India-Myanmar territory: क्या म्यांमार से भारत करेगा अनसुलझे जमीन की अदला-बदली? सीमा विवाद को सुलझाने पर MEA का बड़ा बयान

India-Myanmar territory: भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को लेकर बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीमा के जिन क्षेत्रों का अभी तक सीमांकन नहीं हुआ है, उन्हें लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, भारत सरकार ने अनसुलझे जमीन की अदला-बदली की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि भारत और म्यांमार मणिपुर में अपनी साझा सीमा के एक ऐसे हिस्से को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिसकी सीमा अभी तय नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान इससे जुड़े सवाल पर कहा, “सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन क्षेत्रों पर बातचीत जारी है।” हालांकि, क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान की खबरों ने मणिपुर में नागरिक समाज समूहों के विरोध को जन्म दे दिया है, जिन्हें राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंताएं हैं। चर्चा के तहत आने वाला यह हिस्सा लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में आता है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी (Kabaw Valley) से सटा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा?

अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट (The Diplomat)’ की 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा के बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील जमीन के संभावित आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा गया कि इस सीमांकन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। यह इलाका करीब 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है, जो म्यांमार की काबाव घाटी (Sagaing Region) से सटा हुआ है।

भारत-म्यांमार सीमा कितनी लंबी है?

भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। ये अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह सीमा पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों से होकर निकलती है, जहां कई जनजातीय समुदायों के दोनों देशों में पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इस सीमा में से करीब 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा स्तंभों (Boundary Pillars) के जरिए किया जा चुका है। जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अब भी अनसुलझा है। इनमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी के कुछ हिस्से शामिल हैं।

सीमा पर बाड़ लगाने की योजना

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सीमांकन का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़) का काम पूरा करना है। ताकि अवैध घुसपैठ, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

साल 2024 में केंद्र सरकार ने पूरे 1,643 किलोमीटर लंबे भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को समाप्त करने की घोषणा की थी। 2018 में लागू इस व्यवस्था के तहत सीमा से लगे जनजातीय समुदायों को बिना वीजा 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी।

1967 के समझौते के बाद भी बाकी हैं कुछ विवादित हिस्से

भारत और म्यांमार के बीच वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सीमा 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत तय की गई थी। इसके बावजूद कुछ हिस्सों का सीमांकन आज भी पूरा नहीं हो सका है। सरकार ने साल 2018 में संसद को बताया था कि शेष क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र के माध्यम से किया जाएगा और इसके तहत नौ नए सीमा स्तंभ स्थापित किए जाने हैं।

मणिपुर में मोलचाम सेक्टर (पिलर 64-68), मोरेह सेक्टर (75-79) और चोरो खुन्नौ सेक्टर (88-95) को संवेदनशील माना जाता है। भारत का कहना है कि म्यांमार के साथ कोई व्यापक सीमा विवाद नहीं है। केवल कुछ सीमा स्तंभों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

मणिपुर में शुरू हुआ विरोध

जमीन अदला-बदली की खबरों के सामने आने के बाद मणिपुर के कई नागरिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती है और राज्य की जमीन का कोई हिस्सा म्यांमार को सौंपने की कोशिश की जाती है तो संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।

संगठन ने कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं हो सकती। COCOMI का आरोप है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद राज्य पहले ही अपने ऐतिहासिक क्षेत्र का कुछ हिस्सा खो चुका है। अब किसी भी नई कटौती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से बिना राज्य की जनता की सहमति के कोई फैसला नहीं लेने की मांग की है।

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मामले में बड़ी बातें

  • विदेश मंत्रालय ने केवल सीमा के अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत की पुष्टि की है।
  • जमीन की अदला-बदली को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • मीडिया रिपोर्ट में 1.4 वर्ग मील भूमि के संभावित आदान-प्रदान का दावा किया गया है।
  • प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है।
  • केंद्र सरकार सीमा पर फेंसिंग कर अवैध घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाना चाहती है।
  • मणिपुर के नागरिक संगठनों ने किसी भी संभावित क्षेत्रीय हस्तांतरण का विरोध किया है।

अभ्यास मैच नहीं खेल पाएंगे सांई सुदर्शन पर श्रीलंका जाना लगभग तय

साई सुदर्शन इस सप्ताह के आखिर तक कोलंबो में भारतीय टीम के साथ जुड़ जाएंगे। मंगलवार को रवाना हुई टीम में वह शामिल नहीं थे। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार साई सुदर्शन ‘इस हफ्ते के आखिर तक श्रीलंका जा सकते हैं, जिसका मतलब है कि वह शुक्रवार (सात अगस्त) से शुरू होने वाले तीन दिवसीय वार्म-अप मैच में नहीं खेल पाएंगे।

माना जा रहा है कि वह 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट से काफी पहले टीम के साथ जुड़ जाएंगे। माना जा रहा है कि सुदर्शन के पैर के अंगूठे में हल्की चोट है। हालांकि, उन्होंने बेंगलुरु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में बल्लेबाजी शुरू कर दी है और उम्मीद है कि उन्हें सीओई के मेडिकल स्टाफ से श्रीलंका में टीम के साथ जुड़ने की मंजूरी मिल जाएगी।

सफेद क्रिकेट के शानदार बल्लेबाज सुदर्शन को शुभमन गिल की टेस्ट टीम का अहम सदस्य भी माना जाता है, खासकर नंबर 3 पर। तमिलनाडु और गुजरात के इस बल्लेबाज ने सात टेस्ट मैच खेले हैं और 39 की औसत से 383 रन बनाए हैं, जिसमें तीन अर्धशतक शामिल हैं।

25 जून को साई सुदर्शन (132) के शानदार शतक की बदौलत भारत ए ने श्रीलंका ए के खिलाफ गैर आधिकारिक टेस्ट के पहले दिन चार विकेट पर 333 रन का विशाल स्कोर बनाया था।साई सुदर्शन ने जमकर खेलते हुए 175 गेंदों में 19 चौकों की मदद से 132 रन ठोके थे और विकेटकीपर ध्रुव जुरेल ने 138 गेंदों में पांच चौकों के सहारे नाबाद 68 रन बनाये थे।

वहीं, श्रीलंका पहुंचने के एक दिन बाद बुधवार को भारतीय टीम ने NCC ग्राउंड पर अपना पहला अभ्यास सत्र किया। कोलंबो में 9 अगस्त को तीन दिवसीय वार्म-अप मैच खत्म होने के बाद, टीम पहले टेस्ट के लिए गाले जाएगी। दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), साई सुदर्शन, यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन

Auto ancillary stocks : नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री बाजार को आई पसंद, जानिए ब्रोकरेज की किन शेयरों पर है नजर

Auto ancillary stocks : ऑटो एंसिलरी शेयरों में आज जोरदार तेजी देखने को मिली है। दरअसल ऑटो एंसिलरी के नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री बाजार को पसंद आई है। बुधवार को इंट्रा-डे में ऑटो एंसिलरी कंपनियों के शेयरों में तेज रफ्तार देखने को मिली। BSE पर इनमें 15% तक की बढ़त नजर आई। वित्त वर्ष 2027 के पहली तिमाही के मज़बूत नतीजों और अच्छे आउटलुक के कारण ज्यादातर शेयर अपने मल्टी ईयर हाई पर ट्रेड करते दिखे। में, सुबह 11:42 बजे BSE सेंसेक्स 0.33% बढ़कर 78,687 पर था। एएसके ऑटोमोटिव, बॉश, क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन, गैब्रियल इंडिया, मेनन बेयरिंग्स, मिंडा कॉर्प, प्रिकोल, संसेरा इंजीनियरिंग और यूनिपार्ट्स इंडिया के शेयरों ने बुधवार को इंट्रा-डे ट्रेडिंग में अपने ऑलटाइम हाई को हिट किया।

क्यों दौडे़ ऑटो एंसिलरी शेयर?

ऑटो एंसिलरी शेयरों में तेजी मजबूत नतीजों का असर रही। मदरसन वायरिंग, UNO Minda, ASK ऑटो के अच्छे नतीजे आए हैं। तीनों कंपनियों की ग्रोथ 20% से ज्यादा रही है। इनको प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड का बड़ा फायदा मिला है। इनकी ग्रोथ में EV कारोबार का योगदान बढ़ा है। ASK ऑटो के एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम्स कारोबार में 48% और सेफ्टी कंट्रोल केबल्स कारोबार में 20% ग्रोथ देखने को मिली है।

UNO Minda की कमेंट्री

कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि मजबूत ऑटो प्रोडक्शन और वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर भरोसा है। Q1 के बाद आमतौर पर कंपनी के मार्जिन बेहतर होते हैं। EV कारोबार में मजबूत ग्रोथ और कंपनी की पैठ में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है।

मदरसन वायरिंग की कमेंट्री

कंपनी ने कहा है कि Q1 में EV का आय में योगदान 8.5% रहा। वहीं, FY26 में यह 6.6% था। कॉपर कीमतों में 53% उछाल के बावजूद आय ग्रोथ 37% रही है।

हैप्पी फोर्जिंग की कमेंट्री

कंपनी के मैनेजमेंट को 30% से ऊपर मार्जिन बनाए रखने का भरोसा है। वॉल्यूम ग्रोथ भी अनुमान से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

गोल्डमैन सैच्स ने संसेरा और क्राफ्ट्समैन पर ‘बाय’ रेटिंग के साथ शुरू की कवरेज

Goldman Sachs के एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां सेमीकंडक्टर वेफर फैब्रिकेशन इक्विपमेंट (WFE), डिफेंस, डेटा सेंटर पावर जेनरेशन, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पार्ट्स और एयरोस्पेस जैसी संबंधित सप्लाई चेन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं। इस बदलाव की वजह से कैपेसिटी और स्किल बिल्डिंग (खासकर प्रिसिजन मशीनिंग और टूलिंग के क्षेत्र में) दोनों में निवेश बढ़ रहा है। सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने के लिए ग्लोबल इंडस्ट्रियल/ऑटोमोटिव/सेमीकंडक्टर ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) की पहल इस बिजनेस की ग्रोथ को और सपोर्ट कर रही हैं।

ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि इस सेक्टर की कुछ बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव ला रही हैं और अपने बिजनेज मॉडलों को साइकल प्रूफ बनाने पर फोकस कर रही हैं। ये कंपनियां अपनी प्रोडक्शन क्षमता का लाभ उठाते हुए मुनाफे वाले सेक्टरों में डाइवर्सिफिकेशन कर रही हैं।

Goldman Sachs के एनालिस्ट्स का कहना है कि प्रिसिजन मशीनिंग की ओर बढ़ने से भारतीय ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री का रेवेन्यू बढ़ेगा। इनको 8वें वेतन आयोग और ग्लोबल डेटा सेंटर/सेमीकंडक्टर/डिफेंस/एयरोस्पेस खर्च में बढ़ती हिस्सेदारी जैसे साइक्लिकल फैक्टर से कमाई में आने वाले उछाल का भी फायदा मिलेगा।

गोल्डमैन सैक्स ने संसेरा इंजीनियरिंग (Sansera) और क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन (Craftsman) को BUY रेटिंग देते हुए ₹4,130 और ₹11,600 के टारगेट दिए हैं। वहीं, संवर्धन मदरसन और भारत फोर्ज पर इसने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग के साथ अपनी कवरेज शुरू की है

 

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 6 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

 

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कल बेहद भारी बारिश का अलर्ट: दिल्ली-यूपी से बिहार तक मूसलाधार बरसेंगे बादल! IMD ने इन 25+ राज्यों के लिए जारी की चेतावनी

Heavy Rain Alert: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 अगस्त के लिए देशभर के मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक मानसूनी गतिविधियों के चलते मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहने वाला है। आईएमडी ने देश के 25 से भी अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।

इन राज्यों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 6 अगस्त को देश के कई इलाकों में अत्यधिक तेज बारिश हो सकती है। मैदानी और तटीय इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भारी जलभराव और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से गंगातटीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड, कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र तथा केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन राज्यों के प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार समेत मैदानी राज्यों का हाल

उत्तर और मध्य भारत के मैदानी भागों में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी बादलों की आवाजाही के साथ मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। वहीं दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

IMD Weather

अंडमान-निकोबार में 60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल का खतरा

तटीय और द्वीप क्षेत्रों में समुद्री मौसम काफी आक्रामक रहने वाला है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने द्वीप क्षेत्र में रहने वाले लोगों और मछुआरों को समुद्र तटों और खुले इलाकों से दूर रहने तथा विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है।

40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

दक्षिण भारत और द्वीपीय क्षेत्रों में बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। आंध्र प्रदेश, केरल व माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के अलग-अलग हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

कई राज्यों में 30 से 40 किमी/घंटे की हवाओं के साथ बिजली चमकने का अलर्ट

देश के मध्य, पूर्व और दक्षिण-पश्चिम के कई अन्य हिस्सों में भी आंधी-तूफान का असर देखने को मिलेगा। बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तटीय कर्नाटक, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल व सिक्किम और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में आकाशीय बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है।

इन पहाड़ी व पूर्वोत्तर राज्यों में वज्रपात की चेतावनी

मौसम विभाग ने पहाड़ी और पूर्वोत्तर के राज्यों में केवल आकाशीय बिजली गिरने को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा के अलग अलग क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है। आईएमडी ने इन सभी राज्यों के नागरिकों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

लॉर्ड्स वनडे अब भी साबित हो सकता है रोहित शर्मा का अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच

इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया रोहित शर्मा का लॉर्ड्स वनडे तो दर्शकों को याद ही होगा।  प्रशंसकों को लगा होगा कि रोहित शर्मा ने 138 रन बनाए और संन्यास की अटकलों पर विराम लगा दिया। लेकिन ऐसा नहीं है। लॉर्ड्स वनडे अब भी रोहित का अंतिम वनडे हो सकता है जो कि कुछ पत्रकारों ने तीसरे एकदिवसीय मैच से पहले कहा था।

17 जुलाई (शुक्रवार) से मीडिया सूत्रों में यह अटकलें लग रही थी कि वह संन्यास के बारे में सोच रहे हैं और 19 जुलाई को (रविवार) को लॉर्ड्स पर खेला जाने वाला एकदिवसीय मैच उनका अंतिम मैच होगा। इस मैच से पहले या तो वह खुद संन्यास ले लेंगे या फिर ड्रॉप हो जाएंगे।लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव देवजीत सैकैया ने कहा है कि यह सब अफवाह है। वह जब तक चाहे क्रिकेट खेल सकते हैं।

माना जा रहा था रोहित शर्मा ने अपने PR यानि कि जनसंपर्क के कारण अफगानिस्तान सीरीज में अपनी जगह बचा ली थी लेकिन इंग्लैंड उनकी अंतिम सीरीज मानी जा रही थी।रोहित शर्मा ने फिर जबरदस्त जनसंपर्क की बिसात बिछाकर अपनी जगह एक बार फिर बचा ली और आलोचकों के मुंह शतक लगाकर बंद कर दिए।

लेकिन आज आई आगरकर से जुड़ी खबर में इस बात का भी जिक्र है कि कई चयनकर्ताओं को लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है क्योंकि उनको लगता है कि रोहित के रहते भारतीय टीम 2027 वनडे विश्व कप नहीं जीत सकती जबकि बीसीसीआइ के कुछ बड़े लोग सोशल मीडिया को देखकर अपनी रणनीति बदल रहे हैं।

अगर ऐसा विमर्श कायम होता है तो शायद रोहित शर्मा अब भी अपनी जगह एकदिवसीय टीम में नहीं बचा पाए क्योंकि मुख्य चयनकर्ता भी अपना निर्णय चयनकर्ताओं पर नहीं थोपता और वोटिंग के जरिए ही फैसला होता है।

साल भर रहा बुरा फॉर्म, लॉर्ड्स पर मिली संजीवनी

गौरतलब है कि रोहित शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और इंग्लैंड के पहले दो एकदिवसीय मैच में फ्लॉप रहे थे। जिसके बाद उनकी संन्यास की अटकलें लगनी शुरु हो गई थी। हालांकि आज उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। रोहित शर्मा ने 110 गेंदो में 138 रन बनाए। उन्हें जैकब बैथल ने बोल्ड किया।

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे।  दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

Heavy Rain Alerts: उत्तराखंड में अगले 24 घंटे बेहद भारी! स्कूल बंद…इन जिलों में हाई अलर्ट, जान लें IMD का लेटेस्ट अपडेट

Heavy Rain Alerts: राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय मानसून की बारिश देखने को मिल रही है। वहीं देश के पहाड़ी राज्यों में बारिश ने अपना रौद्र रूप भी दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड में अगले 24 घंटे भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश की गतिविधियां रात के समय और तेज हो सकती हैं और अगले दो दिनों तक इसका असर बना रह सकता है। 6 अगस्त को चमोली, बागेश्वर और देहरादून जिलों के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

इन जिलों के लिए जारी हुआ अलर्ट

मौसम विभाग ने 5 और 6 अगस्त के लिए कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि 7 से 10 अगस्त के बीच भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 5 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, अन्य पहाड़ी जिलों और ऊधम सिंह नगर में भी कई जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

भारी बारिश का अलर्ट, स्कूलों की छुट्टी

देहरादून में रातभर हुई तेज बारिश के कारण टोंस नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बुधवार को सभी स्कूल बंद रखने का फैसला किया है। देहरादून जिला प्रशासन ने बुधवार को सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में एक दिन की छुट्टी घोषित कर दी है। यह आदेश पहली से 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू रहेगा।

अलर्ट पर रखे गए सभी विभाग

वहीं, उत्तराखंड सरकार ने सभी विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। उन्होंने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और सभी जिला प्रशासन को अलर्ट रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उन्होंने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के यात्रा न करें और मौसम विभाग व प्रशासन की ओर से जारी सलाह का पालन करें।

इन इलाकों में मौसम ने दिखाया रौद्र रूप

लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। रुद्रप्रयाग जिले में मदमहेश्वर धाम जाने वाले रास्ते पर मारकंडा नदी का अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया, जिससे यात्रा प्रभावित हो गई है। सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, इसलिए फिलहाल लोग और स्थानीय निवासी नदी पार करने के लिए ट्रॉली की मदद ले रहे हैं। वहीं, मंगलवार रात हुई भारी बारिश के कारण कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी भी प्रभावित हुई। तेज बहाव वाली नदियों में कई वाहन फंस गए थे। हालांकि, सभी 20 पर्यटकों, गाइड और ड्राइवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एहतियात के तौर पर ढेला और झिरना सफारी जोन को फिलहाल बंद कर दिया गया है।

CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों और सुरक्षा बलों से संयम बरतने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि युवा छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा रोकने के लिए अगर हिंसक तरीके अपनाए गए, तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कथित भूमिका को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा नहीं है, युवाओं की बात सुनना जरूरी है। याचिका में दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कथित पत्थरबाजी को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है।

 

 सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी।

 

'अधिकारियों को बहुत सावधानी से कदम उठाना होगा'

CJI सूर्यकांत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सुरक्षा बलों और अधिकारियों को भी संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद सावधानी से काम करना होगा कि युवा हिंसा की ओर न बढ़ें।

कोर्ट ने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से देने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की बात सुनना और यह समझना कि वे किस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, स्थिति को संभालने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के विवेक पर भरोसा जताते हुए कहा कि आगे की कार्रवाई से पहले केंद्र सरकार का पक्ष भी देखा जाएगा।

 

20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई थी हिंसा

 

यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। यह मार्च NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच आयोजित किया गया था। दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस दौरान 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

 

पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी उठा था विवाद

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल को लेकर बाद में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार CRPF की एक आंतरिक जांच में पाया गया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान Rapid Action Force (RAF) के एक जवान ने पैलेट गन से सात राउंड फायर किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से पांच पैलेट प्रदर्शनकारियों को लगे थे।

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और सुरक्षा बलों को संयम से काम लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि युवाओं के विरोध को समझना और उनकी बात सुनना जरूरी है, क्योंकि बल प्रयोग से तनाव कम होने के बजाय स्थिति और बिगड़ सकती है। अब इस मामले के साथ छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं पर भी संयुक्त रूप से सुनवाई की जाएगी।

सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

Gold Silver Price Outlook: देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतों में 5 अगस्त को बढ़त देखने को मिली। मजबूत ग्लोबल संकेतों, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के तौर पर इन कीमती धातुओं की मांग के कारण घरेलू वायदा बाजार (फ्यूचर्स मार्केट) में दोनों में तेजी देखी गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 4,545 रुपये या 2.05 फीसदी बढ़कर 2,26,160 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। इस साल 9 जुलाई को भी चांदी इसी स्तर के आसपास ट्रेड कर रही थी, जब कमोडिटी एक्सचेंज पर इसकी कीमत 2,26,377 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने के वायदा भाव ₹2,165 या 1.5% बढ़कर ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए।

ग्लोबल बाज़ार में, दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स (Comex) गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 2% बढ़कर $4,226.50 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 3.21% बढ़कर $61.46 प्रति औंस हो गए।

सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आ रही है तेजी?

जानकारों का कहना है कि यह तेजी जियोपॉलिटिकल हालात, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच कीमती धातुओं की बढ़ती मांग की वजह से आई है।

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में भी बढ़त देखी गई, क्योंकि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमज़ोर अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशकों ने ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोना खरीदना बढ़ाया है।”

जानकारों के मुताबिक, मार्केट में नए सौदे होने से चांदी की कीमतों को भी फायदा हुआ।

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बातचीत में प्रगति की खबरों से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई और कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, जिसके बाद बुलियन की कीमतों में बढ़त हुई।

कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम कर सकती हैं, जिससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ता है और कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा मिलता है।

RBI का पॉलिसी फ़ैसला और उसका असर

यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने लगातार चौथी पॉलिसी मीटिंग में बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने का फैसला किया है।

कैपिटलXB के को-फ़ाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजिताभ भारती ने कहा कि RBI का यथास्थिति बनाए रखने का फैसला आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और महंगाई के जोखिमों पर नजर रखने के बीच संतुलन को दिखाता है। “हालांकि अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ग्लोबल महंगाई के आउटलुक पर असर डाल रहा है, लेकिन RBI का ध्यान विकास को बढ़ावा देने और साथ ही महंगाई पर बारीकी से नजर रखने पर बना रहेगा।”

इंडियन कंज्यूमर के लिए इस बढ़ोतरी का क्या है मतलब?

सोने-चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी त्योहारी सीजन से ठीक पहले हुई है, जब भारत में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। ऊंची कीमतें गहने खरीदने के फैसलों पर असर डाल सकती हैं, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो अपनी मर्जी से या गैर-जरूरी चीजों के लिए खरीदारी करते हैं।

कामा ज्वैलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने कहा कि दुनिया भर में अनिश्चितता और बदलती आर्थिक स्थितियों की वजह से ग्राहक ज़्यादा सतर्क हो सकते हैं।शाह ने कहा, “आर्थिक हालात के अनिश्चित होने की वजह से लोग सतर्क हो रहे हैं। जैसे-जैसे हम त्योहारी सीजन की ओर बढ़ रहे हैं, इसका असर घरेलू मांग पर थोड़ा दिखेगा, खासकर सोना खरीदने के मामले में।”हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सोने की पारंपरिक भूमिका यानी मूल्य को सुरक्षित रखने का जरिया – लंबे समय तक इसकी मांग को बनाए रख सकती है।

आगे कहां तक जाएंगे भाव

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि अगर सोने की कीमत $4,200 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो इसके $4,500 प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।

उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर, इससे सोने की कीमतें लगभग ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं।

वहीं चांदी के आउटलुक पर अगर कीमत लगातार $63 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो यह $70-$71 प्रति औंस की रेंज तक जा सकती है, जो लगभग ₹2.50-2.55 लाख प्रति किलोग्राम के बराबर है।

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