Braj Mohan Ram: ‘ओडिशा में भी BJP को मजबूत करूंगा’; शपथ ग्रहण से पहले नए राज्यपाल के बयान पर बवाल, जानिए कौन हैं बृज मोहन राम

Braj Mohan Ram: ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल और झारखंड से तीन बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम पदभार संभालने से पहले ही विवादों में घिर गए हैं। ओडिशा की विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) नेराम के इस कथित बयान पर निराशा जताई है कि ‘पद संभालने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।’ एक और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे BJP का असली चेहरा सामने आ गया है। विपक्षी पार्टियों ने मांग की है कि राम को वापस बुलाया जाए।

BJD ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें राम राज्यपाल का पद संभालने के बाद अपनी आगे की कार्ययोजना के बारे में बात करते हुए नजर आ रहे हैं। BJD ने एक बयान में कहा, “पीटीआई के वीडियो में उनकी बातें सुनकर हमें हैरानी हुई, जिसमें वह फिर से कहते हैं कि वह BJP को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। हम इस टिप्पणी की निंदा करते हैं क्योंकि यह टिप्पणी इस तथ्य को दरकिनार करती है कि राज्यपाल पार्टी की राजनीति से ऊपर होते हैं।”

पूर्व सीएम नवीन पटनायक भड़के

ओडिशा के पूर्व सीएम और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने उम्मीद जताई कि वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे। ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “ओडिशा के लोग पार्टी का काम करने के लिए मनोनीत राज्यपाल के उत्साह को देख रहे हैं। उम्मीद है कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ उन्हें ओडिशा के लोगों की सेवा करने का जोश और शक्ति देंगे, जिससे वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखते हुए निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।” उन्होंने पोस्ट में राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया।

कांग्रेस का भी बीजेपी पर हमला

इस बीच, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने X पर एक पोस्ट में कहा, “राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष रूप से संविधान का पालन करना है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के चुनावी हितों को आगे बढ़ाना।” उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों को दलीय राजनीति से ऊपर रहना चाहिए। BJP नेता और तीन बार सांसद रह चुके राम को सोमवार को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राम के बयान पर ओडिशा BJP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बृज मोहन राम ने क्या कहा?

नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने कहा कि वह गरीबों के लिए काम करेंगे। साथ ही बुनियादी मुद्दों के समाधान पर ध्यान देंगे और लोगों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। राम ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ओडिशा तरक्की करे और लोगों को कोई परेशानी न हो। इस दौरान रिपोर्टर ने उनसे काम करने के तरीके को लेकर एक सवाल किया जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं नहीं देखेंगे… वहां (ओडिशा) भी क्या स्थिति है तो वहां भी हम जोड़ेंगे। वहां भी मोर्चा का अपना संगठन है। उसको एक्टिव करके आप अपने बीजेपी के पास में वोट कैसे आए इस पर चिंता करेंगे।” उनके इसी बयान पर सियासी बवाल मच गया है।

बाद में दी सफाई

ओडिशा में ‘बीजेपी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करूंगा’ वाले कथित बयान पर गुरुवार (15अक्टूबर ) को सफाई देते हुए नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने कहा था कि मैं सबके साथ मिलकर काम करूंगा। अब मैं दलीय राजनीति से ऊपर उठ चुका हूं। लेकिन जिस पार्टी से मैं जुड़ा रहा हूं, वह मेरी पूंजी है। उस पार्टी के लिए मेरे मन में हमेशा लगाव और प्रेम रहेगा। लेकिन मैं किसी खास पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा। हम सबके हैं, सब हमारे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं सबके साथ मिलकर इसे निभाऊंगा। शुरुआत में थोड़ा तालमेल बिठाने में समय लगेगा। लेकिन मैं ऐसा कर लूंगा… मैं संवैधानिक पद की मर्यादा के दायरे में रहकर काम करूंगा। एक राजनेता और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बीच फर्क होता है। इसलिए, मुझे इस बात का ध्यान रखते हुए काम करना होगा।”

कौन हैं बृज मोहन राम?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के पलामू जिला निवासी बृज मोहन राम को 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया। वह हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे, जिन्होंने तीन जनवरी 2025 को पदभार संभाला था। राम ने अविभाजित बिहार में 1996, 1998 और 1999 में तीन बार पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य के तौर पर सेवाएं दीं। ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था।

लातेहार से राज्यपाल का सफर

यह क्षेत्र अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से संबंधित बीएस कॉलेज, लोहरदगा से ग्रेजुएट की पढ़ाई की। मीडिया रिपोर्ट्स में उनका पेशा कृषि बताया जाता है। उनके राजनीतिक जीवन की खास बात यह है कि उन्होंने ऐसे दौर में राजनीति में अपनी पहचान बनाई, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था। उस समय पलामू और लातेहार जैसे क्षेत्र अविभाजित बिहार का हिस्सा थे।

विधायक से सांसद बनने और फिर लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहने के बाद राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय है। उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन स्थानीय क्षेत्र से जुड़ा रहा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। उस समय बिहार की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों और BJP के विस्तार का दौर चल रहा था।

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ब्रज मोहन राम ने वर्ष 1991 में अविभाजित बिहार की राजनीति में चुनावी सफलता हासिल की। वह भगवा पार्टी के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। फिर 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। राम की राजनीतिक पहचान में सामाजिक प्रतिनिधित्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने 1996 से 1998 के बीच रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। बाद के वर्षों में भी वह BJP के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय करने में अपनी भूमिका का उल्लेख करते रहे। हाल ही में राज्यपाल नियुक्त होने के बाद उन्होंने कहा कि झारखंड में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय बनाने में उनका योगदान रहा है।

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

Samajwadi Party Rebel MLAs: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले अमेठी में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेठी जनपद के गौरीगंज स्थित मंगलम भवन के सामने मैदान में आयोजित एक विशाल राजनीतिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण कर ली है। अमेठी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी भारी संख्या में दिग्गज नेताओं ने दल-बदल किया है।

​समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी

​भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी मंगलवार को पहली बार अमेठी पहुंचीं। उनकी अगुवाई और मौजूदगी में यह बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से पंकज चौधरी (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष), ​अमरपाल मौर्य (पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष), ​दारा सिंह चौहान (यूपी सरकार के मंत्री) तथा कई अन्य सांसद, विधायक और स्थानीय वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। 

कौन हैं भाजपा में शामिल होने वाले सपा विधायक?

  • ​राकेश प्रताप सिंह : गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के सपा विधायक। पार्टी विरोधी गतिविधियों और रामचरितमानस विवाद के बाद सपा ने इन्हें निष्कासित कर दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने खुलकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी का समर्थन किया था और गौरीगंज से अयोध्या तक राम मंदिर पदयात्रा भी निकाली थी।
  • ​अभय सिंह (अभय प्रताप सिंह) : गोसाईगंज (अयोध्या) से विधायक हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह और पिता भगवान बख्श सिंह समेत भारी संख्या में समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।
  • ​विनोद चतुर्वेदी : जालौन के कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक, जो अपने कई समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।

​क्या कहा राकेश प्रताप सिंह ने?

​सपा से निष्कासित और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने पर स्पष्ट कहा कि वे ‘राष्ट्र और राम’ के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इन तीनों ही विधायकों ने पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था।

​राजनीतिक समीकरण और आगे की राह

​यह पूरा घटनाक्रम अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीतकर सदन पहुंचे इन तीनों कद्दावर विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाना, समाजवादी पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका है। वहीं, आगामी 2027 के चुनावों से पहले इस बड़े फेरबदल से भाजपा की ज़मीनी पकड़ कितनी मजबूत होती है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल अमेठी का यह सियासी घटनाक्रम राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने थामा कांग्रेस का दामन

उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुधवार विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की मौजूदगी में चकराता, सहसपुर, विकास नगर से कई लोगों ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वालों में पूर्व प्रत्याशी विधानसभा चकराता दर्शन लाल डोभाल, सेवानिवृत्त आईजी पुलिस अनन्तराम चौहान, कैप्टन ताजवर सिंह नेगी, कैप्टन नारायण सिंह रावत, कैप्टन गंगा सिंह, कैप्टन हीरा बल्लभ पांडे, कैप्टन सोबन सिंह, जितेंद्र सिंह, शशांक भट्ट आदि प्रमुख हैं।

श्री गोदियाल ने इस अवसर पर कहा कि आज देश एवं प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जनविरोधी नीतियों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार तथा बिगड़ती कानून व्यवस्था से त्रस्त है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार के शासनकाल में बेरोजगार नौजवान रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों से प्रदेश की मातृशक्ति स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही है तथा किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सरकार की नीतियों से परेशान हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में भारी अन्तर है। प्रदेश की जनता ने जिस विश्वास और उम्मीद के साथ भाजपा को सत्ता सौंपी थी, सरकार उन अपेक्षाओं पर खरी उतरने में पूरी तरह विफल रही है। विकास के नाम पर केवल घोषणाएं की जा रही हैं, जबकि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता भाजपा सरकार के कुशासन से मुक्ति चाहती है। प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं तथा सरकार जनसमस्याओं के समाधान के बजाय प्रचार-प्रसार और राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नाकामियों से जनता में भारी आक्रोश है और आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदेश की जनता भाजपा को सत्ता से बेदखल कर कांग्रेस की सरकार बनाने का मन बना चुकी है।

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चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सिंह ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देशभर में लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए निरन्तर संघर्ष कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। इसी का परिणाम है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता कांग्रेस की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं को संगठन में पूरा सम्मान दिया जाएगा तथा उनके राजनीतिक एवं सामाजिक अनुभवों का लाभ पार्टी संगठन को मजबूत बनाने में लिया जाएगा।

प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। प्रदेश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पलायन जैसे ज्वलन्त मुद्दों पर सरकार के पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब भाजपा के खोखले वादों और झूठी घोषणाओं से ऊब चुकी है तथा कांग्रेस की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी पूरी एकजुटता एवं मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवार में नए नेताओं के शामिल होने से पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा तथा भाजपा सरकार के विरुद्ध चल रहे जनसंघर्ष को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर विधायक लखपत सिंह बुटोला, प्रदेश उपाध्यक्ष लालचन्द शर्मा, अभिषेक सिंह, राजेन्द शाह, नवीन जोशी, विनोद चौहान, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, अमेन्द्र बिष्ट, अखिलेश उनियाल, प्रशांत खंडूरी, नरेशानन्द नौटियाल आदि पार्टी नेता उपस्थित रहे।

Pic Credit : UNI

UP News: ‘जो भगवान श्री राम का विरोध करें…’; यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव को बड़ा झटका, अभय सिंह समेत सपा के 3 विधायक BJP में शामिल

UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा झटका लगा है। बुधवार (14 अक्टूबर) को SP के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। समाजवादी पार्टी के ये तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी हैं। राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि अभय सिंह अयोध्या की गोसाईंगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं।

इन विधायकों ने 2022 का चुनाव SP के टिकट पर जीता था। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर दिया था। यूपी के अमेठी में बुधवार (14 अक्टूबर) को BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में तीनों बागी सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुवेर्दी BJP में शामिल हुए।

कौन हैं MLA अभय सिंह?

अभय सिंह भगवान राम की नगरी अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। सिंह भी समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद अभय सिंह पर कार्रवाई हुई थी। बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग के बाद समाजवादी पार्टी ने अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों और राजनीतिक बयानों के कारण उनका नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है। औपचारिक सदस्यता से पहले भी अभय सिंह कई मौकों पर भगवा पार्टी के मंच पर दिखाई दिए थे। 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत का प्रमुख केंद्र बन चुकी अयोध्या का सियासी तापमान अब और बढ़ने की उम्मीद है।

बुधवार को गोसाईंगंज के विधायक अभय सिंह आधिकारिक तौर पर भगवा पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद अब वह BJP के लिए निर्भय होकर मैदान में उतर सकेंगे। अभय सिंह ने SP के टिकट पर 2012 और 2022 में गोसाईंगंज विधानसभा सीट जीती। 2017 के विधानसभा चुनाव में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी से हार गए थे। जबकि 2022 में सिंह ने BJP उम्मीदवार आरती तिवारी को 13,079 वोटों से हराया।

‘जो श्री राम का विरोध करेगा, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे’

समाजवादी पार्टी के विधायक अभय सिंह ने BJP में शामिल होने पर न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का विरोध करें, जो राष्ट्र का विरोध करेंगे, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बारे में जन-जन तक हिंदी और अवधि में पहुंचाने वाले, तुलसीदास ने राम चरित मानस को लिखा। उस रामचरित मानस को जलाया जाए, फाड़ा जाए। उसके बाद इस घटना पर कोई टिप्पणी न की जाए। उसके बाद दर्शन से रोका जाए। ये सब चीजें ऐसी हैं जो उचित नहीं हैं।”

कौन हैं राकेश प्रताप सिंह?

राकेश प्रताप सिंह अमेठी के गौरीगंज से विधायक हैं। सिंह हाईस्कूल तक की पढ़ाई की हुई है। वह साल 2012, 2017 और 2022 में तीन बार विधायक चुने गए हैं। 2022 में राकेश प्रताप सिंह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उन्होंने शानदार जीत भी दर्ज की थी। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद से राकेश प्रताप सिंह सपा को धोखा देकर अपनी पार्टी के अन्य बागी विधायकों के साथ चले गए। इसके बाद अखिलेश यादव ने साल 2025 के जून महीने में राकेश सिंह को सपा से निकाल दिया था।

विनोद चतुर्वेदी के बारे में जानें

जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी  BJP में शामिल हो गए हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह को 2,816 वोटों से हराकर कालपी विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। कालपी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने से पहले चतुर्वेदी ने यूपी के जालौन जिले में उरई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वे 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार के तौर पर उरई सीट से चुने गए थे।

अखिलेश पर बोला हमला

राकेश प्रताप सिंह ने उनके BJP में शामिल होने पर ANI से कहा, “मैं अपने क्षेत्रवासियों का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारा समर्थन किया और मुझसे अनुरोध किया कि भाजपा की सदस्यता लीजिए। उन लोगों ने मुझसे कहा कि वे मेरे साथ हैं… 98% लोग जो अपना बूथ जिताते या हराते थे, वे समाजवादी पार्टी का परित्याग करेंगे और BJP की सदस्यता लेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “विधायक विनोद चतुर्वेदी, अभय सिंह और मैं स्वयं भाजपा में शामिल हो रहा हूं। हमारे साथ ऐसे करीब 1000 लोग जो जनप्रतिनिधि या पूर्व जनप्रतिनिधि हैं वो शामिल होंगे…लगभग 1 दर्जन विधायक मंच पर मौजूद रहेंगे।”

इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने एक X पोस्ट में लिखा, “14 अक्टूबर 2026 का दिन मेरे राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन है। यह मेरे लिए केवल भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का अवसर नहीं, बल्कि सनातन की रक्षा, अपनी आस्था, अपने संस्कारों और अपने सिद्धांतों के साथ एक नई राजनीतिक यात्रा प्रारंभ करने का बहुमूल्य दिन है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपने राजनीतिक जीवन में सदैव अपनी सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा है। बीते समय में समाजवादी पार्टी के भीतर सनातन धर्म, हमारी धार्मिक परंपराओं और पवित्र ग्रंथों को लेकर जिस प्रकार की टिप्पणियां और घटनाएं सामने आईं, उनसे मेरी भावनाएँ बार-बार आहत हुईं। विशेष रूप से जब मुझ जैसे सैकड़ों विधायकों एवं राजनैतिक व्यक्तियों को आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के दर्शन करने ना जाने देना, तो वह क्षण मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक था। उसी दिन मेरे मन में यह विचार दृढ़ हो गया था कि जिस राजनीतिक विचारधारा के साथ मेरी आस्था और मेरा अंतर्मन सहमत नहीं है, उसके साथ आगे बढ़ना मेरे लिए संभव नहीं होगा।”

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Hero Motors Share Price: लिस्टिंग के बाद पहला रिजल्ट और अधिग्रहण का ऐलान, दोहरे सपोर्ट पर 7% चढ़ा शेयर

Hero Motors Share Price: हीरो मोटर्स ने एक कारोबारी दिन पहले रात में लिस्टिंग के बाद पहली बार रिजल्ट पेश किया और इसके साथ एक बड़ी खरीदारी का ऐलान भी किया। जून तिमाही में मुनाफे में करीब ढाई गुना उछाल और खरीदारी के ऐलान ने मिलकर हीरो मोटर्स के शेयरों में जोश भर दिया और यह 7% से अधिक उछल पड़ा। फिलहाल बीएसई पर यह 3.79% की बढ़त के साथ ₹161.50 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.65% चढ़कर ₹167.50 तक पहुंच गया था, जो इसके रिकॉर्ड हाई ₹179.00 के काफी करीब है।

कैसी रही Hero Motors की जून तिमाही

हीरो मोटर्स के लिए चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कंसालिडेटेड लेवल पर कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹3.88 करोड़ से 146.93% बढ़कर ₹9.57 करोड़ पर पहुंच गया तो ऑपरेशंस से रेवेन्यू 24.86% बढ़कर ₹319.32 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी के लिए इस वित्त वर्ष की शुरुआत मजबूत रही। कंपनी का ईबीआईटीडीए भी ₹18.72 करोड़ से 92.04% उछलकर ₹35.95 करोड़ और EBITDA मार्जिन भी 7.32% से 11.26% पर पहुंच गया।

ब्रिटिश कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर क्या है योजना

नतीजे के साथ-साथ हीरो मोटर्स ने खुलासा किया कि वह अपनी ब्रिटिश सब्सिडियरी कंपनी ह्यूलैंड इंजीनियरिंग (Hewland Engineering) में हिस्सेदारी बढ़ाएगी। इसके लिए कंपनी की योजना ह्यूलैंड इंजीनियरिंग के मौजूदा शेयरहोल्डर्स विलियम ह्यूलैंड (William Hewland) और सियोभेन ह्यूलैंड (Siobhan Hewland) से 39% होल्डिंग करीब 6 लाख पाउंड में खरीदेगी। इस खरीदारी के बाद ह्यूलैंड इंजीनियरिंग में हीरो मोटर्स की हिस्सेदारी 51% से बढ़कर 90% हो जाएगी। सौदे के तहत कंपनी £1 की कीमत वाले 8,039 शेयर खरीदेगी। विलियम के पास अभी ह्यूलैंड इंजीनियरिंग के 9090 और सियोभेन के पास 1010 शेयर हैं जो कुल मिलाकर कंपनी की 49% होल्डिंग के बराबर है। यह खरीदारी 6 महीने में पूरी होगी।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल

हीरो मोटर्स के शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹84 के भाव पर जारी हुए हैं। आईपीओ को ओवरऑल 7 गुना बोली मिलने के बाद लिस्टिंग पर इसने निराश किया और 23 सितंबर 2026 को इसकी 2% डिस्काउंट पर एंट्री हुई। हालांकि लिस्टिंग के दिन ₹80.50 के लेवल तक टूटने के बाद यह संभल गया और ताबड़तोड़ रिकवरी करते हुए कुछ ही दिनों में 5 अक्टूबर 2026 को ₹179.00 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया। इस हाई लेवल पर आईपीओ निवेशकों का पैसा 113% से अधिक हो गया।

Bank of Baroda Share Price: ₹1.42 लाख करोड़ के मुकदमे पर डूबे ₹3700 करोड़, 3% टूटे शेयर, ये है पूरा मामला

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Viral Video: न भारत, न गुजरात… पाकिस्तान में दिखा नवरात्रि का ऐसा नजारा, वीडियो देख खुश हो जाएंगे आप

भारत में नवरात्रि के दौरान गरबा, पूजा और माता रानी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी पाकिस्तान में नवरात्रि का ऐसा नजारा देखा है? सोशल मीडिया पर कराची के एक मंदिर का वीडियो चर्चा में है, जहां हिंदू श्रद्धालु माता रानी की भक्ति में डूबे नजर आ रहे हैं। कोई गरबा कर रहा है, तो कोई प्रसाद बांटकर त्योहार की खुशियां साझा कर रहा है। इस वीडियो को देखकर भारत के कई सोशल मीडिया यूजर्स भी अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे हैं। खास बात यह है कि सरहद के उस पार मनाए जा रहे इस त्योहार की झलक लोगों को धार्मिक आस्था और आपसी जुड़ाव का खूबसूरत संदेश देती नजर आ रही है।

कराची के मंदिर में गरबा करते दिखे श्रद्धालु

इंस्टाग्राम यूजर @munji_galhiyun ने यह वीडियो साझा किया है। इसमें पाकिस्तान के कराची स्थित श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर में नवरात्रि उत्सव की झलक दिखाई गई है। वीडियो पर लिखा है, “Navratri Day: 1: Shiv Mandir, Karachi Pakistan।”

वीडियो की शुरुआत में महिला कहती है, “This is not India, this is Pakistan Navratri।” इसके बाद मंदिर परिसर में गरबा करते श्रद्धालु दिखाई देते हैं। कहीं लोग भक्ति संगीत पर झूम रहे हैं, तो कहीं एक साथ प्रसाद ग्रहण करते नजर आ रहे हैं। माता रानी की प्रतिमा और ‘जय माता दी’ लिखे हेडबैंड पहने भक्तों की तस्वीरें भी इस वीडियो को खास बनाती हैं।

नौ दिनों तक चलती हैं नवरात्रि की रौनक

इंस्टाग्राम पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, मंदिर में नवरात्रि का उत्सव नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान पूजा-पाठ, पारंपरिक गरबा और सामूहिक कार्यक्रमों के जरिए श्रद्धालु त्योहार मनाते हैं। महिला ने एक अन्य वीडियो में यह भी बताया कि मुस्लिम लड़के अपने परिवार के साथ इन कार्यक्रमों में आ सकते हैं। उसने इसकी वजह लड़कियों की सुरक्षा बताई। उसके अनुसार, उत्सव का समय रात 8 बजे से मध्यरात्रि तक रहता है।

वीडियो देखकर भारतीय यूजर्स ने जताई खुशी

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में हैं। कई यूजर्स ने पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को नवरात्रि मनाते देखकर खुशी जताई, जबकि कुछ ने भविष्य में इन समारोहों में शामिल होने की इच्छा जाहिर की।

एक यूजर ने लिखा, “भगवान आप सभी को आशीर्वाद दें। भारत से ढेर सारा प्यार और प्रार्थनाएं।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि वह भी नवरात्रि में उनके साथ शामिल होना चाहता है और ‘जय माता दी’ कहकर शुभकामनाएं दीं।

एक अन्य यूजर ने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या यह सच है। वहीं, किसी ने लिखा कि यह वीडियो देखकर उसका दिन बन गया।

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भारत-पाकिस्तान के बीच त्योहार साथ मनाने की उम्मीद

कुछ लोगों ने इस वीडियो को दोनों पड़ोसी देशों के बीच बेहतर रिश्तों की उम्मीद से भी जोड़ा। एक यूजर ने इच्छा जताई कि काश किसी दिन भारत और पाकिस्तान के लोग मिलकर त्योहार मना सकें।कराची के मंदिर में नवरात्रि की यह झलक दिखाती है कि धार्मिक परंपराएं और त्योहार लोगों के जीवन में कितनी अहम जगह रखते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है और सरहद के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव की चर्चा को आगे बढ़ा रहा है।

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Zetwerk Manufacturing IPO 15 अक्टूबर से, प्राइस बैंड ₹143-₹151 प्रति शेयर तय

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस लिमिटेड का IPO 15 अक्टूबर को खुलने जा रहा है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹143-₹151 प्रति शेयर फिक्स किया गया है। लॉट साइज 99 शेयर है। कंपनी का इरादा ₹5,012.33 करोड़ जुटाने का है। IPO में ₹2,830 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे, साथ ही ₹2,182.33 करोड़ के शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। इश्यू 19 अक्टूबर को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 21 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 23 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

जेटवर्क पहले एक डिजिटल मार्केटप्लेस थी और अब मैन्युफैक्चरर्स को ग्राहकों से जोड़कर एक एंड-टू-एंड इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बन गई है। यह कई सेक्टर्स में कस्टम-बिल्ट कंपोनेंट्स के लिए इंजीनियरिंग, उत्पादन और डिलीवरी को व्यवस्थित करती है। ग्राहक डिजाइन प्रदान करते हैं, जेटवर्क सप्लायर का चयन, गुणवत्ता नियंत्रण, टाइमलाइंस और लॉजिस्टिक्स को संभालती है। कंपनी लैपटॉप, हियरेबल्स, वियरेबल्स, IT हार्डवेयर बनाती है। जेटवर्क में खोसला वेंचर्स, एक्सेल, लाइटस्पीड, पीक XV पार्टनर्स, ग्रीनओक्स, एवेनिर जैसे दिग्गजों का पैसा लगा हुआ है।

जेटवर्क में फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर पीक XV पार्टनर्स इनवेस्टमेंट्स V सबसे बड़ी इंडीविजुअल शेयरहोल्डर है, जिसके पास 9.12 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ग्रीनओक्स कैपिटल अपॉर्चुनिटीज फंड II के पास 8.61 प्रतिशत, रामकृष्णन के पास 8.36 प्रतिशत, एक्सेल इंडिया V के पास 7.74 प्रतिशत और आचार्य के पास 7.53 प्रतिशत हिस्सा है।

Zetwerk IPO को जुलाई में सेबी से मिली थी मंजूरी

जेटवर्क ने अपने IPO के लिए इस साल मार्च में कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी से जुलाई में मंजूरी मिलने के बाद अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 13 अगस्त 2026 को फाइल किया। OFS में प्रमोटर-ग्रुप एंटिटी Creovate Innovation, को-फाउंडर अमृत आचार्य, श्रीनाथ रामकृष्णन के साथ-साथ निवेशक पीक XV पार्टनर्स, एक्सेल, लाइटस्पीड वेंचर, के कैपिटल आदि भी शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

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IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज, एवेंडस कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स, बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है। इश्यू में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

Zetwerk अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने, पहले से न पता अधिग्रहणों, अन्य रणनीतिक निवेशों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹4,195.70 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹732.98 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹1,942.19 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में जेटवर्क का रेवेन्यू 40 प्रतिशत बढ़कर ₹16,100.63 करोड़ रहा। घाटा 1,606.17 करोड़ दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जैक याडेगरी कौन हैं? 15 विश्वविद्यालयों ने किया रिजेक्ट, अब 19 साल की उम्र में अपने AI स्टार्टअप के लिए जुटाए 10 मिलियन डॉलर

आज के दौर में जहां युवा अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं, वहीं अमेरिका के 19 वर्षीय जैक याडेगरी अपनी उद्यमशीलता और AI तकनीक के दम पर बिजनेस की दुनिया में चर्चा बटोर रहे हैं। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत से एक खास पहचान बनाई है। जैक ने महज सात साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपनी रुचि को एक बड़े अवसर में बदल दिया। उन्हें सबसे पहले Cal AI ऐप से पहचान मिली, जिसने उनकी सफलता की कहानी को नई दिशा दी। अब वह अपने नए AI स्टार्टअप Persona को लेकर सुर्खियों में हैं।

इस स्टार्टअप के लिए 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाना उनकी उपलब्धियों में एक और बड़ी कड़ी माना जा रहा है। जैक की कहानी दिखाती है कि सही सोच, तकनीकी कौशल और नए विचारों के साथ कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

7 साल की उम्र में सीखी कोडिंग, 16 में बेची पहली कंपनी

अमेरिका के लॉन्ग आइलैंड, न्यूयॉर्क में रहने वाले जैक याडेगरी को बचपन से ही तकनीक में दिलचस्पी थी। उन्होंने स्कूल के दिनों में Totally Science नाम की गेमिंग वेबसाइट बनाई थी। इस प्लेटफॉर्म के जरिए छात्र स्कूल नेटवर्क पर ब्लॉक किए गए गेम खेल सकते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैक ने महज 16 साल की उम्र में इस वेबसाइट को करीब 1 लाख डॉलर में बेच दिया था।

हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड ने किया रिजेक्ट, फिर भी नहीं मानी हार

जैक की कहानी का एक दिलचस्प पहलू कॉलेज एडमिशन से भी जुड़ा है। अप्रैल 2025 में उन्होंने बताया था कि जिन 18 विश्वविद्यालयों में उन्होंने आवेदन किया, उनमें से 15 ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। इनमें हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, उनका GPA 4.0 और ACT स्कोर 34 था। इसके बावजूद उन्हें कई बड़े विश्वविद्यालयों में दाखिला नहीं मिला। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी में पढ़ाई शुरू की। हालांकि, एडमिशन में मिली निराशा उनके बिजनेस सफर में बाधा नहीं बनी।

Cal AI ऐप ने बनाया करोड़ों का बिजनेस

साल 2024 में जैक ने Cal AI नाम का कैलोरी ट्रैकिंग ऐप लॉन्च किया। इसकी मदद से यूजर्स खाने की तस्वीर अपलोड करके उसमें मौजूद कैलोरी का अनुमान लगा सकते थे। ऐप को लोगों के बीच अच्छी लोकप्रियता मिली।

मार्च 2026 में फिटनेस प्लेटफॉर्म MyFitnessPal ने Cal AI का अधिग्रहण करने की घोषणा की। सौदे की रकम सार्वजनिक नहीं की गई। TechCrunch की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप के 1.5 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके थे और दो साल में इसका सालाना राजस्व 3 करोड़ डॉलर से अधिक पहुंच गया था।

अब Persona से AI की दुनिया में नई शुरुआत

MyFitnessPal से जून में अलग होने के बाद जैक ने Persona पर काम शुरू किया। यह AI असिस्टेंट यूजर्स को रोजमर्रा के कामों में मदद देने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जुटाई गई 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग का नेतृत्व Vine Ventures ने किया, जबकि अन्य निवेशकों में Cory Levy और Collective Global शामिल हैं।

दिसंबर में आ सकता है AI डिवाइस

Persona के तहत दिसंबर में 179 डॉलर का एक पहनने योग्य डिवाइस लॉन्च करने की योजना है। इसे बटन दबाकर या कलाई की हलचल से सक्रिय किया जा सकेगा। जैक का कहना है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत विज्ञापनदाताओं को नहीं बेचेगी, हालांकि प्रायोजित शॉपिंग सुझाव इसके बिजनेस मॉडल का हिस्सा होंगे। फिलहाल Persona iMessage पर बीटा वर्जन में उपलब्ध है और इसके कुछ हजार शुरुआती यूजर्स हैं।

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Fusion CX IPO: ₹702 करोड़ का एक और इश्यू 14 अक्टूबर से; रहेंगे ₹500 करोड़ के नए शेयर; चेक करें प्राइस बैंड

मेनबोर्ड सेगमेंट में फ्यूजन CX का ₹702 करोड़ का IPO 14 अक्टूबर को खुलने वाला है। प्राइस बैंड ₹275-₹289 प्रति शेयर और लॉट साइज 51 शेयर है। कंपनी वॉइस, ईमेल, चैट, सोशल मीडिया और मैसेजिंग के जरिए मल्टीचैनल कस्टमर सपोर्ट उपलब्ध कराती है। यह AI डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस भी देती है, जिसमें डेटा कलेक्शन, डेटा एनोटेशन, इमेज व वीडियो लेबलिंग, और रोबोटिक टेली-ऑपरेशंस शामिल हैं।

Fusion CX इंसानी विशेषज्ञता को टेक्नोलॉजी और अपने खास AI टूल्स के साथ कंबाइन करके कई भाषाओं में और कई चैनलों के जरिए कस्टमर एंगेजमेंट उपलब्ध कराती है, काम करने की क्षमता बेहतर बनाती है और कस्टमर के साथ बातचीत को ऑटोमेट करती है। 30 जून, 2026 तक Fusion CX के 13 देशों में 40 डिलीवरी सेंटर थे।

कंपनी के पब्लिक इश्यू में ₹500 करोड़ के 1.73 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹202 करोड़ के 69.90 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में प्रमोटर्स P.N.S. बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और रसीश कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। एंकर निवेशक 13 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

कब होगी लि​स्टिंग

IPO 16 अक्टूबर को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 19 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 22 अक्टूबर को लिस्ट होंगे। इस इश्यू के लिए ‘नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड’ बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies है। IPO में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

ग्रे मार्केट में Fusion CX का शेयर अभी से 19.03 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

Fusion CX का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू ₹503.85 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा ₹55.70 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹238.13 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 37 प्रतिशत बढ़कर ₹1,851.83 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 129 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹169.84 करोड़ रहा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर होने वाली कमाई का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने के लिए, स्टेप डाउन सब्सिडियरीज में निवेश के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

केटी जकारिया व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनीं:ट्रम्प बोले- वे मेरी वफादर; 7 बार से इस पद पर महिला चुनी गईं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने केटी जकारिया को व्हाइट हाउस का नया सेक्रेटरी बनाया है। उन्होंने कैरोलिन लेविट की जगह ली है, जिन्होंने अगस्त में यह पद छोड़ दिया था। 41 साल की जकारिया वकील रह चुकी हैं और फिलहाल ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में सलाहकार हैं। यह कंपनी ट्रम्प के सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल को चलाती है। ट्रम्प ने शुक्रवार को उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए कहा कि वह उनकी बहुत वफादार हैं और उनका रिकॉर्ड बेदाग है। केटी जकारिया से पहले लगातार 6 महिलाएं इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। आखिरी पुरुष प्रेस सेक्रेटरी शॉन स्पाइसर थे, जिन्होंने 2017 में ट्रम्प के पहले कार्यकाल की शुरुआत में यह पद संभाला था। ट्रम्प ने TV पर देखकर पसंद किया था 42 साल की केटी जकारिया कैलिफोर्निया से हैं और उनके चार बच्चे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने जकारिया को टीवी पर देखने के बाद पसंद किया। जकारिया एक्सपर्ट के रूप में लगातार टीवी पर आती रही हैं। ट्रम्प TV पर उनके बात रखने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए थे। ट्रम्प ने यह फैसला लेने से पहले अपने कई करीबी सलाहकारों से बात की थी। इनमें पूर्व प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट भी शामिल थीं। लेविट ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद अगस्त के आखिर में प्रशासन छोड़ दिया था। उनकी जगह लेने के लिए CNN के कंजर्वेटिव कमेंटेटर स्कॉट जेनिंग्स, ट्रम्प की पूर्व वकील अलीना हब्बा और डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली के नाम भी चर्चा में थे। पिछले कार्यकाल में ट्रम्प के 4 प्रेस सेक्रेटरी रहे ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान चार लोगों ने व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी का पद संभाला था। सबसे पहली सीन स्पाइसर को छह महीने बाद ही पद से हटा दिया गया था। उन्होंने 2017 में ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह को सबसे ज्यादा देखे जाने का झूठा दावा किया था। इसके बाद साराह सैंडर्स ने पद संभाला। ट्रम्प ने उनके काम की काफी तारीफ भी की। स्टेफनी ग्रिशम तीसरी प्रेस सेक्रेटरी बनीं, जिन्होंने ट्रम्प के कहने पर कभी प्रेस ब्रीफिंग नहीं की। 6 जनवरी 2021 को ट्रम्प समर्थकों के व्हाइट हाउस घेराव के बाद ग्रिसम ने पद छोड़ दिया था। अब ग्रिशम ट्रम्प विरोधी हैं। कैली मैकनेनी ट्रम्प कार्यकाल में व्हाइट हाउस की आखिरी प्रेस सेक्रेटरी रही। अब वे फॉक्स न्यूज के लिए काम करती हैं।