CIBIL स्कोर 750 होने के बाद भी लोन रिजेक्ट क्यों हो जाता है? ये 5 बड़े कारण जान लीजिए

आपका CIBIL स्कोर 750 है। आपने समय पर पुराने लोन चुकाए हैं। Credit Card का बिल भी समय पर भरते हैं। फिर भी बैंक ने नया लोन देने से मना कर दिया। ऐसा होना संभव है। दरअसल, बैंक सिर्फ CIBIL स्कोर देखकर लोन नहीं देता। वह आपकी पूरी आर्थिक स्थिति देखता है।

कमाई के मुकाबले EMI ज्यादा

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी 60,000 रुपये है और पहले से 35,000 रुपये की EMI जा रही है। अब आपको किसी काम के लिए नया लोन चाहिए। CIBIL स्कोर 780 होने के बावजूद बैंक यह देखेगा कि नई EMI जुड़ने के बाद आपके पास घर का खर्च चलाने के लिए कितना पैसा बचेगा। बोझ ज्यादा लगा तो लोन रिजेक्ट हो सकता है।

ऐसे में नया लोन लेने से पहले अपनी मौजूदा EMI का बोझ कम करने की कोशिश करें। अगर कोई छोटा कर्ज बाकी है और उसे चुकाना मुमकिन है, तो पहले उसे खत्म करना बेहतर हो सकता है।

जरूरत से ज्यादा लोन मांगना

कई बार समस्या CIBIL स्कोर में नहीं, लोन की रकम में होती है। जैसे कि आपकी सैलरी 70,000 रुपये है। और आप 30 लाख रुपये का पर्सनल लोन मांग रहे हैं। बैंक को लग सकता है कि इस रकम की EMI आपकी कमाई के हिसाब से ज्यादा पड़ रही है।

इसलिए जितनी जरूरत है, उतने लोन के लिए आवेदन करें। लोन की रकम कम होने पर EMI भी कम होगी। इससे आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर दिख सकती है।

क्रेडिट कार्ड पर लगातार भारी खर्च

क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर भरने से आपका CIBIL स्कोर अच्छा रह सकता है। लेकिन बैंक यह भी देखता है कि आप कार्ड का इस्तेमाल कितना कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपये है और आप हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, तो बैंक मान सकता है कि आप लोन पर ज्यादा निर्भर हैं।

ऐसे में क्रेडिट कार्ड की लिमिट का हमेशा 30% से कम खर्च करने की कोशिश करें। बिल समय पर भरें और कार्ड की पूरी लिमिट के आसपास लगातार खर्च करने से बचें।

कई बैंकों में एक साथ आवेदन

लोन नहीं मिला तो दूसरे बैंक में आवेदन कर दिया। वहां भी नहीं मिला तो तीसरे बैंक में कोशिश कर ली। इस तरह कम समय में कई जगह आवेदन करना ठीक नहीं माना जाता। हर बार बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट देख सकता है और इसकी इंक्वायरी रिपोर्ट में दर्ज हो सकती है।

आपको आवेदन करने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर, पात्रता और EMI देख लेनी चाहिए। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनना चाहिए। ताकि कई जगह आवेदन करने की नौबत न आए।

CIBIL रिपोर्ट में गलती

यह भी हो सकता है कि आपका CIBIL स्कोर अच्छा हो, लेकिन रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी दर्ज हो। जैसे कोई ऐसा लोन दिख रहा हो जो आपने लिया ही नहीं। पुराने लोन का भुगतान हो चुका हो, लेकिन रिपोर्ट में बकाया दिख रहा हो।

इसलिए लोन लेने से पहले अपनी CIBIL रिपोर्ट जरूर देख लें। कोई गड़बड़ी दिखे तो उसे ठीक कराने के लिए विवाद दर्ज करें। रिपोर्ट में गलत जानकारी रहने से आगे भी परेशानी हो सकती है।

सिर्फ 750 का स्कोर काफी नहीं

CIBIL स्कोर 750 या उससे ऊपर होना अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री का संकेत हो सकता है। लेकिन बैंक के पास लोन मंजूर करने के लिए कई और पैमाने होते हैं। आपकी कमाई कितनी है, पहले से कितना कर्ज है और नई EMI आसानी से चुका पाएंगे या नहीं, ये बातें भी देखी जाती हैं।

इसलिए लोन लेने से पहले सिर्फ अपना CIBIL स्कोर मत देखिए। अपनी EMI, कुल कर्ज और Credit Card के इस्तेमाल पर भी नजर डालिए। कई बार यहीं पर वह वजह छिपी होती है, जिसकी वजह से अच्छा स्कोर होने के बावजूद लोन का आवेदन रिजेक्ट हो जाता है।

LIC Pension Plan: एलआईसी की चौका बेनेफिट्स वाली धांसू पॉलिसी, रिस्क कवर और पेंशन के साथ बोनस भी

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

LIC Pension Plan: एलआईसी की चौका बेनेफिट्स वाली धांसू पॉलिसी, रिस्क कवर और पेंशन के साथ बोनस भी

LIC Pension Plan: एलआईसी का जीवन उमंग, एक ऐसा प्लान जो तिहरे फायदे की चादर में लपेटा हुआ है। चूंकि पॉलिसी एलआईसी की है तो जाहिर सी बात है कि इसमें इंश्योरेंस कवरेज होगा ही। इंश्योरेंस कवरेज के साथ-साथ एलआईसी ने इसमें जिंदगी भर सम एश्योर्ड के 8% के बराबर गारंटीड पेंशन का प्रावधान किया हुआ है तो साथ ही इसमें बोनस भी जुड़ता रहता है, जिससे पेंशन लेते-लेते कभी जरूरत पड़ी तो बोनस मिलाकर अच्छा-खासा अमाउंट मिल जाता है या किसी अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी की आर्थिक मदद हो जाती है। इसके अलावा टैक्स बेनेफिट्स भी मिलता है। इस प्रकार जीवन उमंग में बेनेफिट्स का चौका लग जाता है।

Jeevan Umang Details: खास बातें

जीवन उमंग एलआईसी की एक नॉन-लिंक्ड, पार्टिसिपेटिंग, होल-लाइफ इंश्योरेंस और सेविंग्स प्लान है।

जीवन उमंग पॉलिसी 30 दिन के बच्चे से लेकर 55 साल की उम्र के शख्स के लिए ली जा सकती है।

इसमें कम से कम ₹2 लाख तक का बीमा कराया जा सकता है और अधिकतम की कोई सीमा नहीं है।

मेच्योरिटीज बीमाधारक के 100 वर्ष का होने पर होता है।

इसमें पॉलिसीधारक की एंट्री ऐज के हिसाब से 15,20, 25 या 30 साल का पेमेंट टर्म चुना जा सकता है। दो साल तक के बच्चों के लिए 15 साल का पेमेंट टर्म नहीं है तो 51-55 साल के शख्स के लिए सिर्फ 15 साल का पेमेंट टर्म ही है और 46-50 वर्ष के शख्स के लिए 15 साल और 20 साल का पेमेंट टर्म और 41-45 वर्ष की एंट्री ऐज पर 15, 20 और 25 साल का पेमेंट टर्म।

पॉलिसी पेमेंट टर्म (PPT) पूरा होने पर पॉलिसीधारक को सम एश्योर्ड के 8% के बराबर पेंशन 100 वर्ष की उम्र तक हर साल मिलती रहती है। 100 वर्ष की उम्र पूरा होने पर बेसिक सम एश्योर्ड और पूरी पॉलिसी अवधि में इकट्ठा हुआ बोनस मिलता है।

पॉलिसी टर्म के दौरान किसी अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को सम एश्योर्ड में सिंपल रिवर्सनरी बोनस और फाइनल एडीशनल बोनस मिलता है। हालांकि 8 साल से कम उम्र के बच्चे के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। 8 साल से कम उम्र में पॉलिसी लेने पर पॉलिसी लेने के 2 साल पूरा होने के एक दिन पहले या जिस पॉलिसी एनीवर्सिसरी से बच्चा 8 साल की उम्र करता है, उससे एक दिन पहले; इन दोनों में जो पहले हो, उस दिन से रिस्क शुरू होता है। रिस्क शुरू होने से पहले पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर बेस-पॉलिसी प्रीमियम ही वापस मिलेंगे।

इसमें राइडर्स भी उपलब्ध हैं।

इसमें जमा प्रीमियम पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स मिलता है और मेच्योरिटी या टैक्स बेनेफिट्स आमतौर पर सेक्शन 10(10डी) के तहत टैक्स-फ्री होते हैं।

उदाहरण से समझें

2 साल के बच्चे का उदाहरण

₹10 लाख की पॉलिसी अगर 20 साल के लिए रहे हैं तो और गॉर्जियन की उम्र 35 साल है तो ADDB (एक्सीडेंटल डेथ एंड डिजेबिलिटी बेनेफिट) और PWB (प्रीमियम वेवर बेनेफिट) राइडर के साथ सालाना प्रीमियम ₹55765 बन रही है यानी हर दिन ₹153 की जमा। बिना PWB राइडर के लिए सालाना प्रीमियम ₹53535 होगी।

20 साल पूरा होने यानी बच्चे के 22 साल का होने के बाद हर साल पॉलिसीहोल्डर के खाते में ₹80 हजार क्रेडिट होंगे।

अब इसमें रिस्क कवर की बात करें तो चूंकि इसमें PWB राइडर है तो गॉर्जियन के साथ कोई अनहोनी की स्थिति में पूरा प्रीमियम माफ हो जाएगा और पॉलिसी चलती रहेगी। वहीं पॉलिसीहोल्डर यानी बच्चे के साथ कोई अनहोनी होने पर नॉमिनी को पॉलिसी पीरियड के हिसाब से जो पैसा बनेगा, वह मिल जाएगा। अगर पॉलिसी लेने के एक साल के भीतर ही एक्सीडेंटल डेथ होती है तो नॉमिनी को जमा प्रीमियम के हिसाब से ही यानी 1.11 लाख के आस-पास पैसा मिलेगा तो रिस्क शुरू होने के बाद 10 साल की उम्र में एक्सीडेंटल डेथ पर ₹16 लाख के आसपास मिलेगा।

30 साल की उम्र में पॉलिसी लेने पर

अब अगर 20 साल की उम्र में ₹10 लाख की पॉलिसी अगर 20 साल के लिए रहे हैं तो ADDB राइडर के साथ सालाना प्रीमियम ₹54985 बन रही है यानी हर दिन ₹151 की जमा।

पॉलिसी के 20 साल पूरा होने के बाद 40 की उम्र से जिंदगी भर हर साल ₹80 हजार खाते में क्रेडिट होंगे।

अब अनहोनी के स्थिति की बात करें तो नेचुरल डेथ केस में सम एश्योर्ड और कुल बोनस जोड़कर मिलेगा तो एक्सीडेंटल डेथ केस में सम एश्योर्ड, राइडर और कुल बोनस नॉमिनी को मिलेगा। मान लेते हैं कि पॉलिसी पूरा होने के बाद 5 साल सालाना पैसा यानी कुल ₹4 लाख खाते में क्रेडिट होता है और उसके बाद कोई अनहोनी जाती है तो एक्सीडेंटल केस में मौजूदा बोनस रेट के हिसाब से नॉमिनी को ₹41-₹42 लाख के आस-पास मिल जाएगा।

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LIC Jeevan Utsav: बच्चों के लिए आजीवन तोहफा, हर दिन ₹160 की बचत से करें जिंदगी भर सालाना ₹100000 का इंतजाम

LIC Jeevan Utsav: एलआईसी में लोगों की जरूरतों के हिसाब से कई पॉलिसी हैं, उसमें से एक लाइफटाइम पेंशन प्लान जीवन उत्सव है। इसकी खास बात ये है कि इसमें एक तय अवधि के बाद हर साल एक फिक्स्ड अमाउंट जिंदगी भर पॉलिसीहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट होता रहता है। इस पर मार्केट के उठा-पटक या आर्थिक मंदी या सुस्ती का कोई असर नहीं पड़ता। 1 साल की कम उम्र के किसी बच्चे लिए 16 साल तक हर दिन ₹160 बचाकर 18 वर्ष की उम्र से जिंदगी भर उसके लिए हर दिन ₹274 के हिसाब से सालाना ₹1 लाख की व्यवस्था की जा सकती है।

Jeevan Utsav: डिटेल्स

यह प्लान 30 दिन के नवजात शिशु से लेकर 65 वर्ष की उम्र के बुजुर्गो तक के लिए उपलब्ध है। 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 16 साल तक प्रीमियम चुकाना पड़ेगा तो 65 वर्ष के बुजुर्ग के लिए अधिकतम 5-10 वर्ष तक के पीरियड का ही प्रीमियम पेमेंट ऑप्शन इस पॉलिसी में है। इसमें कम से कम ₹5 लाख तक का सम एश्योर्ड लेना होता है और अधिकतम की कोई सीमा नहीं है। प्रीमियम भरने का पीरियड समाप्त होने के रेगुलर इनकम प्लान के तहत दो साल बाद से हर साल सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट होता रहेगा, जिंदगी भर। 100 साल की उम्र तक पैसा मिलता है और फिर पॉलिसी बंद कर जो भी मेच्योरिटी वैल्यू बनती है, वह पॉलिसी होल्डर्स को दे दी जाती है। किसी अनहोनी की स्थिति में पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर सम एश्योर्ड और हर साल का गारंटीड एडीशन नॉमिनी को मिलता है।

इसमें ADDB (एक्सीडेंटल डेथ एंड डिजिबिलिटी बेनेफिट राइडर), AB, AB (2 गुना), AB (3 गुना), टर्म राइडर और PWB (प्रीमियम वेवर बेनेफिट) जैसे राइडर्स थोड़े से अतिरिक्त शुल्क के साथ मिलते हैं। एडीडीबी का मतलब है कि दुर्घटना से मृत्यु होने पर अतिरिक्त पैसा मिलता है तो दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो सकते हैं। वहीं पीडब्ल्यूबी का मतलब है कि दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो जाता है तो बच्चों की पॉलिसी में अभिभावक की मौत होने पर 18 साल की उम्र तक के सभी प्रीमियम माफ हो जाते हैं।

रिस्क कवर के मामले में एक बात बताना जरूरी है कि 8 साल से कम उम्र के बच्चों की पॉलिसी के मामले में पॉलिसी शुरू होने के 2 साल बाद या बच्चे के 8 साल का होने, दोनों में जो पहले हो, उस दिन से रिस्क कवर शुरू होगा। 8 साल से अधिक उम्र में पॉलिसी लेने पर पर रिस्क तुरंत चालू हो जाएगा। एक और अहम बात ये है कि बच्चे के 18 साल का होने के बाद पॉलिसी अपने आप उसके नाम पर ट्रांसफर हो जाएगी।

अब एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कि ABC की उम्र 36 वर्ष है और एडीडीबी के राइडर के साथ वह 15 साल के लिए ₹10 लाख की पॉलिसी लेता है। 15 साल तक वह हर साल ₹66150, हर छह महीने पर ₹33653, हर तीन महीने पर ₹16950 या हर महीने ₹5691 में से एक विकल्प चुनता है और 15 साल तक लगातार प्रीमियम भरता है। 15 साल तक प्रीमियम भरने के बाद उसे दो साल तक रुकना होता है जिसके बाद 53 वर्ष की उम्र से उसे हर साल अपने बैंक खाते में सालाना ₹1 लाख यानी ₹10 लाख के सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट मिलता है।

किसी अनहोनी की स्थिति में बात करें तो एक्सीडेंट से पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर नॉमिनी को सम एश्योर्ड और जितने साल पॉलिसी मिली है, उतने समय का गारंटीड एडीशंस जोड़कर मिलेगा। जैसे कि 36 वर्ष की उम्र में पॉलिसी लेने के बाद ABC की मौत 45 वर्ष की उम्र में यानी 9 सालाना प्रीमियम भरने के बाद एक एक्सीडेंट में हो गई तो नॉमिनी को ₹24 लाख मिलेंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी यहां कभी भी कोई सलाह नहीं दी जाती है।