Gold Price Outlook: बदलेगी सोने की चाल! तो क्या 1.60 लाख रुपये पर पहुंच जाएगा सोना?

Gold Price Outlook: गोल्ड की कीमतों में 4 सितंबर को मिलाजुला रुख दिखा। दिल्ली सर्राफा बाजार सोना लगातार दूसरे दिन चढ़कर बंद हुआ। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में नरमी दिखी। इससे पहले इस हफ्ते गोल्ड चढ़कर 4,550 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। कुल मिलाकर यह हफ्ता सोने के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा।

गोल्ड फ्यूचर्स के लिए 1.60 लाख रुपये पर बड़ी बाधा

एनालिस्ट्स का कहना है कि टेक्निकली कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए बड़ी बाधा है। अगर यह इस लेवल को पार कर लेता है तो यह 1.65 लाख से 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। 1.50 से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए सपोर्ट है। हालांकि, अगर गोल्ड फ्यूचर्स 1.48 लाख रुपये से नीचे गया तो इसमें गिरावट आ सकती है।

इन फैक्टर्स का पड़ेगा गोल्ड की कीमतों का असर 

गोल्ड की कीमतों पर फिलहाल पांच चीजों का असर पड़ सकता है। इनवेस्टर्स को इन पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। इनमें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड, यूएस इकोनॉमी के डेटा, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी और रुपये की चाल शामिल हैं।

अगस्त का इनफ्लेशन का डेटा गोल्ड के लिए अहम

फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने संकेत दिया है कि अगर इनफ्लेशन के डेटा से यह पता चलता है कि यह बढ़ नहीं रहा है तो वह 15-16 सितंबर की फेडरल रिजर्व की मीटिंग में इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने का समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा काफी अहम हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ता है। इंटरेस्ट रेट घटने पर सोने की चमक बढ़ती है।

डॉलर यील्ड पर भी रखनी होगी करीबी नजर 

जापानी येन में करीब 2 फीसदी तेजी से डॉलर भी मजबूत हुआ है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड घटने से डॉलर की कीमतों को सपोर्ट मिलता है। बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर में मजबूती का गोल्ड की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ता है। पिछले कुछ समय से अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड यील्ड में उछाल दिखा है। हालांकि, फेड और सरकार इसे कंट्रोल में रखने के उपाय कर रहे हैं।

फेड का फोकस फिलहाल इनफ्लेशन कंट्रोल करने पर 

अगले हफ्ते अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं। इसका सीधा असर 16 सितंबर को फेड की पॉलिसी पर पड़ सकता है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही कह चुके हैं कि उनका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन को कंट्रोल में रखने पर होगा। फेड ने इनफ्लेशन के लिए 2 फीसदी का टारगेट तय किया है। फेड इस टारगेट को हासिल करने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है।

यह भी पढ़ें: Branded Gold purchase Scheme: ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना हुआ आसान, यहां जानिए पूरा प्रोसेस

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने को मिल रहा है सपोर्ट

दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं। इससे सोने को सपोर्ट मिल रहा है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। उसने इस साल के अंत तक सोने के सिए 4,900 रुपये का टारगेट भी दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता ने केंद्रीय बैंकों को सोने में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।

Gold Silver Price: 2 महीने के हाई पर पहुंचने के बाद सोना हुआ और भी महंगा, चांदी फिसली

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार (13 अगस्त) की शुरुआती ट्रेडिंग में सोने की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, जबकि चांदी की कीमत में गिरावट आई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाजार महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर विचार कर रहे थे। COMEX पर सोना $4,473.40 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग से $5.90 या 0.13% अधिक था। इस मेटल ने दिन के दौरान $4,509.10 प्रति औंस का उच्चतम और $4,456.50 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

COMEX पर चांदी की कीमत $65.58 प्रति औंस थी, जिसमें $0.12 या 0.18% की गिरावट आई। सेशन के दौरान इसकी कीमत $66.45 और $65.22 प्रति औंस के बीच रही।

ये ताजा बदलाव बुधवार यानी 12 अगस्त को सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद आए हैं। उस दिन जुलाई के अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक आने के बाद सोना दो महीने से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

बुधवार (12 अगस्त) को स्पॉट गोल्ड 0.9% बढ़कर $4,406.64 प्रति औंस हो गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.6% बढ़कर $4,467.50 प्रति औंस पर बंद हुआ। जून में 0.4% की गिरावट के बाद जुलाई में अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.1% की बढ़ोतरी हुई। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था और इससे निकट भविष्य में सख्त मौद्रिक नीति की ओर बढ़ने की उम्मीदें कम हो गईं।

बाजार अब फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कम मान रहे हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, महंगाई के आंकड़ों से पहले दरें बढ़ने की संभावना 46% थी, जो अब घटकर लगभग 40% हो गई है।

आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने पर सोने पर दबाव पड़ता है क्योंकि अधिक यील्ड (रिटर्न) से नॉन-यील्डिंग एसेट (जिससे कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता) को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसके विपरीत, कम या स्थिर दरों की उम्मीदें बुलियन की मांग को सहारा दे सकती हैं।

कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी सोने को कुछ सहारा दिया है। निवेशक अब महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य के बारे में और संकेतों के लिए गुरुवार को आने वाले अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स पर नजर रखेंगे।

कीमती धातुओं के लिए भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी एक अन्य कारक बने हुए हैं। शिपिंग रूट को लेकर फिर से बढ़े तनाव और ईरान-समर्थक हूथी विद्रोहियों से जुड़े टकराव का असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, और इसके चलते महंगाई और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें भी प्रभावित हो सकती हैं।

बुधवार (12 अगस्त) को चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। यह 1.3% बढ़कर $65.49 प्रति औंस पर पहुंच गई और 22 जून के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर को छू लिया।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।