NCR में दौड़ेगी नमो भारत! दिल्ली-पानीपत से जेवर एयरपोर्ट और गुरुग्राम तक बिछेगा रैपिड रेल का जाल, इन 4 नए रूट की डिटेल जानिए

NCRTC ने नमो भारत ट्रेन के संचालन के तीन साल पूरे होने पर ‘नमो भारत दिवस 2026’ मनाया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों एवं बिजली मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, NCRTC के चेयरपर्सन डी. थारा और शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह शामिल हुए। NCRTC के मैनेजिंग डायरेक्टर शलभ गोयल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस आयोजन के जरिए नमो भारत ट्रेन के तीन साल के सफर और क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में इसके योगदान के बारे में चर्चा की गई। वहीं इस दौरान नमो भारत के आने वाले समय में विस्तार के बारे में भी बताया गया।

नमो भारत ट्रेन की तेज और भरोसेमंद सेवा से यात्रियों का सफर आसान हो रहा है। इसके जरिए लोग अपने दफ्तर, शिक्षण संस्थानों और कारोबार से जुड़े स्थानों तक कम परेशानी में पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनका समय भी बच रहा है।

इन रूट पर चलेगी नमो भारत ट्रेन

आने वाले समय में नमो भारत नेटवर्क का और विस्तार होने की उम्मीद है। दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम-बहरोड़ कॉरिडोर को जल्द मंजूरी मिल सकती है। वहीं, गाजियाबाद-जेवर और नोएडा-फरीदाबाद-गुरुग्राम कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम चल रहा है। वहीं नमो भारत ट्रेन की शुरुआत अक्टूबर 2023 में साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच 17 किलोमीटर लंबे हिस्से पर हुई थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे कॉरिडोर पर सेवा शुरू की गई। 22 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ मेट्रो के साथ 82 किलोमीटर लंबे नमो भारत कॉरिडोर को देश को समर्पित किया। फिलहाल, इस ट्रेन से हर दिन 1.1 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। हाल ही में इसने एक दिन में करीब 1.68 लाख यात्रियों के सफर का रिकॉर्ड भी बनाया है।

नमो भारत ट्रेन के तीन साल के सफर को दिखाया गया

कार्यक्रम के दौरान NCRTC ने नमो भारत ट्रेन के तीन साल के सफर और इस दौरान हासिल की गई उपलब्धियों की जानकारी दी। इसमें यात्रियों को बेहतर सुविधा देने, दूसरे परिवहन साधनों से कनेक्टिविटी बढ़ाने और स्टेशन तक पहुंचने के लिए आसान साधन उपलब्ध कराने जैसे प्रयास शामिल रहे। इसके अलावा, सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ट्रैक पर सोलर सिस्टम लगाने और 110 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करने की योजना पर भी प्रकाश डाला गया। इन पहलों और परियोजना की अब तक की प्रगति को एक खास फिल्म के जरिए दिखाया गया, जिसमें नमो भारत सेवा को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रयासों और नई तकनीकों की जानकारी दी गई।

चंडीगढ़ की तर्ज पर चमकेगी रांची! 30 करोड़ से बनेंगे 3 इको-फ्रेंडली पार्क, जानें क्या होंगी सुविधाएं

झारखंड की राजधानी रांची के दिन अब और भी ज्यादा संवरने वाले हैं। रांची शहर जल्द ही अपनी खूबसूरती के मामले में चंडीगढ़ की तरह चमकता हुआ नजर आएगा। झारखंड सरकार ने राजधानी के स्मार्ट सिटी इलाके में शहरवासियों को विश्वस्तरीय सौगात देने की तैयारी कर ली है। इसके तहत लगभग 30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तीन नए और भव्य इको-फ्रेंडली पार्क बनाए जाएंगे। इन पार्कों के निर्माण की जिम्मेदारी जुडको (JUDCO) को सौंपी गई है और इसका DPR यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार किया जा चुका है। विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने जल्द से जल्द टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं, ताकि काम तेजी से शुरू हो सके।

कहां और कैसे बनेंगे ये नए पार्क?

योजना के मुताबिक इन पार्कों का निर्माण दो मुख्य हिस्सों में किया जाएगा। पैकेज-दो के तहत मंत्रियों के आवास से आगे करीब 3.98 एकड़ जमीन पर एक शानदार कम्युनिटी पार्क बनाया जाएगा। इसके अलावा सिविक टावर के पास लगभग 3.19 एकड़ जमीन पर एक खूबसूरत इको पार्क तैयार किया जाएगा। इन सभी पार्कों को पूरी तरह इको-फ्रेंडली और आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया जा रहा है, जिन पर कुल मिलाकर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

पार्कों में मिलेंगी 25 से अधिक आधुनिक सुविधाएं

जुडको की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इन पार्कों में आने वाले लोगों को घूमने-फिरने और मनोरंजन के लिए 25 से भी ज्यादा आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इस पार्क में भव्य प्रवेश द्वार, गाड़ी पार्क करने के लिए बड़ा पार्किंग एरिया, गार्ड रूम, घूमने के लिए खूबसूरत पाथ-वे, पौधे लगाने के लिए प्लांटर बॉक्स, हरा-भरा ग्रीन स्पेस, फ्लोटिंग सॉइल माउंट, स्टेपिंग स्टोन, भूलभुलैया (मेज), गार्डन आर्क, स्कल्पचर प्लेटफॉर्म, आकर्षक ब्रिज और लजीज व्यंजनों के लिए रेस्टोरेंट बनाया जाएगा। इसके साथ ही सेहत का ध्यान रखने के लिए ओपन जिम, बच्चों के खेलने के लिए चिल्ड्रेन प्ले एरिया, फाउंटेन, तालाब, स्टेप्ड फाउंटेन, फ्लावर बेड, बैठने की सुंदर व्यवस्था, परगोला, गजीबो, पेबल बेड और सुंदर हेज की बाउंड्री जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इको पार्क का खास आकर्षण

इको पार्क में भी प्रवेश द्वार, पार्किंग, पाथ-वे, ग्रीन एरिया, गजीबो, पॉली हाउस, स्कल्पचर प्लेटफॉर्म, गार्डन आर्क, परगोला, एनिमल स्कल्पचर, तालाब, सर्कुलर सिटिंग, बैडमिंटन कोर्ट, चिल्ड्रेन प्ले एरिया, ओपन जिम, स्टेप्ड सिटिंग, रेस्टोरेंट और स्क्वायर पैवेलियन के साथ-साथ कमल के फूलों का एक विशेष तालाब और खूबसूरत फव्वारे बनाए जाएंगे।

समाज के हर वर्ग के लिए होगा कुछ खास

विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने जानकारी दी है कि इन इको पार्कों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें समाज के हर आयु वर्ग और हर शख्स के लिए कुछ न कुछ खास जरूर होगा। युवाओं के लिए पार्क में बने रेस्टोरेंट में क्वालिटी टाइम बिताने का मौका होगा तो वहीं बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरामदायक वॉकिंग स्ट्रीट और बैठने के लिए बेंच की खास व्यवस्था रहेगी। जो लोग अपनी फिटनेस को लेकर जागरूक हैं, उनके लिए आधुनिक उपकरणों से लैस ओपन जिम होगा और छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले व खेलकूद की जगह बनाई जाएगी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी की जरूरत को ध्यान में रखकर इन पार्कों का पूरा प्लान तैयार किया गया है।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

नितिन गडकरी ने बताया भविष्य के हाईटेक हाईवे का पूरा रोडमैप, FASTag एनुअल पास और MLFF सिस्टम का जिक्र कर किए बड़े ऐलान

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के टेंट सिटी 2 में “चिंतन शिविर 2026 – हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन” का उद्घाटन किया। इस शिविर का मकसद भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर दो दिनों तक केंद्रित चर्चा के लिए दिशा तय करना है।

शिविर में ये राज्य परिवहन मंत्री भी हुए शामिल

“गतिशक्ति से प्रगति” के मंत्र के साथ आयोजित इस शिविर में राज्यों के परिवहन और PWD मंत्री, राज्य PWD के वरिष्ठ अधिकारी, लागू करने वाली एजेंसियां ​​और अन्य संबंधित पक्ष हाईवे के विकास, प्रोजेक्ट को लागू करने और इंफ्रास्ट्रक्चर डिलीवरी से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ आए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ​​ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

गडकरी ने किया संबोधित

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि ‘चिंतन शिविर’ केंद्र और राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, ताकि वे मिलकर विचार-विमर्श कर सकें, जमीनी स्तर के अनुभव साझा कर सकें और हाईवे विकास में उभरती चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान के लिए मिलकर काम कर सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन और बुनियादी ढांचे के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए, विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए सफल तौर-तरीकों को साझा किया जाना चाहिए, उनका मूल्यांकन किया जाना चाहिए और जहां भी उचित हो, उन्हें अपनाया जाना चाहिए।

हाईवे डेवलपमेंट में इन चीजों पर दिया जोर

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हाईवे डेवलपमेंट में क्वालिटी, सुरक्षा, रफ्तार और वर्ल्ड-क्लास स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) स्टेज पर पहले से प्लानिंग और तैयारी पर ज्यादा जोर देने को कहा, जिसमें सही सर्वे, अलाइनमेंट प्लानिंग, जमीन अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और समय पर जरूरी मंजूरी लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्टेज पर बेहतर तैयारी से देरी कम करने, लागत बढ़ने से रोकने और हाईवे प्रोजेक्ट्स की क्षमता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

प्लानिंग और प्रोजेक्ट डिजाइन पर कही ये बड़ी बात

गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि हाईवे की प्लानिंग और प्रोजेक्ट डिजाइन में शुरू से ही सड़क सुरक्षा को शामिल किया जाना चाहिए। दुर्घटना की आशंका वाली जगहों की पहचान करने और प्लानिंग व कंस्ट्रक्शन स्टेज के दौरान सुरक्षा के सही उपाय करने से हाईवे को ज्यादा सुरक्षित बनाने और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

दो दिन के चिंतन शिविर में कई अहम सेशन होंगे, जिनमें PM गतिशक्ति और इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, जमीन अधिग्रहण और भूमि राशि, मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग, सुरक्षित और ग्रीन हाईवे का डिजाइन, सड़क सुरक्षा और टोल में सुधार और क्वालिटी एश्योरेंस और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग जैसे विषय शामिल होंगे। इन सेशन का मकसद हाईवे डेवलपमेंट को और बेहतर बनाने के लिए लागू करने में आने वाली चुनौतियों से निपटना, बेहतरीन तरीकों को साझा करना और व्यावहारिक व दोहराए जा सकने वाले समाधान खोजना है।

सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी चिंतन शिविर के एजेंडे का एक अहम हिस्सा हैं। गडकरी ने पर्यावरण के अनुकूल कंस्ट्रक्शन तरीकों और नए व रीसाइकल किए गए मटीरियल के ज्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत पर बात की। साथ ही पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय सुनिश्चित करने की बात कही। इसी संदर्भ में उद्घाटन सत्र के दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण उपायों पर एक दस्तावेज जारी किया गया।

इस सेशन के दौरान ‘सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट के नजरिए पर ब्रिक्स (BRICS) संग्रह’ भी लॉन्च किया गया। इसमें ट्रांसपोर्ट सेक्टर में सस्टेनेबल तरीकों पर अलग-अलग नजरिए को एक साथ लाया गया और भविष्य के लिए तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर पर बातचीत में एक इंटरनेशनल पहलू जोड़ा गया।

टेक्नोलॉजी-आधारित सुधारों पर भी जोर दिया

केंद्रीय परिवहन मंत्री ने हाईवे यात्रा को ज्यादा कुशल और सुविधाजनक बनाने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित सुधारों पर भी जोर दिया, जिनमें FASTag एनुअल पास और मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) शामिल हैं। ये पहल टोलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने, ट्रैफिक की आवाजाही को बेहतर बनाने और हाईवे इस्तेमाल करने वालों के अनुभव को बेहतर बनाने पर मंत्रालय के लगातार फोकस को दिखाती हैं।

दो दिनों तक चलने वाली इन चर्चाओं का मकसद प्रोजेक्ट प्लानिंग और मॉनिटरिंग को मजबूत करना, हाईवे की क्वालिटी और सुरक्षा को बेहतर बनाना, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना और भविष्य के लिए तैयार हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में तेजी लाना होगा। गडकरी ने सभी स्टेकहोल्डर्स से सुरक्षित, हाई-क्वालिटी और भविष्य के लिए तैयार हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप तेजी से आर्थिक विकास और मजबूत कनेक्टिविटी में योगदान दिया जा सके।

चीन की बढ़ेगी टेंशन! लद्दाख में 150 KM लंबी नई सड़क बनाने जा रहा है भारत

पूर्वी लद्दाख में भारत सीमा के पास सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) श्योक नदी के पूर्वी किनारे से दौलत बेग ओल्डी (DBO) तक करीब 150 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इससे DBO और डेपसांग जैसे इलाकों तक पहुंच के लिए एक और रास्ता मिल सकेगा।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 150 किलोमीटर की इस सड़क को पांच हिस्सों में बनाया जाएगा। यह दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड नेटवर्क का हिस्सा होगी। BRO फिलहाल इसकी DPR तैयार कर रहा है। इसमें सड़क के रास्ते, ऊंचाई, मौसम और नदी के बहाव जैसी चीजों की जांच की जाएगी।

DBO तक पहुंच होगी आसान, भारी वाहनों की आवाजाही भी बढ़ेगी

दौलत बेग ओल्डी पूर्वी लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ में LAC के पास है। इसके आसपास डेपसांग का इलाका है और यह काराकोरम दर्रे के पास भी है। लेकिन पूर्वी लद्दाख में मौसम इस प्रोजेक्ट की बड़ी चुनौती है। यहां भारी बर्फबारी, ग्लेशियर पिघलने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन से सड़क प्रभावित हो सकती है। सर्दियों में रास्ते को चालू रखने में मदद मिल सकती है।

श्योक नदी के किनारे सड़क बनाना भी आसान नहीं होगा। नदी का बहाव मौसम के साथ बदलता है और इलाके में काफी ऊंचाई है। इसलिए सड़क के साथ मजबूत सुरक्षा इंतजाम, पुल और खास इंजीनियरिंग की जरूरत होगी।

BRO के कई हिस्सों पर काम जारी

BRO इस पूरे कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ससौमा से सासर ब्रांग्सा तक का हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि बाकी हिस्सों में 70 फीसदी से ज्यादा काम पूरा होने की जानकारी है।

अगर यह नया रास्ता बनता है, तो DBO और डेपसांग जाने के लिए एक और मार्ग मिल जाएगा। इससे किसी एक रास्ते पर परेशानी होने पर दूसरे रास्ते से रूट जारी रखी जा सकेगी।

क्या फायदे होंगे?

1. दूरी और समय कम: लेह से DBO की दूरी 322

KM से घटकर 243 KM रह जाएगी। 2 दिन का सफर घटकर 11-12 घंटे का रह जाएगा।

2. भारी हथियारों की आवाजाही: इस रूट पर 9

बड़े पुलों को 40 टन से अपग्रेड कर 70 टन क्षमता वाला बनाया जा रहा है, ताकि बोफोर्स तोपें और टैंक आसानी से ले जाए जा सकें।

3. ऑल-वेदर कनेक्टिविटी: 17,660 फीट पर

सासर ला पास के नीचे 7 KM लंबी टनल बनाने की भी योजना है ताकि सर्दियों में भी रास्ता खुला रहे।

BRO (Border Roads Organisation) इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। ससौमा से सासर ब्रांग्सा तक का हिस्सा पूरा हो चुका है और बाकी हिर पर 70% से ज्यादा काम पूरा हो गया है।

Skoda Slavia Facelift की लॉन्च डेट फिक्स, इन दिन होगी एंट्री, 10.25-इंच डिस्प्ले समेत मिलेंगे ये फीचर्स

Skoda Slavia Facelift, जिसे पिछले महीने भारत में पेश किया गया था, 6 अक्टूबर 2026 को देश में लॉन्च होने वाली है। बता दें कि इस नई सेडान का प्रोडक्शन पुणे के चाकन स्थित कंपनी के प्लांट में शुरू हो चुका है। वहीं, कंपनी नई Slavia को 6 ट्रिम लेवल में पेश करेंगी: Classic, Classic+, Signature, Sportline, Prestige और Monte Carlo। फिलहाल, इसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है, जबकि डिलीवरी की तारीख लॉन्च के समय बताई जाएगी। कीतम की बात करें तो, मौजूदा मॉडल की कीमत 10 लाख रुपये से 18.19 लाख रुपये के बीच है, और अपडेटेड सेडान की कीमत काफी ज्यादा हो सकती है क्योंकि इसके बाहरी और अंदरूनी हिस्से में काफी बदलाव किए गए हैं।

Skoda Slavia Facelift: एक्सटीरियर और इंटीरियर

मेकओवर के बाद, Skoda ने कार की बनावट (सिलुएट) को तो वैसा ही रखा है, लेकिन डिटेल्स में काफी बदलाव किए हैं जिससे Facelifted मॉडल एकदम नया और फ्रेश लगता है। इसमें नए डिजाइन वाले LED हेडलैंप्स दिए गए हैं। इसके अलावा, Skoda ने बंपर्स में भी बदलाव किए हैं। वहीं, पिछले हिस्से में अपडेटेड टेललैंप्स और सीक्वेंशियल इंडिकेटर्स दिए गए हैं। अपडेटेड सेडान में नए अलॉय व्हील्स भी मिलते हैं। इसके अलावा, कलर ऑप्शन में दो नए एक्सटीरियर कलर्स (Arctic Silver और Cappuccino Beige) भी जोड़े गए हैं।

अपडेटेड Slavia के केबिन में अब बड़ी 10.1-इंच की इंफोटेनमेंट स्क्रीन और 10.25-इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले मिलता है। Google Cloud पर आधारित नए AI कंपैनियन के साथ, Slavia फेसलिफ्ट में वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay की सुविधा भी दी गई है। अन्य फीचर्स में 360-डिग्री एरिया व्यू कैमरा और पिछली सीट पर मसाज फंक्शन शामिल हैं। एयर-कंडीशनिंग सिस्टम के लिए एक वेरिएबल-जियोमेट्री कंप्रेसर भी जोड़ा गया है।

Skoda Slavia Facelift: इंजन

मैकेनिकल तौर पर, नई Slavia में दो टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलते हैं: 1.0-लीटर इंजन (115hp और 178Nm) और 1.5-लीटर इंजन (150hp और 250Nm)। छोटे इंजन को 6-स्पीड मैनुअल या नए 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा जा सकता है। इस ट्रांसमिशन ने पुरानी Slavia के छह-स्पीड ऑटोमैटिक की जगह ली है। वहीं, पावरफुल 1.5-लीटर इंजन सात-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक के साथ आता है।

Skoda Slavia Facelift: बुकिंग और मुकाबले की गाड़ियां

अपडेटेड Slavia की बुकिंग 15,000 रुपये में शुरू हो चुकी है। इस सेगमेंट में इसका मुकाबला Volkswagen Virtus, Hyundai Verna और Honda City से होगा।

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7.84 लाख में आई Renault की नई 7-सीटर कार, Turbo इंजन के साथ मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

अगर आप कम बजट में ऐसी 7-सीटर कार देख रहे हैं, जिसमें ज्यादा पावर का विकल्प भी मिले, तो Renault Triber आपके लिए एक नया ऑप्शन लेकर आई है। कंपनी ने भारत में Triber Turbo लॉन्च कर दी है। इसमें पहले से ज्यादा दमदार इंजन दिया गया है और इसकी शुरुआती कीमत 7.84 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।

Renault Triber Turbo में नया 1.0-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। इससे Triber में पावरट्रेन का एक नया विकल्प जुड़ गया है। साथ ही, कंपनी को उम्मीद है कि इससे कॉम्पिटिटिव MPV सेगमेंट में Triber की स्थिति और मजबूत होगी। फिलहाल Triber Turbo को सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ पेश किया गया है। इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट की कीमत 8.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि टर्बो-पेट्रोल इंजन पूरी रेंज के बजाय सिर्फ कुछ खास वेरिएंट्स में ही मिलेगा। ज्यादा जानने के लिए आगे पढ़ें।

Renault Triber Turbo की कीमत: अलग-अलग वेरिएंट की कीमतों पर एक नजर

कार बनाने वाली कंपनी ने MPV के तीन वैरिएंट में नया टर्बो-पेट्रोल इंजन पेश किया है। Evolution Turbo की कीमत 7.84 लाख रुपये है। Techno Turbo की कीमत 8.53 लाख रुपये है। वहीं, टॉप-स्पेक Emotion Turbo की कीमत 8.99 लाख रुपये है। बता दें कि स्टैंडर्ड नैचुरली एस्पिरेटेड वर्जन की शुरुआती कीमत अभी भी लगभग 5.80 लाख रुपये है। सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं।

वेरिएंटइंजन और गियरबॉक्सकीमत (एक्स-शोरूम)
Triber Evolution Turbo1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल, 5-स्पीड मैनुअल7.84 लाख रुपये
Triber Techno Turbo1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल, 5-स्पीड मैनुअल8.53 लाख रुपये
Triber Emotion Turbo1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल, 5-स्पीड मैनुअल8.99 लाख रुपये

Renault Triber Turbo: डिजाइन और फीचर्स

Renault Triber Turbo के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। इसका लुक मौजूदा Triber जैसा ही है। पीछे की तरफ टेलगेट पर ‘Turbo’ बैज दिया गया है, जिससे इसके टर्बो वर्जन की पहचान की जा सकती है।

कार के अंदर भी केबिन का लेआउट पहले जैसा ही रखा गया है। इसमें वेरिएंट के हिसाब से 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay को सपोर्ट करता है। इसके अलावा ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स भी मिलते हैं।

Triber Turbo में सीटिंग को जरूरत के हिसाब से बदलने की सुविधा भी बरकरार रखी गई है। सेफ्टी के लिए इसमें 6 एयरबैग, ट्रैक्शन कंट्रोल, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और हिल-स्टार्ट असिस्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

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उत्तरपाड़ा में EV प्रोजेक्ट की तैयारी, CKA बिड़ला ग्रुप से पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगी DPR

पश्चिम बंगाल सरकार ने CKA Birla Group से उत्तरपाड़ा में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने के प्रस्ताव की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जल्द से जल्द जमा करने को कहा है। Moneycontrol को मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार चाहती है कि ग्रुप इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी जानकारी जल्द उपलब्ध कराए।

ग्रुप के एक प्रतिनिधि ने राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से संपर्क किया था। इसके बाद एक सरकारी अधिकारी ने ग्रुप से DPR जल्द जमा करने को कहा। हालांकि, ग्रुप ने अभी तक यह रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है।

मनीकंट्रोल ने 21 सितंबर को रिपोर्ट दी थी कि CKA बिड़ला ग्रुप ने पुरानी हिंदुस्तान मोटर्स फैक्ट्री में EVs बनाने के प्रस्ताव के साथ पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क किया था। उस समय प्रस्ताव पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा था।

प्रस्तावित प्रोजेक्ट में कितना निवेश किया जाएगा, किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहन बनाए जाएंगे, कितनी गाड़ियों का उत्पादन होगा और प्रोजेक्ट कब तक शुरू होगा, इन सबकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि कौन सी ग्रुप कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम करेगी।

हालांकि, मनीकंट्रोल ने पश्चिम बंगाल सरकार और CKA बिड़ला ग्रुप (जिसे पहले CK बिड़ला ग्रुप के नाम से जाना जाता था) को DPR रिक्वेस्ट और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के बारे में सवाल भेजे हैं। अब उनके जवाब का इंतजार है।

बता दें कि उत्तरपाड़ा में कभी Hindustan Motors की फैक्ट्री थी, जहां Ambassador और Contessa गाड़ियां बनती थीं। इस फैक्ट्री में काम 2014 में रोक दिया गया था। इस प्रस्ताव से एक दशक से ज़्यादा समय के बाद उस जगह पर फिर से गाड़ियों का प्रोडक्शन शुरू हो सकता है, लेकिन जमीन की उपलब्धता एक अहम सवाल बनी हुई है।

395 एकड़ जमीन पर सरकार का कब्जा

Hindustan Motors ने अपनी FY26 की सालाना रिपोर्ट में बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने फैक्ट्री की पूरी जमीन (लगभग 395 एकड़) वापस ले ली है और उस पर कब्जा कर लिया है। कंपनी ने अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट में इस प्रॉपर्टी को राइट-ऑफ भी कर दिया है।

वहीं, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन वापस लिए जाने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली Hindustan Motors की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी ने कहा था कि वह इस फैसले पर दोबारा विचार के लिए याचिका दायर करने और जमीन के एक हिस्से की मांग करने की योजना बना रही है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में गाड़ियों का निर्माण भले ही कम होता हो, लेकिन वहां गाड़ियों का एक बड़ा बाजार है। SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में राज्य में लगभग 10.2 लाख दो-पहिया और 1.25 लाख पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री हुई। हालांकि, यहां अभी तक किसी गाड़ी बनाने वाले प्लांट के आस-पास कंपोनेंट सप्लायर्स का कोई बड़ा नेटवर्क नहीं बन पाया है।

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Noida Residential Scheme: नोएडा के इन सेक्टरों में प्लॉट खरीदने का मौका! 19 इंडस्ट्रियल प्लॉट पर लगी रिकॉर्ड बोली! यूपी में नौकरी की होगी बरसात

Noida Residential Scheme: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में औद्योगिक जमीन की मांग का एक और बड़ा संकेत सामने आया है। नोएडा प्राधिकरण की वित्तीय वर्ष 2026-27 की औद्योगिक भूखंड योजना के तहत 19 प्लॉट के लिए हुई ई-नीलामी में बोली ने आरक्षित कीमत को काफी पीछे छोड़ दिया। इन प्लॉट का कुल आरक्षित मूल्य करीब ₹86 करोड़ था। लेकिन ई-ऑक्शन में इनकी बोली बढ़कर करीब ₹238 करोड़ तक पहुंच गई। यानी आरक्षित मूल्य से करीब ₹152 करोड़ ज्यादा की बोली लगी।

224 आवेदन, 195 आवेदक बोली के लिए योग्य

नोएडा प्राधिकरण की इस योजना के तहत 19 औद्योगिक प्लॉट के लिए कुल 224 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की जांच के बाद 195 आवेदकों को योग्य पाया गया। इसके बाद योग्य बोलीदाताओं ने बैंक के ई-ऑक्शन पोर्टल के जरिए नीलामी में हिस्सा लिया। बुधवार को हुई ई-नीलामी में बोलीदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। आखिरी बोली कुल मिलाकर करीब ₹238 करोड़ तक पहुंच गई। प्राधिकरण के लिए यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 19 भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य सिर्फ ₹86 करोड़ के आसपास रखा गया था।

किन सेक्टरों में हैं ये औद्योगिक प्लॉट?

  • नोएडा प्राधिकरण की योजना में शामिल ये औद्योगिक भूखंड सेक्टर-3, सेक्टर-6, सेक्टर-7, सेक्टर-9, सेक्टर-10, सेक्टर-80, सेक्टर-162 और सेक्टर-164 में स्थित हैं। इन प्लॉट का आकार भी एक जैसा नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनका क्षेत्रफल करीब 58.56 वर्ग मीटर से लेकर 7,990 वर्ग मीटर तक है।
  • यानी योजना में छोटे आकार के प्लॉट से लेकर अपेक्षाकृत बड़े औद्योगिक भूखंड तक शामिल किए गए थे। अलग-अलग सेक्टरों में स्थित होने के कारण इनकी लोकेशन और संभावित औद्योगिक उपयोग भी अलग-अलग हो सकता है।

मई में लॉन्च हुई थी स्कीम

  • नोएडा प्राधिकरण ने इस औद्योगिक भूखंड योजना को मई 2026 में लॉन्च किया था। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ई-बोली की प्रक्रिया में कुछ समय लगा। सितंबर में ई-नीलामी पूरी होने के बाद अब सफल बोलीदाताओं के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • सितंबर की शुरुआत में नोएडा प्राधिकरण ने IT/ITeS प्लॉट के लिए भी नई कीमत व्यवस्था तय की थी। प्राधिकरण ने ऐसे प्लॉट के लिए ₹86,000 प्रति वर्ग मीटर की एक समान आवंटन दर तय की थी। यह फैसला नोएडा में उपलब्ध औद्योगिक जमीन की सीमितता और निवेश की मांग के बीच लिया गया था।

अब सफल बोलीदाताओं की DPR की होगी जांच

  • E-ऑक्शन पूरा होने के बाद अब सिर्फ बोली लगना ही अंतिम चरण नहीं है। नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ पुष्प राज सिंह के मुताबिक, सफल बोलीदाताओं की DPR (Detailed Project Report) की जांच की जाएगी।
  • इस प्रक्रिया के जरिए प्रस्तावित परियोजनाओं, संभावित निवेश और उनसे पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों का आकलन किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि इन प्लॉट पर कौन-कौन सी औद्योगिक यूनिट्स स्थापित होंगी। उनसे कितना निवेश या रोजगार पैदा होगा। इसकी तस्वीर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

नोएडा में औद्योगिक जमीन की मांग क्यों अहम है?

  • नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, नोएडा करीब 20,316 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक योजनाबद्ध औद्योगिक शहर है। शहर में पहले से कई औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित हैं और दिल्ली से सड़क संपर्क के साथ-साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत है।
  • ऐसे में उपलब्ध औद्योगिक जमीन के लिए प्रतिस्पर्धी बोली लगना इस बात का संकेत है कि कंपनियां और निवेशक नोएडा में औद्योगिक गतिविधियों के लिए जमीन हासिल करने में रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, इन 19 प्लॉट पर वास्तविक निवेश और रोजगार का आंकड़ा संबंधित परियोजनाओं की DPR और उनके क्रियान्वयन के बाद ही सामने आएगा।

निवेश और रोजगार पर अब निगाहें

ई-ऑक्शन में आरक्षित मूल्य की तुलना में काफी ऊंची बोली लगने के बाद अब अगला फोकस इन प्लॉट पर प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के विकास पर रहेगा। सफल आवेदकों की परियोजनाओं की जांच और DPR के आकलन के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में कितना निवेश आएगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि इससे कितने रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

नोएडा के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि औद्योगिक जमीन सीमित होने के बीच नए प्लॉट के आवंटन से शहर में नई मैन्यूफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध होती है। हालांकि, ₹238 करोड़ की बोली को सीधे ₹238 करोड़ के नए औद्योगिक निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से भूखंडों के लिए लगी बोली की राशि है। वास्तविक प्रोजेक्ट निवेश इससे अलग और आगे तय होगा।

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दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर बिग अपडेट, मंत्रालय को सौंपा गया DPR, सारी डिटेल जानिए

Delhi-Patna Bullet Train Corridor: देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की तैयारियां तेज हो गई हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेल मंत्रालय को सौंप दी है। करीब 1,557 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है> जबकि दूसरे चरण में इसे वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा।

DPR के बाद ग्राउंड सर्वे की तैयारी तेज

DPR सौंपे जाने के बाद दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल लाइन के ग्राउंड सर्वे की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। NHSRCL ने 7 सितंबर को वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की तैनाती को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत तीन ऑफिसर्स ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और तीन एडिशनल जनरल मैनेजर की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रक्रिया अगले 30 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। दिल्ली, नोएडा, नई दिल्ली, आगरा, लखनऊ, वाराणसी और पटना में तैनात अधिकारियों को परियोजना के जमीनी कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक चलेगी ट्रेन

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 813 किलोमीटर बताई गई है। दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होने वाली यह लाइन नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।

दूसरे चरण में वाराणसी से पटना और इसके बाद सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल लाइन का विस्तार प्रस्तावित है। पूरे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की लंबाई करीब 1,557 किलोमीटर होगी।

इन शहरों से होकर गुजरेगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

‘दैनिक जागरण’ के मुताबिक, प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी रूट में दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या के लिए लिंक लाइन, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी को जोड़े जाने की योजना है। इसके आगे वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी सेक्शन के जरिए बिहार और पश्चिम बंगाल को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

सफर का समय होगा काफी कम

प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से विभिन्न रूटों पर यात्रा का अनुमानित समय इस प्रकार बताया गया है:-

  • दिल्ली-वाराणसी का सफर 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा।
  • वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा।
  • पटना-सिलीगुड़ी के बीच करीब 2 घंटे लगेंगे।
  • दिल्ली-पटना के बीच 4 घंटे 41 मिनट का समय लगेगा।
  • दिल्ली-सिलीगुड़ी के बीच 6 घंटे 45 मिनट लगेगा।

इस हिसाब से दिल्ली से पटना की यात्रा करीब 4 घंटे 41 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 6 घंटे 45 मिनट लग सकते हैं।

बिहार के इन शहरों को मिलेगा फायदा

  • हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में बिहार के कई शहरों को जोड़ने की योजना है। संभावित स्टेशनों में बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं।
  • बिहार में इस परियोजना के लिए एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाने की योजना है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 1,900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है।
  • पटना जिले में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए करीब 21 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। स्टेशन के लिए शुरुआती तौर पर फुलवारी शरीफ में AIIMS पटना के पास जमीन का निरीक्षण किया गया था।
  • इसके अलावा NHSRCL की सर्वे टीम ने बिहटा के पास एक वैकल्पिक स्थान का भी सुझाव दिया है।

जमीन अधिग्रहण और सर्वे का काम जारी

उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज और वाराणसी समेत विभिन्न जिलों में जमीन अधिग्रहण से जुड़े प्रस्तावों पर काम चल रहा है। बिहार में ग्राउंड सर्वे और मिट्टी की जांच का काम भी जारी है। फाइनल मंजूरी मिलने के बाद DPR को कैबिनेट के समक्ष पेश करने की तैयारी है। पिछले बजट में सरकार ने वाराणसी कॉरिडोर समेत सात बुलेट ट्रेन रूट को हाई-प्रायोरिटी प्रोजेक्ट के रूप में चिह्नित किया था।

280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें

  • भारत में स्वदेशी तकनीक से बुलेट ट्रेन के कोच तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इसके अलावा जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन के कोच 2029-30 तक भारत में आने की बात कही गई है। इनकी अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।
  • जापान और चीन मैग्लेव ट्रेनों पर भी काम कर रहे हैं, जिनकी रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है।
  • वहीं, रूस ने भारत को ‘Ivolga’ ट्रेन की आपूर्ति की पेशकश की है, जिसकी गति 360 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।

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SBI Scheme: महिलाओं को SBI की बड़ी सौगात! इस स्कीम में मिलेगा ₹25 करोड़ तक का आसान लोन

SBI Stree Shakti Yojana Details: अगर आप एक महिला उद्यमी हैं और अपना खुद का नया बिजनेस शुरू करना चाहती हैं या पहले से चल रहे काम को बढ़ाना चाहती हैं, तो देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) आपके लिए एक शानदार योजना चला रहा है। एसबीआई की ‘स्त्री शक्ति योजना’ का मुख्य मकसद महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाना है।

मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े व्यवसायों के लिए इस योजना के तहत आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा, महिलाओं को लोन पर ब्याज दर में विशेष छूट भी मिलती है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एसबीआई की इस योजना के तहत कितना लोन मिल सकता है, ब्याज दर में कितनी छूट मिलेगी और इसके लिए क्या-क्या खास शर्तें हैं।

कितना मिल सकता है लोन?

बिजनेस की जरूरत और उसकी वित्तीय स्थिति के आधार पर महिलाएं इस योजना के तहत ₹25 करोड़ रुपये तक का लोन हासिल कर सकती हैं।

वर्किंग कैपिटल और टर्म लोन: यह लोन बिजनेस के रोजमर्रा के खर्चों और लंबी अवधि के एसेट या मशीनरी खरीदने दोनों के लिए दिया जाता है।

बैंक का मूल्यांकन: लोन की अंतिम राशि एसबीआई आवेदक की पात्रता, बिजनेस प्लान और उसके वित्तीय स्थिति के मूल्यांकन के आधार पर तय करता है।

क्रेडिट रेटिंग: ₹2 करोड़ से अधिक के लोन के लिए लागू ब्याज दर आवेदक की क्रेडिट रेटिंग से जुड़ी हो सकती है।

ब्याज दर में मिलेगी 0.50% की विशेष छूट

महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए एसबीआई इस योजना में ब्याज दर में राहत देता है। ₹2 करोड़ रुपये तक के लोन पर महिलाओं को ब्याज दर में 0.50% (50 बीपीएस) तक की छूट मिलती है। इससे महिलाओं के बिजनेस के लिए कर्ज चुकाने की लागत काफी कम हो जाती है।

हालांकि, अंतिम ब्याज दर और अन्य शुल्क एसबीआई के प्रचलित नियमों के अनुसार ही तय होते हैं, इसलिए लोन लेने से पहले नजदीकी शाखा से सटीक दरों की जांच जरूर करें।

अन्नपूर्णा और श्रृंगार योजना से महिला उद्यमियों का संवरेगा बिजनेस

SBI अपनी ‘स्त्री शक्ति पहल’ के अंतर्गत महिलाओं के अलग-अलग कार्यक्षेत्रों की जरूरतों के आधार पर विशेष लोन योजनाएं भी उपलब्ध कराता है। इसके तहत अन्नपूर्णा योजना विशेष रूप से कैटरिंग, रेस्तरां, टिफिन सर्विस और खाद्य पदार्थों से जुड़े नए या पुराने व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

वहीं दूसरी ओर, श्रृंगार योजना ब्यूटी पार्लर, ब्यूटी सैलून और वेलनेस सेक्टर से जुड़ी महिला उद्यमियों को उनके बिजनेस के विस्तार, ब्यूटी उपकरण खरीदने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए आसान शर्तों पर लोन की सुविधा देती है। ये दोनों ही योजनाएं महिलाओं को उनकी विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए तैयार की गई हैं।

रीपेमेंट और मार्जिन मनी की शर्तें

लोन चुकाने की अवधि बिजनेस के आकार और लोन के प्रकार पर निर्भर करती है। टर्म लोन के लिए भुगतान की समय-सीमा 7 से 10 साल तक हो सकती है। लोन राशि के आधार पर बैंक 15% से 25% तक मार्जिन मनी की मांग कर सकता है। यानी कुल लागत का कुछ हिस्सा आवेदक को खुद लगाना होता है और बाकी रकम बैंक लोन के रूप में देता है।

आवेदन करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

अगर आप इस योजना के तहत लोन के लिए अप्लाई करने जा रही हैं, तो अपने बिजनेस प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), केवाईसी डाक्यूमेंट्स, वित्तीय रिकॉर्ड और अपने पास मौजूद मार्जिन मनी का सही हिसाब-किताब तैयार रखें। किसी भी आवेदन से पहले बैंक अधिकारी से ब्याज दरों, प्रोसेसिंग फीस और अन्य सर्विस चार्ज की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।