एआई के आते ही लगी चपत! ₹2 लाख कमाने वाले कॉपीराइटर की इनकम पहुंची 40 हजार पर

आज के बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। वहीं एआई के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कुछ लोगों को अपनी जॉब से भी निकाला जा रहा है। वहीं इसकी वजह से कई लोगों को अपने करियर को लेकर चिंतित हैं। कुछ लोग AI को नए मौके मानते हैं, जबकि कई लोगों के मुताबिक इससे उनके करियर पर बड़ा असर पड़ा है। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर एक कॉपीराइटर का एआई की वजह से कम हुई सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

एक वायरल Reddit पोस्ट में एक कॉपीराइटर ने अपनी नौकरी और कमाई में आए बड़े बदलाव का अनुभव शेयर किया। कॉपीराइटर के मुताबिक, पहले वह हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते थे, लेकिन अब उनकी आय घटकर लगभग 40 हजार रुपये रह गई है। उन्होंने दावा किया कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके काम और करियर पर गहरा असर डाला।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

Reddit पर ये पोस्ट r/IndianWorkplace शेयर की गई थी। इस पोस्ट का टाइटल “2 लाख रुपये महीने से 40 हजार रुपये महीने की सैलरी पर पहुंचना” था। जिंदगी की सबसे बड़ी गिरावट।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि फ्रीलांसिंग से शुरुआत करने के बाद उनकी कमाई 2 लाख रुपये महीने तक पहुंच गई थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में उनका करियर पूरी तरह बदल गया। यूजर ने लिखा, “करीब 8 साल पहले मैंने फ्रीलांसिंग शुरू की थी। 18 साल की उम्र में मुझे पहला फुल-टाइम रिमोट कॉन्ट्रैक्ट मिला और 22 साल की उम्र तक मैं घर से काम करते हुए हर महीने 2 लाख रुपये कमा रहा था।”

कम हो गई सैलरी

लेकिन,ये सफलता ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। यूजर ने बताया कि साल 2026 उनके करियर के लिए सबसे मुश्किल दौर साबित हुआ। उन्होंने लिखा, “2026 मेरे लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा। मेरी सभी नौकरियां और प्रोजेक्ट चले गए और सिर्फ दो हफ्तों के भीतर मेरी छह अंकों की मासिक कमाई घटकर लगभग शून्य हो गई।” यूजर के अनुसार, वर्कप्लेस पर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके करियर पर सबसे ज्यादा असर डाला। उन्होंने दावा किया कि इसी बदलाव की वजह से उनकी नौकरी भी चली गई।

एआई की वजह से गई नौकरी

पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं एक लीड कॉपीराइटर था। मैंने बिल्कुल शुरुआत से अपना करियर बनाया। कॉलेज बीच में छोड़ दिया था और अपनी पूरी जिंदगी अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने में लगा दी। लेकिन फिर AI का दौर आ गया। मेरा मानना है कि मुझे इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि कंपनी ने AI को ट्रेन करने और अपने स्थायी कर्मचारियों को बनाए रखने का फैसला किया।”

2 लाख से 40 हजार हुई सैलरी

इनकम के एक रेगुलर सोर्स के लिए यूजर ने हैदराबाद की एक मार्केटिंग एजेंसी जॉइन की। जो तेलंगाना टूरिज्म के प्रचार से जुड़े काम संभालती है। उन्होंने बताया कि ज्यादा जिम्मेदारियां संभालने के बावजूद उनकी सैलरी पहले की तुलना में काफी कम है। यूजर ने बताया कि नई नौकरी में सबसे बड़ा झटका उन्हें सैलरी को लेकर लगा। उन्होंने लिखा, “मुझे सबसे ज्यादा हैरानी सैलरी देखकर हुई। ऐसा लगता है कि कई कंपनियां यहां लोगों के टैलेंट का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं। पहले जिस काम के लिए मुझे 2 लाख रुपये महीने मिलते थे, अब उससे भी बड़ी जिम्मेदारी के लिए सिर्फ 40 हजार रुपये मिल रहे हैं। यह बात मुझे हर दिन परेशान करती है।”

लोगों में नहीं है उत्साह

यूजर ने कहा कि कम सैलरी के साथ-साथ दफ्तर का माहौल भी उन्हें निराश करता है, क्योंकि वहां लोगों में काम के प्रति जुनून और रचनात्मक सोच की कमी है। उन्होंने लिखा, “पैसों की समस्या के अलावा मुझे सबसे ज्यादा इस बात का दुख है कि मेरे आसपास क्रिएटिव माहौल नहीं है। ज्यादातर लोग सिर्फ काम पूरा करने के लिए काम करते हैं। उनमें न उत्साह दिखता है और न ही जुनून। इससे मेरा भी काम करने का मन कम हो जाता है, जबकि मैं अकेले कई लोगों का काम संभाल रहा हूं।”

लोगों ने किया कमेंट

यूजर ने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी, जिसके बाद कई यूजर्स ने उनका हौसला बढ़ाया और नई स्किल्स सीखने व बेहतर अवसर तलाशने की सलाह दी। एक यूजर ने लिखा, “हममें से ज्यादातर लोग सुरक्षित रास्ता चुनते हैं और जोखिम लेने से बचते हैं। आपने जोखिम लिया, सही समय पर सफलता भी मिली, लेकिन हर दौर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। हर पीढ़ी में बड़े बदलाव आते हैं और इस बार AI ऐसा ही बदलाव लेकर आया है।” वहीं एक और यूजर ने सलाह दी, “अपनी स्किल्स को लगातार बेहतर बनाइए, नए लोगों से जुड़िए और दोबारा फ्रीलांसिंग शुरू कीजिए। इससे आपको बेहतर मौके मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।”

3 लाख सैलरी के बाद भी लाइफ में नहीं मिल रहा सुकून, इंजीनियर की ये पोस्ट हो रही खूब वायरल

सोशल मीडिया पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि, हर महीने 3 लाख रुपये सैलरी मिलने के बावजूद वह रोज 15-16 घंटे काम करने की वजह से पूरी तरह थक चुका है। लगातार काम का दबाव, लंबे घंटे और निजी जीवन के लिए समय न मिलने की वजह से ये नौकरी उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गई। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, वहीं कई लोग इस पर अपनी राय भी रख रहे हैं।

r/IndiaCareers पर शेयर की गई सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने एक Reddit पोस्ट किया। इस पोस्ट का टाइटल था “महीने में 3 लाख रुपये कमा रहा हूं… लेकिन फिर भी खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा हूं।” इस पोस्ट में इंजीनियर ने अपनी मानसिक थकान और बर्नआउट का अनुभव शेयर किया।

महीने की 3 लाख है सैलरी

यूज़र ने लिखा, “मैं टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं, महीने में 3 लाख रुपये से ज्यादा कमाता हूं और मेरे पास चार साल का अनुभव है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रेजुएशन के बाद से मैं एक ही मिड-साइज स्टार्टअप में काम कर रहा हूं।” उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सैलरी लगातार बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद अब उन्हें अपनी नौकरी में पहले जैसी खुशी और संतुष्टि महसूस नहीं हो रही है।

रोज उसी काम से थक गया हूं

उन्होंने आगे बताया कि अब काम पहले जैसा चुनौतीपूर्ण नहीं रहा और रोज एक ही तरह का काम करते-करते वह थक चुके हैं। यूजर ने लिखा, “आजकल ऐसा लगता है कि मैं दिन-रात बस एक ही काम कर रहा हूं। मुझे महसूस होता है कि मैंने कुछ नया सीखना बंद कर दिया है। इसके अलावा काम का दबाव इतना ज्यादा है कि कई बार रोज 15 से 16 घंटे तक काम करना पड़ता है।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है।

इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त नहीं

पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने लिखा, “मेरे पास अपने लिए बिल्कुल समय नहीं बचता। मैं आगे बढ़ना चाहता हूं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता। ऊपर से इस समय बहुत कम कंपनियां भर्ती कर रही हैं। अगर नौकरी बदलनी है, तो कम से कम 3 से 4 महीने की तैयारी करनी होगी और यह सब उसी काम के साथ करना पड़ेगा, जिसने पहले से ही मुझे पूरी तरह थका दिया है।”

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लोगों से मांगी सलाह

पोस्ट के आखिर में इंजीनियर ने ऐसे लोगों से सलाह मांगी, जो पहले इसी दौर से गुजर चुके थे। इसके बाद कई यूजर्स ने नौकरी बदलने, मेंटल हेल्थ का ध्यान रखने और वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर करने जैसे सुझाव दिए। एक यूजर ने कॉर्पोरेट नौकरी के अलावा दूसरे विकल्प तलाशने की सलाह दी। उन्होंने कमेंट किया, “क्यों न अपना कुछ शुरू करें? जरूरी नहीं कि वह टेक से जुड़ा हो। यह आपकी हॉबी, किसी इवेंट या छोटा-सा ऑनलाइन बिजनेस भी हो सकता है। शुरुआत में शायद उससे खर्च न निकल पाए, लेकिन आपको खुशी जरूर मिलेगी। और अगर बाद में लगे कि यह सही नहीं है, तो आप दोबारा कॉर्पोरेट नौकरी में वापस जा सकते हैं।”

एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि, “तुम्हें तैयारी के लिए 3-4 महीने क्यों चाहिए? 10-15 दिन की छुट्टी लो और दूसरी कंपनियों में आवेदन करना शुरू कर दो। मुझे लगता है कि तुम इंटरव्यू देने से घबरा रहे हो, क्योंकि काफी समय से कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। थोड़ा ब्रेक लो और अप्लाई करना शुरू करो। अगर शुरुआत में चयन नहीं भी होता, तो चिंता की बात नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पास पहले से नौकरी है।”

कई Reddit यूजर्स का मानना था कि इंजीनियर की सबसे बड़ी समस्या इंटरव्यू की तैयारी नहीं, बल्कि रोज़ 16 घंटे तक काम करना है। एक यूजर ने लिखा, “सबसे पहले किसी भी तरह अपने काम के घंटे कम करने की कोशिश करो। अगर जरूरत पड़े, तो स्वास्थ्य का कारण बता दो या फिर साफ कह दो कि तुम अपने लिए और परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हो। इसके अलावा, बिना किसी को बताए भी हर दिन अपने लिए थोड़ा समय निकालने की आदत डालो।”

भारत में एवरेज क्रेडिट स्कोर क्या है?

भारत में फाइनेंशियल मामलों में क्रेडिट स्कोर का कॉन्सेप्ट तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है. क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स के बढ़ते यूज के साथ ये स्कोर लोन लेने या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करने में बड़ा रोल प्ले करता है. ये 300 से 900 तक का थ्री-डिजिट नंबर है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर आपकी क्रेडिटवर्थीनेस को रिफ्लेक्ट करता है. हायर स्कोर बेहतर क्रेडिट हेल्थ दिखाता है. क्रेडिट स्कोर, जिसे सिबिल स्कोर भी कहते हैं, रिपेमेंट हिस्ट्री, क्रेडिट यूटिलाइजेशन, क्रेडिट हिस्ट्री कितनी पुरानी है, क्रेडिट टाइप्स और रीसेंट क्रेडिट इंक्वायरीज जैसे फैक्टर्स से तय होता है.

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर आप स्ट्रॉन्ग क्रेडिट रिपोर्ट बनाए रख सकते हैं और अपनी फाइनेंशियल प्रॉस्पेक्ट्स को बेहतर कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर रेंजेस

भारत में क्रेडिट स्कोर को कई रेंज में बांटा जाता है, जो क्रेडिटवर्थीनेस के अलग-अलग लेवल्स दिखाती हैं.

750 से 900: ये रेंज एक्सेप्शनल मानी जाती है. इस रेंज वाले कंज्यूमर्स को लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर लोन अप्रूवल चांसेज मिलते हैं.

700 से 749: ये गुड क्रेडिट स्कोर है. ये रिलायबल क्रेडिट हिस्ट्री दिखाता है, लेकिन एक्सीलेंट जितना स्ट्रॉन्ग नहीं.

650 से 699: फेयर रेंज. क्रेडिट ऑफर्स मिल सकते हैं, लेकिन हायर इंटरेस्ट रेट्स के साथ.

600 से 649: पुअर स्कोर. क्रेडिट लेना मुश्किल हो सकता है और अगर मिले तो हायर इंटरेस्ट रेट्स.

600 से नीचे: इमीडिएट एक्शन की जरूरत, क्योंकि लेंडर्स इसे रिस्की मानते हैं.

ट्रांसयूनियन सीबिल रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंज्यूमर्स अपनी क्रेडिट को एक्टिवली मॉनिटर करते हैं उनका एवरेज क्रेडिट स्कोर 729 होता है, जबकि जो मॉनिटर नहीं करते उनका 712. साथ ही, सेल्फ-मॉनिटरिंग करने वाले 46% कंज्यूमर्स के स्कोर छह महीने में इम्प्रूव हुए, जबकि नॉन-मॉनिटर्स में 41%.

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं

भारत की क्रेडिट हेल्थ कैसी है?

नवंबर 2023 में पैसे बाजार क्रेडिट इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के कंज्यूमर्स की क्रेडिट हेल्थ में वैरिड ट्रेंड्स दिखते हैं. स्टडी ने 823 सिटीज के 3.7 करोड़ कंज्यूमर्स का डेटा एनालाइज किया, जो सैलरीड और सेल्फ-एम्प्लॉयड के बीच गैप्स और एज ग्रुप्स के अंतर को हाइलाइट करती है.

सैलरीड बनाम सेल्फ-एम्प्लॉयड

-सैलरीड कंज्यूमर्स में 25% से ज्यादा का क्रेडिट स्कोर 770 और ऊपर है.

-सेल्फ-एम्प्लॉयड में सिर्फ 14% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट प्रोफाइल है.

-दोनों सेगमेंट्स में 32% कंज्यूमर्स गुड क्रेडिट स्कोर कैटेगरी में आते हैं.

अर्बन बनाम नॉन-मेट्रो

-मेजर मेट्रो सिटीज में 24% कंज्यूमर्स का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर है.

-नॉन-मेट्रो में 22% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर, जो इन डेमोग्राफिक्स में समान क्रेडिट बिहेवियर दिखाता है.

हेल्दी क्रेडिट स्कोर वाली सिटीज

स्टडी ने क्रेडिट-हेल्दी कंज्यूमर्स के हाइएस्ट रेशियो वाली सिटीज को हाइलाइट किया:

-बेंगलुरु

-अहमदाबाद

-मुंबई

-पुणे

-चेन्नई

-दिल्ली

-हैदराबाद

-सूरत (नॉन-मेट्रो)

-कोयंबटूर (नॉन-मेट्रो)

ये फाइंडिंग्स दिखाती हैं कि मेट्रो और नॉन-मेट्रो दोनों में क्रेडिट हेल्थ नोटेबल है, और कुछ नॉन-मेट्रो सिटीज अच्छा परफॉर्म कर रही हैं.

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स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर का इम्पैक्ट

स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स अनलॉक करता है, जो लोन और क्रेडिट कार्ड्स को आसान और फेवरेबल टर्म्स पर लेने में मदद करता है.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर लोन और क्रेडिट कार्ड्स सिक्योर करने के चांसेज बढ़ाता है, क्योंकि ये रिस्पॉन्सिबल फाइनेंशियल बिहेवियर दिखाता है और लेंडर्स के लिए डिफॉल्ट रिस्क कम करता है.

-हाई क्रेडिट स्कोर वाले कंज्यूमर्स को लोन पर लोअर इंटरेस्ट रेट्स मिलते हैं, जो मंथली रिपेमेंट्स को अफोर्डेबल और मैनेजेबल बनाते हैं.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर प्री-अप्रूव्ड लोन और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स के लिए क्वालिफाई करता है, जो जरूरत पड़ने पर फंड्स को फास्ट एक्सेस देता है.

-लेंडर्स हाई क्रेडिट स्कोर वालों को प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स ऑफर करते हैं, जिनमें एन्हांस्ड रिवॉर्ड्स और बेनिफिट्स होते हैं, जो परचेजिंग पावर बढ़ाते हैं.

-गुड क्रेडिट स्कोर हायर लोन अमाउंट्स और क्रेडिट लिमिट्स एक्सेस करने में मदद करता है, जो वैरियस नीड्स के लिए ग्रेटर फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देता है.

गुड क्रेडिट स्कोर कैसे बनाएं

क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने के लिए इम्पैक्टिंग फैक्टर्स पर केयरफुल अटेंशन और नॉलेज की जरूरत है. ये कुछ तरीके हैं अपनी क्रेडिटवर्थीनेस को बेहतर करने के:

-क्रेडिट कार्ड बिल्स और लोन ईएमआई का टाइमली रेपेमेंट सुनिश्चित करें, क्योंकि लेट या मिस्ड पेमेंट्स आपके क्रेडिट स्कोर को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकते हैं.

-एक साथ मल्टिपल लोन एप्लिकेशंस सबमिट करने से बचें, क्योंकि ये लेंडर्स को क्रेडिट के लिए ओवरली इगर लग सकता है.

-क्रेडिट रिपोर्ट को रेगुलरली रिव्यू करें और किसी भी इनएक्युरेसी को तुरंत एड्रेस करें.

-अपनी टोटल क्रेडिट लिमिट के 30% से नीचे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो रखने की कोशिश करें, जो रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है.

निचोड़ ये है कि स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर बेहतर फाइनेंशियल ऑपर्च्युनिटीज के दरवाजे खोल सकता है. इसलिए अपनी क्रेडिट हेल्थ को ट्रैक करना बहुत जरूरी है. आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को मॉनिटर करने के लिए डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट को आसानी से ट्रैक करें. मनीकंट्रोल क्रेडिट डैशबोर्ड एक्सप्लोर करें ताकि फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट एक्सेस कर सकें.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी कितनी है? सरकारी बंगला और सुरक्षा के साथ-साथ मिलती हैं ये सुविधाएं

नीट पेपर लीक मामले को लेकर कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बदलाव के बाद लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं और भत्ते दिए जाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य होने के साथ-साथ सांसद भी होते हैं। ऐसे में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित वेतन, विभिन्न प्रकार के भत्ते और कई आधिकारिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

आइए जानते हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की सैलरी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हर महीने 1 लाख रुपये बेसिक सैलरी मिलती है।

इसके अलावा उन्हें कई तरह के भत्ते भी दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: अपने संसदीय क्षेत्र में जनता से संपर्क और क्षेत्रीय कामकाज के लिए हर महीने 70,000 रुपये।
  • कार्यालय भत्ता: कार्यालय चलाने, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए हर महीने 60,000 रुपये।
  • दैनिक भत्ता: संसद या संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने पर 2,000 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

  • सरकारी आवास: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नई दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में सरकारी बंगला दिया जाता है। इस आवास के लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता। इसके रखरखाव और अन्य जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी सरकार उठाती है।
  • सरकारी गाड़ी और सुरक्षा: आधिकारिक कामकाज के लिए मंत्री को सरकारी कार, ड्राइवर और ईंधन की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के आकलन के आधार पर उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। जरूरत के अनुसार पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ), एस्कॉर्ट वाहन और अन्य सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं।
  • यात्रा की सुविधा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सरकारी काम के लिए पूरे देश में यात्रा करने की सुविधा मिलती है। इसमें हवाई यात्रा के लिए एग्जीक्यूटिव क्लास और ट्रेन में फर्स्ट एसी से सफर करने की व्यवस्था शामिल होती है। सरकारी नियमों के अनुसार, पात्र परिवार के सदस्यों को भी यात्रा से जुड़ी कुछ सुविधाएं मिल सकती हैं।
  • चिकित्सा सुविधा: केंद्रीय मंत्री और उनके आश्रित परिवार के सदस्य सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत इलाज की सुविधा प्राप्त करते हैं। इस योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • कार्यालय और संचार सुविधाएं: सरकार मंत्री की मदद के लिए निजी सहायक (पर्सनल असिस्टेंट), सचिव और अन्य सहयोगी कर्मचारी उपलब्ध कराती है। इसके अलावा सरकारी आवास और कार्यालय में टेलीफोन, इंटरनेट तथा सरकारी कामकाज के लिए जरूरी अन्य संचार सुविधाएं भी दी जाती हैं।

Income Tax Return: खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें? जानिए क्या हैं एक्सपर्ट्स के जवाब

Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। कई टैक्सपेयर्स इस उलझन में हैं कि खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपने टैक्स फाइलिंग पोर्टल को काफी टैक्स फ्रेंडली बना दिया है। इस पर टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड डेटा यानी पहले से भरे गए डेटा दिखते हैं। एआई पावर्ड टूल्स भी उपलब्ध हैं। सवाल है कि आपको खुद रिटर्न फाइल करना चाहिए या टैक्स एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए?

इनकम के एक से ज्यादा स्रोत होने पर खुद फाइल करने में आ सकती है मुश्किल

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी टैक्सपेयर के इनकम के कई स्रोत हैं और कैपिटल गेंस जैसी चीजें हैं तो खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है। अगर कोई सैलरीड टैक्सपेयर है और उसकी सिर्फ एक इनकम है तो वह खुद रिटर्न फाइल कर सकता है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी से प्रॉफिट, फॉरेन एसेट या फॉरेन इनकम वाले टैक्सपेयर्स को खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है।

अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अब यह धारणा टूट रही है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता है।” उन्होंने कहा कि आज टैक्सपेयर्स कई तरह के एसेट्स में इनवेस्ट करते हैं। इनमें शेयर, म्यूचुअल फंड्स, REITs, InvITs, बिजनेस ट्रस्ट्स, फॉरेन एसेट्स और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स शामिल हैं।

अलग-अलग एसेट के लिए इनकम टैक्स के अलग-अलग नियम हैं

इनकम टैक्स के नियमों में अलग-अलग एसेट क्लास के लिए अलग-अलग नियम हैं। सिंगला ने कहा कि अगर इनकम टैक्स के पोर्टल पर रिटर्न फाइल कर दिया जाता है और उसमें कोई गलती होती है या पूरा डिसक्लोजर नहीं होता है या गलत आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल किया गया होता है तो टैक्सपेयर्स को नोटिस आ सकता है। इसका मतलब है कि टैक्स चुकाने के बावजूद छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत पैदा कर सकती है।

एआईएस और फॉर्म 26एएस को टैक्सपेयर्स को खुद चेक कर लेना जरूरी है

King Stubb & Kasiva में पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य ने कहा कि इनकम के कई स्रोत, बिजनेस इनकम, फॉरेन एसेट्स या कॉम्प्लेक्स डिडक्शंस वाले टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। हालांकि, एक्सपर्ट भी रिटर्न फाइल करने से पहले टैक्सपेयर को आईटीआर को रिव्यू करने को कहते हैं। इसके अलावा फॉर्म 26एएस, एआईएस और TIS जैसे डॉक्युमेंट्स के डेटा को चेक करने की जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होती है।

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रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का नहीं करें इंतजार 

अब रिटर्न फाइल करने के लिए एक हफ्ते से कम का समय बचा है। अगर आपने अब तक फाइल नहीं किया है तो आपको जल्द रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। आपको अगर खुद फाइल करने में दिक्कत आ रही है तो आप टैक्स एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। इससे आपको बाद में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Small Savings Schemes: शेयर मार्केट में उठा-पटक की टेंशन दूर, 8.2% तक का रिटर्न, पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम शानदार

Small Savings Schemes: पिछले कुछ महीनों से स्टॉक मार्केट में काफी उठा-पटक दिख रही है। इससे शॉर्ट टर्म में रिटर्न को लेकर निवेशक परेशान हो गए हैं। हालांकि अधिकतक एक्सपर्ट्स लंबे समय में अच्छा पैसा बनाने के लिए इक्विटी में पैसा लगाने की सलाह देते हैं लेकिन जो निवेशक मार्केट की घबराहट से दूर बिना टेंशन अच्छा पैसा बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी मार्केट में विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे निवेशकों के लिए सरकार के सपोर्ट वाली छोटी बचत योजनाएं पोर्टफोलियो का अच्छा हिस्सा बन सकती हैं। इनमें सालाना 8.2% तक का ब्याज मिल रहा है, जिससे मार्केट की उठा-पटक से दूर निवेशकों का क्रेज इन्हें लेकर बढ़ रहा है।

Public Provident Fund (PPF)

लंबे समय से पीपीएफ सैलरीड एंप्लॉयीज और अपना खुद का बिजनेस करने वालों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश विकल्पों में शुमार है। अभी इस पर सालाना 7.1% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 15 वर्ष है। पुरानी टैक्स व्यवस्था यानी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत इसमें किए गए निवेश पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन मिलका है। साथ ही अर्जित ब्याज और मेच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा भी टैक्स-फ्री होता है।

National Savings Certificate (NSC)

एनएससी एक फिक्स्ड इनकम योजना है, जिसमें अभी सालाना 7.7% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है और इसमें निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलता है।

Kisan Vikas Patra (KVP)

बाजार की उठा-पटक से दूर किसान विकास पत्र (केवीपी) ऐसे निवेशकों के लिए सुरक्षित है जो बिना किसी टेंशन अपने पैसे को अच्छी रफ्तार से बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं। अभी इस पर सालाना 7.5% की दर से ब्याज मिल रहा है और इस रफ्तार से 115 महीने में इसमें रखा पैसा डबल हो जाता है।

Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)

लड़कियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना में अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है जोकि स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में सबसे अधिक ब्याज देने वाली योजना में से एक है। 10 साल से कम उम्र की लड़की के अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं।

Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS)

सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम के तहत अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है और यह भी अधिक ब्याज देने वाली सरकारी बचत योजनाओं में शुमार है। इसके तहत 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग निवेश कर सकते हैं और ऐसे लोगों के लिए बेहतर है जो नियमित आय चाहते हैं।

Post Office Time Deposits

पोस्ट ऑफिस में बैंकों की तरह एक एफडी है, जिसे सरकार का सपोर्ट मिला हुआ है। इसमें एक साल की जमा पर 6.9%,दो साल की जमा पर 7.0%, तीन साल की जमा पर 7.1% और पांच साल की जमा पर 7.5% की दर से ब्याज मिलेगा। पांच साल की जमा पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलेगा।

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें

सरकार हर तिमाही स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स यानी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें तय करती हैं और सितंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यहां पोस्ट ऑफिस से जुड़ी स्कीम्स के लिए ब्याज दर की डिटेल्स दी जा रही है-

स्मॉल सेविंग्स स्कीमब्याज दर
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)8.2%
सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS)8.2%
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.7%
किसान विकास पत्र (KVP)7.5%
5 वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट7.5%
पोस्टऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.4%
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.1%
3 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट7.1%
2 साल का पोस्ट ऑफिस डाकघर टाइम डिपॉजिट7.0%
1 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट6.9%
पोस्ट ऑफिस आरडी (RD)6.7%
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम4.0%

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में ₹999 की छोटी SIP से तैयार होगा लाखों का फंड

डिस्क्लेमर: निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है

8th Pay Commission: बेसिक पे से लेकर भत्तों तक, जानिए 7 और 10 अगस्त को वेतन आयोग किस बात पर करेगा महत्वपूर्ण चर्चा

8th Pay Commission Salary Structure: देश के करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में आठवां वेतन आयोग को लेकर खूब चर्चा है। यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण फेज में पहुंच चुका है। इस दौरान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के लिए हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों से लगातार चर्चा की जा रही है।

7 और 10 अगस्त को होगी बड़ी बैठक

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अगले वेतन संशोधन पर चल रहे परामर्श के तहत दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारी संघों, परिसंघों और यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। 23 जुलाई 2026 को जारी एक नोटिस में आयोग ने बताया कि यह बैठक उसकी हितधारक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले कर्मचारी प्रतिनिधियों के सुझाव और सिफारिशें जुटा रहा है।

सैलरी स्ट्रक्चर के 3 मुख्य पिलर, जिन पर टिकी है पूरी चर्चा

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का नया गणित मुख्यतः तीन हिस्सों में तय किया जा रहा है:

A. बेसिक पे और फिटमेंट फैक्टर

बेसिक पे आपकी सैलरी और पेंशन की सबसे मजबूत नींव है, क्योंकि ग्रेच्युटी, पीएफ और बाकी भत्ते इसी के आधार पर तय होते हैं। पुराने बेसिक पे को नए बेसिक पे में बदलने के लिए फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। नेशनल काउंसिल – जेसीएम (NC-JCM) ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

वहीं ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने परिवार की निर्भरता इकाई को 3 से बढ़ाकर 4.4 करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बेसिक पे में बड़ा उछाल आएगा।

B. भत्ते (DA, HRA और TA)

नए बेसिक पे के लागू होते ही उस पर आधारित सभी प्रमुख भत्ते री-कैलकुलेट होंगे:

HRA (मकान किराया भत्ता): एआईएनपीएसईएफ ने X कैटेगरी के शहरों के लिए 36%, Y के लिए 24% और Z कैटेगरी के लिए 12% HRA करने की सिफारिश की है। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि जब भी DA बढ़े, HRA में खुद-ब-खुद बढ़ोतरी हो।

TA (ट्रेवल भत्ता): लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम TA बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीने करने का प्रस्ताव है।

C. ग्रॉस सैलरी

बेसिक पे और सभी भत्तों को मिलाकर आपकी कुल कमाई तय होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर यूनियनों के ये सभी प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी ₹37,080 से बढ़कर सीधे ₹61,344 तक पहुंच सकती है यानी करीब 65% तक की भारी बढ़ोतरी!

कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें?

आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को 18 महीने की अवधि के लिए किया गया था। इसके अनुसार, आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2027 से मध्य-2027 के बीच सौंप सकता है।

अगर हम ऐतिहासिक ट्रेंड्स को देखें तो सिफारिशें आने के बाद सरकार द्वारा इसे पूरी तरह लागू करने में 2 से 3 साल का समय लगता है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से एरियर के साथ प्रभावी हो सकती है।

8वें वेतन आयोग पर आया बड़ा अपडेट! अब केंद्रीय कर्मचारी 7 और 10 अगस्त के लिए कर लें पूरी तैयारी

8th Pay Commission updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के अगले पे रिवीजन के लिए जारी हलचल के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने दिल्ली स्थित केंद्रीय कर्मचारियों के संघों, फेडरेशनों और यूनियनों के साथ वार्ता करने के लिए तारीख का ऐलान कर दिया है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक 8वें वेतन आयोग ने दिल्ली में स्थित या पंजीकृत कर्मचारी यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त को आयोग के साथ बातचीत करने का निमंत्रण दिया है। यह बैठकें अगली सैलरी रिवीजन पर चल रहे विचार-विमर्श की प्रक्रिया के तहत आयोजित की जा रही हैं।

23 जुलाई के नोटिस में आयोग ने क्या कहा?

वेतन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले स्टेकहोल्डर्स की सिफारिशें और विचार जानने के लिए यह परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। 23 जुलाई को जारी अपने नोटिस में आयोग ने कहा कि वह सिर्फ दिल्ली में स्थित या पंजीकृत केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के कर्मचारियों के संघों, परिसंघों और यूनियनों से 7 अगस्त और 10 अगस्त को बातचीत करेगा। हालांकि, इस बैठक में भाग लेने के लिए एक शर्त रखी गई है। सिर्फ वही संगठन इस बैठक के लिए अपॉइंटमेंट मांग सकते हैं जिन्होंने पहले ही अपना ज्ञापन जमा कर दिया है और आयोग के साथ दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में अब तक कोई वार्ता नहीं की है।

31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य

बैठक में शामिल होने के पात्र संगठनों के लिए आयोग ने समय-सीमा तय कर दी है। इच्छुक पात्र संगठनों को 31 जुलाई तक ऑनलाइन माध्यम से अपना अनुरोध जमा करना होगा। अनुरोध भेजते समय संगठनों को अपनी यूनिक मेमो आईडी साथ में दर्ज करनी होगी। बैठकों का स्थान और समय अलग से बताया जाएगा।

अन्य राज्यों के यूनियनों के लिए भी तय होगी तारीखें

आने वाले महीनों में देश भर के अन्य राज्यों के यूनियनों के साथ भी बातचीत की जाएगी। दिल्ली-एनसीआर के बाहर के कर्मचारी संघ और यूनियनें अपने स्वयं के राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में आयोग के साथ बातचीत के लिए समय मांग सकते हैं। आयोग ने बताया है कि आने वाली बैठकों और परामर्श का पूरा शेड्यूल उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया जाता रहेगा।

क्यों अहम हैं ये बैठकें?

कर्मचारी यूनियनों और संघों के साथ बातचीत हर वेतन आयोग के कामकाज का एक मानक हिस्सा होती है। इस बातचीत के दौरान स्टेकहोल्डर्स आयोग के सामने अपने मेमोरेंडम देके हैं। इनमें पे-स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन लाभ, करियर में प्रगति और सेवा शर्तें जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होते हैं। आयोग इन सभी मेमोरेंडम के साथ-साथ अलग अलग मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के इनपुट की समीक्षा करने के बाद ही केंद्र सरकार के लिए अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करता है।

क्या है 8वां वेतन आयोग?

केंद्र सरकार ने लाखों वर्किंग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन लाभों में संशोधन की सिफारिश करने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। आयोग की सिफारिशें एक बार अंतिम रूप ले लेने और सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद देश के लाखों सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए अगले दौर के वेतन संशोधन को निर्धारित करेंगी। फिलहाल आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले अलग अलग स्टेकहोल्डर्स से मिलने और राय बनाने के दौर में है।

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AAI Recruitment 2026: एएआई में ग्रुप ए और बी के 389 पदों में भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, जानें कब से कब तक कर सकेंगे आवेदन

AAI Recruitment 2026: एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) युवाओं के लिए विमानन क्षेत्र में सुरक्षित करियर का शानदार अवसर लेकर आया है। एएआई ने मैनेजर (ग्रुप-ए) और जूनियर एग्जीक्यूटिव (ग्रुप-बी) के 389 पदों पर सीधी भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों के लिए 8 अगस्त से आधिकारिक वेबसाइट aai.aero पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एएआई भर्ती 2026 के तहत आवेदन करने की आखिरी तारीख 7 सितंबर, 2026 है।

एएआई भर्ती 2026 के लिए आवेदन आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन मोड से ही किया जाएगा। जो लोग एक से अधिक पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अलग-अलग पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी और हर पद के लिए अलग से आवेदन शुल्क देना होगा। इस भर्ती प्रक्रिया में सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, फाइनेंस, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, लॉ, फायर सर्विसेज, ऑपरेशंस, कमर्शियल, कॉर्पोरेट प्लानिंग और मैनेजमेंट सर्विसेज, और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस में मैनेजर के पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। जूनियर एग्जीक्यूटिव पोस्ट फाइनेंस, लॉ, ऑपरेशंस, और सर्वे और कार्टोग्राफी में उपलब्ध हैं।

एएआई भर्ती 2026: पदों का ब्योरा और रिक्तियां

एएआई ने कुल 389 पदों की घोषणा की है, जिसमें 260 मैनेजर पद और 129 जूनियर एग्जीक्यूटिव पद शामिल हैं। सबसे ज्यादा 145 पद मैनेजर (इंजीनियरिंग-सिविल) के लिए हैं। इसके बाद जूनियर एग्जीक्यूटिव (ऑपरेशंस) के लिए 79 वैकेंसी हैं।

एएआई भर्ती 2026: चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) के जरिए होगा। एग्जाम की तारीख बाद में आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित की जाएगी। आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, सीबीटी में ऑब्जेक्टिव-टाइप सवाल होंगे और कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी।

मैनेजर पद के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल होना होगा। मैनेजर (फायर सर्विसेज) के लिए आवेदन करने वालों को इसके अलावा फिजिकल मेजरमेंट, ड्राइविंग और फिजिकल एंड्योरेंस टेस्ट से भी गुजरना होगा।

ये उम्मीदवार माने जाएंगे आवेदन करने के योग्य

उम्र सीमा : 7 सितंबर, 2026 तक, मैनेजर पद के लिए अधिकतम उम्र सीमा 32 साल और जूनियर एग्जीक्यूटिव पोस्ट के लिए 27 साल है। सरकारी नियमों के मुताबिक, रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को उम्र में छूट दी जाएगी।

शैक्षिक योग्यता : मैनेजर पद के अवेदकों के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ तीन साल का वैध काम का अनुभग होना चाहिए। जूनियर एग्जीक्यूटिव पद के लिए पहले से कोई वर्क एक्सपीरियंस जरूरी नहीं है। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन पोस्ट के हिसाब से अलग-अलग होती है।

आवेदन शुल्क

एएआई भर्ती 2026 के तहत सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के आवेदकों को 1000 रुपये (जीएसटी सहित) का शुल्क देना होगा। जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग, महिला अभ्यर्थियों और एएआई में एक साल की अप्रेंटिसशिप पूरी कर चुके उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह नि:शुल्क है।

एएआई भर्ती 2026: सैलरी

मैनेजर पद के लिए चुने गए उम्मीदवार को 60,000 रुपये से 1,80,000 रुपये का पे स्केल मिलेगा, जबकि जूनियर एग्जीक्यूटिव्स को 40,000 रुपये से 1,40,000 रुपये मिलेंगे।

एएआई के मुताबिक, मैनेजर्स के लिए लगभग सालाना कॉस्ट टू कंपनी (CTC) 21 लाख रुपये और जूनियर एग्जीक्यूटिव्स के लिए 14 लाख रुपये है, साथ ही लागू अलाउंस और दूसरे बेनिफिट्स भी मिलेंगे।

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New Tax Regime: अब 10 में 9 टैक्सपेयर्स चुन रहे हैं न्यू टैक्स रिजीम, जानिए 5 बड़े कारण

New Tax Regime: इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वाले ज्यादातर लोग न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल उनके पास रिटर्न फाइल करने वाले 80% से 95% तक टैक्सपेयर्स ने नया टैक्स सिस्टम चुना है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या लगातार बढ़ी है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं।

  1. टैक्स में ज्यादा राहत मिलने लगी

न्यू टैक्स रिजीम में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाई है। टैक्स स्लैब में भी बदलाव किए गए हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा बढ़ाया गया है। इसी वजह से पहले के मुकाबले कई सैलरीड लोगों का टैक्स कम हो गया है।

ClearTax का कहना है कि कम टैक्स दरें, ज्यादा टैक्स रिबेट और बढ़ा हुआ स्टैंडर्ड डिडक्शन न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बना रहे हैं।

2. कागजी झंझट लगभग खत्म

ओल्ड टैक्स रिजीम में HRA, 80C, 80D और दूसरे डिडक्शन के लिए कई तरह के दस्तावेज संभालकर रखने पड़ते हैं। न्यू टैक्स रिजीम में इसकी जरूरत काफी कम हो जाती है। इसलिए ITR भरना भी आसान हो गया है।

SBHS & Associates के पार्टनर हिमांक सिंगला कहते हैं कि लोग अब सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश नहीं करना चाहते। आसान प्रक्रिया की वजह से वे तेजी से न्यू टैक्स रिजीम की तरफ बढ़ रहे हैं।

3. कम टैक्स रेट का फायदा

जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए न्यू टैक्स रिजीम सीधे टैक्स बचाने का मौका दे रही है। यही वजह है कि हर साल इसे चुनने वालों की संख्या बढ़ रही है।

HJ Aggarwal & Co. के पार्टनर सीए हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, इस साल उनकी फर्म के करीब 95% क्लाइंट्स ने न्यू टैक्स रिजीम चुनी है। पिछले साल यह आंकड़ा 70% से थोड़ा ज्यादा था, जबकि दो साल पहले सिर्फ 20% लोग इसे चुन रहे थे।

4. ITR फाइल करना पहले से आसान

न्यू टैक्स रिजीम में कम कैलकुलेशन और कम दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इससे रिटर्न जल्दी फाइल हो जाता है।

TaxSpanner के को-फाउंडर और CEO सुधीर कौशिक कहते हैं कि 12 लाख रुपये तक की आय वाले कई टैक्सपेयर्स सिर्फ इसलिए न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं क्योंकि इसमें दस्तावेज कम लगते हैं और पूरी प्रक्रिया आसान है।

5. फिर भी हर किसी के लिए सही नहीं

न्यू टैक्स रिजीम भले ही ज्यादातर लोगों की पहली पसंद बन गई हो, लेकिन हर टैक्सपेयर के लिए यह बेहतर विकल्प नहीं है। NA Shah Associates के पार्टनर गोपाल बोहरा का कहना है कि जिन लोगों को HRA, होम लोन के ब्याज, Chapter VI-A के तहत मिलने वाले डिडक्शन या दूसरे बड़े टैक्स बेनेफिट मिलते हैं, उनके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम अब भी ज्यादा फायदे की हो सकती है।

वहीं, S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना भी सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपना टैक्स निकालकर जरूर देखें। अगर आपके पास HRA, होम लोन, NPS, PPF, EPF या दूसरे बड़े डिडक्शन हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम आज भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

EPS Pension Calculation: 10 से 25 साल की नौकरी पर कितनी बनेगी मंथली पेंशन? 

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