गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर : 184 संदिग्ध मामले, 22 बच्चों की मौत से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र में दहशत

Chandipura virus in Gujarat

Chandipura Virus Outbreak: मानसूनी मौसम के बीच गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) का आतंक चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। राज्यभर से अब तक 184 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 से अधिक मरीजों में इस वायरस की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इस जानलेवा संक्रमण के कारण 15 वर्ष से कम उम्र के लगभग 22 मासूम बच्चों की मौत होने की खबर है। इससे विशेष रूप से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों में भारी डर और दहशत का माहौल है।

अस्पतालों की स्थिति और वायरस के मुख्य लक्षण

वेबदुनिया संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, हिम्मतनगर, गांधीनगर, राजकोट, पाटन और भावनगर के सिविल अस्पतालों के बाल रोग विभाग (Pediatric Wards) चिंतित माता-पिता से भरे नजर आ रहे हैं। बच्चों में अचानक तेज बुखार, उल्टी, चक्कर आना, ऐंठन (दौरे पड़ना) और अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखने पर परिजन तुरंत अस्पताल की ओर भाग रहे हैं। सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) के काटने से फैलने वाले इस वायरस के लक्षण दिखने के बाद बच्चे की हालत बहुत तेजी से गंभीर हो जाती है, जिससे पूरे राज्य में चिंता का माहौल बना हुआ है।

15 साल से कम उम्र के बच्चों में ही क्यों फैलता है यह वायरस?

GCS मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अनुसार, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को ही निशाना बनाता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पूरी तरह विकसित नहीं होती है और मस्तिष्क को सुरक्षा देने वाला 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' कवच कमजोर होने के कारण यह न्यूरोट्रॉपिक वायरस खून से सीधे दिमाग तक पहुंचकर सूजन (Encephalitis) पैदा कर देता है। इसके अलावा, जमीन से कम ऊंचाई पर उड़ने वाली सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) जमीन पर खेलते या नीचे सोए मासूम बच्चों को आसानी से काट लेती है और बच्चों का छोटा शरीर वायरस के हमले के बाद तेज बुखार तथा ऐंठन (दौरे) जैसे गंभीर लक्षणों को तेजी से सहन नहीं कर पाता है।

स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह मुस्तैद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सीधे मार्गदर्शन में राज्य सरकार का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह से मुस्तैद होकर काम कर रहा है। सिविल अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को बिना किसी देरी के ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू (ICU) में भर्ती किया जाए। इसके साथ ही पशुपालन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सैंडफ्लाई के नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य मंत्री?

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल चांदीपुरा वायरस के खिलाफ कोई विशेष वैक्सीन (टीका) या निश्चित दवा उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों और शोधकर्ताओं की एक विशेष टीम द्वारा वैज्ञानिक तरीके से इस वायरस के खिलाफ प्रभावी दवा की खोज और नई वैक्सीन विकसित करने के लिए गहन शोध (Research) शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में बच्चों को इस खतरे से बचाया जा सके।

नागरिकों के लिए सावधानी के उपाय और अपील

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन का सहयोग करने की विनम्र अपील की है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि कच्चे मकानों या मिट्टी की दीवारों की दरारों को तुरंत भरवाएं और बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं। यदि बच्चे में बुखार या ऐंठन जैसे कोई भी प्रारंभिक लक्षण दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करने का अनुरोध किया गया है।

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।

नितिन गडकरी पर AI-डीपफेक पोस्ट को लेकर हाई कोर्ट सख्त, X, Meta और Google को दिए यह निर्देश

Nitin Gadkari gets relief from bombay high court

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए कथित मानहानिकारक, अश्लील और अपमानजनक पोस्ट हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने X और Meta को यह जानकारी देने का भी आदेश दिया है कि वे कंटेंट किसने अपलोड किए थे। ALSO READ: 'पद के लायक हूं या नहीं, जल्द बताऊंगा'… यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना क्यों हैं इतने दुखी?

 

अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह सारा कंटेंट हटाने को कहा है, जिसमें इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से जुड़े मामले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बदनाम करने वाला AI कंटेंट भी शामिल है।

 

कोर्ट ने मेटा, एक्स और गूगल को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और भविष्य में डीपफेक या आपत्तिजनक पोस्ट पर भी सख्त कदम उठाने को कहा। यह जानकारी भी मांगी गई कि यह कंटेट किसने अपलोड किए थे। अदालत ने कहा कि ये पोस्ट देखने में ही अपमानजनक, घिनौने और अश्लील हैं। ALSO READ: भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

 

अदालत ने मेटा, X कॉर्प और गूगल LLC जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से यह भी पूछा कि आपके पास इतनी टेक्नोलॉजी है, तो क्या आपके पास कोई ऐसा सिस्टम नहीं है, जो ऐसे मामलों को तुरंत पकड़ सके? अगर कोई अश्लील या अपमानजनक चीज पोस्ट करता है, तो उसे तुरंत पकड़कर हटा दिया जाना चाहिए। यह बहुत ही घिनौनी बात है। कोई जहर उगल रहा है।'

 

कोर्ट ने गडकरी से कहा कि अगर भविष्य में ऐसी कोई पोस्ट अपलोड की जाती है, जिसमें डीपफेक या एआई से बना कंटेंट भी शामिल हो, तो मंत्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क कर सकते हैं। वे इस पर कार्रवाई करेंगे।

 

PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta को 3 दिन का अल्टीमेटम, संसदीय समिति ने दी बड़ी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ घंटों के लिए फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसदीय समिति ने Meta को कड़ी चेतावनी दी है। समिति ने कहा है कि अगर कंपनी तीन दिनों के भीतर इस मामले पर उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो भारत में उसे मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) कानूनी सुरक्षा खत्म की जा सकती है।

Firstpost की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चेतावनी तब दी गई जब कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के प्रतिनिधियों से प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने के बारे में सवाल किए। यह वीडियो फेसबुक पर लगभग पांच घंटे तक उपलब्ध नहीं था। पैनल ने इस घटना के लिए मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग से जवाबदेही और व्यक्तिगत माफी की मांग की है।

बता दें कि यह विवाद फेसबुक के एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट’ (NEET) का पेपर लीक होने के विरोध में हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों पर बात की थी और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था।

संसदीय समिति ने जवाबदेही की मांग की

समिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि जब तक इस चूक के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं होगा। उन्होंने जकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को कहा और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 79 के तहत मेटा को मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन की समीक्षा की जा सकती है।

यह सुरक्षा ऑनलाइन मध्यस्थों (intermediaries) को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए जिम्मेदारी से बचाती है, बशर्ते वे जरूरी सावधानी (due diligence) के नियमों का पालन करें।

समिति ने Meta को तीन दिनों के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो समिति भारत में Meta की इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) सुरक्षा खत्म करने की सिफारिश कर सकती है।

Meta से मुश्किल सवाल

बैठक के दौरान, कमेटी के सदस्यों ने Meta से पूछा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने का फ़ैसला किसने लिया और इसे क्यों हटाया गया, जबकि प्लेटफॉर्म पर दूसरे आपत्तिजनक कंटेंट मौजूद थे। सदस्यों ने एल्गोरिदम के पक्षपाती होने और आम यूजर्स की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर प्रधानमंत्री का वीडियो भी हटाया जा सकता है, तो आम लोगों के कंटेंट की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में Meta के प्रतिनिधियों ने इस घटना पर खेद जताया और संसदीय समिति से माफी मांगी। हालांकि, समिति के सदस्यों का कहना था कि केवल माफी काफी नहीं है। इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सरकार की जांच-पड़ताल तेज हुई

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब MeitY ने Meta की ग्लोबल टीम को PM मोदी के वीडियो से जुड़े विवाद, कथित एल्गोरिदम बायस (पक्षपात), प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा के उपायों पर चर्चा के लिए बुलाया है। सरकार सोशल मीडिया कंपनी की जांच-पड़ताल तेज कर रही है, इसलिए ये बैठकें दो दिनों तक चलेंगी।

संसदीय समिति की इस बैठक में Meta, Google, YouTube और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ MeitY और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह पूरी कवायद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, ऑनलाइन सुरक्षा और भारतीय कानूनों के पालन की समीक्षा के तहत की जा रही है।

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RBI Monetary Policy: आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाया, नहीं बढ़ेगी आपके होम लोन और कार लोन की EMI

आरबीआई ने रेपो रेट का ऐलान कर दिया है। उसने इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि होम लोन और कार लोन की ईएमआई बढ़ने नहीं जा रही है। इसका अनुमान पहले से था। जानकारों का कहना था कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा जुलाई की पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेंगे।

मनीकंट्रोल के पाल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स और एनालिस्ट्स का मानना था कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखेगा। उसका रुख भी न्यूट्रल बना रहेगा। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन, ग्रोथ और कैपिटल फ्लो पर आरबीआई की कमेंट्री पर नजर रखने की जरूरत है।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक 3 जुलाई को शुरू हुई थी। इसके नतीजे आज आए। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने तीन दिन की बैठक में केंद्रीय बैेंक ने घरेलू इकोनॉमी के साथ ही वैश्विक इकोनॉमी के हालात पर चर्चा की। खासकर उसकी नजरें जियोपॉलिटिकल स्थिति पर थी।

आरबीआई ने हाल में देश में पूंजी की आवक बढ़ाने के लिए कुछ उपाय किए थे। इसका फायदा मिला है। FCNR(B) जुलाई के अंत में 60 अरब डॉलर के पार हो गया। इसका सबसे हिस्सा यानी 4.12 अरब डॉलर एसबीआई के पास आया है।

इनफ्लेशन

आरबीआई पॉलिसी में इनफ्लेशन के अपने अनुमान में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। फिर भी, उसकी कमेंट्री पर नजर रखनी होगी। इसकी वजह यह है कि जून की पॉलिसी में क्रूड में उछाल को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इनफ्लेशन के अनुमान को 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया था।

ग्रोथ के अनुमान

आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ के लिए 6.6 फीसदी का अनुमान दिया है। लेकिन, एसबीआई रिसर्च का मानना है कि अप्रैल-जून तिमाही में ग्रोथ करीब 7 फीसदी रह सकती है। जून की पॉलिसी में केंद्रीय बैंक ने ग्रोथ के अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया था।

क्रूड ऑयल

क्रूड ऑयल की कीमतों पर अभी आरबीआई की सबसे ज्यादा नजरें हैं। इसकी वजह यह है कि अब भी कीमतें लड़ाई से पहले के लेवल से काफी ज्यादा है। यह भारत के लिए चिंताजनक है।

रेपो रेट का अनुमान

जानकारों का कहना है कि भले ही आज आरबीआई रेपो रेट नहीं बढ़ाएगा। लेकिन, महंगाई बढ़ने पर वह आगे रेट बढ़ा सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे होगा। साथ ही पहले लोन ले चुके लोगों की EMI भी बढ़ जाएगी।

MP-CG में Jio का जलवा! ब्रॉडबैंड ग्राहक 21 लाख के पार, नए सस्ते Wi-Fi और TV कॉम्बो प्लान लॉन्च

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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ टेलीकॉम सर्किल में रिलायंस जियो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख के पार पहुंच गई है।भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, MP-CG सर्किल में जियोफाइबर और FWA आधारित जियोएयरफाइबर सेवाओं से 46 हजार से अधिक नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े हैं। इसी अवधि में एयरटेल के करीब 14 हजार नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े।
 

रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में सभी टेलीकॉम कंपनियों के कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 35 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें अकेले जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख से ज्यादा है। वहीं, मोबाइल सेवाओं में भी जियो का मजबूत प्रदर्शन जारी है और कंपनी के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 5.05 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

 

इस उपलब्धि के साथ जियोहोम ने डिजिटल मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट को हर घर तक पहुंचाने के लिए नए और बेहद किफायती सर्विस पैक पेश किए हैं। कंपनी ने विशेष रूप से टीवी मनोरंजन पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए ‘टीवी-ओनली’ पैक लॉन्च किया है।
 

‘टीवी-ओनली’ पैक

इस पैक के तहत ग्राहक प्रभावी रूप से मात्र 400 रुपये प्रति माह की लागत पर टीवी मनोरंजन का लाभ ले सकते हैं। यह पैक 2 महीने और 5 महीने की अवधि के विकल्पों में उपलब्ध है। इसके माध्यम से ग्राहक 1,000 से अधिक लाइव टीवी चैनलों का आनंद ले सकते हैं। इनमें 200 से अधिक HD चैनल और 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल शामिल हैं।

‘वाई-फाई-ओनली’ पैक

इसी तरह, केवल इंटरनेट की सुविधा चाहने वाले ग्राहकों के लिए ‘वाई-फाई-ओनली’ पैक भी उपलब्ध हैं। 30 Mbps स्पीड वाला पैक 2,200 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 450 रुपये प्रति माह है। वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला पैक 3,000 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 600 रुपये प्रति माह है।

 

ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जियोहोम ने ऑल-इन-वन  विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। 3-इन-1 कॉम्बो पैक में 30 Mbps की इंटरनेट स्पीड, 1,000  लाइव टीवी चैनल और 12 OTT ऐप्स की सुविधा उपलब्ध है। यह पैक 2,222 रुपये में 4 महीने के लिए लिया जा सकता है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 555 रुपये प्रति माह है।वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला कॉम्बो पैक 2,122 रुपये में 3 महीने के लिए उपलब्ध है। इसकी प्रभावी मासिक लागत 707 रुपये प्रति माह है।

 

इन नए पैक्स के माध्यम से जियोहोम ग्राहकों को उनकी जरूरतों और बजट के अनुरूप टीवी, मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट के किफायती तथा सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध करा रहा है।

VinFast ने खत्म किया इंतजार, लॉन्च किए सस्ते स्कूटर

vinfast scooter

वियतनाम की बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी VinFast ने फिलीपींस में अपने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कारोबार की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पेश किए हैं। इसके साथ ही VinFast ने दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख बाजारों में से एक फिलीपींस में इलेक्ट्रिक स्कूटर को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

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कंपनी ने भारत में Viper इलेक्ट्रिक स्कूटर और एक नई इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के डिजाइन पेटेंट दाखिल किए हैं। भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में VinFast का नया पोर्टफोलियो Ola Electric, TVS Motor, Bajaj Auto और Ather Energy जैसी कंपनियों को सीधी चुनौती दे सकता है। 

 

कंपनी का लक्ष्य पारंपरिक पेट्रोल मोटरसाइकिलों के मुकाबले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को बढ़ावा देना है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर ग्राहकों की प्रमुख चिंताओं- कम रेंज, चार्जिंग की सुविधा और वाहनों की लंबी अवधि की विश्वसनीयता- को दूर करना VinFast के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ग्राहकों के लिए जल्द ही पब्लिक टेस्ट राइड की सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रही है।

 

अगस्त से शुरू होगा शोरूम विस्तार

 

VinFast अगस्त से फिलीपींस में अपने रिटेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी शुरुआत में 21 रिटेल शोरूम खोल रही है, जबकि आने वाले समय में देशभर में 100 से ज्यादा अतिरिक्त लोकेशन शुरू करने की योजना है।

 

कंपनी का शुरुआती फोकस प्रमुख शहरी क्षेत्रों पर रहेगा। इनमें मेट्रो मनीला, मेट्रो सेबू और मेट्रो दावाओ शामिल हैं। इसके अलावा Cavite, Laguna, Batangas, Rizal और Bulacan जैसे घनी आबादी वाले उपनगरीय इलाकों में भी VinFast अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी।

 

ग्राहक कंपनी के फिलीपींस पोर्टल के जरिए नजदीकी स्टोर की जानकारी हासिल करने के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटर की टेस्ट राइड भी बुक कर सकेंगे।

 

30,000 बैटरी स्वैपिंग हब लगाने की योजना

VinFast की रणनीति में सबसे खास पहल उसका बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क है। कंपनी स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करके पूरे फिलीपींस में करीब 30,000 ऑटोमेटेड बैटरी-स्वैपिंग कैबिनेट लगाने की योजना बना रही है।

 

इस सिस्टम का उद्देश्य इलेक्ट्रिक स्कूटर को चार्ज करने में लगने वाले लंबे समय को कम करना है। यूजर की बैटरी खत्म होने पर उसे चार्ज करने के बजाय स्वैपिंग स्टेशन पर खाली बैटरी निकालकर पूरी तरह चार्ज बैटरी लगाई जा सकेगी। कंपनी के मुताबिक यह प्रक्रिया एक मिनट से भी कम समय में पूरी हो सकती है।

 

पब्लिक स्टेशन पर बैटरी स्वैप करने के लिए 35 फिलीपीन पेसो (P35) का फ्लैट सर्विस चार्ज रखा गया है। यह मॉडल रोजाना स्कूटर इस्तेमाल करने वाले शहरी यात्रियों और डिलीवरी या गिग वर्कर्स के लिए खर्च को अनुमानित और सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकता है।

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5,200W मोटर और डुअल बैटरी से लैस हैं स्कूटर

 

VinFast ने शुरुआत में तीन इलेक्ट्रिक स्कूटर मॉडल पेश किए हैं। इन सभी में 5,200 वॉट BLDC इन-व्हील मोटर आर्किटेक्चर दिया गया है। स्कूटर में सीट के नीचे दो बैटरी स्लॉट हैं, जिनमें 1.5 kWh की दो Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरियां लगाई जा सकती हैं।

 

मोटर और कंट्रोलर को IP67 रेटिंग मिली है। कंपनी के अनुसार इससे स्कूटर पानी और धूल से सुरक्षित रहता है और करीब आधा मीटर गहरे पानी में भी 30 मिनट तक संचालन किया जा सकता है। यह फीचर फिलीपींस जैसे भारी बारिश और जलभराव वाले शहरी इलाकों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है।

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VinFast Evo की टॉप स्पीड 80 

 

कंपनी की नई रेंज में VinFast Evo को एंट्री-लेवल मॉडल के तौर पर पेश किया गया है। इसे शहरी यात्रियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है और इसमें पारंपरिक स्कूटर के साथ आधुनिक यूरोपीय डिजाइन एलिमेंट्स का इस्तेमाल किया गया है। Evo की टॉप स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। डुअल बैटरी सेटअप के साथ यह सामान्य परिस्थितियों में 150 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है।

 

बैटरी सब्सक्रिप्शन मॉडल के तहत इसकी शुरुआती कीमत 70,000 फिलीपीन पेसो (P70,000) रखी गई है, जो करीब 1,210 अमेरिकी डॉलर के बराबर है। सिंगल बैटरी के साथ स्कूटर की कीमत P82,700 और डुअल बैटरी पैकेज के साथ P95,400 है। VinFast का मानना है कि रिटेल नेटवर्क के विस्तार, टेस्ट राइड और बड़े बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए फिलीपींस में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर अपनाने की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है।

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक्ट्रेस तृषा को लेकर विवादित बयान पर विवादों में घिरे

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर में DMK की एक रैली के दौरान एक्ट्रेस तृषा के बारे में विवादित टिप्पणी करने के आरोप में चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से विपक्षी DMK और सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब तंजावुर ईस्ट पुलिस ने एक विरोध सभा के दौरान DMK नेता की टिप्पणियों को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस उदयनिधि स्टालिन के घर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। इसके बाद उनके घर के बाहर DMK कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। DMK ने सरकार पर उदयनिधि स्टालिन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया। मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें विधानसभा के चल रहे सत्र में हिस्सा लेने से रोकना था।

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को राष्ट्रीय महिला आयोग में DMK यूथ विंग के सेक्रेटरी और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत 3 अगस्त को तंजावुर में DMK के एक प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर की गई है। इसे फिल्म एक्ट्रेस पर निशाना साधकर कही गई बात माना जा रहा है।

विवादित बयान पर बवाल

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन सोमवार को अभिनेत्री तृषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए। उदयनिधि ने कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाए।

पीटीआई के मुताबिक, उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘द्विअर्थी’ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज होने के बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

BJP ने बताया शर्मनाक बयान

तमिलनाडु की BJP इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने X पर कहा कि उदयनिधि की कथित द्विअर्थी टिप्पणी घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक है। BJP नेता ने कहा, “सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।”

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उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। तिरुपति ने कहा, “इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (DMK विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।”

गौतम गंभीर के कोचिंग स्टाइल से खुश नहीं BCCI! सीनियर प्लेयर्स ने की शिकायत, अहम होगी श्रीलंका सीरीज

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई से अब गौतम गंभीर को पहले जैसा मजबूत समर्थन नहीं मिल रहा है। पिछले एक साल के मुकाबले उनकी स्थिति बदल गई है और टीम के प्रदर्शन को लेकर उन पर दबाव बढ़ गया है। टीम के हालिया प्रदर्शन के बाद बोर्ड के कुछ अधिकारियों और टीम से जुड़े कुछ लोगों के बीच उनके काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, बोर्ड और टीम से जुड़े कुछ अहम लोगों का भरोसा भी पहले जैसा नहीं रहा।

गंभीर से खुश नहीं बीसीसीआई

cricblogger.com की रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर कभी भी हार की जिम्मेदारी खुद लेते हैं, वह हार का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ते हैं। बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों का मानना है कि टीम की हार के बाद गौतम गंभीर अक्सर खिलाड़ियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) या सपोर्ट स्टाफ को जिम्मेदार ठहराते हैं। वहीं टीम प्रबंधन के फैसलों की जिम्मेदारी कम ही लेते हैं। रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि इस सोच का असर अब भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में भी देखने को मिल रहा है। वहीं टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ियों ने निजी तौर पर पूर्व क्रिकेटरों और बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों के सामने गौतम गंभीर के कोचिंग के तरीके पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

श्रीलंका दौरा होगा अहम

रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई के भीतर गौतम को लेकर माहौल पहले जैसा नहीं रहा है। ऐसे में श्रीलंका दौरा गौतम गंभीर के लिए काफी अहम माना जा रहा है। अगर इस सीरीज में भी टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, तो उनके कामकाज पर सवाल और बढ़ सकते हैं। हाल के टेस्ट मुकाबलों और इंग्लैंड दौरे में खराब प्रदर्शन के बावजूद गंभीर को उनके 2027 तक के कॉन्ट्रैक्ट का सहारा है। माना जा रहा है कि विश्व कप से पहले बीसीसीआई जल्दबाजी में मुख्य कोच को हटाने जैसा बड़ा फैसला नहीं करेगा।

कब उठे थे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार के बाद गौतम गंभीर पर ज्यादा सवाल नहीं उठे थे, क्योंकि उस समय हार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से खिलाड़ियों पर डाली गई थी। बाद में उनकी आलोचना तब बढ़ी जब उन्होंने टीम के खराब प्रदर्शन की वजह बदलाव के दौर (ट्रांजिशन) को बताया। आलोचकों ने इस पर सवाल उठाए, क्योंकि अपने कार्यकाल की शुरुआत में गंभीर खुद कह चुके थे कि टीम में किसी तरह का ट्रांजिशन नहीं चल रहा है।