High Return Stock: इस शेयर ने 5 साल में 8 गुना किया पैसा, क्या आप निवेश करना चाहेंगे?

High Return Stock: कोचिन शिपयार्ड (सीएसएल) के शेयरों ने बीते पांच सालों में निवेशकों को मालामाल किया है। यह समुद्री जहाज बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी की ऑर्डरबुक करीब 21,900 करोड़ रुपये की है। कंपनी ने नेवल और कमर्शियल शिपब्लिडिंग में बड़े मौकों को देखते हुए 6,500 करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर करने का प्लान बनाया है।

Cochin Shipyard की 21,900 करोड़ रुपये की कुल ऑर्डरबुक में 20,700 करोड़ हिस्सेदारी शिपबिल्डिंग की है। बाकी 1,200 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी शिप रिपेयर की है। यह इस बात का संकेत है कि मीडियम टर्म में कंपनी के रेवेन्यू को लेकर तस्वीर साफ है। कंपनी के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स है, जिनमें ASW Corvettes, Next Generation Missile Vessels, और LNG-powered container vessels शामिल हैं।

सीएसएल भारतीय नौसेना के नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल प्रोग्राम के लिए L1 बिडर बनी है। यह प्रोजेक्ट 5,000 करोड़ रुपये का है। कंपनी लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक प्रोग्राम के लिए भी बड़ी दावेदार है। कमर्शियल सेगमेंट में देखा जाए तो सीएसएल की नजरें मीडियम-रेंज टैंकर्स, प्लेटफॉर्म सप्लाई वेसल और बड़े गैस कैरियर्स पर हैं।

कमर्शियल प्रोजेक्ट्स से कंपनी की ऑर्डरबुक डायवर्सिफाय होगी। साथ ही देश में कर्मशियल शिपबिल्डिंग में बढ़ते मौकों का फायदा उठाने में मदद मिलेगी। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी की शिपबिल्डिंग से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 59 फीसदी बढ़कर 700 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, शिप रिपेयर रेवेन्यू 37 फीसदी घटकर 390 करोड़ रुपये रही। इसकी वजह आईएनएस विक्रमादित्य की रिफिट है, जिससे FY26 की पहली तिमाही में बेस काफी हाई था।

स्ट्रॉन्ग ऑर्डरबुक, बेहतर हो रहे एक्जिक्यूशन और बढ़ती कपैसिटी को देखते हुए मैनेजमेंट को आगे भी ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद है। कंपनी का टारगेट FY27 में शिपबिल्डिंग में 10-12 फीसदी ग्रोथ, शिप रिपेयर में 15-20 फीसदी ग्रोथ और कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ 12 फीसदी से ज्यादा का है।

सीएसएल के शेयर में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के 34 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है। लेकिन, ऑर्डरबुक को देखते हुए यह ज्यादा नहीं लगता है। कंपनी क्षमता बढ़ाने पर 6,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इससे लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर लगती हैं। हालांकि, बीते एक साल में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

Warren Buffett: वॉरेन बफे ने 1977 में बताए थे निवेश के 5 नियम, आज भी हर निवेशक के लिए हैं काम के

अमेरिका के मशहूर इनवेस्टर वॉरेन बफे की निवेश की सोच दशकों से दुनिया भर के निवेशकों को प्रभावित करती रही है। 1977 में, 47 साल की उम्र में उन्होंने Berkshire Hathaway के शेयरहोल्डर्स को अपनी पहली चिट्ठी लिखी थी।

उस समय कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 2.19 करोड़ डॉलर था। चिट्ठी में बफे ने निवेश और बिजनेस से जुड़े कई अहम विचार रखे थे। करीब पांच दशक बाद भी उनके ये 5 सबक शेयर बाजार के निवेशकों के लिए काम के हैं।

पहले बिजनेस को समझें, फिर शेयर खरीदें

शेयर चुनने के लिए बफे ने चार बातों की एक चेकलिस्ट दी थी। पहला, बिजनेस ऐसा होना चाहिए जिसे आप समझ सकें। दूसरा, उसके लंबे समय के ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट्स अच्छे होने चाहिए।

तीसरा, कंपनी का मैनेजमेंट ईमानदार और काबिल होना चाहिए। चौथा, शेयर सही कीमत पर मिलना चाहिए। बफे ने साफ कहा था कि वह सिर्फ इसलिए शेयर नहीं खरीदते थे कि कीमत कुछ समय में ऊपर जा सकती है। वो लंबे समय को ध्यान में रखकर शेयर चुनते हैं।

शेयर गिरने पर हमेशा डरें नहीं

बफे का मानना था कि अगर किसी कंपनी का बिजनेस अच्छा चल रहा है, तो उसके शेयर का भाव गिरना निवेशक के लिए मौका भी हो सकता है। कम कीमत पर उसी अच्छे बिजनेस में ज्यादा खरीदारी की जा सकती है।

यही बात SIP निवेशकों के लिए भी अहम है। बाजार गिरने पर निवेश जारी रखने से कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। फिर इन यूनिट्स को लंबी अवधि तक कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।

गलतियों को मानना जरूरी है

1977 में बर्कशायर का टेक्सटाइल बिजनेस लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा था। बफे ने स्वीकार किया कि वह पहले भी इसके बेहतर नतीजों का अनुमान लगाकर गलत साबित हुए थे।

इससे उन्होंने एक बड़ा सबक लिया। उन्होंने कहा कि बेहतर है ऐसे बिजनेस में काम किया जाए, जहां परिस्थितियां आपके पक्ष में हों। यानी बिजनेस को लगातार मुश्किल हालात से लड़ना न पड़े। अच्छी मैनेजमेंट भी कमजोर बिजनेस मॉडल को हमेशा नहीं बचा सकती।

सिर्फ बढ़ती कमाई को सफलता न मानें

बफे ने कहा कि सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कंपनी का प्रॉफिट बढ़ रहा है या नहीं। कई कंपनियों का प्रॉफिट इसलिए बढ़ता है क्योंकि वे लगातार ज्यादा पूंजी लगा रही होती हैं।

उनके मुताबिक, यह देखना ज्यादा जरूरी है कि कंपनी अपनी पूंजी पर कितना रिटर्न कमा रही है। इसी से बिजनेस की असली कैपिटल एफिशिएंसी का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है।

ऐसा बिजनेस बेहतर, जिसे बार-बार ज्यादा पैसा न चाहिए

बफे ने अपनी बर्कशायर हैथवे की रिटेल कंपनी See’s Candies का उदाहरण दिया था। कंपनी का प्रॉफिट बढ़ा, लेकिन इसके लिए बहुत ज्यादा अतिरिक्त पूंजी लगाने की जरूरत नहीं पड़ी।

उनका मानना था कि शानदार बिजनेस वह है, जो निवेश की गई पूंजी पर अच्छा रिटर्न दे और ग्रोथ के लिए बार-बार भारी निवेश न मांगता हो। ऐसे बिजनेस में कैपिटल एफिशिएंसी ज्यादा होती है।

लंबे समय की तस्वीर ज्यादा अहम

बफे ने निवेशकों को एक साल के नतीजों के आधार पर किसी कंपनी का फैसला करने से भी सावधान किया था। उन्होंने Berkshire के इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय कंपनी का बिजनेस काफी मजबूत था, लेकिन बाद के वर्षों में उसकी हालत कमजोर होती चली गई।

इसलिए किसी एक साल का प्रॉफिट या शेयर का शॉर्ट टर्म प्रदर्शन पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। निवेशकों को बिजनेस की लंबी अवधि की ग्रोथ, उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मैनेजमेंट की गुणवत्ता को देखना चाहिए।

1977 में Berkshire Hathaway के Class A शेयर की कीमत करीब 75 से 100 डॉलर के बीच थी। 2026 में, 96 साल की उम्र में पहुंचे वॉरेन बफे के दौर में यही शेयर 1 सितंबर तक करीब 7.52 लाख डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Hyundai Creta gets benefits of up to Rs 1 lakh in September 2026

Hyundai Creta gets benefits of up to Rs 1 lakh in September 2026
Hyundai Creta front quarter static

Hyundai India is offering an attractive range of benefits on select models in its portfolio. Depending on the model chosen, customers can avail up to Rs 1 lakh in benefits, valid until September 30, 2026.

Disclaimer: Offers/benefits may vary by city and are subject to stock availability. Buyers are advised to check with their local dealer for exact figures.

Hyundai Creta offers in September 2026

Benefits of up to Rs 1 lakh

The Creta mid-size SUV is available with benefits of up to Rs 1 lakh. The Korean carmaker’s best-selling model in India is offered with a trio of 1.5-litre engines, namely, a naturally aspirated petrol, a turbo-petrol, and a diesel engine. All engines are offered with manual and automatic gearboxes. Prices range between Rs 10.90 lakh and Rs 19.91 lakh, with the Creta taking on rivals like the Tata Sierra, Kia Seltos, Renault Duster, Skoda Kushaq, and Maruti Victoris.

Hyundai Grand i10 Nios offers in September 2026 

Benefits of up to Rs 70,000

Hyundai’s Grand i10 Nios is being offered with up to Rs 70,000 in benefits. Its most affordable model in India is offered solely with a 1.2-litre petrol engine paired to either a manual or AMT gearbox. A factory-fit dual-cylinder CNG kit can be fitted to this engine and is paired exclusively with a manual gearbox. The Grand i10 is priced between Rs 5.59 lakh to Rs 8.04 lakh and is Hyundai’s answer to the Maruti Swift and the Tata Tiago.

Hyundai i20 offers in September 2026 

Benefits of up to Rs 60,000

The Grand i10’s elder sibling, the i20, is being offered with benefits of up to Rs 60,000. Standard versions of the i20 come powered by a 1.2-litre petrol engine mated with either a manual or CVT automatic gearbox. The i20 is priced from Rs 5.99 lakh to Rs 11.59 lakh, and it competes with the Maruti Baleno, Tata Altroz, and the Toyota Glanza.

Hyundai Exter offers in September 2026

Benefits of up to Rs 50,000

Hyundai is offering benefits of up to Rs 50,000 on the Exter. The subcompact SUV was updated earlier this year with refreshed looks and feature additions. It is powered by a 1.2-litre petrol engine and is mated with either a manual or AMT gearbox. Like the Grand i10, it also gets a CNG kit fitted to this engine. The Exter’s price begins at Rs 5.8 lakh and goes all the way up to Rs 9.46 lakh. It takes on the likes of the Tata Punch.

Hyundai Aura offers in September 2026 

Benefits of up to Rs 30,000

The Aura compact sedan is available with benefits of up to Rs 30,000. The Aura shares the same petrol engine as the Grand i10 Nios and the Exter, along with a CNG version on offer. It is priced between Rs 5.99 lakh and Rs 8.59 lakh and competes with the Tata Tigor, Maruti Dzire, and the Honda Amaze.

एक दांत के इलाज के ₹2.37 लाख! NRI ने जब भारत की फ्लाइट का किराया देखा तो खुद ही रह गया हैरान

अमेरिका में 15 साल से रह रहे भारतीय नितिन मल्होत्रा इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक अनुभव की वजह से चर्चा में हैं। दांत में दर्द होने पर वह इलाज के लिए डेंटिस्ट के पास पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें जो खर्च बताया गया, उसने उन्हें हैरान कर दिया। इंश्योरेंस होने के बावजूद करीब 2,500 डॉलर यानी लगभग ₹2.37 लाख अपनी जेब से देने की बात सामने आई। इसके बाद नितिन ने अमेरिका और भारत में डेंटल ट्रीटमेंट की लागत की तुलना करते हुए एक सवाल अपने फॉलोअर्स के सामने रख दिया।

दांत में दर्द हुआ तो पहुंचे डॉक्टर के पास

नितिन ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए वीडियो में बताया कि दांत में तकलीफ होने के बाद वह जांच के लिए डेंटिस्ट के पास गए। क्लिनिक में सबसे पहले उनसे पूछा गया कि उनके पास कौन सा डेंटल इंश्योरेंस है। इंश्योरेंस कार्ड दिखाने के बाद उनके दांत का एक्स-रे किया गया।

नितिन के मुताबिक, सिर्फ एक्स-रे के लिए उनसे 180 डॉलर यानी करीब ₹17 हजार चार्ज किए गए। इसके बाद डॉक्टर ने जांच करके इलाज का अनुमानित खर्च बताया।

इंश्योरेंस के बाद भी देना था ₹2.37 लाख

नितिन का कहना है कि क्लिनिक ने उन्हें बताया कि सामान्य तौर पर इलाज का बिल करीब 8,000 डॉलर यानी लगभग ₹7.60 लाख हो सकता है। हालांकि, इंश्योरेंस के तहत एडजस्टमेंट के बाद उनकी जेब से 2,500 डॉलर देने की बात कही गई। इतनी बड़ी रकम सुनकर नितिन ने भारत में होने वाले डेंटल ट्रीटमेंट की कीमत से इसकी तुलना की। उनका कहना था कि भारत में दांतों की सफाई, रूट कैनाल और दूसरे इलाज अपेक्षाकृत कम खर्च में हो सकते हैं।

इलाज से सस्ती लगी भारत की फ्लाइट

नितिन ने बताया कि उन्होंने अमेरिका से भारत की फ्लाइट का किराया भी चेक किया। उनके मुताबिक, टिकट करीब 1,200 डॉलर यानी लगभग ₹1.14 लाख में मिल रही थी। यहीं से उनके मन में सवाल आया कि अगर भारत की फ्लाइट का खर्च ही करीब 1.14 लाख रुपये है और अमेरिका में सिर्फ डेंटल ट्रीटमेंट के लिए 2.37 लाख रुपये देने पड़ रहे हैं, तो क्यों न भारत जाकर इलाज कराया जाए।

‘क्या मुझे भारत जाकर इलाज कराना चाहिए?’

नितिन ने वीडियो में अपने फॉलोअर्स से पूछा कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए। अमेरिका में इलाज कराएं या भारत आकर दांतों का इलाज करवाएं? उन्होंने दावा किया कि भारत में रूट कैनाल, दांतों की सफाई और अन्य डेंटल केयर करीब ₹10 हजार से ₹15 हजार में हो सकती है। हालांकि, इलाज की वास्तविक कीमत डॉक्टर, शहर, प्रक्रिया और मरीज की स्थिति के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

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सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

नितिन के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की भी खूब प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने अमेरिका में डेंटल केयर को बेहद महंगा बताया। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी स्थिति में भारत की फ्लाइट बुक करना ही बेहतर है। एक अन्य यूजर ने कहा कि अमेरिका में दांतों का इलाज वाकई काफी महंगा पड़ता है। वहीं एक कमेंट में नितिन की तुलना पर सहमति जताते हुए लिखा गया कि यहां तो फ्लाइट का खर्च ही इलाज से कम नजर आ रहा है।

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Simple Wave Launched from Rs 1.10 lakh

Simple Wave Launched from Rs 1.10 lakh
An indoor shot showing the new Wave scooter with the founders of Simple Energy on stage

Simple, the Bengaluru based EV startup, has finally launched their family scooter Wave today. The scooter was first spotted testing back in March this year and was earlier referred to as Arrive during development. Simple is looking to position this as a mass market scooter compared to their sharp, performance focussed One and One S.

  1. Simple Wave has four variants; six, if you count instrument cluster options
  2. Lowest variant has a 2.2kWh battery, top variant has a 5kWh battery
  3. Delivery starts from 25 September 2026

Simple Wave: What you should know

New and improved motor, battery, and design

The Wave is based on an updated platform of the brand’s One scooter range. The first update is to the suspension, with the Wave using a twin shock rear suspension (compared to the One’s monoshock) and a much longer seat. Speaking of which, the Wave has a whopping 920mm long seat, claimed to be the longest scooter seat in the country. The other headline is the 70L storage in the Wave. Of which, 63 litres come from the under seat compartment, three litres on the front apron cubby, and four litres from a quick access pocket on the left side of the rider’s seat (called Pill Storage). An identical pocket for the right side is offered as an accessory.

The Wave has four variants by battery capacity. The base WaveS is offered in two battery capacities, 2.2kWh and 2.7kWh with 110km and 132km of IDC range, respectively. The middle variant, Wave, has a 3.7kWh battery and 171km of IDC range, and the top Wave+ variant has a 5kWh battery and 243km of IDC range. Wave+ currently has the highest range in its segment. Compared to the One range, the powertrain has seen updates all over. The 6.4kW motor has been updated to third generation and so has the Battery Management System, with the overall size of the motor reduced by 15 percent.

For context, the One uses a 5kWh battery and an 8.8kW motor; the One S has a 3.7kWh battery and a 6.4kW motor. They offer up to 265km and 190km of claimed range, respectively. Do note that there’s also a One Ultra with a 6.5kWh battery and a motor with 8.8kW of power with a claimed 400km range, but the delivery dates for that have not been announced so far. The One Ultra is currently the most expensive scooter from Simple, priced at Rs 2.35 lakh (ex-showroom, Bengaluru).

The scooter’s design has also shifted to a sleeker silhouette, letting go of the One’s sharp and aggressive lines. Simple claims it’s inspired by water, as opposed to air for the One range. However, the Wave retains the 7-inch TFT instrument cluster. The Wave+ gets it as standard, whereas the lower variants offer an option between the TFT or an InfinityBlack LCD cluster. The WaveS variants get three ride modes (EcoX, Eco, and Ride) with a claimed top speed of 75kph. Wave and Wave+ variants add an additional Sports mode and increases the top speed to 90kph. The 2.2kWh variant is available in two colours, 2.7kWh variants in four, and the 3.7kWh and 5kWh variants in six colours.

First spotted on the test mule, the Wave swaps the rear disc from the One range for a more cost-effective rear drum brake but retains the Combined Braking System (CBS) across all four variants. However, the One scooters offer traction control as standard rider aid, with the Wave limiting it to — called GripSense now — on the higher variants. Dimensions-wise, compared to the One range, seat height has been lowered by 5mm to 775mm and ground clearance has been increased by 3mm to 175mm.

The Simple Wave has been priced starting at Rs 1.10 lakh (ex-showroom, Bengaluru). Simple has announced that deliveries commence from September 25. Prices for the higher variants hasn’t been revealed, and Simple hasn’t clarified if the delivery date applies to all the variants. With its pricing, the Simple Wave directly rivals other EV scooters like the new Ather Konarc, Bajaj Chetak, Hero Vida, and TVS iQube, with range as its biggest trump card over all of them.
 

रिकवरी के बावजूद Sensex 374 प्वाइंट्स कमजोर, Nifty 23914 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध की आंच तेज हुई तो कच्चा तेल उबल पड़ा और इन दोनों ने मिलकर दुनिया भर में कोहराम मचा दिया। घरेलू स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया और निचले स्तर पर रिकवरी के बावजूद यह गहरे लाल बंद हुआ। ब्रोडर लेवल पर भी रिकवरी हल्की ही रही और शुरुआती कारोबार में 1% की गिरावट से हल्की रिकवरी के साथ निफ्टी मिडकैप 100 आज 0.53% तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आईटी और आईटी सेक्टर ने मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि यह संभल ही नहीं पाया। निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक और निफ्टी आईटी 1% से अधिक कमजोर हुआ। सरकारी बैंकों ने रिकवरी तो कर ली लेकिन इसके निफ्टी इंडेक्स में बढ़त मामूली रही तो दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 02 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 373.93 प्वाइंट्स यानी 0.49% की फिसलन के साथ 76,570.35 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 141.35 प्वाइंट्स यानी 0.59% की कमजोरी के साथ 23,914.45 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।

निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,86,72,129.50 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹269,860.14 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 10 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और पावरग्रिड सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Milky Mist Share Price: रॉकेट की तरह भागा शेयर, IPO में निवेश किया होता तो 15 दिन में 78% कमाया होता

Milky Mist Share Price: मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में 2 सितंबर को भी जबर्दस्त तेजी दिखी। 1 सितंबर को 10 फीसदी उछाल के बाद इस शेयर में अपर सर्किट लगा था। सिर्फ दो दिन में यह शेयर करीब 20 फीसदी उछला है। 2 सितंबर को कारोबार के अंत में यह शेयर 7.57 फीसदी चढ़कर 249.60 रुपये पर बंद हुआ।

जून तिमाही में कंपनी का शानदार प्रदर्शन

Milky Mist Dairy Food के शेयरों में 1 सितंबर को आई तेजी की वजह जून तिमाही में इसका प्रदर्शन है। जून तिमाही में कंपनी का स्टैंडएलोन नेट प्रॉफिट 1,000 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। कंपनी का रेवेन्यू भी इस दौरान 45 फीसदी बढ़कर 973 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 673 करोड़ रुपये था।

कंपनी वैल्यू-एडेड मिल्क प्रोडक्ट्स बनाती है

यह कंपनी वैल्यू-ऐडेड मिल्क प्रोडक्ट्स के बिजनेस में है। इनमें पनीर, चीज, दही, बटर, घी और आइसक्रीम शामिल हैं। कंपनी ने रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट फूड्स के बिजनेस में भी एंट्री ली है। कंपनी का प्रदर्शन FY24 से ही जोरदार रहा है। इसके रेवेन्यू का सीएजीआर 31 फीसदी रहा है।

पिछले महीने आया था कंपनी का आईपीओ

मिल्की मिस्ट का आईपीओ पिछले महीने आया था। कंपनी ने 140 रुपये के भाव पर इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर इश्यू किए थे। कंपनी के शेयर 18 अगस्त को 25 फीसदी प्रीमियम के साथ 165 रुपये पर लिस्ट हुए थे। इस इश्यू को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला था। यह आईपीओ 55 गुना सब्सक्राइब हुआ था। अगर आईपीओ में आपको शेयर मिला होता तो आज आपका मुनाफा 78 फीसदी होता।

बाजार के कमजोर सेटीमेंट में भी चढ़ा शेयर 

मिल्की मिस्ट के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी है, जब शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर है। 2 सितंबर को भी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.59 फीसदी यानी 141 अंक गिरकर 23,914 पर आ गया। सेंसेक्स भी 0.49 फीसदी यानी 373 फीसदी गिरकर 76,570 पर आ गया। कई सत्रों के बाद निफ्टी 24,000 के नीचे आया है।

Bihar Teacher Recruitment 4.0: 21 सितंबर से शुरू होंगे बिहार टीआरई 4 के लिए आवेदन? सरकार ने बढ़ाए म्यूजिक टीचर के पद

Bihar Teacher Recruitment 4.0: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने जल्द ही स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण (TRE-4.0) की शुरुआत कर सकता है। आयोग ने मंगलवार शाम को बताया कि चौथे चरण की स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन 21 सितंबर से शुरू हो सकता है। बिहार टीआरई 4.0 के लिए आवेदन की शुरुआत एक औपचारिक संशोधित विज्ञापन जारी होने और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में जरूरी बदलावों के बाद हो सकता है।

यह अपडेट बीपीएससी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध था। ट्वीट में लिखा है, “एडवरटाइजमेंट नंबर-14/2026, चौथे फेज के स्कूल टीचर रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (TRE-4.0) के तहत, स्कूल टीचर के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया, संशोधित विज्ञापन और ऑनलाइन आवेदन में जरूरी बदलावों के बाद, तारीख-21.09.2026 से शुरू होने की संभावना है।”

बीपीएससी टीआरई भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग स्कूल स्तर पर 32388 टीचिंग पद शामिल होंगे। कुल वैकेंसी में से, क्लास 1 से 5 के लिए 3,847 पोस्ट, क्लास 6 से 8 के लिए 8,563, क्लास 9 और 10 के लिए 3,877, और क्लास 11 और 12 के लिए 16,101 पोस्ट तय की गई हैं।

राज्य भर के सरकारी स्कूलों में 32,388 टीचर पदों को भरने के उद्देश्य से बीपीएससी टीआरई 4.0 आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले, 31 अगस्त को, बीपीएससी ने टीआरई 4.0 के लिए आवेदन प्रक्रिया को टालने का ऐलान किया था। जबकि आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होने वाला था।

आधिकारिक रिलीज में कहा गया था, “शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत 1 सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण के स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4.0) के तहत स्कूल शिक्षकों के कुल 32,388 खाली पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रोसेस में बदलाव की वजह से टाल दिए गए हैं। इस विज्ञापन से जुड़ी तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी।” शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक राज्य के ढेरों उम्मीदवार कई मुख्य मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। इसमें एग्जाम पैटर्न में बदलाव और नेगेटिव मार्किंग लागू करना शामिल था। विरोध कर रहे उम्मीदवारों से बातचीत के बाद, राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की कि टीआरई 4.0 एक ही चरण में आयोजित किया जाएगा।

टीआरई 4.0 की वैकेंसी बढ़ाई गई

राज्य सरकार ने उम्मीदवारों की म्यूजिक टीचर के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग के बाद, पदों की संख्या 111 बढ़ा दी।

IBPS RRB Recruitment 2026: 13000 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए आईबीपीएस ने जारी किया नोटिफिकेशन, आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन शुरू

Success Story: छत पर शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, ऐसे होने लगी लाखों की कमाई, महिला ने अपनाया ये तरीका

रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग आराम और परिवार के साथ समय बिताने की योजना बनाते हैं। लेकिन केरल की पूर्व हेडमिस्ट्रेस रेमाभाई एस की जिंदगी में रिटायरमेंट के बाद एक अलग ही अध्याय शुरू हुआ। अकेलेपन से निपटने के लिए घर में पौधे लगाने से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे ऐसे बिजनेस में बदल गया, जिससे अब वह करीब ₹4 लाख महीने की कमाई कर रही हैं।

मां की मौत के बाद बढ़ गया था अकेलापन

रेमाभाई ने 31 मई 2022 को 30 साल से ज्यादा समय तक जूलॉजी पढ़ाने के बाद रिटायरमेंट लिया। उनके पति रिटायर्ड सीनियर बैंक मैनेजर हैं और उस समय भी एक इंजीनियरिंग कॉलेज में काम कर रहे थे। वहीं उनका बेटा और बहू दोनों डॉक्टर हैं और दिल्ली में रहते थे। उसी साल उनकी मां का निधन हो गया। रिटायरमेंट और मां की मौत के बाद घर में अकेलापन उन्हें ज्यादा महसूस होने लगा। इसी दौरान उन्होंने खुद को व्यस्त रखने के लिए घर में पौधे उगाने का फैसला किया।

52 विदेशी फलों पर की रिसर्च, फिर चुना ड्रैगन फ्रूट

रेमाभाई ने शुरुआत किसी जल्दबाजी में नहीं की। उन्होंने जर्नल, ऑनलाइन जानकारी और अलग-अलग फार्म की यात्राओं के जरिए करीब 52 विदेशी फलों के बारे में जानकारी जुटाई। काफी रिसर्च के बाद उन्होंने Malaysian King Red Dragon Fruit किस्म को चुना। सीमित जगह में ज्यादा पौधे लगाने के लिए उन्होंने हाई-डेंसिटी फार्मिंग का तरीका अपनाया।

1,750 वर्ग फुट में लगाए 360 पौधे

घर के करीब 1,750 वर्ग फुट के हिस्से में उन्होंने 360 ड्रैगन फ्रूट पौधे लगाए। इसके लिए 90 स्थानीय स्तर पर बने कंक्रीट पोल लगाए गए और हर पोल पर चार पौधों को सहारा दिया गया। उन्होंने खर्च कम रखने के लिए GI पाइप और पुराने टायरों का भी इस्तेमाल किया। शुरुआती दौर में एक पौधे की स्टेम करीब ₹100 में खरीदी गई थी। मेहनत का नतीजा जल्दी दिखा। करीब छह महीने में पौधों में फूल आने लगे और मार्च 2023 से उन्होंने फल की पहली फसल लेना शुरू कर दिया।

शुरुआत में ₹50 हजार, फिर बढ़कर ₹1.5 लाख महीना

पहले 360 पौधों से उन्हें हर महीने ₹50 हजार से ज्यादा की आमदनी हुई। पौधों के बड़े होने के साथ कमाई बढ़कर करीब ₹1.5 लाख महीने तक पहुंच गई। उत्पादन के चरम समय में वह लगभग 750 किलो ड्रैगन फ्रूट हर महीने तैयार करने लगीं। वह फल करीब ₹175 प्रति किलो की दर से बेचती थीं। खास बात यह रही कि थोक खरीदार और ऑर्गेनिक स्टोर उनके घर से ही फल उठा लेते थे।

नई जमीन नहीं खरीदी, छत को बनाया अगला फार्म

बिजनेस बढ़ाने के लिए रेमाभाई के सामने अगली चुनौती थी बिना जमीन खरीदे उत्पादन बढ़ाना। घर की छत पर बड़ी मात्रा में मिट्टी ले जाना उन्हें सही नहीं लगा। इसलिए उन्होंने सोइल-लेस यानी कम मिट्टी वाली खेती के विकल्प पर प्रयोग शुरू किया। उन्होंने सामान्य मिट्टी और घर में तैयार किए गए कंपोस्ट की तुलना की। कंपोस्ट में पौधों की ग्रोथ बेहतर दिखने के बाद उन्होंने इसी तरीके को आगे बढ़ाया।

बैरल में लगाए 100 और पौधे

रेमाबाई ने छत पर 50 बैरल लगाए। इनमें कंपोस्ट और गोबर की खाद का मिश्रण इस्तेमाल किया गया और हर बैरल में दो पौधे लगाए गए। इस तरह छत पर 100 और ड्रैगन फ्रूट पौधे तैयार हो गए। करीब पांच महीने में इन पौधों पर फल आने लगे। अक्टूबर 2023 तक छत की खेती भी उत्पादन देने लगी थी। एक पौधे पर एक समय में करीब 10 से 20 फल तक दिखाई देते थे।

घर के कचरे से तैयार करती हैं खाद और लिक्विड फर्टिलाइजर

रेमाबाई की खेती की खासियत सिर्फ ड्रैगन फ्रूट उगाना नहीं है। वह घर और बगीचे से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल भी खेती में करती हैं। किचन वेस्ट, पत्तियां, कटहल का बचा हिस्सा, प्याज और सब्जियों के अवशेष जैसी चीजों से वह कंपोस्ट तैयार करती हैं। उनके पास तीन कंपोस्टिंग यूनिट हैं और वह 15 से ज्यादा तरह के लिक्विड प्रिपरेशन भी तैयार करती हैं। मछली के कचरे से वह फिश अमीनो एसिड भी बनाती हैं। उनके मुताबिक, अब तक 5,000 लीटर से ज्यादा यह तैयारी तैयार की जा चुकी है।

साल में ज्यादा लंबे समय तक मिलता है फल

उनके खेती के तरीके का एक फायदा यह भी है कि ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन लंबे समय तक चलता है। जहां आमतौर पर इसकी मुख्य फसल करीब पांच से छह महीने तक रहती है, वहीं रेमाबाई लगभग 10 महीने तक फल प्राप्त कर लेती हैं। जनवरी और फरवरी में उत्पादन में मुख्य अंतराल रहता है। उनके बगीचे में महीने में करीब तीन बार फसल होती है और हर बार लगभग 250 किलो फल निकलता है।

अब पौधों की कटिंग भी बन गई कमाई का जरिया

समय के साथ रेमाभाई के ड्रैगन फ्रूट पौधों की स्टेम कटिंग की मांग भी बढ़ने लगी। उन्होंने इसे अलग आय के स्रोत के रूप में विकसित कर लिया। वह एक कटिंग करीब ₹70 में बेचती हैं और अब तक भारत, मालदीव और श्रीलंका में उनके 2,500 से ज्यादा ग्राहक बताए जाते हैं। बड़े ऑर्डर कुरियर के जरिए भेजे जाते हैं। एक दिन में तेलंगाना के लिए 5,500 स्टेम कटिंग का ऑर्डर भी भेजा गया।

सिर्फ पौधे नहीं बेचतीं, तरीका भी सिखाती हैं

रेमाबाई अपने ग्राहकों को सिर्फ कटिंग देकर नहीं छोड़तीं। वह उन्हें पौधे लगाने और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी देती हैं और आगे की ग्रोथ पर भी नजर रखती हैं। उनके मुताबिक, सही परिस्थितियों में स्टेम से करीब छह महीने में फल मिलना शुरू हो सकता है।

रिटायरमेंट का शौक बना पूरा बिजनेस

रेमाबाई की कहानी की खास बात यह है कि उन्होंने बिजनेस शुरू करने के लिए न बड़ी जमीन खरीदी और न ही भारी निवेश किया। घर के आंगन और छत जैसी सीमित जगह का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पहले पौधे लगाए, फिर रिसर्च की, प्रयोग किए और धीरे-धीरे खेती को कमाई के मॉडल में बदल दिया।

आज ड्रैगन फ्रूट, छत पर खेती और स्टेम कटिंगइन अलग-अलग स्रोतों से उनकी कुल मासिक कमाई करीब ₹4 लाख बताई जाती है। रिटायरमेंट के बाद अकेलेपन से बचने के लिए शुरू हुआ पौधों का शौक अब उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी बन चुका है।

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बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया ‘नो-ईटिंग’ अलर्ट!

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया 'नो-ईटिंग' अलर्ट!

Bihar no eating fish alert

Bihar no eating fish alert: नेपाल में हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर दिखाई दे रहा है। नेपाल की नदियों से बहकर विशालकाय और असामान्य वजन वाली मछलियां उत्तर बिहार की गंडक (Gandak River) और कोसी नदियों में पहुंच गई हैं।

 

स्थानीय लोग और मछुआरे इन विशाल मछलियों को पकड़ने के लिए नदियों के किनारे जुट रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन मछलियों को पकड़ने और खाने पर सख्त रोक लगा दी है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

गंडक नदी में अचानक कैसे आईं ये विशाल मछलियां?

नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी, त्रिशूली और गंडकी नदी प्रणालियों में भीषण फ्लैश फ्लड आया।

  • नेपाल के हैचरी और प्राकृतिक जलाशयों से बहाव : नेपाल के ऊपरी इलाकों में स्थित बड़े मत्स्य पालन केंद्रों (Fish Farms/Hatcheries) और प्राकृतिक झीलों के तटबंध बाढ़ में बह गए।
  • तेज बहाव के साथ भारत में प्रवेश : भारी पानी के बहाव और गाद (Sedimentation) के साथ 10 किलो से लेकर 40-50 किलो तक की विशालकाय मछलियां बहकर बिहार के वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के मैदानी इलाकों में आ गईं।

प्रशासन क्यों कर रहा है इन मछलियों को खाने से मना?

विशालकाय मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में इन्हें खाने की होड़ मच गई है, लेकिन प्रशासन और जिला मत्स्य अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण निम्नलिखित हैं:

 

(A) पानी में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं का मिश्रण (Heavy Metal Contamination)

नेपाल में आई बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चट्टानों, खदानों के मलबे और औद्योगिक कचरे को बहाकर लाई है। गंडक नदी में बहकर आ रही मछलियों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा अत्यधिक होने की आशंका है, जो मानव शरीर के लिए विषैले साबित हो सकते हैं।

 

(B) दूषित और सड़ी हुई मछलियों का खतरा (Bacterial Contamination)

बाढ़ के तीव्र बहाव में दम घुटने (Oxygen Depletion) और पत्थरों से टकराने के कारण कई मछलियां रास्ते में ही मर चुकी थीं या घायल हो गई थीं। पानी में पड़े रहने से इनमें ई-कोलाई (E-coli) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक जीवाणु पनप चुके हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से:

  • फूड पॉइज़निंग (Food Poisoning)
  • पेट में गंभीर संक्रमण और उल्टी-दस्त
  • लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

(C) एलियन/इन्वेंसिव स्पीशीज (Invasive Species) का खतरा

प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि नेपाल के हैचरी से बहकर आई कुछ मछलियां 'सकर-माउथ कैटफिश' (Sucker-mouth Catfish) या 'थाई मांगुर' जैसी विदेशी नस्ल की हो सकती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से विषाक्तता होती है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और एडवाइजरी

  • नदी घाटों पर धारा 144 व पुलिस बल : वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में लोगों को पानी के पास जाने और जाल बिछाने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • बाजारों में बिक्री पर रोक : स्थानीय बाजारों में नेपाल से बहकर आई संदिग्ध मछलियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
  • सैंपलिंग और लैब जांच: मत्स्य विभाग ने इन मछलियों के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे हैं, ताकि पानी और मछली में किसी भी प्रकार के टॉक्सिन (विष) की पुष्टि की जा सके।

नेपाल की बाढ़ से आई ये विशाल मछलियां पहली नजर में भले ही एक अवसर लग रही हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने तक इन मछलियों का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और नदी से पकड़ी गई संदिग्ध मछलियों को खाने से पूरी तरह परहेज करें।