रिजर्व के फैसले पर लगी हैं। फेड भारतीय समय के मुताबिक आज रात 11:30 से 12 बजे के बीच अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा। इस बात की ज्यादा उम्मीद है कि वह इंटरेस्ट रेट में 0.25 फीसदी का इजाफा करेगा।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजरें

एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर दिखेगा। अगर वह इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करता है तो सोने की कीमतों में तेजी दिख सकती है। हालांकि, फेड यह संकेत दे चुका है कि फिलहाल उसका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल में रखने पर है। क्रूड की कीमतों में उछाल से इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी दिखी। यह 1.3 फीसदी चढ़कर 4,348 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी भी 1.5 फीसदी के उछाल के साथ 64.61 डॉलर प्रति औंस पर थी। इस साल जनवरी में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद दोनों में तेज गिरावट आई थी। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन पर दबाव बढ़ गया था।

Federal Reserve आज 0.25% बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट, इसका भारतीय शेयर बाजारों पर पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। अगर फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो यह जुलाई 2023 के बाद रेट में पहली वृद्धि होगी। रायटर्स के पोल में शामिल ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व मार्च तक कम से कम एक बार या ज्यादा बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। सवाल है कि अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका भारतीय शेयर बाजारों पर क्या असर पड़ेगा?

आज रात 12 बजे तक आएगा फेड का फैसला

फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट को लेकर फैसले का पता आज यानी 16 सितंबर को भारतीय समय के मुताबिक रात 11:30-12 बजे तक चल जाएगा। अगर फेड ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया तो डॉलर में मजबूती आएगी। इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी और शेयर बाजारों में ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखेगा। शेयर बाजारों पर पहले से काफी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। बाजार का सेंटिमेंट पहले से कमजोर है।

इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ने की पूरी संभावना

एनरिच मनी के फाउंडर और सीईओ पोनमुदी आर ने कहा कि आज इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा है। ऐसे में यह देखना काफी अहम होगा कि फेड आगे किस तरह का गाइडेंस देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार फेड के रेट बढ़ाने के फैसले को बर्दाश्त कर सकते हैं। लेकिन, इस बात को लेकर काफी अनिश्चितता है कि इंटरेस्ट रेट को लेकर फेड का रुख आगे कैसा रहेगा।

फेडरल रिजर्व के आगे के गाइडेंस पर होगी नजरें 

उन्होंने कहा, “इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है। इसका असर बाजार पर पहले से पड़ता दिख रहा है। भारतीय बाजार के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण फेड का आगे का गाइडेंस है। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि फेड के ऐलान के बाद अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड की दिशा कैसी रहती है।”

विदेशी फंडों के निवेश पर पड़ सकता है असर

उन्होंने कहा, “अगर फेड यह संकेत देता है कि इनफ्लेशन आगे हाई लेवल पर बना रहेगा और आगे भी इंटरेस्ट रेट बढ़ने के आसार हैं तो बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर में मजबूती का असर विदेशी फंडों के निवेश पर पड़ेगा। इसका मतलब है कि भारतीय बाजारों को लेकर विदेशी निवेशकों की बेरुखी जारी रह सकती है।” उन्होंने कहा कि इसका ज्यादा असर हाई-बीटा और रेट सेंसेटिव सेक्टर्स पर दिखेगा।

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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ेगा दबाव

भारत की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है। लेकिन विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। रुपया भी फिर से दबाव में दिख रहा है। अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नीचे नहीं आती है तो इससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी पर पहुंच गई है। यील्ड और बढ़ती है तो इससे भारतीय बाजारों पर दबाव बढ़ेगा।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 17 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 16 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,200 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 332.63 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 पर और निफ्टी 99.00 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 23,217.60 पर बंद हुआ। आज लगभग 1913 शेयरों में बढ़त हुई, 2241 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में SBI लाइफ इंश्योरेंस,HDFC लाइफ,ITC,एक्सिस बैंक और SBI शामिल रहे। वहीं TCS,विप्रो,इंफोसिस,टेक महिंद्रा और बजाज फिनसर्व में गिरावट देखी गई।

IT और फार्मा को छोड़कर,बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। FMCG और PSU बैंक इंडेक्स में 1% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स बिना किसी बदलाव के बंद हुआ,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली गिरावट आई।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि भारतीय बाजार आज बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले सेशन में आई भारी गिरावट के बाद इसमें रिकवरी हुई। सेंसेक्स लगभग 74,336 पर बंद हुआ और इसमें करीब 333 अंकों की बढ़त हुई,जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ 99 अंक ऊपर बंद हुआ। US में कच्चे तेल का स्टॉक बढ़ने से सप्लाई से जुड़ी कुछ चिंताएं कम हुईं,जिसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

FMCG शेयरों में सबसे ज़्यादा तेजी रही और चार दिन से जारी इनकी गिरावट का सिलसिला थम गया। आने वाले त्योहारों के मौसम को देखते हुए निवेशकों के रुझान के कारण HUL,ITC,डाबर इंडिया,इमामी,गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और P&G हाइजीन के शेयरों में 2-4% की बढ़त हुई।

सरकार ने 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% MDR लागू किया है, जिसमें 75,000 रुपये और उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय किया गया है। ये नए शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होंगे। इससे 2020 में शुरू किया गया ज़ीरो MDR सिस्टम खत्म हो जाएगा। जिन छोटे व्यापारियों का मासिक UPI QR कलेक्शन 1 लाख रुपये तक है,उन्हें इससे छूट मिलेगी। P2P ट्रांज़ैक्शन पहले की तरह मुफ़्त रहेंगे। इस बदलाव से बैंकों,पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को अतिरिक्त रेवेन्यू मिल सकता है।

PhonePe के CEO समीर निगम ने कहा है कि नए MDR फ्रेमवर्क से कंपनी के IPO प्लान को मदद मिल सकती है और चालू वित्त वर्ष में इसकी लिस्टिंग हो सकती है। उम्मीद है कि यह IPO पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा।

SEMICON India 2026 का आयोजन 17-19 सितंबर के बीच नई दिल्ली में किया जाएगा। इसमें 600 से ज्यादा एग्ज़िबिटर्स के शामिल होने की उम्मीद है,जिससे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स शेयरों पर सबकी नजर रहेगी। सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है, जिनमें से तीन में पहले से ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

NSE का IPO कल खुलने वाला है। बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहने की संभावना है। सेक्टर-स्पेसिफिक डेवलपमेंट,कच्चे तेल की कीमतो और विदेशी निवेश इसके मुख्य कारण होंगे। NSE का यह बड़ा IPO प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी का भी एक बड़ा टेस्ट होगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और US फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद (जिसका असर बाजार पहले ही पचा चुका है) से निवेशकों का भरोसा बढ़ा,जिससे भारतीय इक्विटी बाजार में भी तेजी आई। बैंक ऑफ जापान के पॉलिसी फैसले से पहले जापानी बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से भी पॉजिटिव माहौल को और मजबूती मिली,जिससे पूरे एशिया में जोखिम लेने की इच्छा को सपोर्ट मिला।

घरेलू स्तर बाजार में बैंकिंग,FMCG और ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी के कारण लार्ज-कैप शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त रही,जबकि IT सेक्टर में हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में मुनाफा वसूली दिखी।

निवेशक अब भविष्य में ब्याज दरों की चाल के बारे में और जानकारी पाने के लिए फेड चेयरमैन के बयान का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस गाइडेंस का असर ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति,कैपिटल फ़्लो और फ़ाइनेंशियल मार्केट की निकट भविष्य की दिशा पर पड़ेगा।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार को बैंकिंग शेयरों और कुछ बड़े शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते भारतीय इक्विटी मार्केट में थोड़ी रिकवरी देखने को नजर आई।

इस रिकवरी में बैंक निफ्टी सबसे आगे रहा। इसने 56,000 का स्तर फिर से हासिल किया और बेंचमार्क इंडेक्स को सपोर्ट दिया। हालांकि, रिकवरी में बहुत अधिक तेजी नहीं थी क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें $107-$108 प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी रहीं और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी घोषणा से पहले अमेरिकी 10-साल के ट्रेजरी यील्ड 5% के आसपास रही।

ग्लोबल मार्केट में निवेशकों का रुख सावधानी के साथ पॉजिटिव रहा। बाजार फेड के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। इंडिया VIX घटकर 13.15 पर आ गया,जो बताता है कि निकट भविष्य की चिंता में थोड़ी कमी आई है,हालांकि उतार-चढ़ाव हाल के स्तरों से ऊपर बना हुआ है।

तकनीकी स्थिति में मामूली सुधार हुआ है लेकिन यह अभी भी कमजोर है। निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद हुआ। लेकिन 23,300-23,500 के दायरे में उसे अभी भी रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,000 पर है और उसके बाद 22,800 पर अहम सपोर्ट है।

बैंक निफ्टी को 56,500-56,800 की ओर रिकवरी जारी रखने के लिए 56,000 के स्तर से ऊपर बने रहना होगा। अगर यह फिर से 56,000 के नीचे जाता है तो 55,500 का स्तर फिर से फोकस में आ सकता है।

फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर फैसला और उसके साथ दी जाने वाली पॉलिसी गाइडेंस ही बाजार की अगली चाल तय करेगी। फेड की संतुलित कमेंट्री से रिकवरी में मदद मिल सकती है,जबकि सख्त रुख (हॉकिश आउटलुक),बॉन्ड यील्ड में फिर से तेजी या ब्रेंट क्रूड का $110 की ओर बढ़ना बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ा सकता है और बाजार की रिकवरी को सीमित कर सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च, वेल्थ मैनेजमेंट,सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले से पहले बनी अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में सावधानी का माहौल बने रहने की संभावना है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट ने कहा कि आज भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव वाला दिन रहा। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी देखने को मिली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,रुपये में कमजोरी और FII की लगातार बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें,करेंसी में उतार-चढ़ाव और US फेड की पॉलिसी को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा तय करेंगी।

 

Trading Plan : कोई भी ट्रेड आज 3:40 बजे तक निपटा कर जाएं, कल का अनुमान अभी लगाना काफी मुश्किल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Plan : कोई भी ट्रेड आज 3:40 बजे तक निपटा कर जाएं, कल का अनुमान अभी लगाना काफी मुश्किल

Trading Plan : आज दरों पर US फेड के फैसले से पहले बाजार में शानदार रिकवरी आई है। निफ्टी निचले स्तरों से करीब 100 अंक सुधरा है और 23200 के ऊपर आ गया है। बैंक निफ्टी भी 56200 के अहम लेवल के ऊपर है। मिड और स्मॉलकैप ने भी यूटर्न मारा है। इधर INDIA VIX 3 फीसदी फिसला है। 2:35 बजे के आसपास सेंसेक्स 311.82 अंक या 0.42 प्रतिशत बढ़कर 74,315.64 पर और निफ्टी 115.90 अंक या 0.50 प्रतिशत बढ़कर 23,234.50 पर दिख रहा था। FMCG सेक्टर में सबसे ज़्यादा,लगभग 2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। जबकि PSU बैंक, रियल्टी और मीडिया सेक्टर में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी दिख रही है।

हालांकि IT शेयरों में गिरावट दिख रही और इसका सेक्टर इंडेक्स 1.59 प्रतिशत गिर गया है । बेंचमार्क में बढ़त के बावजूद मार्केट ब्रेड्थ नेगेटिव है। 1,727 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 2,176 शेयरों में गिरावट आई है। मिडकैप शेयरों में हल्की बढ़त दिख रही है। स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग सपाट है।

बैंकों और ग्रुप लाइफ कंपनियों के कमीशन पर कैंची चलाने की तैयारी है। इंडिविजुल एजेंट्स को राहत मिल सकी है। इस जल्द IRDAI का कंसल्टेशन पेपर जारी होगा। CNBC-TV की इस एक्सक्लूसिव खबर के बाद PB फिनटेक 5 फीसदी ऊपर भागा है। सिगरेट महंगी होने से ITC में उछाल आया है।चुनिंदा ब्रांड्स के दाम 9-13% बढ़े हैं। यह शेयर 2% चढ़कर निफ्टी के टॉप गेनर्स में शामिल है। गॉडफ्रे फिलिप्स भी 2.5% उछला है।

नए MDR फ्रेमवर्क से PAYTM में जोश है और ये करीब 2.5 फीसदी चढ़कर 52 हफ्तों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। उधर यस बैंक में भी खरीदारी कायम है। हालांकि ऊपरी स्तरों से दोनों शेयर हल्के हुए हैं।

बाजार: रिकवरी का दिन

बाजार पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिट अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी आई है। बाजार ने एक शॉर्ट और 1 लॉन्ग ट्रेड दी। पहले शॉर्ट ट्रेड ने काम किया और फिर लॉन्ग ट्रेड ने और अब फैसले की घड़ी से पहले का सेशन बाकी है। आज शाम को आएगा US फेड का फैसला। निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों में अच्छी रिकवरी आई है। दोनों में ठीक सपोर्ट लेवल से रिकवरी आई। निफ्टी में 23,100 और बैंक निफ्टी में 55,800 से रिकवरी आई। मिडकैप, स्मॉलकैप में भी निचले स्तरों से शानदार रिकवरी हुई। बड़ा सवाल यह है कि क्या बाजार अब दरों में कटौती को पचा चुका है?

बाजार: अब क्या?

अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में शॉर्ट साइड के सारे टारगेट हिट हुए हैं और इसीलिए हमने शॉर्ट समेटने का नजरिया लिया है। कोई भी ट्रेड आज 3:40 तक निपटा कर जाएं। कल का अभी अनुमान लगाना काफी मुश्किल है। आज फेड चीफ क्या कहेंगे कोई नहीं कह सकता। मगर बाजार बहुत कुछ निगेटिव पचा चुका है। यहां से और गिरने के लिए फेड का एक्ट्रीम हॉकिस होना जरूरी है और अगर ज्यादा हॉकिस नहीं हुए तो रिकवरी भी संभव है। जो भी है अब मंदी 23,100 के नीचे बंद होने पर ही होगी। अभी भी बाजार ने पोजीशनल लॉन्ग का संकेत नहीं दिया है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,100-23,150 पर सपोर्ट और 23,400-23,450 पर रेजिस्टेंस है। निफ्टी बैंक के लिए 55,800-56,000 पर सपोर्ट और 56,500-56,800 पर रेजिस्टेंस है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Insight : बाजार में आज फैसले का दिन, आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे

Market Insight : बाजार की आगे की दशा और दिशा पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में आज फैसले का दिन है। ग्लोबल बाजारों के लिए आज की रात फैसले की घड़ी है। आज रात को US फेड का फैसला आएगा। US में दरों में बढ़ोतरी की संभावना अब 94% पर है। इसका मतलब बाजार में दरों में बढ़ोतरी 94% भाव में शामिल है। अगर दरों में बढ़ोतरी हुई तो शायद कल एक बॉटम भी बने। लेकिन अगर दरों में बढ़ोतरी नहीं आई तो काफी दिलचस्प होगा। निफ्टी हमारे सारे टार्गेट हासिल कर चुका है। जैक्सन होल के बाद हमने CNBC-आवाज़ पर एक शॉर्ट का नजरिया लिया था। 23,100-23,300 के हमारे सारे टार्गेट स्क्रीन पर हासिल हुए। कल सुबह भी खुलते ही 23,650 के SL के साथ शॉर्ट का नजरिया था। कल क्लोजिंग में फिर शॉर्ट में मुनाफावसूली का नजरिया रहा। आज भी वही नजरिया है, इंट्राडे भले शॉर्ट करें, लेकिन निपटा कर जाएं। आज कुछ हिम्मत दिखाने वाले लोग शायद लॉन्ग भी लेकर जाएंगे।

फेड के फैसले से पहले ग्लोबल बाजार में घबराहट

अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 5.041% के इंट्राडे हाई पर है। 2007 के बाद 10-साल की यील्ड सबसे ऊंचे स्तर पर है। ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के ऊपर है। आज रात फेड के दरों में बढ़ोतरी की 94% संभावना है।

क्यों उबल रहा है कच्चा तेल?

रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब ने सितंबर की कुछ डिलीवरी रद्द की है। यूरोपीय ग्राहकों की सितंबर की डिलीवरी रद्द की गई है। सऊदी ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद की है। सऊदी ने एहतियातन पाइपलाइन बंद की है। हूतियों के हमले में पाइपलाइन को नुकसान हुआ है। पाइपलाइन की मरम्मत कबतक होगी ये साफ नहीं है।

ईरान युद्ध की कीमत

अमेरिकी कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में कहा गया है कि ईरान युद्ध से अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर बोझ बढ़ा है। पहले 5 महीनों में टैक्सपेयर्स पर 38 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। अगले साल की शुरुआत तक महंगाई 0.5% बढ़ सकती है। युद्ध का हर अतिरिक्त महीना 2-3 अरब डॉलर महंगा पड़ रहा है। तनाव बढ़ने पर युद्ध की लागत और बढ़ सकती है। कोर महंगाई पुराने अनुमान से 0.3% ज्यादा रह सकती है।

US डिफेंस सिस्टम पर असर

कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में आगे कहा गया है कि इस युद्ध में US बेस पर सैकड़ों इमारतें और स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं।कुवैत, बहरीन, कतर में US बेस स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं। UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान, जॉर्डन में भी स्ट्रक्चर तबाह हुए हैं।’Operation Epic Fury’ में विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए हैं।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा बयान आया है। इसमें कहा गया है कि ये तो सिर्फ शुरुआत है।

फेड का फैसला: हमारे लिए क्यों अहम?

पुरी दुनिया की नजर इस समय यूएस फेड पर है। बाजार के मुताबिक 25 Bps दरें बढ़ेंगी। एनालिस्ट का कहना है कि होल्ड या dovish hike के लिए बाजार तैयार नहीं है। BoA का कहना है कि इस स्तर पर रेट होल्ड करना “अभूतपूर्व” होगा। केविन वॉर्श की कोई भी टिप्पणी अहम होगी।

फेड की दर बढ़ोतरी का असर?

इससे इमर्जिंग मार्केट्स में आने वाले निवेश फ्लो पर सीधा असर पड़ता है। सोने और चांदी में रेट हाइक से गिरावट आती है। डॉलर की मांग बढ़ने से डॉलर मजबूत होता है। बेस मेटल्स पर भी दबाव आ सकता है। लोग खर्च कम करते हैं, जिससे मंदी का खतरा बढ़ता है। FCNR डिपॉजिट्स जो हमने जुटाए हैं,उनकी देनदारी भी बढ़ेगी। दर बढ़ोतरी किस मैक्रो हालात में होती है,ये सबसे अहम होता है। अगर इकोनॉमी मजबूत हो तो दर बढ़ोतरी हमेशा निगेटिव नहीं होती। पिछले 2-3 साल में भारत में ETF निवेश नहीं हुआ बल्कि पैसा बाहर ही गया है। ऐसे में काफी लोग कहेंगे कि हमें क्या फर्क पड़ता है? लेकिन अगर ग्लोबल बाजार में मंदी का खतरा बढ़े तो फर्क पड़ता है।

बाजार: आज का दांव

ब्रेंट $108/बैरल के ऊपर है। इसमें 4 महीने के शिखर के करीब कारोबार हो रहा है। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में एक्शन जारी रह सकता है। ONGC, OIL इंडिया के लिए पॉजिटिव है। वहीं, OMCs, एशियन पेंट्स और इंडिगो के लिए निगेटिव है। फेड के फैसले से पहले सोने-चांदी की कीमती में कमजोरी है। सोना 6 हफ्तों के और चांदी 5 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह टाइटन और कल्याण के लिए पॉजिटिव है। वहीं, मणप्पुरम, मुथूट फाइनेंस और हिंद जिंक के लिए निगेटिव है। डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। यह फार्मा और IT के लिए पॉजिटिव है लेकिन बैंकों के लिए निगेटिव है।

मेटल्स पर रखें नजर

डॉलर की मजबूती से मेटल्स में गिरावट आ सकती है। Nickel 10 हफ्तों के निचले स्तर पर है। कॉपर फ्यूचर्स 7 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह मेटल शेयरों के लिए निगेटिव है। खास तौर पर हिंद कॉपर,नाल्को और हिंडाल्को पर खराब असर पड़ सकता है।

रबर पर रखें नजर

रबर की कीमतें 1 हफ्ते के निचले स्तर पर हैं। यह अपोलो टायर्स,सिएट और MRF जैसे टायर शेयरों के लिए पॉजिटिव है।

AI और IT: अब आगे क्या?

एंथ्रोपिक के सीईओ अमोदेई (Amodei) ने कहा है कि AI डेवलपमेंट की रफ्तार धीमा करना जरूरी है। यही इंडस्ट्री को आगे लेकर जाने का सबसे अच्छा तरीका है। वहीं, एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने कहा है कि बाजार की ताकतें पहले से मौजूद हैं, नए रेगुलेशन की जरूरत नहीं है। जब तक वो ऐसी चीज जारी ना करें जो बाजार पसंद करेगा,कंपनियों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।

इस बीच खबर आई है कि OpenAI नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। कंपनी $1.2 ट्रिलियन वैल्यूएशन पर फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। अनुज सिंघल ने कहा कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगा कि AI ट्रेड खत्म हो गई है। किसी भी बड़ी बुल मार्केट में बड़े करेक्शन सामान्य होते हैं। पहले भी हमने AI के टॉप की बात की है और हर बार AI शेयरों ने नया हाई लगाया। AI अब यहां रहने और आगे बढ़ने के लिए आया है। हर गिरावट में पावर और डाटा सेंटर शेयर खरीदें। IT में अब आपको सावधान और स्टॉक स्पेसिफिक रहना होगा।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए आखिरी सपोर्ट 23,000-23,100 पर है। इसके नीचे बंद हुए तो 200 WMA यानी 22,500 का रास्ता खुलेगा। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,300-23,350 पर है और बड़ा रजिस्टेंस 23,400-23,500 पर है। आज हम निफ्टी पर न्यूट्रल रहेंगे और कल नया नजरिया लेंगे। कल सारे शॉर्ट्स क्लोजिंग में निपटाने का नजरिया था। आज शायद आपको 1 शॉर्ट और 1 लॉन्ग ट्रेड दोनों मिलेंगे।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी का मेक ऑर ब्रेक जोन 55,100-55,500 है। अगर 55,100 के नीचे बंद हुए तो 53,500-54,000 का रिस्क है। लेकिन अगर 55,100-55,500 बचा रहा तो शॉर्ट कवरिंग संभव है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 56,000-56,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 56,500-56,700 पर है। आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे।

 

Trading Ideas :उतार-चढ़ाव भरे सेशन में बेंचमार्क इंडेक्स में तेजी, जानिए आज किन शेयरों में हो सकती है कमाई

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: ₹3000 महंगी हुई चांदी, जानें 16 सितंबर को दिल्ली से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

Silver Price Today: 16 सितंबर 2026 को भारत में चांदी की कीमत ₹2.45 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास बनी रही। यह स्थिति तब रही जब कच्चे तेल की कीमतों, US ट्रेजरी यील्ड, US डॉलर और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर से जुड़े फैसलों के कारण ग्लोबल बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी था।

हालांकि आज बाजार ओपन होने के बाद कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में 1.3% बढ़कर यानी 3006 रुपये बढ़त के साथ 2,35,124 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,32,118 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

घरेलू बाजार में चांदी की कीमत ₹244.90 प्रति ग्राम, ₹2,449 प्रति 10 ग्राम और ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम थी। यह पिछली कीमत से ₹0.10 प्रति ग्राम कम थी और कुल मिलाकर इसमें काफी उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

अगस्त की शुरुआत में चांदी की कीमत ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम थी और महीने के आखिर में यह ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम हो गई, यानी एक महीने में इसमें 8.51% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, सितंबर में कीमतों में कुछ गिरावट (करेक्शन) देखी गई और 16 सितंबर को यह ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम पर थी।

इंटरनेशनल मार्केट में चांदी का भाव

16 सितंबर की बैठक से पहले अमेरिकी बाज़ार का ताज़ा बेंचमार्क यह है कि 15 सितंबर को स्पॉट सिल्वर $63.41 प्रति ट्रॉय औंस पर ट्रेड कर रही थी। स्पॉट गोल्ड $4,293.29 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स $4,332.80 पर ट्रेड कर रहे थे। रॉयटर्स ने बताया है कि FED की बैठक से पहले मज़बूत अमेरिकी डॉलर और ज़्यादा अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड की वजह से कीमती धातुओं पर दबाव बन रहा था।

आज दिल्ली में चांदी की कीमतों का ट्रेंड

दिल्ली में चांदी का रिटेल भाव राष्ट्रीय दर के हिसाब से ₹2,449 प्रति 10 ग्राम और ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम है। सितंबर की शुरुआत में कीमतों में जो तेज़ी से उतार-चढ़ाव देखे गए थे, उनकी तुलना में अब रोज़ाना के बदलाव कम हैं।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,45,000
मुंबई₹2,45,000
कोलकाता₹2,45,000
चेन्नई₹2,50,000
लखनऊ₹2,45,000
पटना₹2,45,000
जयपुर₹2,45,000
अहमदाबाद₹2,45,000
पुणे₹2,45,000
बेंगलुरु₹2,45,000
हैदराबाद₹2,45,000
भोपाल₹2,45,000
चंडीगढ़₹2,45,000
नोएडा₹2,45,000
गुरुग्राम₹2,45,000

क्या आपको आज भारत में चांदी खरीदनी चाहिए या इंतज़ार करना चाहिए?

जिन खरीदारों की निवेश रणनीति लंबे समय की है, उनके लिए एक ही बार में सारा पैसा लगाने के बजाय टुकड़ों में खरीदारी करना बेहतर हो सकता है।शॉर्ट-टर्म के लिए खरीदारी करने वालों को मार्केट द्वारा बताए गए MCX रेफरेंस लेवल – ₹2.30 लाख और ₹2.48 लाख – पर ध्यान देना चाहिए। जो लोग गहने और बर्तन खरीद रहे हैं, उन्हें सिर्फ़ बुलियन (कच्ची चांदी) की कीमत के बजाय खरीदारी की कुल लागत पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।खरीदारी का फैसला लेते समय खरीदारों को यह याद रखना चाहिए कि सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

Gold Silver Price:फेड के फैसले से पहले सोना-चांदी स्थिर, कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्रूड की कीमतें बाजार के लिए अभी भी बड़ी चिंता, जानें गिफ्ट निफ्टी से आज कैसे मिल रहे है संकेत

GIFT Nifty Indicator: बुधवार को GIFT Nifty ने भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के लिए सतर्क लेकिन काफी हद तक फ्लैट से पॉजिटिव ओपनिंग का संकेत दिया, जबकि एशियाई इक्विटी में कुछ स्थिरता लौटी। फेडरल रिजर्व के अहम पॉलिसी फैसले से पहले कच्चे तेल की कीमतें कम हुईं और US ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से नीचे आ गई।

सुबह 8:15 बजे GIFT Nifty 37 अंक या 0.16 प्रतिशत बढ़कर 23,239 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि पिछले सेशन में पांच महीने के नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद Nifty मामूली रिकवरी की कोशिश कर सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमत $107 प्रति बैरल से ऊपर बने रहने, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और US फेड के ब्याज दर के फैसले को लेकर अनिश्चितता के कारण बढ़त सीमित रह सकती है।

मंगलवार को भारतीय इक्विटी लगातार दूसरे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुईं, जिसमें व्यापक बिकवाली देखी गई, जबकि IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जिसने इस ट्रेंड के विपरीत प्रदर्शन किया। सेशन के दौरान Nifty 23,118.60 के निचले स्तर तक गिर गया, जो पांच महीनों में इसका सबसे निचला स्तर था।

विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार पांचवें सेशन में बिकवाल बने रहे और 15 सितंबर को 2,977 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी बेची। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,686 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी के साथ इस निकासी को आंशिक रूप से संतुलित किया।

ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से एशियाई बाजारों में स्थिरता

लगातार चार सेशन की गिरावट के बाद बुधवार को एशियाई इक्विटी में मामूली बढ़त देखी गई, क्योंकि फेड के फैसले से पहले ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी रुक गई। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत शेयरों के MSCI के सबसे व्यापक इंडेक्स में उतार-चढ़ाव के बाद 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि दक्षिण कोरियाई इक्विटी में 0.8 प्रतिशत की तेजी आई। S&P 500 फ्यूचर्स में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई।

हालिया उछाल के बाद US ट्रेजरी यील्ड में भी नरमी आई। मंगलवार को तीन साल में पहली बार 5 प्रतिशत का स्तर पार करने के बाद, बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड एशियाई ट्रेडिंग में लगभग 0.8 बेसिस पॉइंट गिरकर 4.9875 प्रतिशत हो गई।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, लेकिन $107 से ऊपर बनी हुई हैं

US क्रूड इन्वेंट्री में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद एशियाई कारोबार की शुरुआत में तेल की कीमतों में गिरावट आई, हालांकि कीमतें ऊंची बनी रहीं क्योंकि निवेशक पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति जोखिमों का आकलन करते रहे। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.86% गिरकर $107.82 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.92% गिरकर $104.86 पर आ गया।

मंगलवार को दोनों बेंचमार्क $3 से ज़्यादा बढ़कर 19 मई के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे। ऐसा तब हुआ जब सऊदी अरब ने रेड सी (लाल सागर) की ओर जाने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद अपने यानबू पोर्ट पर तेल की लोडिंग रोक दी। सऊदी अरब ने यूरोप को तेल की सप्लाई भी कम कर दी।

निफ्टी पर आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि घरेलू बाज़ार के लिए क्रूड ऑयल अभी भी सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, जबकि फेड के फ़ैसले का उभरते बाज़ारों में कैपिटल फ़्लो पर बड़ा असर पड़ सकता है।

पोनमुडी के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने या सख़्त रुख अपनाने से भारत समेत उभरते बाज़ारों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिकी यील्ड बढ़ने से डॉलर एसेट्स ज़्यादा आकर्षक हो जाते हैं। उन्हें उम्मीद है कि जब तक तेल की वजह से होने वाली महंगाई और फेड की पॉलिसी की दिशा के बारे में ज़्यादा साफ जानकारी नहीं मिल जाती, तब तक घरेलू बाज़ार में सावधानी का रुख बना रहेगा।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा फ्लैट ओपनिंग के संकेत, एशिया बाजारों में मिलाजुला कारोबार

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price:फेड के फैसले से पहले सोना-चांदी स्थिर, कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

Gold Silver Price: बुधवार, 16 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं, जबकि चांदी में बढ़त देखी गई क्योंकि निवेशक दिन में बाद में आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले का इंतजार कर रहे थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर का असर बुलियन (सोने-चांदी) पर बना रहा, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बनाए रखा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, COMEX सोना $4,329.30 प्रति औंस पर था, जो पिछले बंद भाव $4,333.50 प्रति औंस से $3.50 या 0.08% कम था। कॉन्ट्रैक्ट ने दिन के दौरान $4,339.50 प्रति औंस का उच्चतम और $4,315.20 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

वहीं, COMEX चांदी 0.59% बढ़कर $64.235 प्रति औंस हो गई, जबकि पिछला बंद भाव $64.185 प्रति औंस था। चांदी $64.480 प्रति औंस के उच्चतम और $63.940 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच कारोबार करती रही।

घरेलू बाजार में, PTI द्वारा बताए गए स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, मंगलवार (15 सितंबर) को नई दिल्ली में सोने की कीमतें ₹1,000 गिरकर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम हो गईं, जिससे यह कीमती धातु एक महीने से अधिक समय के अपने निचले स्तर पर आ गई।

हालांकि, चांदी की कीमत ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर स्थिर रही।

सोने में हालिया कमजोरी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतों में गिरावट के बाद आई। विश्लेषकों ने इस बदलाव का कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड को बताया।

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड मंगलवार (15 सितंबर) को 5% के पार पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर था, हालांकि बुधवार को एशियाई कारोबार में इसमें थोड़ी नरमी आई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी सोने पर दबाव डाल सकती है क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती है।

डॉलर इंडेक्स दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने पर और दबाव पड़ा। साथ ही, पिछले सत्र में भारी बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के आसपास ऊंचे स्तर पर बना रहा, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। अब बाज़ार की नज़रें फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और ब्याज दरों पर उसकी गाइडेंस पर टिकी हैं। फ़ेड के रेट आउटलुक में बदलाव डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर असर डाल सकते हैं, जिससे सेंट्रल बैंक की टिप्पणी बुलियन की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम ट्रिगर बन जाती है।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अगस्त में सोने का आयात सालाना आधार पर 57.75% घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि चांदी का आयात 127% बढ़कर 1.02 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान सोने का आयात 3.38% बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।