ट्रम्प के ‘शांति समझौते’ के दावे पर ईरान का पलटवार, कहा- नहीं हो रही कोई बातचीत

US Iran peace deal missed track Photo  : AI Generated

Iran US Talks News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच जुबानी जंग और तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ट्रम्प ने ईरान पर हमले को अंतिम समय में टालते हुए दावा किया था कि दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू होने जा रही है। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बैठक या बातचीत की कोई योजना नहीं है। इस कूटनीतिक खींचतान के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

ट्रम्प का दावा- हम बातचीत कर रहे हैं

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने ईरान पर हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया है क्योंकि बातचीत का दौर शुरू होने वाला है। ट्रम्प ने दावा किया कि वे लोगों की जान लेने के बजाय समझौता करना पसंद करेंगे। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान के नेतृत्व को 'अत्यधिक कपटी' बताते हुए कहा कि ईरान ने ही बैठक की मांग की थी। ALSO READ: US-Iran War : ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप तो तेहरान ने कसा तंज, रुबियो बोले- अब चुकानी होगी ‘बहुत बड़ी कीमत’; इराक में ड्रोन अटैक से आग

क्या कहा ईरान ने?

दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रम्प के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही किसी बैठक का कार्यक्रम तय है। उन्होंने बताया कि ईरान के अधिकांश वार्ताकार देश में ही मौजूद हैं और विदेश मंत्री अब्बास अराघची इराक में धार्मिक यात्रा पर हैं। ईरान के मुताबिक अमेरिका के साथ कोई वार्ता प्रस्तावित नहीं है। फिलहाल केवल ओमान के साथ 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' के प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है। ALSO READ: ट्रंप कर रहे ईरान में भीषण हमले की तैयारी, अपने नागरिकों को दी यह सलाह, धमकी पर क्‍या बोला तेहरान?

क्या है ट्रंप का दावा?

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से नियंत्रण है, जहां से दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई समझौता या ईरान का पूर्ण आत्मसमर्पण नहीं हो जाता, तब तक वहां से कुछ भी नहीं गुजर सकता। दूसरी ओर, ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना अधिकार क्षेत्र बनाए रखने पर अड़ा हुआ है। हालांकि सैन्य कार्रवाई के टलने की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 5% गिरकर 83.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT निफ्टी से मिल रहे अच्छे संकेतों को देखते हुए लगता है कि 3 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स मजबूती के साथ खुल सकते हैं। GIFT निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,565 के आसपास हरे निशान में कारोबार कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

31 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने लगातार तीसरे सेशन में अपनी बढ़त जारी रखी। FMCG और IT को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर में हुई व्यापक खरीदारी के दम पर निफ्टी ने 24,400 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 166.49 अंक या 0.21 प्रतिशत बढ़कर 78,094.64 पर और निफ्टी 66.45 अंक या 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। इस हफ्ते BSE सेंसेक्स और निफ्टी में 2.6% की बढ़त हुई,जिससे पिछले हफ्ते हुए सभी नुकसान की भरपाई हो गई और हफ्ते की क्लोजिंग मजबूती के साथ हुई।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार चौथे सत्र में भी खरीदारी जारी रखी और 31 जुलाई को ₹277 करोड़ के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी बाजार को सहारा दिया और ₹2,260 करोड़ के शेयर खरीदकर वे भी नेट बॉयर बन गए।

क्रूड में नरमी से गिफ्ट निफ्टी जोश में

क्रूड में नरमी से गिफ्ट निफ्टी जोश में दिख रहा है। इसमें 125 अंकों की तेजी देखने को मिल रही है। US फ्यूचर्स भी ऊपर कारोबार कर रहा है। वहीं, 4.74 फीसदी तक जाने के बाद US बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है और यह 4.7 के नीचे फिसल गया है। इधर शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी रौनक दिखी है। हालांकि एशियाई बाजार दबाव में दिख रहे हैं। कोस्पी 5 फीसदी तो जापान का बाजार निक्केई 3 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।

अनुमान से कमजोर रहे ITC के नतीजे

आईटीसी के पहले तिमाही के स्टैंडअलोन नतीजे अनुमान से कमजोर रहे हैं। मार्जिन और ईबीआईटीडीए में 27% की गिरावट आई है। रेवेन्यू में भी 14% से ज्यादा की गिरावट आई है। मार्जिन पर भी दबाव दिखा है। एक्साइज टैक्स का बढ़ोतरी पर असर दिखा है। एफएमसीजी कारोबार की रेवेन्यू अनुमान के करीब रही है।

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कमजोर रहे मारुति के नतीजे

मारुति के नतीजे कमजोर रहे हैं। पहली तिमाही में कंपनी की आय 36 फीसदी बढ़ी है। लेकिन मुनाफा 11 फीसदी घटा है। वेस्ट एशिया संकट की मार्जिन पर मार पड़ी है। मार्जिन करीब 400 बेसिस प्वाइंट घटकर 8 फीसदी तक आए हैं। महंगे कमोडिटी दामों का असर पड़ा है। हालांकि वॉल्यूम ऑलटाइम हाई पर रहा है।

डिवीज लैब्स के शानदार Q1 नतीजे

पहली तिमाही में डिवीज लैब्स ने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के मुनाफे में 66 फीसदी और रेवेन्यू में 28 फीसदी की बढ़त हुई है। मार्जिन में भी 10 फीसदी का तगड़ा उछाल आया है। तीनों आंकड़े अनुमान से कहीं अच्छे रहे हैं। वहीं ग्लेनमार्क फार्मा का प्रॉफिट 10 गुना से ज्यादा बढ़ा है। इसके रेवेन्यू में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके मार्जिन भी सुधरे हैं।

ऑटो कंपनियों के लिए शानदार रहा जुलाई

ऑटो कंपनियों के लिए जुलाई का महीना शानदार रहा है। सभी सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। मारुति की बिक्री 34% बढ़ी है। एंट्री-लेवल सेगमेंट में लगातार दूसरे महीने 90% बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हीरो मोटो,महिंद्रा और हुंडई की भी बिक्री जोरदार रही है।

जुलाई में रिकॉर्ड GST कलेक्शन

जुलाई में GST कलेक्शन ने नया रिकॉर्ड बनाया है। टैक्स कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है। इसमें पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली है।

बुधवार को मॉनेटरी पॉलिसी का एलान

ब्याज दरों पर आज RBI MPC की तीन दिवसीय बैठक शुरू होगी। बुधवार को मॉनेटरी पॉलिसी का एलान होगा। CNBC-TV18 के पोल के मुताबिक दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।

आज से 10 मिनट बढ़ेगा F&O मार्केट का क्लोजिंग-टाइमिंग

आज से F&O मार्केट का क्लोजिंग-टाइमिंग 10 मिनट बढ़ेगा। प्री-मार्केट की तर्ज पर मार्केट बंद होने से पहले 15 मिनट का स्पेशल क्लोजिंग ऑक्शन सेशन होगा। वायदा में शामिल शेयरों से इसकी शुरुआत हो रही है। स्टॉक फ्यूचर्स और इंडेक्स फ्यूचर्स में ट्रेडिंग तीन बजकर 40 मिनट तक होगी।

 

Asian Markets: एशिया बाजारों में दबाव, कोस्पी 3% टूटा, निक्केई 1.5% नीचे, क्रूड ऑयल में नरमी

Asian Markets: सोमवार को एशिया बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है। कोस्पी 4 फीसदी तो निक्केई 3 फीसदी नीचे है। निक्केई करीब 1.42 फीसदी की गिरावट के साथ 63,545.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.03फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.02 फीसदी चढ़कर 43,558.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.09 फीसदी की बढ़त के साथ 25,909.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी 3.25 फीसदी टूटा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.61 फीसदी की बढ़त के साथ 3,807.37 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

रविवार शाम को अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में बढ़त देखी गई क्योंकि निवेशक जुलाई की रोज़गार रिपोर्ट और अगस्त के पहले हफ़्ते में आने वाले कई कंपनियों के नतीजों (अर्निंग्स कैलेंडर) पर नज़र बनाए हुए थे। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में लगभग 200 अंक या 0.4% की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स 0.5% ऊपर चढ़े। नैस्डैक-100 फ्यूचर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया और 0.8% की बढ़त हासिल की।

वॉल स्ट्रीट ने शुक्रवार का सत्र सकारात्मक रुख के साथ समाप्त किया; डॉव जोन्स 276.97 अंक या 0.53% बढ़कर 52,485.03 पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.7% की बढ़त के साथ यह 7,489.72 पर पहुंचा, जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 1% चढ़कर 25,373.85 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स के रिकॉर्ड स्तर के करीब बंद होने के बाद, अब निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या हालिया तेज़ी को बढ़ावा देने वाले कारक बाज़ार में आगे भी बढ़त बनाए रखने में मदद करेंगे।

कच्चे तेल की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ़ नियोजित सैन्य हमले को रद्द करने और सोमवार से ईरान के साथ नई बातचीत शुरू करने की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई।

अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड शुरुआती एशियाई कारोबार में 7.3% तक गिर गया, जबकि जुलाई में इसमें लगभग 25% की तेजी आई थी , जो मार्च के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़त थी। इस बीच, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया।

अमेरिका-ईरान युद्ध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन में कहा कि उन्होंने ईरान पर बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य हमले को रद्द कर दिया है। ऐसा उन्होंने सऊदी अरब समेत मध्य-पूर्व के प्रमुख सहयोगियों के कहने पर किया, जिन्होंने अमेरिका से कूटनीतिक समाधान खोजने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन इस शर्त पर रद्द किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए जल्द समझौता करने की कोशिशें जारी रहेंगी, साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत में तेज़ी लाने को भी कहा।

आज सोने की कीमत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि सोमवार को ईरान के साथ फिर से बातचीत शुरू होगी, सोने की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई। इससे उम्मीद जगी कि लंबे समय से चल रहे इस टकराव में कोई समाधान निकलने से ऊर्जा-जनित महंगाई को कम करने में मदद मिल सकती है।

जुलाई में 1% की बढ़त के बाद सोने का कारोबार $4,070 प्रति औंस के आसपास हुआ; फरवरी के बाद यह सोने में पहली मासिक बढ़त थी।

हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, पांच महीने से ज़्यादा समय पहले शुरू हुए अमेरिका-ईरान टकराव के बाद से सोने की कीमत में 20% से ज़्यादा की गिरावट आई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं,जो सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों के लिए एक नकारात्मक बात है।

Stock Market Live Update: बाजार लगाएगा आज तेजी की छलांग, गिफ्ट निफ्टी दे रहा गैप-अप ओपनिंग के संकेत

Stock Market Live Update: बाजार लगाएगा आज तेजी की छलांग, गिफ्ट निफ्टी दे रहा गैप-अप ओपनिंग के संकेत

Stock Market Live Update: क्रूड में नरमी से गिफ्ट निफ्टी का जोश हाई है। गिफ्ट निफ्टी 125 अंकों की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है। वहीं US फ्यूचर्स भी ऊपर है। 4.74 परसेंट तक जाने के बाद US बॉन्ड यील्ड नरम पड़ी है और यह 4.7 के नीचे फिसली है। इधर शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी रौनक दिखी। हालांकि एशिया दबाव में नजर आ रहा है। कोस्पी 5 परसेंट तो जापान का बाजार निक्केई 3 परसेंट नीचे फिसला है।

रविवार को ट्रंप के यह कहने के बाद कि उन्होंने ईरान के खिलाफ़ तय हमले रद्द कर दिए हैं, तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने उनसे हमले न करने का अनुरोध किया था ताकि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंच सकें।

ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में “होरमुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़) को तुरंत, पूरी तरह और हर तरह से खोलने” का प्रावधान होगा और इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे का भी समाधान होगा। ब्रेंट क्रूड की कीमत $3.52 गिरकर $84.41 प्रति बैरल हो गई, जबकि U.S. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत $3.49 गिरकर $81.18 हो गई।

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

Silver Price Outlook: इस साल चांदी ने निवेशकों को निराश किया है। साल की शुरुआत से अब तक इसकी कीमत करीब 23% गिर चुकी है। सिर्फ जून महीने में ही इसमें 22% की बड़ी गिरावट आई। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। भारत में इसका भाव करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो है। इसका मतलब है कि इस साल चांदी ₹65,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।

हालांकि, पिछले एक साल में चांदी ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। लेकिन अब कीमतें दिसंबर 2025 के स्तर के आसपास लौट आई हैं। सवाल यह है कि आखिर चांदी पर दबाव क्यों बना हुआ है?

तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी वजह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा है। इससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और कीमतें चढ़ गईं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 86 डॉलर प्रति बैरल पर है, जो युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल महंगा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और दुनिया भर के बाजारों पर दबाव आएगा।

फेड की ब्याज दरें क्यों हैं अहम?

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। ऐसे समय में निवेशक सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट छोड़कर डॉलर आधारित निवेश की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहता है।

चांदी सोने से ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली

चांदी की कीमतें सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इसकी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड जैसे सेक्टरों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग में थोड़ा भी बदलाव कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।

गोल्ड सिल्वर रेशियो क्या होता है

जून 2026 में जब सोना 4,000-4,060 डॉलर प्रति औंस के बीच था, तब चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस पर थी। उस समय गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 67 था। इससे पहले मई में यह 55 और जनवरी में 50 तक आ गया था।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो बताता है कि 1 औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी चाहिए। इसे सोने की कीमत को चांदी की कीमत से भाग देकर निकाला जाता है। अगर रेशियो 75 या उससे ज्यादा हो, तो इसका मतलब माना जाता है कि चांदी सोने के मुकाबले सस्ती है। वहीं, अगर यह 50-60 या उससे नीचे हो, तो सोना सस्ता माना जाता है।

क्या अभी चांदी सस्ती है?

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेन्द्र यादव का कहना है कि 70 का रेशियो अपने लंबे समय के औसत के करीब है। यह बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी चांदी सोने के मुकाबले थोड़ी सस्ती नजर आती है। खासकर तब, जब औद्योगिक मांग मजबूत बनी रहे। भारत में दिसंबर 2025 से चांदी की कीमत लगातार ₹2 लाख प्रति किलो से ऊपर बनी हुई है।

आगे किस धातु में ज्यादा दम?

निरपेन्द्र यादव का मानना है कि फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेशियो 65 से 75 के बीच रह सकता है। यह काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर फेड ब्याज दरें घटाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार आता है, तो चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे Gold-Silver Ratio घटकर 60-65 तक आ सकता है।

वहीं, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, मंदी का खतरा गहराता है या निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं, तो सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में यह रेशियो 70 से ऊपर बना रह सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में सिर्फ सोना या सिर्फ चांदी चुनने के बजाय दोनों में संतुलित निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

अगर आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है और आप कम जोखिम लेना चाहते हैं, तो सोना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं और लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो धीरे-धीरे चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से चांदी में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है।

Gold Price Today: अगस्त के पहले दिन सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का बढ़ गया भाव

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Ethanol Petrol Row: ‘…तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर होती’; एथेनॉल विवाद पर सरकार का बड़ा दावा

Ethanol Blending E20 Petrol Row: पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम का बचाव करते हुए दावा किया है जब ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $135 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने फ्यूल में एथेनॉल नहीं मिलाया होता, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर होती। मंत्रालय ने कहा कि लेकिन इसके बजाय ग्राहकों को ₹94.77 प्रति लीटर चुकाना पड़ा। दरअसल एथेनॉल पहले से तय कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदा गया था। इसने क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के असर से रिटेल कीमतों को बचाए रखने में मदद की, जिससे संकट के चरम पर लगभग ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई।

सरकार ने 28 फरवरी को वेस्ट एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद लगभग 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। फिर मई में उन्हें 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया। दिल्ली में स्टैंडर्ड E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत अब ₹102.12 प्रति लीटर है। जबकि 100-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत ₹169 है। मंत्रालय ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि गरीबों के लिए अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा था, या इस प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए सब्सिडी वाले FCI चावल का इस्तेमाल किया जा रहा था।

एफिशिएंसी में 2-6% की कमी!

फ्यूल एफिशिएंसी के सवाल पर सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में ARAI, SIAM और IOC की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि E10 फ्यूल के लिए डिजाइन किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E20 पर चलने पर वाहन की कैटेगरी और उम्र के आधार पर एफिशिएंसी में 2-6% की कमी आ सकती है। मंत्रालय ने पहले 20 जुलाई को राज्यसभा को बताया था कि ऐसे वाहनों में यह कमी लगभग 3-5% तक सीमित है।

दोनों मंत्रालयों ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया के माध्यम से शुरू किया गया था, जिसमें प्रोडक्शन कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने के साथ-साथ ब्लेंडिंग का स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि E20 पर स्विच करने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, गाड़ी चलाने में आसानी, मटीरियल की अनुकूलता और उत्सर्जन पर असर की जांच-परख के बाद लिया गया।

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इस प्रक्रिया में वाहन बनाने वाली कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और चीनी एवं अनाज उद्योगों से भी सलाह-मशविरा किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि लैब स्टडीज और असल दुनिया के डेटा से पता चला है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। साथ ही, 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ब्लेंड्स पर चल चुकी हैं। इनमें एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना 300 रुपये महंगा, चांदी की कीमतें स्थिर

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में 31 जुलाई को 300 रुपये इजाफा हुआ। चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। रिटेलर्स और ज्वेलर्सी की खरीदारी से सोने को सपोर्ट मिला। सोने की कीमत 1,48,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुईं। चांदी 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.18 फीसदी गिरकर 4,055 डॉलर प्रति औंस था। चांदी भी 2 फीसदी की गिरावट के साथ 57.98 डॉलर प्रति औंस रही। कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चेनवाला ने कहा, “गुरुवार रात के लेवल से कीमत में नरमी आई है। यह 4,060 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। सिल्वर में भी नरमी दिखी है।”

सोने की कीमतों पर दबाव की दो वजहें 

एनालिस्ट्स के मुताबिक, क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने पर पड़ा है। हालांकि, फरवरी के बाद जुलाई पहला महीना है, जब सोने की कीमतें चढ़ी हैं। स्वतंत्र विश्लेषक रॉस नॉरमैन ने कहा, “सोना चढ़ने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अभी यह कंसॉलिडेशन फेज में है।”

सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर दबाव में आएगा सोना

फेडरल रिजर्व ने 29 जुलाई को इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं किया। इससे सोने को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन, माना जा रहा है कि फेड सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घट जाती है। क्रूड की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है।

क्रूड में तेजी से महंगाई का खतरा बढ़ रहा

महंगाई को काबू में करने के लिए फेड सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होता नहीं दिख रहा है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही हैं। 31 जुलाई को ब्रेंट क्रूड का भाव 1.76 फीसदी चढ़कर 88.37 डॉलर पर चल रहा था। क्रूड में तेजी जारी रहने पर सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : आज बाजार के लिए ग्बोबल और घरेलू संकेत अच्छे हैं। गिफ्टी निफ्टी करीब 70 अंक ऊपर कारोबार कर रहा है। FIIs ने कैश और वायदा में मिलाकर करीब 4700 करोड़ की खरीदारी की है। इंडेक्स में दो दिनों में करीब 19000 नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट कवर किए गए हैं। क्रूड में भी नरमी है। यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

30 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन के बाद भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। IT शेयरों में आई तेजी का असर रियल्टी,कैपिटल गुड्स,हेल्थकेयर और कुछ बड़े शेयरों में आई कमजोरी से संतुलित हो गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 273.55 अंक या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 77,928.15 पर और निफ्टी 66.95 अंक या 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 पर बंद हुआ। ब्रॉडर इंडेक्स का प्रदर्शन मुख्य इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

विदेशी निवेशकों के रुझान पर एक नजर

30 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,623 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे। इससे घरेलू बाजार में उनका भरोसा बना रहने का संकेत मिलता है। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार पांच सेशन से चली आ रही खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और वे नेट सेलर बन गए,क्योंकि उन्होंने ₹1,864 करोड़ के शेयर बेचे।

कमोडिटी न्यूज

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से कुछ जहाज निकलने की खबरों से क्रूड में थोड़ी नरमी आई है। ब्रेंट 89 डॉलर के पास पहुंच गया है। इधर US में दरें ना बढ़ने से सोना 4100 डॉलर के पार चला गया है। चांदी भी 2.5 फीसदी उछली है।

चिप शेयरों में दिखी जोरदार तेजी

अमेरिका में कल चिप शेयरों में जोरदार रिबाउंड दिखा। मैक्रॉन,वेस्टर्न डिजिटल,सैनडिस्क और SK HYNIX ADR में 15 से 26% तक का उछाल आया। वहीं सॉफ्टवेयर कंपनियों पर दबाव दिखा। Accenture और Cognizant पांच से छह परसेंट फिसले। इंफोसिस का ADR भी 5% नीचे आय।

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एशियाई बाजारों में रौनक

चिप शेयरों में जोरदार खरीदारी से एशियाई बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। निक्केई 5% तो कॉस्पी 16% दौड़ा है। कॉस्पी में सैमसंग 20% तो SK HYNIX 30% तक दौड़े हैं। उधर अमेरिकी बाजारों में भी कल शानदार तेजी दिखी। नैस्डैक करीब तीन परसेंट उछला। वहीं, डाओ जोंस भी तेजी के साथ बंद हुआ।

टाटा स्टील का Q1 मुनाफा 12% बढ़ा, 24% बढ़ा वेदांता का मुनाफा,मार्जिन में सुधार

पहली तिमाही में टाटा स्टील के नतीजे अनुमान के करीब रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में 12 परसेंट तो आय में 14 परसेंट की बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्जिन में भी एक फीसदी की बढ़त हुई है। करीब 33,900 करोड़ के कैपेक्स को बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। वहीं वेदांता का मुनाफा 24% बढ़ा है। मार्जिन में भी सुधार दिखा है।

10% बढ़ा LIC हाउसिंग का मुनाफा, टोरेंट फार्मा का मुनाफा बढ़ा

पहली तिमाही में LIC हाउसिंग फाइनेंस का मुनाफा 10% बढ़ा है। हालांकि इसकी ब्याज से होने वाली कमाई करीब एक परसेंट बढ़ी है। दूसरी ओर टोरेंट फार्मा का मुनाफा 3% बढ़ा है। इसके मार्जिन में भी सुधार दिखा है।

अनुमान से कमजोर रहे स्विगी के नतीजे, फूड डिलिवरी,इंस्टामार्ट ग्रोथ कमजोर

स्विगी के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे हैं। पहली तिमाही में कंपनी का घाटा कम हुआ है। इसकी आय में 37 फीसदी का उछाल दिखा है। लेकिन फूड डिलिवरी का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू और इंस्टामार्ट का नेट ऑर्डर वैल्यू अनुमान से कम रहा है।

निफ्टी की चार कंपनियों के नतीजे आज

नतीजों के लिहाज से आज बेहद अहम दिन है। आज निफ्टी की चार कंपनियों,ITC, MARUTI,सन फार्मा और बजाज फिनसर्व के रिजल्ट आएंगे। ITC का मुनाफा 12% घट सकता है ,मार्जिन पर भी दबाव संभव है। सिगरेट की वॉल्यूम ग्रोथ निगेटिव हो सकती है। वहीं डिक्सन,गेल,ABB समेत वायदा की 9 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों को बचाना मकसद

सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी ने 50 से ज्यादा देशों को गठबंधन में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि अभी तक उन देशों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। इससे रेड सी के रास्ते भेजे जा रहे तेल की खेप पर असर पड़ा है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? मिडिल ईस्ट की न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के मुताबिक अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया और सूडान को न्योता भेजा गया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी निमंत्रण मिला है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, सऊदी अरब का करीबी सहयोगी अमेरिका अभी तक आधिकारिक तौर पर गठबंधन में शामिल होने की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ इमरजेंसी बैठक की। बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि प्रिंस खालिद ने अमेरिका से कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध को और फैलाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 28 फरवरी से अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद, ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस खालिद ने जेडी वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब, यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने में सक्षम है और फिलहाल उसे इस मामले में अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है। दुनिया के लिए रेड सी इतना अहम क्यों है? रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इसके एक तरफ सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी तरफ मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। दुनिया के करीब 30% समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। रेड सी में आने-जाने के केवल दो रास्ते हैं। पूर्व में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और पश्चिम में स्वेज नहर। इसलिए इनमें से किसी एक रास्ते में रुकावट आने पर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता है। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसी वजह से यहां जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो समुद्री लेन हैं। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है। लेकिन अब इस रास्ते में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का असर बढ़ गया है। ईरान जंग से एक चौथाई सप्लाई पर असर पड़ा सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। अब होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की करीब 25% ऊर्जा आपूर्ति किसी न किसी रूप में इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।