1 अगस्त को आ रहा पोर्टल, महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने वाली दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

Lakshmi Yojana scheme: दिल्ली सरकार ने मंगलवार को महिलाओं को वित्तीय सहायता देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को हरी झंडी दिखाई गई। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार इस योजना का पोर्टल 1 अगस्त को लॉन्च करने जा रही है और रक्षाबंधन तक पहली किस्त जारी करने की तैयारी में है।

दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

28 जुलाई 2026: दिल्ली कैबिनेट और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा योजना को मंजूरी।

1 अगस्त 2026: योजना के लिए समर्पित आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन व सत्यापन: पोर्टल लॉन्च होने के बाद प्राप्त आवेदनों का वेरिफिकेशन किया जाएगा।

रक्षाबंधन: सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि रक्षाबंधन तक लाभार्थियों के खातों में योजना की पहली किस्त जारी कर दी जाएगी।

2500 रुपये का गणित: कैसे मिलेंगे पैसे?

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक इस योजना के तहत मिलने वाले 2500 रुपये को दो हिस्सों में बांटा गया है। हर महीने 1000 रुपये महिलाओं को खाते में सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। बाकी बचे 1500 रुपये हर महीने एक रिकरिंग डिपॉजिट (RD) खाते में जमा किए जाएंगे।

3 साल का लॉक-इन पीरियड

आरडी खाते में जमा होने वाले 1500 रुपये 3 सालों के लिए लॉक रहेंगे। 3 साल का समय पूरा होने के बाद, जमा हुआ पूरा पैसा और उस पर मिला ब्याज सीधे महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। महिलाओं में बचत को बढ़ावा देने और उनके लिए फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी तैयार करने के उद्देश्य से इस सेविंग्स कंपोनेंट को जोड़ा गया है।

इस योजना के लिए क्या हैं पात्रता के नियम?

योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो यहां नीचे दी गई पात्रताओं को पूरा करती हैं-

  • दिल्ली की 10 साल की निवासी: आवेदक को कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है।
  • उम्र सीमा: परिवार की 21 से 60 वर्ष की आयु के बीच की महिलाएं ही पात्र होंगी।
  • परिवार से सिर्फ एक महिला: हर परिवार से सिर्फ एक महिला को लाभ मिलेगा। अगर किसी परिवार में एक से अधिक पात्र महिलाएं हैं, तो परिवार की सबसे बड़ी महिला को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
  • कोई पेंशन न मिलती हो: आवेदक को पहले से कोई अन्य सरकारी पेंशन न मिल रही हो।
  • कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो: आवेदक का स्वयं का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।

कौन-कौन सी महिलाएं होंगी योजना से बाहर?

  1. सरकारी कर्मचारी।
  2. इनकम टैक्स पेयर्स (करदाता)।
  3. पेंशनर्स (पेंशन पाने वाली महिलाएं)।
  4. जिन महिलाओं या उनके परिवार के पास चार पहिया वाहन है।
  5. जिन महिलाओं के परिवार में किसी भी सदस्य का आपराधिक रिकॉर्ड है।

योजना के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स

आवेदकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी कार्ड
  • परिवार के सदस्यों के दस्तावेज
  • सेल्फ-डिक्लेरेशन (Self-Declaration): इसमें आवेदक को यह शपथ पत्र देना होगा कि वे कम से कम 10 सालों से दिल्ली में रह रही हैं और उनके या उनके परिवार पर कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है।

5110 करोड़ रुपये का बजट आवंटन

दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के सुचारू क्रियान्वयन और संचालन के लिए लगभग 5110 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Retirement Planning Guide: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय हर इंसान का लक्ष्य अलग होता है। कोई रिटायरमेंट के लिए एक फिक्स्ड रकम तय करना चाहता है, तो कोई किसी खास वित्तीय पड़ाव को हासिल करने के बाद नौकरी छोड़ना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि रिटायरमेंट के लिए कितना फंड या कॉर्पस काफी है?

पॉलिसीबाजार के लाइफ इंश्योरेंस चीफ बिजनेस ऑफिसर विवेक जैन के मुताबिक, रिटायरमेंट कॉर्पस का कोई एक फिक्स्ड स्टैंडर्ड नहीं हो सकता। यह आपकी जीवनशैली, रिटायरमेंट की उम्र, लाइफ एक्सपेक्टेंसी, महंगाई दर और हेल्थकेयर के खर्चों पर निर्भर करता है।

भारत में क्यों तेजी से बदल रहा है रिटायरमेंट का गणित?

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए विवेक जैन बताते हैं कि साल 2050 तक भारत में लगभग हर 5 में से 1 व्यक्ति 60 साल से अधिक उम्र का होगा। आज लोग ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं और कई लोग जल्दी रिटायर होना चाहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका रिटायरमेंट का दौर पहले की तुलना में ज्यादा लंबा होगा। इसके लिए ऐसे फंड की जरूरत है जो लंबी अवधि तक महंगाई और मेडिकल खर्चों का मुकाबला कर सके।

सिर्फ ₹5,000 महीना निवेश से बन सकता है ₹3.25 करोड़ का फंड

विवेक जैन एक आसान उदाहरण से समझाते हैं कि कैसे जल्दी शुरुआत करने से बड़ा फायदा होता है। अगर कोई 25 साल का युवा हर महीने ₹5,000 का निवेश शुरू करता है और 60 साल की उम्र तक लगातार निवेश बनाए रखता है, तो 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न के हिसाब से 60 की उम्र में उसके पास करीब ₹3.25 करोड़ का बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

इसमें से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि बाकी 40% हिस्से से एनुटी खरीदकर जीवनभर के लिए हर महीने रेगुलर पेंशन पाई जा सकती है।

महंगाई और हेल्थकेयर खर्चों का चक्रव्यूह

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी चुनौती महंगाई है। आज जो खर्च आपको सामान्य लग रहा है, आने वाले 20-30 सालों में वह कई गुना बढ़ जाएगा। इसके अलावा, मेडिकल इंफ्लेशन सामान्य महंगाई से भी तेजी से बढ़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों और लंबे इलाज का खर्च बढ़ता है। इसलिए रिटायरमेंट फंड बनाते समय हेल्थकेयर के नियमित खर्चों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

40 की उम्र से पहले ही रिटायरमेंट प्लान कर रहे भारतीय

पॉलिसीबाजार के डेटा का विश्लेषण करते हुए विवेक जैन ने कुछ बेहद दिलचस्प ट्रेंड्स सामने रखे हैं:

युवाओं की हिस्सेदारी: रिटायरमेंट पॉलिसी खरीदने वाले लगभग 60% ग्राहक 40 साल से कम उम्र के हैं। वहीं, 50 साल से ऊपर के केवल 11.6% लोग ही इसे खरीद रहे हैं। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी जल्दी वित्तीय आजादी चाहती है।

मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स की पसंद: 98% से अधिक लोग मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स (NPS, रिटायरमेंट ULIPs और पेंशन ULIPs) चुन रहे हैं। लोग अब इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करने से नहीं डरते।

छोटे शहरों का दबदबा: रिटायरमेंट प्लानिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। 75% से ज्यादा रिटायरमेंट पॉलिसियां टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही हैं।

NRIs का भरोसा: कुल रिटायरमेंट पॉलिसी में करीब 10% हिस्सेदारी एनआरआई (NRIs) की है। इनका औसत निवेश साइज (₹2.25 लाख) भारतीय निवेशकों से 2.5 गुना अधिक है। एनआरआई खरीदारी में सबसे बड़ी 38% हिस्सेदारी गल्फ (खाड़ी देशों) क्षेत्र की है।

ITR Last Date: 31 जुलाई या 31 अगस्त? जानिए आपके लिए कौन-सी है इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन

कुल मिलाकर विवेक जैन का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग का मकसद सिर्फ सबसे बड़ा कॉर्पस जमा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा फंड बनाना है जो आपको जिंदगीभर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखे। 50 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट प्लान करने का जमाना अब चला गया है; जितना जल्दी शुरुआत करेंगे, आपका भविष्य उतना ही सुरक्षित रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Income Tax भरने के लिए कौन-सा क्रेडिट कार्ड सबसे बेहतर? जानिए कौन देता है सबसे ज्यादा रिवॉर्ड

Best Credit Cards for Income Tax Payment: क्रेडिट कार्ड के जरिए इनकम टैक्स का भुगतान करना अब सिर्फ एक सुविधा मात्र ही नहीं रह गया है। अगर सही क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया जाए, तो टैक्स भरते समय लगने वाले कन्वीनियंस फीस की भरपाई के साथ-साथ शानदार रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और माइलस्टोन बेनिफिट्स भी कमाए जा सकते हैं।

हालांकि, सभी बैंक सरकारी या टैक्स भुगतानों पर रिवॉर्ड नहीं देते। कई बैंक टैक्स पेमेंट को रिवॉर्ड कैटेगरी से बाहर रखते हैं या उस पर रिवॉर्ड पॉइंट्स की लिमिट लगा देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन-से क्रेडिट कार्ड्स टैक्स भुगतान के लिए सबसे बेहतरीन साबित हो सकते हैं।

कौन-सा क्रेडिट कार्ड है सबसे बेस्ट?

टैक्स भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड्स के आधार पर कुछ प्रमुख क्रेडिट कार्ड्स की तुलना नीचे दी गई है:

कौन-सा क्रेडिट कार्ड है सबसे बेस्ट?

HDFC Biz Black Metal क्यों है सबसे आगे?

अगर आप भारी-भरकम इनकम टैक्स भरते हैं, तो HDFC Biz Black Metal कार्ड सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसकी बेस रिवॉर्ड दर 3.3% है। एक्सीलरेटेड रिवॉर्ड्स के तहत यह 16.66% तक जा सकती है और माइलस्टोन जोड़ने पर कुल वैल्यू 20% से भी अधिक हो जाती है। ज्यादातर कार्ड्स पर रिवॉर्ड की सीमा खत्म होते ही रिवॉर्ड बंद हो जाते हैं, लेकिन यह कार्ड कैपिंग खत्म होने के बाद भी बेस रिवॉर्ड देता रहता है।

ये कार्ड्स भी हैं आपकी रडार में रखने लायक

Kotak Solitaire: टैक्स भुगतानों पर कोई कैपिंग (सीमा) नहीं है। यह ICICI Times Black से बेहतर हो सकता है, लेकिन यह केवल ‘इन्विटेशन-ओनली’ कार्ड है।

HDFC BizPower: जो लोग Biz Black के लिए पात्र नहीं हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, इसमें 5X रिवॉर्ड्स अनलॉक करने के लिए आवश्यक ₹25,000 के मासिक खर्च में टैक्स पेमेंट नहीं गिना जाता।

YES Bank Private: टैक्स पेमेंट पर बिना किसी कैपिंग के 2.5% वैल्यू बैक देता है, लेकिन इस प्रीमियम कार्ड को हासिल करना थोड़ा मुश्किल है।

HDFC Marriott Bonvoy: इसकी रिवॉर्ड दर थोड़ी कम है, लेकिन पात्रता की शर्तें आसान हैं और बड़े टैक्स पेमेंट के लिए काम आ सकता है।

क्रेडिट कार्ड से टैक्स भरने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

केवल कार्ड का प्रचार में रिवॉर्ड रेट देखकर फैसला न लें। टैक्स पेमेंट करने से पहले ये बातें जरूर चेक करें:

  • एलिजिबिलिटी और कैपिंग: जांचें कि क्या टैक्स भुगतान पर रिवॉर्ड मिल रहे हैं या नहीं और प्रति माह कितने रिवॉर्ड पॉइंट्स की लिमिट तय की गई है।
  • कन्वीनियंस फीस का हिसाब: टैक्स पेमेंट पर लगने वाले सर्विस चार्ज या कन्वीनियंस फीस की तुलना अपने मिलने वाले रिवॉर्ड वैल्यू से करें।
  • रिडेम्प्शन वैल्यू: रिवॉर्ड पॉइंट्स को कैश, वाउचर या होटल/एयरलाइन माइल्स में रिडीम करने पर असली वैल्यू अलग-अलग हो सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या स्पाउस के अकाउंट में पैसे डालकर टैक्स बचाया जा सकता है? पैसे गिफ्ट करने को लेकर क्या रूल है, ये कब टैक्सेबल होता है?

Tax Rules On Gifting Money To Spouse: बहुत से नौकरीपेशा और बिजनेसमैन यह मान लेते हैं कि अपनी पत्नी या पति के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करके या उनके नाम पर निवेश करके परिवार की टैक्स देनदारी को कम किया जा सकता है। विशेष रूप से तब, जब स्पाउस की कोई अपनी कमाई न हो या वे लोअर टैक्स स्लैब में आते हों।

हालांकि, आयकर विभाग के नियम कुछ और ही कहते हैं। अगर आप सही नियमों और ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ के प्रावधानों को नहीं समझते हैं, तो टैक्स बचाने का यह तरीका आपके लिए भारी पड़ सकता है।

क्या स्पाउस को पैसे गिफ्ट करना टैक्स फ्री है?

हां, पैसे गिफ्ट करना पूरी तरह से टैक्स फ्री है! इनकम टैक्स एक्ट की धारा 56 के तहत पति या पत्नी को ‘रिश्तेदार’ की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए अपनी पत्नी या पति को कैश, चेक या एसेट के रूप में कितना भी पैसा गिफ्ट किया जाए, उस पर पाने वाले को कोई टैक्स नहीं देना होता।

कब लगता है अन्य पर टैक्स?

किसी गैर-रिश्तेदार से एक वित्तीय वर्ष में ₹50,000 से अधिक का गिफ्ट मिलने पर टैक्स लगता है, लेकिन स्पाउस के मामले में यह सीमा लागू नहीं होती। पैसे गिफ्ट करना भले ही टैक्स-फ्री हो, लेकिन जैसे ही उस पैसे को कहीं इन्वेस्ट किया जाता है और उससे कमाई शुरू होती है, टैक्स के नियम बदल जाते हैं।

‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ (सेक्शन 64) का गणित क्या है?

अगर आप अपनी पत्नी को पैसे गिफ्ट करते हैं और वे उस पैसे को एफडी, म्युचुअल फंड, शेयर मार्केट या सोने में निवेश कर देती हैं, तो उससे होने वाली कमाई पर आपकी पत्नी नहीं, बल्कि आपको टैक्स देना होगा। आयकर अधिनियम की धारा 64 के तहत ‘क्लबिंग प्रावधान’ इसलिए बनाए गए हैं ताकि लोग कम टैक्स स्लैब वाले पारिवारिक सदस्यों के नाम पर संपत्ति या पैसे ट्रांसफर करके टैक्स न चुरा सकें।

टैक्स किस पर लगेगा?

गिफ्ट किए गए पैसे से जो भी ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन्स होगा, वह आपकी कुल कर योग्य आय में जोड़ दिया जाएगा और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स काटा जाएगा।

कब लागू नहीं होते क्लबिंग ऑफ इनकम के नियम?

कुछ खास परिस्थितियां ऐसी हैं जहां क्लबिंग के नियम लागू नहीं होते और आप कानूनी रूप से टैक्स राहत पा सकते हैं:

खुद की प्रोफेशनल या टेक्निकल योग्यता से कमाई: अगर आपकी पत्नी आपकी किसी कंपनी या फर्म से सैलरी, फीस या कमीशन प्राप्त करती हैं और वह कमाई उनकी अपनी शैक्षणिक योग्यता, ज्ञान या हुनर के दम पर है, तो उस कमाई को आपके साथ नहीं जोड़ा जाएगा।

PPF में निवेश: अगर आप अपनी पत्नी के नाम से पीपीएफ खाता खोलकर उसमें पैसे जमा करते हैं, तो उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। इसलिए वहां क्लबिंग का कोई नुकसान नहीं होता।

पिन मनी या घर के खर्च की बचत: अगर पत्नी घर चलाने के लिए मिले खर्चों में से बचत करके उसे कहीं इन्वेस्ट करती हैं, तो उससे हुई आय पर क्लबिंग नियम लागू नहीं होते।

कमाई पर दोबारा कमाई: गिफ्ट किए गए पैसे से जो पहली कमाई होगी, वह आपके खाते में जुड़ेगी। लेकिन अगर आपकी पत्नी उस ब्याज के पैसे को दोबारा कहीं इन्वेस्ट करके और कमाई करती हैं, तो उस ‘दूसरी कमाई’ पर क्लबिंग लागू नहीं होगी।

ITR Deadline Alert: 31 जुलाई के बाद ITR भरा तो लगेगा जुर्माना! जानिए लेट रिटर्न दाखिल करने पर कितना होगा नुकसान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Deadline Alert: 31 जुलाई के बाद ITR भरा तो लगेगा जुर्माना! जानिए लेट रिटर्न दाखिल करने पर कितना होगा नुकसान

ITR Filing Deadline AY 2026-27: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख में सिर्फ 4 दिन बचे हैं। करदाताओं के लिए 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन बेहद करीब है। टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आखिरी वक्त के रश और ई-फाइलिंग पोर्टल के संभावित सर्वर डाउन या तकनीकी खराबी से बचने के लिए तुरंत अपना रिटर्न दाखिल कर दें।

आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 तक 4.10 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 3.85 करोड़ का ई-वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। आइए आपको बताते हैं 31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने पर आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।

क्या 31 जुलाई के बाद भी भरा जा सकता है ITR?

हां, अगर आप 31 जुलाई की डेडलाइन मिस कर देते हैं, तो भी आप अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसे बिलेटेड आईटीआर कहा जाता है। AY 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम सीमा 31 दिसंबर 2026 तक है। हालांकि, 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको भारी जुर्माना, ब्याज और कई टैक्स लाभों से हाथ धोना पड़ सकता है।

लेट ITR फाइल करने पर कितना लगेगा जुर्माना?

आयकर अधिनियम की सेक्शन 234F के तहत समय सीमा खत्म होने के बाद रिटर्न भरने पर लेट फीस वसूल की जाती है:

₹5 लाख से अधिक आय पर: अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 का जुर्माना देना होगा।

₹5 लाख तक की आय पर: अगर कुल आय ₹5 लाख तक है, तो लेट फीस ₹1,000 होगी।

बेसिक छूट सीमा से कम आय पर: अगर आपकी आय टैक्स फ्री लिमिट से कम है और रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं था, तो कोई लेट फीस नहीं लगेगी।

बकाया टैक्स पर लगेगा भारी ब्याज

31 जुलाई तक अगर आपका कोई टैक्स बकाया रह जाता है, तो धारा 234A के तहत हर महीने या महीने के हिस्से पर 1% की दर से ब्याज वसूला जाएगा। यह ब्याज तब तक जुड़ता रहेगा जब तक आप अपना रिटर्न और बकाया टैक्स जमा नहीं कर देते।

घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार खत्म

31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने का सबसे बड़ा नुकसान उन टैक्सपेयर्स को होता है जिन्हें कैपिटल गेन या बिजनेस में नुकसान हुआ है। समय पर ITR फाइल न करने पर आप इस नुकसान को भविष्य के सालों में अपने मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते।

टैक्स रिफंड मिलने में होगी देरी

अगर आपका टीडीएस अधिक कट गया है और आप टैक्स रिफंड के हकदार हैं, तो देरी से रिटर्न भरने पर रिफंड की प्रक्रिया और भुगतान में काफी वक्त लग सकता है। जितना जल्दी रिटर्न फाइल और वेरिफाई होगा, रिफंड उतनी ही तेजी से आपके बैंक खाते में आएगा।

किसके लिए कौन-सी डेडलाइन है लागू?

  • 31 जुलाई 2026: वेतनभोगी कर्मचारियों, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स तथा ₹1.25 लाख तक के LTCG वाले व्यक्तियों के लिए।
  • 31 अगस्त 2026: ऐसे कारोबारी और पेशेवर जिनकी खातों की टैक्स ऑडिट की आवश्यकता नहीं होती (ITR-3 / ITR-4)।
  • 30 सितंबर 2026: टैक्स ऑडिट कराने की अंतिम तिथि।
  • 31 अक्टूबर 2026: ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके खातों का ऑडिट होना अनिवार्य है।

पीएफ निकालने पर कब नहीं देना पड़ता टैक्स? जानिए 5 साल वाला नियम और TDS का पूरा गणित

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nirmala Sitharaman: ‘जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगवाएं’, इनकम टैक्स अधिकारियों को निर्मला सीतारमण की नसीहत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों से कहा है कि आम लोगों को अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी और तेजी से काम करने की अपील की।

नागरिकों का काम समय पर करें

मुंबई के नरीमन पॉइंट में बने 13 मंजिला आयकर सिंधु भवन के उद्घाटन के दौरान सीतारमण ने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है। लेकिन लोगों को उनका हक समय पर मिलना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकारी ऐसा काम करें कि लोगों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक भटकना न पड़े।

विभाग को भी झेलनी पड़ी परेशानी

वित्त मंत्री ने बताया कि जिस जमीन पर यह इमारत बनी है, वह 1973 से आयकर विभाग के पास थी। इसके बावजूद भवन बनाने के लिए विभाग को कई मंजूरियां लेने में काफी मुश्किलें आईं। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी विभाग को ही इतनी दिक्कत होती है, तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकारी जमीन पर कब्जे पर नाराजगी

सीतारमण ने सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हमारी कार्यप्रणाली की कमी दिखाता है। अगर समय रहते सरकारी संपत्तियों की देखभाल होती, तो ऐसी नौबत नहीं आती।

अधिकारियों के आवास की कमी दूर होगी

उन्होंने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई में आयकर अधिकारियों के लिए सरकारी आवास कम हैं। कई अधिकारियों को रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकारी विभागों के बीच जमीन का हस्तांतरण तेज किया जाएगा, ताकि नए दफ्तर और आवास जल्द बन सकें।

BSNL की जमीन का भी होगा इस्तेमाल

वित्त मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे BSNL की खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल सरकारी दफ्तरों और आवास के लिए करने की संभावना देखें। उन्होंने कहा कि इस बारे में वह संबंधित मंत्री से भी बात करेंगी।

ईमानदारी को सबसे ऊपर रखें

सीतारमण ने अधिकारियों से कहा कि ईमानदारी से बड़ा कोई सिद्धांत नहीं है। उन्होंने सभी अधिकारियों से पारदर्शिता के साथ काम करने और लोगों का भरोसा जीतने की अपील की।

*पीटीआई से इनपुट के साथ

Income Tax Return: खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें? जानिए क्या हैं एक्सपर्ट्स के जवाब

Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। कई टैक्सपेयर्स इस उलझन में हैं कि खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपने टैक्स फाइलिंग पोर्टल को काफी टैक्स फ्रेंडली बना दिया है। इस पर टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड डेटा यानी पहले से भरे गए डेटा दिखते हैं। एआई पावर्ड टूल्स भी उपलब्ध हैं। सवाल है कि आपको खुद रिटर्न फाइल करना चाहिए या टैक्स एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए?

इनकम के एक से ज्यादा स्रोत होने पर खुद फाइल करने में आ सकती है मुश्किल

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी टैक्सपेयर के इनकम के कई स्रोत हैं और कैपिटल गेंस जैसी चीजें हैं तो खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है। अगर कोई सैलरीड टैक्सपेयर है और उसकी सिर्फ एक इनकम है तो वह खुद रिटर्न फाइल कर सकता है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी से प्रॉफिट, फॉरेन एसेट या फॉरेन इनकम वाले टैक्सपेयर्स को खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है।

अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अब यह धारणा टूट रही है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता है।” उन्होंने कहा कि आज टैक्सपेयर्स कई तरह के एसेट्स में इनवेस्ट करते हैं। इनमें शेयर, म्यूचुअल फंड्स, REITs, InvITs, बिजनेस ट्रस्ट्स, फॉरेन एसेट्स और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स शामिल हैं।

अलग-अलग एसेट के लिए इनकम टैक्स के अलग-अलग नियम हैं

इनकम टैक्स के नियमों में अलग-अलग एसेट क्लास के लिए अलग-अलग नियम हैं। सिंगला ने कहा कि अगर इनकम टैक्स के पोर्टल पर रिटर्न फाइल कर दिया जाता है और उसमें कोई गलती होती है या पूरा डिसक्लोजर नहीं होता है या गलत आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल किया गया होता है तो टैक्सपेयर्स को नोटिस आ सकता है। इसका मतलब है कि टैक्स चुकाने के बावजूद छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत पैदा कर सकती है।

एआईएस और फॉर्म 26एएस को टैक्सपेयर्स को खुद चेक कर लेना जरूरी है

King Stubb & Kasiva में पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य ने कहा कि इनकम के कई स्रोत, बिजनेस इनकम, फॉरेन एसेट्स या कॉम्प्लेक्स डिडक्शंस वाले टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। हालांकि, एक्सपर्ट भी रिटर्न फाइल करने से पहले टैक्सपेयर को आईटीआर को रिव्यू करने को कहते हैं। इसके अलावा फॉर्म 26एएस, एआईएस और TIS जैसे डॉक्युमेंट्स के डेटा को चेक करने की जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होती है।

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रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का नहीं करें इंतजार 

अब रिटर्न फाइल करने के लिए एक हफ्ते से कम का समय बचा है। अगर आपने अब तक फाइल नहीं किया है तो आपको जल्द रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। आपको अगर खुद फाइल करने में दिक्कत आ रही है तो आप टैक्स एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। इससे आपको बाद में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

₹4 लाख से कम सैलरी वाले सावधान! टैक्स तो नहीं लगेगा, पर ITR भरना है जरूरी; जानिए ये 6 कड़े नियम

ITR Filing Rules Below Exemption Limit: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना लेट फीस इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है जो बेहद करीब है। आयकर विभाग के अनुसार, अब तक 3 करोड़ से अधिक करदाता अपना ITR फाइल कर चुके हैं।

आमतौर पर माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹4 लाख और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ₹2.5 लाख से अधिक की सालाना कमाई पर ही आईटीआर भरना अनिवार्य होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सालाना कमाई इस बेसिक छूट सीमा से कम होने के बावजूद भी आपको जेल या पेनल्टी से बचने के लिए ITR दाखिल करना पड़ सकता है?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के तहत ऐसे 6 विशेष नियम तय किए गए हैं, जिनके दायरे में आने पर आईटीआर भरना अनिवार्य हो जाता है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

इन 6 स्थितियों में कम कमाई पर भी अनिवार्य है ITR भरना

अगर आपकी सालाना आय बेसिक छूट सीमा से कम है, फिर भी इनमें से कोई एक शर्त पूरी होने पर आपको ITR दाखिल करना ही होगा:

1- करंट अकाउंट में ₹1 करोड़ से ज्यादा का डिपॉजिट: अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक चालू खातों में ₹1 करोड़ या उससे अधिक की नकदी जमा की है।

2- विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक का खर्च: अगर आपने अपने या किसी अन्य व्यक्ति के फॉरेन ट्रैवल जैसे- हवाई टिकट, टूर पैकेज आदि पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं।

3- ₹1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल: अगर पूरे साल में आपका बिजली बिल कुल मिलाकर ₹1 लाख से अधिक आया है।

4- TDS या TCS की सीमा पार होना: अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका कुल TDS/TCS कटान ₹25,000 या उससे अधिक है (60 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए)। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे ऊपर) के लिए यह सीमा ₹50,000 रखी गई है।

5- सेविंग्स अकाउंट में ₹50 लाख या उससे अधिक जमा: अगर वित्त वर्ष में आपके एक या एक से अधिक बचत खातों में कुल ₹50 लाख या उससे ज्यादा जमा हुए हैं।

6- विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खाते में साइनिंग अथॉरिटी: अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेश में कोई संपत्ति, फाइनेंशियल शेयर या किसी विदेशी बैंक खाते का साइनिंग राइट रखते हैं।

कम कमाई के बावजूद ITR फाइल करने के 4 बड़े फायदे

भले ही कानूनन आपके लिए आईटीआर भरना अनिवार्य न हो, फिर भी वॉलंटरी रिटर्न दाखिल करने के कई बड़े फायदे मिलते हैं:

लोन मिलने में आसानी: होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के आवेदन के दौरान ITR सबसे मजबूत ‘इनकम प्रूफ’ का काम करता है।

वीजा प्रोसेसिंग: कई देशों जैसे- अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन देश का वीजा हासिल करने के लिए पिछले 2-3 सालों का ITR जमा करना अनिवार्य होता है।

TDS रिफंड का दावा: अगर आपका टीडीएस कटा है, तो उसे वापस पाने के लिए रिटर्न भरना ही एकमात्र तरीका है।

नुकसान को आगे ले जाना: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए समय पर ITR फाइल करना जरूरी होता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Small Savings Schemes: शेयर मार्केट में उठा-पटक की टेंशन दूर, 8.2% तक का रिटर्न, पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम शानदार

Small Savings Schemes: पिछले कुछ महीनों से स्टॉक मार्केट में काफी उठा-पटक दिख रही है। इससे शॉर्ट टर्म में रिटर्न को लेकर निवेशक परेशान हो गए हैं। हालांकि अधिकतक एक्सपर्ट्स लंबे समय में अच्छा पैसा बनाने के लिए इक्विटी में पैसा लगाने की सलाह देते हैं लेकिन जो निवेशक मार्केट की घबराहट से दूर बिना टेंशन अच्छा पैसा बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी मार्केट में विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे निवेशकों के लिए सरकार के सपोर्ट वाली छोटी बचत योजनाएं पोर्टफोलियो का अच्छा हिस्सा बन सकती हैं। इनमें सालाना 8.2% तक का ब्याज मिल रहा है, जिससे मार्केट की उठा-पटक से दूर निवेशकों का क्रेज इन्हें लेकर बढ़ रहा है।

Public Provident Fund (PPF)

लंबे समय से पीपीएफ सैलरीड एंप्लॉयीज और अपना खुद का बिजनेस करने वालों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश विकल्पों में शुमार है। अभी इस पर सालाना 7.1% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 15 वर्ष है। पुरानी टैक्स व्यवस्था यानी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत इसमें किए गए निवेश पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन मिलका है। साथ ही अर्जित ब्याज और मेच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा भी टैक्स-फ्री होता है।

National Savings Certificate (NSC)

एनएससी एक फिक्स्ड इनकम योजना है, जिसमें अभी सालाना 7.7% की दर से ब्याज मिल रहा है। इसका मेच्योरिटी पीरियड 5 साल है और इसमें निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलता है।

Kisan Vikas Patra (KVP)

बाजार की उठा-पटक से दूर किसान विकास पत्र (केवीपी) ऐसे निवेशकों के लिए सुरक्षित है जो बिना किसी टेंशन अपने पैसे को अच्छी रफ्तार से बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं। अभी इस पर सालाना 7.5% की दर से ब्याज मिल रहा है और इस रफ्तार से 115 महीने में इसमें रखा पैसा डबल हो जाता है।

Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)

लड़कियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना में अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है जोकि स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में सबसे अधिक ब्याज देने वाली योजना में से एक है। 10 साल से कम उम्र की लड़की के अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं।

Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS)

सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम के तहत अभी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है और यह भी अधिक ब्याज देने वाली सरकारी बचत योजनाओं में शुमार है। इसके तहत 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग निवेश कर सकते हैं और ऐसे लोगों के लिए बेहतर है जो नियमित आय चाहते हैं।

Post Office Time Deposits

पोस्ट ऑफिस में बैंकों की तरह एक एफडी है, जिसे सरकार का सपोर्ट मिला हुआ है। इसमें एक साल की जमा पर 6.9%,दो साल की जमा पर 7.0%, तीन साल की जमा पर 7.1% और पांच साल की जमा पर 7.5% की दर से ब्याज मिलेगा। पांच साल की जमा पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बेनेफिट्स भी मिलेगा।

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें

सरकार हर तिमाही स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स यानी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें तय करती हैं और सितंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यहां पोस्ट ऑफिस से जुड़ी स्कीम्स के लिए ब्याज दर की डिटेल्स दी जा रही है-

स्मॉल सेविंग्स स्कीमब्याज दर
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)8.2%
सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS)8.2%
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.7%
किसान विकास पत्र (KVP)7.5%
5 वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट7.5%
पोस्टऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.4%
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.1%
3 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट7.1%
2 साल का पोस्ट ऑफिस डाकघर टाइम डिपॉजिट7.0%
1 साल का पोस्ट ऑफिस  टाइम डिपॉजिट6.9%
पोस्ट ऑफिस आरडी (RD)6.7%
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम4.0%

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डिस्क्लेमर: निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से जरूर संपर्क करें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है