24 पोते बने 95 वर्षीय दादी सोनदेवी के श्रवण कुमार, हरिद्वार में कराया गंगा स्नान

Soni devi kanwar Meerut

Yogi Government Kanwar Arrangements: सावन की कांवड़ यात्रा में जहां डीजे की धुन, भव्य कांवड़ और शिवभक्तों का उत्साह हर किसी को आकर्षित कर रहा है, वहीं सिवाया टोल प्लाजा पर सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने लोगों की आंखें नम कर दीं। 95 वर्षीय सोनदेवी पालकी में हाथ जोड़कर भोलेनाथ का जयघोष कर रही थीं और उनके 24 पोते बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ रहे थे। यह दृश्य देखते ही राहगीरों के कदम थम गए। जिसने भी इस परिवार का समर्पण देखा, उसने इसे आज के दौर की सबसे खूबसूरत तस्वीर बताया। 

दादी की अधूरी इच्छा को बनाया अपना संकल्प

बुलंदशहर के हसनपुर जागीर निवासी सोनदेवी की वर्षों से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए यह यात्रा संभव नहीं थी। ऐसे में परिवार के युवाओं ने उनकी इच्छा को अपना संकल्प बना लिया। 'महाकाल ग्रुप' के नाम से यात्रा कर रहे 24 पोतों ने दादी को हरिद्वार ले जाकर गंगास्नान कराया और अब पालकी में बैठाकर गांव तक लेकर जा रहे हैं। पोतों का कहना है कि योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा में जिस तरह के इंतजाम किए हैं, उससे किसी को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।  

हर कुछ दूरी पर बदल जाते हैं कंधे

महाकाल ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि टोली में शामिल सभी 24 युवक रिश्ते में सोनदेवी के पोते हैं। यात्रा के दौरान कोई एक व्यक्ति लगातार पालकी नहीं उठाता। कुछ दूरी तय करने के बाद दूसरे पोते कंधा संभाल लेते हैं, ताकि दादी को बिना किसी परेशानी के पूरी यात्रा कराई जा सके। परिवार का कहना है कि दादी की खुशी ही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

सिवाया टोल पर लगा लोगों का जमावड़ा

जैसे ही कांवड़ यात्रा सिवाया टोल प्लाजा पहुंची, पालकी में बैठी सोनदेवी को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। कोई उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने पहुंचा तो किसी ने इस भावुक पल को मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। दादी पूरे रास्ते हाथ जोड़कर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष करती रहीं, जबकि पोते पूरे उत्साह के साथ उनकी सेवा में जुटे रहे।

आस्था से बढ़कर बना संस्कारों का संदेश

कांवड़ यात्रा में यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के संस्कार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक बन गया। जहां एक ओर युवा कांवड़िए भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं, वहीं सोनदेवी के 24 पोतों ने यह साबित कर दिया कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है। कांवड़ मार्ग पर यह अनोखा कारवां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के साथ-साथ प्रेरणा का संदेश भी देता नजर आया।

नितिन गडकरी पर AI-डीपफेक पोस्ट को लेकर हाई कोर्ट सख्त, X, Meta और Google को दिए यह निर्देश

Nitin Gadkari gets relief from bombay high court

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए कथित मानहानिकारक, अश्लील और अपमानजनक पोस्ट हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने X और Meta को यह जानकारी देने का भी आदेश दिया है कि वे कंटेंट किसने अपलोड किए थे। ALSO READ: 'पद के लायक हूं या नहीं, जल्द बताऊंगा'… यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना क्यों हैं इतने दुखी?

 

अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह सारा कंटेंट हटाने को कहा है, जिसमें इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से जुड़े मामले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बदनाम करने वाला AI कंटेंट भी शामिल है।

 

कोर्ट ने मेटा, एक्स और गूगल को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और भविष्य में डीपफेक या आपत्तिजनक पोस्ट पर भी सख्त कदम उठाने को कहा। यह जानकारी भी मांगी गई कि यह कंटेट किसने अपलोड किए थे। अदालत ने कहा कि ये पोस्ट देखने में ही अपमानजनक, घिनौने और अश्लील हैं। ALSO READ: भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

 

अदालत ने मेटा, X कॉर्प और गूगल LLC जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से यह भी पूछा कि आपके पास इतनी टेक्नोलॉजी है, तो क्या आपके पास कोई ऐसा सिस्टम नहीं है, जो ऐसे मामलों को तुरंत पकड़ सके? अगर कोई अश्लील या अपमानजनक चीज पोस्ट करता है, तो उसे तुरंत पकड़कर हटा दिया जाना चाहिए। यह बहुत ही घिनौनी बात है। कोई जहर उगल रहा है।'

 

कोर्ट ने गडकरी से कहा कि अगर भविष्य में ऐसी कोई पोस्ट अपलोड की जाती है, जिसमें डीपफेक या एआई से बना कंटेंट भी शामिल हो, तो मंत्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क कर सकते हैं। वे इस पर कार्रवाई करेंगे।

 

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी आई पसंद, जानिए किन शेयरों में देखने में मिल सकता है एक्शन

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी पसंद आई है। यूजीआरओ कैपिटा (UGRO Capita) में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर शिल्पा भट्टर का कहना है कि RBI का रेपो रेट के 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती पर भरोसे को दिखाता है। पश्चिम एशिया युद्ध का शुरुआती असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बाद, पॉलिसी की स्थिरता से बिज़नेस कम्युनिटी के भरोसे के मजबूती मिलनी चाहिए,लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होनी चाहिए और MSMEs को वर्किंग कैपिटल को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलनी चाहिए,जिससे बेहतर रीपेमेंट और मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पॉलिसी स्टेटमेंट का टोन काफी न्यूट्रल रहा, इससे यह नहीं लगता कि रेट में जल्द ही सख्ती आने वाली है।

मॉडुलस अल्टरनेटिव्स (Modulus Alternatives) के CEO और CIO संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,ग्रोथ और मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाने के लिए एक सोच-समझकर लिया गया फैसला नजर आता है। महंगाई के दबाव पर करीब से नजर रखी जा रही है और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बढ़ रही हैं,ऐसे में जैसा है वैसा बनाए रखने से स्टेबिलिटी मिलती है और पिछली पॉलिसी के उपायों का असर इकॉनमी में और आगे तक पहुंच पाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई के आज के फैसले से बैंकिंग सेक्टर को फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट्स के बारे में बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही रिटेल, MSME और बिज़नेस सेगमेंट में क्रेडिट डिमांड भी बढ़ सकती। आगे महंगाई,लिक्विडिटी की स्थिति और ग्लोबल डेवलपमेंट RBI की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक स्थिर पॉलिसी के साथ ही घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स में सुधार से आने वाले महीनों में कर्ज की मांग टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिलेगी।

एक्सिस डायरेक्ट की रिसर्च एनालिस्ट-BFSI, ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि महंगाई का दबाव थोड़ा कम हुआ है और ग्रोथ मजबूत बनी रही है। इसको देखते हुए RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन मानसून से जुड़ी चुनौतियां महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं और इस पर पैनी नजर बनी हुई है।

आरबीआई ने महंगाई के अपने अनुमान को थोड़ा कम करके 5% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। साथ ही, कोर महंगाई के अनुमान को भी घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो पहले 4.7% था। साथ ही, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को भी थोड़ा बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है, जो पहले 6.6% था।

बैंकिंग सेक्टर के नज़रिए से बात करें तो बैंकों ने सीजन के हिसाब से कमजोर रहने वाले Q1 में भी अच्छा काम किया है। इस अवधि में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही और अर्निंग भी अच्छी रही। इसे क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने और मामूली ओपेक्स ग्रोथ से सपोर्ट मिला, भले ही ज्यादातर बैंकों के मार्जिन में दिक्कतें रही। एसेट क्वालिटी में सुधार इस तिमाही की सबसे बड़ी पॉज़िटिव बात रही। नए एनपीए में नियंत्रण की वजह से ज्यादातर बैंकों में सुधार दिखा।

एक और खास बात यह रही है कि अब तक FCNR(B) डिपॉजिट में मजबूती आई है, जिससे Q2 में डिपॉज़िट ग्रोथ को सपोर्ट मिलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में मार्जिन काफी हद तक रेंज-बाउंड रहेंगे और कोई भी सुधार काफी हद तक पोर्टफोलियो मिक्स में अच्छे बदलाव से होगा।

ऐसे में निवेश के नजरिए से वह बैंक अच्छे लग रहे हैं जिनकी अर्निंग्स ग्रोथ, बैलेंस शीट और वैल्यूएशनम अच्छे हैं। नजरिए से कोटक महिंद्रा बैंक, ICICI बैंक, SBI, फेडरल बैंक और उज्जीवन SFB अच्छे लग रहे है। वहीं, NBFC में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण अच्छे नजर आ रहे हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

दतिया भाजपा पर एक्शन के बाद नरोत्तम मिश्रा से आशुतोष तिवारी की मुलाकात, बोले नरोत्तम, सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा भ्रम

भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद दतिया भाजपा की जिला कार्यकारिणी को भंग करने के बाद जहां एक और प्रदेश की सियासत में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है, वहीं दूसरी ओर बुधवार को दतिया से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने भोपाल में नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की।
खुद नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया पर आशुतोष तिवारी के साथ फोटो पोस्ट करते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी।

दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद नरोत्तम मिश्रा ने पहली बार रिएक्शन देते हुए सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि दतिया उपचुनाव के बाद सोशल मीडिया पर मेरे और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर जो भ्रामक और असत्य बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। आशुतोष तिवारी मेरे अनुज हैं। उनके प्रति मेरे मन में हमेशा स्नेह और आत्मीयता रही है, और आगे भी रहेगी। हमारे बीच न कभी कोई कटुता थी, न आज है। आज भी हमारी मुलाकात हमेशा की तरह उसी गर्मजोशी और अपनत्व के साथ हुई।

आशुतोष भारतीय जनता पार्टी के एक कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता हैं। मेरे चुनाव 2003 डबरा से मैने उन्हें एक ईमानदार कार्यकर्ता के रूप में ही देखा है। मैंने वर्षों से उनकी कार्यशैली को करीब से देखा है। मुझे पूरा विश्वास है कि वे संगठन और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। आशुतोष ने भी परिणाम के पश्चात किसी का नाम लेकर नाराज़गी नहीं जताई यह भी सभी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में सम्मान के भाव का प्रकटीकरण है !

मैं अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूँ कि वे ऐसा कोई कार्य, टिप्पणी या व्यवहार न करें जिससे पार्टी, संगठन या आशुतोष को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचे। हमारी ताकत हमारी एकजुटता, अनुशासन और संस्कार हैं। आशुतोष तिवारी जी और मेरे बीच 25 वर्षों का पारिवारिक रिश्ता है। वह सदैव मेरे अनुज है, उनके लिए मैं अभिभावक हमारा और उनका यह रिश्ता सदैव ऐसे ही बना रहेगा।राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा स्थायी रहते हैं !

PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta को 3 दिन का अल्टीमेटम, संसदीय समिति ने दी बड़ी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ घंटों के लिए फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसदीय समिति ने Meta को कड़ी चेतावनी दी है। समिति ने कहा है कि अगर कंपनी तीन दिनों के भीतर इस मामले पर उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो भारत में उसे मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) कानूनी सुरक्षा खत्म की जा सकती है।

Firstpost की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चेतावनी तब दी गई जब कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के प्रतिनिधियों से प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने के बारे में सवाल किए। यह वीडियो फेसबुक पर लगभग पांच घंटे तक उपलब्ध नहीं था। पैनल ने इस घटना के लिए मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग से जवाबदेही और व्यक्तिगत माफी की मांग की है।

बता दें कि यह विवाद फेसबुक के एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट’ (NEET) का पेपर लीक होने के विरोध में हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों पर बात की थी और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था।

संसदीय समिति ने जवाबदेही की मांग की

समिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि जब तक इस चूक के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं होगा। उन्होंने जकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को कहा और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 79 के तहत मेटा को मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन की समीक्षा की जा सकती है।

यह सुरक्षा ऑनलाइन मध्यस्थों (intermediaries) को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए जिम्मेदारी से बचाती है, बशर्ते वे जरूरी सावधानी (due diligence) के नियमों का पालन करें।

समिति ने Meta को तीन दिनों के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो समिति भारत में Meta की इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) सुरक्षा खत्म करने की सिफारिश कर सकती है।

Meta से मुश्किल सवाल

बैठक के दौरान, कमेटी के सदस्यों ने Meta से पूछा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने का फ़ैसला किसने लिया और इसे क्यों हटाया गया, जबकि प्लेटफॉर्म पर दूसरे आपत्तिजनक कंटेंट मौजूद थे। सदस्यों ने एल्गोरिदम के पक्षपाती होने और आम यूजर्स की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर प्रधानमंत्री का वीडियो भी हटाया जा सकता है, तो आम लोगों के कंटेंट की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में Meta के प्रतिनिधियों ने इस घटना पर खेद जताया और संसदीय समिति से माफी मांगी। हालांकि, समिति के सदस्यों का कहना था कि केवल माफी काफी नहीं है। इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सरकार की जांच-पड़ताल तेज हुई

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब MeitY ने Meta की ग्लोबल टीम को PM मोदी के वीडियो से जुड़े विवाद, कथित एल्गोरिदम बायस (पक्षपात), प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा के उपायों पर चर्चा के लिए बुलाया है। सरकार सोशल मीडिया कंपनी की जांच-पड़ताल तेज कर रही है, इसलिए ये बैठकें दो दिनों तक चलेंगी।

संसदीय समिति की इस बैठक में Meta, Google, YouTube और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ MeitY और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह पूरी कवायद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, ऑनलाइन सुरक्षा और भारतीय कानूनों के पालन की समीक्षा के तहत की जा रही है।

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बाढ़ का समाधान अगर सिंगापुर कर सकता है, तो भारत क्यों नहीं? | Why Mumbai floods every monsoon

सिर्फ 2 घंटे की बारिश और मुंबई पानी-पानी।
लेकिन सिंगापुर में 24 घंटे लगातार बारिश के बाद भी शहर सामान्य रहता है।
फर्क सिर्फ मौसम का नहीं, सोच और प्लानिंग का है।
जहाँ एक शहर बारिश को बर्बाद करता है, वहीं दूसरा उसकी हर बूंद को संभालकर भविष्य सुरक्षित करता है।
अगर भारत के शहर भी ऐसी योजना अपनाएँ, तो क्या हर साल आने वाली बाढ़ और पानी की कमी दोनों खत्म हो सकती हैं?
आपकी क्या राय है? क्या भारत को सिंगापुर का मॉडल अपनाना चाहिए? कमेंट में ज़रूर बताइए।

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भारतीय टीम पहुंची श्रीलंका, WTC के लिहाज से 2-0 की बढ़त होगी अहम (Video)

भारतीय क्रिकेट टीम कल रात श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पहुंच गई। टीम को 7 तारीख से अभ्यास मैच खेलना है जो 4 से 3 दिन का हो गया है। संभवत श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ना ही वह खिलाड़ी सामने लाएगा जो टेस्ट मैचों में खेलेंगे और ना ही पिच वैसी बनाएगा जो पहले टेस्ट में बनाई जाएगी। इस कारण भारत को अपने अभ्यास सत्रों पर विश्वास दिखाना होगा।

टीम के दल में जो बल्लेबाज चयनित हुआ था वह टीम के साथ नहीं था। यह बल्लेबाज टेस्ट टीम का शीर्ष क्रम का बल्लेबाज है।सांई सुदर्शन अभी बैंगलोर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपने स्वास्थ सुधार की अंतिम प्रक्रिया में है और टीम को उम्मीद है कि अभ्यास मैच से पहले वह टीम से जुड़ जाएंगे।

इससे पहले जब खबर आई कि जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरे श्रीलंका दौरे से ही बाहर हो गए हैं तो बैंगलूरू स्थित सैंटर ऑफ एक्सिलेंस पर भारतीय क्रिकेट फैंस सवाल उठाने लग गए।

तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी चोटिल होने के कारण श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में नहीं खेल पाएंगे। ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहले टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं जबकि तेज गेंदबाज आकाशदीप अभी तक पीठ की दर्द से नहीं उबर पाए हैं।

लेकिन भारत की चिंता चोटों से ज्यादा स्पिन की मुफीद पिचें है।कभी भारत की ताकत मानी जाने वाली स्पिन गेंदबाजी टेस्ट क्रिकेट में भारत की कमजोरी बनकर उभरी है। भारत ने अपने घर में पहले न्यूजीलैंड और फिर दक्षिण अफ्रीका से बिना कोई टेस्ट जीते सीरीज गंवानी पड़ी थी। इस सीरीज में 85 प्रतिशत विकेट स्पिन गेंदबाजों के थे।

श्रीलंका में भी भारत को स्पिन के मुफीद पिचें पेश की जाएंगी। हालांकि यह हो सकता है कि पहले ही दिन से पिच टर्न ना ले जैसा भारत में देखते हैं लेकिन भारत इस सीरीज को 2-0 से जीतने के लिए कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि भारत के सभी नेट गेंदबाज स्पिनर हैं और अलग विविधता के हैं।

टीम में 4 स्पिनरों को जगह दी है और शीर्ष तेज गेंदबाजी क्रम अनुभवी है।टीम में कुलदीप यादव, रविंद्र जड़ेजा, अफगानिस्तान के खिलाफ ड्रीम डेब्यू करने वाले मानव सुथार और इस सीरीज में डेब्यू करने वाले स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को मौका मिला है।

विश्व टेस्ट चैंपियनशित चक्र 2025-27 को देखते हुए अब भारत की टीम ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती। टीम इंडिया के लिए बचे हुए 9 मैचों में से 7 जीतने आवश्यक है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन।

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

unity in diversity

Indian culture: भारत विविधताओं का लोकसागर है। भारतीय लोक समाज, सागर जैसी विशालता के साथ ही साथ लोकजीवन में समायी अंतहीन विविधताओं का जीता-जागता संग्रहालय हैं। हमारा देश भारत, लोकजीवन की अंतहीन विविधताओं का गहरा जमावड़ा है। यहां खानपान, सोच विचार,रहन सहन, वेशभूषा, भाषा बोली -लिपियों, चिन्तन परम्परा से लेकर स्थापत्य, विचारधारा,दर्शन, धर्म संस्कृति और समाज में अनेक मत मतान्तरों, लड़ाई-झगड़ों सहित विविध साकार निराकार विचारों का अंतहीन सिलसिला सनातन समय से है। आधुनिक काल में कई एकांगी समूह, संगठन और विचारधाराएं भारत की विविधताओं से अपने अन्तर्मन में विचलित होकर भारत की विविधताओं को बिखराव की संज्ञा देती हुए दिखाई देती हैं। भारत की वैचारिक विविधताओं को भी इस विविधता विरोधी एकांगी विचार प्रक्रिया पर भी कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि सारी विविधताएं एक तरह से विचारों का विस्तार ही तो है! विविधताओं से असहमति भी विविधता मय जीवन का एक वैचारिक आयाम ही समझा जाना चाहिए। ALSO READ: आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया!

 

एक विचार यह भी उभारने की पहल हो रही है कि विविधताओं से एकता कमजोर होती है। सब कुछ एक जैसा होना चाहिए। भाषा भूषा, खान पान,सोच विचार, दर्शन धर्म, बोल चाल, हाव भाव सब कुछ एक जैसा होना चाहिए। यदि इस भारत देश और दुनिया में सब कुछ एक जैसा हो जाय तो अंतहीन नए विविधतापूर्ण सोच-विचार और सृजनात्मक गतिविधियों को तो एक तरह से यांत्रिक एकरस जड़ता में ढलना ही होगा। जीवन कभी भी एक रस नहीं हो सकता, साथ ही एक मार्गी और एकांगी भी नहीं हो सकता है। जीवन की चेतना, सहज विस्तार और प्राकृतिक समृद्धि का पर्याय है उसकी अंतहीन विविधता। विविधता पूर्ण जीवन की चेतना से ही लोक जीवन और जगत हर क्षण नवीनता और विविधता से भरपूर बना रहता है। यही प्राकृतिक जीवन का आनंद हैं। ALSO READ: राजनीति और धर्म का मूल जीवन का अध्यात्म हैं!

 

प्रकृति में कुछ भी एक जैसा नहीं है।साथ ही कुछ भी प्रवाहहीन या गतिहीन भी नहीं है, सबकुछ एक दूसरे से भिन्न भी है फिर भी सब कुछ अभिन्न भी हैं। विभिन्नता बाह्य स्वरूप है, अभिन्नता आत्म स्वरूप है, साथ ही साथ निरंतर गतिशील भी। एक ही पेड़ की दो पत्तियां एक जैसी नहीं होती एक जैसे दो जीव नहीं होते। जीव भिन्न है जीवन अभिन्न हैं। विविध विचारों विषयों और विधाओं से ही मानवीय सभ्यता का विस्तार होकर वैचारिक समृद्धि और समझ का दायरा निरन्तर प्रवाहित होता है। यदि सारी दुनिया एक तरह के या एक जैसे यांत्रिक सांचे में ढली होती तो दुनिया नीरस और उदासी भरी एकरसता का यंत्रवत विस्तार मात्र ही बनी रहती। आज समूची दुनिया में जो विभिन्नता का अनन्त विस्तार है इसी से समूची दुनिया एक तरह से विविध रूप स्वरूप के अनन्त महासागर जैसी दिखाई देती हैं। ALSO READ: सृष्टि का आनंद बनाम आनंद की सृष्टि!

 

हमारी इस धरती पर जो भूमि या भूभाग हैं उसकी विविधताओं का कोई अंत नही है। कहीं विशाल पर्वत श्रृंखला है तो कहीं विशाल वीराने या सन्नाटे समेटे जन एवं वनस्पति रहित रेतीले रेगिस्तान, तो कहीं धनधोर वन प्रान्तर का विशाल साम्राज्य। इसके अलावा हमारी धरती में महासागरों के रूप में जो विशाल जलराशि का विस्तार है, उसमें जिस जीव और वनस्पति जगत का अंतहीन विस्तार है वह या उसकी विविधता हमारी कल्पना से परे है। महासागर की जलराशि में मौजूद जीवन के विस्तार को देखते हुए हम कह सकते हैं कि हमारी धरती में हूबहू एक जैसा दूसरा कोई जीव या वनस्पति मौजूद ही नहीं है।

 

सब कुछ अपने आप में अनोखा और अंतहीन जीवन श्रृंखला का साकार स्वरूप जैसा ही है। यानी धरती पर जीवन का स्पष्ट संकेत या संदेश विविधतापूर्ण जीवन चिंतन और मनन के लिए है। तभी तो समूचा जगत और जीवन अंतहीन विविधताओं के जीते-जागते संग्रहालय जैसा लगता है जिसे कोई भी जीव अपने जीवन काल में समग्र रूप से देख,समझ और अनुभव भी नहीं कर पाता है। भारत में मौजूद विविधताओं के अंतहीन विस्तार की समूची कल्पना भी मनुष्य के मन में  अपने समूचे जीवन काल में नहीं आ पाती है। हमारी धरती और मनुष्य के मन में विविधताओं का कोई ओर-छोर नहीं है कोई थाह ही नहीं है। हमारी गणना समाप्त हो सकती है पर धरती के जल,थल और जीवन में मौजूद विविधताओं का अंत और अस्तित्व समाप्त नहीं हो सकता है।

 

हमारी इस धरती पर वनस्पति जगत की उत्पत्ति अपने आप प्राकृतिक रूप से एक निश्चित समय चक्र में अपने आप होती रहती है। इस तरह अपने आप अंकुरित होने वाली वनस्पति में अंतहीन विविधताओं के दर्शन होते हैं। पर मनुष्य द्वारा तयशुदा फ़सल चक्र में जो बीज बोया जाता है वहीं फ़सल के रूप में अंकुरित हो अनाज के रूप में हमें मिलता है। मनुष्य के द्वारा फसल या अनाज के रूप में बोया गया बीज तो उस रूप में उगता ही है पर उसके साथ साथ असंख्य वनस्पतियों की अन्य प्रजातियां भी प्राकृतिक रूप से अंकुरित हो कर कई तरह की वनस्पतियों को जन्म देती है।

 

हम अपनी उपयोगिता या लाभ हानि के लिए एकांगी स्वरूप का मनचाहा बीज बोते हैं। पर प्रकृति जीवन के हर आयाम में ऐसी-ऐसी विविधताओं को निरंतर अभिव्यक्त करती है जिसका कोई अंत ही हमें हमारे जीवन काल में कभी भी दिखाई ही नहीं पड़ता। विविधता में अंतर्निहित अभिन्नता के मूल को समझने पर हम दोनों ही स्थितियों को भले ही भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से देखें पर फिर भी दोनों ही भिन्न-भिन्न दिखाई देते हुए भी आपस में अभिन्न स्वरूप में ही बनी रहती है।

 

भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

MDR charge on UPI payment

मंगलवार को संसद में देश के भुगतान कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए जाने के साथ ही भारत अपने लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किए गए लेन-देन पर मर्चेंट शुल्क को फिर से लागू करने के एक कदम और करीब पहुंच गया है। ALSO READ: UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क में से एक यूपीआई ने जुलाई में 29.9 ट्रिलियन रुपये ($313.5 बिलियन) मूल्य के 23.6 बिलियन लेन-देन संसाधित किए। वॉलमार्ट का फोनपे और अल्फाबेट का गूगल पे यूपीआई के माध्यम से होने वाले भुगतान में अपना दबदबा बनाए हुए हैं।

उद्योग जगत के अधिकारियों ने लंबे समय से यह तर्क दिया है कि डिजिटल भुगतान में वृद्धि को बनाए रखना कठिन हो गया है क्योंकि भुगतान कंपनियों को यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं मिलता है, जिससे इस पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) में निवेश करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।

 

उद्योग और नियामक स्रोतों के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए भारत के भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन से डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुरू करने की अनुमति मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि यह बदलाव एमडीआर वसूलने का एक कानूनी आधार तैयार करता है, लेकिन शुल्क के स्तर या वे कहाँ लागू होंगे, इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

 

एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारियों द्वारा डिजिटल लेन-देन को संसाधित करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाता है। हालांकि भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का एमडीआर लगता है, लेकिन वर्तमान में व्यापारियों के लिए यूपीआई लेन-देन मुफ़्त है।

 

दो दृष्टिकोणों पर विचार किया जा रहा है

नीति निर्माता दो व्यापक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं: एक निश्चित सीमा (थ्रेसहोल्ड) से ऊपर के लेन-देन पर एमडीआर लगाना या व्यापारी के वार्षिक टर्नओवर के आधार पर शुल्क वसूलना। एक प्रस्ताव में केवल बड़े व्यापारियों पर शुल्क लागू करने की बात कही गई है, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ़्त रहेगा।

 

सरकार 1.5 करोड़ रुपये (15 मिलियन रुपये) से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये ($20.97) से अधिक के लेन-देन पर 0.3% से 0.5% का एमडीआर लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मंगलवार को जेफरीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन व्यापारी भुगतान मात्रा (वॉल्यूम) का केवल 4% हिस्सा हैं, लेकिन कुल लेन-देन मूल्य (वैल्यू) का लगभग 67% हिस्सा हैं।