Chief Minister Pushkar Singh Dhami : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज समस्त प्रदेशवासियों को विजयादशमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर विनम्रता की विजय का प्रतीक है। यह हमें सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि हम सत्य और धर्म का साथ न छोड़ें, तो विजय अवश्य प्राप्त होती है। आज देहरादून और मसूरी में रावण दहन के आयोजन होंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, समस्त प्रदेशवासियों को विजयादशमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर विनम्रता की विजय का प्रतीक है। यह हमें सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि हम सत्य और धर्म का साथ न छोड़ें, तो विजय अवश्य प्राप्त होती है। आइए, इस अवसर पर हम अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता का संकल्प लें।
#Vijayadashami
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) October 20, 2026
उत्तराखंड में दशहरा (विजयादशमी) का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में धूमधाम, सांस्कृतिक आयोजनों और भव्य रावण दहन के साथ मनाया जाता है। राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में बन्नू बिरादरी की ओर से भव्य दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
विजयादशमी पर देहरादून और मसूरी में रावण दहन के आयोजन होंगे। परेड ग्राउंड में मुख्य कार्यक्रम को देखते हुए यातायात और पार्किंग व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जबकि मसूरी और कांवली में भी रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा।
यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए पुलिस ने 11 स्थानों पर बैरियर लगाने के साथ ही सामान्य और वीआईपी वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग निर्धारित की है। पुलिस ने लोगों से निर्धारित पार्किंग में ही वाहन खड़े करने और संभव हो तो दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
Renault has expanded the new Duster line-up with a strong-hybrid option, joining the existing 1.0-litre and 1.3-litre turbo-petrol engines. While the hybrid shares much of its design and cabin layout with the petrol versions, there are differences in styling, equipment and, most importantly, how the two powertrains deliver performance and efficiency. Here’s a closer look at what sets them apart.
Renault Duster turbo petrol vs hybrid: Exterior
The illuminated grille and badges are the main styling difference
Duster turbo petrol vs hybrid
The Duster hybrid retains the turbo-petrol model’s overall design, including its eyebrow-shaped LED daytime running lamps, chunky body cladding, roof rails and C-pillar-mounted rear door handles. It also has the same 212mm ground clearance.
The main styling changes are an illuminated ‘Duster’ grille emblem and ‘E-Tech Hybrid’ badges on the front doors and tailgate. The Hybrid version also gets frequency-dependent dampers. Boot capacity is lower than in the turbo-petrol versions, although the overall exterior design remains largely unchanged.
Renault Duster turbo petrol vs hybrid: Interior and features
The cabin layout is similar, but the upholstery and equipment differ
Duster turbo petrol vs hybrid
The hybrid follows the turbo-petrol Duster’s dashboard layout, with a dual-screen setup and an e-shifter on the centre console. The hybrid gets a different upholstery scheme from the turbo-petrol Duster, with black upholstery and grey stitching on the Evolution, Desert Beige semi-leatherette on the Techno and Dune Brown leatherette on the Emotion. The hybrid also gets a smaller headrest.
The Duster hybrid is offered in Evolution, Techno and Emotion trims, while the turbo-petrol range gets Evolution, Techno, Techno+, Iconic and Iconic Launch Edition variants.
The hybrid and turbo-petrol Duster share some equipment across their respective trims, but there are differences. The hybrid Evolution gets a 7-inch digital driver’s display, a 10.1-inch touchscreen and dual-zone automatic climate control. The turbo-petrol Evolution has the same touchscreen and driver’s display, but gets single-zone manual air conditioning. Both the hybrid and turbo-petrol Techno trims get a panoramic sunroof.
At the top of the range, the hybrid Emotion gets a 10.25-inch digital driver’s display, ventilated and electrically adjustable front seats, and a powered tailgate. The turbo-petrol Iconic offers these features too, but additionally gets a 360-degree camera and Level 2 ADAS, which are not available on the hybrid.
Renault Duster turbo petrol vs hybrid: Engine and Performance
The 1.3-litre turbo-petrol makes more torque
Duster turbo petrol vs hybrid
The Duster turbo-petrol is available with two engine options. The 1.0-litre, three-cylinder unit produces 100hp and 166Nm and is paired with a 6-speed manual gearbox. The larger 1.3-litre, four-cylinder engine develops 163hp and 280Nm, and is available with a 6-speed manual or a 6-speed dual-clutch automatic gearbox.
The hybrid uses a naturally aspirated 1.8-litre, four-cylinder petrol engine paired with two electric motors: a 20hp generator and a 49hp motor that drives the wheels. The system produces a combined 160hp and 172Nm, with a 1.4kWh battery supporting the setup. It uses a ‘multi-mode’ automatic gearbox with two electric gears and four petrol gears.
The hybrid system automatically switches between six operating modes, including all-electric, petrol-only and series and series-parallel hybrid modes. Renault claims the Duster hybrid can cover up to 80 percent of city driving in pure electric mode and accelerate from 0-100kph in a claimed 9.61 seconds.
While the hybrid’s combined output of 160hp is close to the 1.3-litre turbo-petrol’s 163hp, its claimed torque figure of 172Nm is lower than the turbo-petrol’s 280Nm.
Renault Duster turbo petrol vs hybrid: mileage
Duster hybrid mileage is 10.55kpl higher than turbo-petrol DCT
Powertrain
Transmission
ARAI-claimed mileage
1.0-litre turbo-petrol
6-speed manual
19.41kpl
1.3-litre turbo-petrol
6-speed manual
17.75kpl
1.3-litre turbo-petrol
6-speed DCT automatic
18.45kpl
1.8-litre strong hybrid
Multi-mode automatic
29kpl
The hybrid’s claimed mileage is significantly higher than that of either turbo-petrol engine. The difference is 9.59kpl over the 1.0-litre turbo-petrol manual, 11.25kpl over the 1.3-litre turbo-petrol manual and 10.55kpl over the 1.3-litre turbo-petrol DCT. At 29kpl, the hybrid’s claimed mileage is around 57 percent higher than that of the DCT version.
The hybrid has a 50-litre fuel tank, the same capacity as the turbo-petrol versions. Renault claims a driving range of more than 1,400km on a full tank of the Hybrid variant.
Duster turbo petrol vs hybrid: Price
The hybrid costs more, even though it misses some features available on the top-spec turbo-petrol
Trim
Duster hybrid
Duster turbo-petrol
Authentic
–
10.49 (1.0 MT)
Evolution
16.99
11.69 (1.0 MT); 12.99 (1.3 MT); 14.49 (1.3 DCT)
Techno
18.99
13.49 (1.0 MT); 14.49 (1.3 MT); 15.89 (1.3 DCT)
Techno+
–
15.29 (1.3 MT); 16.69 (1.3 DCT)
Emotion / Iconic
19.49 (Emotion)
16.99 (Iconic MT); 18.49 (Iconic DCT)
MT = manual; DCT = dual-clutch automatic
The hybrid’s introductory prices apply to deliveries until December 31, 2026. In Evolution trim, the hybrid costs Rs 2.50 lakh more than the 1.3-litre turbo-petrol DCT, while the top-spec Emotion hybrid is Rs 1 lakh more than the Iconic DCT. The hybrid offers higher claimed mileage but misses out on the 360-degree camera and Level 2 ADAS available on the turbo-petrol Iconic.
The hybrid version suits buyers who cover long distances and prioritize fuel efficiency, while the 1.3-litre turbo-petrol is worth considering for its higher torque and additional driver-assistance features.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हूती विद्रोहियों के हमले के डर से बंकरों वाले महल में रहने को मजबूर हैं। उनके पास करोड़ों का महल है लेकिन बढ़ते हमलों के डर से उन्हें बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। बीते कुछ समय में हूतियों ने सऊदी पर हमले बढ़ा दिए हैं। इसी महीने रियाद एयरपोर्ट को 20 बार निशाना बनाया गया। इसके चलते एयरपोर्ट बंद है और उड़ाने रद्द हैं। प्रिंस सलमान की सुरक्षा के लिए चुने गए गार्ड तैनात रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा के लिए खास तौर पर चुने गए गार्ड तैनात हैं। हूती विद्रोहियों के हमलों के खतरे को देखते हुए सऊदी अरब अपने शाही महलों और तेल ठिकानों की सुरक्षा भी बढ़ा रहा है। इसके लिए मिसाइलों को हवा में रोकने वाले एयर डिफेंस सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा रहा है। इस महीने सऊदी के एयरपोर्ट पर हुए बड़े हमले 6 अक्टूबर: जजान और नजरान के एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। खामिस मुशैत की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी एयर डिफेंस ने रोकने का दावा किया। 7 अक्टूबर: रियाद और अभा के एयरपोर्ट पर हमले हुए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, तीन विदेशी नागरिकों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। 8 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर एक और हमला हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई। सरकारी एयरलाइन सऊदिया का एक विमान भी क्षतिग्रस्त हुआ। 10 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में 1 भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। 11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट के पर एक मिसाइल या ड्रोन गिरा। एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। क्राउन प्रिंस सलमान की आलीशान जिंदगी से जुड़े किस्से 41 साल के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आलीशान जिंदगी से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं। कहीं उन्होंने करोड़ों रुपए खर्च कर पार्टी की, तो कहीं हजारों करोड़ की पेंटिंग, हवेली और यॉट से उनका नाम जुड़ा। 1. मालदीव में एक महीने के लिए 474 करोड़ रुपए में लिया रिसॉर्ट लेखक जस्टिन शेक की किताब ‘ब्लड एंड ऑयल’ के मुताबिक, जुलाई 2015 में सलमान ने मालदीव का वेला रिसॉर्ट एक महीने के लिए करीब 474 करोड़ रुपए में किराए पर लिया था। यहां पिटबुल, साइ और डीजे अफ्रोजैक ने परफॉर्म किया। एक रात सलमान खुद मंच पर पहुंचे और अपने पसंदीदा गाने बजाने लगे। पार्टी की खबर बाहर आने के बाद इसे एक हफ्ते के भीतर खत्म कर दिया गया। 2. 4268 करोड़ की पेंटिंग की खरीद से जुड़ा नाम लियोनार्डो दा विंची की पेंटिंग ‘साल्वेटर मुंडी’ 2017 में करीब 4268 करोड़ रुपए में बिकी थी। इसे दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग में गिना जाता है। इस पेंटिंग की खरीद से सलमान का नाम भी जुड़ा था। हालांकि, अबू धाबी के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने दावा किया था कि पेंटिंग उसने खरीदी है। 3. फ्रांस में 2848 करोड़ की हवेली सलमान ने 2015 में फ्रांस के वर्साय में करीब 2848 करोड़ रुपए की एक आलीशान हवेली खरीदी थी। 57 एकड़ में फैली यह हवेली बाहर से पुराने शाही महल जैसी दिखती है। इसमें सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल और शानदार सजावट है। हवेली में एक ऐसा कमरा भी है, जहां पानी के बीच बैठकर ऊपर तैरती मछलियों को देखा जा सकता है। यहां के फव्वारे, लाइटें और एसी तक आईफोन से चलाए जा सकते हैं। 4. आधे घंटे यॉट देखी, पसंद आई तो दोगूनी कीमत में खरीदी रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में फ्रांस में छुट्टियां मनाते समय सलमान को ‘सेरेन’ नाम की सुपरयॉट पसंद आ गई। उन्होंने करीब आधे घंटे तक इसे देखा और फिर लगभग 5472 करोड़ रुपए में खरीद लिया। इस यॉट में दो हेलीपैड हैं। इसके अलावा, इसमें एक खास कमरा भी है, जहां से पानी के अंदर का नजारा देखा जा सकता है। 5. नियोम के महल में निजी समुद्र तट और 10 हेलीपैड सऊदी अरब के नियोम में लाल सागर के किनारे सलमान का एक आलीशान महल भी है। यहां निजी समुद्र तट, बड़े-बड़े बगीचे और गोल्फ कोर्स हैं। महल में हेलिकॉप्टर उतारने के लिए 10 हेलीपैड भी बनाए गए हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया:5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, 4 की मौत; प्रधानमंत्री मौजूद थे, बाल-बाल बचे यमन के अदन शहर में हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के समय प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी और सरकार के कई मंत्री परिसर में मौजूद थे, सभी सुरक्षित हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
– मुख्यमंत्री योगी ने अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सहित नाथपंथ के मनीषियों को नमन किया।
– अखंड ज्योति और मंदिर परिसर के सभी देव विग्रहों की भी मुख्यमंत्री योगी ने की पूजा
– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोशाला में गोपूजन किया।
Chief Minister Yogi Adityanath : गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी (दशहरा) के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का विशिष्ट पूजन-अनुष्ठान किया। विशेष पारंपरिक परिधान में मुख्यमंत्री योगी ने गोरक्षपीठ की परंपरा का अनुसरण करते हुए मंगलवार सुबह विधि-विधान से महायोगी गोरखनाथ जी की पूजा-आराधना कर चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की। गोरक्षपीठ में विजयादशमी का विशिष्ट अनुष्ठान दो घंटे से अधिक समय तक चला।
विशिष्ट पूजन की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में शक्तिपीठ से हुई, जहां शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से ही जगतजननी आदिशक्ति की आराधना के अनुष्ठान चल रहे थे। शक्तिपीठ में वेदी पूजन तथा लोकमंगल की प्रार्थना करने के बाद मुख्यमंत्री योगी मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ व अन्य साधु-संतों के साथ, संस्कृत विद्यापीठ के आचार्यगण व वेदपाठी छात्रों के वैदिक मंत्रोच्चार, शंख, डमरू, घंट, तुरही की गूंज के बीच गुरु गोरखनाथ जी के मुख्य मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे।
यहां उन्होंने नाथपंथ के विधान से महायोगी गोरखनाथ जी की विशिष्ट पूजा की। विविध पूजन सामग्री के साथ शक्तिपीठ की वेदी पर उगाए गए जौ के जवारे चढ़ाए, आरती उतारी और हाथ से चंवर झुलाकर श्रद्धासेवा अर्पित की। गुरु गोरखनाथ जी की विधिवत आराधना करने के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर में अखंड ज्योति, समस्त देव विग्रहों, नाथपंथ के मनीषियों के विग्रहों, अखंड धूना, यज्ञशाला, भीम सरोवर का विशिष्ट पूजन किया।
उन्होंने करबद्ध होकर महायोगी गोरखनाथ जी और सभी देव विग्रहों की परिक्रमा भी की। पूजन के क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सहित अन्य संतों की समाधि स्थल पर भी पहुंचे। उन्होंने अपने गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज, योगिराज बाबा गंभीरनाथ जी महाराज आदि मनीषियों की प्रतिमा समक्ष शीश नवाया और विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया।
इस दौरान नाथपंथ के परंपरागत विशेष वाद्य यंत्र नागफनी, शंख, ढोल, घंट, डमरू, तुरही और बैंड बाजे की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्ति तरंगों से झंकृत हो रहा था। विजयादशमी के विशिष्ट पूजन में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के सुखमय, शांतिमय और समृद्धिमय जीवन की कामना की।
विजयादशमी पर गोपूजन कर मुख्यमंत्री योगी ने की गोसेवा
गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी के विशिष्ट पूजन के क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में गोपूजन किया और गोमाता को श्रद्धाभाव से गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की। गोसेवा के दौरान वह गोवंश को दुलारते भी रहे। उन्होंने भीम सरोवर में मछलियों को भी लाई खिलाई।
We first rode the Norton Manx R superbike overseas in May and this was followed by the Atlas adventure bike in July. At the time in June, TVS had said that the Atlas would be introduced in India later in the year. It had also scheduled the launch of TVS Paddock, its premium retail channel, for the second quarter of FY27. Paddock will serve as the retail outlet for both Norton products as well as select TVS premium vehicles across the country.
Norton motorcycles will be retailed out of a few exclusive Norton outlets as well as a new TVS Paddock dealer network
Three paddock outlets will be set up by December 2026
Norton line-up will be initiated with the Atlas, followed by Manx R and the new single-cylinder motorcycle
Norton’s reach in Europe, US and India
Indian dealer network still being established
We recently reported on the company’s new 450cc class liquid cooled single cylinder roadster making its debut at ECMA 2026. In its official response to our queries sent, a company spokesperson said, “Norton is set to launch in India soon following the brand’s presence at EICMA this year, when the next key stage of the resurgence will be revealed”.
However, the company did not provide an updated Paddock rollout schedule. Current preparations are understood to point to around three Paddock outlets by December, although a larger network is being sought. The number of outlets that will be operational when motorcycle sales begin has yet to be finalised. Under the tentative India rollout plan, the Atlas could launch in January 2027, with the Manx following by March if that schedule holds. The sequence could see Norton introduce three to four products during 2027, although the final model mix and launch dates have not been announced. As for the new single cylinder roadster, that bike is likely to be launched in India alongside overseas markets in the second half of next year.
While Norton’s India innings is yet to begin, the company spokesperson says that the Manx R and Atlas launched earlier this year are being delivered to customers across Europe. The naked Manx and road-biased Atlas GT have not yet been formally launched. The company said it now has more than 50 retailers across 10 markets, including the UK, Italy, France, Germany and Spain. Preparations for a United States launch are continuing, subject to the final stages of vehicle certification.
“As Norton continues to build the brand globally, it is important to ensure that Norton’s entry into India is equally meaningful and thoughtfully executed,” the spokesperson said. “The positive response to Norton’s products in Europe gives us confidence, and more on Norton’s India plans will be shared in due course.”
किसान अगर कुछ नया करने की ठान ले, तो खेती से भी करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले महेश असाबे ने इसे सच कर दिखाया है। उनके परिवार ने कुछ साल पहले सिर्फ 3 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया था। आज उनका फार्म 60 एकड़ तक फैल चुका है और सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ रुपये पहुंच गया है। खास बात यह है कि महेश ने खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक अपनाई और दूसरे देशों से भी सीख ली। उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।
पिता ने शुरू की थी खेती
महेश असाबे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकोला गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करता था। महेश ने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड फूड प्रोसेसिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।
साल 2013-14 में उनके पिता ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस फल के बारे में पढ़ा था और जाना था कि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। सूखे इलाकों में भी इसकी खेती की जा सकती है। यही बात उन्हें इस फसल की ओर खींच लाई।
बांग्लादेश से मंगाए 9,000 पौधे
ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना परिवार के लिए एक नया प्रयोग था। इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश से करीब 9,000 पौधे मंगवाए। Startup Pedia के मुताबिक, पौधों पर शुरुआती निवेश करीब ₹9.9 लाख था। परिवार ने तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। साल 2015-16 में पहली फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ करीब पांच टन उत्पादन मिला। उपज बेचकर परिवार को लगभग ₹5 लाख की कमाई हुई।
धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की मांग और कीमत बढ़ने लगी। साल 2017 तक परिवार इसे ₹150 से ₹250 प्रति किलो के भाव पर बेचने लगा। इससे खेती को बड़े स्तर पर ले जाने का हौसला मिला।
इजरायल और वियतनाम से सीखी खेती की नई तकनीक
महेश ने खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। पढ़ाई के दौरान वह 45 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इजरायल गए। वहां उन्होंने पानी का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक कृषि तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखे। साल 2018 में उन्होंने वियतनाम का दौरा भी किया, जहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के तरीकों को समझा। लौटकर उन्होंने अपने खेत में एक-एक एकड़ के अलग-अलग प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए, ताकि खेती की विभिन्न तकनीकों को आजमाया जा सके।
3 एकड़ से 60 एकड़ तक पहुंचा फार्म
आज महेश असाबे Rukmini Farms and Nursery का संचालन करते हैं। उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट के अलावा अनार, सीताफल और अमरूद भी उगाए जाते हैं।
खेती में पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और तालाब जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। निराई जैसे नियमित कामों में मशीनों का इस्तेमाल भी शुरू किया गया, जिससे खेती को संभालना आसान हुआ।
Startup Pedia के मुताबिक, महेश ड्रैगन फ्रूट की खेती से हर साल करीब ₹1.25 करोड़ कमाते हैं। उनके फार्म में सालाना लगभग 200 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे फलों से होने वाली कमाई को जोड़ दें, तो उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब ₹2 करोड़ पहुंच जाता है।
महेश की कहानी बताती है कि खेती में नई तकनीक अपनाना, बाजार की मांग समझना और लगातार सीखते रहना कितना महत्वपूर्ण है। तीन एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने 7 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ एक्शन लिया है। इन प्लेटफॉर्म्स पर एक्सप्लोसिव्स की धड़ल्ले से अवैध बिक्री हो रही थी। इसके चलते CCPA ने इनमें से कुछ पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। उसके बाद इन प्लेटफॉर्म्स ने अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक पदार्थों की अवैध बिक्री करने वाले करीब 3,900 विक्रेताओं को हटा दिया। CCPA की जांच के दायरे में इंडियामार्ट, ट्रेडइंडिया, डायल4ट्रेड, जस्टडायल, सिग्मा-एल्ड्रिच इंडिया, एक्सपोर्ट्सइंडिया और आईबायकेमिकल्स हैं।
CCPA ने नियामकीय उल्लंघनों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए सभी 7 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। CCPA ने एक बयान में कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ता सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और जिम्मेदार ई-कॉमर्स गतिविधियों को मजबूत करना है।
इन 7 प्लेटफार्म्स पर कई विक्रेता अमोनियम नाइट्रेट, बारूद, पिक्रिक एसिड और पेंटाएरीथ्रिटॉल टेट्रानाइट्रेट (PETN) सहित विस्फोटक पदार्थों की अवैध बिक्री करते पाए गए। CCPA का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने नियमों के उल्लंघन के मामले में 3,940 विक्रेताओं और लिस्टिंग एंट्रीज को हटाने की डिटेल उपलब्ध कराई है। CCPA अब तक 2 प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ 3 मामलों में अंतिम आदेश जारी कर चुका है।
किन कंपनियों पर लगा जुर्माना
अमोनियम नाइट्रेट की बिक्री के मामले में डायल4ट्रेड और अमोनियम नाइट्रेट व PETN की बिक्री के मामले में एक्सपोर्ट्सइंडिया (वेबलिंक.इन प्राइवेट लिमिटेड) पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, एक्सपोर्ट्सइंडिया पर पिक्रिक एसिड की बिक्री के मामले में 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। CCPA ने बताया कि 3 मामलों की जांच जारी है।
सिग्मा-एल्ड्रिच केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ अमोनियम नाइट्रेट, PETN और पिक्रिक एसिड की ऑनलाइन लिस्टिंग, उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने, विज्ञापन करने और उनकी बिक्री में मदद करने के मामले में जांच की जा रही है। इन्फोकॉम नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की कंपनी ट्रेडइंडिया के खिलाफ पिक्रिक एसिड और PETN की ऑनलाइन लिस्टिंग, उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने, विज्ञापन करने और उनकी बिक्री में मदद करने के मामले की जांच हो रही है। वहीं, आईबायकेमिकल्स के खिलाफ पिक्रिक एसिड की ऑनलाइन लिस्टिंग, उसे अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने, विज्ञापन करने और उसकी बिक्री में मदद करने के मामले में जांच चल रही है।
किस नियम के तहत एक्शन
नियामक ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020; विस्फोटक अधिनियम और अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है। मौजूदा नियमों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रेगुलेटेड और खतरनाक विस्फोटक पदार्थों की अनाधिकृत लिस्टिंग, उन्हें उपलब्ध कराने, विज्ञापन करने और उनकी बिक्री में मदद करने पर रोक है।
Ranchi Smart City Project: स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रांची में स्मार्ट सिटी का निर्माण पिछले 4 सालों से हो रहा है, जहां अब पक्की सड़कें, सिग्नल, पार्क, कम्युनिटी हॉल और मंत्रियों के बंगले भी नजर आने शुरू हो गए हैं। यहां कई बड़े कॉम्प्लेक्स और फ्लैटों के निर्माण में काफी तेजी देखी जा रही है, और अब आम लोग यहां अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं।
इन चीजों पर फिलहाल चल रहा है काम
रांची स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पीआरओ अमित बताते हैं कि रांची स्मार्ट सिटी में इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट वर्क के तहत आठ प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। इनमें लैंड डेवलपमेंट, रोड, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज एंड एसटीपी, ड्रेनेज, पावर डिस्ट्रीब्यूशन, वाटर डिस्ट्रीब्यूशन, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर व पावर फॉर वर्क प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट का 96 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है।
लोगों को करना पड़ेगा इंतजार
हालांकि, आम लोगों को फ्लैट लेने के लिए अभी 1.5 साल का और इंतजार करना पड़ेगा। कई सारे प्लॉट में यहां फ्लैट और डुप्लेक्स आदि का निर्माण जारी है। बहुत लोगों ने तो बिल्डर के द्वारा एडवांस बुकिंग कर ली है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह कंप्लीट होने में कम से कम एक से डेढ़ साल का वक्त लगेगा। चूंकि यह पूरी तरह प्लांट सिटी है, इसलिए यहां रहने का अनुभव काफी शानदार रहेगा।
80 करोड़ की लागत से अर्बन हाट होगा आकर्षण का केंद्र
प्लॉट नंबर 54 में 80 करोड़ की लागत से अर्बन हाट बनाया जाएगा। पीआरओ अमित बताते हैं कि इस अर्बन हाट में हैंडीक्राफ्ट्स प्रोडक्ट्स एंड पेंटिंग्स, अस्थायी प्रदर्शनी स्टॉल, बच्चों को खेलने के लिए ओपन स्पेस, ट्रेडिशनल फूड कोर्ट, हैंडलूम स्टॉल और ओपन एयर एंफीथिएटर जैसी चीजें मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी, और यहां के स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा।
रांची होगा फ्यूचर-रेडी स्मार्ट सिटी
अमित कुमार बताते हैं कि रांची को फ्यूचर-रेडी स्मार्ट सिटी बनाने के उद्देश्य से 37 फीसदी भूमि को ओपन और ग्रीन स्पेस के रूप में सुरक्षित किया गया है। 24×7 गैस-इंसुलेटेड पावर स्टेशन और जलापूर्ति नेटवर्क विकसित किया गया है। अंडरग्राउंड वायरिंग मॉडल, रोडसाइड यूटिलिटी डक्ट सिस्टम और कई आधुनिक मॉडल्स के जरिए यह पर्यावरण-फ्रेंडली और सस्टेनेबल डेवलपमेंट स्मार्ट सिटी बनकर तैयार होगा।
ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी ने फैसला कर लिया है कि वह सरकार को चैन नहीं लेने देगी। इसके लिए उसने तय किया है कि वह सरकार के हर फैसले को संदिग्ध बना देगी और हर कदम पर उससे सवाल करेगी। इसका पता नहीं कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा लेकिन यह जरूर है कि भाजपा और सरकार के तंत्र को जवाब देने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और पहले से चल रहे विवादों को छोड़ दें तो हाल के दो मामले ऐसे हैं, जिनमें ऊपरी तौर पर कोई गड़बड़ी नहीं दिख रही है लेकिन कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना दिया और ऐसा विवाद खड़ा किया कि सरकार बैकफुट पर आ गई है।
पहला मामला अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे से जुड़ा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूबियो की मुलाकात मुंबई में तय हुई है। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री ने अपने कर्मचारी को मुंबई तलब किया। इस बात को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी आगे बढ़ाया। अब सोचें, भारत के दौरे पर आ रहे अमेरिका के विदेश मंत्री से अगर भारत के विदेश मंत्री देश के किसी और शहर में मिलेंगे तो यह कहा जाएगा कि उनको वहां तलब किया गया? भारत के विदेश मंत्री को अमेरिकी विदेश मंत्री का कर्मचारी बता कर राहुल कौन सा नैरेटिव सेट कर रहे हैं? लेकिन उन्होंने जानते बूझते ऐसा कर दिया क्योंकि उनको पता है कि सरकार इस पर भी बैकफुट पर आएगी। कई बार ऐसा होता है कि नेता राजधानी से इतर दूसरे शहरों में मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन गए तो राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात वुहान में हुई। तो क्या कहा जा सकता है कि मोदी ने जिनपिंग को वुहान तलब किया?
बहरहाल, दूसरा मामला जनगणना के नियमों में बदलाव का है। भारत के महापंजीयक ने अगले साल होने वाली जनगणना में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के अलावा निजी स्कूलों के शिक्षकों व कर्मचारियों और वॉलंटियर्स को भी शामिल करने का फैसला किया है। महापंजीयक कार्यालय की ओर से इसका आदेश निकला तो कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के लोगों के लिए रोजगार योजना है। जबकि यह एक अच्छी पहल है कि वॉलंटियर्स को प्रशिक्षण देकर इस तरह के कामों में लगाया जाए। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी से होने वाली समस्याएं कम होंगी, स्कूलों में पढ़ाई का काम कम प्रभावित होगा और सरकारी कार्यालयों के कामकाज में आने वाली बाधा भी दूर होगी। इसी तरह की योजना के तहत अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में अपनी सरकार रहते हुए अपने कार्याकर्ताओं को सिविल डिफेंस वॉलंयिटर्स के रूप में भर्ती किए थे। अपने लोगों को बस मार्शल में रखा था और चौराहों पर तख्ती लेकर खड़े होने के लिए भी अपने लोगों को चुना था। अगर यह रोजगार की भी योजना है तो इससे कुछ लोगों को काम मिलेगा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर यानी सोमवार को भी बिकवाली की। इससे पिछले हफ्ते की अच्छी तेजी के बाद हफ्ते के पहले दिन बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 1.11 फीसदी यानी 257 अंक गिरकर 22,888 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 876 अंक गिरकर 73,852 पर क्लोज हुआ। विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर जब तक बदलेगा नहीं, तब तक बाजार में तेजी टिक नहीं पाएगी।
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल का बड़ा असर
वर्ल्ड बैंक में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर-इंडिया नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड की वजह से भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। निवेश के जटिल नियमों का असर भी फॉरेन इनवेस्टर्स के इनवेस्टमेंट पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स घटाने से काम नहीं चलेगा। इनवेस्टमेंट प्रोसेस को आसान बनाना होगा, नियमों को पारदर्शी बनाना होगा और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। उन्होंने कहा कि रुपये पर जितना दिख रहा है, उससे ज्यादा दबाव है।
अमेरिका और भारतीय बाजार में रिटर्न के बीच का फर्क घटा
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट में निवेश में फायदा नहीं दिखता है। अमेरिका और भारत में रिटर्न के बीच का फर्क घट गया है, जिससे निवेश के लिहाज से भारत का अट्रैक्शन कम हुआ है। हाल में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड अमेरिका में कई दशकों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोपीय देशों में भी बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। यील्ड में उछाल से अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश में दिलचस्पी बढ़ी है।
भारतीय बाजार में घट रही विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी
मिश्रा ने एक उदाहरण की मदद से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2 फीसदी और भारत में 8 फीसदी है, तो भारत में निवेश करने में फायदा है। लेकिन, अगर अमेरिका में यील्ड बढ़कर 5.3 फीसदी हो जाती है और भारत में 7.3 फीसदी रहती है भारत में निवेश में दिलचस्पी कम हो जाती है। इसका मतलब है कि फॉरेन इनवेस्टर्स को भारत में निवेश करने में फायदा नहीं दिखता। ऐसी स्थिति में वे भारत की जगह अमेरिका में इनवेस्ट करना पसंद करेंगे।
FIIs ने सोमवार को शुद्ध रूप से की 1,148 करोड़ की बिकवाली
स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, फॉरेन इनवेस्टर्स ने 19 अक्तूबर को भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 1,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। उन्होंने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। लेकिन, 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से 3,201.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली के बीच DII ने लगातार खरीदारी कर भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया है।