LIC Pension Plan: एलआईसी की चौका बेनेफिट्स वाली धांसू पॉलिसी, रिस्क कवर और पेंशन के साथ बोनस भी

LIC Pension Plan: एलआईसी का जीवन उमंग, एक ऐसा प्लान जो तिहरे फायदे की चादर में लपेटा हुआ है। चूंकि पॉलिसी एलआईसी की है तो जाहिर सी बात है कि इसमें इंश्योरेंस कवरेज होगा ही। इंश्योरेंस कवरेज के साथ-साथ एलआईसी ने इसमें जिंदगी भर सम एश्योर्ड के 8% के बराबर गारंटीड पेंशन का प्रावधान किया हुआ है तो साथ ही इसमें बोनस भी जुड़ता रहता है, जिससे पेंशन लेते-लेते कभी जरूरत पड़ी तो बोनस मिलाकर अच्छा-खासा अमाउंट मिल जाता है या किसी अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी की आर्थिक मदद हो जाती है। इसके अलावा टैक्स बेनेफिट्स भी मिलता है। इस प्रकार जीवन उमंग में बेनेफिट्स का चौका लग जाता है।

Jeevan Umang Details: खास बातें

जीवन उमंग एलआईसी की एक नॉन-लिंक्ड, पार्टिसिपेटिंग, होल-लाइफ इंश्योरेंस और सेविंग्स प्लान है।

जीवन उमंग पॉलिसी 30 दिन के बच्चे से लेकर 55 साल की उम्र के शख्स के लिए ली जा सकती है।

इसमें कम से कम ₹2 लाख तक का बीमा कराया जा सकता है और अधिकतम की कोई सीमा नहीं है।

मेच्योरिटीज बीमाधारक के 100 वर्ष का होने पर होता है।

इसमें पॉलिसीधारक की एंट्री ऐज के हिसाब से 15,20, 25 या 30 साल का पेमेंट टर्म चुना जा सकता है। दो साल तक के बच्चों के लिए 15 साल का पेमेंट टर्म नहीं है तो 51-55 साल के शख्स के लिए सिर्फ 15 साल का पेमेंट टर्म ही है और 46-50 वर्ष के शख्स के लिए 15 साल और 20 साल का पेमेंट टर्म और 41-45 वर्ष की एंट्री ऐज पर 15, 20 और 25 साल का पेमेंट टर्म।

पॉलिसी पेमेंट टर्म (PPT) पूरा होने पर पॉलिसीधारक को सम एश्योर्ड के 8% के बराबर पेंशन 100 वर्ष की उम्र तक हर साल मिलती रहती है। 100 वर्ष की उम्र पूरा होने पर बेसिक सम एश्योर्ड और पूरी पॉलिसी अवधि में इकट्ठा हुआ बोनस मिलता है।

पॉलिसी टर्म के दौरान किसी अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को सम एश्योर्ड में सिंपल रिवर्सनरी बोनस और फाइनल एडीशनल बोनस मिलता है। हालांकि 8 साल से कम उम्र के बच्चे के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। 8 साल से कम उम्र में पॉलिसी लेने पर पॉलिसी लेने के 2 साल पूरा होने के एक दिन पहले या जिस पॉलिसी एनीवर्सिसरी से बच्चा 8 साल की उम्र करता है, उससे एक दिन पहले; इन दोनों में जो पहले हो, उस दिन से रिस्क शुरू होता है। रिस्क शुरू होने से पहले पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर बेस-पॉलिसी प्रीमियम ही वापस मिलेंगे।

इसमें राइडर्स भी उपलब्ध हैं।

इसमें जमा प्रीमियम पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स मिलता है और मेच्योरिटी या टैक्स बेनेफिट्स आमतौर पर सेक्शन 10(10डी) के तहत टैक्स-फ्री होते हैं।

उदाहरण से समझें

2 साल के बच्चे का उदाहरण

₹10 लाख की पॉलिसी अगर 20 साल के लिए रहे हैं तो और गॉर्जियन की उम्र 35 साल है तो ADDB (एक्सीडेंटल डेथ एंड डिजेबिलिटी बेनेफिट) और PWB (प्रीमियम वेवर बेनेफिट) राइडर के साथ सालाना प्रीमियम ₹55765 बन रही है यानी हर दिन ₹153 की जमा। बिना PWB राइडर के लिए सालाना प्रीमियम ₹53535 होगी।

20 साल पूरा होने यानी बच्चे के 22 साल का होने के बाद हर साल पॉलिसीहोल्डर के खाते में ₹80 हजार क्रेडिट होंगे।

अब इसमें रिस्क कवर की बात करें तो चूंकि इसमें PWB राइडर है तो गॉर्जियन के साथ कोई अनहोनी की स्थिति में पूरा प्रीमियम माफ हो जाएगा और पॉलिसी चलती रहेगी। वहीं पॉलिसीहोल्डर यानी बच्चे के साथ कोई अनहोनी होने पर नॉमिनी को पॉलिसी पीरियड के हिसाब से जो पैसा बनेगा, वह मिल जाएगा। अगर पॉलिसी लेने के एक साल के भीतर ही एक्सीडेंटल डेथ होती है तो नॉमिनी को जमा प्रीमियम के हिसाब से ही यानी 1.11 लाख के आस-पास पैसा मिलेगा तो रिस्क शुरू होने के बाद 10 साल की उम्र में एक्सीडेंटल डेथ पर ₹16 लाख के आसपास मिलेगा।

30 साल की उम्र में पॉलिसी लेने पर

अब अगर 20 साल की उम्र में ₹10 लाख की पॉलिसी अगर 20 साल के लिए रहे हैं तो ADDB राइडर के साथ सालाना प्रीमियम ₹54985 बन रही है यानी हर दिन ₹151 की जमा।

पॉलिसी के 20 साल पूरा होने के बाद 40 की उम्र से जिंदगी भर हर साल ₹80 हजार खाते में क्रेडिट होंगे।

अब अनहोनी के स्थिति की बात करें तो नेचुरल डेथ केस में सम एश्योर्ड और कुल बोनस जोड़कर मिलेगा तो एक्सीडेंटल डेथ केस में सम एश्योर्ड, राइडर और कुल बोनस नॉमिनी को मिलेगा। मान लेते हैं कि पॉलिसी पूरा होने के बाद 5 साल सालाना पैसा यानी कुल ₹4 लाख खाते में क्रेडिट होता है और उसके बाद कोई अनहोनी जाती है तो एक्सीडेंटल केस में मौजूदा बोनस रेट के हिसाब से नॉमिनी को ₹41-₹42 लाख के आस-पास मिल जाएगा।

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103 गुना भरा IPO, अब धांसू लिस्टिंग को तैयार यह SME, आपको मिला शेयर?

BenchMark Infotech Listing: इंटीग्रेटेड आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस कंपनी बेंचमार्क इंफोटेक के शेयर अब NSE SME पर लिस्ट होने वाले हैं। इसके आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल 103 गुना से अधिक भरा था। अब ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर धमाकेदार संकेत मिल रहे हैं। इश्यू प्राइस के मुकाबले इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) ₹25 यानी 22.73% है। इस प्रकार ग्रे मार्केट से बेंचमार्क इंफोटेक के शेयरों की मजबूत लिस्टिंद के संकेत हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर 5 अक्टूबर को एनएसई एसएसई पर लिस्ट होंगे। आईपीओ के तहत निवेशकों को यह ₹110 के भाव पर जारी हुआ है और डीमैट खाते में 1 अक्टूबर को क्रेडिट हो चुका है।

BenchMark Infotech IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

बेंचमार्क इंफोटेक का ₹42 करोड़ का आईपीओ 25-29 सितंबर तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 103.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 88.62 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 136.92 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 96.90 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹37 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 4.58 लाख शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹30.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, ₹4.59 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹3.18 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

BenchMark Infotech के बारे में

बेंचमार्क इंफोटेक सर्विसेज एक इंटीग्रेटेड आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस कंपनी है। यह सरकारी विभागों, PSUs, इंस्टीट्यूशंस और प्राइवेट सेक्टर के क्लाइंट्स को एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। यह नेटवर्किंग, कम्युनिकेशन सिस्टम्स, स्ट्रक्चर्ड केबलिंग, फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विलांस सिस्टम्स, ऑडियो-विजुअल सॉल्यूशंस, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सॉल्यूशंस और एनुअल मेटेनेंस सर्विसेज पर काम करती है। इसके अलावा कंपनी ने एआई लैब सॉल्यूशंस को लेकर भी काम शुरू किया है, जिसके तहत यह एआई लैब के सेटअप का काम करती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 163% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹10.22 करोड़ और टोटल इनकम करीब 36% के सीएजीआर से ₹63.99 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹2.71 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹26.44 करोड़ पड़े थे।

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Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: दिग्गज निवेशक विजय केडिया स्टॉक मार्केट की दुनिया में जाना-माना नाम हैं और उनके कही बात रिटेल इंवेस्टर्स के लिए गोल्डेन टिप्स की तरह है। समय-समय पर खुदरा निवेशकों को खास टिप्स देते रहते हैं और ऐसी ही उनकी एक स्माइल थ्योरी है, जिससे आम लोगों को किस स्टॉक में पैसे लगाएं, इससे चुनने में काफी मदद मिल सकती है। स्माइल थ्योरी के जरिए स्टॉक्स को मल्टीबैगर बनने से पहले पकड़ा जा सकता है, जिससे पोर्टफोलियो भी खिलखिला उठेंगे।

क्या है Vijay Kedia की SMILE थ्योरी

S: स्मॉल इन साइज यानी कि ऐसी कंपनियों में निवेश, जोकि अभी छोटी हो यानी स्मॉल-कैप या माइक्रो-कैप।

M: मीडियम इन एक्सपीरिएंस यानी कि मैनेजमेंट के पास अच्छा-खास अनुभव होना चाहिए।

I: इंक्रीजिंग अर्निंग्स/लॉर्ज इन एस्पिरेशन यानी कि सपने बड़े होने चाहिए, तभी तो कंपनी आगे बढ़ेगी और इसकी कमाई बढ़ती रहनी चाहिए।

L: लो डेट यानी कि कंपनी पर कर्ज का भारी-भरकम बोझ नहीं होना चाहिए।

E: एक्स्ट्रा-लॉर्ज मार्केट पोटेंशियल यानी कि कंपनी जिस सेगमेंट या कैटेगरी में है, वह काफी बड़ा होना चाहिए, तभी तो कंपनी को आगे बढ़ने का स्कोप मिलेगा।

एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कोई कंपनी आज ₹500 करोड़ की है मतलब कि S।

उसके मैनेजमेंट के पास 10-15 साल का अनुभव है यानी कि M।

प्रमोटर कंपनी का आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहा है और कंपनी की कमाई भी बढ़ रही है यानी कि I।

कंपनी का कर्ज भी कंट्रोल में है यानी कि L।

कंपनी जिस सेक्टर में है, उसका पोटेंशियल ₹50 हजार करोड़ है यानी कि ₹500 करोड़ की कंपनी के सामने ₹50 हजार करोड़ का मार्केट है यानी कि E।

क्या है Vijay Kedia के पोर्टफोलियो में

विजय केडिया ने स्टॉक मार्केट में 19 साल की उम्र से निवेश शुरू किया था। वह निवेशकों को लंबे समय तक के लिए निवेश की सलाह देते हैं और अपने पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट के लिए स्माइल थ्योरी पर निर्भर रहते हैं। उनके पोर्टफोलियो की बात करें तो कंपनी की लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग के हिसाब से उनके पास ₹1,319.2 करोड़ के 23 स्टॉक्स हैं, जिनमें अतुल ऑटो, महिंद्रा रिजॉर्ट्स, सियाराम सिल्क मिल्स, सुदर्शन केमिकल, वैभव ग्लोबल, तेजस नेटवर्क्स और यथार्थ हॉस्पिटल हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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Nifty Outlook: देश की 50 दिग्गज लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को ट्रैक करने वाला एनएसई का इंडेक्स Nifty 50 इस साल लाल होने की कगार पर है। पिछले 10 साल से यह लगातार बढ़त के साथ ग्रीन जोन में बंद हो रहा है लेकिन इस बार इसकी रैली थमती दिख रही है। इस साल अभी तीन महीने बचे हैं और अभी तक की स्थिति के हिसाब से यानी 1 अक्टूबर तक निफ्टी 14.97% कमजोर हो चुका है यानी कि निफ्टी को अपनी ग्रीन रैली बनाए रखने के लिए जोरदार रिकवरी दिखानी होगी।

एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 1 अक्टूबर को यह 0.88% की गिरावट के साथ 22421.95 पर बंद हुआ था। इस साल की शुरुआत में 5 जनवरी 2026 को यह इंट्रा-डे में 26,373.20 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था तो क्लोजिंग बेसिस पर 2 जनवरी 2026 को यह 26,328.55 के रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ था।

10 साल में कब कितनी बढ़त के साथ बंद हुआ Nifty

निफ्टी के लिए पिछले 10 साल के सालाना सफर की बात करें तो सबसे अधिक बढ़त 2016 में दिखी थी। यहां तक कि कोरोना महामारी से प्रभावित वर्ष 2020 में भी निफ्टी ने दमदार मजबूती हासिल की थी। यहां पिछले 10 साल की रैली का ट्रैक रिकॉर्ड दिया जा रहा है-

वर्ष निफ्टी उठा-पटक
2015(-)4.06%
20163.01%
201728.65%
20183.15%
201912.02%
202014.90%
202124.12%
20224.33%
202320.03%
20248.80%
202510.51%
2027(-)14.97% (1 अक्टूबर तक)

आखिर क्यों टूट रहा निफ्टी

इस साल निफ्टी जनवरी से सितंबर तक सिर्फ अप्रैल, जून और जुलाई महीने में मजबूत हुआ और अक्टूबर भी शुरुआत कमजोर हुई। इस साल अब तक यह 14.97% कमजोर हुआ है जिसमें से 11.31% की कमजोरी तो मार्च महीने में आई थी। निफ्टी को इस साल कई आंधियों से जूझना पड़ा जैसे कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध, कच्चे तेल में उबाल, टैरिफ वार, महंगाई की तेज रफ्तार, सख्त मौद्रिक नीतियां, बॉन्ड यील्ड में उछाल, विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली और सेल ऑन राइज स्ट्रैटेजी।

अहम लेवल्स

लेवल टाइप इसलिए है अहम
22,217तात्कालिक सपोर्ट1 अक्टूबर का इंट्रा-डे लो
22,182मजबूत सपोर्टअप्रैल 2026 का निचला स्तर/ 52-हफ्ते के निचले स्तर के आस-पास
22,000अगला सपोर्टमनोवैज्ञानिक स्तर
21,750अगला सपोर्टअप्रैल 2025 का निचला स्तर
22,600–22,800तात्कालिक रेजिस्टेंसहाल-फिलहाल की टेक एनालिसिस में रेजिस्टेंस जोन
23,000अहम रेजिस्टेंस22,800–23,000 जोन का अपर एंड

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Dr Reddy’s Share Price: वित्त वर्ष बताने में गलती अमेरिकी इकाई पर पड़ी भारी, अब 5 अक्टूबर को शेयर फोकस में

Dr Reddy’s Share Price: डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज की पूर्ण मालिकाना हक वाली स्टेप-डाउन सब्सिडियरी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज इंक (DRL Inc) पर अमेरिका में लाखों का जुर्माना लगा है। कंपनी ने इसके बारे में शनिवार 3 अक्टूबर की शाम एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी। इसे लेकर कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इंटर्नल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने टैक्स पेमेंट के समय वित्त वर्ष के गलत तरीके से रेफरेंस पर $32,350.20 यानी करीब ₹31 लाख का जुर्माना लगाया है। अब इसका असर सोमवार 5 अक्टूबर को इसके शेयरों की चाल पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 1 अक्टूबर को बीएसई पर इसका शेयर 2.90% की गिरावट के साथ ₹1200.10 पर बंद हुआ था।

Dr Reddy’s पर जुर्माने का क्या है पूरा मामला

डॉ रेड्डीज के मुताबिक उसकी अमेरिकी सब्सिडयरी पर इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने $32,350.20 का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना टैक्स पेमेंट के समय फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) के रेफरेंस को गलत तरीके से बताने की वजह से लगाया गया है। DRL Inc को US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी, इंटरनल रेवेन्यू सर्विस, सिनसिनाटी, ओहियो से 25 सितंबर, 2026 की तारीख वाला फाइनल ट्रांसक्रिप्ट 2 अक्टूबर, 2026 को मिला। हालांकि डॉ रेड्डीज का कहना है कि एवैल्युएशन के आधार पर इसका कंपनी के फाइनेंशियल, ऑपरेशंस और अन्य एक्टिविटीज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

इससे पहले 11 सितंबर को एक डॉ रेड्डीज ने बताया था कि अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने मेक्सिको में इसकी API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) बनाने वाली फैसिलिटी में रिकॉर्ड्स की जांच पूरी कर ली है और जांच के आखिर में दो ऑब्जर्वेशन जारी किया। यह एसेसमेंट 17 जुलाई से 8 सितंबर के बीच हुआ था।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

डॉ रेड्डीज के शेयरों ने बहुत ही शॉर्ट पीरियड में एक साल के हाई लेवल से एक साल के निचले स्तर का सफर तय किया। बीएसई पर 29 जून 2026 को इसके शेयर ₹1,414.40 पर थे, जोकि इसके लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से महज 1 ही महीने में यह 23.64% टूटकर 23 जुलाई 2026 को ₹1,080.05 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Gold Price Today: एक हफ्ते में ₹3500 गिरा गोल्ड, रविवार को दिल्ली से पटना तक भाव में कोई बदलाव नहीं

Gold Rate Today in India: इस महीने के आखिरी में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। आज की बात करें तो एक दिन की गिरावट के बाद गोल्ड के भाव में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। एक हफ्ते में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹3500 और 22 कैरट वाला ₹3200 सस्ता हुआ है। अब चांदी की बात करें तो इंडस्ट्रियल डिमांड की सुस्ती पर लगातार तीसरे दिन आज इसके भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,49,330₹1,36,900₹1,12,040
मुंबई₹1,49,180₹1,36,750₹1,11,890
कोलकाता₹1,49,180₹1,36,750₹1,11,890
चेन्नई₹1,49,180₹1,36,750₹1,12,350
बेंगलुरू₹1,49,180₹1,36,750₹1,11,890
हैदराबाद₹1,49,180₹1,36,750₹1,11,890
लखनऊ₹1,49,330₹1,36,900₹1,12,040
पटना₹1,49,230₹1,36,800₹1,11,940
जयपुर₹1,49,330₹1,36,900₹1,12,040
अहमदाबाद₹1,49,230₹1,36,800₹1,11,940

लगातार तीसरे दिन स्थिर चांदी

चांदी की बात करें तो 1 अक्टूबर को एक किलो चांदी के भाव ₹5 हजार गिरने के बाद से लगातार तीन दिनों तक इसके भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹2,35,000 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,45,000 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

क्या हो सकता है US Fed की बैठक में?

बुलियन मार्केट की नजरें इस महीने के आखिरी में होने वाली फेडरल रिजर्व की मीटिंग पर लगी हैं। पहले यह माना जा रहा था कि फेड चेयरमैन केविन वॉर्श 28 अक्तूबर को लगातार दूसरी बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। लेकिन, हाल में आया इनफ्लेशन का डेटा उम्मीद से कम रहा है। इससे माना जा रहा है कि फेड इस महीने के अंत में होने वाली बैठक में इंटरेस्ट रेट मौजूदा लेवल पर बनाए रखने का फैसला कर सकता है।

इस हफ्ते की शुरुआत में अक्तूबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ृने की उम्मीद करीब 70% थी, जो अब घटकर करीब 22% रह गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड की चाल फेडरल रिजर्व के फैसले पर निर्भर करेगी। हालांकि, अगर केविन वॉर्श इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं करते हैं तो सोने की कीमतों पर दबाव कुछ कम हो सकता है।

Gold Outlook: यूएस-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद से 20% फिसला सोना, जानिए इसकी वजह

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

25 अक्टूबर से मुंबई एयरपोर्ट का टर्मिनल 1 बंद, नहीं मिलेगी कोई फ्लाइट्स, आखिर क्यों हुआ ऐसा?

Mumbai Airport Big Announcement: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 से 25 अक्टूबर से फ्लाईट नहीं ले सकेंगे। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) ने इसका ऐलान किया है। इसे इसलिए बंद किया जा रहा है, क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर फिर से डेवलपमेंट किया जाना है, जो जन जनवरी 2027 से शुरू होगा। यह रीडेवलपमेंट AAI (एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के निर्देशों पर हो रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह टर्मिनल 2029-30 तक बंद रह सकता है यानी 25 अक्टूबर से लगभग चार साल तक मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 से कोई फ्लाइट नहीं मिलेगी। यहां से जो भी उड़ाने होंगी, वह या तो नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA) से हो सकती हैं या एयरलाइन कंपनियां कुछ समय के लिए अपनी सर्विसेज बंद कर सकती हैं।

मुंबई एयरपोर्ट से अभी हर दिन लगभग 950 फ्लाइट्स ऑपरेट हो रही हैं। इसके दोनों टर्मिनलों से 53 अंतरराष्ट्रीय और 7 घरेलू एयरलाइंस उड़ानें ऑपरेट करती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में टर्मिनल 1 से लगभग 1.5 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जबकि टर्मिनल 2 से करीब 4 करोड़ यात्री गुजरे।

84 साल पुराना है Mumbai Airport का Terminal 1

एयरपोर्ट के टैरिफ और सर्विस चार्जेज को रेगुलेट करने वाली AERA (एयरपोर्ट्स इकनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने 84 साल पुराने टर्मिनल 1 को गिराने का निर्देश दिया था। इसके रीडेवलपमेंट का काम मूल रूप से पिछले साल 2025 के मध्य में शुरू होना था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया क्योंकि MIAL के प्रवक्ता के मुताबिक फ्लाइट्स को ट्रांसफर करने के लिए कोई और एयरपोर्ट फैसिलिटी नहीं थी। अब नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट चालू हो चुकी है तो मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में एक विकल्प मिल चुका है।

यात्रियों पर फैसले से क्या असर

कुछ घरेलू उड़ानों को टर्मिनल 2 पर शिफ्ट किए जाने के आसार दिख रहे हैं, जबकि T2 से अभी चल रही कुछ इंटरनेशनल सर्विस नवी मुंबई एयरपोर्ट पर शिफ्ट हो सकती हैं। अकासा एयर ने अपने कुछ ऑपरेशन्स को शिफ्ट करना शुरू भी कर दिया है और दूसरी एयरलाइंस के साथ बातचीत चल रही है।

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Copper News: कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बिग अलर्ट, कॉपर में मई के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट

Copper News: शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ ही है, कमोडिटी मार्केट में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। निफ्टी (Nifty) वीकली लेवल पर लगातार आठ हफ्ते कमजोर हुआ है और इतनी लंबी गिरावट 25 साल बाद दिखी है। अब कमोडिटी मार्केट में बात करें तो कॉपर जो धड़ाधड़ ऊपर भाग रहा था, अब मई के बाद से सबसे बड़ी वीकली गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। शुक्रवार को डॉलर में गिरावट के साथ लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसके फ्यूचर्स प्रति टन $14,300 प्रति टन से ऊपर चले गए, लेकिन फिर भी वीकली लेवल पर हफ्ते की समाप्ति पर इसमें लगभग 2% की गिरावट रहने के आसार हैं।

क्यों फीका पड़ा Copper?

एनर्जी की लागत में बढ़ोतरी और चीन के लड़खड़ाते इंडस्ट्रियल सेक्टर की वजह से मांग कम होने के डर से कॉपर को झटका लगा। एनर्जी की लागत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है, जिससे यह उबल पड़ा और कॉपर को भी इसकी आंच महसूस हुई। इसके अलावा चीन में इंडस्ट्रियल कमजोरी के आंकड़ो ने भी कॉपर पर दबाव बनाया।

अभी कितना टूटेगा भाव?

चीन में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज की कमजोर और कच्चे तेल में उबाल ने कॉपर को नरम किया है लेकिन सप्लाई की कमी के कारण कीमतें ऊपरी लेवल पर बनी हुई है यानी कि इसमें अधिक गिरावट की गुंजाइश नहीं दिख रही है। रिफाइंड मेटल पर अमेरिकी टैरिफ के डर से ट्रेडर्स ने लाखों टन मेटल अमेरिका भेजा है, जिससे दूसरी जगहों पर कमी का खतरा पैदा हो गया है। चिली की एक बड़ी खदान में भी हड़ताल चल रही है।

बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन के एनालिस्ट्स ने अपने नोट में जिक्र किया है कि जब तक पश्चिमी एशिया में युद्ध जारी रहेगा, बेस मेटल्स में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है लेकिन एल्युमीनियम, कॉपर और निकेल की सप्लाई में कमी से कीमतों को सपोर्ट मिलना चाहिए।

अभी अमेरिका में सितंबर महीने का रोजगार डेटा आना है, जिसमें मार्केट का अनुमान है कि हायरिंग में बड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। यह आंकड़ा आज शुक्रवार को आना है। इसमें सुस्ती का असर ये होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त करने की संभावना फीकी होगी, जो कॉपर के लिए पॉजिटिव हो सकता है।

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Orient Cables IPO: ग्रे मार्केट में तूफानी चाल, आईपीओ को 97 गुना बोली के बाद अब धांसू लिस्टिंग की तैयारी

Orient Cables IPO: देश की चार सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग केबल कंपनियों में शुमार ओरिएंट केबल्स के ₹552 करोड़ के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला। ओवरऑल 97 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन के बाद इसके शेयर अलॉट हो चुके हैं और अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार है। जिन्हें इसके शेयर मिले हैं, उनके खाते में यह 1 अक्टूबर को क्रेडिट हो गया और अब 5 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग है।

लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट से मजबूत संकेत नहीं मिल रहे हैं और GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹107 यानी 39.34% है यानी कि 39% से अधिक के लिस्टिंग गेन की गुंजाइश दिख रही है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स ही शेयरों की चाल तय करते हैं।

Orient Cables IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

ओरिएंट केबल्स का ₹552 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 25-29 सितंबर तक खुला था। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹258-₹272 था। इस आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 97.28 गुना सब्सक्राइब हुआ है। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 192.68 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 121.90 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 32.21 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹320 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹1 की फेस वैल्यू वाले ₹232 करोड़ के 85,29,409 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹91.50 करोड़ मशीनरी और इक्विपमेंट की खरीदारी और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के सिविल वर्क्स, ₹155.50 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹48.34 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹42.53 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Orient Cables के बारे में

ओरिएंट केबल्स इंटरनेट, नेटवर्किंग, डेटा सेंटर, टेलीकॉम, सोलर, EV और दूसरी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली केबल और नेटवर्किंग उपकरण बनाती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो CAT5, CAT5e, CAT6 और CAT6A नेटवर्किंग केबल्स, पैच कॉर्ड्स, सीसीटीवी और कोएक्सियल केबल्स, इंस्ट्रूमेशन और कंट्रोल केबल्स, पावर केबल्स, ऑप्टिकल फाइबर केबल्स, फाइबर पैच कॉर्ड्स, कीस्टोन जैक्स, पावर स्ट्रिप्स और पावर कॉर्ड्स हैं। इसके अलावा कंपनी ने कुछ नए प्रोडक्ट्स भी जोड़े हैं, जैसे कि ई-बीम इर्रेडिएटेड स्पेशल्टी केबल्स, सोलर जंक्शन बॉक्स, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम्स, केबल हार्नेसेज, ईवी चार्जिंग केबल्स, ईवी चार्जिंग गन्स और पावर कॉर्ड्स। नेटवर्किंग केबल मार्केट में इसका दबदबा तेजी से बढ़ा है और मार्केट शेयर वित्त वर्ष 2022 में करीब 16% से वित्त वर्ष 2026 में 22.9% पर पहुंच गया।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 16% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹53.56 करोड़ और टोटल इनकम 33% से अधिक के सीएजीआर से ₹1,181.67 करोड़ पर पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष 2027 की बात करें तो पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में कंपनी को ₹32.78 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹490.94 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹258.46 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹257.35 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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Bajaj Finance Shares: बजाज ग्रुप की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस के बोर्ड ने ₹5800 करोड़ के कंवर्टिबल वारंट जारी करने की मंजूरी दे दी है। ये वारंट इसकी प्रमोटर और होल्डिंग कंपनी बजाज फिनसर्व को जारी होंगे और इसे बाद में इक्विटी शेयरों में बदला जा सकेगा। इसके अलावा बोर्ड ने इसे QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) के जरिए ₹11700 करोड़ जुटाने की मंजूरी दी है। इस प्रकार एनबीएफसी की योजना दो तरीकों से कुल मिलाकर ₹17500 करोड़ जुटाने की है। कंपनी ने 1 अक्टूबर की देर रात एक्सचेंज फाइलिंग में इनकी जानकारी दी।

अब इसका असर 5 अक्टूबर को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 1 अक्टूबर को बीएसई पर 1.24% की गिरावट के साथ ₹949.35 पर बद हुआ था।

वारंट को लेकर क्या है Bajaj Finance का प्लान

बजाज फाइनेंस के बोर्ड ने प्रमोटर और होल्डिंग कंपनी बजाज फिनसर्व को कंवर्टिबल वारंट जारी कर ₹5800 करोड़ जुटाने की मंजूरी दी है। ये वारंट ₹1 की फेस वैल्यू वाले शेयरों में बदले जा सकेंगे। इसका पेमेंट दो चरणों में होगा। 25% पैसा वारंट एलॉट होने के समय कंपनी को मिलेगा तो बाकी 75% पैसा इसे शेयरों में बदलने के समय। इसका इश्यू प्राइस अभी तय नहीं हुआ है।

QIP को लेकर क्या है प्लान

बजाज फाइनेंस की योजना QIP इश्यू के जरिए ₹11700 करोड़ जुटाने की है। इसके तहत म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों को ₹1 की फेस वैल्यू इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

बजाज फाइनेंस के शेयरों ने इस साल जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अस्थिरता और टैरिफ की आंच के बीच निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। 23 मार्च 2026 को बीएसई पर यह ₹788.40 पर था, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से ₹5 ही महीने में यह 49.37% चढ़कर 3 अगस्त 2026 को ₹1,177.60 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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