Asian Market Today : चिप शेयरों में बिकवाली के चलते कोस्पी 7% गिरा, निक्केई 2% से ज्यादा टूटा, जानें ग्लोबल मार्केट में कहां है हलचल

Asian Market : टेक्नोलॉजी शेयरों के ओवरवैल्यूएशन और मिडिल ईस्ट में चल रहे US-ईरान युद्ध की चिंताओं के बीच गुरुवार को एशियाई मार्केट में गिरावट देखने को मिल रही है। चिप शेयरों में बिकवाली के चलते कोस्पी 7 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा है । निक्केई करीब 2.69 फीसदी की गिरावट के साथ 66,903.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.36 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

ताइवान का बाजार 1.12फीसदी गिरकर 45,160.55 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 1.76 फीसदी की बढ़त के साथ 25,116.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 6.14 फीसदी की गिरावट के साथ 6,825.53 के स्तर पर कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.48 फीसदी की बढ़त के साथ 3,936.40 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

बुधवार को US स्टॉक मार्केट बढ़त के साथ बंद हुआ क्योंकि महंगाई के नरम आंकड़ों ने इन्वेस्टर सेंटिमेंट को बेहतर बनाया।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 150.91 पॉइंट्स या 0.29% बढ़कर 52,659.18 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 28.83 पॉइंट्स या 0.38% बढ़कर 7,572.42 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 162.22 पॉइंट्स या 0.62% बढ़कर 26,269.23 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के शेयर की कीमत 0.33% बढ़ी, AMD के शेयर 3.46% गिरे, इंटेल के शेयर 4.43% फिसले, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 8.02% गिरे, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 2.78% बढ़े, अमेज़न के शेयर 3.02% बढ़े, एप्पल के शेयर 4.01% बढ़े, मेटा के शेयर 3.07% बढ़े, पेपाल के शेयर 16.87% उछले, जबकि टेस्ला के शेयर 0.43% गिरे, और स्पेसएक्स के शेयर 0.60% गिरे।

US-ईरान युद्ध

US ने हमलों की दो नई लहर शुरू की, जिसमें ईरानी मिलिट्री क्षमताओं को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से आज़ादी से गुज़रने वाले जहाजों को धमकाने के लिए किया गया था। इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा जब तक US अपने “आक्रामक कामों” को खत्म नहीं कर देता, साथ ही चेतावनी दी कि दूसरे क्षेत्रीय तेल एक्सपोर्ट रूट भी निशाना बन सकते हैं।

US प्रोड्यूसर प्राइस

US प्रोड्यूसर प्राइस जून में अचानक गिर गए, जो 14 महीनों में सबसे बड़ी गिरावट थी। फ़ाइनल डिमांड के लिए प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स पिछले महीने 0.3% गिरा, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी गिरावट थी, मई में 0.6% की कमी के बाद। रॉयटर्स द्वारा पोल किए गए अर्थशास्त्रियों ने मई में पहले बताई गई 1.1% की बढ़त के बाद PPI में कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया था।

बैंक ऑफ़ कोरिया पॉलिसी

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया के सेंट्रल बैंक ने साढ़े तीन साल में पहली बार अपनी बेंचमार्क ब्याज दर बढ़ाकर 2.75% कर दी। बैंक ऑफ़ कोरिया के सात सदस्यों वाले मॉनेटरी पॉलिसी बोर्ड ने सात दिन के रीपरचेज रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाने के लिए वोट किया।

कच्चे तेल की कीमतें

ईरानी मिलिट्री ठिकानों पर US के नए हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई में रुकावट की आशंका के बाद कच्चे तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.4% बढ़कर $85.28 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर्स 0.5% बढ़कर $80.02 प्रति बैरल हो गया।

आज सोने का रेट

हाल के US डेटा से पता चला कि महंगाई का दबाव कम हो रहा है, इसलिए सोने की कीमतें स्थिर रहीं। स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,056.59 प्रति औंस पर थोड़ी बदली, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% बढ़कर $4,062.50 हो गया। स्पॉट सिल्वर की कीमत 0.3% गिरकर $57.61 प्रति औंस हो गई।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ITR Filing 2026: NPS, PPF या EPF… रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा दिलाएगी?

ITR Filing 2026: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग NPS, PPF और EPF में से किसी एक या एक से ज्यादा स्कीम में निवेश करते हैं। तीनों का मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है। हालांकि, टैक्स छूट, ब्याज और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी मायने रखता है कि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है या नया।

NPS में सबसे ज्यादा टैक्स छूट

अगर आप पुराना टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो NPS सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाली स्कीम बन सकती है।

NPS Tier-I में निवेश पर Section 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। यह सीमा Section 80C का हिस्सा है। इसके अलावा Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी NPS के जरिए कुल ₹2 लाख तक टैक्स डिडक्शन का फायदा लिया जा सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो अपनी तरफ से किए गए निवेश पर छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर आपका नियोक्ता NPS में योगदान देता है, तो Section 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी और DA के 14% तक की रकम पर टैक्स छूट मिल सकती है।

रिटायरमेंट के समय NPS की 60% रकम टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है। बाकी 40% से एन्युटी खरीदनी होती है। उस पर मिलने वाली पेंशन आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।

PPF में पूरा टैक्स-फ्री फायदा

PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी की स्कीम माना जाता है। पुराने टैक्स रिजीम में PPF में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।

अगर आपने नया टैक्स रिजीम चुना है, तो नए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगी।

EPF का फायदा नौकरीपेशा लोगों को

EPF संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।

पुराने टैक्स रिजीम में कर्मचारी का EPF योगदान Section 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है। तय शर्तें पूरी होने पर ब्याज और निकासी भी टैक्स-फ्री रहती है। हालांकि, अगर समय से पहले पैसा निकाला जाता है, तो कुछ मामलों में टैक्स देना पड़ सकता है।

पुराने और नए टैक्स रिजीम में क्या फर्क?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो NPS, PPF और EPF तीनों में टैक्स बचाने का फायदा मिलता है। इनमें भी NPS सबसे आगे है, क्योंकि इसमें ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

वहीं, नए टैक्स रिजीम में Section 80C की छूट नहीं मिलती। इसलिए PPF और EPF में निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा। NPS में भी सिर्फ नियोक्ता के योगदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।

किसे स्कीम को चुनना बेहतर?

अगर आपका लक्ष्य सबसे ज्यादा टैक्स बचाना है, तो पुराने टैक्स रिजीम में NPS बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प है। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का अहम हिस्सा बना रहता है।

हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन तीनों का संतुलित इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

सोना खरीदने वालों के लिए राहत! अब कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेंगी? जानिए 5 बड़े कारण

Gold Price Outlook: सोने में हालिया गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी जरूर आई है। लेकिन 2026 में जनवरी जैसा रिकॉर्ड हाई दोबारा देखने को मिले, इसकी संभावना फिलहाल कम दिख रही है। Fitch Solutions की रिसर्च यूनिट BMI ने 2026 के लिए सोने के औसत भाव का अनुमान 4,600 डॉलर से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड 4026 डॉलर के आसपास है। इस हिसाब से गोल्ड में करीब ज्यादा से ज्यादा 9% उछाल का अनुमान है। रिपोर्ट का कहना है कि मजबूत डॉलर, कम होते वैश्विक तनाव और बेहतर होती अर्थव्यवस्था की वजह से सोने पर दबाव बना रह सकता है।

मजबूत डॉलर से सोना महंगा पड़ता है

जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे मांग पर असर पड़ता है।

BMI का अनुमान है कि डॉलर इंडेक्स 98 से 102 के बीच रह सकता है। अगर यह बढ़कर 105 से 110 तक पहुंचा, तो सोने की तेजी पर ब्रेक लग सकता है।

ब्याज दरें घटने की उम्मीद कम

सोना ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर ज्यादा जाते हैं।

BMI का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve 2026 के बाकी समय में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। दरें 3.75% पर बनी रह सकती हैं। ऐसे में सोने की मांग पर दबाव रह सकता है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था संभल रही है

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक कारोबार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है।

जब अर्थव्यवस्था बेहतर होती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश छोड़कर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ बढ़ते हैं। BMI ने 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 2.4% रहने का अनुमान लगाया है।

कम होते वैश्विक तनाव का भी असर

पिछले एक साल में सोने की तेजी की बड़ी वजह वैश्विक तनाव रहे थे। लेकिन अब हालात पहले से कुछ शांत दिख रहे हैं।

BMI का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से सोने को मिलने वाला ‘सेफ हेवन’ सपोर्ट भी कमजोर पड़ सकता है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है, तो सोने की मांग और घट सकती है।

महंगाई कम रही, तो मांग भी घट सकती है

महंगाई बढ़ने पर लोग अक्सर सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन अगर महंगाई काबू में रहती है, तो सोने की मांग भी कम हो सकती है।

BMI का कहना है कि ऊर्जा की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव घट रहा है। अगर आगे भी यही स्थिति रही, तो सोने को मिलने वाला एक और बड़ा सहारा कमजोर पड़ सकता है।

क्या फिर भी सोना टूट जाएगा?

BMI ऐसा नहीं मानता। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। इससे कीमतों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

हालांकि, अगर भविष्य में Federal Reserve ब्याज दरें घटाता है या डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोना फिर 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर जा सकता है। वहीं, अगर डॉलर और मजबूत हुआ या बॉन्ड यील्ड बढ़ी, तो कीमतें 3,500 डॉलर प्रति औंस तक भी आ सकती हैं।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Home Loan Tips: नया घर खरीदने का है प्लान? होम लोन से जुड़े ये 5 फैसले बचाएंगे आपके लाखों रुपए

Taking A Home Loan: नया घर खरीदना हर किसी के जीवन का सबसे बड़ा सपना और सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता है। होम लोन आमतौर पर किसी भी व्यक्ति की जिंदगी की सबसे बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता होती है, जिसकी ईएमआई (EMI) सालों या दशकों तक साथ चलती है। ऐसे में लोन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले लिए गए फैसले आपकी जेब पर बहुत बड़ा असर डालते हैं।

अक्सर लोग सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि लोन किसी तरह मंजूर हो जाए, लेकिन यह इस लंबी प्रक्रिया का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। जून 2026 में भी बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अलग-अलग ब्याज दरों और शर्तों पर होम लोन दे रही हैं। इसलिए, नया घर लेने से पहले सही प्लानिंग करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं वे 5 बड़े फैसले, जो आपके लाखों रुपये बचा सकते हैं।

1. सिर्फ ब्याज दर न देखें, कुल खर्च का हिसाब लगाएं

होम लोन लेते समय हर किसी की नजर सबसे पहले ब्याज दर पर जाती है। कम ब्याज दर बेशक आकर्षक लगती है, लेकिन यही सब कुछ नहीं है:

छिपे हुए चार्ज: लोन की कुल लागत केवल ब्याज दर से तय नहीं होती, बल्कि इसमें प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, जरूरी इंश्योरेंस और फोरक्लोजर के नियम भी शामिल होते हैं।

पूरी तस्वीर देखें: कई बार थोड़ा अधिक ब्याज दर वाला लोन भी बेहतर साबित होता है, बशर्ते उसके अन्य एडिशनल चार्ज कम हों। इसलिए हमेशा ‘लोन की कुल लागत’ की तुलना करें।

2. उतनी ही रकम का लोन लें जितनी जरूरत हो, न कि जितनी ऑफर की जा रही हो

अक्सर बैंक आपकी रीपेमेंट क्षमता को देखते हुए आपकी जरूरत से ज्यादा का लोन ऑफर या अप्रूव कर देते हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप पूरा का पूरा लोन ले लें। आप जितना बड़ा लोन लेंगे, आपकी मासिक ईएमआई उतनी ही भारी होगी और आपको लोन अवधि के दौरान उतना ही अधिक ब्याज चुकाना पड़ेगा।

समझदारी इसी में है कि आप अपना डाउन पेमेंट बढ़ा दें या अपने बजट के अनुकूल प्रॉपर्टी चुनें ताकि लोन की राशि को कम से कम रखा जा सके।

3. टैक्स बेनेफिट्स का पूरा फायदा उठाएं

होम लोन लेने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसके जरिए आप हर साल टैक्स में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के नियमों के तहत, योग्य बोरोअर्स होम लोन के मूलधन और चुकाए गए ब्याज दोनों पर टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकते हैं।

टैक्स सेविंग का सटीक फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी किस तरह की है, उसका मालिकाना हक किसके पास है और आपने कौन सा टैक्स व्यवस्था चुना है। लोन फाइनल करने से पहले इसे समझने से लॉन्ग टर्म प्लानिंग में मदद मिलती है।

4. जब भी हाथ में अतिरिक्त पैसा हो, पार्ट-प्रीपेमेंट करें

यह जरूरी नहीं है कि अगर आपने 20 साल के लिए होम लोन लिया है, तो आप उसे 20 साल तक ही चलाएं। अधिकांश बैंक और लेंडर्स फ्लोटिंग-रेट लोन पर बिना किसी पेनल्टी के पार्ट-प्रीपेमेंट करने की अनुमति देते हैं।

जब भी आपको सालाना बोनस मिले या किसी अन्य स्रोत से अतिरिक्त आमदनी हो, तो उस लंप-सम राशि को लोन चुकाने में लगा दें। इससे आपका आउटस्टैंडिंग बैलेंस कम होता है और लोन की अवधि के साथ-साथ ब्याज का बोझ उम्मीद से कहीं ज्यादा घट जाता है।

5. अपनी जेब और बजट के हिसाब से लोन की अवधि चुनें

होम लोन की अवधि तय करते समय जल्दबाजी न करें, क्योंकि इसका सीधा संबंध आपके मासिक बजट से होता है। लोन की अवधि जितनी लंबी होगी, आपकी हर महीने की ईएमआई उतनी ही छोटी होगी, लेकिन लोन के पूरे जीवनकाल में आपको कुल ब्याज बहुत अधिक देना पड़ेगा।

लोन की अवधि कम रखने से ईएमआई का बोझ मासिक रूप से बढ़ जाता है, लेकिन आप लोन से जल्दी मुक्त हो जाते हैं और कुल ब्याज का भारी पैसा बचा लेते हैं। अपनी आय और भविष्य के खर्चों को देखते हुए बीच का सही रास्ता चुनें।

Direct vs Regular: एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम, फिर भी एक को मिला ₹50 लाख ज्यादा रिटर्न! समझें एक्सपेंस रेशियो का असली खेल

कुल मिलाकर होम लोन कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप हर दो-चार साल में बदलते रहें। एक बार जब कागजी कार्रवाई पूरी हो जाती है, तो चुकाने का एक लंबा सफर शुरू होता है। इसलिए लोन लेने से पहले थोड़ा अतिरिक्त समय देकर तुलना करना और सोच-समझकर फैसला लेना आपकी रीपेमेंट यात्रा को बेहद आसान और सस्ता बना सकता है।

Direct vs Regular: एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम, फिर भी एक को मिला ₹50 लाख ज्यादा रिटर्न! समझें एक्सपेंस रेशियो का असली खेल

Direct vs Regular Mutual Funds Comparison: म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले हर निवेशक के सामने दो विकल्प होते हैं- डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान। हाल ही में ऑनलाइन ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ग्रो द्वारा रेगुलर म्यूचुअल फंड सेगमेंट में ‘MF Prime’ सर्विस लॉन्च करने के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है। यह नई सर्विस उन निवेशकों के लिए है जो अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने और सही फंड चुनने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह चाहते हैं।

वहीं, जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ का कहना है कि खुद से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए डायरेक्ट प्लान एक ‘नो-ब्रेनर’ यानी सबसे आसान और समझदारी भरा विकल्प है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं देना पड़ता। उन्होंने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म ‘कॉइन’ पर निवेशकों ने कमीशन न देकर अब तक हजारों करोड़ रुपये बचाए हैं। आइए समझते हैं कि डायरेक्ट और रेगुलर फंड्स में क्या अंतर है और कैसे डायरेक्ट प्लान आपके पोर्टफोलियो में ₹50 लाख तक एक्स्ट्रा जोड़ सकता है।

डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?

इन दोनों प्लान्स में सबसे बड़ा और मुख्य अंतर एक्सपेंस रेशियो यानी फंड मैनेजमेंट के खर्च का होता है:

डायरेक्ट प्लान: इसमें निवेशक सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) यानी म्यूचुअल फंड हाउस से यूनिट्स खरीदता है। इसमें बीच में कोई ब्रोकर, एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता, इसलिए कोई कमीशन नहीं कटता। नतीजा यह होता है कि इसका एक्सपेंस रेशियो काफी कम होता है।

रेगुलर प्लान: इसमें निवेशक किसी डिस्ट्रीब्यूटर, ब्रोकर या फाइनेंशियल एडवाइजर के माध्यम से निवेश करता है। फंड हाउस इन मध्यस्थों को कमीशन देता है, जिसे एक्सपेंस रेशियो में जोड़ दिया जाता है। इसलिए, रेगुलर प्लान का खर्च डायरेक्ट प्लान से थोड़ा ज्यादा होता है।

रिटर्न पर असर: अगर दो अलग-अलग निवेशक एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम में एक जितनी रकम और एक जितनी अवधि के लिए निवेश करते हैं, तो डायरेक्ट प्लान वाले निवेशक को कम लागत के कारण रेगुलर प्लान की तुलना में थोड़ा अधिक रिटर्न मिलेगा।

डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?

लॉन्ग टर्म में कैसे जुड़ सकते हैं ₹50 लाख एक्स्ट्रा?

दिखने में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के एक्सपेंस रेशियो में महज 0.50% से 1% तक का ही अंतर नजर आता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज के कारण यह मामूली अंतर एक विशाल रकम में बदल जाता है।

EPF New Rules: बदल गए पीएफ के नियम! ₹1 लाख का एक्स्ट्रा फायदा, विड्रॉल लिमिट और क्लेम पर बड़ा अपडेट; 10 पॉइंट्स में समझें

मान लीजिए कि आप 30 साल के लिए एक बड़ी रकम निवेश करते हैं। रेगुलर प्लान में जहां आपका डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन कटता रहेगा, वहीं डायरेक्ट प्लान में वह बचा हुआ 1% कमीशन हर साल आपके पोर्टफोलियो में दोबारा निवेश होता रहेगा। 30 साल की लंबी अवधि में यही बची हुई रकम कंपाउंड होकर आपके कुल फंड में ₹30 लाख से ₹50 लाख तक का अतिरिक्त मुनाफा जोड़ सकती है।

क्या कम खर्च का मतलब हमेशा बेहतर रिटर्न है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कम एक्सपेंस रेशियो देखकर डायरेक्ट प्लान चुन लेना ही समझदारी नहीं है, क्योंकि निवेश में सबसे बड़ा रोल इन्वेस्टर बिहेवियर का होता है।

म्युचुअल फंड रिसर्च फर्म फंड्सइंडिया के रिसर्च सीनियर मैनेजर जीरल मेहता के मुताबिक, ‘आंकड़े बताते हैं कि कई बार फंड्स जितना रिटर्न कमा कर देते हैं, आम निवेशकों को उतना रिटर्न नहीं मिल पाता। इसकी वजह यह है कि निवेशक बाजार में गिरावट आने पर डरकर अपने पैसे निकाल लेते हैं या फिर बाजार के बहुत ऊंचे होने पर निवेश करते हैं।’

इसे ‘बिहेवियर गैप’ कहा जाता है। यह गैप डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के खर्चों के अंतर से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। एक डायरेक्ट प्लान का निवेशक अगर 30 साल के सफर में सिर्फ दो बार भी गलत समय पर बाजार से बाहर निकलता है, तो वह डायरेक्ट प्लान से मिलने वाले सारे कॉस्ट-बेनिफिट को पूरी तरह बर्बाद कर देता है।

फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका और सही चुनाव

यहीं पर एक रेगुलर प्लान और फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका अहम हो जाती है:

रेगुलर प्लान किसके लिए सही है? – ऐसे निवेशक जिन्हें मार्केट की गहरी समझ नहीं है, जो उतार-उढ़ाव देखकर घबरा जाते हैं और जिन्हें समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा और रीबैलेंसिंग के लिए किसी गाइड की जरूरत होती है, उनके लिए रेगुलर प्लान बेहतर है। यहां थोड़ा ज्यादा एक्सपेंस रेशियो देना अंततः फायदेमंद साबित होता है क्योंकि एडवाइजर आपको गलत फैसले लेने से रोकता है।

डायरेक्ट प्लान किसके लिए सही है? – अगर आप एक ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (DIY) इन्वेस्टर हैं, जो खुद रिसर्च कर सकते हैं, बाजार की गिरावट में शांत रह सकते हैं और बिना किसी बाहरी मदद के अनुशासित रहकर निवेश जारी रख सकते हैं, तो डायरेक्ट प्लान आपके लिए सबसे ज्यादा कॉस्ट-इफेक्टिव और मुनाफेमंद साबित होगा।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

EPS Scheme 2026: अब चुटकियों में क्लेम होगा पेंशन का पैसा! नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, परिवार को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

EPFO EPS Scheme 2026 Rules: नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सबसे बड़ा सहारा इंप्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) होती है। हाल ही में सरकार ने पुराने नियमों को बदलते हुए EPS 2026 को लागू कर दिया है, जो पुराने EPS-95 की जगह लेगा। नए नियमों के तहत अब पेंशन क्लेम की प्रक्रिया को बेहद आसान और समयबद्ध बना दिया गया है।

आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि आप अपना ईपीएस पेंशन क्लेम कैसे कर सकते हैं और इस नई स्कीम में आपके परिवार को कौन से 5 बड़े पेंशन फायदे मिलते हैं।

EPS क्लेम करने से पहले चेक करें अपनी योग्यता

ईपीएस पेंशन का लाभ उठाने के लिए आपका योग्य होना जरूरी है। इसके लिए मुख्य शर्तें ये हैं:

10 साल की सेवा: ईपीएस के तहत मासिक पेंशन पाने के लिए कर्मचारी की न्यूनतम पेंशन योग्य सेवा 10 वर्ष होनी चाहिए।

उम्र सीमा: सामान्य तौर पर सदस्य 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर मासिक पेंशन पाने का हकदार होता है। हालांकि, 10 साल की सेवा पूरी करने वाले सदस्य 50 वर्ष की उम्र से ही ‘अंतिम राहत’ के तौर पर अर्ली पेंशन ले सकते हैं, लेकिन इसमें पेंशन की राशि थोड़ी कम हो जाती है।

विड्रॉल बेनिफिट: जिन कर्मचारियों की सेवा 10 वर्ष से कम है, वे पेंशन के बजाय एकमुश्त विड्रॉल बेनिफिट का दावा कर सकते हैं।

KYC अपडेट रखना है सबसे जरूरी

पेंशन क्लेम में किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए आपका ईपीएफओ रिकॉर्ड बिल्कुल अपडेट होना चाहिए।

आपके ईपीएफ खाते में आधार, बैंक खाता संख्या, पैन और जन्म तिथि बिल्कुल सही होनी चाहिए।

आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट होना चाहिए और वह आधार से लिंक होना चाहिए। अगर आपके दस्तावेजों और ईपीएफ खाते की जानकारियों में थोड़ा भी अंतर होगा, तो आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

सही फॉर्म का चुनाव करें

आप किस तरह का लाभ लेना चाहते हैं, फॉर्म का चुनाव उसी पर निर्भर करता है:

फॉर्म 10D (Form 10D): अगर आप अपनी पात्रता पूरी कर चुके हैं और हर महीने मिलने वाली नियमित पेंशन का दावा करना चाहते हैं, तो आपको फॉर्म 10D भरना होगा।

फॉर्म 10C (Form 10C): अगर आपकी सेवा 10 वर्ष से कम है और आप पेंशन फंड में जमा पूरी रकम एकमुश्त निकालना चाहते हैं, तो आपको फॉर्म 10C भरना होगा।

पेंशन क्लेम की ऑनलाइन प्रक्रिया और नया 20-डे रूल

अब आपको ईपीएस क्लेम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप ईपीएफओ मेंबर पोर्टल पर जाकर अपने यूएएन और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करके सीधे ऑनलाइन क्लेम फॉर्म भर सकते हैं और इसे आधार ओटीपी के जरिए सत्यापित कर सकते हैं।

20 दिनों का सख्त नियम: EPS 2026 के नए नियमों के तहत अब कमिश्नर को आपका पेंशन क्लेम आवेदन मिलने के 20 दिनों के भीतर निपटाना होगा। अगर बिना किसी ठोस वजह के क्लेम सेटल होने में 20 दिनों से ज्यादा की देरी होती है, तो देरी की अवधि के लिए 12% सालाना की दर से ब्याज दिया जाएगा और यह ब्याज संबंधित अधिकारी की सैलरी से भी वसूला जा सकता है।

EPS 2026: परिवार को मिलने वाले 5 बड़े पेंशन बेनिफिट्स

ईपीएस स्कीम का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि यह केवल कर्मचारी को ही नहीं, बल्कि उसके न रहने पर परिवार को भी सामाजिक सुरक्षा देती है। स्कीम के तहत मिलने वाले 5 बड़े फायदे ये हैं:

1. विधवा/विधुर पेंशन: ईपीएफ सदस्य की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी या पति को आजीवन पेंशन मिलती है। यह पेंशन उनके दोबारा शादी करने या मृत्यु होने तक जारी रहती है।

2. बच्चों के लिए पेंशन: सदस्य की मृत्यु के बाद पत्नी के साथ-साथ दो बच्चों को भी (25 वर्ष की आयु पूरी होने तक) मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। यह राशि विधवा पेंशन की 25% के बराबर होती है।

3. अनाथ बच्चों के लिए पेंशन: अगर सदस्य और उसकी पत्नी दोनों की मृत्यु हो जाती है, तो बच्चों को अनाथ पेंशन दी जाती है। यह राशि सामान्य बाल पेंशन से काफी अधिक (विधवा पेंशन की 75% तक) होती है।

4. नॉमिनी पेंशन: अगर सदस्य अविवाहित है या उसका कोई परिवार नहीं है, तो सदस्य द्वारा ई-नॉमिनेशन में फॉर्म 2 के जरिए तय किए गए नामांकित व्यक्ति को आजीवन पेंशन दी जाती है।

5. आश्रित माता-पिता को पेंशन: अगर मृत सदस्य का कोई परिवार, बच्चे या नॉमिनी नहीं है, तो उसके आश्रित माता-पिता (पहले मां और फिर पिता) को पेंशन का लाभ दिया जाता है।

SIP Calculator: सिर्फ ₹2,000 की मंथली SIP से तैयार करें ₹1 करोड़ का फंड! समझें म्यूचुअल फंड कंपाउंडिंग का पूरा गणित

Mutual Fund SIP Calculator: करोड़पति बनने का सपना हर किसी का होता है, लेकिन बहुत से लोग सोचते हैं कि इसके लिए बहुत बड़ी सैलरी या किसी बड़े बिजनेस की जरूरत होती है। हकीकत यह है कि अगर आप सही समय पर और सही अनुशासन के साथ निवेश की शुरुआत करें, तो बहुत मामूली रकम से भी यह जादुई आंकड़ा छुआ जा सकता है।

म्युचुअल फंड में सिर्फ ₹2,000 प्रति महीने की सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करके आप ₹1 करोड़ से ज्यादा का फंड तैयार कर सकते हैं। लेकिन, इस गणित के पीछे एक बड़ा पेंच भी है, जिसे समझे बिना निवेश करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं इसका पूरा गणित और इसके पीछे की हकीकत।

₹2,000 की SIP से ₹1.1 करोड़ बनाने का गणित

म्युचुअल फंड में लॉन्ग टर्म निवेश के लिए 12% का औसत सालाना रिटर्न एक मानक माना जाता है। अगर आप इस औसत रिटर्न के साथ हर महीने मात्र ₹2,000 बचाते हैं, तो देखिए समय के साथ आपकी वेल्थ कैसे बढ़ती है:

₹2,000 की SIP से ₹1.1 करोड़ बनाने का गणित

  • मंथली निवेश: ₹2,000
  • निवेश की अवधि: 35 वर्ष
  • कुल निवेशित रकम: ₹8.4 लाख
  • अनुमानित सालाना रिटर्न: 12%
  • केवल ब्याज से कमाई: ₹1.02 करोड़
  • मैच्योरिटी पर कुल वैल्यू: ₹1.1 करोड़

₹2,000 की SIP से ₹1.1 करोड़ बनाने का गणित

कंपाउंडिंग का जादू: इस पूरे गणित में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आपकी जेब से सिर्फ ₹8.4 लाख रुपये ही जमा होते हैं, लेकिन ब्याज के ऊपर ब्याज यानी कंपाउंडिंग मिलने के कारण आपको ₹1 करोड़ से अधिक का मुनाफा मिल जाता है।

लेकिन… इस जादुई आंकड़े के पीछे ‘कैच’ क्या है?

करोड़पति बनने का यह रास्ता दिखने में जितना आसान लगता है, असल में उतना ही धैर्य मांगता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे दो सबसे बड़े रियल्टी चेक हैं:

1. अनुशासन और 35 साल की लंबी मैराथन

पैसे बनाने का यह सफर कोई स्प्रिंट यानी छोटी दौड़ नहीं बल्कि एक लंबी मैराथन है। ₹2,000 की छोटी रकम को ₹1 करोड़ बनाने के लिए आपको 35 साल तक लगातार बिना रुके निवेश करना होगा। सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कई लोग बाजार में गिरावट आने पर या पर्सनल पैसों की तंगी होने पर अपनी एसआईपी बीच में ही बंद कर देते हैं या पैसे निकाल लेते हैं। ऐसा करने से कंपाउंडिंग का चक्र टूट जाता है और आप लक्ष्य से पीछे रह जाते हैं।

2. रिटर्न की कोई गारंटी नहीं

लॉन्ग टर्म में इक्विटी फंड्स शानदार रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन यह कोई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) नहीं है जिसमें रिटर्न तय हो। बाजार के चक्र के कारण कभी आपको एक साल में भारी मुनाफा मिल सकता है, तो कभी आपका पोर्टफोलियो घाटे में भी जा सकता है। इसलिए आपको उतार-चढ़ाव झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

अगर देर से शुरुआत की, तो क्या करें?

अगर आप 35 साल तक इंतजार नहीं करना चाहते या आपने निवेश की शुरुआत थोड़ी देर से की है, तो फाइनेंशियल प्लानर्स स्टेप-अप एसआईपी (Step-up SIP) की सलाह देते हैं।

इसका मतलब यह है कि आप अपनी मासिक SIP को हमेशा ₹2,000 पर ही फिक्स रखने के बजाय, हर साल अपनी सैलरी या आय बढ़ने के साथ-साथ इसमें 5% या 10% की बढ़ोतरी करते रहें। इससे आप ₹1 करोड़ का यह माइलस्टोन बहुत कम समय में और बहुत आसानी से हासिल कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: Kusumgar की लिस्टिंग; EaseMyTrip, Biocon और Delhivery समेत इन स्टॉक्स पर फोकस

Stocks to Watch: अमेरिका में अनुमान से कम महंगाई बढ़ने की रफ्तार के आंकड़ों ने ब्याज दरें बढ़ने की आशंका कम की तो वैश्विक मार्केट में रौनक छा गई। इन सबके बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में भी ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 27.00 प्वाइंट्स यानी 0.11% की बढ़त के साथ 24,041.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 14 जुलाई को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज सेंसेक्स (Sensex) 561.46 प्वाइंट्स यानी 0.72% की फिसलन के साथ 77,054.94 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 158.95 प्वाइंट्स यानी 0.66% की गिरावट के साथ 24,052.05 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

आज इन कंपनियों के आएंगे कारोबारी नतीजे

एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (ग्रो), एंजेल वन, एमवी फोटोवोल्टिक पावर, फेडबैंक फाइनेंशियल सर्विसेज, जीटीपीएल हैथवे, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक, साई सिल्क (कलामंदिर), मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स, नेटवर्क 18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स, और स्टील स्ट्रिप्स व्हील्स आज कारोबारी नतीजे पेश करेंगी।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

L&T Technology Services Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 13% बढ़कर ₹356.6 करोड़ और रेवेन्यू 11.5% उछलकर ₹2,940.1 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का डॉलर रेवेन्यू 0.4% बढ़कर $30.99 करोड़ पर पहुंचा। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटी 28.1% बढ़कर ₹461.3 करोड़ और ईबीआईटी मार्जिन 200 बीपीएस चढ़कर 15.7% पर पहुंच गया।

Tata Elxsi Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टाटा एलेक्सी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 18.2% बढ़कर ₹170.6 करोड़ और रेवेन्यू 14.5% उछलकर ₹1,021.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Anand Rathi Share and Stock Brokers Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 2.3% बढ़कर ₹23.4 करोड़ और नेट इंटेरेस्ट इनकम 47.6% उछलकर ₹68.4 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी जीरो से ₹20.9 करोड़ के एक्सपेश्नल लॉस में आ गई।

Hero MotoCorp

हीरो मोटोकॉर्प के बोर्ड ने अपनी सहयोगी कंपनी एथर एनर्जी में ₹1,000 करोड़ तक के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है। इस प्रस्तावित निवेश से पहले हीरो मोटोकॉर्प की एथर एनर्जी में 29.48% हिस्सेदारी है।

Belrise Industries

बेलराइज इंडस्ट्रीज ने 14 जुलाई को अपना क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च किया, जिसमें फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹230.79 तय किया गया। कंपनी इस पर 5% तक की छूट भी दे सकती है।

PDS

पीडीएस ने अपने मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस और इंडोनेशिया की कपड़े बनाने वाली दिग्गज कंपनी बुसाना अपैरल ग्रुप के बीच एक रणनीतिक साझेदारी का ऐलान किया है।

Kirloskar Brothers

किर्लोस्कर ब्रदर्स की यूके सब्सिडियरी एसपीपी पम्प्स को साइपेम ऑफशोर कंस्ट्रक्शन SPA से वर्टिकल पंप और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई के लिए 1.17 करोड़ पौंड (₹149.59 करोड़) का ऑर्डर मिला है।

Easy Trip Planners

ईजमाईट्रिप (EaseMyTrip) ने झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग के साथ एक रणनीतिक एमओयू किया है।

Delhivery

आरबीआई ने डेल्हीवरी की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी डेल्हीवरी फाइनेंशियल सर्विसेज को टाइप 2 एनबीएफसी-एनडी के तौर पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) देने की मंजूरी दे दी है।

IOL Chemicals & Pharmaceuticals

चीन के नेशनल मेडिकल प्रोडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन (NMPA) के सेंटर फॉर ड्रग इवैल्यूएशन (CDE) ने आईओएल केमिकल्स के API प्रोडक्ट Clopidogrel Bisulfate को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी इस प्रोडक्ट के लिए कंपनी के पास पहले से मौजूद वैलिड सर्टिफिकेट ऑफ सूटेबिलिटी (CEP) के अलावा है, जिससे इसका रेगुलेटरी पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ और अब चीन के फार्मा मार्केट में इसकी पहुंच बढ़ेगी।

Jain Resource Recycling

जैन रिसोर्सेज रिसाइकलिंग ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 14 जुलाई को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में उसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में भट्टी फटने से एक हादसा हुआ। इस घटना में एक मजदूर की मौत हो गई और कई घायल हो गए, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पतालों में ले जाया गया।

Jammu and Kashmir Bank

जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के 1.02 करोड़ इक्विटी शेयर (0.50% इक्विटी) मेटलाइफ इंटरनेशनल होल्डिंग्स को प्रति शेयर ₹117.20 के भाव पर ₹120.1 करोड़ में बेचने का प्रस्ताव दिया है।

बल्क एंड ब्लॉक डील्स

Biocon

मिलान (Mylan) ने बायोकॉन में अपनी पूरी 5.64% हिस्सेदारी यानी 9.19 करोड़ शेयर ₹3,678.68 करोड़ में प्रति शेयर ₹400 के भाव पर बेच दिए। ये शेयर ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, एबेकस, व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ MF, एक्सिस म्यूचुअल फंड, SBI म्यूचुअल फंड, फ्रैंकलिन टेम्पलटन MF, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, मिरे एसेट MF, मोतीलाल ओसवाल AMC, सिटीग्रुप, ईस्टस्प्रिंग इन्वेस्टमेंट्स, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली, सोसिएट जेनरल और वैनगार्ड इमर्जिंग मार्केट्स ने खरीदे।

SG Mart

पब्लिक सेक्टर की पेंशन इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने हर शेयर ₹649.98 के भाव पर एसजी मार्ट के 10 लाख शेयर (0.79% हिस्सेदारी) ₹64.99 करोड़ और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने प्रति शेयर ₹650 के भाव पर कंपनी के 11.23 लाख शेयर (0.89% हिस्सेदारी) ₹72.99 करोड़ में खरीदे। वहीं दूसरी तरफ एचआर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग ने SG मार्ट के 22 लाख शेयर (1.74% हिस्सेदारी) ₹143 करोड़ में प्रति शेयर ₹650.02 के भाव पर बेचे

Radiowalla Network

आशीष कचोलिया के निवेश वाली बंगाल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट ने रेडियोवाला के 1.44 लाख शेयर (2.04% हिस्सेदारी) ₹35.28 लाख में प्रति शेयर ₹24.50 के भाव पर बेचे। मार्च 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार बंगाल फाइनेंस के पास 2.22% हिस्सेदारी थी तो आशीष कचोलिया की कंपनी में 3.24% हिस्सेदारी थी। वहीं अमृतांशु अग्रवाल ने रेडियोवाला के 1.47 लाख शेयर (2.08% हिस्सेदारी) ₹36.12 लाख में प्रति शेयर ₹24.54 के भाव पर खरीद लिए।

लिस्टिंग

आज कुसुमगर के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

आज टीसीएस, ऑटोमोबाइल कॉरपोरेशन ऑफ गोवा, भारत बिजली, हेरिटेज फूड्स, केफिन टेक, सेंट गोबैन सेकुरिट इंडिया के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो एनर्जी इंफ्रा ट्रस्ट के इनकम डिस्ट्रीब्यूशन और ऑर्बिट एक्सपोर्ट्स और रेडियोवाला नेटवर्क के बायबैक की एक्स-डेट है।

F&O Ban

आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: तीन दिनों से टूट रहा सोना, दिल्ली से पटना तक 24 से 18 कैरट बिक रहा इस भाव पर

Gold Rate Today in India: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य हमलों ने पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। जियो-पॉलिटकल टेंशन में उछाल पर कच्चा तेल उबला तो इसने गोल्ड पर दबाव डाला और आज लगातार तीसरे दिन इसकी चमक फीकी पड़ी। एक दिन की स्थिरता के बाद राजधानी दिल्ली में लगातार तीसरे दिन गोल्ड सस्ता हुआ है। इन तीन दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹1540 और 22 कैरट वाला ₹1410 सस्ता हुआ है। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में 10 ग्राम का 24 कैरट और 22 कैरट वाला गोल्ड फिलहाल ₹10 सस्ता हुआ है। चांदी की बात करें तो जियो-पॉलिटिकल टेंशन के साथ-साथ इंडस्ट्रीज की तरफ से डिमांड में सुस्ती ने इस पर भी दबाव डाला है और इसकी चमक फीकी की है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। आज एक किलो चांदी ₹100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 
दिल्ली₹1,42,940₹1,31,040₹1,07,240
मुंबई₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
कोलकाता₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
चेन्नई₹1,43,450₹1,31,490₹1,09,690
बेंगलुरू₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
हैदराबाद₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
लखनऊ₹1,42,940₹1,31,040₹1,07,240
पटना₹1,42,840₹1,30,940₹1,07,140
जयपुर₹1,42,940₹1,31,040₹1,07,240
अहमदाबाद₹1,42,840₹1,30,940₹1,07,140

तीन दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। तीन दिनों की स्थिरता से पहले एक किलो चांदी 11 जुलाई को ₹5 हजार सस्ती हुई थी तो 10 जुलाई को ₹5 हजार महंगी और ₹9 जुलाई को ₹10 हजार सस्ती हुई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी यह इसी भाव पर बिक रही है यानी देश के चारों बड़े महानगरों में चांदी समान भाव पर बिक रही है।

इस कारण है दबाव

एलकेपी सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतिन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसे ऐसे एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।