Tata Technologies Q2 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा घटा, शेयरों पर रहेगी नजर

Tata Technologies Q2 Results: टाटा ग्रुप की कपंनी Tata Technologies के लिए सितंबर तिमाही में तस्वीर मिली-जुली रही। कंपनी का मुनाफा घटा, लेकिन रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई। बुधवार 14 अक्टूबर को जारी नतीजों के मुताबिक, कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.2% गिरकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 180.8 करोड़ रुपये था।

दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू 28.4% बढ़कर 1,698.8 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल यह 1,323.3 करोड़ रुपये था। ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर रही। EBIT 25.3% बढ़कर 238.7 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBIT मार्जिन 14.4% से घटकर 14.1% रह गया।

EBITDA बढ़ा, लेकिन मुनाफा अनुमान से कम

टाटा टेक्नोलॉजीज का EBITDA सालाना आधार पर 31.5% बढ़कर 273.3 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 15.7% से बढ़कर 16.1% पहुंच गया। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस तीन ब्रोकरेज के अनुमान से बेहतर रहे। हालांकि, नेट प्रॉफिट 200 करोड़ रुपये के अनुमान से काफी कम रहा।

कंपनी के सर्विस सेगमेंट का रेवेन्यू 33.9% बढ़कर 1,355.7 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस से रेवेन्यू 10.5% बढ़कर 343.1 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के CEO वॉरेन हैरिस ने कहा कि मजबूत मांग और नए प्रोग्राम शुरू होने से पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

टाटा टेक्नोलॉजीज को नए ऑटोमोटिव प्रोजेक्ट

तिमाही के दौरान Tata Technologies को एक बड़ी यूरोपीय लग्जरी कार कंपनी से 138 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट मिला। इसके तहत कंपनी दो व्हीकल प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग से जुड़े काम करेगी।

इसके अलावा, उत्तर अमेरिका की एक कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी ने नए व्हीकल प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट की जिम्मेदारी दी है। कंपनी को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े दूसरे प्रोजेक्ट भी मिले।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ी, शेयर में तेजी

सितंबर के अंत में Tata Technologies में 12,895 कर्मचारी थे। एक साल पहले इनकी संख्या 12,402 थी। तिमाही में कंपनी का फ्री कैश फ्लो 223.5 करोड़ रुपये रहा। सितंबर के अंत में कंपनी के पास 107.8 मिलियन डॉलर का कैश और कैश इक्विवेलेंट्स था।

नतीजों से पहले बुधवार को कंपनी का शेयर 0.5% बढ़कर 747.25 रुपये पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक शेयर करीब 16% चढ़ चुका है।

HDB Financial Q2 Results: मुनाफा 34% बढ़ा, NPA में भी सुधार; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock to Invest: इस इंश्योरेंस कंपनी के शेयर में आ सकती है तूफानी तेजी, एनालिस्ट्स की बाय रेटिंग

Stock to Invest: आप अगर किसी ऐसे शेयर की तलाश में हैं, जिसमें दमदार रिटर्न देने की क्षमता हो तो आप आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस पर विचार कर सकते हैं। 14 अक्तूबर को यह शेयर 0.45 फीसदी गिरकर 445 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर करीब 34 फीसदी गिरा है।

सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद एनालिस्ट्स की राय पॉजिटिव

ICICI Prudential Life Insurance ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। साल दर साल आधार पर नए बिजनेस की वैल्यू 20.7 फीसदी बढ़ी है। हालांकि, यह अनुमान से कम है। फिर भी, ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों का नजरिया इस शेयर को लेकर पॉजिटिव है।

ब्रोकरेज फर्मों ने बढ़ाए शेयर के टारगेट प्राइस

ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों ने इस शेयर का टारगेट प्राइस भी बढ़ाया है। उनका मानना है कि कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स में इम्प्रूवमेंट है। हालांकि, ग्रोथ और मार्जिन को लेकर चिंता बनी हुई है। एचएसबीसी ने इस शेयर पर अपनी ‘buy’ रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 582 रुपये कर दिया है। इसका मतलब है कि मौजूदा प्राइस से यह शेयर करीब 30 फीसदी चढ़ सकता है।

एचएसबीसी की शेयर में निवेश की सलाह

एचएसबीसी का मानना है कि शेयर की वैल्यूएशन FY28 की अनुमानित एंबेडेड वैल्यू की एक गुना है, जो महंगा नहीं है। उसने कहा है कि इस वजह से इस शेयर में गिरावट की उम्मीद नहीं दिखती। उसने यह भी कहा है कि दूसरी तिमाही में कंपनी की वीएनबी अनुमान से थोड़ा ज्यादा रही। मार्जिन को फेवरेबल प्रोडक्ट मिक्स का फायदा मिला।

नोमुरा ने शेयर के लिए 710 रुपये का टारगेट दिया

विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भी इस शेयर पर ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 710 रुपये कर दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 59 फीसदी चढ़ सकता है। हालांकि, कंपनी का वीएनबी अनुमान से कम रही। नोमुरा का मानना है कि डिस्ट्रिब्यूशन में रिफॉर्म्स का ज्यादा असर इस कंपनी पर नहीं पड़ेगा।

जेपी मॉर्गन भी इस इस शेयर को लेकर पॉजिटिव

जेपी मॉर्गन ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के शेयर पर ‘ओवरवेट’ की रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 670 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर मौजूदा प्राइस से करीब 50 फीसदी चढ़ सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कंपनी की वीएनबी ग्रोथ अनुमान से 2.7 फीसदी कम रही।

33 एनालिस्ट्स की इस शेयर पर बाय रेटिंग

ब्लूमबर्ग एनालिस्ट डेटा के मुताबिक, इस शेयर को कवर करने वाले 36 एनालिस्ट्स में से 33 ने इसे खरीदने की सलाह दी है। तीन एनालिस्ट्स की इस शेयर पर ‘होल्ड’ की रेटिंग है। किसी एनालिस्ट ने इस शेयर को बेचने की सलाह नहीं दी है। एनालिस्ट्स का 12 महीने का कन्सेन्सस टारगेट 621 रुपये है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 39 फीसदी चढ़ सकता है।

RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कहा-जरूरत पड़ी तो रुपये में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग रोकने के लिए और कदम उठाएंगे

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय बैंक कुछ और उपायों पर विचार करेगा। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) और इंटरेस्ट रेट सहित कई मसलों पर अपनी राय बताई। गौरतबल है कि पिछले हफ्ते रुपये पर दबाव घटाने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई बड़े कदम उठाए थे।

मल्होत्रा ने एक्सटर्नल सेक्टर यानी वैश्विक स्थितियों को भारत के लिए मुख्य चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था की ग्रोथ अच्छी है। बैंकों की बैलेंसशीट मजबूत है। कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार और आरबीआई बैलेंस ऑफ पेमेंट्स की मजबूती के लिए और कदम उठाएंगे।

स्पेकुलेटिव फॉरेक्स ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लागने के लिए हाल में उठाए गए कदमों के बारे में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। उदाहरण के लिए कैंसिल किए गए फॉरेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की रीबुकिंग पर रोक लगा दी गई है। इससे गैरजरूरी स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने कहा कि हमारे फॉरेक्स मार्केट का मुख्य मकसद अंडरलाइंग फॉरेन एक्सचेंज की जरूरत को पूरा करना या हेज करना है। यह शेयर बाजार जैसा नहीं है, जहां पार्टिसिपेंट्स शेयरों की कीमतों की दिशा पर दांव लगा सकते हैं। फॉरेक्स मार्केट मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्हें वास्तविक हेजिंग की जरूरत पड़ती है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हमने देखा है कि एक ही दिन में बड़ी संख्या में ट्रेड्स कैंसिल किए जा रहे हैं और रीबुक किए जा रहे हैं। कुछ मामलों में तो करीब एक-तिहाई ट्रेड्स जिस दिन किए गए उसी दिन क्लोज्ड या कैंसिल कर दिए गए। अगर किसी पार्टिसिपेंट को सच में हेजिंग की जरूरत है तो वह उस ट्रेड को तब तक बनाए रखेगा, जब तक उसकी जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। एक दिन कैंसिलेशंस और रीबुकिंग से पता चलता है कि फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में काफी स्पेकुलेटिव ट्रेड्स हो रहे हैं।

क्या आरबीआई रुपये के सहारा देने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा? इस सवाल के जवाब में मल्होत्रा ने कहा कि मैं फिर से उस सिद्धांत को दोहराउंगा जिसके बारे में मैंने कुछ दिन पहले कौटिल्य इकोनॉमिक कॉनक्लेव में बताया था। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के बगैर कीमतों में स्थिरता नहीं आ सकती। मॉनेटरी पॉलिसी में उठाए गए कदमों का सही असर तभी दिखता है जब फाइनेंशियल सिस्टम में स्टैबिलिटी होती है।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर हम फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के रिस्क को कम करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल नहीं करते हैं। मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल प्राइस स्टैबिलिटी के लिए होता है। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के लिए रेगुलेटरी, सुपरवायजरी और मैक्रोप्रूडेंशियल टूल्स का इस्तेमाल होता है। हालांकि, दोनों को पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर फाइनेंशियल स्टैबिलिटी पर पड़ सकता है।

Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी का मुनाफा 135% बढ़ा, रेवेन्यू में 61% का उछाल

Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी Transformers and Rectifiers (India) ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 135% बढ़कर ₹79.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹33.9 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, इस बार मुनाफे में ₹131.5 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन भी शामिल है।

रेवेन्यू और EBITDA में मजबूत बढ़त

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 60.7% बढ़कर ₹739.4 करोड़ हो गया। पिछले साल सितंबर तिमाही में यह ₹460 करोड़ था। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹128.8 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹58.9 करोड़ था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी सुधरा है। पिछले साल के 12.8% के मुकाबले इस बार यह 17.4% रहा। कंपनी के नतीजे CNBC-TV18 के पोल अनुमान से बेहतर रहे।

ऑर्डर बुक में 32% की बढ़ोतरी

Transformers and Rectifiers को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ₹3,283 करोड़ के नए ऑर्डर मिले। यह सालाना आधार पर 161% ज्यादा है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी की अनएक्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक 32% बढ़कर ₹7,237 करोड़ हो गई। वहीं, बातचीत के दौर में चल रहे ऑर्डर की वैल्यू ₹21,000 करोड़ है।

कंपनी को न्यूक्लियर पावर सेक्टर से पहला ऑर्डर भी मिला है। इसके तहत Nuclear Power Corporation of India के कैगा यूनिट 5 और 6 प्रोजेक्ट के लिए जनरेटर ट्रांसफॉर्मर सप्लाई किए जाएंगे।

दिवाली के आसपास बढ़ेगा प्रोडक्शन

कंपनी के MD और CEO सत्येन ममतोरा ने कहा कि चांगोदर और मोरैया प्लांट में बेहतर इस्तेमाल से रेवेन्यू बढ़ा है। ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। दिवाली के आसपास कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है।

कंपनी ने FY27 के लिए 25% रेवेन्यू ग्रोथ, 16% EBITDA मार्जिन और 9-10% PAT मार्जिन का अनुमान बरकरार रखा है।

शेयर का हाल

नतीजों से पहले मंगलवार को Transformers and Rectifiers का शेयर BSE पर 3.36% चढ़कर ₹304.70 पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर पिछले 12 महीनों में 38% से ज्यादा गिर चुका है।

Tata Elxsi Q2 Results: टाटा की कंपनी को ₹170 करोड़ का मुनाफा, ऑटो बिजनेस में मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख के लोन पर कितना ब्याज देना पड़ेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर बाजारों को बड़े बूस्टर डोज की जरूरत, इन उपायों से मार्केट को लग सकते हैं पंख

भारत की इकोनॉमी मजबूत है, लेकिन शेयर बाजारों पर इसका असर नहीं दिख रहा है। कम्प्लीट सर्किल के मैनेजिंग पार्टनर एवं चीफ इनवेस्टमेंट अफसर गुरमीत चड्ढ़ा का कहना है कि सरकार को शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में सुधार के लिए टैक्स घटाने के साथ ही रिफॉर्म्स करना चाहिए। उन्होंने इस बारे में कुछ कदम उठाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि कई डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था में मजूबती का संकेत देते हैं। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) में निफ्टी 50 की रेवेन्यू ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा रही है। टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) 21 फीसदी बढ़ा है। सितंबर में ऑटो सेल्स रिकॉर्ड 25.4 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई। कमर्शियसल व्हीकल्स की रिटेल बिक्री पहली बार एक लाख यूनिट्स पहुंच गई। इससे इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने का पता चलता है।

इकोनॉमी की मजबूत स्थिति के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। डेरिवेटिव्स ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा आर्बिट्रॉज ट्रेड पर निर्भर है, जिसमें तेजी से कमी आ रही है। आज निफ्टी खरीदने और फ्यूचर में बेचने पुर 15-16 रुपये का लॉस हो रहा है। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में उछाल है। जियोपॉलिटिकल टेंशन हाई लेवल पर है।

चड्ढ़ा के मुताबिक, हिस्टोरिकल ट्रेंड से पता चलता है कि टैक्स घटाने का शेयर बाजारों पर पॉजिटिव असर पड़ता है। जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स और इनकम टैक्स में कमी के बाद ऐसा देखने को मिला है। ऐसे में शेयर बाजारों के सेटीमेंट को बेहतर बनाने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को घटाकर पिछले साल के बजट के लेवल पर लाया जा सकता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) में भी कमी की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि डिविडेंड और बायबैक पर टैक्स के नियम अभी काफी जटिल हैं। मौजूदा नियम की वजह से प्रमोटर्स को शेयर ऑफलोड करने को मजबूर होना पड़ता है। इससे मार्केट में शेयरों की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो जाती है। अगर डिविडेंड और बायबैक के टैक्स के नियमों में बदलाव किया जाता है तो शेयरों के सप्लाई का दबाव घटेगा। उन्होंने रेगुलेटरी चेंजेज को भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि अगस्त में कैश मार्केट में एडजस्टमेंट के लिए 3:15 से 3:30 का समय तय किया गया। इसका खराब असर प्राइस डिस्कवरी पर पड़ा है। इश्योरेंस में रिफॉर्म्स जरूरी है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत है। इससे सिस्टम को अचानक झटका नहीं लगेगा।

इस शुगर कंपनी का शेयर बन सकता है रॉकेट, एक्सपर्ट ने दी खरीदने की सलाह

आप किसी ऐसे शेयर की तलाश में है, जो अगले एक-दो साल में जोरदार रिटर्न दे सकता है तो आप बलरामपुर चीनी मिल्स के बारे में सोच सकते हैं। एलारा सिक्योरिटीज के वाइस-प्रेसिडेंट (इंस्टीट्यूशनल इक्विटी) प्रशांत बियानी का मानना है कि यह शेयर अगले एक से दो साल में 30 फीसदी तक चढ़ सकता है।

Balrampur Chini Mills का शेयर 13 अक्टूबर को 12:15 बजे 0.56 फीसदी गिरकर 696.85 रुपये पर चल रहा था। हालांकि, इस साल शेयर का प्रदर्शन शानदार रहा है। इस दौरान यह करीब 59 फीसदी चढ़ा है। यह अपने 52 हफ्ते के लो से 79 फीसदी ऊपर है। बियानी का मानना है कि बलरामपुर चीनी मिल्स की ग्रोथ तीन से पांच साल में शानदार रह सकती है।

उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। कंपनी का नया पॉलीलेक्टिक एसिड (PLA) प्रोजेक्ट दिसंबर में शुरू हो रहा है। इसका फायदा कंपनी को मिलेगा। पूरे शुगर सेक्टर के लिए आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है, क्योंकि भारत में चीनी की सप्लाई कम रहने के आसार हैं। पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में जबर्दस्त तेजी दिखी है। रॉ शुगर की कीमत 51-55 रुपये के बीच चल रही है। यह एक साल पहले के मुकाबले 15-20 फीसदी ज्यादा है।

नए पेराई सीजन के बाद चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे इसकी कीमतों में नरमी आ सकती है। बियानी ने कहा, “फिलहाल चीनी की सप्लाई कम है। अगले दो सालों के दौरान भी उत्पादन अनुमान से कम रह सकता है, जिसकी वजह मौसम की प्रतिकूल स्थितियां हैं। अगर चीनी का आयात नहीं होता है तो इनवेंट्री को सामान्य लेवल तक लाने में समय लग सकता है।”

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने की कोशिश करेगी। सरकार गन्ने के स्टेट एडवाइस्ड प्राइस (SAP) को बढ़ा सकती है। लेकिन, रेम्यूनरेटिव शुगर प्राइसेज की वजह से इसका ज्यादा असर चीनी मिलों पर नहीं पड़ेगा। हालांकि, शुगर इंडस्ट्री तेजी की नई साइकिल की शुरुआत में है।

बलरामपुर चीनी मिल्स चीनी बनाने वाली देश की बड़ी कंपनियों में शामिल है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 14,832 करोड़ रुपये है। यह शुगर, इथेनॉल और को-जेनेरेटेड पावर का उत्पादन करती है। इस कंपनी में कई म्यूचुअल फंडों ने निवेश किया है। इसका मुकाबला ईआईडी पैरी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और बजाज हिंदुस्तान शुगर जैसी कंपनियों से है।

HCL Tech shares Price: Q2 नतीजों के बाद शेयर बना रॉकेट, 5% से ज्यादा चढ़कर बना निफ्टी का टॉप गेनर, एक्सपर्ट्स से जानें अब खरीदें , बेचें या रहे बनें

HCL Tech shares Price: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी एचसीएल टेक (HCLTech) के शेयर में 13 अक्टूबर को जोरदार बढत देखने को मिली। शेयर इंट्राडे में 5 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाते हुए निफ्टी का टॉप गेनर बन गया । IT सर्विस देने वाली इस बड़ी कंपनी के शेयरों में बढ़त की वजह कंपनी द्वारा दूसरी तिमाही में अच्छी कमाई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ और बड़ी डील जीतने के बाद आई है।

कंपनी ने FY27 में रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को भी बढ़ा दिया, हालांकि ब्रोकरेज अभी भी स्टॉक के ऊपर जाने की संभावना को लेकर बंटे हुए हैं। HCLTech के शेयर सोमवार के 1,223 रुपये के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले 5.55 फीसदी चढ़कर 1,288 रुपये पर पहुंच गया। मंगलवार की तेजी के बावजूद, 2026 में अब तक स्टॉक 22.2 फीसदी नीचे है, जबकि निफ्टी 50 में 14.2 फीसदी की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 3.45 लाख करोड़ रुपये रहा।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

HCLTech ने सोमवार को सितंबर तिमाही के लिए 5,132 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट बताया, जो साल-दर-साल 21.2 परसेंट ज़्यादा है, जबकि रेवेन्यू 11.5 परसेंट बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन लगातार 131 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 18.2 परसेंट हो गया।

क्या है शेयर पर ब्रोकरेज फर्मों की राय

नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने HCLTech के आउटलुक के बारे में मिली-जुली राय दी। नोमुरा ने 1,330 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी Buy रेटिंग बनाए रखी, जिसमें मजबूत सर्विस परफॉर्मेंस, बढ़ते AI रेवेन्यू और कंपनी की AI स्ट्रैटेजी में प्रोग्रेस का हवाला दिया गया।

जेफरीज ने HCLTech को अपनी पिछली “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग से अपग्रेड करके “होल्ड” कर दिया है, और इसका प्राइस टारगेट पहले के ₹1,070 से बढ़ाकर ₹1,150 कर दिया है।

HSBC ने भी HCLTech पर अपनी “होल्ड” रेटिंग बनाए रखी है और प्राइस टारगेट ₹1,225 रखा है। इसने कंपनी के आउटलुक कमेंट्री को पॉजिटिव बताया क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में डिमांड में सुधार हुआ है, हालांकि फर्म ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इसका सस्टेनेबिलिटी एक चिंता का विषय है।HSBC ने बताया कि HCLTech अपने कॉम्पिटिटर के मुकाबले मीडियम आउटपरफॉर्मेंस और कम मार्जिन के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन मल्टीपल पर ट्रेड कर रही है।

सिटी ने HCLTech पर ₹1,050 के प्राइस टारगेट के साथ “सेल” करने की सलाह दी है। फर्म ने मार्जिन बीट के बाद अपने फाइनेंशियल ईयर 2027-2029 EPS अनुमानों को भी 1% से 3% तक बढ़ा दिया है। हालांकि, सिटी ने कहा है कि मार्जिन का सस्टेनेबिलिटी अहम होगा क्योंकि HCLTech पहले से ही आम सहमति के अनुमानों के आधार पर TCS और इंफोसिस जैसे अपने कॉम्पिटिटर के मुकाबले 20% से 25% प्रीमियम पर ट्रेड कर रही है।

HCLTech पर 45 एनालिस्ट की कवरेज है, जिनमें से 18 ने स्टॉक को “बाय” रेटिंग दी है, 16 ने “होल्ड” कहा है, और 11 ने स्टॉक को “सेल” रेटिंग दी है। प्राइस टारगेट के आम अनुमानों से पता चलता है कि मौजूदा लेवल से सिर्फ़ 2.1% की बढ़त की संभावना है।

 

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Share Market Rally: 5 वजहों से 700 प्वाइंट्स चढ़ा Sensex, आईटी सेक्टर की रौनक में Nifty पहुंचा 22600 के पास

Share Market Rally: वैल्यू बाइंग और इकनॉमिक ग्रोथ आउटलुक में अपग्रेड ने घरेलू स्टॉक मार्केट में आज शानदार रौनक बिखेरी। इस माहौल में सेंसेक्स 693 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी ने फिर से 22500 का लेवल हासिल किया और 22600 के करीब पहुंचा। हालांकि ब्रोडर लेवल पर मार्केट में मिला-जुला रुझान है और स्मॉलकैप स्पेस में बिकवाली का काफी दबाव है। निफ्टी मिडकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो दूसरी तरफ निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 1% की गिरावट है।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:55 AM पर सेंसेक्स 692.86 प्वाइंट्स यानी 0.96% की बढ़त के साथ 72,617.54 और निफ्टी भी 213.10 प्वाइंट्स यानी 0.95% के उछाल के साथ 22,576.45 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 696.23 प्वाइंट्स चढ़कर 72,620.91 और निफ्टी 217.80 प्वाइंट्स उछलकर 22,581.15 तक पहुंच गया था।

Stock Market Rally: ये है वजह

वैल्यू बाइंग

निचले स्तर पर खरीदारी यानी वैल्यू बाइंग से मार्केट को सपोर्ट मिला है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX में नरमी से मार्केट को सपोर्ट मिला है। फिलहाल यह 4.40% की तेजी के साथ 14.58 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी

IMF (इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड) ने अपनी अक्टूबर की वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक में अनुमान लगाया है कि इस वित्त वर्ष 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.4% की बजाय 7% की रफ्तार से बढ़ेगी। आईएमएफ के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज एक्टिविटी से इसे वैश्विक स्तर पर आर्थिक उथल-पुथल से संभलने में मदद मिली।

IT Stocks का शानदार सपोर्ट

सेक्टरवाइज आज मार्केट को आईटी सेक्टर का शानदार सपोर्ट मिला है, जिसका निफ्टी इंडेक्स 3% से अधिक उछल पड़ा। इसे एफएमसीजी और रियल्टी से भी मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जिनके निफ्टी इंडेक्स 1-1% से अधिक मजबूत हुए हैं। निफ्टी पीएसयू बैंक करीब 1% और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब आधे फीसदी ऊपर चढ़ा है।

टेक्निकल वजह

एनालिस्ट्स के मुताबिक जब निफ्टी 22,300 के ऊपर है, इसमें रिकवरी की पूरी गुंजाइश है।

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