JNU में प्रोफेसर पर गंभीर आरोप! 10 छात्राओं ने की यौन उत्पीड़न की शिकायत; ICC ने शुरू की जांच

JNU Sexual Harassment: राजधानी दिल्ली में स्थित प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक प्रोफेसर के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों ने कैंपस में हलचल बढ़ा दी है। कम से कम 10 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें की हैं। सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी की की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) आरोपों की जांच कर रही है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, पीड़ितों की तरफ से ये शिकायतें लगभग एक महीने पहले की गई थीं।

जानकारी के मुताबिक, छात्राओं की तरफ से ये शिकायतें करीब एक महीने पहले ICC के समक्ष दर्ज कराई गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि प्रोफेसर ने कुछ छात्राओं को यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित अपने आवास पर आयोजित एक पार्टी में बुलाया। वहां कथित तौर पर छात्राओं के प्रति अनुचित यौन व्यवहार और आपत्तिजनक पहल किए गए। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रोफेसर ने कक्षाओं के दौरान कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

सूत्रों ने TOI को बताया, “कैंपस में रहने वाले इस प्रोफेसर ने छात्राओं को अपने घर बुलाया और यौन संबंध बनाने की कोशिश की। कुछ शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने क्लास के दौरान अश्लील या अनुचित टिप्पणियां कीं। प्रोफेसर के खिलाफ हाल ही में एक और शिकायत दर्ज होने के बाद सीनियर छात्र भी इसी तरह के आरोप लेकर सामने आए।”

शिकायत के बाद सामने आए कई छात्र

मामले में शुरुआती शिकायत दर्ज होने के बाद कई वरिष्ठ छात्र शिकायतकर्ताओं के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कथित तौर पर सीनियर प्रोफेसर के व्यवहार को लेकर चिंता जताई। कुछ छात्रों ने कथित तौर पर इसी तरह के अनुभव या आरोप भी सामने रखे हैं। हालांकि, फिलहाल इन सभी आरोपों की ICC द्वारा जांच की जा रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

JNU प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं

मामले को लेकर अभी तक JNU प्रशासन या कुलपति ऑफिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, छात्र संगठन की ओर से भी फिलहाल मामले पर कोई डिटेल्स अपडेट शेयर नहीं किया गया है। चूंकि मामला जांच के स्तर पर है, इसलिए प्रोफेसर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ICC की जांच जारी है। मामले में यूनिवर्सिटी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी की VC ने क्या कहा?

प्रोफेसर ने शिकायतों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह मामला आंतरिक है। कथित आरोपी प्रोफेसर ने कहा कि मामले की अभी जांच चल रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ICC के सामने पेश हुए या उन्होंने कोई बयान दर्ज कराया, तो संबंधित प्रोफेसर ने कहा कि उन्हें किसी भी शिकायत के बारे में जानकारी नहीं है।र उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। वहीं, JNU की VC शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने TOI को बताया कि यौन उत्पीड़न के आरोपों को ICC देखती है। उन्होंने कहा कि VC इस कमिटी की सदस्य नहीं होती हैं।

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Shreya Ghoshal: श्रेया घोषाल ने बॉलीवुड की ‘पुरुष-प्रधान’ म्यूजिक इंडस्ट्री पर सवाल उठाए, बोलीं- यह Patriarchal और जेंडर बेस्ड मामला है

Shreya Ghoshal: बॉलीवुड के कुछ सबसे बड़े हिट गानों में ऐसे बोल भी रहे हैं, जिन पर महिलाओं को आपत्ति हो सकती है। श्रेया घोषाल का कहना है कि उन्होंने पहले भी ऐसे गाने करने से मना किया है, भले ही वे बाद में बहुत लोकप्रिय हुए हों। इस मशहूर प्लेबैक सिंगर के लिए, यह मामला कुछ आपत्तिजनक लाइनों से कहीं बड़ा है, क्योंकि यह उस म्यूजिक इंडस्ट्री की ओर इशारा करता है, जिसे वह आज भी “पुरुष-प्रधान” मानती हैं।

‘द मेल फेमिनिस्ट पॉडकास्ट’ के साथ एक इंटरव्यू में, श्रेया घोषाल से उन गानों को मना करने के बारे में पूछा गया जिनके बोल आपत्तिजनक थे। सिंगर ने कहा, “गाने के बोल तो एक बात है। इसके अलावा कंपोज़िशन और गाने का अंदाज़ भी मायने रखता है। कुछ ऐसे लोकप्रिय गाने थे जो बहुत सफल रहे, लेकिन मैंने उन्हें गाने से मना कर दिया।

अच्छी बात यह है कि अब ऐसे गाने काफी कम हो गए हैं। एक समय के बाद, फिल्मों में गाने ऐसे हो गए कि महिला सिंगर्स को सिर्फ़ उसी तरह के गाने दिए जाने लगे। बाकी गाने पुरुषों के होते थे, और कुछ रोमांटिक डुएट होते थे।”

उन्होंने आगे कहा, “तो हमें यह देखना होगा कि यह सब कहां से शुरू हो रहा है। यह समस्या गायिकाओं, अभिनेत्रियों और इस इंडस्ट्री से जुड़े हर व्यक्ति के लिए है। यह थोड़ा पितृसत्तात्मक और जेंडर-आधारित मामला है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अब इंडिपेंडेंट म्यूज़िक की वजह से इसमें बदलाव आ रहा है। फिर भी, मुझे लगता है कि यह बहुत ज़्यादा पुरुष-प्रधान है। मैंने पहले भी इस बारे में खुलकर बात की है, और मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि इसे किस नज़रिए से देखा जाता है – अच्छा या बुरा।”

वहीं, 2025 में लिली सिंह से बातचीत के दौरान, श्रेया ने माना था कि उन्होंने अपने करियर में कुछ बोल्ड गाने गाए हैं, जिनमें ‘चिकनी चमेली’ भी शामिल है। हालांकि, उन्होंने कहा कि आज वह ऐसे गाने नहीं गाएंगी। श्रेया ने कहा था, “सेंसुअल या सेक्सी होने और पूरी तरह से ऑब्जेक्टिफ़ाई होने या आम तौर पर महिलाओं को ऑब्जेक्टिफ़ाई करने के बीच एक बहुत बारीक फ़र्क होता है।

समय के साथ मैं ज़्यादा जागरूक इसलिए हुई हूं क्योंकि मैं छोटी बच्चियों को इन गानों का मतलब समझे बिना गाते हुए देखती हूं। वे बस इन गानों पर डांस करती हैं और मेरे पास आकर कहती हैं, ‘ओह, हमें आपका गाना बहुत पसंद है! क्या हम आपके लिए इसे गा सकते हैं?’ और मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। पांच या छह साल की छोटी बच्ची जब ऐसे बोल गाती है तो यह सही नहीं लगता।”

Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारतीय क्रिकेटरों को मिलेंगे अलग होटल? IOA ने BCCI के सामने रखी ये शर्त

जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 से पहले भारतीय क्रिकेट टीमों के ठहरने और सुविधाओं को लेकर मामला चर्चा में है। आयोजकों ने दोनों टीमों के लिए होटल तय कर दिए हैं, लेकिन BCCI अभी इन व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया है। वहीं इसी बीच भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) ने साफ किया कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अलग से होटल की व्यवस्था नहीं किया जाएगा।

अगर BCCI अपने खिलाड़ियों के लिए अलग जगह चाहता है, तो खिलाड़ियों की पूरी व्यवस्था बोर्ड को खुद संभालनी होगी। इसमें होटल का खर्च, खाने-पीने, आने-जाने और मैच स्थल तक खिलाड़ियों को पहुंचाने जैसी जिम्मेदारियां शामिल होंगी। ये व्यवस्था जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के दौरान लागू हो सकती है।

BCCI को लेनी होगा जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, IOA ने साफ किया कि वह एशियन गेम्स के दौरान क्रिकेट टीम के लिए अलग होटल की व्यवस्था नहीं करेगा। अगर BCCI को आयोजन समिति की ओर से दिया गया होटल सुविधाजनक नहीं लगता है, तो वह खिलाड़ियों के लिए अपनी पसंद की जगह बुक कर सकता है। लेकिन, होटल चुनने से लेकर खिलाड़ियों के खाने और आने-जाने जैसी सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी BCCI को ही संभालनी होगी।

CEO रघुराम अय्यर ने क्या कहा

TOI से बात करते हुए IOA के CEO रघुराम अय्यर ने कहा, “BCCI के CEO हेमांग अमीन ने हमसे संपर्क किया और हमारी अच्छी बातचीत हुई। वे सुविधाओं का आकलन करने के लिए जापान में एक एडवांस टीम भेजने पर विचार कर रहे हैं। IOA को इससे कोई दिक्कत नहीं है। अपने आकलन के आधार पर, वे तय कर सकते हैं कि वे आयोजक की सुविधाओं का इस्तेमाल करना चाहते हैं या अपना इंतजाम खुद करना चाहते हैं।”

एक कमरे में होंगे दो खिलाड़ी

फिलहाल एशियन गेम्स के आयोजकों ने भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों के लिए होटल तय कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष टीम को तीन स्टार APA होटल नागोया एकिमाए और महिला टीम को चार स्टार मेइतेत्सु ग्रैंड होटल में ठहराया जाएगा। दोनों होटलों में जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेटरों को आमतौर पर मिलने वाली पांच स्टार सुविधा के मुकाबले ये एक स्तर नीचे हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए दो लोगों के एक कमरे में रहने की व्यवस्था की गई है, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

BCCI एक टीम भेजेगी नेपाल

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम के लिए एशियन गेम्स से पहले यात्रा और ठहरने से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। टीम 13 सितंबर को दुबई में एशिया कप खत्म करने के बाद 14 सितंबर को जापान के नागोया के लिए रवाना होगी, जहां उसका अभियान 17 सितंबर से शुरू होना है। इससे पहले BCCI एक टीम को जापान भेजेगा, जो होटल, क्रिकेट मैदान और खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध दूसरी सुविधाओं की जांच करेगी। इसके बाद ही खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

गुजरात सरकार का बड़ा ऐलान: सेवानिवृत्ति के बाद NPS से निकासी के नियमों में बदलाव

गुजरात सरकार का बड़ा ऐलान: सेवानिवृत्ति के बाद NPS से निकासी के नियमों में बदलाव

pension

गुजरात सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए सर्कुलर के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को पेंशन राशि की निकासी और एन्युइटी (Annuity) खरीदने के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा, सरकारी क्षेत्र के NPS सदस्यों को सेवानिवृत्ति के बाद भी 85 वर्ष की आयु तक इस योजना से जुड़े रहने की विशेष छूट दी गई है। ALSO READ: सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका: GSRTC में 2510 हेल्पर पदों पर ऑनलाइन भर्ती शुरू

 

8 लाख तक की राशि पर पूर्ण निकासी की छूट 

नए नियमों के अनुसार, सामान्य रूप से सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली कुल पेंशन राशि में से कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से की एन्युइटी खरीदना अनिवार्य होता है। हालांकि, छोटे निवेशकों को राहत देते हुए यह घोषणा की गई है कि यदि कुल संचित पेंशन राशि 8 लाख रुपए तक होगी, तो कर्मचारी को पूरी राशि एकमुश्त (एक साथ) निकालने का विकल्प मिलेगा। 

 

8 से 12 लाख रुपए तक की राशि के लिए भुगतान के नए विकल्प

यदि संचित पेंशन राशि 8 लाख से 12 लाख रुपए के बीच है, तो कर्मचारी अधिकतम 6 लाख रुपए तक की राशि एकमुश्त निकाल सकेंगे। जबकि शेष राशि के लिए कम से कम छह वर्षों तक समय-समय पर (किस्तों में) भुगतान प्राप्त करने या एन्युइटी खरीदने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी अपनी एन्युइटी खरीद और एकमुश्त राशि की निकासी को 85 वर्ष की आयु तक टाल (Defer) भी सकते हैं। ALSO READ: GIDC प्लॉट धारकों के लिए बड़ी राहत: राज्य सरकार ने घोषित की 'GIDC एम्नेस्टी स्कीम'
 

स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति (VRS) और अन्य विशेष प्रावधान 

स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति (VRS) या अन्य निर्धारित मामलों में, कर्मचारी को अपनी कुल संचित राशि का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा एन्युइटी के लिए आवंटित करना होगा। लेकिन यदि ऐसी स्थिति में कुल संचित राशि 5 लाख या उससे कम है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकालने की अनुमति होगी। इन नए सुधारों के माध्यम से NPS के सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के सदस्यों के लिए निकासी के अलग-अलग और स्पष्ट प्रावधान लागू किए गए हैं।

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

threat after nepal disaster in india

प्रभाकर मणि तिवारी

भारत में खासकर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बनने वाली पनबिजली परियोजनाएं, इनके तहत बनने वाले बांध और सुरंगों से पैदा होने वाले खतरे अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। लेकिन अब नेपाल के भयावह हादसे में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। उनको आशंका है कि जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कभी भी नेपाल जैसे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: जलवायु न्याय की मांग कर रहा है आपदा प्रभावित नेपाल

 

हाल के वर्षों में इन राज्यों में भूस्खलन और सुरंग धंसने की अलग-अलग घटनाओं में कई लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ों की कटाई करके ऐसी परियोजनाएं बनाने का काम जारी है। इनमें खासकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है।

 

अरुणाचल का संकट

चीन सरकार अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाके में एक विशालकाय बांध बना रही है। बीते साल इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब डेढ़ सौ अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना के वर्ष 2033 तक पूरा होने का लक्ष्य है। विशेषज्ञ इसे वाटर बम बताते हैं। लेकिन भूवैज्ञानिकों की असली चिंता इस परियोजना का आकार नहीं बल्कि इसकी लोकेशन है। यह मेडॉग परियोजना उस फॉल्ट जोन के पास स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसकी वजह से यह इलाका भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील है। बीते साल भी तिब्बत के शिगात्से इलाके में रिक्टर स्केल पर 7.1 की तीव्रता वाले एक भूकंप के कारण वहां 120  से ज्यादा लोगों की मौत के अलावा कुछ बांधों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थी।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाले बांध को भूकंपरोधी तकनीक से बनाने के बावजूद किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जमीन धंसने और चट्टानों के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बांध पर तो खास असर नहीं होगा। लेकिन नदी के निचले हिस्से में स्थित भारतीय इलाकों को नेपाल जैसी आपदा झेलनी पड़ सकती है। इससे नदी का बहाव बदल सकता है। इससे पहले भी ऐसी कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में तिब्बत में एक बांध टूटने से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ आ गई थी। इससे पहले वर्ष 2017 में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी का पानी अचानक काला पड़ गया था। तब इसके लिए तिब्बत में खनन गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया था। यही सियांग नदी असम में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।

 

विशेषज्ञों ने चेताया है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाला विशालकाय बांध पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर तबाही ला सकता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

भारत की जवाबी रणनीति

इसके असर की काट के लिए भारत सरकार ने भी राज्य के अपर सियांग में 11 हजार मेगावाट क्षमता वाली एक बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का फैसला किया है। लेकिन स्थानीय लोग और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो जाएगा। अरुणाचल प्रदेश में आधा दर्जन पनबिजली परियोजनाएं चल रही हैं जबकि करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी परियोजनाओं का काम चल रहा है। इनमें दिबांग, अपर सियांग, लोअर सुबनसिरी और इटालीन जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार ने 2025-35 को 'पनबिजली का दशक' घोषित किया है।

 

भूवैज्ञानिकों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में हिमालय की संरचना भी उस नेपाल-तिब्बत सीमा जैसी है जो हाल में प्राकृतिक हादसे का शिकार हुआ है। खासकर इटालीन परियोजना तो भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाके में है। वहां ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा भी बना हुआ है।

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देश भर में ऐसे 195 ग्लेशियल झीलों की पहचान की है जिनके फटने से बाढ़ आने का खतरा है। किसी ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील को रोकने वाली बर्फ, चट्टान या मलबे जैसी प्राकृतिक दीवार के अचानक टूटने के बाद आने वाली बाढ़ को 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' या 'ग्लोफ' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 32 झीलें अकेले अरुणाचल में ही हैं।

 

क्या है विशेषज्ञों का आकलन?

पूर्वोत्तर के मशहूर भूवैज्ञानिक डा. प्रमोद चंद्र सरमा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हिमालय प्राकृतिक रूप से एक नाजुक पर्वतीय प्रणाली है।इसका पूर्वी क्षेत्र अभी युवा है। इस इलाके में हमेशा भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बना रहता है। जलवायु परिवर्तन इस खतरे को और बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पनबिजली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बनने वाले बांधों ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है।”

 

पर्यावरणविद डीके अपांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “राज्य में प्रस्तावित तमाम बड़ी परियोजनाएं भूकंप के लिहाज बेहद संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं। चीनी बांध परियोजना ने प्राकृतिक विपदा के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।”

 

सियांग बहुउद्देशीय परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे सियांग इंडीजीनस फार्म्स फोरम (एसआईएफएफ)  के प्रमुख जेजांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “अपर सियांग इलाका चीनी सीमा से सटा है। इसका निर्माण पूरा होने पर यहां भी नेपाल जैसा हादसा होने का खतरा बढ़ जाएगा।” ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या हैं बचाव के उपाय?

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अर्ली-वार्निंग सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ऐसे हादसे के बारे में समय रहते जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इलाके में मौसम और हिमालय की ऊंचाई पर बने ग्लेशियरों और झीलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी का तंत्र विकसित करना होगा।

 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताते हैं, “सरकार अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम कर रही है। पहले चरण में 46 बेहद संवेदनशील बांधों में से 40 में यह प्रणाली लागू की जा चुकी है। चरणबद्ध तरीके से दूसरी परियोजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।

 

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 में कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बीते करीब तीन दशकों के दौरान कार्बन का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले दो देशों, भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के ग्लेशियरों में जमा बर्फ की मात्रा एक-तिहाई कम हो गई है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है कि भौगोलिक रूप से अस्थिर हिमालयी क्षेत्र में सियांग और उसके जैसे बड़े बांधों का निर्माण उचित है या नहीं?

हिमालय के ग्लेशियर सिर्फ बढ़ते तापमान से नहीं जूझ रहे:बर्फ पर जमी कालिख सूरज की गर्मी सोख रही, नेपाल जैसी तबाही का खतरा बढ़ा

हिमालय के ग्लेशियरों पर अब सिर्फ बढ़ते तापमान का खतरा नहीं है। हवा में मौजूद कालिख और धूल भी बर्फ के पिघलने की रफ्तार बढ़ा रही है। गाड़ियों, कोयला बिजलीघरों, फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों, घरों के चूल्हों और जंगलों व खेतों में लगने वाली आग से निकलने वाले कण हवा के साथ ऊंचे पहाड़ों तक पहुंचते हैं और ग्लेशियरों की सफेद सतह पर जम जाते हैं। बर्फ पर जमी कालिख सूरज की गर्मी ज्यादा सोखती है। इससे बर्फ जल्दी पिघलने लगती है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के साथ प्रदूषण का यह असर ग्लेशियरों को कमजोर और अस्थिर कर सकता है। नेपाल इसका चिंताजनक उदाहरण है। यहां हाल में ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक बाढ़ आई और भारी नुकसान हुआ। इस घटना की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ता तापमान और ग्लेशियरों पर जमा प्रदूषण ऐसे हादसों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। सफेद बर्फ पर कालिख पड़ते ही पिघलना क्यों बढ़ जाता है? साफ बर्फ सूरज की करीब 90% रोशनी वापस अंतरिक्ष में भेज देती है। इसलिए वह सूरज की गर्मी का बड़ा हिस्सा सोखने से बच जाती है। जब बर्फ पर कालिख यानी ब्लैक कार्बन जमती है तो उसकी सफेदी कम हो जाती है। सतह सूरज की ज्यादा ऊर्जा सोखने लगती है और तेजी से गर्म होती है। इससे बर्फ के पिघलने की रफ्तार भी बढ़ जाती है। एक मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, 2007 से 2016 के बीच हिमालय में ग्लेशियरों के कुल बर्फ नुकसान में दक्षिण एशिया से आया ब्लैक कार्बन एक-तिहाई तक जिम्मेदार हो सकता है। यानी ग्लेशियरों पर असर सिर्फ बढ़ते तापमान का नहीं है। बर्फ पर जम रही कालिख भी उसके गर्म होने और पिघलने में भूमिका निभा रही है। पाकिस्तान से उठी कालिख भी हिमालय तक पहुंच रही सैटेलाइट डेटा के अध्ययन से पता चला है कि पाकिस्तान के औद्योगिक मैदानी इलाकों से निकलने वाला ब्लैक कार्बन और खनिज धूल हवा के साथ ऊंचे हिमालयी ग्लेशियरों तक पहुंच सकता है। ये महीन कण ग्लेशियर की सतह पर जमते हैं और बर्फ को गहरा कर देते हैं। इससे सूरज की ज्यादा ऊर्जा सोखी जाती है और पिघलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। तेजी से पिघलने वाला पानी ग्लेशियर की दरारों के रास्ते अंदर भी जा सकता है। इससे बर्फ के भीतर पानी के रास्ते बन सकते हैं और ग्लेशियर की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। अगर कमजोर ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आता है तो फ्लैश फ्लड यानी अचानक तेज बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। प्रदूषण सिर्फ बर्फ को काला नहीं करता ब्लैक कार्बन का असर ग्लेशियर की सतह तक सीमित नहीं है। हवा में मौजूद कालिख सूरज की गर्मी सोखकर पहाड़ों के ऊपर के वातावरण को गर्म कर सकती है और बादलों के बनने के तरीके को भी प्रभावित कर सकती है। इससे कुछ इलाकों में बर्फबारी कम होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में ग्लेशियर पर दोहरा दबाव पड़ता है। एक तरफ पुरानी बर्फ तेजी से पिघलती है और दूसरी तरफ उसकी भरपाई के लिए नई बर्फ कम मिल सकती है। कालिख के बड़े स्रोत कौन से हैं? दक्षिण एशिया में ब्लैक कार्बन के प्रमुख स्रोतों में पेट्रोल-डीजल वाहन, कोयला आधारित बिजलीघर और उद्योग, ईंट भट्ठे, लकड़ी और ठोस ईंधन से चलने वाले पारंपरिक चूल्हे, जंगलों की आग और फसल जलाना शामिल हैं। इनसे निकले महीन कण हवाओं के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं। यानी ग्लेशियर से हजारों किलोमीटर दूर पैदा हुआ प्रदूषण भी हिमालय की बर्फ तक पहुंच सकता है। अच्छी खबर: कालिख कम करने का असर जल्दी दिखता है ब्लैक कार्बन के मामले में राहत की एक वजह भी है। कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले यह वातावरण में बहुत कम समय तक रहता है। आमतौर पर कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक। इसलिए इसके उत्सर्जन में कमी लाने पर असर जल्दी दिखाई दे सकता है। इसका एक उदाहरण 2020 का कोविड लॉकडाउन है। 2023 में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने उस दौरान हुए प्रदूषण में कमी का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि प्रदूषण घटने से हिमालय की बर्फ ज्यादा चमकीली हुई और उसके पिघलने की दर 40% तक कम हो गई। इससे पता चलता है कि वाहनों, उद्योगों और दूसरे स्रोतों से निकलने वाली कालिख को कम करके ग्लेशियरों पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक जल्दी घटाया जा सकता है। हिमालय का संकट सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं हिमालय के ग्लेशियर भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम हैं। इनसे निकलने वाला पानी कई बड़ी नदियों के प्रवाह में योगदान देता है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से कुछ समय के लिए नदियों में पानी बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय तक यही रफ्तार बनी रही तो ग्लेशियरों में जमा बर्फ घटती जाएगी। इससे भविष्य में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ग्लेशियरों के पास बनी झीलों के फटने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचले इलाकों में भारी तबाही ला सकती है। —————— यह खबर भी पढ़ें… हिमालय में 7 मिनट में तबाही, चीन की तैयारी नाकाम:पिछली बार झील फटी थी, इस बार ग्लेशियर ही टूट गया 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर हिमालय की एक घाटी में ऐसी तबाही आई, जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हैरानी की बात ये थी कि चीन इस इलाके में ऐसी आपदा से निपटने की तैयारी पहले ही कर चुका था। पूरी खबर पढ़ें…

एक ट्रेन, कई खूबसूरत मंजिलें! वंदे भारत से बनाएं परफेक्ट वीकेंड प्लान

वीकेंड पर आप दिल्ली की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर करके कम समय में एक अच्छी छोटी ट्रिप का मजा लिया जा सकता है। ट्रेन का आरामदायक सफर आपका समय भी बचाता है और सफर की थकान भी कम करता है।

कम दिनों की छुट्टी में ऐसी जगह चुनना सही रहता है, जहां घूमने के लिए ज्यादा समय मिले और सफर में पूरा दिन न निकल जाए। वीकेंड ट्रिप के लिए ट्रेन से ट्रिप करना इसलिए भी अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि आप आराम से सफर करते हुए अपने परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं।

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1. चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा

वीकेंड में कम समय में घूमने के लिए चंडीगढ़ एक अच्छा ऑप्शन है। दिल्ली से चंडीगढ़ की वीकेंड ट्रिप के लिए 22447 वंदे भारत एक्सप्रेस सुविधाजनक ऑप्शन है। ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 5:50 बजे चलकर करीब 2 घंटे 48 मिनट में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (CDG) सुबह 8:38 बजे पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹855 और Executive Chair Car का करीब ₹1,585 है। एक दिन की ट्रिप में सुबह रॉक गार्डन और रोज गार्डन घूमने के बाद सुखना झील घूम सकते हैं। शाम को झील के आसपास समय बिताने के बाद सेक्टर-17 मार्केट में शॉपिंग और लोकल फूड का आनंद लिया जा सकता है। अगर 2 दिन का समय है, तो दूसरे दिन कैपिटल कॉम्प्लेक्स और शहर के आसपास की जगहें देख सकते हैं।

 

2. देहरादून, उत्तराखंड

पहाड़ों और हरियाली के बीच छोटा-सा ब्रेक लेना चाहते हैं तो देहरादून का प्लान बनाया जा सकता है। देहरादून जाने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस 22457 दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल (ANVT) से शाम 5:50 बजे चलती है और करीब 4 घंटे 45 मिनट में रात 10:35 बजे देहरादून (DDN) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,075 और Executive Chair Car का करीब ₹1,900 है। शहर में एक दिन हो तो रॉबर्स केव, सहस्त्रधारा और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आसानी से घूमे जा सकते हैं। शाम को किसी लोकल कैफे में बैठकर देहरादून का माहौल एंजॉय करें। दो दिन मिल रहे हों तो अगले दिन मसूरी की ओर निकलना बेहतर रहेगा।

 

3. अजमेर, राजस्थान

अगर वीकेंड पर धार्मिक स्थलों के साथ राजस्थान की संस्कृति देखना चाहते हैं, तो अजमेर को चुन सकते हैं। दिल्ली से अजमेर जाने के लिए वंदे भारत का रूट जयपुर होते हुए अजमेर तक जाता है। इस यात्रा में करीब 5 घंटे 15 मिनट लगते हैं और AC Chair Car का किराया लगभग ₹1,150 से शुरू होने की जानकारी अवेलेबल है। स्टेशन पहुंचने के बाद अजमेर शरीफ दरगाह से घूमने की शुरुआत करें और फिर अढ़ाई दिन का झोपड़ा देखा जा सकता है। दिन के दूसरे हिस्से में आना सागर झील के आसपास वक्त बिताएं और शाम को स्थानीय बाजार में राजस्थानी मिठाइयों और खाने का स्वाद लें। दो दिन का प्लान है तो अगले दिन अजमेर से पुष्कर जाकर पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर घूम सकते हैं।

 

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी की यात्रा बाकी जगहों से थोड़ी लंबी है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए यह खास डेस्टिनेशन है। वाराणसी के लिए 22436 वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 6:00 बजे चलती है और करीब 8 घंटे में दोपहर 2:00 बजे वाराणसी जंक्शन (BSB) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,835 और Executive Chair Car का करीब ₹3,385 है। यहां एक दिन का समय हो तो काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट को प्राथमिकता दें। शाम होते ही दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती देखना न भूलें। पुरानी गलियों में घूमकर बनारसी खान-पान का स्वाद भी लिया जा सकता है।

 

5. जयपुर, राजस्थान

शाही महलों, किलों और बाजारों से भरी जयपुर की यात्रा दिल्ली से वीकेंड पर आसानी से की जा सकती है। जयपुर के लिए दिल्ली से वंदे भारत की ट्रिप करीब 3 घंटे 37 मिनट से 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकती है। मौजूदा शेड्यूल में एक वंदे भारत दिल्ली कैंट (DEC) से दोपहर 3:10 बजे चलकर शाम 7:00 बजे जयपुर जंक्शन (JP) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹835 और Executive Chair Car का करीब ₹1,610 है। दूसरी वंदे भारत दिल्ली कैंट से शाम 6:28 बजे चलकर रात 10:05 बजे जयपुर पहुंचती है। एक दिन में आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर को कवर किया जा सकता है। घूमने के बाद शाम का समय जौहरी बाजार या बापू बाजार में शॉपिंग के लिए रखें और दाल बाटी चूरमा, प्याज कचौरी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें।

70 साल में पाक क्रिकेट का सबसे बुरा दौर, राशिद लतीफ ने टीम को लताड़ा

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और उसके चेयरमैन मोहसिन नक़वी की कड़ी आलोचना की है। यह आलोचना तब हुई जब लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड के हाथों राष्ट्रीय टीम को 194 रनों की करारी हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड के मौजूदा दौरे पर पाकिस्तान का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है और वे शुरुआती दो टेस्ट मैचों में से किसी में भी टक्कर का खेल नहीं दिखा पाए हैं।

उनकी इस हालिया हार ने टीम और प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा है कि ब्रिटिश मीडिया ने इस पाकिस्तानी टीम को “पिछले 50 वर्षों की सबसे खराब पाकिस्तानी टीम” करार दिया है। लतीफ़ इस बात से सहमत थे, लेकिन उनका कहना था कि समस्याएँ सिर्फ़ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पीसीबी को भी इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ने कहा कि बोर्ड का खराब प्रशासन, सिलेक्शन कमिटी और कोचिंग सेटअप – इन सभी ने मैदान पर पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन में भूमिका निभाई है। लतीफ़ ने जियो न्यूज़ पर कहा, “हर कोई पाकिस्तान टीम के बारे में बात कर रहा है और कह रहा है कि यह पिछले 50 वर्षों में दौरा करने वाली सबसे खराब टीम है। लेकिन कोई भी इस बारे में बात नहीं कर रहा है कि मौजूदा बोर्ड पिछले 70 वर्षों में सबसे खराब है। कोई भी सबसे खराब सिलेक्शन कमिटी और कोचों के बारे में बात नहीं कर रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप इन सभी मुद्दों को एक साथ देखें, तो आपको अपने सवाल का जवाब मिल जाएगा। आपको पता चल जाएगा कि इस टीम को किसने बर्बाद किया है। अब आप लगातार हार रहे हैं। यह सबसे खराब क्रिकेट बोर्ड है, यह एक सच्चाई है।”

थाईलैंड के खिलाफ बल्लेबाजी कैसे ढह गई? एशिया कप के पहले मैच पर क्या बोली शेफाली

Shefali Verma

भारतीय सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने कहा कि थाईलैंड की कमजोर टीम के खिलाफ महिला एशिया कप के पहले मैच में 94 रन की आसान जीत के बावजूद टीम की बल्लेबाजी इकाई को टर्न लेती पिचों पर अपनी कमियों का आकलन करना होगा।

शेफाली ने 36 गेंदों में 64 रन बनाकर भारत को अच्छी शुरुआत दी। उनकी पारी में आठ चौके और तीन छक्के शामिल थे। लेकिन भारत के मध्य क्रम के बल्लेबाज नहीं चल पाए। एक विकेट पर 91 रन के बाद उसका स्कोर जल्द ही 6 विकेट पर 127 रन हो गया और 137 रनों पर 9 विकेट हो गया। आखिर में टीम ने क्रांति गौड़ के बल्ले से निकले छक्के और चौक्के के कारण 159 रन बनाए। थाईलैंड की टीम इसके जवाब में 65 रन पर आउट हो गई।

शेफाली ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘हम इस पर गौर करेंगे कि बल्लेबाजी में हमसे कहां गलतियां हो रही हैं और हम कहां सुधार कर सकते हैं। आज का मैच खत्म हो गया है और हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। वापस जाने पर हम इस पर विचार विमर्श करेंगे कि हम क्या सुधार कर सकते हैं और टीम के लिए और क्या योगदान दे सकते हैं।’’

हरमनप्रीत कौर (05 रन), भारती फुलमाली (14 गेंदों पर 13 रन), ऋचा घोष (00) और दीप्ति शर्मा (05) ने थाईलैंड के अनुभवहीन गेंदबाजों के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन किया।

शेफाली ने कहा कि भारत को पता था कि पिच से कुछ टर्न मिलेगा और पारी आगे बढ़ने के साथ बल्लेबाजों को बेहतर ढंग से तालमेल बिठाने की जरूरत होगी।उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यहां की पिच टर्न लेगी। हम यहां की परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और हम इस पिच के बारे में जानते थे।’’

शेफाली ने कहा कि नई गेंद बल्ले पर अच्छी तरह से आ रही थी।उन्होंने कहा, ‘‘नई गेंद बल्ले पर बहुत अच्छी तरह से आ रही थी। गेंद पुरानी होने के बाद गेंद टर्न लेने लगती है।’’शेफाली ने कहा, ‘‘दो साल पहले विश्व कप के लिए हम यहां आए थे, इसलिए मुझे यहां की परिस्थितियों का पता है और मैं तैयार थी। स्वदेश में मैं इस तरह की पिच पर खेलने का अभ्यास कर रही थी।’

पहली बार चक दे गर्ल्स Girls हॉकी विश्वकप में Boys से निकली आगे

हॉकी विश्वकप में हमेशा भारतीय पुरुष टीम से महिला टीम कोसो पीछे रहती थी। ना जाने कितनी बार तो महिला टीम क्वालिफाय ही नहीं कर पाती थी। लेकिन इस बार महिला टीम ने ना केवल क्वालिफाय किया बल्कि अपने पुरुष साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस बार उम्मीद की पुरुष टीम कम से कम सेमीफाइनल खेलेगी और महिला टीम से कोई उम्मीद ही नहीं थी। लेकिन भारतीय महिला टीम ने पांचवा पायदान पाया और पुरुष टीम को आठवां पायदान मिला।

अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली जीत के साथ, भारतीय महिला हॉकी टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप में शानदार समापन किया। टीम ने 5वें-छठे स्थान के लिए खेले गए मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराया। यह मैच गुरुवार शाम को खेला गया।

इस नतीजे से भारतीय महिला टीम को पांचवां स्थान मिला, जो 1974 में हुए पहले महिला वर्ल्ड कप (जिसमें वे चौथे स्थान पर रही थीं) के बाद से उनका वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

वहीं पुरुष टीम ने खासा निराश किया। पुरुष टीम की आलोचना पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने भी की। हरमनप्रीत सिंह ने ने अंतिम मैच में गोल दागकर खुद को शीर्ष 5 गोल स्कोरर में स्थापित कर दिया लेकिन कुल मिलाकर टीम का अभियान निराशाजनक रहा।पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

पुरुष टीम ने पूल डी के मुकाबले में इंग्लैंड जैसी टीम से 4-2 से मैच गंवाया।वह भी मैच में बढ़त बनाने के बाद। इसके बाद टीम का पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा था लेकिन 5-3 की स्कोरलाइन संतोषजनक नहीं थी।

अगले दौर में टीम को नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना मिली। नीदरलैंड्स ने भारतीय टीम को 3-1 से हराया। नीदरलैंड से हारने के बाद भारत पूल ई से अंतिम चार की दौड़ से लगभग बाहर ही हो गया था लेकिन अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर जीत के बाद तकनीकी तौर पर उसके रास्ते खुले थे । इसके लिये उसे कम से कम तीन गोल के अंतर से जीत दर्ज करनी थी।  लेकिन भारत ने पहले छह मिनट में ही दो गोल गंवा दिये और इस दबाव से टीम निकल ही नहीं सकी। अर्जेंटीना के खिलाफ भारत 3-5 से हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।

लेकिन निराशाजनक अभियान और ज्यादा निराशाजनक तब हो जब सातवें और आठवें पायदान के लिए भारत बेल्जियम से भिड़ा।भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।