Income Tax Return: अगर आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो है तो भी न करें ये भूल! इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनके फॉर्म 16 में कोई टैक्स नहीं कटा है या फिर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉर्म 16 में टैक्स लायबिलिटी निल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको आईटीआर दाखिल करने से छूट मिल गई है। ऐसा न करना आपको भारी पड़ सकता है।

फॉर्म 16 नहीं है आपकी वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर

King Stubb & Kasiva, Advocates and Attorneys के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य का कहना है कि एक आम गलतफहमी यह है कि अगर फॉर्म 16 में कोई टीडीएस या देय टैक्स नहीं है तो आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फॉर्म 16 सिर्फ इंप्लॉयर द्वारा भुगतान किए गए वेतन और काटे गए टैक्स (अगर कोई है तो) का एक रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय तस्वीर को नहीं दर्शाता है। आईटीआर फाइल करने की अनिवार्यता इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों, आपकी कुल आय और वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए वित्तीय लेनदेन पर निर्भर करती है।

इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

भले ही आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो दिख रहा हो लेकिन नीचे दी गई स्थितियों और फायदों के लिए आपको आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए-

1- टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए

कई बार ऐसा होता है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं या फिर नौकरी बदलने की स्थिति में पिछला इंप्लॉयर नौकरी छोड़ने से पहले टैक्स काट लेता है। भले ही वित्तीय वर्ष के अंत में आपकी कुल अंतिम टैक्स देनदारी शून्य ही क्यों न हो, लेकिन इस कटे हुए एक्स्ट्रा टैक्स को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर है। बिना रिटर्न फाइल किए आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।

2- वित्तीय घाटे को आगे बढ़ाने के लिए

अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस उठाते हैं तो नियमों के तहत आप इस घाटे को भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। यह लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करेंगे। डेडलाइन चूकने का मतलब है कि आप इस मूल्यवान टैक्स लाभ को हमेशा के लिए खो देंगे।

3- इन विशेष सरकारी शर्तों/नियमों को पूरा करने के लिए

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार भले ही आपका अंतिम टैक्स शून्य हो लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित में से किसी भी शर्त के दायरे में आते हैं तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है:

  • एक या अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करना।
  • एक या अधिक करंट अकाउंट्स (चालू खातों) में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करना।
  • अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
  • एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाना।
  • अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में संपत्ति रखते हैं, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित रखते हैं, विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं या विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी हैं।
  • वर्ष के दौरान कुल टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) 25000 रुपये या उससे अधिक हो (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है)।
  • ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी कुल प्राप्तियां 10 लाख रुपये से अधिक हैं, भले ही उनकी टैक्स योग्य आय बुनियादी छूट सीमा से कम ही क्यों न हो।

4- लोन और वीजा के लिए पुख्ता इनकम प्रूफ

‘दिनेश आर्जव एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ की पार्टनर और एनआरआई टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन कहती हैं कि कंप्लायंस के नजरिए से परे आपका आईटीआर चुपचाप आपके लिए दूसरी जगहों पर भी बहुत काम करता है। बैंक और वीजा कार्यालय अक्सर आय के प्रमाण के रूप में इसी दस्तावेज को मांगते हैं। इसलिए रिकॉर्ड में आईटीआर का होना बेहद फायदेमंद है, भले ही तकनीकी रूप से आपके लिए इसे फाइल करना जरूरी न रहा हो।

ऐसे में फॉर्म 16 में जीरो टैक्स देखकर आईटीआर न भरने की धारणा नुकसानदेह हो सकती है। ‘AQUILAW’ की लीड कंसलटेंट (टैक्स) – IDT डिंपल जोगानी के मुताबिक, फाइलिंग की आवश्यकता को नजरअंदाज करने से टैक्सपेयर्स न सिर्फ अपना रिफंड खो सकते हैं बल्कि नुकसान को कैरी फारवर्ड करने का मौका भी गंवा सकते हैं। अगर आयकर विभाग बाद में यह पाता है कि आपके लिए फाइलिंग अनिवार्य थी तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी मिल सकता है। मामले के तथ्यों के आधार पर लेट फाइलिंग फीस, ब्याज या अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अब ऐसी गलतफहमियों की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इंप्लॉयर, बैंकों, म्यूचुअल फंडों, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी अब टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिखाई देती है। इसके जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की तुलना आपके रिटर्न में घोषित आय से आसानी से कर लेता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ फॉर्म 16 पर न रहें निर्भर

जैसे-जैसे टैक्स फाइलिंग का सीजन तेज हो रहा है विशेषज्ञ टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे ‘जीरो टीडीएस’ को ‘जीरो कंप्लायंस’ समझने की भूल न करें। सिर्फ फॉर्म 16 पर निर्भर रहने की बजाय, व्यक्तियों को अपनी आय के सभी स्रोतों की समीक्षा करनी चाहिए। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आईटीआर फाइल करने की शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।

ITR 2026: अपने इनकम टैक्स रिटर्न पर चाहिए मैक्सिमम रिफंड तो आईटीआर फाइल करते समय अपनाएं ये 5 शानदार तरीके

Income Tax Return Best Strategies: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही टैक्सपेयर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वे अपना टैक्स रिफंड कैसे बढ़ाएं। टैक्स रिफंड को अधिकतम करना सिर्फ आखिरी समय में डिडक्शन ढूंढने तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत इस बात से होती है कि आपका टैक्स रिटर्न आपकी इनकम, निवेश और पहले से भुगतान किए गए टैक्स को बिल्कुल सही-सही दर्शाता हो।

क्या होता है इनकम टैक्स रिफंड?

इनकम टैक्स रिफंड तब जारी किया जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्सपेयर द्वारा चुकाया गया टैक्स, उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाता है। यह एक्स्ट्रा टैक्स सोर्स पर टैक्स कटौती (TDS), सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) या एडवांस टैक्स के रूप में जमा हो सकता है। टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर दाखिल करके इस एक्स्ट्रा टैक्स अमाउंट को क्लेम कर सकते हैं। आपको बता दें कि रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड का स्टेटस इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और दूसरे ऑप्शन की मदद से ऑनलाइन ट्रैक भी किया जा सकता है।

क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अपने लिए लागू सभी उपलब्ध छूटों और कटौतियों को क्लोजली रिव्यू करना चाहिए। दोनों टैक्स रिजीम के फायदों की तुलना करनी चाहिए और यह वेरिफाई करना चाहिए कि टैक्स डॉक्युमेंट्स में दी गई जानकारी ऑफिशियल रिकॉर्ड से मैच करती हो। आपकी छोटी सी गलती भी रिफंड में देरी कर सकती है या नोटिस का कारण बन सकती है।

मैक्सिमम रिफंड पाने की 5 शानदार स्ट्रैटिजी

अपने इनकम टैक्स रिफंड को अधिकतम करने के लिए टैक्सपेयर्स को नीचे दिए गए तरीकों को अपनाना चाहिए:

1- दोनों टैक्स रिजीम (Old vs New) की तुलना करें

रिटर्न फाइल करने से पहले पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें। उस रिजीम का चयन करें जिसमें आपका टैक्स आउटगो सबसे कम हो। अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका अधिक टीडीएस कट चुका है तो सही रिजीम चुनकर आप अपना रिफंड काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

2- ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत डिडक्शंस का पूरा लाभ उठाएं

अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं तो आप अलग-अलग कटौतियों के माध्यम से अपनी टैक्स योग्य इनकम को कम कर सकते हैं। इसके लिए नीचे दी गई जानकारी को देखें-

सेक्शन 80C: पीपीएफ, ईएलएसएस, ईपीएफ, एनएससी, जीवन बीमा प्रीमियम और 5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश करके आप ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।

सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के माध्यम से ₹25000 से ₹50000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत का दावा किया जा सकता है। यह क्लेम इंश्योर्ड शख्स और परिवार के सदस्यों की उम्र पर निर्भर करता है।

सेक्शन 24(b) और HRA: सैलरीड कर्मचारी निर्धारित शर्तों के अधीन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट का दावा कर सकते हैं। साथ ही खुद के घर के होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की कटौती पा सकते हैं।

3- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का अतिरिक्त फायदा

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में योगदान करने वाले लोग सेक्शन 80C की सीमा के ऊपर और अतिरिक्त सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50000 तक की एक्स्ट्रा कटौती का दावा कर सकते हैं। सेक्शन 80CCD(2) के तहत एंप्लॉयर के योगदान पर भी टैक्स लाभ मिलता है। यह कटौती दोनों टैक्स रिजीम (पुरानी और नई) में उपलब्ध है। इसके तहत एंप्लॉयर की कैटेगिरी के आधार पर ओल्ड रिजीम में वेतन के 10 प्रतिशत तक और न्यू रिजीम में 14 प्रतिशत तक के एंप्लॉयर योगदान पर दावा किया जा सकता है।

4- स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स रिबेट

सैलरीड टैक्सपेयर्स टैक्स योग्य इनकम की गणना करते समय ऑटोमेटिकली स्टैंडर्ड डिडक्शन के हकदार होते हैं। यह कटौती ओल्ड रिजीम के तहत ₹50000 और न्यू रिजीम के तहत ₹75000 है। इसके अलावा पात्र टैक्सपेयर्स सेक्शन 87A के तहत रिबेट का लाभ उठा सकते हैं जिससे अगर टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है तो टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।

इसके अलावा फैमिली पेंशन प्राप्तकर्ताओं को सेक्शन 57(iia) के तहत कटौती मिलती है। यह कटौती ओल्ड रिजीम में ₹15000 तक और न्यू रिजीम में ₹25000 तक उपलब्ध है, जो टैक्स योग्य आय को कम करके रिफंड की पात्रता में सुधार करती है।

5- रिफंड क्लेम करने के लिए अपनाएं ये जरूरी स्टेप्स

रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है, भले ही टैक्सपेयर के लिए सामान्य रूप से रिटर्न दाखिल करना जरूरी न हो। रिफंड प्रक्रिया को तेज करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

सही ITR फॉर्म चुनें: इनकम के सोर्स, आवासीय स्थिति और टैक्सपेयर की श्रेणी के आधार पर सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म चुनने से रिपोर्टिंग में त्रुटियां हो सकती हैं और रिफंड अटक सकता है।

आय की सटीक गणना: अपनी आय के सभी स्रोतों, लागू कटौतियों और छूटों को सही ढंग से घोषित करें।

TDS डिटेल वेरिफाई करें: रिटर्न में पहले से भरे हुए टीडीएस डिटेल का फॉर्म 16, फॉर्म 16A या अन्य संबंधित रिकॉर्ड से मिलान जरूर करें ताकि कोई विसंगति न रहे।

सही बैंक खाते का डिटेल दें: अपने एक्टिव बैंक खाते की सही जानकारी दर्ज करें क्योंकि रिफंड सीधे रिटर्न से लिंक बैंक खाते में ही क्रेडिट किया जाता है। गलत जानकारी देने से ट्रांसफर फेल हो सकता है।

तुरंत ई-वेरिफिकेशन पूरा करें: रिटर्न दाखिल करने के बाद जितनी जल्दी हो सके इसे ई-वेरीफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद ही रिटर्न प्रोसेस होता है और समय पर वेरिफिकेशन से रिफंड जल्दी जारी होने में मदद मिलती है।

ITR Filing 2026: 31 जुलाई तक नहीं भरा रिटर्न तो लगेगा 5,000 तक जुर्माना! जानिए आपको कौन सा ITR Form भरना है

Income Tax Return Deadline

ITR Filing Deadline 2026 : क्या आप भी इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आखिरी तारीख (31 जुलाई) का इंतजार कर रहे हैं? याद रखें, इनकम टैक्स पोर्टल ऐन वक्त पर हैंग हो सकता है और आपकी एक लापरवाही सीधे 5,000 रुपए का चूना लगा सकती है! ALSO READ: 1 July से बदल गए 6 बड़े नियम: Aadhaar, Passport से लेकर Credit Card तक, आपकी जेब पर सीधा असर

 

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के बाद आइटीआर दाखिल करने पर करदाताओं को विलंब शुल्क देना होगा। यदि कर योग्य आय पांच लाख रुपए से अधिक है तो अधिकतम 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, 5 लाख रुपए तक की कर योग्य आय वाले करदाताओं को 1,000 रुपए विलंब शुल्क देना होगा।

 

ITR में किसे कौन सा फार्म भरना होगा?

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) का सही फॉर्म आपकी आय के स्रोत, कुल आय और टैक्सपेयर की श्रेणी पर निर्भर करता है। गलत ITR फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है।

ITR forms

किसे 31 जुलाई तक दाखिल करना होगा रिटर्न

आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का आखरी महीना शुरू हो गया है। विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर आइटीआर-1 और आइटीआर-4 की आनलाइन व आफलाइन यूटिलिटी उपलब्ध करा दी है। वेतनभोगी, पेंशनभोगी और सीमित आय स्रोत वाले करदाताओं के लिए आइटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

 

ये 31 अक्टूबर तक भर सकेंगे रिटर्न

जिन व्यापारियों और पेशेवरों के खातों का आडिट अनिवार्य नहीं है, उनके लिए आइटीआर-3 और आइटीआर-4 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है। वहीं जिन व्यापारियों और कंपनियों के खातों का आडिट जरूरी है, वे 31 अक्टूबर 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।

Annapurna Yojana: अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने महिलाओं को मिलेंगे ₹3,000! जानें कौन होगा पात्र और कैसे चेक करें स्टेटस

Annapurna Yojana: पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को बुधवार, 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके तहत 25 से 60 साल की उम्र की लगभग 1.2 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में हर महीने ₹3,000 भेजे जाएंगे। इस योजना का मकसद राज्य भर की महिलाओं को आर्थिक मदद देना और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है।

इस दौरान बुधवार को एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई जिलों से आई सैकड़ों लाभार्थी महिलाओं की मौजूदगी में इस योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत पैसे सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जिससे इसका औपचारिक रूप से शुभारंभ हुआ।

इससे पहले, सरकार ने बताया था कि उसे इस योजना के लिए अब तक लगभग 1.5 करोड़ आवेदन मिले हैं। जांच-पड़ताल के बाद, कुल 1.2 करोड़ आवेदन सही पाए गए। इनमें लगभग 5 लाख आदिवासी महिलाएं शामिल थीं।

अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी कौन हैं?

इस योजना के लाभार्थी वे महिलाएं हैं जो सरकार द्वारा तय किए गए मानदंडों को पूरा करती हैं। इसमें मुख्य रूप से 25 से 60 वर्ष की आयु की लगभग 1.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाएगी।

‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का नया रूप है अन्नपूर्णा योजना 

सरकार ने अन्नपूर्णा योजना के लिए कुल ₹36,000 करोड़ का बजट तय किया है। यह पहले से चल रही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का ही नया रूप है, जिसके तहत लगभग 2.4 करोड़ लोग लाभ उठा रहे थे।

इस बदलाव के कारण महिलाओं में अपनी पात्रता (eligibility) को लेकर कुछ भ्रम हो सकता है कि उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं। सरकार ने बताया है कि लक्ष्मी भंडार योजना के योग्य पुराने लाभार्थियों को नई अन्नपूर्णा योजना में शामिल कर दिया गया है। वहीं, मई से नए आवेदन जमा किए गए थे।

स्टेटस चेक करने के स्टेप्स

अगर आपने अन्नपूर्णा योजना के लिए आवेदन किया है और अपना लाभार्थी स्टेटस देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें:

  1. सबसे पहले पश्चिम बंगाल सोशल सिक्योरिटी पोर्टल पर जाएं:

    https://socialregistry.wb.gov.in/

  2. फिर Citizen Access सेक्शन पर क्लिक करें, जो आपको इस लिंक पर ले जाएगा:

    https://socialregistry.wb.gov.in/citizen/

  3. अब अपने जिले (District) का चयन करें और मोबाइल नंबर डालकर लॉगिन डिटेल्स भरें।
  4. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) आएगा।
  5. OTP और कैप्चा (Captcha) भरकर लॉगिन करें।
  6. लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड में जाकर “Application Status” पर क्लिक करें।
  7. यहां आपको आपकी आवेदन स्थिति और लाभार्थी जानकारी दिख जाएगी।

कौन पात्र नहीं है

मुख्यमंत्री ने पहले ही साफ किया था कि लक्ष्मी भंडार योजना नई अन्नपूर्णा योजना में पूरी तरह शामिल होने तक जारी रहेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनकम टैक्स भरने वाले, सरकारी कर्मचारी, नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारी और पेंशन पाने वाले लोग इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। हालांकि, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) प्रक्रिया के तहत आने वाले आवेदक या SIR प्रक्रिया में न्यायिक समीक्षा का सामना कर रहे लोग इस योजना के लाभ के पात्र बने रहेंगे।

सरकार ने बताया कि जून महीने में भी लाखों लाभार्थियों के खातों में पैसे भेजे गए थे, लेकिन आने वाले चरणों में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया 1 जून से शुरू होकर 90 दिनों तक चलेगी। इस दौरान हर नगर पालिका (Municipality) में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन और सत्यापन का काम किया जाएगा, ताकि सभी पात्र लोगों को इस योजना का लाभ मिल सके।

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Personal Loan EMI: कम ब्याज पर पर्सनल लोन चाहिए? अप्लाई करने से पहले जरूर करें ये 7 काम

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सबसे आसान और तेजी से मिलने वाला लोन है। शादी, इलाज, बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत या किसी दूसरी जरूरी जरूरत के लिए लोग अक्सर इसका सहारा लेते हैं। लेकिन कई बार लोग बिना तैयारी के लोन के लिए आवेदन कर देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि या तो लोन महंगे ब्याज पर मिलता है या फिर आवेदन ही रिजेक्ट हो जाता है।

अगर आप चाहते हैं कि बैंक या NBFC आपको कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन ऑफर करे, तो आवेदन करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे 7 काम, जो आपकी ब्याज दर कम कराने में मदद कर सकते हैं।

1. CIBIL Score मजबूत रखें

पर्सनल लोन की ब्याज दर तय करने में CIBIL Score सबसे अहम भूमिका निभाता है। अगर आपका स्कोर 750 या उससे ज्यादा है तो बैंक आपको कम जोखिम वाला ग्राहक मानते हैं। ऐसे ग्राहकों को अक्सर बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना रहती है।

अगर स्कोर कम है तो पहले पुराने बकाया चुकाएं, समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल भरें। कुछ महीनों में स्कोर बेहतर हो सकता है।

2. नौकरी और आमदनी स्थिर होनी चाहिए

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि आपकी नौकरी कितनी स्थिर है। अगर आप लंबे समय से एक ही कंपनी में काम कर रहे हैं और आपकी आमदनी नियमित है, तो लोन मिलने के साथ-साथ बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

अगर अपना रोजगार करते हैं, तो नियमित कमाई और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की भी भूमिका अहम हो जाती है।

3. पहले से ज्यादा कर्ज है तो सावधान रहें

अगर आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से EMI चुकाने में जा रहा है, तो बैंक को लगता है कि आपको लोन देने में जोखिम है। इसे डेट टु इनकम रेशियो कहते हैं यानी कर्ज और कमाई का अनुपात।

हमेशा कोशिश करें कि आपकी कुल EMI, मंथली इनकम के बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा न करे। इससे कम ब्याज पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

4. एक साथ कई जगह आवेदन न करें

कई लोग सोचते हैं कि जितने ज्यादा बैंकों में आवेदन करेंगे, लोन मिलने की संभावना उतनी बढ़ जाएगी। लेकिन ऐसा करना उल्टा नुकसान पहुंचा सकता है।

हर आवेदन पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में हार्ड इन्क्वायरी दर्ज होती है। कम समय में कई हार्ड इन्क्वायरी होने पर CIBIL Score प्रभावित हो सकता है और बैंक इसे जोखिम का संकेत मान सकते हैं।

5. जिस बैंक से रिश्ता पुराना है, वहां पहले बात करें

अगर आपका सैलरी अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, होम लोन या दूसरी बैंकिंग सेवाएं पहले से किसी बैंक में हैं, तो उसी बैंक से पहले ऑफर जरूर चेक करें।

मौजूदा ग्राहकों को कई बैंक प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन या कम ब्याज दर की पेशकश करते हैं।

6. सिर्फ पहली पेशकश पर हामी न भरें

हर बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और दूसरी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए पहला ऑफर मिलते ही लोन लेने की बजाय अलग-अलग संस्थानों के ऑफर की तुलना करें।

अगर आपका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है, तो कई मामलों में ब्याज दर पर सौदेबाजी की भी गुंजाइश होती है।

7. जितनी जरूरत हो, उतना ही लोन लें

जरूरत से ज्यादा रकम का लोन लेने पर EMI का बोझ बढ़ जाता है। वहीं बहुत लंबी अवधि चुनने पर कुल ब्याज भी ज्यादा देना पड़ सकता है।

इसलिए उतना ही लोन लें, जिसकी वास्तव में जरूरत हो। साथ ही, लोन की अवधि भी अपनी सहूलियत के हिसाब से रखें। ताकि EMI भी आराम से चुकाई जा सके और कुल ब्याज भी ज्यादा न बढ़े।

इन बातों को भी नजरअंदाज न करें

सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न करें। प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज, प्रीपेमेंट नियम, लेट पेमेंट पेनल्टी और दूसरी शर्तों को भी ध्यान से पढ़ें। कई बार कम ब्याज वाला लोन भी छिपे हुए चार्ज की वजह से महंगा पड़ सकता है।

कम ब्याज पर पर्सनल लोन पाना सिर्फ किस्मत की बात नहीं है। ये सिबिल स्कोर, कमाई और आपकी सौदेबाजी के हुनर पर काफी निर्भर करता है। इसलिए आवेदन करने से पहले थोड़ी तैयारी कर लें। इससे आपकी जेब पर EMI का बोझ भी कम रहेगा और लोन चुकाना भी आसान होगा।

Income Tax Refund: पूरा इनकम टैक्स रिफंड नहीं मिला? ये 7 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

Ayodhya Ram Mandir donation theft

Ayodhya Ram Mandir donation theft: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने आस्था के केंद्र पर लगे इस दाग को और गहरा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में सबसे बड़ी चोरी साल 2025 की शुरुआत में आयोजित हुए कुंभ मेले के दौरान हुई, जब देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे से रामजी का खजाना लबालब था। इस महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स (IT) विभाग की एंट्री होने जा रही है, क्योंकि चोरी के पैसों से आधे दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदने और कंबलों में नोटों की गड्डियां छिपाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले से ही छोटी-मोटी चोरियां कर रहे थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में जब कुंभ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और दान में भारी उछाल आया, तो आरोपियों की नीयत पूरी तरह डोल गई। उन्होंने इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर आपस में साठगांठ की और करोड़ों रुपए के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

जीजा-साले ने खरीदीं आधा दर्जन संपत्तियां

इस खेल के सबसे बड़े आरोपी रिश्ते में जीजा-साले हैं। गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके जीजा अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश उड़ाया। पाप की इस कमाई से उन्होंने देखते ही देखते आधे दर्जन से अधिक अवैध संपत्तियां खरीद लीं, जिसे पुलिस ने ट्रैक कर लिया है।

 

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के एक योग केंद्र पर जब पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां रखे चार बड़े बक्सों में नोटों की गड्डियों को बड़ी चालाकी से कंबलों के अंदर छिपाकर रखा गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

चंपत राय के ड्राइवर के घर भी मिला कैश

इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू है आरोपी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी। टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर था। ड्राइवर होने के नाते उसकी पहुंच बहुत अंदर तक थी और उसी के पास नोटों की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे की एक चाबी रहती थी। टिन्नू के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला है।

अब ED और IT कसेंगे शिकंजा

यह मामला अब सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिख रही है, जबकि अवैध संपत्तियों की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग की मदद ली जा रही है। यही नहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, क्योंकि तिजोरी की चाबी रखने वाले बैंक स्टाफ की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी मुमकिन ही नहीं थी। आरोपियों के खातों में उनकी वैध कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन मिला है। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी 89 लाख रुपए की हुई है। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला? 

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद से ही देश-विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। इस वजह से मंदिर के दानपात्रों और काउंटरों पर हर महीने करोड़ों रुपए का नकद और चेक के माध्यम से दान आता है। इन पैसों को गिनने के लिए मंदिर परिसर में एक स्पेशल काउंटिंग रूम बनाया गया है, जहां बैंक के अधिकारी और ट्रस्ट के भरोसेमंद लोग मौजूद रहते हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को ऑडिट और रूटीन चेकिंग के दौरान दान में आई रकम और बैंक में जमा हुई राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर (मिसमैच) नजर आया।

 

इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर 89 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव (ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो चुका है।

 

Ram Mandir Donation Scam: कुंभ में लूटा गया सबसे ज्यादा राम मंदिर का चढ़ावा! जीजा-साले की जोड़ी ने उड़ाई बड़ी रकम

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के लिए मिले दान की चोरी के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। अयोध्या पुलिस की जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी 2025 की शुरुआत में कुंभ मेले के दौरान हुई थी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कुछ कुंभ से पहले भी छोटी-मोटी चोरियों में शामिल थे। लेकिन कुंभ के दौरान मंदिर में चढ़ावे और दान में भारी बढ़ोतरी हुई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इसका फायदा उठाया और मिलीभगत करके एक बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

फिलहाल इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव (जिन्हें टिन्नू यादव भी कहा जाता है) शामिल हैं। इन सभी से मंगलवार को कई घंटों तक पूछताछ की गई।

वहीं, पुलिस का दावा है कि पूरी साजिश सभी आठों आरोपियों ने मिलकर रची थी।

जीजा-साले की जोड़ी ने सबसे ज्यादा कैश चुराया

जांच में सामने आया है कि जीजा-साले की जोड़ी, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा रकम चुराई थी। पुलिस के मुताबिक, इस जोड़ी ने चोरी के पैसों से प्रॉपर्टी भी खरीदी। अब तक पुलिस ने इन दोनों से जुड़ी आधी दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी का पता लगाया है।

पैसे के लेन-देन की जांच के लिए, अयोध्या पुलिस अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर आरोपी की संपत्ति और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। अधिकारी मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) की विस्तृत जांच के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती SBI की देखरेख में होती है, जो इस काम के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को नियुक्त करता है। मंदिर में आने वाले दान को चार दान-पेटियों में जमा किया जाता है और इसकी गिनती 14 लोगों की एक टीम करती है, जिसमें बैंक के 11 कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के तीन सदस्य शामिल होते हैं।

इस बीच, पुलिस ने बताया कि इस मामले में सबसे ज्यादा नकद राशि आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी कौशालपुरी की एक जगह से बरामद की गई थी। यह जगह उसके भाई अभिषेक से जुड़े एक योग केंद्र की है।

योग सेंटर चलाने वाली सीमा तिवारी ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को सेंटर की तलाशी ली और भारी मात्रा में कैश बरामद किया। उन्होंने कहा कि वहां अभिषेक के चार बक्से रखे हुए थे, जिनमें कंबल के अंदर पैसे छिपाकर रखे गए थे। एक बक्से पर “राम राज्य कोष” लिखा हुआ था।

सीमा तिवारी के मुताबिक, जब अभिषेक से छापेमारी और कैश के बारे में पूछताछ की गई, तो उसने दावा किया कि उसका भाई अविनाश शुक्ला ड्रग्स के धंधे में शामिल है और इसी वजह से छापेमारी हुई।

आरोपियों के घरों से कैश बरामद

वहीं, जांच अब सभी आरोपियों के घरों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने तीन दिन पहले तलाशी ली और टिन्नू यादव के घर से कैश बरामद किया, जो पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है।

सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं को पता चला कि मंदिर में मिले दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी कथित तौर पर टिन्नू यादव के पास थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक स्टाफ के पास रहती थी। सूत्रों ने आगे बताया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फंड का कथित तौर पर गबन किया गया और इसमें शामिल लोगों के बीच पैसे आपस में बांट लिए गए।

इसके साथ ही, पुलिस ने सभी आरोपियों की चल और अचल संपत्ति से जुड़े बैंक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी इकट्ठा किए हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले एक साल के उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से कथित तौर पर ऐसे लेन-देन का पता चला है जो उनकी ज्ञात आय से कहीं ज़्यादा थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि, इस मामले में सबसे ज्यादा कैश की बरामदगी 89 लाख रुपये की हुई, जो आरोपी अविनाश शुक्ला द्वारा कथित तौर पर जगह बताने के बाद की गई। पुलिस ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने यह रकम बरामद कर ली थी।

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Income Tax Refund: पूरा इनकम टैक्स रिफंड नहीं मिला? ये 7 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: ITR फाइल करने के बाद ज्यादातर लोगों को 4 से 5 हफ्तों में टैक्स रिफंड मिल जाता है। लेकिन कई बार खाते में उतनी रकम नहीं आती, जितनी आपने क्लेम की थी। इसकी वजह यह है कि इनकम टैक्स विभाग रिटर्न प्रोसेस करते समय आपकी जानकारी का दोबारा मिलान करता है। अगर कोई गड़बड़ी मिलती है, तो रिफंड की रकम कम हो सकती है।

पूरा रिफंड क्यों नहीं मिलता?

रिटर्न प्रोसेस करते समय इनकम टैक्स विभाग Form 26AS, AIS, TIS, TDS स्टेटमेंट और दूसरी जानकारियों का मिलान करता है। अगर इनमें अंतर मिलता है, तो रिफंड कम हो सकता है। इसके लिए ये 7 कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • TDS या TCS की जानकारी में गड़बड़ी
  • बैंक ब्याज या कैपिटल गेन जैसी टैक्स योग्य आय छूट जाना
  • गलत टैक्स छूट (Deduction) का दावा
  • एडवांस टैक्स या सेल्फ-असेसमेंट टैक्स की गलत जानकारी
  • टैक्स के कैलकुलेशन में गलती
  • धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज लगना
  • पुराने असेसमेंट ईयर की बकाया टैक्स डिमांड

अगर विभाग कोई बदलाव करता है, तो धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन भेजता है। इसमें रिफंड कम होने की वजह भी बताई जाती है।

रिफंड की रकम कैसे तय होती है?

इनकम टैक्स विभाग आपकी आय, टैक्स छूट और टैक्स क्रेडिट का मिलान करता है। इसके लिए वह कंपनी, बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाओं से मिली जानकारी का इस्तेमाल करता है।

इसके बाद आपकी कुल टैक्स देनदारी दोबारा निकाली जाती है। फिर TDS, TCS, एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स को एडजस्ट किया जाता है। अगर आपने जरूरत से ज्यादा टैक्स जमा किया है, तो बची हुई रकम रिफंड के रूप में मिलती है। अगर पुराने साल का कोई टैक्स बकाया है, तो उसे भी रिफंड से एडजस्ट किया जा सकता है।

पुराने टैक्स बकाया का क्या होगा?

अगर किसी पुराने असेसमेंट ईयर का टैक्स बकाया है, तो इनकम टैक्स विभाग उसे आपके रिफंड से एडजस्ट कर सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले विभाग ई-फाइलिंग पोर्टल पर सूचना देता है।

टैक्सपेयर्स को डिमांड स्वीकार करने, आंशिक रूप से मानने या उस पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलता है। तय समय तक जवाब नहीं मिलने या जवाब पर फैसला होने के बाद ही एडजस्टमेंट किया जाता है।

ब्याज भी घटा सकता है रिफंड

अगर आपने ITR देर से फाइल की है, एडवांस टैक्स कम भरा है या उसकी किस्त समय पर जमा नहीं की है, तो धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है।

यह ब्याज आपकी कुल टैक्स देनदारी में जुड़ जाता है। ऐसे में TDS पूरा कटा होने पर भी रिफंड कम मिल सकता है।

अगर रिफंड कम मिले तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि रिफंड गलत तरीके से कम किया गया है, तो सबसे पहले धारा 143(1) के तहत मिला इंटिमेशन पढ़ें। उसमें पूरी वजह लिखी होती है।

अगर कोई गलती दिखे, तो रेक्टिफिकेशन के लिए आवेदन करें। Form 16, Form 16A, Form 26AS, AIS, TIS, टैक्स चालान, निवेश के दस्तावेज, कैपिटल गेन का हिसाब, ITR की कॉपी और पुराने टैक्स रिकॉर्ड संभालकर रखें। जरूरत पड़ने पर यही दस्तावेज काम आएंगे।

रिफंड कम होने से कैसे बचें?

ITR फाइल करने से पहले Form 26AS, AIS और TIS का अच्छी तरह मिलान करें। बैंक ब्याज, कैपिटल गेन और दूसरी सभी टैक्स योग्य आय जरूर शामिल करें। सही ITR फॉर्म चुनें। टैक्स छूट और टैक्स क्रेडिट का दावा दस्तावेजों के आधार पर ही करें।

बैंक अकाउंट पहले से प्री-वैलिडेट रखें। ITR फाइल करने के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन करें। रिटर्न सबमिट करने से पहले एक बार पूरी जानकारी जरूर जांच लें। इससे रिफंड में कटौती या देरी की संभावना काफी कम हो जाती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

Rules Changing From July 1 2026:  1 जुलाई से देश में कई जरूरी फाइनेंशियल और और नीतिगत बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर इनकम टैक्स, सैलरीड क्लास, पेंशन पाने वालों, बैंक कस्टमर और विदेश यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ने जा रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और पासपोर्ट फीस से लेकर ईपीएफओ सेवाओं, आधार नियमों और क्रेडिट कार्ड के फायदों में कई बड़े अपडेट किए गए हैं। आइए आपको इन बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं ताकि आप किसी तरह की असुविधा से बचें और बजट को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएं।

1- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता, घरेलू दाम स्थिर

सरकार ने 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। इससे होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। इस कटौती के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3113.50 से घटकर ₹2930 हो गई है। हालांकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कटौती 2026 की पहली छमाही के दौरान कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई कई तेज वृद्धियों के बाद आई है।

2- FY 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। ऐसे करदाता जो ITR-3 और ITR-4 दाखिल करते हैं और जिन पर टैक्स ऑडिट की आवश्यकता लागू नहीं होती है, उनके पास अपना रिटर्न जमा करने के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय है। तय समय-सीमा चूकने पर जुर्माना लग सकता है, टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है और नुकसान को आगेल कैरी फॉरवर्ड करने की सर्विस से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

3- EPFO 3.0: UPI आधारित पीएफ विड्रॉल की सुगबुगाहट

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बहुप्रतीक्षित EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जा रहा है। इसके तहत ईपीएफ सब्सक्राइबर्स को यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से तुरंत पैसे निकालने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

4- पासपोर्ट फीस में हुआ भारी इजाफा

सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन करके पासपोर्ट आवेदन शुल्क में बदलाव किया है। ये बदलाव भी 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है। अब 36 पन्नों के नए सामान्य पासपोर्ट की फीस 1500 से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। इसी कैटेगरी में तत्काल शुल्क को 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है। 60 पन्नों के पासपोर्ट और खोए या कटे-फटे पासपोर्ट को बदलने की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। वरिष्ठ नागरिकों और 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नए आवेदनों पर 10 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी।

5- आधार (Aadhaar) में ईमेल अपडेट करना हुआ फ्री

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधिकारिक आधार मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकृत ईमेल पते को अपडेट करने पर लगने वाले ₹75 के शुल्क को माफ कर दिया है। यह मुफ्त सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

6- मिस-सेलिंग पर RBI की सख्ती, टेलीमार्केटिंग का समय तय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री को रोकने और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम पेश किए हैं। अगर किसी ग्राहक को उचित सहमति के बिना या भ्रामक तरीकों से उत्पाद बेचे जाते हैं तो वे रिफंड और मुआवजे के हकदार होंगे। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे टेलीमार्केटिंग और प्रमोशनल कॉल्स को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही सीमित रखें।

7- HDFC बैंक ने क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड और लाउंज नियमों को बदला

एचडीएफसी बैंक ने अपने रेगेलिया गोल्ड और डाइनर्स क्लब प्रिविलेज क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर और ट्रैवल बेनिफिट्स में बदलाव किया है। रिवॉर्ड कैलकुलेशन से जुड़े बदलाव पहले ही लागू किए जा चुके हैं जबकि एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस से जुड़ी संशोधित शर्तें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। नए नियमों के मुताबिक रेगेलिया गोल्ड कार्डधारकों को कॉम्प्लीमेंट्री डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ उठाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60000 रुपये खर्च करने होंगे।

8- SBI कार्ड ने लगाई रिवॉर्ड पॉइंट्स पर कैपिंग

एसबीआई कार्ड ने अपने दो वेरिएंट्स PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव की घोषणा की है। 1 जुलाई से प्रभावी नियमों के तहत कंपनी ग्राहकों द्वारा कमाए जाने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स पर मंथली कैप लगाएगी। इंश्योरेंस से जुड़े खर्चों और अन्य श्रेणियों के खर्चों के लिए अलग-अलग सीमाएं लागू होंगी। ऑनलाइन लेनदेन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स को भी कम कर दिया गया है।

हर महीने सिर्फ 12500 रुपये के निवेश से करोड़पति बनने का जबर्दस्त फॉर्मूला

कई लोग निवेश में सुरक्षा का ज्यादा ध्यान रखते हैं। हालांकि, ज्यादा रिटर्न के लिए थोड़ा रिस्क जरूरी है। लेकिन, सुरक्षित निवेश से भी लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई युवा नौकरी लगते ही या कमाई शुरू होते ही सिर्फ 12500 रुपये का निवेश हर महीने करना शुरू कर देता है तो सिर्फ 24 साल के निवेश से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा फंड तैयार किया जा सकता है।

पीपीएफ के रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं

पीपीएफ को निवेश का सबसे भरोसेमंद इनवेस्टमेंट ऑप्शन माना जाता है। इसकी वजह यह है कि यह स्कीम सरकार की तरफ से चलाई जाती है। यह फिक्स्ड रिटर्न वाली स्कीम है। इसका मतलब है कि निवेश शुरू करने से पहले इनवेस्टर को पता होता है कि स्कीम मैच्योर करने पर उसे कुल कितने पैसे मिलेंगे। दूसरा, इस स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का भी असर नहीं पड़ता है। इस स्कीम का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड है।

एक साल में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये के निवेश पर डिडक्शन की इजाजत

पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक का निवेश कर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान में रखना होगा कि डिडक्शन की यह सुविधा इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में मिलती है। नई रीजीम में टैक्सपेयर को ज्यादातर डिडक्शन की सुविधा नहीं मिलती है।

मंथली 125000 के निवेश से 15 साल में बनेगा बड़ा फंड

अगर 25 साल का कोई व्यक्ति पीपीएफ में हर महीने 12,500 रुपये का निवेश शुरू करता है तो उसके 40 साल के होने पर पीपीएफ में उसका निवेश मैच्योर कर जाएगा। हर महीने 12,500 रुपये निवेश का मतलब साल में कुल 1.50 लाख रुपये का निवेश है। पीपीएफ में इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी है। इस तरह 15 साल में आप कुल 22,50,000 रुपये का निवेश करेंगे।

पीपीएफ के मैच्योरिटी अमाउंट पर नहीं लगता है टैक्स

आपको 15 साल बाद पीपीएफ अकाउंट मैच्योर होने पर कुल 40,68,209 रुपये मिलेंगे। इसमें 18,18,209 रुपये इंटरेस्ट का होगा। पीपीएफ की खासियत यह है कि यह स्कीम एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट (EEE) कैटेगरी में आती है। इसका मतलब है कि न तो आपके निवेश पर टैक्स लगता है, न तो इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है और न ही मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स लगता है। इस वजह से मैच्योरिटी का पूरा पैसा आपके बैंक अकाउं में आता है।

म्यूचुअल फंड में सिर्फ 9 साल के निवेश से एक करोड़ का फंड तैयार

पीपीएफ अंकाउंट मैच्योर करने पर आपको जो 40,68,209 रुपये मिलेंगे, उसे आपको एकमुश्त म्यूचुअल फंड की किसी अच्छी इक्विटी स्कीम में डालना होगा। 12 फीसदी सालाना रिटर्न के हिसाब से आपका यह पैसा सिर्फ 9 साल में 1,10,92,315 रुपये हो जाएगा। इस तरह सिर्फ 24 साल में आपके पास एक करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। म्यूचुअल फंड से मिले रिटर्न पर 12.5 फीसदी की दर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगेगा। यह 8.75 लाख रुपये आएगा। इसका मतलब है कि टैक्स चुकाने के बाद भी आपके पास एक करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड होगा।