The Legend of Hanuman 7: ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान 7’ का रिलीज हुआ ट्रेलर, इस दिन होगी जियोहॉटस्टार पर होगी स्ट्रीम

The Legend of Hanuman 7 Trailer release: हनुमान की गाथा एक बार फिर लौट आई है। इस बार दांव पहले से कहीं बड़े हैं। JioHotstar ने ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का ट्रेलर जारी कर दिया है। इसके साथ ही दर्शकों के पसंदीदा शोज में से एक का अब तक का सबसे बड़ा अध्याय सामने आया है। ग्राफिक इंडिया द्वारा निर्मित और शरद देवराजन के सह-निर्माण में तैयार इस सीजन का प्रीमियर 23 अक्टूबर को होगा।

नए सीजन में लंका का युद्ध अपने निर्णायक और भयावह मोड़ पर पहुंचता है, जहां रावण अब तक के अपने सबसे शक्तिशाली रूप में सामने आता है। वानर सेना के शिविर में निराशा छाने लगती है, तभी हनुमान उस एक अस्त्र की तलाश में निकल पड़ते हैं, जो रावण का हमेशा के लिए अंत कर सकता है।

लेकिन अंतिम अस्त्र की यह खोज जल्द ही उन्हें युद्धभूमि से बहुत आगे समय के अलग-अलग पड़ावों तक ले जाती है। इस यात्रा में वे भगवान राम के अतीत के उन अनजाने पहलुओं और मृत्यु के साम्राज्य तक पहुंचते हैं, जिनसे अब तक पर्दा नहीं उठा था। इसी दौरान हनुमान एक ऐसे रहस्य से पर्दा उठाते हैं, जो सब कुछ बदलकर रख देगा—उनकी दिव्यता का वास्तविक स्वरूप और उनकी असीम शक्ति।

शानदार एक्शन के साथ इमोशन, आस्था और मित्रता का संगम पेश करता यह सीजन हनुमान की यात्रा में एक नए और प्रभावशाली अध्याय की शुरुआत करता है। अब रावण के अंत की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का प्रीमियर 23 अक्टूबर को विशेष रूप से JioHotstar पर होगा।

शरद केलकर एक बार फिर रावण की आवाज के रूप में लौट रहे हैं और अपने दमदार अंदाज से इस शक्तिशाली खलनायक के किरदार को जीवंत करेंगे। शो में वापसी को लेकर शरद केलकर ने कहा- “मैं ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं। यह ऐसा शो है, जो हमारी पौराणिक कथाओं की कुछ कालजयी गाथाओं को जीवंत करता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ेगी, दर्शक इससे जुड़े रहेंगे और हर नए खुलासे का इंतजार करेंगे।”

शरद देवराजन, निर्माता एवं लेखक, सह-संस्थापक और सीईओ, ग्राफिक इंडिया ने कहा- “‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ का निर्माण मेरे जीवन की सबसे संतोषजनक यात्राओं में से एक रहा है। JioHotstar के साथ हमारी साझेदारी ने हमें इस दुनिया का विस्तार करने और इसकी कई परतों को दर्शकों के सामने ऐसे अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर दिया है, जो कालजयी होने के साथ-साथ आज के दौर से भी जुड़ा है। एनिमेशन ही ऐसा माध्यम है, जो भगवान हनुमान की कथा के विशाल स्वरूप, कल्पनाशीलता और आध्यात्मिक गहराई के साथ न्याय कर सकता है।

शरद देवराजन, जीवन जे. कांग और चारुवी अग्रवाल द्वारा निर्मित ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 अपनी विशिष्ट एनिमेशन शैली और विस्तृत पौराणिक दुनिया को आगे बढ़ाता है। ग्राफिक इंडिया की इस प्रस्तुति का निर्देशन जीवन जे. कांग और नवीन जॉन ने किया है, जबकि इसकी पटकथा शरद देवराजन, जीवन जे. कांग, सरवत चड्ढा और शिवांगी सिंह ने लिखी है।

ट्रेलर हनुमान की यात्रा के अब तक के सबसे शक्तिशाली अध्याय की झलक पेश करता है। देखें ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7, 23 अक्टूबर से विशेष रूप से JioHotstar पर।

‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का ट्रेलर जारी, 23 अक्टूबर से होगा प्रसारण

जियोहॉटस्टार ने लोकप्रिय एनिमेटेड सीरीज ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ के सातवें सीजन का ट्रेलर जारी कर दिया है। ग्राफिक इंडिया द्वारा निर्मित इस सीजन का प्रीमियर 23 अक्टूबर 2026 को होगा।

नए सीजन में लंका का युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंचता है, जहां हनुमान रावण का अंत करने वाले एक विशेष अस्त्र की तलाश में निकलते हैं। इस दौरान उनकी यात्रा युद्धभूमि से आगे समय के विभिन्न पड़ावों तक पहुंचती है, जहां उन्हें भगवान राम के अतीत के अनजाने पहलुओं और अपनी दिव्यता की वास्तविक शक्ति से जुड़े रहस्यों का पता चलता है।

सीजन में रावण अपने सबसे शक्तिशाली रूप में नजर आएगा। एक्शन, आस्था, भावनाओं और मित्रता से भरपूर यह कहानी हनुमान की अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण लड़ाई और उनकी असीम शक्ति के नए पहलुओं को सामने लाएगी।

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शरद केलकर एक बार फिर रावण के किरदार को अपनी आवाज देंगे। उन्होंने कहा कि सीरीज का सातवां सीजन हनुमान की यात्रा को नई दिशा में ले जाएगा और दर्शकों को उनकी दिव्यता तथा अपार शक्ति के ऐसे पहलुओं से परिचित कराएगा, जिन्हें उन्होंने पहले नहीं देखा होगा।

ग्राफिक इंडिया के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरद देवराजन ने कहा कि जियोहॉटस्टार के साथ साझेदारी ने इस पौराणिक दुनिया का विस्तार करने का अवसर दिया है। सातवें सीजन में हनुमान की यात्रा को युद्धभूमि से आगे समय के विभिन्न पड़ावों तक ले जाते हुए कहानी का अब तक का सबसे अप्रत्याशित अध्याय प्रस्तुत किया गया है।

शरद देवराजन, जीवन जे. कांग और चारुवी अग्रवाल द्वारा निर्मित इस सीजन का निर्देशन जीवन जे. कांग और नवीन जॉन ने किया है। इसकी पटकथा शरद देवराजन, जीवन जे. कांग, सरवत चड्ढा और शिवांगी सिंह ने लिखी है।

‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का प्रीमियर 23 अक्टूबर से विशेष रूप से जियोहॉटस्टार पर होगा।

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सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

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श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

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Amitabh Bachchan: दिल्ली HC ने अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स मामले में दिया बड़ा निर्देश, कहा- व्यक्तिगत रूप से पेश हों एक्टर

Amitabh Bachchan: अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े मामले में एक नया मोड़ आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बिग बी से कहा है कि अगर वह इस केस को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने अमिताभ बच्चन और दूसरे पक्षों को 16 नवंबर तक अपना समझौता फाइनल करने का समय दिया है।

यह निर्देश तब दिया गया जब उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे कुछ प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) के साथ किसी समझौते पर पहुंच गए हैं। 2022 में कोर्ट ने एक ‘एक्स-पार्टे’ (एकतरफा) आदेश के जरिए अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की थी। उनके वकील ने जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए और समय मांगा था, लेकिन अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगर समझौता फाइनल नहीं होता है और अमिताभ बच्चन केस को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा।

HT की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- “समय दे दिया गया है। मामले को 16.11.2026 को लिस्ट किया जाए। अगर समझौता नहीं होता है या समझौता अधूरा रहता है और वादी किसी भी दावे या मुद्दे पर मुकदमा आगे बढ़ाना चाहता है तो उसे सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा। इससे कोर्ट को ‘कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908’ के ‘ऑर्डर X नियम 2’ और ‘ऑर्डर V नियम 3’, तथा ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023’ की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।”

बिग बी के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) के मामले के बारे में

2022 में, मशहूर वकील हरीश साल्वे ने बच्चन की ओर से हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने अपने नाम, तस्वीर, आवाज़ और व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं की सुरक्षा की मांग की थी। जस्टिस नवीन चावला ने कहा, “वादी को अपूरणीय नुकसान और क्षति होने की संभावना है। कुछ गतिविधियां उन्हें बदनाम भी कर सकती हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए एकतरफा अंतरिम आदेश (ex parte ad interim order) पारित किया जाता है।”

जस्टिस चावला ने आगे कहा-“इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वादी (बच्चन) एक मशहूर हस्ती हैं और कई विज्ञापनों में भी दिखाई देते हैं। वादी इस बात से नाराज हैं कि प्रतिवादी उनकी अनुमति या अधिकार के बिना अपने सामान और सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए उनकी सेलिब्रिटी हैसियत का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिकायत पर विचार करने के बाद मेरी राय है कि प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है और सुविधा का संतुलन भी उनके पक्ष में है।”

मुकदमे में कहा गया था कि मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपर्स अमिताभ बच्चन के नाम का इस्तेमाल गैर-कानूनी तरीके से लॉटरी चलाने के लिए कर रहे थे, जबकि अन्य लोग उनकी तस्वीर वाली टी-शर्ट बेच रहे हैं।

अमिताभ बच्चन के बारे में और जानकारी

अमिताभ बच्चन ने 1969 में ‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, जिसमें उन्होंने कवि अनवर अली की भूमिका निभाई थी। इसके बाद के वर्षों में वे ‘रेशमा और शेरा’, ‘परवाना’, ‘संयोग’ और ‘बंसी बिरजू’ जैसी फिल्मों में नजर आए, जिनमें से कई व्यावसायिक रूप से असफल रहीं। ‘आनंद’ (1971) और ‘बॉम्बे टू गोवा’ (1972) में उनके अभिनय ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया जिन पर नजर रखी जानी चाहिए।

ईरान के 19 जहाज श्रीलंका के पास फंसे:खाना-पानी और ईंधन की कमी, अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से मदद करने से बच रही सरकार

श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के 19 जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर खाने-पीने के सामान, पानी और ईंधन की कमी हो गई है। इसके बावजूद श्रीलंका सरकार फिलहाल उनकी मदद करने से बच रही है। सरकार को डर है कि ईरानी जहाजों को सहायता देने से अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम पैदा हो सकता है। श्रीलंका का कहना है कि वह किसी भी फैसले से पहले अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो के मुताबिक, ये जहाज देश के तट से करीब 24 समुद्री मील दूर खड़े हैं। हालांकि, श्रीलंका को अमेरिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं मिली है कि ईरानी जहाजों की मदद करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के बाद से फंसे जहाज श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संडे टाइम्स को बताया कि ये ईरान के तेल टैंकर हैं। उनके मुताबिक, होर्मुज में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से दर्जनों ईरानी जहाज फंसे हुए हैं और अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं। होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। श्रीलंका के अमेरिका और ईरान, दोनों से कारोबारी रिश्ते श्रीलंका के लिए यह फैसला आसान नहीं है। देश अभी आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका व ईरान दोनों उसके कारोबारी साझेदार हैं। श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज दिलाने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी। अमेरिका की मदद से कृषि क्षेत्र को खाद्य संकट से उबारने के प्रयास भी किए गए थे। श्रीलंका के अधिकारियों के मुताबिक, जहाजों को सामान और दूसरी सेवाएं देने वाली कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सरकार को मानवीय जरूरतों और अमेरिका के साथ अपने रिश्तों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। पहले भी ईरानी जहाज को मदद दे चुका है श्रीलंका करीब सात महीने पहले अमेरिकी टॉरपीडो हमले में ईरान का नौसैनिक जहाज IRIS Dena डूब गया था। इस घटना में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई थी। यह जहाज भारत के निमंत्रण पर आयोजित नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इसके बाद एक दूसरे ईरानी जहाज को तकनीकी खराबी के कारण श्रीलंका के बंदरगाह पर लाया गया था। उसके घायल नाविकों का श्रीलंकाई अस्पतालों में इलाज किया गया। जहाज से बचाए गए लोगों और घायल नाविकों को बाद में सुरक्षित ईरान भेज दिया गया था। एक्सपर्ट बोले- हमला होने पर मदद देना नैतिक जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार दयान जयतिलके ने कहा कि श्रीलंका मुश्किल स्थिति में है और उसकी मदद करने की भी व्यावहारिक सीमाएं हैं। उनके मुताबिक, दुनिया को यह समझना चाहिए कि श्रीलंका जानबूझकर सहायता से इनकार नहीं कर रहा, बल्कि उसे सावधानी से फैसला लेना पड़ रहा है। जयतिलके ने कहा कि ये युद्धपोत नहीं, बल्कि मालवाहक जहाज हैं, जो ईरान से चीन तक तेल ले जाते थे। अगर इन जहाजों पर हमला होता है और वे मदद के लिए श्रीलंका के जलक्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें तुरंत सहायता देना देश की नैतिक जिम्मेदारी होगी। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया:हमलों के डर से ब्रिटेन से 12 बमवर्षक हटे; अमेरिकी सैनिक होटलों में रहने को मजबूर ईरान पर हमला करके अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाना चाहता था, लेकिन अब यही युद्ध उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ईरानी हमलों के बाद अमेरिका को मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बदलनी पड़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

होम्बले फिल्म्स दुनियाभर में रिलीज करेगी मराठी फिल्म ‘गोंधल’

मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को 99वें अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर 2027) में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। भारतीय फिल्म निर्माण कंपनी होम्बले फिल्म्स ने इस फिल्म के अंतरराष्ट्रीय सिनेमाघरों में वितरण की घोषणा की है।

संतोष दावखर लिखित एवं निर्देशित ‘गोंधल’ एक मराठी लोक-थ्रिलर फिल्म है। इसमें किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी और निषाद भोईर ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म के संगीत को दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने तैयार किया है।

ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म रात में होने वाले पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से आस्था, मानवीय जुनून, सत्ता और धोखे के विभिन्न पहलुओं को सामने लाती है। अपनी विशिष्ट कहानी, सांस्कृतिक परिवेश और प्रभावशाली दृश्य प्रस्तुति के कारण फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली है।

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फिल्म ने 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी हासिल किया है। ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद इसके अंतरराष्ट्रीय वितरण को फिल्म की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

होम्बले फिल्म्स ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर फिल्म के विदेशी सिनेमाघरों में वितरण की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि वह इस दमदार कहानी को दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचाने को लेकर उत्साहित है। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज की तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।

होम्बले फिल्म्स ने ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी, ‘कांतारा’, ‘सालार’ और ‘महावतार नरसिम्हा’ जैसी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी की आगामी परियोजनाओं में ‘सालार: भाग 2-शौर्यंगा पर्व’, ‘महावतार परशुराम’, ‘सूर्या 48’ और ‘येतो का नाय’ सहित अन्य फिल्में शामिल हैं।

Pic Credit : UNI

बीजू जनता दल विपक्ष के साथ नहीं है

कांग्रेस पार्टी और दूसरी विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेता भ्रम में आ गए थे। उनको लग रहा था कि नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल उनके साथ है। असल में छह अक्टूबर को निर्वाचन सदन के घेराव के कार्यक्रम में बीजद के कुछ नेता शामिल हुए थे। डीएमके जैसी पार्टी के सांसदों के दूर रहने और बीजद सांसदों के शामिल होने से ही कांग्रेस को यह लगा कि कम से कम इस मसले पर विपक्ष को बीजद का समर्थन है। लेकिन बीजद ने साफ कर दिया है कि वह ‘इंडिया’ ब्लॉक के साथ नहीं है।

इसे और स्पष्ट करने के लिए बीजू जनता दल ने कहा है कि ‘इंडिया’ ब्लॉक की  ओर से ओडिशा बंद के आह्वान में वह शामिल नहीं है। गौरतलब है कि छह अक्टूबर के प्रदर्शन में बीजू जनता दल के राज्यसभा में नेता मानस मंगराज ने हिस्सा लिया था। उनके अलावा सुलता देव और पूर्व सांसद मुजीबुल्ला खान भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। अब पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों से उनका विरोध है। वे इसके खिलाफ प्रदर्शन भी करेंगे लेकिन कांग्रेस और ‘इंडिया’ ब्लॉक का न तो हिस्सा बनेंगे और न उनकी ओर से घोषित किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे। अब ओडिशा में कांग्रेस को अकेले ही प्रदर्शन करना होगा। बीजद का प्रदर्शन अलग होगा।

US Student Visa Shock: अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए अब देने होंगे 70,000 डॉलर, Trump सरकार का नया प्रस्ताव, भारतीय छात्रों पर सबसे बड़ी मार

वॉशिंगटन: अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को बड़ा झटका लग सकता है। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के लिए काम से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) के तहत काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 70,000 डॉलर की फीस प्रस्तावित की है। हालांकि, यह शुल्क सीधे छात्रों से नहीं, बल्कि उन संस्थानों से लिया जाना प्रस्तावित है जो छात्रों के OPT की सिफारिश करते हैं।

पहली बार OPT के लिए 70,000 डॉलर, नवीनीकरण पर 30,000 डॉलर

प्रस्ताव के तहत किसी एफ-1 वीजा वाले छात्र के लिए पहली बार OPT की सिफारिश करने पर संबंधित संस्थान को 70,000 डॉलर का शुल्क देना होगा। इसके बाद OPT के प्रत्येक नवीनीकरण या अगली सिफारिश पर 30,000 डॉलर का शुल्क प्रस्तावित है। फिलहाल OPT आवेदन की फीस इससे काफी कम है।

क्या है OPT?

OPT एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके तहत एफ-1 वीजा पर अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है। सामान्य तौर पर छात्र स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल तक काम कर सकते हैं, जबकि पात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) की डिग्री वाले छात्रों को अतिरिक्त दो साल का OPT मिल सकता है।

DHS ने क्यों लिया यह फैसला?

DHS का कहना है कि प्रस्तावित शुल्क का उद्देश्य वीजा कार्यक्रम में धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोकना, आव्रजन व्यवस्था की निगरानी मजबूत करना और अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा करना है। विभाग ने OPT को कम लागत वाली विदेशी श्रम व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल किए जाने की चिंताओं का भी उल्लेख किया है।

भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में पढ़ाई करते हैं। ऐसे में अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े रोजगार पर इसका असर पड़ सकता है। उच्च शिक्षा से जुड़े संगठनों ने भी आशंका जताई है कि इतनी बड़ी फीस से अमेरिका में पढ़ाई और पढ़ाई के बाद नौकरी करने के लिए आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

अभी लागू नहीं हुआ है प्रस्ताव

यह शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है। प्रस्ताव पर जनता से टिप्पणियां मांगी जाएंगी और इसके बाद DHS अंतिम फैसला लेगा। प्रस्ताव को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना भी जताई गई है।

अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय समेत विदेशी छात्रों और उन्हें OPT के जरिए काम पर रखने वाले संस्थानों के लिए यह बड़ा बदलाव होगा। इससे छात्रों की पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी पाने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी लागत पर असर पड़ सकता है।

मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

फुटबॉल में कुछ खिलाड़ी मैच खत्म होने के साथ मैदान छोड़ते हैं और कुछ खिलाड़ी मैदान छोड़ने के बाद भी खेल का हिस्सा बने रहते हैं। लियोनेल मेसी दूसरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।

 

ब्यूनस आयर्स के एस्टाडियो मोनुमेंटल में 6 अक्टूबर की रात अर्जेंटीना ने बेनिन को 3-0 से हराया। मेसी ने एक गोल किया और दो गोल में असिस्ट दिया। लेकिन उस रात स्कोर से ज्यादा महत्वपूर्ण था वह पल, जब दुनिया ने अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में मेसी को आखिरी बार देखा। 39 साल की उम्र में उन्होंने 21 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगा दिया।

 

स्टेडियम में 85 हजार से ज्यादा लोग थे। 10वें मिनट में उनके नंबर 10 के सम्मान में तालियां बजीं। मैदान पर ‘Gracias’ लिखी विशाल जर्सी रखी गई। मैच खत्म होने के बाद आसमान में ड्रोन शो हुआ और हर तरफ एक ही भावना थी- धन्यवाद, लियो।

 

यह विदाई इसलिए भी भारी थी क्योंकि मेसी ने सिर्फ अर्जेंटीना के लिए फुटबॉल नहीं खेला। उन्होंने एक पूरी पीढ़ी की फुटबॉल की कल्पना को आकार दिया।

 

मेसी से दुनिया प्यार क्यों करती है?

इस सवाल का जवाब उनके गोल, ट्रॉफियों और रिकॉर्ड से कहीं बड़ा है। मेसी से प्यार करने के लिए अर्जेंटीना का होना जरूरी नहीं। उनके प्रशंसक दुनिया के लगभग हर कोने में हैं, क्योंकि उनके खेल में कुछ ऐसा था जो भाषा और देश की सीमाओं से बाहर चला जाता था।

 

गेंद उनके पास आती थी और अचानक खेल की रफ्तार बदल जाती थी। वह तीन खिलाड़ियों के बीच से निकल जाते थे। किसी को उम्मीद नहीं होती थी कि वह पास देंगे, लेकिन गेंद बिल्कुल सही जगह पहुंच जाती थी। कभी वह खुद गोल कर देते और कभी ऐसा पास देते कि साथी खिलाड़ी के लिए गोल करना सबसे आसान काम रह जाता।

 

उनका सबसे बड़ा हुनर शायद यही था कि वह उस चीज को पहले देख लेते थे, जिसे बाकी खिलाड़ी बाद में देख पाते थे।

 

मेसी ने फुटबॉल को जटिल नहीं बनाया। उन्होंने उसे आसान दिखाई देने वाला बना दिया। यही महान कलाकार की पहचान होती है।

 

उनके खेल में एक कलाकार क्यों नजर आता था?

मेसी को सिर्फ महान फुटबॉलर कहना उनके खेल के साथ थोड़ा अन्याय है। उनके पैरों में गेंद होती थी तो मैदान किसी कैनवास की तरह लगता था। डिफेंडर रंग थे, गेंद ब्रश और गोलपोस्ट अंतिम तस्वीर।

 

लेकिन इस कला में सबसे खूबसूरत बात उनकी सहजता थी। मेसी कभी-कभी ऐसे चलते हुए दिखाई देते थे जैसे खेल उनके लिए बहुत धीमा हो। फिर एक क्षण में वह गति बदलते और पूरी डिफेंस लाइन पीछे छूट जाती।

 

उनकी ड्रिब्लिंग में ताकत से ज्यादा संतुलन था। उनके पास में दिखावे से ज्यादा समझ थी। उनके गोल में सिर्फ शॉट नहीं, कोण और टाइमिंग की समझ थी। और उम्र बढ़ने के साथ यह कला खत्म नहीं हुई।

 

शरीर पहले जैसा तेज नहीं रहा, लेकिन दिमाग और बायां पैर अब भी खेल को पढ़ते रहे। 2026 विश्व कप में 39 की उम्र में भी वह अर्जेंटीना की टीम का हिस्सा रहे और छह विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल हुए। यही मेसी की सबसे बड़ी खूबी थी कि उन्होंने अपनी उम्र के साथ खेलना सीख लिया।

 

महानता की राह आसान नहीं थी

आज जिस मेसी को अर्जेंटीना में लगभग देवता जैसा सम्मान मिलता है, उनके लिए यह रिश्ता हमेशा इतना आसान नहीं था। एक समय था जब उन पर आरोप लगता था कि वह क्लब के लिए तो सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन अर्जेंटीना के लिए नहीं।

 

2014 विश्व कप का फाइनल हारना, 2015 और 2016 में कोपा अमेरिका के फाइनल में हारना और लगातार बढ़ता दबाव, इन सबने मेसी को भीतर तक प्रभावित किया। 2016 में कोपा अमेरिका फाइनल हारने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास तक घोषित कर दिया था।

 

लेकिन वह लौटे। और फिर वही वापसी उनकी कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई।

 

2021 में अर्जेंटीना ने कोपा अमेरिका जीता। मेसी ने पहली बड़ी सीनियर अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी उठाई। अगले साल कतर में विश्व कप मिला। 2024 में एक और कोपा अमेरिका खिताब आया।

 

जिस खिलाड़ी पर कभी सवाल उठते थे कि वह अर्जेंटीना को कुछ नहीं दे पाया, वही बाद में देश के सबसे बड़े फुटबॉल नायक बन गया।

 

शायद इसी वजह से उनकी कहानी इतनी मानवीय है। वह हमेशा जीतते हुए खिलाड़ी नहीं थे। वह हारकर वापस आने वाले खिलाड़ी थे।

 

विश्व कप ने कहानी पूरी कर दी

मेसी के करियर की सबसे बड़ी कमी लंबे समय तक यही कही जाती रही कि उनके पास विश्व कप नहीं है। उनकी तुलना बार-बार डिएगो माराडोना से होती थी। हर हार के बाद सवाल उठता था कि क्या मेसी कभी वह कर पाएंगे, जो माराडोना ने 1986 में किया था।

 

फिर 2022 आया। कतर के फाइनल में अर्जेंटीना और फ्रांस आमने-सामने थे। वह मैच आज फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार फाइनल में गिना जाता है। 

 

अर्जेंटीना विश्व चैंपियन बना। मेसी के हाथ में विश्व कप था। उस पल के बाद उनकी महानता को साबित करने के लिए किसी तर्क की जरूरत नहीं रह गई। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि विश्व कप जीतने के बाद भी उन्होंने खेलना बंद नहीं किया।

 

2026 में उन्होंने अपना छठा विश्व कप खेला। अर्जेंटीना फाइनल तक पहुंचा, लेकिन स्पेन से हार गया। पराजय के बावजूद मेसी की कहानी अधूरी नहीं हुई। क्योंकि उनके पास वह ट्रॉफी पहले से थी, जिसका इंतजार उनके करियर के सबसे कठिन वर्षों में हुआ था।

 

आखिरी मैच में भी वही मेसी

बेनिन के खिलाफ आखिरी मैच में शायद सबसे खूबसूरत बात यही थी कि मेसी ने विदाई को औपचारिकता नहीं बनने दिया। उन्होंने निकोलस ओटामेंडी के गोल में मदद की। फिर निको पाज के गोल के लिए असिस्ट दिया और 71वें मिनट में पेनल्टी पर खुद गोल किया।

 

यानी आखिरी बार भी उन्होंने वही किया, जो पूरी जिंदगी करते आए थे, खेल को अपने आसपास बेहतर बनाना।

 

एक गोल। दो असिस्ट। और 3-0 की जीत। उनका अर्जेंटीना करियर 208 मैचों और 126 अंतरराष्ट्रीय गोलों के साथ खत्म हुआ। वह देश के सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले और सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर विदा हुए।

 

लेकिन आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण वह दृश्य था, जब अंतिम सीटी के बाद मेसी भावुक होकर मैदान पर खड़े थे। उनकी आंखों में आंसू थे। शायद इसलिए कि इस बार वह जानते थे कि अब वापस आने का कोई अगला मैच नहीं है।

 

मेसी की सबसे बड़ी विरासत क्या है?

ट्रॉफियां? गोल? रिकॉर्ड? आठ बैलन डी’ओर? निश्चित तौर पर ये सब उनकी महानता का हिस्सा हैं। लेकिन मेसी की सबसे बड़ी विरासत शायद इससे आगे है।

 

उन्होंने दुनिया को बताया कि फुटबॉल सिर्फ ताकत और रफ्तार का खेल नहीं है। इसमें कल्पना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक बच्चे को दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टार बनने की कहानी दी। उन्होंने लाखों बच्चों को यह सपना देखने की वजह दी कि गेंद को पैरों के करीब रखकर भी दुनिया जीती जा सकती है।

 

उन्होंने यह भी सिखाया कि महानता हमेशा शोर नहीं करती। मेसी मैदान पर बहुत कम बोलते थे। गेंद उनके लिए बोलती थी।

 

अब फुटबॉल कितना सूना होगा?

फुटबॉल खत्म नहीं होगा। नए खिलाड़ी आएंगे। नए सितारे बनेंगे। कोई अगला बड़ा गोल करेगा, कोई अगला रिकॉर्ड तोड़ेगा। लेकिन मेसी जैसा खिलाड़ी बार-बार नहीं आता। अब वह इंतजार नहीं होगा कि गेंद मेसी के पास कब आएगी।

 

वह क्षण नहीं होगा जब स्टेडियम में अचानक हजारों लोग एक साथ खड़े हो जाएं क्योंकि उन्हें पता है कि कुछ असाधारण होने वाला है।

 

कोई डिफेंडर उनके सामने खड़ा होगा, मेसी उसे देखेंगे, एक छोटा सा मूवमेंट होगा और अगले ही पल पूरा खेल बदल जाएगा। उस अनुभव का कोई विकल्प नहीं है।

 

अर्जेंटीना के लिए तो यह खालीपन और बड़ा है। मेसी अब सिर्फ टीम के कप्तान नहीं थे। वह उस टीम की पहचान बन चुके थे जिसने लंबे इंतजार और निराशाओं के बाद दुनिया को फिर अपने साथ खड़ा किया।

 

यह अंत नहीं, एक अध्याय का अंत है

मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी उतार दी है। फुटबॉल नहीं। वह क्लब फुटबॉल में इंटर मियामी के साथ खेलते रहेंगे। लेकिन अर्जेंटीना के नंबर 10 के रूप में उनकी कहानी अब पूरी हो चुकी है। और शायद यही इस विदाई की खूबसूरती है।

 

उन्होंने तब विदा ली, जब लोग यह नहीं पूछ रहे थे कि मेसी कब रिटायर होंगे? लोग पूछ रहे थे कि मेसी अभी क्यों रिटायर हों? क्योंकि उम्र ने उन्हें रोका नहीं था। आखिरी मैच में भी वह गोल कर रहे थे, असिस्ट दे रहे थे और खेल को अपनी शर्तों पर प्रभावित कर रहे थे।

 

लेकिन हर महान कहानी का एक अंतिम पन्ना होता है। मेसी का वह पन्ना ब्यूनस आयर्स में लिखा गया। आसमान में उनके नाम की रोशनी थी। स्टेडियम में हजारों आवाजें थीं। आंखों में आंसू थे। और अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में एक आखिरी बार वही नंबर चमक रहा था- 10।

 

कुछ खिलाड़ी फुटबॉल खेलते हैं। कुछ खिलाड़ी फुटबॉल जीतते हैं। और कुछ ऐसे होते हैं, जिनके जाने पर लगता है कि फुटबॉल का एक हिस्सा अपने साथ चला गया। लियोनेल मेसी उसी आखिरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

Who was Maharaja Agrasen, Learn about his principles of justice

Maharaja Agrasen Jayanti 2026: भारत के महान लोकनायक एवं महाराजा अग्रसेन की जयंती 11 अक्टूबर, रविवार 2026 को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, उनका जन्म आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को हुआ था। महाराजा अग्रसेन समानता पर आधारित आर्थिक नीति को अपनाने वाले संसार के प्रथम सम्राट थे। महाराजा अग्रसेन को समाजवाद का अग्रदूत भी कहा जाता है। महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति प्राचीन भारत के इतिहास में सबसे अनोखी, मानवीय और प्रेरणादायक मानी जाती है। आइए जानते हैं महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति और उनके जीवन के बारे में विस्‍तार से…

 

कौन थे महाराजा अग्रसेन?

महाराजा अग्रसेन का जन्म सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा वल्लभ सेन के यहां हुआ था जो प्रतापनगर के राजा थे। मान्यता के अनुसार इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की 34वीं पीढ़ी में द्वापर के अंतिमकाल और कलियुग के प्रारंभ में आज से 5000 वर्ष पूर्व हुआ था।

 

यह भी कहा जाता है कि उनका जन्म विक्रम संवत प्रारंभ होने के करीब 3130 साल पहले हुआ था। कहते हैं कि महाभारत के युद्ध के समय महाराज अग्रसेन 15 वर्ष के थे। महाराज अग्रसेन ने 108 वर्षों तक राज किया। उनके 18 पुत्र हुए जिनसे 18 गोत्र चले। गोत्रों के नाम गुरुओं के गोत्रों पर रखे गए।

 

‘1 रुपया और 1 ईंट’ का स्वर्णिम सिद्धांत

महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति का सबसे बड़ा स्तंभ उनकी सामाजिक सहायता प्रणाली थी। जब भी कोई नया परिवार उनके राज्य (अग्रोहा) में आकर बसता था तो राज्य का प्रत्येक नागरिक उसे 1 रुपया और 1 ईंट भेंट करता था।

इसका उद्देश्‍य यह था कि 1 ईंट से वह व्यक्ति अपने रहने के लिए घर बना लेता था और रुपयों से अपना व्यापार शुरू कर पाता था। इस व्यवस्था से कोई भी व्यक्ति असहाय या गरीब रहकर अपराध (जैसे चोरी या लूट) की ओर प्रवृत्त नहीं होता था। उन्होंने समाज से असमानता मिटाकर अपराध की संभावना को ही समाप्त कर दिया था।

 

अहिंसात्मक एवं सुधारात्मक दंडनीति

महाराजा अग्रसेन शारीरिक हिंसा, मृत्युदंड या कठोर कारावास के घोर विरोधी थे। यदि कोई नागरिक पहली बार कोई अपराध या गलती करता था, तो उसे तुरंत कठोर दंड देने के बजाय सुधरने का अवसर दिया जाता था। दंड ऐसा होता था जिससे अपराधी में पश्चाताप की भावना जागे, न कि प्रतिशोध की।

महाराजा अग्रसेन का न्याय केवल अपराध की सजा देने तक सीमित नहीं था, बल्कि अपराध की जड़ (गरीबी और लाचारी) को समाप्त करने और समाज में समानता स्थापित करने पर केंद्रित था।

 

आर्थिक समानता और स्वाभिमान

महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में ऐसी व्यवस्था बनाई थी जहां कोई भी व्यक्ति याचक (भिखारी) न बने। उनका मानना था कि किसी को बिना काम किए दान देना उसके स्वाभिमान को चोट पहुंचाता है। इसलिए उन्होंने ऐसी नीति बनाई जिससे हर व्यक्ति को व्यापार या कृषि का साधन मिले और वह स्वाभिमान से अपनी जीविका चला सके।

 

प्रजातांत्रिक एवं लोकतांत्रिक न्याय

महाराजा अग्रसेन ने राजतंत्र में भी लोकतांत्रिक सिद्धांतों को लागू किया। उन्होंने राज्य को 18 प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया था और 18 यज्ञों के माध्यम से 18 गोत्रों की स्थापना की। निर्णय अकेले राजा द्वारा नहीं, बल्कि गणराज्य के प्रतिनिधियों और गुरुओं की सलाह व सहमति से निष्पक्ष रूप से लिए जाते थे।

 

राजा और प्रजा के बीच विश्वास

उनकी न्यायनीति इतनी पारदर्शी और लोककल्याणकारी थी कि प्रजा को कभी अदालती चक्करों या शोषण का सामना नहीं करना पड़ता था। राज्य में विश्वास और बंधुत्व का वातावरण था, जिससे अपराध दर न के बराबर थी।

महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कल्याणकारी राज्य और व्यवहारिक समाजवाद का पहला ऐतिहासिक उदाहरण थी, जहां न्याय का अर्थ समाज के हर व्यक्ति को बराबरी का अवसर और सम्मान देना था।

 

पशु हिंसा पर प्रतिबंध

उन्होंने अपने राज्य में यज्ञों में दी जाने वाली बलि और पशु हिंसा पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया था। उनका मानना था कि जीव हत्या अन्याय है।

 

महाराज अग्रसेन के मुख्‍य 3 आदर्श

महाराज अग्रसेन ने एक ओर हिन्दू धर्मग्रंथों में वैश्य वर्ण के लिए निर्देशित कर्मक्षेत्र को स्वीकार किया और दूसरी ओर देशकाल के परिप्रेक्ष्य में नए आदर्श स्थापित किए। उनके जीवन के मूल रूप से 3 आदर्श हैं- लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, आर्थिक समरूपता एवं सामाजिक समानता।