मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

climate change

प्रभाकर मणि तिवारी

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया के मुंबई, कोलकाता और ढाका समेत निचले इलाको में बसे कई शहरों में 1.40 करोड़ लोगों पर निकट भविष्य में विस्थापन का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2024 में समुद्री जलस्तर में रिकार्ड छह मिलीमीटर की वृद्धि ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या-क्या कहा गया है यूएन की रिपोर्ट में?

संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने 55वीं पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स मीटिंग में सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव नवीद हनीफ ने भी न्यूयार्क में पत्रकारों को विस्तार से इसकी जानकारी दी।

 

रिपोर्ट में विस्थापन के खतरे की समयसीमा के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि इसके मुताबिक, दुनिया भर के करीब 77 करोड़ लोग इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं। इसमें कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आगे चल कर खाद्य सुरक्षा, पूर्वजों की जमीन और हमारी पहचान के लिए भी खतरा बन सकता है। ऐसे में सरकारों को इस मुद्दे को अपनी योजना प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए एक बहुत ही व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

 

रिपोर्ट में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ और सूखे के बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि ग्लेशियरों की तादाद ज्यादा होने के कारण दक्षिण एशिया दुनिया का 'तीसरा ध्रुव' बन गया है।

 

अब तक मिले संकेतों से अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले 15-20 वर्षों में दक्षिण एशिया में ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। उसके बाद पैदा होने वाली सूखे की स्थिति के कारण खेती और खाद्य सुरक्षा पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे बदलाव हिमालयी नदी प्रणाली और खेती पर निर्भर समुदायों को के लिए बड़ा खतरा बनेंगे।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया तेज होती है और पानी गर्म होता है। इसका असर कई स्तरों पर नजर आता है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहरी बुनियादी ढांचे, जल प्रणालियों, परिवहन, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को पहले ही नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी नतीजे सामने आ रहे हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर कम ऊंचाई वाले द्वीपीय देशों पर होगा। हालांकि यह उन तक ही सीमित नहीं रहेगा।समुद्र का बढ़ता जलस्तर विकसित और विकासशील, दोनों वर्ग के देशों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका के न्यूयार्क और मियामी के अलावा ग्वांझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में तटवर्ती इलाके के बुनियादी ढांचे पर भी खतरे की आशंका है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

एशिया के किन शहरों पर खतरा ज्यादा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में खासकर भारतीय शहरों कोलकाता और मुंबई के अलावा बांग्लादेश की राजधानी ढाका पर समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे गंभीर हैं।  दूसरे इलाकों की तुलना में यहां खतरा ज्यादा होने की क्या वजह है?

 

पर्यावरणविदों का कहना है कि इन शहरों में समुद्री जमीन पर तेजी से बुनियादी ढांचे के साथ ही इंसानी बस्तियां बसाई जा रही हैं। लगातार बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कमी हो रही है। ऐसे में टाउन प्लानरों के सामने समुद्री जमीन हासिल करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

 

उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा इन शहरों के उन तटीय इलाकों में हैं जहां बीते 15-20 साल में समुद्री जमीन पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बसाई गई हैं।

 

कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में सामुद्रिक विज्ञान संस्थान के प्रमुख डा। सुगत हाजरा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “समुद्री जमीन पर बुनियादी ढांचा और इंसानी बस्तियां बसाने की योजना बनाते समय पर्यावरणया भविष्य में पैदा होने खतरों की अनदेखी की जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए इससे निपटने के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनाने और उस पर अमल करने की जरूरत है।”

 

हाजरा कहते हैं, “बंगाल के सुंदरबन इलाके में बसे द्वीपों पर बीते कई सालों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले बदलाव का असर नजर आ रहा है। बंगाल की खाड़ी के बढ़ते जलस्तर के कारण इलाके के कई द्वीप पानी में डूब चुके हैं और कई डूबने की कगार पर हैं। उन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।” ALSO READ: शहरों को ठंडा रखने वाले पेड़ों को भी अब चाहिए सहारा

 

जादवपुर विश्वविद्यालय में ही जलवायु परिवर्तनकार्यक्रम की प्रमुख जयश्री राय डीडब्ल्यू से कहती हैं, “संयुक्त राष्ट्र पहले से इस खतरे की चेतावनी देता रहा है। अफसोस की बात यह है कि सरकार ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया है। शायद इस खतरे से बचने की दिशा में ठोस पहल करने से पहले हम सिक्किम, धराली और नेपाल जैसी किसी आपदा का इंतजार कर रहे हैं।”

 

कोलकाता में मौसम विज्ञानी डा. प्रणवेश कुंडू डीडब्ल्यू से कहते हैं, “संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम एजेंसियां समय-समय पर इस खतरे से आगाह करती रही हैं। लेकिन अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद लोग इसे भूल जाते हैं।” वो बताते हैं, “वर्ष 2019 में अमेरिका स्थित शोध समूह क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर पेश की थी। उसमें में कहा गया था कि वर्ष 2050 तक भारत में बाढ़ और समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से 3।60 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।”

 

कुंडू ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सूरत, मुंबई, कोलकाता, केरल, ओडीशा और चेन्नई जैसी तटवर्ती इलाकों पर भी भारी खतरा मंडराने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन उसका गंभीरता से संज्ञान तक नहीं लिया गया। अब ताजा रिपोर्ट में भी वही चेतावनी दोहराई गई है।

‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्‍कृति विभाग के श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्‍य स्‍तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्‍य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जन्‍मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा।

मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्‍चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्‍तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्‍ण लोक का भूमि-पूजन किया जायेगा।  

 

राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। 

 

राज्य मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्‍व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

 

श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्‍होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों का विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं। 

 

कृष्णमय होगा मध्यप्रदेश, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ-‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे। 

 

नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन-उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा। दूसरे दिन कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका, भजन गायन तथा ‘श्रीकृष्ण की माखन चोरी’ रासलीला होगी। तीसरे दिन ओडिसी शैली में कृष्ण आधारित नृत्य-नाटिका, भजन गायन और ‘श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीला’ प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पांचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिका तथा भजन गायन होगा। सभी पांचों दिनों रासलीला का मंचन भी किया जाएगा। 

 

सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की झलक-उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें ‘कर्षति इति कृष्ण’, भजन गायन और बघेली लोकगायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत-महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गायन होगा। दूसरे दिन बुंदेली गायन तथा भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भजन गायन के साथ श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी महिदपुर की परंपरा पर केंद्रित श्रीकृष्ण जन्म आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे कृष्ण के विविध प्रसंग-पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन तथा प्रणामी परंपरा पर केंद्रित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही भजन गायन भी होगा। अमझेरा को श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी वरण से जुड़े प्राचीन स्थल के रूप में आयोजन की विषयवस्तु में विशेष स्थान दिया गया है। 

 

जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग-महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। आयोजन स्थल पर भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

 

प्रदेश के अनेक जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग-श्रीकृष्ण पर्व के अंतर्गत पाली (उमरिया), शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगायन और भजन के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर साकार किया जाएगा। उज्जैन के गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को गीत गोविंद केंद्रित नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में भी लोक एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। आगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित अनेक जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नृत्य-नाटिका, भजन और लोकगायन के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ा जाएगा। 

 

1500 से अधिक स्थानीय कलाकार होंगे सहभागी-‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुतियां देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में लोकगायन, भजन, नृत्य-नाटिका और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन एवं दर्शन के विविध आयाम सामने आएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने और प्रदेश की विविध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का व्यापक प्रयास बनकर सामने आएगा।

 

 

नेपाल के त्रिभुवन त्रिशूली स्कूल की इमारत तो बह गई पर प्रिंसिपल ने 1600 बच्चों को बचा लिया! अब भारत इस स्कूल को फिर बनवाएगा

Nepal Flood: नेपाल के नुवाकोट जिले में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को हीरो माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने 26 अगस्त को त्रिशूली घाटी में आई भयानक बाढ़ के दौरान स्कूल के सभी 1,643 छात्रों की जान बचाने में मदद की थी। हालांकि, स्कूल की इमारत अब नष्ट हो चुकी है, इसलिए दवाड़ी ने भारत सरकार से अपील की है कि वे स्कूल को फिर से बनाने और बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने में मदद करें।

स्कूल से जल्दी निकलो

मीडिया से बात करते हुए दवाड़ी ने बताया कि कैसे स्कूल की एक आम सुबह समय के साथ एक मुश्किल दौड़ में बदल गई। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9:20 बजे, मुझे एक दोस्त का जरूरी फोन आया, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि पास के एक गांव में नदी का पानी भर गया है। वहां, से जल्दी निकलो। इसके कुछ ही देर बाद, एक घबराए हुए पैरेंट स्कूल पहुंचे और बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

बिना देरी किए स्कूल की बेल बजाने का दिया आदेश

उस समय सैकड़ों छात्र स्कूल की तीन मंजिला इमारत के अंदर या आस-पास थे, जो नदी से लगभग 60 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थी। हालात तेजी से बिगड़ते देख, दवाड़ी ने बिना देरी के स्कूल की घंटी बजाने का आदेश दिया और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे क्लासरूम खाली कराएं और बच्चों को ऊंची जगह पर ले जाएं।

प्रींसिपल ने बस ड्राइवरों से भी किया संपर्क

उन्होंने स्कूल बस ड्राइवरों से भी संपर्क किया और उन्हें वापस लौटने को कहा। हालांकि, एक बस से संपर्क नहीं हो पा रहा था। राजेंद्र दावाड़ी ने बाहर आकर देखा तो वही बस लोहे के पुल को पार कर स्कूल की तरफ बढ़ रही थी और नीचे नदी का विकराल पानी स्कूल परिसर की तरफ तेजी से आ रहा था। प्रिंसिपल साहब ने पूरी ताकत से चिल्लाकर और हाथ हिलाकर ड्राइवर को इशारा किया। ड्राइवर ने पलक झपकते ही बस को रिवर्स किया और सुरक्षित दूरी पर ले गया। बस के हटते ही वो पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गया और नदी में समा गया।

जान बचाकर पहाड़ी पर भागे बच्चे

जैसे-जैसे खतरा बढ़ा, छात्र पहाड़ी की ओर जाने लगे। खबर है कि एक लड़की को पैनिक अटैक आया और उसे मोटरसाइकिल से सुरक्षित जगह ले जाना पड़ा, जबकि बाकी बच्चे पैदल ही भाग निकले। जब छात्र नदी से दूर जा रहे थे, तो दवाड़ी उनके साथ ही रहे।

बाद में बाढ़ का पानी उस इलाके में फैल गया, जिससे स्कूल बर्बाद हो गया और नदी के किनारे बनी इमारतें बह गईं। जब पानी का तेज बहाव घाटी से गुजर रहा था, तब छात्रों ने एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण ली।

प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को बचाया

हालांकि, इस आपदा से प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को तो सुरक्षित बचा लिया, लेकिन स्कूल ने अपने दो बहादुर साथियों को खो दिया। 32 साल के नए सोशल हिस्ट्री टीचर संतोष परियार क्लास लेने के बाद खाना पकाने अपने कमरे पर गए थे और बाढ़ में बह गए। वहीं, स्कूल के सफाईकर्मी सुल्तान लामा की भी मौत हो गई। बताया जाता है कि वे स्कूल को सुरक्षित करने के लिए वापस लौटे थे।

दुनियाभर की मीडिया में नेशनल हीरो के तौर पर सराहे जाने के बाद भी राजेंद्र दावाड़ी की आंखों में अपनों को खोने का गम है। मलबे के ढेर को देखते हुए वे बेहद विनम्रता से बस एक ही बात कहते हैं, “मैं करता भी तो क्या? उस वक्त मेरे बच्चों की जान से बढ़कर कुछ नहीं था।”

स्कूल बनाने के लिए भारत से मदद की मांग

दावाड़ी के लिए, रेस्क्यू ऑपरेशन एक और चुनौती की शुरुआत भर थी। स्कूल की इमारत के तबाह हो जाने के बाद, अब वे स्कूल को फिर से बनाने के लिए भारत से मदद मांग रहे हैं, ताकि सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें।

भारत ने दी मदद की गारंटी

वहीं, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने X पर एक पोस्ट में लिखा, मैंने नुवाकोट के बिदुर में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी से मुलाकात की। रसुवा में अचानक आई बाढ़ (flash flood) में स्कूल के बह जाने से ठीक पहले, उनके समय पर लिए गए फैसले ने 1600 से ज्यादा स्कूली बच्चों की जान बचाई। यह स्कूल 1950 के दशक में बनाया गया था। इसका डिजाइन एक भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था, जो त्रिशूली हाइड्रोपावर प्लांट के निर्माण से जुड़े थे, और इसे भारत की मदद से बनाया गया था। इस स्कूल की नई इमारत भी 2022 में भारत की मदद से HICDP प्रोग्राम के तहत बनाई गई थी। श्रीवास्तव ने दवाड़ी को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भारत, नेपाल में भारतीय दूतावास के माध्यम से स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।

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Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?

Nepal Floods: नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इंटरनेशनल मदद की मांग का अपना रुख बदलते हुए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग उठाई है। नेपाल का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालयी देश को भुगतना पड़ रहा है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के लिए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग करने का अपना कूटनीतिक रुख बदल लिया है।

नेपाल का तर्क है कि यह हिमालयी देश उस जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे पैदा करने में उसकी भूमिका बहुत कम थी ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश अब सहायता को महज मानवीय मदद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे जलवायु जिम्मेदारी और मुआवजे के मुद्दे से जोड़ रहा है। यह विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण आई थी।

‘यह दान नहीं, न्याय और मुआवजे का मामला’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान लगभग नगण्य है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमालयी आपदाओं का सामना नेपाल को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी कूटनीतिक रणनीति को ‘मदद’ से ‘न्याय और मुआवजे’ की ओर ले जा रहा है। उनके मुताबिक यह किसी देश की ओर से दी जाने वाली चैरिटी नहीं, बल्कि जलवायु संकट के लिए जिम्मेदारी और मुआवजे का सवाल है।

भारत, चीन और अमेरिका को बताया बड़ा प्रदूषक

नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल एमिटर्स में शामिल बताते हुए कहा कि इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे जलवायु संवेदनशील देशों को मुआवजा दें। खनाल ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एमिटर्स है, उसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है। उन्होंने दावा किया कि नेपाल ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपेंसेशन क्लेम लेटर भी भेजा है।

‘यह बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने हालिया आपदा की भयावहता बताते हुए इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पानी की लहरें 20 से 30 मीटर तक ऊंची थीं। उनकी रफ्तार करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘हिमालयी सुनामी’ करार दिया। बाढ़ के पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने UN से मांगी 5 अरब डॉलर की मदद

आपदा के बाद नेपाल ने पुनर्निर्माण और रिकवरी की लागत करीब 5 अरब डॉलर आंकी है। साथ ही, देश ने जलवायु आपदाओं से उबरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े विशेष फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। नेपाल के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने उन परिस्थितियों को और गंभीर बनाया, जिनके बीच यह भयावह आपदा सामने आई।

नेपाल का तर्क है कि जो देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, वे ही अक्सर इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि हिमालय के ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के अरबों लोगों की जल सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 987 हो गई> सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं।इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMAए ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं।

टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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अक्षय ओबेरॉय-हेली दारूवाला की केमिस्ट्री ने जीता दिल, ‘लव लॉटरी’ का गाना ‘नजर लग जाएगी’ हुआ रिलीज

अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला स्टारर कोर्टरूम सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘लव लॉटरी’ का रोमांटिक गाना ‘नजर लग जाएगी’ रिलीज हो गया है। जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज में सजे इस खूबसूरत गाने का म्यीजिक वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे ने तैयार किया है, जबकि इसके बोल अरविंद पांडे ने लिखे हैं। गाने में अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला के बीच खूबसूरत केमिस्ट्री देखने को मिलती है।

उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्माया गया ‘नजर लग जाएगी’ कहानी के किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को सामने लाता है। पहाड़ों की खूबसूरती, शांत माहौल और प्रकृति के बीच फिल्माए गए रोमांटिक पल अक्षय और हेली की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को और निखारते हैं। दोनों की मौजूदगी गाने को बिना किसी बनावटीपन के एक स्वाभाविक और खूबसूरत एहसास देती है। गाने की सिनेमैटोग्राफी नवीन वी. मिश्रा ने की है, जबकि इसकी कोरियोग्राफी देवेंद्र चतुर्वेदी ‘डेविड’ ने की है।

गाने और फ़िल्म को लेकर निर्देशक एवं संगीत निर्देशक अरविंद पांडे ने कहा- “नजर लग जाएगी के जरिए हम अपने किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को बहुत सहज तरीके से दिखाना चाहते थे। उत्तराखंड की खूबसूरती ने हमें इसके लिए बिल्कुल सही माहौल दिया।

फ़िल्म के निर्माता कुलदीप भार्गव कहते हैं कि लव लॉटरी का विषय नाजुक है और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी कि इसे संतुलन और समझदारी के साथ दर्शकों के सामने रखा जाए। फिल्म इस बात को तलाशती है कि प्यार, भरोसा और शादी का रिश्ता कभी-कभी किस तरह एक अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।

जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज इस रोमांटिक गाना के एहसास को और गहराई देती है। वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे के संगीत तथा अरविंद पांडे के बोलों के साथ तैयार यह गाना किरदारों के बीच की नज़दीकियों और उनके रिश्ते की भावनात्मक परत को सामने लाता है।

सिनेमा गंज फिल्म्स के बैनर तले कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ द्वारा निर्मित ‘लव लॉटरी’ का निर्देशन अरविंद पांडे ने किया है और इसकी कहानी व लेखन अंकुर खत्री का है। फ़िल्म में अक्षय ओबेरॉय, हेली दारूवाला और कबीर दुहन सिंह प्रमुख भूमिकाओं में हैं, जबकि विजयांत कोहली, संतोष शुक्ला, हेमंत पांडे, इंदिरा कृष्णन, अग्नि अय्यारी, विक्रम शर्मा, कुमार सौरभ, अश्वंत लोधी और अर्शदीप संधू सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

Yogi Janta Darshan Program: ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अति मानवीय रूप देख अन्य आगंतुक अपनी पीड़ा भूल गए। सीएम योगी का यह रूप देख किसी की भावनाएं आंसुओं के जरिए निकल पड़ीं तो किसी ने अपनी कुर्सी से ही हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के प्रति आभार जताया। दरअसल अयोध्या से आए एक भाई-बहन जनता दर्शन में पहुंचे। भाई ने मुख्यमंत्री से बताया कि उनकी बहन गंभीर रूप से बीमार हैं। वह बहन को लेकर लखनऊ आए हैं, उन्हें जल्द से जल्द इलाज की आवश्यकता है। इस पर मुख्यमंत्री ने पीड़िता को तत्काल लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज भी शुरू हो गया है। 

मुख्यमंत्री आवास से तत्काल अस्पताल भेजी गईं पीड़िता

अयोध्या से आए श्याम सोनकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी बहन बबिता कुछ दिनों से अयोध्या में भर्ती थीं, डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया है। परिवार अत्यंत गरीब है, इसलिए इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने अपने आवास से तत्काल पीड़िता को एंबुलेंस से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर भिजवाया। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद डॉक्टरों की देख-रेख में मरीज का इलाज प्रारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने पीड़िता के परिजनों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। 

भाई की आंखों में आए आंसू, फोन करके दिया धन्यवाद

बहन बबिता के एडमिट होते ही उनके भाई श्याम ने चैन की सांस ली। डॉक्टरों को उन्होंने पूरी बीमारी आदि के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इलाज की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही श्याम की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने फोन करके मुख्यमंत्री आवास को इसकी जानकारी भी दी और धन्यवाद भी ज्ञापित किया। 

धन की कमी के कारण नहीं रुकेगा किसी का इलाज

‘जनता दर्शन’ में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर शासन में उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि धन की कमी के कारण किसी का इलाज नहीं रुकेगा। 

चॉकलेट पाकर खिलखिला उठी मासूम

‘जनता दर्शन’ में एक मासूम अपनी मां के साथ आई थी। सीएम ने उनकी मां की समस्या सुनी, फिर बच्ची से मुखातिब हुए और दुलारा-पुचकारा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने चॉकलेट मंगाई और उसके सामने रैपर खोलना शुरू कर दिया। सीएम के हाथ में चॉकलेट देखकर बच्ची खिलखिला उठी। बाबा और बच्ची के संवाद को देख अपना दर्द भूल सभी पीड़ित व अनय लोग मुस्कुरा उठे। सभी ने बच्चों के प्रति मुख्यमंत्री योगी के वात्सल्य की खूब प्रशंसा की।

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

Mohan Bhagwat Canada Visit: ‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’, कनाडा में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

Mohan Bhagwat Canada Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदू पहचान, विविधता, एकता और भारत की सभ्यतागत सोच पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। हिंदू विचारधारा की मूल भावना अलग-अलग विविधताओं को स्वीकार करने और उनमें मौजूद एकता को पहचानने की है।

मोहन भागवत ने आगे कहा कि हिंदू की पहचान किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवन जीने की शैली से तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि हिंदू विचार सभी को स्वीकार करने और सभी का सम्मान करने की भावना पर आधारित है।

उन्होंने कहा, “जब मैं हिंदू कहता हूं तो हिंदू शब्द को किसी विशेष भाषा, किसी विशेष पूजा या किसी विशेष जीवनशैली से परिभाषित नहीं किया जा सकता।” भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू विचारधारा में ‘सबका सम्मान और सबकी स्वीकृति’ का भाव है।

‘विविधता स्वाभाविक है, एकता वास्तविकता’

RSS प्रमुख ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में जाति, पंथ और भाषाओं की अनेकता हमेशा से रही है। उनके मुताबिक, अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन एकता मूल वास्तविकता है।

उन्होंने कहा, “कई जातियां हैं, कई पंथ हैं, कई भाषाएं हैं। सब कुछ अनेक है। विविधता स्वाभाविक है, जबकि एकता वास्तविकता है।” भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यतागत सोच यह सिखाती है कि विविधता को एकता के लिए खतरा नहीं माना जाना चाहिए। बल्कि उसका सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विविधता एकता की अभिव्यक्ति है। यही विविधता समाज को सुंदर बनाती है।

‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सेवा और मानवता की भावना को भी हिंदू विचार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा जरूरतमंदों की मदद करने की रही है और कई बार भारत ने बिना मांगे भी दूसरों की सहायता की है। उन्होंने कहा, “जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मांगे भी मदद का हाथ बढ़ाया। यही भारत की परंपरा और उसका डीएनए है।”

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि आपने यह बात सुनी होगी कि अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है। भागवत ने कहा कि हिंदू आध्यात्मिक परंपरा लोगों को विविधता के भीतर एकता देखने की सीख देती है। इसमें केवल मनुष्यों ही नहीं। बल्कि जीव-जंतुओं और निर्जीव प्रकृति के साथ भी जुड़ाव की भावना पर जोर दिया जाता है।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ का किया जिक्र

RSS प्रमुख ने अपने भाषण में भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे पूरी दुनिया को एक परिवार मानने वाली सोच बताया। उन्होंने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान रखने वाले लोग इस विचार को स्वीकार करते हैं कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है। भागवत के मुताबिक, इंसानों के बीच बाहरी रूप-रंग को लेकर भले ही अंतर दिखाई दे। लेकिन मूल रूप से सभी एक हैं। इसी सोच से दूसरों की सेवा करने का दायित्व पैदा होता है। उन्होंने कहा, “दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। हमने यह ज्ञान प्राप्त किया है, जो हमें स्थायी खुशी और संतुष्टि देता है।”

‘भारत विश्वगुरु बना, महाशक्ति बनकर नहीं’

मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक प्रभाव की तुलना केवल सैन्य या आर्थिक ताकत से करने के बजाय सेवा और मानवीय मूल्यों से की। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया पर अपना प्रभाव किसी सुपरपावर के रूप में नहीं बनाया, बल्कि अपने चरित्र और दुनिया की सेवा के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। उन्होंने कहा, “कोई भारत को सुपरपावर कह सकता है, लेकिन भारत सुपरपावर नहीं था। उसने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना, ‘महाशक्ति’ नहीं।”

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का उदाहरण

भागवत ने भारत की शरण देने की परंपरा को समझाने के लिए इतिहास के कई उदाहरण दिए। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पोलैंड के लोग युद्ध और संकट के कारण परेशान थे, तब जामनगर के महाराजा ने उन्हें शरण और सुरक्षा दी। उन्हें तब तक संरक्षण दिया गया, जब तक वे सुरक्षित रूप से अपने देश लौटने की स्थिति में नहीं आ गए।

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न्होंने भारत की हालिया मानवीय सहायता का भी उदाहरण दिया। भागवत ने मध्य-पूर्व के एक युद्ध क्षेत्र से भारतीय नागरिकों की निकासी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सैन्य विमानों ने न केवल भारतीयों बल्कि सात अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला।

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

 

नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता

खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।

 

खरगे ने विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करने की अपील की। ALSO READ: नेपाल की त्रासदी में विदिशा की स्वाति बागरेचा लापता, 26 अगस्त से परिवार से संपर्क टूटा

 

नेपाल को तत्काल राहत सहायता देने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

 

अमित शाह को दिया सुझाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।

 

खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।