NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर की दवाओं के दाम पर सरकार का बड़ा फैसला, 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसकी चपेट में आने वाले मरीज के साथ-साथ उसका पूरा परिवार जूझता है। यह बीमारी शरीर ही नहीं, आत्मबल और आर्थिक स्थिति को भी चोट पहुंचाती है। बहुत से मरीज और उनके परिजन इसका इलाज तक पूरा नहीं कर पाते हैं। लेकिन सरकार के इस कदम से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार इस जानलेवा बीमारी की दवाओं के दाम 70% तक घटाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30% तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कैंसर की अन्य दवाओं को मूल्य सुरक्षा देना

सरकार ने गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री में लगने वाले मार्जिन को सीमित करने को मंजूरी दे दी है। ये मार्जिन अधिकतम बिक्री मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित होंगे। इस कदम से दवाओं की कीमतें 70% तक कम होने और कैंसर के मरीजों को हर साल ₹2,500 करोड़ बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे उनकी जेब से चुकाने वाली रकम में काफी कमी आएगी।

शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल जरूरी कैंसर की दवाएं पहले से ही सरकार द्वारा तय की गई सख्त सीलिंग प्राइस के तहत हैं। लेकिन इस सूची से बाहर गैर सूचीबद्ध कैंसर दवाओं को सरकार के नए फैसले से मूल्य सुरक्षा मिलेगी। मरीजों तक पहुंचने से पहले दवाओं पर जोड़े जाने वाले मार्जिन को सीमित किया जाएगा।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत एक विशेषज्ञ समिति कवर की जाने वाली दवाओं की सूची को अंतिम रूप देगी। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) फिर फैसला लेगी और अधिसूचना जारी करेगी।

कम होगा कैंसर के इलाज का भारी खर्च

भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, हर एक लाख की आबादी पर लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। इलाज से मरीजों और उनके परिवारों पर पैसे का भारी बोझ पड़ता है। एनपीपीए के मार्केट डेटा के एनालिसिस में पाया गया कि गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की कीमत में औसतन लगभग 170% का मार्क-अप होता है। कुछ मामलों में यह 700% या उससे भी अधिक हो जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, मरीज तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन से गुजरने वाली दवा की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। रिटेल फार्मेसी, हॉस्पिटल फार्मेसी या ऑनलाइन फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं की कीमतें भी काफी अलग-अलग होती हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सहित राज्य अधिकारियों ने, मरीजों और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर दवाओं की बहुत ज्यादा कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन चिंताओं पर सार्वजनिक मंचों पर भी आवाज उठाई गई है। खासकर जिस कीमत पर दवाएं बेचने के लिए खरीदी जाती हैं और कंज्यूमर से ली जाने वाली MRP के बीच बड़े अंतर को लेकर।

महंगी कैंसर की दवाओं पर इतना अधिक मार्जिन मरीजों के इलाज का खर्च काफी बढ़ा देता है। नई लिमिट से बहुत ज्यादा मुनाफाखोरी पर रोक लगेगी, बाजार में गलत कीमत तय करने के तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा और मरीजों के लिए सही कीमतें पक्का करने में मदद मिलेगी।

2019 के फैसले से मिली राहत को आगे बढ़ाना

फरवरी 2019 में, सरकार के निर्देश पर, एनपीपीए ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की लिमिट लगा दी थी। सरकार के इस दखल से पता चलता है कि मार्जिन को सीमित करने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।

उस फैसले से MRP 91% तक कम हो गई, जिससे 526 ब्रांड पर सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई। इससे कैंसर के मरीजों पर पैसे का बोझ काफी कम हुआ और उनकी जिंदगी आसान हुई। इससे सबक लेते हुए और सप्लाई चेन में कीमत की समस्याओं को दूर करते हुए, सरकार ने अब बड़ी लिमिट को मंजूरी दे दी है।

उत्पादन बनाए रखना और लगातार उपलब्धता पक्का करना

कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के मैन्युफैक्चरर्स को अपने मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखना होगा। इस हस्तक्षेप में ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में बनी और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड, सभी श्रेणी की गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाएं शामिल होंगी। इससे मरीजों को कम कीमतों का काफी फायदा होगा। साथ ही, उन्हें जरूरी दवाएं लगातार मिलती रहेंगी।

Delhi Metro News: 10 अक्टूबर को राजीव चौक, मंडी हाउस और कश्मीरी गेट समेत ये 57 मेट्रो रह सकते हैं बंद, पूरी लिस्ट यहां देखिए

EPF vs NPS: हर महीने ₹10,000 का निवेश, 30 साल में कहां तेजी से बढ़ेगा आपका पैसा? समझिए पूरा गणित

EPF vs NPS Return Calculation: रिटायरमेंट के लिए अगले 30 सालों तक हर महीने ₹10,000 का योगदान देना एक बड़ा और सुरक्षित कॉर्पस तैयार कर सकता है। लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में से कौन सा विकल्प आपको अधिक रिटर्न देगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पैसा किस तरह इन्वेस्ट और ग्रो हो रहा है।

EPF जहां सरकार द्वारा हर वित्त वर्ष घोषित की जाने वाली निश्चित ब्याज दर पर काम करता है, वहीं NPS का पैसा बाजार से जुड़े एसेट्स जैसे- शेयर बाजार, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी प्रतिभूतियों में लगाया जाता है।

अगर आप बिना किसी वार्षिक बढ़ोतरी के 30 सालों तक हर महीने ₹10,000 का योगदान करते हैं, तो आपकी कुल जमा राशि ₹36 लाख होगी। आइए दोनों विकल्पों के गणित और नियमों को विस्तार से समझते हैं:

EPF का गणित: सुरक्षित और निश्चित ब्याज का विकल्प

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25% की ब्याज दर तय की है। अगर हम पूरे 30 सालों के लिए 8.25% की औसत वार्षिक ब्याज दर मानकर चलें, तो हर महीने ₹10,000 का निवेश बढ़कर लगभग ₹1.57 करोड़ हो जाएगा।

वैसे यह 8.25% का रिटर्न गारंटीड नहीं है, क्योंकि EPF की ब्याज दरें हर साल सरकार द्वारा संशोधित की जाती हैं। हालांकि, इसका रिटर्न दैनिक बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

NPS का गणित: बाजार की ताकत और कंपाउंडिंग

NPS में कोई फिक्स रिटर्न की गारंटी नहीं होती। इसमें आपका पैसा आपकी पसंद के अनुसार इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में बांटा जाता है। ‘एक्टिव चॉइस’ के तहत आप इक्विटी में 75% तक एक्सपोजर ले सकते हैं। बाजार से जुड़े होने के कारण NPS का कॉर्पस EPF की तुलना में काफी अलग और बड़ा हो सकता है।

10% वार्षिक रिटर्न पर: अगर NPS पर औसतन 10% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका ₹10,000 का मासिक निवेश 30 साल में बढ़कर लगभग ₹2.26 करोड़ हो जाएगा।

9% वार्षिक रिटर्न पर: अगर रिटर्न 9% रहता है, तो कुल कॉर्पस लगभग ₹1.83 करोड़ बनेगा।

(नोट: पेंशन फंड नियामक PFRDA के अनुसार, NPS का अंतिम फंड बाजार के प्रदर्शन, आपके द्वारा चुने गए एसेट एलोकेशन और एन्युटी खरीदारी के प्रतिशत पर निर्भर करता है।)

रिटायर्मेंट पर पैसे निकालने के नियम: EPF और NPS का अंतररिटायर्मेंट के समय

जमा राशि निकालने के मामले में EPF और NPS के नियम बिल्कुल अलग हैं। EPF मुख्य रूप से एक नियोक्ता से जुड़ा बचत ढांचा है, जिसमें 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट पर जमा हुई पूरी 100% राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है। इसके अलावा, नौकरी के दौरान घर खरीदने, बच्चों की शिक्षा, शादी या बीमारी जैसी विशेष जरूरतों के लिए शर्तों के तहत आंशिक निकासी का विकल्प भी मिलता है।

दूसरी ओर, NPS एक स्वतंत्र और फ्लेक्सिबल पेंशन खाता है, जो रिटायरमेंट पर नियमित आय देने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। NPS के नियमों के तहत रिटायरमेंट के समय कुल कॉर्पस का अधिकतम 60% हिस्सा ही एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि कम से कम 40% राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है ताकि जीवनभर पेंशन मिलती रहे। इसमें भी गंभीर बीमारी या बच्चों की उच्च शिक्षा/शादी जैसी विशेष परिस्थितियों में सीमित आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है।

टैक्स छूट और नियम

EPF पर टैक्स: EPF मुख्य रूप से EEE (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आता है। हालांकि, अगर कर्मचारी का सालाना योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।

NPS पर टैक्स: धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा, NPS में धारा 80CCD (1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। रिटायर्मेंट के समय निकाली गई 60% एकमुश्त राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।

आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

केवल आंकड़ों की तुलना करें, तो 10% रिटर्न के अनुमान के साथ NPS (₹2.26 करोड़) EPF (₹1.57 करोड़) से बाजी मार लेता है। लेकिन इस अतिरिक्त रिटर्न के साथ बाजार का जोखिम भी जुड़ा हुआ है।

वैसे आप बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं, तो EPF बेहतर है। अगर आप लंबी अवधि के लिए बाजार का जोखिम उठाकर अधिक वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो NPS सही विकल्प है।

दोनों का कॉम्बिनेशन भी बढ़िया विकल्प है। नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए यह ‘EPF या NPS’ का चुनाव नहीं है। PFRDA के नियमों के अनुसार, आप EPF के साथ-साथ अलग से NPS खाता भी चला सकते हैं।

रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय सिर्फ बड़े आंकड़े न देखें, यह भी देखें कि आप कितना मार्केट रिस्क ले सकते हैं, आपको रिटायरमेंट से पहले कितनी लिक्विडिटी चाहिए और क्या आप नियमित पेंशन चाहते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आदेश और अंतरात्मा के बीच खड़ी वर्दी !

सुधार किसी एक प्रदर्शन की जीत-हार से नहीं निकलेगा। बल प्रयोग की हर घटना की वीडियो, समय और आदेश-श्रृंखला सार्वजनिक होनी चाहिए। निषेधाज्ञा लिखित हो और बाद में आनुपातिकता की स्वतंत्र जाँच हो। चिह्नित स्थलों पर पूर्व सूचना और यातायात व्यवस्था को अनुमति के पूर्ण निषेध से अलग रखा जाए। प्रदर्शनकारियों के लिए भी सीमा साफ है।

लोकतंत्र केवल मतपेटी में बंद मतों का नाम नहीं है। वह उस सांस का भी नाम है, जिसमें नागरिक अपनी नाराजगी शांतिपूर्वक सड़क पर रख सके। भारत के संविधान ने यह सांस अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) में दी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बिना हथियार के शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार और सीमा भी उसी अनुच्छेद में है। अनुच्छेद 19(2) और 19(3) संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में युक्तियुक्त निर्बंधन की अनुमति देते हैं। यहीं से पुलिस का कठिन कर्तव्य शुरू होता है। उसे न विरोध को कुचलना है, न अव्यवस्था को खुली छूट देनी है।

यह द्वंद्व किसी एक आंदोलन की संपत्ति नहीं है। परीक्षा-पत्र लीक से निकले युवा मार्च हों, किसान कानूनों के खिलाफ घेराव हो, नागरिकता कानून पर धरना हो, या चुनावी सूची और निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल हों। हर बार सवाल एक ही लौटता है। राज्य विरोध को सुविधा दे रहा है, या केवल उसे नियंत्रित करने के नाम पर संकुचित कर रहा है। अक्टूबर 2026 का दिल्ली दृश्य इसी प्रश्न की ताजा तस्वीर है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्षी गठबंधन के सांसद जंतर-मंतर की ओर बढ़े, तो लुटियंस दिल्ली बैरिकेड, आरएएफ और केंद्रीय बलों की छावनी बन गई। बसें रोक दी गईं, रास्ते सील कर दिए गए। उसी बीच, पेपर लीक मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन की औपचारिक सूचना संसद मार्ग थाने में दी। पिछली बार के धरने से सबक लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने अनुमति नामंजूर कर दी।

तर्क यह था कि निर्धारित स्थल पर भी बैठक या धरने के लिए आवेदन कम से कम दस दिन पहले देना होता है, और भीड़ के आकार के अनुसार स्थल जंतर-मंतर, रामलीला मैदान या बुराड़ी तय होते हैं। आयोजकों का जवाब सीधा था। जंतर-मंतर ऐतिहासिक और चिह्नित विरोध-स्थल है। पुलिस का काम सुरक्षा, व्यवस्था और यातायात है, अनुमति देकर नागरिक के अधिकार का फैसला करना नहीं।

कानून इस बहस में खाली नहीं है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की वे धाराएँ, जो पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 129 से 132 थीं, कार्यपालक मजिस्ट्रेट या थाना प्रभारी को गैरकानूनी जमाव को तितर-बितर करने का आदेश देती हैं। बल तभी है जब आदेश न माना जाए, और तब भी जितना कम बल और जितनी कम क्षति हो, उतना ही। धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लगाई जा सकती है, पर सर्वोच्च न्यायालय अनुराधा भसीन मामले में कह चुका है कि ऐसा आदेश वास्तविक आपात पर टिका हो, तथ्यों को दर्ज करे और आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरे।

हिम्मत लाल शाह (1973) में सार्वजनिक सड़कों पर बैठकों का पूर्ण निषेध नकारा गया। रामलीला मैदान (2012) में प्रक्रियात्मक सुरक्षा को औपचारिकता नहीं माना गया। अमित साहनी, यानी शाहीन बाग (2020), में शांतिपूर्ण विरोध को माना गया, पर सार्वजनिक मार्ग के अनिश्चितकालीन कब्जे को नहीं। मार्च 2025 में न्यायालय ने कहा कि पुलिस अनुच्छेद 12 के अर्थ में राज्य का अंग है, इसलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा उसका संवैधानिक दायित्व है। जुलाई 2026 में, नीट व अन्य पेपर लीक पर ‘चलो संसद’ मार्च के बाद, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने मौखिक रूप से रेखांकित किया कि शांतिपूर्ण विरोध गारंटीकृत है और केवल आंदोलन होने से लाठीचार्ज जायज नहीं हो जाता।

जुलाई का वह मार्च याद दिलाने लायक है, क्योंकि वहाँ बल की सीमा ही विवाद बनी। पुलिस का पक्ष था कि मार्च मना था, भीड़ ने बैरिकेड तोड़े और पथराव किया, बल अंतिम उपाय था और इस प्रदर्शन में सौ से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हुए। प्रदर्शनकारियों, अस्पताल रिकॉर्ड और बाद की रिपोर्टों ने लाठी, आँसू गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल की बात कही। न्यायालय ने नाबालिगों की रिहाई के आदेश दिए और स्वतंत्र जाँच का पैनल बनाया। वहीं दिल्ली पुलिस ने अपने आचरण को कानूनी और पेशेवर बताया। दोनों बयान अब भी अधूरे हैं। यही अधूरापन हर बड़े प्रदर्शन के बाद दोहराया जाता है।

इसी ढाँचे में वर्दी की नैतिक स्थिति समझी जा सकती है। धरने प्रदर्शन का सामना कर रहा पुलिस का सिपाही अक्सर उसी वर्ग से आता है जिससे प्रदर्शनकारी। वह परीक्षा की अनियमितता, बेरोजगारी, फसल के दाम या मतदाता सूची के संदेह को व्यक्तिगत रूप से समझ सकता है। पर उसके साथ ही वह वर्दी में वह राजनीतिक कार्यपालिका के आदेश का सेवक है। संविधान की सातवीं अनुसूची में पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं। दिल्ली में यह नियंत्रण केन्द्र के गृह मंत्रालय से जुड़ा है। स्थानांतरण, पदोन्नति और विभागीय जाँच उसी सत्ता के हाथ में हैं, जिसकी नीतियों के खिलाफ भीड़ खड़ी होती है।

परिणाम यह होता है कि ‘न्यूनतम बल’ का सिद्धांत असल में मौके पर ‘आदेश का पालन’ में सिकुड़ जाता है। यह भी सच है कि जब भीड़ पथराव करती है, वाहन क्षतिग्रस्त करती है या सुरक्षाकर्मियों पर हमला होता है, तब संयम बरतने वाले अधिकारी को बाद में ढिलाई का आरोप झेलना पड़ता है। पुलिस न पूरी तरह दमन का औजार है, न भीड़ का स्वयंसेवक। वह बीच की संस्था है। उसकी निष्पक्षता तभी बचती है जब राजनीतिक आका ऐसा कोई आदेश दें, पर कानून सीमा बाँधे।

इसलिए सुधार किसी एक प्रदर्शन की जीत-हार से नहीं निकलेगा। बल प्रयोग की हर घटना की वीडियो, समय और आदेश-श्रृंखला सार्वजनिक होनी चाहिए। निषेधाज्ञा लिखित हो और बाद में आनुपातिकता की स्वतंत्र जाँच हो। चिह्नित स्थलों पर पूर्व सूचना और यातायात व्यवस्था को अनुमति के पूर्ण निषेध से अलग रखा जाए। प्रदर्शनकारियों के लिए भी सीमा साफ है। बिना हथियार, बिना मार्ग के अनंत कब्जे, और बिना हिंसा के। लोकतंत्र में पुलिस संविधान का अभिकर्ता है। जब वह राजनीतिक इच्छा और नागरिक के नैतिक दावे के बीच कानून को चुनती है, तभी विरोध सड़क की गरमी बना रहता है, राजधानी का घेरा नहीं।

फील्डमार्शल ने नए डीजल इंजन लॉन्च किए, टैक्ट्रर और खेती की मशीनों में आएंगे काम; ARAI से मिली मंजूरी

इंजीनियरिंग कंपनी Fieldmarshal P.M. Diesels Private Limited ने 15 HP और 18 HP कैटेगरी में नए सिंगल-सिलेंडर डीजल इंजन लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक, ये भारत के पहले ARAI-अप्रूव्ड और TREM V-कम्प्लायंट सिंगल-सिलेंडर डीजल इंजन हैं। यह लॉन्च कंपनी के 60 साल से ज्यादा लंबे इंजीनियरिंग सफर में अहम पड़ाव है।

कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और खेती की मशीनों के लिए डिजाइन

नए इंजन खास तौर पर कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और खेती की मशीनों के लिए बनाए गए हैं। कंपनी का कहना है कि इनमें बेहतर टेक्नोलॉजी, ईंधन की बचत और मजबूती पर फोकस किया गया है। साथ ही, इनका डिजाइन कॉम्पैक्ट रखा गया है, ताकि खेती से जुड़े अलग-अलग कामों में इनका इस्तेमाल आसान हो।

देश में विकसित की गई EGR टेक्नोलॉजी

इन इंजनों में भारत में विकसित EGR सिस्टम लगाया गया है। यह उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है। साथ ही, इंजन के सुचारू संचालन पर भी फोकस किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यह टेक्नोलॉजी नए TREM V उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करती है।

TREM V टेक्नोलॉजी के लिए पेटेंट फाइलिंग

Fieldmarshal ने अपनी TREM V इंजन टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई राष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग भी की हैं। कंपनी के मुताबिक, इससे देश में ही R&D, इंजीनियरिंग और बौद्धिक संपदा तैयार करने पर उसका फोकस दिखता है।

कंपनी अब एडवांस्ड इंजन, ट्रैक्टर और खेती के मशीनीकरण से जुड़े समाधान विकसित करने पर आगे बढ़ रही है। इसके अलावा कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, जल समाधान और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना है।

कंपनी ने क्या कहा?

Fieldmarshal P.M. Diesels के डायरेक्टर ऋषि पटेल ने कहा कि TREM V इंजन प्लेटफॉर्म कंपनी की इंजीनियरिंग यात्रा में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि छह दशकों से ज्यादा समय से कंपनी का फोकस ऐसे प्रोडक्ट बनाने पर रहा है, जो वास्तविक कामकाजी परिस्थितियों में भरोसेमंद प्रदर्शन दे सकें।

उन्होंने कहा कि ARAI से मंजूर TREM V-कम्प्लायंट 15 HP और 18 HP सिंगल-सिलेंडर इंजन का लॉन्च और इससे जुड़ी पेटेंट फाइलिंग भारत की इंजीनियरिंग क्षमताओं को दिखाती है।

अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, विप्रो, इंफोसिस को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया, H-1B के दुरुपयोग का आरोप

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ChatGPT अब सिर्फ जवाब नहीं देगा, दिखाकर भी समझाएगा! नया Intelligent UI फीचर हुआ लॉन्च

ChatGPT अब सिर्फ जवाब नहीं देगा, दिखाकर भी समझाएगा! नया Intelligent UI फीचर हुआ लॉन्च

chatgpt

ChatGPT इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। OpenAI ने ChatGPT के लिए ‘Intelligent UI’ नाम का नया फीचर पेश किया है, जिसके जरिए चैट में सिर्फ टेक्स्ट जवाब देने के बजाय ज्यादा विजुअल और इंटरैक्टिव एलिमेंट्स दिखाई देंगे। कंपनी का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य जटिल विषयों को समझना आसान बनाना है।

 

नए इंटरफेस में यूजर्स को साधारण तस्वीरों के बजाय ऐसे विजुअल मिल सकते हैं, जिनके साथ वे सीधे बातचीत कर सकेंगे। इनमें टैप करने वाले बटन, किसी खास काम के लिए तैयार किया गया कैलकुलेटर, इंटरैक्टिव चार्ट, एडिट किए जा सकने वाले ग्राफ और दूसरे विजुअल एलिमेंट शामिल हैं।

 

ChatGPT में अब इंटरैक्टिव होंगे जवाब

ALSO READ: Suzuki e Sky Mini EV की एंट्री, सस्ती कार और धमाकेदार फीचर्स

अब तक ChatGPT मुख्य रूप से टेक्स्ट आधारित इंटरफेस के रूप में काम करता रहा है। Intelligent UI के जरिए OpenAI इसे ज्यादा विजुअल और उपयोगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, अगर कोई यूजर किसी जटिल विषय को समझना चाहता है तो ChatGPT जरूरत के मुताबिक डायग्राम, चार्ट या दूसरे विजुअल तैयार कर सकता है। इससे केवल टेक्स्ट पढ़ने के बजाय किसी प्रक्रिया को देखकर समझना आसान हो सकता है।

 

विमान के पंख से लेकर साइकिल तक समझाएगा

 

OpenAI ने पत्रकारों के साथ एक डेमो में Intelligent UI की क्षमताओं को दिखाया। कंपनी के मुताबिक, यदि कोई कॉलेज छात्र ChatGPT से पूछता है कि विमान का पंख लिफ्ट कैसे पैदा करता है, तो ChatGPT उस विषय को समझाने के लिए तुरंत कई डायग्राम तैयार कर सकता है। इन विजुअल्स के जरिए यह समझाने में मदद मिल सकती है कि विमान हवा में कैसे रहता है और उसके पंख किस तरह काम करते हैं।

 

कंपनी ने इसके अलावा कई दूसरे उदाहरण भी दिखाए, जिनमें रेसिपी के लिए विजुअल, साइकिल के मैकेनिक्स का डायग्राम, कई दिनों की हाइकिंग के लिए मैप और व्यक्तिगत बचत का कैलकुलेटर शामिल हैं।

 

पढ़ाई और रोजमर्रा के काम में भी उपयोगी

 

OpenAI के प्रोडक्ट मैनेजर Aarush Selvan के मुताबिक, ChatGPT अब तक मुख्य रूप से टेक्स्ट आधारित रहा है, लेकिन रोजमर्रा के कामों से लेकर सीखने तक कई ऐसे सवाल हैं, जिनके लिए सिर्फ टेक्स्ट सबसे उपयोगी जवाब नहीं होता। यानी नया Intelligent UI सिर्फ पढ़ाई के लिए ही नहीं, बल्कि रेसिपी प्लान करने, यात्रा की तैयारी करने, पैसे बचाने की योजना बनाने और किसी प्रक्रिया को समझने जैसे रोजमर्रा के कामों में भी उपयोगी हो सकता है।

 

यूजर्स तय कर सकेंगे कितने विजुअल चाहिए

 

Intelligent UI को कस्टमाइज भी किया जा सकेगा। अगर कोई यूजर हर जवाब में ज्यादा विजुअल नहीं चाहता है, तो वह इन्हें कम कर सकेगा। यानी ChatGPT का अनुभव यूजर की जरूरत और पसंद के अनुसार बदला जा सकेगा।

 

किन यूजर्स को मिलेगा फीचर?

 

OpenAI के अनुसार Intelligent UI को GPT-6 के साथ वैश्विक स्तर पर रोलआउट किया जा रहा है। यह फीचर Pro, Plus, Business और Enterprise यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि Free और Go टियर के यूजर्स के लिए इसे गुरुवार से उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस बदलाव के साथ ChatGPT का इस्तेमाल सिर्फ सवाल पूछने और टेक्स्ट जवाब पढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में यूजर किसी विषय को देखकर, इंटरैक्ट करके और जरूरत के मुताबिक विजुअल बदलकर भी समझ सकेंगे।

Amazon Great Indian Festival 2026: ₹30 हजार से कम में खरीदें ये 5 धांसू स्मार्टफोन्स! देखें पूरी डील्स

Amazon Great Indian Festival 2026: अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, लेकिन आपका बजट ₹30,000 से कम है, तो Amazon की Greate Indian Festival Sale में आपके लिए कई शानदार स्मार्टफोन डील्स मौजूद हैं। इस सेल में iQOO, OnePlus, Samsung, Redmi और Motorola जैसे ब्रांड्स के फोन कम कीमत पर मिल रहे हैं। साथ ही, बैंक ऑफर, कूपन, कैशबैक और EMI डील्स के जरिए कुछ फोन पर अतिरिक्त छूट भी मिल रही है। अगर आप अपना बजट बहुत ज्यादा बढ़ाए बिना फोन अपग्रेड करना चाहते हैं, तो यहां पर दी गई डील्स को ध्यान से पढ़ें।

Amazon Great Indian Festival 2026: 30,000 रुपये से कम कीमत वाले बेहतरीन फोन डील्स

Amazon Great Indian Festival 2026 सेल में स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए कई शानदार ऑफर्स मिल रहे हैं। सेल के दौरान SBI Debit और Credit Card से पेमेंट करने पर 10 प्रतिशत का इंस्टेंट डिस्काउंट मिल सकता है। वहीं, Amazon Pay ICICI Bank Credit Card यूजर्स को 5 प्रतिशत का अनलिमिटेड कैशबैक और Amazon Pay Later से योग्य EMI पर 10 प्रतिशत तक का कैशबैक मिल सकता है।

इन ऑफर्स की वजह से कई स्मार्टफोन की प्रभावी कीमत उनकी लिस्टेड कीमत से काफी कम हो जाती है। कुछ मॉडल्स पर बैंक ऑफर के साथ अतिरिक्त कूपन डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।

iQOO Z11xa 5G

iQOO Z11xa 5G पर Amazon सेल में बड़ी कीमत कटौती मिल रही है। इसका MRP 40,999 रुपये है, लेकिन सेल में इसे 24,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। इस कीमत में लागू बैंक और कूपन ऑफर्स का फायदा शामिल है।

OnePlus Nord CE 6 Lite

OnePlus Nord CE 6 Lite भी 30 हजार रुपये से कम बजट में एक अच्छा विकल्प है। इसका MRP 33,999 रुपये है, जबकि Amazon Sale में यह 26,999 रुपये में उपलब्ध है। इस प्रभावी कीमत में लागू Credit Card EMI ऑफर का फायदा शामिल है।

Samsung Galaxy M47 5G

Samsung Galaxy M47 5G पर भी Amazon Great Indian Festival Sale में अच्छी डील मिल रही है। इसका लिस्टेड प्राइस 46,999 रुपये है, लेकिन सेल के दौरान इसे 26,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। यानी इस फोन पर करीब 20,000 रुपये की सीधी बचत हो रही है।

Redmi Note 17 5G

Redmi Note 17 5G की कीमत सेल में 27,999 रुपये रखी गई है। हालांकि, यह Samsung Galaxy M47 5G से थोड़ा महंगा है, लेकिन इसकी कीमत को और कम किया जा सकता है। लिस्टिंग पर 1,000 रुपये का अतिरिक्त कूपन भी दिया जा रहा है। यह कूपन लागू शर्तों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है।

Motorola Edge 60 Fusion

30,000 रुपये के बजट में अगर आप थोड़ा प्रीमियम फोन खरीदना चाहते हैं, तो Motorola Edge 60 Fusion पर भी अच्छी डील मिल रही है। इसका MRP 37,999 रुपये है, लेकिन सेल में बैंक ऑफर्स को शामिल करने के बाद इसे 28,749 रुपये की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है।

Amazon Sale में 30 हजार रुपये से कम के बेस्ट फोन डील्स

स्मार्टफोनMRPसेल की प्रभावी कीमत
Motorola Edge 60 Fusion (12GB + 256GB)₹37,999₹28,749
Redmi Note 17 5G (6GB + 128GB)₹39,999₹27,999
Samsung Galaxy M47 5G (6GB + 128GB)₹46,999₹26,999
OnePlus Nord CE 6 Lite (8GB + 128GB)₹33,999₹26,999
iQOO Z11xa 5G (8GB + 128GB)₹40,999₹24,999

यह भी पढ़ें: Amazon Sale में Apple प्रोडक्ट्स पर धांसू डील्स! iPhone 17e से MacBook Air तक पर बंपर डिस्काउंट

Flipkart पर iPhone 17 Pro की कीमत हुई धड़ाम! ₹1.34 लाख वाला फोन ₹79,750 में खरीदने का मौका, जानें कैसे उठाएं फायदा

अगर आप iPhone 17 Pro खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो Flipkart का यह ऑफर आपके काम आ सकता है। दरअसल, ई- कॉमर्स साइट पर iPhone 17 Pro के 256GB मॉडल की कीमत फिलहाल 1,34,900 रुपये है। हालांकि, एक्सचेंज ऑफर और बैंक डिस्काउंट मिलाकर इसकी प्रभावी कीमत 79,750 रुपये तक आ सकती है।

इस लिस्टिंग पर सबसे बड़ा फायदा ₹51,150 तक का एक्सचेंज डिस्काउंट है। इसके बाद इसके बाद Flipkart Axis Bank Credit Card से पेमेंट करने पर 4,000 रुपये का अतिरिक्त डिस्काउंट दिया जा रहा है। वहीं, अगर आपको दोनों ऑफर्स का पूरा फायदा मिलता है, तो 1,34,900 रुपये वाला iPhone 17 Pro सिर्फ 79,750 रुपये की प्रभावी कीमत में पड़ सकता है।

Flipkart पर iPhone 17 Pro की डील प्राइस

डिटेल्सकीमत
लिस्टेड कीमत₹1,34,900
एक्सचेंज डिस्काउंट₹51,150 तक
Flipkart Axis Bank डिस्काउंट₹4,000
प्रभावी Buy Now कीमत₹79,750

बता दें कि ₹79,750 की कीमत, ₹1,34,900 की लिस्टेड कीमत में से ₹51,150 की ज्यादा से ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू और ₹4,000 के Flipkart Axis Bank डिस्काउंट को घटाकर निकाली गई है। वहीं, एक्सचेंज का फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा स्मार्टफोन एक्सचेंज किया जा रहा है, उसकी हालत कैसी है और दूसरी जरूरी शर्तें क्या हैं।

इसके अलावा, लिस्टिंग में Flipkart Axis Bank क्रेडिट कार्ड के साथ 5% कैशबैक ऑफर भी दिखाया गया है। हालांकि, यह ‘Buy Now’ कीमत में पहले से शामिल ₹4,000 के डिस्काउंट से अलग है, इसलिए खरीदारों को ऑफर के लागू होने वाले कॉम्बिनेशन के लिए फाइनल पेमेंट पेज देखना चाहिए।

साथ ही जिन खरीदारों के पास एक्सचेंज करने के लिए सही स्मार्टफोन है, उनके लिए Flipkart की मौजूदा डील iPhone 17 Pro की असरदार कीमत को ₹80,000 से कम कर देती है। हालांकि, ज्यादा से ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू इस बात पर अलग-अलग होगी कि कौन सा डिवाइस एक्सचेंज किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: Amazon Sale में Apple Watch Series 11 पर ₹10,000 से ज्यादा की बचत! Coupon और SBI कार्ड ऑफर का भी मिलेगा फायदा

Amazon Sale में Apple Watch Series 11 पर ₹10,000 से ज्यादा की बचत! Coupon और SBI कार्ड ऑफर का भी मिलेगा फायदा

Amazon की Great Indian Festival सेल अब शुरू हो गई है, जिसमें स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, वियरेबल्स और दूसरी चीजों पर शानदार डील्स मिल रही हैं। इस सेल में बचत करने के कई तरीके हैं, जैसे कि डिस्काउंट, बैंक ऑफर, कूपन, एक्सचेंज बेनिफिट और कुछ खास प्रोडक्ट्स पर नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन। ऐसे में अगर आप Apple का वियरेबल खरीदने का इंतजार कर रहे थे, तो Apple Watch Series 11 पर एक बहुत अच्छी डील मिल रही है। यह अब अपनी MRP से काफी कम कीमत पर उपलब्ध है, इसलिए आप कम खर्च में Apple स्मार्टवॉच खरीद सकते हैं। इसके अलावा, ई-कॉमर्स साइट SBI डेबिट कार्ड, SBI क्रेडिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड EMI ट्रांजैक्शन पर 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट भी दे रही है।

Apple Watch Series 11 पर मिल रहा डिस्काउंट

Amazon Great Indian Festival Sale में Apple Watch Series 11 पर अच्छी डील मिल रही है। इसका 46mm GPS वेरिएंट अभी Amazon पर 36,499 रुपये में लिस्टेड है। इसकी लिस्टेड कीमत 46,900 रुपये है, यानी सीधे तौर पर 10,401 रुपये की बचत हो रही है।

इतना ही नहीं, प्रोडक्ट पेज पर 500 रुपये का अतिरिक्त कूपन भी मिल रहा है। अगर आप चेकआउट के समय इस कूपन का इस्तेमाल करते हैं, तो Apple Watch Series 11 को 35,999 रुपये की प्रभावी कीमत में खरीद सकते हैं। इस तरह लिस्टेड कीमत के मुकाबले कुल 10,901 रुपये तक की बचत हो सकती है।

इसके अलावा, Apple Watch Series 11 पर बैंक ऑफर का भी फायदा मिल रहा है। अगर आप एलिजिबल SBI Credit Card या SBI Debit Card से पेमेंट करते हैं, तो आपको 3,000 रुपये तक का डिस्काउंट मिल सकता है। ऐसे में ऑफर के लिए योग्य ग्राहकों के लिए स्मार्टवॉच की प्रभावी कीमत और कम हो जाएगी।

Apple Watch Series 11 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Apple Watch Series 11, WatchOS 26 पर चलती है और इसमें 5G कनेक्टिविटी की सुविधा है। इसमें नई सिरेमिक कोटिंग वाला Ion-X ग्लास लगा है। Apple का कहना है कि इस कोटिंग की वजह से इसका फ्रंट ग्लास पिछली जनरेशन के मॉडल्स के मुकाबले दोगुना ज्यादा स्क्रैच-रेसिस्टेंट हो गया है। यह स्मार्टवॉच 100% रीसायकल किए गए टाइटेनियम और एल्युमीनियम से बनी है और फास्ट चार्जिंग के साथ 24 घंटे तक की बैटरी लाइफ देने का दावा करती है। इसमें लाइव ट्रांसलेशन की सुविधा भी है, जिससे यूजर्स सीधे वॉच से ही बातचीत का अनुवाद कर सकते हैं।

इसके अलावा, हेल्थ ट्रैकिंग के लिए, Watch Series 11 में ECG, Irregular Rhythm Notifications और नींद की क्वालिटी बताने वाला नया ‘Sleep Score’ फीचर दिया गया है। इसमें हाइपरटेंशन नोटिफिकेशन्स की सुविधा भी है, जो ऑप्टिकल हार्ट सेंसर के डेटा का इस्तेमाल करके यह मॉनिटर करते हैं कि यूजर की blood vessels दिल की धड़कनों पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं। यह फीचर 30 दिनों की अवधि में इस डेटा का विश्लेषण करता है और अगर हाइपरटेंशन से जुड़े संकेत मिलते हैं, तो यूजर्स को अलर्ट कर सकता है।

यह भी पढ़ें: Amazon Sale 2026 में लैपटॉप पर बंपर डील! Lenovo से Apple तक पर ऑफर, कीमत ₹54,990 से शुरू

केरल पुलिस ने घरेलू हिंसा के खिलाफ ‘स्पीक अप’ कार्यबल की शुरुआत की

केरल पुलिस ने घरेलू हिंसा को रोकने और पीड़ितों की सुरक्षा, कानूनी मदद और अन्य सहायता सुनिश्चित करने के लिए ‘स्पीक अप’ नाम से एक खास कार्यबल की शुरुआत की है।

इस पहल की खास जिम्मेदारी पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अजिथा बेगम (आईपीएस) को सौंपी गई है। इसका मकसद घरेलू हिंसा का सामना कर रहीं महिलाओं को अपनी चुप्पी तोड़ने और मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करना है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि ‘स्पीक अप’ का संदेश यह है कि महिलाओं को चुपचाप सहते नहीं रहना चाहिए और पुलिस घरेलू हिंसा के मामलों में सख्ती से कार्रवाई करेगी। 

उन्होंने कहा घरेलू हिंसा एक ऐसी खामोश कातिल है जो महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से खत्म कर देती है। पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी महिला आर्थिक या पारिवारिक डर के कारण न्याय से वंचित न रहे। यह पहल घरेलू हिंसा को रोकने, पीड़ितों को कानूनी मदद और काउंसलिंग देने तथा सुरक्षित रहने की जगह और आजीविका में मदद दिलाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

Also Read : मैं गलत कामों को बंद करने की ठान कर बैठा हूं, बंद कर के रहूंगा: मोदी

यह उन महिलाओं के लिए भी एक तरीका उपलब्ध कराएगा जो औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करा पातीं, ताकि वे सुरक्षित रूप से मदद मांग सकें। राज्य के गृह विभाग के आदेश के अनुसार यह कार्यबल वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारियों की देखरेख में काम करेगा। पुलिस ने बताया कि पिछले सात वर्षों में केरल में घरेलू हिंसा के कारण 92 महिलाओं की मौत हुई है, जबकि कई अन्य डर के कारण दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने से बचती हैं। ‘स्पीक अप’ शिकायत करने वालों को शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, उनके लिए उपलब्ध कानूनी उपायों और आगे की कार्रवाई को समझने में मदद करेगा। 

गौरतलब है कि यह पहल पीड़ितों की निजता को प्राथमिकता देगी। जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारी वर्दी की बजाय सादे कपड़ों में उनसे संपर्क करेंगे और एक तय अधिकारी हर मामले की निगरानी करेगा। यह अधिकारी हर सप्ताह मामले की प्रगति, काउंसलिंग की जरूरतों और पीड़ित की आजीविका में मदद की समीक्षा करेगा।

डिजिटल हेल्पलाइन, व्हाट्सएप और एक खास मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए शिकायतों को जल्दी दर्ज करने और समय पर मदद पहुंचाने के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा। पीड़ितों की निजी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसके लिए यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों जैसी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं के सहयोग से इस पहल के तहत स्थानीय स्तर पर आश्रय गृह और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बनाने का प्रस्ताव भी है।

सुश्री अजीथा बेगम ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें पुलिस मंजूरी प्रमाण-पत्र और पासपोर्ट न देना भी शामिल है।

Pic Credit : UNI

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का लोन जल्दी चुकाने से ₹69000 का ब्याज बचेगा, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना काफी आसान है, लेकिन उसका ब्याज जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब लोन की अवधि लंबी हो। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपके पास पैसा आ जाए तो लोन को जल्दी खत्म करना कितना फायदेमंद है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। ब्याज दर 12% सालाना है और लोन की अवधि 5 साल यानी 60 महीने है।

5 साल तक चलाया तो कितना ब्याज देंगे?

5 लाख रुपये के इस लोन पर 12% ब्याज के हिसाब से आपकी EMI करीब 11,122 रुपये बनेगी। आप 60 महीने तक यह EMI चुकाते हैं तो बैंक को कुल करीब 6.67 लाख रुपये देने होंगे।

यानी 5 लाख रुपये की मूल रकम के ऊपर करीब 1.67 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चला जाएगा।

3 साल में लोन खत्म किया तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आप इसी 5 लाख रुपये के लोन को 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने का फैसला करते हैं। इस स्थिति में आपकी EMI बढ़कर करीब 16,607 रुपये हो जाएगी

हालांकि, लोन की अवधि कम होने से कुल ब्याज काफी घट जाएगा। 36 महीने में आप बैंक को करीब 5.98 लाख रुपये चुकाएंगे। इसमें ब्याज करीब 97,858 रुपये होगा। यानी 5 साल की जगह 3 साल में लोन खत्म करने पर करीब 69,476 रुपये का ब्याज बच सकता है।

लोन की अवधिEMIकुल ब्याज
5 सालकरीब ₹11,122करीब ₹1.67 लाख
3 सालकरीब ₹16,607करीब ₹97,858
ब्याज में बचत—करीब ₹69,476

लेकिन EMI बढ़ाना हर किसी के लिए सही नहीं

यहां एक बात समझना जरूरी है। लोन जल्दी खत्म करने का मतलब है कि आपको हर महीने ज्यादा रकम EMI में लगानी होगी। इसलिए फैसला सिर्फ ब्याज बचत देखकर नहीं करना चाहिए।

अगर आपकी आमदनी स्थिर है और 16-17 हजार रुपये की EMI आसानी से संभाल सकते हैं, तो छोटी अवधि वाला लोन ब्याज के लिहाज से बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर ज्यादा EMI से आपका बाकी खर्च या इमरजेंसी फंड प्रभावित होता है, तो जल्दबाजी ठीक नहीं होगी।

दूसरे चार्ज का ध्यान रखना भी जरूरी

अगर आप पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक या NBFC के प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज भी जरूर देख लें। इन चार्ज की वजह से वास्तविक बचत अलग हो सकती है।

इस उदाहरण में 12% ब्याज दर और बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के हिसाब से 5 लाख रुपये का लोन 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने पर करीब 69 हजार रुपये का ब्याज बचता है। यानी सिर्फ लोन जल्दी खत्म करने से ही आपकी जेब में अच्छी-खासी रकम बच सकती है।

Home loan EMI : RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट, जानें आपके होम लोन पर क्या होगा इसका असर

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।