Stocks to Buy: ब्रोकरेज ने टाटा स्टील समेत 5 शेयरों को खरीदने की सलाह दी, 45% तक तेजी की उम्मीद

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ब्रोकरेज कुछ स्टॉक्स पर बुलिश हैं। 5 शेयरों पर अलग-अलग ब्रोकरेज ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस के आधार पर इनमें करीब 24% से 41% तक तेजी की गुंजाइश दिख रही है। लिस्ट में बैंकिंग, स्टील, टेक्सटाइल, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर के शेयर शामिल हैं।

Shriram Finance

एनबीएफसी कंपनी Shriram Finance पर Motilal Oswal ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने ₹1,220 का टारगेट दिया है। शेयर का मौजूदा भाव ₹983.50 है। इस स्तर से करीब 24% तेजी की गुंजाइश बनती है। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी का ग्रोथ फोकस अब कमर्शियल व्हीकल से आगे बढ़कर कई सेगमेंट में फैल रहा है।

Tata Steel

स्टील कंपनी Tata Steel पर Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस ₹240 है, जबकि शेयर फिलहाल ₹185.69 पर है। इस भाव से करीब 29% की तेजी की संभावना बनती है। Nomura को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में घरेलू स्टील कीमतों में बढ़ोतरी से टाटा स्टील को फायदा मिलेगा।

कंपनीब्रोकरेजटारगेट प्राइसतेजी की गुंजाइश
Shriram FinanceMotilal Oswal₹1,22024%
Tata SteelNomura₹24029%
Yatharth HospitalsChoice Institutional Equities₹1,35032%
Sanathan TextilesEmkay₹67533%
Dr Reddy’s LaboratoriesNomura₹1,74041%

Yatharth Hospitals

हेल्थकेयर कंपनी Yatharth Hospitals पर Choice Institutional Equities ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का टारगेट ₹1,350 है और शेयर ₹1,024 पर है। यानी मौजूदा भाव से करीब 32% रिटर्न मिल सकता है। कंपनी की एडवेंट इंटरनेशनल के साथ रणनीतिक साझेदारी और अधिग्रहण योजनाओं से 30% से ज्यादा ऑर्गेनिक ग्रोथ की उम्मीद जताई गई है।

Sanathan Textiles

टेक्सटाइल कंपनी Sanathan Textiles पर Emkay ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। शेयर का मौजूदा भाव ₹509 है, जबकि टारगेट प्राइस ₹675 रखा गया है। इस हिसाब से करीब 33% की तेजी मुमकिन है। ब्रोकरेज के मुताबिक पंजाब प्लांट में क्षमता विस्तार और नई मशीनरी से कंपनी की ग्रोथ को बढ़ावा मिल सकता है।

Dr Reddy’s Laboratories

फार्मा कंपनी Dr Reddy’s Laboratories पर Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। शेयर ₹1,232.70 पर है और टारगेट प्राइस ₹1,740 है। इस भाव से करीब 41% उछाल दिख सकता है। बायोलॉजिक्स प्लांट की USFDA मंजूरी और बायोसिमिलर Abatacept की मंजूरी कंपनी के लिए अहम ट्रिगर हैं। मंजूरी मिलने पर कंपनी पहली लहर में Abatacept को 50 से ज्यादा देशों में लॉन्च करने की योजना बना रही है।

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Elevate Campuses Share Price: ₹362 के शेयरों ने दिया शॉक, डिस्काउंट एंट्री के बाद और आया नीचे

Elevate Campuses IPO Listing: स्टुडेंट्स के लिए रहने की व्यवस्था करने वाली एलीवेट कैंपसेज के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में डिस्काउंट पर एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और हर कैटेगरी का आरक्षित हिस्सा पूरा भर नहीं पाया था। इसके आईपीओ के तहत ₹362 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹356.50 और NSE पर ₹355.10 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला बल्कि लिस्टिंग पर डेढ़ फीसदी से अधिक पूंजी ही घट गई। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर फिसल गए। टूटकर BSE पर यह ₹345.50 (Elevate Campuses Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 4.56% घाटे में हैं।

Elevate Campuses IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

एलीवेट कैंपसेज का ₹2100 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 23-25 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.89 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.66 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.89 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.07 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 5,80,11,049 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,100.00 करोड़ के-12 एंटिटीज और कैंपसेज के अधिग्रहण, ₹750.00 करोड़ कंपनी और इसकी सब्सिडियरी का कर्ज हल्का करने, ₹129.61 करोड़ इनऑर्गेनिक ग्रोथ और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों, और ₹120.39 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Elevate Campuses के बारे में

एलीवेट कैंपसेज एक एडुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर/स्टुडेंट हाउसिंग कंपनी है। यह उच्च शिक्षा से जुड़े स्टुडेंट्स के आवास की व्यवस्था करती है तो इसके पास के-12 स्कूल एसेट्स भी हैं। इसका स्टुडेंट अकमडेशन बिजनेस गुड होस्ट स्पेसेज और स्कॉलरजेड ब्रांड्स के तहत चलता है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से कंपनी के प्री-एक्विजिशन ग्रुप के पास देश के 15 शहरों और यूएई के 1 शहर में 80,255 स्टुडेंट्स को रखने की क्षमता थी। इसमें खुद के 7 कैंपस में 20,368 बेड थे तो 14 मैनेज्ड कैंपस में 55,487 बेड। एकेडमिक वर्ष 2025-26 में इसका अकुपेंसी रेट 89.37% था।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 109% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹173.76 करोड़ और टोटल इनकम 29% के सीएजीआर से ₹603.39 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹4,120.53 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹947.45 करोड़ पड़े थे।

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Karwa Chauth 2026: खुशहाल दांपत्य के लिए कब किया जाएगा करवाचौथ का व्रत? जानें सही तारीख, महत्व और पूजा विधि

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं का बेहद महत्वपूर्ण उपवास माना जाता है। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल दांपत्य के लिए करती हैं। इस व्रत में विवाहित मिहलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं, रात को चंद्र दर्शन, पूर्जा और अर्घ्य देने के बाद अपने उपवास का पारण करती हैं। हर साल करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश भगवान की पूजा और कथा सुनी जाती है। आइए जानें इस साल अखंड सौभाग्य का यह व्रत किस तारीख को किया जाएगा?

करवा चौथ 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1 बजकर 7 मिनट से आरंभ होगी और 29 अक्तूबर की रात 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा।

परिधि योग में होगा करवा चौथ का व्रत

इस साल अखंड सौभाग्य के व्रत करवा चौथ पर परिधि योग का निर्माण होगा। साथ ही, चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे और गौरी योग का भी संयोग बनेगा।

करवा चौथ व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक परंपराओं में करवा चौथ को दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य से जुड़ा व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती की आराधना करने से सुहाग की रक्षा और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस अवसर पर करवा माता के साथ भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, कुछ स्थानों पर अविवाहित कन्याओं द्वारा मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखने की परंपरा है।

करवा चौथ व्रत पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
  • कई स्थानों पर सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने की परंपरा है।
  • इसके बाद पूरे दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हुए भगवान का स्मरण करें।
  • शाम के समय पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
  • इसके बाद करवा माता की आराधना करें और दीपक जलाएं।
  • पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा का श्रवण करें।

च्रदोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें

शाम की पूजा पूरी होने के बाद चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा की जाती है। चंद्र दर्शन के समय छलनी के माध्यम से चंद्रमा को देखा जाता है और उन्हें जल अर्पित कर अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद इसी छलनी से पति का चेहरा देखने की परंपरा है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण किया जाता है।

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SRIT India IPO: 25% के पार पहुंचा GMP, 28 सितंबर को खुलेगा इश्यू; जानिए हर एक डिटेल

SRIT India IPO: डिजिटल सॉल्यूशन देने वाली SRIT India का आईपीओ 28 सितंबर से खुलने वाला है। कंपनी का इश्यू से ₹218.40 जुटाने का प्लान है। इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP बढ़कर 25% के पार पहुंच गया है।

IPO कब खुलेगा?

बेंगलुरु की IT सॉल्यूशन कंपनी SRIT India का IPO 28 सितंबर को खुलेगा। निवेशकों के पास 30 सितंबर तक आवेदन करने का मौका रहेगा। प्राइस बैंड 123 से 130 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। इसकी 6 अक्टूबर को बाजार में लिस्टिंग हो सकती है।

IPO के बाद कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी घट जाएगी। अभी प्रमोटर्स के पास 84.74% हिस्सेदारी है। IPO के बाद यह 62.59% रह जाएगी।

GMP से कितने मुनाफे का संकेत?

Investorgain के मुताबिक, SRIT India का GMP 33 रुपये है। यह अपर प्राइस बैंड 130 रुपये से करीब 25.38% ज्यादा है। हालांकि, GMP ग्रे मार्केट का संकेत है। यह लिस्टिंग पर मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं है।

कंपनी क्या करती है?

SRIT India डिजिटल सॉल्यूशन और सिस्टम ऑटोमेशन का काम करती है। कंपनी कस्टम एप्लीकेशन बनाती है। साथ ही अलग-अलग सिस्टम को इंटीग्रेट करने की सर्विस भी देती है।

कंपनी सरकारी संस्थाओं और एंटरप्राइज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करती है। इसका कारोबार भारत के अलावा कुछ विदेशी बाजारों में भी है।

AI पर भी फोकस

SRIT India अपने मुख्य बिजनेस में AI बेस्ड सॉल्यूशन जोड़ रही है। इसका मकसद AI से जुड़ी अपनी क्षमता बढ़ाना है।

SRIT India ने बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी लागू किए हैं। कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म को डिजाइन करने से लेकर उसे चलाने तक का काम करती है।

IPO के पैसे का क्या होगा?

IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कई कामों में किया जाएगा। कंपनी मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और उनके दोबारा विकास पर पैसा लगाएगी।

इसके अलावा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पूरी की जाएगी। कंपनी अधिग्रहण के जरिए कारोबार बढ़ाने और दूसरी रणनीतिक योजनाओं पर भी पैसा खर्च करेगी। कुछ रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखी जाएगी।

सरकारी कारोबार से सबसे ज्यादा रेवेन्यू

SRIT India के कारोबार में सरकारी सेगमेंट की बड़ी हिस्सेदारी है। मार्च 2026 को खत्म वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 450 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 389.3 करोड़ रुपये था। यानी रेवेन्यू में 15.6% की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी के कुल रेवेन्यू में सरकारी कारोबार की हिस्सेदारी 89.41% रही। वहीं एंटरप्राइज सेगमेंट से 10.59% रेवेन्यू आया।

किन कंपनियों से मुकाबला?

SRIT India की तुलना Allied Digital Services, Aurionpro Solutions, Mastek और Protean eGov Technologies जैसी लिस्टेड कंपनियों से की जाती है।

इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर Choice Capital Advisors Private Limited हैं। KFin Technologies Limited इश्यू की रजिस्ट्रार है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आस्था स्पिनटेक्स को 25 करोड़ रुपये का ग्रेज फैब्रिक ऑर्डर, 2 साल में करनी होगी सप्लाई

आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड को करीब 25 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर JSK टेक्सटाइल LLP ने दिया है। इसके तहत करीब 750 MT ग्रेज फैब्रिक का निर्माण और सप्लाई करनी है।

कंपनी के मुताबिक, यह लॉन्ग टर्म और नॉन-कैंसिलेबल ऑर्डर है। इस ऑर्डर को दो साल में पूरा करना है।

दो महीने में शुरू होगी सप्लाई

आस्था स्पिनटेक्स इस ऑर्डर पर अगले दो महीनों में काम शुरू करेगी। शुरुआत में करीब 30 MT ग्रेज फैब्रिक की सप्लाई की जाएगी।

इसके बाद क्वालिटी अप्रूवल मिलने पर बाकी ऑर्डर की सप्लाई शुरू होगी। कंपनी को उम्मीद है कि इस ऑर्डर से उसके रेवेन्यू और ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस को फायदा होगा।

चेयरमैन ने क्या कहा?

आस्था स्पिनटेक्स के चेयरमैन और डायरेक्टर दिव्यांग जसवंतभाई पटेल ने कहा कि कंपनी को ग्रेज फैब्रिक की सप्लाई के लिए यह लॉन्ग टर्म ऑर्डर मिलने की खुशी है।

उन्होंने कहा कि इससे मौजूदा टेक्सटाइल ऑपरेशन्स और मजबूत होंगे। साथ ही, ऑर्डर पूरा होने की अवधि में बिजनेस की विजिबिलिटी बढ़ेगी। उनके मुताबिक, यह ऑर्डर कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं पर ग्राहकों के भरोसे को भी दिखाता है।

तीन स्तंभों पर ग्रोथ की रणनीति

कंपनी ने ग्रोथ के अगले चरण के लिए ‘थ्री-पिलर ग्रोथ स्ट्रेटेजी’ पेश की है। इसमें फाइनेंशियल एक्सीलेंस, शेयरहोल्डर रिवॉर्ड्स और यार्न से फैब्रिक तक वर्टिकल इंटीग्रेशन पर फोकस है।

इसी रणनीति के तहत बोर्ड ने 1:1 बोनस इश्यू को मंजूरी दी है। इसके साथ ही कंपनी की अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने का भी फैसला हुआ है। इसे 45 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये किया जाएगा।

यार्न से फैब्रिक तक बढ़ेगी मौजूदगी

आस्था स्पिनटेक्स ने अपने ब्रांड के तहत ग्रे फैब्रिक और दूसरे वैल्यू-एडेड फैब्रिक प्रोडक्ट्स में विस्तार को भी मंजूरी दी है। इसका मकसद टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ना है।

ये फैसले फाल्कन यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड के हालिया अधिग्रहण के बाद लिए गए हैं। इस अधिग्रहण से कंपनी की स्पिनिंग क्षमता 7,700 MT से बढ़कर 17,457 MT हो जाएगी।

वहीं, स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 हो जाएगी। इससे कंपनी के पास विस्तार के अगले चरण के लिए बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार होगा।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विलोप के करीब पहुंची मध्यमार्गी राजनीति

समाजवाद को सकारात्मक नजरिए देखने वाले नौजवान अमेरिकियों की संख्या बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया पर पूंजीवाद बनाम समाजवाद की बहस व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। यह संकेत है कि कम्युनिस्ट और समाजवादी विचारधाराएं, जिन्हें कभी अमेरिका में कलंकित और वर्जित माना जाता था, अब हाशिये से निकलकर मुख्यधारा की चेतना में प्रवेश करती दिख रही हैं- विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच।

यूरोपीय राजनीति की खिसक रही भू-गर्भीय परतों (Tectonic Plates) से उठते भूकंपीय झटकों का सितंबर में जर्मनी शिकार बना। पहले हफ्ते में सैक्सनी-अनहाल्ट पहला जर्मन प्रांत बना, जहां नव-नाजीवादी ऑल्टरनेटिव्स फॉर ड्यूशलैंड (एएफडी) पार्टी प्रादेशिक चुनाव जीतने में कामयाब रही (वहां वह लगभग 44 फीसदी वोट पाकर सबसे बड़ी पार्टी बनी)। यह किसी आम स्थिति में अचानक पैदा हुई विसंगति नहीं थी। बल्कि यह एक दशक से अधिक समय से उभरते रूझान का ठोस रूप ग्रहण कर लेना भर था। इस बात की पुष्टि 20 सितंबर को जर्मनी के मेक्लेनबर्ग– वेस्टर्न पोमेरेनिया प्रांत में एएफडी की जीत से हुई। वहां वह 38 प्रतिशत से अधिक वोटों के साथ पहले स्थान पर रही।

उसी रोज जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक दूसरे किस्म का सियासी भूकंप आया। वहां डाई लिंके (द लेफ्ट) पार्टी सबसे आगे रही, जिसे पश्चिमी मीडिया धुर-वामपंथी बताता है। इन तीन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जर्मनी की राजनीति तेजी से दक्षिण एवं वाम की ‘चरम’ (extreme) धुरियों के बीच बंटती जा रही है। इस तरह सेंटर राइट- क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीयू) और सेंटर लेफ्ट- सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच सत्ता की अदला-बदली का जारी लगभग आठ दशक से जारी खेल अब खत्म हो रहा है। उचित ही इसे जर्मन राजनीति में मध्य मार्ग के विलोप के रूप में देखा गया है।

और यह सिर्फ जर्मनी का रुझान नहीं है। वैसे तो यह ट्रेंड चुनावी लोकतंत्र वाले तमाम देशों में उभरा है, लेकिन पश्चिमी देशों में इस नई राजनीतिक परिघटना की खास झलक देखी जा सकती है। कुछ महीनों के बाद इस रुझान की पुष्टि संभवतः फ्रांस में भी होगी, जहां अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में मुख्य गोलबंदी “धुर वामपंथी” नेता ज्यां ल्यूक मेलेन्शॉ और धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन के बीच हो रही है।

यह घटनाक्रम आने वाले वक्त में संभावित राजनीतिक टकराव का संकेत है। डाई लिंके की जीत और मेलेन्शॉ को मिल रही लोकप्रियता दुनिया में नए तेवर वाले वामपंथ के उदय की मिसाल हैं। और ऐसे संकेत सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं हैं। डाई लिंके की जीत के सिलसिले में यह बात सामने आई कि इस पार्टी ने बर्लिन में अपने चुनावी अभियान को न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से सीख लेते हुए डिजाइन किया। बर्लिन में डाई लिंके का चेहरा तुर्किश मूल की सोशलिस्ट एलीफ एराल्प हैं। उनकी टीम ममदानी के प्रचार अभियान का अध्ययन करने न्यूयॉर्क गई। वहां से वह ये सबक लेकर लौटी कि बिखरे हुए अनगिनत मुद्दों को उठाने के बजाय दो या तीन ऐसे मुद्दे लिए जाएं, जिनकी वजह ‘लोगों की रात की नींद उड़ी रहती है’।

न्यूयॉर्क की तरह ही बर्लिन में भी नवोदित लेफ्ट ने मकान किराये को अपना केंद्रीय मुद्दा बनाया। साथ में रोजमर्रा की चीजों की महंगाई और परिवहन पर ध्यान केंद्रित किया गया। उसके साथ हज़ारों स्वयंसेवकों को संगठित किया गया, ताकि वे घर घर जाकर चर्चा कर सकें। और उसका असर हुआ- ठीक न्यूयॉर्क की तरह। अब एराल्प बर्लिन की मेयर कार्यालय के दरवाजे तक पहुंच चुकी हैं।

एक जर्मन विश्लेषक ने लिखा है- यह तथ्य कि पूंजीवादी विरोधी वामपंथ ने बर्लिन में जीत हासिल की है, पुष्टि करता है कि उदारवादी (लिबरल) और मध्यमार्गी (सेंटरिस्ट) विकल्पों का पतन और “बाज़ार लोकतंत्र” का ढहना जारी है। वह पार्टी सिस्टम ढह रहा है, जो नव-उदारवाद के दौरान एक ही केंद्र- पूंजी से नियंत्रित रहा, भले दिखावटी तौर पर कई पार्टियों के रूप में उसके अनेक चेहरे सामने रहे हों।

गुजरे डेढ़ दशक में दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में धुर-दक्षिणपंथ का बढ़ना सबसे मजबूत राजनीतिक परिघटना रही है। ऐसा उन विशाल निराश समूहों की प्रतिक्रिया से संभव हुआ, जिन्होंने नव-उदारवादी भूमंडलीकरण के विनाशकारी परिणामों को झेला और एक मुकाम आकर उसे ठुकराना शुरू किया। अर्थव्यवस्था का उत्तरोत्तर वित्तीयकरण, वेतन की अस्थिरता, बेरोजगारी, आवास का दुर्लभ होना, स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई, शिक्षा का व्यापारीकरण, आम इन्फ्रास्ट्रक्चर का क्षय- आदि के कारणों से उपजे जन असंतोष का लाभ धुर दक्षिणपंथी दलों ने उठाया। किसी ‘आंतरिक शत्रु’ के खिलाफ नफरत भरे अभियान चलाना, काल्पनिक प्रभु वर्ग (मोटे तौर पर पहले सत्ता से लाभान्वित रहे समूहों) को तमाम समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराना, अयथार्थ समाधान पेश करना- आदि ऐसा तरीका रहा है, जिसे लगभग हर देश में उन दलों ने अपनाया है। इनकी बदौलत धुर-दक्षिणपंथियों को कामयाबी मिली है।

उन्हें यह सफलता इसलिए भी मिली, क्योंकि पारंपरिक वामपंथ ने नव-उदारवाद के हाथों अपनी हार को स्वीकार कर लिया। वे दल बाजार, बड़ी कंपनियों, और अंतरराष्ट्रीय पूंजी के समन्वित हमलों के आगे झुक गए। उन्होंने बिना आलोचनात्मक रुख अपनाए उस एजेंडे को स्वीकार कर लिया, जो शासक वर्ग उनके लिए तैयार किया था। मसलन, पहचान आधारित मुद्दों और woke culture के समर्थन में उन्होंने अपना सारा जोर लगाया, जबकि आम जन के रोजमर्रा के सवालों से उन्होंने नेता तोड़ लिया।

ट्रेड यूनियनों का बदलाव के बड़े सपनों को छोड़ देना, वर्ग-आधारित पार्टियों का विघटन और वर्ग चेतना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी से उनका मुंह मोड़ लेना- ये सब इसी दौर की कहानियां हैं। इस दौर में पूंजी बनाम श्रम की बहस को हाशिये में चले जाने दिया गया और यह शिक्षा नजरअंदाज दी गई कि पूंजी का बेलगाम संकेंद्रण धन उत्पन्न करने के अन्य दो स्रोतों- प्रकृति और श्रम- को नष्ट कर देता है।

इसी दौर में धुर-दक्षिणपंथ “समाधान” बनकर उभरा। उसने मुसीबत के असली स्रोतों से ध्यान हटा कर अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, या कम्युनिस्ट प्रतीकों को निशाने पर लिया। पश्चिमी देशों में पारंपरिक वामपंथ और मध्यमार्गी दलों ने इनमें से कुछ सवालों पर धुर-दक्षिणपंथ को अपनी मौन सहमति दी, जबकि कुछ मुद्दों पर उसे सीधे चुनौती देने से वे बचते रहे। उसी का नतीजा अब उनका खुद हाशिये पर चले जाना और उससे पैदा हुए खालीपन को भरने के लिए नए तेवर वाले वामपंथ का उभरना है।

इस प्रक्रिया को फिलहाल अमेरिका भी साफ देखा जा सकता है। वहां नए वामपंथी तेवर की नुमाइंदगी Democratic Socialists of America (डीएसए) कर रहा है। हालांकि यह स्वायत्त राजनीतिक समूह है, लेकिन चुनावी सिस्टम की मजबूरियों के कारण वह डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर अपने को संगठित किए हुए है। इस समय जोहरान ममदानी डीएसए का सबसे प्रखर चेहरा हैं। लेकिन उसके अनेक चेहरे इस वर्ष डेमोक्रेटिक प्राइमरी (उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया) में कामयाब रहे, और तीन नवंबर को होने वाले मध्य-अवधि चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। उनके नतीजों पर सबका ध्यान टिका हुआ है।

यह घटनाक्रम अमेरिका में आए एक बड़े बदलाव को जाहिर करता है। इस सिलसिले में ब्रिटिश अर्थशास्त्री जॉन रॉस की यह टिप्पणी काबिल-ए-गौर हैः

“पिछली बार जब किसी सोशलिस्ट उम्मीदवार को अमेरिकी चुनाव में गंभीरता से लिया गया, तो वह 1912 में था, जब यूजीन डेब्स को राष्ट्रपति पद के लिए 6 फीसदी वोट मिले। यह बहुत कम था, लेकिन नगण्य नहीं था। उसके बाद पहली बार हो रहा है, जब डीएसए चुनाव जीत रहा है। उनके सदस्य कांग्रेस में हैं। उन्होंने दो सीटें जीतीं। उन्होंने सीनेट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवारी हासिल की है। न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी डीएसए के सदस्य हैं। यह पहली बार है कि जब उम्मीदवार खुले तौर पर समाजवादी के रूप में खड़े हो रहे हैं। इसका अपवाद सिर्फ बर्नी सैंडर्स हैं, जो डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं, लेकिन वे निर्दलीय के रूप में ही चुनाव लड़ते रहे।।।।।

अमेरिकी अखबार पढ़ें, तो मुझे लगता है वॉल स्ट्रीट जर्नल लगभग हर दिन डीएसए की निंदा करने वाला लेख छापता है, और न्यूयॉर्क टाइम्स आदि भी। और यह चौंकाने वाला है। यह तो शायद संवैधानिक भी न हो कि अमेरिकी कांग्रेस किसी विशिष्ट संगठन की निंदा करने के लिए मतदान करे, क्योंकि यह कहा जा सकता है कि यह अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के खिलाफ है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित करता है। लेकिन ऐसा इसीलिए हुआ, क्योंकि अब मामला गंभीर है।।।।

इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका समाजवादी बनने जा रहा है। दुर्भाग्य से मेरे जीवन काल में ऐसा नहीं होगा। यहां मेरा मतलब वास्तविक समाजवाद से है- यानी उस अर्थ में, जिसमें अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा राजकीय स्वामित्व में आ जाता है, आपके सामने औपचारिक समाजवादी समाज होता है, और श्रमिक वर्ग समाज में अग्रणी शक्ति होता है।”

यहां जॉन रॉस ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के जिस प्रस्ताव का जिक्र किया, वह निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने पिछले एक सितंबर को पारित किया। 192 के मुकाबले 220 मतों के बहुत से पारित इस प्रस्ताव में “समाजवाद” की निंदा की गई। डीएसए का इसमें नाम लेकर जिक्र किया गया। इसके अलावा हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के नेता बार बार कम्युनिस्ट खतरे का जिक्र करते रहे हैं। उन्होंने डीएसए उम्मीदवारों का उल्लेख कर कहा है कि “कम्युनिज़्म हमारा दुश्मन है”। बीते चार जुलाई को अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं सालगिरह के मौके पर राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने एक चौथाई से ज्यादा समय कम्युनिस्ट खतरे के उल्लेख और कम्युनिज्म के कथित अत्याचारों की चर्चा में लगाया।

इसके बावजूद हकीकत यह है कि समाजवाद को सकारात्मक नजरिए देखने वाले नौजवान अमेरिकियों की संख्या बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया पर पूंजीवाद बनाम समाजवाद की बहस व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। यह संकेत है कि कम्युनिस्ट और समाजवादी विचारधाराएं, जिन्हें कभी अमेरिका में कलंकित और वर्जित माना जाता था, अब हाशिये से निकलकर मुख्यधारा की चेतना में प्रवेश करती दिख रही हैं- विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच। और अब बात चर्चा से आगे निकल कर यहां पहुंच गई है कि खुद को सोशलिस्ट बताने वाले उम्मीदवार चुनाव जीतने लगे हैं।

इस घटनाक्रम ने डीएसए की नीतियों और कार्यक्रम को चर्चा के केंद्र में लाया है। आम धारणा यही है कि डीएसए नॉर्डिक सोशल डेमोक्रेसी का अमेरिकी संस्करण है। नॉर्डिक मॉडल निजी स्वामित्व, प्रतिस्पर्धी बाज़ार, और बड़े निजी कॉरपोरेट्स को चुनौती नहीं देता। वह महज सामूहिक सौदेबाजी (यानी यूनियन अधिकारों) को मजबूत करने और उदार कल्याणकारी राज्य की धारणा पर आधारित है। नॉर्डिक मॉडल के तहत राज्य अधिक कर लगाता है, अधिक विनियमन करता है, और अधिक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन अर्थव्यवस्था का स्वामित्व और संचालन मुख्य रूप से निजी पूंजी ही करती है।

व्यवहार में डीएसए की राजनीति चाहे जो हो, अपने प्रोग्राम में वह इससे कहीं आगे गया है। उसका कार्यक्रम पूंजीवादी स्वामित्व को केंद्रीय समस्या मानता है। वह कंपनी संचालन, निवेश, संसाधन आवंटन आदि का दायित्व सार्वजनिक संस्थानों, श्रमिक संगठनों और लोकतांत्रिक निकायों की ओर ट्रांसफर करना चाहता है। संघीय स्तर पर रोजगार गारंटी, 32 घंटे का कार्य सप्ताह, पूर्ण वेतन के साथ पर्यटन अवकाश,  व्यक्तिगत शुल्क के बिना सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, प्री-स्कूल से विश्वविद्यालय तक मुफ्त शिक्षा, छात्र ऋण की समाप्ति, किराया नियंत्रण, बड़े पैमाने पर सामाजिक आवास का निर्माण आदि उसके कार्यक्रम का हिस्सा हैं। संसाधन जुटाने के लिए वह वेल्थ टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स की ऊंची दरों तथा उत्तराधिकार कर लगाने की मांग करता है।

डीएसए का राजनीतिक सुधार कार्यक्रम भी उतना ही व्यापक है। यह अमेरिकी सीनेट और इलेक्टॉरल कॉलेज को समाप्त करने, आनुपातिक प्रतिनिधित्व लागू करने, बहुदलीय लोकतंत्र लागू करने, राष्ट्रपति पद और सुप्रीम कोर्ट का ढांचा फिर से तय करने, और कार्यपालिका तथा न्यायपालिका को कहीं अधिक कड़े विधायी नियंत्रण के अधीन लाने आदि जैसी बात करता है।

अमेरिकी सिस्टम के भीतर से ऐसे सुधारों को लागू करवा पाना असंभव समझा जाता है। जबकि बाहरी जन हस्तक्षेप से सिस्टम को पलटना डीएसए की रणनीति का हिस्सा नहीं है। इसीलिए उसके कार्यक्रमों को अक्सर हवाई बताया जाता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनका कोई महत्त्व नहीं है। डीएसए को इस बात का श्रेय दिया जाएगा कि उसने अमेरिका में उन मुद्दों को लोकप्रियता दिलाई, जिनसे वहां का शासक वर्ग ना सिर्फ नफरत करता है, बल्कि भयभीत भी होता है।

बीसवीं सदी वयस्क मताधिकार आधारित लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना के लिए हुए आंदोलनों के कारण जनता के राजनीतिक अधिकारों का विस्तार हुआ था। बोल्शेविक क्रांति ने उसमें आर्थिक एवं सामाजिक पक्ष जोड़े। लेकिन एक मुकाम के बाद शासक वर्ग उस चेतना को भटकाने और सिस्टम पर फिर से अपना पूरा शिकंजा कसने में कामयाब हो गया। मौजूदा दौर में धुर-दक्षिणपंथ को उसने अपना राजनीतिक औजार बनाया है। उसके प्रतिवाद के रूप में अब नए तेवर वाला वामपंथ सामने आया है। हालांकि इसकी सीमाएं हर जगह स्पष्ट हैं, फिर भी इसका उदय स्वागतयोग्य है, क्योंकि इनसे नई संभावनाएं खुलती हैं।

भारत के राजनीतिक क्षितिज पर अभी ऐसी किसी संभावना के संकेत नजर नहीं आते, तो उसकी वजह यहां शासक वर्ग के चलाए उस वैचारिक एजेंडे का अभी भी प्रभावशाली बने रहना है, जिसके जरिए आम जन की रोजमर्रा की समस्याओं को विमर्श से बाहर धकेला गया है। बहरहाल, यहां की नई पीढ़ी अगर सीखना चाहे, तो वह पश्चिम में उभरी संभावनाओं और उनकी सीमाओं का अध्ययन कर सकती है। हालांकि अपनी राजनीति विकसित करने के लिए शिक्षा का असल स्रोत तो अपनी वस्तुगत परिस्थितियां और आवाम हो ही सकते हैं। खैर, यह एक बिल्कुल अलग मुद्दा है।

SRIT India IPO: ₹218 करोड़ का एक और मेनबोर्ड इश्यू 28 सितंबर से, रहेंगे केवल नए शेयर; चेक करें प्राइस बैंड, GMP

मेनबोर्ड सेगमेंट में SRIT इंडिया का ₹218.40 करोड़ का IPO आ रहा है। यह 28 सितंबर को खुलेगा और 30 सितंबर को बंद होगा। इसमें 1.68 करोड़ नए शेयर रहेंगे। प्राइस बैंड ₹123-₹130 प्रति शेयर और लॉट साइज 115 शेयर है। SRIT इंडिया लिमिटेड बेंगलुरु की एक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विसेज (IT/ITeS) सॉल्यूशंस कंपनी है। यह डिजिटल सॉल्यूशन, कस्टम एप्लीकेशन डेवलपमेंट और सिस्टम इंटीग्रेशन सर्विसेज उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत और कुछ विदेशी बाजारों में सरकारी संस्थाओं और एंटरप्राइजेज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजाइन, इंप्लीमेंट और ऑपरेट करती है।

SRIT इंडिया 3 वर्टिकल में काम करती है: हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस, और टेलीकम्युनिकेशंस व ब्रॉडबैंड। इसकी सर्विसेज में हेल्थकेयर इनफॉर्मेशन सिस्टम्स, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस सॉल्यूशंस, साइबर सिक्योरिटी, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग, कनेक्टिविटी, फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम इंटीग्रेशन, ऑटोमेशन और मैनेज्ड सर्विसेज शामिल हैं।

SRIT India के IPO की क्लोजिंग 30 सितंबर को होगी, जिसके बाद अलॉटमेंट 1 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 6 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है। IPO के लिए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स, बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies है।

IPO में कितना हिस्सा रिजर्व

पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। कंपनी पब्लिक इश्यू से हुई कमाई का इस्तेमाल मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और रीडेवलपमेंट के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों और अन्य रणनीतिक पहलों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रेाथ के लिए, और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी।

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SRIT India की वित्तीय सेहत

SRIT India का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 15 प्रतिशत बढ़कर ₹462.54 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹43.29 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹36.15 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 के दौरान रेवेन्यू ₹400.50 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹33.60 करोड़ दर्ज किया गया। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर अभी से 24.62 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 25 सितंबर को Nykaa, PB Fintech, ESDS Software Solution समेत इन शेयरों में बड़े उतार-चढ़ाव के आसार

शुक्रवार, 25 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा। लिस्ट में नाइका, पीबी फिनटेक, व्हील्स इंडिया, आइनॉक्स ग्रीन एनर्जी, पर्पल स्टाइल लैब्स जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा शुक्रवार को SME सेगमेंट में एक कंपनी की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 4 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड और 2 कंपनियों के शेयर एक्स-स्प्लिट ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

इन शेयरों पर रहेगी नजर

ESDS Software Solution: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 14% बढ़कर 29.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 7.3% बढ़कर 133.7 करोड़ रुपये हो गया।

Purple Style Labs: Q1 में कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर 88.1 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 13% बढ़कर 119.4 करोड़ रुपये हो गया।

PB Fintech: Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी का शेयर 24 सितंबर को 36 प्रतिशत टूटा था। बंपर बिकवाली की वजह रही इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट और उसके बाद बर्नस्टीन का व्यू। बर्नस्टीन का मानना है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी। इस शेयर पर शुक्रवार को भी नजर रहेगी।

Wheels India: कंपनी का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) 24 सितंबर को खुल गया। फ्लोर प्राइस ₹2,197.10 प्रति शेयर है।

Inox Green Energy Services: कंपनी ने 24 सितंबर को अपना QIP लॉन्च किया। फ्लोर प्राइस ₹174.36 प्रति शेयर तय किया गया है।

FSN E-Commerce Ventures (Nykaa): नाइका और L’Oréal के कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल फंड, BOLD (बिजनेस अपॉर्चुनिटीज फॉर L’Oréal डेवलपमेंट) ने तेजी से बढ़ रहे भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड्स की अगली पीढ़ी में मिलकर निवेश करने के लिए एक सहयोग की घोषणा की है।

Waaree Energies: कंपनी की सब्सिडियरी, Waaree Clean Energy Solutions ने भारत के स्पेशिएलिटी गैस बिजनेस में उतरने की घोषणा की है। इसका मकसद देश की सेमीकंडक्टर और सोलर सेल बनाने वाली कंपनियों के लिए वन-स्टॉप सप्लायर बनना है।

LCC Projects: कंपनी राजस्थान के गंगधार में छोटी कालीसिंध और चाहुरनी नदियों पर सोलर पावर वाले स्प्रिंकलर सिस्टम पर बेस्ड ‘छोटी कालीसिंध मीडियम इरिगेशन प्रोजेक्ट’ के लिए L-1 बिडर (सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी) के तौर पर उभरी है। इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित कीमत 653.34 करोड़ रुपये है।

Dr Lal PathLabs: कंपनी के बोर्ड ने SN Genelab में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा शेयरधारकों से खरीदने को मंजूरी दे दी है। डील ₹168 करोड़ तक की होगी। इस अधिग्रहण के बाद SN Genelab, डॉ. लाल पैथलैब्स की सब्सिडियरी बन जाएगी। ट्रांजेक्शन के 30 नवंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

JSW Cement: कंपनी को बेलागावी ऑडिट कमिश्नरेट के एडिशनल कमिश्नर (सेंट्रल टैक्स) से एक ‘कारण बताओ नोटिस’ मिला है। यह नोटिस गलत क्लासिफिकेशन के कारण GST के कथित तौर पर कम भुगतान से संबंधित है। इसके चलते, डिपार्टमेंट ने अप्रैल 2022 से मार्च 2024 की अवधि के लिए 229.85 करोड़ रुपये के GST की मांग की है, जिसमें लागू ब्याज और 10 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है।

इस बीच, JSW स्टील और JSW सीमेंट द्वारा प्रमोटेड JSW वन प्लेटफॉर्म्स ने IPO के जरिए 3,054 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए SEBI, BSE और एनएसई के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है।

L&T Technology Services: कंपनी ने इंडस्ट्रियल AI में ग्लोबल लीडर, कॉग्नाइट (Cognite) के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की है। इसका मकसद एसेट-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज के लिए जॉइंट इंडस्ट्रियल AI और डेटा सॉल्यूशन विकसित करना और उन्हें उपलब्ध कराना है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

बल्क और ब्लॉक डील्स

PB Fintech: HDFC म्यूचुअल फंड ने लगभग 320.6 करोड़ रुपये के 25 लाख शेयर खरीदे।

Brainbees Solutions (FirstCry): प्री-IPO निवेशक न्यूक्वेस्ट एशिया इनवेस्टमेंट्स ने लगभग 202 करोड़ रुपये के 1.15 करोड़ शेयर बेचे। वहीं गोल्डमैन सैक्स ने लगभग 119 करोड़ रुपये के 68 लाख शेयर खरीदे।

Sedemac Mechatronics: एक ही ब्लॉक डील में लगभग 1,469 करोड़ रुपये के 48.8 लाख शेयरों का लेन-देन हुआ। A91 एमर्जिंग फंड II और एक्सपोन्शिया कैपिटल से जुड़े फंड्स सहित प्राइवेट इक्विटी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचा। खरीदारों में सिंगापुर सरकार (GIC) और मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर जैसे सॉवरेन फंड्स के साथ-साथ T रो प्राइस, अमांसा होल्डिंग्स और SBI, ICICI प्रूडेंशियल, एक्सिस, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और इनवेस्टको सहित कई घरेलू म्यूचुअल फंड्स शामिल थे।

BlueStone Jewellery and Lifestyle: ब्लूस्टोन ज्वेलरी के लगभग 61.98 लाख शेयरों का लेन-देन 513.01 करोड़ रुपये में हुआ। बजाज लाइफ इंश्योरेंस, कुवैत इनवेस्टमेंट अथॉरिटी FD F238, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, मिरे एसेट म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड और SBI लाइफ इंश्योरेंस ने Accel और 360 ONE WAM से BlueStone के शेयर खरीदे।

SME लिस्टिंग

Axiom Gas Engineering

ये स्टॉक करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी

LGT ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी

A D S डायग्नोस्टिक्स

नोबल पॉलिमर्स

ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

नेच्युराइट एग्रो प्रोडक्ट्स

मिडवेस्ट एनर्जी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ट्रम्प से विवाद के बीच मेलोनी UN महासभा नहीं जाएंगी:कहा- बिजी हूं; 15 साल में पहली बार इटली के PM नहीं पहुंचेंगे

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई लेवल बैठक में शामिल नहीं होंगी। उन्होंने इसकी वजह बिजी शेड्यूल बताई है। करीब 15 साल बाद पहली बार इटली का प्रधानमंत्री UNGA की सालाना हाई लेवल बैठक में शामिल नहीं होगा। मेलोनी की जगह विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी UNGA में इटली का प्रतिनिधित्व करेंगे। मेलोनी के न्यूयॉर्क नहीं जाने से उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से आमने-सामने मुलाकात भी नहीं होगी। इस साल जून में G7 समिट में दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था। ट्रम्प ने कहा था कि मेलोनी उनके साथ फोटो के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने जवाब दिया था, ‘ मुझे इसके लिए गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं हैं।’ ईरान युद्ध में मेलोनी ने ट्रम्प का साथ नहीं दिया ईरान के मुद्दे पर भी ट्रम्प और मेलोनी के रुख में अंतर रहा। मेलोनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं किया था। इसके बाद ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर उनके रुख की आलोचना की थी। हालांकि, इटली और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग जारी है। इटली NATO का सदस्य है और वहां करीब 13 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। एवियानो, नेपल्स, विसेंजा और सिसिली में अमेरिका के अहम सैन्य ठिकाने भी हैं। ट्रम्प और मेलोनी आखिरी बार G7 में साथ दिखे थे 15-17 जून 2026 को हुए G7 समिट में ट्रम्प और मेलोनी के रिश्तों में सुधार के संकेत दिखे थे। फ्रांस में हुई इस बैठक के दौरान दोनों कई बार साथ नजर आए। एक मौके पर दोनों सोफे पर बैठकर काफी देर तक बातचीत करते भी दिखे। उनकी तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। उस वक्त माना जा रहा था कि मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं के रिश्ते फिर सामान्य हो रहे हैं। हालांकि, ट्रम्प के बयान के बाद दोनों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया था। ट्रम्प पर यूरोप-अमेरिका के रिश्ते बिगाड़ने का आरोप मेलोनी के करीबी सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यालय में अंडरसेक्रेटरी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने G7 के बाद ट्रम्प के बयान पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि ट्रम्प जानबूझकर या अनजाने में अमेरिका और यूरोप के पुराने रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फज्जोलारी के मुताबिक, ट्रम्प के ऐसे बयानों से पूरे यूरोप में अमेरिका की छवि खराब हुई है। इसका नुकसान आखिरकार अमेरिका को ही उठाना पड़ेगा। ट्रम्प की बड़ी समर्थक रही हैं मेलोनी BBC के मुताबिक ट्रम्प और मेलोनी के रिश्ते पहले काफी करीबी माने जाते थे। 2025 में ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली वह एकमात्र यूरोपीय नेता थीं। उन्हें यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच ब्रिज के तौर पर भी देखा जाता था। अप्रैल में ईरान पर अमेरिकी हमले के दौरान ट्रम्प और मेलोनी के बीच मतभेद हो गया था। अमेरिका को इटली के हवाईअड्डों और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की जरूरत थी, लेकिन इटली ने इससे इनकार कर दिया था। इसके बाद पोप लियो को लेकर भी ट्रम्प और मेलोनी के बीच मतभेद सामने आए। पोप ने ईरान युद्ध रोकने की अपील की थी। ट्रम्प ने उनकी अपील पर नाराजगी जताई, जबकि मेलोनी ने ट्रम्प की बात का विरोध किया। इसके बाद ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें लगता था कि मेलोनी में हिम्मत है, लेकिन अब उन्हें ऐसा नहीं लगता। मोदी, पुतिन और जिनपिंग भी नहीं पहुंचे इस साल मेलोनी अकेली बड़ी नेता नहीं हैं जो UN महासभा से दूर हैं। प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे। करीब 130 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख इस बार UNGA की हाई लेवल बैठक में शामिल हो रहे हैं। PM मोदी ने इस साल UNGA में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। मोदी आखिरी बार सितंबर 2024 में UNGA की बैठक में शामिल हुए थे। इसके बाद 2025 में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने महासभा को संबोधित किया था। वहीं रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव महासभा को संबोधित करेंगे। चीन की ओर से उपराष्ट्रपति प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि, जिनपिंग इस हफ्ते वॉशिंगटन में ट्रम्प से अलग मुलाकात करने वाले हैं। ———————- यह खबर भी पढ़ें… जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका रवाना:ट्रम्प एयरपोर्ट पर रिसीव करेंगे, व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर मिलेगा; ट्रेड, AI और ताइवान पर बातचीत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार दोपहर अमेरिका रवाना हो गए हैं। वे 11 साल वहां जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

Hero Motors IPO Listing: 2% डिस्काउंट पर लिस्ट ₹84 का शेयर, हीरो मोटर्स ने आईपीओ निवेशकों को किया निराश

Hero Motors IPO Listing: ऑटो कंपोनेंट्स और एडवांस्ड मोबिलिटी मैन्युफैक्चरर हीरो मोटर्स के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में डिस्काउंट पर एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 7 गुना बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹84 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹82.10 और NSE पर ₹82.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला, बल्कि 2% से अधिक पूंजी ही घट गई। लिस्टिंग के बाद शेयरों ने रिकवरी की कोशिश की। उछलकर BSE पर यह ₹83.82 (Hero Motors Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 0.21% घाटे में हैं।

Hero Motors IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

हीरो मोटर्स का ₹1000 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-18 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 7.01 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 7.32 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 10.47 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.62 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले ₹400 करोड़ के4,76,19,047 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स- ओपी मुंजाल होल्डिंग्स और हीरो साइकिल्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹190.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹200.00 करोड़ इक्विपमेंट्स की खरीदारी, ₹171.99 करोड़ अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹60.25 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Hero Motors के बारे में

हीरो मोटर्स एक ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह भारत के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और एशियन की गाड़ी कंपनियों के लिए पावरट्रेन सॉल्यूशंस तैयार कर मुहैया कराती है। यह दोपहिया से लेकर ई-बाइक, पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियां, ऑफ-रोड वेईकल्स और ईवीटोल्स के लिए सर्विसेज देती है। इसकी ग्राहक बीएमडब्ल्यू एजी, डुकाटी मोटर होल्डिंग, और हमिंगबर्डईवी जैसी दिग्गज कंपनियां हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 55% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹41.17 करोड़ और टोटल इनकम 6% के सीएजीआर से ₹1,216.74 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹400.79 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹116.32 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।