Google Pixel 11 Pro Fold की एंट्री से पहले स्पेसिफिकेशन्स लीक, जानें कीमत, फीचर्स और लॉन्च डेट

Google Pixel 11 Pro Fold: Google Pixel 11 सीरीज भारतीय और ग्लोबल मार्केट में लॉन्च होने के लिए तैयार है, जिसमें Pixel 11 Pro Fold इस लाइनअप का सबसे महंगा फोन होगा। सामने आई लीक और रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फोन कई नए फीचर्स और बेहतर ऑप्टिमाइज्ड यूजर इंटरफेस (UI) के साथ आ सकता है। इस फोन को लेकर अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर आइए जानते हैं इसकी कीमत, लॉन्च डेट और अन्य खास बातें।

भारत में Google Pixel 11 Pro Fold की कीमत और लॉन्च डेट

Google Pixel 11 Pro Fold का 16GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज वाला वेरिएंट भारत में ₹1,74,999 से ₹1,89,999 की कीमत रेंज में आ सकता है। इसके अलावा, यह फोन 12 अगस्त, 2026 को ‘Made By Google’ इवेंट में लॉन्च किया जाएगा, जिसकी पुष्टि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कर दी है। हालांकि, अभी तक फोन के कलर वेरिएंट्स के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

Google Pixel 11 Pro Fold: कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

Google Pixel 11 Pro Fold में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) वाला 50MP का प्राइमरी वाइड-एंगल कैमरा, 48MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा और 5x ऑप्टिकल जूम वाला 48MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो शूटर शामिल हो सकता है। इसके अलावा, सेल्फी लेने और वीडियो कॉल करने के लिए, डिवाइस में 10.5MP का कवर सेल्फी कैमरा और 10.5MP का इनर सेल्फी कैमरा भी हो सकता है।

स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो, इस फोन 6.5-इंच का OLED इनर डिस्प्ले और 8.5-इंच का LTPO OLED आउटर डिस्प्ले हो सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस के साथ आएगा। परफॉर्मेंस के लिए यह फोन 2nm प्रोसेस पर बने Google Tensor G6 चिपसेट के साथ आ सकता है। इसके अलावा, यह स्मार्टफोन Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल सकता है।

पावर के मामले में, Pixel 11 Pro Fold में 4800mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है, जो 30W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 23W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।

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Gift Nifty Indicator: बाजार के लिए क्या आज मंगल होगा दिन, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है संकेत

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में बहुत कम बदलाव के साथ शुरुआत होने की संभावना है। सोमवार को Nifty के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल में CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) की वजह से आई तेजी के बाद GIFT Nifty सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। नए शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले दिन बेंचमार्क इंडेक्स में ज़बरदस्त तेजी देखी गई थी, लेकिन GIFT Nifty से मिल रहे संकेत बताते हैं कि ग्लोबल मार्केट से सपोर्ट मिलने के बावजूद, मार्केट की शुरुआत उस ऑक्शन से तय क्लोजिंग लेवल से नीचे हो सकती है। निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में आने वाले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मॉनेटरी पॉलिसी फ़ैसले और जून तिमाही के जारी नतीजों (अर्निंग्स सीज़न) पर भी कड़ी नज़र रखेंगे।

सुबह करीब 8:10 बजे GIFT Nifty, NSE IFSC पर पिछले सेशन की क्लोजिंग से लगभग 10 अंक नीचे 24,655 पर ट्रेड कर रहा था। इससे सोमवार की जबरदस्त रैली के बाद Nifty 50 की शुरुआत के ज़्यादातर फ़्लैट रहने का संकेत मिलता है। यह शुरुआती स्तर Nifty के 24,774.30 के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल से भी नीचे था, जो क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के पहले दिन से प्रभावित था।

सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार चौथे सेशन में तेज़ी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हुई खरीदारी के सपोर्ट से Sensex 544.39 अंक या 0.70 प्रतिशत बढ़कर 78,639.03 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 390.70 अंक या 1.60 प्रतिशत बढ़कर 24,774.30 पर बंद हुआ।

Wall Street में तेजी, एशियाई बाजारों में गिरावट

मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से ऑयल की कीमतें तेज़ी से गिरीं और रिस्क लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिससे US इक्विटी मार्केट ने अगस्त की शुरुआत मज़बूती के साथ की और ग्लोबल संकेत सपोर्टिव बने रहे। Dow Jones Industrial Average 1.32 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 1.48 प्रतिशत और Nasdaq Composite में 2.13 प्रतिशत की बढ़त हुई।

यह रैली US-Iran संघर्ष में तनाव कम होने के संकेतों के बाद आई। इससे ट्रेज़री यील्ड में भी गिरावट आई और अर्निंग्स व इकोनॉमिक डेटा के लिहाज़ से व्यस्त हफ़्ते से पहले निवेशकों का भरोसा बढ़ा। मंगलवार को ग्लोबल रैली के बाद एशियाई बाज़ारों में पॉज़िटिव लेकिन सतर्क रुख देखा गया। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई, जिसमें दक्षिण कोरिया में 2.1 प्रतिशत तक की तेज़ी का अहम योगदान रहा। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.3 प्रतिशत गिर गया, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स में मामूली बढ़त देखी गई।

तेज गिरावट के बाद तेल की कीमतों में सुधार

पिछले सेशन में भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली सुधार हुआ। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.7 प्रतिशत बढ़कर 84.39 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.7 प्रतिशत बढ़कर 80.95 डॉलर पर पहुंच गया। यह सुधार सोमवार को ब्रेंट क्रूड में 7 प्रतिशत की गिरावट के बाद आया है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक प्रोग्रेस की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट की चिंताओं को कम कर दिया है। हालांकि कीमतों में थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन ये अभी भी पिछले हफ़्ते के हाई लेवल से काफी नीचे हैं।

इंडेक्स पर क्या होनी चाहिए रणनीति 

आज निफ्टी 50 के आउटलुक पर बात करते हुए, रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी 50 ने 24,400 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन (जो 200-दिन के DEMA के बराबर है) को साफ़ तौर पर पार करके अपने तेज़ी वाले स्ट्रक्चर को मज़बूत किया है। यह ब्रेकआउट जारी रिकवरी को और मज़बूत करता है और जल्द ही 25,000–25,200 ज़ोन की ओर बढ़ने का रास्ता खोलता है। नीचे की तरफ़, अगर प्रॉफ़िट-बुकिंग होती है, तो 24,350–24,500 का इलाका तुरंत सपोर्ट का काम कर सकता है।

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी R का मानना ​​है कि बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को आगे बढ़ा रहा है और अपने 20, 50, 100 और 200-दिन के EMA से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है, जो बैंकिंग सेक्टर में लगातार मज़बूती दिखाता है। टेक्निकली, 58,000 ज़ोन से ऊपर लगातार बने रहने से खरीदारी की रफ़्तार बढ़ सकती है और इंडेक्स 58,300–58,500 के इलाके की ओर बढ़ सकता है।

नीचे की तरफ़, 57,300–57,400 का स्तर शॉर्ट-टर्म सपोर्ट का काम करता है, जिसे ठीक नीचे 57,000 के राउंड नंबर का सहारा मिलता है। इंडेक्स को इस दायरे से ऊपर बनाए रखने से तेज़ी का मौजूदा ट्रेंड बना रहता है, जबकि 57,000 से नीचे जाने पर शॉर्ट-टर्म में प्रॉफ़िट-बुकिंग हो सकती है। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक पॉज़िटिव बना हुआ है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

12 अगस्त को लॉन्च होगा Google का ये दमदार फोन, Tensor G6 चिप और 120Hz डिस्प्ले से होगा लैस

Google Pixel 11 सीरीज 12 अगस्त, 2026 को ग्लोबल मार्केट में आने के लिए तैयार है। उम्मीद है कि इस लाइनअप में चार डिवाइस होंगे: Google Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold। बेस वेरिएंट (Google Pixel 11) की बात करें तो इसे लेकर उम्मीदें काफी ज्यादा हैं और फोन के बारे में आ रही अफवाहों से पता चलता है कि यह दमदार हो सकता है।

अगर आप Google Pixel 11 के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर हैं। यहां हमने इस हैंडसेट के बारे में सभी उपलब्ध जानकारी दी है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि नए Pixel 11 मॉडल की कीमत पिछले मॉडल के मुकाबले ज्यादा हो सकती है। इसकी बड़ी वजह बाजार में चल रही चिप की कमी (Chip Crisis) को माना जा रहा है। हालांकि, Google ने अभी तक कीमत या फीचर्स को लेकर आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

Google Pixel 11 का कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

Google Pixel 11 में 6.3 इंच का OLED डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आ सकता है। इसके अलावा, फोन में 3000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिल सकती है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन को आसानी से देखा जा सकेगा। कहा जा रहा है कि इस फोन में Google Tensor G6 प्रोसेसर और 8GB RAM होगी।

वहीं, लीक से यह भी पता चलता है कि इस बार डिवाइस में कम से कम 256GB इंटरनल स्टोरेज मिल सकती है। इसके अलावा, लॉन्च के समय, हमें कई RAM और स्टोरेज वेरिएंट भी देखने को मिल सकते हैं। फोन में पिछले मॉडल की तुलना में बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी हो सकता है।

भारत में Google Pixel 11 की कीमत

कीमत की बात करें तो, Google Pixel 11 की कीमत निश्चित रूप से इसके पिछले मॉडल की तुलना में ज्यादा होगी। इस बारे में अटकलें हैं कि 8GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज वाला यह डिवाइस भारतीय बाजार में लगभग ₹83,999 की कीमत पर उपलब्ध होगा।

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Xiaomi ने लॉन्च की 7-सीटर इलेक्ट्रिक SUV, Kunlun आर्किटेक्चर पर बनी SkyNomad देगी 505Km तक की रेंज

Xiaomi SkyNomad Series: चीन की टेक और EV निर्माता कंपनी Xiaomi ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपनी नई SkyNomad Series SUV को लॉन्च कर दिया है। कंपनी की यह पहली Extended-Range Electric Vehicle (EREV) सीरीज है, जिसे नए Kunlun Architecture प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max इलेक्ट्रिक मोड में 505 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है, जबकि इसकी कुल ड्राइविंग रेंज 1,700 किलोमीटर से भी ज्यादा है। फिलहाल इस इलेक्ट्रिक SUV की प्री-बुकिंग चीन में शुरू हो चुकी है और सितंबर से इसकी डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। अब आइए जानते हैं Xiaomi SkyNomad Series की खासियतों के बारे में।

Xiaomi SkyNomad सीरीज की कीमत और उपलब्धता

Xiaomi ने SkyNomad Series को दो वेरिएंट में पेश किया है। इसका टॉप मॉडल Xiaomi SkyNomad N90 Max है, जो एक 7-सीटर एक्सटेंडेड-रेंज SUV है। चीन में इसकी प्री-सेल कीमत 2,99,900 चीनी युआन (करीब 42.41 लाख रुपये) रखी गई है। वहीं, कंपनी ने इसका एक 5-सीटर ऑल-व्हील-ड्राइव वेरिएंट SkyNomad N70 Max भी लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत 2,59,900 चीनी युआन (करीब 36.75 लाख रुपये) है।

कलर ऑप्शन की बात करें तो, Xiaomi SkyNomad Series को Mountain Green, Valley Blue और Volcanic Gray एक्सटीरियर कलर में पेश किया गया है। वहीं, इसके इंटीरियर में Cream Beige और Mocha Brown कलर ऑप्शन मिलेंगे।

फिलहाल, चीन में अभी दोनों मॉडल्स के लिए प्री-ऑर्डर शुरू हो गए हैं। ग्राहक CNY 1,000 (लगभग ₹14,000) की रिफंडेबल डिपॉजिट राशि देकर किसी भी SUV को बुक कर सकते हैं। इस बुकिंग के साथ ग्राहकों को प्रोडक्शन में प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा, डिलीवरी के समय उन्हें करीब 999 चीनी युआन (लगभग 14,000 रुपये) की कीमत वाला इन-कार डुअल कप होल्डर टेबल भी मुफ्त दिया जाएगा।

हालांकि, Xiaomi ने अभी तक SkyNomad Series को ग्लोबल मार्केट या भारत में लॉन्च करने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

Xiaomi SkyNomad सीरीज के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

Xiaomi का दावा है कि SkyNomad सीरीज नए Kunlun प्लेटफॉर्म पर आधारित उसका पहला प्रोडक्शन मॉडल है। पारंपरिक लेआउट के उलट, इस प्लेटफॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें केबिन का फर्श पूरी तरह से फ्लैट रहता है, सीट रेल्स लंबी होती हैं और इंटीरियर को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। इसे आने-जाने, कैंपिंग, काम या फैमिली ट्रिप जैसे अलग-अलग कामों के लिए कई तरह के लेआउट में बदला जा सकता है, जिससे अंदर ज्यादा जगह मिलती है।

बड़े SkyNomad N90 Max की लंबाई 5,285mm और व्हीलबेस 3,080mm है, जबकि N70 Max की लंबाई 4,960mm और व्हीलबेस 2,950mm है। Xiaomi का दावा है कि सात सीटों वाली N90 Max में यात्रियों के बैठने के लिए 2,760mm तक की जगह और 1,831 लीटर तक का सामान रखने की क्षमता मिलती है।

कंपनी ने इस SUV में पावर-एडजस्टेबल सीटें, चार तक जीरो-ग्रेविटी सीटें, 16-पॉइंट मसाज, हीटिंग, वेंटिलेशन, बिल्ट-इन रेफ्रिजरेटर वाला स्लाइडिंग सेंटर कंसोल और 30 से ज्यादा स्टोरेज कम्पार्टमेंट जैसे फीचर्स दिए हैं।

नई EV में ‘कुनलुन हाइपररेंज’ (Kunlun HyperRange) एक्सटेंडेड-रेंज सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 52kWh से 76kWh तक की बैटरी के विकल्प मिलते हैं। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड में 505km तक की CLTC (चाइना लाइट-ड्यूटी व्हीकल टेस्ट साइकिल) रेंज दे सकती है, जबकि बड़ी N90 Max एक बार चार्ज करने पर 464km तक की रेंज देती है। दोनों SUV में डुअल-मोटर ऑल-व्हील-ड्राइव सेटअप का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह 310kW तक की पीक पावर जेनरेट कर सकता है।

टेक्नोलॉजी की बात करें तो, SkyNomad सीरीज का केबिन Snapdragon 8 Gen 3-बेस्ड डोमेन कंट्रोलर से चलता है। इसमें डुअल 5G कनेक्टिविटी, Wi-Fi 7, छह-स्क्रीन वाला इंफोटेनमेंट सिस्टम, 25-स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम और 6.9-इंच का रियर कंट्रोल डिस्प्ले दिया गया है। Xiaomi ने इसमें अपना Hyper XiaoAi वॉयस असिस्टेंट भी शामिल किया है, जो वॉयस कमांड से केबिन के 11 सीटिंग लेआउट को बदल सकता है।

इस इलेक्ट्रिक SUV में 700 TOPS वाला असिस्टेड-ड्राइविंग प्लेटफॉर्म, LiDAR, 4D मिलीमीटर-वेव रडार और Xiaomi का XLA आर्किटेक्चर पर बना HAD असिस्टेड-ड्राइविंग सिस्टम भी मिलता है।

सेफ्टी के लिहाज से, SkyNomad सीरीज में स्टील-एल्युमीनियम हाइब्रिड बॉडी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें कई स्ट्रक्चरल पॉइंट्स पर 2,200MPa अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील और 12 एयरबैग्स दिए गए हैं। इसमें Xiaomi की नई Armour Scale बैटरी भी है, जिसमें 18-लेयर प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर है। साथ ही, इसमें डुअल टेलगेट रिलीज हैंडल, ट्रिपल-रिडंडेंट डोर हैंडल और 26 ड्राइवर-असिस्टेंस जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।

SkyNomad Series के लॉन्च के साथ Xiaomi की इलेक्ट्रिक व्हीकल रेंज और मजबूत हो गई है। इससे पहले कंपनी के EV पोर्टफोलियो में SU7 सेडान और YU7 SUV जैसे मॉडल शामिल हैं।

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सोना गिरकर ₹1.42 पर आया, चांदी ₹2400 हुई सस्ती, आखिर भारतीय खरीदारों के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव क्या दे रहा संकेत

Gold Silver Price Today: भारत में सोने- चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट की बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में कमजोरी रही। डॉलर में निचले स्तर से रिकवरी के कारण सोने-चांदी की हालिया तेजी को ब्रेक लगा है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, 5 अगस्त की डिलीवरी के लिए सोने का वायदा भाव 0.79% गिरकर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि 4 सितंबर की डिलीवरी के लिए चांदी का वायदा भाव 2400 रुपये यानी 1% गिरकर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे फिसल गया है।

वहीं इंटरनेशनल मार्केट में COMEX गोल्ड फ्यूचर्स 0.39% गिरकर $4,144.40 प्रति औंस पर आ गया, जबकि COMEX सिल्वर फ्यूचर्स 0.22% गिरकर $58.89 प्रति औंस पर आ गया। पिछले सेशन में एक हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद स्पॉट गोल्ड की कीमत में भी थोड़ी गिरावट आई।

कीमतों में गिरावट क्यों?

घरेलू कीमतों में गिरावट काफी हद तक ग्लोबल ट्रेंड्स को दिखाती है। इस हफ्ते की शुरुआत में तेजी के बाद, सोने और चांदी पर दबाव बना क्योंकि अमेरिकी डॉलर जनवरी 2023 के बाद अपनी सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट से उबर गया। मजबूत डॉलर आमतौर पर कीमती धातुओं पर दबाव डालता है क्योंकि यह दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए इन्हें महंगा बना देता है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले के बाद बुलियन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद मुनाफावसूली ने भी गिरावट में योगदान दिया।

गिरावट के बावजूद सोने को क्यों मिल रहा सपोर्ट

हालांकि शुक्रवार 31 जुलाई की गिरावट के बावजूद, सोना 5 महीनों में अपनी पहली मासिक बढ़त दर्ज करने की राह पर है। इसे अमेरिकी मौद्रिक सख्ती (monetary tightening) की उम्मीदों में कमी और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से सपोर्ट मिल रहा है, जिससे सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) के तौर पर सोने की मांग बढ़ी है।

हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने भी इन उम्मीदों को मजबूत किया है कि फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों के फैसलों पर सावधानी से आगे बढ़ सकता है। महंगाई के नरम आंकड़ों और आर्थिक विकास में नरमी के संकेतों ने बुलियन को सपोर्ट दिया है, हालांकि बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर ने बढ़त को सीमित रखा है।

अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP कायनात चेनवाला ने कहा, “कीमती धातुएं एक दायरे में बनी हुई हैं। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में नरमी से सपोर्ट मिल रहा है, जबकि मजबूत डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख (hawkish stance) से तेज बढ़त सीमित हो रही है। सोना और चांदी दोनों ही कई महीनों में अपनी पहली मासिक बढ़त की राह पर हैं।”

भारतीय खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?

देश में सोने और चांदी की कीमतें इंटरनेशनल बुलियन की कीमतों, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और इंपोर्ट से जुड़ी लागतों से प्रभावित होती हैं। नतीजतन, लोकल कीमतें अक्सर ग्लोबल ट्रेंड्स के हिसाब से चलती हैं, हालांकि घरेलू मांग और करेंसी में उतार-चढ़ाव इन बदलावों को बढ़ा या घटा सकते हैं।

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में सोने की फिजिकल मांग पर दबाव बना रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सोने की मांग में सालाना आधार पर 6% की गिरावट आई क्योंकि ऊंची कीमतों ने खरीदारी पर असर डाला। हालांकि, सोने पर कुल कंज्यूमर खर्च वैल्यू के हिसाब से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जबकि त्योहारों और शादियों से जुड़ी खरीदारी के कारण पिछली तिमाही के मुकाबले ज्वैलरी की मांग में सुधार हुआ।

इन्वेस्टर्स को आगे किस पर नज़र रखनी चाहिए?

मार्केट आज बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई की उम्मीदों (इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशन्स) के डेटा पर बारीकी से नज़र रखेगा, ताकि अमेरिकी महंगाई के आउटलुक और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी की दिशा के बारे में नए संकेत मिल सकें।

एनालिस्ट्स को यह भी उम्मीद है कि अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव, ट्रेजरी यील्ड और वेस्ट एशिया में घटनाक्रम निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों के लिए मुख्य कारक बने रहेंगे।

 Silver Price Today: चांदी और हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जान लें अपने शहर का रेट

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Market Insight : FMCG में चुनिंदा निवेश जारी रखें,फ्यूचर टेक वाली डिफेंस कंपनियों पर रहे फोकस

Market Insight : आज शेयर बाजार के लिए अगस्त सीरीज की शुरुआत शानदार रही। बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। मजबूत खरीदारी के दम पर बाजार पूरे दिन हरे निशान में कारोबार करता रहा। सेंसेक्स,निफ्टी अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 889 प्वाइंट चढ़कर 77,655 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 265 प्वाइंट चढ़कर 24,250 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। IT,मेटल और FMCG शेयरों में भी खरीदारी रही। फार्मा और निफ्टी बैंक इंडेक्स बढ़त पर बंद हुए। बैंक निफ्टी 450 प्वाइंट चढ़कर 57,206 पर बंद हुआ। मिडकैप 511 प्वाइंट चढ़कर 62,862 पर बंद हुआ। आज निफ्टी के 50 में से 38 शेयरों में खरीदारी रही। वहीं, सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयरों में खरीदारी आई। जबकि, बैंक निफ्टी के 14 में से 11 शेयरों में तेजी दिखी।

मार्केट आउटलुक

इस बीच मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए कोटक महिंद्रा एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने कहा कि निवेशक अब AI निवेश से IT की ओर जा रहे हैं। टोकन वैल्युएशन की उम्मीद में AI की तेजी आई। आगे IT सेक्टर में कुछ विनर्स होंगे और कुछ लूजर्स होंगे। AI की मदद से प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को फायदा संभव है। तेजी से सस्ते IT प्रोडक्ट बनाने वाले को फायदा होगा।

सस्ते दाम पर तेजी से प्रोडक्ट देने वाली कंपनियों को ही होगा फायदा

पहली तिमाही के नतीजों पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अभी तक ज्यादातर कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे हैं। लार्जकैप से बेहतर मिड-स्मॉलकैप के नतीजे रहे हैं। सस्ते दाम पर तेजी से प्रोडक्ट देने वाली कंपनियों को ही फायदा होगा। वेस्ट एशिया संकट के बीच बड़ी दिक्कतें नहीं आईं है। यह हमारे लिए काफी अच्छा संकेत है।

Market View : फार्मा शेयरों में जारी रहेगी तेजी, शॉर्ट टर्म में बंपर कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

FMCG के लिए समय बदला

FMCG के लिए समय बदल गया है। लिस्टेड FMCG कंपनियां प्रोडक्ट इनोवेशन में पिछड़ गई हैं। FMCG कंपनियों के लिए 3-6 महीने चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। पहले FMCG कंपनियों में ग्रोथ अच्छी रहती थी FMCG कंपनियां से नया प्रोडक्ट नहीं ला रही है। FMCG में चुनिंदा निवेश जारी रखें।

फ्यूचर टेक वाली डिफेंस कंपनियों पर फोकस करना बेहतर रणनीति

मौजूदा जियोपॉलिटिकल माहौल में सभी देशों को डिफेंस खर्च बढ़ाना ही होगा। लोकल और ग्लोबल मार्केट तक डिफेंस प्रोडक्ट का पहुंचना और मजबूत सप्लाई चेन जरूरी है। दुनिया में डिफेंस का खर्च बढ़ता ही रहेगा। फ्यूचर टेक वाली डिफेंस कंपनियों पर फोकस करना बेहतर रहेगा। घरेलू के साथ एक्सपोर्ट वाली डिफेंस कंपनियां बेहतर नजर आ रही हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Realme C100i के लॉन्च से पहले लीक हुए फीचर्स, 7000mAh बैटरी और 2 कलर ऑप्शन के साथ आएगा फोन

भारत में Realme C100i के लॉन्च से पहले ही इसके वेरिएंट्स और कलर ऑप्शन की जानकारी लीक हो गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह अपकमिंग फोन दो RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन के साथ-साथ दो कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। रिपोर्ट में भारतीय वर्जन के मॉडल नंबर का भी जिक्र है और बताया गया है कि यह फोन ग्लोबल मार्केट में पहले से उपलब्ध वेरिएंट से कुछ अलग है। फिलहाल, Realme ने अभी तक इस फोन की कीमत या लॉन्च की जानकारी नहीं दी है, और यह भी साफ नहीं किया है कि भारतीय मॉडल में इंटरनेशनल मॉडल जैसा ही हार्डवेयर होगा या नहीं।

Realme C100i भारत में दो वेरिएंट और दो कलर ऑप्शन में हो सकता है लॉन्च

XpertPick की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लॉन्च होने वाले Realme C100i का मॉडल नंबर RMX5399 हो सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी इस फोन को दो स्टोरेज (4GB + 64GB और 4GB + 128GB) वेरिएंट में पेश कर सकती है। इसके अलावा, इस फोन को दो कलर ऑप्शन Skyline Silver और Midnight Black में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि Realme C100i, जो पहले से ही कुछ देशों में उपलब्ध है, उसका मॉडल नंबर RMX5377 है, जबकि भारतीय वर्जन की पहचान RMX5399 के तौर पर की गई है। हालांकि, अभी तक इस बात का कोई संकेत नहीं है कि क्या Realme भारत में लॉन्च होने वाले वर्जन के लिए वही हार्डवेयर इस्तेमाल करेगा या नहीं।

वहीं, अगर भारत में आने वाला मॉडल ग्लोबल वेरिएंट जैसा ही हुआ, तो Realme C100i में 6.8 इंच का HD+ IPS LCD डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। परफॉर्मेंस के लिए इस फोन में Unisoc T7250 चिपसेट दिया जा सकता है, जिसे LPDDR4x RAM और eMMC 5.1 स्टोरेज के साथ जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, फोन में पावर के लिए 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है, जो 15W चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।

इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि Realme में रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) चल रही है, जिसकी वजह से इसके स्मार्टफोन लॉन्च की रफ्तार धीमी हो गई है। पब्लिकेशन का कहना है कि कंपनी बजट डिवाइस को प्राथमिकता देती दिख रही है और हालिया रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि इस साल GT सीरीज का कोई फ्लैगशिप फोन लॉन्च नहीं हो सकता है। हालांकि, Realme ने अभी तक अपने अपकमिंग प्रोडक्ट रोडमैप के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी है।

पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि RMX5377 वेरिएंट में Unisoc T615 चिपसेट के साथ 4GB RAM हो सकती है और यह सिर्फ 4G कनेक्टिविटी को सपोर्ट करेगा। इस मॉडल में 720 x 1,570 पिक्सल वाला LCD डिस्प्ले मिल सकता है, जिसकी पीक ब्राइटनेस 900 निट्स तक हो सकती है। इसके अलावा, फोन में 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है, जिसे 8.35mm पतले डिजाइन वाले बॉडी में फिट किया गया है।

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Gift Nifty Indicator: क्रूड में उबाल से क्या लाल होगा बाजार या बुल्स भरेगा आज नई उड़ान, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एशियाई बाज़ार मंगलवार की भारी बिकवाली से उबर गए हैं। US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई की रिपोर्ट से पहले आई उम्मीद ने ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाया है।

सुबह 8:15 बजे GIFT निफ्टी 245 अंक या 1.02 फीसदी बढ़कर 24,230 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 मंगलवार की क्लोजिंग 23,985.35 से काफी ऊपर खुल सकता है। यह सकारात्मक संकेत तब आया है जब मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़्यादातर सपाट कारोबार हुआ था। सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। IT, ऑटो और रियल्टी शेयरों में बढ़त के बावजूद एनर्जी, FMCG, मेटल और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी के कारण बाज़ार में गिरावट रही।

भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में रिकवरी

पिछले सेशन में भारी नुकसान के बाद बुधवार को एशियाई शेयरों में रिकवरी हुई, क्योंकि निवेशक US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई का इंतज़ार कर रहे थे।

मंगलवार को 3.6 प्रतिशत गिरने के बाद MSCI का एशिया-पैसिफिक शेयरों (जापान को छोड़कर) का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.8 प्रतिशत बढ़ा। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि जापान के निक्केई में लगभग 1 प्रतिशत की तेज़ी आई। नैस्डैक फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत बढ़े और यूरोपीय फ्यूचर्स ने भी मज़बूत शुरुआत का संकेत दिया।

यह रिकवरी AI से जुड़े खर्च, चिप-सेक्टर के वैल्यूएशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर बनी चिंताओं के बावजूद हुई, जिनकी वजह से इस हफ़्ते की शुरुआत में टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी।

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण क्रूड में उछाल

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण हाल के दिनों में देखी गई शांति खत्म हो गई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 3 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़कर $81.95 पर पहुंच गया। यह बढ़त तब हुई जब US सेना ने कहा कि ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिन्हें सफलतापूर्वक रोक दिया गया। मंगलवार को अमेरिकी बाज़ार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। एप्पल और दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजे आने से पहले, सेमीकंडक्टर शेयरों में आई गिरावट की भरपाई डिफेंसिव हैवीवेट शेयरों में हुई बढ़त से हो गई।

S&P 500 में 0.21 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.03 प्रतिशत चढ़ा। नैस्डैक कंपोजिट 0.22 प्रतिशत गिरा क्योंकि निवेशक टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर सतर्क रहे।

उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व बुधवार को बाद में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा; बाज़ार में दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना 71 प्रतिशत और 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 29 प्रतिशत मानी जा रही है।

निफ्टी- बैंक निफ्टी पर क्या बनाए रणनीति

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि सोमवार को आई ज़बरदस्त तेज़ी के बाद, कमज़ोर ग्लोबल मार्केट संकेतों के बीच मंगलवार को निफ्टी 50 कंसोलिडेशन के दौर में चला गया। उन्होंने बताया कि डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक छोटी बुलिश कैंडलस्टिक बनाई है, जिसमें ऊपर की तरफ़ एक छोटी शैडो (upper shadow) है। यह 24,000–24,100 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास उतार-चढ़ाव वाली चाल (choppy price action) का संकेत देता है, जो ‘पोलैरिटी में बदलाव’ (change in polarity) के कॉन्सेप्ट के अनुरूप है।

शेट्टी के अनुसार, जारी कंसोलिडेशन के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है। हालांकि, इंडेक्स के एक अहम ओवरहेड रेजिस्टेंस के पास होने की वजह से, उन्हें उम्मीद है कि 24,100 के लेवल के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट की कोशिश करने से पहले, मार्केट में निकट भविष्य में और कंसोलिडेशन या मामूली पुलबैक देखने को मिल सकता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

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IT Stocks: दो दिन में आईटी इंडेक्स 6% चढ़ा, क्या TCS, इंफोसिस जैसी कंपनियों का बुरा दौर खत्म? जानिए एक्सपर्ट्स से

IT Stocks: मंगलवार, 28 जुलाई को एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली के बीच निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। ग्लोबल मार्केट में AI पर होने वाले भारी निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की टेक कंपनियों पर दिखा। हालांकि, भारतीय IT कंपनियां इस दबाव से काफी हद तक बची रहीं, क्योंकि यहां AI पर फोकस करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 6% चढ़ चुका है। इसकी एक बड़ी वजह Jefferies की रिपोर्ट रही, जिसमें ब्रोकरेज ने सेक्टर की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी। यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

भारतीय IT सेक्टर कैसे बचा?

Nexedge Capital के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर गौरव कुलश्रेष्ठ का कहना है कि दुनियाभर में AI को लेकर जो उत्साह ठंडा पड़ा है, उससे भारतीय IT सेक्टर को संभलने का मौका मिला है। हालांकि, उनका मानना है कि बड़ी IT कंपनियों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर खर्च नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर में लंबी तेजी आना मुश्किल है।

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है। इन्हें AI डेटा सेंटर या चिप बनाने वाली कंपनियों की तरह अरबों डॉलर का पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि AI निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर कम पड़ा।

उनका कहना है कि पिछले कई महीनों की गिरावट के बाद IT शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एशियाई हार्डवेयर कंपनियों से पैसा निकालकर भारतीय IT शेयरों में लगाया।

निफ्टी IT इंडेक्स का टेक्निकल आउटलुक

मयंक जैन के मुताबिक, निफ्टी IT इंडेक्स हालिया कारोबारी सत्र में 3.5% से ज्यादा चढ़कर 30,500 के करीब बंद हुआ। कई महीनों की गिरावट के बाद इसमें मजबूत रिकवरी देखने को मिली। इस तेजी के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग हुई।

टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA के ऊपर वापसी कर ली है। 28,600-28,700 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इंडेक्स अभी भी 200-डे EMA यानी करीब 31,800 के नीचे कारोबार कर रहा है। मयंक जैन का कहना है कि 31,800-32,000 का दायरा सबसे बड़ा रेजिस्टेंस है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर ही लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि होगी। फिलहाल रिकवरी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

TCS

जैन के मुताबिक, TCS का शेयर फिलहाल अपने 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, शेयर अभी भी 200 DMA से नीचे है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत डिविडेंड और बेहतर वैल्यूएशन इसे आकर्षक बनाते हैं। वहीं, ट्रेडर्स को 200 DMA के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।

Infosys

मयंक जैन का कहना है कि Infosys का शेयर 20 DMA के ऊपर लौट आया है, लेकिन अभी भी 50 DMA और 200 DMA से नीचे है। कंपनी की मजबूत कैश फ्लो, 4.3% डिविडेंड यील्ड और आकर्षक वैल्यूएशन इसे डिफेंसिव स्टॉक बनाते हैं। हालांकि, शेयर में बड़ी तेजी तभी आ सकती है, जब कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस और बिजनेस आउटलुक बेहतर हो।

HCL Technologies

जैन के हिसाब से बड़े IT शेयरों में HCL Technologies का टेक्निकल सेटअप सबसे मजबूत दिख रहा है। शेयर 20 DMA और 50 DMA के ऊपर बना हुआ है और अब 200 DMA के पास अहम रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अगर शेयर अच्छे वॉल्यूम के साथ इस स्तर को पार कर लेता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।

Tech Mahindra

मयंक जैन के मुताबिक, Tech Mahindra भी 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शेयर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 1,700 रुपये के आसपास मौजूद 200 DMA अभी बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि इस स्तर तक आने वाली छोटी गिरावटें, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकती हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

मयंक जैन का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय IT सेक्टर की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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