डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों ‘मन अनहद नाद’ और ‘अनकहे से संवाद’ का भव्य विमोचन

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

Dr. Anjana Chakrapani Mishra

प्रतिष्ठित संस्था वामा साहित्य मंच ('शब्द शक्ति की संवाहक') के तत्वावधान में एक गरिमामयी साहित्यिक समारोह का आयोजन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों— काव्य संग्रह 'मन अनहद नाद' और आलेख संग्रह 'अनकहे से संवाद' का भव्य एवं शुचित विमोचन किया गया।

 

सांस्कृतिक एवं औपचारिक शुभारंभ

मंगलाचरण: कार्यक्रम का शुभारंभ लेखिका की नातिन अलाइना द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना तथा लब्धप्रतिष्ठ गायिका आकांक्षा जाचक शेट्टी द्वारा अपनी मधुर स्वर-लहरी में गाई गई सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

 

स्वागत वक्तव्य: वामा साहित्य मंच की अध्यक्षा ज्योति जैन ने शब्द-पुष्पों से अतिथियों, साहित्यकारों एवं सुधी पाठकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लेखिका तत्सम प्रधान भाषा का सहज प्रयोग करते हुए समाज की विसंगतियों को प्रखरता से उजागर करती हैं। समाज में बिखरे शब्दों को एक माला में पिरोने का यह प्रयास सराहनीय है और दोनों ही पुस्तकें अत्यंत उत्कृष्ट हैं।

 

पारिवारिक अनुभूतियां (पारिवारिक पाती)

कनिष्क मिश्र: उन्होंने कहा कि मां भले ही अत्यंत संस्कृतनिष्ठ शब्दों का चयन करती हैं, किंतु उनका सुनना और समझना अत्यंत सहज एवं सुंदर है; वही उनके मन का वास्तविक अनहद नाद है।

निष्ठा मिश्र: इस दिन को विशेष बताते हुए उन्होंने कहा कि मां की रचनाएं भले ही पठन में गंभीर एवं कठिन लगें, परंतु वे उनके निरंतर प्रयास, जूनून, अनुभव और प्रेरणा का उत्सव हैं। यह उपलब्धि उनकी लेखनी की सुखद शुरुआत मात्र है।

 

लेखिका का वक्तव्य एवं काव्य प्रस्तुति

मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित प्रबुद्धजनों का अभिवादन करते हुए लेखिका डॉ० अंजना चक्रपाणि मिश्र ने कहा:

“मेरी पुस्तकें मेरा दर्पण हैं, जो आपको मुझसे आत्मीय रूप से रूबरू कराएंगी। मैं दूसरों के सुख-दुख को स्वयं में महसूस करके लिखती हूं। मेरे पिता जी आयुर्वेदाचार्य थे और उनकी प्रेरणा व साधारण परिवेश में पली मेरी मां प्रसूति रोग विशेषज्ञ बनीं, जिनसे मुझे सदैव संबल मिला। इस पूरी यात्रा में मेरे पति, पुत्र और पुत्री हमेशा मेरे सहयोगी रहे हैं।”

इसके उपरांत उन्होंने अपने गीत “रजत राग— चंदनियां गुनगुना रही है…” की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर संपूर्ण सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

कृतियों पर सारगर्भित एवं गहन समीक्षा

डॉ० गरिमा संजय दुबे (प्रोफेसर एवं वरिष्ठ साहित्यकार):

लेखन की शैली: पद्य और गद्य— दोनों ही विधाओं पर समान अधिकार के साथ न्याय करना अत्यंत कठिन कार्य है। ये पुस्तकें एक-दूसरे की पूरक और संवादों का जीवंत प्रतिबिंब हैं।

'मन अनहद नाद' (काव्य संग्रह): इसकी कविताएं स्वयं के मन की तलाश करते हुए पाठक को दूसरों के मन की यात्रा कराती हैं। इसमें स्त्रीभाव, राधा-कृष्ण का प्रेम और आध्यात्मिक दर्शन का अद्भुत समावेश है। इसमें रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) जैसे उपेक्षित विषय पर भी संवेदनशीलता से लिखा गया है कि यह थकान का नहीं, बल्कि मुक्ति का समय है।

'अनकहे से संवाद' (आलेख संग्रह): यह लालित्यपूर्ण शैली में लिखे आलेखों का सुंदर संकलन है। इसमें संस्कृत भाषा, लोक परंपरा, बनारस की आध्यात्मिकता और आधुनिकता का सुंदर समन्वय है। 'नीला लिफाफा', कबीर चौरा और मणिकर्णिका घाट पर लिखे गए आलेख अत्यंत प्रभावकारी बन पड़े हैं।

श्रीमती शैलबाला मार्टिन पाठक (पूर्व आईएएस एवं पूर्व सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग – विशिष्ट अतिथि):

उन्होंने लेखिका को प्रेम, वात्सल्य और परंपरा व आधुनिकता का सुंदर संगम बताया। उन्होंने कहा कि लेखिका की कविताएं अंतर्मन की सहज अभिव्यक्ति हैं, जो पाठक को गहराई से सोचने पर मजबूर करती हैं। इसके बाद उन्होंने 'संवेदना' और 'बनारस की गलियां' कविताओं का वाचन भी किया।

आकांक्षा जाचक शेट्टी: उन्होंने लेखिका को विलक्षण प्रतिभा का धनी बताते हुए डॉ० अंजना चक्रपाणि द्वारा रचित 'चेती गीत' की सुमधुर प्रस्तुति दी।

 

मुख्य अतिथि का संबोधन एवं परामर्श

श्री पंकज सुबीर (प्रख्यात साहित्यकार एवं सारथी, शिवना प्रकाशन):

सराहना: उन्होंने दोनों कृतियों की तुलना बेटियों से की और कहा कि गद्य व पद्य का यह संकलन चौंकाता है। 'रजोनिवृत्ति' और 'स्त्री बोलने पर' जैसे अनछुए विषयों पर लिखना एक साहसिक और आवश्यक कदम है। उन्होंने 'ईश्वर जैसा' तथा 'पिता' कविताओं का मंच से वाचन करते हुए कहा कि “स्त्री का लिखना हमारे समय की वास्तविक उपलब्धि है।”

 

सुझाव: उन्होंने भाषा के संदर्भ में कबीर का उदाहरण देते हुए कहा कि “भाषा बहता नीर होनी चाहिए।” आगे के युवा पाठकों से जुड़ने के लिए भाषा को और अधिक सरल बनाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने पुस्तक के शीर्षक चयन में सावधानी रखने तथा भावी कविता संग्रहों को अलग-अलग खंडों में विभाजित करने का व्यावहारिक परामर्श दिया।

 

अन्य गणमान्य जनों के उद्गार एवं संचालन

पद्मा राजेंद्र (संस्थापक अध्यक्ष, वामा साहित्य मंच): उन्होंने इस आयोजन को अत्यंत गर्व और प्रसन्नता का क्षण बताया तथा लेखिका को एक संवेदनशील, कोमल हृदया और आत्मीय सखी के रूप में रेखांकित किया।

मंच संचालन: सम्पूर्ण कार्यक्रम का गरिमापूर्ण एवं कुशल संचालन वरिष्ठ कवयित्री प्रीति दुबे द्वारा किया गया।

अतिथि स्वागत व आभार: कार्यक्रम के दौरान चक्रपाणि दत्त मिश्र, राकेश पाठक, कनिष्क मिश्र, अमर कौर चड्ढा, निष्ठा मिश्र एवं इंदू मिश्र का भावभीना स्वागत किया गया। अंत में चक्रपाणि दत्त मिश्र ने उपस्थित सभी साहित्य-अनुरागियों, प्रबुद्धजनों एवं अतिथियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति प्रयासों को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। काट्ज ने कहा था- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 2 सितंबर बुधवार को कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। उन्होंने आगे बताया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलहाल इस योजला को फ्रीज किया है। इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। ट्रम्प ने फरवरी 2025 में पहली बार गाजा की करीब 23 लाख आबादी को दूसरी जगह बसाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि काट्ज ने यह भी माना था कि फिलहाल कोई भी देश इतनी बड़ी संख्या में गाजा के लोगों को अपने यहां लेने के लिए तैयार नहीं है। इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कहा था कि गाजा के करीब 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहां से चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने गाजा को फिर से बसाने और उसे भूमध्यसागर के किनारे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी। ट्रम्प के इस प्रस्ताव का कई देशों ने विरोध किया था। इनमें मिस्र भी शामिल था। मिस्र, इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि अगर उन्हें उनकी जमीन से जबरन हटाया गया तो यह उन्हें 1948 की याद दिलाएगा, जब इजराइल के बनने के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। फिलिस्तीनी इस घटना को ‘नकबा’ यानी तबाही कहते हैं। बाद में अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने इलाके के लिए 20 बिंदुओं वाली योजना पेश की। इसमें फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की बात नहीं थी। दावा- 80% लोग गाजा छोड़ने को तैयार इजराइल के कट्टरपंथी नेता इतामार बेन ग्वीर ने गुरुवार को गाजा की ज्यादातर फिलिस्तीनी आबादी को इलाके से बाहर निकालने की योजना पेश की थी। उन्होंने इसे स्वैच्छिक पलायन बताया था। काट्ज ने भी दावा किया कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं, लेकिन हमास उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। इस योजना में एक अलग सरकारी मंत्रालय बनाने की बात भी शामिल है। बेन ग्वीर ने कहा था कि अगर अक्टूबर के आखिर में होने वाले चुनाव के बाद उनकी गठबंधन सरकार सत्ता में रहती है तो वे इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। नेतन्याहू बोले- इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि “हम इस इलाके को नियंत्रित कर रहे हैं। हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हम यलो लाइन पर बने रहेंगे।” यलो लाइन गाजा के उन इलाकों को अलग करती है, जो हमास और इजराइली सेना के नियंत्रण में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम गाजा पट्टी के 60% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और हम रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम उन आतंकियों को खत्म कर रहे हैं जो हर दिन हमें धमकी देते हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। ————– यह खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी ऐशोआराम के लिए नहीं; ट्रम्प के बेटे को भी मिल चुकी धमकी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की थी। पूरी खबर पढ़ें…

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

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आध्यात्मिक जीवन की सही उम्र: बचपन

भारत में एक भ्रांति प्रचलित है कि अध्यात्म का मार्ग बुढ़ापे में अपनाया जाना चाहिए। परंतु बुढ़ापे में जब शरीर और इंद्रियां दुर्बल हो जाती हैं, तब साधना कर पाना अत्यंत कठिन होता है। “धर्म तो जीवन जीने की कला है”—इसे बचपन से ही सीखा जाना चाहिए, ताकि संपूर्ण जीवन सुखमय और अर्थपूर्ण बन सके। बचपन में पड़े धर्म के संस्कार मन को वश में करने की विद्या सिखाते हैं, जिससे बच्चों के लिए शील और सदाचार का पालन करना सहज हो जाता है।

 

शिविर का मंगल उद्देश्य

इस बाल शिविर का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को एक ऐसी मानवीय चेतना से समृद्ध करना है, जो पूरे देश और विश्व में सुख-शांति का वातावरण निर्मित कर सके। इतनी छोटी उम्र में ही बच्चों के भीतर धर्म और सद्गुणों के बीज रोपित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसी कल्याणकारी लक्ष्य को ध्यान में रखकर आनापान ध्यान बाल शिविरों का आयोजन किया जाता है।

 

बालकों के विकास में लाभ

देश-विदेश में आयोजित आनापान शिविरों में शामिल हुए बच्चों के व्यक्तित्व और व्यवहार में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है। इस विधि के नियमित अभ्यास से बच्चों में निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव महसूस किए गए हैं:

 

शैक्षणिक व भावनात्मक विकास:

एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।

नैतिक मूल्य और आत्मविश्वास: नैतिक मूल्यों का विकास होता है तथा खेलकूद व अन्य कलाओं में कुशलता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

 

शिविर संबंधी विवरण और पात्रता

आयोजक: धम्म मालवा विपश्यना केंद्र

शुल्क: यह शिविर पूरी तरह से निःशुल्क आयोजित किया जाता है।

आयु वर्ग: 8 से 13 वर्ष और 13 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए पृथक शिविर।

 

अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए विजिट करें: https://malwa.dhamma.org/

 

नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

यह भी पढ़ें: नेपाल की टनल से 9 दिन बाद जिन संजय शाह को निकाला गया क्या वो मंत्र के सहारे जिंदा रहे?

भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन जाति व्यवस्था अभी भी जारी है: बॉम्बे हाईकोर्ट

भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन जाति व्यवस्था अभी भी जारी है: बॉम्बे हाईकोर्ट

bombay High court News

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि 21वीं सदी में हम चांद के दूसरे छोर तक पहुंचने का बखान करते हैं लेकिन कठोर हकीकत यह है कि हमारे देश में अभी भी जाति व्यवस्था की सामाजिक बुराई जारी है, जिसकी वजह से हमारे कुछ नागरिकों को मानवीय गरिमा से नीचे के काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुशा देशपांडे की डिविजनल बेंच ने ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाथ से मैला ढोने या साफ करने को मैनुअल स्कैवेंजिग कहा जाता है। हाथों से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई भी इसके दायरे में आती है। 

 

बेंच ने कहा, “मैनुअल स्कैवेंजिग एक ऐसी प्रथा है, जो आज भी हमारे देश में जारी है और जो एक विशेष वर्ग को पीढ़ियों से यह अमानवीय काम करने के लिए मजबूर कर रही है।” कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और ऐसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करने वाले कानूनों के बावजूद यह प्रथा अभी भी जारी है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के उस नियम को चुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था कि अगर निजी सोसाइटी या ठेकेदार, मैनुअल स्कैवेंजिग के लिए किसी को काम पर रखते हैं तो दुर्घटना होने की स्थिति में मुआवजा देने की जिम्मेदारी भी उन्ही की होगी। कोर्ट ने कहा कि कानून नियोक्ता के आधार पर सफाई कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं करता है।

ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस ने ऑनलाइन वीडियो गेम्स की एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें खिलाड़ियों को अवैध प्रवासियों को पकड़ने, डिपोर्ट करने और अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। वेबसाइट पर मौजूद एक गेम ‘रियो रन’ क्लासिक आर्केड गेम ‘स्नेक’ पर बेस्ड है। इसमें अमेरिकी बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन का डिजिटल किरदार रियो ग्रांडे नदी के पास माइग्रेंट्स का पीछा करता है। वहीं दूसरे गेम ‘बिल्ड द वॉल’ में खिलाड़ियों को ब्लॉक जोड़कर अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का टास्क दिया गया है। इसमें लिखा है- “आने वाली भीड़ से सीमा की रक्षा करें।” व्हाइट हाउस बोला- उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश व्हाइट हाउस के एक्स अकाउंट ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी MAGA लोगो से मिलता-जुलता एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लिखा था- “जीतना बंद नहीं कर सकते। दीवार बनाओ। डिपोर्ट करो। ट्रम्प अकाउंट भरो।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इन गेम्स के जरिए प्रशासन राष्ट्रपति की उपलब्धियों और नीतियों को ऐसे तरीके से लोगों तक पहुंचाना चाहता है, जो हर अमेरिकी से जुड़ सके। मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी गेम्स लॉन्च होने के बाद अधिकार संगठनों ने व्हाइट हाउस की आलोचना की। टेक्सास के ईगल पास में फ्रोंटेरा फेडरेशन की सह-निदेशक अमेरिका गार्सिया ग्रेवाल ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहा था और अब उसने इसे वीडियो गेम का रूप दे दिया है। बॉर्डर पर काम करने वाली संस्था AMIGOS सैन डिएगो कम्युनिटी की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एड्रियाना जासो ने कहा कि इन आर्केड गेम्स से प्रशासन की गंभीरता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रवासियों को अमानवीय और मजाक का विषय बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हिरासत केंद्रों में लोगों की मौत हो रही है। उनके मुताबिक, “यह मुद्दे को ऐसे पेश करता है जैसे यह कोई गेम हो, जबकि असल में ऐसा नहीं है।” खबर अपडेट हो रही है…

ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस ने ऑनलाइन वीडियो गेम्स की एक वेबसाइट लॉन्च की है। इसमें खिलाड़ी अवैध प्रवासियों का पीछा कर उन्हें पकड़ सकते हैं, डिपोर्ट कर सकते हैं और अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बना सकते हैं। वेबसाइट का एक गेम ‘रियो रन’ क्लासिक ‘स्नेक’ पर बेस्ड है। इसमें अमेरिकी बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन का डिजिटल किरदार रियो ग्रांडे नदी के पास प्रवासियों का पीछा करता है। दूसरा गेम ‘बिल्ड द वॉल’ है। इसमें खिलाड़ी ब्लॉक्स जोड़कर अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाते हैं। गेम में लिखा है- “आने वाली भीड़ से सीमा की रक्षा करें।” व्हाइट हाउस बोला- नीतियों को लोगों तक पहुंचाने का तरीका व्हाइट हाउस के एक्स अकाउंट ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) लोगो से मिलता-जुलता एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लिखा था- “जीतना बंद नहीं कर सकते। दीवार बनाओ। डिपोर्ट करो। ट्रम्प अकाउंट भरो।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इन गेम्स के जरिए राष्ट्रपति की उपलब्धियों और नीतियों को लोगों तक ऐसे तरीके से पहुंचाया जा रहा है, जो उन्हें आसानी से समझ आए और उनसे जुड़ सके। मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की गेम्स लॉन्च होते ही मानवाधिकार संगठनों ने व्हाइट हाउस की आलोचना शुरू कर दी। टेक्सास के ईगल पास में फ्रोंटेरा फेडरेशन की सह-निदेशक अमेरिका गार्सिया ग्रेवाल ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहा था, अब उसने इसे सचमुच वीडियो गेम बना दिया है। बॉर्डर पर काम करने वाली संस्था AMIGOS सैन डिएगो कम्युनिटी की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एड्रियाना जासो ने कहा कि इन गेम्स से प्रशासन के रवैये में गंभीरता की कमी दिखती है। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को अमानवीय और मजाक का विषय बनाया जा रहा है, जबकि हिरासत केंद्रों में लोगों की मौत हो रही है। उनके मुताबिक, “यह मुद्दे को ऐसे दिखाता है जैसे यह कोई गेम हो, जबकि असल में ऐसा नहीं है।” ट्रम्प ने सबसे बड़े मास डिपोर्टेशन का वादा किया था ट्रम्प ने 2024 के चुनाव प्रचार में अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा मास डिपोर्टेशन अभियान चलाने का वादा किया था। जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद उनकी सरकार ने इस पर तेजी से काम शुरू किया। प्रशासन ने बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की गिरफ्तारी और देश से बाहर भेजने के लिए इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) को ज्यादा अधिकार दिए। अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई और अवैध तरीके से दाखिल होने वालों के खिलाफ कार्रवाई सख्त की गई। ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का मकसद अवैध सीमा पार करने पर रोक लगाना और बिना वैध दस्तावेज अमेरिका में रह रहे लोगों को तेजी से देश से बाहर भेजना है। खबर अपडेट हो रही है…

नेपाल बाढ़- 5300 से ज्यादा अब भी लापता:1259 की मौत, 12 हजार को बचाया; भारत ने मदद की एक और खेप भेजी

नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ की तबाही के 10 दिन बाद भी 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है। संकट के बीच भारत ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री की एक और खेप भेजी है। गुरुवार रात दो C-130J विमानों से 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू पहुंची। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में 21,402 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ये टीमें खोज, बचाव, राहत वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में लगी हैं। नेपाल आपदा से जुड़ी 5 तस्वीरें… चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं। नेपाल बाढ़ से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गोविंद देव गिरि के प्रमोशन पर उठे सवाल

​ram mandir trust govind dev giri: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। चढ़ावा विवाद के चलते चंपत राय की जिम्मेदारी अब गोविंद देव गिरि को सौंपी गई है। दिल्ली के महेश भागचंदका को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। गिरि को महासचिव बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है उनके कोषाध्यक्ष रहते हुए ही चढ़ावा में चोरी की घटना हुई थी। कोष के लिए कोषाध्यक्ष ही सीधे जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में महासचिव के रूप में गोविंद गिरि का नाम लोगों के गले नहीं उतर रहा है। 

क्या कहा गोविंद देव गिरि ने?

​ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि नई टीम का मुख्य लक्ष्य अयोध्या को दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करना और मंदिर निर्माण के साथ-साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज को पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ाना है।

 

​बैठक में वित्तीय व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने, चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और SIT जांच से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का रुख स्पष्ट किया गया। आने वाले दिनों में जरूरत पड़ने पर ज्वाइंट या डिप्टी CEO की नियुक्ति के लिए जल्द ही SOP और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।

चंपतराय का दबदबा बरकरार

महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय का सीधे-सीधे तो नहीं, लेकिन परोक्ष रूप से ट्रस्ट में उनका दबदबा बरकरार है। दरअसल, नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। चंपत राय इस ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के नए सदस्य महेश पांडेय को भी चंपत राय का करीबी माना जाता है। हालांकि अध्यक्ष और महासचिव के पद अब संत समाज के पास हैं।  

 

उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन को सुदृढ़ करने के लिए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चुना गया है। इस पद के लिए 16 अभ्यर्थियों में से तीन नाम—एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज—शॉर्टलिस्ट किए गए थे, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम सहमति बनी।

 

​इनके अलावा अयोध्या निवासी ​वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में रामलला की ओर से प्रभावी कानूनी पैरवी की थी। शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया।