Commodity Market: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल! ब्रेंट $95 के पार, जानिए सोने-चांदी का हाल

Commodity Market Updates: आज शुक्रवार, 4 सितंबर को वैश्विक कमोडिटी बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से भड़की तबाही की चिंगारी के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी एंप्लॉयमेंट डेटा से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती व स्थिरता बनी हुई है।

कच्चे तेल में आई यह तेजी मध्य जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर इशारा कर रही है। आइए आपको बताते हैं कमोडिटी बाजार का पूरा अपडेट।

कच्चे तेल की कीमतों में उबाल: ब्रेंट $95 और WTI $91 के पार

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 15 सेंट (0.2%) चढ़कर $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वीकली आधार पर इसमें 7.1% की भारी बढ़त देखी जा रही है। वही अमेरिकी WTI क्रूड 26 सेंट (0.3%) की बढ़त के साथ $91.56 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हफ्ते भर में WTI में 9.8% का उछाल दर्ज किया गया है। यह 20 जुलाई के बाद कच्चे तेल में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

सोने-चांदी का हाल: US Fed के नरम रुख से मिला सहारा

कच्चे तेल की आग के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और यह भी मामूली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,477.10 प्रति औंस के मजबूत स्तर पर टिका हुआ है। दिसंबर का अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,522.60 प्रति औंस पर रहा। सिल्वर (चांदी) 0.1% बढ़कर $66.90 प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में मामूली सुस्ती रही।

निवेशक अब आज शाम जारी होने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर अगला कदम उठाने का संकेत मिलेगा।

गुरुवार को गोल्ड में क्यों आई थी 2% की तेजी?

अमेरिकी फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा था कि अगर महंगाई दर स्थिर रहती है तो वे ब्याज दरें न बढ़ाने का समर्थन करेंगे। उनके इस बयान के बाद ट्रेडर्स ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदें कम कर दीं, जिससे गुरुवार को सोने में 2% का बड़ा उछाल आया था।

डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी

दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05% घटकर 99.54 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कोटेड कमोडिटी (सोना-तेल) खरीदना तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलता है।

यूरो (Euro): $1.1589 पर स्थिर।

जापानी येन (Yen): डॉलर के मुकाबले 0.07% मजबूत होकर 158.59 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Outlook: गोल्ड ₹1.53 लाख पर, क्या यह ₹1.60 लाख का लेवल पार करेगा? जानिए आगे कैसी रह सकती है चाल

Gold Outlook: सोने में गुरुवार यानी 3 सितंबर को रिकवरी दिखी। डॉलर में कमजोरी और महंगे क्रूड की वजह से महंगाई बढ़ने की चिंता कम होने से सोने को सपोर्ट मिला। शुरुआती कारोबार में कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1.30 फीसदी चढ़कर 4,472.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इधर, भारत में भी कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी।

MCX में गोल्ड में तेजी 

MCX में गोल्ड फ्यूचर्स 1.05 फीसदी यानी 1,595 रुपये चढ़कर 1,53,997 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। एनालिस्ट्स का कहना है कि अब एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल महत्वपूर्ण दिख रहा है। उधर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मीटिंग करीब आ रही है। ऐसे में इनवेस्टर्स की नजरें फेड के फैसले पर टिकी हैं।

1.60 लाख का लेवल अहम 

बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव के मुताबिक, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल अहम है। उन्होंने कहा कि हाल में आई तेजी और फिर करेक्शन के बाद 1.60 लाख के लेवल को ब्रेकआउट लेवल माना जा सकता है। अगर गोल्ड 1.60 लाख के लेवल को पार करने के बाद टिका रहता है तो इससे यह संकेत मिलेगा कि गोल्ड में आए करेक्शन की वजह मुख्यत: मुनाफावसूली थी।

तेजी में गोल्ड 1.65 लाख तक जा सकता है

1.60 लाख के लेवल के पार गोल्ड के टिके रहने पर इसके 1.65-1.70 लाख तक जाने का रास्ता खुल जाएगा। यादव ने कहा, “इससे पहले के टेक्निकल एसेसमेंट में भी 1.58-1.60 लाख के लेवल को ब्रेकआउट जोन बताया गया था। इसका मतलब है कि 1.65-1.70 लाख संभावित अगला टारगेट हो सकता है। गिरावट की स्थिति में 1.52-1.50 पर सोने को अहम सपोर्ट मिलेगा।”

केंद्रीय बैंकों की खरादीरी से गोल्ड को सपोर्ट

यादव ने बताया कि जब कभी गोल्ड ब्रेकआउट देता है तो इसका कनफर्मेशन जरूरी हो जाता है। मौजूदा लेवल पर ऐसा नहीं दिख रहा। हालांकि, दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं, जिससे इसे सपोर्ट मिल रहा है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक 2026 में हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद रहे हैं। उसने साल के अंत तक गोल्ड की कीमतों के लिए 4,900 डॉलर प्रति औंस का अनुमान जताया है।

जियोपॉलिटिकल टेंशन का भी गोल्ड पर असर

जियोपॉलिटिकल टेंशन बने रहने से भी गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। गोल्ड को सुरक्षित निवेश का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। भारतीय निवेशकों के लिए रुयये का लेवल भी एक बड़ा मसला है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड कंसॉलिडेशन जारी रहता है तो भी रुपये में कमजोरी से एमसीएक्स गोल्ड को सपोर्ट मिल सकता है।

यह भी पढ़ें: Silver Rate Today 3 September: खरीदारी से पहले जानें चांदी का भाव, दिल्ली समेत इन शहरों में आज इतना रेट

इनवेस्टर्स की नजरें फेडरल रिजर्व के फैसले पर

यादव ने कहा कि गोल्ड के लिए शॉर्ट टर्म में सबसे बड़ा रिस्क अमेरिका में इंटरेस्ट रेट को लेकर फेड का फैसला, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड है। फेड चेयरमैन के हालिया रुख से यह साफ हो गया है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की पॉलिसी सख्त होगी। इससे यील्ड में उछाल दिखा है और डॉलर में मजबूती आई है। इससे गोल्ड पर कुछ समय के लिए दबाव बन सकता है।

GIFT निफ्टी से मिल रहे बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत, क्रूड 96 डॉलर के करीब

बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सुस्त शुरुआत करने की संभावना दिख रही है। GIFT निफ्टी हल्की गिरावट के साथ शुरुआत का संकेत दे रहा है। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी,US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और US-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में जोखिम से बचने का माहौल बन गया है। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट और वॉल स्ट्रीट में कमजोरी से दबाव और बढ़ सकता है, हालांकि घरेलू स्तर पर संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहने से कुछ राहत मिल सकती है।

सुबह करीब 8.30 बजे GIFT निफ्टी 24,027 पर ट्रेड कर रहा था। इसमें 24 अंक यानी 0.1 प्रतिशत की गिरावट दिख रही थी। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 12.99 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 76,944.28 पर आ गया,जबकि निफ्टी 24.60 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 24,055.80 पर बंद हुआ।

ग्लोबल हालात काफी खराब हो गए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत $96 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है,US 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड 4.8 प्रतिशत के करीब है और जियोपॉलिटिकल तथा ब्याज दरों से जुड़ी चिंताएं फिर से उभर आई हैं।

रिस्क-ऑफ़ ट्रेड बढ़ने से एशियाई बाजारों में गिरावट

बुधवार को एशियाई इक्विटी में भारी गिरावट आई है। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में बिकवाली और अमेरिका-ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई ने निवेशकों के जोखिम लेने के उत्साह को कम कर दिया है। जापान को छोड़कर एशिया पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 0.8 प्रतिशत गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) खुलते ही 3 प्रतिशत लुढ़क गया,जबकि जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 2.2 प्रतिशत गिर गया।

उधर कल अमेरिकी शेयरों में गिरावट जारी रहने के बाद S&P 500 e-mini फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है।

अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी के और सख्त होने की उम्मीदें बढ़ने के साथ US 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड बढ़कर लगभग 4.80 प्रतिशत हो गया है। रॉयटर्स के मुताबिक फेड फंड्स फ्यूचर्स के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि दो हफ़्ते बाद होने वाली US फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 67 प्रतिशत है।

तेल की कीमतों में लगभग 1% की बढ़ोतरी

बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 1% की बढ़ोतरी हुई। पिछले सेशन की तेजी आगे बढ़ी दिखी है। US और ईरान के बीच रात भर हुए हमलों के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बढ़ गईं हैं और मिडिल ईस्ट में तनाव के जल्द कम होने की उम्मीदें कम हो गईं हैं।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 87 सेंट या 0.92% बढ़कर $95.52 प्रति बैरल पर दिख रहा है। जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 80 सेंट या 0.89% बढ़कर $91.02 पर आ गया है। मंगलवार को दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स में $4 से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी,जो 24 जुलाई के बाद ब्रेंट में और 23 जुलाई के बाद WTI में सबसे बड़ी बढ़त रही।

बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से वॉल स्ट्रीट में गिरावट

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट जारी रही। ग्लोबल स्तर पर बॉन्ड की बिकवाली तेज हो गई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। नैस्डैक कम्पोजिट 1.03 प्रतिशत गिरकर 26,099.77 पर आ गया,जबकि डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.79 प्रतिशत गिरकर 52,766.93 पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.71 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,631.47 पर आ गया।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और US ट्रेजरी यील्ड के 4.8 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी मार्केट के लिए मुश्किल हालात बन रहे हैं। एक्सटर्नल मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल जोखिमों का असर निकट भविष्य में बाजार की दिशा पर पड़ने की संभावना है।

निफ़्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी आर का मानना ​​है कि निफ्टी का रुख सतर्क से लेकर कमज़ोर बना रहेगा,जिसमें 24,150-24,200 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम करेगा। 24,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है और इंडेक्स इसके नीचे बना रहता है तो यह 23,900-23,800 की ओर जा सकता है।

 

Stock Market live Updates : GIFT Nifty से सुस्त शुरुआत के संकेत, US और एशियाई बाजार गिरे

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Drop: लगातार 5वें दिन फिसला सोना, ऑल-टाइम हाई से ₹10700 की टूट; जानें गिरावट की ये 4 बड़ी वजहें

Gold Prices Today Fall: भारतीय वायदा बाजार पर सोने की कीमतों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 24 अगस्त को ₹1,63,229 प्रति 10 ग्राम के अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद, MCX पर सोना अब तक ₹10,700 से ज्यादा टूटकर ₹1,52,514 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी सोना $4,734 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर लगभग $4,420 प्रति औंस पर पहुंच गया है। महज एक सत्र में MCX पर सोना करीब ₹1,900 और COMEX पर $75 तक फिसल गया।

सोने की कीमतों में गिरावट के 4 मुख्य कारण

1. अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका: जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख ने सोने के बाजार को प्रभावित किया है। फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से निवेशक अब सोने से पैसा निकालकर अन्य सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों में लगा रहे हैं।

2. मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: ब्याज दरें बढ़ने के संकेतों से अमेरिकी डॉलर (USD) मजबूत हुआ है और ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग घट जाती है।

3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंता: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहे हैं, जिससे सोने पर दबाव बना हुआ है।

4. घरेलू मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर: आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटी एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जरूरत न होने पर सोना न खरीदने की अपील का असर घरेलू सेंटीमेंट पर पड़ा है। इससे भारतीय बाजार में त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी और रिटेल मांग में थोड़ी सुस्ती की आशंका है।

अगस्त का प्रदर्शन और सितंबर के लिए आउटलुक

ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में सोने ने 9.4% और चांदी ने 15% का मजबूत रिटर्न दिया, जो इस साल का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन था। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस हफ्ते जारी होने वाले अमेरिकी लेबर मार्केट डेटा सोने की अगली चाल तय करेंगे। अगर डेटा मजबूत आता है तो डॉलर और मजबूत होगा, जिससे सोने में गिरावट जारी रह सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।

US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : US में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और क्रूड में उछाल से भारतीय बाजार के सेंटिमेंट कमजोर दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे आ गया है। शुक्रवार को FIIs की कैश और वायदा मिलाकर 5600 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली देखने को मिली। इनके नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट फिर दो लाख के पार चले गए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

28 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला खत्म होगा। IT शेयरों में बढ़त की वजह से निफ्टी 24,150 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 330.92 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 77,264.51 पर और निफ्टी 84.80 अंक या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 24,175.65 पर बंद हुआ। वीकली बेसिस पर देखें तो मार्केट में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट जारी रही। बीते हफ्ते BSE सेंसेक्स और निफ्टी50 दोनों में 0.3% की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा और निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में बहुत कम बदलाव के साथ कारोबार खत्म हुआ

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

28 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे,लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5,183 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर इसकी भरपाई कर दी और लगातार 14वें दिन भी खरीदारी जारी रखी।

Stock Market LIVE Updates : GIFT Nifty से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, US और एशियाई बाजारों में गिरावट

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला असर दिख रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.29% और जापानी येन 0.09% मजबूत हुए हैं। दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.04% की गिरावट आई है,जबकि फिलीपींस पेसो 0.10% कमजोर हुआ है। थाई बाहत 0.19% और ताइवान डॉलर 0.17% गिरे हैं। चीनी रेनमिनबी में 0.14% की नरमी आई हैं,जबकि मलेशियाई रिंगित 0.20% टूटा है। सिंगापुर डॉलर भी 0.02% नीचे आया है।

वेस्ट एशिया टेंशन और बढ़ी

वेस्ट एशिया टेंशन और बढ़ गई है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार हुआ है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के सुप्रीम लीडर र्मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि डॉलर की भूमिका धीरे-धीरे खत्म करने की जरूरत है। इधर क्रूड 90 डॉलर के पार चला गया है।

US फेड चेयरमैन ने दिए दरें बढ़ाने के संकेत, बॉन्ड यील्ड 4.7 के पार, डॉलर इडेक्स में उछाल

US फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महंगाई लक्ष्य से ज्यादा रही तो कदम उठाने पड़ेंगे। इस बयान के बाद बॉन्ड यील्ड 4.7 के पार चली गई है। डॉलर इंडेक्स में भी उछाल आया है। सोना-चांदी ठंडे पड़े हैं। अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए। वहीं एशिया भी कमजोर दिख रहा है। निक्केई और कॉस्पी 2% फिसले हैं।

सबसे बड़े IPO का रास्ता हुआ साफ

देश के सबसे बड़े IPO का रास्ता साफ हो गया है। सेबी ने जियो प्लैटफॉर्म्स के IPO को मंजूरी दे दी है। जियो प्लैटफॉर्म्स 27 करोड़ फ्रेश शेयर जारी करेगी। इस रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होगा।

HDFC बैंक से रिटायर होंगे शशिधर जगदीशन

शशिधर जगदीशन दोबारा HDFC बैंक के MD&CEO नहीं बनेंगे। ये 26 अक्टूबर को रिटायर होंगे। उन्होंने कहा है कि वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। उन्होंने बैंक के बोर्ड से कहा है कि उत्तराधिकारी तलाश करने का प्रोसेस तेज किया जाए।

सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान का विरोध

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज की और से बड़ी खबर आई है। सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान का विरोध किया गया है। NCLT के फैसले को कैनरा, HDFC बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस चुनौती देंगे।

MSCI की आज रीबैलेंसिंग

आखिरी आधे घंटे में आज MSCI की रीबैलेंसिंग होगी। लॉरस लैब्स,लेंसकार्ट,अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो शामिल होंगे। वहीं बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, SBI कार्ड्स और एस्ट्रल बाहर होंगे। MSCI में भारत के वेटेज में भी हल्की बढ़त होगी।

Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

Gold Price Today: ₹2890 सस्ता हुआ सात दिनों में गोल्ड; दिल्ली-मुंबई नहीं,10 शहरों में 18 कैरट वाला सबसे महंगा बिक रहा यहां

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Next Week: भारत से अमेरिका तक आ रहे ये आंकड़े, अगले हफ्ते तय करेंगे मार्केट की चाल

Market next week: 31 अगस्त से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते मार्केट की चाल मुख्य तौर पर जीडीपी के घरेलू आंकड़ों, कच्चे तेल के भाव और अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। इसके अलावा एनालिस्ट्स के मुताबिक मैक्रोइकनॉमिक रिलीज, ऑटो सेल्स के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग एक्टिविटी भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले कारोबारी हफ्ते यानी 17-21 अगस्त के दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) 276.32 प्वाइंट्स यानी 0.35% गिरा, तो निफ्टी (Nifty) 76.35 प्वाइंट्स यानी 0.31% नीचे आया। लगातार तीसरे हफ्ते ये लाल हुए।

Market next week: क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्र का कहना है कि आने वाला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। जीडीपी के घरेलू आंकड़े और वैश्विक आर्थिक आंकड़े मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था में बात करें तो जून 2026 तिमाही के आंकड़े 31 अगस्त को जारी होंगे। अजीत के मुताबिक निवेशकों की नजर अगस्त महीने के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई के आंकड़ों, जीएसटी कलेक्शंस, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और रुपये की चाल पर भी रहेगी।

अजीत के मुताबिक सबसे बड़ा ट्रिगर तो अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा रहेगा। 4 अगस्त को अगस्त के नॉन-फार्म पेरोल्स का आंकड़ा आएगा। अजीत का मानना है कि यग फेडरल रिजर्व के सितंबर महीने की मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड्स और एमर्जिंग मार्केट्स में फंड्स फ्लो से जुड़ी उम्मीदों पर असर डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त में भारतीय इक्विटीज में अब तक ₹30,919 करोड़ का नेट निवेश किया है और लगातार दूसरे महीने उनकी नेट खरीदारी जारी रही।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि घरेलू स्तर पर जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े ब्रोडर रिस्क सेंटिमेंट के लिए अहम होंगे। इससे यह पता चलेगा कि घरेलू अर्थव्यवस्था किस चाल से बढ़ रही है, खासतौर से ऐसे समय में जब एनर्जी प्राइसेज रॉकेट बने हुए हैं और पश्चिमी एशिया में तनाव अभी भी बना हुआ है।

पोनमुडी का कहना है कि जैक्सन होल में फेड चेयर कैविन वार्श के हॉकिश कमेंट के बाद अब अमेरिकी मौद्रिक नीति वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा कैटेलिस्ट बन गई है। पोनमुडी का कहना है कि मार्केट की नजर अब 4 सितंबर को आने वाले अगस्त की जॉब्स रिपोर्ट के साथ-साथ अगली इनफ्लेशन रीडिंग पर भी नजर रहेगी। इन आंकड़ो से यह तय होगा कि सितंबर में रेट हाइक की हाल में बढ़ी उम्मीदें बनी रहती हैं या कम होती हैं।

रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि सोमवार को भारतीय इकॉनमी के लिए जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े के आंकड़े आएंगे, जिससे घरेलू आर्थिक विकास की दिशा पता चलेगी। वहीं शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा वैश्विक बाजारों के सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है। उनका कहना है कि इसके बाद निवेशक फिर से फेडरल रिजर्व की सितंबर की मौद्रिक नीतियों को लेकर अपनी उम्मीदों को रिव्यू करेंगे।

लेवरेज्ड ETF के लिए कोर्स करना जरूरी, दक्षिण कोरिया ने इस कारण बनाया नियम

Meesho कब आएगी मुनाफे में? शेयर खरीदने से पहले प्वाइंटवाइज चेक करें एक्सपर्ट कैलकुलेशन

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Weekly Report: सोने और चांदी में हफ्ते के आखिर में तेज गिरावट, सोना 3% फिसला

Gold Silver Weekly Report: सोने के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। चांदी में भी इस हफ्ते गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच है। 28 अगस्त को फेड चेयरमैन ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर होगा। इसका असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

24 अगस्त को सोना 4700 डॉलर के करीब पहुंच गया था

सोना इस हफ्ते मंगलवार यानी 24 अगस्त को तीन महीने के सबसे ऊंचे लेवल 4,696 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 28 अगस्त को स्पॉट गोल्ड 3.18 फीसदी गिरकर 4,454 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी 27 अगस्त को करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। 28 अगस्त को यह 4.48 फीसदी गिरकर 66 डॉलर पर आ गई।

फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी में तेज गिरावट 

शुक्रवार की गिरावट से पहले इस हफ्ते सोने और चांदी में अच्छी तेजी आई थी। इसकी वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से उपाय का ऐलान डिबेसमेंट ट्रेड था। लेकिन, फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी पर ब्रेक लग गया। अमेरिका में जुलाई में पर्सनल कंजमप्शन एक्सपेंडिचर इनफ्लेशन 3.7 फीसदी पर रहा।

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी फिसला सोना 

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में 28 अगस्त को गिरावट आई। सोना 3,300 रुपये गिरकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह दिल्ली में सोने की कीमतों में गिरावट का लगातार तीसरा दिन था। इस हफ्ते दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतेंत 4,700 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरी हैं। 25 अगस्त को दिल्ली में सोना 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

यह भी पढ़ें: फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई पर चेताया, बोले- 2% इंफ्लेशन का लक्ष्य हासिल करना जरूरी

सोने की कीमतों पर मुनाफा वसूली का भी असर 

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते कीमतों में तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने पर पड़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की चर्चा का भी असर पड़ा।