आंध्र प्रदेश में हॉस्टल में सोई कक्षा 9 और 10 छात्राओं की कटी चोटी, खौफ से सहमी छात्राएं

आंध्र प्रदेश के भीतिली के एक आवासीय स्कूल में हुई घटना की सुर्खियों में छाई हुई है। यहां हॉस्टल में सो रही छात्राओं की चोटी काटने की हैरान करने वाली घटना का पता चला है। यह छात्राएं कक्षा 9 और 10 की बताई जा रही हैं, जो हॉस्टल के दो कमरों में सो रही थीं। इस घटना ने हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस और स्कूल प्रशासन बारीकी से मामले की जांच कर रहा है।

यह घटना आंध्र प्रदेश के भीमिली के कृष्णापुरम स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की है। कई मीडिया स्रोतों में आ रही खबर के अनुसार, यह घटना 16 सितंबर को देर रात हुई थी। उस समय छात्राएं दो कमरों में सो रही थींऍ एक कमरे में छह और दूसरे कमरे में चार छात्राएं थीं। सुबह उन्होंने देखा कि उनके बाल कटे हुए हैंऍ स्कूल के इन दो कमरों में कक्षा नौ की करीब 38 छात्राएं रहती हैं।

बाहरी व्यक्ति के हॉस्टल में घुसने की आशंका

पुलिस और स्कूल प्रशासन इस घटना की जांच में जुटे हुए हैं। पहले यह माना जा रहा था कि हॉस्टल में घुसे किसी बाहरी व्यक्ति से इस घटना को अंजाम दिया होगा। लेकिन पुलिस और स्कूल प्रशासन अब इस संभावना की भी जांच कर रहे हैं कि इस घटना में हॉस्टल की ही कुछ छात्राएं शामिल हो सकती हैं। पुलिस ने छात्राओं से बात की है और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। भीमिली के इंस्पेक्टर जी दिवाकर ने बताया कि पुलिस और स्कूल प्रशासन ने छात्राओं की काउंसलिंग की है और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

विधायक ने की छात्राओं, माता-पिता और स्कूल से बात

रविवार को भीमिली के विधायक घंटा श्रीनिवास राव स्कूल पहुंचे। उन्होंने छात्राओं, उनके माता-पिता और स्कूल प्रबंधन से बातचीत की। उन्होंने घटना की विस्तृत जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति के हॉस्टल में घुसने की संभावना बहुत कम है। उनका कहना था कि सीसीटीवी फुटेज से घटना के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकती है।

शिक्षा विभाग ने की प्रशासनिक कार्रवाई

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना और हॉस्टल की निगरानी में लापरवाही को लेकर चार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें स्कूल की प्रिंसिपल, ड्यूटी पर मौजूद शिक्षक और रात की सुरक्षा में तैनात महिला कर्मचारी शामिल हैं।

कुरुक्षेत्र ITI क्लस्टर को मिलेंगे 320 करोड़ रुपये, जिंदल नवीन अवसर करेगा हरियाणा सरकार के साथ पार्टनरशिप

KPSC भर्ती घोटाले की अब SIT करेगी जांच, सीनियर IPS अधिकारी आलोक कुमार को मिली जिम्मेदारी

KPSC Recruitment Exam: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की सिंगल बेंच ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। वहीं, कोर्ट ने इस जांच की जिम्मेदारी सिनियर IPS अधिकारी आलोक कुमार को सौंपी है।

CID और पुलिस से SIT को सौंपे जाएंगे साक्ष्य

SIT के गठन के बाद अब तक मामले की जांच कर रही CID और संबंधित पुलिस थानों से केस डायरी, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत नई जांच टीम को सौंपे जाएंगे। कोर्ट के इस कड़े कदम से सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है।

विभागों और जांच एजेंसियों को सहयोग का निर्देश

हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों, जांच एजेंसियों और सार्वजनिक प्राधिकरणों को SIT के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि सभी संबंधित संस्थाएं जांच में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं, ताकि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित हो सके।

100 दिनों में जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

कोर्ट ने सुनवाई करते हुए SIT को जांच शुरू होने के 100 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, SIT को हर 30 दिन में प्रगति रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष दाखिल करनी होगी।

रिपोर्ट के बाद सुनी जाएंगी आपराधिक याचिकाएं

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अपराधों को रद्द करने की मांग वाली सभी संबंधित आपराधिक याचिकाओं पर SIT की जांच रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद विचार किया जाएगा।

बता दें कि अदालत के इस आदेश के बाद KPSC भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच अब SIT की निगरानी में आगे बढ़ेगी।

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कुरुक्षेत्र ITI क्लस्टर को मिलेंगे 320 करोड़ रुपये, जिंदल नवीन अवसर करेगा हरियाणा सरकार के साथ पार्टनरशिप

प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) स्कीम के तहत नेशनल स्टीयरिंग कमेटी (NSC) ने हरियाणा में कुरुक्षेत्र ITI क्लस्टर के लिए ₹320 करोड़ के स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को मंजूरी दे दी है। इस क्लस्टर के लिए जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर हरियाणा सरकार के साथ पार्टनरशिप करेगी।

इस मंजूरी के साथ, पीएम-सेतु के तहत 10 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) क्लस्टर में मंजूर कुल इन्वेस्टमेंट बढ़कर ₹2,491 करोड़ हो गया है। इससे आईटीआई को उद्योग का नेतृत्व करने, भविष्य के लिए तैयार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने के सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूती मिली है। यह मंजूरी सरकारी आईटीआई के इंडस्ट्री-लेड ट्रांसफॉर्मेशन को मजबूत करने और ज्यादा मांग वाले वोकेशनल ट्रेनिंग इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

इस मौके पर कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा, “उद्योग को आईटीआई के करीब लाने से हमारे युवाओं के लिए रोजगार के मजबूत रास्ते बनेंगे। पीएम सेतु के तहत कुरुक्षेत्र क्लस्टर को मंजूरी देना, कौशल विकास को उद्योगों की बदलती जरूरतों के हिसाब से ज्यादा काम का, उम्मीदों पर खरा उतरने वाला और रिस्पॉन्सिव बनाने के हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।”

एक हब और छह स्पोक आईटीआई को बदला जाएगा

कुरुक्षेत्र क्लस्टर को PM-SETU के तहत सोचे गए हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा और इसमें सात सरकारी ITIs शामिल होंगी।

सरकारी ITI, कुरुक्षेत्र हब ITI के तौर पर काम करेगा, जबकि नीचे दिए गए इंस्टिट्यूट स्पोक ITI के तौर पर काम करेंगे:

सरकारी ITI (महिला), कुरुक्षेत्र

सरकारी ITI, कैथल

सरकारी ITI (महिला), कैथल

सरकारी ITI, पेहोवा

सरकारी ITI, पबनावा

सरकारी ITI (महिला), अंबाला शहर

मजबूत ढांचे के विकास में मदद करेगा निवेश

₹320 करोड़ का यह निवेश पूरे क्लस्टर में एक इंटीग्रेटेड और इंडस्ट्री-रिस्पॉन्सिव स्किलिंग इकोसिस्टम के विकास में मदद करेगा। PM-SETU के तहत, इंडस्ट्री पार्टनर करिकुलम डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर एन्हांसमेंट, ट्रेनिंग डिलीवरी, फैकल्टी एंगेजमेंट, अप्रेंटिसशिप, इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्लेसमेंट सपोर्ट के जरिए ITI के ट्रांसफॉर्मेशन को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इस स्कीम का मकसद यह पक्का करना है कि वोकेशनल ट्रेनिंग नई तकनीक और श्रम बाजार की बदलती मांगों के साथ रेखांकित रहे।

एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर, जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड हरियाणा सरकार और इसमें शामिल ITI के साथ मिलकर काम करेगी ताकि इंडस्ट्री के साथ जुड़ाव को मजबूत किया जा सके और छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, अप्रेंटिसशिप और नौकरी के मौकों तक बेहतर पहुंच मिल सके। कंपनी पहले से ही ओडिशा के बारबिल आईटीआई क्लस्टर से जुड़ी हुई है, जहां पीएम-सेतु के तहत ₹240 करोड़ की रणनीति निवेश योजना को मंजूरी दी गई है। दोनों क्लस्टर में कंपनी की भागीदारी इस योजना के इंडस्ट्री-लेड कौशल विकास की सोच में उद्योग के बढ़ते भरोसे को दिखाती है।

भारत सरकार की एक खास पहल है PM-SETU 

PM-SETU भारत सरकार की एक खास पहल है जिसका मकसद आधुनिक ढांचा, उन्नत प्रयोगशाला और उपकरण, उद्योगों के साथ तालमेल वाला पाठ्यक्रम, उभरते क्षेत्रों में कोर्स शुरू करने और मजबूत औद्योगिक साझेदारी के जरिए वोकेशनल ट्रेनिंग की क्वालिटी, रेलिवेंस और नतीजों को बेहतर बनाना है।

इस स्कीम का कुल खर्च ₹60,000 करोड़ है और इसमें इंडस्ट्री के हब-एंड-स्पोक मॉडल के जरिए 1,000 सरकारी आईटीआई को अपग्रेड करने का लक्ष्य है, जिसमें देश भर में 200 हब ITI और 800 स्पोक ITI शामिल हैं।

राहुल के इंदौर कार्यक्रम के बाद बढ़ा विवाद

नई दिल्ली। इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर बड़ा हमला किया है। राहुल गांधी के मंच पर एक कॉमेडियन की मौजूदगी और नरेंद्र मोदी का मजाक बनाए जाने को ल कर भाजपा हमलावर है।  भाजपा ने कांग्रेस को जोकरों की पार्टी कहा है। यहां तक कि भाजपा ने यह आरोप भी लगाया है कि राहुल के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी की मां का अपमान किया गया।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी कॉमेडियंस और जोकर्स की पार्टी बन गई है। वे हमेशा के लिए बाहर हो गए हैं… रेस्ट इन पीस’। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कांग्रेस पर हमला किया और एक्स पर लिखा, ‘राहुल और कांग्रेस पार्टी नैतिक दिवालियापन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। छात्र संवाद का इस्तेमाल पीएम मोदी की दिवंगत मां का मजाक उड़ाने और उनका अपमान करने के लिए करना बुनियादी मानवीय संवेदना और राजनीतिक संस्कृति की चौंकाने वाली कमी दिखाता है’।

दूसरी ओर कांग्रेस ने इसका जवाब दिया और भाजपा व आरएसएस पर शिक्षा व्यवस्था को खोखला और भ्रष्ट करने का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी छात्रों के साथ खड़े हैं, इसलिए सरकार से सवाल पूछ रहे हैं और जवाबदेही मांग रहे हैं। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम की थीम ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ रखी गई थी। यह कार्यक्रम इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में हो चुका है। इंदौर में छात्रों ने शिक्षा, भर्ती, परीक्षा, आरक्षण, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाए।

इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है, कोई अहसान या सुविधा नहीं। कार्यक्रम में स्टैंडअप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज से मिलते जुलते हाव भाव और संवाद किए। राहुल गांधी भी उनके साथ हंसते नजर आए। वे राहुल से जबरदस्ती गले लगते दिखे, जिसक बाद राहुल ने परेशान होने की एक्टिंग की। गौरतलब है कि इस तरह का एक एक्ट राहुल गांधी और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित पहले दिल्ली में भी कर चुके हैं। उसे इंदौर में एक स्टैंडअप कॉमेडियन के जरिए दोहराया गया। उसी एक्ट को लेकर भाजपा सबसे ज्यादा आहत है और कांग्रेस पर हमलावर है।

आस्था का कारोबार, सिनेमा की जीत: ‘हनुमान अंश’

कभी-कभी कोई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती, वह समाज के भीतर चलती है। ‘हनुमान अंश’ के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ दिखाई देता है। लगभग दो करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म तीन सौ करोड़ से ज़्यादा का वैश्विक कारोबार कर चुकी है। लेकिन इस वाक्य में सबसे महत्वपूर्ण शब्द दो करोड़ या तीन सौ करोड़ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण शब्द है, दर्शक।

‘हनुमान अंश’ की तीन सौ करोड़ से ज़्यादा की यात्रा को सिर्फ़ एक फ़िल्म की सफलता की तरह देखना शायद उसके साथ नाइंसाफ़ी होगी। यह उस दर्शक की कहानी भी है जो तेज़ी से बदलती दुनिया में किसी स्थिर, भरोसेमंद और आत्मीय चीज़ की तलाश में है। लेकिन क्या सिनेमा उसे सिर्फ़ विश्वास दे या विश्वास के भीतर सवाल करने की जगह भी?

कभी-कभी कोई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती, वह समाज के भीतर चलती है। ‘हनुमान अंश’ के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ दिखाई देता है। लगभग दो करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म तीन सौ करोड़ से ज़्यादा का वैश्विक कारोबार कर चुकी है। लेकिन इस वाक्य में सबसे महत्वपूर्ण शब्द दो करोड़ या तीन सौ करोड़ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण शब्द है, दर्शक। वह दर्शक, जिसने शुरुआत में इस फ़िल्म को शायद कोई बड़ी सिनेमाई घटना नहीं माना। जिसने फिर किसी दोस्त से इसके बारे में सुना। किसी परिवार के सदस्य ने कहा, “एक बार देखना”। किसी सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्सुकता जगाई। किसी ने फ़िल्म देख कर अपनी अनुभूति साझा की। और धीरे-धीरे एक फ़िल्म, फ़िल्म से बढ़ कर एक अनुभव बन गई।

यही सिनेमा की सबसे पुरानी और सबसे ताक़तवर मार्केटिंग है, किसी दूसरे इंसान का विश्वास। और इसलिए ‘हनुमान अंश’ को समझने के लिए हमें आज से नहीं, 1975 से शुरुआत करनी चाहिए। ‘जय संतोषी मां’। एक ऐसी फ़िल्म, जिसने उस दौर में धार्मिक सिनेमा को सिर्फ़ एक जॉनर नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामूहिक आस्था के अनुभव में बदल दिया। कई जगह दर्शक सिनेमाघर में फ़िल्म देखने नहीं, मानो दर्शन करने जाते थे। फूल चढ़ते थे, आरती होती थी, और फ़िल्म का पर्दा कुछ समय के लिए पूजा और सिनेमा के बीच की सीमा को धुंधला कर देता था।

सोचिए, 1975 का भारत। न सोशल मीडिया था, न इंस्टाग्राम, न यूट्यूब, न डिजिटल मार्केटिंग। लेकिन वर्ड ऑफ़ माउथ था। मोहल्ला था। परिवार था। भरोसा था। आज 51 साल बाद तकनीक बदल गई है। दर्शक की जेब में पूरा मीडिया संसार आ गया है। लेकिन मनुष्य की कुछ ज़रूरतें शायद उतनी नहीं बदलीं। उसे अभी भी उम्मीद चाहिए। उसे अभी भी किसी ऐसी कहानी की ज़रूरत है जो कहे कि अंधेरे के बाद उजाला होता है। उसे अभी भी किसी ऐसे पात्र की तलाश होती है जिसके सामने वह अपने निजी दुःख, अपनी असुरक्षा और अपनी असमर्थता रख सके। और शायद यही वह जगह है जहां आस्था सिनेमा से मिलती है।

हम अक्सर पूछते हैं कि लोग धार्मिक फ़िल्में क्यों देख रहे हैं? मुझे लगता है, हमें इसके उलट सवाल पूछना चाहिए। आज के समय में लोगों को ऐसी फ़िल्मों की ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है? हम एक ऐसे समय में हैं जहां जानकारी की कोई कमी नहीं है, लेकिन निश्चितता की बहुत कमी है। हमारे पास हर सवाल का उत्तर खोजने के लिए गूगल है, लेकिन हर बेचैनी का उत्तर नहीं है। हमारे पास दुनिया से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया है, लेकिन अपने भीतर टिके रहने का हुनर कम होता जा रहा है। हमारे पास विकल्प बहुत हैं, लेकिन शांति कम है। ऐसे समय में आस्था एक भावनात्मक आश्रय बन सकती है। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

मनुष्य जब अनिश्चितता से घिरता है, तो वह अर्थ खोजता है। कभी दर्शन में। कभी प्रेम में। कभी कला में। कभी राजनीति में। और कभी ईश्वर में। इसलिए किसी धार्मिक फ़िल्म के दर्शक को पिछड़ा हुआ, अंधविश्वासी या अविवेकी मान लेना शायद सबसे आसान और सबसे ग़लत रास्ता होगा। वह दर्शक भी हमारी तरह ही जटिल है। वह मंदिर भी जाता है और अस्पताल भी। वह भगवान से प्रार्थना भी करता है और डॉक्टर की रिपोर्ट भी देखता है। वह अपने बच्चे को विज्ञान पढ़ाता है और घर में पूजा भी करता है। भारत की असली कहानी शायद इसी सह अस्तित्व में है। और इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि आस्था हो या तर्क। सवाल यह है कि क्या आस्था और तर्क साथ रह सकते हैं? मेरे लिए जवाब होना चाहिए, हां।

भारतीय परंपरा की एक बड़ी खूबी यही रही है कि यहां प्रश्न पूछने की परंपरा भी उतनी ही पुरानी है जितनी प्रार्थना की। उपनिषदों में संवाद हैं। बुद्ध के सामने प्रश्न हैं। कबीर के यहां सवाल हैं। नानक की वाणी में जिज्ञासा है। हमारी आध्यात्मिक परंपरा ने हमेशा मनुष्य को सिर्फ़ सिर झुकाना नहीं सिखाया; कई बार उसने सिर उठाकर देखने को भी कहा है। फिर सिनेमा क्यों न पूछे? यहीं ‘हनुमान अंश’ मेरे लिए एक दिलचस्प फ़िल्म बन जाती है। एक संत की कहानी को पर्दे पर उतारना अपने आप में मुश्किल काम है। क्योंकि संत के जीवन में चमत्कार दिखाना आसान है, लेकिन उनकी मनुष्यता दिखाना मुश्किल। चमत्कार आंखों को आकर्षित करता है। मनुष्यता दिल में ठहरती है।

अगर किसी संत की पूरी सिनेमाई यात्रा सिर्फ़ इस बात पर टिकी हो कि उन्होंने कितने चमत्कार किए, तो हम शायद उनके सबसे बड़े चमत्कार को ही भूल जाएंगे कि उन्होंने लोगों के जीवन को कैसे छुआ? किसी डरे हुए आदमी को साहस देना क्या चमत्कार नहीं है? किसी टूटे हुए इंसान को अपने पैरों पर खड़ा कर देना क्या चमत्कार नहीं है? किसी भूखे को खाना देना? किसी अकेले के पास बैठना?

किसी के दुःख को बिना जज किए सुन लेना?

शायद सिनेमा का सबसे सुंदर आध्यात्मिक क्षण वह नहीं होता जब आसमान से कोई चमत्कार उतरता है। वह होता है जब एक इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा होता है। और यहीं से धार्मिक सिनेमा की अगली यात्रा शुरू हो सकती है। हमें संतों की कहानियां चाहिए। लेकिन हमें उनके भीतर के इंसान की कहानियां भी चाहिए। हमें आस्था चाहिए। लेकिन उसके साथ सवाल भी चाहिए। हमें चमत्कार चाहिए। लेकिन उसके साथ चरित्र भी चाहिए। हमें भगवान चाहिए। लेकिन उसके साथ इंसान भी चाहिए। क्योंकि अगर भगवान को बड़ा करने के लिए इंसान को छोटा करना पड़े, तो शायद हमने भगवान को समझा ही नहीं।

‘हनुमान अंश’ जैसी फ़िल्मों के बहाने एक और सामाजिक सवाल उठता है, जिस पर हमारी फ़िल्में बहुत कम बात करती हैं। जब कोई व्यक्ति भौतिक संसार छोड़कर आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है, तो पीछे कौन रह जाता है? उसकी पत्नी? उसके बच्चे? उसके माता-पिता? उसकी रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियां? हम अक्सर त्याग की कहानी सिर्फ़ उस व्यक्ति की नज़र से देखते हैं, जिसने घर छोड़ा। लेकिन जिसने घर में रहकर जीवन सम्भाला, उसका त्याग किस कहानी में है? यह सवाल किसी संत की महानता को कम नहीं करता, बल्कि त्याग की परिभाषा को और मानवीय बनाता है। और शायद यही वह जगह है, जहां भविष्य का आध्यात्मिक सिनेमा हमारे समय से संवाद कर सकता है।

आज की महिला अपने पति की आध्यात्मिक यात्रा की सिर्फ़ दर्शक नहीं है। वह उस यात्रा की सामाजिक कीमत को भी समझती है। आज का परिवार भी बदल चुका है। आज का दर्शक भी। इसलिए आने वाली धार्मिक फ़िल्में अगर सिर्फ़ पुराने सांचे दोहराएंगी, तो वे शायद उस दर्शक से आधा ही संवाद कर पाएंगी, जिसके लिए वे बनाई जा रही हैं। ‘जय संतोषी मां’ के समय आस्था का सिनेमाई अनुभव सामूहिक था। ‘हनुमान अंश’ के समय वह सामूहिक होने के साथ-साथ डिजिटल भी है। लेकिन दोनों के बीच एक अदृश्य धागा वही है- कहानी पर विश्वास।

और शायद सिनेमा का भविष्य भी यहीं छिपा है। अगर निर्माता इस सफलता से सिर्फ़ यह सीखेंगे कि “धार्मिक फ़िल्म बनाओ, कम बजट रखो और तीन सौ करोड़ कमाओ”, तो वे सबसे ज़रूरी बात नहीं समझेंगे। दर्शक फ़ॉर्मूला नहीं खरीदता। दर्शक विश्वास खरीदता है। और विश्वास की नकल नहीं की जा सकती।

एक और संत की कहानी बना देने से वही परिणाम नहीं आएगा। एक और चमत्कार दिखा देने से वही भाव पैदा नहीं होगा। एक और भक्ति गीत डाल देने से वही सामूहिक अनुभव नहीं बनेगा। क्योंकि दर्शक को कहानी में कुछ अपना मिलना चाहिए। यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता को केवल धार्मिक फ़िल्मों की सफलता कह देना भी अधूरा होगा। यह उस भारतीय दर्शक की वापसी है जो शायद बहुत समय से अपने सिनेमा में अपने सांस्कृतिक अनुभव की कोई सच्ची प्रतिध्वनि खोज रहा था।

लेकिन यहां सिनेमा की ज़िम्मेदारी भी शुरू होती है। आस्था को बेचने और आस्था को समझने में फ़र्क़ है। पहले रास्ते में फ़ॉर्मूला बनता है। दूसरे में सिनेमा। और मुझे उम्मीद है कि इस नई लहर में दूसरा रास्ता चुना जाएगा। ऐसी फ़िल्में बनेंगी जो धार्मिक हों, लेकिन प्रचारात्मक नहीं। जो आध्यात्मिक हों, लेकिन उपदेशात्मक नहीं। जो चमत्कार दिखाएं, लेकिन सवाल से न डरें। जो परंपरा का सम्मान करें, लेकिन इंसान की स्वतंत्र सोच का भी। क्योंकि हमारा संविधान भी नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासा की भावना विकसित करने की बात करता है।

इसका मतलब यह नहीं कि भारत को अपनी आस्था छोड़ देनी चाहिए। इसका मतलब शायद यह है कि भारत अपनी आस्था को इतना मज़बूत बनाए कि वह सवाल सह सके। मुझे लगता है, यही हमारे समय की सबसे सुंदर सिनेमाई संभावना है। एक ऐसी फ़िल्म जहां कोई बच्चा मंदिर में हाथ जोड़कर खड़ा हो और उसी शाम अपने पिता से पूछे- “भगवान होते कहां हैं”? और पिता उसके सवाल से डरने के बजाय मुस्कुराकर कहे- “शायद यह सवाल पूछना भी भगवान को खोजने का एक रास्ता है”। अगर हमारा सिनेमा वहां तक पहुंच गया, तो उसने सिर्फ़ फ़िल्म नहीं बनाई। उसने समाज के भीतर एक संवाद शुरू किया। और शायद ‘हनुमान अंश’ की असली उपलब्धि यही है कि उसने यह संवाद फिर से शुरू कर दिया है।

तीन सौ करोड़ की संख्या कल किसी और फ़िल्म की हो सकती है। लेकिन जिस समय का कोई सवाल सिनेमा के ज़रिए हमारे भीतर उतर जाता है, वह संख्या से कहीं ज़्यादा देर तक रहता है। आस्था रहे। ज़रूर रहे। क्योंकि आस्था मनुष्य को संभाल सकती है। लेकिन उसके साथ विवेक भी रहे। क्योंकि विवेक मनुष्य को गिरने से बचा सकता है। और सवाल? सवाल तो रहने ही चाहिए। क्योंकि जिस आस्था को एक सवाल से डर लगने लगे, वह शायद आस्था से ज़्यादा भय बन जाती है। और जिस आस्था के भीतर सवाल के लिए जगह हो, वह शायद इंसान को ईश्वर के थोड़ा और क़रीब ले जाती है। सिनेमा का काम हमारी आस्था छीनना नहीं है। उसका काम शायद इतना भर है कि वह हमें अपनी आस्था को थोड़ा और गहराई से देखने का मौक़ा दे। फ़िल्म ख़त्म होती है। लेकिन सवाल वहीं से शुरू होता है।

‘हनुमान अंश’ के तीन सौ करोड़ सिर्फ़ एक फ़िल्म की कमाई नहीं, उस दर्शक की तलाश भी हैं जो बदलती दुनिया में भरोसा, अर्थ और शायद अपने भीतर का कोई जवाब खोज रहा है।

बहरहाल, आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में है। देख लीजिएगा। (पंकज दुबे पॉप कल्चर क़िस्सागो, उपन्यासकार और यूट्यूब चैट शो ‘स्मॉल टाउन्स बिग स्टोरीज़”के होस्ट हैं।)

H-1B Visa पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, $1 लाख फीस का आदेश एक और साल के लिए बढ़ाया; भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले लाखों विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय IT कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम की निगरानी को सख्त करने वाले एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। इसके तहत H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने वाले आदेश की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। हालांकि, इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई अभी अदालत में जारी है, लेकिन ट्रंप के इस फैसले के बाद अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

बता दें की ट्रंप ने कुछ एम्प्लॉयर्स, थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट ग्रुप्स और आउटसोर्सिंग फर्मों पर आरोप लगाया है कि वे कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों से कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को बदलने के लिए इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने यह नया आदेश 18 सितंबर 2026 को जारी किया। इसका नाम “Enhancing Program Integrity and Interagency Coordination in the Administration of the H-1B Nonimmigrant Visa Program” है। इस आदेश का मकसद H-1B वीजा प्रोग्राम की निगरानी और नियमों को और सख्त करना है।

अमेरिका ने वेतन में अंतर और नौकरियों के नुकसान का हवाला दिया

आदेश के अनुसार, H-1B प्रोग्राम को खास हुनर ​​वाले और बहुत ज्यादा स्पेशलाइज्ड विदेशी अस्थायी कर्मचारियों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बनाया गया था। हालांकि, इसमें कहा गया है कि इस प्रोग्राम का “बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल” किया गया है, जिससे कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखा गया और वेतन कम हुआ।

व्हाइट हाउस ने दावा किया कि सस्ते H-1B कर्मचारियों की वजह से घरेलू वेतन पर दबाव पड़ता है। उसने कहा कि H-1B वीजा धारक, H-1B पर निर्भर उद्योगों में उसी तरह के काम करने वाले अमेरिका में जन्मे कर्मचारियों की तुलना में $9,000 से $20,000 कम कमाते हैं, जबकि समान वेतन का कानूनी नियम है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों ने 2022 से 2026 के बीच 8 लाख से 13 लाख अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालते हुए भी लाखों कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा की मांग की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि कुछ कंपनियों ने नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारियों से ही उनकी जगह लेने वाले विदेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दिलवाई।

आदेश में कहा गया, “सस्ते H-1B कर्मचारियों का गलत इस्तेमाल घरेलू वेतन पर दबाव डालता है। कानून के तहत H-1B कर्मचारियों को उनके घरेलू कर्मियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए, फिर भी H-1B वीजा धारक अमेरिका में जन्मे समान स्तर के कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम कमाते हैं। वेतन में यह अंतर $9,000 से शुरू होकर H-1B पर निर्भर उद्योगों में $20,000 तक पहुंच जाता है।”

आउटसोर्सिंग’ करने वाली कंपनियां चर्चा में

आदेश में कहा गया है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों का इस्तेमाल थर्ड-पार्टी क्लाइंट कंपनियों के अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने के लिए करती हैं। इसके बाद इन कंपनियों का काफी काम विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आदेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में इस तरह के आउटसोर्सिंग मॉडल पर काम करने वाली छह सबसे बड़ी H-1B इस्तेमाल करने वाली कंपनियों ने 25,000 से ज्यादा H-1B वीजा रजिस्ट्रेशन किए। आदेश में एक विदेशी मंत्री के बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया कि H-1B वीजा अब ‘आउटसोर्सिंग वीजा’ बन गया है।

वहीं, व्हाइट हाउस ने H-1B प्रोग्राम के इस कथित गलत इस्तेमाल को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता बताया है। उसके मुताबिक, अमेरिकी जांच एजेंसियों ने H-1B पर निर्भर कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ वीजा धोखाधड़ी, पैसे की हेराफेरी की साजिश और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर जांच की है।

आदेश में आगे कहा गया है कि इस तरह के दुर्व्यवहार अमेरिकियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने से हतोत्साहित कर सकते हैं और इन क्षेत्रों में अमेरिका की लीडरशिप को खतरे में डाल सकते हैं।

एजेंसियां ​​एम्प्लॉयर द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जांच करेंगी

नए आदेश के तहत, विदेश, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के सचिवों को H-1B वीजा की अर्जियों, लेबर कंडीशन एप्लीकेशन और वीजा की प्रक्रिया के दौरान वाणिज्य और शिक्षा विभाग के सचिवों के साथ मिलकर काम करना होगा। इसमें स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के एडमिनिस्ट्रेटर भी शामिल होंगे।

ये सभी एजेंसियां कर्मचारियों की सैलरी, रोजगार, शिक्षा, इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अन्य जानकारी आपस में साझा करेंगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि H-1B वीजा से जुड़े नियम इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के मुताबिक लागू किए जा रहे हैं।

नए आदेश के तहत इमिग्रेशन अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि H-1B वीजा के लिए स्पॉन्सर करने वाली किसी कंपनी ने पिछले एक साल में सीधे या किसी अन्य तरीके से कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि कंपनी भविष्य में ऐसी छंटनी करने की योजना तो नहीं बना रही है, जिससे समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों पर नकारात्मक असर पड़े।

आदेश के मुताबिक, 30 दिनों के भीतर, लेबर डिपार्टमेंट के ‘वेज एंड आवर डिवीजन’ को पहले जमा किए गए ‘लेबर कंडीशन एप्लीकेशन’ के डेटा की समीक्षा शुरू करनी होगी, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या स्पॉन्सर करने वाले एम्प्लॉयर्स के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई करने की रूरत है।

अमेरिकी सरकार की जांच में क्या सामने आया?

आदेश के मुताबिक, अमेरिका के कई सरकारी विभागों और एजेंसियों ने H-1B वीजा का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियों की जानकारी दी है। आरोप है कि कुछ कंपनियां कम वेतन और कम स्किल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए H-1B प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।

जांच में जिन कथित नियमों के उल्लंघन का जिक्र किया गया है, उनमें अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखना, नौकरी की जिम्मेदारियों और काम की परिस्थितियों के बारे में गलत जानकारी देना, ऐसी नौकरियों को ‘स्पेशलिटी ऑक्युपेशन’ बताना जो इसके योग्य नहीं हैं, जरूरी वेतन को कम दिखाना और फर्जी या संदिग्ध डिग्री देने वाले संस्थानों (डिप्लोमा मिल) की डिग्री के आधार पर H-1B आवेदन जमा करना शामिल है।

वहीं, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वर्कफोर्स की सुरक्षा और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए और कदम उठाने की जरूरत है, साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि H-1B प्रोग्राम राष्ट्रीय हित में काम करे।

इस आदेश के तहत विदेश, वाणिज्य, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभागों के सचिवों को इसे लागू करने के लिए जरूरी नियम, नीतियां और ऑपरेशनल गाइडेंस जारी करने या अपनाने का अधिकार दिया गया है।

व्हाइट हाउस ने कहा कि इस आदेश को लागू करते समय मौजूदा कानूनों और उपलब्ध फंड का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, यह भी कहा गया कि इस आदेश से अमेरिकी सरकार या उसकी एजेंसियों के खिलाफ कोई ऐसा कानूनी अधिकार या लाभ नहीं बनता, जिसे अदालत में लागू कराया जा सके।

क्या है H-1B वीजा कार्यक्रम?

अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1990 में शुरू किया गया यह वीजा कार्यक्रम विशेष रूप से उन प्रौद्योगिकी (टेक) कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत और चीन से प्रतिभाशाली पेशेवरों की भर्ती करना चाहती हैं। H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। तकनीकी, इंजीनियरिंग, आईटी, वित्तीय सेवाओं और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों पेशेवर हर साल इस वीजा के माध्यम से अमेरिका जाते हैं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से भारतीय और चीनी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किन लोगों पर लागू नहीं होगा आदेश

यह आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में मौजूद हैं और बाद में H-1B वीजा प्राप्त करते हैं। इसके अलावा मौजूदा H-1B वीजा के नवीनीकरण पर भी यह नियम लागू नहीं किया गया है.।इसी कारण नए आवेदकों और पहली बार वीजा प्रायोजन कराने वाली कंपनियों पर इसका प्रभाव अधिक माना जा रहा है।

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पावन दीयों का सियासी शस्त्रीकरण

गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। अब इस परंपरा में नरेंद्र भाई के ‘सेवा-संकल्प’ में पूरे एक महीने उत्सव और जुड़ने का हमें सौभाग्य मिला है।

ज़िंदगी रोशन करने के लिए अपने घर की मुंडेर पर दीया जलाने की हमारी परंपरा ज़्यादा नहीं तो कम-से-कम पांच हज़ार साल पुरानी तो है ही। मेरी दादी, मेरी नानी और फिर मेरी मां भी हर दिन गोधूलि बेला में घर के मंदिर और तुलसी के चौबारे पर घी का दीया जलाती थीं। मां जब तक थीं, उन्होंने इस रीत का अनवरत निर्वाह किया। वे नहीं रहीं तो बहुत अरसे तक मेरी पत्नी भी ऐसा ही करती रही। घर के छोटे-से मंदिर में रोज़ सुबह-शाम दीया-बाती करने का उस का नियम था। दिल्ली के घरों में चौबारा तो कहां से बनाएं, सो, तुलसी गमले में उगती है और मिट्टी का दीया वह हर शाम पूरे श्रद्धा भाव से उस पर रख दिया करती थी।

मगर कुछ बरस से यह नियम ज़रा लड़खड़ा-सा गया है। प्रतिदिन दीया बालने की पत्नी की हुमक अब वैसी नहीं रही है। एक तो कोरोना-काल में डर के मारे दिल्ली छोड़ कर बहुत दिनों मां, मैं और पत्नी अरण्यवास में चले गए तो गमले में लगी तुलसी सूख गई। और, सूखी तो ऐसी सूखी कि कई बार लगाने की कोशिश की, पर नहीं पनपी, तो नहीं पनपी। सो, तुलसी का दीया आजकल मौन है। फिर पत्नी-बेटियों के आग्रह पर अरसे बाद घर के भीतर हल्का-फुल्का नवीनीकरण कराया तो मंदिर के पट कुछ महीनों के लिए पूरी तरह बंद रखने पड़े और सुबह-शाम दीया लगाने का पत्नी का दस्तूर भंग हो गया। उस के बाद पट तो खुले, लेकिन दीये की निरंतरता नैपथ्य में चली गई।

नरेंद्र भाई मोदी के जन्मदिन पर देश भर में जले करोड़ों आशीर्वाद-दीयों ने मुझे दादी-नानी-मां-पत्नी के सहारे प्राणवान रहे अपने घर के परंपरागत दीये की याद दिला दी। वह दीया मेरे गांव, ननिहाल और जंगल-जंगल पदस्थ मेरे पिता के कवेलू-आवासों से ले कर अंततः दिल्ली तक के घर की सुखदायी-संतोषदायी जीवनीशक्ति बना रहा। दीये की यह भीनी टिमटिमाहट ही आज भी, जब-जब मन उदास होता है, हमारा संबल बनती है। सो, जब नरेंद्र भाई के जन्मदिन पर आशीर्वाद-दीये जलाने के आयोजन-प्रयोजन की होड़ में लगे उन के कल्याणाकांक्षियों की सघन उंदुर-दौड़ मैं ने देखी तो मेरे तो होश फ़ाख़्ता हो गए। मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि सनातनी सभ्यता की आधारशिला पावन दीये को भी कभी ऐसे सियासी शस्त्रीकरण का ज़रिया बनाने की हद तक हमारे हुक्मरान उतर सकते हैं।

मेरा जन्म मध्यप्रदेश में हुआ। अगर उसे लालन-पालन कहा जा सके तो लालन-पालन भी मध्यप्रदेश में हुआ। औपचारिक शिक्षा भी मध्यप्रदेश में हुई। पत्रकारिता के संस्कार भी मध्यप्रदेश से मिले। जब राजनीति में कूदने का चस्का लगा तो उस की मैदानी धरती भी मध्यप्रदेश ही रही। तो ज़ाहिर है कि मध्यप्रदेश से अतिरिक्त लगाव मेरी धमनियों में है। इसलिए नरेंद्र भाई के लिए देश भर में बुधवार को रोशन किए गए दीयों में मेरी नज़र सब से पहले मध्यप्रदेश के दीयों पर पड़ी। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस वज़ह से थोड़े परिचित रहे हैं कि वे भी उज्जैन के उसी विक्रम विश्वविद्यालय से पढ़ कर निकले हैं, जहां से मैं। विक्रम की शिक्षण-अध्ययन परंपरा बहुत अर्थपूर्ण और संजीदा मानी जाती रही है। महाकाल के मंदिर से उत्तर दिशा में पांच-छह किलोमीटर दूर आज भी सांदीपनि ऋषि का आश्रम मौजूद है। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण, उन के बड़े भाई बलराम और सुदामा ने एक साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

तो मुझे लगा कि हमारे मोहन यादव में सांदीपनि की धरती की धूल का कुछ तो असर ज़रूर होगा। मगर फिर मैं ने पाया कि नरेंद्र भाई को आशीर्वाद देने के लिए 3 करोड़ 55 लाख दीये तो अकेले मध्यप्रदेश में जलाए गए। मुख्यमंत्री के ख़ुद के गृह-नगर उज्जैन में महाकाल महालोक के आसपास और क्षिप्रा नदी के घाटों पर 33 लाख 27 हज़ार दीये जला कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। अब तक नहीं समझ पा रहा हूं कि इस तिलिस्म की रचना पर गर्व करूं या दूर कहीं जा कर किसी चुल्लू की तलाश में जुटूं? मैं तो अब तक घर-बाहर के मंदिर में आनंद से झूमती दीये की लौ में ही ऐसे शक्तिपुंज के दर्शन करता रहा हूं कि ये लाखों-करोड़ों दीयो की आक्रामक दीपशिखाएं तो मेरे सामने डेढ़ दर्जन परमाणु अस्त्र ढो कर अठारह हज़ार किलोमीटर दूर तक चली जाने वाली सटन-2 मिसाइल का दृश्य पेश कर रही हैं।

नरेंद्र भाई के स्वयं गृह-प्रदेश गुजरात में साढ़े अठारह हज़ार स्थानों पर 88 लाख दीयों ने अपनी माटी के लाल पर आशीष बरसाया। अहमदाबाद की कांकरिया झील किनारे सवा लाख और अटल-पुल पर 76 हज़ार दीये जलाए गए। सूरत में दस हज़ार स्थानों पर दस लाख दीये जले। अहमदाबाद के विश्व उमियाधाम में नरेंद्र भाई के जीवन के 76 बरस पूरे होने पर 76 हज़ार दीये प्रज्वलित कर आरती की गई। गृह मंत्री अमित भाई शाह नरेंद्र भाई के जन्मस्थान वडनगर पहंुचे और आरती-पूजन समारोह का हिस्सा बने। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने भी दीयों की झड़ी लगा दी। नरेंद्र भाई के निर्वाचन क्षेत्र बनारस में दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और काशी विष्वनाथ धाम क्षेत्र में 5 लाख से अधिक दीये जले। राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों के साथ हज़ारों प्रज्वलित दीयों से बनाई गई नरेंद्र भाई की आकृति की आरती उतारी।

बिहार में 21 लाख आशीर्वाद-दीये जले। छत्तीसगढ़ में 36 लाख दीये जले। पश्चिम बंगाल में एक करोड़ घरों में दीप प्रज्वलन प्रायोजन हुआ। राजस्थान से ले कर महाराष्ट्र तक, आंध्र प्रदेश से ले कर अरुणाचल तक, ओडिशा से ले कर गोवा तक और हरियाणा से ले कर असम, त्रिपुरा, मणिपुर तक हर मतदान केंद्र के क्षेत्र को इकाई मान कर दीप प्रज्वलन के कार्यक्रम आयोजित हुए। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से अपने-अपने घरों के बाहर पांच-पांच, ग्यारह-ग्यारह दीये जलवा कर नरेंद्र भाई मोदी को शुभाशीष दिलवाया गया। भारतीय जनता पाटी की सरकारों वाले 22 राज्यों के बीच इस मामले में एक-दूसरे को पटखनी देने की होड़-सी मच गई।

आजकल देश भर में गणपति विराजे हुए हैं। गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में तेजाजी महाराज का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाता है। हमारे देश में प्रमुख से प्रमुख देवी-देवताओं और लोकदेवताओं तक के जन्मोत्सव कई दिनों तक मनाने की प्राचीन परंपरा है।

सो, भला हुआ कि नरेंद्र भाई 76 के हुए तो अब इस परंपरा में पूरे एक महीने मनाया जाने वाला सालाना ‘सेवा-संकल्प’ उत्सव और जुड़ने का सौभाग्य हमें मिल गया है। भारत एक उत्सवधर्मी देष है। हम हर बात का उत्सव मनाते हैं। जब सात बरस पहले नरेंद्र भाई ने कहा था कि ‘डर होना चाहिए, डर अच्छी चीज़ है’ तो मुझे नहीं मालूम था कि एक दिन आएगा कि वे मेरे मन के दीये को भी सियासी-धमक का डर फैलाने के साधन में तब्दील कर लेंगे। नरेंद्र भाई के लिए एक सद्भावना-दीप मैं भी दीप्तिमान करने का मेरा भी मन था। मगर अब मेरे उंगलियां ही नहीं, टांगें तक थर-थर कांप रही हैं।

Ranbir Kapoor-Alia Bhatt: रणबीर कपूर-आलिया भट्ट ने PM मोदी को दिया जन्मदिन का तोहफा, मुंबई के 20 स्कूलों का कराएंगे कायाकल्प

Ranbir Kapoor-Alia Bhatt: आलिया भट्ट ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई दी। एक्ट्रेस ने यह भी घोषणा करते हुए कहा कि वह और उनके पति- एक्टर रणबीर कपूर 20 स्कूलों को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर #SevaSankalpAbhiyaan का समर्थन करेंगे।

पीएम मोदी के लिए जन्मदिन का संदेश शेयर करते हुए आलिया ने लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी को जन्मदिन की बधाई! आने वाला साल आपके लिए सेहतमंद और खुशियों भरा हो। #SevaSankalpAbhiyaan की भावना सामूहिक प्रयास और समाज को कुछ वापस देने की शानदार सोच को दिखाती है। इस दिन को मनाने और इस नेक काम में सहयोग करने के लिए रणबीर और मैं @mybmc की सिफारिशों के अनुसार 20 स्कूलों को बेहतर बनाने का संकल्प ले रहे हैं, ताकि हमारे बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए बेहतर और अच्छी सुविधाओं वाली जगहें मिल सकें।”

आलिया का यह पोस्ट तब आया जब कई मशहूर हस्तियों ने पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी।

सेलेब्स ने पीएम मोदी को बधाई दी

X पर सलमान खान ने लिखा, “माननीय पीएम साहब, आपको जन्मदिन मुबारक हो। नरेंद्र भाई मोदी आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। जय हिंद।” शाहरुख खान ने भी अपने X हैंडल से PM मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने लिखा, “माननीय PM @narendramodi जी, आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। आप हमेशा अच्छी सेहत, खुशी और संतुष्टि के साथ रहें। देश को प्रेरित करने की ताकत और सकारात्मकता आपमें हमेशा बनी रहे।”

अक्षय कुमार ने X पर लिखा, “आज हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन है और यह दिन सेवा के संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। मेरा मानना ​​है कि जन्मदिन मनाने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं हो सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “हम किसी की सेवा करें, किसी जरूरतमंद की मदद करें, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाएं… बस यही एक साधारण सा संकल्प। जन्मदिन मुबारक हो @narendramodi जी। हमारे महान देश को प्रेरित करते रहें। जय भारत। जय महाकाल।”

मोहनलाल ने X पर लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। देश की तरक्की के लिए आपका अथक समर्पण लाखों लोगों को प्रेरित करता रहता है। यह साल आपके लिए अच्छी सेहत, ताकत और देश की सेवा में लगातार सफलता लेकर आए।”एक्टर और MP कंगना रनौत ने PM मोदी के साथ एक तस्वीर शेयर की और दिल से एक नोट लिखा। जैकी श्रॉफ ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर PM मोदी के साथ तस्वीर शेयर की और लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई!”

पीएम मोदी के जन्मदिन पर बीजेपी उनके 25 साल के जन-सेवा कार्य के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी। इससे पहले 9 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि पीएम मोदी 7 अक्टूबर को जन-सेवा के 25 साल पूरे करेंगे और इस मौके पर बीजेपी एक महीने तक चलने वाला विशेष अभियान ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाएगी।

UP Smart Schools: एक ओर यूपी के 14,429 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने का ऐलान, दूसरी ओर नोएडा के स्कूल की CJP ऑडिट पर बवाल

UP smart schools: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत 14,429 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूलों’ के तौर पर विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस योजना के तहत, राज्य के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चुने गए स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास शुरू की जाएंगी। इन स्कूलों के छात्रों को स्मार्ट क्लास, ICT लैब, डिजिटल किताबें और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मिलेगी। टेक्नोलॉजी-आधारित लर्निंग सिस्टम के तहत शिक्षक टैबलेट का भी इस्तेमाल करेंगे।

300 करोड़ रुपये मंज़ूर

योगी सरकार ने इस पहल के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। स्मार्ट क्लास लगाने के लिए ‘श्री ट्रॉन इंडिया लिमिटेड’ को लागू करने वाली एजेंसी के तौर पर चुना है। इंस्टॉलेशन का काम कॉम्पिटिटिव टेंडरिंग (प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया) के जरिए किया जाएगा। प्रस्तावित दर 2,07,910 रुपये प्रति स्कूल तय की गई है, जिसमें सैनिटेशन चार्ज और GST शामिल हैं। अगर टेंडर प्रक्रिया में दर कम आती है, तो सरकार 300 करोड़ रुपये की सीमा के भीतर बची हुई रकम का इस्तेमाल और स्कूलों को कवर करने के लिए कर सकती है।

1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा

राज्य में पहले से ही 32,000 से ज़्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास चल रही हैं। 15,000 से ज्यादा स्कूलों में ICT लैब की सुविधा भी है। जबकि 1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा दी गई है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए हैं। उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास 2021 में शुरू हुई थीं। जबकि इनका औपचारिक संचालन 2022-23 शैक्षणिक सत्र से शुरू हुआ।

नई स्मार्ट स्कूल योजना सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की पहुंच को और बढ़ाएगी। सरकार छात्रों की संख्या और एनरोलमेंट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास और ICT लैब सुविधाओं का विस्तार करेगी। इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है।

CJP ने नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत संगठन ने युवाओं से अपने आसपास के स्कूलों का निरीक्षण करने और शिक्षण सुविधाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने की अपील की। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि 15 अगस्त से जारी इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को अपने क्षेत्र में स्कूलों की स्थिति और वहां दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

दास ने पत्रकारों से कहा, “आज हम ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत एक स्कूल का ऑडिट करने के लिए नोएडा आए हैं। हम देखना चाहते हैं कि यहां बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं। चूंकि, नोएडा उत्तर प्रदेश के बेहतर जिलों में से एक है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि यहां के स्कूलों की स्थिति अच्छी होगी।” उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को भी आगे आकर अपने आसपास के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।

ये भी पढ़ें- MDR Charges Row: 96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क! वित्त मंत्रालय ने बताया- UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?

इससे पहले, दास ने X पर एक पोस्ट में कहा था कि वह अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कथित तौर पर प्रताड़ित किए गए और अनुचित तरीके से जेल में डाले गए लोगों के परिजन और मित्रों से मुलाकात करेंगे। दास ने कहा था कि संविधान उचित वेतन की मांग करने और अमानवीय रूप से लंबी पाली के खिलाफ प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करता है।

Gurugram Biker Case: टक्कर मारने के आरोपी कल्याण बैंसला के वकील ने महिला बाइकर को लेकर किया बड़ा दावा, केस में आया नया ट्विस्ट!

Gurugram Hit-And-Run Case: गुरुग्राम पुलिस ने ‘हिट-एंड-रन’ के मामले में आरोपी कल्याण बैंसला समेत दो लोगों को राजस्थान के दौसा जिले से गिरफ्तार कर लिया है। दौसा सदर के थानाधिकारी युधिष्ठिर सिंह ने बताया कि गुरुग्राम पुलिस की टीम ने थाने को जानकारी दी है कि उसने दौसा के आगरा रोड इलाके से बैंसला और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है। सिंह ने कहा, “गुरुग्राम पुलिस ने हिट-एंड-रन मामले के सिलसिले में कल्याण बैंसला और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है।” इस बीच, बाइक सवार महिला को टक्कर मारने का आरोपी कल्याण बैंसला के वकील ने अदालत में मंगलवार को एक बड़ा दावा किया।

आरोपी ने सभी आरोपों को किया खारिज

जानबूझकर कार से टक्कर मारने और परेशान करने के आरोपों को खारिज करते हुए गुरुग्राम गोल्फ कोर्स रोड दुर्घटना मामले में आरोपी ड्राइवर कल्याण बैंसला का पक्ष रख रहे वकील नवीन बैंसला ने मंगलवार को दावा किया कि यह घटना हिट-एंड-रन नहीं। बल्कि तेज़ रफ़्तार और रेसिंग के कारण हुई आपसी लापरवाही का मामला है।

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए वकील ने जानबूझकर टक्कर मारने के दावों को खारिज कर दिया। वकील ने आरोप लगाया कि 20 से 30 मोटरसाइकिल सवारों का एक ग्रुप सड़क पर स्टंट कर रहा था और अन्य वाहनों को रेस के लिए उकसा रहा था।

‘हिट-एंड-रन का मामला नहीं’

वकील नवीन बैंसला ने कहा, “यह हिट-एंड-रन का मामला नहीं है। यह लापरवाही का मामला है। यह पूरी तरह से तेज रफ्तार और लापरवाह व्यवहार के कारण हुआ। वे एक-दूसरे के साथ रेस लगा रहे थे। बाइकर्स का एक बड़ा ग्रुप था। लगभग 20-30 राइडर्स एक साथ थे। सड़क के नियमों का पालन करने के बजाय, वे तेज रफ़्तार से गाड़ी चला रहे थे और स्टंट कर रहे थे। वे अन्य वाहनों को ताने मार रहे थे और परेशान कर रहे थे। उन्हें रेस या ओवरटेक करने के लिए उकसा रहे थे।””

उन्होंने तर्क दिया कि टक्कर इसलिए हुई क्योंकि कार और दोपहिया वाहन दोनों तेज रफ्तार से चल रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप वाहनों पर से कंट्रोल खो गया। वकील ने कहा, “कार और बाइक के बीच टक्कर सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि वे जिस रफ़्तार से गाड़ी चला रहे थे। वह बहुत ज्यादा तेज थी। यह पूरी तरह से लापरवाही का मामला है। इसमें और कुछ नहीं है। यह बस एक ऐसा मामला था जिसमें दोनों गलत थे। वे तेज रफ्तार से रेस लगा रहे थे, नियंत्रण खो बैठे और वाहन आपस में टकरा गए।”

शराब पीकर कार चलाने के आरोपों को किया खारिज

पीड़िता के इस दावे को खारिज करते हुए कि कार में सवार लोग नशे में थे। वकील ने जोर देकर कहा कि ड्राइवर सुबह-सुबह अपने परिवार के सदस्यों के साथ यात्रा कर रहा था। उसने शराब नहीं पी रखी थी।

वकील ने कहा, “कल्याण बैंसला मेरे गांव के रहने वाले हैं। वह बहुत अच्छे इंसान हैं। वह नेशनल और इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी हैं। उनके परिवार के खिलाफ आज तक कोई शिकायत नहीं आई है। समाज में उनके परिवार का बहुत सम्मान है। वे शराब नहीं पी रहे थे। यह घटना सुबह 7 बजे हुई। उनके परिवार के सदस्य उनके साथ थे। शराब पीने के दावे पूरी तरह से झूठे हैं। वह एक जिम ट्रेनर और जिम के मालिक हैं।”

पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी

गुरुग्राम में कार की टक्कर से घायल हुई बाइक सवार महिला ने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो जारी कर आरोपी कल्याण बैंसला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद उसके खिलाफ अब हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। बैंसला ने दावा किया था कि यह महज एक दुर्घटना थी।

शिवानी चौहान उर्फ सिया ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर डाले गए वीडियो में सवाल किया कि अगर बैंसला दुर्घटना को लेकर वास्तव में परेशान था तो टक्कर लगने के बाद वह घटनास्थल पर क्यों नहीं रुका। गुरुग्राम पुलिस ने मामले में अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास का आरोप दर्ज किया है जिसमें 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है।

गुरुग्राम पुलिस ने इससे पहले मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सेक्टर-56 थाने में मामला दर्ज किया था। सहायक पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) अभिलक्ष जोशी के अनुसार, आरोपी चालक के खिलाफ भारतीय बीएनएस की धारा 281 (लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 125 (चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सिया ने यह आरोप भी लगाया कि महिला बाइक सवार होने के कारण उसे निशाना बनाया गया। उसे रोकने की जानबूझकर कोशिश की गई। उसने दावा किया कि उसकी जान जा सकती थी और दुर्घटना के बाद आरोपी ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि वह सुरक्षित है या नहीं।

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