Salman Khan: ‘सफाई बनाए रखो, वरना मैं उन्हें भेज दूंगा’, सलमान खान ने बांद्रा के एक कैफे को तुकाराम मुंडे के नाम से दी चेतावनी

Salman Khan: सलमान खान ने अपने दोस्त के नए बांद्रा कैफे को बेसिक चीजों का ध्यान रखने के लिए मजाकिया अंदाज में याद दिलाया है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी कॉफ़ी दोबारा भरने के लिए कहा और मज़ाक में कैफ़े से कहा कि वे कीमत, क्वालिटी या साफ़-सफ़ाई से कोई समझौता न करें। उनकी यह चेतावनी महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर भी एक मज़ाकिया इशारा लग रही थी, जो फ़ूड आउटलेट्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं।

तुकाराम मुंडे चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

26 मई, 2026 को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ़्टी के लिए की जा रही सख़्त कार्रवाई में एक जाना-माना नाम बन गए हैं। बताया जाता है कि सिर्फ़ दो महीनों में उनकी टीम ने 3,000 से ज़्यादा जगहों का निरीक्षण किया और लगभग 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।

सख़्त और बिना किसी ढिलाई वाले रवैये की वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “असली सिंघम” का नाम भी दिया गया है। उनकी देखरेख में, FDA ने रेस्तरां, होटल, क्लब, फ़ास्ट-फ़ूड आउटलेट और संस्थागत किचनों में अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। अधिकारी ख़राब साफ़-सफ़ाई, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और बिना लाइसेंस के काम करने जैसी समस्याओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ लोगों का होना ज़रूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ भोजन और दवा ज़रूरी है। और इसके लिए, रेगुलेटर्स को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।”

सलमान खान का अगला प्रोजेक्ट क्या है?

काम की बात करें तो, सलमान खान ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं। नया सीज़न 6 सितंबर, 2026 को JioHotstar और Colors TV पर शुरू होगा। इसके बाद सलमान ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) में नज़र आएंगे, जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ (Battle of Galwan) था।

फ़िलहाल इस फ़िल्म की दोबारा शूटिंग चल रही है। उनके पास वामशी पैदिपल्ली की फ़िल्म ‘मॉन्स्टर’ (Monster) भी है, जिसमें उनके साथ नयनतारा हैं और इसके 2027 में ईद के आस-पास रिलीज़ होने की उम्मीद है।

एक ट्रेन, कई खूबसूरत मंजिलें! वंदे भारत से बनाएं परफेक्ट वीकेंड प्लान

वीकेंड पर आप दिल्ली की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर करके कम समय में एक अच्छी छोटी ट्रिप का मजा लिया जा सकता है। ट्रेन का आरामदायक सफर आपका समय भी बचाता है और सफर की थकान भी कम करता है।

कम दिनों की छुट्टी में ऐसी जगह चुनना सही रहता है, जहां घूमने के लिए ज्यादा समय मिले और सफर में पूरा दिन न निकल जाए। वीकेंड ट्रिप के लिए ट्रेन से ट्रिप करना इसलिए भी अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि आप आराम से सफर करते हुए अपने परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं।

tarinmm

 

1. चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा

वीकेंड में कम समय में घूमने के लिए चंडीगढ़ एक अच्छा ऑप्शन है। दिल्ली से चंडीगढ़ की वीकेंड ट्रिप के लिए 22447 वंदे भारत एक्सप्रेस सुविधाजनक ऑप्शन है। ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 5:50 बजे चलकर करीब 2 घंटे 48 मिनट में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (CDG) सुबह 8:38 बजे पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹855 और Executive Chair Car का करीब ₹1,585 है। एक दिन की ट्रिप में सुबह रॉक गार्डन और रोज गार्डन घूमने के बाद सुखना झील घूम सकते हैं। शाम को झील के आसपास समय बिताने के बाद सेक्टर-17 मार्केट में शॉपिंग और लोकल फूड का आनंद लिया जा सकता है। अगर 2 दिन का समय है, तो दूसरे दिन कैपिटल कॉम्प्लेक्स और शहर के आसपास की जगहें देख सकते हैं।

 

2. देहरादून, उत्तराखंड

पहाड़ों और हरियाली के बीच छोटा-सा ब्रेक लेना चाहते हैं तो देहरादून का प्लान बनाया जा सकता है। देहरादून जाने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस 22457 दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल (ANVT) से शाम 5:50 बजे चलती है और करीब 4 घंटे 45 मिनट में रात 10:35 बजे देहरादून (DDN) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,075 और Executive Chair Car का करीब ₹1,900 है। शहर में एक दिन हो तो रॉबर्स केव, सहस्त्रधारा और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आसानी से घूमे जा सकते हैं। शाम को किसी लोकल कैफे में बैठकर देहरादून का माहौल एंजॉय करें। दो दिन मिल रहे हों तो अगले दिन मसूरी की ओर निकलना बेहतर रहेगा।

 

3. अजमेर, राजस्थान

अगर वीकेंड पर धार्मिक स्थलों के साथ राजस्थान की संस्कृति देखना चाहते हैं, तो अजमेर को चुन सकते हैं। दिल्ली से अजमेर जाने के लिए वंदे भारत का रूट जयपुर होते हुए अजमेर तक जाता है। इस यात्रा में करीब 5 घंटे 15 मिनट लगते हैं और AC Chair Car का किराया लगभग ₹1,150 से शुरू होने की जानकारी अवेलेबल है। स्टेशन पहुंचने के बाद अजमेर शरीफ दरगाह से घूमने की शुरुआत करें और फिर अढ़ाई दिन का झोपड़ा देखा जा सकता है। दिन के दूसरे हिस्से में आना सागर झील के आसपास वक्त बिताएं और शाम को स्थानीय बाजार में राजस्थानी मिठाइयों और खाने का स्वाद लें। दो दिन का प्लान है तो अगले दिन अजमेर से पुष्कर जाकर पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर घूम सकते हैं।

 

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी की यात्रा बाकी जगहों से थोड़ी लंबी है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए यह खास डेस्टिनेशन है। वाराणसी के लिए 22436 वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 6:00 बजे चलती है और करीब 8 घंटे में दोपहर 2:00 बजे वाराणसी जंक्शन (BSB) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,835 और Executive Chair Car का करीब ₹3,385 है। यहां एक दिन का समय हो तो काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट को प्राथमिकता दें। शाम होते ही दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती देखना न भूलें। पुरानी गलियों में घूमकर बनारसी खान-पान का स्वाद भी लिया जा सकता है।

 

5. जयपुर, राजस्थान

शाही महलों, किलों और बाजारों से भरी जयपुर की यात्रा दिल्ली से वीकेंड पर आसानी से की जा सकती है। जयपुर के लिए दिल्ली से वंदे भारत की ट्रिप करीब 3 घंटे 37 मिनट से 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकती है। मौजूदा शेड्यूल में एक वंदे भारत दिल्ली कैंट (DEC) से दोपहर 3:10 बजे चलकर शाम 7:00 बजे जयपुर जंक्शन (JP) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹835 और Executive Chair Car का करीब ₹1,610 है। दूसरी वंदे भारत दिल्ली कैंट से शाम 6:28 बजे चलकर रात 10:05 बजे जयपुर पहुंचती है। एक दिन में आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर को कवर किया जा सकता है। घूमने के बाद शाम का समय जौहरी बाजार या बापू बाजार में शॉपिंग के लिए रखें और दाल बाटी चूरमा, प्याज कचौरी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें।

Success Story: छत पर शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, ऐसे होने लगी लाखों की कमाई, महिला ने अपनाया ये तरीका

रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग आराम और परिवार के साथ समय बिताने की योजना बनाते हैं। लेकिन केरल की पूर्व हेडमिस्ट्रेस रेमाभाई एस की जिंदगी में रिटायरमेंट के बाद एक अलग ही अध्याय शुरू हुआ। अकेलेपन से निपटने के लिए घर में पौधे लगाने से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे ऐसे बिजनेस में बदल गया, जिससे अब वह करीब ₹4 लाख महीने की कमाई कर रही हैं।

मां की मौत के बाद बढ़ गया था अकेलापन

रेमाभाई ने 31 मई 2022 को 30 साल से ज्यादा समय तक जूलॉजी पढ़ाने के बाद रिटायरमेंट लिया। उनके पति रिटायर्ड सीनियर बैंक मैनेजर हैं और उस समय भी एक इंजीनियरिंग कॉलेज में काम कर रहे थे। वहीं उनका बेटा और बहू दोनों डॉक्टर हैं और दिल्ली में रहते थे। उसी साल उनकी मां का निधन हो गया। रिटायरमेंट और मां की मौत के बाद घर में अकेलापन उन्हें ज्यादा महसूस होने लगा। इसी दौरान उन्होंने खुद को व्यस्त रखने के लिए घर में पौधे उगाने का फैसला किया।

52 विदेशी फलों पर की रिसर्च, फिर चुना ड्रैगन फ्रूट

रेमाभाई ने शुरुआत किसी जल्दबाजी में नहीं की। उन्होंने जर्नल, ऑनलाइन जानकारी और अलग-अलग फार्म की यात्राओं के जरिए करीब 52 विदेशी फलों के बारे में जानकारी जुटाई। काफी रिसर्च के बाद उन्होंने Malaysian King Red Dragon Fruit किस्म को चुना। सीमित जगह में ज्यादा पौधे लगाने के लिए उन्होंने हाई-डेंसिटी फार्मिंग का तरीका अपनाया।

1,750 वर्ग फुट में लगाए 360 पौधे

घर के करीब 1,750 वर्ग फुट के हिस्से में उन्होंने 360 ड्रैगन फ्रूट पौधे लगाए। इसके लिए 90 स्थानीय स्तर पर बने कंक्रीट पोल लगाए गए और हर पोल पर चार पौधों को सहारा दिया गया। उन्होंने खर्च कम रखने के लिए GI पाइप और पुराने टायरों का भी इस्तेमाल किया। शुरुआती दौर में एक पौधे की स्टेम करीब ₹100 में खरीदी गई थी। मेहनत का नतीजा जल्दी दिखा। करीब छह महीने में पौधों में फूल आने लगे और मार्च 2023 से उन्होंने फल की पहली फसल लेना शुरू कर दिया।

शुरुआत में ₹50 हजार, फिर बढ़कर ₹1.5 लाख महीना

पहले 360 पौधों से उन्हें हर महीने ₹50 हजार से ज्यादा की आमदनी हुई। पौधों के बड़े होने के साथ कमाई बढ़कर करीब ₹1.5 लाख महीने तक पहुंच गई। उत्पादन के चरम समय में वह लगभग 750 किलो ड्रैगन फ्रूट हर महीने तैयार करने लगीं। वह फल करीब ₹175 प्रति किलो की दर से बेचती थीं। खास बात यह रही कि थोक खरीदार और ऑर्गेनिक स्टोर उनके घर से ही फल उठा लेते थे।

नई जमीन नहीं खरीदी, छत को बनाया अगला फार्म

बिजनेस बढ़ाने के लिए रेमाभाई के सामने अगली चुनौती थी बिना जमीन खरीदे उत्पादन बढ़ाना। घर की छत पर बड़ी मात्रा में मिट्टी ले जाना उन्हें सही नहीं लगा। इसलिए उन्होंने सोइल-लेस यानी कम मिट्टी वाली खेती के विकल्प पर प्रयोग शुरू किया। उन्होंने सामान्य मिट्टी और घर में तैयार किए गए कंपोस्ट की तुलना की। कंपोस्ट में पौधों की ग्रोथ बेहतर दिखने के बाद उन्होंने इसी तरीके को आगे बढ़ाया।

बैरल में लगाए 100 और पौधे

रेमाबाई ने छत पर 50 बैरल लगाए। इनमें कंपोस्ट और गोबर की खाद का मिश्रण इस्तेमाल किया गया और हर बैरल में दो पौधे लगाए गए। इस तरह छत पर 100 और ड्रैगन फ्रूट पौधे तैयार हो गए। करीब पांच महीने में इन पौधों पर फल आने लगे। अक्टूबर 2023 तक छत की खेती भी उत्पादन देने लगी थी। एक पौधे पर एक समय में करीब 10 से 20 फल तक दिखाई देते थे।

घर के कचरे से तैयार करती हैं खाद और लिक्विड फर्टिलाइजर

रेमाबाई की खेती की खासियत सिर्फ ड्रैगन फ्रूट उगाना नहीं है। वह घर और बगीचे से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल भी खेती में करती हैं। किचन वेस्ट, पत्तियां, कटहल का बचा हिस्सा, प्याज और सब्जियों के अवशेष जैसी चीजों से वह कंपोस्ट तैयार करती हैं। उनके पास तीन कंपोस्टिंग यूनिट हैं और वह 15 से ज्यादा तरह के लिक्विड प्रिपरेशन भी तैयार करती हैं। मछली के कचरे से वह फिश अमीनो एसिड भी बनाती हैं। उनके मुताबिक, अब तक 5,000 लीटर से ज्यादा यह तैयारी तैयार की जा चुकी है।

साल में ज्यादा लंबे समय तक मिलता है फल

उनके खेती के तरीके का एक फायदा यह भी है कि ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन लंबे समय तक चलता है। जहां आमतौर पर इसकी मुख्य फसल करीब पांच से छह महीने तक रहती है, वहीं रेमाबाई लगभग 10 महीने तक फल प्राप्त कर लेती हैं। जनवरी और फरवरी में उत्पादन में मुख्य अंतराल रहता है। उनके बगीचे में महीने में करीब तीन बार फसल होती है और हर बार लगभग 250 किलो फल निकलता है।

अब पौधों की कटिंग भी बन गई कमाई का जरिया

समय के साथ रेमाभाई के ड्रैगन फ्रूट पौधों की स्टेम कटिंग की मांग भी बढ़ने लगी। उन्होंने इसे अलग आय के स्रोत के रूप में विकसित कर लिया। वह एक कटिंग करीब ₹70 में बेचती हैं और अब तक भारत, मालदीव और श्रीलंका में उनके 2,500 से ज्यादा ग्राहक बताए जाते हैं। बड़े ऑर्डर कुरियर के जरिए भेजे जाते हैं। एक दिन में तेलंगाना के लिए 5,500 स्टेम कटिंग का ऑर्डर भी भेजा गया।

सिर्फ पौधे नहीं बेचतीं, तरीका भी सिखाती हैं

रेमाबाई अपने ग्राहकों को सिर्फ कटिंग देकर नहीं छोड़तीं। वह उन्हें पौधे लगाने और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी देती हैं और आगे की ग्रोथ पर भी नजर रखती हैं। उनके मुताबिक, सही परिस्थितियों में स्टेम से करीब छह महीने में फल मिलना शुरू हो सकता है।

रिटायरमेंट का शौक बना पूरा बिजनेस

रेमाबाई की कहानी की खास बात यह है कि उन्होंने बिजनेस शुरू करने के लिए न बड़ी जमीन खरीदी और न ही भारी निवेश किया। घर के आंगन और छत जैसी सीमित जगह का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पहले पौधे लगाए, फिर रिसर्च की, प्रयोग किए और धीरे-धीरे खेती को कमाई के मॉडल में बदल दिया।

आज ड्रैगन फ्रूट, छत पर खेती और स्टेम कटिंगइन अलग-अलग स्रोतों से उनकी कुल मासिक कमाई करीब ₹4 लाख बताई जाती है। रिटायरमेंट के बाद अकेलेपन से बचने के लिए शुरू हुआ पौधों का शौक अब उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी बन चुका है।

₹30 हजार से शुरू किया सैंडविच का ठेला, आज ₹25 लाख महीना! फेल इंटरनेट कैफे के बाद ऐसे बदली अभिषेक की किस्मत

₹30 हजार से शुरू किया सैंडविच का ठेला, आज ₹25 लाख महीना! फेल इंटरनेट कैफे के बाद ऐसे बदली अभिषेक की किस्मत

कारोबार में पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो बहुत से लोग दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी कुछ अलग है। करीब 15 साल पहले शुरू किया गया उनका इंटरनेट कैफे एक साल के अंदर बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय महज ₹30 हजार के लोन से एक छोटे से सैंडविच कार्ट की शुरुआत की। आज उनका यही छोटा कारोबार सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

पहला बिजनेस एक साल में ही हो गया बंद

अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने शुरुआत इंटरनेट कैफे से की। उस दौर में इंटरनेट कैफे एक अच्छा बिजनेस आइडिया माना जाता था, लेकिन उनका कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला।

करीब एक साल बाद ही उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश की असफलता के बावजूद अभिषेक ने कारोबार करने का विचार नहीं छोड़ा। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस चुना, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके।

₹30 हजार जुटाए और बदल दी दिशा

पहले कारोबार के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस की तरफ रुख किया। उन्होंने ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया। खास बात यह थी कि उनके पास सैंडविच बनाने की कोई बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने YouTube की मदद से अलग-अलग सैंडविच की रेसिपी सीखीं और फिर उन्हें अपने छोटे से कार्ट पर आजमाना शुरू किया। यानी दूसरी शुरुआत बड़े निवेश या बड़े सेटअप से नहीं, बल्कि सीमित पैसे और खुद सीखने की कोशिश से हुई।

धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा स्वाद

शुरुआत में यह एक छोटा सा सैंडविच कार्ट था, लेकिन समय के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोगों को सैंडविच पसंद आने लगे और धीरे-धीरे इस छोटे कारोबार ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अभिषेक के बिजनेस की कहानी में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट पर बनी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके सैंडविच का स्वाद लेने पहुंचने लगे।

अब 30-50 मिनट तक इंतजार करते हैं ग्राहक

कभी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटे कार्ट से हुई थी, आज उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राहक सैंडविच के लिए इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, कई ग्राहकों को ऑर्डर के लिए करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई।

हर दिन सैकड़ों सैंडविच की बिक्री

सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich अब हर दिन लगभग 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है। वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि शनिवार और रविवार जैसे दिनों में 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं। इसी पोस्ट के अनुसार, इस छोटे से फूड बिजनेस का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच चुका है।

असफलता से शुरुआत, लेकिन वहीं नहीं रुके

अभिषेक साहू की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं है। असली बात यह है कि पहला बिजनेस बंद होने के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।

इंटरनेट कैफे के अनुभव के बाद उन्होंने कम पैसे वाला बिजनेस चुना, YouTube से स्किल सीखी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बनाया। यही छोटा कदम आगे चलकर बड़े कारोबार में बदलता गया।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

प्रथम ने X पर अभिषेक की कहानी शेयर करते हुए उनके सफर को उजागर किया। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी की सबसे खास बात ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं, बल्कि पहली असफलता के बाद सिर्फ ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत करने का फैसला है। दूसरे यूजर ने इसे एक शानदार ‘कमबैक’ बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Video: भगवान को अकेला नहीं छोड़ सकता… चित्रकूट बाढ़ के बीच भावुक करने वाला नजारा! DM-SP जोड़ते रहे हाथ फिर भी मंदिर से नहीं निकले पुजारी

इन पहाड़ों में मिलेगा ऐसा सुकून, शिमला-मसूरी की भीड़ भी भूल जाएंगे!

उत्तर भारत के पहाड़ों में छुट्टियां बिताने का नाम आते ही सबसे पहले शिमला, मसूरी और नैनीताल जैसी जगहों का ख्याल आता है। इन जगहों की खूबसूरती देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन छुट्टियों के समय यहां बढ़ती भीड़, ट्रैफिक और महंगे होटल कई बार सफर का मजा थोड़ा कम कर देते हैं। ऐसे में यदि आप शोर-शराबे से दूर किसी शांत पहाड़ी जगह पर कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं, तो कुछ कम मशहूर जगहों की ट्रिप कर सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई ऐसे छोटे-छोटे पहाड़ी ठिकाने हैं, जहां प्रकृति की खूबसूरती के साथ आपको शांत माहौल भी मिलेगा। यहां देवदार और चीड़ के जंगल, ठंडी हवा, पहाड़ों के सुंदर नजारे और आराम से समय बिताने का मौका मिलता है।

kasolrr

 

 

शोजा, हिमाचल प्रदेश

जिभी के पास बसा शोजा एक शांत और खूबसूरत पहाड़ी गांव है। यहां चारों तरफ घने जंगल, लकड़ी के बने घर और सुंदर पहाड़ी रास्ते देखने को मिलते हैं। यहां बड़े टूरिस्ट सेंटर जैसी भीड़ नहीं होती, इसलिए आप आराम से घूमने का मजा ले सकते हैं। शोजा में रहकर आप शांत माहौल का मजा ले सकते हैं और साथ ही जिभी के कैफे व आसपास की मशहूर जगहों पर भी घूम सकते हैं।

 

 

 

मशोबरा, हिमाचल प्रदेश

शिमला से करीब 11 किलोमीटर दूर मशोबरा उन लोगों के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है, जो शिमला के पास रहकर भी भीड़ से बचना चाहते हैं। यहां देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरे रास्ते और शांत माहौल आपको काफी सुकून देंगे। यहां पुराने समय की खूबसूरत बिल्डिंग और आरामदायक रहने की जगहें भी मिलती हैं। पहाड़ों में शांति से समय बिताने के लिए मशोबरा एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

 

 

 

पंगोट, उत्तराखंड

नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर पंगोट एक छोटा और शांत पहाड़ी गांव है। यहां आपको भीड़भाड़ वाले मार्केट की जगह हरे-भरे जंगल और पहाड़ों के सुंदर नजारे देखने को मिलेंगे। यह जगह पक्षी देखने के शौकीन लोगों को पसंद आती है। यहां जंगल की पगडंडियों पर घूमने, पहाड़ों को देखने और शांत होमस्टे में रहने का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है। प्रकृति के करीब कुछ दिन बिताने के लिए पंगोट अच्छा डेस्टिनेशन है।

लैंडोर, उत्तराखंड

मसूरी से करीब 5 किलोमीटर दूर लैंडोर एक शांत और खूबसूरत जगह है। यहां पुराने घर, चीड़ के पेड़ों से घिरी सड़कें और पहाड़ों के सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं। यहां छोटे कैफे और शांत घूमने की जगहें भी हैं। यदि आप मसूरी घूमना चाहते हैं, लेकिन वहां की ज्यादा भीड़ से बचना चाहते हैं, तो लैंडोर में ठहरना बेहतर साबित हो सकता है।

 

 

 

कनाताल, उत्तराखंड

मसूरी और धनौल्टी के पास कनाताल एक शांत पहाड़ी जगह है। यहां चारों तरफ हरियाली, जंगल और सेब के पेड़ दिखाई देते हैं। मौसम साफ होने पर दूर से हिमालय की बर्फीली चोटियों के नजारे भी देखे जा सकते हैं। यहां आप ट्रेकिंग कर सकते हैं, नेचर के बीच घूम सकते हैं या बस शांत माहौल में आराम कर सकते हैं। मसूरी और धनौल्टी की भीड़ से दूर कुछ दिन बिताने के लिए कनाताल अच्छा ऑप्शन है।

 

 

 

एक ट्रिप में दो तरह का मजा

इन शांत पहाड़ी जगहों की सबसे अच्छी बात यह है कि ये कई मशहूर हिल स्टेशनों के पास ही हैं। इसलिए आपको घूमने के लिए किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। दिन में आप शिमला, मसूरी, नैनीताल या जिभी जैसी पॉपुलर डेस्टिनेशन की सैर कर सकते हैं और शाम को भीड़ से दूर अपने शांत डेस्टिनेशन पर लौट सकते हैं। इस तरह एक ही ट्रिप में आपको मशहूर जगहों और पहाड़ों का सुकून एक साथ मिल जाता है।

ऐतिहासिक रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा DDA, जानिए कितनी है इसकी फीस और कौन-कैसे कर सकता है अप्लाई

DDA Roshanara Club Lifetime Membership: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ऐतिहासिक डीडीए रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा है। कुल 750 सीटों के लिए यह मेंबरशिप स्कीम शुरू की जा रही है, जिसके जरिए दिल्लीवासियों को इस ऐतिहासिक क्लब की वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स, फिटनेस और रिक्रिएशनल सुविधाओं का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

अगर आप भी 100 साल से ज्यादा पुराने और भारतीय क्रिकेट के इतिहास से जुड़े इस क्लब का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जानिए फीस, योग्यता और ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया।

मेंबरशिप कैटेगरी और फीस स्ट्रक्चर

डीडीए की ओर से कुल 750 लाइफटाइम मेंबरशिप दो अलग-अलग श्रेणियों में दी जा रही हैं:

नॉन-गवर्नमेंट कैटेगरी: आम नागरिकों और प्राइवेट सेक्टर के लोगों के लिए कुल 400 सीटें रखी गई हैं। इसके लिए मेंबरशिप चार्ज ₹12.50 लाख + GST तय किया गया है।

गवर्नमेंट / पीएसयू कैटेगरी: सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 350 सीटें रिजर्व हैं। इसकी फीस ₹4 लाख + GST है।

कब से शुरू होंगे आवेदन और कैसे करें अप्लाई?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 28 अगस्त 2026 की रात 12:00 बजे से शुरू होगी।आवेदक 27 अक्टूबर 2026 (रात 11:59 बजे) तक अपना फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं। इच्छुक लोग केवल डीडीए के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ही अप्लाई कर सकते हैं।

आधिकारिक लिंक: [https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx](https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx)

क्लब में मिलेंगी कौन-कौन सी स्पोर्ट्स सुविधाएं?

22 एकड़ में फैले हरे-भरे रोशनआरा क्लब में सदस्यों को इन खेलों और फिटनेस गतिविधियों की सुविधा मिलेगी:

आउटडोर व इनडोर गेम्स: मेन क्रिकेट पिच और प्रैक्टिस पिच, टेनिस, स्क्वॉश, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पिकलबॉल, बिलियर्ड्स और कार्ड रूम।

फिटनेस व स्विमिंग: स्विमिंग पूल, बच्चों के लिए टॉडलर पूल, मल्टी-जिम, फिटनेस सेंटर और योग क्लासेस।

कोचिंग फैसिलिटी: उभरते खिलाड़ियों के लिए योग्य कोचों द्वारा कोचिंग की सुविधा भी दी जाएगी। साथ ही क्रिकेट ग्राउंड को टूर्नामेंट्स और कॉरपोरेट इवेंट्स के लिए भी बुक किया जा सकेगा।

सोशल और क्लब हाउस सुविधाएं

स्पोर्ट्स के अलावा क्लब हाउस में सदस्यों के मनोरंजन और सोशल गैदरिंग के लिए ये सुविधाएं होंगी:

  • लाउंज, रेस्टोरेंट, कैफे और डाइनिंग एरिया
  • बार और बैंक्वेट सुविधाएं
  • किड्स जोन

क्या है रोशनआरा क्लब का इतिहास?

22 एकड़ का ऐतिहासिक परिसर और 100 साल से भी पुराना यह क्लब भारतीय क्रिकेट के शुरुआती इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस क्लब को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। डीडीए ने 29 सितंबर 2023 को इस ऐतिहासिक क्लब का आधिकारिक रूप से अधिग्रहण कर लिया था।

DDA रोशनआरा क्लब मेंबरशिप डिटेल्स

कुल उपलब्ध मेंबरशिप: 750

आम नागरिक फीस: ₹12.50 लाख + GST (400 सीटें)

सरकारी कर्मचारी फीस: ₹4.00 लाख + GST (350 सीटें)

रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तिथि: 28 अगस्त 2026

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर 2026

क्लब का कुल क्षेत्रफल: 22 एकड़

दिल्ली के उपराज्यपाल के ‘ईज ऑफ लिविंग’ और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के विजन के तहत यह कदम उठाया गया है। दिल्ली के 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 3 गोल्फ कोर्स चलाने वाला DDA अब खेल प्रेमियों को देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक क्लबों में से एक का हिस्सा बनने का यह सुनहरा मौका दे रहा है।

ईरान की सड़कों पर बदल गई तस्वीर! महिलाएं खुलेआम निकल रहीं बिना हिजाब, सरकार क्यों है परेशान?

Iran Hijab Controversy: ईरान की सड़कों पर हिजाब एक बार फिर सरकार और आम महिलाओं के बीच नए टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। देश के रूढ़िवादी नेता महिलाओं को इस्लामिक ड्रेस कोड के दायरे में वापस लाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं लेकिन शासन के लिए यह फैसला आसान नजर नहीं आ रहा है। अधिकारियों को डर है कि जबरन कार्रवाई करने से देश में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों की नई लहर खड़ी हो सकती है और इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सड़कों पर बदला नजारा और व्यवसायों पर सख्त कार्रवाई

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान और दूसरे बड़े शहरों की सड़कों पर महिलाएं अब खुलेआम बिना अनिवार्य हिजाब के घूमती नजर आ रही हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने अब तक सीधे महिलाओं से टकराने के बजाय कैफे और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों को निशाना बनाया है। ड्रेस कोड का पालन कराने में नाकाम रहने के आरोप में कई कैफे और रेस्टोरेंट को सील कर दिया गया है और दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर बिना सिर ढके निकलने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

रूढ़िवादी नेताओं का बढ़ता दबाव और सरकार की दुविधा

ईरान में दशकों से हिजाब इस्लामिक गणराज्य के सामाजिक नियमों का एक प्रमुख प्रतीक रहा है और कानूनन महिलाओं के लिए सार्वजनिक रूप से अपने बाल ढकना अनिवार्य है। हालांकि अब रूढ़िवादी राजनेता और धर्मगुरु सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह ड्रेस कोड के इस खुले उल्लंघन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे। उनका तर्क है कि सरकार इस्लामिक मूल्यों के इस तरह क्षरण को चुपचाप नजरअंदाज नहीं कर सकती।

लेकिन तेहरान के लिए बड़े पैमाने पर इस कानून को लागू करना बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती है। ईरानी अधिकारियों को पता है कि हिजाब का मुद्दा सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकार विरोधी जनाक्रोश का रूप ले सकता है।

2022 के प्रदर्शन और महसा अमीनी का मामला भी यादों में है

सड़कों पर फिर से गश्ती पुलिस की तैनाती 2022 के उन जख्मों को हरा कर सकती है जब 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी महिला महसा अमीनी की हिरासत में मौत हो गई थी। अमीनी को हिजाब नियम का ठीक से पालन न करने के आरोप में मोरल पुलिस ने हिरासत में लिया था। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ आंदोलन छिड़ गया था। यह प्रदर्शन दशकों में ईरान के धार्मिक नेतृत्व के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था जहां महिलाओं ने खुलेआम अपने हिजाब जलाए थे। अधिकारियों ने बाद में इन प्रदर्शनों को दबा दिया था लेकिन जनता के भीतर से अभी इसकी यादें मिटी नहीं हैं।

चार साल बाद आज कई महिलाएं फिर उसी राह पर हैं। तेहरान में युवा महिलाएं बिना सिर ढके स्कूटर चलाती, खरीदारी करती और सार्वजनिक समारोहों में शामिल होती देखी जा सकती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब नियमों को पहले जितना सख्त तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति ने सरकार को एक अजीब मोड़ पर खड़ा कर दिया है। अधिकारी किसी कैफे को बंद कर सकते हैं या किसी दुकान पर ताला लगा सकते हैं, लेकिन भारी संख्या में महिलाओं का सीधे सामना करना जोखिम भरा है। सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी सी घटना भी तुरंत विरोध का प्रतीक बन सकती है।

क्या बल प्रयोग से बदलेगी सोच?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या लोगों के व्यवहार और मान्यताओं को बल प्रयोग के जरिए बदला जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया है कि बढ़ती वैचारिक खाई को पाटने के लिए दबाव बनाना एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके उलट रूढ़िवादी गुट देश के इस्लामिक मूल्यों को बहाल करने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग पर अड़े हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ महिलाएं अपने पहनावे की आजादी को लेकर आगे बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ सरकार इस सोच में पड़ी है कि बिना किसी नए संकट को जन्म दिए इस स्थिति पर कैसे नियंत्रण पाया जाए।

यह भी पढ़ें: Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

24×7 पार्टी और नाइटलाइफ सिटी बनेगी दिल्ली, मास्टर प्लान 2047 में 24-घंटे इकोनॉमी का पूरा ब्लूप्रिंट

देश में भी नाइटलाइफ मुंबई जैसी हो जाए तो क्या आपको पसंद आएगी? असल में दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के लॉन्च होने के बाद दिल्ली को 24 घंटे की इकोनॉमी में बदलने का प्लान सामने आया है। इस नए प्लान के लागू होने के बाद दिल्ली के रेस्टोरेंट्स, बाजार, सांस्कृतिक केंद्र और वर्किंग प्लेस जैसी जगहों ट्रेडिशनल वर्किंग आवर के काफी बाद तक गुलजार और रोशन रह सकेंगे।

मास्टर प्लान 2047 के तहत 24-घंटे वाले शहर के कॉन्सेप्ट पर आगे बढ़ने की तैयारी है। इसके लिए दिल्ली भर में ऐसे प्रमुख नोड्स, परिसर और सर्किटों की पहचान की गई है। इन जगहों को ऐसे डेवलप किया जाएगा ताकि अंधेरा होने के बाद भी यहां तमाम एक्टिविटी सेफ तरीके से चलती रहें। नाइट लाइफ को बढ़ावा देने का ये पूरा प्रोसेस अंततः दिल्ली की अर्थव्यवस्था को ही मजबूत करने का काम करेगा।

ये इलाके बनेंगे दिल्ली के नए नाइटलाइफ जोन

दिल्ली के कुछ सबसे बड़े और लोकप्रिय इलाके इस नई नाइट-टाइम इकोनॉमी को रफ्तार देने का काम करेंगे। मास्टर प्लान के मुताबिक इन प्रमुख क्षेत्रों में कनॉट प्लेस शामिल है। सीपी पहले से ही नाइटलाइफ का एक बड़ा केंद्र है और अब यहां प्लानिंग की मदद से और बेहतर नाइट लाइफ की सुविधाएं डेवलप की जाएंगी। इसके अलावा हौज खास के अर्बन विलेज और उसके बाजार में कैफे, बार और सांस्कृतिक स्थलों के खुलने का समय बढ़ाया जा सकता है।

ऐतिहासिक क्षेत्र चांदनी चौक यानी पुरानी दिल्ली को एक हेरिटेज और कल्चरल नाइट सर्किट के रूप में डेवलप किया जाएगा। वहीं इंडिया गेट के लॉन को शाम और रात के समय इस्तेमाल के लिए एक पब्लिक हब बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही निजामुद्दीन और चिराग दिल्ली को सांस्कृतिक सर्किट नोड्स के रूप में चिह्नित किया गया है जबकि महरौली को देर रात के सार्वजनिक जीवन के लिए एक और अर्बन विलेज हब के रूप में चुना गया है। प्लान में यह भी प्रस्ताव है कि पुरानी खदानों, लैंडफिल, ऐश डैक्स और बेकार पड़े थर्मल प्लांटों जैसी खाली पड़ी जमीनों का जीर्णोद्धार करके समय के साथ उन्हें सार्वजनिक या इवेंट स्पेस में बदला जाए।

जमीन पर क्या-क्या बदलेगा और क्या सुविधाएं मिलेंगी?

मास्टर प्लान 2047 सिर्फ दुकानों के देर रात तक खुले रहने तक सीमित नहीं है बल्कि यह शहर के पूरे एक्सपीरियंस को बदलने वाला साबित हो सकता है। योजना के तहत संबंधित सरकारी एजेंसियों की इजाजत से रेस्टोरेंट्स, रिटेल स्टोर्स, खेल और सांस्कृतिक सुविधाओं के संचालन के समय को बढ़ाया जाएगा। दिल्ली के बाजारों में पैदल चलने योग्य एक्टिव ट्रैवल एरिया डेवलप किए जाएंगे। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि लोग लंबे समय तक घूम सकें, खरीदारी कर सकें और समय बिता सकें।

कलाकारों, विक्रेता संघों और कम्युनिटी के साथ मिलकर थीम आधारित नाइट वॉक, सीजनल फेस्टिवल और डेडिकेटेट नाइक मार्केट डेवलप किए जाएंगे। इसके अलावा अंधेरा होने के बाद लोगों की आवाजाही बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रीन-ब्लू कॉरिडोर और हेरिटेज सर्किट तैयार किए जाएंगे।

रात के समय आवाजाही और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था

देर रात तक चलने वाले शहर के लिए यह सबसे जरूरी है कि लोग सुरक्षित तरीके से अपने घरों तक पहुंच सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी काफी फोकस है। अंतिम ट्रेन छूटने के बाद लोगों को फंसे रहने से बचाने और नाइट-टाइम इकोनॉमी को रियलिस्टिक बनाने के लिए एक्सटेंडेड मेट्रो सर्विस के अलावा ऐसी व्यवस्थाएं देने की तैयारी है जो 24 घंटे चलें।

क्या दिल्ली वाकई नाइट लाइफ के सपने को साकार कर पाएगी?

इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना की सफलता पूरी तरह से इस बात पर डिपेंड करती है कि इसे लागू कैसे कराया जाता है। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था, पुलिसिंग, स्ट्रीट लाइटिंग और विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की सबसे पहले जरूरत होगी। अगर रात 2 बजे तक कोई बाजार खुला रहता है लेकिन लोग वहां तक पहुंचने या घर लौटने में सुरक्षित महसूस नहीं करते तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा। वैसे अगर यह योजना सही तरीके से जमीन पर उतरती है तो इसके बेहद पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं। इससे हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, एंटरटेनमेंट और क्रिएटिव इकोनॉमी में नए जॉब और बिजनेस के अवसर पैदा होंगे। इनकी मदद से दिल्ली दुनिया के उन वैश्विक शहरों से मुकाबला कर सकेगी जो कभी रात में बंद नहीं होते।

यह भी पढ़ें: Delhi-NCR में H1N1 और डेंगू का बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताया किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

दुनिया के सबसे जगमग नाइट व्यू वाले शहर, जहां शाम के बाद बढ़ जाती है रौनक!

आजकल ट्रैवलर सिर्फ दिन में नहीं घूमना चाहते, बल्कि रात को भी अपनी खास ट्रिप कर रहे हैं। जिसे नाइट टूरिज्म कहते है इसमें लोग लोकल फूड, नाइट मार्केट, लाइव म्यूजिक, थिएटर, स्पोर्ट्स और शहर की नाइट लाइफ का मजा लेते हैं। कई शहर है जो इस ट्रेंड के लिए दुनिया भर में मशहूर हो रहे हैं। आप भी ऐसे ही नाईट ट्रिप को मजेदार बनाना चाहते हैं, तो इन शहरों की नाइट लाइफ का एक्सपीरियंस जरूर करें।

noight 1

मैड्रिड – देर रात तक रहती है चहल-पहल

यहां देर रात तक चहल-पहल रहती है जो बाकी शहरों से काफी अलग है। यहां लोग देर से डिनर करते हैं और देर रात तक दोस्तों और परिवार के साथ घूमते हैं। शाम के समय प्लाजा में टहलना, तपस बार में लोकल डिश खाना और फ्लेमेंको डांस शो देखना यहां की पहचान है। रात में शहर की गलियां, कैफे और टेरेस लोगों से भर जाती हैं। आप स्पेन कल्चर को देखना चाहते हैं, तो मैड्रिड में रात में में जरूर घूमने निकले।

न्यू ऑरलियन्स – संगीत से भरी रातें

न्यू ऑरलियन्स अपनी म्यूजिक कल्चर के लिए दुनिया भर में पॉपुलर है। यहां पर जब शाम होती है तो रोड पर लाइव जैज म्यूजिक की धुनें सुनाई देने लगती हैं। फ्रेंचमेन स्ट्रीट और फ्रेंच क्वार्टर जैसी जगहों में कई छोटे-बड़े म्यूजिक क्लब और बार हैं, जहां हर रात शानदार परफॉर्मेंस होती है। यहां घूमते समय ऐसा लगता है जैसे शहर में कोई म्यूजिक फेस्टिवल हो। इसके साथ ही खाने का टेस्ट और पुराने बाजारों की शॉपिंग इस शहर की रात को और भी शानदार बना देती है।

बैंकॉक – रात में खाने का असली स्वाद

बैंकॉक में घूमने का असली मजा सूरज ढलने के बाद ही आता है। यहां के नाइट मार्केट रंग-बिरंगी दुकानों और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड से भरे रहते हैं। आप यहां थाई खाने का स्वाद ले सकते है। कपड़े, हैंडीक्राफ्ट और कई यादगार चीजों की खरीदारी कर सकते हैं। चाओ फ्राया नदी के किनारे बैठकर डिनर करना और रूफटॉप बार से पूरे शहर की चमक देखना एक बहुत ही यादगार पल होता है। आपको खाने पीने और घूमने का शौक है, तो बैंकॉक की रातें आपको जरूर पसंद आएंगी।

टोक्यो – रात में भी रहती है रौनक

टोक्यो को उन शहरों में गिना जाता है, जो रात में भी पूरी रफ्तार से चलते हैं। यहां शिंजुकु और शिबुया जैसे इलाके रंग-बिरंगी नियॉन लाइट्स से जगमगा उठते हैं। देर रात तक खुले रहने वाले रामेन रेस्टोरेंट, जापानी पब, कराओके और गेमिंग सेंटर लोगों को खूब पसंद आते हैं। अगर आपको शॉपिंग का शौक है, तो कई मार्केट और स्टोर देर रात तक खुले रहते हैं। यहां के रूफटॉप कैफे और बार से रात में चमकते शहर का नजारा देखने का अपना अलग ही मजा है। टोक्यो की रातें हर उम्र के ट्रैवलर के लिए कुछ न कुछ खास जरूर लेकर आती हैं।

फिलाडेल्फिया – खेल और मस्ती से भरी शाम

फिलाडेल्फिया उन शहरों में से है, जहां शाम होते ही माहौल पूरी तरह बदल जाता है। अगर आपको खेल पसंद हैं, तो यहां प्रोफेशनल स्पोर्ट्स मैच का रोमांच देखने को मिलेगा। मैच का टिकट न होने पर भी आप स्पोर्ट्स बार में बैठकर टीवी पर इसे लाइव देख सकते हैं। इसके अलावा यहां लाइव म्यूजिक, थिएटर शो, बॉलिंग, गेमिंग और मिनी गोल्फ जैसी कई एक्टिविटीज रात को और मजेदार बना देती हैं। खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी यह शहर किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां के लोकल कैफे, फूड टूर और खास रेस्टोरेंट आपको शहर के असली स्वाद चखाते हैं। आपको एक ही शाम में मनोरंजन, स्वाद और लोकल कल्चर का एक्सपीरियंस लेना हैं, तो फिलाडेल्फिया परफेक्ट जगह है।

सियोल – कैफे और नाइट मार्केट का मजा

सियोल की रातें काफी शांत, खूबसूरत और रंगीन होती हैं। यहां के नाइट मार्केट में घूमने के साथ आप लोकल स्ट्रीट फूड का स्वाद ले सकते हैं और आसपास की दुकानों से खरीदारी भी कर सकते हैं। हान नदी के किनारे शाम बिताना और शहर की रोशनी देखना यहां आने वाले टूरिस्ट का पसंदीदा एक्सपीरियंस होता है। इसके अलावा थीम कैफे, देर रात तक खुले शॉपिंग एरिया और खूबसूरत गलियां इस शहर को खास बनाती हैं। यहां घूमने के लिए बिकुल भी जल्दबाजी न करें आपम से समय निकालकर सियोल नाईट के मजे ले।

बढ़ रहा है नाइट टूरिज्म

आज के समय में लोग सिर्फ फोटो खींचने के लिए ट्रैवल नहीं करते, बल्कि उन शहरों की असली जिंदगी को भी जीना चाहते हैं। यही कारण है कि नाइट टूरिज्म तेजी से पॉपुलर हो रहा है। रात के समय लोग लोकल फूड का मजा लेते हैं, लाइव म्यूजिक सुनते हैं, नाइट मार्केट में शॉपिंग करते हैं और शहर कल्चर को जानते हैं। इससे ट्रैवलर को एक अलग एक्सपीरियंस मिलता है और दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल और मनोरंजन से जुड़े कारोबार को भी फायदा होता है। आप भी इन शहरो को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जोड़कर ट्रिप को यादगार बना सकते हैं।

नई Royal Enfield Continental GT 650 भारत में लॉन्च, कीमत और नए फीचर्स ने खींचा ध्यान

Royal Enfield ने भारत में अपनी अपडेटेड Continental GT 650 लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इस बाइक के डिजाइन और फीचर्स में कुछ छोटे बदलाव किए हैं, जबकि इसके इंजन और बाकी मुख्य मैकेनिकल चीजों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। वहीं, इसकी कीमत कलर और स्पेसिफिकेशन के आधार पर 3.58 लाख रुपये से शुरू होकर 3.88 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

बता दें कि अपडेटेड Continental GT 650 को चार कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। Rocker Red वेरिएंट, जिसमें अब ब्लैक फिनिश वाला इंजन, एग्जॉस्ट और कास्ट-अलॉय व्हील मिलते हैं। इसकी कीमत 3.58 लाख रुपये है। वहीं, British Racing Green की कीमत भी 3.58 लाख रुपये है। इसमें पॉलिश्ड इंजन और स्पोक व्हील दिए गए हैं।

ब्लैक-आउट इंजन और कास्ट-अलॉय व्हील्स वाले Apex Grey की कीमत 3.81 लाख रुपये है, जबकि पॉलिश्ड इंजन और स्पोक व्हील्स वाले मिस्टर क्लीन वेरिएंट की कीमत सबसे ज्यादा, यानी 3.88 लाख रुपये है। ये सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं।

2026 Continental GT 650 में अब ब्लैक कलर का इंस्ट्रूमेंट काउल और नए LED इंडिकेटर्स दिए गए हैं। इसके अलावा, बाइक में USB Type-C फास्ट चार्जिंग पोर्ट भी जोड़ा गया है। इससे राइडर सफर के दौरान स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस आसानी से चार्ज कर सकेंगे।

वहीं, Rocker Red वेरिएंट में अब ब्लैक फिनिश वाला इंजन, एग्जॉस्ट और कास्ट-अलॉय व्हील दिए गए हैं। पहले यह सेटअप सिर्फ Apex Grey कलर में मिलता था। इस बदलाव के बाद British Racing Green और Mr Clean ही ऐसे वेरिएंट हैं, जिनमें स्पोक व्हील और पॉलिश्ड इंजन फिनिश दी गई है।

ये अपडेट मुख्य रूप से दिखावट से जुड़े हैं और इनसे मोटरसाइकिल के बेसिक डिजाइन या राइडिंग के अनुभव में कोई बदलाव नहीं आता है। मैकेनिकल तौर पर Continental GT 650 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें अभी भी 648cc का एयर- और ऑयल-कूल्ड पैरेलल-ट्विन इंजन लगा है, जो 47hp की पावर और 52.3Nm का टॉर्क देता है। पावर को पिछले पहिये तक पहुंचाने के लिए छह-स्पीड गियरबॉक्स का इस्तेमाल किया गया है।

Royal Enfield की लाइनअप में Continental GT 650 की अपनी अलग पहचान है। यह बाइक क्लासिक कैफे रेसर लुक के साथ मॉडर्न और भरोसेमंद तकनीक का कॉम्बिनेशन देती है।

USB Type-C चार्जिंग पोर्ट और डिजाइन में किए गए छोटे बदलाव इसे मिड-वेट परफॉर्मेंस बाइक सेगमेंट में और बेहतर बनाए रखने में मदद करेंगे। वहीं, Royal Enfield आने वाले समय में ज्यादा बड़े इंजन वाली बाइक्स भी पेश करने की तैयारी कर रही है।

यह भी पढ़ें: Mahindra की नई धांसू EV लॉन्च, 79kWh बैटरी और AI फीचर्स से है लैस, जानें कीमत