Market Outlook : बाजार में दिखी जोरदार तेजी, जानिए 12 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद सेंसेक्स 879 अंक यानी 1.23%) बढ़कर 72,472 पर और निफ्टी 289 अंक यानी 1.30% बढ़कर 22,520 पर बंद हुआ। बाज़ार का रुख पॉजिटिव रहा। 2,344 शेयरों में बढ़त हुई जबकि 1,686 शेयरों में गिरावट आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो IT सेक्टर में सबसे ज़्यादा 3.02% की तेज़ी रही, जबकि FMCG में 2.25% और PSU बैंकों में 1.62% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में 1.46% और स्मॉलकैप शेयरों में 0.55% की बढ़त हुई, वहीं इंडिया VIX में 6.09% की गिरावट आई। TCS, ITC और अपोलो हॉस्पिटल्स में से हर एक में 4% से ज़्यादा की बढ़त हुई और ये निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद, वैल्यू बाइंग और शॉर्ट कवरिंग के दम पर घरेलू इक्विटी मार्केट में राहत भरी रैली देखने को मिली। Q2 अर्निंग्स सीज़न की मज़बूत शुरुआत और AI-आधारित रेवेन्यू के मौकों पर बढ़ते भरोसे के कारण IT शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के मिड-टर्म चुनावों से पहले होने की संभावना कम होने के संकेतों से भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुईं। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और बाज़ार के सेंटीमेंट में सुधार हुआ। हालांकि, लगातार हो रही FII की बिकवाली और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी, रिकवरी की उम्मीदों पर दबाव बनाए हुए है। RBI के ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) के रुख के बाद, निवेशक अब ब्याज दरों की चाल के बारे में और संकेतों के लिए सोमवार को आने वाले घरेलू CPI डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं। आगे चलकर, Q2 के नतीजे (जिसके सालाना आधार पर अच्छा रहने का अनुमान है) बाज़ार में आई तेज़ी के बने रहने के लिहाज़ से अहम होंगे।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि आज शुक्रवार को निफ्टी में अच्छी रिकवरी दिखी और इसमें 1% से ज़्यादा की बढ़त हुई। हालांकि, यह 22,600 के आसपास बने 50EMA के लेवल को पार नहीं कर पाया। अगर इंडेक्स 22,600–22,650 के रेजिस्टेंस ज़ोन के ऊपर जाता है तो शॉर्ट-टर्म ट्रेंड में सुधार हो सकता है और रिकवरी जारी रह सकती है। लेकिन, अगर यह इस ज़ोन को पार नहीं कर पाता है, तो बाज़ार में फिर से कमज़ोरी आ सकती है। निचले स्तर पर इसके लिए 22,450, 22,350 और 22,100 पर सपोर्ट हैं।

360 ONE वेल्थ की प्रेसिडेंट अनु जैन ने एक अहम टेक्निकल गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा कि मार्केट अपने 200 वीक के मूविंग एवरेज (जो एक लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है) से नीचे आ गया है। इससे पता चलता है कि एडजस्टमेंट का दौर अभी और चल सकता है। या तो कीमतें और गिर सकती हैं या फिर लंबे समय तक कंसोलिडेशन का दौर रह सकता है। इससे पता चलता है कि अभी और मुश्किल दौर आ सकता है। टेक्निकल इंडीकेटर बताते हैं कि बाजार में अभी और गिरावट की गुंजाइश है।

बजाज ऑल्ट्स की ग्रुप प्रेसिडेंट (इन्वेस्टमेंट्स) और मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO लक्ष्मी अय्यर ने हाल में आई गिरावट को मार्केट में बनी अस्वाभाविक तेजी ज़रूरी सफ़ाई बताते हुए कहा है कि मोमेंटम इंडिकेटर कमज़ोर हुए हैं और मार्केट के मज़बूत स्थिति में आने से पहले निवेशकों को और उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। अय्यर ने मौजूदा दौर की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा क पहले ज़हर मिलेगा, लेकिन आपको अमृत का इंतज़ार करना होगा। यानी असल वैल्यू सामने आने से पहले उथल-पुथल का दौर देखने को मिलेगा।

अभी हर जगह वैल्यूएशन की स्थिति सही नहीं है। अय्यर ने कहा कि वैल्यूएशन अब धीरे-धीरे सही स्तर की ओर बढ़ रहे हैं और बाज़ार के कुछ हिस्सों में ये लंबे समय के औसत से नीचे आ गए हैं। लार्ज-कैप की वैल्यूएशन ठीक लग रही है, लेकिन कई सालों की ज़बरदस्त री-रेटिंग के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप में अभी भी बहुत ज़्यादा राहत की गुंजाइश नहीं दिख रही है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड कैप स्टॉक लार्जकैप के मुकाबले 55-60% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं और स्मॉल-कैप में भी लगभग इतना ही प्रीमियम मिल रहा है। फिर भी, उनका कहना है कि कई मिड साइज़ कंपनियों की अर्निंग में मज़बूती बनी हुई है, इसलिए यह बिना सोचे-समझे खरीदारी करने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने वालों का बाज़ार है। यह स्टॉक पिकर्स) का बाज़ार है।

नुवामा एसेट मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट और हेड, अंशु कपूर की राय है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए भारत अभी भी पसंदीदा मार्केट नहीं है, क्योंकि दूसरे मार्केट में तुलनात्मक रूप से बेहतर मौके मिल रहे हैं। उनका कहना यह नहीं है कि भारत का स्ट्रक्चरल आकर्षण खत्म हो गया है, बल्कि यह है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव की वजह से निकट भविष्य में कुछ और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price: MCX पर सोने-चांदी में बढ़त, क्या आज की तेजी हालिया गिरावट को करेगी खत्म, एक्सपर्ट्स से जानें अब क्या करें निवेश

Gold Silver Price: घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई तेजी, US ट्रेजरी यील्ड में कमी और कमजोर डॉलर से कीमतों को सपोर्ट मिला है । हालांकि, महंगाई की चिंताएं और US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर नजरिया निवेशकों के लिए अहम बातें बनी हुई हैं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,690 या 1.13% बढ़कर ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹3,626 या 1.64% बढ़कर ₹2.24 लाख प्रति किलोग्राम हो गया।

PTI के अनुसार, इंटरनेशनल बाजारों में गोल्ड फ्यूचर्स 1.43% बढ़कर $4,191.51 प्रति औंस हो गया, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 2.16% बढ़कर $60.44 प्रति औंस हो गया।

कीमतों में तेजी क्यों?

शुक्रवार को US ट्रेजरी यील्ड में कमी और डॉलर में गिरावट से कीमती धातुओं को सहारा मिला। सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो यह कम आकर्षक होता है और जब यील्ड कम होती है तो यह अधिक आकर्षक हो जाता है।

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि US में 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की नीलामी से लॉन्ग-टर्म यील्ड ऊंचे स्तरों से नीचे आ गई, जिससे सोने की कीमतों को राहत मिली।

उन्होंने ईरान पर संभावित हमले को टालने और बातचीत को प्रोडक्टिव बताने के बारे में US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों में नरमी का भी जिक्र किया। तेल की कीमतें बुलियन मार्केट के लिए मायने रखती हैं क्योंकि एनर्जी की लागत महंगाई की उम्मीदों और ब्याज दरों के फैसलों पर असर डाल सकती है।

निवेश की मांग से भी अतिरिक्त सहारा मिला है। नार्वेकर ने कहा कि इस हफ्ते ग्लोबल गोल्ड ETF होल्डिंग्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई, जिससे उनकी बढ़त लगातार 12वें हफ्ते भी जारी रह सकती है। सेंट्रल बैंक की खरीदारी से भी सहारा मिला है।

क्या सोना अपनी रिकवरी बनाए पाएगा?

सोना $4,100 प्रति औंस के स्तर से सुधरा है, जिसे नार्वेकर ने एक अहम सपोर्ट लेवल बताया था। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महंगाई की चिंताएं बनी रहती हैं, तो यह तेजी कम समय के लिए हो सकती है। उन्होंने $4,220 प्रति औंस (जो घरेलू स्तर पर लगभग ₹1,52,000 के बराबर है) के आसपास तुरंत रेजिस्टेंस और $4,300 प्रति औंस (या लगभग ₹1,55,400) के पास मज़बूत रेजिस्टेंस की पहचान की।

VT मार्केट्स के सीनियर मार्केट एनालिस्ट (APAC) जस्टिन खू ने कहा कि सितंबर की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग के मिनट्स से पता चला है कि 18 में से 16 अधिकारियों को उम्मीद थी कि 2026 में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होगी, ताकि महंगाई को फेडरल रिज़र्व के 2% के लक्ष्य से लगातार ऊपर जाने से रोका जा सके।

हालांकि, खू ने कहा कि उम्मीद से कम पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई और कमज़ोर रोज़गार डेटा ने अक्टूबर में तुरंत ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को कम कर दिया है। 14 अक्टूबर को आने वाली सितंबर की US कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट से महंगाई और फेड के अगले कदम के बारे में और संकेत मिलेंगे।

ब्याज दरें बढ़ने से सोने पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि इससे बिना रिटर्न देने वाली एसेट को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसलिए, निवेशक महंगाई के डेटा और बॉन्ड यील्ड पर नज़र रखेंगे ताकि यह पता चल सके कि शुक्रवार की रिकवरी जारी रह सकती है या नहीं।

चांदी में निवेश के लिए किन बातों का रखें ध्यान

शुक्रवार को चांदी की कीमतों में भी तेज़ी आई, लेकिन इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा हो सकता है क्योंकि यह मेटल निवेश की मांग और औद्योगिक इस्तेमाल, दोनों से प्रभावित होता है।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने ₹2.19 लाख–₹2.20 लाख प्रति किलोग्राम को एक अहम सपोर्ट ज़ोन और ₹2.24 लाख को चांदी के रिकवर करने के लिए पहला ज़रूरी लेवल बताया। शुक्रवार की तेज़ी ने कॉन्ट्रैक्ट को उस लेवल से ऊपर पहुंचा दिया।

गुरुवार (8 अक्टूबर) को कीमतों में इंट्राडे के दौरान जो तेज़ी से उतार-चढ़ाव देखे गए, वे भी अस्थिरता के जोखिम को दिखाते हैं। रिकवरी के दौरान चांदी में तेज़ी से उछाल आ सकता है, लेकिन निवेशकों को उतनी ही तेज़ी से गिरावट की संभावना को भी ध्यान में रखना चाहिए।

रुपये का घरेलू कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत में सोने और चांदी की कीमतें न केवल अंतरराष्ट्रीय दरों पर, बल्कि रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट पर भी निर्भर करती हैं। रुपया कमज़ोर होने से डॉलर में कीमत वाली चीज़ों को आयात करने की लागत बढ़ जाती है और इससे घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि रुपये की कमजोरी से इम्पोर्ट की गई चीज़ों की घरेलू लागत बढ़ रही है। 9 अक्टूबर के उनके मार्केट अपडेट में यह भी बताया गया कि डॉलर की मजबूती में कमी कीमती धातुओं के लिए मददगार साबित हो रही है, जबकि तेल बाज़ार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?

सिर्फ़ शुक्रवार की बढ़त से यह साबित नहीं होता कि बुलियन (सोने-चांदी) में हालिया कमजोरी खत्म हो गई है। सोने के लिए, अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बने रहना और नार्वेकर द्वारा बताए गए रेजिस्टेंस लेवल को पार करना ज़रूरी होगा। चांदी में निवेश करने वालों को इसके सपोर्ट ज़ोन और कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव पर खास ध्यान देना चाहिए।

जो लोग योजना बनाकर फिजिकल सोना खरीद रहे हैं, वे एक ही ट्रेडिंग सेशन के आधार पर फैसला लेने के बजाय समय के साथ-साथ खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं। जो निवेशक गोल्ड और सिल्वर ETF का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें अपने पोर्टफोलियो एलोकेशन, निवेश की अवधि और उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता का आकलन करना चाहिए।

Silver Price Today: ₹2700 और महंगी हुई चांदी, खरीदारी से पहले जानें आपके अपने शहर का ताजा भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: एशिया बाजारों में गिरावट, AI पर खर्च को लेकर बढ़ी चिंता, निक्केई 1% टूटा,

Asian Market Today: एशियाई शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। इसकी वजह वॉल स्ट्रीट पर हुई बिकवाली रही। जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खर्च में तेज़ी के लंबे समय तक बने रहने को लेकर नए शक के कारण हुई थी। शुरुआती कारोबार में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.1% नीचे आ गया। जापान में, निक्केई (Nikkei) बाजार खुलने पर 1% से ज़्यादा गिरा, लेकिन बाद में नुकसान कम हुआ और यह 0.58% नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि टोपिक्स (Topix) में लगभग 0.15% की गिरावट थी। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.1% की मामूली बढ़त हुई।

दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार बंद रहने के कारण इस सत्र में शामिल नहीं हुए। कोरियाई अल्फाबेट के निर्माण की याद में मनाए जाने वाले ‘हंगुल दिवस’ के कारण कोस्पी बंद था, जबकि ताइवान अपने राष्ट्रीय दिवस के कारण बंद था।

जापानी येन 0.1% कमजोर होकर 158.06 प्रति डॉलर पर आ गया, और ऑफशोर युआन 6.7034 पर लगभग स्थिर रहा।

गुरुवार की बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों पर पड़ा। नैस्डैक 100 में 1.4% की गिरावट आई, जो सात हफ्तों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी, जबकि अमेरिकी चिपमेकर्स का इंडेक्स 3.4% गिर गया। S&P 500 में 0.5% की गिरावट आई। हालांकि, नुकसान सीमित रहा। S&P 500 की दो-तिहाई से ज़्यादा कंपनियों के शेयरों में बढ़त हुई, स्मॉल-कैप शेयरों में कोई खास हलचल नहीं हुई, और निवेशकों ने डिफेंसिव सेक्टर (सुरक्षित माने जाने वाले सेक्टर) का रुख किया।

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के कारण यह गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि OpenAI का सालाना रेवेन्यू उसके पहले बताए गए स्तर से 20 अरब डॉलर कम है, और ChatGPT बनाने वाली कंपनी लगभग 50 अरब डॉलर के रेवेन्यू की राह पर है।

गुरुवार को यूएस लेबर सचिव के अनुसार यूएस लेबर डिपॉर्टमेंट ने कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला देते हुए माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को अपने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से निलंबित कर दिया। विभाग ने यह भी कहा कि वह कॉग्निजेंट, इंफोसिस, कैपजेमिनी, विप्रो, टीसीएस और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों से नए आवेदन न तो स्वीकार करेगा और न ही उन पर कोई कार्रवाई करेगा।

आईटी इंडस्ट्री की संस्था नैसकॉम ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने H-1B वीज़ा पर अपनी निर्भरता कम कर दी है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर लोगों को नौकरी पर रखने का काम लगातार बढ़ाया है। संस्था ने यह भी कहा कि बहुत कम कर्मचारी PERM प्रक्रिया के ज़रिए H-1B स्टेटस से स्थायी निवासी (परमानेंट रेजिडेंसी) बनते हैं।

गुरुवार को US ट्रेजरी बॉन्ड में तेज़ी आई, क्योंकि 30 साल के बॉन्ड की नीलामी में मज़बूत मांग के कारण लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड (लंबे समय के बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) उन ऊंचे स्तरों से नीचे आ गई, जो दो दशकों से ज़्यादा समय में नहीं देखे गए थे। यह तेज़ी तब और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वह ईरान पर दोबारा हमला नहीं करेंगे।

इसके बावजूद, लंबे समय के डेट (कर्ज़) में महीनों से जारी बिकवाली की मुख्य वजह यह डर रहा है कि ईरान युद्ध से ऊर्जा की कीमतें और महंगाई ज़्यादा बनी रहेगी, साथ ही सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, US फेडरल रिज़र्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि महंगाई को काबू में करने के लिए शायद ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की ज़रूरत होगी।

ट्रंप के वादे से ईरान के साथ नए टकराव का डर कम हुआ, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.5% गिरकर लगभग $103.80 प्रति बैरल पर आ गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 0.5% की गिरावट आई और यह लगभग $91.05 पर आ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹3600 उछला, चांदी 3000 रुपये फिसली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 8 अक्टूबर को सोने में जोरदार तेजी देखने को मिली। यह 3,600 रुपये के उछाल के साथ 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 7 अक्टूबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमतों में 8 अक्टूबर को बड़ी गिरावट देखने को मिली।

फेस्टिव सीजन से पहले सोने में बढ़ी दिलचस्पी

इससे पहले लगातार दो सत्रों में सोने में गिरावट आई थी। ट्रेडर्स का कहना है कि फेस्टिवल सीजन से पहले सोने में रिटेलर्स और ज्वेलर्स की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों को मजबूती मिली। ट्रेडर्स ने बताया कि ज्वेलर्स आम तौर पर फेस्टिव सीजन से पहले रॉ मैटेरियल के रूप में सोने का स्टॉक बढ़ाते हैं। त्योहारों के दौरान सोने की मांग बढ़ती है।

डॉलर में मजबूती और महंगे क्रूड से सोने में ज्यादा तेजी नहीं

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि सोने की कीमतें दो महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई थीं। अब इसमें रिकवरी दिखी है। हालांकि, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और डॉलर में मजबूती से सोने में तेजी सीमित बनी हुई है। चांदी की चाल सोने से उल्टी रही। यह 3000 रुपये गिरकर 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी, चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 0.32 फीसदी की तेजी दिखी। यह 4,125 डॉलर प्रति औंस था। सिल्वर करीब एक फीसदी गिरकर 59.15 डॉलर प्रति औंस था। आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में स्थिरता रही। इससे पहले के सत्र में यह 9 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल पर 

उन्होंने कहा कि सोने में तेजी दिखी है, लेकिन क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर बनी हुई हैं। खबरों के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने पेंटागन को ईरानी ठिकानों पर हमलों के विकल्पों पर विचार करने को कहा है। ये हमले अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शंस से पहले हो सकते हैं। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है।

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इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।

Market View : बाजार का ढ़ांचा कमजोर, एक्सपर्ट्स जानिए अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Market View : ग्लोबल मार्केट में बिकवाली का असर भारतीय इक्विटी इंडेक्स पर भी पड़ा। US बॉन्ड यील्ड में तेजी और इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर $102 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के कारण बेंचमार्क निफ्टी 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गया। FII द्वारा घरेलू शेयरों की भारी बिकवाली और RBI द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका से भी लोकल इन्वेस्टर्स में घबराहट है,क्योंकि ऊंची ब्याज दरों से लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा। इसके चलते 8 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई और निफ्टी 22,250 के स्तर से नीचे आ गया। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64% गिरकर 22,231.80 पर आ गया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि घरेलू बाजार में आज भारी बिकवाली का दौर जारी रहा। RBI की सख़्त पॉलिसी का असर उन सेक्टर्स पर पड़ा जो ब्याज दरों में बदलाव के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म वैल्यूएशन मल्टीपल्स में बदलाव आया। FII की लगातार निकासी,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की गिरती कीमत ने इस दबाव को और बढ़ा दिया।

इसके अलावा,कच्चे तेल की कीमतों में वोलैटिलिटी,जो लगातार $100 के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं,देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। अच्छे हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा से मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का पता चलता है, जबकि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना इक्विटी वैल्यूएशन को दबाए हुए है।

मार्जिन से जुड़ी चिंताओं और टैक्टिकल प्रॉफ़िट बुकिंग के बीच मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सुस्ती रही। आगे बाज़ार का फोकस अब Q2 अर्निंग्स सीज़न पर है,जहां डिमांड की स्थिरता और इनपुट कॉस्ट को संभालने के बारे में मैनेजमेंट की कमेंट्री शॉर्ट-टर्म के लिए बाजार की दिशा तय करेंगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP-रिसर्च,अजीत मिश्रा का कहना है कि गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और बाजार लगभग 1.5 फीसदी नीचे आ गया। कमजोर शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स ज्यादातर समय दबाव में रहे और अंत में दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुए। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही।

सेक्टर के लिहाज से देखें तो बिकवाली हर तरफ थी। मेटल, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई,जबकि IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जिसने कुछ हद तक मजबूती दिखाई।

ब्रॉडर मार्केट में और भी तेज बिकवाली हुई इससे मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों इंडेक्स 2% से ज्यादा गिरे। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में जोखिम लेने से बचा जा रहा है और बाजार का दायरा (मार्केट ब्रेड्थ) कमजोर हो रहा है।

घरेलू और ग्लोबल मैक्रो चिंताओं का बाजार के सेंटीमेंट पर भारी असर रहा। RBI के रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.50% करने और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) की ओर रुख करने के फैसले से वित्तीय हालात के और सख्त होने की चिंता बढ़ गई है। साथ ही,भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत $102–103 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गई। जबकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3% के आसपास ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। TCS के तिमाही नतीजों से पहले सावधानी का माहौल और IT सेक्टर में घबराहट ने भी बाजार पर असर डाला।

तकनीकी तौर पर,मामूली सुधार (पुलबैक) के बाद निफ़्टी ने एक बार फिर अप्रैल 2026 के निचले स्तर 22,182.55 को टेस्ट किया है जो मौजूदा ढांचे में और कमजोरी का संकेत है। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो बाजार 21,700–22,000 के जोन की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ़,22,400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है और उसके बाद 22,700–22,800 अगला बड़ा रेजिस्टेंस हो सकता है। मौजूदा गिरावट के दौर में इंडेक्स के नए निचले स्तर बनाने और बाजार के दायरे में तेजी से गिरावट के कारण,निकट भविष्य के लिए सतर्क रहने की ज़रूरत है।

बाजार में अपनी पोजीशन उसी हिसाब से बनानी चाहिए और हेज्ड अप्रोच (जोखिम कम करने वाला तरीका) अपनाना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि अर्निंग सीजन के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स में गिरावट जारी रही और यह पिछले सेशन के निचले स्तर से भी नीचे चला गया। पूरे सेशन के दौरान मंदड़ियों का दबदबा बना रहा और तेजड़ियों को कोई राहत नहीं मिली।

चाहे वह आवरली चार्ट हो या वीकली चार्ट, इंडेक्स क्रिटिकल मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। यह लगातार बनी कमजोरी का संकेत है। हालात निराशाजनक लग रहे हैं और यह माहौल कुछ और दिनों तक ऐसा ही बना रह सकता है।

RSI बेयरिश क्रॉसओवर में है और ओवरसोल्ड जोन में बना हुआ है। निचले स्तर पर निफ्टी के लिए 22180 पर सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स में और गिरावट आ सकती है और यह 22000 के स्तर तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 22350 पर रेजिस्टेंस है।

 

Market Outlook : कमजोर नोट पर बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 9 सितंबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI MPC: तेजी से बढ़ रही ग्रोथ, आरबीआई की सख्ती, शेयर दबाव में, अब आगे क्या?

केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की और इसे 5.5% कर दिया। मार्केट को इसने हैरान नहीं किया, क्योंकि इसकी उम्मीद पहले से ही थी। हालांकि कुछ और बातें ऐसी रही, जिसने मार्केट का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरबीआई ने ग्रोथ का अनुमान तेजी से बढ़ाया तो दूसरी तरफ महंगाई का भी अनुमान बढ़ाया है और साथ ही अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया तो महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% किया।

मार्केट में मिला-जुला रुझान

आरबीआई के रुझान से मार्केट को मिला-जुला संकेत मिला। जीडीपी अपग्रेड निश्चित रूप से कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी बात है लेकिन महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से यह संकेत मिला कि दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है। आरबीआई गवर्नर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं।

वैसे मार्केट पहले से ही कमजोर है। पिछले महीने सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरकर 22,620 तक आ गया था, जोकि मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी तो सेंसेक्स 5.8% गिरकर 72,480 पर आ गया। साथ ही अक्टूबर में एंट्री करते ही इसने लगातार आठ हफ्तों की लगातार गिरावट दिखाई, जो 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। आरबीआई के 5 अगस्त के पॉलिसी पॉज के बाद इंडेक्स लगभग 7.5% गिर चुका है।

अब आगे क्या

आरबीआई ने अपने आउटलुक से यह संकेत दिया है कि इसका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन पर है। वैसे भी जून 2026 तिमाही में भारतीय इकॉनमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी जोकि आरबीआई के पहले के अनुमान 7% से अधिक रही। अब आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनियों की मांग और रेवेन्यू की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

अब सबसे बड़ी परीक्षा सितंबर तिमाही के नतीजे को लेकर है। निफ्टी 50 की कंपनियों से रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना करीब 20% के ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि तेल और कच्चे माल की लागत में उछाल से रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पूरा फायदा प्रॉफिट में नहीं बदल सकता है और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 100-150 बीपीएस की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में असली सवाल ये रहेगा कि कंपनियां बढ़ती लागत को कितना सोख सकती है और ईबीआईटीडीए मार्जिन कितना बचा सकती हैं। सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे पर तो मार्केट की नजर रहेगी ही लेकिन इसके अलावा आगे यह भी देखना होगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री क्या रहती है, क्या कंपनियों के पास प्राइसिंग पावर है, और वित्त वर्ष 2027 में डिमांड कैसी रहती है।

फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।

कंक्लूजन

बाजार का समीकरण बदल चुका है। 7.1% GDP ग्रोथ से कमाई का निचला स्तर तय होता है तो महंगाई की 5.2% की रफ्तार और 5.5% रेपो रेट से वैल्यूएशन रीरेटिंग की ऊपरी सीमा तय होती है। सितंबर में निफ्टी पहले ही लगभग 6% और अगस्त की पॉलिसी के बाद से लगभग 8% गिर चुका है, इसलिए अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कंपनी की कमाई उम्मीदों से बेहतर हो सकती है। फिलहाल आरबीआई ने सस्ते कर्ज की संभावना खत्म कर दी है तो इक्विटी को बड़े बदलाव की जरूरत है। खास बात ये है कि भारत का ग्रोथ इंजन बना हुआ है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कई वर्षों के हाई लेवल के करीब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मार्जिन पर दबाव से कंपनियों की मजबूत कमाई के बावजूद शेयरों का जोश फीका हो सकता है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI Repo Rate Hike : आरबीआई गवर्नर ने कहा, ब्याज दरों में आगे भी कटौती की संभावना नहीं, इसमें अभी और बढ़ोतरी की संभावना

RBI Repo Rate Hike : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का अगला नीतिगत कदम या तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकता है या फिर दरों को बरकरार रखा जा सकता है। यह बदलाव महंगाई तथा अन्य आर्थिक स्थितियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

यह गाइडेंस तब आया है जब मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 5.25% से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि निकट भविष्य में “रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है” और आगे की पॉलिसी में हालात के हिसाब से या तो रेट बढ़ाए जाएंगे या फिर उन्हें जस का तस रखा जाएगा।

अक्टूबर में रेपो रेट में की गई यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद RBI की ओर से रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। उस समय MPC ने पॉलिसी रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था।

रुख में इस बदलाव का समर्थन MPC के छह में से चार सदस्यों ने किया, जबकि दो सदस्यों ने ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'(सोच-समझकर सख्ती) की ओर बढ़ने के खिलाफ वोट दिया।

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद, स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी रेट को 5.25% पर एडजस्ट किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है।

महंगाई बढ़ने का डर रहा हावी

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक अब वैसा अनुकूल नहीं है जैसा पिछले साल था। कीमतों के दबाव को देखते हुए MPC मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत का आकलन कर रही है।

RBI ने FY27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि FY27 की अगली तीन तिमाहियों में CPI महंगाई (रिटेल महंगाई) औसतन 5.8% रहने की उम्मीद है।

RBI गवर्नर ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी को सप्लाई शॉक के ‘सेकंड-राउंड’ असर (यानी सप्लाई में अचानक बदलाव से होने वाले बाद के असर) पर नजर रखनी होगी, भले ही शुरुआती सप्लाई-साइड महंगाई के असर से इन्हें अलग करना मुश्किल हो।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी आंशिक रूप से ऐसे ‘सेकंड-राउंड’ असर को रोककर काम करती है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का असर इकॉनमी तक पहुंचने में समय लगता है।

दरें बढ़ाने का फैसला कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में फिर से आई अस्थिरता के माहौल में लिया गया है। बैठक से पहले, एनर्जी की बढ़ती लागत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो गई थीं। अगस्त में रिटेल महंगाई दर 4.82% रही, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से ज्यादा है।

संजय मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव ने ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट को कमजोर किया है और फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया और कहा कि ग्लोबल महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका है। उन्होंने कहा कि सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और जारी संघर्षों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

 

 

RBI Policy : RBI ने वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमान भी बढ़े

Asian Market Today: एशिया बाजार पर हल्का दबाव, क्रूड और मजबूत बॉन्ड यील्ड के बावजूद अमेरिकी बाजारों में दिखी तेजी

Asian Market Today: एशिया में भी हल्की कमजोरी देखने को मिल रही है। इधर ऊंचे कच्चे तेल और मजबूत बॉन्ड यील्ड के बावजूद अमेरिकी बाजारों में तेजी दिखी। NASDAQ और S&P रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ। जापान के बाजार में इंट्राडे गिरावट ने दक्षिण कोरिया में हुई बढ़त के असर को कम कर दिया, और यह क्षेत्र वॉल स्ट्रीट पर हुई रिकॉर्ड-तोड़ तेज़ी का अनुसरण करने में विफल रहा।

शुरुआती कारोबार में MSCI के एशिया-पैसिफिक शेयरों के इंडेक्स में 0.1% की गिरावट आई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) लगभग 0.33% बढ़ा, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.31% गिरा और टॉपिक्स (Topix) में 0.043% की गिरावट आई। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

भारत में (GIFT निफ्टी – जो यह बताता है कि देश का शेयर बाज़ार दिन के लिए कैसे खुलेगा) ने गिरावट के साथ (लाल निशान में) शुरुआत का संकेत दिया।

करेंसी की बात करें तो, जापानी येन 0.2% कमजोर होकर 158.42 प्रति डॉलर पर आ गया, जबकि ऑफशोर युआन 6.7032 पर स्थिर रहा।

वॉल स्ट्रीट ने रात भर में माहौल तय किया, क्योंकि S&P 500 और नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) दोनों ही ऑल-टाइम हाई (अब तक के उच्चतम स्तर) पर बंद हुए। यह सब अमेरिकी अर्निंग्स सीज़न (कंपनियों के नतीजों का दौर) के बीच हुआ, जो अगले हफ़्ते शुरू होने वाला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शेयरों में बढ़त ने इस तेज़ी को आगे बढ़ाया, और Nvidia की मार्केट वैल्यू $6 ट्रिलियन के करीब पहुंच गई।

इसके अलावा, जुलाई और सितंबर के बीच ताइवान के Taiex इंडेक्स ने कोस्पी (Kospi) को 23 प्रतिशत अंकों से पीछे छोड़ दिया, जो सदी की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ा अंतर था। मार्च 2025 के बाद पहली बार ताइवानी कंपनियों ने कोरियाई प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अपने अर्निंग्स अनुमानों (कमाई के अनुमानों) को तेज़ी से अपग्रेड किया है।

इस बीच, टेक्नोलॉजी शेयरों पर भी नज़र बनी हुई है, क्योंकि फाइनेंशियल टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि SpaceX, Nvidia चिप्स खरीदने के लिए $40 बिलियन जुटाना चाहती है।

ग्लोबल शेयर भी रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब बने हुए थे, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद थी कि कंपनियाँ ऊंची ब्याज दरों और ऊर्जा लागत का सामना कर पाएंगी।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि कुछ ही आर्थिक डेटा जारी होने वाले थे, इसलिए ट्रेडर्स की नज़र अर्निंग्स सीज़न पर थी। वे इस बात के सबूत तलाश रहे थे कि AI पर टेक दिग्गज जो अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, उससे बेहतर मुनाफ़ा हो रहा है या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्रो ट्रेडर्स तेल की ऊंची कीमतों, बॉन्ड यील्ड में कई सालों की सबसे ज़्यादा बढ़त और करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव पर भी नज़र रखे हुए थे।

एशियाई बाज़ार में शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड 0.8% बढ़कर $101 प्रति बैरल के पार पहुँच गया, क्योंकि ट्रेडर्स ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की ज़्यादा सप्लाई और जहाज़ों पर ईरानी हमलों में बढ़ोतरी के बीच तुलना की। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.7% बढ़कर $90.07 प्रति बैरल हो गया।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI MPC Meeting: फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ सकता है रेपो रेट, महंगाई बनी बड़ी वजह

RBI MPC Meeting: RBI की 21 लगातार MPC बैठकों में ब्याज दर नहीं बढ़ी है। अब 7 अक्टूबर की बैठक में तस्वीर बदल सकती है। माना जा रहा है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा।

फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा, जब RBI रेपो रेट बढ़ाएगा। हालांकि, बाजार में इसकी उम्मीद पहले से बनी हुई है। इसलिए असली नजर इस बात पर होगी कि RBI आगे कितनी बढ़ोतरी के संकेत देता है।

आगे कितनी बढ़ सकती हैं दरें?

Moneycontrol के 19 एक्सपर्ट्स के पोल में 15 ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। वहीं, चार एक्सपर्ट्स को दरों में कोई बदलाव की उम्मीद है।

IDFC First Bank की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक, फरवरी तक रेपो रेट में कुल करीब 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में पहली बढ़ोतरी के बाद RBI का अगला इशारा बाजार के लिए ज्यादा अहम होगा।

महंगाई बढ़ने की चिंता

महंगाई RBI के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। पिछली समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा था।

अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी। अब कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से महंगाई पर और दबाव आ सकता है।

GDP ग्रोथ मजबूत, लेकिन आगे चुनौती

भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। इससे RBI को महंगाई पर फोकस करने की थोड़ी गुंजाइश मिलती है।

अधिकांश एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि RBI FY27 के लिए 6.7% GDP ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखेगा। हालांकि, महंगा कच्चा तेल और दुनिया में बढ़ती ब्याज दरें दूसरी छमाही में परेशानी बढ़ा सकती हैं।

बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा पैसा

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसा भी RBI के लिए बड़ा मुद्दा है। सितंबर में लिक्विडिटी सरप्लस करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

अब यह घटकर करीब 4-6 लाख करोड़ रुपये रह गया है। 6 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में करीब 5.03 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी थी। RBI इसे कम करने के लिए OMO बिक्री और VRRR जैसे कदम उठा रहा है।

कच्चा तेल और रुपया भी चिंता

RBI के सामने बाहरी मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड हाल में करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी 5.2% तक चली गई। रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। वहीं, भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.2% के ऊपर पहुंच गई है।

यानी इस बार बाजार सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी नहीं देखेगा। असली सवाल यह होगा कि RBI आगे कितनी दरें बढ़ा सकता है और महंगाई, ग्रोथ और रुपये के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

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RBI क्या 7 अक्तूबर को बढ़ाएगा इंटरेस्ट रेट, क्या होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन होंगे महंगा ?

आरबीआई 7 अक्तूबर यानी बुधवार को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू हुई। इसके नतीजे बुधवार को आएंगे। सवाल है कि क्या केंद्रीय बैंक इसमें रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान करेगा?

रेपो रेट एक चौथाई-फीसदी बढ़ सकता है

इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि RBI 7 अक्तूबर को रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी एक चौथाई-फीसदी बढ़ा सकता है। इसकी वजह यह है कि रिटेल इनफ्लेशन लगातार बीते कई महीनों से केंद्रीय बैंक के 4 फीसदी के तय लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है। मध्यपूर्व में अमेरिका-ईरान की लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। इसने इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ाया है।

फेडरल रिजर्व ने बढ़ाया था इंटरेस्ट रेट

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में ग्लोबल चीफ इकोनॉमिस्ट्स पॉल ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि आरबीआई उन केंद्रीय बैंकों की लिस्ट में शामिल है सकता है, जिन्होंने महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, उनका मानना है कि दुनिया में इंटरेस्ट रेट में होने वाली वृद्धि सीमित रहेगी।

दिसंबर में भी बढ़ सकता है रेपो रेट 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डी के जोशी का भी मानना है कि आरबीआई अक्तूबर की पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि फिर दिसंबर की पॉलिसी में भी इंटरेस्ट रेट बढ़ने की काफी उम्मीद है। उसके बाद इंटरेस्ट रेट में वृद्धि इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगी।

अगले साल आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी वृद्धि

जोशी ने कहा, “हमारा मानना है कि इंटरेस्ट रेट में वृद्धि दिसंबर में भी होगी। उसके बाद इसके बढ़ने की कम उम्मीद है। हालांकि, यह इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगा।” उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में आक्रामक वृद्धि का साइकिल शुरू करने की जगह नापतौल कर इस बारे में फैसला लेगा।

अगस्त की पॉलिसी के बाद हुए हैं तीन बड़े बदलाव 

उन्होंने अगस्त की आरबीआई की पॉलिसी के बाद हुए तीन बदलावों का जिक्र किया। मानसून की बारिश कम हुई है और असमान रही है। पश्चिम एशिया में स्थिति गंभीर हुई है। ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। इस बीच. पहली तिमाही में देश में जीडीपी की ग्रोथ आरबीआई की उम्मीद से ज्यादा रही है।

इनफ्लेशन पर दबाव जारी रहने के आसार 

उपर्युक्त वजहों से इनफ्लेशन पर दबाव बना रह सकता है। अमेरिका और भारत के इंटरेस्ट रेट के बीच घटता फर्क दूसरी ब़ड़ी वजह है, जिसका असर पॉलिसी से जुड़े आरबीआई के फैसले पर पड़ सकता है। जोशी ने कहा कि 10 साल की भारत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच का फर्क घटकर 190 बेसिस प्वाइंट्स रह गया है, जो तीन साल पहले करीब 450 बेसिस प्वाइंट्स था। फेडरल रिजर्व भी इस महीने के आखिर में पॉलिसी का ऐलान करेगा। वह लगातार दूसरी बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

रिटेल इनफ्लेशन अगस्त में 4.82 फीसदी पहुंचा

भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट की फाउंडिंग और मैनेजिंग ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमण ने कहा कि अगस्त में भारत में रिटेल इनफ्लेशन बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गया। यह जुलाई में 4.45 फीसदी था। हालांकि, इंडस्ट्रियल आउटपुट जुलाई के 6.7 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 8 फीसदी रहा। ऐसे में दोनों के बीच बैलेंस जरूरी है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी का फोकस मैक्रोइकोनॉमिक स्टैबिलिटी पर होगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक की कोशिश कर्ज तक आसान पहुंच बनाए रखने पर भी होगी।