अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अमेरिका के पास खुद करीब 46 अरब बैरल तेल है। भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के 40 साल के ऑयल इम्पोर्ट के बराबर है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह काम वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। इस साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55% हिस्सा मिलेगा। हालांकि, इस निजी कंपनी का नाम अभी नहीं बताया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है। वेनेजुएला में 300 अरब बैरल तेल मौजूद वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वहां 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कर रहे हैं, वह वेनेजुएला के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है। वेनेजुएला के पास इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वहां उत्पादन काफी कम है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है। अमेरिका के हिस्से में कितना तेल आएगा इस डील में सबसे अहम बात अभी भी साफ नहीं है। अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल का मालिकाना हक मिलेगा या सिर्फ उसके उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह समझना जरूरी है। अभी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका को साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन का 55% हिस्सा मिलेगा। लेकिन इस काम में शामिल निजी कंपनी का नाम और समझौते की पूरी शर्तें अभी सामने नहीं आई हैं। इसलिए 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का कंट्रोल होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा तेल अमेरिका का हो गया है। असल में अमेरिका को कितना अधिकार मिलेगा, यह डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही साफ होगा। 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश राष्ट्रपति रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इसमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इस पूरे काम से वेनेजुएला की सरकार को आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अपने बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहता है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले रिश्ते अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते जनवरी में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदल गए। डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और वेनेजुएला का तेल इसका सबसे अहम मुद्दा बन गया। इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग के नियम बदले। नए नियमों से विदेशी कंपनियों को ज्यादा अधिकार मिले और अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल गया। वेनेजुएला के पास सबसे ज्यादा तेल, फिर भी गरीब वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। देश की सरकारी तेल कंपनी कमजोर हुई, तेल उद्योग में निवेश कम हुआ और उत्पादन लगातार गिरा। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों ने भी तेल कारोबार को नुकसान पहुंचाया। यानी जमीन के नीचे तेल बहुत है, लेकिन उसे निकालने, बेचने और उससे कमाई करने की क्षमता कमजोर हो गई। इसके साथ ही देश में कई साल तक महंगाई, आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता रही। इसका सीधा असर आम लोगों की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा। इस डील से OPEC को चुनौती OPEC तेल उत्पादक देशों का समूह है। इसके सदस्य तेल का उत्पादन घटाकर या बढ़ाकर बाजार में सप्लाई को प्रभावित करते हैं। सप्लाई कम हो तो कीमत बढ़ सकती है और ज्यादा तेल आने पर कीमत घट सकती है। वेनेजुएला भी OPEC का सदस्य है। अगर वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ा और बाजार में ज्यादा तेल आया, तो तेल की कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डील के तुरंत बाद पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा। वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा। इसके अलावा ईरान युद्ध, OPEC के फैसले, दुनिया में तेल की मांग और दूसरे देशों का उत्पादन भी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। —————————– रिपोर्ट- वेनेजुएला का तेल भारत को देगा अमेरिका:ट्रम्प दुनिया की बड़ी ऑयल कंपनियों के अफसरों से मिले; रिलायंस भी तेल खरीद सकती है
अमेरिका, भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा सौदा किया है, जिसके तहत इसे 6500 करोड़ बैरल से अधिक के प्रूवेन यानी मिल चुके तेल भंडार पर मेजॉरिटी कंट्रोल मिलेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार तड़के यह दावा किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस सौदे के बारे में ऐलान किया। ट्रंप ने दुनिया के इतिहास में इसे अब तक की सबसे बड़ी ऑयल डील कहा है और कहा कि इससे अमेरिका का तेल भंडार दोगुना से अधिक हो जाएगा। हालांकि उन्होंने समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इसके बदले वेनेजुएला को क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को और मजबूत करेगा।
दावा: अमेरिका और वेनेजुएला, दोनों के लिए फायदे का सौदा
ट्रंप के अनुसार अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ मिलकर निजी कंपनियों की साझेदारी के जरिए इस सौदे पर बातचीत की। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को अमेरिकी और वेनेजुएला के लोगों के लिए बहुत बड़ी जीत बताया। ट्रंप कीके ऐलान के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व नाम Twitter) पर उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिका को स्थिर और कम लागत वाला तेल मिलेगा, तो वेनेजुएला में लगभग $10 हजार करोड़ के निजी निवेश, हजारों अच्छी सैलरी वाली नौकरियां और देश की अर्थव्यवस्था को फिर से ट्रैक पर लाने में मदद मिल सकती है।
वेनेजुएला में बढ़ रहा अमेरिका का दखल!
दोनों देशों के बीच यह समझौता वेनेजुएला में महीनों तक चली अमेरिका की गहरी दखलंदाजी के बाद हुआ है जोकि जनवरी में लंबे समय से राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो को हटाए जाने और उनके पकड़े जाने के बाद शुरू हुई थी। मादुरो के उपराष्ट्रपति रहे रोड्रिगेज ने फिर अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर कमान संभाली और अमेरिका ने उनकी सरकार के साथ बेहतर साझेदारी की उम्मीद की। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा प्रूवेन तेल भंडार है, जिसका अनुमान लगभग 30 हजार करोड़ बैरल है।
एक्सियोस ने गुरुवार को दो अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल के ऐसे 12 प्रोडक्टिव ऑयल फील्ड्स के बारे में बातचीत चल रही थी, जिनमें लगभग 9000 करोड़ बैरल का पक्का भंडार है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मालिकाना हक के बदले इन जगहों को डेवलर करेंगी, तो वेनेजुएला को तेल से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा मिलेगा। वेनेजुएला में अभी हर दिन लगभग 12.5 लाख बैरल कच्चा तेल निकलता है।
खत्म हुआ इंतजार, जैक्सन होल की बैठक में अमेरिकी फेड ने महंगाई को लेकर जताई चिंता
अमेरिका के फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श की स्पीच के बाद अमेरिकी शेयर मार्केट में कोहराम मच गया। उनके बयान से निवेशकों को यह संकेत मिला कि फेड की कोशिश महंगाई से निपटने की है। इसी बीच ट्रेडर्स ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार पर दांव लगाना शुरू कर दिया। केविन वार्श के स्पीच के चलते अमेरिका के अहम इंडेक्स लगातार बढ़त और गिरावट के बीच झूलते रहे। हालांकि इक्विटी मार्केट में कुछ हद तक स्थिरता दिखाई दी। ऐतिहासिक रूप से फेड चेयर का जैक्सन होल भाषण शेयर बाजार के लिए बहुत बड़ा ट्रिगर नहीं रहा है। वर्ष 2000 से अब तक इस स्पीच के बाद अगले हफ्ते इंडेक्स में औसतन सिर्फ 0.4% का बदलाव हुआ है। हालांकि अगर यह स्पीच मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव से पहले आता है, तो इसका असर अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या है अमेरिकी मार्केट में स्थिति
अमेरिका का अहम इंडेक्स एसएंडपी 500 (S&P500) 0.2% टूट गया। इंडस्ट्रियल और आईटी शेयरों में गिरावट ने इस पर दबाव डाला। सेमीकंडक्टर इंडेक्स में शामिल लगभग सभी कंपनियों के शेयर गिरे, और सबसे अधिक गिरावट एनविडिया (Nvidia) में रही। अमेरिका का टेक-हैवी नास्डाक 100 (Nasdaq 100) भी 0.7% टूट गया और शुरुआती बढ़त गंवाते हुए डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) भी थोड़ा नीचे आया। Cboe Volatility Index में गिरावट जारी रही और 14 से थोड़ा ही ऊपर है। साथ ही तेल निकालने वाले देशों के संगठन ओपेक (OPEC) से वेनेजुएला बाहर निकलने पर विचार कर रहा है, जिससे तेल की कीमतें गिर गई।
क्या कहना है केविन वार्श का
अमेरिकी फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वार्श ने आने वाले समय के लिए गाइडेंस यानी अनुमान को लेकर अपनी अनिच्छा दोहराई। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जिसमें मार्केट अपने अगले ट्रेड के लिए मुख्य रूप से फेड की तरफ देख रहे हों। उन्होंने कहा कि शांत फेड अपने उद्देश्यों को हासिल करने में अधिक सक्षम होगा और महंगाई को कंट्रोल करने के लिए अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने कहा कि महंगाई लंबे समय से जरूरत से ज्यादा ऊंची बनी हुई है।
क्या कहना है एक्सपर्ट का
सिटी वेल्थ की चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर केट मूर ने ब्लूमबर्ग टीवी के एक इंटरव्यू में कहा कि निवेशकों को अर्थव्यवस्था, मुनाफे और 2% महंगाई के लक्ष्य को लेकर अमेरिकी फेड की प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी चाहिए थे और उन्हें यह मिल गई, जिसके चलते इक्विटी मार्केट में कुछ स्थिरता दिख रही है।
खत्म हुआ इंतजार, जैक्सन होल की बैठक में फेड ने महंगाई को लेकर जताई यह चिंता
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LPG Price 29 August 2026: 29 अगस्त 2026 को देशभर में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों को लेकर तेल कंपनियों ने कोई बदलाव नहीं किया है। यानी आज ग्राहकों को सिलेंडर खरीदने के लिए पिछले महीने जितनी ही कीमत चुकानी होगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत बड़े शहरों में LPG के मौजूदा रेट फिलहाल स्थिर हैं। घरेलू रसोई गैस की कीमत लंबे समय से लोगों के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है, खासकर तब जब महंगाई का असर लगातार घरेलू बजट पर दिखाई दे रहा है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले होटल, रेस्टोरेंट और कारोबारियों की नजर भी कीमतों पर बनी रहती है।
ऐसे में आज LPG के दामों में बदलाव नहीं होने से उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर ₹942 और मुंबई में ₹941.50 पर उपलब्ध है। जानिए देश के प्रमुख शहरों में आज LPG के क्या रेट हैं।
आपके शहर में LPG सिलेंडर की कीमत कितनी है?
LPG सिलेंडर के दाम हर शहर में अलग-अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन और अन्य खर्चों के कारण एक ही घरेलू सिलेंडर की कीमत में शहर के अनुसार अंतर देखने को मिलता है। इसलिए सिलेंडर बुक करने से पहले अपने शहर का ताजा LPG रेट जरूर चेक कर लें।
| शहर | घरेलू LPG (14.2 किलो) | कमर्शियल LPG (19 किलो) |
|---|---|---|
| कोलकाता | ₹968.00 | ₹2,872.50 |
| मुंबई | ₹941.50 | ₹2,691.50 |
| चेन्नई | ₹957.50 | ₹2,906.00 |
| गुड़गांव | ₹950.50 | ₹2,755.00 |
| नोएडा | ₹939.50 | ₹2,738.00 |
| बैंगलोर | ₹944.50 | ₹2,821.00 |
| भुवनेश्वर | ₹968.00 | ₹2,908.00 |
| चंडीगढ़ | ₹951.50 | ₹2,760.00 |
| हैदराबाद | ₹994.00 | ₹2,985.00 |
| जयपुर | ₹945.50 | ₹2,765.50 |
| लखनऊ | ₹979.50 | ₹2,860.50 |
| पटना | ₹1,031.50 | ₹3,018.00 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹951.00 | — |
जून में महंगा हुआ था घरेलू सिलेंडर
घरेलू LPG की कीमत में आखिरी बदलाव जून 2026 में हुआ था। उस समय तेल कंपनियों ने प्रति सिलेंडर ₹29 की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गई थी और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अगस्त में कमर्शियल LPG हुआ था सस्ता
कमर्शियल LPG इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को 1 अगस्त को राहत मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बाद तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम अलग-अलग शहरों में करीब ₹192 से ₹209 तक घटाए थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी परेशानी
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 25 अगस्त को इस रास्ते से सिर्फ पांच जहाज गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या सात थी। इस रूट में व्यवधान से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है।
ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमला
इस बीच ओमान के तट के पास तेल टैंकर AL SALAM II पर अज्ञात मिसाइल या प्रोजेक्टाइल से हमले की सूचना सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में विस्फोट हुआ और आग लग गई। नुकसान के चलते टैंकर आगे यात्रा करने की स्थिति में नहीं है। हमले को लेकर ईरान के IRGC पर संदेह जताया गया है, हालांकि जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
LPG की कीमतों पर आगे भी रहेगी नजर
घरेलू LPG के दाम फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल-गैस बाजार और मध्य-पूर्व की स्थिति पर तेल कंपनियों की नजर बनी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में LPG कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Petrol Diesel Price Today: आज सस्ता हुआ या महंगा? जानें पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श का कहना है कि अमेरिका का लेबर मार्केट अब भी मजबूत बना हुआ है और बेरोजगारी की मौजूदा रफ्तार लगभग फुल एंप्लॉयमेंट की स्थिति के हिसाब से है। उनका कहना है कि रोजगार के मोर्चे पर दोनों तरफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था अच्छा परफॉर्म कर रही है। अमेरिका में बेरोजगारी दर अभी 4.1% है जोकि फुल एंप्लॉयमेंट से जुड़ी परिस्थितियों के मुताबिक ही है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि महंगाई अभी भी पॉलिसीमेकर्स के लिए चिंता की बात बनी हुई है। उन्होंने ये बातें शुक्रवार को फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ कैनसस सिटी के एनुअल जैक्सन होल सिम्पोजियम में कही।
महंगाई को लेकर क्या है आशंका
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख ने रोजगार के मोर्चे पर इकॉनमी की सेहत को बेहतर तो बताया है लेकिन महंगाई को लेकर सतर्क भी किया है। उन्होंने कहा कि कीमतों का दबाव अभी भी ऊंचे लेवल पर बना हुआ है। उन्होंने महंगाई के आंकड़ों को और अधिक चिंताजनक बताया और कहा कि मौजूदा वित्तीय परिस्थितियां काफी हद तक सख्त है या नहीं, इस पर कु कहना उनके लिए मुश्किल होगा। ऐसे में इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि लेबर मार्केट में स्थिरता के संकेतों के बावजूद फेडरल रिजर्व की महंगाई की रफ्तार पर कड़ी नजर बनी रहेगी।
अर्थव्यवस्था पर AI को बढ़ते असर पर भी जोर
केविन वार्श ने अर्थव्यवस्था पर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते असर पर भी जोर दिया। उन्होंने अभी के समय को इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। केविन के मुताबिक एआई आने वाले वर्षों में प्रोडक्टिविटी, आर्थिक विकास और काम की प्रकृति को बड़े स्तर पर बदल सकती है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में केविन वार्श के प्रमुख बनने के बाद से फेड ने अर्थव्यवस्था पर एआई के आर्थिक असर की स्टडी तेज कर दी है। इसके लिए एक खास टास्क फोर्स बनाई गई है, जो यह जांच रही है कि यह प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी, रोजगार के रुझानों और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर किस तरह असर डाल सकता है।
CNG Price: दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सीएनजी (CNG) का इस्तेमाल करने वालों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में सीएनजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें आज शनिवार 29 अगस्त को सुबह 6 बजे से प्रभावी हो गई हैं। कंपनी ने सीएनजी की दरों में प्रति किलोग्राम 3.89 रुपये का इजाफा किया है। इससे निजी कार मालिकों के साथ-साथ ऑटो, कैब और दूसरी कमर्शियल गाड़ियां चलाने वालों को झटका लगा है।
जानिए दिल्ली और आसपास के शहरों में क्या है सीएनजी का नया रेट
आईजीएल द्वारा की गई इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत ₹83.09 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलोग्राम हो गई है। इससे पहले 17 मई को सीएनजी की कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया था। आज से लागू हुई ₹3.89 प्रति किलोग्राम की वृद्धि इस वर्ष की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। सीएनजी की कीमतें बढ़ने का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले आम लोगों और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के किराए पर पड़ने की संभावना है।
क्यों बढ़ाए गए सीएनजी के दाम? आईजीएल ने बताई वजह
IGL ने शुक्रवार देर रात जारी एक बयान में सीएनजी की कीमतों में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की बढ़ती कीमतों को बताया है। कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल लेबल पर एलएनजी के दामों में तेज उछाल आया है।
आईजीएल के मुताबिक सीएनजी सप्लाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्राकृतिक गैस का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्टेट LNG से आता है। जब से पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ है तब से स्पॉट मार्केट में एलएनजी की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और इनपुट कॉस्ट का असर
कंपनी के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलएनजी की ऊंची कीमतों और इनपुट गैस कॉस्ट पर पड़ रहे असर को देखते हुए फैसला लिया गया है। आईजीएल ने कहा है कि गैस की बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट की भरपाई आंशिक रूप से करने के लिए प्रति किलोग्राम ₹3.89 कीमत बढ़ाना जरूरी था।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट में यह तेजी ईरान युद्ध और ग्लोबल ऑयल शिपमेंट के मेन समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आने वाली अड़चनों के बाद से ही देखी जा रही है। इस साल फरवरी के अंत से ही क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रूड और गैस की दरों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी इतनी नहीं घटी है कि फेड निश्चिंत हो सके। जब तक महंगाई के 2% लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने का भरोसा नहीं होता, तब तक फेड को काम करना होगा।
यह मई में फेड चेयर बनने के बाद वार्श का पहला बड़ा भाषण था। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिका के व्योमिंग में जैक्सन होल में फेड के सालाना सम्मेलन में यह बात कही। वार्श ने कहा कि 2% का महंगाई लक्ष्य तय है। फेड इसी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करेगा। उनके मुताबिक, कीमतों में स्थिरता लाना फेड की जिम्मेदारी है।
महंगाई में अभी बड़ा सुधार नहीं
वार्श ने कहा कि गर्मियों में PCE और CPI के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि महंगाई की मूल स्थिति में बड़ा सुधार आ गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी भी 2% से ऊपर है। इसलिए फिलहाल फेड का मुख्य फोकस कीमतों पर होना चाहिए।
ब्याज दर है फेड का बड़ा हथियार
वार्श के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय स्थितियां अभी बहुत सख्त नहीं हैं। ऐसे में ब्याज दर फेड का सबसे अहम हथियार है। उन्होंने कहा कि महंगाई अपने आप 2% तक नहीं आएगी। इसे स्थिर करना फेड की जिम्मेदारी है।
ब्याज दर बढ़ाने पर बंटी राय
अब बड़ा सवाल ब्याज दरों को लेकर है। अर्थशास्त्रियों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि महंगाई को काबू करने के लिए आने वाले महीनों में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
जुलाई की बैठक में फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। हालांकि, कई अधिकारियों ने दर बढ़ाने का समर्थन किया था। बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेड को नीति और सख्त करनी पड़ सकती है।
पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हुई थी आलोचना
जुलाई की बैठक के बाद वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना भी हुई थी। आलोचकों का कहना था कि वह दरें स्थिर रखने की वजह साफ तरीके से नहीं बता पाए।
उसके बाद निवेशकों ने लंबी अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड बेचने शुरू किए। इससे उनकी यील्ड करीब दो दशक के उच्च स्तर तक पहुंच गई। इसे फेड के 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे में कमी के संकेत के तौर पर देखा गया।
अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत
हालांकि, जुलाई की बैठक के बाद कुछ आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिले हैं। जुलाई में रिटेल बिक्री एक साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा गिरी। कोर महंगाई भी सीमित रही। कंपनियों ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियां घटाईं। इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी कटौती की गई।
इन आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम हुई है। शुक्रवार सुबह फेडरल फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 36% थी। जुलाई के अंत में यह 70% से ज्यादा थी।
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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Mumbai milk Price: देश में अभी चीनी की महंगाई से जहां लोग उबरे नहीं हैं, वहीं अब 1 सितंबर, 2026 से दूध की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं। जी हां, दरअसल मुंबई के स्थानीय दूध उत्पादकों ने 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद से आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।
फिलहाल, तबेले के दूध की कीमत अभी 93 रुपये प्रति लीटर है, जो बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हो रही है और इससे उन ग्राहकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है जो नियमित रूप से ताजा डेयरी दूध खरीदते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दूध की नई कीमतें 1 सितंबर, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक लागू रहेंगी।
तबेले के दूध की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
दूध उत्पादकों ने इस बढ़ोतरी की वजह डेयरी पशुओं के रखरखाव में आने वाले ज्यादा खर्च और पशुओं के चारे व दाने की कीमतों में भारी वृद्धि को बताया है।
उत्पादकों का कहना है कि बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण डेयरी फार्मों के लिए 93 रुपये प्रति लीटर की मौजूदा दर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। अनाज समेत पशुओं के दाने की कई चीजों की कीमतें 25% तक बढ़ गई हैं, जबकि महंगे चारे और खली (oil cakes) ने दूध उत्पादन की लागत को और बढ़ा दिया है।
लागत लगातार बढ़ने के कारण, दूध उत्पादकों का कहना है कि डेयरी का कामकाज जारी रखने के लिए कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया था।
मुंबई के परिवारों पर असर
दूध के दाम में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी से उन परिवारों के बजट पर असर पड़ने की उम्मीद है जो नियमित रूप से तबेले का दूध खरीदते हैं। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जब आमतौर पर घरों में खर्च बढ़ जाता है।
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Gold Price Today: सोने की कीमत में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। दिल्ली के बाजार में 24 कैरेट 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹3,300 टूटकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसमें सभी टैक्स शामिल हैं। गुरुवार को इसका भाव ₹1,65,700 था।
तीन दिन में सोना ₹4,700 यानी करीब 3% सस्ता हो चुका है। 25 अगस्त को इसका भाव ₹1,67,100 प्रति 10 ग्राम था। हाल की तेजी के बाद अब कारोबारी मुनाफावसूली कर रहे हैं।
चांदी भी ₹5,000 सस्ती
चांदी में भी शुक्रवार को गिरावट रही। घरेलू बाजार में इसका भाव ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ₹2,50,500 प्रति किलो थी।
LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जितिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर 99.15 के स्तर से ऊपर चला गया। इसका असर सोने पर पड़ा। हाल की तेजी के बाद कारोबारी लगातार तीसरे दिन मुनाफावसूली कर रहे हैं।
कस्टम ड्यूटी घटने की खबर का भी असर
घरेलू बाजार में कस्टम ड्यूटी घटाने की खबरों से भी सोने पर दबाव आया। बढ़ती तस्करी के बीच सरकार कस्टम ड्यूटी घटा सकती है। ऐसी खबरें बाजार में चल रही हैं।
Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, इन खबरों से घरेलू सोने की कीमत पर दबाव बढ़ा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों में अंतर भी बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड मामूली गिरावट के साथ $4,599.70 प्रति औंस पर था। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वार्श के जैक्सन होल सिम्पोजियम में होने वाले भाषण पर है।
Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, बाजार वार्श के बयान पर नजर रख रहा है। महंगाई को लेकर उनका रुख अहम होगा। ऊंची यील्ड के बीच बाजार को उनके भाषण से संकेत मिलने की उम्मीद है।
बाजार में फिलहाल सख्त रुख वाले बयान की उम्मीद है। अगर वार्श निवेशकों को भरोसा नहीं दिला पाते हैं, तो डॉलर कमजोर हो सकता है। ऐसे में सोने को फिर तेजी मिल सकती है।
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Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत $4,600 प्रति औंस के आसपास स्थिर रही। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के एक अहम भाषण की उम्मीद में, जब निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य का आकलन कर रहे थे।
इस खबर को लिखते समय, COMEX गोल्ड $4,650.60 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग $4,656 से कम थी। COMEX पिछले दिन के 69.350 से बढ़कर 69.400 पर पहुंच गया।
पिछले सेशन में 0.2% की बढ़त के बाद इसमें बहुत कम हलचल हुई, लेकिन यह 1999 के बाद से अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त के लिए तैयार है। बॉन्ड मार्केट में अमेरिकी ट्रेजरी के अप्रत्याशित दखल से इस मेटल को नई गति मिली। इससे ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट से लाभ कमाने की रणनीति) में फिर से दिलचस्पी जगी, जिसने पिछले साल सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल को बढ़ावा दिया था।
निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि शुक्रवार को चेयरमैन के तौर पर अपना पहला बड़ा भाषण देते समय वॉर्श महंगाई पर फेड का क्या रुख बताते हैं। सेंट्रल बैंक के सालाना जैक्सन होल सिम्पोजियम में होने वाला यह बहुप्रतीक्षित भाषण वॉर्श को अपने आर्थिक विचारों के बारे में पारदर्शिता की कमी को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देने का मौका देगा।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत को लेकर अर्थशास्त्री और नीति-निर्माता बंटे हुए हैं, जो बिना रिटर्न (यील्ड) देने वाले सोने के लिए एक चुनौती बन सकता है। हालांकि फेड अधिकारियों ने जुलाई में उधार लेने की लागत (ब्याज दरें) को स्थिर रखा, लेकिन तीन सदस्यों ने असहमति जताई और क्वार्टर-पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की वकालत की।
सोने की कीमतों में आई जबरदस्त रिकवरी ( जिसमें यह मेटल अगस्त में लगभग 14% बढ़ने की राह पर है) को निवेशकों की विविध भागीदारी से बल मिला है।
हालांकि सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने की संभावना घटकर सिर्फ़ 34% रह गई है, लेकिन CME फेडवॉच टूल के अनुसार, दिसंबर तक बढ़ोतरी की संभावना 74% बनी हुई है।
आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरें सोने के आकर्षण को कम कर देती हैं, क्योंकि इस मेटल से खुद कोई रिटर्न (यील्ड) नहीं मिलता है।
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