रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। यह करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। इन बैलिस्टिक मिसाइलों का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।

₹30 हजार से शुरू किया सैंडविच का ठेला, आज ₹25 लाख महीना! फेल इंटरनेट कैफे के बाद ऐसे बदली अभिषेक की किस्मत

कारोबार में पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो बहुत से लोग दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी कुछ अलग है। करीब 15 साल पहले शुरू किया गया उनका इंटरनेट कैफे एक साल के अंदर बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय महज ₹30 हजार के लोन से एक छोटे से सैंडविच कार्ट की शुरुआत की। आज उनका यही छोटा कारोबार सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

पहला बिजनेस एक साल में ही हो गया बंद

अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने शुरुआत इंटरनेट कैफे से की। उस दौर में इंटरनेट कैफे एक अच्छा बिजनेस आइडिया माना जाता था, लेकिन उनका कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला।

करीब एक साल बाद ही उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश की असफलता के बावजूद अभिषेक ने कारोबार करने का विचार नहीं छोड़ा। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस चुना, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके।

₹30 हजार जुटाए और बदल दी दिशा

पहले कारोबार के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस की तरफ रुख किया। उन्होंने ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया। खास बात यह थी कि उनके पास सैंडविच बनाने की कोई बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने YouTube की मदद से अलग-अलग सैंडविच की रेसिपी सीखीं और फिर उन्हें अपने छोटे से कार्ट पर आजमाना शुरू किया। यानी दूसरी शुरुआत बड़े निवेश या बड़े सेटअप से नहीं, बल्कि सीमित पैसे और खुद सीखने की कोशिश से हुई।

धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा स्वाद

शुरुआत में यह एक छोटा सा सैंडविच कार्ट था, लेकिन समय के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोगों को सैंडविच पसंद आने लगे और धीरे-धीरे इस छोटे कारोबार ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अभिषेक के बिजनेस की कहानी में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट पर बनी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके सैंडविच का स्वाद लेने पहुंचने लगे।

अब 30-50 मिनट तक इंतजार करते हैं ग्राहक

कभी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटे कार्ट से हुई थी, आज उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राहक सैंडविच के लिए इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, कई ग्राहकों को ऑर्डर के लिए करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई।

हर दिन सैकड़ों सैंडविच की बिक्री

सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich अब हर दिन लगभग 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है। वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि शनिवार और रविवार जैसे दिनों में 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं। इसी पोस्ट के अनुसार, इस छोटे से फूड बिजनेस का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच चुका है।

असफलता से शुरुआत, लेकिन वहीं नहीं रुके

अभिषेक साहू की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं है। असली बात यह है कि पहला बिजनेस बंद होने के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।

इंटरनेट कैफे के अनुभव के बाद उन्होंने कम पैसे वाला बिजनेस चुना, YouTube से स्किल सीखी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बनाया। यही छोटा कदम आगे चलकर बड़े कारोबार में बदलता गया।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

प्रथम ने X पर अभिषेक की कहानी शेयर करते हुए उनके सफर को उजागर किया। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी की सबसे खास बात ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं, बल्कि पहली असफलता के बाद सिर्फ ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत करने का फैसला है। दूसरे यूजर ने इसे एक शानदार ‘कमबैक’ बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Women’s Champions Trophy: श्रीलंका से छिनी गई चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी, जानें ICC ने क्यों लिया ये फैसला

श्रीलंका क्रिकेट को बड़ा झटका लगा है। 2027 में पहली बार होने वाली ICC विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी अब श्रीलंका के हाथ से निकल गई है। अब 14 से 28 फरवरी के बीच होने वाला छह टीमों का यह टूर्नामेंट अब श्रीलंका में आयोजित नहीं किया जाएगा। श्रीलंका क्रिकेट में सरकारी दखल को लेकर ICC ने आपत्ति जताई है। श्रीलंका से मेजबानी छिनने के बाद अभी तक ICC ने नए मेजबान देश के नाम का ऐलान नहीं किया है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर ICC की अगली बोर्ड बैठक में चर्चा के बाद कोई फैसला लिया जा सकता है।

इससे पहले भी छिनी गई है मेजबानी

मेजबानी छिनने से श्रीलंकाई क्रिकेट के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ये फैसला ऐसे समय में आया जब श्रीलंका क्रिकेट और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के बीच प्रशासन और कामकाज को लेकर विवाद अभी सुलझा नहीं है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को 2023-24 में कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया था। उस दौरान बोर्ड के कामकाज में राजनीतिक दखल का मुद्दा सामने आया था। बोर्ड और सरकार के बीच भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों को लेकर लंबे समय तक विवाद चलता रहा। इस विवाद का असर क्रिकेट आयोजनों पर भी पड़ा और 2024 में होने वाले पुरुष अंडर-19 वर्ल्ड कप की मेजबानी श्रीलंका से लेकर दक्षिण अफ्रीका को दे दी गई थी।

क्यों लिया फैसला

इस साल अप्रैल में श्रीलंकाई सरकार ने क्रिकेट बोर्ड के कामकाज को अस्थायी रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया था। सरकार ने क्रिकेट से जुड़े विवादों को खत्म करने और बोर्ड में जरूरी बदलाव करने के लिए एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी बनाने की बात कही थी। वहीं ICC का कहना है कि श्रीलंका क्रिकेट में चुनी हुई व्यवस्था वापस आनी चाहिए और बोर्ड के चुनाव कराए जाने चाहिए। इसी वजह से सरकार की बनाई कमेटी के सदस्यों को ICC की बोर्ड बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है।

श्रीलंका नहीं करेगी मेजबानी

ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सचिव प्रकाश शैफ्टर ने ‘संडे टाइम्स’ से बातचीत में इस खबर की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट की मेजबानी अब श्रीलंका में नहीं होगी। शैफ्टर के मुताबिक, इसे किसी दूसरे देश में आयोजित किया जाएगा, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि टूर्नामेंट की मेजबानी कौन सा देश करेगा। ये फैसला उस वक्त लिया गया है, जब श्रीलंका क्रिकेट अभी भी ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी की निगरानी में चल रहा है।

क्या है आईसीसी के नियम

ICC के नियमों के मुताबिक, किसी भी सदस्य क्रिकेट बोर्ड को सरकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर काम करना जरूरी है। श्रीलंका क्रिकेट का मौजूदा ढांचा इसी नियम को लेकर ICC के साथ विवाद की वजह बना हुआ है। श्रीलंका से टूर्नामेंट की मेजबानी छिनने के बाद अब उसके खुद इस प्रतियोगिता में खेलने पर भी सवाल उठ सकते हैं। पहले तय नियमों के मुताबिक मेजबान देश के अलावा रैंकिंग में ऊपर रहने वाली टीमों को टूर्नामेंट में जगह मिलनी थी। मौजूदा रैंकिंग में श्रीलंका छठे नंबर पर है। हालांकि, ICC ने अभी यह नहीं बताया है कि मेजबान बदलने के बाद टीमों के चयन के नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं।

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

Share Market Rally: रक्षाबंधन को 358 प्वाइंट्स चढ़ा Sensex, इन 4 वजहों से Nifty भी मजबूत

Share Market Rally: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक और आईटी सेक्टर में खरीदारी के मजबूत रुझानों पर सवार घरेलू स्टॉक मार्केट में भी जोश आ गया। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 358 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी चढ़कर 24150 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:08 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 302.45 प्वाइंट्स यानी 0.39% की बढ़त के साथ 77,236.04 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 61.00 प्वाइंट्स यानी 0.25% के उछाल के साथ 24,151.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 357.86 प्वाइंट्स उछलकर 77,291.45 और निफ्टी भी 75.40 प्वाइंट्स चढ़कर 24,166.25 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: ये है वजह

IT Sector से मजबूत सपोर्ट

मार्केट को आज आईटी सेक्टर से शानदार सपोर्ट मिला है। इसका निफ्टी इंडेक्स करीब 3% उछल पड़ा। इसे दक्षिण कोरिया के टेकहैवी इंडेक्स कोस्पी की तेज गिरावट से सपोर्ट मिला है। आमतौर पर एआई से जुड़े स्टॉक्स में गिरावट से आईटी स्टॉक्स को सपोर्ट मिलता है। हालांकि दूसरी तरफ बैंकिंग शेयर मार्केट पर दबाव डाल रहे हैं लेकिन सरकारी बैंकों और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में गिरावट हल्की ही है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में नरमी से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 1.08% की गिरावट के साथ 10.95 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

एशियाई बाजारों में रौनक

घरेलू मार्केट को आज अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक से सपोर्ट मिला है। ताइवान के ताइवान वेटेड और जापान के निक्केई 225 में करीब 1-1% की बढ़त है तो सिंगापुर के स्ट्रैट टाइम्स और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में भी अच्छी बढ़त है। वहीं दक्षिण कोरिया को कोस्पी में 1% से अधिक तो थाईलैंड के सेट कंपोजिट में आधे फीसदी की गिरावट है।

Nifty का टेक्निकल आउटलुक

ब्रोकरेज फर्म बजाज ब्रोकिंग के मुताबिक निफ्टी 24,000-24,350 की रेंज में रह सकता है, जब तक कि यह 24,360 के ऊपर बंद न हो जाए। इस स्तर के ऊपर जाने यानी ब्रेकआउट से रिकवरी 24,550-24,700 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट-टर्म में इसे 24,000-23,800 के लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है।

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Orry: ‘अमृता सिंह की वजह से मैं ट्रॉमा में चला गया था’, सारा अली खान से दोस्ती पर ऑरी ने कही ये बड़ी बात

Orry: ओरहान अवत्रामणि, जिन्हें ‘ओरी’ के नाम से भी जाना जाता है, ने सारा अली खान की मां अमृता सिंह के साथ हुई अनबन के बारे में बात की है। इस अनुभव को अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर बताया है। उन्होंने कहा कि अमृता ने उन्हें “बहुत परेशान” किया और “सच में बहुत बुरा हाल कर दिया था।” ओरी ने यह भी कहा कि इस अनुभव का असर सारा के साथ उनके रिश्ते पर भी पड़ा और इसने उन्हें और मजबूत बनाया।

पिंकविला से बात करते हुए ओरी ने कहा, “2021 में अमृता अली खान ने मुझे बहुत परेशान किया था। यह बहुत ज़्यादा था। मुझे नहीं लगता कि मैं पहले कभी ऐसी किसी चीज़ से गुजरा हूं। यह मेरी जिंदगी का बहुत मुश्किल और बुरा दौर था, उन्होंने सच में मुझे बहुत बुरी हालत में डाल दिया था।”

ओरी ने आगे कहा, “जब मैं उस स्थिति से बाहर निकला, तो लोग कहते थे कि तुम इससे और मजबूत होकर निकलोगे। मुझे लगता था, ‘मुझे इतनी ज्यादा मजबूती की जरूरत नहीं है।’ भला जिंदगी में इतनी मजबूती की किसे जरूरत होती है? फिर मुझे एहसास हुआ कि अब मुझ पर किसी चीज का कोई असर नहीं होता। मतलब, कोई भी चीज मुझे सच में दुखी नहीं करती।”

अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, ओरी ने कहा कि जिस “ट्रॉमा” (मानसिक सदमे) से वह गुजरे, उसने उन्हें और मजबूत बनाया और लोगों की नजर में रहने के दौरान मिली आलोचनाओं का सामना करने में मदद की। उन्होंने बताया, “मुझे लगता है कि उस समय जिस ट्रॉमा से मैं गुज़रा, उसने मुझे इतना मजबूत बना दिया कि जब मैं एक पब्लिक फिगर बना, तो शुरुआत में मुझे जो नफरत मिली, उसने मुझ पर कोई असर नहीं डाला।”

उन्होंने आगे कहा कि भले ही लोग उनकी “बेइज़्ज़ती” करते थे, लेकिन ऐसी आलोचनाओं का उन पर अब कोई भावनात्मक असर नहीं पड़ता। जब उनसे पूछा गया कि उनके और अमृता के बीच असल में क्या हुआ था, तो ओरी ने कहा, “सच कहूं तो, बुरे लोगों के साथ बुरी चीजें ही होती हैं। मैं बस इतना ही कहूंगा।”

ऑरी ने यह नहीं बताया कि अमृता सिंह के साथ उनके कथित झगड़े की असल वजह क्या थी, लेकिन उन्होंने उस अनुभव को बहुत ज़्यादा तकलीफ़देह बताया है। जनवरी 2026 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सारा अली खान के साथ दोस्ती करने का मतलब होगा उस “ट्रॉमा” को नजरअंदाज करना या उसे ठीक मान लेना, जो उनकी मां ने उन्हें दिया था। ओरी ने यह भी कहा कि अगर अमृता माफी मांग लें, तो वह इस मामले को भूलने के लिए तैयार हैं। ऑरी अभी ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आ रहे हैं।

Kuku kohli Aruna Irani Relationship: ‘कुकू कोहली ने नहीं बताया था कि वे शादीशुदा हैं’, जब अरुणा ईरानी ने अपने दिवंगत पति के साथ पहली मुलाकात किया था खुलासा

Kuku kohli Aruna Irani Relationship: अरुणा ईरानी और दिवंगत फिल्म निर्माता कुकू कोहली की प्रेम कहानी और उनकी शादी उन दिनों अक्सर सुर्खियों में रहती थी। कुकू कोहली की पहली पत्नी के जिंदा रहते अरुणा ईरानी इस हादसे के बारे में ज्यादा बात नहीं करती थीं। चार साल पहले, अरुणा ईरानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे उनकी मुलाकात कुकू कोहली से एक फिल्म सेट पर हुई और कैसे उनका रिश्ता पनपा।

अरुणा ईरानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया- हमारी मुलाकात एक फिल्म के दौरान हुई, जिसमें हम दोनों साथ काम कर रहे थे। उस फिल्म के दौरान वह सभी अन्य अभिनेताओं को तब तक इंतजार करवाते थे, जब तक धर्मेंद्र जी सेट पर नहीं आ जाते। तभी शूटिंग शुरू होती थी।

मुझे उन पर बहुत गुस्सा आता था क्योंकि मैं उस समय कुछ अन्य फिल्मों में भी काम कर रही थी। इसलिए हमारा रिश्ता प्यार और नफरत से भरा हुआ था। मैं उन पर बहुत गुस्सा होती थी और वह मुझे दिलासा देते थे। उस चक्कर में कैसे लफड़ा हो गया समझ नहीं आया ।

अरुणा ईरानी को यह जानकर काफी हैरानी हुई कि कुकू पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “जब हम मिले थे, तो उन्होंने मुझे यह भी नहीं बताया था कि वह शादीशुदा हैं, और इसी वजह से मुझे उनसे प्यार हो गया। इसलिए हमारे रिश्ते के बारे में बात करना सही नहीं लगा, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी पत्नी और बेटियां थीं। अब मैं इस बारे में इसलिए बात कर रही हूं, क्योंकि उनकी पहली पत्नी का कुछ महीने पहले निधन हो गया है।”

अरुणा और कुकू की शादी 1990 में हुई थी, जब वह 40 साल की थीं

फिल्मफेयर के साथ एक पुराने इंटरव्यू में, अरुणा ने यह भी बताया था कि उनके और कुकू कोहली के बच्चे क्यों नहीं हुए। “आज जब मैं अपने भतीजे-भतीजियों और भांजे-भांजियों को देखती हूं, तो मुझे खुशी होती है कि मेरे बच्चे नहीं हैं। अगर कोई मेहमान घर आता और मेरा बच्चा उनका स्वागत न करता या सोफे पर बेपरवाह पड़ा रहता – जैसा कि आजकल के बच्चे करते हैं – तो मुझे बुरा लगता।

उनका ऐसा रवैया होता है, ‘तो क्या हुआ?’ भगवान का शुक्र है। मेरे एक करीबी दोस्त, डॉ. अजय कोठारी ने मुझे सही बात समझने और फैसला लेने में मदद की। उन्होंने कहा, ‘शादी करना ठीक है, आपको साथ की जरूरत है, लेकिन बच्चे और आपके बीच उम्र का फ़ासला इतना ज़्यादा होगा कि उसे संभालना मुश्किल होगा।’ मुझे लगता है कि वह सही थे। मैं और मेरा बच्चा एक-दूसरे के साथ घुटन महसूस करते।

1991 की फ़िल्म ‘फूल और कांटे’ के लिए मशहूर अनुभवी फ़िल्म निर्माता कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके दोस्त अशोक पंडित ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अशोक पंडित ने PTI को बताया, “उन्हें बेचैनी महसूस हो रही थी, इसलिए कल उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम करीब 4:30 बजे हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया।” कोहली के परिवार में उनकी पत्नी अभिनेत्री अरुणा ईरानी और उनकी पहली पत्नी रीटा कोहली से हुई दो बेटियां, पूजा और करिश्मा हैं।

Bill Gates AI Warning: AI की रफ्तार देख सन्न रह गए बिल गेट्स! नौकरियों को लेकर दे दी ये बड़ी चेतावनी

Bill Gates AI Warning: माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दी है। एक इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि AI की तरक्की जिस तेज रफ्तार से हो रही है, वह उनकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा आगे निकल चुकी है। उन्होंने आगाह किया कि अगर सरकारों और टेक कंपनियों ने समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए, तो दुनिया को बड़े पैमाने पर नौकरियों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

‘मैं खुद हैरान हूं’: कोडिंग में AI ने दी मात

‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में दशकों का अनुभव रखने वाले बिल गेट्स ने स्वीकार किया कि Anthropic के Claude जैसे AI टूल्स की क्षमताओं ने उन्हें पूरी तरह चौंका दिया है।

गेट्स ने कहा, ‘यह विचार कि अब ये AI टूल्स कई मामलों में मुझसे भी बेहतर काम कर रहे हैं, यह मेरे लिए हैरान कर देने वाला है।’

गेट्स के मुताबिक, AI क्रांति पुरानी औद्योगिक या डिजिटल क्रांतियों से बिल्कुल अलग है। पहले की तकनीकों ने पुरानी नौकरियां खत्म करके नए रोजगार पैदा किए थे, लेकिन AI जिस पैमाने पर इंसानों को रिप्लेस कर रहा है, उससे दूसरे क्षेत्रों में नई नौकरियां बच पाना मुश्किल होगा।

टेक कंपनियां क्यों छुपा रही हैं AI का असली खतरा?

गेट्स ने टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनियां भारी फंड जुटाने के चक्कर में इसके खतरों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘प्राइवेट में AI समझने वाले लोग बेहद डरे हुए हैं। लेकिन कोई खुलकर नहीं बोल रहा क्योंकि इससे अगली ट्रिलियन डॉलर की फंडिंग रुकने का डर है।’

कंपनियां बिना किसी सुरक्षा मानकों के सिर्फ इस उम्मीद में आगे बढ़ रही हैं कि AI का अच्छा पहलू इसके बुरे असर को ढक लेगा।

गेट्स ने क्या सुझाया AI का समाधान?

AI के बढ़ते खतरे से आम जनता और नौकरियों को बचाने के लिए बिल गेट्स ने दो प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं:

AI Tax: कंपनियों द्वारा इंसानों की जगह AI का इस्तेमाल करने पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। इस टैक्स से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल नौकरियां गंवाने वाले लोगों की मदद के लिए किया जाए।

‘Human Reserved’ जॉब्स: कुछ संवेदनशील पेशों (जैसे- केयरगिविंग, नर्सिंग और व्यक्तिगत देखभाल) को पूरी तरह ‘ह्यूमन रिजर्व्ड’ घोषित किया जाए, ताकि इन क्षेत्रों में AI के प्रवेश पर बैन रहे और इंसानी नौकरियां सुरक्षित रहें।

जैविक हथियारों का बड़ा खतरा

नौकरियों के अलावा, बिल गेट्स ने एडवांस AI से उत्पन्न होने वाले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर भी चिंता जताई। गेट्स ने चेतावनी दी कि अगर AI का इस्तेमाल नए मॉलिक्यूल्स या खतरनाक बायोलॉजिकल हथियार बनाने में किया गया, तो यह तबाही ला सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त समझौते और मैंडेटरी रिव्यू की मांग की है, ताकि AI का दुरुपयोग बायो-टेररिज्म के लिए न हो सके।

बिल गेट्स का मानना है कि AI सुरक्षा का मुद्दा अब वैश्विक स्वास्थ्य जितना ही गंभीर हो चुका है और वे इसे दुनिया भर के नेताओं के सामने उठाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि इनोवेशन हमेशा सही हो ऐसा जरूरी नहीं, और फिलहाल AI जिस दिशा में जा रहा है, वह एक बड़ी चेतावनी है।

Asian Market Today: एशिया बाजारों में मिला-जुला कारोबार, बॉन्ड यील्ड में नरमी, निक्केई, कोस्पी में बढ़त

Asian Market Today: बुधवार को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है।  वॉल स्ट्रीट पर रात भर हुई बढ़त के बाद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में कमी से बाज़ारों को सहारा मिला।  Nvidia Corp. की अर्निंग्स रिपोर्ट से पहले निवेशकों ने सावधानी बरती, जिससे US इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में थोड़ी गिरावट आई। इस रिपोर्ट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में भरोसे का पता चलने की उम्मीद है।

वहीं, निक्केई करीब 0.56 फीसदी की बढ़त के  साथ 66,228.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.27 फीसदी की  कमजोरी दिखा रहा है।  ताइवान का बाजार 0.31 फीसदी  चढ़कर 45,308.25 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.99 फीसदी की बढ़त के साथ 25,764.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 0.87 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.50 फीसदी की बढ़त के साथ 3,909.04 के स्तर पर दिख रहा है।

एशियाई बाज़ारों का रुख निवेशकों की मिली-जुली सोच को दिखाता है। जहां कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने बाज़ारों को सहारा दिया, वहीं अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता का असर निवेशकों के मूड पर अब भी बना हुआ है।

वॉल स्ट्रीट पर रात भर अमेरिकी शेयर बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुआ। AI की दिग्गज कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के नतीजों से पहले टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी ने बाजार को ऊपर उठाने में मदद की।

US ट्रेजरी यील्ड में गिरावट

US ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। US के 10-साल और 30-साल के बॉन्ड की यील्ड लगातार दूसरे दिन गिरी, क्योंकि ट्रेडर्स US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के पिछले हफ़्ते ट्रेजरी बायबैक बढ़ाने के फ़ैसले के असर पर विचार कर रहे थे।

डॉलर इंडेक्स, जो येन और यूरो जैसी कई करेंसी के मुकाबले डॉलर की वैल्यू मापता है, 0.1% गिरकर 98.87 पर आ गया, जबकि यूरो 0.13% बढ़कर $1.1677 पर पहुंच गया। जापानी येन के मुकाबले डॉलर 0.03% मजबूत होकर 159.13 पर पहुंच गया।

क्रूड में नरमी

इस बीच, ईरान के खिलाफ US के नए प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए ट्रेडर्स के रुख के कारण कच्चे तेल की कीमतें एक हफ़्ते के निचले स्तर पर आ गई। ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स 2.14% गिरकर $86.68 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ़्यूचर्स 1.91% गिरकर $80.79 पर आ गया।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, क्रूड में नरमी

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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