यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

UP Textiles Conclave 2026

UP Textiles Conclave 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।

 

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं।

 

प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।

यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी

सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं।

 

पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Samsung ने लॉन्च किया सस्ता Galaxy A07s, 50MP कैमरा और 5,000mAh बैटरी से है लैस, जानें कीमत

साउथ कोरिया की टेक कंपनी Samsung ने चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में अपना नया बजट स्मार्टफोन, Samsung Galaxy A07s लॉन्च किया है। यह नया Samsung स्मार्टफोन अब कंपनी की वेबसाइट पर तीन कलर ऑप्शन और दो RAM व स्टोरेज कॉन्फिगरेशन में खरीदने के लिए उपलब्ध है। बता दें कि Galaxy A07s में MediaTek Helio G सीरीज का चिपसेट और 5,000mAh की बैटरी दी गई है। इसके अलावा, फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का मेन कैमरा शामिल है। साथ ही, इसमें 6.7-इंच की HD+ टचस्क्रीन है, जो 90Hz तक के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है।

Samsung Galaxy A07s की कीमत और उपलब्धता

Samsung Galaxy A07s के बेस वेरिएंट (4GB RAM और 64GB स्टोरेज) की कीमत JOD 119 (लगभग ₹16,000) से शुरू होती है। वहीं, टॉप-एंड 4GB + 128GB RAM और स्टोरेज वाले कॉन्फिगरेशन की कीमत JOD 149 (लगभग ₹20,000) है।

फिलहाल, यह हैंडसेट अभी जॉर्डन में Samsung के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। Samsung Galaxy A07s Black, Green, और Light Violet कलर ऑप्शन में मिल रहा है।

Samsung Galaxy A07s के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Samsung Galaxy A07s एक डुअल-सिम स्मार्टफोन है, जो Android 16 पर आधारित One UI पर चलता है। कंपनी ने इस हैंडसेट के लिए 6 OS अपग्रेड देने का वादा किया है। इसमें 6.7-इंच का HD+ (720 x 1,600 पिक्सल) PLS LCD टचस्क्रीन है, जो 90Hz तक का रिफ्रेश रेट और 16.7 मिलियन कलर्स देता है। टेक कंपनी का दावा है कि यह हैंडसेट धूल और पानी की छींटों से बचाव के लिए IP54 रेटिंग के साथ आता है।

इस नए Samsung फोन में ऑक्टा-कोर MediaTek Helio G99+ चिपसेट दिया गया है, जिसमें 2.0GHz की स्पीड वाले 6 एफिशिएंसी कोर और 2.2GHz की पीक क्लॉक स्पीड वाले दो परफॉर्मेंस कोर हैं। इसके अलावा, फोन में 4GB RAM और 128GB तक की ऑनबोर्ड स्टोरेज है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है।

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy A07s में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP (f/1.8) का प्राइमरी कैमरा है, जो ऑटोफोकस और 10x तक डिजिटल जूम की सुविधा देता है। फोन में 2MP (f/2.4) का रियर डेप्थ सेंसर भी है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए Samsung Galaxy A07s में 8MP (f/2.0) का कैमरा दिया गया है। यह फोन 30 fps तक 1080p रिजॉल्यूशन वाले वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है।

इस फोन में 5,000mAh की बैटरी है, जो USB Type-C पोर्ट के जरिए वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 4G LTE, डुअल-बैंड Wi-Fi, Bluetooth 5.3, GPS, GLONASS, BeiDou, Galileo और QZSS का सपोर्ट भी मिलता है। इसमें मौजूद सेंसर की लिस्ट में एक्सेलेरोमीटर, सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर, एम्बिएंट लाइट सेंसर और प्रॉक्सिमिटी सेंसर शामिल हैं। इसका साइज 167.4 x 77.4 x 7.6mm है और वजन लगभग 188g है।

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GIFT निफ्टी में गिरावट से सेंसेक्स और निफ्टी के लिए सुस्त शुरुआत के संकेत, कच्चा तेल 97 डॉलर के पार

मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है। GIFT निफ्टी फ्लैट या नेगेटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें $97 प्रति बैरल के पार चली गई हैं और अमेरिका-ईरान के बीच लगातार तनाव का असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है। एशियाई बाजार बिना किसी साफ दिशा के कारोबार कर रहे हैं,जबकि सोमवार को अमेरिकी बाजार में छुट्टी के कारण वॉल स्ट्रीट से कोई संकेत न मिलने से भी निवेशक सतर्क रह सकते हैं।

फिलहाल GIFT निफ्टी 23,802 पर ट्रेड कर रहा है। यह पिछले दिन की क्लोजिंग से 25 पॉइंट या 0.1 प्रतिशत नीचे दिख रहा है। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पिछले सेशन की रिकवरी को बनाए नहीं रख पाए। ज़्यादातर सेक्टर में बिकवाली के दबाव के कारण बेंचमार्क इंडेक्स नीचे आ गए। सेंसेक्स 382.62 अंक या 0.50 प्रतिशत गिरकर 76,132.81 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 118.55 अंक या 0.50 प्रतिशत गिरकर 23,779.15 पर बंद हुआ।

बेंचमार्क इंजेक्सों में गिरावट के बावजूद,पिछले सेशन में इंस्टीट्यूशनल फ्लो से भारतीय इक्विटी को कुछ सहारा मिला। 7 सितंबर को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने 280 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने भी 566 करोड़ रुपये का निवेश करते हुए नेट खरीदारी की।

ग्लोबल मार्केट पर एक नजर

निवेशकों की सावधानी के बीच एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुख दिख रहा है। मंगलवार को मिले-जुले आर्थिक आंकड़ो, तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच एशियाई शेयरों में साफ दिशा नहीं है। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.2 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जबकि जापान का निक्केई 225 उतार-चढ़ाव के बाद लगभग 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। दक्षिण कोरिया के कोस्पी ने बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें 1.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

सोमवार को अमेरिकी बाज़ार बंद थे,इसलिए निवेशकों को वॉल स्ट्रीट से कोई नया संकेत नहीं मिला। मंगलवार को एशियाई कारोबार में S&P 500 ई-मिनी फ्यूचर्स में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला प्रदर्शन यह बताता है कि निवेशक जोखिम लेने में सावधानी बरत रहे है। वे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और अमेरिकी मौद्रिक नीति के आउटलुक पर नजर रखे हुए हैं।

ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकी के बाद ब्रेंट क्रूड $97 के पार

मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त जारी है। मध्य पूर्व में लंबे समय तक संघर्ष चलने का खतरा बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका के किसी भी नए हमले का जवाब देने की धमकी दी है,जिससे तनाव बढ़ने और तेल की सप्लाई में रुकावट आने की चिंताएं और बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.35% बढ़कर $97.34 प्रति बैरल हो गया है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.26% बढ़कर $92.63 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

निफ़्टी का टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला प्रदर्शन यह बताता है कि निवेशक जोखिम लेने में सावधानी बरत रहे है। वे तेल की कीमतों को लेकर सतर्क बने हुए है। ऐसे में निफ़्टी का रुख सतर्क से लेकर मंदी वाला (बेयरिश) बना रहेगा। मोमेंटम वापस लाने के लिए इसे 24,000 के ऊपर टिके रहने की ज़रूरत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,750-23,700 पर है और उसके बाद 23,600 पर बड़ा सपोर्ट है।

 

Market View : निफ्टी में उछाल पर बिकवाली की रणनीति करेगी काम, ट्रेडर इस ऑटो शेयर में बना सकते हैं अच्छा पैसा

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Trend : सेंसेक्स और निफ्टी के लिए GIFT निफ्टी से कमजोर संकेत, तेल की कीमतों में तेजी से ठंडा पड़ा जोश

GIFT Nifty Trend : सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के हल्की गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी कमजोर शुरुआत के संकेत दे रहा है। एशियाई बाजारों में अच्छी बढ़त के बावजूद,कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं। अमेरिका की मजबूत जॉब्स रिपोर्ट ने इस महीने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं। इससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

फिलहाल GIFT निफ्टी 47 अंक या 0.2 प्रतिशत गिरकर 23,963 पर ट्रेड कर रहा है। उधर शुक्रवार को मेटल,ऑयल एंड गैस और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया था। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था।

आज बाजार खुलने से पहले ग्लोबल माहौल मिला-जुला है। अमेरिका में मजबूत जॉब डेटा के बाद एशियाई शेयरों में जबरदस्त तेज़ी आई है,लेकिन इसी रिपोर्ट ने अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की उम्मीदों को भी मज़बूत किया है। रॉयटर्स के मुताबिक बाजार अब 16 सितंबर की बैठक में फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की 58 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं,जबकि अक्टूबर तक ऐसा होने की संभावना 70 प्रतिशत है।

एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार

सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में तेजी है। मज़बूत अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट को ग्लोबल ग्रोथ के लिए अच्छा माना जा रहा है भले ही इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। वहीं,खाड़ी में अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद तेल की कीमतों में हल्की बढ़त हुई। तेहरान ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र की घोषणा करेगा। यह कदम अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तीन टैंकरों पर हमले और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के बाद उठाया गया है।

जापान के निक्केई में 2 प्रतिशत की रिकवरी हुई है। जबकि पिछले हफ़्ते इसमें इतनी ही गिरावट आई थी। वहीं,दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 3 प्रतिशत का उछाल आया है। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.9 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

अमेरिका के बाजारों में कमजोरी

शुक्रवार को मजबूत जॉब्स रिपोर्ट के बाद US शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51 प्रतिशत गिरकर 53,413.60 पर, S&P 500 0.38 प्रतिशत गिरकर 7,718.41 पर और नैस्डैक कंपोजिट 0.29 प्रतिशत गिरकर 26,506.99 पर बंद हुए। ब्याज दरों बढ़ने की आशंका ने बाजार पर अपना असर दिखाया।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड $96 के पार

सोमवार को खाड़ी में अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। पिछले हफ्ते लगभग 10 प्रतिशत की बढ़त के बाद, ब्रेंट क्रूड 0.2 प्रतिशत बढ़कर 96.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.4 ​​प्रतिशत बढ़कर 91.85 डॉलर प्रति बैरल पर दिख रहा है।

ईरान ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करेगा। यह घोषणा अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तीन टैंकरों पर हमला करने और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के बाद की गई है।

4 सितंबर को FIIs ने 3112 करोड़ रुपये के शेयर बेचे

NSE के डेटा के मुताबिक शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3,111.94 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 8,930.12 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

निफ़्टी का टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना ​​है कि निफ़्टी के लिए 24,000-24,200 का दायरा सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस ज़ोन बना रहेगा। जबकि 23,800 अहम सपोर्ट लेवल है। अगर निफ़्टी लगातार 24,200 के ऊपर बना रहता है,तो शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में सुधार हो सकता है। वहीं,23,800 के नीचे जाने पर इंडेक्स 23,600 के स्तर तक गिर सकता है।

 

Stock Market LIVE Updates: GIFT निफ्ट से मिल रहे सपाट शुरुआत के संकेत,अमेरिकी बाजार गिरे,एशियाई बाजारों में तेजी

 

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ISRO Privatisation: निजीकरण की खबरों को ISRO ने ‘बेबुनियाद’ बताया, कहा- हमारी अहमियत बनी रहेगी

ISRO Privatisation: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने निजीकरण की खबरों को खारिज किया है। एजेंसी ने ऐसी अटकलों को ‘बेबुनियाद और गलत’ बताया। ISRO ने कहा कि स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है। लेकिन इससे उसकी भूमिका कम नहीं होगी।

ISRO देश में एडवांस्ड स्पेस रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का मुख्य संस्थान बना रहेगा। राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशन भी उसके पास रहेंगे। अंतरिक्ष विज्ञान, खोज और महत्वपूर्ण स्पेस टेक्नोलॉजी पर भी ISRO काम करता रहेगा।

निजी कंपनियों की एंट्री क्यों बढ़ रही है?

भारत अपने स्पेस सेक्टर में ज्यादा कंपनियों को जोड़ रहा है। इसमें प्राइवेट कंपनियां, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थान और सरकारी कंपनियां शामिल हैं।

ISRO के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि एजेंसी की अहमियत घट रही है। मकसद पूरे स्पेस इकोसिस्टम को बड़ा बनाना है। इससे ISRO को ज्यादा जटिल और नई तकनीकों पर ध्यान देने का मौका मिलेगा। ISRO ने कहा कि बदलाव उसकी भूमिका में नहीं, बल्कि पूरे स्पेस सेक्टर के आकार और काम करने के तरीके में है।

ISRO अब किन कामों पर ज्यादा ध्यान देगा?

ISRO का फोकस अब अगली पीढ़ी की तकनीकों पर और बढ़ेगा। इसमें अत्याधुनिक रिसर्च, मानव अंतरिक्ष उड़ान और नए लॉन्च सिस्टम शामिल हैं। डीप स्पेस और दूसरे ग्रहों से जुड़े मिशन भी अहम रहेंगे। रणनीतिक तकनीकों पर भी ISRO काम करता रहेगा।

इसके अलावा कम्युनिकेशन, नेविगेशन और अर्थ ऑब्जर्वेशन के लिए एडवांस्ड पेलोड बनाए जाएंगे। सेंसर और प्रोपल्शन सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी काम जारी रहेगा।

मच्योर टेक्नोलॉजी बनाएगा प्राइवेट सेक्टर

जो तकनीक पूरी तरह तैयार हो चुकी है, उसका बड़े स्तर पर उत्पादन निजी कंपनियां और सरकारी कंपनियां कर सकती हैं। इसमें मच्योर लॉन्च व्हीकल, नियमित तौर पर बनने वाले सैटेलाइट और दूसरे स्थापित सिस्टम शामिल हैं।

ISRO पहले ही कई तकनीकों को इंडस्ट्री को ट्रांसफर कर चुका है। एजेंसी ने साफ किया कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मतलब यह नहीं है कि वह उस क्षेत्र से हट रही है।

इसका मकसद बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ाना है। इससे कमर्शियलाइजेशन और इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। कंपनियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

ISRO की भूमिका क्या रहेगी?

ISRO के पास मुख्य वैज्ञानिक और रणनीतिक जिम्मेदारियां रहेंगी। वहीं, इंडस्ट्री को तैयार तकनीकों को बड़े स्तर पर बनाने की जिम्मेदारी ज्यादा मिल सकती है। इससे ISRO अपने वैज्ञानिकों और संसाधनों को एडवांस्ड रिसर्च पर लगा सकेगा। दूसरी तरफ, निजी कंपनियां निवेश और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाएंगी।

ISRO ने इस मॉडल को ‘ISRO-led national space ecosystem’ बताया है। यानी ISRO की भूमिका खत्म नहीं हो रही है। बल्कि स्पेस सेक्टर में ज्यादा कंपनियों के आने के साथ उसका फोकस और ज्यादा एडवांस्ड मिशन पर होगा।

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Market Outlook: इस हफ्ते किस ओर मुड़ेगा बाजार; पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमत समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों की चाल भी बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 749.08 अंक या 0.96 प्रतिशत के नुकसान में रहा। वहीं निफ्टी 277.95 अंक या 1.14 प्रतिशत नीचे आया। शुक्रवार, 4 सितंबर को सेंसेक्स 362.57 अंक चढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है, ‘‘इस सप्ताह बाजार वैश्विक मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर संवेदनशील रह सकता है। अमेरिका के उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद अब निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की सितंबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बदलती उम्मीदों पर रहेगी।’’

घरेलू मोर्चे पर विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर नजर रहेगी। मिश्रा के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे, क्योंकि इनका भारत की महंगाई, बाहरी संतुलन और कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा असर पड़ सकता है।

बीते सप्ताह 8 प्रतिशत महंगा हुआ ब्रेंट क्रूड

एनरिच मनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पोनमुडी आर का कहना है कि पिछले सप्ताह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 8 प्रतिशत से अधिक और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत में 9 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिया है। नए हफ्ते में भी तेल की कीमतों पर फोकस रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की धारणा पर लगातार दबाव डाल सकती हैं।

बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर भी होगी। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और ग्लोबल मार्केट के सेंटीमेंट को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड भी महंगाई के आंकड़ों से प्रभावित होगी।

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FPI फिर बने सेलर

भारतीय शेयर बाजार में लगातार 2 महीने बायर रहने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सितंबर के पहले सप्ताह में फिर से सेलर बन गए। इस दौरान उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से 7,443 करोड़ रुपये निकाले। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। FPI ने इससे पहले जुलाई में भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 30,919 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इससे पहले मार्च से जून तक लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

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Refurbished Phone खरीदने से पहले ये 8 चीजें जरूर चेक करें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

Refurbished Phone: भारत और दूसरे ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों की वजह से स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं, इसलिए ज्यादा खरीदार Refurbished स्मार्टफोन की ओर रुख कर रहे हैं। हमेशा की तरह, Apple और Samsung के पहले इस्तेमाल किए गए डिवाइस की बहुत ज्यादा मांग है। आमतौर पर इन फोन्स को दोबारा बेचने से पहले अच्छी तरह जांच, टेस्ट और जरूरत पड़ने पर रिपेयर किया जाता है। रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप कम कीमत में बेहतर या नया हार्डवेयर वाला फोन ले सकते हैं। यानी नए फोन की पूरी कीमत चुकाने के बजाय, आप हाल ही में लॉन्च हुए किसी मॉडल को कम दाम में खरीद सकते हैं। हालांकि, Refurbished फोन खरीदने में कई जोखिम भी होते हैं। खरीदने से पहले यूजर्स को कई बातों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए, जैसे कि सेलर की  विश्वसनीयता, डिवाइस के हार्डवेयर फीचर्स, वारंटी वगैरह।

सुरक्षित Refurbished फोन सेलर कैसे चुनें

अपने इस्तेमाल के लिए Refurbished स्मार्टफोन मॉडल चुनने से पहले ही, आपको एक भरोसेमंद सेलर चुनना होगा। क्योंकि सिर्फ एक भरोसेमंद सेलर ही फोन की हालत, उसकी हिस्ट्री, वारंटी और रिटर्न पॉलिसी के बारे में सही जानकारी दे सकता है।

आमतौर पर सबसे बेहतर विकल्प कंपनी से सर्टिफाइड Refurbished फोन खरीदना होता है। Samsung जैसी बड़ी स्मार्टफोन कंपनियां अपने सर्टिफाइड Refurbished फोन कम कीमत पर बेचती हैं। Samsung के Certified Re-Newed प्रोग्राम से यूजर्स Galaxy S25 Ultra और Galaxy S25 जैसे मॉडल कम कीमत पर पा सकते हैं।

ब्रांड्स की तरफ से सीधे बेचे जाने वाले पुराने (pre-owned) फोन्स की इन-हाउस जांच, फंक्शनल टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर वैलिडेशन की जाती है। कई ब्रांड्स तो बिक्री के लिए लिस्ट करने से पहले डेटा हटा देते हैं और खराब पार्ट्स को ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स से बदल भी देते हैं। इसके अलावा, आप मैन्युफैक्चरर की वेबसाइट पर जाकर उनके ऑफिशियल रिफर्बिश्ड प्रोग्राम के बारे में पता कर सकते हैं और यह पक्का कर सकते हैं कि डिवाइस के साथ वैलिड वारंटी मिल रही है या नहीं। कुछ कंपनियां Refurbished फोन्स खरीदने वालों को अतिरिक्त फायदे और डिस्काउंट भी देती हैं।

इसके अलावा, कोई ऐसा भरोसेमंद रिटेलर भी चुना जा सकता है जो लंबे समय से रिफर्बिश्ड फोन बेचने का काम कर रहा हो। लेकिन खरीदारी करने से पहले रिटेलर से फोन की कंडीशन, ग्रेड और वारंटी के बारे में पूरी जानकारी जरूर लें। फोन खरीदने के बाद उसका इनवॉइस संभालकर रखना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही फोन खरीदने से पहले रिटेलर की रिटर्न और रिप्लेसमेंट पॉलिसी भी अच्छी तरह पढ़ लें।

जो खरीदार पैसे देने से पहले फोन को अच्छी तरह देखना-परखना चाहते हैं, वे Refurbished फोन बेचने वाले स्टोर पर जा सकते हैं। स्टोर पर जाकर आप हैंडसेट, डिस्प्ले, कैमरा और फोन की कुल हालत की जांच कर सकते हैं। साथ ही, खरीदारों को वारंटी, रिटर्न की अवधि और Refurbished के दौरान इस्तेमाल किए गए पार्ट्स की जांच अच्छे से कर लेनी चाहिए। इसके अलावा, ऐसे सेलर से सावधान रहें जो IMEI नंबर या खरीद का बिल देने से मना करते हैं।

Refurbished फोन खरीदने से पहले क्या-क्या चेक करें

खरीद पूरी करने से पहले, फोन को ध्यान से देखें और उसकी पहचान वेरिफाई करें। डिवाइस पर दिख रहे IMEI नंबर को चेक करें और अगर मुमकिन हो, तो उसे बॉक्स या इनवॉइस पर लिखे IMEI नंबर से मिलाएं। भारत में खरीदार ‘Sanchar Saathi CEIR’ सर्विस के जरिए IMEI स्टेटस चेक कर सकते हैं।

वहीं, iPhone खरीदने वालों को यह पक्का करना चाहिए कि सेलर ने अपने Apple अकाउंट से साइन आउट कर लिया है या नहीं। जबकि Android खरीदने वालों को यह चेक करना चाहिए कि पुराना Google अकाउंट हटा दिया गया है या नहीं।

अब अगर आप iPhone खरीद रहे हैं, तो Settings में जाकर Battery Health जरूर चेक करें। Android फोन में भी Settings के अंदर बैटरी की क्षमता की जानकारी मिलती है, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के फोन में यह विकल्प अलग हो सकता है।

Refurbished फोन खरीदने से पहले आप इन चीजों को भी जरूर चेक करें:

  • डिस्प्ले पर स्क्रैच या वर्टिकल लाइन तो नहीं है, यह ध्यान से देखें।
  • कैमरा, स्पीकर और माइक्रोफोन को अच्छी तरह चेक करें।
  • सभी बटन, फिंगरप्रिंट सेंसर या Face ID सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं, यह जांचें।
  • फोन आपके SIM को सपोर्ट करता है या नहीं और आपके लिए जरूरी नेटवर्क बैंड्स को सपोर्ट करता है या नहीं, यह जरूर देखें।
  • सुनिश्चित करें कि फोन को ठीक से रीसेट किया गया है और पिछले मालिक का कोई डेटा उसमें मौजूद नहीं है।
  • फोन खरीदते समय बिल और वारंटी जरूर मांगें।

खरीदार क्लासिफाइड लिस्टिंग और व्यक्तिगत विक्रेताओं पर तभी विचार कर सकते हैं जब वे फोन को खुद देख-परख सकें। पेमेंट करने से पहले, यह पक्का कर लें कि चुना गया फोन अकाउंट-लॉक न हो या उसके खोने या चोरी होने की रिपोर्ट न हो। साथ ही, यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे फोन के लिए पहले से पेमेंट न करें जिसे वे देख-परख नहीं सकते, खासकर तब जब विक्रेता कोई वैध इनवॉइस या मालिकाना हक का सबूत न दे सके।

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Market Technicals : मार्केट का टेक्निकल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर, निफ्टी में उछाल पर बिकवाली का ट्रेंड रहेगा कायम

Market Technicals : ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के चलते शुक्रवार को बाजार में लगातार चार दिनों से चल रही गिरावट थम गई और सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त लेकर बंद हुए। US के नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों से पहले ट्रेडर्स सतर्क रहे। इन आंकड़ों का फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले पर बड़ा असर पड़ सकता है। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 76,515.43 पर बंद हुआ। इंट्राडे में इसने 730.28 अंक यानी 0.95 प्रतिशत उछलकर 76,883.14 का हाई हिट किया।

निफ्टी में 24,000 के अहम साइकोलॉजिकल लेवल के पास बिकवाली का दबाव बना रहा। हालांकि इंडेक्स ने सेशन के दौरान रिकवरी की कोशिश की लेकिन 24,000 के जोन के आसपास आई प्रॉफिट बुकिंग ने एक बार फिर इसकी ऊपर जाने की रफ्तार को सीमित कर दिया। अंत में निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स कल ज़्यादातर समय हरे निशान में रहा और इंट्राडे में 24,000 के स्तर को पार करते हुए 24,005.75 का हाई छुआ। हालांकि,क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में यह बढ़त कुछ कम हो गई। इसके चलते इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।

मोमेंटम इंडिकेटर भी कमजोर

मोमेंटम इंडिकेटर कमजोर बने हुए हैं। RSI 40 के आसपास है,जो सुस्त मोमेंटम और लगातार बने मंदी के दबाव का संकेत है। MACD भी नेगेटिव जोन में है। MACD लाइन सिग्नल लाइन के नीचे है और हिस्टोग्राम नेगेटिव बना हुआ है जो मौजूदा कमजोर मोमेंटम को और मजबूत कर रहा है।

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शॉर्ट-टर्म ट्रेंड के कमजोर बने रहने की संभावना

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि आगे शॉर्ट-टर्म ट्रेंड के कमजोर बने रहने की संभावना है क्योंकि इंडेक्स अभी भी आवरली चार्ट पर 50-EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है। जब तक निफ्टी 24,000-24,200 के जोन के नीचे बना रहेगा,तब तक उछाल पर बिकवाली का सेंटीमेंट बना रह सकता है। वहीं, निचले स्तर पर इसके लिए 23,830 और 23,700 पर सपोर्ट है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि टेक्निकल नजरिए से मार्केट का स्ट्रक्चर अभी भी कमज़ोर बना हुआ है। निफ्टी लगातार एक डिसेंडिंग चैनल में और अपने अहम मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 का लेवल अभी भी तत्काल रेसिस्टेंस जोन बना हुआ है। शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में सुधार के लिए 24,000 के ऊपर की टिकाऊ क्लोजिंग और उसके बाद 24,200 के ऊपर एक मजबूत ब्रेकआउट की जरूरत होगी।

उन्होंने आगे कहा नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,800 का जोन में अहम सपोर्ट बना हुआ है। अगर इंडेक्स 23,800 के नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 23,600 के स्तर तक गिर सकता है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अगले 1 महीने में बैंक निफ्टी में आ सकती है 5000 अंकों की तेजी, अगले 12 महीने में डबल हो सकता है सीएनएक्स आईटी

बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए केडियानॉमिक्स के फाउंडर सुशील केडिया ने कहा कि बाजार में इस समय पैसा बनाने का टाइम आ गया है। स्वर्ग जाने का रास्ता नरक जैसा दिखता है और नर्क में जाने का रास्ता स्वर्ग जैसा दिखता है। लोग जब शेयर बाजार में सबसे ज्यादा खुश होते हैं तो नर्क की शुरुआत वहीं होती है। अभी जो लोगों के मन में नर्क जैसे हालात बने हुए यही मार्केट का बॉटम है। अब यहीं से स्वर्ग जाने का रास्ता खुलेगा। एक बात ध्यान में रखें की रुपया-डॉलर और भारतीय बाजार का संबंध बड़ा विचित्र सा है।

लॉन्ग रन में डॉलर के मुकाबले भारत की करेंसी कमजोर होती रही है और शेयर मार्केट बढ़ता रहा है। इस गिरावट में रुपया जब भी मजबूत होता है। बाजार बढ़ जाता है। जब भी रुपए में 10% की गिरावट आई है। मार्केट में -5% से लेके प्लस 5% तक का रिटर्न मिला है। लेकिन जब रुपया 10% मजबूत होता है तो निफ्टी में 20 से 25% तक की तेजी देखने को मिली है। अब डॉलर टूटने को कगार पर है। ऐसे में आगे हमारे बाजारों को रुपए में मजबूती का फायदा मिलेगा।

ग्लोबल मार्केट पर नजर डालें तो अब बाजार में तेजी का माहौल बन गया है। लेकिन अभी बाजार में अभी टुकड़े-टुकड़े में खेलना होगा। पर अब वो हालात बन गए हैं जिसमें अच्छी कमाई हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय बैंक निफ्टी की दिशा ज्यादा साफ दिख रही है। अगले कुछ ही दिनों में निफ्टी की स्थिति भी साफ हो सकती है। लेकिन अभी के लिए कहा जा सकता है कि एक से सवा महीनें में बैंक निफ्टी में 5000 अंकों की तेजी आ सकती है।

अदाणी ग्रुप के शेयरों पर बात करते हुए सुशील केडिया ने कहा कि अदाणी एंटरप्राइज और अदाणी पोर्ट पर उनकी शॉर्ट करने की सलाह होगी। वहीं, अदाणी पावर और एनडीटीवी में लॉन्ग बेट है। इनमें बने रहने की सलाह होगी। बजाज ऑटो में भी अब शॉर्ट करने के मौके बन रहे है। बैंक शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एयू बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा आगे धमाका कर सकते हैं। वहीं, एसबीआई और कोटक बैंक नखरे दिखा सकते हैं।

हिंन्दुस्तान यूनीलीवर और टाटा कंज्यूमर यहां से 50-60 फीसदी की तेजी देखने को मिल सकती है। एशियन पेंट्स भी अच्छे करेक्शन के बाद अब भागने को तैयार है। इसमें 30 फीसदी तक की रैली देखने को मिल सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर हम पिछले 30 साल का इतिहास देखें तो पता चलता है कि जब भी रूपया-डॉलर मजबूत होता है तो सबसे ज्यादा रिटर्न एफएमसीजी और आईटी ही देते हैं। अगर मार्केट में तेजी आती है तो सबसे पहले इन्ही सेक्टर्स के शेयर भागेंगे। अगर कोई टीसीएस को 3 साल के नजरिए से खरीदे तो इसमें 7000 रुपए का भाव देखने को मिल सकता है। ट्रेंडिंग के नजरिए से भी इसमें 3200-3300 रुपए का भाव मिल सकता है। इस समय सारे ही आईटी शेयर अच्छे लग रहे हैं। अगर कोई सेक्टोरल इंडेक्स है जो अगले 12 महीनों में डबल हो सकता है तो वह है सीएनएक्स आईटी ही है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Oppo Find X10 भारत में मचाएगा तहलका! BIS सर्टिफिकेशन पर दिखा फोन, फीचर्स भी हुए लीक

Oppo अपनी लेटेस्ट फ्लैगशिप, Oppo Find X10 सीरीज को ग्लोबल मार्केट में लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। खास बात यह है कि Oppo Find X10 पहले ही BIS सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर दिख चुका है, जिसका मतलब है कि यह डिवाइस भारत में लॉन्च होने के लिए तैयार हो रहा है। इसके अलावा, Oppo Find X10 Pro Max भी थाईलैंड के NBTC डेटाबेस पर सामने आया है और इसे TUV मंजूरी भी मिल गई है।

इस सीरीज के भारत-स्पेसिफिक वेरिएंट की बात करें, तो Oppo Find X10 का मॉडल नंबर CPH2911 है। सीरीज के Pro वेरिएंट के बारे में अफवाहें हैं कि कंपनी इसे सिर्फ चीन तक ही सीमित रखेगी। हालांकि, अभी तक Oppo Find X10 Pro Max के भारत में उपलब्ध होने की भी पुष्टि नहीं हुई है। तो चलिए अब, लीक, अफवाहों और अनुमानों के आधार पर इस फोन के बारे में जो भी जानकारी मिली है वह यहां हम आपको बताते हैं।

Oppo Find X10 सीरीज के अनुमानित स्पेसिफिकेशन्स

Oppo Find X10 में 6.59-इंच का 1.5K डिस्प्ले और बहुत पतले बेजेल्स होने की उम्मीद है। इसके अलावा, इस डिवाइस में MediaTek Dimensity 9600 सीरीज या Dimensity 9500 Plus चिपसेट हो सकता है, साथ ही 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज भी मिल सकती है। इसके कई RAM और स्टोरेज वेरिएंट्स भी आ सकते हैं। ऐसी भी खबरें हैं कि इस फोन में 8000mAh की बैटरी होगी और यह 80W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करेगा। यह Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगा और इसमें ColorOS स्किन होगी।

कैमरे की बात करें तो, Oppo Find X10 में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होगा, जिसमें 200MP का पेरिस्कोप सेंसर, 200MP का प्राइमरी सेंसर और 50MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल सेंसर शामिल होगा। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए, इस डिवाइस में 50MP का फ्रंट कैमरा भी हो सकता है। अभी तक डिवाइस की कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उम्मीद है कि Oppo की ओर से आधिकारिक घोषणा होने पर ही इस बारे में और जानकारी मिल पाएगी।

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