Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

ITR Refund: ई-वेरिफिकेशन में देरी होने पर भी मिलेगा रिफंड, ITAT के फैसले से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

48 घंटे से भी कम समय में क्रेडिट होने वाला है आपके PF खाते में इंट्रेस्ट! जानिए कैसे कैलकुलेट होता है ब्याज, 5 लाख पीएफ पर कितनी होगी कमाई?

EPF Interest 2026: अगर आप भी बार-बार अपनी ईपीएफ (EPF) पासबुक रिफ्रेश कर रहे हैं तो आपका इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 34 करोड़ खातों में 15 जुलाई तक ब्याज की रकम क्रेडिट करने जा रहा है। पिछले वर्षों में जहां ब्याज अक्टूबर-नवंबर के समय क्रेडिट होता था। वहीं इस साल यह काफी पहले किया जा रहा है।

इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इंट्रेस्ट के मद में क्रेडिट होने वाली है। EPFO के नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम (CITES) के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाने वाला पहला ब्याज भुगतान है।

पिछले महीने वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूर की गई ब्याज दर लगातार तीसरे साल भी 8.25 प्रतिशत पर बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से इस 8.25% ब्याज का रुपयों में क्या गणित बैठता है और इसका कैलकुलेशन कैसे किया जाता है।

₹5 लाख से ₹1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इंट्रेस्ट का कैलकुलेशन 31 मार्च 2026 तक के कुल फंड के आधार पर की जाती है। ये इंट्रेस्ट 15 जुलाई तक आपके पासबुक में दिखने लगेगी। साधारण गणित के हिसाब से आपके पीएफ बैलेंस पर मिलने वाला इंट्रेस्ट कुछ ऐसा बनता है:-

₹5 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹41250 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹541250 हो जाएगा।

₹10 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹82500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹1082500 हो जाएगा।

₹50 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹412500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹5412500 हो जाएगा।

₹1 करोड़ के पीएफ बैलेंस पर: ₹825000 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹10825000 हो जाएगा।

इंट्रेस्ट क्रेडिट होने से पहले अपने ईपीएफओ मेंबर पोर्टल या उमंग (UMANG) ऐप पर जाकर तुरंत चेक कर लें कि आपकी केवाईसी डिटेल्स अपडेटेड हैं या नहीं। केवाईसी डिटेल्स का पुराना या आउटडेटेड होना ही सबसे आम कारण है जिसकी वजह से ब्याज क्रेडिट और क्लेम अटक जाते हैं।

कैसे होता है EPF ब्याज का कैलकुलेशन? जानिए नियम

ईपीएफ (EPF) में ब्याज की गणना मंथली आधार पर की जाती है। लेकिन यह रकम वित्तीय वर्ष के अंत में साल में एक बार आपके खाते में जमा होती है। इसका कैलकुलेशन कुछ इस तरह से किया जाता है-

मंथली क्लोजिंग बैलेंस: ईपीएफओ हर महीने के अंत में आपके खाते के बैलेंस को आधार बनाता है। पिछले वित्त वर्ष के क्लोजिंग बैलेंस पर पूरे साल का ब्याज मिलता है।

मासिक दर: वार्षिक ब्याज दर को 12 से भाग दिया जाता है, जैसे- 8.25% ÷ 12 = 0.6875% प्रति माह

नया योगदान: महीने के दौरान जमा हुई नई राशि को उस महीने के ब्याज में नहीं गिना जाता बल्कि उसे अगले महीने के ओपनिंग बैलेंस में शामिल किया जाता है। साल के दौरान जमा होने वाले नए पीएफ योगदान पर ब्याज, जमा होने के अगले महीने की पहली तारीख से 31 मार्च तक मिलता है।

पैसा निकालने पर नियम: अगर आपने साल के बीच में पीएफ का पैसा निकाला है तो निकाली गई रकम पर ब्याज केवल निकासी वाले महीने से ठीक पहले तक ही मिलता है। उसके बाद उस हिस्से पर ब्याज नहीं मिलता।

राउंड ऑफ और टोटल: सभी 12 महीनों के ब्याज को जोड़कर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में क्रेडिट किया जाता है। आखिरी में EPFO कुल ब्याज की रकम को नजदीकी पूरे रुपये में राउंड ऑफ कर देता है।

इस बार नए CITES सिस्टम की वजह से न सिर्फ ब्याज काफी जल्दी मिल रहा है। बल्कि आगे चलकर क्लेम, अकाउंट ट्रांसफर और दूसरी EPFO सेवाएं भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगी।

मेंबर पासबुक पोर्टल पर कैसे चेक करें अपना बैलेंस? स्टेप बाई स्टेप तरीका

अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज आपके खाते में क्रेडिट हुआ है या नहीं तो सुनिश्चित करें कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट हो। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:-

स्टेप 1: सबसे पहले EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपने UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी (OTP) को दर्ज करके अपनी पहचान सत्यापित करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आप अपना लेटेस्ट ईपीएफ बैलेंस देख सकते हैं और यह भी चेक कर सकते हैं कि FY26 का ब्याज क्रेडिट हुआ है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

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ITR 2026: सैलरी स्लैब के हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम में सीधे बचा सकते हैं करीब 1.5 लाख रुपये का टैक्स! ये रहा पूरा कैलकुलेशन

Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।

इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

क्या कहता है टैक्स का गणित?

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-

धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)

धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये

इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।

विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी

25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।

50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।

75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।

तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?

ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-

  • धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
  • मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
  • धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
  • सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।

अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।

सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी

सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।

इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।

बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

फाइल करने से पहले क्या करें?

रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत खराब रहने की संभावना है। शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 0.79 फीसदी कमजोरी के साथ 24,045 के आसपास ट्रेड कर रह है। यह एक निगेटिव संकेत है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

10 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन भी रिकवरी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में हुई जबरदस्त खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी,दोनों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के बीच बाजार मजबूती के साथ खुला और पूरे सेशन के दौरान बढ़त बनाए रखी। निफ्टी 50 ने इंट्राडे में 24,228.45 का हाई लेवल छुआ। इस तेज़ी में IT शेयरों का अहम योगदान रहा। वहीं,रियल्टी,मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने सेंटीमेंट को और मजबूत किया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 827.57 अंक या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.39 पर और निफ्टी 244.10 अंक या 1.02 प्रतिशत बढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ।

ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट में टेंशन से ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार चला गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर है। इधर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोना $4,100 के नीचे फिसल गया है।

LTM के उम्मीद से बेहतर नतीजे, L&T फाइनेंस का मुनाफा 28% बढ़ा

LTM ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की constant currency यानी CC रेवेन्यू ग्रोथ 0.3% रही है। कंपनी के मुनाफे में 9% से ज्यादा की बढ़त रही है। वहीं मार्जिन में भी सुधार दिखा है। ऑर्डर बुक भी मजबूत रही है। दूसरी ओर L&T Finance की प्रॉफिट और ब्याज से होने वाली कमाई यानी NII 28% से ज्यादा बढ़ी है। रिटेल लोन बुक गाइडेंस से कहीं बेहतर रही है।

डीमार्ट: Q1 मुनाफे में 11.3% का उछाल

पहली तिमाही में एवेन्यू सुपरमाट्स के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में 11 परसेंट और रेवेन्यू में 15 परसेंट की ग्रोथ रही है। हालांकि मार्जिन बिल्कुल फ्लैट रहे हैं। मेट्रो शहरों के स्टोर्स की ग्रोथ में दबाव दिखा है।

आज आएंगे HCL TECH के नतीजे

निफ्टी में आज HCL TECH के नतीजे आएंगे। इसकी कॉन्सटेंट करेंसी में 1.1 परसेंट और डॉलर आय में 1.3% गिरावट का अनुमान है। हालांकि मार्जिन 30 Bps बढ़ने की उम्मीद है।

SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO का साइज घटा

SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO का साइज घटा है। इश्यू का साइज 11700 करोड़ रुपए से घटकर 9813 करोड़ रुपए हुआ है। इधर दिग्गजों को प्री-IPO स्टेक बेचकर SBI ने 1655 करोड़ रुपए जुटाए हैं। SBI के OFS का हिस्सा घटकर 6.30% से 4.89% पर आ गया है।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:50 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 195 अंक यानी 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 24,040.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए निगेटिव संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 1.20 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.20 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.85 फीसदी की तेजी दिख रही है। ताइवान के बाजार में भी 0.82 फीसदी की बढ़त नजर आ रही है। वहीं, कोस्पी करीब 4.75 फीसदी नीचे है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.71 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

शुक्रवार को S&P 500 में 0.42% की बढ़त हुई और यह 7,575.39 के लेवल पर बंद हुआ। यह 2 जून को बने रिकॉर्ड हाई क्लोज़ से अभी भी 0.45% नीचे है। Nasdaq भी 0.29% की बढ़त के साथ यह 26,281.61 के लेवल पर पहुंच गया। जबकि डाओ जोन्स में 0.29% की बढ़त हुई और यह 52,637.01 के स्तर पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुए टकराव से महंगाई का डर बढ़ गया और सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बढ़ गई है। जिसके चलते डॉलर अपनी ज़्यादातर प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 101.17 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में 2 बेसिस पॉइंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ये क्रमशः 4.58% और 4.23% पर पहुंच गए हैं।

एशियन करेंसी

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला कारोबार हुआ,रीजनल बाजारों में सतर्कता का माहौल दिखा। इंडोनेशियाई रुपया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है। जिसमें 0.35% की बढ़त हुई। इसके बाद चीनी रेनमिनबी (+0.22%) और ताइवान डॉलर (+0.19%) का स्थान रहा। दूसरी तरफ,साउथ कोरियन वॉन इस इलाके की सबसे कमजोर करेंसी है,जिसमें 0.34% की गिरावट आई,जबकि जापानी येन 0.25% फिसला है जिससे पता चलता है कि नॉर्थ एशिया की मुख्य करेंसी के मुकाबले डॉलर में हल्की मज़बूती आई है। थाई बात(-0.21%),सिंगापुर डॉलर (-0.17%),मलेशियन रिंगिट (-0.17%) और फिलीपीन पेसो (-0.16%) भी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

10 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)ने बिकवाली के एक दिन बाद ₹2,603 ​​करोड़ के शेयर खरीदे और वे नेट खरीदार बन गए। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार तीसरे सेशन में खरीदारी जारी रखी और ₹2,019 करोड़ का निवेश किया।

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।