कैंसर की 137 दवाइयां हो सकती हैं 70% तक सस्ती, NPPA ने मुनाफे पर लगाई 30% की कैप

ड्रग प्राइसिंग रेगुलेटर NPPA ने शनिवार को 137 कैंसर-रोधी (Anti-Cancer) नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के ट्रेड मार्जिन यानि कि मुनाफे को 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह फैसला 9 नवंबर से प्रभावी होगा। इससे इन दवाओं की खुदरा कीमतें मौजूदा प्राइस स्ट्रक्चर के आधार पर 70 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद है।

नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने शनिवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (TMR) व्यवस्था लागू की है। NPPA, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स के तहत काम करता है।

मंत्रालय के अनुसार, यह कदम स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर बेस्ड है। इस समिति में देशभर के नामी कैंसर विशेषज्ञ, मेडिकल स्पेशलिस्ट्स, अस्पतालों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने के लिए 137 दवाओं की सिफारिश की थी। इस लिस्ट को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।

2019 में भी की थी ऐसी पहल

यह पहल NPPA के 2019 के एक पायलट पर बेस्ड है। उस समय 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तय किया गया था। इसके परिणामस्वरूप 526 ब्रांड्स की दवाओं के मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) में 90 प्रतिशत तक की कमी आई थी। मंत्रालय ने कहा है कि नई व्यवस्था के तहत अब कहीं अधिक संख्या में कैंसर की दवाओं को शामिल किया गया है।

दवा कंपनियों को दवाओं की रिवाइज्ड प्राइस लिस्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश करने और खुदरा विक्रेताओं व अस्पतालों तक इसकी जानकारी व्यापक रूप से पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर से संशोधित दरों पर ही दवाएं बेचनी होंगी और अपनी फार्मेसी में नई कीमतों को डिस्प्ले करना होगा। जो अस्पताल कैंसर की दवाओं का एक बड़ा हिस्सा सीधे खरीदते हैं, उन्हें अपनी वेबसाइट्स पर नई कीमतें प्रमुखता से दर्शानी होंगी। साथ ही यह सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी कि इन संशोधित कीमतों को वास्तव में लागू किया जाए।

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उपभोक्ता ऐसे पता कर सकते हैं सही कीमतें

उपभोक्ता NPPA की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल ऐप के जरिए दवाओं की अपडेटेड कीमतों की जांच कर सकते हैं। इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए राज्यों के ड्रग कंट्रोलरों को निर्देश दिया गया है कि वे मैन्युफैक्चरर्स, डीलर्स, खुदरा विक्रेताओं, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में इनका अनुपालन सुनिश्चित कराएं। दवा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे नोटिफाइड दवाओं के अपने मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर को बनाए रखें, ताकि देश भर के मरीजों को जरूरी दवाएं बिना किसी रुकावट के और समय पर मिलती रहें।

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर की दवाओं के दाम पर सरकार का बड़ा फैसला, 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसकी चपेट में आने वाले मरीज के साथ-साथ उसका पूरा परिवार जूझता है। यह बीमारी शरीर ही नहीं, आत्मबल और आर्थिक स्थिति को भी चोट पहुंचाती है। बहुत से मरीज और उनके परिजन इसका इलाज तक पूरा नहीं कर पाते हैं। लेकिन सरकार के इस कदम से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार इस जानलेवा बीमारी की दवाओं के दाम 70% तक घटाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30% तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कैंसर की अन्य दवाओं को मूल्य सुरक्षा देना

सरकार ने गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री में लगने वाले मार्जिन को सीमित करने को मंजूरी दे दी है। ये मार्जिन अधिकतम बिक्री मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित होंगे। इस कदम से दवाओं की कीमतें 70% तक कम होने और कैंसर के मरीजों को हर साल ₹2,500 करोड़ बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे उनकी जेब से चुकाने वाली रकम में काफी कमी आएगी।

शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल जरूरी कैंसर की दवाएं पहले से ही सरकार द्वारा तय की गई सख्त सीलिंग प्राइस के तहत हैं। लेकिन इस सूची से बाहर गैर सूचीबद्ध कैंसर दवाओं को सरकार के नए फैसले से मूल्य सुरक्षा मिलेगी। मरीजों तक पहुंचने से पहले दवाओं पर जोड़े जाने वाले मार्जिन को सीमित किया जाएगा।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत एक विशेषज्ञ समिति कवर की जाने वाली दवाओं की सूची को अंतिम रूप देगी। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) फिर फैसला लेगी और अधिसूचना जारी करेगी।

कम होगा कैंसर के इलाज का भारी खर्च

भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, हर एक लाख की आबादी पर लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। इलाज से मरीजों और उनके परिवारों पर पैसे का भारी बोझ पड़ता है। एनपीपीए के मार्केट डेटा के एनालिसिस में पाया गया कि गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की कीमत में औसतन लगभग 170% का मार्क-अप होता है। कुछ मामलों में यह 700% या उससे भी अधिक हो जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, मरीज तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन से गुजरने वाली दवा की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। रिटेल फार्मेसी, हॉस्पिटल फार्मेसी या ऑनलाइन फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं की कीमतें भी काफी अलग-अलग होती हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सहित राज्य अधिकारियों ने, मरीजों और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर दवाओं की बहुत ज्यादा कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन चिंताओं पर सार्वजनिक मंचों पर भी आवाज उठाई गई है। खासकर जिस कीमत पर दवाएं बेचने के लिए खरीदी जाती हैं और कंज्यूमर से ली जाने वाली MRP के बीच बड़े अंतर को लेकर।

महंगी कैंसर की दवाओं पर इतना अधिक मार्जिन मरीजों के इलाज का खर्च काफी बढ़ा देता है। नई लिमिट से बहुत ज्यादा मुनाफाखोरी पर रोक लगेगी, बाजार में गलत कीमत तय करने के तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा और मरीजों के लिए सही कीमतें पक्का करने में मदद मिलेगी।

2019 के फैसले से मिली राहत को आगे बढ़ाना

फरवरी 2019 में, सरकार के निर्देश पर, एनपीपीए ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की लिमिट लगा दी थी। सरकार के इस दखल से पता चलता है कि मार्जिन को सीमित करने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।

उस फैसले से MRP 91% तक कम हो गई, जिससे 526 ब्रांड पर सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई। इससे कैंसर के मरीजों पर पैसे का बोझ काफी कम हुआ और उनकी जिंदगी आसान हुई। इससे सबक लेते हुए और सप्लाई चेन में कीमत की समस्याओं को दूर करते हुए, सरकार ने अब बड़ी लिमिट को मंजूरी दे दी है।

उत्पादन बनाए रखना और लगातार उपलब्धता पक्का करना

कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के मैन्युफैक्चरर्स को अपने मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखना होगा। इस हस्तक्षेप में ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में बनी और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड, सभी श्रेणी की गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाएं शामिल होंगी। इससे मरीजों को कम कीमतों का काफी फायदा होगा। साथ ही, उन्हें जरूरी दवाएं लगातार मिलती रहेंगी।

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