टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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अक्षय ओबेरॉय-हेली दारूवाला की केमिस्ट्री ने जीता दिल, ‘लव लॉटरी’ का गाना ‘नजर लग जाएगी’ हुआ रिलीज

अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला स्टारर कोर्टरूम सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘लव लॉटरी’ का रोमांटिक गाना ‘नजर लग जाएगी’ रिलीज हो गया है। जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज में सजे इस खूबसूरत गाने का म्यीजिक वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे ने तैयार किया है, जबकि इसके बोल अरविंद पांडे ने लिखे हैं। गाने में अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला के बीच खूबसूरत केमिस्ट्री देखने को मिलती है।

उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्माया गया ‘नजर लग जाएगी’ कहानी के किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को सामने लाता है। पहाड़ों की खूबसूरती, शांत माहौल और प्रकृति के बीच फिल्माए गए रोमांटिक पल अक्षय और हेली की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को और निखारते हैं। दोनों की मौजूदगी गाने को बिना किसी बनावटीपन के एक स्वाभाविक और खूबसूरत एहसास देती है। गाने की सिनेमैटोग्राफी नवीन वी. मिश्रा ने की है, जबकि इसकी कोरियोग्राफी देवेंद्र चतुर्वेदी ‘डेविड’ ने की है।

गाने और फ़िल्म को लेकर निर्देशक एवं संगीत निर्देशक अरविंद पांडे ने कहा- “नजर लग जाएगी के जरिए हम अपने किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को बहुत सहज तरीके से दिखाना चाहते थे। उत्तराखंड की खूबसूरती ने हमें इसके लिए बिल्कुल सही माहौल दिया।

फ़िल्म के निर्माता कुलदीप भार्गव कहते हैं कि लव लॉटरी का विषय नाजुक है और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी कि इसे संतुलन और समझदारी के साथ दर्शकों के सामने रखा जाए। फिल्म इस बात को तलाशती है कि प्यार, भरोसा और शादी का रिश्ता कभी-कभी किस तरह एक अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।

जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज इस रोमांटिक गाना के एहसास को और गहराई देती है। वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे के संगीत तथा अरविंद पांडे के बोलों के साथ तैयार यह गाना किरदारों के बीच की नज़दीकियों और उनके रिश्ते की भावनात्मक परत को सामने लाता है।

सिनेमा गंज फिल्म्स के बैनर तले कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ द्वारा निर्मित ‘लव लॉटरी’ का निर्देशन अरविंद पांडे ने किया है और इसकी कहानी व लेखन अंकुर खत्री का है। फ़िल्म में अक्षय ओबेरॉय, हेली दारूवाला और कबीर दुहन सिंह प्रमुख भूमिकाओं में हैं, जबकि विजयांत कोहली, संतोष शुक्ला, हेमंत पांडे, इंदिरा कृष्णन, अग्नि अय्यारी, विक्रम शर्मा, कुमार सौरभ, अश्वंत लोधी और अर्शदीप संधू सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

Yogi Janta Darshan Program: ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अति मानवीय रूप देख अन्य आगंतुक अपनी पीड़ा भूल गए। सीएम योगी का यह रूप देख किसी की भावनाएं आंसुओं के जरिए निकल पड़ीं तो किसी ने अपनी कुर्सी से ही हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के प्रति आभार जताया। दरअसल अयोध्या से आए एक भाई-बहन जनता दर्शन में पहुंचे। भाई ने मुख्यमंत्री से बताया कि उनकी बहन गंभीर रूप से बीमार हैं। वह बहन को लेकर लखनऊ आए हैं, उन्हें जल्द से जल्द इलाज की आवश्यकता है। इस पर मुख्यमंत्री ने पीड़िता को तत्काल लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज भी शुरू हो गया है। 

मुख्यमंत्री आवास से तत्काल अस्पताल भेजी गईं पीड़िता

अयोध्या से आए श्याम सोनकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी बहन बबिता कुछ दिनों से अयोध्या में भर्ती थीं, डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया है। परिवार अत्यंत गरीब है, इसलिए इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने अपने आवास से तत्काल पीड़िता को एंबुलेंस से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर भिजवाया। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद डॉक्टरों की देख-रेख में मरीज का इलाज प्रारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने पीड़िता के परिजनों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। 

भाई की आंखों में आए आंसू, फोन करके दिया धन्यवाद

बहन बबिता के एडमिट होते ही उनके भाई श्याम ने चैन की सांस ली। डॉक्टरों को उन्होंने पूरी बीमारी आदि के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इलाज की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही श्याम की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने फोन करके मुख्यमंत्री आवास को इसकी जानकारी भी दी और धन्यवाद भी ज्ञापित किया। 

धन की कमी के कारण नहीं रुकेगा किसी का इलाज

‘जनता दर्शन’ में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर शासन में उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि धन की कमी के कारण किसी का इलाज नहीं रुकेगा। 

चॉकलेट पाकर खिलखिला उठी मासूम

‘जनता दर्शन’ में एक मासूम अपनी मां के साथ आई थी। सीएम ने उनकी मां की समस्या सुनी, फिर बच्ची से मुखातिब हुए और दुलारा-पुचकारा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने चॉकलेट मंगाई और उसके सामने रैपर खोलना शुरू कर दिया। सीएम के हाथ में चॉकलेट देखकर बच्ची खिलखिला उठी। बाबा और बच्ची के संवाद को देख अपना दर्द भूल सभी पीड़ित व अनय लोग मुस्कुरा उठे। सभी ने बच्चों के प्रति मुख्यमंत्री योगी के वात्सल्य की खूब प्रशंसा की।

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

Mohan Bhagwat Canada Visit: ‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’, कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

Mohan Bhagwat Canada Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदू पहचान, विविधता, एकता और भारत की सभ्यतागत सोच पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। हिंदू विचारधारा की मूल भावना अलग-अलग विविधताओं को स्वीकार करने और उनमें मौजूद एकता को पहचानने की है।

मोहन भागवत ने आगे कहा कि हिंदू की पहचान किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवन जीने की शैली से तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि हिंदू विचार सभी को स्वीकार करने और सभी का सम्मान करने की भावना पर आधारित है।

उन्होंने कहा, “जब मैं हिंदू कहता हूं तो हिंदू शब्द को किसी विशेष भाषा, किसी विशेष पूजा या किसी विशेष जीवनशैली से परिभाषित नहीं किया जा सकता।” भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू विचारधारा में ‘सबका सम्मान और सबकी स्वीकृति’ का भाव है।

‘विविधता स्वाभाविक है, एकता वास्तविकता’

RSS प्रमुख ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में जाति, पंथ और भाषाओं की अनेकता हमेशा से रही है। उनके मुताबिक, अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन एकता मूल वास्तविकता है।

उन्होंने कहा, “कई जातियां हैं, कई पंथ हैं, कई भाषाएं हैं। सब कुछ अनेक है। विविधता स्वाभाविक है, जबकि एकता वास्तविकता है।” भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यतागत सोच यह सिखाती है कि विविधता को एकता के लिए खतरा नहीं माना जाना चाहिए। बल्कि उसका सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विविधता एकता की अभिव्यक्ति है। यही विविधता समाज को सुंदर बनाती है।

‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सेवा और मानवता की भावना को भी हिंदू विचार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा जरूरतमंदों की मदद करने की रही है और कई बार भारत ने बिना मांगे भी दूसरों की सहायता की है। उन्होंने कहा, “जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मांगे भी मदद का हाथ बढ़ाया। यही भारत की परंपरा और उसका डीएनए है।”

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि आपने यह बात सुनी होगी कि अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है। भागवत ने कहा कि हिंदू आध्यात्मिक परंपरा लोगों को विविधता के भीतर एकता देखने की सीख देती है। इसमें केवल मनुष्यों ही नहीं। बल्कि जीव-जंतुओं और निर्जीव प्रकृति के साथ भी जुड़ाव की भावना पर जोर दिया जाता है।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ का किया जिक्र

RSS प्रमुख ने अपने भाषण में भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे पूरी दुनिया को एक परिवार मानने वाली सोच बताया। उन्होंने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान रखने वाले लोग इस विचार को स्वीकार करते हैं कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है। भागवत के मुताबिक, इंसानों के बीच बाहरी रूप-रंग को लेकर भले ही अंतर दिखाई दे। लेकिन मूल रूप से सभी एक हैं। इसी सोच से दूसरों की सेवा करने का दायित्व पैदा होता है। उन्होंने कहा, “दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। हमने यह ज्ञान प्राप्त किया है, जो हमें स्थायी खुशी और संतुष्टि देता है।”

‘भारत विश्वगुरु बना, महाशक्ति बनकर नहीं’

मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक प्रभाव की तुलना केवल सैन्य या आर्थिक ताकत से करने के बजाय सेवा और मानवीय मूल्यों से की। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया पर अपना प्रभाव किसी सुपरपावर के रूप में नहीं बनाया, बल्कि अपने चरित्र और दुनिया की सेवा के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। उन्होंने कहा, “कोई भारत को सुपरपावर कह सकता है, लेकिन भारत सुपरपावर नहीं था। उसने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना, ‘महाशक्ति’ नहीं।”

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का उदाहरण

भागवत ने भारत की शरण देने की परंपरा को समझाने के लिए इतिहास के कई उदाहरण दिए। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पोलैंड के लोग युद्ध और संकट के कारण परेशान थे, तब जामनगर के महाराजा ने उन्हें शरण और सुरक्षा दी। उन्हें तब तक संरक्षण दिया गया, जब तक वे सुरक्षित रूप से अपने देश लौटने की स्थिति में नहीं आ गए।

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न्होंने भारत की हालिया मानवीय सहायता का भी उदाहरण दिया। भागवत ने मध्य-पूर्व के एक युद्ध क्षेत्र से भारतीय नागरिकों की निकासी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सैन्य विमानों ने न केवल भारतीयों बल्कि सात अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला।

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

 

नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता

खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।

 

खरगे ने विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करने की अपील की। ALSO READ: नेपाल की त्रासदी में विदिशा की स्वाति बागरेचा लापता, 26 अगस्त से परिवार से संपर्क टूटा

 

नेपाल को तत्काल राहत सहायता देने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

 

अमित शाह को दिया सुझाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।

 

खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

farakka barrage

मनीष कुमार, पटना

नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बिहार भी सहम सा गया है। बिहार सरकार ने पश्चिम बंगाल से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में गंगा नदी में जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। 23 अगस्त को हुई इस बातचीत के 24 घंटे के अंदर बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए, जिससे बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से कम हुआ। अब बिहार इस समझौते के नवीकरण की जगह नया समझौता चाहता है, जिसमें बिहार के बाढ़ प्रबंधन और अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

 

फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह और भागीरथी-हुगली जलमार्ग में नौ परिवहन के लिए गहराई बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। सोच यह थी कि हुगली नदी में पर्याप्त पानी पहुंचा कर कोलकाता बंदरगाह में गाद (सिल्ट) कम किया जाए। कालांतर में यह परियोजना बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। ALSO READ: जर्मन और विदेशी कामगारों की कमाई में इतनी बड़ी खाई क्यों?

 

बिहार में बाढ़ की वजह बना फरक्का बैराज

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह जल संधि की गई थी, जिसे फरक्का बैराज संधि कहा जाता है। इसका उद्देश्य दोनों देश के बीच पानी का बंटवारा करना था। पानी की उपलब्धता के अनुसार दोनों के हिस्से तय होते हैं। यह बैराज बंगाल में गंगा नदी पर बनाया गया है, लेकिन इसके कारण गंगा नदी के प्रवाह की गति पीछे की तरफ धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदी अपने साथ जो गाद लाती है, वह बैराज के पीछे बिहार में गंगा नदी की तलहटी में जमा हो जाती है।

 

बैराज के कारण गंगा व उसकी सहायक नदियांइस सिल्ट के कारण उथली होती जा रही हैं। मानसून में जब पानी बढ़ता है तो यही उथलापन, बाढ़ का कारण बन जाता है। इससे बिहार को दो तरफा नुकसान हो रहा है। शुष्क मौसम में पानी की कमी तथा मानसून में बाढ़। बिहार का कहना है कि इस बराज को या तो पूरी तरह हटा दिया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे गाद का बहाव सुचारू रूप से हो सके। ताकि, बिहार को बाढ़ की समस्या न झेलनी पड़े।

 

गंडक का जलस्तर तीन मीटर तक हो सकता है ऊंचा

इस बीच, बिहार सरकार ने नेपाल में फ्लैश फ्लड की आपदा और गंडक नदी में अचानक जल प्रवाह तेज होने की संभावना को देखते हुए बांधों तथा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का आदेश दिया है। सीमावर्ती छह जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल की त्रिशूली नदी का भारी सैलाब गंडक की ओर बढ़ रहा है। इससे नारायणी नदी में भी पानी बढ़ गया है। यही नारायणी नदी बिहार में गंडक नदी कहलाती है।

 

गंडक नदी के जलस्तर में एक से तीन मीटर तक की भारी वृद्धि की आशंका है। जल संसाधन विभाग के अनुसार बुधवार की रात आठ बजे के बाद फ्लैश फ्लड का पानी आना शुरू हुआ और 12 बजे तक जल प्रवाह डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। राहत की बात हालांकि यह रही कि 12.30 बजे यह घटकर 1.42 लाख और एक बजे 1.29 लाख तथा दो 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम चंपारण जिला स्थित वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। ALSO READ: असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

 

बिहार के बड़े क्षेत्र में पानी के फैलाव की आशंका

नेपाल से आने वाली ज्यादातर नदियों का बहाव बिहार की ओर ही है। वहीं बिहार में नदियां पहले से ही गाद से भरी हैं, इसलिए इस बार बड़ी आबादी को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक ए प्रकाश का कहना है कि हर साल मानसून में नेपाल में होने वाली बारिश का खामियाजा बिहार के 20 जिलों को भुगतना पड़ता है। लेकिन, इसे रोका नहीं जा सकता है, बल्कि इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।

 

नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र कहते हैं, ‘‘नदियों को रोकने की कवायद बेकार है। उन्हें अपनी रौ में बहने देना चाहिए। हमें बांध बनाकर या तटबंधों को ऊंचा कर उन्हें रोकना चाहते हैं। इससे बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी की तलहटी में गाद जमा हो रही है। जब तक गाद प्रबंधन नहीं होगा तब तक समस्या ज्यों की त्यों ही रहेगी।''

 

फरक्का पर तेज हुई राजनीति

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर 30 साल पुराने इस समझौते की अवधि दिसंबर, 2026 में समाप्त हो रही है। अब इसके नवीनीकरण के समय बिहार की सियासत भी गर्म हो गई है। इसे लेकर जेडीयू और आरजेडी, दोनों ने एक दूसरे पर निशाना साधा है। जेडीयू सांसद संजय झा का कहना है कि 1996 में जब केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार ने बांग्लादेश के साथ यह समझौता किया था, तब लालू प्रसाद यादव केंद्र में काफी प्रभावशाली नेता थे। अगर, उस समय बिहार सरकार ने इस जलसंधि का मजबूती से विरोध किया होता तो राज्य को बीते तीन दशकों से बाढ़ और फिर सूखे की दोहरी मार नहीं झेलनी पड़ती।

 

इस पर पलटवार करते हुए आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया में एक बयान जारी कर नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन में दूरगामी प्रभाव वाले मुद्दों पर कभी ध्यान नहीं दिया। फरक्का के मुद्दे पर उन्होंने हमेशा चुप्पी साधे रखी। लालू ने संसद में अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस संधि को देशहित के खिलाफ बताते हुए कैसे इसे रद्द करने की मांग की थी। क्योंकि इसमें बिहार के भविष्य के खतरे को अनदेखा किया गया था।

जयशंकर ने 21 भारतीय तीर्थयात्रियों का किया स्वागत, बोले- नेपाल में फंसे लोगों को निकालना पहली प्राथमिकता

S. Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। तीर्थयात्रियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, “मैंने अभी भारतीयों के एक समूह का स्वागत किया है जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे। उन्हें नेपाली सेना ने बचाया और काठमांडू पहुंचाया। इसके बाद, हमारे दूतावास ने उनकी वापसी का इंतजाम किया। मैं उनसे मिलने, इस बात पर खुशी जाहिर करने कि वे सुरक्षित हैं, और उनके अनुभवों के बारे में जानने के लिए यहां आया था।”

तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए नेपाल सरकार और वहां की सेना का आभार जताते हुए जयशंकर ने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क करने पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा, “हम वहां मौजूद सभी भारतीयों से संपर्क करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। अलग-अलग जगहों से लगभग 85 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें अभी आए 21 तीर्थयात्रियों का यह समूह भी शामिल है।”

मंत्री ने कहा कि बचाए गए तीर्थयात्री नेपाल सेना के बहुत आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने बहुत मुश्किल इलाके में यह बचाव अभियान चलाया।

बचाव और राहत कार्यों में मदद करना पहली प्राथमिकता

जयशंकर ने कहा कि भारत की पहली प्राथमिकता नेपाल के अपने बचाव और राहत कार्यों में मदद करना है और साथ ही प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाकर उन्हें वापस लाना है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री से बात की थी और भारत ने कई तरह की मदद की पेशकश की है, जिस पर काठमांडू अभी विचार कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा, “हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है; वे उस पर विचार कर रहे हैं। उन्हें जो भी सही लगेगा, वे अपनी जरूरतों के हिसाब से उसे चुन लेंगे।”

जयशंकर ने तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कहा कि भारत एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में मदद के लिए टनलिंग एक्सपर्ट्स की एक टीम भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां लोगों के टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है।

उनके अनुसार, भारत बेली ब्रिज भी भेजेगा, जिन्हें उन इलाकों में तेज़ी से जोड़ा और लगाया जा सकता है जहां बाढ़ की वजह से कनेक्टिविटी खराब हो गई है। इन पुलों को लगाने में मदद के लिए एक टीम भी साथ जाएगी।

जयशंकर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर नेपाल मेडिकल टीमें भी भेजी जा सकती हैं। भारत ने नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के कर्मियों को तैनात करने की भी पेशकश की है, अगर नेपाल सरकार ऐसी मदद मांगती है।

उन्होंने कहा, “अगर उन्हें NDRF के लोगों की जरूरत होगी, तो हम उन्हें भेज देंगे। हमने उन्हें यह विकल्प दिया है।”

आज नेपाल के लिए रवाना होगी भारत की तीसरी राहत उड़ान

भारत बाढ़ से प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता भी भेज रहा है। जयशंकर ने कहा कि राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही भेजे जा चुके हैं, जबकि तीसरी राहत उड़ान शुक्रवार को रवाना होगी।

यह सहायता नेपाल की आपातकालीन प्रतिक्रिया में मदद करने के भारत के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, क्योंकि अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी हैं।

जयशंकर ने कहा, “अभी हमारे लिए यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है – इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, नेपाल में राहत कार्यों में कैसे मदद की जाए, और बचाव कार्य तथा हमारे लोगों और अन्य देशों के नागरिकों की वापसी में कैसे सहायता की जाए।”

भारत मदद के लिए आगे

जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुख्य बचाव अभियान नेपाल के अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे हैं, और भारत जहां भी जरूरत हो, मदद दे रहा है।

उन्होंने कहा, “बचाव कार्य नेपाल के अधिकारियों और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे हैं। इसलिए, 21 लोगों का जो समूह अभी भारत पहुंचा है, उन्हें भी नेपाल की सेना ने ही बचाया था। हमारी तरफ से नेपाल सरकार को जो भी मदद दी जा सकती है, हम वह दे रहे हैं।”

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तलाक के बाद जॉइंट होम लोन का क्या होता है, कौन भरता है? घर खरीदने से पहले बैंक लोन और EMI से जुड़े ये नियम जान लीजिए

तलाक के जरिए दो लोग कानूनी तौर पर अपनी शादी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि किसी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन के साथ किया गया आपका जॉइंट फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट भी खुद ब खुद खत्म नहीं हो जाता। अक्सर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन लेते हैं। जब शादी टूटती है तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि संपत्ति का बंटवारा होते ही लोन की जिम्मेदारी भी खत्म हो गई जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बैंक के साथ साइन किए गए लोन एग्रीमेंट की शर्तें तब तक लागू रहती हैं जब तक कि बकाया कर्ज पूरी तरह चुकता न हो जाए या बैंक औपचारिक रूप से बदलाव के लिए सहमत न हो जाए। सिर्फ तलाक की डिग्री लोन कॉन्ट्रैक्ट को नहीं बदलती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी बॉरोअर्स को सलाह देता है कि वे अपने होम लोन के नियमों और शर्तों को ध्यानपूर्वक समझें और उन्हें लिखित रूप में अपने पास रखें

क्या तलाक के बाद भी दोनों को भरनी होगी EMI?

जॉइंट होम लोन के मामले में दोनों कर्जदारों को कभी भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि जो जीवनसाथी घर में रह रहा है या जिसे संपत्ति मिल रही है, वह ऑटोमेटिकली पूरी ईएमआई के लिए जिम्मेदार हो जाएगा। अगर मूल एग्रीमेंट के तहत दोनों व्यक्ति को-बॉकोअर्स हैं तो बैंक दोनों को समान रूप से जिम्मेदार ठहरा सकता है।

अगर कोई एक पक्ष ईएमआई देना बंद कर देता है तो बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए दूसरे पक्ष पर दबाव बना सकता है। ऐसा वो तब भी कर सकता है चाहे उनके बीच तलाक के समझौते में कुछ भी तय हुआ हो। इसलिए सेपरेशन की स्थिति में भी जरूरी है कि आप कानून और बैंक एक्सपर्ट की मदद से इससे जुड़े नियमों को समझ लें।

संपत्ति का मालिकाना हक और लोन की जिम्मेदारी में अंतर

संपत्ति का मालिकाना हक और होम लोन का दायित्व दो अलग-अलग विषय हैं। सिर्फ इस बात से कि आपने को-बॉरोअर के रूप में साइन किए हैं, ये साबित नहीं होता कि प्रॉपर्टी में आपका आधा या बराबर का हिस्सा है। इसी तरह प्रॉपर्टी में स्वामित्व का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि आप ही एकमात्र मालिक हैं और लोन के लिए सिर्फ आप ही देनदार हैं। तलाक के निपटारे के दौरान इन दोनों पहलुओं को अलग-अलग और गहराई से देखा जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई कानूनी या फाइनेंशियल डिस्प्यूट न पैदा हो।

जॉइंट होम लोन से बाहर निकलने के तीन मुख्य विकल्प

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन को निपटाने के लिए आमतौर पर तीन तरह के व्यावहारिक रास्ते अपनाए जाते हैं-

एक जीवनसाथी द्वारा लोन का पूरा टेकओवर: एक आम समाधान यह है कि एक पक्ष संपत्ति अपने पास रखे और पूरी EMI भरे। इसके लिए बैंक की औपचारिक स्वीकृति अनिवार्य है। बैंक दूसरे कर्जदार का नाम हटाने या लोन को रीस्ट्रक्चर करने से पहले बाकी जीवनसाथी की आय, क्रेडिट प्रोफाइल और पुनर्भुगतान क्षमता का रीवैल्यूएशन करता है। जब तक यह औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक निजी समझौते से कोई भी पक्ष लोन से मुक्त नहीं होता।

संपत्ति बेचकर लोन चुकता करना: दूसरा विकल्प यह है कि संपत्ति को बेच दिया जाए और मिलने वाले पैसे से बैंक का पूरा बकाया लोन चुकता कर दिया जाए। अगर घर लोन की राशि से अधिक कीमत पर बिकता है तो बची हुई शेष रकम को दोनों पक्ष अपने मालिकाना हक और आपसी समझौते के आधार पर बांट सकते हैं। लेकिन अगर बिक्री मूल्य लोन राशि से कम है, तो पहले उस घाटे की भरपाई दोनों को मिलकर करनी होगी।

संयुक्त स्वामित्व जारी रखना: कुछ मामलों में विशेष रूप से जहां बच्चों का भविष्य जुड़ा होता है, पूर्व पति-पत्नी कुछ समय के लिए संपत्ति को संयुक्त रूप से बनाए रखने का निर्णय ले सकते हैं। यह व्यवस्था तभी काम कर सकती है जब ईएमआई भुगतान, घर का रखरखाव, प्रॉपर्टी टैक्स, रहने का अधिकार और भविष्य में बिक्री या हस्तांतरण से जुड़े नियम लिखित में स्पष्ट हों।

तलाक के सेटलमेंट में इन बातों का रखें ध्यान

तलाक के समझौते में सिर्फ प्रॉपर्टी का उल्लेख करने के बजाय होम लोन का स्पष्ट और खास रूप से विवरण होना चाहिए। दस्तावेज में यह साफ लिखा होना चाहिए कि घर में कौन रहेगा, ईएमआई का भुगतान कौन करेगा, संपत्ति में किसका कितना हिस्सा है और भविष्य में घर बेचने पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

व्यावहारिक तरीका यह है कि सबसे पहले बैंक से नवीनतम लोन स्टेटमेंट लें, संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेजों की जांच करें, बैंक के साथ अपनी योजना पर चर्चा करें और फिर सहमति से बने फैसले को अपने तलाक के कानूनी समझौते में शामिल करें। जब भी किसी सह-कर्जदार का नाम लोन से हटाया जाए या लोन बंद किया जाए, तो बैंक से इसका लिखित प्रमाण पत्र जरूर ले लें।

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

Gold Price : शुक्रवार,28 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक US फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल में होने वाले भाषण से पहले मुनाफावसूली कर रहे है। फिलहाल 12 बजे के आसपास MCX पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 716 रुपए यानी 0.45 फीसदी की गिरावट के साथ 158,282 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी का सितंबर फ्यूचर्स 101 रुपए यानी 0.04 फीसदी गिरकर 240,550 रुपए प्रति किलोग्राम पर दिख रहा था।

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक वॉर्श के भाषण पर नजरें बनाए हुए है। US गोल्ड फ्यूचर्स के दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40% गिरकर 4,627.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए हैं।

गोल्ड पर जेफरीज की राय

इस बीच गोल्ड पर जारी अपनी रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज में कहा है कि भारत में आज भी सबसे बड़ा भरोसा सोने पर ही है। भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी है। उसके मुताबिक देश में करीब 4 लाख करोड़ डॉलर का सोना है,जो आगे चलकर इकोनॉमी और मार्केट दोनों को चमका सकता है। गोल्ड ही भारत का सुपर पावर है। भारत के गोल्ड की वैल्यू 4 लाख करोड़ डॉलर है जो कुल इक्विटी निवेश का 4 गुना है। देश में गोल्ड का भाव 10 फीसदी बढ़ने पर जीडीपी में 0.80 फीसदी का उछाल देखने को मिलता है।

जेफरीज का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से इकोनॉमी और मार्केट दोनों को फायदा होता है। देश में सोना बढ़ेगा तो खर्च बढ़ेगा। गोल्ड लोन के बढ़ते क्रेज से भी फायदा होगा। लोग घर में सोना रखने के बजाय गोल्ड लोन लेकर पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। गोल्ड लोन के पैसे से इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।

जेफरीज का गोल्डन पोर्टफोलियो

जेफरीज के गोल्ड थीम में मणप्पुरम और सिल्वर थीम में हिंदुस्तान जिंक शामिल है। इसके अलावा उसके मॉडल पोर्टफोलियो में कंजम्पशन थीम से मीशो और केमिकल थीम से नवीन फ्लोरीन शामिल है। वहीं, इसने अपने मॉडल पोर्टफोलियो से जिंदल स्टेनलेस और अंबुजा सीमेंट को बाहर कर दिया है। जेफरीज की राय है कि सोना चढ़ा तो टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स, MCX, IIFL फाइनेंस और मुथूट फाइनेंस की बल्ले-बल्ले होगी।

 

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