Market cues : टेक्निकल इंडीकेटर दे रहे मिलेजुले संकेत, 24300-24400 की दीवार पार होने पर ही आएगी तेजी

Trade setup for today : ऊपरी स्तरों पर हुई मुनाफा वसूली के कारण निफ्टी क्लोजिंग बेसिस पर 24,300 के लेवल (20-डे EMA) को बनाए रखने में नाकाम रहा और 24 अगस्त को 0.14 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। ट्रेडर्स 25 अगस्त को होने वाली मंथली F&O एक्सपायरी से पहले सतर्क नजर आए। मोमेंटम इंडिकेटर्स में बेयरिश क्रॉसओवर घबराहट का संकेत है,लेकिन घटता हुआ रेड हिस्टोग्राम बार बेयरिश मोमेंटम के कमजोर होने का संकेत है।

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि सोमवार के निचले स्तर के पास स्थित 24,150-24,100 का जोन निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। इसके बाद 24,000 पर बड़ा सपोर्ट होगा। ऊपर की तरफ,24,300-24,400 का जोन रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। इस दीवार को पार होने पर 24,500 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (24,219) के लिए अहम लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,161, 24,121 और 24,057

पिवट प्वांइट पर आधारित रेजिस्टेंस :24,290, 24,330 और 24,394

स्पेशल फॉर्मेशन : निफ्टी ने कल एक बेयरिश कैंडल बनाई जिसमें नीचे की तरफ एक साफ लोअर विक दिखी। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी की दिलचस्पी के बावजूद बिकवाली का दबाव बना रहा। क्लोजिंग बेसिस पर इंडेक्स 20-डे EMA के नीचे रहा,लेकिन डे EMA के ऊपर बना रहा। RSI गिरकर 47.85 पर आ गया और अपनी सिग्नल लाइन के नीचे रहा,जबकि MACD रेफरेंस लाइन के नीचे बना रहा। हालांकि,लाल हिस्टोग्राम बार छोटा हो गया और स्टोकेस्टिक RSI लगातार तीसरे सेशन में भी बुलिश क्रॉसओवर बनाए रहा,जिससे कुल मिलाकर सतर्क रुख के बावजूद अंडरलाइंग मोमेंटम में कुछ सुधार का संकेत मिला।

बैंक निफ्टी (57,526) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,788, 57,937 और 58,176

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,309, 57,160 और 56,921

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,137, 58,714

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,400, 57,135

स्पेशल फॉर्मेशन : बैंक निफ्टी ने भी निफ्टी की तरह ही कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया और अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से थोड़ा नीचे बंद हुआ। इंडेक्स की दो दिन की बढ़त का सिलसिला टूट गया और इसमें 0.41 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि,यह अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा जो शॉर्ट-टर्म में थोड़ी सावधानी के बावजूद इसके बेहतर स्ट्रक्चर का संकेत है। RSI गिरकर 50.53 पर आ गया और इसमें नेगेटिव क्रॉसओवर देखा गया,जबकि MACD अपनी सिग्नल लाइन के नीचे ही बना रहा। हालांकि,लाल हिस्टोग्राम बार छोटा होता गया और स्टोकेस्टिक RSI लगातार तीसरे सेशन में भी पॉजिटिव क्रॉसओवर बनाए रखने में कामयाब रहा। इससे मिले-जुले संकेत मिलते हैं। शॉर्ट-टर्म मोमेंटम को लेकर सावधानी के संकेत हैं,लेकिन अंदरूनी मजबूती में सुधार के संकेत भी दिख रहे हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

24 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट खरीदार रहे और उन्होंने 1,181 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार 10वें सेशन में खरीदारी जारी रखी और 2,493 करोड़ रुपये का निवेश किया।

इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX सोमवार को 2.95% बढ़कर 11.525 पर पहुंच गया। यह लगातार दूसरे सेशन में भी ऊपर की ओर बढ़ा जो थोड़ी सावधानी बरतने का संकेत है। हालांकि,यह बढ़त तेजड़ियों के लिए अभी चिंता की बात नहीं है,क्योंकि यह इंडेक्स अभी भी अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और 12 के लेवल से नीचे बना हुआ है।

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पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 24 अगस्त को गिरकर 0.83 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 1.11 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: सेल (SAIL)

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: चारों महानगरों में सबसे महंगा गोल्ड दिल्ली में, चेक करें 10 शहरों में 24 से 18 कैरट सोना कहां सबसे सस्ता

Gold Rate Today in India: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते गोल्ड की चमक आज लगातार दूसरे दिन मजबूत हुई है तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी से चांदी पर दबाव दिखा। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की स्थिरता के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹890 और 22 कैरट वाला ₹810 महंगा हुआ है। 23 अगस्त की स्थिरता से पहले लगातार तीन दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट की शुद्धता वाला गोल्ड ₹8120 और 22 कैरट वाला ₹7450 महंगा हुआ है। अब आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 मजबूत हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी चमक फीकी हुई है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। एक किलो चांदी आज ₹100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,64,130₹1,50,460₹1,23,090
मुंबई₹1,63,980 ं₹1,50,310₹1,22,940
कोलकाता₹1,63,980₹1,50,310₹1,22,940
चेन्नई₹1,63,980₹1,50,310₹1,28,010
बेंगलुरू₹1,63,980₹1,50,310₹1,22,940
हैदराबाद₹1,63,980₹1,50,310₹1,22,940
लखनऊ₹1,64,130₹1,50,460₹1,23,090
पटना₹1,64,030₹1,50,360₹1,22,990
जयपुर₹1,64,130₹1,50,460₹1,23,090
अहमदाबाद₹1,64,030₹1,50,360₹1,22,990

तीन दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव कम हुए हैं। इन तीन दिनों की स्थिरता से पहले लगातार दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,500 ऊपर चढ़ी थी तो उससे भी एक दिन पहले 19 अगस्त को एक किलो चांदी ₹5000 नीचे आई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,59,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,75,100 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते घरेलू बाजार में सोना तेजी से ऊपर चढ़ा। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी है। स्पॉट गोल्ड $42.45 यानी करीब 1% बढ़कर प्रति औंस $4,646.54 पर पहुंच गया। वहीं चांदी प्रति औंस करीब $69 पर स्थिर रही।

एनालिस्ट्स के मुताबिक अब गोल्ड की चाल सिर्फ जियो-पॉलिटिकल टेंशन से नहीं तय होगी बल्कि महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) कायनात चेनवाला का कहना है कि पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। मार्केट की नजर इस बात पर रहेगी कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा रिस्क पैदा होता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Lalithaa Jewellery IPO Listing: 66 गुना आईपीओ भरने के बाद शेयर 32% प्रीमियम पर लिस्ट, धांसू एंट्री के बाद और भागा ऊपर

Lalithaa Jewellery Mart IPO Listing: दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ज्वैलरी रिटेल कंपनी ललिता ज्लैवरी मार्ट के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और इसे ओवरऑल 66 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹201 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹265.30 और NSE पर ₹265.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को करीब 32% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹273.80 (Lalithaa Jewellery Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 36.22% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹19 के डिस्काउंट पर मिला है।

Lalithaa Jewellery IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

ललिता ज्वैलरी का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 153.80 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 78.17 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 9.10 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1,200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹5 की फेस वैल्यू वाले 2,48,75,621 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर किरण कुमार जैन को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,033.23 करोड़ 10 नए स्टोर्स के सेटअप और बाकी आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Lalithaa Jewellery Mart के बारे में

ललिता ज्वैलरी का कारोबार दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूती से फैला हुआ है। यह सोने, चांदी, हीरे इत्यादि के गहने बनाती है। ललिता ज्वैलरी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 67% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹1,009.82 करोड़ और टोटल इनकम 22% के सीएजीआर से ₹25,039.80 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,679.74 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Lalithaa Jewellery Listing: 66 गुना सब्सक्राइब आईपीओ, ₹201 के शेयर चमकाएंगे पोर्टफोलियो या रेड लिस्ट?

Lalithaa Jewellery Listing: आईपीओ को 66 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ज्वैलरी रिटेल कंपनी ललिता ज्लैवरी मार्ट के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर शानदार संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹72 यानी 35.82% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 24 अगस्त को करीब 36% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹201 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Lalithaa Jewellery चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट कंपनी पर क्लिक करके Lalithaa Jewellery चुनें।

पैन, एप्लीकेशन नंबर, डीपी/क्लाइंट आईडी, अकाउंट नंबर/IFSC में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Lalithaa Jewellery IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

ललिता ज्वैलरी का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 153.80 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 78.17 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 9.10 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1,200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹5 की फेस वैल्यू वाले 2,48,75,621 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर किरण कुमार जैन को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,033.23 करोड़ 10 नए स्टोर्स के सेटअप और बाकी आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Lalithaa Jewellery के बारे में

ललिता ज्वैलरी का कारोबार दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूती से फैला हुआ है। यह सोने, चांदी, हीरे इत्यादि के गहने बनाती है। ललिता ज्वैलरी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 67% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹1,009.82 करोड़ और टोटल इनकम 22% के सीएजीआर से ₹25,039.80 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,679.74 करोड़ पड़े थे।

आईपीओ को लेकर क्या था ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई सिक्योरिटीज ने ललिता ज्वैलरी आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने कहा था कि वह अभी की बजाय लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाही तक कंपनी के परफॉरमेंस को ट्रैक करेगी। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी की वैल्यू वित्त वर्ष 2026 की कमाई के मुकाबले 11.1 गुना पर थी जोकि ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इंडस्ट्री पियर्स के हिसाब से है। हालांकि हेजिंग पॉलिसी नहीं होने को एक रिस्क बताया था। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक गोल्ड के भाव स्थिर होने पर कंपनी का मार्जिन कम हो सकता है।

एक और ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने ललिता ज्वैलरी को सब्सक्राइब रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने लिस्टिंग गेन के साथ-साथ रिस्क उठा सकने वाले निवेशकों को लॉन्ग टर्म के लिए पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कल्याण ज्लैवर्स (Kalyan Jewellers) और टाइटन (Titan) जैसे दिग्गजों के मुकाबले P/E बेसिस पर यह आईपीओ 75% डिस्काउंट पर है। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म ने ₹1066 करोड़ के जीएसटी विवाद और प्रमोटर से जुड़े मामले को अहम रिस्क के तौर पर जिक्र किया है लेकिन यह भी कहा कि टैक्स से जुड़े पुराने मामले काफी हद तक सुलझ चुके हैं।

Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट से लिस्टिंग को लेकर मिल रहे ये संकेत

Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा शेयर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट में ऐसी है शेयरों की हालत

Horizon Industrial Parks Listing: इनकम में उछाल के बावजूद लगातार घाटे में चल रही होरीजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स का आईपीओ दो गुना से कम सब्सक्राइब हो पाया। ग्रे मार्केट से भी इसके शेयरों की ढाई फीसदी प्रीमियम पर ही लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹1.5 यानी 2.50% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को करीब 2.5% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। इसके शेयर कल 24 अगस्त को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹60 के भाव पर जारी हुए हैं। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर ₹5 का डिस्काउंट मिला है। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Horizon Industrial Parks चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Horizon Industrial Parks चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Horizon Industrial Parks IPO को मिला था सुस्त रिस्पांस

होरिजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स का ₹2,600 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। यह इश्यू ओवरऑल 1.52 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.94 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.03 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.02 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 1.64 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 43,34,09,090 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹2,250.00 कंपनी और इसकी पूर्ण मालिकाना हक वाली कुछ सब्सिडरीज का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Horizon Industrial Parks के बारे में

जीएलएल रिपोर्ट के मुताबिक नेटवर्क के हिसाब से ब्लैकस्टोन के निवेश वाली होरीजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स इंफ्रा डेवलपर है। कंपनी के आईपीओ ड्राफ्ट के मुताबिक इसके पास देश के 10 बड़े शहरों में कुल 5.80 स्क्वेयर फीट में फैले हुए 45 लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल एसेट्स हैं। यह बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए बड़े और नए जमाने के हिसाब से वेयरहाउसेज और इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज बनाती है और फिर उन्हें किराए पर देती है।

इसके पास मुख्य रूप से तीन एसेट्स हैं- ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, रिटेल और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के इस्तेमाल के लिए फुलफिलमेंट सेंटर्स (वेयरहाउसिंग); मैन्युफैक्चरिंग, ईवी, रिन्यूएबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इत्यादि के लिए इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज; और लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए इन-सिटी सेंटर्स जिनका इस्तेमाल डार्क स्टोर्स, फार्मा, क्लाउड किचन, रिटेल और सर्विस बिजनेस में होता है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले तीन वित्त वर्षों से इनकम में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद इसका घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024 में इसे ₹162.21 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था जोकि वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर ₹178.78 करोड़ और वित्त वर्ष 2026 में ₹203.65 करोड़ पर पहुंच गया तो दूसरी तरफ इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना करीब 77% की रफ्तार यानी सीएजीआर से बढ़कर ₹767.84 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹6,884.34 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹3,214.54 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold vs Inflation: 46 साल के आंकड़ों से मिला जवाब, गोल्ड में निवेश महंगाई से लड़ाई में कितना कारगर

Gold vs Inflation: गोल्ड के भाव एक बार फिर तेजी से ऊपर चढ़ने लगे हैं। 24 कैरट की शुद्धता वाला 10 ग्राम गोल्ड अब करीब ₹1.64 लाख के भाव पर पहुंच गया है जबकि कुछ ही दिन पहले यह लगभग ₹1.59 लाख में मिल रहा था। हालांकि गोल्ड के भाव में इस तेजी के चलते ही इसमें निवेशकों का रुझान दिखता है बल्कि इसे बड़े पैमाने पर महंगाई की रफ्तार से बचाव के तौर पर देखा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सोना वाकई लॉन्ग टर्म में महंगाई से लड़ाई में अच्छा हथियार साबित हुआ है और अगर हां तो कितना। इसे लेकर फंड्सइंडिया की वेल्थ कंवर्जेशंस अगस्त 2026 रिपोर्ट के डेटा से सामने आया है कि जैसे-जैसे गोल्ड रखने की अवधि यानी होल्डिंग पीरियड बढ़ती है, महंगाई से आगे रहने में इसकी रफ्तार अधिक स्थिर हो जाती है।

Gold vs Inflation: अलग-अलग टाइमफ्रेम में कैसी रही भिड़ंत

फंड्सइंडिया ने साल 1995 और साल 2025 के बीच अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड में सोने से मिलने वाले रिटर्न और महंगाई की तुलना की। इसमें गोल्ड के रिटर्न और महंगाई के बीच सालाना औसत अंतर को मापा गया। इस डेटा के मुताबिक एक साल में दोनों के बीच किसकी रफ्तार अधिक रही, यह इस बात पर काफी निर्भर है कि गोल्ड की खरीदारी कब हुई। औसतन गोल्ड ने एक साल में इनफ्लेशन को करीब 4 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ दिया। हालांकि एक साल में ही खरीदारी के अलग-अलग समय के हिसाब से ही गोल्ड ने इनफ्लेशन को 24 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पछाड़ दिया तो कुछ अवधि में 28 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पिछड़ गई।

अब अगर पांच साल में बात करें तो गोल्ड ने महंगाई की रफ्तार यानी इनफ्लेशन को औसतन सालाना 5 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ा तो 10,15 और 20 साल की अवधि में भी ऐसी ही स्थिति रही। इसका मतलब है कि कम समय में जरूरी नहीं है कि गोल्ड इनफ्लेशन को पछाड़ दे लेकिन लंबे समय में यह अब तक आगे ही साबित हुआ है।

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हर साल लगातार नहीं बढ़ी गोल्ड की चमक

लॉन्ग टर्म में गोल्ड ने शानदार रिटर्न दिया है और महंगाई को मात दी है लेकिन इसकी चमक लगातार हर साल नहीं बढ़ी है। इसे लेकर फंड्सइंडिया ने 1980 से लेकर अब तक गोल्ड ने कितना रिटर्न दिया, एक और एनालिसिस की। इसमें सामने आया कि इसमें जोरदार तेजी के दौर भी आए हैं तो लॉन्ग टर्म तक सुस्त रिटर्न के दौर भी रहे हैं। रोलिंग-रिटर्न डेटा के मुताबिक अलग-अलग पीरियड में गोल्ड का औसतन सालाना रिटर्न करीब 10% रहा है लेकिन शॉर्ट टर्म में रिटर्न इस बात पर बहुत निर्भर रहा कि निवेशक ने किस समय सोना खरीदा था। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि इनफ्लेशन हेज यानी महंगाई के खिलाफ हथियार होने का मतलब ये नहीं है कि जब भी महंगाई बढ़ेगी, सोने की कीमत भी उसी समय बढ़ेगी या सोना हर साल महंगाई से ज्यादा रिटर्न देगा या सोने की कीमत हमेशा ऊपर ही जाएगी।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा चार्ज! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

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UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

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NTPC Green की सब्सिडरी को बड़ी सफलता, बिजली सप्लाई की बड़ी डील पर भागेगा शेयर! 24 अगस्त को रहेगी नजर

NTPC Green Energy Share Price: एनटीपीसी के एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी को बड़ी सफलता मिली है। कंपनी ने 22 अगस्त को इसके बारे में एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी। इसे सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की 6000 MWh की एश्योर्ड पीक वार टेंडर में 500 मेगावाट की कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी मिली है। इसके लिए प्रति किलोवाट घंटा का टैरिफ ₹6 तय किया गया है। ऐसे में जब सोमवार 24 अगस्त को मार्केट खुलेगा तो शेयरों पर इसका असर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 21 अगस्त को बीएसई पर यह 0.57% की गिरावट के साथ ₹91.33 पर बंद हुआ था।

इसके शेयर 27 नवंबर 2024 को मार्केट में लिस्ट हुए थे और आईपीओ निवेशकों को यह ₹108 के भाव पर जारी हुआ था। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के शेयर 4 दिसंबर 2024 को ₹155.30 के रिकॉर्ड हाई लेवल और 2 फरवरी 2026 को ₹84.08 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थे।

किस नीलामी में मिली सफलता

एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक टेंडर के लिए ई-रिवर्स ऑक्शन शुक्रवार 21 अगस्त को हुआ। यह टेंडर इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) से जुड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है। इसमें सेबी ने हाई डिमांड वाले टाइम में 4 घंटे के लिए 1500 मेगावाट के हिसाब से से 6 हजार मेगावाट बिजली की व्यवस्था करने का टेंडर निकाला यानी कि ऐसी कंपनियां चुनने के लिए टेंडर निकाला गया जो बिजली की हाई डिमांड वाले समय में चार घंटे तक हर घंटे के हिसाब से 1500 मेगावाट बिजली की सप्लाई कर सकें। इसमें से 500 मेगावाट की सप्लाई के लिए बोली एनटीपीसी ग्रीन की सब्सिडरी ने जीत ली है और इसके तहत यह सेकी को प्रति यूनिट ₹6 के हिसाब से बिजली सप्लाई करेगी।

कैसी है NTPC Green Energy की सेहत

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा शानदार रेवेन्यू के दम पर 38.3% बढ़कर ₹304.84 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 62.7% बढ़कर ₹1,106.86 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी के लिए जून तिमाही अच्छी रही। जून तिमाही में सालाना आधार पर कंरनी का ईबीआईटीडीए 63.8% बढ़कर ₹988.7 करोड़ और EBITDA मार्जिन 88.7% से 89.3% पर पहुंचा।

इसके अलावा बोर्ड ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट के लिए एक पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) बनाने को मंजूरी दी है। सभी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी का मानना है कि यह एसपीवी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर के ग्राहकों के लिए कैप्टिव या ग्रुप कैप्टिव स्ट्रक्चरिंग के तहत बाद में हिस्सेदारी कम करने में मदद करेगा। बोर्ड ने एनटीपीसी ग्रीन और न्यू एंड रिन्यूएबल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ आंध्र प्रदेश लिमिटेड की आधी-आधी हिस्सेदारी वाले ज्वाइंट वेंचर एपी एनजीईएल हैरिट अमृति लिमिटेड (AP NGEL Harit Amrit Ltd) में ₹28.78 लाख तक निवेश करने की मंजूरी भी दी। इस निवेश के बाद ज्वाइंट वेंचर में एनटीपीसी ग्रीन की हिस्सेदारी बढ़कर 51% हो जाएगी।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

F&O, Rupees Printing Machine or Destroyer: इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कई वर्षों बाद पहली बार बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि बाजार नियामक सेबी (SEBI) की ताजा ट्रेडर स्कोरकार्ड रिपोर्ट के मुताबिक मूल समस्या अभी भी बनी हुई है कि अधिकतर रिटेल ट्रेडर्स F&O (Futures & Options) को एक व्यवस्थित ट्रेडिंग प्रक्रिया की बजाय किस्मत आजमाने जैसा मानते हैं। एफएंडओ में कुल नुकसान और ट्रेडर्स की संख्या दोनों कम तो हुई, लेकिन 10 में से करीब 9 रिटेल ट्रेडर्स अब भी घाटे में रहे। सेबी के आंकड़ों से सामने आया है कि वित्त वर्ष 2026 में जो सुधार दिखा भी है, वह स्ट्रैटेजी यानी रणनीति के चलते नहीं बल्कि ट्रेडर्स की संख्या घटने से आया।

क्या हैं आंकड़े

वित्त वर्ष 2026 में F&O में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख और कुल नेट नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा तो नुकसान में रहने वाले ट्रेडर्स का अनुपात भी 90.9% से घटकर 87.7% रह गया। हालांकि नुकसान में रहने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया। इस प्रकार वित्त वर्ष 2026 में कम लोगों ने ट्रेडिंग की, लेकिन जो ट्रेडिंग में बने रहे, उन्होंने अभी काफी बड़ा रिस्क लिया और भारी नुकसान उठाया।

Options Buying अब भी रिटेलर्स की पहली पसंद

सेबी के बिहैवरियल एनालिसिस के मुताबिक करीब 99.3% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेड किया, तो 93% ट्रेडर्स ने सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेडिंग की और फ्यूचर्स में उनकी हिस्सेदारी बहुत सीमित रही। इसके अलावा सेबी के के स्ट्रैटेजी-वाइज स्टडी में सामने आया कि ऑप्शंस बायर्स को 90% नुकसान हुआ और रिटेलर्स को सबसे बड़ा झटका इसी ने दिया। इससे फटाफट पैसा बनाने की कोशिश, एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग, बिना ठोस रणनीति के डायरेक्शन बेट्स और जरूरत से ज्यादा बड़ी पोजिशंस लेना।

रिटेलर्स के लिए बढ़ी लड़ाई

सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल ट्रेडर्स का मुकाबला अब सिर्फ दूसरे इंडिविजुअल्स से नहीं है। मार्केट पर अब बड़े इंस्टीट्यूशंस, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स और एल्गोरिदम से चलने वाले उन ट्रेडर्स का दबदबा बढ़ रहा है जो एडवांस्ड एग्जीक्यूशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये टेक्नोलॉजी, रिस्क मॉडल्स, ऑटोमोटेड एग्जीक्यूशन और डिसिपलिन्ड पोजिशन साइजिंग का इस्तेमाल करते हैं। वित्त वर्ष 2026 प्रोप्रॉयटरी ट्रेडर्स ने लगभग ₹44,000 करोड़ और FPIs ने करीब ₹14,000 करोड़ की कमाई की। इन दोनों की कमाई का करीब 99% हिस्सा एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग एंटिटीज से आया। एक तरह कई रिटेलर्स भावनाओं, सोशल मीडिया टिप्स और एक्सपायरी के दिन ट्रे़डिंग पर पर निर्भर हैं तो प्रोफेशनल ट्रेडर्स पहले से तय रणनीतियों, टेक्नोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट के के आधार पर ट्रेड कर रहे।

और भी खास बातें आई सामने

सेबी की रिपोर्ट में एक बात का खंडन हुआ कि अधिक अनुभव का मतलब घाटा कम होना है। जिन ट्रेडर्स ने लगातार चार या उससे अधिक वर्षों तक ट्रेडिंग की, उनमें भी नुकसान की दर बहुत अधिक रही यानी कि बार-बार एक ही गलती करने से ट्रेडिंग स्किल अपने आप नहीं बढ़ती। इसी तरह जिन ट्रेडर्स को लगातार दो साल नुकसान हुआ, उनमें से लगभग 90% ने ट्रेडिंग जारी रखी और फिर से नुकसान उठाया।

सेबी की रिपोर्ट में एक और परेशान करने वाली बात सामने आई कि अधिक ट्रेडिंग से नुकसान भी बड़ा हुआ। सबसे अधिक एक्टिव 42% ट्रेडर्स की कुल घाटे में 87% और टर्नओवर में 94% हिस्सेदारी रही। यह समस्या खासतौर से युवाओं और कम आय वाले ट्रेडर्स में अधिक दिखाई दी।

सेबी की रिपोर्ट में कम कैपिटल और अधिक रिस्क की बात सामने आई। लगभग 35% डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था, तो 78% के पास ₹1 लाख से कम की इक्विटी होल्डिंग थी। पोर्टफोलियो का साइज बढ़ने के साथ नुकसान की संभावना लगातार कम होती गई। बहुत कम या बिना इक्विटी होल्डिंग वाले ट्रेडर्स के लिए नुकसान की संभावना 93% रही तो ₹10 करोड़ से अधिक के पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स के लिए यह लगभग 58% रही। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी पूंजी वाले ट्रेडर्स आमतौर पर एक लिमिट में एक्सपोजर लेते हैं, जबकि कई छोटे ट्रेडर्स अपनी पूंजी के मुकाबले बहुत अधिक लेवरेज इस्तेमाल करते हैं।

Bonds में निवेश पर रिटर्न की गांरटी! ऐसे ऐड पर लगेगी रोक, SEBI ने लाया प्रस्ताव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।