ChatGPT का नया ट्रेंड हो रहा वायरल, एक फोटो डालिए और पहुंच जाइए 1980s में! आजमाइए ये 5 AI प्रॉम्ट्स

1980s AI Photo Trend: हाल के दिनों में AI की मदद से फोटो एडिट करने का चलन काफी बढ़ा है। अब AI के जरिए आज की तस्वीरों को किसी भी पुराने दौर की तस्वीर जैसा लुक देना आसान हो गया है। इनमें 1980 का दशक लोगों को खास तौर पर पसंद आ रहा है।

बता दें कि 1980 का दौर अपने शानदार फैशन, फिल्म कैमरे से खींची गई तस्वीरों, चटक रंगों, बड़े और स्टाइलिश हेयरस्टाइल और खास रेट्रो लुक के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि लोग AI की मदद से अपनी आधुनिक तस्वीरों को 1980 के दशक की पुरानी और यादगार तस्वीरों जैसा बना रहे हैं।

AI मॉडल अब आम विंटेज फिल्टर लगाने के बजाय, कपड़े, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड और लाइटिंग बदलकर 1980 के दशक की असली जैसी तस्वीरें बना सकते हैं, और साथ ही व्यक्ति का चेहरा और पहचान भी पहचानी जा सकती है।

यहां 5 प्रॉम्प्ट दिए गए हैं, जिनकी मदद से आप अपनी तस्वीरों को 1980 के दशक की रियलिस्टिक और पुरानी यादों जैसी फोटो में बदल सकते हैं।

क्लासिक फैमिली पोर्ट्रेट

इस फोटो को 1980 के दशक की असली फैमिली फोटो जैसा बनाएं, जिसमें मेरा चेहरा, चेहरे की बनावट, स्किन टोन, हाव-भाव और पहचान पूरी तरह से पहचानी जा सके। मुझे 1980 के दशक के असली कपड़े पहनाएं और उस दौर के हिसाब से हेयरस्टाइल और एक्सेसरीज दें। वार्म एनालॉग लाइटिंग, कोडक फिल्म के रंग, हल्का ग्रेन, हल्के रंग और सॉफ्ट फोकस का इस्तेमाल करें। आधुनिक चीजों की जगह विंटेज फर्नीचर, CRT टेलीविजन और क्लासिक होम डेकोर लगाएं।

हाई स्कूल ईयरबुक

इस इमेज को 1980 के दशक की असली हाई स्कूल ईयरबुक पोर्ट्रेट में बदलें। मेरी चेहरे की पहचान बनाए रखते हुए मुझे फेदर्ड हेयर, रेट्रो कपड़े और उस दौर की स्टाइलिंग दें। असली ईयरबुक फोटो जैसा लुक देने के लिए स्टूडियो बैकड्रॉप, सॉफ्ट फ्लैश फ़ोटोग्राफी, साफ दिखने वाले फिल्म ग्रेन और थोड़े हल्के रंगों का इस्तेमाल करें।

गर्मियों की छुट्टियों की तस्वीर

इसे 1980 के दशक की छुट्टियों की एक कैजुअल तस्वीर में बदलें, जैसे कि यह 35mm फिल्म पर खींची गई हो। मेरे चेहरे को वैसा ही रहने दें, लेकिन मेरे मॉडर्न कपड़ों की जगह रंग-बिरंगे रेट्रो कपड़े दिखाएं। छुट्टियों जैसा असली एहसास देने के लिए इसमें हल्की गर्म धूप, फिल्म की स्वाभाविक कमियां, लेंस की हल्की धुंधलाहट, पुरानी कारें और ताड़ के पेड़ जोड़ें।

1980 के दशक की सड़क का नजारा

इस तस्वीर को 1980 के दशक की सड़क की एक कैंडिड तस्वीर में बदलें। मेरे चेहरे को वैसा ही रहने दें और साथ ही उस दौर के फैशन, नियॉन साइन वाले स्टोरफ्रंट, पे-फोन, क्लासिक सेडान कारें और फिल्म कैमरे की कमियां जोड़ें। इसमें असली एनालॉग लाइटिंग और रंगों का हल्का फेडिंग इफेक्ट इस्तेमाल करें।

रेट्रो ऑफिस प्रोफेशनल

1980 के दशक के कॉर्पोरेट ऑफिस का एक असली जैसा दिखने वाला पोर्ट्रेट बनाएं। मेरे चेहरे के हाव-भाव वैसे ही रहने दें, लेकिन मेरे कपड़ों की जगह शोल्डर पैड वाला विंटेज बिजनेस सूट और रेट्रो चश्मा लगा दें। साथ ही, बैकग्राउंड में CRT मॉनिटर और फाइलिंग कैबिनेट वाला क्लासिक ऑफिस का इंटीरियर दिखाएं।

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Instagram पर वायरल हुआ 1980s वाला फोटो ट्रेंड, जानें ChatGPT से इसे कैसे बनाएं?

Instagram 80s Trend: Instagram ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पुरानी यादें ताजा करने वाली मशीन में बदलने का एक और तरीका ढूंढ लिया है। जी हां, दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर एक नया फोटो ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें लोग अपनी तस्वीरों को ऐसा बना रहे हैं, जैसे उन्हें 1980 के दशक में खींचा गया हो।

इसके लिए सिर्फ फोटो पर पुराना या विंटेज फिल्टर लगाने के बजाय, लोग अपनी तस्वीरें ChatGPT पर अपलोड कर रहे हैं और उससे पूरी तस्वीर को 1980 के दशक के हिसाब से बदलने के लिए कह रहे हैं। इसमें हेयरस्टाइल, कपड़े, एक्सेसरीज, बैकग्राउंड और फोटो की पुरानी दिखने वाली क्वालिटी तक बदली जा रही है।

इस ट्रेंड को Instagram पर तेजी से फैलाने में एक और चीज मदद कर रही है। लोग Stories में इस फोटो को बनाने वाला प्रॉम्प्ट शेयर कर रहे हैं और Instagram के “Add Yours” स्टिकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उनके दोस्त और फॉलोअर्स भी अपनी 1980 के दशक वाली तस्वीरें बना सकते हैं।

इसका मकसद सिर्फ किसी फोटो को पुराना दिखाना नहीं है, बल्कि एक आसान सवाल का जवाब तलाशना है—अगर यह तस्वीर चार दशक पहले खींची गई होती, तो मैं कैसा दिखता?

इस ट्रेंड की खासियत सिर्फ फोटो का रंग बदलना नहीं, बल्कि पूरी तरह से 1980 के दशक का लुक तैयार करना है। ऑनलाइन सामने आ रही इन तस्वीरों में कई तरह के अलग-अलग स्टाइल और लुक देखने को मिल रहे हैं।

कुछ तस्वीरें ग्लैमरस बॉलीवुड पोर्ट्रेट जैसी लगती हैं। वहीं कुछ तस्वीरें फॉर्मल स्टूडियो फोटोग्राफ, दानेदार फिल्म स्टिल्स, पुराने जमाने की मैगजीन के कवर या परिवार के पुराने एल्बम की तस्वीरों जैसी दिखती हैं।

इस रेट्रो इफेक्ट को बनाने के लिए वॉर्म लाइटिंग, गहरे रंग, सॉफ्ट-फोकस फोटोग्राफी और फेड टेक्सचर जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारतीय स्टाइल वाले पोर्ट्रेट में अक्सर उस दौर की जानी-पहचानी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें महिलाओं को रंग-बिरंगी साड़ियों, कर्ल किए हुए या घने बालों और खास तरह की ज्वेलरी के साथ दिखाया जा रहा है, जबकि पुरुषों के पोर्ट्रेट में ढीली या फिटिंग वाली शर्ट, हाई-वेस्ट पैंट, मूंछें और अच्छी तरह से स्टाइल किए गए बाल शामिल हो सकते हैं।

इस ट्रेंड में यह फर्क काफी महत्वपूर्ण है। अच्छी तस्वीर वही मानी जा रही है, जो ऐसी लगे जैसे वह वास्तव में 1980 के दशक में खींची गई हो, न कि आज की सेल्फी पर सिर्फ पुराना इफेक्ट लगा दिया गया हो।

इसे बनाने के तरीकों में एनालॉग-स्टाइल फिल्म ग्रेन, हल्के फेड रंग, सॉफ्ट फोकस, त्वचा का नैचुरल टेक्सचर और उस दौर का असली जैसा माहौल बनाने पर जोर दिया जाता है, साथ ही इसमें स्मार्टफोन, आज के कपड़े, मॉडर्न कारें और आज की दूसरी साफ तौर पर दिखने वाली चीजों को जानबूझकर शामिल नहीं किया जाता है।

चेहरे की पहचान बनाए रखना अब प्रॉम्प्ट का एक हिस्सा बन गया है

इस बदलाव का मतलब जरूरी नहीं कि इंसान का चेहरा पूरी तरह बदल दिया जाए।

इस ट्रेंड के उदाहरणों में बार-बार यह निर्देश दिया जाता है कि व्यक्ति के आस-पास के विजुअल माहौल को बदलते समय भी उसके चेहरे की पहचान, स्किन टोन और कुल मिलाकर उसकी पहचान को बनाए रखा जाए। इसलिए, यूजर्स अलग-अलग तरह के कपड़े, हेयरस्टाइल और बैकग्राउंड के साथ एक्सपेरिमेंट करते हुए भी अपने चेहरे और हाव-भाव को ओरिजिनल फोटो के काफी हद तक वैसा ही रख सकते हैं।

यह रिक्वेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि AI से बनी तस्वीर, अपलोड की गई फोटो वाले व्यक्ति से अलग दिख सकती है।

कुछ प्रॉम्प्ट्स में सिस्टम से यह भी कहा जाता है कि वह चेहरे की बनावट या आकार में बेवजह बदलाव न करे और व्यक्ति की पहचान बनी रहे।

इसी असर की वजह से कई तस्वीरें लोगों का ध्यान खींचती हैं। व्यक्ति तो वही रहता है, लेकिन उनके आस-पास की फोटो किसी और जमाने की लगती है।

यूजर्स 1980 के दशक के लुक को लेकर ज्यादा खास जानकारी दे रहे हैं

यह ट्रेंड यह भी दिखाता है कि प्रॉम्प्ट के आधार पर फाइनल इमेज कितनी बदल सकती है।

सिर्फ ChatGPT से यह कहने के बजाय कि “इसे 1980 के दशक जैसा बनाओ,” यूजर्स यह बता सकते हैं कि उन्हें क्या चाहिए – जैसे इंडियन स्टूडियो पोर्ट्रेट, बॉलीवुड स्टाइलिंग, फैमिली-एल्बम फोटोग्राफ, पुरानी शादी की तस्वीर, डिस्को सेटिंग, मैगजीन-कवर शूट या फिल्म पर खींची गई तस्वीर जैसा लुक।

इसके अलावा, लोग मूंछ, अलग हेयरस्टाइल, पुराने जमाने की एक्सेसरीज और बैकग्राउंड जैसी चीजों को भी अपनी पसंद के हिसाब से बदल रहे हैं। तस्वीर में डिस्को, आर्केड, 1980 के दशक का जिम, बीच या बर्थडे पार्टी जैसी जगहें भी जोड़ी जा सकती हैं।

इस तरह एक ही फोटो ट्रेंड से 1980 के दशक की दर्जनों अलग-अलग तरह की तस्वीरें बनाई जा रही हैं।

एक तस्वीर को एक बार में ग्लैमरस फिल्म पोर्ट्रेट जैसा और अगली बार में आम फैमिली स्नैपशॉट जैसा स्टाइल किया जा सकता है। मूल आइडिया वही रहता है, लेकिन जो नॉस्टैल्जिया पैदा होता है, वह सिनेमैटिक, फैशनेबल या जानबूझकर आम जिंदगी जैसा हो सकता है।

लोग ChatGPT से 1980 के दशक वाली तस्वीरें कैसे बना रहे हैं

इसका तरीका काफी आसान है। लोग एक साफ फोटो चुनते हैं, उसे ChatGPT पर अपलोड करते हैं और बताते हैं कि वे फोटो में किस तरह का 1980 के दशक वाला लुक चाहते हैं।

ऐसी फोटो बेहतर रहती है जिसमें चेहरा सामने या थोड़ा साइड से साफ दिखाई दे। इसके लिए प्रोफेशनल फोटो होना जरूरी नहीं है। साधारण सेल्फी से भी ऐसी तस्वीर बनाई जा सकती है।

इसके बाद प्रॉम्प्ट में कपड़े, हेयरस्टाइल, एक्सेसरीज, जगह, रोशनी और फोटो के टेक्सचर जैसी चीजों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

अगर पहली बार में तस्वीर सही नहीं बनती, तो यूजर्स को दोबारा शुरुआत करने की जरूरत नहीं होती। वे उसी तस्वीर में बदलाव करते हुए उसे बेहतर बना सकते हैं। किसी एक चीज को बदला जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर फोटो बहुत ज्यादा आधुनिक या परफेक्ट लग रही है, तो उसे कम आधुनिक और 1980 के दशक की असली फोटो जैसा बनाया जा सकता है।

यही बार-बार बदलाव करने की सुविधा इन तस्वीरों को साधारण फोटो फिल्टर से अलग बनाती है। तस्वीर में एक-एक चीज को बदलकर उसे अपनी पसंद के मुताबिक तैयार किया जा सकता है।

छोटी-छोटी गलतियां AI की पहचान बता सकती हैं

रेट्रो स्टाइल वाली तस्वीर पहली नजर में भले ही बिल्कुल असली लगे, लेकिन पोस्ट करने से पहले उसे ध्यान से जांचना जरूरी है।

AI से बनाई गई तस्वीरों में चेहरे की छोटी-बड़ी चीजें, ज्वेलरी, उंगलियां, कपड़ों के डिजाइन या बैकग्राउंड में लिखे शब्द बदल सकते हैं या गलत दिखाई दे सकते हैं।

इसलिए यूजर्स को सलाह दी जाती है कि अंतिम तस्वीर को ध्यान से देखें और AI से बनाई गई फोटो को असली पुरानी या ऐतिहासिक तस्वीर बताकर शेयर न करें।

इसमें प्राइवेसी का भी ध्यान रखना जरूरी है। ऐसी तस्वीरें अपलोड करने से बचना चाहिए जिनमें जरूरी दस्तावेज, निजी जगह या संवेदनशील जानकारी दिखाई दे रही हो। इसके अलावा, किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर को उनकी अनुमति के बिना बदलने से भी बचना चाहिए।

AI से बनाई गई तस्वीरों को 1980 के दशक की सटीक ऐतिहासिक तस्वीर नहीं माना जाना चाहिए। ये सिर्फ रचनात्मक तरीके से तैयार की गई तस्वीरें हैं। AI कपड़ों, हेयरस्टाइल, जगहों और चेहरे की बारीकियों में गलतियां कर सकता है। इसलिए तस्वीर 1980 के दशक का अंदाज तो दिखा सकती है, लेकिन उस दौर की बिल्कुल सही तस्वीर नहीं हो सकती।

आज की सेल्फी से ऐसी तस्वीर तक, जो कभी ली ही नहीं गई

इस ट्रेंड के पीछे लोगों की दिलचस्पी को समझना आसान है।

आज की कोई भी फोटो हमें दिखाती है कि हम इस समय कैसे दिखते हैं। लेकिन 1980 के दशक का यह ट्रेंड इससे कुछ अलग है। इसमें लोग अपने अतीत की एक ऐसी तस्वीर बनवा सकते हैं, जो असल में कभी थी ही नहीं।

यह तस्वीर किसी ऐसे स्टूडियो पोर्ट्रेट जैसी हो सकती है, जो कभी खिंचा ही नहीं गया। यह किसी ऐसे फैमिली एल्बम की तस्वीर भी लग सकती है, जो कभी बना ही नहीं था। या फिर यह 1980 के दशक का फिल्मी अंदाज हो सकता है, जिसे व्यक्ति ने सिर्फ फिल्मों, फैशन और पुरानी पारिवारिक तस्वीरों के जरिए जाना है।

फिलहाल, Instagram का यह नया AI नॉस्टेल्जिया ट्रेंड लोगों के लिए ऐसे काल्पनिक अतीत को बनाना बेहद आसान कर रहा है।

सिर्फ एक फोटो, सही तरीके से लिखा गया प्रॉम्प्ट और कुछ बार बदलाव करके कोई भी व्यक्ति अपने चेहरे को बिल्कुल अलग दौर की तस्वीर में दिखा सकता है।

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Gold Silver Prices Today: दिल्ली में लगातार दूसरे दिन फिसला सोना, चांदी 600 रुपये उछली

Gold Silver Prices Today:  दिल्ली सर्राफा बाजार में 8 सितंबर को सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। चांदी में तेजी देखने को मिली। सोने की कीमत 2,150 रुपये गिरकर 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने यह जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में हल्की नरमी दिखी।

चांदी की कीमतों में 600 रुपये का उछाल

चांदी में 600 रुपये की तेजी दिखी, जिससे इसका भाव 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। इससे पहले के लगातार दो सत्रों में चांदी की कीमतों में स्थिरता दिखी थी। चांदी 3 सितंबर को 5,000 रुपये चढ़कर 2,40,500 रुपये पर पहुंच गई थी। उसके बाद 4 और 7 सितंबर को कीमतों में स्थिरता दिखी थी।

डॉलर में कमजोरी से चांदी को मिला सपोर्ट

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “सिल्वर में रिकवरी आ रही है, क्योंकि डॉलर में कमजोरी से इसे सपोर्ट मिल रहा है। इनवेस्टर्क की नजरें इस बीच अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं।” अगर महंगाई बढ़ती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। फेड की बैठक 15 सितंबर को शुरू हो जाएगी। इसके नतीजे 16 सितंबर को आएंगे। अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका खराब असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।

क्रूड में उछाल से बुलियन पर दबाव

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड का भाव फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल की तरफ बढ़ रहा है। इससे महंगाई बढ़ने का डर है। महंगाई बढ़ने पर फेडरल रिजर्व सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाएंगे। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर गोल्ड की चमक फीकी पड़ती है, जबकि घटने पर चमक बढ़ जाती है।

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जनवरी में सोने और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ गया। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में दोनों में रिकवरी दिखी थी।

Nifty Trend : निफ्टी पिछले एक महीने में करीब 1000 अंक नीचे गिरा, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Nifty Trend : सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का कहना है कि बाजार इस समय मंड़ियों की पकड़ में है। निफ्टी पिछले एक महीने में करीब 1000 अंक नीचे गिरा है। यह 24,775 से धीरे-धीरे गिरकर 23,775 पर आया है। दिक्कत यह कि एक दिन की गिरावट कभी भी 0.57% से ज्यादा नहीं रही है। इस दौरान सिर्फ 6 दिन निफ्टी पॉजिटिव रहा। निफ्टी में अब ट्रेंडलाइन और ट्राइएंगल ब्रेकडाउन कन्फर्म हुआ है। कच्चा तेल अभी भी बाजार का सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स भी नीचे आने को तैयार नहीं हैं। एक बड़ा फैक्टर है निफ्टी IT का वापस गिरना। पिछले 1 महीने में Nifty IT 6% से ज्यादा गिर चुका है। बैंक निफ्टी फ्लैट रहा है लेकिन बार-बार 200 DMA के नीचे आ रहा है। ग्लोबल बाजार भी 11 तारीख तक शायद वेट एंड वॉच मोड में रहें।

क्रूड की तेजी बरकरार

ब्रेंट $97 के पार निकल गया है। इसमें पिछले हफ्ते से 9% की तेजी आई है। सप्लाई की चिंता से क्रूड में तेजी जारी है। US-ईरान में तनाव बढ़ने से सप्लाई की चिंता बढ़ी है।

ईरान-ओमान के बीच हॉर्मुज मैनेजमेंट डील अंतिम दौर में है। सऊदी अरामको की Jazan फैसिलिटी पर हमले की खबरें हैं। चीन की क्रूड खरीद में रिकवरी से भी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।

क्रूड पर Goldman Sachs

Goldman Sachs का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में हमले बढ़े तो कीमतों में और तेजी आएगी। हमले बढ़े तो ब्रेंट $120 तक भी जा सकता है। क्रूड पर बाजार का भरोसा बढ़ा है। हेज फंड्स मई के बाद ब्रेंट पर सबसे ज्यादा बुलिश हैं। WTI में नेट लॉन्ग पोजिशन जून के बाद सबसे ऊंचे हैं। हॉर्मुज सप्लाई रिस्क से क्रूड में तेजी की उम्मीद बढ़ी है।

अमेरिका में पेट्रोल-डीजल महंगा

US में गैसोलीन और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर हैं।मिडिल ईस्ट सप्लाई रिस्क से फ्यूल मार्केट पर दबाव है।

चीन की गोल्ड खरीदारी जारी

PBoC ने अगस्त में 6.5 लाख औंस सोना खरीदा है। अगस्त में हुई खरीद अक्टूबर 2023 के बाद सबसे ज्यादा रही है। PBoC लगातार 22वें महीने सोना खरीद रहा है।

शेयर बाजार क्यों चिंता में?

शेयर बाजार पर Societe Generale का कहना है कि 10-साल की US यील्ड में तेजी बाजार के लिए ठीक नहीं है। US यील्ड 5.5% पर पहुंची तो बाजार पर दबाव बढ़ेगा। 5.5% यील्ड पर अर्निंग्स ग्रोथ भी वैल्यूएशन को सपोर्ट नहीं है। बढ़ती बॉरोइंग कॉस्ट से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ेगा। फेड या ECB का दरें बढ़ाना बाजार के लिए काफी नहीं है। रेट हाइक महंगाई की चिंता दूर करने के लिए काफी नहीं है।

इक्विटी बाजार पर JPMorgan की राय है कि 10-साल की यील्ड 5% पर बाजार में तेज प्रतिक्रिया संभव है। 5% यील्ड से निवेशकों की इक्विटी को लेकर चिंता बढ़ेगी। 5% का स्तर अहम साइकोलॉजिकल थ्रेशोल्ड माना जा रहा है।

बाजार: कहां तक गिर सकता है निफ्टी?

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी में इस साल 2 बड़े बॉटम बने थे। युद्ध के तुरंत बाद 22,331 और मई में 23,123 (क्लोजिंग लेवल) देखने को मिले। क्लोजिंग के हिसाब से हम 24,774 तक चले थे। मई के स्तर से जो रैली हुई उसका हम 60% गिर चुके हैं और अगर 23,750 के नीचे बंद हुए तो 61.8% रिट्रेसमेंट होगी। ऐसे में वापस 23,100-23,200 जाने का रिस्क होगा। युद्ध के बाद वाले लो की रैली का भी हम 41% रिट्रेस हो चुके हैं और उसका 50% retracement लेवल आएगा करीब 23,550 पर। यानी कि कुल मिला कर 23,200-23,500 का रास्ता अब शायद खुल चुका है।

बाजार: आज कहां हो नजर?

अनुज सिंघल की राय है कि आज फिर से निफ्टी IT पर दबाव दिख सकता है। एक बार फिर से कोस्पी ऊपर है और बॉन्ड यील्ड्स भी। आज GE Vernova T&D हीरो हो सकता है। CNBC-आवाज ने आपको पिछले हफ्ते ही आज के लिए तैयार किया था। सिर्फ आवाज़ ने कहा था कि पावर ग्रिड का ऑर्डर GVT&D को मिलेगा। इसके अलावा बाकी पावर इक्विपमेंट शेयर भी चल सकते हैं। लग रहा है कि AI ट्रेड वापस अब दौड़ रही है। डिफेंस शेयर भी रडार पर हैं लेकिन ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली संभव है। आज कुछ मेटल शेयर चल सकते हैं। कॉपर रिकॉर्ड हाई पर है और जिंक 4 साल की ऊंचाई पर है। सोने और चांदी में भी चमक लौटी है। आज हिंद कॉपर और हिंद जिंक जैसे शेयरों पर नजर रखें। आज फार्मा शेयरों पर भी नजर रखें। बाजार में Risk Off है, ऐसे में थोड़ा फार्मा चल सकता है। निफ्टी का PCR गिरकर 0.69 पर आ चुका है। एक उम्मीद रहेगी कि एक्सपायरी की वजह से आज दूसरे हाफ में बड़ी कवरिंग आए। लेकिन ये सिर्फ उम्मीद है, स्क्रीन अभी तक रैली के लिए तैयार नहीं है।

निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,700-23,750 पर और बड़ा सपोर्ट 23,550-23,600 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,800-23,850 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,900-23,950 पर है। बाजार में ट्रेड वहां करें जहां रिकवरी फेल हो,वहां बेचें। लेकिन आज एक्सपायरी है,एक शॉर्ट कवरिंग भी संभव है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

इसके लिए 56,800-57,000 एक मेक ऑर ब्रेक लेवल है। इसे बचाया तो एक बार वापस 57,300-57,500 जा सकते हैं। लेकिन 56,800 टूटा तो 56,500 तक गिरने का खतरा होगा।

 

 Market Trend : मार्केट में रिकवरी की कोशिश हो रही नाकाम, कमजोर बाजार में भी इन शेयरों में दिख रहा दम

 

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Trading Plan : बाजार पर कच्चे तेल में उछाल और अमेरिका में दरें बढ़ने का डर हुआ हावी, जानिए कल के लिए ट्रेडिंग प्लान

Trading Plan : बाजार पर कच्चे तेल में उछाल और अमेरिका में दरें बढ़ने का डर हावी हो गया है। निफ्टी 23750 के मेक या ब्रेक लेवल पर पहुंच गया है। एडवांस्ड-डिक्लाइन रेशियो भी कमजोर है। क्रूड 98 डॉलर के करीब है। इंडिया VIX 5 फीसदी ऊपर चला गया है। IT, मेटल, रियल्टी और बैंकों ने बनाया आज सबसे ज्यादा दबाव बनाया है। निफ्टी IT इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा फिसला है। इंफोसिस, टेक महिंद्रा, विप्रो और HCL टेक वायदा के टॉप लूजर्स में शुमार हैं। हलांकि डिफेंस फार्मा और हेल्थकेयर से सपोर्ट मिल रहा है।

कमजोर बाजार में भी आज EMS सेक्टर कमाल कर रहा है। AVALON 8 परसेंट ऊपर है। नए JV और नोमुरा की बुलिश रिपोर्ट के बाद इसका जोश हाई है। साथ ही सिरमा SGS 10% उछलकर आज का हीरो बना है। KAYNES में भी खरीदारी आई है। NSE के IPO को मंजूरी से कैपिटल मार्केट स्पेस में भी मोमेंटम है। एंजेल वन करीब 2 परसेंट चढ़कर वायदा के टॉप गेनर्स में शुमार है। साथ ही MCX और BSE में भी खरीदारी आई है।

बाजार की कड़वाहट के बीच पूरे शुगर स्पेस में मिठास है। डालमिया भारत शुगर, श्री रेणुका और बलरामपुर चीनी 3-4 परसेंट उछले हैं साथ ही अवध शुगर, त्रिवेणी एंजीनियरिंग, द्वारिकेश शुगर्स में भी अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है।

Vodafone Idea को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। GST विभाग की 360 करोड़ की डिमांड याचिका खारिज कर दी गई है। यह शेयर 52 हफ्तों की ऊंचाई पर पहुंचा है। इसमें 1 महीने में 20 परसेंट का उछाल दिखा है। साथ ही इंडस टावर्स में भी करीब 1 परसेंट की मजबूती है।

बाजार: नाजुक स्तरों पर

सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का कहना है कि निफ्टी 23,750 के अहम मेक ऑर ब्रेक स्तर पर है। आज निफ्टी IT और बैंक्स दोनों में गिरावट है। मेटल शेयरों में भी मुनाफावसूली आई है। फेड का रेट हाइक फीयर फैक्टर बाजार पर हावी है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आज भी बिकवाली है । ADVANCE/DECLINE भी कमजोर है। INDIA VIX में आज बहुत दिनों बाद तेजी देखने को मिली है। कच्चा तेल अभी भी $97 के ऊपर ही है। तेजी वाले सेक्टर्स ढूंढना बड़ा मुश्किल है। EMS और कैपिटल मार्केट जैसे कुछ ही सेक्टर्स में तेजी है। बड़ा सवाल यह है कि क्या हम 23,750 के नीचे बंद होंगे?

बाजार: अब क्या?

बाजार पर हमारा निगेटिव नजरिया रहा है और अब 23,750 का सबसे अहम स्तर है। अगर इसके नीचे बंद हुए तो ट्रेंड बड़ा निगेटिव होगा। बाजार में पैसा रैलियां फेल होने पर बेच कर बन रहा है। दिक्कत ये है कि बाजार के पास चलने का ट्रिगर नहीं है और US में दरें बढ़ने का डर अब सही में है। बाजार की दूसरी बड़ी दिक्कत है रिकॉर्ड संख्या में IPOs हैं। IPOs में पैसा बन रहा है और वो लिक्विडिटी खींच रहे हैं। इस हफ्ते 7000 करोड़ के IPOs खुल रहे हैं। दिक्कत ये कि वो 7 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी खींच लेंगे।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,750 पर सपोर्ट है। इसके नीचे 23,500-23,600 तक सपोर्ट नहीं है। इसके लिए रेजिस्टेंस 23,850-23,900 पर है। बैंक निफ्टी के लिए 56,800-57,000 पर सपोर्ट और 57,300-57,500 पर रेजिस्टेंस है।

कल के लिए रणनीति

निफ्टी में अब पूरी तरह मंदड़ियों के कंट्रोल में हैं। वही रैलियों के फेल होने पर शॉर्ट करने की रणनीति अपनाएं। अगर 23,750 के नीचे बंद हों तो शॉर्ट्स को और जोड़ भी सकते हैं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: क्या 7 सितंबर को 24000 का लेवल टच कर पाएगा निफ्टी? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: निफ्टी शुक्रवार को चार दिन की लगातार गिरावट के बाद संभला। इंडेक्स 24 अंक चढ़कर 23,897 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर कमजोर रही। निफ्टी में 1.15% की गिरावट आई। यह लगातार चौथा हफ्ता है, जब इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ।

पूरे हफ्ते बिकवाली हावी रही

हफ्ते की शुरुआत ही कमजोर रही। ज्यादातर कारोबारी सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। हफ्ते के बीच में बाजार तेज गैप-डाउन के साथ खुला। इसके बाद खरीदारों ने गिरावट रोकने की कोशिश की। लेकिन ऊंचे स्तरों पर खरीदारी ज्यादा देर नहीं टिक पाई। नतीजा यह रहा कि मुनाफावसूली जारी रही और निफ्टी पूरे हफ्ते दबाव में रहा।

किन शेयरों में बड़ी हलचल दिखी

निफ्टी 50 में SBI Life, Tata Steel और HDFC Life सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी तरफ HCL Tech, Bharti Airtel और Maruti सबसे ज्यादा टूटे। सेक्टोरल प्रदर्शन भी मिला-जुला रहा। Metals, Financial Services और Cement सेक्टर में तेजी रही। वहीं रियल्टी, हेल्थकेयर और केमिकल्स में दबाव देखने को मिला।

ब्रॉडर मार्केट में भी तस्वीर साफ नहीं रही। Nifty Midcap 100 में 0.25% की गिरावट आई। Nifty Smallcap 100 में 0.22% की बढ़त रही।

रुपया भी मजबूत हुआ

डॉलर के मुकाबले रुपये में भी मजबूती रही। यह सिलसिला पूरे हफ्ते जारी रहा। हफ्ते के दौरान रुपया करीब 1% मजबूत हुआ। शुक्रवार को यह लगभग 94.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अब इन संकेतों पर रहेगी नजर

आने वाले दिनों में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिका में फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है। लेकिन बाजार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहला, ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर है। दूसरा, वेस्ट एशिया में तनाव बना हुआ है।

निवेशकों की नजर क्रूड की कीमतों पर रहेगी। वेस्ट एशिया के घटनाक्रम भी अहम होंगे। इसके अलावा ग्लोबल रेट आउटलुक और घरेलू लिक्विडिटी पर भी नजर रहेगी। शुक्रवार को जारी अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। इनसे फेड के अगले फैसले को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, अगले हफ्ते US ISM Services PMI, ECB की पॉलिसी, OPEC की मंथली ऑयल मार्केट रिपोर्ट और भारत के फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़े बाजार के लिए अहम रहेंगे।

24,000 के ऊपर जाना जरूरी

HDFC Securities के विनय राजानी के मुताबिक, 24,000-24,200 का जोन निफ्टी के लिए बड़ा रेजिस्टेंस है। 23,800 के नीचे जाने पर निफ्टी 23,600 तक गिर सकता है। वहीं, 23,800 के ऊपर टिकने पर कुछ समय के लिए बाजार दायरे में रह सकता है। हालांकि, बड़ी तस्वीर में ट्रेंड अभी कमजोर है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,750-23,600 का जोन अहम सपोर्ट है। इसके नीचे डेली क्लोज मिलने पर निफ्टी 23,450-23,400 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 24,000-24,050 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद 24,150-24,200 का स्तर आएगा।

50-EMA से नीचे निफ्टी

LKP Securities के रूपक डे ने कहा कि अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों से पहले ट्रेडर्स सतर्क रहे। इन आंकड़ों का असर फेड के ब्याज दर के फैसले पर पड़ सकता है।

उनके मुताबिक, निफ्टी प्रति घंटे के चार्ट पर 50-EMA से नीचे है। इससे शॉर्ट टर्म ट्रेंड कमजोर दिख रहा है। जब तक निफ्टी 24,000-24,200 के नीचे है, तेजी पर बिकवाली की रणनीति काम कर सकती है। नीचे 23,830 और 23,700 पर सपोर्ट है।

Banking Index में भी लंबे समय से ठहराव

बैंकिंग इंडेक्स करीब 24 सत्रों से एक दायरे में घूम रहा है। यानी इसमें भी कोई साफ दिशा नहीं दिख रही। शुक्रवार को इंडेक्स 0.02% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, 56,900-56,800 का जोन अहम सपोर्ट है। इसके ऊपर टिके रहने पर कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। ऊपर 57,800-57,900 का स्तर रेजिस्टेंस है।

अगर इंडेक्स 57,900 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देता है या 56,800 के नीचे टूटता है, तो कंसोलिडेशन खत्म हो सकता है। इसके बाद बाजार में किसी एक दिशा में बड़ी चाल देखने को मिल सकती है।

अगले हफ्ते IPO की भी धूम

प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज हैं। अगले हफ्ते 11 मेनबोर्ड IPO खुलने वाले हैं। ये कंपनियां मिलकर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने की तैयारी में हैं। कई कंपनियों की लिस्टिंग भी अगले हफ्ते होगी। यानी शेयर बाजार के मुख्य इंडेक्स में भले ही सावधानी है, लेकिन IPO बाजार में हलचल बनी हुई है।

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Gold Price Outlook: बदलेगी सोने की चाल! तो क्या 1.60 लाख रुपये पर पहुंच जाएगा सोना?

Gold Price Outlook: गोल्ड की कीमतों में 4 सितंबर को मिलाजुला रुख दिखा। दिल्ली सर्राफा बाजार सोना लगातार दूसरे दिन चढ़कर बंद हुआ। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में नरमी दिखी। इससे पहले इस हफ्ते गोल्ड चढ़कर 4,550 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। कुल मिलाकर यह हफ्ता सोने के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा।

गोल्ड फ्यूचर्स के लिए 1.60 लाख रुपये पर बड़ी बाधा

एनालिस्ट्स का कहना है कि टेक्निकली कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए बड़ी बाधा है। अगर यह इस लेवल को पार कर लेता है तो यह 1.65 लाख से 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। 1.50 से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए सपोर्ट है। हालांकि, अगर गोल्ड फ्यूचर्स 1.48 लाख रुपये से नीचे गया तो इसमें गिरावट आ सकती है।

इन फैक्टर्स का पड़ेगा गोल्ड की कीमतों का असर 

गोल्ड की कीमतों पर फिलहाल पांच चीजों का असर पड़ सकता है। इनवेस्टर्स को इन पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। इनमें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड, यूएस इकोनॉमी के डेटा, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी और रुपये की चाल शामिल हैं।

अगस्त का इनफ्लेशन का डेटा गोल्ड के लिए अहम

फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने संकेत दिया है कि अगर इनफ्लेशन के डेटा से यह पता चलता है कि यह बढ़ नहीं रहा है तो वह 15-16 सितंबर की फेडरल रिजर्व की मीटिंग में इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने का समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा काफी अहम हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ता है। इंटरेस्ट रेट घटने पर सोने की चमक बढ़ती है।

डॉलर यील्ड पर भी रखनी होगी करीबी नजर 

जापानी येन में करीब 2 फीसदी तेजी से डॉलर भी मजबूत हुआ है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड घटने से डॉलर की कीमतों को सपोर्ट मिलता है। बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर में मजबूती का गोल्ड की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ता है। पिछले कुछ समय से अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड यील्ड में उछाल दिखा है। हालांकि, फेड और सरकार इसे कंट्रोल में रखने के उपाय कर रहे हैं।

फेड का फोकस फिलहाल इनफ्लेशन कंट्रोल करने पर 

अगले हफ्ते अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं। इसका सीधा असर 16 सितंबर को फेड की पॉलिसी पर पड़ सकता है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही कह चुके हैं कि उनका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन को कंट्रोल में रखने पर होगा। फेड ने इनफ्लेशन के लिए 2 फीसदी का टारगेट तय किया है। फेड इस टारगेट को हासिल करने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है।

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केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने को मिल रहा है सपोर्ट

दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं। इससे सोने को सपोर्ट मिल रहा है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। उसने इस साल के अंत तक सोने के सिए 4,900 रुपये का टारगेट भी दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता ने केंद्रीय बैंकों को सोने में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार दूसरे दिन चढ़ा, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 4 सितंबर को सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी आई। यह 1,400 रुपये चढ़कर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

चांदी की कीमत 2,40,500 रुपये पर स्थिर

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतें 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रहीं। ट्रेडर्स का कहना है कि सोने में तेजी की वजह घरेलू बाजार में इसकी अच्छी खरीदारी है। हालांकि, अमेरिका में नॉन-फॉर्म पेरोल्स डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं। इस डेटा का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।

रिकॉर्ड ऊंचाई से 40 फीसदी गिरी है चांदी

सोने और चांदी की कीमतें इस साल जनवरी के आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों में तेज गिरावट दिखी। चांदी की कीमत जनवरी में 4 लाख रुपये के पार हो गई थी। तब से यह करीब 40 फीसदी गिर चुकी है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “इनवेस्टमेंट डिमांड कमजोर है, जिससे डीलर इनवेंट्रीज को लेकर चिंता पैदा होती है।”

कमजोर डिमांड से चांदी पर बढ़ सकता है दबाव 

उन्होंने कहा कि अगर डिमांड नहीं बढ़ती है तो भारतीय डीलरों की तरफ से दिए गए करीब 2,000 टन सिल्वर के आने से इनवेंट्री पर दबाव और बढ़ सकता है। सिल्वर का इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में भी होता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल शामिल हैं। इसके अलावा इसमें इनवेस्टमेंट डिमांड भी होती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट आई। सोना हल्की गिरावट के साथ 4,465 डॉलर प्रति औंस था, जबकि चांदी 0.38 फीसदी गिरकर 66.72 डॉलर प्रति औंस थी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अगस्त की नॉन-फॉर्म पेरोल रिपोर्ट से पहले ट्रेडर्स सावधानी बरत रहे हैं। इससे सोने और चांदी की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं।

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अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर करीबी नजर

अगले हफ्ते अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं। इसका असर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर पड़ेगा। फेड 16 सितंबर को अपनी पॉलिसी पेश करेगा। अगर इनफ्लेशन में इजाफा होता है तो वह इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान कर सकता है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनका फोकस इनफ्लेशन को काबू करने पर है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो इसका खराब असर सोने पर पड़ेगा।

MCX में हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट, जानिए क्या वजह

कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर 4 सितंबर को सोने और चांदी में गिरावट दिखी। शाम 4:15 गोल्ड फ्यूचर्स 0.34 फीसदी यानी 531 रुपये गिरकर 1,55,244 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.31 फीसदी यानी 734 रुपये गिरकर 2,35,320 रुपये पर चल रहा था।

विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट 

कमोडिटीज के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में नॉन-फॉर्म पेरोल्स के डेटा आने से पहले बाजार में सावधानी बरती जा रही है। सोने और चांदी के फ्यूचर्स पर रुपये में मजबूती का भी असर पड़ा। विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट दिखी। सोना मामूली 0.02 फीसदी की गिरावट के साथ 4,472.12 डॉलर प्रति औंस पर था। सिल्वर 0.22 फीसदी की कमजोरी के साथ 66.80 डॉलर प्रति औंस था।

इस हफ्ते सोने में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले इस हफ्ते में सोना 4,480 डॉलर के आसपास बना हुआ है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने आक्रामक रुख के संकेत दिए हैं। डॉलर में कमजोरी से सोने को सपोर्ट मिला है।

अमेरिका में नॉन-फॉर्म पेरोल्स डेटा का असर सोने पर पड़ेगा

उन्होंने कहा कि ग्लोबल मनी मैनेजर्स बीते कुछ हफ्तों से गोल्ड में पोजीशन बना रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ में भी दिलचस्पी बनी हुई है। लेमन में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि नॉन-फॉर्म पेरोल्स रिपोर्ट का असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने और चांदी पर पड़ सकता है। इधर, 3 सितंबर को रुपये में 0.5 फीसदी मजबूती आई। डॉलर के मुकाबले यह 94.48 के लेवल पर बंद हुआ।

क्रूड की ऊंची कीमतों ने भी बुलियन पर बढ़ाया दबाव 

गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर क्रूड की ऊंची कीमतों का भी असर पड़ रहा है। ब्रेट क्रूड 95 डॉलर से ऊपर है, जबकि WTI क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार है। इस हफ्ते क्रूड करीब 10 फीसदी चढ़ा है। क्रूड के हाई लेवल पर बने रहने से महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ेगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

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फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर टिकीं निगाहें

इनवेस्टर्स की नजरें फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी है। फेड 16 सितंबर को अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा। इससे पहले अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन में कमी नहीं दिखती है तो फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा कर सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 7 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन बाजार ने सीमित दायरे में कारोबार किया। सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त पर बंद हुए। हालांकि,मिडकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला और मिडकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं,निफ्टी बैंक में लगभग फ्लैट क्लोजिंग रही। आज सेंसेक्स 363 प्वाइंट चढ़कर 76,515 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 24 प्वाइंट चढ़कर 23,898 पर बंद हुआ। कैपिटल मार्केट और मेटल शेयरों में खरीदारी रही। रियल्टी,फार्मा और IT शेयरों पर दबाव रहा।

बैंक निफ्टी 11 प्वाइंट गिरकर 57,370 पर बंद हुआ। वहीं, मिडकैप 156 प्वाइंट गिरकर 63,079 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 में से 28 शेयरों में बिकवाली रही। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में खरीदारी दिखी। बैंक निफ्टी के 14 में से 9 शेयरों में बिकवाली रही। रुपया बिना किसी बदलाव के 94.49/$ पर बंद हुआ।

बाजार पर एक्सपर्ट्स की राय

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च,श्रीकांत चौहान का कहना है कि शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और मामूली रिकवरी की। पूरे हफ्ते बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 गिरावट के साथ बंद हुआ। जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेहतर मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण ग्लोबल इक्विटी मार्केट में बिकवाली का दबाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ीं। इससे भारत के लिए फिस्कल और महंगाई से जुड़े जोखिम और बढ़ गए।

इसी दौरान,ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में भारी बिकवाली हुई,जिससे सॉवरेन बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। US ट्रेजरी यील्ड में हुई इस बढ़ोतरी ने भारत समेत दुनिया भर के इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव को बढ़ावा दिया।

घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर भारत की Q1FY27 रियल GDP ग्रोथ शानदार 7.8% पर रही। इसने एक्सपोर्ट और इन्वेस्टमेंट में मजबूत ग्रोथ के दम पर बाजार की उम्मीदों को पीछे छोड़ दिया। हालांकि हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स उत्साहजनक बने हुए हैं,लेकिन त्योहारों के बाद की रफ्तार अहम बनी रहेगी।

इस हफ्ते भारतीय रुपये ने क्रूड ऑयल और यील्ड के दबाव के बावजूद मजबूती दिखाई,जिसे फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट इनफ्लो का सहारा मिला।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका कम होने से भारतीय शेयर बाज़ार में तेजी रही। हालांकि,ऊंचे स्तरों पर मुनाफ़ा वसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेज़ी सीमित रही। निवेशकों की नज़र आज आने वाले अमेरिकी रोज़गार के आंकड़ों पर है,जबकि ब्याज दरों की आगे की चाल का अंदाज़ा लगाने के लिए अगले हफ़्ते आने वाले अमेरिकी CPI के आंकड़े अहम होंगे।

अगस्त में कोर महंगाई में मामूली गिरावट की उम्मीदों से फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने में कुछ समय के लिए रोक लगने की संभावना मजबूत हो सकती है और इससे बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर,पूरे बाजार में खास शेयरों और सेक्टरों में खरीदारी देखी गई और स्मॉल-कैप इंडेक्स ने इंट्राडे में अब तक के नए उच्चतम स्तर को छुआ। मजबूत अर्निंग ग्रोथ, टिकाऊ आर्थिक विकास और घरेलू स्तर पर मजबूत मांग से ब्रॉडर मार्केट में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

निफ्टी टेक्निकल व्यू

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह का कहना है कि शुक्रवार को निफ्टी में 107 अंको की सीमित ट्रेडिंग रेंज देखी गई और यह 0.10% की बढ़त के साथ सपाट स्तर पर बंद हुआ। डेली टाइमफ्रेम पर इंडेक्स ने अपर शैडो के साथ एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई। यह बाजार में अनिश्चितता और किसी स्पष्ट दिशा के बारे में पक्के संकेत न होने का इशारा है। पिछले पांच सेशन में निफ्टी लगभग 348 अंको की रेंज में ट्रेड कर रहा है। यह जब तक कि किसी भी तरफ कोई निर्णायक ब्रेकआउट न हो जाए तब तक लगातार कंसोलिडेशन होने के संकेत दे रहा है।

टेक्निकल नजरिए से निफ्टी अभी भी अपने 20-डे और 50-डे EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है,जिससे निकट अवधि का स्ट्रक्चर सतर्कता वाला बना हुआ है। डेली RSI 30–50 ज़ोन में बना हुआ है,जो स्पष्ट मोमेंटम की कमी को दिखाता है। जबकि MACD ज़ीरो लाइन के नीचे ट्रेड कर रहा है,जिससे नेगेटिव रुझान बना हुआ है। वहीं,बढ़ता ADX ट्रेंड की तेजी में धीरे-धीरे बढ़ोतरी का संकेत है,जिससे पता चलता है कि उतार-चढ़ाव अधिक रह सकता है और दोनों तरफ के उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

आगे 23750–23700 का जोन जो 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के बराबर है, निफ्टी के लिए एक अहम सपोर्ट एरिया का काम कर सकता है। अगर यह लेवल 23700 टूटता है तो 23600–23570 के लेवल तक और गिरावट आ सकती है। ऊपर की तरफ,24050–24080 तत्काल रेजिस्टेंस का काम करेगा। लगातार 24080 के ऊपर बने रहने पर निफ्टी में 24200 के लेवल तक वापसी हो सकती है।

बैंक निफ्टी टेक्निकल व्यू

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी लगभग 24 सेशन से एक ही दायरे में बना हुआ है,जिससे पता चलता है कि इसमें किसी खास दिशा में बढ़ने की गति की कमी है। इंडेक्स 0.02% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ और डेली चार्ट पर एक छोटी बॉडी वाली ‘बेयरिश कैंडल’ बनाई,जिसके दोनों तरफ विक्स (wicks) थीं। यह बाजार में अनिश्चितता का संकेत है। डेली RSI 50 के स्तर के आसपास न्यूट्रल बना रहा, जो मजबूत डायरेक्शनल मोमेंटम की कमी को दिखाता है।

आगे 56900–56800 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया के तौर पर काम कर सकता है। अगर यह इस स्तर से ऊपर बना रहता है तो मौजूदा कंसोलिडेशन का दौर जारी रह सकता है। ऊपर की तरफ,57800–57900 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस एरिया का काम कर सकता है। इस जोन से ऊपर ब्रेकआउट या 56800 से नीचे ब्रेकडाउन मौजूदा कंसोलिडेशन के दौर को खत्म कर सकता है और किसी खास दिशा में बड़ी चाल की शुरुआत हो सकती है।

 

Trading plan :ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं, अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।