Gurugram Hit and Run: महिला बाइकर को टक्कर मारने वाला आरोपी दौंसा से अरेस्ट, हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

Gurugram Hit and Run: गुरुग्राम पुलिस ने मंगलवार को राजस्थान के दौसा से आरोपी कल्याण बैंसला को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने यह कदम गोल्फ कोर्स रोड पर एक महिला बाइकर के साथ हुई कथित हिट-एंड-रन की घटना के CCTV फुटेज की जांच के बाद उठाया है। बता दें की उस पर हत्या की कोशिश करने का आरोप लगा है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 भी लगा दी है। यह धारा हत्या की कोशिश से जुड़ी है और इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक कार कथित तौर पर मोटरसाइकिल सवार महिला को टक्कर मारकर मौके से भागती हुई दिखाई दे रही है।

CCTV फुटेज की जांच के बाद हत्या की कोशिश का आरोप जोड़ा गया

ऑनलाइन फुटेज सामने आने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने घटना का स्वतः संज्ञान लिया। सेक्टर 56 थाने में चल रही जांच के दौरान, अधिकारियों ने इलाके के CCTV फुटेज की जांच की।

CCTV फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने हत्या की कोशिश का आरोप जोड़ा। शुरुआत में यह मामला BNS की धारा 281 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) और धारा 125 (चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज किया गया था। पुलिस ने पहले बताया था कि आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे पकड़ने के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं।

बता दें कि यह Hit and run की घटना रविवार को गोल्फ कोर्स रोड पर हुई, जब एक महिला, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी पहचान ‘सिया’ के तौर पर बताई है, बाइकर्स के एक ग्रुप के साथ अप्रिलिया RS 457 चला रही थी।

बाइक से गिरी महिला बाइकर

मोटरसाइकिल पर लगे कैमरों की फुटेज के अनुसार, एक कार ग्रुप के पास आई और सिया की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से वह बाइक से गिर गईं और सड़क पर कई मीटर तक घिसटती चली गईं।

सिया को मामूली चोटें आईं, लेकिन उन्होंने कहा कि वह अभी भी शारीरिक दर्द और इस घटना के भावनात्मक असर से जूझ रही हैं।

CNN-News18 से खास बातचीत में सिया ने कहा, “मेरे घुटनों में दर्द है, पूरे शरीर में दर्द हो रहा है। मैं जल्द ठीक होना चाहती हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं बहुत बड़े सदमे में हूं।”

उन्होंने टक्कर से पहले ड्राइवर के व्यवहार को भी याद किया।

उन्होंने CNN-News18 को बताया, “मुझे नहीं पता कि कार गोल्फ कोर्स रोड पर कब आई। उसने पहले थंब्स अप दिखाया और फिर अजीब-अजीब इशारे करता रहा।”

गौरतलब है कि सिया ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि उनकी मोटरसाइकिल के पास आने से पहले कार ने उनके ग्रुप का पीछा किया था। उन्होंने दावा किया कि कार में सवार लोगों ने उनके साथ बदतमीजी की और जब उन्होंने दूरी बनाए रखने के लिए कहा, तो उन्होंने गाड़ी रोकने को कहा। सिया ने यह भी आरोप लगाया कि वे नशे में लग रहे थे।

फुटेज में कार को उनकी बाइक को टक्कर मारते और फिर वहां से चले जाते हुए देखा जा सकता है।

आरोपी ने टक्कर की बात मानी, लेकिन जान-बूझकर टक्कर मारने से किया इनकार

जिम के मालिक बैंसला, जो खुद को इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी बताते हैं, ने माना है कि टक्कर हुई थी, लेकिन उन्होंने सिया को जान-बूझकर टक्कर मारने से इनकार किया।

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि घटना के समय वह अपनी बहन और दो कजिन के साथ यात्रा कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहा था। मैंने उस युवती के प्रति कोई गलत इशारा नहीं किया; मैंने बस उससे अपनी बाइक धीरे चलाने के लिए कहा था। मैं मानता हूं कि टक्कर हुई थी। अगर मैं उसी समय रुक जाता, तो वे लोग हमें पीट देते।”

बैंसला ने दावा किया कि लगभग 20 से 22 मोटरसाइकिल सवारों ने उनकी कार को ओवरटेक किया था और उन्हें शुरू में पता नहीं चला कि उनमें एक महिला भी शामिल थी।

उन्होंने कहा, “वह बिना शीशे (मिरर) में देखे मुड़ रही थीं; तभी, एक यू-टर्न के पास, मेरा कार से कंट्रोल छूट गया और टक्कर हो गई। यह मेरी गलती थी; मैं इसे मानता हूं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि टक्कर के बाद उन्होंने रुकने के बारे में सोचा था, लेकिन बाइक सवारों द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज किए जाने के बाद उन्होंने न रुकने का फैसला किया।

बैंसला ने कहा, “मेरा परिवार मेरे साथ था, इसलिए मुझे डर था कि अगर हम रुके तो वे हमें पीट सकते हैं। मैंने उनसे बात करने के लिए एक रेड लाइट पर कार रोकी भी थी और उन्हें समझाया था कि इसमें मेरी गलती नहीं थी। उसके बाद, मेरे भाई ने वहां रुकने से मना कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरे खिलाफ पहले का कोई मामला नहीं है। अब मुझे परेशान किया जा रहा है।”

वकील का दावा- महिला 140-170 किमी/घंटे की रफ्तार से चला रही थी बाइक

बैंसला के वकील नवीन बैंसला ने बताया कि जब यह घटना हुई, तब उनके क्लाइंट दिल्ली में एक रिश्तेदार के घर से अपने परिवार के साथ लौट रहे थे।

“मेरे क्लाइंट दिल्ली में एक रिश्तेदार के घर से अपने परिवार के साथ लौट रहे थे। लगभग 25 राइडर्स लगातार मेरे क्लाइंट से आगे निकल रहे थे; महिला 140-170 kmph की रफ्तार से गाड़ी चला रही थी, तभी उसने दाईं ओर मुड़ने की कोशिश की और मेरे क्लाइंट ने बाईं ओर मुड़ने की कोशिश की, जिससे टक्कर हो गई।”

घटना में शामिल कार मनीष के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसने कहा कि टक्कर के समय वह गाड़ी नहीं चला रहा था।

मनीष ने कहा, “मैं सेना में काम करता हूं और हां, यह गाड़ी मेरी ही है। मैं काम पर था और मेरे दोस्त कल्याण सिंह ने मेरी कार ली थी।”

उसके चाचा करतार पोसवाल ने भी कहा कि बैंसला ने गाड़ी ली थी और परिवार को उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

महिला के पिता ने सख्त कार्रवाई की मांग की

सिया के पिता ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में मीडिया रिपोर्ट से पता चला, क्योंकि उनकी बेटी ने शुरू में उन्हें इसके बारे में नहीं बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि टक्कर जानबूझकर मारी गई थी और इस घटना को महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया।

उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” बाद में सिया ने कहा कि वह कानूनी कार्रवाई करेंगी और अपने वकील के साथ FIR दर्ज कराएंगी। उन्होंने समाचार संगठनों से यह भी अनुरोध किया कि वे उनकी पहचान उजागर न करें या उनका चेहरा न दिखाएं।

वहीं, विवाद के बाद बैंसला ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया है।

गुरुग्राम पुलिस ने दोहराया है कि वह सड़क पर होने वाले झगड़ों (रोड रेज), लापरवाही से गाड़ी चलाने और गैर-कानूनी व्यवहार के प्रति ‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है, और कहा कि इसमें शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

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14 सितंबर को हिंदी दिवस का आगमन संपूर्ण हिंदी जगत के लिए उमंग, उत्साह और ऊर्जा से भरा उत्सव होता है। इसका समापन प्रायः 'हिंदी सप्ताह' या 'हिंदी पखवाड़े' के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करने तथा हिंदी सेवियों, प्रेमियों एवं साधकों के श्रेष्ठ कार्यों के सम्मान के साथ एक औपचारिकता (कर्मकांड) के रूप में हो जाता है।

 

हिंदी दिवस पर हम अत्यंत आत्मविश्वास के साथ हिंदी की गरिमा, महिमा और उसके अप्रतिम गौरव का गुणगान तो करते हैं, किंतु वास्तव में हम इसकी वर्तमान दशा को लेकर अपेक्षित रूप से गंभीर नहीं होते। जबकि यह दिन हमारे आत्म-मूल्यांकन और आत्म-विश्लेषण का है कि हमने हिंदी के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की दिशा में क्या महती योगदान दिया है।

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यह निर्विवाद है कि हिंदी हमारी अस्मिता की पहचान और भारत की आत्मा है। यह हमारी सांस्कृतिक चेतना को सूक्ष्मता से अभिव्यक्त करने वाली अनमोल संपदा है। यह हमारे सार्वभौमिक मूल्यों की संरक्षिका है, जो समग्र राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोती है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि एक समृद्ध, सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिक विरासत की संवाहिका है। यह 'वसुधैव कुटुंबकम' अर्थात् वैश्विक बंधुत्व और एकता की भावना को जाग्रत कर जन-जन में आत्म-सम्मान का भाव भरती है। परस्पर सम्मान, जुड़ाव, विनम्रता, सहिष्णुता, संवेदनशीलता और समरसता हिंदी की अंतर्निहित प्रकृति है। इसी कारण यह जन-जन की अभिलाषा के अनुरूप पूरे राष्ट्र की संपर्क भाषा बनी है।

 

मध्यकाल में हिंदी भक्ति आंदोलन के धार्मिक और सामाजिक सुधारों का माध्यम बनी तथा स्वाधीनता संग्राम के राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वाले आदर्शों को इसने सशक्त स्वर दिया। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लंबे संघर्ष के बाद 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान किया गया कि 'संघ की आधिकारिक भाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी।' हालांकि, संविधान लागू होने के समय से 15 वर्षों की अवधि तक संघ के उन सभी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति भी दी गई।

 

अनुच्छेद 343 की धारा 3 में यह व्यवस्था थी कि संसद 15 वर्ष की अवधि के पश्चात विधि द्वारा अंग्रेजी के प्रयोग को बढ़ा सकेगी। खेर आयोग और पंत समिति की रिपोर्टों के आधार पर 1963 में राजभाषा अधिनियम बनाकर यह प्रावधान कर दिया गया कि 26 जनवरी 1965 के बाद भी अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा। इसमें यह शर्त जोड़ दी गई कि अंग्रेजी तब तक बनी रहेगी जब तक हिंदी को राजभाषा अपनाने वाले सभी राज्यों के विधानमंडल इसे समाप्त करने का संकल्प पारित न कर दें। इस व्यवस्था ने अंग्रेजी के प्रयोग को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया और एक भी राज्य की असहमति पर हिंदी अनिवार्य राजकाज की भाषा बनने से वंचित रह गई।

 

डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भाषा के प्रश्न को केवल भावुकता से नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा। संस्कृत हो या हिंदी, उनका मानना था कि ये भाषाएं भारत को एकता के सूत्र में बांधकर भाषाई विवादों से बचा सकती हैं। 9 भाषाओं के ज्ञाता और 32 उपाधियों के धारक डॉ. आंबेडकर ने अंग्रेजी के बजाय हिंदी में समाचार पत्र निकाले, जिससे वे वंचित समाज की मुखर आवाज बन सके। वे प्रांतीय भाषाओं के विकास के पक्षधर थे, किंतु राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का ही समर्थन करते थे। भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी डॉ. आंबेडकर ने 'एक भाषा-एक राज्य' के स्थान पर 'एक राज्य-एक भाषा' की अवधारणा का समर्थन किया था।

 

हमारे राष्ट्र-निर्माताओं ने बहुत सोच-समझकर हिंदी की स्वीकार्यता को रेखांकित किया था:

महात्मा गांधी: “यदि हम भारत को एक राष्ट्र बनाना चाहते हैं, तो हिंदी ही हमारी राष्ट्रभाषा हो सकती है। राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: “प्रांतीय ईर्ष्या-द्वेष को दूर करने में जितनी सहायता हिंदी प्रचार से मिलेगी, उतनी किसी अन्य साधन से नहीं।”

महर्षि दयानंद सरस्वती: “हिंदी के माध्यम से संपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।”

के. एम. मुंशी: “हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना नहीं है, वह तो पहले से ही है।”

 

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा था—

“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

पै निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को सूल॥”

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसी मूलमंत्र को स्वीकारते हुए मातृभाषाओं और लोकभाषाओं को प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक विशेष स्थान दिया गया है। हालांकि, मातृभाषा में शिक्षा का क्रियान्वयन पर्याप्त मानवीय और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। हिंदी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह केवल प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रहकर वैश्विक विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय शोध और ज्ञान की बुनियाद बने।

 

किसी भाषा का भविष्य केवल शासकीय आदेशों या तंत्र पर निर्भर नहीं होता; वह भाषा-भाषियों के सृजनात्मक समर्पण, अपनत्व और निस्वार्थ संकल्प-शक्ति से जीवंत रहता है। यदि हमारा हिंदी-प्रेम केवल 14 सितंबर के उत्सव तक सीमित है, तो हमें आत्मचिंतन की आवश्यकता है।

 

मनुस्मृति का कथन है- “धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः” (जो धर्म का नाश करता है, उसका नाश हो जाता है और जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है)। भाषा के संदर्भ में भी यही सत्य है—जो समाज अपनी भाषा की उपेक्षा करता है, उसकी संस्कृति का क्षरण निश्चित है।

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि “अन्य भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी।” अतः हिंदी का यह दायित्व है कि वह अन्य भारतीय भाषाओं को सहेली मानकर परस्पर सम्मान, सहयोग और आदान-प्रदान का वातावरण बनाए।

 

आज सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डिजिटल युग में हिंदी के समक्ष अनंत संभावनाएं हैं। एक तरफ जहां सूचनाओं का विशाल भंडार है, वहीं फर्जी व गुणवत्ताहीन सामग्री से बचकर प्रामाणिक ज्ञान का चयन करना एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल दुनिया में अपनी उपादेयता बनाए रखने के लिए हिंदी में उच्चस्तरीय ज्ञान-कौशल और समृद्ध डिजिटल सामग्री का निर्माण अनिवार्य है।

 

हिंदी के सर्वांगीण विकास के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता है। आधुनिक विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, एआई, अर्थशास्त्र, खगोल, भूगोल और दर्शन जैसे विषयों पर हिंदी में मौलिक व प्रामाणिक ग्रंथों का सृजन युद्ध स्तर पर होना चाहिए।

 

जिस दिन हिंदी रोजगार की कुंजी और अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान का प्रवेश द्वार बन जाएगी, उसी दिन 'हिंदी दिवस' का आयोजन सही मायनों में सार्थक होगा।

 

कोटि-कोटि कंठों की भाषा,

जन-गण की मुखरित अभिलाषा।

हिंदी है पहचान हमारी,

हिंदी है हम सबकी परिभाषा॥

 

लेखक: डॉ. अशोक कुमार भार्गव (पूर्व आईएएस)

संपर्क: 9425427525 | ईमेल: dr.ak.bhargava2022@gmail.com

IND vs AFG: क्या बारिश बनेगी भारत-अफगानिस्तान मुकाबले में विलेन? जानें क्या कहता है वेदर रिपोर्ट

भारत और अफगानिस्तान के बीच 3 मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। फैंस इस मुकबाले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं ये मुकाबले काफी खास होने वाला है। भारत भले ही ये मुकाबले अपने घर में खेल रही हो लेकिन अफनिस्तान इस सीरीज में मेजबान के तौर पर उतरेगी। बीसीसीआई ने इस सीरीज के लिए दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम अफगानिस्तान को होमग्राउंड के तौर पर दिया है। वहीं दोनों देशों के बीच होने वाले मुकाबले में बारिश भी अहम रोल निभा सकती है। आइए जानते हैं कैसा होगा दिल्ली का मौसम

बारिश डालेगी मुकाबले में खलल?

भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाले इस मैच में मौसम अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि मैच के दौरान बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। दिल्ली में करीब 49 प्रतिशत तक भारी बारिश का अनुमान है। ऐसे में बारिश के कारण मैच कुछ समय के लिए रुक सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार तक दिल्ली में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। दोनों टीमों के बीच मुकाबले की शुरुआत शाम 7:30 बजे से होगा।

आज कैसा होगा दिल्ली का मौसम

AccuWeather के मुताबिक, रविवार को दिल्ली में मौसम बदलता हुआ नजर आ सकता है। दिन की शुरुआत कुछ समय के लिए धूप के साथ होगी, लेकिन बाद में आसमान में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना है। दोपहर के समय तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस रह सकता है और बारिश की संभावना 64 प्रतिशत तक है। शाम को भी बादल बने रहेंगे और कुछ जगहों पर हल्की बौछारें हो सकती हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच मुकाबला शाम 7:30 बजे शुरू होना है, ऐसे में मौसम पर सभी की नजर रहेगी। रात में बारिश की संभावना 55 प्रतिशत और गरज के साथ बारिश होने की संभावना 33 प्रतिशत बताई गई है।

अफगानिस्तान के पास बेहतरीन स्पिन गेंदबाज

एशियन गेम्स से पहले अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज भारतीय टीम के लिए अच्छी तैयारी साबित हो सकती है। अफगानिस्तान के पास राशिद खान, नूर अहमद और मुजीब उर रहमान जैसे अच्छे स्पिन गेंदबाज हैं, जिससे भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन के खिलाफ खेलने का अच्छा प्रैक्टिस मिलेगा। इसके अलावा, अफगान टीम के पास फजलहक फारूकी और नवीन-उल-हक जैसे तेज गेंदबाज भी हैं। गुलबदीन नायब और अजमतुल्लाह उमरजई भी गेंद और बल्ले से टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। अगर दिल्ली की पिच गेंदबाजों को मदद देती है, तो अफगानिस्तान के गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

भारतीय टीम की प्लेइंग XI को लेकर बल्लेबाजी के साथ स्पिन गेंदबाजों के चयन पर भी चर्चा हो रही है। टीम में ऐसे खिलाड़ियों को शामिल करने पर जोर है, जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में अच्छा प्रदर्शन कर सकें। इसी वजह से अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर के खेलने की उम्मीद है। दोनों खिलाड़ी बल्ले और गेंद से टीम के लिए अहम योगदान दे सकते हैं।

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अमेरिकी AI स्कूलों के लर्निंग मॉडल की हो रही आलोचना:स्कूल बने टॉर्चर चैम्बर, पेरेंट्स के कड़वे बोल तय कर रहे भविष्य

भविष्य की शिक्षा के नाम पर अमेरिकी स्कूलों का चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पेरेंट्स के आलोचनात्मक वीडियो दिखाई जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। ‘सहनशीलता’ सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है, जानिए… सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल… कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनिटर की ‘बीप-बीप’ सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। चौदह साल का रेयान मंच पर रखी एक कुर्सी पर अकेला बैठा था। उसकी उंगलियों और सीने से सेंसर जुड़े थे, जबकि सामने बैठे छात्र बड़ी स्क्रीन पर उसकी धड़कनों का ग्राफ देख रहे थे। रेयान का सामान्य हार्ट रेट 80 बीपीएम था। नियमों के मुताबिक अपनी जगह बनाए रखने के लिए रेयान को दिल की धड़कन 10% से अधिक नहीं बढ़ने देनी थी। 88 बीपीएम पार होते ही वह तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाता। तभी प्रोजेक्टर की स्क्रीन जगमगाई। सामने रेयान के पेरेंट्स का पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो चलने लगा। वे उसके काम, उसकी कमियों और उसकी हर नाकामी की तीखी आलोचना कर रहे थे। एक-एक शब्द रेयान के आत्मसम्मान पर हथौड़े की तरह चोट कर रहा था। पूरी क्लास की नजरें कभी उस वीडियो पर जातीं, तो कभी स्क्रीन पर दौड़ती लाल लकीर पर। ‘82… 85… 87…’ रेयान की मुट्ठियां भींच गईं। उसने अपनी आंखें बंद कीं, सांसों को जबरदस्ती धीमा करने लगा। दिल सीने से बाहर आने को बेताब था, पर बाहर दिखने वाली हर कमजोरी का मतलब था विफलता। जब वीडियो थमा, स्क्रीन पर औसत दर्ज था- 87 बीपीएम। वह सिर्फ एक धड़कन के फासले से बच गया था। पूरा हफ्ता उसके हाथ कांपते रहे। सिलिकॉन वैली के चर्चित एआई स्कूल में परीक्षा सिर्फ दिल की धड़कन नियंत्रित करने तक सीमित नहीं थी। छात्रों पर बॉट्स की मदद से कुछ ही दिनों में कठिन कोर्स पूरा करने का दबाव था। उन्हें बिना शिकायत गंदे शौचालय साफ कराए जाते और सोशल मीडिया पर खुद को ‘बेचने’ की ट्रेनिंग दी जाती। अल्फा स्कूल के अलावा जाने-माने स्कूल सिंथेसिस, अल्फा एनीवेयर और क्वेस्ट् टू लर्न यही तरीका अपना रहे हैं…सहनशीलता और ‘अदम्य साहस’ के नाम पर चल रहा यह प्रयोग शिक्षा से ज्यादा तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण जैसा लगता था, जहां संवेदनाओं को दबाना ही सफलता की कसौटी माना जाता है। सेंसर हटाते ही रेयान ने राहत की सांस तो ली, पर उसकी आंखें शून्य में ताक रही थीं। मशीन ने उसके दिल की रफ्तार तो नाप ली थी, लेकिन उस डर और घुटन का कोई डेटा स्क्रीन पर नहीं आया, जो उसके भीतर हमेशा के लिए दर्ज हो चुका था।

IND vs AFG: दिल्ली में होगी चौकों-छक्कों की बारिश! मैदान पर उतरेंगे वैभव सूर्यवंशी, जानें कहां पर देखें ये मुकाबला

IND vs AFG: भारत और अफगानिस्तान के बीच 3 मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। सीरीज का पहला मुकाबला 13 सितंबर,रविवार को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। वहीं इस मुकाबले में जसप्रीत बुमराह की वापसी हो रही है। वहीं मुकाबले से पहले जसप्रीत बुमराह ने नेट्स पर जमकर गेंदबाजी की है। प्रैक्टिस के दौरान बुमराह पूरी तरह से लय में नजर आ रहे थे। बुमराह का इस तरह प्रैक्टिस करना भारतीय टीम के लिए राहतभरी खबर है। इस मुकबाले में वैभव सूर्यवंशी भी खेलते हुए नजर आएंगे। आइए जानते हैं कब और कहां पर देखे सकते हैं ये मुकाबला

अफगानिस्तान होगा मेजबान

यह मुकाबला अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए काफी खास है। पहले अफगानिस्तान को अपने घरेलू मैच दूसरे देशों में खेलने पड़ते थे और भारत ने भी उसके कई मैचों की मेजबानी की थी। लेकिन अब अफगानिस्तान की स्थिति बदल गई है। भारत के खिलाफ यह सीरीज इसलिए भी खास है, क्योंकि पहली बार अफगानिस्तान अपने घर में भारत की मेजबानी कर रहा है। भारत भले ही ये मुकाबले अपने घर में खेल रही हो लेकिन अफनिस्तान इस सीरीज में मेजबान के तौर पर उतरेगी।

कब होगा पहला मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मुकाबलों की टी20 सीरीज का आगाज 13 सितंबर से होगा। सीरीज का पहला मैच नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला शाम 7:30 बजे से शुरू होगा।

कहां पर देखें ये मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाले पहले टी20 मुकाबले को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए अच्छी खबर है। भारत में इस मैच का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनलों पर किया जाएगा। ऐसे में दर्शक घर बैठे टीवी पर दोनों टीमों के बीच होने वाले इस मुकाबले का लाइव आनंद ले सकते हैं।

किस एप पर देखें मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच पहले टी20 मैच को अगर आप टीवी के बजाय मोबाइल या लैपटॉप पर देखना चाहते हैं, तो इसकी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग FanCode पर उपलब्ध होगी। भारतीय दर्शक FanCode की वेबसाइट या ऐप के जरिए इस मुकाबले को लाइव देख सकेंगे।

भारत और अफगानिस्तान की पूरी टीम

भारत की पूरी टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), संजू सैमसन (विकेट कीपर), अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वैभव सूर्यवंशी, यश ठाकुर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई

अफगानिस्तान की पूरी टीम: इब्राहिम ज़दरान (कप्तान), दरविश रसूली, नूर उल रहमान, रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेट कीपर), सेदिकुल्लाह अटल, अज़मतुल्लाह उमरज़ई, राशिद खान, मोहम्मद नबी, गुलबदीन नायब, नांगेलिया खारोटे, अब्दुल्ला अम्हेदज़ई, फ़ज़लहक फ़ारूक़ी, नवीन-उल-हक, मुजीब उर रहमान, नूर अहमद

Asian Games 2026: एशियन गेम्स से पहले जापान में बाढ़ ने मचाई तबाही, क्या टाला जाएगा टूर्नामेंट? सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए एथलीट

इटली की नेता और पूर्व विदेश मंत्री बोनिनो का निधन:महिलाओं के हक पर पोप से टकरा गई थीं एमा; 48 साल पुराना एबॉर्शन कानून बदलवाया

इटली की पूर्व विदेश मंत्री एमा बोनिनो को एक ऐसी महिला के रूप में याद किया जाएगा, जिसने अपनी निजी पीड़ा को लाखों महिलाओं के अधिकार की लड़ाई बना दिया। 26 साल की उम्र में जब उनका गर्भपात हुआ, तब इटली में यह गैरकानूनी था। इसके बाद उन्होंने तय किया कि दूसरी महिलाओं को एबॉर्शन के अपमान और असुरक्षित हालात से नहीं गुजरना पड़े। यूरोपीय आयुक्त भी रह चुकीं इटली की कद्दावर नेता एमा अपनी तीखी टिप्पणियों और मानवाधिकारों के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उनका 78 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी पार्टी ‘मोर यूरोप’ ने कहा कि देश ने सबसे दूरदर्शी, साहसी और स्वतंत्र सोच वाली नेता को खो दिया है। जानते हैं ​उनके राजनीतिक संघर्ष… निजी पीड़ा को बनाया इटली में क्रांति का नया हथियार – 1974 में जब इटली में गर्भपात गैरकानूनी था, तब 26 वर्षीय एमा ने एक क्लिनिक में गर्भपात कराया। – गर्भपात पर प्रतिबंध वाले 48 साल पुराने कानून के विरोध में पुलिस के सामने समर्पण किया। अपनी गिरफ्तारी से उपजी लहर को जनआंदोलन बनाया। – दबाव में संसद ने 1978 में 48 साल पुराने 1930 के कानून को बदलते हुए गर्भपात को कानूनी मान्यता दी। इससे पहले तलाक का कानून भी बनाया गया था। एमा ने कभी विवाह नहीं किया। एबॉर्शन के सवाल पर वेटिकन से भी टकराव रहा एमा ने वेटिकन चर्च के कड़े विरोध के बावजूद गर्भपात और तलाक को कानूनी दर्जा दिलवाने के अभियानों का नेतृत्व किया। महिला अधिकारों पर टकराव के बावजूद पोप फ्रांसिस के साथ उनकी अनूठी और गहरी दोस्ती भी थी। पोप फ्रांसिस अक्सर उनकी मानवीय पहलों की सराहना करते थे और उन्हें सबसे कमजोर तबके की आवाज उठाने वाली नेता कहते थे। कैंसर के बावजूद सक्रिय रहीं – 2015 में कैंसर का पता चलने के बाद भी एमा ने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वह रंग-बिरंगे स्कार्फ पहनकर संसद से लेकर टीवी डिबेट्स में मानवाधिकारों की आवाज बुलंद करती रहीं। आखिरी बात: लड़ाइयां अभी बहुत हैं – बीमारी के बीच जब उनसे पूछा गया कि कौन सी लड़ाई बाकी है, तब कहा था, ‘बहुत सारी, जरूरत से भी ज्यादा- मानवाधिकार, वैश्विक भूख और स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध। दस जन्म भी कम पड़ेंगे।’

पीएम मोदी ने पुतिन को गिफ्ट किया तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद, जानिए क्या है ये और कौन थे इसे लिखने वाले संत तिरुवल्लुवर?

PM Modi & Putin Meeting: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारतीय संस्कृति और साहित्य की अनूठी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य के महान और कालजयी ग्रंथ तिरुक्कुरल (Thirukkural) का विशेष रूप से तैयार किया गया रूसी अनुवाद भेंट किया। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने वाले इस तोहफे के बाद एक बार फिर महान तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल और इसके रचयिता संत तिरुवल्लुवर की चर्चा पूरी दुनिया में शुरू हो गई है।

क्या है तिरुक्कुरल ग्रंथ?

तिरुक्कुरल (तमिल में इसका अर्थ पवित्र दोहे या संक्षेप में ‘कुरल’ है) तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण और असरदार मानी जाने वाली कालजयी रचना है। इस महान ग्रंथ का तमिल संस्कृति, जीवनशैली और दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है। यह ग्रंथ कुल 1330 संक्षिप्त दोहों (कुरल) का एक अद्वितीय संग्रह है। ये दोहे जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे कि नैतिकता, सुशासन, प्रेम, अर्थ और आध्यात्मिकता पर कालातीत विजडम यानी कि ज्ञान देते हैं। इसके दोहे बहुत ही संक्षिप्त, सटीक और काव्यात्मक रूप में लिखे गए हैं। इस वजह से इन्हें आसानी से याद रखा जा सकता है और जीवन में उतारा जा सकता है।

तीन प्रमुख खंडों में विभाजित है ग्रंथ की संरचना

तिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन प्रमुख भागों या पुस्तकों में विभाजित किया गया है। इन्हें अराम’, ‘पोरुल’ और ‘इन्बम’ कहा जाता है।

अराम (Aram – धर्म/सद्गुण): इस खंड में धार्मिकता, सत्य, कृतज्ञता और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों और सद्गुणों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों का पालन करने और धर्म परायण जीवन जीने के महत्व पर जोर देता है।

पोरुल (Porul – अर्थ/धन और शासन): यह भाग सांसारिक मामलों, शासन कला, अर्थव्यवस्था और मित्रता के बारे में प्रैक्टिकल इनसाइट है। इसमें धन प्रबंधन, कुशल प्रशासन और अच्छे संग के महत्व के बारे में बताया गया है।

इन्बम (Inbam – काम/प्रेम): यह खंड मानवीय भावनाओं, प्रेम और पारिवारिक जीवन की जटिलताओं और सुंदरता की गहराई में ले जाता है।

कौन थे संत तिरुवल्लुवर?

संत तिरुवल्लुवर को तमिल संस्कृति और इतिहास के सबसे प्रमुख और आदरणीय साहित्यिक शख्सियतों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि संत तिरुवल्लुवर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर पांचवीं शताब्दी के बीच तमिल साहित्य के स्वर्ण काल यानी संगम काल के दौरान थे। उनका जन्म मायलापुर (मौजूदा चेन्नई का हिस्सा) के एक साधारण परिवार में हुआ था। तिरुवल्लुवर को सिर्फ एक कवि ही नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक और संत के रूप में भी जाना जाता है। उनके द्वारा लिखा गया ‘तिरुक्कुरल’ आज भी दुनिया भर के लोगों को सही जीवन जीने और सुशासन का मार्ग दिखाता है।

आपको बता दें कि पीएम मोदी अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देते हैं। इससे पहले भी वह विश्व नेताओं को भगवद्गीता, उपनिषद और तमिल ग्रंथ भेंट कर चुके हैं। ऐसे में पुतिन को उनकी यह भेंट दोनों देशों के बीच न सिर्फ रणनीतिक और आर्थिक बल्कि गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों की ओर भी इशारा करती है।

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Hunkkaar The Roar Trailer: बाप जी के खिलाफ खड़ी हुईं अनीत पड्डा, ‘हुंकार द रोअर’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज

Hunkkaar The Roar Trailer: एक आरोप….. जब जवान लड़की, जो चुप रहने से इंकार कर देती है और एक ताकतवर दुनिया जो कहानी को अपने हिसाब से मोड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देती है। जियोहॉटस्टार ने आज ‘हुंकार द रोअर’ का ट्रेलर जारी किया है। यह कहानी ‘मीनू’ की है—एक नए दौर की ऐसी नायिका जो किसी पीड़ित महिला वाली छवि में फिट होने से साफ मना कर देती है। निडर, पेचीदा और अप्रत्याशित, मीनू के फैसले दर्शकों को खुद से सवाल पूछने पर मजबूर करते हैं कि वे किस पर विश्वास करते हैं और क्या उनका यह विश्वास बदल सकता है।

ट्रेलर दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां सच की राह आसान नहीं है, बल्कि यह पावर, परसेप्शन और धारणाओं के बीच फंसी एक लड़ाई है। पुलिस जांच, कोर्टरूम और मीडिया ट्रायल तक फैली यह कहानी हर मोड़ पर एक नया सच और नया ड्रामा सामने लाती है। इस सीरीज़ में अनीत पड्डा, फातिमा शेक, मोहम्मद जीशान अय्यूब, अर्जुन माथुर, रघुबीर यादव और राम कपूर जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे। करण डी कपाड़िया, नित्या मेहरा और हीराज़ मारफतिया द्वारा निर्देशित इस शो के क्रिएटर करण डी कपाड़िया और नित्या मेहरा हैं।

जिओस्टार (स्ट्रीमिंग, टीवी और स्टूडियो) के हेड – हिंदी व इंग्लिश एंटरटेनमेंट बिजनेस, आलोक जैन ने कहा: “ऐसी कहानियां जो मानवीय अनुभवों से जुड़ी होती हैं और पूरी ईमानदारी के साथ बताई जाती हैं, वे मनोरंजन से परे जाकर गहरी बातचीत की शुरुआत करती हैं। ‘हुंकार: द रोअर’ एक ऐसी ही कहानी है, एक ऐसी पेचीदा कहानी जो एक युवा लड़की के सफर के जरिए पावर, विश्वास और सामाजिक सोच पर सवाल उठाती है। हमें विश्वास है कि यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी।”

एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर प्रियंका चोपड़ा जोनास ने कहा- “एक निर्माता के तौर पर मैं हमेशा ऐसी कहानियों का समर्थन करना चाहती हूं, जिनका कोई सामाजिक संदेश हो। ‘हुंकार द रोअर’ बिल्कुल वैसी ही है। मुझे नित्या और करण के विजन पर पूरा भरोसा है। मेरी प्रोडक्शन कंपनी ‘पर्पल पेबल पिक्चर्स’ का मुख्य मकसद ही उन फिल्म मेकर्स को मंच देना है, जो एक निडर सोच रखते हैं। मुझे इस पूरी टीम पर गर्व है और जियोहॉटस्टार, बिरला स्टूडियोज व एप्लॉज़ के साथ इसे पेश करते हुए बेहद खुशी हो रही है।”

मीनू रावत का किरदार निभा रहीं अनीत पड्डा ने कहा- “मीनू इस बात से तय नहीं होती कि उसके साथ क्या हुआ, बल्कि इससे तय होती है कि वह उसके बाद क्या रास्ता चुनती है। वह युवा है, पेचीदा है और उसे समझना हमेशा आसान नहीं होता, यही बात उसे असली बनाती है। उसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह चुप रहने से इंकार कर देती है।”

एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट के प्रोड्यूसर दीपक सहगल ने कहा- “हुंकार: द रोअर उस हिम्मत की कहानी है जो दुनिया के चुप रहने के दबाव के बावजूद बोलने के लिए चाहिए होती है। आज की युवा पीढ़ी जो अपनी बात रखने से नहीं डरती, उसके लिए मीनू का सफर बेहद प्रासंगिक है।”

एसीपी जसलीन सिंह सोपनी के किरदार पर फातिमा शेख ने कहा- “जसलीन एक ऐसे केस की जांच करती है जहां कोई आसान जवाब नहीं हैं। पावर, प्रभाव और पब्लिक प्रेशर के बीच वह सच की तलाश करती है। यह किरदार मेरे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और खास रहा।”

भालेराव का किरदार निभा रहे मोहम्मद जीशान अय्यूब ने कहा- “भालेराव एक अंडरडॉग है। जब आपके खिलाफ पूरी ताकतवर व्यवस्था खड़ी हो, तब भी कानून के लिए लड़ना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वह इस कहानी की आत्मा है।” देखिए ‘हुंकार द रोअर’, 25 सितंबर से केवल जियोहॉटस्टार पर।

गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल ‘BHISHM Cube-R300’ की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार

गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार

BHISM Cube R 300

गुजरात विधानसभा परिसर में अत्याधुनिक पोर्टेबल इमरजेंसी मेडिकल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया है। यह पोर्टेबल यूनिट 12 मिनट में तैनात होकर 300 मरीजों का इलाज करने में सक्षम है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल सरकार का बड़ा फैसला: मूंगफली, मूंग, उड़द और सोयाबीन की MSP पर खरीद के लिए पंजीकरण

 

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात विधानसभा परिसर में ‘BHISHM Cube-R300’ की विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के मार्गदर्शन में ‘आरोग्य मैत्री पहल’ के तहत यह अत्याधुनिक यूनिट तैयार की गई है, जो आपदा के समय चिकित्सा सेवाओं में क्रांति लाएगी।

महानुभावों की उपस्थिति और डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन

इस भव्य अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया सहित मंत्रिमंडल के सदस्य एवं विधायक विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी महानुभावों ने इस दो दिवसीय प्रदर्शनी के तहत ‘भीष्म क्यूब’ की कार्यप्रणाली को दर्शाने वाली विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी देखी।

 

12 मिनट में तैनाती और 300 मरीजों के इलाज की क्षमता

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि इस पोर्टेबल अस्पताल को महज 12 मिनट से भी कम समय में किसी भी स्थान पर कार्यान्वित किया जा सकता है। इस सिंगल यूनिट द्वारा एक साथ लगभग 300 घायलों को आपातकालीन उपचार दिया जा सकता है। पूरी प्रणाली 72 मॉड्यूलर मिनी-क्यूब्स में विभाजित है, जिसमें प्रत्येक क्यूब का वजन 20 किलोग्राम से कम होने के कारण इसे लाना-ले जाना बेहद आसान है।

 

पूर्णतः अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और परिवहन क्षमता

इस अस्पताल में वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, मिनी-लैब, सर्जिकल उपकरण और ऑक्सीजन आपूर्ति सहित लगभग 400 चिकित्सा सामग्रियां उपलब्ध हैं। जमीन, हवाई या समुद्री मार्ग से कहीं भी भेजी जा सकने वाली यह प्रणाली स्वयं की बिजली उत्पादन क्षमता रखती है और दुर्गम क्षेत्रों में इसे विमान या हेलीकॉप्टर के माध्यम से एयरड्रॉप भी किया जा सकता है।

 

गुजरात के लिए महत्व और वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता

आपदा के जोखिमों और लंबे समुद्री तट वाले गुजरात के लिए इस अस्पताल की तैनाती राज्य की राहत एवं बचाव क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। इससे पहले भारत सरकार द्वारा इन क्यूब्स को यूक्रेन, मालदीव, जमैका और श्रीलंका जैसे देशों में मानवीय सहायता के रूप में भेजा जा चुका है। इस उद्घाटन समारोह में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, GSDMA, SDRF के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

 

हमारे राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मजबूत और त्वरित बनाने वाली इस अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल की पहल वास्तव में सराहनीय है। चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक का यह समन्वय कठिन समय में कई नागरिकों की अमूल्य जान बचाने में मददगार साबित होगा।

 

शीतल देवी ने विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ में जीते 4 स्वर्ण पदक

शीतल देवी ने महिलाओं की कंपाउंड स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, क्योंकि भारत ने बुधवार को अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ 2026 चरण 3 को 15 पदकों – चार स्वर्ण, तीन रजत और आठ कांस्य – के साथ संपन्न किया।

 

19 वर्षीय विश्व चैंपियन ने स्वर्ण पदक प्रतियोगिता 144-144 के स्तर पर समाप्त होने के बाद शूट-ऑफ में कजाकिस्तान की एज़ादा सेदान को हराया। शीतल ने अपने शूट-ऑफ तीर से 10 का स्कोर किया, जबकि सेडान 9 के स्कोर के साथ भारतीय खिलाड़ी को साबरमती रिवरफ्रंट पर खिताब दिलाने में सफल रही। यह विश्व तीरंदाज़ी पैरा सीरीज़ में शीतल का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक था।

विश्व नंबर 1 भारतीय पैरा तीरंदाज ने क्वालीफिकेशन में 698 अंक हासिल करने के बाद शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी के रूप में एलिमिनेशन में प्रवेश किया था। स्कोर सीज़न का सर्वश्रेष्ठ था और उसने अपने एशियाई रिकॉर्ड में एक अंक का सुधार किया।

शीतल ने राउंड 16 में स्लोवाकिया की लिलियाना लाकोवा को 147-142 से और क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन की जेसिका स्ट्रेटन को 145-142 से हराया और सेमीफाइनल में हमवतन सरिता को 145-143 से हराया। कांस्य पदक मैच में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की वांग हुइटिंग को 141-140 से हराने के बाद सरिता भी पोडियम पर रहीं।

शीतल ने इससे पहले प्रतियोगिता में साथी पेरिस 2024 मिश्रित टीम पैरा तीरंदाजी कांस्य पदक विजेता राकेश कुमार के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया था। भारतीय जोड़ी ने कंपाउंड मिश्रित टीम क्वालीफिकेशन में 1400 अंक हासिल किए, जिससे पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में बनाए गए 1399 के अपने पिछले विश्व रिकॉर्ड में एक अंक का सुधार हुआ। शीतल ने 698 अंक बनाए जबकि राकेश ने रिकॉर्ड कुल स्कोर में 702 का योगदान दिया।

कंपाउंड मिश्रित टीम एलिमिनेशन राउंड के लिए, टोमन कुमार ने राकेश की जगह ली और शीतल के साथ जोड़ी बनाई। भारतीय जोड़ी ने बुधवार को इराक को 157-145 से हराकर कांस्य पदक जीता। सेमीफाइनल में चीन के खिलाफ 156-156 की बराबरी के बाद शूट-ऑफ में हारने के बाद भारत स्वर्ण पदक मैच से चूक गया था।

इस बीच, भावना और हरविंदर सिंह ने रिकर्व मिश्रित टीम प्रतियोगिता में भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक जीता।

भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन के लियांग किउरोंग और ज़िया लेई को 6-0 से हराकर तीन सेट 35-31, 36-33 और 34-32 से जीते। भावना ने हमवतन राजश्री धनराज राठौड़ को 6-0 से हराकर महिला व्यक्तिगत रिकर्व कांस्य पदक भी जीता।

मौजूदा कंपाउंड पुरुष विश्व चैंपियन टोमन कुमार ने इराक के अब्बास कादिम को 143-138 से हराकर कांस्य के साथ अपना व्यक्तिगत अभियान पूरा किया। टॉमन सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के अंतिम चैंपियन केन स्वागुमिलांग से 146-144 से हार गए थे। अंतिम दिन के पदकों ने प्रतियोगिता में भारत की सफलता में इजाफा किया।

टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी ने मंगलवार को इराक को 152-139 से हराकर कंपाउंड पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीता। पेरिस 2024 पैरालंपिक चैंपियन हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने स्लोवाकिया के खिलाफ 6-2 से जीत के साथ रिकर्व पुरुष युगल खिताब जीता।

भावना और पूजा रिकर्व महिला युगल में रजत पदक के साथ समाप्त हुईं, जबकि स्वाति चौधरी और आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी डब्ल्यू 1 मिश्रित टीम स्पर्धा में उपविजेता रहे।

डब्ल्यू1 अधिक गंभीर शारीरिक अक्षमताओं वाले एथलीटों के लिए एक पैरा तीरंदाजी प्रभाग है। तीरंदाज व्हीलचेयर से प्रतिस्पर्धा करते हैं और संशोधित उपकरण नियमों के तहत रिकर्व या कंपाउंड धनुष का उपयोग कर सकते हैं।

भारत ने दोनों डब्ल्यू1 युगल स्पर्धाओं में कांस्य पदक भी जीते। आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी और नवीन दलाल पुरुषों की प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहे, जबकि स्वाति चौधरी और वसुंधरा तेवतिया ने महिलाओं की स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। स्वाति ने व्यक्तिगत डब्ल्यू1 महिला प्रतियोगिता में एक और कांस्य पदक जीता।

इससे पहले, दृष्टिबाधित प्रतियोगिता में तन्वी प्रवीण इंगले ने रजत और युगल गर्ग ने कांस्य पदक जीता था।5 से 9 सितंबर तक आयोजित अहमदाबाद प्रतियोगिता में भारत ने पहली बार विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ कार्यक्रम की मेजबानी की।