El Nino Impact: क्या अल-नीनो बिगाड़ेगा भारत की जीडीपी का खेल? सिटीग्रुप के अर्थशास्त्री ने की ये प्रेडिक्शन 

Indian Economy and El Nino: अल-नीनो को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के बीच देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी GDP ग्रोथ को लेकर राहत भरी खबर आई है। ग्लोबल फाइनेंशियल फर्म सिटीग्रुप के एमडी और चीफ इकोनॉमिस्ट (इंडिया) समीरन चक्रवर्ती ने मनीकंट्रोल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि अल-नीनो के कारण FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ में 20 से 30 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है, लेकिन गैर-ग्रामीण क्षेत्रों की मजबूत मांग इस नुकसान की भरपाई कर देगी।

सिटीग्रुप के अनुसार, बाजार में अल-नीनो का डर जितना पहले था, उसके मुकाबले अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़े काफी बेहतर रहे हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ता नहीं दिख रहा है।

ग्रामीण इलाकों से मिल रहे मजबूत संकेत

अल-नीनो की आशंकाओं के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था से पॉजिटिव आंकड़े सामने आ रहे हैं। FADA के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 (FY27) के दौरान देश में ट्रैक्टरों की बिक्री में सालाना आधार पर 21% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान टू-व्हीलर्स की बिक्री में भी 17% का उछाल देखने को मिला है।

समीरन चक्रवर्ती ने बताया कि ‘हाई-फ्रीक्वेंसी ग्रोथ नंबरों में अल-नीनो का खौफ नहीं दिखता। इस साल अल-नीनो का असर खरीफ के बजाय रबी पर अधिक हो सकता है।’

बारिश और खाद्य महंगाई की मौजूदा स्थिति

देश में मानसून और महंगाई के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। जून में हुई कम बारिश के कारण कुल बारिश में 13% की कमी जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई और अगस्त में स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बुवाई का रकबा भी पिछले साल के लगभग बराबर ही है। सब्जियों या अनाज की कीमतों में कोई असामान्य उछाल नहीं देखा गया है। जुलाई 2026 में खाद्य महंगाई दर 5.52% पर रही।

महंगाई को लेकर असली जोखिम वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) में आ सकता है, अगर उस दौरान असामान्य रूप से ज्यादा गर्मी देखने को मिलती है।

न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी से बढ़ी ग्रामीण मांग

सिटीबैंक के अर्थशास्त्री का मानना है कि पिछले दो सालों से ग्रामीण इलाकों की मांग शहरी इलाकों से बेहतर बनी हुई है। 2025 से सभी राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में दोहरे अंकों की वृद्धि हुई है।

पिछले 6-7 सालों में लेबर के मुकाबले कंपनियों का पलड़ा भारी था, लेकिन लेबर कानूनों के तहत हुए एकमुश्त वेज एडजस्टमेंट ने आम लोगों के हाथों में पैसा पहुंचाया है, जिससे मांग में तेजी आई है।

सरकारी प्रोत्साहन और क्रेडिट ग्रोथ का मिला सहारा

भारत में घरेलू मांग को बढ़ाने में पिछले साल दिए गए राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहन की बड़ी भूमिका रही है। इनकम टैक्स में छूट, जीएसटी दरों में कटौती और ब्याज दरों में कटौती जैसे कदमों ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाई।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक देश के सभी शेड्यूल्ड बैंकों का कुल क्रेडिट ₹225.87 लाख करोड़ पहुंच गया, जो सालाना आधार पर लगभग 19% अधिक है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY27) में FMCG कंपनियों की बिक्री में जबरदस्त वॉल्यूम ग्रोथ देखने को मिली है, जो मजबूत उपभोक्ता मांग का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आगे खपत से जुड़ी कंपनियों में दिखेगी जोरदार तेजी, फिनटेक और क्विक कॉमर्स शेयरों पर रहे नजर – आशीष चतुरमोहता

शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट देखने को मिल रही है। अलग-अलग सेक्टर में कमजोरी के बीच सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा गिरा है और निफ्टी 24,300 के आसपास बना हुआ है। मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। इस सेक्टर का इंडेक्स 1.19 प्रतिशत नीचे आ गया है। जबकि IT सेक्टर के इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट आई है। PSU बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है। लेकिन कमजोर बाजार में भी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने 0.66 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। ​​छोटे-मझोले शेयरों में भी बिकवाली आई है। इसके चलते मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है।

टेक्नो फंडा नजरिए से बाजार की चाल पर बात करते हुए जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ( JM Financial Services) में PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजों का सीजन काफी अच्छा रहा। बहुत लंबे समय बाद पहली बार लार्ज कैप में अर्निंग ग्रोथ आई है। हमें इसमें लगभग 19 से 20% की ग्रोथ देखने को मिली है। स्मॉल और मिड कैप ने भी फिर से बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। स्माल कैप अर्निंग ग्रोथ 30 से 32% के आसपास रही है। वहीं मिड कैप ने भी लगभग 24 से 25% की ग्रोथ दिखाई। साफतौर पर अर्निंग ट्रेजेक्टरी बहुत ज्यादा स्ट्रांग रही है। जिस तरह से ग्लोबल अनसर्टेनिटी बनी रही और क्रूड से जुड़े रॉ मटेरियल की वजह मार्जिन पर प्रेशर बना, उसके बावजूद भी प्रॉफिटेबिलिटी में अच्छी ग्रोथ देखने को नजर आई। अब हमें साफ दिख रहा है कि यहां से कॉर्पोरेट अर्निंग्स में काफी मजबूत री-रेटिंग होती हुई नजर आएगी।

इसके अलावा पिछले साल मिले जीएसटी और इनकम टैक्स रिलीफ का बेनिफिट अब बाजार को मिलना शुरू हो गया है। इसके संकेत भी पहली तिमाही के नतीजों में मिले हैं। इसी के चलते ऑटो, ऑटो इंसिलरीज और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े नतीजे काफी अच्छे रहे हैं। यहां तक कि न्यू एज कंपनियों के नतीजे भी काफी अच्छे रहे हैं । हमें लगता है कि एक बहुत अच्छी डबल इंजन ग्रोथ देखने को नजर आ रही है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तो काफी अच्छा कर ही रहा है पर बहुत लंबे समय बाद खपत से जुड़ी कंपनियों से भी अच्छे संकेत मिल रहे है। हमें लगता है कि हमारे मार्केट्स के लिए काफी अच्छी स्थिति बनती हुई नजर आ रही है। क्यूएसआर सेगमेंट पर अपनी राय साझा करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि इस सेगमेंट में काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धा का माहौल है। पिछली तिमाहियों में बर्गर किंग, देवयानी और ज्युबिलेंट फूड जैसी कंपनियों के नतीजों पर इसका असर भी देखने को मिला है। हालांकि पहली तिमाही इनके लिए अच्छी रही है। इसके चलते ये शेयर री-रेट भी होंगे। लेकिन स्ट्रचरली हमें लगता है कि अगर हमें कंजम्प्शन थीम को ही प्ले करना है तो न्यू एज सेगमेंट को प्राथमिकता देनी चाहिए। कंजम्प्शन थीम के लिए तमाम पॉजिटिव फैक्टर नजर आ रहे हैं।

क्विक कॉमर्स की बात करें तो अगले 5-6 सालों में इसका मार्केट 5 अरब डॉलर से बढ़कर 55-65 अरब डॉलर का हो सकता है। इस सेगमेंट में हमें 11-12 गुना की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इस सेगमेंट की कंपनियों में आगे हमें काफी तेज ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इसका फायदा इटरनल, स्विगी, मीशो और Honasa जैसी कंपनियों को मिलेगा। इसके अलावा फिन टेक कंपनियों में भी आगे तेज ग्रोथ देखने को मिल सकती है। देश में लोगों की आय और खपत बढ़ने का फायदा इन कंपनियों के मिलेगा। देश में बढ़ेते डिजिटल स्पेंडिंग का सीधा फायदा पेटीएम जैसी कंपनियों को मिलेगा।

 

July WPI Data : जुलाई में थोक महंगाई 9.87% से घटकर 9.78% पर आई,लगातार तीसरे महीने 9% से ऊपर रहा ये आंकड़ा

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ITR Notice: टाइम पर ITR भर दिया? फिर भी आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस! जानिए बचाव का सही तरीका

Income Tax Notice After Filing ITR: अगर आपने 31 जुलाई या तय समयसीमा के भीतर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। समय पर ITR फाइल करने से सिर्फ डेडलाइन पूरी होती है, लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका रिटर्न पूरी तरह सही और सटीक है।

इनकम टैक्स विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों (AIS/फॉर्म 26AS) और आपके द्वारा दी गई जानकारी में जरा सी भी गड़बड़ी पाई जाने पर आपको इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

समय पर ITR भरने के बाद भी क्यों आता है टैक्स नोटिस?

विशेषज्ञों के मुताबिक, टैक्स रिटर्न दाखिल करना पहला कदम है। नोटिस आने के ये कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • TDS और टैक्स क्रेडिट मिसमैच: फॉर्म 26AS या AIS में दिख रहा TDS/TCS और रिटर्न में क्लेम किया गया TDS आपस में मेल न खाना।
  • छूटी हुई आय: सेविंग्स अकाउंट का ब्याज, FD का ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेंस को ITR में न दर्शाना।
  • हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड का भारी बिल या बड़े कैश डिपॉजिट का ब्योरा रिटर्न से अलग होना।
  • गलत ITR फॉर्म चुनना: अपनी आय के स्रोतों के हिसाब से सही फॉर्म (ITR-1, 2, 3 या 4) की जगह गलत फॉर्म चुनना।
  • गलत डिडक्शन या क्लेम: बिना किसी पक्के सबूत के फर्जी HRA, 80C या अन्य टैक्स छूट का क्लेम करना।

इनकम टैक्स नोटिस के प्रकार

विभाग अलग-अलग कारणों से अलग-अलग धाराओं के तहत नोटिस भेजता है:

सेक्शन 143(1) इंटिमेशन नोटिस: यह रिटर्न प्रोसेस होने के बाद आता है। अगर विभाग को आपकी आय, टैक्स क्रेडिट या डिडक्शन की गणना में कोई गणितीय गलती मिलती है, तो यह इंटिमेशन जारी किया जाता है।

सेक्शन 139(9) डिफेक्टिव रिटर्न: रिटर्न में कोई जानकारी अधूरी रहने या गलत फॉर्म चुनने पर ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस मिलता है।

धारा 142(1) इंक्वायरी नोटिस: जब असेसिंग ऑफिसर (AO) को आपके रिटर्न के संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज चाहिए होते हैं।

धारा 143(2) स्क्रूटनी नोटिस: जब आपका रिटर्न विस्तृत जांच के लिए चुना जाता है। इसमें आपको अपने दावों के समर्थन में सबूत देने होते हैं।

धारा 148 – Income Escaped असेसमेंट: जब टैक्स अधिकारी के पास यह मानने की वजह हो कि आपकी कोई आय टैक्स के दायरे से छूट गई है।

धारा 156 – डिमांड नोटिस: अगर जांच के बाद विभाग यह पाता है कि आप पर टैक्स, ब्याज या पेनल्टी की कोई देनदारी बनती है, तो यह नोटिस भेजा जाता है।

नोटीस मिलने पर क्या करें? अपनाएं ये स्टेप्स

अगर आपको इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ये स्टेप्स को फॉलो करें:

सबसे पहले इनकम टैक्स के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें। नोटिस का DIN, असेसमेंट ईयर और PAN नंबर जरूर वेरीफाई करें। नोटिस में उठाए गए मुद्दे की तुलना अपने ITR, Form 26AS, AIS/TIS और बैंक स्टेटमेंट्स से करें।

अगर गलती आपकी तरफ से हुई है, तो तय समय में रिवाइज्ड रिटर्न या अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करें। अगर आपका रिटर्न बिल्कुल सही है, तो पोर्टल पर ही मांगे गए कागजात और सबूत अपलोड करके अपना पक्ष रखें।

नोटिस में दी गई डेडलाइन को कभी नजरअंदाज न करें। क्योंकि नोटिस का जवाब न देने पर भारी पेनल्टी, अतिरिक्त ब्याज या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market View : निफ्टी कंपनियों के लिए अच्छी रहेगी सितंबर तिमाही, बच्चों का कपड़ा बनाने वाली यह कंपनी कर सकती है कमाल

Market View : मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (Marcellus Investment Managers) के फाउंडर और CIO सौरभ मुखर्जी ने कहा कि वे टाइटन में काफी लंबे समय से निवेशित हैं। अगले 10-15 दिनों में टाइटन की स्टोरी पर उनकी एक किताब भी आ रही है। कंपनी की 20-22 साल की कमाल की हिस्ट्री रही है। कंपनी ने इस दौरान न सिर्फ अपना बल्कि पूरे ज्वेलरी मार्केट का ट्रांसफॉर्मेशन कर दिया है। टाइटन ने लोगों में जिस तरह का भरोसा हासिल किया है और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट किया है वह कमल का है।

पहली तिमाही के नतीजों पर बात करते हुए सौरभ मुखर्जी ने कहा कि इस अवधि में एक बड़ा पॉजिटिव सरप्राइज़ देखने को मिला है। जून तिमाही में निफ्टी की ईपीएस ग्रोथ 7-8 फीसदी रहने की उम्मीद थी। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यह डबल डिजिट में रह सकती है। यह करीबन 3 साल बाद ऐसा पहला क्वार्टर होगा जहां पर डबल डिजिट ग्रोथ दिखेगी। स्मॉल एंड मिड कैप में डबल डिजिट ग्रोथ काफी सालों से दिख रही है, वो नई बात नहीं है। लेकिन निफ्टी में जो भारी भरकम स्टॉक्स है उनके लिए यह तीन साल का बेस्ट क्वार्टर हो सकता। ऐसा लग रहा है कि निफ्टी के लिए सितंबर क्वार्टर भी अच्छा रहेगा। पिछले साल इनकम टैक्स, आरबीआई के रेट और जीएसटी दरों में जो कटौती हुई उसका फायदा जून तिमाही में दिखा। सितंबर तिमाही में भी इसका असर रहेगा। कंज्यूमर बाजार की तरफ रुख कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार कैपेक्स पर थोड़ दबाव तो है लेकिन प्राइवेट कैपेक्स में थोड़ा सा पिकअप दिख रहा है। एक्सपोर्ट ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग में भी सॉलिड पिकअप दिख रहा है। एक्सपोर्ट ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग में विदेशी निवेश भी आ रहा है। कंपनियों की कमाई और ऑपरेटिंग मार्जिन में भी पिक अप दिख रहा है। ऐसे में यह तिमाही काफी अच्छी रही है। अगले 3-4 साल बाजार के लिए अच्छे रहेंगे। इस दौर में क्वालिटी स्टॉक्स अच्छा रिटर्न देंगे।

एक्सपोर्ट से जुड़ा मैन्युफैक्चरिंग स्पेस करेगा बेहतर प्रदर्शन

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए सौरभ मुखर्जी ने कहा कि आगे एक्सपोर्ट से जुड़ा मैन्युफैक्चरिंग स्पेस बेहतर करेगा। इस सेक्टर की एक कंपनी है एसपी एपेरल्स (SP Apparels)। उम्मीद है कि यह शेयर आगे काफी अच्छा प्रदर्शन करेगा। यह कोयम्बटूर के पास बेस्ड बच्चों के लिए कपड़ा बनाने वाली कंपनी है। यह एक्सपोर्ट ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग करती है। यह कोयंबटूर से पूरे वेस्टर्न यूरोप के रिटेलर्स के लिए बच्चों का कपड़ा बनाती है। ध्यान देनें की बात है कि बच्चों का कपड़ा बनाना एक कठिन काम है। इसमें यूरोपियन देशों द्वारा तय किए गए कई हेल्थ एंड सेफ्टी नियमों का पालन करना होता है। एसपी एपेरल्स इस सेगमेंट की लीडिंग प्लेयर है।

सौरभ मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने करीबन चार या पांच महीने पहले इस स्टॉक में पोजीशन बनाई थी। वे कई सालों से इस पर नजर रखे हुए थे। उनकों यह कंपनी काफी साफ सुथरी और अच्छी लगती है। बहुत साल से कंपनी बांग्लादेश फैक्टर से परेशान थी। बांग्लादेश पर यूरोप में भारत के मुकाबले 13-14% कम टैरिफ लगता है। लेकिन जब तो जब पीयूष गोयल ने यूरोप के साथ फ्री ट्रंड एग्रीमेंट पर साइन किया तो एसपी एपेरल्स फिर से लाइम लाइट में आ गया। उम्मीद है कि जनवरी 2027 से एसपी एपेरल्स को टैरिफ के मामले में बांग्लादेश के साथ बराबरी मिल जाएगी। रुपया भी गिर रहा है। कंपनी अच्छा प्रोडक्ट भी बनाती है। कंपनी को करेंसी में कमजोरी और एफटीए का फायदा दोनों ही मिलेगा।

 

 

Market Outlook: सपाट बंद हुआ बाजार, जानिए 11 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Rate Today: सावन के दूसरे सोमवार को सोना हुआ सस्ता, 10 बड़े शहरों में इतनी रह गई कीमत

देश में सावन मास के दूसरे सोमवार यानि कि 10 अगस्त को सोने की कीमत में गिरावट है। राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड की कीमत गिरकर 152540 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। मुंबई में कीमत घटकर 152340 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। अन्य शहरों में भी ​सोने का भाव गिरा है। बीते एक सप्ताह में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 8180 रुपये तक ​बढ़ी। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 7600 रुपये तक महंगा हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,336.02 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 152540 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139840 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 139640 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 151630 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139000 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152340 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 139640 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली139840152540
मुंबई139640152340
अहमदाबाद139740152440
चेन्नई138990151630
कोलकाता139640152340
हैदराबाद139640152340
जयपुर139840152540
भोपाल139740152440
लखनऊ139840152540
चंडीगढ़139840152540

Income Tax Refund: अभी तक इनकम टैक्स रिफंड नहीं आया? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमत में भी गिरावट दिख रही है। 10 अगस्त की सुबह कीमत 244900 रुपये प्रति किलोग्राम है। बीते सप्ताह में चांदी का भाव 10000 रुपये ​बढ़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.29 डॉलर प्रति औंस पर है।

Income Tax Refund: अभी तक इनकम टैक्स रिफंड नहीं आया? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद ज्यादातर टैक्सपेयर्स को रिफंड का इंतजार रहता है। कई लोगों के खाते में रिफंड जल्दी आ जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। अगर आपने भी रिटर्न भर दिया है, लेकिन अभी तक रिफंड नहीं मिला, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि रिफंड किन कारणों से अटक सकता है।

1. ITR अभी प्रोसेस नहीं हुआ

रिटर्न फाइल करने के बाद इनकम टैक्स विभाग उसकी जांच करता है। जब तक ITR प्रोसेस नहीं होगा, तब तक रिफंड जारी नहीं किया जाएगा। अगर पोर्टल पर ‘Return Under Processing’ दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि विभाग अभी आपके रिटर्न की जांच कर रहा है।

2. बैंक अकाउंट में दिक्कत

रिफंड सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। अगर आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट नहीं है, PAN से लिंक नहीं है या बैंक की जानकारी गलत है, तो रिफंड अटक सकता है। इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक अकाउंट का स्टेटस एक बार जरूर जांच लें।

3. ITR में कोई गलती

अगर रिटर्न में बैंक अकाउंट नंबर, IFSC, आय, TDS या दूसरी जानकारी गलत भर दी गई है, तो रिफंड में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करना पड़ सकता है।

4. TDS और AIS में अंतर

अगर आपके ITR में दी गई TDS की जानकारी, Form 26AS या AIS से मेल नहीं खाती, तो इनकम टैक्स विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है। इससे रिफंड आने में ज्यादा समय लग सकता है।

5. रिटर्न जांच के लिए चुना गया

कुछ ITR को विभाग स्क्रूटनी या अतिरिक्त वेरिफिकेशन के लिए चुनता है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने के बाद ही रिफंड जारी किया जाता है। अगर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आया है, तो उसका जवाब समय पर देना जरूरी है।

रिफंड का स्टेटस कैसे चेक करें?

  • इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
  • e-File मेन्यू में जाकर Income Tax Returns पर क्लिक करें।
  • View Filed Returns विकल्प चुनें।
  • संबंधित असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का ITR चुनें।
  • यहां आपको रिटर्न और रिफंड का मौजूदा स्टेटस दिख जाएगा।
  • अगर रिफंड जारी हो चुका है, तो उसका ट्रांजैक्शन रेफरेंस और भुगतान की जानकारी भी यहीं मिल जाएगी।

RBI का बड़ा फैसला: लोन की EMI चूकने पर नियम बदले, जानिए बैंक क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

‘3 साल हो गए, जमीन नहीं मिली…’, आधी रात को ऋषभ पंत ने CM धामी से लगाई खास गुहार

Rishabh Pant: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालांकि, इस बार वजह उनकी बल्लेबाजी या फिर शानदार प्रदर्शन नहीं बल्कि शुक्रवार आधी रात को किया गया उनका सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिधे जमीन खरीदने की गुहार लगा दी। जिसके बाद उनका पोस्ट तुरंत वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी।

पंत, जो अभी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ श्रीलंका में हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में धामी को टैग करते हुए यह अनुरोध किया। 28 वर्षीय पंत ने कहा कि वे पिछले तीन सालों से उत्तराखंड में उपयुक्त जमीन खोजने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें ऐसी कोई प्रॉपर्टी नहीं मिल पाई जो उनकी जरूरतों को पूरा कर सके।

इससे भी अहम बात यह है कि पंत ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद वे अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं और राज्य में रहकर उसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए लिखा, “नमस्ते सर, आप कैसे हैं? उत्तराखंड का स्थानीय होने के नाते, मुझे यहां आए हुए काफी समय हो गया है। मैं दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होने के लिए जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे यहां रहने के लिए कोई अच्छी और बड़ी जगह नहीं मिल पा रही है। मुझे अपना उत्तराखंड बहुत पसंद है। मेरी आपसे विनम्र विनती है कि जमीन लेने में मेरी मदद करें, क्योंकि आजकल साफ-सुथरी जमीन मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। एक जमीन तो मुझे तब मिलनी चाहिए थी जब मैं राज्य का प्रचार-प्रसार कर रहा था, लेकिन अब मैं सब कुछ छोड़कर अपने मूल स्थान पर वापस आकर उत्तराखंड के विकास में योगदान देना चाहता हूं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच रहना चाहता हूं। कृपया इस मामले पर ध्यान दें। 3 साल हो गए हैं और मुझे अभी तक कोई जमीन नहीं मिली है। आपके जवाब का इंतजार है, सर।”

X पर पोस्ट करने के बाद पंत ने साफ किया कि वह जमीन मुफ्त में नहीं मांग रहे थे, बल्कि सरकार से तय दरों पर उसे खरीदना चाहते थे।

पंत ने आगे लिखा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए यह एक शानदार तोहफा होगा, लेकिन अगर आप मुझे इजाजत दें तो मैं इसे सरकार से उनकी तय दरों पर खरीदना चाहूंगा, ताकि कम से कम मैं अपने राज्य में अपना पहला घर बना सकूं। कृपया इसमें मदद करें। सच कहूं तो मुझे नहीं पता था कि इसके लिए क्या करना होगा।”

पंत की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और उनकी इस अनोखी अपील ने लोगों का खासा ध्यान खींचा।

पंत अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं

बता दें कि पंत का जन्म उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ था और उन्होंने वहीं से अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत की थी, जिसके बाद वे प्रोफेशनल तौर पर क्रिकेट खेलने के लिए दिल्ली चले गए। आगे चलकर उन्होंने सभी फॉर्मेट में भारत के बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज़ों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई।

हालांकि, पंत घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते रहते हैं, लेकिन उत्तराखंड के साथ उनका जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा है। उनकी हालिया पोस्ट से पता चलता है कि वे भविष्य में इस राज्य को अपना घर बनाना चाहते हैं और इसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब पंत 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए उत्तराखंड में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्ति बन गए हैं। खबरों के अनुसार, उन्होंने 23.84 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स भरा है।

इन आंकड़ों की घोषणा उत्तराखंड के इनकम टैक्स चीफ कमिश्नर ने 24 जुलाई को इनकम टैक्स डे के मौके पर एक कार्यक्रम में की थी। बता दें कि पंत लगातार दूसरे साल राज्य में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्तियों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहे।

ABP Live की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, पंत का टैक्स योगदान पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। पिछले साल उन्होंने लगभग 10.5 करोड़ रुपये का एडवांस टैक्स भरा था।

27 करोड़ रुपये की IPL डील से लेकर बड़े-बड़े एंडोर्समेंट तक

पंत का भारी-भरकम टैक्स पेमेंट कई सोर्स से हुई उनकी कमाई को दिखाता है, जिसमें BCCI कॉन्ट्रैक्ट, IPL सैलरी, मैच फीस और एंडोर्समेंट डील शामिल हैं।

बता दें कि पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था, जिससे वह लीग के सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक बन गए। हालांकि, जिस अवधि की बात की जा रही है, उस दौरान पंत BCCI के Grade A कॉन्ट्रैक्ट में भी थे और उन्हें सालाना 5 करोड़ रुपये रिटेनरशिप के तौर पर मिलते थे। लेकिन, बाद में उन्हें Grade B में कर दिया गया, जिसके बाद उनकी सालाना रिटेनरशिप घटकर 3 करोड़ रुपये हो गई।

उनकी कमर्शियल कमाई भी उनकी इनकम में काफी योगदान देती है। पंत के एंडोर्समेंट एसोसिएशन Adidas, Dream11, SG, Thums Up, Cadbury, boAt, Noise, Zomato, JSW Cement और MakeMyTrip के साथ हैं।

धामी ने दिया आश्वासन

इस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने पंत को आश्वासन दिया है कि मामले में संबंधित लोगों को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने पंत को एक्स पर जवाब देते हुए लिखा, “प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखंड के गौरव हैं। आपने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका यह प्रेम और यहां वापस आकर योगदान देने की भावना अत्यंत सराहनीय है। आपके द्वारा उठाए गए विषय के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे शीघ्र ही आपसे संपर्क कर नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे।”

AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस! CA की पोस्ट ने मचाई हलचल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिल गया।

X यूजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताए जा रहे @carajendra89 ने इस मामले को शेयर करते हुए लिखा, “AI से ITR फाइल करने के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।” हालांकि, इस बातचीत में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

ITR नोटिस मिलने के बाद मांगी टैक्स एक्सपर्ट की मदद

वायरल पोस्ट में एक बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति टैक्स नोटिस मिलने के बाद विशेषज्ञ की मदद मांग रहा था। उस मैसेज में लिखा था कि उसने AI की सहायता से अपना ITR दाखिल किया था और अब उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला है। वह इस मामले को समझने और समाधान के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट से जुड़ना चाहता था।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या टैक्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह AI पर भरोसा करना सही है?

लोगों ने AI के इस्तेमाल पर दी अलग-अलग राय

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने कहा कि AI एक उपयोगी टूल है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। एक यूजर ने सलाह दी कि लोगों को समझना होगा कि AI का इस्तेमाल कहां करना चाहिए और कहां नहीं। खासकर ITR जैसे वित्तीय मामलों में पूरी तरह AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ लोगों ने कहा- आसान ITR के लिए AI काफी है

वहीं, कई यूजर्स ने AI का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि सामान्य टैक्स मामलों में AI काफी मददगार साबित हो सकता है। एक यूजर ने बताया कि व्यक्तिगत ITR-1 और ITR-2 जैसे रिटर्न उन्होंने AI की मदद से सफलतापूर्वक फाइल किए हैं। उनके मुताबिक, AI की सहायता से न सिर्फ काम आसान हुआ बल्कि टैक्स प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।

क्या AI भविष्य में CA की जगह ले सकता है?

कुछ लोगों ने इस बहस को भविष्य की टैक्स व्यवस्था से जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज टैक्स प्रोफेशनल संभालते हैं। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि AI जानकारी देने और प्रक्रिया आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जटिल टैक्स मामलों में विशेषज्ञ की सलाह अभी भी जरूरी हो सकती है।

CA ने बताया- युवाओं को सावधान रहने की जरूरत

कुछ टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना था कि ऐसे मामलों को सामने लाना जरूरी है, ताकि खासकर युवा और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सावधानी बरतें। एक यूजर ने कहा कि सिर्फ तकनीक की जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर वित्तीय काम बिना विशेषज्ञ सलाह के किया जा सकता है। टैक्स नियमों की बारीकियां समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक ही AI से गलती भी सुधारी जा सकती है

वहीं, कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि अगर AI की मदद से कोई गलती हुई है तो उसी तकनीक की मदद से उसे ठीक भी किया जा सकता है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि AI का इस्तेमाल रिटर्न में सुधार करने और सही तरीके से दोबारा सबमिट करने के लिए किया जा सकता है।

AI बनाम एक्सपर्ट की बहस फिर तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI टैक्स जैसे संवेदनशील कामों के लिए पर्याप्त है या फिर विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। जहां एक तरफ लोग AI को समय बचाने वाला और आसान विकल्प मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वित्तीय मामलों में सावधानी और विशेषज्ञ सलाह को जरूरी बता रहे हैं।

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मां का ITR भरते समय हुई देरी, बेटे को लगा 5,000 रुपये का झटका, वायरल हुआ मामला

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में हुई थोड़ी सी देरी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने दावा किया कि सिर्फ कुछ घंटों की देरी के कारण मामूली टैक्स राशि पर हजारों रुपये की लेट फीस जुड़ गई। इस मामले ने एक बार फिर टैक्स नियमों, समय पर रिटर्न भरने की जरूरत और आम लोगों से होने वाली छोटी गलतियों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे नियमों का जरूरी हिस्सा बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का मानना है कि पहली बार फाइल करने वालों या कुछ घंटे की देरी जैसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट के बाद लोग जुर्माने की व्यवस्था और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

पहली बार मां का ITR भर रहा था शख्स

एक्स यूजर @poojaofficial5 ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक व्यक्ति पहली बार अपनी मां का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल भर रहा था। पोस्ट के मुताबिक, वह चाहता था कि रिटर्न में कोई गलती न हो, इसलिए उसने एक जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार किया। उसका मकसद सही जानकारी के साथ ITR जमा करना था। लेकिन इसी इंतजार के दौरान फाइलिंग की आखिरी तारीख निकल गई।

सिर्फ ढाई घंटे की देरी और लग गया ₹5,000 जुर्माना

पोस्ट में दावा किया गया कि जब वह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन कर पाया, तब तक डेडलाइन खत्म हुए सिर्फ करीब ढाई घंटे हुए थे। हालांकि, सिस्टम ने देरी के लिए तय लेट फाइलिंग फीस जोड़ दी। इसके बाद जो टैक्स राशि पहले ₹850 थी, वह बढ़कर ₹5,850 हो गई। यूजर ने सवाल उठाया कि जब टैक्स की असली रकम इतनी कम थी और देरी भी कुछ घंटों की थी, तो क्या जुर्माना इतना ज्यादा होना उचित है?

यूजर ने नियमों में मानवीय गलती की जगह देने की बात कही

पोस्ट में कहा गया कि टैक्स नियमों का उद्देश्य लोगों को समय पर रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन कई बार आम लोगों से छोटी गलतियां हो सकती हैं। यूजर ने लिखा कि पहली बार ITR भरने वालों या कुछ घंटों की देरी जैसे मामलों में कुछ राहत या ग्रेस पीरियड पर विचार किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर इंटरनेट यूजर्स भी दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने सिस्टम को सख्त बताया और कहा कि छोटी देरी पर इतना बड़ा जुर्माना परेशान करने वाला है। एक यूजर ने लिखा कि टैक्स फाइलिंग के लिए लोगों के पास काफी समय होता है, इसलिए आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी से की गई कोशिश और छोटी मानवीय गलतियों के लिए कुछ गुंजाइश होनी चाहिए।

लोगों ने दी समय से ITR भरने की सलाह

कई यूजर्स ने इस घटना को लेकर लोगों को सलाह दी कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पहले से दस्तावेज तैयार रखकर समय पर ITR दाखिल करने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। यह मामला एक बार फिर चर्चा में ले आया है कि टैक्स नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे स्तर की गलतियों और जानबूझकर की गई लापरवाही में अंतर कैसे तय किया जाए।

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VIDEO: भारत में 30% और स्वीडन में 35% टैक्स देकर क्या मिलता है? युवती ने वीडियो में बताया दोनों देशों में क्या-क्या मिलती है सरकार सुविधा

स्वीडन में रहने वाली भारतीय मूल की एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। भारतीय मूल के एक एचआर प्रोफेशनल ने वहां के टैक्स सिस्टम और लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की तुलना भारत से की है। वीडियो में उसने बताया कि, वहां लोग 30 से 35 प्रतिशत तक टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त शिक्षा और कई दूसरी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद भारत और स्वीडन के टैक्स सिस्टम और सरकारी सुविधाओं को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।

एचआर प्रोफेशनल और डिजिटल क्रिएटर कृतिका साकोरिया हाल ही में स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर में रहने गई हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि वहां 30 से 35 प्रतिशत तक इनकम टैक्स देना पड़ता है। इसके बदले लोगों को इतनी अच्छी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।

सरकार कैसे कर रहे पैसों का इस्तेमाल

वीडियो में कृतिका ने लिखा, “30 प्रतिशत टैक्स देना पहली नजर में बहुत ज्यादा लगता है, लेकिन जब आपको रोजमर्रा की जिंदगी में मिलने वाली सुविधाएं दिखाई देती हैं, तब इसकी अहमियत समझ आती है।” उन्होंने अपने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि टैक्स को सिर्फ उसकी दर से नहीं, बल्कि उसके बदले मिलने वाली सरकारी सुविधाओं के आधार पर भी देखा जाना चाहिए। इस वीडियो पर उन्होंने लिखा, ‘भारत में 30% टैक्स देने के बाद’ वहीं कुछ देर बाद लिखा, स्वीडन में 35% टैक्स देने के बाद’।

कृतिका ने कहा, “हर देश की अपनी व्यवस्था होती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि टैक्स के बदले लोगों को क्या मिलता है? टैक्स सिर्फ पैसे देने का नाम नहीं है, बल्कि यह भी मायने रखता है कि सरकार उन पैसों का इस्तेमाल समाज के लिए किस तरह करती है।”

 

क्या-क्या मिलती है सुविधाएं

कृतिका ने अपनी पोस्ट में लिखा, “स्वीडन में टैक्स देने के बाद मुझे ऐसी कई सुविधाएं मिलती हैं, जो मेरी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर और आसान बनाती हैं।” कमेंट सेक्शन में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कृतिका ने बताया कि स्वीडन में टैक्स देने वालों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। इनमें कम खर्च में स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त शिक्षा, माता-पिता के लिए सवेतन अवकाश, सामाजिक सुरक्षा, बच्चों के लिए आर्थिक सहायता, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थान, बेहतर सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वहां लोगों को काम और निजी जीवन के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने का अवसर मिलता है।

लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत के टैक्स सिस्टम और सरकारी सुविधाओं को लेकर जमकर अपनी राय दी। कई यूजर्स ने कृतिका की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “कुछ लोग भारत की मौजूदा व्यवस्था का बचाव करने में लगे रहते हैं, लेकिन जब तक कमियां स्वीकार नहीं की जाएंगी, बदलाव संभव नहीं है।” एक यूजर ने लिखा, “अगर वहां बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, तो वहीं रहो और वापस मत आना।” वहीं एक और यूजर ने लिखा, “सिर्फ 30 प्रतिशत नहीं, जीएसटी, सेस और दूसरे टैक्स जोड़ने के बाद लोगों पर टैक्स का बोझ और बढ़ जाता है।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “आयकर के अलावा कैपिटल गेन टैक्स, कारों पर टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स भी देना पड़ता है।” सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह से कमेंट किए हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)