दुनिया के सबसे अमीर और टेक दिग्गजों में अब पशु-पालन और खेती का शौक बढ़ रहा है। अमेरिका में खेती की जमीन अब सिर्फ किसान की जरूरत नहीं, अरबपतियों के लिए बड़ा निवेश और शौक बन चुकी है। कोई यहां मवेशी पाल रहा है, तो कोई जमीन खरीदकर भविष्य ज्यादा सुरक्षित कर रहा है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग हवाई के काउआई द्वीप पर करीब 2,871 करोड़ रु. के 4,000 एकड़ कोउलाउ रेंच पर वाग्यू और एंगस नस्ल के मवेशी पाल रहे हैं। वहीं, रेडिट के सह-संस्थापक एलेक्सिस ओहानियन फ्लोरिडा में अपने फार्म पर केले के बाग और मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। हालांकि, इन दिग्गजों के खेती-बारी का नया शौक अमेरिका में कृषि जमीनों को एक बेहद महंगे ‘एसेट क्लास’ में बदल दिया है। ‘ द लैंड रिपोर्ट’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के पास 2.75 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिससे वे अमेरिका के 44वें सबसे बड़े भूस्वामी बन गए हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस 4.62 लाख एकड़ और वॉलमार्ट घराने से जुड़े स्टेन क्रोनके 27 लाख एकड़ जमीन के मालिक हैं। क्रोनके ने 2025 में न्यू मैक्सिको में 9.38 लाख एकड़ जमीन खरीदी, जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी रैंच बिक्री बताया गया। अलग-अलग राज्यों में इन जमीनों पर आलू, गाजर, प्याज, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं। कुछ किसानों को लीज पर भी दी जाती है। पीपुल्स कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कृषि भूमि 411 लाख करोड़ की परिसंपत्ति बन चुकी है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक, बीते वर्ष खेतों के मूल्य में 4.3% की बढ़ोतरी हुई। नेशनल यंग फार्मर्स कोएलिशन की पॉलिसी निदेशक एरिन फॉस्टर के अनुसार, जमीन की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि पहली बार खेती में उतरने वाले युवा या छोटे किसान प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। जमीन में निवेश क्यों? महंगाई के साथ बढ़ती है कीमत महंगाई से सुरक्षित बचाव – सीमित प्राकृतिक संसाधन होने के कारण जमीन की कीमतें हमेशा महंगाई के साथ बढ़ती हैं। एआई और डेटा सेंटर्स की मांग – टेक कंपनियों (एआई हाइपरस्केलर्स) को विशाल डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़े भूभाग की जरूरत होती है। लाइफस्टाइल और नॉन-फाइनेंशियल फायदे – कोरोना महामारी के बाद बड़े परिसरों में शिकार, मछली पकड़ने और खुद का ऑर्गेनिक अन्न उगाने का रुझान बढ़ा है।
8th Pay Commission Fitment Facto: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। 7वें वेतन आयोग में जहां फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था जिससे न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुई थी। अब 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी यूनियनों ने 3.61 से लेकर 4.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।
कागज पर फिटमेंट फैक्टर के ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन असलियत में इनसे हर महीने कर्मचारियों की सैलरी में हजारों रुपये का अंतर आने वाला है।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों है अहम?
फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिसे कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे से गुणा करके नए वेतन आयोग के तहत नई सैलरी तय की जाती है। यह न केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को समाहित करता है, बल्कि कर्मचारियों की वास्तविक आय में वृद्धि भी सुनिश्चित करता है। पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन तय करने में भी इसी फैक्टर का इस्तेमाल होता है।
यूनियनों की प्रमुख मांगें: किसकी कितनी है सिफारिश?
अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी-अपनी मांगें और कैलकुलेशन रखी हैं:
BPMS (फिटमेंट फैक्टर 4.00 – न्यूनतम पे ₹72,000): भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने सबसे ज्यादा 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इसके तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 तय करने का प्रस्ताव है। BPMS का कहना है कि इसमें 1.58 घटक केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को बेअसर करने के लिए है, जबकि बाकी हिस्सा राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आधार पर है।
NCJCM स्टाफ साइड और BPS (फिटमेंट फैक्टर 3.833 – न्यूनतम पे ₹69,000): नेशनल काउंसिल JCM (स्टाफ साइड) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है।
इसके तहत न्यूनतम सैलरी ₹69,000 होगी। NCJCM ने 5 सदस्यों के परिवार के खाने, कपड़े, मकान, शिक्षा, शादी और तकनीक जैसे 15वें ILC मानदंडों के आधार पर यह गणना की है।
MSA (फिटमेंट फैक्टर 3.61 – न्यूनतम पे ₹65,000): मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA) ने 3.61 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है, जिससे न्यूनतम पे ₹65,000 (लेवल-1) हो जाएगी।
सैलरी मैट्रिक्स: लेवल के हिसाब से कितना होगा फायदा?
अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के कारण पे-मैट्रिक्स में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:
लेवल 1: MSA (3.61) के तहत ₹64,980, NCJCM (3.833) के तहत ₹69,000 और BPMS (4.00) के तहत यह ₹72,000 होगी।
लेवल 6: NCJCM के प्रस्ताव के अनुसार बेसिक पे बढ़कर ₹1,35,700 हो जाएगी।
लेवल 9 व 10 (मर्ज्ड): NCJCM के तहत यह ₹2,15,100 तक पहुंच जाएगी।
क्या सरकार उठा पाएगी इसका वित्तीय बोझ?
NCJCM का तर्क है कि 2014-15 के बाद से देश की जीडीपी में 165.23% और कुल कर राजस्व में 205.41% की भारी वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार के पास वेतन में इस बढ़ोतरी के वित्तीय प्रभाव को आसानी से संभालने की पूरी क्षमता है। रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी जोर दिया है कि बेसिक पे में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने से रिटायर्ड कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होती है।
50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग द्वारा चुना जाने वाला फिटमेंट फैक्टर बेहद निर्णायक होगा। यह न केवल हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी तय करेगा, बल्कि पेंशन, ग्रेच्युटी की सीमा और कम्यूटेशन अमाउंट पर भी लंबे समय तक असर डालेगा।
Gift Nifty Indicator: गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है, क्योंकि GIFT Nifty फ्लैट या नेगेटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है। Nvidia के अच्छे आउटलुक ने पूरे एशिया में टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों को बढ़ावा दिया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट से भारतीय शेयरों को सहारा मिल रहा है। हालांकि, उम्मीद से ज़्यादा US महंगाई के आंकड़ों और जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क रह सकते हैं।
सुबह करीब 7:40 बजे GIFT Nifty 30 अंक या 0.12 प्रतिशत गिरकर 24,366 पर ट्रेड कर रहा था। बुधवार को भारतीय शेयर पिछले सेशन की बढ़त को बनाए नहीं रख पाए और Nifty दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुआ। Sensex 183.15 अंक या 0.24 प्रतिशत गिरकर 77,472.94 पर आ गया, जबकि Nifty 126.80 अंक या 0.52 प्रतिशत गिरकर 24,207.75 पर बंद हुआ।
Nvidia के आउटलुक से एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों में उछाल
Nvidia द्वारा बिक्री का अच्छा आउटलुक जारी करने के बाद एशियाई शेयरों में बढ़त हुई। इससे उन चिंताओं में कमी आई कि AI से जुड़े कैपिटल खर्च में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है। हाल के हफ़्तों में AI पर खर्च के पैमाने और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंताओं के कारण इस सेक्टर में ज़बरदस्त बिकवाली हुई थी, ऐसे में यह अच्छा आउटलुक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकता है।
MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें सेमीकंडक्टर शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया। दक्षिण कोरिया के Kospi में 1.1 प्रतिशत की बढ़त हुई, जिसे SK Hynix और Samsung Electronics जैसे शेयरों का सहारा मिला, जबकि जापान के Topix में 0.9 प्रतिशत की बढ़त हुई। Nvidia के शेयरों में US में एक्सटेंडेड ट्रेडिंग के दौरान 4.7 प्रतिशत का उछाल आया, क्योंकि इसके आउटलुक ने बिक्री में लगातार मज़बूत बढ़ोतरी का संकेत दिया। इस घोषणा के बाद Nasdaq 100 फ्यूचर्स में 1.3 प्रतिशत तक की बढ़त हुई, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत ऊपर थे।
वॉल स्ट्रीट में गिरावट
Nvidia पर सकारात्मक प्रतिक्रिया तब आई जब बुधवार को रेगुलर ट्रेडिंग में अमेरिकी शेयर मामूली गिरावट के साथ बंद हुए थे, क्योंकि उम्मीद से ज़्यादा महंगाई के आंकड़ों ने सेंटीमेंट पर असर डाला था। Dow Jones Industrial Average 0.21 प्रतिशत गिरकर 53,463.88 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.02 प्रतिशत गिरकर 7,675.70 पर और Nasdaq Composite 0.08 प्रतिशत गिरकर 26,130.20 पर बंद हुआ।
महंगाई के आंकड़े अमेरिकी ब्याज दरों और ट्रेजरी यील्ड के आउटलुक पर फोकस बनाए रख सकते हैं। हाल के हफ्तों में, लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें और ज़्यादा बॉन्ड यील्ड ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए, खासकर ज़्यादा वैल्यूएशन वाले टेक्नोलॉजी शेयरों और उभरते बाजारों की एसेट्स के लिए, एक बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं।
ब्रेंट में लगातार चौथे दिन गिरावट
कच्चे तेल की गिरती कीमतें भारतीय बाजारों के लिए एक अच्छा संकेत हैं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.7 प्रतिशत गिरकर $87.24 प्रति बैरल पर आ गए, जिससे लगातार चौथे सेशन में इसमें गिरावट जारी रही। US West Texas Intermediate क्रूड 0.7 प्रतिशत गिरकर $81.67 प्रति बैरल पर आ गया, जो लगातार पांचवां सेशन था जब इसमें गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक
Bajaj Broking ने कहा कि निफ्टी 24,000-24,350 की रेंज में रह सकता है, जब तक कि यह 24,360 के ऊपर बंद न हो जाए; इस स्तर के ऊपर जाने (ब्रेकआउट) से रिकवरी 24,550-24,700 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट-टर्म सपोर्ट 24,000-23,800 पर देखा जा रहा है।
बुधवार को बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद इंस्टीट्यूशनल फ्लो सपोर्टिव रहा। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार दूसरे सेशन में नेट बायर रहे और उन्होंने 26 अगस्त को 502 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीदे। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने कहीं ज़्यादा खरीदारी की और शेयरों में 6,425 करोड़ रुपये का निवेश किया।
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India Weather Update: देश भर के अलग-अलग हिस्सों भारी बारिश और आंधी तूफान के कहर के बीच मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक देश के 12 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत कई राज्यों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने की भी चेतावनी जारी की गई है। समुद्र तटीय इलाकों में खराब मौसम और तेज हवाओं की स्थिति को देखते हुए मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

उत्तर भारत का मौसम: यूपी, उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट
उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में 26 अगस्त को सुपर एक्टिव मानसून का असर साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में गरज और चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का भी अलर्ट जारी किया गया है।
पश्चिमी भारत से सटे पूर्वी राजस्थान में भी 26 अगस्त को अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आंधी आने और बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
मध्य और पूर्वोत्तर भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम-मेघालय समेत इन राज्यों में बरसेगी आफत
मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 26 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों में बारिश के साथ-साथ गर्जना और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी 26 अगस्त को भारी बारिश होने के आसार जताए गए हैं।
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज के साथ बिजली चमकने और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।
पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड और बंगाल में भारी बारिश के साथ तेज हवाओं की चेतावनी
पूर्वी भारत के राज्यों के लिए 26 अगस्त का दिन मौसम के लिहाज से काफी संवेदनशील रहने वाला है। बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई इलाकों में तेज आंधी और झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
इन राज्यों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। साथ ही आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे न जाने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और तेज बारिश के साथ बिजली चमकने का अनुमान है।
दक्षिण भारत: केरल में भारी बारिश, आंध्र और तमिलनाडु में 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
दक्षिण भारत में भी मानसून अपना असर दिखाएगा। केरल और माहे में 26 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही केरल, माहे और लक्षद्वीप क्षेत्र में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक का अलर्ट है।
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में मौसम अधिक उग्र रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।
समंदर में रहेगा खराब मौसम, मछुआरों के लिए अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाओं और तूफानी मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना है। इसके अलावा कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र से सटे समुद्र में 35 से 45 किमी प्रति घंटे से लेकर 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने के आसार हैं।
बंगाल की खाड़ी की स्थिति देखें तो मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र, श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम-मध्य व दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। मौसम विभाग ने इन सभी समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सख्त सलाह दी है।
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Gold- Silver Price Today: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मंगलवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 500 रुपये गिरकर 1,62,933 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। 595 लॉट का कारोबार हुआ। जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है।
वहीं फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स 903 रुपये या 0.37 प्रतिशत गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,702 लॉट का कारोबार हुआ।
ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 4,641.42 डॉलर प्रति औंस हो गए।न्यूयॉर्क में चांदी 1.04 प्रतिशत गिरकर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
गिरावट की क्या है वजह
डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।
बाजार की नजरें बुधवार को आने वाले US पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर हैं, जो US फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है। साथ ही, शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में चेयरमैन केविन वॉर्श के पहले भाषण पर भी नजरें टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों की चाल के बारे में संकेत मिल सकते हैं।
क्या है निवेश का सही समय
VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि अगस्त में चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। इसकी वजहें हैं – ब्याज दरों को लेकर कम होती उम्मीदें, कमज़ोर USD, कीमती धातुओं की फिर से बढ़ती मांग और सरकारी कर्ज़ व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं। चांदी को मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे टेक्नोलॉजी सेक्टर से) का भी फ़ायदा मिल रहा है, और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी इसे और सहारा दे रही हैं।
हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।
जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए इसे बनाए रखना एक अच्छा फ़ैसला हो सकता है, खासकर अगर यह उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो का हिस्सा है। लेकिन नए निवेशकों के लिए, महीने भर में हुई लगभग 20% की तेज़ी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। इतनी ज़बरदस्त तेज़ी के बाद एक ही बार में खरीदने के बजाय, डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है।
निवेशकों को तभी बेचने के बारे में सोचना चाहिए जब उनके निवेश का आधार (investment thesis) बदल गया हो या पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा हो गया हो।
Silver Price Today: खरीदारी से पहले जानें क्या है आज का ताजा भाव, चेक करें 10 प्रमुख शहरों की लिस्ट
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।
वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।
सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी
एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।
चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।
क्या रूस से मिलेगा सहारा?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।
महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।
महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।
ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।
भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव
भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।
भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।
ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।
कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।
Kanpur expired chocolate dump: सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के कानपुर का एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कानपुर के पनकी में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड टॉफियों और चॉकलेट्स को उठाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई है। एक फैक्ट्री द्वारा कचरे में फेंकी गई इन मिठाइयों और चॉकलेट्स को इकट्ठा करने के लिए पुरुषों और महिलाएं टूट पड़े हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही फूड सेफ्टी, वेस्ट मैनेजमेंट और गरीबी को लेकर बहस छिड़ गई है कि कोई एक्सपायर्ड चॉकलेट के लिए कैसे क्रेजी हो सकता है और क्या लोग इसे घर ले जाकर अपने बच्चों को खिलाएंगे?
न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Delhiite नाम के यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे अजीब होड़ बताया है। यूजर का कहना है कि एक्सपायर्ड चॉकलेट लूटने के लिए टूट पड़े लोगों में बुनियादी कॉमन सेंस पूरी तरह से गायब नजर आया।
वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट पर लोगों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने जहां एक्सपायर्ड चीजों को उठाने वालों की आलोचना की और इसके हेल्थ पर पड़ने वाले खराब असर की बात कही, तो दूसरे कुछ लोगों का मानना था कि इस घटना को गरीबी और महंगाई के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।
Picking Up Expired Chocolates From Garbage
Kanpur’s Panki witnessed a bizarre rush as people picked up expired toffees and chocolates from a garbage dump. Basic common sense clearly took the day off. pic.twitter.com/JaFcUYxmaM
— زماں (@Delhiite_) August 24, 2026
महंगाई और गरीबी पर छिड़ी तीखी बहस
कचरे के ढेर पर मची इस लूट को लेकर कई यूजर्स ने देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक तंगी पर चिंता जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए तंज कसा कि भाई महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब कचरा भी बजट शॉपिंग डेस्टिनेशन बन गया है। वहीं दूसरे यूजर ने सहानुभूति जताते हुए लिखा कि यह सामान्य समझ की कमी से ज्यादा गरीबी और असमर्थता को दर्शाता है। इसी गरीबी ने लोगों को कचरे से खाना उठाने पर मजबूर किया होगा। एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि सोचिए उस स्तर तक पहुंचने के लिए कितनी तंगी रही होगी कि लोग इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार हो गए।
कुछ यूजर्स ने लोगों के पहनावे को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि जिस तरह से लोगों ने कपड़े पहने हैं, उससे लगता है कि वे सभी स्कूल और कॉलेज गए होंगे। समझ नहीं आता कि उन्हें क्या सिखाया गया है कि वे एक्सपायर्ड सामान उठा रहे हैं। दूसरे यूजर ने लिखा कि लोग फ्री की टॉफियों के लिए इंफेक्शन का खतरा मोल ले रहे हैं, ऐसा लगता है जैसे कॉमन सेंस गायब हो चुका है।
कंपनी और FSSAI पर उठे सवाल, नियमों के उल्लंघन का आरोप
इस पूरी घटना के बाद कंपनियों द्वारा खराब और एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने के तरीके पर भी सवाल उठे हैं। सोशल मीडिया पर एफएसएसएआई और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए एक यूजर ने लिखा कि उस फैक्ट्री मालिक को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और सजा मिलनी चाहिए क्योंकि एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने की एक तय प्रक्रिया होती है। एक दूसरे यूजर ने कहा कि एक्सपायर्ड आइटम को निपटाने का यह मानक तरीका नहीं है और इसके लिए दोषी ब्रांड के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह लेख यूजर-जनरेटेड कंटेंट और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। ओरिजिनल पोस्ट में किए गए दावों की मनीकंट्रोल द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।)
Trading Plan: मार्केट एक्सपर्ट्स की राय है कि निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। बाजार को साफ दिशा पकड़ने के लिए सोमवार के ट्रेडिंग रेंज (24,150–24,300) से साफ तौर पर बाहर निकलना होगा। मंथली F&O एक्सपायरी से पहले बाजार में सावधानी का माहौल होने के बावजूद, मोमेंटम इंडिकेटर्स ने अंडरलाइंग मोमेंटम में कुछ सुधार के संकेत दिए हैं। अगर इंडेक्स 24,300 के ऊपर मजबूती दिखाता है तो यह 24,500 की ओर बढ़ सकता है। वहीं,अगर यह 24,150–24,100 के नीचे गिरता है तो 24,000 के स्तर की ओर गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।
उधर बैंक निफ्टी के 57,235 पर अपने 50-डे EMA को बनाए रखने की संभावना है,जो इस महीने क्लोजिंग बेसिस पर अच्छी तरह से टिका हुआ है। जानकारों के अनुसार,अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 57,000–56,700 की ओर जा सकता है,जबकि 57,900 के ऊपर जाने पर यह 58,250 की ओर बढ़ सकता है।
निफ्टी आउटलुक और रणनीति
ICICI सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ डेरिवेटिव्स एंड क्वांट रिसर्च, जय ठक्कर का कहना है कि निफ्टी पिछले हफ्ते और इस हफ्ते के पहले दिन भी गिरावट के साथ बंद हुआ,जिससे पता चलता है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव है। बैंक निफ्टी ऊंचे स्तरों से तेजी से गिरा,जिसका असर निफ्टी पर भी पड़ा। निफ्टी का सबसे ज्यादा पुट बेस 24,000 के स्तर पर है,जो इसे निचले स्तरों पर एक अहम सपोर्ट बनाता है,जबकि 24500 का स्तर तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। इसलिए,इंडेक्स के लिए निकट-अवधि की रेंज 24,000–24,500 है। जब तक इस रेंज से ब्रेकआउट नहीं होता,तब तक बाजार के साइडवेज रहने की संभावना है।
अब तक रोलओवर का स्तर ठीक-ठाक रहा है। पिछले शुक्रवार तक,पूरे मार्केट में रोलओवर 40 प्रतिशत था। जबकि सोमवार तक निफ्टी में गिरावट का रुख बना रहा। इससे पता चलता है कि FIIs शॉर्ट पोजीशन बढ़ा रहे हैं या उन्हें रोलओवर कर रहे हैं (कम से कम इंडेक्स में),क्योंकि हाल ही में नेट इंडेक्स शॉर्ट्स 1.5 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स से बढ़कर 2.10 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स हो गए हैं।
हालांकि,India VIX निचले स्तरों पर ट्रेड कर रहा है,लेकिन पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन में इसमें इंट्राडे उछाल देखा गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में ग्लोबल इक्विटी के लिए एक निगेटिव फैक्टर बनी हुई हैं। जब तक कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं होतीं,महंगाई का जोखिम इंडेक्स पर ऊपरी स्तरों पर दबाव बनाए रखता है।
अहम रेजिस्टेंस: 24,500
अहम सपोर्ट: 24,000
रणनीति: 24,100 के आस-पास गिरावट आने पर निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें। स्टॉप-लॉस 23,950 के नीचे रखें और टारगेट 24,400 व 24,500 रखें।
बैंक-निफ्टी आउटलुक और रणनीति
जय ठक्कर का कहना है कि निफ्टी की तरह ही बैंक निफ्टी भी एक दायरे में फंसा हुआ है। ऊपर की तरफ,58,000 स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा कॉल बेस है, जबकि स्विंग रेजिस्टेंस 58,500 पर है। नीचे की तरफ,57,000 स्ट्राइक पर सबसे ज़्यादा पुट ओपन इंटरेस्ट है,जिससे यह एक तत्काल सपोर्ट लेवल बन गया है, जबकि 56,000 अगला सपोर्ट लेवल है। ऐसे में इसका शॉर्ट-टर्म रेंज 57,000–58,000 है,जबकि मीडियम-टर्म रेंज 56,000–58,500 है। निफ्टी PSU बैंक नेगेटिव ट्रेंड के साथ ट्रेड कर रहे हैं और इनमें काफी संख्या में शॉर्ट पोजीशन बनी हैं। वहीं,पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन में प्राइवेट-सेक्टर बैंक इंडेक्स का प्रदर्शन PSU बैंक इंडेक्स से बेहतर रहा है। हालांकि एक्सिस बैंक और HDFC बैंक इसके अपवाद रहे हैं,क्योंकि बाकी ज्यादातर स्टॉक अपेक्षाकृत बेहतर ट्रेड कर रहे हैं। इसलिए,अगर बैंकिंग सेक्टर में शॉर्ट-कवरिंग होती है तो तेजी से ब्रेकआउट हो सकता है, जिससे इंडेक्स 60,000 और उससे ऊपर जा सकता है।
अहम रेजिस्टेंस: 58,000, 58,500
अहम सपोर्ट: 57,000
स्ट्रेटेजी: 58,000 के ऊपर बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,57,000 के नीचे स्टॉप-लॉस रखें और 60,000 का टारगेट रखें।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Gold Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बॉन्ड मार्केट में US ट्रेजरी के आने वाले कदमों का आकलन कर रहे हैं। यह आकलन एक अप्रत्याशित दखल के बाद हो रहा है जिसने फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।
COMEX गोल्ड में 1% यानी 46.90 की बड़ी बढ़त हुई और यह पिछले क्लोज 4,710.10 से बढ़कर 4,744.70 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, COMEX सिल्वर 1.26% या 0.861 बढ़कर 69.455 पर पहुंच गई, जबकि पिछला क्लोज 68.96 था।
ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-टर्म सरकारी कर्ज की बायबैक (वापसी खरीद) बढ़ाने के बाद लगातार चार सेशन में 7% से अधिक की बढ़त के साथ बुलियन की कीमत $4,680 प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।
इस अप्रत्याशित कदम ने कर्ज लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और डॉलर पर दबाव डाला है। जिससे सोना (जिसकी कीमत डॉलर में तय होती है) कई खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की अपनी तैयारी का संकेत दिया है, हालांकि सोमवार को उन्होंने कोई अतिरिक्त संकेत नहीं दिया।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि केविन वॉर्श शुक्रवार को सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल बैंक के चेयरमैन के तौर पर लगातार बनी हुई महंगाई पर फेडरल रिजर्व को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे।
US कर्ज की लागत को मैनेज करने के हालिया कदमों ने महंगाई और डॉलर की कमजोरी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे उस ‘डीबेसमेंट नैरेटिव’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट की धारणा) की वापसी का संकेत मिलता है, जिसने 2025 में सोने की जबरदस्त तेजी में योगदान दिया था।
सोने की इस उल्लेखनीय रिकवरी ने धातु को महत्वपूर्ण 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसे अक्सर तेजी का संकेत (बुलिश टेक्निकल इंडिकेटर) माना जाता है।
बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) से इस धातु की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) वाली खासियत को भी चुनौती मिल रही है। US ने ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बातचीत विफल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कनाडा के साथ व्यापारिक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Gold Rate Today in India: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते गोल्ड की चमक आज लगातार दूसरे दिन मजबूत हुई है तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी से चांदी पर दबाव दिखा। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की स्थिरता के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹890 और 22 कैरट वाला ₹810 महंगा हुआ है। 23 अगस्त की स्थिरता से पहले लगातार तीन दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट की शुद्धता वाला गोल्ड ₹8120 और 22 कैरट वाला ₹7450 महंगा हुआ है। अब आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 मजबूत हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी चमक फीकी हुई है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। एक किलो चांदी आज ₹100 सस्ती हुई है।
सिटीवाइज गोल्ड के भाव
देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…
| शहर | 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव | 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव | 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव |
| दिल्ली | ₹1,64,130 | ₹1,50,460 | ₹1,23,090 |
| मुंबई | ₹1,63,980 ं | ₹1,50,310 | ₹1,22,940 |
| कोलकाता | ₹1,63,980 | ₹1,50,310 | ₹1,22,940 |
| चेन्नई | ₹1,63,980 | ₹1,50,310 | ₹1,28,010 |
| बेंगलुरू | ₹1,63,980 | ₹1,50,310 | ₹1,22,940 |
| हैदराबाद | ₹1,63,980 | ₹1,50,310 | ₹1,22,940 |
| लखनऊ | ₹1,64,130 | ₹1,50,460 | ₹1,23,090 |
| पटना | ₹1,64,030 | ₹1,50,360 | ₹1,22,990 |
| जयपुर | ₹1,64,130 | ₹1,50,460 | ₹1,23,090 |
| अहमदाबाद | ₹1,64,030 | ₹1,50,360 | ₹1,22,990 |
तीन दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी
चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव कम हुए हैं। इन तीन दिनों की स्थिरता से पहले लगातार दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,500 ऊपर चढ़ी थी तो उससे भी एक दिन पहले 19 अगस्त को एक किलो चांदी ₹5000 नीचे आई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,59,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,75,100 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।
क्या कहना है एक्सपर्ट का
लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते घरेलू बाजार में सोना तेजी से ऊपर चढ़ा। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी है। स्पॉट गोल्ड $42.45 यानी करीब 1% बढ़कर प्रति औंस $4,646.54 पर पहुंच गया। वहीं चांदी प्रति औंस करीब $69 पर स्थिर रही।
एनालिस्ट्स के मुताबिक अब गोल्ड की चाल सिर्फ जियो-पॉलिटिकल टेंशन से नहीं तय होगी बल्कि महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) कायनात चेनवाला का कहना है कि पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। मार्केट की नजर इस बात पर रहेगी कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा रिस्क पैदा होता है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

