GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।

US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold-Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, भारतीय वायदा कारोबार में टूटा भाव, चेक करिए नए रेट्स

Gold-Silver Price Drop Today: भारतीय वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हफ्ते के पहले दिन सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। हाजिर मांग में सुस्ती और निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली के चलते सोने के भाव में ₹2000 से ज्यादा और चांदी में लगभग ₹1950 की बड़ी नरमी दर्ज की गई है।

अगर आप भी सोने या चांदी की खरीदारी या इसमें निवेश की योजना बना रहे हैं, तो जानिए MCX और ग्लोबल मार्केट में आज क्या हैं नए रेट्स।

सोने के रेट में ₹2000 से ज्यादा की गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने के वायदा भाव में तगड़ी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹2,045 या 1.31% टूटकर ₹1,54,236 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इस दौरान कुल 2,680 लॉट के लिए कारोबार हुआ। बाजार जानकारों के मुताबिक, लोकल मार्केट में हाजिर मांग कमजोर पड़ने से बिकवाली का दबाव बढ़ा है जो गिरावट की बड़ी वजह है।

₹1955 घटकर ₹2.40 लाख के करीब पहुंची चांदी

सोने के साथ-साथ चांदी की चमक भी फीकी पड़ी है। निवेशकों द्वारा अपनी पोजीशन काटने से चांदी के वायदा भाव में भारी गिरावट आई। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹1,955 या 0.81% गिरकर ₹2,40,489 प्रति किलोग्राम पर आ गई। इस दौरान कुल 2,004 लॉट का ट्रेड हुआ। जानकारों के मुताबिक, हालिया मुनाफावसूली का सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ा।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुस्ती और घरेलू बाजारों में हाजिर मांग कमजोर रहने से शॉर्ट टर्म में कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का एक नया मौका भी बन सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Samsung Galaxy S26 FE की धांसू एंट्री, 3X जूम और 4,900mAh बैटरी जैसे मिलेंगे फीचर्स

Samsung Galaxy S26 FE को गुरुवार को चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में Galaxy S26 लाइनअप में कंपनी के नए ‘Fan Edition’ के तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। यह फोन अगले महीने की शुरुआत में कंपनी की वेबसाइट के जरिए दुनिया भर में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। Samsung Galaxy S26 FE में Exynos 2000 सीरीज का चिपसेट है, जो 3nm प्रोसेस पर बना है। इस फोन में 4,900mAh की बैटरी है जो वायर्ड फास्ट चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसके अलावा, इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का मेन कैमरा है। अब चलिए फोन के स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में जानते हैं।

Samsung Galaxy S26 FE की कीमत और उपलब्धता

Samsung Galaxy S26 FE की कीमत 8GB RAM और 128GB स्टोरेज वाले बेस वेरिएंट के लिए EUR 799 (लगभग ₹89,000) से शुरू होती है। वहीं, 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत EUR 899 (लगभग ₹1,00,000) है।

इसके अलावा, फोन का टॉप वेरिएंट 8GB RAM और 512GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसकी कीमत EUR 1,099 (लगभग ₹1,22,000) रखी गई है। हालांकि, भारत में Samsung Galaxy S26 FE की कीमत का अभी ऐलान नहीं किया गया है।

फिलहाल, यह नया स्मार्टफोन चुनिंदा ग्लोबल मार्केट्स में 4 सितंबर से Samsung के ऑनलाइन स्टोर के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। बता दें कि फोन को Blueberry, Graphite और Pistachio जैसे तीन कलर ऑप्शन में पेश किया गया है।

Samsung Galaxy S26 FE के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Samsung Galaxy S26 FE एक डुअल-सिम स्मार्टफोन है जो Samsung के लेटेस्ट OneUI 9 पर चलता है, जो Android 17 पर आधारित है। इस हैंडसेट में 6.7-इंच का Full-HD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले है, जो 120Hz तक का रिफ्रेश रेट और 1,900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस देता है। साउथ कोरिया की टेक कंपनी का कहना है कि यह फोन धूल और पानी से बचाव के लिए IP68 रेटिंग के साथ आता है। Samsung Galaxy S26 FE में Exynos 2500 SoC का इस्तेमाल किया गया है, जिसे 3nm प्रोसेस पर बनाया गया है।

इसके अलावा, इसमें 8GB RAM और 512GB तक का ऑनबोर्ड स्टोरेज मिलता है। कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP (f/1.8) का प्राइमरी कैमरा, 123-डिग्री फील्ड ऑफ व्यू वाला 12MP (f/2.2) का अल्ट्रावाइड कैमरा और 8MP (f/2.4) का टेलीफोटो कैमरा शामिल है। टेलीफोटो कैमरा 3x ऑप्टिकल जूम, 30x तक डिजिटल जूम और OIS की सुविधा देता है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 85-डिग्री फील्ड ऑफ व्यू वाला 12MP (f/2.2) का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है।

बैटरी और कनेक्टिविटी

Samsung Galaxy S26 FE में 4,900mAh की बैटरी दी गई है। यह 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 15W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

कनेक्टिविटी के लिए फोन में 5G, 4G LTE, Wi-Fi 6E और Bluetooth 5.4 का सपोर्ट मिलता है। इसमें USB Type-C पोर्ट भी दिया गया है। सिक्योरिटी के लिए फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है।

फोन का डायमेंशन 161.6 x 76.9 x 7.4mm है और इसका वजन करीब 193 ग्राम है।

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Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 31 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और अच्छे ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। सेंसेक्स आज 331 अंक या 0.43 फीसदी बढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 85 अंक या 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ। चौतरफा खरीदारी के दम पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी तेजी आई। BSE 150 मिडकैप 0.16% चढ़ा,जबकि 250 स्मॉलकैप में 0.33% की बढ़त हुई।

बाजार की इस तेजी की मुख्य वजह चुनिंदा IT और बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों में आई जोरदार खरीदारी रही। सेंसेक्स की बढ़त में इन्फोसिस और HDFC बैंक का सबसे बड़ा योगदान रहा। हालांकि,ICICI बैंक ने इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव डाला।

TCS,इन्फोसिस,टेक महिंद्रा,HCL टेक और टाइटन सेंसेक्स की सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं। दूसरी ओर ICICI बैंक,अल्ट्राटेक सीमेंट,एशियन पेंट्स और ITC इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि IT शेयरों में जबरदस्त तेजी की वजह से आज भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। इस सेक्टर को Nvidia की शानदार कमाई और बेहतर आउटलुक से सहारा मिला। इससे AI से जुड़े निवेश के जारी रहने को लेकर भरोसा बढ़ा और एंटरप्राइज़ AI डिप्लॉयमेंट और वर्कफ़्लो इंटीग्रेशन से जुड़ी कंपनियों को फायदा हुआ। हालांकि,निवेशकों की भागीदारी चुनिंदा शेयरों में रही क्योंकि बाजार जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयर की टिप्पणियों पर नजरें बनाए हुए हैं। इससे US में ब्याज दरों के आउटलुक और ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति के बारे में ज्यादा साफ जानकारी मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर, Q1FY27 के नतीजों का दौर काफी हद तक अच्छे नतीजों के साथ खत्म हो रहा है,इसलिए अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे बदलती ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों के बीच अर्निंग ग्रोथ पर रहेगा।

हालांकि घरेलू लिक्विडिटी की अच्छी स्थिति बाजार को स्थिरता दे रही है,लेकिन वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता के विषय हैं,जिससे निवेशक ग्रोथ और कॉर्पोरेट मुनाफे से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर,अश्विनी शमी ने कहा कि अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड के 4.6%–4.7% के 1-साल के हाई के करीब रहने के बावजूद,हाल के हफ्तों में FII का निवेश थोड़ा पॉजिटिव रहा है। हालांकि US में रिस्क-फ्री रेट्स बढ़ने से आमतौर पर उभरते बाजारों में निवेश पर असर पड़ता है। लेकिन निवेश में यह बढ़ोतरी 2 साल से ज्यादा समय तक बाजार के कंसोलिडेशन के बाद भारतीय इक्विटी की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रुझान को दिखाती है। घरेलू रिटेल और DII का मजबूत निवेश बाजार में गिरावट को संभालने में मदद कर रहा है।

बेंचमार्क इंडेक्स एक दायरे में बने हुए हैं। लार्ज-कैप निफ्टी 100 (~20x P/E) की तुलना में स्मॉल और मिड-कैप इंडेक्स (~34x और 30x P/E) का वैल्यूएशन प्रीमियम काफी ज्यादा है,जो अच्छे बॉटम-अप मौके देता है। निकट भविष्य में बाजार का फोकस दूसरी छमाही (H2) की अर्निंग, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI के लिक्विडिटी रुख पर रहने की उम्मीद है। अच्छे वैल्यूएशन के कारण BFSI और फाइनेंशियल सर्विसेज के चुनिंदा शेयरों निवेश के मौके हैं। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर,पावर और बिजनेस सर्विसेज में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं, जिन्हें कैपेक्स (capex) में सुधार और ऑपरेटिंग लेवरेज से फायदा मिल रहा है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि लगातार दो सेशन में गिरावट के बाद आज भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी दिखी। IT शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले लेकिन पॉजिटिव संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ ट्रेड कर करते दिखे। हालांकि,कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,US बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के पॉलिसी आउटलुक को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है।

कल मंथली एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान दिखी भारी उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को दिन के आखिर में होने वाली हलचल को लेकर और सतर्क कर दिया।

आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें और इंस्टीट्यूशनल फ्लो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP,रिसर्च,अजीत मिश्रा ने कहा कि आज शुक्रवार को बाजार में सुस्ती रही और मिले-जुले संकेतों के बीच मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। सपाट शुरुआत के बाद,निफ्टी पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में घूमता रहा और आखिर में 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 0.43% ऊपर 77,264.51 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nvidia के शानदार तिमाही नतीजों और रेवेन्यू के अच्छे आउटलुक के बाद ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी के दम पर IT सेक्टर सबसे आगे रहा। फार्मा और मेटल सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए,जबकि FMCG और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी सुस्ती रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है।

ग्लोबल बाजार से मिले-जुले संकेतों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच निवेशकों का मूड सतर्क बना रहा। अब सबकी नजरें जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर टिकी हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी के लिए 24,100-24,000 के जोन के आसपास की खींचतान बनी हुई है। अगर यह लेवल टूटता है और गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स 23,800–23,650 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 24,200 का लेवल तत्काल रुकावट का काम कर सकता है और उसके बाद 24,300–24,400 का जोन अहम रेजिस्टेंस लेवल होगा।

मौजूदा अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ट्रेडरों को सलाह है कि इंडेक्स को लेकर सतर्क रुख अपनाएं और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करें। निवेशकों को मज़बूत शेयरों और सेक्टर को प्राथमिकता देनी चाहिए और साथ ही रिस्क और पोजीशन मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

10,000mAh बैटरी के साथ नया Redmi फोन लॉन्च! मिलेगा 50MP OIS कैमरा और 120Hz डिस्प्ले, जानें कीमत

Xiaomi ने चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में Redmi Note 17 Pro Max 5G लॉन्च कर दिया है, जिसमें 6.83-इंच का AMOLED डिस्प्ले, Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट और 512GB तक की स्टोरेज दी गई है। इस स्मार्टफोन में OIS के साथ 50MP का मेन कैमरा, 32MP का फ्रंट कैमरा और 100W वायर्ड चार्जिंग वाली 10,000mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी भी दी गई है। अब चलिए जानते हैं फोन के स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में।

Redmi Note 17 Pro Max 5G की कीमत और उपलब्धता

जापान में Redmi Note 17 Pro Max 5G के 8GB + 256GB वेरिएंट की कीमत JPY 79,980 (लगभग ₹47,900) और 8GB + 512GB मॉडल की कीमत JPY 99,980 (लगभग ₹59,900) है। यह Cloudbrush, Purple और Black कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।

Redmi Note 17 Pro Max 5G के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

Redmi Note 17 Pro Max 5G में 6.83-इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जिसका रिजॉल्यूशन 1.5K और रिफ्रेश रेट 120Hz तक है। यह पैनल 3,500 निट्स तक की ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है और इसमें 12-बिट कलर डेप्थ, DCI-P3 कलर गैमट, HDR10+ और डॉल्बी विजन जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसे कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 से सुरक्षा दी गई है और यह 3,840Hz PWM डिमिंग और वेट टच टेक्नोलॉजी 2.0 को भी सपोर्ट करता है।

Redmi Note 17 5G सीरीज के Pro Max वेरिएंट में Snapdragon 6 Gen 5 SoC प्रोसेसर है, जिसके साथ 8GB LPDDR5X RAM और 512GB तक UFS 4.1 ऑनबोर्ड स्टोरेज मिलता है। यह फोन Android 16 पर आधारित Xiaomi के HyperOS 3 पर चलता है और इसमें AI Eraser Pro, AI Reflection Removal, AI Image Enhancement, AI Sky और AI Bokeh जैसे AI फीचर्स दिए गए हैं। फोन Google Gemini फीचर्स को भी सपोर्ट करता है, हालांकि Xiaomi का कहना है कि इनकी उपलब्धता इलाके और सॉफ्टवेयर वर्जन के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

कैमरे की बात करें तो, फोन में OIS के साथ 50MP का प्राइमरी रियर कैमरा और 8MP का अल्ट्रावाइड कैमरा है। रियर कैमरा 30fps पर 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फ्रंट कैमरा भी 30fps पर 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है।

कनेक्टिविटी के लिए फोन में 5G, डुअल सिम, Wi-Fi 6, Bluetooth 6.0 और NFC का सपोर्ट मिलता है। इसमें इन्फ्रारेड ब्लास्टर भी दिया गया है, जिसकी मदद से फोन को कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के रिमोट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

सेंसर की बात करें तो फोन में एक्सेलेरोमीटर, जायरोस्कोप, इलेक्ट्रॉनिक कंपास, प्रॉक्सिमिटी सेंसर और एम्बिएंट लाइट सेंसर दिए गए हैं।

बैटरी और सिक्योरिटी

Redmi Note 17 Pro Max 5G में 10,000mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है और यह 100W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है। यह 27W तक की वायर्ड रिवर्स चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है। सुरक्षा के लिए, इसमें इन-स्क्रीन फिंगरप्रिंट सेंसर और फेशियल रिकग्निशन की सुविधा है।

Redmi का दावा है कि Note 17 Pro Max 5G मॉडल पानी और धूल से बचाव के लिए IP66 और IP68 रेटिंग को पूरा करता है। इसके अलावा, फोन की ऊंचाई 163.44mm, चौड़ाई 78.27mm और मोटाई 8.65mm है, जबकि Cloudbrush वेरिएंट की मोटाई 8.57mm है। इसका वजन 229.5 ग्राम है।

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2030 तक EV सेक्टर में आएंगी 5 करोड़ नौकरियां, 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा मार्केट! नितिन गडकरी का बड़ा दावा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही इस सेक्टर में 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, CII-ITC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित एक समिट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत में अभी 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, “2030 तक भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इससे 2030 तक पांच करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी।”

इस दौरान गडकरी ने भारत की दो सबसे बड़ी टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प की एक्सपोर्ट क्षमता का भी जिक्र किया और कहा कि वे अपने बनाए गए वाहनों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा का एक्सपोर्ट करती हैं।

भारत को और ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बसों की मांग है, लेकिन देश के मैन्युफैक्चरर अभी साल में सिर्फ 50,000-60,000 EV बसें ही बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में सबसे बड़ा बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास ट्रेंड मैनपावर और कॉम्पिटिटिव व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं।

गडकरी ने आगे कहा, “अगले पांच सालों में हमारा लक्ष्य भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में नंबर 1 बनाना है… यह मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।”

उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर का आकार काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर का पद संभाला था, तब इस सेक्टर की वैल्यू 14 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी US के ऑटोमोबाइल सेक्टर की वैल्यू 78 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद चीन 47 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे और भारत 23 लाख करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है।

फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हम अच्छे हाईवे बना रहे हैं… अच्छे रास्ते और उनके विकल्प तैयार कर रहे हैं, और बायो-फ्यूल ही भविष्य है।”

लॉजिस्टिक्स लागत के बारे में गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 8% तक लाना है। उनका तर्क है कि लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से ग्लोबल मार्केट में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) बेहतर होगी।

गडकरी ने कहा कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बैंगलोर की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% हो गई है।

उन्होंने कहा, “सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर 8% करना है, जिससे भारत को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।”

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?

US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।

वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।

सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी

एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।

चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।

क्या रूस से मिलेगा सहारा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।

महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।

ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव

भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।

कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।

POCO F9 Pro और F9 Ultra की लॉन्च डेट कंफर्म! 16GB RAM और 5x Optical Zoom के साथ होगी एंट्री

POCO के फैंस काफी समय से कंपनी की F9 सीरीज के लॉन्च का इंतजार कर रहे हैं। अब कंपनी ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि वह 1 सितंबर 2026 को POCO F9 सीरीज को दुनियाभर में लॉन्च करेगी। कंपनी ने यह भी बताया है कि वह POCO F9 Pro और POCO F9 Ultra को लॉन्च करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि ये दोनों फोन Redmi K100 सीरीज के रीब्रांडेड वर्जन हो सकते हैं, जिसे अभी सिर्फ चीन में लॉन्च किया गया है। यहां हम आपको आने वाले इन स्मार्टफोन्स के बारे में अब तक मिली सभी जानकारी बता रहे हैं।

Poco F9 सीरीज 1 सितंबर को होगी लॉन्च

Xiaomi के सब-ब्रांड POCO ने कंफर्म किया है कि Poco F9 Pro और Poco F9 Ultra को ग्लोबल मार्केट में 1 सितंबर को रात 8 बजे GMT (भारत में 2 सितंबर को रात 1:30 बजे) लॉन्च किया जाएगा। खास बात यह है कि कई लीक्स में दावा किया गया है कि कंपनी स्टैंडर्ड Poco F9 को लॉन्च नहीं करेगी।

Poco F9 सीरीज के कलर और स्पेसिफिकेशन्स

टीजर के मुताबिक, Poco F9 सीरीज को White और Dark Cherry कलर ऑप्शन में लॉन्च किया जाएगा, जो Redmi K100 सीरीज जैसा ही है। हैंडसेट के पीछे ‘Sound by Bose’ की ब्रांडिंग दिख रही है, जिससे पता चलता है कि इसकी ऑडियो ट्यूनिंग US कंपनी के साथ मिलकर की गई है।

स्पेसिफिकेशन की बात करें तो, Poco F9 Pro में 185Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.59-इंच का QHD+ प्लास्टिक OLED डिस्प्ले होने की उम्मीद है। जबकि F9 Ultra में इससे भी बड़ी 6.85-इंच की स्क्रीन हो सकती है, जिसका रिजोल्यूशन 2608 × 1200 पिक्सल होगा।

दोनों फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया जा सकता है। इनमें 16GB तक RAM और 512GB तक स्टोरेज भी मिल सकता है।

हालांकि, Pro मॉडल के प्रोसेसर को लेकर कुछ अनिश्चितता है। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि Poco F9 Pro में Snapdragon 8 Elite Gen 5 का एक खास वर्जन (binned version) इस्तेमाल हो सकता है, जिसे Snapdragon 8 Elite Gen 5 V कहा जा रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि यही चिप चीन में Redmi K100 Pro में भी इस्तेमाल होगी।

कैमरे की बात करें तो, Poco F9 Pro में पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS के साथ 50MP का मेन कैमरा, 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम व OIS वाला 50MP टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

वहीं, Poco F9 Ultra में ज़्यादा बेहतर ज़ूम सेटअप मिल सकता है। इसमें Pro मॉडल जैसा ही 50MP का प्राइमरी कैमरा होने की उम्मीद है, साथ ही 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 5x ऑप्टिकल ज़ूम को सपोर्ट करने वाला एक और 50MP का टेलीफोटो सेंसर भी हो सकता है।

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Hindustan Copper OFS: सरकार 6% तक हिस्सेदारी बेचेगी, ₹514 का फ्लोर प्राइस तय; 1 साल 140% चढ़ा स्टॉक

Hindustan Copper OFS: सरकारी कंपनी Hindustan Copper में भारत सरकार ऑफर ऑफर सेल (OFS) के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर तय किया गया है।

DIPAM के सचिव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। सरकार पहले कंपनी की 3% हिस्सेदारी बेचेगी। अगर इश्यू को ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलता है, तो अतिरिक्त 3% हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के तहत बेची जा सकती है।

सरकार जुटा सकती है ₹3,000 करोड़

अगर ग्रीन-शू ऑप्शन समेत पूरी 6% हिस्सेदारी बिक जाती है, तो ₹514 के फ्लोर प्राइस पर सरकार को करीब ₹3,000 करोड़ मिल सकते हैं। फिलहाल Hindustan Copper में सरकार की हिस्सेदारी करीब 66% है। पूरी 6% हिस्सेदारी बेचने के बाद यह घटकर करीब 60% रह जाएगी।

OFS में 10% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व होगा। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए 25,000 शेयर अलग रखे गए हैं।

मजबूत नतीजों के बाद हिस्सेदारी बिक्री

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जून तिमाही में Hindustan Copper का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹353 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹134 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 81.4% बढ़कर ₹936.5 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹516.4 करोड़ था।

कॉपर की कीमतों में तेजी का फायदा

ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमत पिछले हफ्ते 14,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थी। यह जनवरी के अंत के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था।

कॉपर की कीमतों में लगातार छह हफ्तों तक तेजी रही। सप्लाई की कमी और अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की चिंता कम होने से कॉपर को सहारा मिला।

शेयर भाव से कितना नीचे है फ्लोर प्राइस?

Hindustan Copper के शेयर सोमवार को 0.25% की बढ़त के साथ ₹574.15 पर बंद हुए। इस हिसाब से OFS का ₹514 का फ्लोर प्राइस सोमवार के बंद भाव से करीब 10.5% नीचे है।

पिछले 1 महीने में स्टॉक 17.54% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 140% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Technicals : टेक्निकल एक्सपर्ट्स से जाने कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति, निफ्टी-बैंक निफ्टी में किन लेवल्स पर रहे नजर

Market Technicals : आज बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। बाजार की चाल सुस्त रही। निफ्टी 0.13% की गिरावट के साथ 24,219.05 पर और सेंसेक्स 0.22% की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ। सेक्टर नजरिए से देखें तो मेटल और रियल्टी सेक्टर में बढ़त रही,जबकि डिफेंस,बैंक,सीमेंट और ऑटो सेक्टर में गिरावट देखी गई। निफ्टी 50 में सबसे ज़्यादा बढ़त जेएसडब्ल्यूस्टील, हिंडाल्को और टाटास्टील में रही। वहीं,एसबीआईलाइफ,बजाज फाइनेंस और अदानीपोर्ट्स में गिरावट रही।

पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन से मेटल शेयरों में तेजा देखने को मिल रही है। सप्लाई में दिक्कत,घटते स्टॉक और मज़बूत मांग के कारण स्टील,कॉपर,एल्युमीनियम और जिंक की ग्लोबल कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में गिरावट से भी इस सेक्टर को सहारा मिला है। आज निफ्टी मेटल्स में 1.59% की तेजी आई।

आज हिंदुस्तान जिंक सुर्खियों में रहा क्योंकि सरकार अगले दो हफ्तो में इसमें ऑफर फ़ॉर सेल लाने की योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार 1.5-2% हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4,000-5,000 करोड़ रुपये जुटाने की सोच रही है,जो ऑफर के फ़ाइनल साइज़ और कीमत पर निर्भर करेगा। आज हिंदुस्तान जिंक 2.2% बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, पिछले 3 ट्रेडिंग सेशन में इसमें लगभग 7% की तेजी आई है।

सोने की कीमतों में तेजी से मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम जैसी गोल्ड फ़ाइनेंस कंपनियों को भी फायदा हुआ है। इनके शेयरों में 5.72% और 2.21% से ज्यादा की तेजी आई है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से गोल्ड फ़ाइनेंस कंपनियों को फायदा हो सकता है। इससे गिरवी रखी गई संपत्ति (कोलेटरल) की वैल्यू बढ़ती है,लेंडर की सिक्योरिटी मजबूत होती है और लोन ग्रोथ को भी बढ़ावा मिल सकता है।

एंजेल वन के चीफ मैनेजर-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च,ओशो कृष्ण का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों की वजह से भारतीय इक्विटी मार्केट में बढ़त के साथ शुरुआत हुई और बेंचमार्क इंडेक्स ने एक्सपायरी वाले हफ्ते की शुरुआत जोश के साथ की। हालांकि,बाद में फॉलोअप खरीदारी न होने से शुरुआती तेजी कमज़ोर पड़ गई और इंडेक्स नीचे आ गया,जिससे बुलिश गैप का दोबारा टेस्ट हुआ। इसके बाद, CAS सेशन के बाद निफ्टी ने नुकसान की कुछ भरपाई की और 24200 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा,जिससे सेशन का अंत 0.14% की मामूली गिरावट के साथ हुआ।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो पोजीशन अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। 20-DEMA एक बड़ी रुकावट के तौर पर सामने आ रहा है और लगातार रिजेक्शन का कारण बन रहा है। हालांकि,हाल ही में मंदी के कमजोर पड़ने के संकेतों ने रिवर्सल की उम्मीद जगाई है, लेकिन तेजी या गिरावट की रफ्तार (मोमेंटम)अभी भी धीमी है। बाजार की नजर किसी ऐसे अहम संकेत पर है जिससे खरीदारी में तेजी आए। अगर गिरावट आती है तो 24150-24100 का दायरा तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, जबकि 24050-24000 का जोन एक मजबूत सपोर्ट जोन बना रहेगा।

ऊपर की तरफ,24300 के आसपास स्थित 20-DEMA का जोन रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। अगर इस स्तर के ऊपर बढ़त कायम रहती है तो टेक्निकल सेटअप मजबूत होगा और आने वाले समय में 24500 के स्तर तक की रिकवरी का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल,सतर्कता बरतना ही समझदारी होगी। ट्रेडरों को सलाह है कि जब तक बाजार रुझान साफ न हो जाए,तब तक आक्रामक रुख न अपनाएं। अगस्त माह की एक्सपायरी के दौरान वोलैटुलिटी बढ़ने की भी आशंका है। इसलिए,ट्रेडरों के अनुशासित तरीके से रिस्क मैनेज करते हुए सीमित निवेश करना चाहिए और बाजार के अहम संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।

SBI सिक्योरिटीज में हेड -टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि निफ्टी की गैप-अप ओपनिंग टिक नहीं पाई क्योंकि इंडेक्स पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव बना और दिन चढ़ने के साथ यह नीचे गिरकर 0.14% की गिरावट के साथ 24219 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर निफ्टी ने लोअर विक के साथ एक बेयरिश कैंडल बनाई। चार्ट पर यह लोअर विक मुख्य रूप से इसलिए बना क्योंकि इंडेक्स ने दूसरे हाफ के आखिर में अपने शुरुआती नुकसान का कुछ हिस्सा रिकवर कर लिया था। इंडेक्स को अपने 20-डे EMA के आसपास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और यह नीचे बंद हुआ। ADX इंडिकेटर पर DI-लगातार DI+ से ऊपर बना हुआ है,जो बुल्स पर बेयर्स के लगातार बने दबदबे को दिखाता है।

मिडकैप इंडेक्स ने एक पतली बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसके दोनों तरफ छोटी विक्स थीं। इससे पता चलता है कि इंट्राडे में कोई साफ दिशा नहीं थी। स्मॉलकैप इंडेक्स ने एक बेयरिश कैंडल बनाई जिसमें ऊपर की तरफ एक छोटी विक थी,जो ऊपरी लेवल पर प्रॉफ़िट बुकिंग को दिखाती है। प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद, स्मॉलकैप इंडेक्स मिडकैप और लार्जकैप के मुकाबले बेहतर स्थिति में है,जैसा कि इसके संबंधित रेश्यो चार्ट में बढ़ती रेश्यो लाइन से पता चलता है।

आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24070-24050 के जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है तो इसमें और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23900 और फिर 23750 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24350-24370 के जोन में है।

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बैंक निफ्टी आउटलुक

 सुदीप शाह का कहना है कि  बैंक निफ्टी भी गैप-अप के साथ खुला,लेकिन ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया। दिन के दौरान इसमें तेज गिरावट आई,लेकिन बाद में,खासकर दूसरे हाफ के आखिर में इसमें कुछ रिकवरी हुई और इंडेक्स ने नुकसान की कुछ भरपाई की। आखिरकार,यह 0.41% गिरकर 57526 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक बेयरिश कैंडल बनाई है,जिसमें नीचे की तरफ एक साफ लोअर विक दिख रही है। अगस्त की शुरुआत से ही बैंक निफ्टी 1246 अंकों की रेंज में ही घूम रहा है जो बाजार में अनिश्चितता और साइडवेज रहने के संकेत है। गिरता हुआ ADX भी इस बात की पुष्टि करता है कि बाजार में कोई मजबूत दिशा वाला ट्रेंड नहीं है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57100-57000 जोन में है। अगर यह इस जोन के नीचे बना रहता है,तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56600 और फिर 56200 तक टूट सकता है। ऊपर की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57900-58000 जोन में है।

 

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