ना स्मार्टफोन, ना UPI… फिर भी दिल का करोड़पति निकला पोस्टमास्टर, 2 साल की बच्ची के लिए दान कर दी पूरी सैलरी

भुवनेश्वर: आज के दौर में जहां लोग 10 रुपये दान करने से पहले 10 बार सोचते हैं, वहीं ओडिशा के एक पोस्टमास्टर ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर हर कोई सलाम कर रहा है। ना उनके पास स्मार्टफोन है, ना डिजिटल वॉलेट… लेकिन दिल सोने से भी खरा है।

कौन हैं ये पोस्टमास्टर बिमल और क्या है त्रिशिका की कहानी?

बिमल कुमार साहू 58 साल के हैं और ढेंकानाल जिले के गांदिया ब्लॉक स्थित पिंगुआ सब-पोस्ट ऑफिस में पोस्टमास्टर हैं। रिटायरमेंट में कुछ ही दिन बाकी हैं और उनकी मासिक सैलरी 26,304 रुपये है। वहीं, जाजपुर जिले की 2 साल की त्रिशिका रे एक दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) टाइप-2 से जूझ रही है। डॉक्टरों ने उसके इलाज के लिए जोल्जेन्स्मा इंजेक्शन की सलाह दी है, जिसकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई है। त्रिशिका के पिता क्राउडफंडिंग के जरिए इलाज के लिए पैसे जुटा रहे हैं। अब तक करीब 6 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि अभी भी करीब 10 करोड़ रुपये की जरूरत है।

टीवी पर देखी खबर, फिर स्कूटर में पेट्रोल भरकर निकल पड़े

बिमल साहू ने टीवी पर त्रिशिका की खबर देखी। उन्होंने सोचा कि ऑनलाइन कैसे भेजूं, इससे अच्छा है खुद जाकर दे आऊं। उन्होंने अपने स्कूटर में पेट्रोल भरवाया और सीधे भुवनेश्वर के लिए निकल पड़े। रास्ता पूछते-पूछते वह News18 के ऑफिस पहुंचे और बोले – मुझे त्रिशिका की मदद करनी है। वहीं पर त्रिशिका के परिवार को बुलाया गया और बिमल जी ने अपनी पूरे महीने की सैलरी उनके हाथ में रख दी।

बोले- मैं तो बस गिलहरी जैसा योगदान दे रहा हूं

पैसे देते हुए बिमल साहू ने कहा, “मैं इस बच्ची को जितने पैसों की जरूरत है उतना तो नहीं दे सकता, लेकिन क्या मैं गिलहरी की तरह अपना छोटा सा योगदान भी नहीं दे सकता?” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बिमल साहू की यह कहानी सिर्फ दान की नहीं, बल्कि सोच की है। एक तरफ जहां लोग मदद के नाम पर सोशल मीडिया पर सिर्फ पोस्ट शेयर करके अपनी जिम्मेदारी खत्म समझ लेते हैं, वहीं 58 साल के इस पोस्टमास्टर ने बिना किसी दिखावे के वह कर दिया जो बड़े-बड़े दानवीर भी नहीं कर पाते। उनकी सैलरी भले ही 26 हजार हो, लेकिन उनका दिल करोड़ों का है। रिटायरमेंट से ठीक पहले दिया गया उनका यह योगदान यह बताता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। सोशल मीडिया पर अब हर कोई कह रहा है – टेक्नोलॉजी नहीं, नियत बड़ी होनी चाहिए।

रांची के 3 प्रमुख बस स्टैंड्स की बदलेगी सूरत! 50 करोड़ से होगा कायाकल्प, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

राजधानी रांची के तीनों प्रमुख बस टर्मिनल आईटीआई बस स्टैंड, सरकारी बस डिपो और बिरसा मुंडा बस टर्मिनल खादगढ़ा का कायाकल्प अब राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन सभी टर्मिनलों के आधुनिकीकरण, नवीनीकरण और जीर्णोद्धार का निर्देश दिया है। इसके बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कुल 48.72 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी है। इसमें आईटीआई बस स्टैंड के लिए 24.77 करोड़, सरकारी बस डिपो के लिए 20.19 करोड़ और बिरसा मुंडा बस स्टैंड के लिए 3.76 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। प्रधान सचिव सुनील कुमार को जुडको के माध्यम से जल्द ही काम शुरू करने का निर्देश भी दिया गया है।

2 साल के अंदर मिलेंगी कई सुविधाएं

इन तीनों बस स्टैंड में कई सारी सुविधाएं मिलेंगी। प्रधान सचिव सुनील कुमार ने बताया कि बस स्टैंड में वेटिंग रूम और डॉरमेट्री बनाई जाएगी। यानी यहां महिला और पुरुष दोनों के लिए रैन बसेरा होगा, जहां लोग आराम से रात गुजर पाएंगे। महिला डॉरमेट्री के लिए महिला वार्डन और टाइट सिक्योरिटी रहेगी।

साथ ही, वॉशरूम से लेकर नहाने के लिए बाथरूम और कई अन्य सामान्य सुविधाएं भी होंगी। साफ सफाई पर काफी विशेष ध्यान दिया जाएगा। कंबल, गद्दा, तकिया यह सारी चीज रहेगी और इसका रेट काफी कम रहेगी ₹50-100 के बीच ताकि हर तबके लोग इसको अफोर्ड कर पाए।

लाइट से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर होगा शानदार

यह तीनों बस स्टैंड रात में जगमगाते हुए नजर आयेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार होगा और उसके साथ ही, इसकी साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखी जाएगी और एक टीम होगी जो साफ सफाई पर 24 घंटा नजर रखेगी। महिला यात्रियों की सुरक्षा को भी खास ध्यान रखते हुए महिला पुलिसकर्मी की टीम रहेगी।

गंदगी फैलाई तो लगेगा जुर्माना

रांची में नए सिरे से विकसित किए जाने वाले इन बस अड्डों पर साफ-सफाई शीर्ष स्तर की होगी। यहां गंदगी फैलाने वाले को फौरन जुर्माना देना होगा, वह भी ₹1000 तक। यानी आने वाले दिनों में आपको रांची के बस स्टैंड नये रूप में नजर आने वाला है और महिलाओं को अब रात में ट्रैवल करने में भी सहजता महसूस होगी।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

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Vishal Nirmiti IPO: ₹178 करोड़ का इश्यू 2 गुना भरकर बंद, अलॉटमेंट 6 अक्टूबर को; ऐसे करें चेक

सिविल इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी विशाल निर्मिती का IPO 1.79 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हो गया है। यह ₹178 करोड़ का था। पब्लिक इश्यू में ₹145 करोड़ के 65.91 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही प्रमोटर वामन प्रीस्ट्रेसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से ₹33 करोड़ के 15 लाख शेयरों को ओएफएस रहा। IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.33 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.75 गुना और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.89 गुना भरा।

IPO बंद होने के बाद अलॉटमेंट आज, 6 अक्टूबर को फाइनल होने की उम्मीद है। जिन लोगों ने Vishal Nirmiti के IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Vishal Nirmiti IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से कैसे करें चेक

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Vishal Nirmiti सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

Vishal Nirmiti IPO के लिए प्राइस बैंड ₹208-₹220 प्रति शेयर था। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 8 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं। विशाल निर्मिती लिमिटेड का पुराना नाम सेजल फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड था। यह कंपनी मुख्य रूप से रेलवे के लिए प्री-स्ट्रेस्ड कॉन्क्रीट (PSC) स्लीपर, प्री-कास्ट और प्री-स्ट्रेस्ड कॉन्क्रीट प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्च​रिंग और डीलिंग के कारोबार में है।

साथ ही, यह पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSPs) के लिए माइल्ड स्टील पाइप, लाइनर और पेनस्टॉक पाइप बनाने और उन्हें लगाने का काम भी करती है। कंपनी रेलवे, रिन्यूएबल पावर और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और सिविल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सर्विस भी देती है।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

विशाल निर्मिती अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर होने वाली कमाई का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। कंपनी के प्रमोटर ब्रिज बी तापड़िया, अजय भगवानदास तापड़िया, पवन विट्ठलदास तापड़िया, अखिल रणछोड़ तापड़िया, नवीन तापड़िया, राजेंद्रकुमार बद्रीनारायण तापड़िया, सुयश विट्ठलदास तापड़िया, वेदांत तापड़िया और केशव तापड़िया हैं।

विशाल निर्मिती का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 6 प्रतिशत बढ़कर ₹344.13 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा भी 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹24.98 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹87.42 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू ₹324.86 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹23.64 करोड़ दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यमन ने हूतियों को खदेड़ने के लिए फौज भेजी:इनके कब्जे में देश का एक-तिहाई हिस्सा, यहां 80% आबादी रहती है

यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने हूती विद्रोहियों को खदेड़ने और कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए फौज भेजना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने रविवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि सरकारी सेना पूरे यमन में राज्य का नियंत्रण बहाल करेगी। यमन में हूतियों का करीब एक-तिहाई इलाके पर नियंत्रण है। यहां देश की करीब 80% आबादी रहती है। यही वजह है कि हूतियों का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद उनका देश की आबादी और अहम शहरों पर बड़ा प्रभाव है। हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर कब्जा बढ़ाया हूतियों ने पिछले 48 घंटों में यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा किया है। अगर हूती इस इलाके को सरकारी इलाके से काट देते हैं, तो सरकार पूरी तरह इस पर नियंत्रण खो देगी। हूतियो ने इस इलाके में यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज पर भी कब्जा बढ़ाया है। यहां सैकड़ों लोग रहते हैं और हजारों सरकारी समर्थक लड़ाके भी तैनात हैं। शहर पर दबाव बढ़ने से आम लोगों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यमनी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अल-कादी के मुताबिक, आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा हूतियों को मजबूत रक्षा स्थिति देता है। इससे तट की ओर होने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का सामना करना उनके लिए आसान होगा और इन इलाकों को वापस लेना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है। बाब अल-मंदेब पर भी हूतियों की नजर हूतियों की हालिया बढ़त सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। उन्होंने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास भी अपनी स्थिति मजबूत की है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया का 12% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हाल ही में हूतियों ने दक्षिणी लाल सागर में दो और अहम द्वीपों ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर कब्जा कर लिया है। ये द्वीप बाब-अल मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में हैं। इन पर कब्जे से लाल सागर के समुद्री रास्ते पर उनका दबदबा और मजबूत हो गया है। यूरोप और एशिया के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए यह रास्ता बेहद अहम है। ऐसे में इस इलाके पर हूतियों का नियंत्रण बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच बाब अल-मंदेब की अहमियत और बढ़ गई है। 12 साल से चल रही हैं यमन में लड़ाई यमन में सरकार और हूतियों के बीच करीब 12 साल से लड़ाई चल रही है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है। 2022 में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई काफी कम हो गई थी। अब हूतियों की बढ़त के बाद यमन में फिर बड़े गृहयुद्ध का खतरा पैदा हो गया है। युद्ध से यमन पहले ही गंभीर मानवीय संकट में है। देश का बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो चुका है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के मुताबिक, कुछ इलाकों में हर 4 में से 3 परिवारों को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा। नई लड़ाई में हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। ऐसे में अगर सैन्य अभियान लंबा चला, तो यमन में भूख और विस्थापन का संकट और बढ़ सकता है। सऊदी अरब भी हूतियों पर हमला कर सकता है सऊदी अरब भी यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को उतार सकता है। इसका मकसद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं – इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… अल-कायदा ने फ्लाईदुबई हमले के आरोपी की तारीफ की: कहा- जंग अभी खत्म नहीं हुई, अमेरिकी-इजराइली विमानों पर 9/11 जैसे हमले करो आतंकी संगठन अल-कायदा ने फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट स्मित मच्छर पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी की तारीफ की। पूरी खबर पढ़ें…

कल का मौसम: इन राज्यों में 5 अक्टूबर को भारी बारिश-तूफान का अलर्ट; 20-22 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

Weather forecast for October 5: देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कल यानी पांच अक्टूबर को देश के कई राज्यों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारों का अनुमान जताया है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की आशंका है। कई इलाकों में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाओं का दौर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, दिल्ली समेत उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में मौसम फिलहाल शुष्क रहने की संभावना है।

दिल्ली में कल मौसम रहेगा साफ और शुष्क

राजधानी दिल्ली में 5 अक्टूबर को मौसम मुख्य रूप से साफ और धूप वाला रहने का अनुमान है। IMD के मुताबिक, दिल्ली में कोई महत्वपूर्ण बारिश होने की संभावना नहीं है। इस दौरान करीब 20-22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक सूखा मौसम जारी रहने की संभावना है। हालांकि, 6 से 7 अक्टूबर के बीच हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में छिटपुट से लेकर कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। दिल्ली में 6 से 8 अक्टूबर के बीच बारिश की संभावना बनी हुई है।

यूपी में फिलहाल बारिश का कोई बड़ा अलर्ट नहीं

उत्तर प्रदेश के लिए फिलहाल मौसम विभाग ने कोई गंभीर चेतावनी जारी नहीं की है। 5 से 9 अक्टूबर के दौरान पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए IMD के नवीनतम बुलेटिन में आंधी, भारी बारिश या खराब मौसम का कोई विशेष अलर्ट नहीं है।

इन राज्यों में बारिश और गरज-चमक

उत्तर भारत के मुकाबले देश के दूसरे हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है:- 

  • केरल: गरज-चमक, मध्यम बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। अगले दो दिनों में बारिश की गतिविधि कम होने की संभावना है।
  • ओडिशा: 7 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर बारिश जारी रह सकती है।
  • बिहार और झारखंड: 5 अक्टूबर से छिटपुट बारिश की शुरुआत हो सकती है।
  • पूर्वोत्तर भारत: कई हिस्सों में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
  • छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कोंकण और गोवा: 7 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर बारिश जारी रहने का अनुमान है।

हिमाचल-उत्तराखंड में भी बारिश के आसार

  • 5 से 7 अक्टूबर के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां लौट सकती हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश होने की संभावना है।
  • 6 और 7 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में भी छिटपुट से लेकर कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
  • हिमाचल प्रदेश के लिए 6 और 7 अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

दक्षिण भारत में भारी बारिश का अनुमान

  • दक्षिण भारत में बारिश का दौर अभी जारी रहेगा। केरल और माहे में 7 अक्टूबर तक व्यापक बारिश होने की संभावना है।
  • 5 और 6 अक्टूबर को केरल और माहे में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
  • वहीं, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है।
  • आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और यनम तथा रायलसीमा में भी तेज सतही हवाएं चल सकती हैं।

मानसून की विदाई जारी

  • देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर जारी है। IMD के मुताबिक, मानसून उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों से विदा हो चुका है।
  • अगले 2-3 दिनों में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ, बिहार, झारखंड, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तथा तेलंगाना और उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ इलाकों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं।
  • महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी हो चुकी है। IMD के अनुसार राज्य के 36 में से 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

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अमृतसर में बना मैगी का पहाड़! 1000 पैकेट से तैयार हुआ लंगर, देखें वायरल वीडियो

मैगी का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में तुरंत बनने वाला एक आसान और पसंदीदा स्नैक आता है। लेकिन अमृतसर में इसी आम मैगी को कुछ लोगों ने इतने बड़े स्तर पर तैयार किया कि देखने वाले भी हैरान रह गए। यहां 1000 पैकेट वेजिटेबल मैगी एक साथ बनाई गई और फिर इसे लोगों के बीच बांटा गया। बड़े बर्तन में पकती मैगी और उसे लेने के लिए जुटे लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। इस आयोजन ने सिर्फ अपनी विशाल मात्रा की वजह से ध्यान नहीं खींचा, बल्कि लोगों के बीच इस बात पर भी बहस शुरू हो गई कि लंगर में किस तरह का भोजन परोसा जाना चाहिए।

कुछ लोगों ने इसे मिल-बांटकर खाना खिलाने की अच्छी पहल माना, जबकि कुछ ने मैगी की जगह पौष्टिक भोजन को बेहतर विकल्प बताया। यानी एक साधारण सी मैगी ने खाने से आगे बढ़कर परंपरा और पसंद पर चर्चा छेड़ दी।

बड़े भगोने में शुरू हुई हजार पैकेट की तैयारी

वीडियो की शुरुआत मैगी के ढेर सारे पैकेट खोलने से होती है। इसके बाद एक बड़े बर्तन को चूल्हे पर रखा गया और उसमें तेल व मक्खन डाला गया। फिर बारी-बारी से प्याज, शिमला मिर्च, गाजर, मटर, स्वीट कॉर्न, मशरूम और टमाटर जैसी कई सब्जियां डाली गईं। इतनी मात्रा में सामग्री देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि खाना कितने लोगों के लिए तैयार किया जा रहा था।

मैगी में डाली गईं ढेर सारी सब्जियां और पनीर

सब्जियों को अच्छी तरह पकाने के बाद बड़े बर्तन में पानी और मैगी मसाला डाला गया। इसके बाद 1000 पैकेट की मैगी उसमें शामिल कर दी गई। जब मैगी पककर तैयार हुई तो इसमें पनीर के कई किलो टुकड़े भी डाले गए। आखिर में तैयार खाना लोगों को गर्मागर्म परोसा गया।

खाना लेने के लिए जुटे लोग

मैगी तैयार होने के बाद वितरण शुरू हुआ तो लोगों की कतार लग गई। रोजाना घरों और छोटी दुकानों में नजर आने वाली मैगी का इतना बड़ा रूप देखकर वहां मौजूद लोगों के लिए यह अनुभव खास रहा।

वीडियो में कई लोग खाना लेते दिखाई दे रहे हैं। आयोजन का सबसे मानवीय पहलू यही था कि एक आम पसंद के खाने ने अलग-अलग लोगों को एक जगह ला दिया।

तारीफ के साथ उठे सवाल भी

वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं रहीं। कुछ लोगों ने इस प्रयास की सराहना की और कहा कि लोगों को खाना खिलाने की पहल अच्छी है। वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि लंगर जैसे सामुदायिक भोजन में मैगी को शामिल करना कितना उचित है। कुछ लोगों ने इसकी जगह दाल, सब्जी या दूसरे पौष्टिक भोजन को बेहतर विकल्प बताया।

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क्या लंगर सिर्फ खाने का नाम है?

इस आयोजन ने एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया क्या लंगर की पहचान सिर्फ इस बात से तय होनी चाहिए कि उसमें क्या खाना परोसा जा रहा है, या फिर लोगों को मिल-बांटकर भोजन कराना इसका बड़ा उद्देश्य है? सोशल मीडिया पर इसी बात को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ लोगों ने परंपरा पर जोर दिया, जबकि कुछ ने सेवा और लोगों को भोजन उपलब्ध कराने को ज्यादा महत्वपूर्ण माना।

एक साधारण मैगी ने शुरू कर दी बड़ी चर्चा

1000 पैकेट मैगी से तैयार यह आयोजन इसलिए चर्चा में आया क्योंकि इसमें एक बेहद आम चीज को बड़े सामुदायिक भोजन का रूप दिया गया। किसी के लिए यह लोगों को जोड़ने वाली अच्छी पहल थी, तो किसी के लिए लंगर की परंपरा और सेहत से जुड़ा सवाल।

video: हर नौकरी बदलने पर 30% सैलरी बढ़ना भी पड़ सकता है भारी, जानिए कम पैकेज का खेल

Russia Ukraine War: क्या भारत कराएगा रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत? कीव ने कहा- नई दिल्ली का सीजफायर प्लान सबसे व्यापक

Russia Ukraine War Latest News: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म कराने की दिशा में भारत ने एक अहम कूटनीतिक पहल की है। यूक्रेन ने भारत के सीजफायर प्रस्ताव को अब तक मिले सभी प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के मुताबिक, कीव को भारत के अलावा तुर्की, मिस्र और अमेरिका से भी सीजफायर के प्रस्ताव मिले हैं। यूक्रेन रूस के साथ अलग-अलग फॉर्मेट में सीजफायर पर विचार करने के लिए तैयार है।

RBC-Ukraine की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कीव में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत का प्रस्ताव इन सभी पहलों में ‘सबसे व्यापक’ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म कराने की प्रक्रिया में भूमिका निभाने की इच्छा स्पष्ट रूप से जताई है।

भारत के प्रस्ताव में क्या है?

सिबिहा के मुताबिक, यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र और काला सागर (Black Sea) दोनों में एक साथ सीजफायर चाहता है। उनका कहना है कि सिर्फ एक क्षेत्र में सीजफायर पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ऊर्जा और काला सागर में सीजफायर के लिए तैयार है। लेकिन दोनों को एक साथ शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सभी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के साथ-साथ बंदरगाहों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना भी शामिल होगा।

तुर्की-मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव भी मेज पर

यूक्रेन के सामने भारत के अलावा तीन अन्य कूटनीतिक पहल भी हैं। सिबिहा के अनुसार, तुर्की और मिस्र ने काला सागर में अनाज और कृषि क्षेत्र से जुड़े सीजफायर का जॉइंट प्रस्ताव दिया है। वहीं अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में सीजफायर का एक फ्रेमवर्क पेश किया है। यह मुद्दा पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भी चर्चा में आया था।यूक्रेन का कहना है कि वह संपर्क रेखा (Line of Contact) पर बिना किसी शर्त के सीजफायर समेत अलग-अलग फॉर्मेट पर विचार करने के लिए तैयार है।

काला सागर में फिर शुरू हो सकती है बातचीत

रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर में सीजफायर को लेकर नए दौर की बातचीत की तैयारी भी चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्की और संयुक्त राष्ट्र इस दिशा में नए प्रयास कर रहे हैं। काला सागर में सीजफायर का एक अहम उद्देश्य अनाज की आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर पहले भी दबाव पड़ा है। दोनों देशों से होने वाला अनाज निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है।

पुतिन भी कर चुके हैं PM मोदी की तारीफ

भारत की पहल पर यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ की थी। वाल्दाई फोरम में पुतिन ने कहा था कि पीएम मोदी उन विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद लगातार यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की जरूरत का मुद्दा उठाते हैं।

पुतिन ने कहा कि रूस प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों और संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के समर्थन के लिए आभारी है। उन्होंने PM मोदी के विचारों को बहुत अच्छे विचार बताते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री संघर्ष को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करना चाहते हैं।

भारत लगातार बातचीत और शांति पर दे रहा जोर

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर कहा है कि भारत का रुख मानवीय और शांति-केंद्रित है। अब यूक्रेन द्वारा भारत के सीजफायर प्रस्ताव को ‘सबसे व्यापक’ बताया जाना भारतीय कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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पांच साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेंगी तनिशा मुखर्जी

अभिनेत्री तनिशा मुखर्जी करीब पांच साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही हैं। तनिशा, फिल्मकार कपिल कौस्तुभ शर्मा की फिल्म ‘ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है’ में नजर आएंगी।

‘मार्गाओ फाइल्स’ की सफलता के बाद कपिल अब मुंबई की पारसी कम्युनिटी की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी लेकर आ रहे हैं। फिल्म 1990 के दशक से वर्ष 2025 तक का सफर तय करती है और इसमें रोमांस, हास्य और मानवीय भावनाओं का मेल देखने को मिलेगा।

फिल्म में तनिशा का किरदार जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों से गुजरता है। निर्देशक कपिल के अनुसार, तनिशा में मौजूद भावनात्मक गहराई इस किरदार के लिए बेहद उपयुक्त थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उनके लिए व्यक्तिगत है और रिश्तों, बदलते समय तथा रोजमर्रा की जिंदगी की खूबसूरती को दर्शाती है।

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फिल्म की शूटिंग दक्षिण मुंबई और दादर पारसी कॉलोनी के वास्तविक पारसी घरों में की गई है। फिल्म को प्रामाणिक बनाने के लिए कपिल ने पारसी समुदाय के लोगों के साथ भी करीब से काम किया है, ताकि उनकी संस्कृति, तौर-तरीके और बोलचाल को स्वाभाविक रूप से पर्दे पर उतारा जा सके।

कपिल ने फिल्म की कहानी लिखने और निर्देशन के साथ इसका निर्माण भी किया है। वह इसमें अभिनय भी कर रहे हैं और एक पारसी किरदार के जीवन के अलग-अलग उम्र के पड़ावों को निभाने के लिए शारीरिक रूपांतरण से गुजरे हैं।

‘ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है’ का नाम 1978 में प्रदर्शित फिल्म ‘खट्टा मीठा’ के चर्चित गीत से प्रेरित है। कपिल ने बताया कि इसी फिल्म के जरिए बचपन में उन्हें पारसी जीवन और संस्कृति की पहली सिनेमाई झलक मिली थी।

फिल्म में तनिशा मुखर्जी के अलावा सुष्मिता मुखर्जी, कितू गिडवानी, परवीन दस्तूर, डेलनाज़ ईरानी, तनाज़ ईरानी, शाहरुख सिरस ईरानी, डॉली ठाकोर और अनन्या दत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने से पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में ले जाने की भी तैयारी है।

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साहब अच्छे एक्टर नहीं!

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं है।

विदेशी नेताओं के साथ साहब के बेतकल्लुफ, याराना, गले-लिपट जैसे व्यवहार का इधर सोशल मीडिया में मजाक बना। इंदौर में एक कलाकार ने उसी अंदाज में राहुल गाँधी के गले से लिपट कर, नाटकीय हँस कर, राहुल की पीठ खूब थपथपाकर, आदि से उस का प्रदर्शन किया। साथ ही, उस ने ऑडियेंस में मानो किसी को देख ‘माँ को बिठाओ’ कहने का भी प्रहसन किया। आम सभाओं में साहब अक्सर किसी बच्चे, बूढ़े या बूढ़ी को नोटिस कर मानो ध्यान दिलाते हैं कि उन के लिए बच्चे-बुजुर्ग भी प्रेम दिखाने आते रहते हैं!

मंच पर उन दोनों भंगिमाओं से तमाम उपस्थित लोग बिना बताए समझ गये कि किस की नकल हो रही है। वह इतना चर्चित हुआ कि अनेक केंद्रीय भाजपा नेताओं ने उस की निन्दा की। जबकि कलाकार ने साहब का नाम भी नहीं लिया था! सो ‘वह बात जिस का सारे फसाने में कहीं जिक्र न था’, वह भाजपा नेताओं को नागवार गुजरी। उन की नाराजगी से प्रहसन और चर्चित हुआ।

किन्तु प्रहसन सटीक था। यह दोनों स्थितियाँ — आए दिन विदेशी नेताओं के गले लटकना, और अपने को सबका चहेता बताना — इतनी बार देखी जा चुकी है कि लोग बोर हो गये हैं। एक तरह से यह लोगों की समझ का अपमान है कि वे इस का बनावटीपन नहीं समझे हैं।

फिर विदेशियों के साथ वह जबरन यारी दिखाना देश की छवि गिराता है। आखिर यूरोपीय, अमेरिकी नेता स्वयं गले नहीं चिपटते। वे प्रायः हाथ मिलाते और संयत रहते हैं। पर अपने साहब विदेशियों से बेतकल्लुफ दिखने को उतावले नजर आते हैं।

यह इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि यह उन का स्वभाव नहीं है। देसी बंधुओं के साथ साहब सीधे मुँह बात भी नहीं करते। किसी से मैत्री तो क्या, समान सहजता भी मुश्किल से बरतते हैं। दलीय सहयोगियों के प्रति उन का रूखा, मालिकाना सा व्यवहार दिखता है। मानो वे सब उनके हरकारे जैसे हों। अपनी भंगिमा ही नहीं, कई बार किसी को फटकारने, डपटने जैसे बयान देकर भी साहब ने दिखाया है कि वे किस को क्या समझते हैं!

यह दो विपरीत अदाएं बार-बार दिखना अच्छी एक्टिंग नहीं! साहब देसी-विदेशी, दोनों दर्शकों की संवेदना से अनजान लगते हैं। उन्हें आभास नहीं कि एक जगह असरानी दूसरी जगह गब्बर, बार-बार देखकर विदेशी और देसी दर्शक क्या सोचेंगे? यही कि एक्टर आत्ममुग्ध, अपने पर फिदा है! माने बैठा है कि एक ही एक्टिंग पर लोग सदैव ताली बजाएंगे।

इसी दुर्बलता पर इंदौर वाले प्रहसन ने ऊँगली रखी। लोग तुरत पहचान गये कि साहब की नकल हो रही है। क्योंकि उन्होंने वह मूल एक्टर द्वारा अभिनीत कई बार देखा हुआ है।

सो, बार-बार देश और विदेश में दो अंदाज दिखाने वाला एक्टर दुर्बल है।‌ निरंतर ऐसा विपरीत व्यवहार दिखाना आत्महीनता भी लग सकती है। विदेशियों के सामने अपने को हीन बनाना कि उन से अपनी निकटता दिखाने के लिए वह मरा जा रहा है। उसी हीनता का दूसरा पहलू देशी लोगों के सामने ऐंठना है। मानो, उसे अपनी महत्ता का भरोसा नहीं! ऊँचे पद पर आकर भी उसे भीतर शंका है कि दूसरे उसे छोटा तो नहीं समझ रहे? इसलिए वह अतिगंभीर मुद्रा बनाकर अपनी महत्ता जताता है।

आखिर, दोनों अवसर औपचारिक, सार्वजनिक व्यवहार के हैं।‌ देसी या विदेशी नेताओं के साथ, दोनों औपचारिक, आधिकारिक कार्यक्रम हैं। किसी को निजी कह कर सफाई देना कठिन है। अतः विदेशियों के साथ विगलित और देसियों के साथ रूखे, यह दोहरापन खटकता है। ऐसा व्यवहार सहज नहीं है।

क्या साहब को अपने पद, व्यक्तित्व, और काम — किसी पर स्वयं विश्वास नहीं है? विदेशियों के सामने गदगद होने, ओर देसियों के सामने ऐंठने में बनावट झलकती है। फिर, साहब की भाषा — अक्सर इतनी खोखली कि हैरत होती है! आखिर ‘भारत की ए.आई. में भारतीयता होनी चाहिए’ कहने का क्या अर्थ हुआ?

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं है।

कैमरे के सामने भी वे प्रायः उचित व्यवहार दिखाने में विफल रहते हैं। वह कैसा एक्टर होगा, जिसे यह भी नहीं मालूम कि किन के सामने कैसी मुख-मुद्रा रखनी उचित है? अपने से आयु में बड़े, और उस पर उपकार करने वाले वरिष्ठ नेता, जो उसे सार्वजनिक मंच पर हाथ जोड़ कर प्रणाम कर रहे हों, उन्हें अनदेखा कर बढ़ जाने का क्या मतलब है? उस से किसे क्या संदेश मिला? यह तो नौसिखिया एक्टिंग लगती है।

यह तब साफ झलकता है जब वही एक्टर विदेशियों के साथ लंगोटिया सा दिखना चाहे। वह भी जिद करके। कभी उसे झूला झुलाकर, कभी उसे जबरन सीढ़ी पर साथ बैठा कर, कभी उस के साथ ताली बजाते हुए चक्कर काटकर, तो कभी उस की बाँह खींचकर, कभी उसे ‘तू’ कहकर, आदि। सब कुछ कैमरे के सामने। यह नाटक एकतरफा है, क्योंकि दूसरा पक्ष सपाट रहता है। शिष्टाचारवश लाचार-सा, कि चलो करने दो जो कर रहा है। कुछ देर की बात है।

ऐसे दृश्य बार-बार देख कर संवेदनशील भारतीय लज्जा महसूस करते हैं कि उन का नेता विदेशियों के सामने छोटा बन रहा है! पर एक्टर की बेपरवाही दिखाती है कि वह इस के परिणामों से अनजान है! यह इस से स्पष्ट है कि अनेकानेक वर्षों में भारत को विदेशी शक्तियों से कोई लाभ के बदले हानि उठाने के उदाहरण अधिक दिखते हैं। यूपीआई पर टैक्स उसी की नवीनतम कड़ी लगती है।

देश के अंदर भी हेकड़ी, परनिंदा, और आडंबर की बुरी परंपरा फैली है। विशेषकर शिक्षा-संस्कृति क्षेत्र में। हर संस्था, संगठन प्रमुख अपने को खामखा विशिष्ट, ऊँचा दिखने और उपलब्धि दिखाने के लिए उसी तरह नाटकीय, कृत्रिम उपाय करता नजर आता है। जो अनुपयुक्त लगता है। पर प्रमुख मानो ‘साधारण’ दिखने की आशंका से ग्रस्त है! सो, अपने उत्तरदायित्व और उचित काम के बदले नाटकीयता और बनावट पर निर्भर है। मुख्यतः अपनी कुर्सी की आयु बढ़ाने की फिराक में है।

यह प्रवृत्ति साहब की देखा-देखी भी है, जो सब के ‘मॉडल’ बताए जाते रहे हैं। आखिर जब वह सब कुछ अगला चुनाव जीतने की दृष्टि से तय करते हैं, तो वही प्रवृत्ति नीचे बढ़ना स्वाभाविक है। प्रायः सब का चयन भी उसी भावना में होता है कि ‘अपने’ आदमी हैं। काम की योग्यता, गुणवत्ता नहीं — बल्कि ‘अपने’ प्रति वफादारी!

इस से शिक्षा-संस्कृति क्षेत्र की हुई और हो रही हानि अपरिमेय है। शैक्षिक संस्थानों में जातिवादी जहर फैलाना और फैलने देना उसी भावना में है। लाभ उठाने वाले भी बखूबी जानते हैं कि यह किसी समूह की हित-चिंता नहीं, बल्कि केवल ताउम्र कुर्सीनशीनी का मंसूबा है।

सो, यह सब हर हाल में निराशाजनक है। किसी सुविचारित नीति के बदले ओछी मानसिकता दिखाता है। विदेशियों के सामने झुकना, और देसियों के सामने ऐंठना एक ही दुर्बलता के दो रूप हैं। साहब के सहयोगियों ने कथित चिंतन-बैठक में इस पर विचार किया या नहीं, किन्तु किसी को उन्हें बताने की जरूरत है कि उन की एक्टिंग प्रभावहीन हो चुकी है।

समय रहते बदलें, वरना फिल्म के पूरे कास्ट, ताम-झाम को हानि उठानी पड़ सकती है। पिछली फिल्में जिस चेहरे के बल पर चली थी, उस में अब चमक नहीं है। इस भ्रम में रहना बेकार है कि विकल्प क्या है? लोग जब चिढ़ जाते हैं तब सिर्फ यह देखते हैं कि चिढ़ाने वाले को कौन हरा सकता है।

वैसे भी, अगर इतनी लंबी अवधि तक साहब-राज के बावजूद प्रजा इस हाल है कि उसे अपने ही देश का कोई अन्य नेता हानि पहुँचा सके — तो यह साहब की नाकारा उपलब्धि का बयान है। वह कैसा जनहितैषी शासक होगा जो प्रजा का हित अपनी अमरता से जोड़ दे?

कांग्रेस ने शुरू की आंदोलन की तैयारी

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानी को लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में हुए खुलासे पर बड़ा आंदोलन करने की तैयार कर रही है। पार्टी इसे छोड़ने के मूड में नहीं है। तभी अगले तीन दिन तक लगातार राजनीतिक कार्यक्रम तय किए गए हैं। सोमवार, 28 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ता जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके अगले दिन मंगलवार, 29 सितंबर को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक होगी और उसके अगले दिन 30 सितंबर को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। अगर बीजद के प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेते हैं तो इसे विपक्ष की बैठक कहा जाएगा।

बहरहाल, कांग्रेस पार्टी इस मसले पर अपनी रणनीति बनाने के लिए 29 सितंबर को कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक करेगी। सोनिया व राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा इसमें शामिल होंगे। इसमें विपक्षी गठबंधन की बैठक को लेकर भी बात होगी। अगले दिन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। लगभग सभी विपक्षी पार्टियों के नेता इसमें शामिल होंगे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद बैठक में नहीं पहुंच पाएंगे लेकिन उनकी पार्टी के नेता इसमें हिस्सा लेंगे।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस और सपा के अलावा इस बैठक की पहल करने वाली ममता बनर्जी और लेफ्ट के नेता भी शामिल होंगे। इसमें डीएमके और आम आदमी पार्टी के भी शामिल होने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछली बैठक में इन दोनों पार्टियों ने दूरी बनाई थी। बताया जा रहा है कि बीजू जनता दल को भी इसमें शामिल होने का न्योता भेजा गया है और कहा जा रहा है कि नवीन पटनायक का कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल हो सकता है। अगर बीजद का कोई नेता आता है तो इस बैठक को ‘इंडिया’ ब्लॉक की बजाय विपक्ष की बैठक नाम दिया जा सकता है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ी और चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेद की खबरों के बाद विपक्षी पार्टियां नए सिरे से एकजुट हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में एक दूसरे के धुर विरोधी रहे तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के बीच बातचीत शुरू हो गई है। असल में सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने ‘इंडिया’ ब्लॉक के सभी नेताओं को पत्र लिखा और चुनाव आयोग के हालात पर विचार के लिए बैठक बुलाने की अपील की।

एमए बेबी की चिट्ठी के जवाब में ममता बनर्जी ने सीपीएम महासचिव को फोन कर दिया। कोई 30 साल के बाद ममता की उनसे बात हुई। ममता बनर्जी ने एमए बेबी को कहा कि पूरे विपक्ष को मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाने की जरूरत है। इसके बाद ही बैठक की तारीख तय की गई।

विपक्ष के जानकार नेताओं का कहना है कि गठबंधन की ओर से 2029 का लोकसभा का चुनाव पुरानी मतदाता सूची से ही कराने की मांग की जाएगी। यानी एसआईआर को रद्द करने की मांग की जा सकती है। इस बैठक में यह सवाल भी पूछा जा सकता है कि एसआईआर के बाद कितने बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए और कितनों को वापस बांग्लादेश भेजा गया? इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनौती दी है कि वे सोमवार को दिल्ली आ रहे हैं और सरकार में हिम्मत है तो उनको पकड़ कर दिखाए।