नेपाल में चीनी का रेट पहुंचा 120 रुपये किलो! समझिए दशैं-तिहार त्योहार से पहले नेपाली शुगर इंडस्ट्री क्यों दिख रही डंवाडोल

Price of sugar in Nepal: नेपाल के लोगों के लिए दशैं और तिहार जैसे बड़े हिंदू त्योहारों से पहले ही चीनी की मिठास जेब पर बहुत भारी पड़ने लगी है। नेपाल में चीनी की किल्लत रिपोर्ट की जा रही है। खुदरा बाजारों में जो चीनी अबतक 95-100 रुपये बिक रही थी, उसका रेट अब 120 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोग अगर बढ़ी हुई कीमतें चुकाने को तैयार हैं तो भी दुकानों पर चीनी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। नेपाल के न्यूज पोर्टल ‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट की मानें तो नेपाली सरकार इसे लेकर कोई ठोस कदम भी अबतक नहीं उठा पाई है।

आइए समझते हैं कि आखिर नेपाल में अचानक ये चीनी की क्राइसिस क्यों दिखने लगी है और क्या इसका भारत से भी कोई कनेक्शन है या नहीं?

तीन महीने में ही टूटा उद्योगपतियों का वादा, खाली हुए स्टॉक

‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की चीनी सप्लाई काफी हद तक पड़ोसी देश भारत पर निर्भर करती है। जब भारत ने बैशाख के अंतिम सप्ताह में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था तब से ही नेपाली बाजार में चीनी की भारी किल्लत की आशंका पैदा हो गई थी। उस समय नेपाल शुगर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि देश के भीतर चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की कोई बात नहीं है। एसोसिएशन ने यह भी कहा था कि फैक्ट्रियों के स्तर से चीनी की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

उद्योगपतियों के इस आश्वासन के बाद बाजार में फैला डर कुछ हद तक शांत हुआ। सरकार ने भी घरेलू उत्पादन पर भरोसा जताते हुए आयात के फैसलों को आगे बढ़ा दिया। यह वादा तीन महीने से ज्यादा नहीं टिका। अब स्थिति यह है कि जेठ के महीने में पर्याप्त स्टॉक का दावा करने वाले उद्योगपति ही अब अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक बैठकों के दौरान उद्योगपति अब सीधे तौर पर कह रहे हैं कि उनके पास चीनी का स्टॉक समाप्त हो चुका है और अब उनके पास चीनी नहीं बची है।

आयात प्रक्रिया में देरी से पैदा हुआ डर

नेपाल के आयातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और देश के भीतर बढ़ती मांग के बीच तालमेल न बैठ पाने की वजह से ऐसा हो रहा है। अगर सरकार ने समय रहते चीनी आयात की अनुमति नहीं दी और कोटा प्रणाली को लेकर स्पष्ट नीतिगत फैसले नहीं किए तो त्योहारों के चरम पर बाजार में भारी किल्लत और कीमतों में प्रचंड उछाल देखने को मिल सकता है।

ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की बढ़ती कीमतों और कमोडिटी मार्केट में आई अस्थिरता की वजह से चीनी के दाम भी डॉलर में लगातार बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर भारत और अन्य देशों से नेपाल आने वाली चीनी पर पड़ रहा है। व्यवसायियों ने सरकार पर आयात प्रक्रिया में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। आयातकों का तर्क है कि जब भी बाजार में चीनी की कमी की अफवाहें या खबरें फैलती हैं तो उपभोक्ता और खुदरा व्यापारी जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर जमा करने लगते हैं।

भारत से G2G के जरिए 10,000 क्विंटल चीनी मंगाने की तैयारी

बाजार में गहराते संकट और लगातार मिल रही शिकायतों के बीच फूड मैनेजमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड त्योहारों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के साथ ‘G2G’ (सरकार से सरकार) माध्यम के जरिए 10000 क्विंटल चीनी आयात करने की अंतिम तैयारी में है।

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कंपनी के सूचना अधिकारी माधव मिश्रा के मुताबिक पहले चरण में 10,000 क्विंटल चीनी लाई जा रही है और यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यह चीनी बहुत जल्द नेपालगंज सीमा पर पहुंच जाएगी। सरकारी स्तर पर यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि त्योहारों के दौरान लोगों को चीनी की किल्लत का सामना न करना पड़े।

Redmi Note 17 सीरीज की ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म, 10,000mAh बैटरी समेत इन फीचर्स का हुआ खुलासा

Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi ने ऐलान किया है कि Redmi Note 17 सीरीज जल्द ही ग्लोबल मार्केट में दस्तक देने वाली है। कंपनी ने सोमवार को इसकी लॉन्च डेट की जानकारी दी। बता दें कि इस सीरीज के फोन जुलाई में चीन में लॉन्च किए गए थे, और ब्रांड ने Redmi Note 17 के 5G और 4G वेरिएंट भी ग्लोबल लेवल पर पेश किए थे। उम्मीद है कि ग्लोबल लाइनअप में तीन मॉडल होंगे — Redmi Note 17, Note 17 Pro और एक नया Note 17 Pro Max। इनमें से आखिरी वाले (Pro Max) के कई स्पेसिफिकेशन भी अब सामने आ गए हैं।

Redmi Note 17 सीरीज की लॉन्च डेट

Xiaomi ने X पर एक पोस्ट में घोषणा की कि Redmi Note 17 सीरीज को 27 अगस्त को ग्लोबल लेवल पर लॉन्च किया जाएगा। Xiaomi की ग्लोबल वेबसाइट पर एक नई माइक्रोसाइट से Redmi Note 17 Pro Max नाम के एक नए मॉडल के जल्द लॉन्च होने की पुष्टि होती है। डिजाइन की बात करें तो, इस लाइनअप में फोटोक्रोमिक टेक्नोलॉजी होगी। Redmi का कहना है कि इसमें एक नया ‘क्लाउड ब्लश’ एलिमेंट है जो सूरज की रोशनी के साथ रिएक्ट कर सकता है।

आने वाली Redmi Note 17 सीरीज में 6.83 इंच का CrystalRes AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 1.5K रेजोल्यूशन के साथ आएगा। फोन में Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट दिया जाएगा। इसके साथ 24GB तक रैम मिलेगी, जिसमें वर्चुअल रैम का सपोर्ट भी शामिल होगा। Redmi का दावा है कि फोन 72 महीने तक स्मूद परफॉर्मेंस बनाए रखेगा।

माइक्रोसाइट से धूल और पानी से बचाव के लिए IP66 + IP68 + IP69 + IP69K रेटिंग्स का भी पता चलता है। Xiaomi के सब-ब्रांड का कहना है कि उनके फोन SGS और TÜV SÜD दोनों से सर्टिफाइड हैं।

कैमरे की बात करें तो अभी इसके बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी ने कन्फर्म किया है कि Note 17 सीरीज में AI-पावर्ड पोर्ट्रेट एन्हांसमेंट फीचर होगा। ब्रांड द्वारा शेयर किए गए कैमरा सैंपल में f/1.5 अपर्चर, 26mm फोकल लेंथ, 1/60-सेकंड शटर स्पीड और ISO 125 की जानकारी मिलती है।

हालांकि, सबसे खास बात इसकी बैटरी क्षमता है, जो 10,000mAh की है। जानकारी से पता चलता है कि यह Redmi 17 Pro Max के लिए है, जो 100W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा, हालांकि Xiaomi ने कन्फर्म किया है कि वे बॉक्स में पावर एडॉप्टर नहीं देंगे। Redmi Note 17 सीरीज खरीदने पर ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के 2 महीने का YouTube Premium, तीन महीने का Spotify Premium, छह महीने का Google One प्लान, 24 महीने के अंदर एक बार फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और 36 महीने के अंदर एक बार फ्री बैटरी सर्विस मिलेगी।

पिछली रिपोर्ट्स के अनुसार, Redmi Note 17 सीरीज भारत में 18 या 20 सितंबर को लॉन्च हो सकती है। लीक से यह भी पता चलता है कि Redmi Note 17 Pro Max में 50MP (f/1.8) का प्राइमरी रियर कैमरा हो सकता है, साथ ही 8MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल लेंस और सेल्फी व वीडियो कॉल के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा भी हो सकता है। हालांकि, पहले सामने आई जानकारी में फोन में 9,210mAh बैटरी होने की बात कही गई थी।

लेकिन अब ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म होने के बाद, हम उम्मीद कर सकते हैं कि Redmi Note 17 सीरीज के लॉन्च से पहले के दिनों में और भी जानकारी सामने आएगी।

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नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

Gold Silver price: भारत में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। इसकी वजह ग्लोबल मार्केट में मजबूती का ट्रेंड था, जिसमें कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं की मांग को सहारा दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव ₹676 या 0.44% बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹2,270 या 0.96% बढ़कर ₹2.38 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

ग्लोबल स्तर पर, सोने के वायदा भाव लगभग 0.40% बढ़कर $4,394.01 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 1.64% बढ़कर $65.74 प्रति औंस हो गए।

क्यों बढ़ रही कीमतें हैं?

इसका एक मुख्य कारण अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर बदलता नज़रिया है। हाल ही में अमेरिका में महंगाई, रोजगार और कंज्यूमर एक्टिविटी के आंकड़े कमज़ोर रहे हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा और सख्ती बरतने की उम्मीदें कम हो गई हैं। इसका असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है और सोने को इससे सहारा मिला है।

आमतौर पर डॉलर के कमज़ोर होने से सोने को फायदा होता है क्योंकि दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए यह धातु सस्ती हो जाती है। कम ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने को सहारा दे सकती हैं, क्योंकि सोने जैसी ऐसी एसेट (संपत्ति) को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है जिससे कोई रेगुलर इनकम नहीं होती।

भारत के लिए खास वजह क्या है?

घरेलू कीमतें करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी दिखाती हैं। सोमवार (17 अगस्त) को शुरुआती कारोबार में रुपया कमज़ोर होकर लगभग ₹95.59 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपया कमज़ोर होने से सोने और चांदी जैसी इंटरनेशनल कीमत वाली कमोडिटीज़ की ‘लैंडेड कॉस्ट’ (आयात लागत) बढ़ सकती है, जिससे घरेलू कीमतों को और सहारा मिलता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी रुपये पर दबाव रहा है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, WTI क्रूड लगभग $82.83 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि ब्रेंट $89 के आसपास बना हुआ था। गर्ग ने कहा कि डॉलर के कमज़ोर होने और आर्थिक आंकड़े कमज़ोर रहने से फेड द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गईं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने US-ईरान शांति वार्ता के रुकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही कम होने के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताओं की ओर भी इशारा किया।

बता दें कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक और वजह है जो बुलियन (सोना-चांदी) को सहारा दे रही है। US-ईरान शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने और तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा है। ऐसी अनिश्चितता सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की मांग बढ़ा सकती है।

अब आगे क्या करें निवेशक

सोने के लिए, फेडरल रिजर्व का रेट आउटलुक, US डॉलर, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक बने रहेंगे। अगर फेड का रुख नरम (dovish) होता है तो कीमतों को सहारा मिल सकता है, जबकि महंगाई का नया झटका या सख्त (hawkish) पॉलिसी रुख बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

VT मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड, रॉस मैक्सवेल ने कहा कि $4,400-$4,450 प्रति औंस सोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर कीमत $4,500 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है तो तेजी का रुझान (bullish trend) मजबूत हो सकता है, जबकि उन्होंने $4,150-$4,200 प्रति औंस को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट एरिया बताया।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल सोना और चांदी की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंटरनेशनल कीमतें और घरेलू बाजार की स्थितियां मिलकर MCX कीमतों की दिशा तय करती हैं।

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर लगातार बनी मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतें नए हफ़्ते में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही हैं।”

देसाई ने कहा, “भू-राजनीतिक जोखिम और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंताएं बुलियन को और सहारा दे रही हैं।” हालांकि, एनालिस्ट कीमतों में सीधी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हालिया बढ़त के बाद, सोने और चांदी की कीमतों में कुछ ठहराव (कंसोलिडेशन) या मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखी जा सकती है।

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Saptadhara Explained: ‘सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी ने बताया विकसित भारत का 7-सूत्रीय रोडमैप

Saptadhara Explained: सात धाराओं के पवित्र हिंदू विचार से लेकर विकसित भारत के लिए सात-सूत्रीय रोडमैप तक: ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर इसका जिक्र क्यों किया? दरअसल, ‘सप्तधारा’ शब्द असल में ‘सप्त’ (यानी सात) और ‘धारा’ (यानी बहाव या प्रवाह) से मिलकर बना है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसे विकास के एक फ्रेमवर्क के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से बहुत पहले से ही, सात पवित्र धाराओं का यह विचार हिंदू धार्मिक परंपराओं में मौजूद था।

बता दें कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने जो घोषणा की, उसका आधार यही सांस्कृतिक और सभ्यतागत सोच थी। उन्होंने एक नई “सप्तधारा” — यानी ताकत की सात धाराएं — की बात की, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर भारत के सफर को आगे बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की पुरानी अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी भारत अपनी ताकत के लिए सप्त सिंधु के कारण जाना जाता था और तर्क दिया कि अब एक विकसित भारत को ताकत की नई धाराओं की जरूरत है।

तो, सप्तधारा का हिंदू मूल क्या है, और इस शब्द को नीति के संदर्भ में नया अर्थ कैसे मिला है?

हिंदू परंपरा में ‘सप्तधारा’ का क्या अर्थ है?

सबसे बुनियादी स्तर पर, सप्तधारा का अर्थ है ‘सात धाराएं’। हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात की संख्या का विशेष महत्व है—चाहे वह सात ऋषि (सप्तर्षि) हों, सात पवित्र नदियां हों या हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित सात लोक हों।

पद्म पुराण में एक विशिष्ट ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का भी वर्णन मिलता है।

संबंधित अध्याय के अनुवाद के अनुसार, सप्तधारा को एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थान माना जाता था और यह ऋषियों से जुड़ा हुआ था। इस ग्रंथ में पवित्र जल की सात धाराओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें गंगा के सात शुभ रूपों से जोड़ा गया है। इस स्थान का संबंध पांडवों से भी बताया गया है।

पद्म पुराण में सप्तधारा का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सात धाराओं में बहने वाले पवित्र जल को गंगा की पवित्रता, तीर्थ यात्रा और पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों से जोड़ा गया है।

सप्तधारा या सप्तसरोवर नामक स्थानों से जुड़ी अन्य हिंदू परंपराएं भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार में एक स्थानीय मान्यता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हो गई थी ताकि सप्तऋषि (सात प्राचीन ऋषि) बिना किसी व्यवधान के अपनी तपस्या कर सकें।

दूसरे शब्दों में, “सात धाराएं” कोई नई गढ़ी गई उपमा नहीं है। लंबे समय से यह पवित्र प्रवाह, समृद्धि, निरंतरता और किसी शक्तिशाली चीज के विभिन्न दिशाओं में फैलने का प्रतीक रही है।

सप्तधारा और सप्त सिंधु: क्या है इनका संबंध?

पीएम मोदी के भाषण को समझने के लिए यह कड़ी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

‘सप्त सिंधु’ का शाब्दिक अर्थ है “सात नदियां” और यह शुरुआती वैदिक काल से जुड़ा एक प्राचीन भौगोलिक और सांस्कृतिक शब्द है।

पीएम मोदी ने अपनी ‘सप्तधारा’ को पौराणिक ‘सप्तधारा-तीर्थ’ की हूबहू नकल के तौर पर पेश नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने अपने आज के विचार को समझाने के लिए पुरानी ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा का इस्तेमाल एक पुल की तरह किया।

सात ही क्यों?

भारतीय परंपराओं में ‘सात’ का बहुत गहरा महत्व है। सप्तऋषि (सात ऋषि) और सप्तसिंधु (सात नदियां) जैसी अवधारणाएं हैं। साथ ही हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, रीति-रिवाजों और साहित्य में भी सात के समूहों का कई बार जिक्र मिलता है।

इसलिए, यह संख्या पूर्णता और विविधता को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्रतीक है: अलग-अलग धाराएं मिलकर एक बड़ा प्रवाह बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह इस विचार का इस्तेमाल किया। उनकी ‘सप्तधारा’ कोई एक योजना या नया मंत्रालय नहीं है। बल्कि, यह सात हिस्सों वाला एक रणनीतिक ढांचा है। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए जरूरी आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे से जुड़ी, सैन्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मजबूती दे सकते हैं।

PM मोदी की सात ‘सप्तधाराएं’ क्या हैं?

  1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। इसमें पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने से लेकर डिजाइन और तैयार उत्पादों तक हर स्तर शामिल है। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद हिस्सा बनना होगा। उन्होंने तीन जरूरतों पर ज़ोर दिया: लागत, क्वालिटी और स्केल।

उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे मेरे भाइयों और बहनों के लिए, यह एक बड़ मौका है। इस मौके को हाथ से न जाने दें। और इसके लिए, हमें लागत, क्वालिटी और स्केल के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। हमारी फैक्ट्रियां कॉम्पिटिटिव होनी चाहिए। हमारे प्रोडक्ट यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।”

इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार न रहे, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बने।

  1. खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग: दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। यहां जोर सिर्फ खेती से होने वाले उत्पादन को बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेत से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने पर है। पीएम मोदी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), मसालों, फलों और सब्जियों जैसे उत्पादों का जिक्र किया और कहा कि भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केमिकल-मुक्त खेती को बढ़ावा देंगे। दुनिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। और अगर हमारे कृषि उत्पाद हर तरह से ग्लोबल मानकों पर खरे उतरते हैं, तो हम आसानी से दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच पाएंगे।”

इसका मकसद खेती से होने वाले उत्पादन में प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए वैल्यू जोड़ना है, न कि किसानों को मुख्य रूप से कच्चे माल (रॉ-कमोडिटी) के स्तर पर ही छोड़ देना।

  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की है। पीएम मोदी ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत के अनुभव का जिक्र किया और कहा कि देश को अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग लगानी चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती हुई टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन (जिसमें ‘मेड-इन-इंडिया 6G’ भी शामिल है) जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। इसका मुख्य संदेश यह है कि भारत उभरती हुई टेक्नोलॉजी का सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता। बल्कि उसे इनका डेवलपर और निर्यातक भी बनना होगा।

उन्होंने कहा, “मेड-इन-इंडिया दुनिया के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज करनी चाहिए। इस दिशा में हमारे प्रयास कम नहीं होने चाहिए।”

  1. गति शक्ति: चौथी धारा है ‘गति शक्ति’ – यानी रफ्तार और कनेक्टिविटी की ताकत। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, अंदरूनी जलमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इसका मकसद पूरे भारत में लोगों और सामान को लाने-ले जाने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ निर्माण का काम नहीं है। यह भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता) का हिस्सा बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें एयरपोर्ट्स की जरूरत है। हमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की जरूरत है। हमें अपने बंदरगाहों को सिर्फ सामान चढ़ाने और उतारने की जगह के तौर पर नहीं देखना चाहिए। दुनिया भर से जहाजों का वहां आकर रुकना ही काफी नहीं है। हमें अपने बंदरगाहों को ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह-आधारित विकास) और ग्रोथ की दिशा में आगे ले जाना होगा।”

इसलिए, पीएम मोदी ने बिना रुकावट वाली कनेक्टिविटी को देश के बड़े आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा।

  1. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा: पांचवां क्षेत्र डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भी जरूरी हो गई है।

उन्होंने उस जोखिम का जिक्र किया जो तब पैदा होती है जब जरूरी चीजों – जैसे एनर्जी, फर्टिलाइजर, दवाइयां और टेक्नोलॉजी – की सप्लाई पर जियोपॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है। वहीं, इसका समाधान है घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना और ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी विकसित करना, ताकि भारत को एक ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगली जनरेशन की डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करके, हमें ग्लोबल सप्लायर बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा।”

  1. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी:

छठी धारा दो क्षेत्रों को मिलाती है: ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

ग्रीन हिस्से में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। ब्लू हिस्सा भारत की तटरेखा, महासागरों, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। इसका बड़ा मकसद आर्थिक विकास को एनर्जी ट्रांजिशन के साथ जोड़ना और साथ ही भारत की समुद्री क्षमता का इस्तेमाल करना है।

  1. भारत की सॉफ्ट पावर: सातवीं और आखिरी धारा ‘सॉफ्ट पावर’ है।

यहीं पर मोदी की ‘सप्तधारा’ पारंपरिक आर्थिक पैमानों से आगे निकल जाती है। उन्होंने योग, हस्तशिल्प, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव खुद एक आर्थिक और भू-राजनीतिक संपत्ति बन सकता है।

इसका मकसद भारत के उत्पादों, संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ और विचारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को दुनिया तक ले जा सकते हैं। चाहे वह हस्तशिल्प हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हों, हमारी क्रिएटिव दुनिया हो, VFX, एनिमेशन, गेमिंग या डिजिटल कंटेंट हो – भारत क्रिएटिव दुनिया में अपनी ताकत दिखा सकता है। हमें इसे एक ग्लोबल क्षमता के तौर पर विकसित करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा: “भारत के पास वन संपदा का विशाल भंडार है। हमारे यहां 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। इसमें बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे रहे हैं। हमारे पास अपनी सॉफ्ट पावर के जरिए दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित करने का मौका है। हमें दुनिया के सामने अपनी क्षमताओं को दिखाना होगा।”

सप्तधारा के पीछे की सोच क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ की घोषणा को ‘विकसित भारत 2047’ के बड़े लक्ष्य से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि जो काम पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें अब आने वाले पांच से सात सालों में पूरा करना होगा। उन्होंने इस पहल को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार की गति बढ़ाने वाला कदम) भी कहा और सिस्टम, सोच और काम करने की रफ्तार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

इस वजह से ‘सप्तधारा’ सिर्फ सरकार की एक अलग योजना नहीं रह जाती, बल्कि सरकार के विकास के एजेंडे के अगले चरण के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा बन जाती है।

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Gift Nifty Indicator: बुल्स या बीयर्स, आज कौन होगा बाजार पर हावी, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के फ्लैट या मामूली गिरावट के साथ खुलने की उम्मीद है। ग्लोबल मार्केट से अच्छे संकेत मिलने के बावजूद GIFT निफ्टी मामूली गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है। सुबह 7:45 बजे GIFT निफ्टी 15 अंक या 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,444 पर ट्रेड कर रहा था, जो सेंसेक्स और निफ्टी 50 के लिए सुस्त शुरुआत का संकेत है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहने से यह उम्मीद मजबूत हुई है कि फेडरल रिजर्व अगले महीने ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा, जिससे एशियाई बाजारों में तेजी आई और वॉल स्ट्रीट भी बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि, सीजफायर बातचीत के रुकने और ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखने की अमेरिकी धमकियों के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है।

गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र में भारतीय बाजार काफी हद तक फ्लैट बंद हुए, क्योंकि निचले स्तरों पर खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स को अपने इंट्राडे निचले स्तरों से उबरने में मदद मिली। सेंसेक्स 113.61 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 78,079.96 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 40.10 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 24,395.85 पर बंद हुआ।

ब्याज दरों को लेकर चिंता कम होने से एशियाई बाजारों में तेजी

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेजी आई क्योंकि अमेरिकी महंगाई में नरमी के और सबूतों ने इस उम्मीद को मजबूत किया कि फेडरल रिजर्व अपनी सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.5 प्रतिशत बढ़ा, जिससे इंडेक्स लगातार चौथे सप्ताह बढ़त की ओर अग्रसर है, जो मई के बाद से इसकी सबसे लंबी बढ़त की अवधि है।

पिछले महीने की भारी बिकवाली के बाद निवेशकों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ट्रेड पर फिर से दांव लगाने से टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी आई। दक्षिण कोरिया के टेक-हैवी कोस्पी में 1 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि जापान के टॉपिक्स में 0.9 प्रतिशत की तेजी आई। रात भर की रैली के बाद अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स सुस्त रहे; S&P 500 फ्यूचर्स में बहुत कम बदलाव हुआ, जबकि हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई।

वॉल स्ट्रीट में तेजी, S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद

गुरुवार को अमेरिकी शेयरों में तेजी आई क्योंकि प्रोड्यूसर-प्राइस इन्फ्लेशन (उत्पादक-मूल्य मुद्रास्फीति) के आंकड़े कम रहने से कीमतों के दबाव में कमी के सबूत मिले और इस उम्मीद को बल मिला कि फेडरल रिजर्व अगले महीने उधार लेने की लागत (ब्याज दरें) नहीं बढ़ाएगा। प्रोड्यूसर-प्राइस डेटा बुधवार के अपेक्षाकृत कम कंज्यूमर इन्फ्लेशन (उपभोक्ता मुद्रास्फीति) आंकड़ों के बाद आया, जिससे सितंबर में फेड द्वारा दरों को अपरिवर्तित रखने की संभावना मजबूत हुई। S&P 500 में 0.65% की बढ़त हुई और यह 7,798.99 के रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंच गया, जबकि नैस्डैक कम्पोजिट में 0.81% और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.13% की बढ़ोतरी हुई। इस तेजी में टेक्नोलॉजी शेयरों की अहम भूमिका रही, खासकर मेमोरी-चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त देखी गई।

क्रूड में तेजी

शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त हुई। ऐसा तब हुआ जब अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) को अनिश्चित काल तक जारी रखने की धमकी दी, जिससे मध्य पूर्व से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.1% बढ़कर $87.16 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत $81.29 पर लगभग स्थिर रही।

गुरुवार को ग्लोबल डिमांड आउटलुक कमजोर रहने के कारण दोनों बेंचमार्क में 2% से ज्यादा की गिरावट आई थी, जिसके बाद यह मामूली बढ़त देखने को मिली। इस गिरावट के बावजूद, ब्रेंट और WTI दोनों ही साप्ताहिक आधार पर लगभग 4% की बढ़त की राह पर बने रहे।

इंडेक्स पर क्या होनी चाहिए रणनीति

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना ​​है कि बैंक निफ्टी के निकट भविष्य में एक दायरे (रेंज) में रहने की उम्मीद है। जब तक इंडेक्स 57,500–57,400 के सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है, तब तक इसका व्यापक स्ट्रक्चर काफी हद तक स्थिर रहेगा। 57,800–58,000 का ज़ोन तत्काल रेजिस्टेंस बैंड बना हुआ है। 58,000 के स्तर से ऊपर लगातार बने रहने से खरीदारी का मोमेंटम मज़बूत हो सकता है और 58,300–58,500 के स्तर की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।

नीचे की ओर, 57,500 तत्काल सपोर्ट बना हुआ है, जिसके बाद 57,200–57,000 का ज़ोन आता है। मौजूदा रिकवरी स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए 57,400 से ऊपर बने रहना महत्वपूर्ण होगा, जबकि 57,200 से नीचे निर्णायक रूप से टूटने पर नई प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो सकती है और निकट-अवधि का टेक्निकल सेटअप कमज़ोर हो सकता है। कुल मिलाकर, निकट-अवधि का आउटलुक सतर्क और एक दायरे में रहने वाला है, जिसमें 58,000 मुख्य अपसाइड ट्रिगर के रूप में और 57,400–57,200 महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन के रूप में काम कर रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Pova 8 Pro 5G की लॉन्च डेट कन्फर्म, 4,500 निट्स ब्राइटनेस और 6,500mAh बैटरी से होगा लैस

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी ने घोषणा की है कि Pova 8 Pro 5G अगले हफ्ते भारत में लॉन्च किया जाएगा। इस घोषणा के साथ ही कंपनी ने आने वाले स्मार्टफोन के डिजाइन की झलक भी दिखाई है, जिससे यह कन्फर्म हो गया है कि इसके पिछले हिस्से में एक सेकेंडरी डिस्प्ले होगा। इसके अलावा, फोन में मेटल फ्रेम होने की भी जानकारी दी गई है। यह हैंडसेट पहले ही Tecno की ग्लोबल वेबसाइट पर अपनी मुख्य स्पेसिफिकेशन्स, फीचर्स, कलर ऑप्शन और दूसरी जानकारियों के साथ लिस्ट हो चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, Pova 8 Pro 5G को पहले Google Play Console डेटाबेस पर भी देखा गया था, जिससे इसके जल्द आने का संकेत मिला था। बता दें कि ग्लोबल मार्केट में, Pova 8 Pro 5G में MediaTek Dimensity 7000 सीरीज का चिपसेट दिया गया है।

Pova 8 Pro 5G भारत में 18 अगस्त को होगा लॉन्च

गुरुवार को एक प्रेस रिलीज में, टेक कंपनी ने घोषणा की कि Pova 8 Pro 5G को भारत में 18 अगस्त को लॉन्च किया जाएगा। टेक कंपनी ने यह भी बताया है कि आने वाले स्मार्टफोन के पिछले हिस्से में, कैमरा मॉड्यूल के बगल में एक सेकेंडरी डिस्प्ले (जिसे ‘अलाइव मैट्रिक्स डिस्प्ले’ कहा जा रहा है) दिया जाएगा। Pova 8 Pro 5G में दाईं ओर Orange कलर का एक नया बटन होने का भी संकेत मिला है। इसके अलावा, फोन में एक फ्लैट मेटल फ्रेम भी होगा।

बता दें कि फोन के लॉन्च के आस-पास ही इसकी मुख्य स्पेसिफिकेशन और फीचर जैसी और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

Pova 8 Pro 5G के स्पेसिफिकेशन

Pova 8 Pro 5G को Tecno की ग्लोबल वेबसाइट पर पहले ही लिस्ट किया जा चुका है। यहां फोन के स्पेसिफिकेशन, फीचर्स और कलर ऑप्शन की जानकारी दी गई है। ग्लोबल मार्केट में यह फोन Arc White, Graphite Black और Tundra Green कलर में उपलब्ध है।

सॉफ्टवेयर की बात करें तो फोन Android 16 पर आधारित HiOS 16 पर चलता है। इसमें ऑक्टा-कोर MediaTek Dimensity 7400 Ultimate चिपसेट दिया गया है, जिसे 4nm प्रोसेस पर बनाया गया है। इस चिपसेट की अधिकतम क्लॉक स्पीड 2.6GHz तक है। वहीं, ग्राफिक्स के लिए इसमें Arm Mali-G615 MC2 GPU दिया गया है।

स्टोरेज और RAM के मामले में Pova 8 Pro 5G को तीन कॉन्फिगरेशन में पेश किया गया है। इनमें 8GB RAM + 256GB स्टोरेज, 12GB RAM + 256GB स्टोरेज और 12GB RAM + 512GB स्टोरेज शामिल हैं।

इसके अलावा, Pova 8 Pro 5G के ग्लोबल वर्जन में 6.78-इंच (1,208 x 2,644 पिक्सल) का HyperLux AMOLED डिस्प्ले है, जो 144Hz तक का रिफ्रेश रेट, 429 ppi पिक्सल डेंसिटी, 4,500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस, 1.07 बिलियन कलर्स और 93.18% स्क्रीन-टू-बॉडी रेश्यो देता है। वहीं, इसका डायमेंशन 162.48×77.27×7.39mm है और वजन लगभग 189g है।

कैमरे की बात करें तो, Pova 8 Pro 5G में पीछे की तरफ डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन के साथ 50MP का मेन कैमरा और 8MP का अल्ट्रावाइड कैमरा शामिल है। जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 13MP का फ्रंट कैमरा भी है।

इसके अलावा, फोन को पावर देने के लिए इसमें 6,500mAh की बैटरी दी गई है जो 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। साथ ही सुरक्षा के लिए इसमें अंडर-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर भी दिया गया है।

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सोना ₹1.54 लाख के पार, चांदी ₹3600 चढ़ी, निवेशकों को अब किस बात पर करना चाहिए फोकस!

Gold Silver Price: ग्लोबल बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त के चलते भारत में बुधवार 12 अगस्त को सोने-चांदी की कीमतों में तेजी जारी रही। हालांकि अब निवेशक जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर नजर बनाए हुए थे। MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा 0.66% बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि सितंबर डिलीवरी वाली चांदी के वायदा 1.50% बढ़कर ₹2.39 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

घरेलू बुलियन मार्केट में यह बढ़त ग्लोबल स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आई। जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग बनी रही, जबकि चांदी को औद्योगिक मांग की उम्मीदों से अतिरिक्त सहारा मिला।

कीमतों को क्या दे रहा सहारा

सोना निवेशकों के फोकस में बना हुआ है क्योंकि वे जियोपॉलिटिकल जोखिमों का आकलन कर रहे हैं और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के बारे में संकेत पाने के लिए अमेरिका के लेटेस्ट महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया और उसके आसपास शिपिंग से जुड़े नए तनाव ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल की ओर बढ़ गया, जबकि अमेरिकी क्रूड $83 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था।

जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता के समय में अक्सर सोने की मांग बढ़ती है क्योंकि निवेशक इस धातु का इस्तेमाल वैल्यू स्टोर करने और पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए करते हैं।

आज आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों पर कड़ी नजर रखी जाएगी, क्योंकि इनका अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। महंगाई के आंकड़े कम रहने से आसान मॉनेटरी स्थितियों की उम्मीदें मजबूत हो सकती हैं, जबकि उम्मीद से ज्यादा आंकड़े आने पर ब्याज दरों को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाने की संभावना बढ़ सकती है।

सोने से ज्यादा चांदी में बढ़त

बुधवार (12 अगस्त) के घरेलू कारोबार में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें MCX पर सितंबर वायदा में 1.50% की बढ़त देखी गई।

चांदी की मांग दो तरह की होती है । पहला निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक कामों में भी इसका इस्तेमाल होता है। इससे चांदी को सोने की तरह ‘सेफ-हेवन’ वाले कारकों के अलावा मांग का एक अतिरिक्त सहारा भी मिलता है।

और कितनी तेजी संभव

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “सोने और चांदी को लगातार मजबूत सहारा मिल रहा है, जो कीमती धातुओं में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।” देसाई के अनुसार, कीमतें अधिक होने के बावजूद दोनों धातुओं की फिजिकल मांग अच्छी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि निवेश की दिलचस्पी और लगातार औद्योगिक मांग के कारण चांदी में भी तेजी आई है। साथ ही, देसाई ने चेतावनी दी कि बुलियन की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी के बाद, कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन और प्रॉफ़िट-बुकिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश का प्रवाह पॉज़िटिव है, लेकिन इसकी रफ़्तार धीमी है।एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) के ज़रिए निवेश का प्रवाह भी मददगार रहा है, हालांकि इसकी रफ़्तार धीमी हुई है।

मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश का प्रवाह पॉज़िटिव बना रहा, जबकि जुलाई में सिल्वर ETF में निवेश का प्रवाह लगभग ₹1,285 करोड़ रहा, जो जून में ₹4,286 करोड़ था।

इस धीमी रफ़्तार से पता चलता है कि निवेश की मांग खत्म नहीं हुई है, लेकिन नए निवेश की रफ़्तार पिछले महीने की तुलना में कम हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, घरेलू स्तर पर ऊंची कीमतें, दुनिया भर में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतें और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें – ये सभी बातें आने वाले समय में बुलियन की कीमतों के लिए अहम रहेंगी।

Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त, आगे क्या हो सकता है असर?

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

इस दिन लॉन्च होगा Google Pixel 11! मिल सकते हैं ये 5 बड़े अपग्रेड, जानें पूरी डिटेल

Google Pixel 11 सीरीज बस कुछ ही घंटों में ग्लोबल मार्केट में लॉन्च होने वाली है। जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि यह सीरीज इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) के हिसाब से 13 अगस्त को सुबह 3:30 बजे लॉन्च होगी। फिलहाल, Google ने इस इवेंट की पुष्टि कर दी है और इसे एलेक्स कूपर और स्टीफन करी होस्ट करेंगे। ऐसे में अगर आप जानना चाहते हैं कि इस लॉन्च इवेंट में क्या-क्या देखने को मिल सकता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आइए जानते हैं Google Pixel लॉन्च इवेंट में सुंदर पिचाई की तरफ से होने वाली 5 बड़ी घोषणाएं क्या हो सकती हैं।

Google Pixel लॉन्च इवेंट में 5 बड़ी घोषणाओं की उम्मीद

HiLight कैमरा बार: इसे Google के इस साल के सबसे दिलचस्प फीचर्स में से एक माना जा सकता है। यह कैमरा बार में लगा एक नया लाइट वाला एलिमेंट होगा और फ्यूचर में इसे Pixel का खास फीचर कहा जा सकता है। इस बार का इस्तेमाल विजुअल अलर्ट और नोटिफिकेशन जैसे कामों के लिए किया जाएगा।

Google Tensor G6: यह प्रोसेसर 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर आधारित Pixel 11 सीरीज का मुख्य आकर्षण होगा। कहा जा रहा है कि यह चिपसेट अपने पिछले वर्जन की तुलना में ज्यादा बेहतर परफॉर्मेंस देगा।

एक्सक्लूसिव Gemini फीचर: Google की आदत रही है कि वह Pixel 11 सीरीज के लॉन्च के समय अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करता है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि यह कंपनी आम लोगों के लिए कुछ ऐसे Pixel-एक्सक्लूसिव Gemini फीचर लाएगी, जो Pixel 11 सीरीज के डिवाइस को दूसरे फोन के मुकाबले बढ़त दिलाएंगे।

कैमरा में सुधार: ऐसी चर्चा है कि दमदार सेंसर देने के अलावा, Google कुछ खास AI-पावर्ड फोटोग्राफी फीचर्स भी लाने वाला है, ताकि उनके सेंसर दूसरों से अलग और बेहतर दिखें।

इकोसिस्टम: उम्मीद है कि Google इस साल अपनी नई वॉच, फोन, Pixel Tag और दूसरे प्रोडक्ट्स के जरिए इकोसिस्टम के अनुभव को और ज्यादा खास तरीके से पेश करेगा।

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Top Trading Picks : कमजोर बाजार में भी करनी है अच्छी कमाई तो इन दो शेयरों पर लगाएं दांव

Top Trading Picks : 11 अगस्त को ग्लोबल मार्केट से मिल रहे कमजोर संकेतों और बैंकिंग शेयरों पर दबाव के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ खुले हैं। सुबह 9:45 बजे के आसपास सेंसेक्स 341.60 अंक या 0.43% गिरकर 78,200.84 पर और निफ्टी 98.40 अंक या 0.40% गिरकर 24,485.40 पर दिख रहा था। ऐसे में मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए manasjaiswal.com के मानस जायसवाल ने कहा कि पिछले हफ्ते सोमवार को निफ्टी ने एक ट्रायंगुलर फॉर्मेशन का ब्रेकआउट दिया था। उसके बाद अगले पांच सेशन से हमें कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है। लेकिन ध्यान रखें की यह कंसोलीडेशन 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर और जो ट्रायंगुलर फॉर्मेशन था उसके अपर बैंड के ऊपर हो रहा है। ऐसे में अभी तक का ट्रेंड पॉजिटिव लग रहा है।

जब तक निफ्टी 24,350 के आसपास स्थित 20 डे मूविंग एवरेज के ऊपर ट्रेड करता रहेगा, मार्केट का ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। इसलिए अपनी लॉन्ग पोजीशन में बने रहें। हालांकि यह भी सही है कि कंसोलिडेशन हो रहा है, इसलिए फ्रेश खरीदारी आपको केवल 24,700 के ऊपर ही करनी है। अगर 24,700 का आंकड़ा ब्रेक हुआ तो निफ्टी 25,300 की तरफ जाने की कोशिश करेगा। बाजार का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। पोजीशन को 24,350 के स्टॉप लॉस के साथ होल्ड करना चाहिए।

बैंक निफ्टी ट्रेंड

बैंक निफ्टी में भी कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है और यहां पर भी कंसोलिडेशन 20 डे मूविंग एवरेज के ऊपर हो रहा है। ऐसे में जब तक बैंक निफ्टी 57300 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। फ्रेश खरीदारी करनी है तो थोड़ा वेट कर लें। 58100 58100 के ऊपर ही खरीदारी करें। अगर ये लेवल पार हो गए तो उसके ऊपर करीब 1200 से 1300 अंक की तेजी देखने को मिल सकती है।

मानस जायसवाल की टॉप पिक्स

मानस जायसवाल ने कहा कि बाजार में काफी अपॉर्चुनिटीज़ हैं। अगर आप स्टॉक स्पेसिफिक देखें तो सबसे पहला रिकमेंडेशन बीएसई है। बीएसई का शेयर लोअर टॉप लोअर बॉटम बना रहा था। लेकिन कल इसमें कुछ रिवर्सल के साइन देखने को मिले हैं। कैंडलस्टिक चार्ट पर मॉर्निंग स्टार पैटर्न बना है। आरएसआई में भी पॉजिटिव डायवर्जन देखने को मिला। बीएसई शेयर एक बाउंस बैक के लिए तैयार दिख रहा है। इस स्टॉक में करंट लेवल के आसपास, 3549 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 3700 रुपए के पहले और 3700 रुपए के दूसरे टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह होगी।

मानस जायसवाल का आज का दूसरा पसंदीदा स्टॉक है DMART। इस स्टॉक में भी हायर टॉप, हायर बॉटम्स का कंफर्मेशन मिला है। स्टॉक अपने 10-20 डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकला है। यहां पर भी एक बाउंस बैक की उम्मीद दिख रही है। इस शेयर में 3974 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 4200 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह होगी।

 

 

Market Trend : ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमत बाजार के लिए सबसे बड़ा निगेटिव फैक्टर, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:  ग्लोबल मार्केट में बढ़त के बाद, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के हल्की बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार के मूड पर असर डाल सकती हैं। गिफ्ट निफ्टी के संकेत भी बताते हैं कि आज भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स – निफ्टी 50 और सेंसेक्स – की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हो सकती है।

गिफ्ट निफ्टी 24,678 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 37 पॉइंट ऊपर (प्रीमियम पर) था।

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण गिरावट देखी गई, क्योंकि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कोई ठोस जियोपॉलिटिकल समाधान न निकलने से बाजार का मूड कमजोर बना रहा।

सेंसेक्स 455.59 पॉइंट या 0.58% गिरकर 78,499.17 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 65.35 पॉइंट या 0.27% गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ।