PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोकल फॉर वोकल अभियान को बढ़ावा देने के लिए मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर एक स्थानीय डेरी पहुंचे और चाय-फैन का लुत्फ उठाया। इस दौरान उन्होंने मेलाघाट मार्ग के दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों से बातचीत की और राहुल गांधी पर भी तंज कसा। ALSO READ: उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, खटीमा के मेलाघाट रोड पर भ्रमण के दौरान मिलन डेरी में चाय की चुस्कियों के साथ स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से आत्मीय संवाद किया। स्थानीय उत्पादों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है। जब हम स्थानीय दुकानों और उत्पादों को अपनाएंगे, तभी हमारे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्वरोजगार की प्रेरणा मिलेगी।

राहुल गांधी की मानसिकता पर सवाल उठाए

चाय पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ बैठकर चाय पीते हुए मुझे चाय का स्वाद और लोगों का अपनापन तो साफ दिखाई दिया, लेकिन कहीं भी कोई जाति नजर नहीं आई। राहुल गांधी द्वारा चाय के कप में भी जाति और भेदभाव तलाशना संकीर्ण राजनीति की पराकाष्ठा है। कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन सोच इतनी डिस्पोजेबल नहीं होनी चाहिए कि चाय में भी जाति और राजनीति ढूंढ ली जाए।

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

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अगस्त का आज आखिरी दिन है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के जीवन, खर्च और बचत से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बैंकिंग, गैस सिलेंडर, टैक्स, यात्रा और क्रेडिट कार्ड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के ये बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। इनमें से कुछ बदलावों के कारण आपको अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, तो वहीं कुछ नियमों से आपको बड़ी राहत मिलने की संभावना है। किसी भी परेशानी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए, नए नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

 

विदेश यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत

1 सितंबर से भारत से अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों के बोर्डिंग पास पर भौतिक (फिजिकल) मुहर नहीं लगाई जाएगी। इमिग्रेशन ब्यूरो ने प्रक्रिया को सुगम और तेज बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नए नियम के अनुसार, यात्री अपने मोबाइल फोन पर इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और अस्पष्ट मुहरों जैसी पुरानी तकनीकी समस्याएं हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।

 

LPG सिलेंडर

31 अगस्त को एलपीजी कनेक्शन के लिए ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक सत्यापन आखिरी दिन है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया 1 सितंबर को बंद हो जाएगी। यदि आपने इस अवधि में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो आप घरेलू सब्सिडीयुक्त सिलेंडर प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी प्रमुख तेल कंपनियां ग्राहकों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह देते हुए लगातार संदेश भेज रही हैं। 1 सितंबर से एलपीजी या पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव हो सकता है। 

 

बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव

बैंकों में बड़ी सावधि जमा (एफडी) करने वालों के लिए भी नियमों में पारदर्शिता लाई जा रही है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बड़ी जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज दर रोजाना सुबह 10:10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैंक की अलग-अलग शाखाएं एक ही दिन जमा की गई एक ही राशि पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। हालांकि, इस नियम का आम नागरिकों की छोटी एफडी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। ध्यान दें कि एफडी पारदर्शिता के ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 1 सितंबर से एटीएम से जुड़े चार्जेस में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर बैंक आपसे मोटी फीस वसूल सकता है।

 

ईटीएफ पर नए नियम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) ने ईटीएफ (ETF) कारोबार को लेकर 1 सितंबर से नए नियम लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के हिसाब से ईटीएफ की कीमत की सीमा तय के लिए पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट की ट्रेडिंग वॉल्यूम की औसत कीमत को आधार बनाया जाएगा। इससे ईटीएफ की कीमत बाजार की ताजा स्थिति के आसपास बनी रहेगी।

 

विदेश यात्रा से जुड़ा बड़ा बदलाव

1 सितंबर 2026 से विदेश यात्रा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने वाला है। भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प लगवाने की जरूरत नहीं होगी. यात्री मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा कर सकेंगे। इस नए नियम से हवाई यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Nifty से ज्यादा Gold ETF में गिरावट, दो वजहों से 4 % तक आया नीचे

Gold ETF Big Fall: गोल्ड और सिल्वर के ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में आज बिकवाली का तेज दबाव दिखा और यह 4% तक टूट गया। इसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श (Kevin Warsh) की हॉकिश यानी सख्त कमेंट्स से झटका लगा, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ीं तो सोने-चांदी के ईटीएफ की चमक फीकी पड़ी। यह बिकवाली वैश्विक मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में आई तेजी के मुताबिक ही है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में सोमवार को भी गिरावट जारी रही।

शुक्रवार को सोने में 3% से अधिक की गिरावट आई, जो जून की शुरुआत के बाद इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। सिंगापुर में कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 0.7% गिरकर प्रति औंस $4,422.75 प्रति औंस तो सिल्लर भी 0.4% गिरकर $66.12 प्रति औंस पर आ गया। इसका असर घरेलू बूलियन मार्केट में भी दिखा और MCX Gold प्रति 10 ग्राम 1.14% गिरकर ₹1,54,496 और MCX Silver Futures करीब 1.28% गिरकर ₹2,39,341 प्रति किग्रा पर आ गया।

Gold ETF की तुलना में Silver ETF में अधिक गिरावट

आज 31 अगस्त तो गोल्ड ईटीएफ की तुलना में सिल्वर ईटीएफ में अधिक गिरावट रही। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ (SBI Silver ETF) 4.05% गिरकर ₹226.55 पर आ गया, तो निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ (Nippon India Silver ETF- Silver BeES) 4.06% गिरकर ₹221.07 पर आ गया। टाटा सिल्वर ईटीएफ (Tata Silver ETF) भी 3.98% गिरकर ₹22.44 और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ (ICICI Prudential Silver ETF) भी 3.87% गिरकर ₹231.21 पर आ गया।

गोल्ड ईटीएफ में भी भारी गिरावट रही। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ (ICICI Prudential Gold ETF) 3.59% गिरकर ₹130.75, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ (SBI Gold ETF) 3.50% टूटकर ₹130.30 और निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएसएस (Nippon India ETF Gold BeES) 3.48% गिरकर ₹126.30 पर आ गया। वहीं टाटा गोल्ड ईटीएफ (Tata Gold ETF) 3.19% गिरकर ₹14.87 पर आ गया।

क्या है US Fed का रुझान

फेडरल रिजर्व की सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में केविन वॉर्श ने कहा कि वह महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य पर वापस लाने के लिए प्रतिबंध है। इसके बाद सोना-चांदी धड़ाम हो गया क्योंकि इससे अमेरिकी मौद्रिक नीतियों के सख्त होने की उम्मीदें बढ़ गई। ट्रेडर्स का मानना है कि सितंबर में नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 50% से अधिक है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर सोने और चांदी जैसी बिना यील्ड वाली एसेट्स पर पड़ता है।

सोने-चांदी की चमक पर अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई गहहाने से तेल की कीमतों में उबाल ने और दबाव बनाया। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया जोकि एक महीने से अधिक समय में ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई थी। कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा दिया, जबकि बाजार पहले से ही आने वाले समय में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कैलकुलेशन कर रहा था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank Share Price: MD और CEO पर नए ऐलान से दिखी 3% तक तेजी, अब ब्रोकरेज का क्या है नजरिया

HDFC Bank के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) शशिधर जगदीशन अपना कार्यकाल (टर्म) खत्म होने के बाद फिर से नियुक्ति नहीं चाहते हैं। उनका टर्म 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इस ऐलान के बाद 31 अगस्त को दिन में बैंक के शेयर में करीब 3 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। बीएसई पर शेयर 739.50 रुपये के हाई तक गया। कई ब्रोकरेज फर्मों ने मैनेजमेंट में संभावित बदलाव को लेकर सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। लेकिन नए CEO की नियुक्ति को लेकर निकट भविष्य की अनिश्चितता के कारण सावधान भी हैं।

HDFC Bank ने नए MD और CEO की तलाश शुरू कर दी है। कहा है कि उसका बोर्ड उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक को उम्मीद है कि वह जगदीशन के 26 अक्टूबर को रिटायर होने से पहले ही अपने नए CEO की नियुक्ति कर लेगा। HDFC Bank के नए MD और CEO के रोल के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों तरह के कैंडिडेट्स पर विचार किया जा रहा है।

HDFC Bank स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्मों के रुख की बात करें तो HDFC Bank पर कवरेज करने वाले एनालिस्ट्स इस डेवलपमेंट को लेकर बंटे हुए हैं। बर्नस्टीन ने बैंक के स्टॉक के लिए ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज लीडरशिप में बदलाव को सकारात्मक मानता है। उसका कहना है कि नया CEO बैंक की कहानी को नए सिरे से पेश करने का स्वाभाविक मौका दे सकता है।

जेपी मॉर्गन ने भी स्टॉक पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 990 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर निकट भविष्य में स्टॉक पर पड़ सकता है, लेकिन समय पर उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी होने से नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है। निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए नेट इंटरेस्ट इनकम (शुद्ध ब्याज आय) में बढ़ोतरी का फिर से शुरू होना काफी मायने रखता है है।

एक्सिस कैपिटल ने ‘बाय’ कॉल के साथ 1,030 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि जगदीशन के फैसले से दूसरे कार्यकाल के छोटा होने की आशंका खत्म हो गई है। नए उत्तराधिकारी को पूरे 3 साल का कार्यकाल मिल सकता है।

IIFL, जेफरीज, ICICI सिक्योरिटीज की क्या राय

IIFL ने जगदीशन के फैसले को न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव बताया है। तर्क है कि इससे रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर अगला कार्यकाल छोटा होने का जोखिम खत्म हो जाता है। हालांकि कैजाद भरूचा एक संभावित इंटरनल कैंडिडेट (अंदरूनी उम्मीदवार) हो सकते हैं, लेकिन IIFL का कहना है कि कार्यकाल की पाबंदियों के कारण उन्हें काम करने के लिए कम समय मिल सकता है। भरूचा का HDFC Bank के बोर्ड में फुल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर 15 साल का कार्यकाल 2029 में खत्म होगा। इसके चलते उन्हें टॉप पोजिशन पर बहुत कम मौका मिलेगा। कहा जा रहा है कि यह उनके नाम पर विचार करने में रुकावट बन सकता है। IIFL के मुताबिक, इसके उलट कोई भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार लीडरशिप में एक नई शुरुआत और लंबा कार्यकाल दे सकता है।

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अन्य ब्रोकरेज ने इस बदलाव को लेकर ज्यादा सावधानी भरा रुख अपनाया है। जेफरीज ने ‘बाय’ रेटिंग तो बनाए रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 1,050 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया है। FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों में भी 3-3 प्रतिशत की कटौती की है। ब्रोकरेज का मानना है कि नेतृत्व में बदलाव से बैंक के रेवेन्यू की रफ्तार, खासकर डिपॉजिट जुटाने और फीस से होने वाली आय पर असर पड़ सकता है। साथ ही बढ़ती अनिश्चितता से बैंक की कॉस्ट ऑफ इक्विटी बढ़ सकती है और वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।

जेफरीज का कहना है कि इन सबके बावजूद HDFC Bank की वैल्यूएशन इतनी ज्यादा नहीं है कि रेटिंग घटाई जाए। ICICI सिक्योरिटीज ने भी अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 1,020 रुपये से घटाकर 920 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

September 2026: दूध से लेकर LPG सिलेंडर तक… 1 सितंबर से बदल जाएंगे ये 9 बड़े नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Financial Rule Changes September 2026: सितंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी से लेकर निवेशकों और करदाताओं के लिए कई नियम बदलने वाले हैं। सितंबर 2026 में दूध की कीमतों से लेकर डीमैट अकाउंट, एडवांस टैक्स, एलपीजी सिलेंडर बायोमेट्रिक और फ्लाइट में सफर तक से जुड़े 9 बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले इन सभी 9 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानिए।

1. डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनेशन के नए नियम

1 सितंबर 2026 से डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नए दिशानिर्देश लागू हो जाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों का नॉमिनेशन स्टेटस तुरंत चेक करें और आवश्यक प्रक्रिया या ऑप्ट-आउट फॉर्म समय रहते पूरा कर लें।

2. SEBI के नए ETF रूल्स

शेयर बाजार के नियामक सेबी का नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) फ्रेमवर्क 7 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इसमें बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रक्रियाओं में बदलाव शामिल हैं। पहले इसे लागू करने की समयसीमा अलग थी, जिसे बढ़ाकर 7 सितंबर किया गया है।

3. FCNR(B) डिपॉजिट पर स्पेशल स्वैप विंडो बंद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) डिपॉजिट के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। 1 सितंबर से नई FCNR(B) एफडी पर यह स्पेशल फैसिलिटी नहीं मिलेगी। हालांकि, FCNR(B) डिपॉजिट बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब इन पर ब्याज दरें बैंक की सामान्य दरों के आधार पर तय होंगी।

4. एडवांस टैक्स चुकाने की लास्ट डेट: 15 सितंबर

करदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की अगली किश्त जमा करने की अंतिम तिथि है। नियमों के तहत, योग्य टैक्सपेयर्स को 15 सितंबर तक अपनी कुल एडवांस टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा सरकार को जमा करना अनिवार्य है।

5. छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव

सितंबर का आखिरी दिन यानी 30 सितंबर छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि और एनएससी (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरों की समीक्षा और घोषणा करेगी।

6. इंटरनेशनल फ्लाइट्स: बोर्डिंग पास पर स्टैंप की जरूरत खत्म

1 सितंबर 2026 से भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मोहर लगवाने की बाध्यता से छूट दे दी गई है। अब यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास का उपयोग कर सकते हैं या प्रिंटेड पास दिखाकर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

7. LPG e-KYC की अनिवार्यता

घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (e-KYC) कराने की समयसीमा 31 अगस्त यानी आज तक है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर के बाद रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग या सब्सिडी दरों का लाभ लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

8. मुंबई में दूध की कीमतें बढ़ीं

मुंबई में 1 सितंबर से ताजा भैंस के दूध के थोक दामों में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके बाद अब दूध की नई दरें ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। यह रिवाइज्ड रेट अगले छह महीनों के लिए लागू रहेंगे।

9. मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी

मुंबई में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी झटका लगने वाला है। 1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के बेस फेयर में बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे लोकल ट्रैवलिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।

PPF Calculator: PPF में मंथली निवेश करें या साल में एकमुश्त, किसमें ज्यादा फायदा है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

PPF Calculator: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में निवेश करने वालों के सामने अक्सर यह सवाल आता है कि हर महीने पैसा जमा करना बेहतर है या पूरे साल का पैसा एक साथ जमा कर देना चाहिए। दोनों तरीकों में निवेश की रकम समान हो सकती है, लेकिन ब्याज में बड़ा अंतर आ सकता है।

मान लीजिए आप हर वित्त वर्ष PPF में ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। आप चाहें तो ₹12,500 हर महीने जमा करें। दूसरा तरीका है कि पूरे ₹1.5 लाख साल की शुरुआत में ही PPF में डाल दें। लेकिन, दोनों का कैलकुलेशन आखिर में दिलचस्प तस्वीर दिखाता है।

₹1.5 लाख एकमुश्त या ₹12,500 मंथली?

यहां 15 साल का एक उदाहरण देखते हैं। कैलकुलेशन 7.1% सालाना ब्याज दर के आधार पर किया गया है। माना गया है कि PPF की ब्याज दर पूरे 15 साल इसी स्तर पर रहती है। साथ ही मंथली निवेश हर महीने की 5 तारीख से पहले किया गया है।

सालाना अनुमानित रिटर्न

₹2 लाख तक पहुंचने में समयकुल SIP निवेशअनुमानित फंड
12.00%13 साल 5 महीने₹80,500₹2,00,130
15.00%12 साल₹72,000₹2,01,792
18.00%10 साल 10 महीने₹65,000₹2,00,552

इस हिसाब से दोनों तरीकों में कुल निवेश ₹22.50 लाख ही है। लेकिन साल की शुरुआत में एकमुश्त ₹1.5 लाख जमा करने पर मैच्योरिटी पर करीब ₹1.24 लाख ज्यादा मिल सकते हैं।

एकमुश्त निवेश पर ज्यादा फायदा क्यों?

PPF में ब्याज का हिसाब हर महीने किया जाता है। किसी महीने में 5 तारीख के बाद से लेकर महीने के आखिर तक खाते में मौजूद सबसे कम बैलेंस को ब्याज के लिए माना जाता है।

अगर आप 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच पूरे ₹1.5 लाख जमा कर देते हैं, तो पूरी रकम को उस वित्त वर्ष के सभी 12 महीनों का ब्याज मिल सकता है। वहीं मंथली निवेश में पैसा धीरे-धीरे खाते में आता है।

इसका सीधा असर ब्याज पर पड़ता है। ₹1.5 लाख को अप्रैल की शुरुआत में जमा करने पर पहले साल करीब ₹10,650 का ब्याज मिल सकता है। वहीं हर महीने ₹12,500 जमा करने पर पहले साल ब्याज करीब ₹5,769 होगा। यानी सिर्फ पहले साल में ही करीब ₹4,881 का अंतर आ सकता है।

15 साल में कैसे बढ़ता जाता है अंतर?

पहले साल एकमुश्त निवेश पर जो अतिरिक्त ब्याज मिलता है, वह अगले साल से खुद भी ब्याज कमाने लगता है। यही कंपाउंडिंग का फायदा है।

हर साल अगर आप शुरुआत में एकमुश्त निवेश करते हैं, तो आपके पैसे को ज्यादा समय तक ब्याज मिलता है। 15 साल तक यही अंतर जुड़ता जाता है। इसलिए मैच्योरिटी पर करीब ₹1.24 लाख का फासला बन सकता है।

अगर एकमुश्त ₹1.5 लाख नहीं है तो?

हर किसी के पास वित्त वर्ष की शुरुआत में ₹1.5 लाख जमा करने के लिए बड़ी रकम नहीं होती। ऐसी स्थिति में मंथली निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है। आप हर महीने ₹12,500 जमा कर सकते हैं और पूरे साल में ₹1.5 लाख का निवेश पूरा कर सकते हैं।

बस कोशिश करें कि PPF में जमा करने वाला पैसा हर महीने की 5 तारीख से पहले खाते में पहुंच जाए। 5 तारीख के बाद जमा करने पर उस महीने का पूरा ब्याज नहीं मिलेगा। इसलिए 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करना बेहतर माना जाता है।

साल में एक बार पैसा कब जमा करें?

अगर आपके पास पूरे साल का निवेश पहले से तैयार है, तो नया वित्त वर्ष शुरू होते ही 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच पैसा जमा करना फायदेमंद हो सकता है। इससे रकम को पूरे साल ब्याज कमाने का मौका मिलता है।

लेकिन सिर्फ ज्यादा ब्याज के लिए अपनी इमरजेंसी सेविंग या जरूरी पैसा PPF में नहीं डालना चाहिए। PPF लंबी अवधि का निवेश है और इसमें पैसे निकालने के नियम भी लागू होते हैं।

PPF में कौन सा तरीका चुनें?

अगर आपके पास साल की शुरुआत में पूरी रकम है, तो एकमुश्त निवेश से ज्यादा ब्याज मिलने की संभावना होती है। वहीं सैलरी या नियमित आमदनी से निवेश करने वालों के लिए मंथली निवेश आसान है।

मंथली निवेश में एक और फायदा है। आपको एक बार में ₹1.5 लाख की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती। हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा होता रहता है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका वही है, जिसे आप लंबे समय तक आसानी से जारी रख सकें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

HDFC Bank के नए CEO के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्या नई लीडरशिप निवेशकों का भरोसा लौटा पाएगी?

HDFC Bank के MD और CEO शशिधर जगदीशन के पद छोड़ने के फैसले के बाद अब नए CEO की तलाश शुरू हो गई है। यह सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं है। बैंक के सामने निवेशकों का भरोसा लौटाने और गवर्नेंस से जुड़े सवालों को पीछे छोड़ने की भी बड़ी चुनौती है।

बैंक ने शनिवार को बताया कि शशिधर जगदीशन दोबारा नियुक्ति नहीं लेंगे। उनके पद छोड़ने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल को बढ़ाने की अटकलें चल रही थीं। उनका आखिरी वर्किंग डे 26 अक्टूबर होगा। अब बैंक का बोर्ड नए CEO की नियुक्ति के लिए RBI से मंजूरी मांगेगा। नया CEO बैंक के भीतर से भी हो सकता है और बाहर से भी।

2020 में संभाली थी बैंक की कमान

शशिधर जगदीशन HDFC Bank में करीब तीन दशक से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2020 में आदित्य पुरी के बाद बैंक की कमान संभाली थी। आदित्य पुरी ने 20 साल से ज्यादा समय तक बैंक का नेतृत्व किया था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जगदीशन के कार्यकाल में बैंक की बैलेंस शीट तेजी से बढ़ी। उनके नेतृत्व में 2023 में HDFC Bank का देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC Ltd के साथ मर्जर भी हुआ। हालांकि, उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में बैंक के नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े हुए।

IIFL Capital ने क्या कहा?

IIFL Capital के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिकिन शाह का कहना है कि जगदीशन का दोबारा नियुक्ति नहीं लेना शेयर के लिए बनी बड़ी अनिश्चितता को खत्म कर सकता है। उनका मानना है कि अगर RBI छोटा कार्यकाल मंजूर करता, तो शेयर पर दबाव और लंबे समय तक बना रह सकता था।

शाह के मुताबिक, अगर बैंक किसी भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार को CEO बनाता है, तो इससे नेतृत्व में नया बदलाव देखने को मिल सकता है। नए CEO को बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय भी मिल सकता है।

शेयर ने इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया

HDFC Bank भारत का सबसे मूल्यवान बैंक है। इसका मार्केट कैप करीब 116 अरब डॉलर है। इसके बावजूद इस साल बैंक का शेयर दबाव में रहा है।

इस साल शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले Nifty Bank में सिर्फ 3.5% की गिरावट रही है। HDFC Bank का यह प्रदर्शन अपने बैंकिंग इंडेक्स और बड़े प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। 2003 के बाद यह बैंक के शेयर का सबसे खराब रिलेटिव प्रदर्शन है।

गवर्नेंस को लेकर क्यों उठे सवाल?

पिछले कुछ समय में बैंक को कई विवादों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल दुबई के स्थानीय रेगुलेटर ने प्रोसेस में खामियां मिलने के बाद HDFC Bank की दुबई ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था।

मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मतभेदों का हवाला दिया था। बाद में उन्होंने कहा कि दुबई रेगुलेटर से जुड़े मुद्दों को बैंक ने जिस तरह संभाला, उससे उन्हें चिंता हुई थी। हालांकि, HDFC Bank ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। RBI ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा है कि बैंक में गवर्नेंस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।

बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग पर कार्रवाई

बैंक पर सवाल तब और बढ़े, जब एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बैंक ने एक सरकारी कंपनी को ज्यादा ब्याज दिया। इसे कथित तौर पर मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।

जुलाई में बैंक के बोर्ड ने इस मामले में जगदीशन समेत तीन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की। बोर्ड ने कहा कि डिपॉजिट रेट तय करने से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अपनी व्यावसायिक सीमा से आगे जाकर फैसले लिए थे।

बैंक के सामने अमेरिका में शेयरधारकों की संभावित कानूनी कार्रवाई का भी जोखिम है। निवेशकों ने मिस-सेलिंग के आरोप भी लगाए हैं। बैंक ने कहा है कि वह इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेगा।

नए CEO का जल्दी चयन जरूरी

नए CEO की नियुक्ति में ज्यादा देरी बैंक के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर सकती है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद यह दबाव पहले ही बढ़ चुका है।

अब निवेशक यह देखेंगे कि नया CEO कौन बनता है। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि नेतृत्व परिवर्तन कितनी आसानी से होता है। नए CEO को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत है और बैंक की ग्रोथ पर पूरा फोकस रहेगा।

HDFC Ltd के मर्जर की चुनौतियां

2023 में HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर के बाद बैंक को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मर्जर के बाद बैंक के पास लंबी अवधि वाले होम लोन का बड़ा पोर्टफोलियो आ गया। इससे बैंक की लिक्विडिटी और मार्जिन पर दबाव पड़ा है।

नए CEO के सामने इन चुनौतियों को संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। बैंक को मर्जर का पूरा फायदा निकालने के साथ अपनी ग्रोथ और मुनाफे में सुधार करना होगा।

बाजार के लिए क्यों अहम है HDFC Bank?

HDFC Bank की Nifty 50 में करीब 10% हिस्सेदारी है। इसलिए इस शेयर की बड़ी चाल का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ सकता है। बैंक के शेयर में गिरावट ने हाल के समय में Nifty पर भी दबाव बनाया है।

Nifty 50 में इस साल करीब 7.5% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले MSCI Asia Pacific Index करीब 22% चढ़ा है। ऐसे में HDFC Bank के शेयर का कमजोर प्रदर्शन भारतीय बाजार के लिए भी एक अहम मुद्दा बन गया है।

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक की कमान कौन संभालता है। निवेशक नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया, नए CEO के आने के बाद बैंक की ग्रोथ और गवर्नेंस मानकों को भी करीब से देखेंगे। अब नया नेतृत्व ही तय करेगा कि HDFC Bank आगे कितनी जल्दी निवेशकों का भरोसा वापस जीत पाता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

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PPF Investment: क्या आप भी PPF में डालते हैं पैसा और लमसम या मंथली में है कंफ्यूज? जान लें 5 तारीख वाला ये ‘गोल्डन रूल’

PPF Investment Timing: अगर आप हर साल पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि पैसा साल की शुरुआत यानी अप्रैल में एक साथ जमा करना सही है या हर महीने किश्तों में?

अक्सर लोग अपनी सुविधा के हिसाब से निवेश करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ निवेश के सही समय का चुनाव करने से आपके फाइनल मैच्योरिटी फंड में ₹1.1 लाख से ₹1.2 लाख तक का अंतर आ सकता है? आइए समझते हैं PPF में ब्याज की गणना कैसे होती है और 15 साल बाद दोनों तरीकों में से कौन सा विकल्प ज्यादा रिटर्न देगा।

PPF में ब्याज की गणना का नियम

PPF में ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने के लिए इसके ब्याज की गणना का गणित समझना बेहद जरूरी है। वर्तमान में सरकार PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दे रही है, जो हर साल कंपाउंड होता है। PPF नियम के अनुसार, ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच मौजूद सबसे न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है।

अगर आप 5 अप्रैल से पहले पूरा ₹1.5 लाख जमा कर देते हैं, तो आपको पूरे 12 महीनों के लिए उस ₹1.5 लाख पर ब्याज मिलता है। इसके विपरीत, हर महीने ₹12,500 जमा करने पर ब्याज केवल उसी हिस्से पर मिलेगा जो महीने-दर-महीने खाते में जुड़ता जाएगा।

5 अप्रैल से पहले लमसम vs हर महीने ₹12,500

अगर आप PPF खाते में हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो 15 साल की मैच्योरिटी अवधि (7.1% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज पर) में कुल ₹22.5 लाख जमा करने के बाद, साल की शुरुआत में यानी 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त पैसा जमा करने पर आपको ₹40,68,209 का कुल फंड मिलता है। जबकि हर महीने ₹12,500 की किश्त में निवेश करने पर यही फंड घट कर ₹39,47,848 रह जाता है।

पैसे कम बढ़ने के पीछे की वजह है PPF का 5 तारीख का ब्याज वाला नियम है, जिसके तहत 5 अप्रैल से पहले एक साथ पैसा जमा करने पर आपकी पूरी रकम पर पूरे 12 महीनों तक लगातार चक्रवृद्धि ब्याज बनता है, जिससे बिना कोई अतिरिक्त पैसा लगाए आपको ₹1,20,361 (लगभग ₹1.2 लाख) का ज्यादा ब्याज प्राप्त होता है।

किस निवेशक के लिए कौन सा विकल्प सही है?

लमसम (5 अप्रैल से पहले): ये उन लोगों के सही है जिन लोगों के पास साल की शुरुआत में बोनस, मैच्योरिटी फंड या पर्याप्त सरप्लस पैसा उपलब्ध है। इससे आपके पैसे को 12 महीनों तक लगातार ब्याज और कंपाउंडिंग की ताकत मिलती है।

मंथली SIP (हर महीने की 5 तारीख से पहले): नौकरीपेशा और वे लोग जो अपनी मासिक सैलरी से बजट बनाकर थोड़ा-थोड़ा निवेश करते हैं। एकमुश्त बड़ी रकम का वित्तीय दबाव नहीं पड़ता और बचत का अनुशासन बना रहता है। इस बात का ध्यान दें कि अगर आप हर महीने निवेश कर रहे हैं, तो हमेशा महीने की 5 तारीख से पहले पैसा ट्रांसफर करें ताकि उस महीने का ब्याज न छूटे।

अगर आपके पास पैसा पहले से मौजूद है, तो उसे बैंक खाते में रखकर साल भर में थोड़ा-थोड़ा निवेश करने का कोई फायदा नहीं है। 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त ₹1.5 लाख जमा करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। समय की ताकत और चक्रवृद्धि ब्याज का सही इस्तेमाल करके आप आसानी से ₹1.2 लाख की एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।